अब ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर-3’ का विरोध

‘उड़ता पंजाब’ को सेंसर बोर्ड की हरी झंडी के बाद अब अनुराग कश्यप की आने वाली फिल्म ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर-3’ के विरोध की पटकथा लिखी जा रही है.

झारखंड के धनबाद जिले के वासेपुर कस्बे के लोगों ने इसके विरोध का फैसला किया है. लोगों का मानना है कि फिल्म पहले के दोनों पार्ट में वासेपुर की गलत छवि दिखाई गई है जिसके कारण वहां के लोगों की बदनामी हुई है.

वार्ड काउंसलर निसार आलम का कहना है कि 2012 में इस फिल्म के पहले पार्ट के आने के बाद वासेपुर में अपराध का ग्राफ बढ़ गया है. वो बताते हैं कि अब लोग वासेपुर में अपनी बेटियों की शादी करने से कतरा रहे हैं.

उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि वासेपुर के ही जीशान कादरी, फिल्म के सह पटकथा लेखक अपने स्वार्थ के लिए यहां की गलत तस्वीर पेश कर रहे हैं, जबकि वासेपुर के सामाजिक ताना बाना में कौमी एकता की मिठास है. वो कहते हैं कि कई दूसरी अच्छी बातें भी हैं, जिन्हें शोकेस किया जा सकता था.

बकौल निसार आलम, “इस कस्बे के लोग आईएएस, आईआईटी इंजीनियर, डॉक्टर और पुलिस में बड़े अधिकारी हैं. फिल्म तो इन खूबियों पर भी बनाई जा सकती है.”

वासेपुर की आरा मोड़ कालोनी के निवासी रुस्तम अंसारी ने बताया कि कोलकाता में उन्हें होटल वालों ने सिर्फ इसलिए कमरा नहीं दिया क्योंकि वे वासेपुर से हैं.

ऐसा अनुभव दूसरे ग्रामीणों का भी है. लोगों ने बताया कि होटल वाले रेसिडेंशल प्रूफ देखते ही कमरों के बुक्ड होने का बहाना बना देते हैं.

भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के धनबाद जिलाध्यक्ष बबलू फरीदी मानते हैं कि इस फिल्म के कारण वासेपुर के युवाओं पर गलत असर पड़ रहा है और इसलिए फिल्म के पार्ट-3 का विरोध होगा. उन्होंने कहा कि इसके लिए कानूनी लड़ाई भी लड़ी जाएगी.

पिछले दिनों जीशान कादरी वासेपुर में बढ़ रहे क्राइम ग्राफ का अध्ययन करने यहां आए थे. उन्होंने मीडिया को कहा, “हमने गैंग्स ऑफ वासेपुर के पहले दो पार्ट में साल 2002 तक की कहानी बताई थी. तीसरे पार्ट में हम 2003 से 2015 की कहानी बताने वाले हैं.

उन्होनें एक दिलचस्प बात भी बताई, वो ये कि यह फिल्म ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ सीरीज का तीसरी पार्ट नहीं होगी. यानी यह फिल्म सिक्वल या प्रीक्वल नहीं होगी बल्कि दोनों के बीच की होगी. यही वजह है कि इसे ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर 3’ कहने की बजाए ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर 1.5’ कहना ठीक होगा.

फिल्म की स्क्रीप्टिंग का काम पूरा हो चुका है. शूटिंग भी चल रही है. हम इसे अक्टूबर तक पूरी कर लेंगे. इस साल के अंत तक फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज कर दी जाएगी.”

जीशान ने कहा कि फिल्म को फिल्म की तरह ही लेना चाहिए और इसका विरोध करने वाले लोग सस्ती लोकप्रियता के फेर में ऐसा कर रहे हैं.

शराब की बोतलों से बना ‘रईस’ का पोस्टर

 

शाहरुख की अगली फिल्म ‘रईस’ का नया पोस्टर सामने आया है, जो एल्कोहल की बोतलों से बना है. मुंबई के फिल्म-पब्लिसिटी डिजाइनर राजेश ने यह पोस्टर डिजाइन किया है, जिसमें शाहरुख का चेहरा अलग-अलग रंगों की शराब की बोतलों से बना है.

