सलमान को लगता है शादी से डर!

‘सलमान खान शादी कब करेंगे’ यह सवाल तो जैसे राष्ट्रीय बहस का सदाबहार मुद्दा है. उनके इतने अफेयर हुए, लेकिन शादी तक बात नहीं पहुंची. अब तो यह हाल है कि सलमान किसी लड़की के साथ एक झलक दिख भी जाएं, तो लोग कयास लगाने लगते हैं कि वह लड़की कहीं सलमान की फ्यूचर बीवी तो नहीं!

हर बात की कोई न कोई वजह तो होती है, सो सलमान के अबतक शादी ना करने की भी कोई वजह होगी. वह वजह क्या है, इसका जवाब खुद सलमान ने दिया है.

सलमान हाल ही में एक जूलरी स्टोर की लॉन्चिंग के मौके पर दिल्ली पहुंचे थे. पाकिस्तानी कलाकारों को बैन करने की जो मांगे उठ रही हैं, उसपर सलमान ने अपना स्टैंड साफ किया. इतना ही नहीं, वह अपनी लव लाइफ के बारे में खुलकर बोले.

सलमान ने कहा ‘इस पूरी दुनिया में मैं सबसे ज्यादा रोमांटिक इंसान हूं.’ वैसे, सलमान के बिना बताए भी हम जानते हैं कि वह बेहद रोमांटिक हैं.

इतना रोमांटिक होने के बावजूद उन्होंने अब तक शादी क्यों नहीं की, इसका जवाब भी उन्होंने खुद ही दिया. सल्लू ने बताया, ‘अंगूठियों का फोबिया है मुझे. शादी से डर लगता है. मुझे लगता है कि इतनी बार दिल टूटने की वजह से ऐसा हुआ. अब यह डर मेरे अंदर गहरे तक बैठ गया है.’

भारती को मारा थप्पड़ तो…

कॉमेडी शोज हंसने-हंसाने के लिए होते हैं, लेकिन कई बार ये शोज भी विवादों की चपेट में आ जाते हैं. कलर्स के कॉमेडी शो कॉमेडी नाइट्स बचाओ ताजा के बाद अब इसका एक और कॉमेडी शो कंट्रोवर्सी में आ गया. हालांकि शो के कलाकार कह रहे हैं, कि सब ठीक है.

कॉमेडी नाइट्स लाइव से कॉमेडियन सिद्धार्थ सागर की छुट्टी हो गई है. खबरें ये आई थीं कि शो में एक एक्ट के दौरान सिद्धार्थ ने भारती सिंह को भूल से थप्पड़ मार दिया. कॉमेडी की स्टार बन चुकीं भारती इससे नाराज हो गईं, जिसका खामियाजा सिद्धार्थ को भुगतना पड़ा.

लेकिन सिद्धार्थ कहते हैं कि, ”मैंने खुद अभी ब्रेक लिया है. क्योंकि मैं इस घटना के बाद थोड़ा डिस्टर्ब हो गया था. हमारा काम एंटरटेन करना है जो खुद का दिमाग शांत करके करेंगे. फिर से जल्द ही लौटूंगा.”

ये दोनों कॉमेडियंस कॉमेडी कलासेज और कॉमेडी सर्कस से धूम मचा चुके हैं. उन्होंने कहा, ”भारती और मैं क्लोज फ्रेंड रहे हैं. ऐसे में यह सब जो हुआ ठीक नहीं हुआ है. लेकिन अब कॉन्ट्रोवर्सी हो गयी है तो क्या किया जा सकता है. हम आर्टिस्ट हैं तो कई बार यह सब हो जाता है. भारती मुझसे काफी सीनियर हैं और मैच्योर भी हैं. तो हम दोनों इस सिचुएशन को समझ रहे हैं.”

सिद्धार्थ ने उन खबरों का खंडन भी किया, जिनमें कहा जा रहा है कि इस घटना की वजह से प्रोडक्शन हाउस ने उन पर बैन लगा दिया है. सिद्धार्थ ने कहा है कि मैं 9 साल से काम कर रहा हूं उनके साथ. सभी लोग अच्छे हैं.