‘रईस’ को शाहरुख की रेड चिलीज एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड और फरहान अख्तर की एक्सल एंटरटेंमेंट प्रोड्यूस कर रहे हैं. इसके डायरेक्टर राहुल ढोलकिया हैं, जिन्हें 2005 की फिल्म ‘परजानिया’ के लिए नेशनल अवॉर्ड फॉर बेस्ट डायरेक्शन मिला था.

‘रईस’ में शाहरुख अवैध शराब का बिजनेस करते नजर आएंगे. रिपोर्टस के मुताबिक, यह फिल्म गुजरात के गैंगस्टर अब्दुल लतीफ की जिंदगी पर आधारित है जो गुजरात में अवैध शराब का बिजनेस चलाता था.

राजेश के काम से खुश होकर शाहरुख ने ट्विटर पर फिल्म का पोस्टर शेयर कर राजेश को शुक्रिया कहा और कैप्शन लिखा, ‘वेरी-वेरी कूल…’

राजेश सुपरस्टार के इस रिस्पॉन्स से बेहद खुश नजर आए. बता दें कि इस फिल्म में नवाजुद्दीन सिद्दीकी भी नजर आएंगे. 26 जनवरी 2017 को रिलीज होने वाली इस फिल्म में सनी लियोनी का जबरदस्त आइटम नम्बर भी देखने को मिलेगा.

मनमोहन सिंह पर बनेगी फिल्म

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर मूवी बनने जा रही है. मूवी का नाम रखा गया है ‘मनमोहन सिंह- द एक्सिडेंटल प्राइम मिनिस्टर’. मूवी साल 2017 के अंत तक रिलीज होगी.

इसकी कहानी संजय बारू की विवादित किताब ‘द एक्सिडेंटल प्राइम मिनिस्टर: द मेकिंग एंड अनमेकिंग ऑफ मनमोहन सिंह’ पर आधारित होगी. इसमें साल 2014 तक के सिंह के कार्यकाल के बारे में भी दिखाया जाएगा.

सूत्रों से खबर आई है कि मूवी का टीजर 30 अगस्त को जारी किया जा सकता है. साथ ही कहा गया है कि मूवी का फर्स्ट लुक कई बड़े कांग्रेस नेताओं की नींद उड़ा सकता है. इसमें दिखाया जाएगा कि कांग्रेस ने किस तरह से पूर्व पीएम नरसिंहा राव का अंतिम संस्कार दिल्ली में नहीं होने के लिए कोशिश की थी.

सूत्रों से यह भी खबर मिली है कि मूवी भारत के साथ ही पूरे वर्ल्ड में एक दर्जन से ज्यादा भाषाओं में रिलीज होगी. मनमोहन सिंह की भूमिका के लिए पंजाब के एक युवा कलाकार को चुना गया है, लेकिन सोनिया और राहुल गांधी के किरदार के लिए अभी तलाश जारी है. साथ ही बताया गया है कि इसमें संजय बारू की भूमिका निभाने के लिए मनोज बाजपेयी को लिया जा सकता है.

…तो इसलिए अलग हुए रितिक और सुजैन

17 साल की खुशहाल शादीशुदा जिंदगी बिताने के बाद अचानक रितिक और सुजैन की तलाक की खबर फैन्स के लिए किसी झटके से कम नहीं थी.

हालांकि इसके पीछे वजह रितिक का दूसरे को-स्टार्स से अफेयर्स बताईं जा रही थीं. वहीं, अर्जुन रामपाल से सुजैन की बढ़ रही नजदीकियां भी इस रिश्ते के टूटने का एक कारण माना जा रहा था.

इस रिश्ते को खत्म हुए करीब दो साल हो चुके हैं इसके बावजूद दोनों कभी भी एक दूसरे के खिलाफ कुछ भी बोलते नजर नहीं आए. जिससे फैन्स कभी ये समझ ही नहीं पाए कि तलाक के बाद भी एक दूसरे को हमेशा सपोर्ट करने वाली ये जोड़ी आखिर अलग हुई क्यों? लेकिन अब इसका जवाब मिल गया है.

दरअसल रितिक की एक्स वाइफ सुजैन ने तलाक के दो साल बाद इस रिश्ते को खत्म करने की असली वजह बताई है. सुजैन ने कहा कि “हम जिंदगी के ऐसे मोड़ पर पहुंच चुके थे जहां मैंने सोचा कि हमारा अलग होना ही बेहतर है. झूठे रिश्ते में रहने से बेहतर था कि अब अपने रिश्ते की असलियत पहचानें.”

सुजैन ने कहा, ‘हम लोग करीबी दोस्त हैं. जब हम साथ हुआ करते थे, उससे कहीं ज्यादा आज हम चैट करते हैं. इन सबसे कहीं ज्यादा हम अपने बच्चों के लिए कमिटेड हैं. हम एक-दूसरे का सम्मान करते हैं. जब बच्चे बीच में रहते हैं तो हमारे लिए यह अहम हो जाता है कि हम अपने डिफरेंसेस को साइड कर उनको प्रोटेक्ट करें.’

बता दें कि रितिक और सुजैन के दो बेटे रियान और रिदान हैं. तलाक के बावजूद ये दोनों बच्चों की खुशी के लिए एक साथ नजर आने से नहीं कतराते. हाल ही में इन्होंने एक साथ ही अपने छोटे बेटे का बर्थडे भी सेलिब्रेट किया था.

लेकिन इन सब के बावजूद सुजैन कह चुकीं है कि रितिक से दोबारा रिश्ता संभव नहीं.

प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाएं ले सकती हैं सामान्य दवाएं

गर्भवती महिलाएं आम तौर पर सामान्य दवाओं से बचने की कोशिश करती हैं, लेकिन एक नए अध्ययन में पता चला है कि इलाज न होने पर अगर एक छोटी सी समस्या गंभीर रूप ले लेती हैं, तो यह मां और बच्चा दोनों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है.

ब्रिटेन स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्ट एंगिल्या (यूएई) ने इस अध्ययन के लिए 1,120 महिलाओं पर सर्वेक्षण किया. इस दौरान महिलाओं से गर्भावस्था के दौरान सामान्य तकलीफों जैसे मिचली आना, सीने में जलन, कब्ज, जुकाम, मूत्र मार्ग में संक्रमण, गर्दन, सिर दर्द और नींद की समस्याओं संबंधित सवाल पूछे थे.

अध्ययन में यह बात सामने आई कि कुल महिलाओं में से लगभग एक तिहाई महिलाओं ने गर्भावस्था के दौरान विभिन्न तकलीफों में दवाओं के सेवन से परहेज किया. उन्होंने आमतौर पर बिना चिकित्सीय परामर्श के इस्तेमाल होने वाली पैरासिटामोल, इबूप्रोफेन, कफ और सर्दी से संबंधित दवाओं के सेवन से भी परहेज किया.

शोध के नेतृत्वकर्ता माइकल ट्विग के अनुसार वह पता लगाना चाहते थे कि गर्भावस्था के दौरान महिलाएं दवाओं के जोखिमों और लाभों के बारे में क्या सोचती हैं.

ट्विग ने कहा, “शोध के दौरान हमने पाया कि महिलाओं की एक बड़ी संख्या गर्भावस्था के दौरान पैरासिटामोल के सेवन को जोखिम समझती है. हालांकि यह बिलकुल सुरक्षित है. “

उन्होंने बताया, ” इस अध्ययन में हमें सबसे अधिक चिंता की बात यह देखने को मिली कि कई महिलाएं मूत्र मार्ग में संक्रमण का अनुभव करने के दौरान भी दवाएं नहीं लेती हैं. अगर इसका सही समय पर इलाज नहीं किया जाता है, यह जटिल होकर कई मां और भ्रूण दोनों को नुकसान पहुंचाता है.

इन निष्कर्षों से पता चलता है कि महिलाओं को प्रभावी ढंग से इलाज के लिए प्रोत्साहित करने के लिए गर्भावस्था के दौरान दवाओं के लाभों और सुरक्षा के बारे में अधिक जानकारी की जरूरत है.”