वहीं भारती ने भी इन खबरों को गलत बताया है कि उन्होंने चैनल या प्रोडक्शन हाउस को सिद्धार्थ को कास्ट ना करने के लिए दवाब बनाया है. भारती ने सिद्धार्थ का समर्थन करते हुए कहा कि सिद्धार्थ भाई जैसा है.

उसकी सफलता मैंने देखी है. उसे बढ़ते हुए मैंने देखा है. मैं उसका बुरा ना कर सकती और ना ही सोच सकती हूं. आप जब काम कर रहे होते हो तो यह सब बातें होती रहती हैं. लेकिन इससे हमारे रिलेशन पर फर्क नहीं पड़ेगा.

कुरसी बड़ी या रिश्ता

उत्तर प्रदेश में सासबहू की सी लड़ाई बेटे, पिता, चाचा में हो रही है. अखिलेश यादव सरकार अपनी तरह चलाना चाहते हैं, पिता और चाचा यानी ससिया चाची और सास मिल कर अपने रंग दिखा रहे हैं. भारतीय पारिवारिक परंपरा का यह उदाहरण न पहला है न अंतिम. पौराणिक ग्रंथ भी इन से भरे हैं, लोक कथाएं इन से भरी हैं और अदालतों के फैसले इन से भरे हैं.

निकटता जहां प्रेम व भरोसा पैदा करती है, वहीं असहजता भी पैदा करती है. अनजानों से लेनदेन बकाया नहीं रहता. अपनों से खाता कभी बंद नहीं होता और बैक डेटेड ऐंट्रियां होती रहती हैं और अखिलेश, मुलायम व शिवपाल इसी चक्कर में हैं और वह भी तब जब 2017 के चुनाव सिर पर हों. जिसे लगता है कि उसे उतना लाभ नहीं हो रहा है जितना वह उठा सकता है, वह विद्रोह का झंडा सास या बहू की तरह उठा लेता है.

कहने को तो हम नारे लगाते रहते हैं कि सास मांजी होती है, बहू बेटी होती है पर इन के बीच एक अदृश्य दीवार मोटी होती है और पैतरेबाजी हर समय चलती रहती है. इस से परिवार टूटते हैं, मातापिता यानी सासससुर भी नुकसान में रहते हैं और नातीपोते भी. पर यह प्रकृति का नियम है और इस पर गम नहीं करना चाहिए.

उत्तर प्रदेश में जो हुआ वह इंदिरा गांधी के घर में हो चुका है. वह जयललिता के साथ हुआ, आंध्र प्रदेश में चंद्रबाबू नायडू के साथ हुआ, शिवसेना के बाल ठाकरे परिवार के साथ हुआ. इसलिए न यह अनूठा है और न चिंता की बात. राज्य की सरकार चलती रहेगी, रसोई में खाना पकता रहेगा बस बरतन जरा जोर से पटके जाएंगे.

मनुष्य को साथ रहने के गुण मिले हैं पर ये गुण हमारे जीन्स में इतने गहरे नहीं गए हैं कि सभी मानव एकसाथ एकजैसा सोचने लगें. ऐसा होता तो न सदियों से युद्ध होते, न करोड़ों मारे जाते और न ही तलाक होते. मनुष्य अपने हितों के कारण साथी ढूंढ़ता है और जब बात हितअहित की सीमा तक पहुंच जाए तो अलग होना ही एक तरीका बचता है.

अखिलेश को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की गद्दी छोड़नी पड़ सकती है और हो सकता है 2017 के चुनावों में कोई पक्ष जा कर भाजपा या मायावती से जा मिले. ऐसा होता है तो समाजवादी दल चाहे समाप्तप्राय हो जाए पर दूसरों की थाली में हलवापूरी बिना मेहनत के आ जाएगी. यह मामला थोड़ा चौंकाने वाला है पर अजीब नहीं और इसीलिए 2-4 महीनों बाद उस की लकीरें भी रेत की जमीन पर न रहेंगी.

जेल अपराधों का स्कूल

जेल अपराधों का इलाज नहीं है, यह 3 मामलों ने और साफ किया है. दिल्ली में 25 साला एक विवाहित औरत की एक पड़ोसी ने दिनदहाड़े सड़क पर हत्या कर खुद भी आत्महत्या कर ली. पड़ोसी देखते रहे पर कोई कुछ बोला नहीं. यह औरत हत्यारे की शिकायत कर चुकी थी और उसे 2 माह पहले जेल भी भेजा गया था पर जमानत पर बाहर आया था. 6 साल से वह इस औरत को तंग कर रहा था.