वरुण बनेंगे मेजर ध्यानचंद

बॉलीवुड एक्टर वरुण धवन हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद का किरदार निभाते नजर आ सकते हैं. लगभग चार साल पहले मेजर ध्यानचंद के बेटे ने उनपर फिल्म बनाने के अधिकार निर्माता पूजा शेट्टी और आरती शेट्टी को बेचे थे. तब इस फिल्म पर कोई काम शुरू नहीं हुआ था लेकिन अब यह कहानी कुछ आगे बढ़ती दिख रही है.

बीच में निर्माता ने शाहरुख खान से इस प्रोजेक्ट के बारे में विचार किया था, लेकिन बात बन नहीं पाई थी. इसके बाद शेट्टी बहनें इस प्रोजेक्ट को धर्मा प्रोडक्शन के करण जौहर के पास लेकर गए.

करण जौहर ने जब इस प्रोजेक्ट के बारे में सुना तो वह इसे बनाने के लिए तैयार हो गए. करण ने इस प्रोजेक्ट पर तुरंत काम करना शुरू कर दिया.

चर्चा है कि करण, ध्यानचंद के किरदार में रणबीर कपूर को लेना चाह रहे थे लेकिन रणबीर के हाथ में कई और प्रोजेक्ट भी हैं, इसलिए उन्होंने मना कर दिया. इसके बाद करण ने वरुण धवन से संपर्क किया. वरुण ने प्रोजेक्ट में काफी दिलचस्पी दिखाई. हीरो फाइनल होने के बाद करण ने फोक्स स्टार स्टूडियो से संपर्क किया, वो भी इस प्रोजेक्ट से जुडऩे के लिए तैयार हो गए हैं.

लेमन फिश (Lemon Fish)

मछली bengali विधि मानी जाती है, पर आजकल तो सभी मछली खाना पसंद करते है. मछली खाना हेल्थ के लिए काफी अच्छा है और बालों के लिए भी. तो आज हम आपको लेमन फिश की रेसिपी बताने वाले हैं.

सामग्री

बोनेलेस मछली – 1

मक्खन – 1/4 कप

निम्बू का रस – 1 1/2

अदरक -लहसुन का पेस्ट – 1 स्पून

काली मिर्च – टी स्पून

लाल मिर्च – स्वादानुसार

नमक – स्वादानुसार

विधि

1.ओवन को पहले preheat कर लीजिए.

2.पहले ओवन वाले बर्तन में मछली रखे और अब उस पर निम्बू का रस और मक्खन डाल दीजिए.

3.अब अदरक- लहसुन का पेस्ट, काली मिर्च, लाल मिर्च और नमक डाल दीजिए.

4.अब बर्तन को preheat ओवन में आधे घंटे के लिए रख के सेंक लीजिए, जबतक कि मछली पक न जाए.

लेमन फिश बनकर तैयार है, आप इसे सजाने के लिए पत्ता गोभी का प्रयोग कर सकते हैं.

‘‘उड़ता पंजाब’’ नहीं आएगी 17 जून को..?

फिल्म ‘‘उड़ता पंजाब’’ के सेंसर प्रमाणपत्र के मसले पर मुंबई हाई कोर्ट फैसला सुनाएगा. लेकिन फिल्म ‘‘उड़ता पंजाब’’ के निर्माता अनुराग कश्यप धीरे धीरे घिरते हुए नजर आ रहे हैं. फिलहाल जो हालात बन गए हैं, उन हालातों में फिल्म ‘‘उड़ता पंजाब’’ के 17 जून को रिलीज होने की संभावनाएं कमतर हो गयी हैं. शायद यह बात फिल्म ‘‘उड़ता पंजाब’’ के निर्माताओं के अलावा पूरी फिल्म इंडस्ट्री भी समझ चुकी है. मगर अभी तक अनुराग कश्यप ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं.

जबकि बौलीवुड से जुड़े कुछ सूत्रों का दावा है कि फिल्म ‘‘उड़ता पंजाब’’ के निर्मातागण यह मानकर चल रहे हैं कि उनकी फिल्म 17 जून को रिलीज नहीं हो पाएगी. इसलिए इन लोगों ने कई सूत्रों की मदद से 24 जून को रिलीज होने वाली फिल्मों के निर्माताओं व उन फिल्मों के वितरकों से बात की. उसके बाद अब 24 जून को रिलीज होने वाली राजनीतिक ड्रामा के साथ प्रेम कहानी प्रधान फिल्म ‘‘शोरगुल’’ 24 जून की बजाय 17 जून को तथा टीसीरीज निर्मित और विवेक अग्निहोत्री निर्देशित फिल्म ‘‘जुनूनियत’’ भी अब 24 जून की बजाय 17 जून को रिलीज होगी.