उत्तर प्रदेश के रामपुर में एक युवक को हिरासत में लिया गया है, क्योंकि उस ने 10 साल की लड़की का बलात्कार किया था. उस ने 2012 में 8 साल की लड़की का भी बलात्कार किया था और 4 साल  जेल में भी रह चुका था. एक अन्य मामले में 34 साल के एक आदमी ने 21 साल की लड़की की सड़क पर खुलेआम 24 बार कैंची घोंपघोंप कर हत्या कर दी और देखने वाले उसे न रोक पाए. लड़का लड़की का कई सालों से पीछा कर रहा था.

अपराध विशेषज्ञ हमेशा से इस बात पर बहस करते रहे हैं कि क्या जेल में सुधार होता है या सिर्फ अपराधी को समाज से दूर किया जाता है? अपराध विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि जेल में जीवन चाहे कितना ही कठिन हो पर यह अपराधों का स्कूल भी है, जहां अपराध कैसे किए जाएं सिखाया जाता है.

अपराधों पर नियंत्रण असल में जेलों से कम शिक्षा से ज्यादा आता है. जब पता चलने लगता है कि ईमानदारी से ज्यादा कमाई हो सकती है तो लोग अपराध कम करते हैं.  पर यह दावा भी अधूरा है, क्योंकि सभ्य देशों में अमेरिका में जनसंख्या के अनुपात में सब से ज्यादा अपराध होते हैं और वहां की जेलें कैदियों से ठसाठस भरी हैं. जेल चलाना वहां एक बड़ा व्यवसाय हो गया है और कई राज्यों ने यह काम ठेकों पर दे दिया है, जो जजों को प्रभावित कर के ग्राहक यानी कैदियों की संख्या बढ़वाने में लग गए हैं.

अमेरिका अमीर होते हुए भी सुरक्षित नहीं है और शहरी हों या गैरशहरी इलाके, अपराधियों से भरे हैं. इसीलिए वहां गन कंट्रोल चल नहीं पा रहा जबकि सिरफिरों ने कितने ही निहत्थे, निर्दोषों की अकारण हत्याएं कर डाली हैं.

भारत में बलात्कार, औरतों पर जुल्म, दहेज हत्या आदि पर एकदम जेल में ठूंसने या फांसी पर चढ़ाने की जो बात होने लगती है वह बेमतलब की है. अदालतों को हर अपराधी को समय देना होगा कि वह खुद का बचाव कर सके साथ ही पैरोल और जमानत की सुविधाएं भी देनी ही होंगी.

जेल समाज की सुरक्षा का रास्ता नहीं है. नैतिकता का पाठ पढ़ाना भी आसान नहीं है. अपराध सड़कों पर होने वाली दुर्घटनाओं में मौतों की तरह हैं जो होते रहेंगे. समाज को इन दुखों को कैसे झेलें, यह सीखना और सिखाना होगा.

ट्रेकिंग का मजा लेना है तो रखें ध्यान…

ट्रेकिंग पर जाना बेशक रोमांचक अनुभव होता है लेकिन बहुत अधिक उत्‍साह आपके सफर का मजा किरकिरा भी कर सकता है. अगर आप भी ऐसा कोई ट्रिप प्लान कर रहे हैं तो इसका पूरा मजा उठाने के लिए जान लें कि ट्रेकिंग के दौरान आपको क्या करना है और क्या नहीं…

1. जरूर करें नाश्‍ता

दिन की शुरुआत नाश्‍ते से करना सेहत के लिए बुहत अच्‍छा होता है, ऐसी बातें आपने कई बार सुनी और पढ़ी होंगी. ट्रेकिंग के समय भी नाश्‍ता आपके लिए हेल्‍पफुल होगा क्‍योंकि ये बॉडी में एनर्जी बनाए रखने के लिए बहुत जरूरी है. यह आपको ट्रेकिंग के दौरान लगने वाली भूख से बचाएगा. नाश्‍ते में ज्‍यादा चाय या कॉफी का सेवन न करें. इससे आपको डिहाइड्रेशन हो सकता है.

2. जरूरी है किसी का साथ

फिल्‍मों में दिखाए गए ट्रेकिंग के सीन्स से बिल्‍कुल भी इंस्पायर न हों. अकेले ट्रेकिंग करने की सोचें भी नहीं. अपने दोस्‍तों या ग्रु्प के साथ ही ट्रेकिंग करें. ट्रेकिंग का सबसे बड़ा रूल है धैर्य और अनुशासन जिसका ध्‍यान रखना आपको कई समस्‍याओं से बचा सकता है. अपने ट्रेक लीडर की बातों को ध्‍यान से सुनें और उनको फॉलो करें.

3. इस सफर में पानी है आपका हमसफर

पहाड़ों पर चढ़ने और उतरने के दौरान कई तरह की सिचुएशन्स का सामना करना पड़ता है. चढ़ाई के दौरान बॉडी को बैलेंस रखना बहुत जरूरी होता है. इसलिए आपके पास पानी के लगभग 4 से 5 स्‍टॉक होने चाहिए. पानी बॉडी को डिहाइड्रेशन से बचा कर रखता है. हर 20 मिनट के बाद थोड़ा-थोड़ा पानी लेते रहें ताकि शरीर में पानी की कमी न हो. ध्‍यान रखें एकसाथ ढेर सारा पानी न पीएं.

4. रफ्तार को कंट्रोल रखें

फिल्‍मों में ट्रेकिंग के दौरान कॉम्पिटीशन दिखाए जाते हैं लेकिन वास्‍तव में ऐसी चीजें करने से बचें. बहुत ही ध्‍यान से और आराम से चढ़ाई करें. बहुत ज्‍यादा तेजी आपके लिए नुकसानदेह हो सकती है. एक्‍सपर्ट भी ऐसी चीजें करने के लिए मना करते हैं. अपने बॉडी स्‍टेमिना के हिसाब से ही चढ़ाई की रफ्तार को घटाएं-बढ़ाएं न कि किसी दूसरे को देखकर. ऐसा करके आप बहुत सारी परेशानियों से बचे रहेंगे.

5. एल्‍कोहल पीने से बचें

पहाड़ों की खूबसूरती, ठंडी हवा के झोंके और हसीन वादियों के बीच कैम्‍प मस्‍ती आपको झूमने के लिए उकसा सकती है. लेकिन आपका शराब से दूर रहना ही बेहतर होगा क्‍योंकि शराब पीने के बाद पहाड़ों पर चलना मुश्किल होता है. शराब आपका पेट खराब कर सकती है और आपको इसी तरह की कई परेशानियां  झेलनी पड़ सकती हैं.

होटल में नौकरी करने अमरीका गई क्वीन!

फिल्म ‘क्वीन’ में कंगना रनौत ने अकेले पेरिस जा कर खूब ‘हंगामा’ किया था और अब वो अमरीका निकल गई हैं होटल में नौकरी करने. वैसे ये सब हो रहा है हंसल मेहता की अगली फिल्म ‘सिमरन’ के लिए.

कंगना रनौत, अपनी अगली फिल्म ‘सिमरन’ की शूटिंग के लिए मुम्बई से अमेरिका के लिए रवाना हो गईं. अमेरिका में ‘सिमरन’ के शूटिंग की सारी तैयारियां हो चुकी हैं. फिल्म की यूनिट के कुछ सदस्य पहले से ही वहां पहुंच चुके हैं.

हंसल मेहता की फिल्म सिमरन में कंगना एक होटल में हाउस कीपिंग स्टाफ की भूमिका निभाएंगी. फिल्म में कंगना एक गुजराती एन आर आई की भूमिका में होंगी जिसका नाम प्रफुल पटेल है.

बता दें कि इसी फिल्म के लिए कंगना अगस्त के अंतिम सप्ताह में अटलांटा में एक होटल में रहकर वर्कशॉप भी किया था और अपने किरदार को अच्छी तरह जानने-समझने के लिए वहां के हाउस कीपिंग स्टॉप के साथ समय होटल का काम भी किया.