इतना ही नहीं अनुराग अपनी दूसरी फिल्म ‘‘रमन राघव 2.0’’ को भी अब 24 जून की बजाय 17 जून को ही रिलीज करने की योजना पर काम कर रहे हैं. इससे 17 जून से ‘उड़ता पंजाब’ के लिए रोके गए सिनेमाघरों में यह फिल्में रिलीज हो जाएंगी. इसके बाद यदि ‘उड़ता पंजाब’ के लिए सब कुछ सही रहा, तो ‘उड़ता पंजाब’ को 24 जून को रिलीज किया जा सकता है.

मगर कुछ सूत्रों का दावा है कि 24 जून को पंजाबी फिल्म ‘‘रिटर्न आफ सरदारजी’’ रिलीज हो रही है, जो कि सफलतम पंजाबी फिल्म ‘सरदारजी’ का सिक्वअल है. इस फिल्म से ‘उड़ता पंजाब’ नहीं टकराएगी. क्योंकि इस पंजाबी फिल्म में पंजाब के चर्चित अभिनेता दिलजीत दोसांज की दोहरी भूमिका हैं, जिन्होनें फिल्म ‘उड़ता पंजाब’ में भी सरताज सिंह का किरदार निभाया है. इसलिए यदि ‘उड़ता पंजाब’ 17 जून को नही रिलीज हो पायी, तो फिर ‘उड़ता पंजाब’ का 15 जुलाई से पहले रिलीज होना मुश्किल है. मगर कोई भी निर्माता कुछ भी कहने को तैयार नहीं. वैसे फिल्म ‘‘शोरगुल’’ के निर्माताओं ने घोषणा कर दी है कि उनकी फिल्म 24 की बजाय 17 जून को रिलीज होगी.

फिल्म ‘‘जुनूनियत’’ की निर्माण कंपनी ‘‘टीसीरीज’’ के प्रवक्ता भी स्वीकार कर रहे हैं कि ‘जुनूनियत’ 24 की बजाय 17 जून को आएगी. क्योंकि फिल्म तैयार है और फिल्म की वितरक ‘पूजा फिल्मस’ चाहती है कि इसे 17 जून को रिलीज किया जाए, जिससे 24 जून को रिलीज होने वाली पंजाबी फिल्म ‘‘रिटर्न आफ सरदारजी’’ से टकराव न हो.

ऐसा पहली बार होगा, जब अचानक कोई फिल्म एक सप्ताह पहले रिलीज हो. अन्यथा अब तक होता रहा है कि फिल्म की रिलीज की तारीखें आगे बढ़ी हैं, पीछे नही. जबकि बौलीवुड से जुड़े कुछ लोगों की राय में जो निर्माता अपनी फिल्म को पहले रिलीज कर रहे हैं, वह अवसर का फायदा उठा रहे हैं. अब यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा कि किसे फायदा और किसे नुकसान होगा.

पुलकित सम्राट की खुशी का राज

फिल्म ‘‘जुनूनियत’’ के एक सप्ताह पहले यानी कि 24 जून की बजाय 17 जून को रिलीज होने से सबसे ज्यादा खुश पुलकित सम्राट हैं. उनका मानना है कि अब उनकी फिल्म ज्यादा सिनेमाघरों में रिलीज हो सकेगी. अपनी इस खुशी का इजहार करते हुए पुलकित सम्राट कहते हैं-‘‘हमारी फिल्म एक सप्ताह पहले रिलीज हो रही है,इससे हम काफी उत्साहित हैं. एक सप्ताह पहले आने से हमारी फिल्म को अब ज्यादा संख्या में सिनेमाघर मिल रहे हैं. जब हमारी फिल्म 24 जून को रिलीज होने वाली थी, उस वक्त हमें पांच फिल्मों के साथ मुकाबला करने के अलावा थिएटर भी कम मिल रहे थे.’’ यानी कि किसी का नुकसान तो किसी का फायदा.