विशाल भारद्वाज की फिल्म ‘रंगून’ के पोस्ट प्रोडक्शन का काम पूरा कर कंगना ने अमरीका जाते वक्त एयरपोर्ट पर इसकी पुष्टि की और बताया, “मैं हंसल मेहता की फिल्म सिमरन की शूटिंग के लिए यूएस जा रहीं हूं.”

‘सिमरन’ एक ऐसी लड़की की कहानी है जो अपनी महत्वकांक्षा को पूरा करने के लिए अपराध के दलदल में फंस जाती है. ‘सिमरन’ की रिलीज डेट फिलहाल तय नहीं है लेकिन हंसल ने एक बातचीत में ये साफ किया था कि सिमरन को अगले साल के सेकेण्ड हाफ में रिलीज किया जाएगा.

शूटिंग छोड़ 10 घंटे के लिए इंडिया आते थे अर्जुन!

बॉलीवुड एक्टर अर्जुन कपूर अपनी अगले साल आने वाली फिल्म ‘हाफ गर्लफ्रेंड’ की शूटिंग विदेश से छोड़कर सिर्फ 10 घंटे के लिए इंडिया आते थे. फिल्म के न्यूयॉर्क शेड्यूल के दौरान अर्जुन जिस वजह से सिर्फ 10 घंटे के लिए इंडिया आए थे उस वजह का खुलासा हो चुका है.

ये साफ हो गया है कि अर्जुन अपनी किसी गर्लफ्रेंड से मिलने नहीं बल्कि अपने हेयर ट्रीटमेंट के लिए इंडिया आते थे. सूत्रों कि मानें तो अर्जुन को शूटिंग के लिए खास तरह का हेयर स्टाइल बनवाना था और वो अपने बालों को लेकर बहुत केयरिंग हैं. हेयर स्टाइल बनवाने के लिए ही वो 10 घंटे के इंडिया आए थे.

श्रद्धा कपूर और अर्जुन स्टारर फिल्म ‘हाफ गर्लफ्रैंड’ अगले साल 19 मई को रिलीज होगी. फिल्ममेकर मोहित सूरी की इस फिल्म का सह निर्माण चेतन भगत कर रहे हैं, इसी नाम के उनके उपन्यास पर यह फिल्म बनाई जा रही है.

यह पहली बार नहीं है जब अर्जुन उपन्यास पर आधारित फिल्म का हिस्सा बनने जा रहे हैं. इससे पहले भी वह ‘2 स्टेट्स’ में काम कर चुके हैं. यह फिल्म भी चेतन भगत के ‘2 स्टेट्स: द स्टोरी ऑफ माय मैरिज’ उपन्यास पर आधारित थी.

अपनी पहली फिल्म में ही आलिया को किया रिप्लेस

श्रीदेवी और बोनी कपूर की बड़ी बेटी जाह्नवी कपूर जल्द ही बड़े पर्दे पर नजर आने वाली हैं. सूत्रों की मानें तो वो अपकमिंग फिल्म ‘शिद्दत’ में आलिया भट्ट को रिप्लेस करने जा रही हैं.

पहली ही फिल्म में किसी हीरोइन को रिप्लेस करना अपने आप में एक बड़ी बात है. हो सकता है कि इस फिल्म में अच्छी एक्टिंग के बल पर श्रीदेवी की बेटी कुछ और फिल्में हथिया ले.

करण जौहर के प्रोडक्शन और अभिषेक वर्मन के डायरेक्शन में बन रही इस फिल्म में पहले आलिया भट्ट को तय किया गया था. लेकिन उनकी जगह जाह्नवी को फिल्म में लिया जाएगा.

जाह्नवी ने इसी साल 6 मार्च को अपना 19वां बर्थडे मनाया. खबर है कि जाह्नवी इन दिनों लॉस एंजलिस के ‘द ली स्ट्रासबर्ग थिएटर एंड फिल्म इंस्टीट्यूट’ से एक्टिंग की ट्रेनिंग ले रही हैं.

आपको बता दें कि जाह्नवी फिल्म ‘शिद्दत’ में वरुण धवन के साथ नजर आएंगी. यह फिल्म करण जौहर के बैनर ‘धर्मा प्रोडक्शन’ के तले बनेगी. साजिद नाडियाडवाला फिल्म के को-प्रोड्यूसर होंगे.

वरुण धवन ‘जुड़वां 2’ की शूटिंग खत्म करने के बाद ‘शिद्दत’ की शूटिंग शुरू करेंगे. उम्मीद है कि 2017 में ही जाह्नवी कपूर की पहली फिल्म रिलीज हो जाएगी.

हालांकि इस फिल्म की रिलीज के बाद दर्शक जाह्नवी कपूर की तुलना उनकी मां श्रीदेवी के साथ कर सकते हैं.

सैक्सी खलनायिका बनना चाहती हूं: मेघना नायडू

अपने पहले वीडियो अलबम से ही लोगों के दिल पर छा जाने वाली मेघना को मनोरंजन की दुनिया में अपनी जगह बनाने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ी. अब वे खुद को कैरियर के किस मुकाम पर देखती हैं, उन्हीं से जानें.

बोल्ड रूप में बौलीवुड में ऐंट्री लेने का फौर्मूला मेघना के लिए फ्लौप साबित हुआ. 18 साल की उम्र में तेलुगु फिल्म ‘प्रेम साक्षी’ में अभिनय करने के बाद वीडियो अलबम ‘कलियों का चमन’ में अपनी अदाओं के जलवे दिखाने वाली मेघना अपने पहले ही वीडियो अलबम से बौलीवुड में छा गईं. उन्हें बौलीवुड में ऐंट्री फिल्म ‘हवस’ से मिली.

मेघना ने बौलीवुड की ज्यादातर बी ग्रेड फिल्मों में ही काम किया और जम कर खुद को ऐक्सपोज किया, पर वे खुद को स्थापित नहीं कर पाईं. इसीलिए छोटे परदे का रुख कर लिया.

छोटे परदे पर मेघना ने जितने भी सीरियल किए हैं, उनके कैरेक्टर ज्यादातर नैगेटिव रहे हैं. मेघना मानती हैं कि उन्हें नैगेटिव रोल्स से खास लगाव है. औडियंस को नैगेटिव रोल ही ज्यादा ऐंटरटेन और अट्रैक्ट करते हैं. नैगेटिव शेड्स वाले कैरेक्टर ही कहानी में ट्विस्ट लाते हैं.

मेघना चाहती हैं कि लोग उन्हें सैक्सी वैंप के रूप में ही जानें.

अलग पहचान

‘‘जब मैं ने फिल्म ‘प्रेम साक्षी’ साइन की थी उस समय मैं 16 साल की स्कूल गोइंग गर्ल थी. उस समय मुझे कैमरा, शूटिंग के बारे में कुछ भी पता नहीं था. मुझे इंडस्ट्री में भी कोई नहीं जानता था. मुझे याद है जब भी शूटिंग शुरू होती मैं कैमरे की तरफ बड़ी उत्सुकता से देखा करती थी कि पता नहीं इस में क्या होता होगा. हर समय सहमी सहमी रहती थी. पर वक्त के साथ मैं मैच्योर होती गई. आज मेरी इंडस्ट्री में अलग पहचान है,’’ कहती हैं मेघना.

डांस ही पैशन है

मेघना सीरियल ‘अम्मां’ में मुजरा भी करती नजर आएंगी. वे कहती हैं, ‘‘मुझे तो बौलीवुड डांसिंग का क्रेज है. आप सुबह 4 बजे भी ‘चिकनी चमेली…’, ‘कलियों का चमन…’ या किसी अन्य सौंग पर डांस करने को कहें तो मैं शुरू हो जाऊंगी. मुझे कोई परेशानी नहीं होगी. लेकिन मुजरा या इंडियन क्लासिकल डांस करने में मुझे थोड़ी दिक्कत होती है. बिना डांस के मेरी लाइफ बहुत ही बोरिंग हो जाएगी.

उम्र का डांस पर असर नहीं

देखा गया है कि एक डांसर की यंग एज में ही डिमांड रहती है. उम्र बढ़ने के साथ उस की डिमांड कम हो जाती है. लेकिन मेघना इस बात को नहीं मानतीं. वे कहती हैं, ‘‘मेरा तो मानना है कि डांसर का ऐक्सपीरियंस जितना ज्यादा होता जाता है, उस का डांस उतना ही ज्यादा निखरता जाता है.

उदाहरण के लिए हेमा मालिनी, माधुरी दीक्षित और शोभना नारायण को ही लीजिए. ये बचपन से ही डांस से जुड़ी रही हैं और आज भी डांस कर रही हैं. इसलिए यह सिर्फ एक धारणा बनी हुई है कि उम्र बढ़ने के साथ अदाएं और लोच कम हो जाती हैं, बल्कि उम्र बढ़ने के साथ डांस में परिपक्वता आ जाती है.’’

बौलीवुड में फ्लौप

‘‘फिल्में नहीं चलीं तो छोटे परदे पर आ गई, क्योंकि जीवनयापन के लिए पैसा तो चाहिए न, फिर चाहे छोटा परदा हो अथवा बड़ा परदा इस से कोई फर्क नहीं पड़ता,’’ कहती हैं मेघना.

जब म्यूजिक अलबम ‘कलियों का चमन’ के लिए औडिशन हो रहे थे, तो मेघना भी स्क्रीन टैस्ट देने वहां जा पहुंचीं. तब उन्हें देख सभी यह कहने लगे कि यह साउथ की फिल्मों की काली, मोटी, लंबे बालों वाली लड़की कैसे इस म्यूजिक अलबम में काम करेगी. अगर इसे लिया तो यह अलबम फ्लौप हो जाएगा. मगर निर्देशक ने मेघना पर विश्वास किया और उन्होंने इस में काम किया. जब यह अलबम आया तो मार्केट में तहलका मच गया और उसी से उन्हें वास्तविक पहचान मिली है.

मेघना अभी शादी के चक्कर में नहीं पड़ना चाहती हैं, क्योंकि उन का कहना है कि पेरैंट्स आज शादी की बात करेंगे कल बच्चों के लिए कहेंगे और फिर सब की डिमांड पूरी करते करते वे अपना कैरियर बनाने से पहले ही गुमनामी में खो जाएंगी. वे शादी समय आने पर करेंगी. वैसे उन्हें अपना ड्रीम बौय मिल गया है, जो इस इंडस्ट्री से नहीं है. एक स्पोर्ट्समैन है और वे उस के साथ जिंदगी बिताने का फैसला कर चुकी हैं.

साइबर क्राइम की बनीं शिकार

प्रैगनैंसी को ले कर झूठी खबर फैलाए जाने के मामले में मेघना नायडू ने मुंबई स्थित साइबर क्राइम इनवैस्टिगेशन सैल में शिकायत दर्ज करवाई थी. एक अज्ञात हैकर ने उन का मेल अकाउंट हैक कर उन्हें प्रैगनैंट बताया था. इस हैकर ने मेघना के दोस्तों के साथ मेघना बन चैट की और कहा कि वे प्रैगनैंट हैं और मुझे उस शख्स का नाम भी याद नहीं है, जिस ने यह काम किया है.

जब इस अज्ञात व्यक्ति ने मेघना के ऐक्स पब्लिसिस्ट डेल भगवागर से चैट की तो डेल को दाल में कुछ काला नजर आया. इसलिए चैट के तुरंत बाद उस ने मेघना के घर फोन यह जानने के लिए किया कि क्या वे ही चैट कर रही थीं.

तब उनके पेरैंट्स ने बताया कि वे तो जिम गई हुई हैं. एक घंटे बाद मेघना वापस आईं और उन्होंने डेल से बात की. मेघना ने बाद में कहा कि मैं ने अपने गूगल चैट्स चैक किए और पाया कि उस व्यक्ति ने उन के कई दोस्तों से बात की और उन के प्रैगनैंट होने की जानकारी उन्हें दी.

बदल गई रंगोली

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच रंगोली बनाने के तौर तरीके भी काफी तेजी से बदल रहे हैं. रंगोली जमीन या कपड़े पर बनाई जाती है, पर आजकल कागज, प्लाईवुड, हार्ड बोर्ड, सनमाइका, कैनवास आदि पर भी बनाई जाने लगी है.

पहले त्योहारों के आने से पहले ही महिलाएं रंगोली बनाने की तैयारी में जुट जाती थीं, लेकिन अब तो त्योहारों के मौके पर कागज और प्लास्टिक पेपर पर प्रिंटेड रंगोली भी धड़ल्ले से बिकती है. जिन्हें रंगोली बनाना नहीं आता या जिन के पास समय की कमी है, वे अपने घरों में रंगोली का स्टीकर चिपका कर ही उत्सवी माहौल बनाने की कोशिश करते हैं.

अद्भुत कला

पटना में रंगोली के स्टीकरों का थोक कारोबार करने वाले विनीता सेल्स के उपेंद्र सिंह बताते हैं कि हर साल दीवाली के मौके पर करीब 3 करोड़ के रंगोली के स्टीकर बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश आदि राज्यों में बिक जाते हैं. खुदरा बाजार में एक स्टीकर साइज के हिसाब से 20 से 250 तक में बिकता है.

आमतौर पर रंगोली बनाने के लिए फूलों, रंगों, अबीर, चावल दोनों और लेई आदि का इस्तेमाल किया जाता है. देखने में बिना किसी तामझाम वाली इस कला का अपना अलग आकर्षण, खूबसूरती और पहचान है. इस में भारतीय कला की बुनियादी सोच छिपी हुई है.

नया रंग नई उमंग

पटना के गुरुदेव पेंटिंग क्लासेज की कलाकार अनुपम कहती हैं कि हमारे देश में कभी भी कला के लिए कला वाली सोच नहीं मानी गई. यहां हर कला के पीछे कोई न कोई मकसद जरूर होता है. हर त्योहार, रस्म में कला का खूबसूरती से इस्तेमाल कर माहौल को रंगीन और उत्सवी बना दिया जाता रहा है.

रंगोली बनाने में ज्यादातर कमल और सूरजमुखी के फूल, शंख, दीपक, सूरज, पक्षी, मछली आदि के चित्र उकेरे जाते हैं. खास बात यह है कि ज्यादातर रंगोली गोलाई में ही बनाई जाती है. इसे हाथ की उंगलियों, बांस की सींक, कपड़े आदि से बनाया जाता है.

रंगोली बनाने में सफेद रंग का ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है क्योंकि इसे शांति का प्रतीक माना जाता है और जहां शांति का माहौल होता है, वहीं तरक्की आती है. भारत की काफी पुरानी कला परंपरा में रंगोली शामिल है और भारतीय कला में इसे 64वीं कला का नाम दिया गया है.

रंगोली की खास बात

दक्षिण भारत में रंगोली की परंपरा काफी मजबूत है. रंगोली की खूबसूरती और इस का मोह आज के भागदौड़ भरे जीवन में भी कायम है. लोग खुद भले ही रंगोली न बना सकते हों पर बाजार में मौजूद रंगोली के स्टीकरों को चिपका कर अपनी संस्कृति से जुड़ाव को महसूस तो कर ही सकते हैं.

ओडिशा के मशहूर कलाकार अनिल कुमार बल बताते हैं कि बिहार और मध्य प्रदेश में रंगोली के तरह-तरह के नमूने मशहूर हैं.

बिहार के दरभंगा जिले में ‘धूली चित्रा’ के नाम से बनाई जाने वाली रंगोली चावल के घोल से बनाई जाती है. मध्य प्रदेश में मौनसून के खत्म होने पर घरों के दरवाजों पर फूलों और पत्तियों से रंगोली बनाई जाती है. राजस्थान की रंगोली की सब से खास बात यह है कि उस में चटक रंगों का भरपूर इस्तेमाल किया जाता है.

विविध नाम व रूप

केरल में ओणम के मौके पर बनाई जाने वाली रंगोली में फूलों का इस्तेमाल किया जाता है. फर्श पर रंगोली का चित्र बना कर खाली जगहों को गुलाब, गेंदा, सूरजमुखी, चमेली आदि फूलों की पंखुडि़यों को सलीके से भरा जाता है.

हर राज्य में रंगोली को अलग-अलग नाम से पुकारा जाता है. बिहार में इसे अरिपन तो उत्तर प्रदेश में चौक पूरना कहा जाता है. राजस्थान में इसे मांडना के नाम से पुकारा जाता है, तो बंगाल में अल्पना कहा जाता है. कर्नाटक में रंगवल्ली तो तमिलनाडु में कोल्लम के नाम से पुकारा जाता है.

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