मजेदार बात यह है कि कुछ दिन पहले अक्षय कुमार ने भी इसी तरह की खुशी जाहिर की थी. वास्तव में फिल्म ‘‘हाउसफुल 3’’ की सफलता की पार्टी में जब पत्रकारों ने अक्षय कुमार से पूछा था कि सेंसर बोर्ड के साथ हुए विवाद के चलते अब फिल्म ‘‘उड़ता पंजाब’’ 17 जून को नहीं रिलीज हो पाएगी. इस पर उनकी क्या राय है? इस सवाल पर अक्षय कुमार ने पत्रकारो से सेंसर बोर्ड पर टिप्पणी करने की बजाय अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा था-‘‘यदि ऐसा है, तो हमारे लिए खुशी की बात है. हमारी फिल्म एक सप्ताह और अच्छा कमा सकेगी.’’…

वाह! क्या बात है. दूसरों के दुःख में अपनी खुशी तलाशने वालों की संख्या बौलीवुड में भी कम नहीं है..इसके बावजूद फिल्म वाले दावा करते हैं कि ‘‘हम सब एक हैं.’’

भारतीय सभ्यता की झलक है इन 4 गुफाओं में

गुफाएं मनुष्य के लिए पनाहगाह रहीं हैं. कई गुफाएं कुदरत ने उसे दी, तो कई उसने सभ्यता के विकास, दर्शन, कला साधना और एकांत के लिए भी बनाईं. ये गुफाएं इतनी बेहतरीन थीं कि वे आज की आधुनिक इंजीनियरिंग के लिए चुनौती बनी हुई हैं. भारत में भी गुफाओं का इतिहास लाखों और हजारों साल पुराना है.

वराह गुफाएं (महाबलीपुरम, तमिलनाडु)

तमिलनाडु में महाबलीपुरम में स्थित वराह गुफाएं बहुत फेमस हैं. यहां भगवान विष्णु का मंदिर है. इन गुफाओं की कलाकारी इतनी सुंदर है कि इसे यूनेस्को ने वर्ल्ड हेरिटेज साइट बनाया है. इस गुफा के अलावा सित्तनवसल और नार्थमलाई गुफा भी मशहूर है. महाबलीपुरम तक एयर, ट्रेन और बस से आसानी से जाया जा सकता है.

बोर्रा और बेलम की गुफाएं (विशाखापट्टनम)

बोर्रा गुफाओं की खोज 1807 में ब्रिटिश भूविज्ञानी विलियम जॉर्ज ने की थी. आंध्र प्रदेश में विशाखापट्नम जिले में स्थित बोर्रा गुफाएं अनंतगिरि पहाड़ियों में स्थित है. आंध्र में ही कुरनूल से 106 किमी दूर बेलम गुफाएं स्थित हैं. दोनों ही गुफाएं 10 लाख साल पुरानी हैं. विशाखापट्नम के लिए प्रमुख शहरों से विमान, ट्रेन और बस की सेवा उपलब्ध है.

बादामी गुफा (कर्नाटक)

कर्नाटक के बादामी में सुंदर और नक्काशीदार गुफाएं हैं. बादामी की चार गुफाओं में से दो गुफाएं भगवान विष्णु, एक शिव जी और एक जैन धर्म से संबंधित बताई जाती हैं. लाल पत्थर से बनाई गई ये गुफाएं सुंदरता के लिए जानी जाती हैं. कर्नाटक में एहिलो गुफा भी आकर्षण का केंद्र है. बादामी तक हवाई, सड़क या रेलमार्ग से पहुंचा जा सकता है.

अजंता की गुफाएं (महाराष्ट्र)

दुनियाभर में मशहूर अंजता-एलोरा की गुफाएं हमेशा से ही जिज्ञासा और सैलानियों के आकर्षण का केंद्र रही हैं. यहां की सुंदर चित्रकारी व मूर्तियां कलाप्रेमियों के लिए स्वर्ग से कम नहीं हैं. हरियाली की चादर ओढ़ी यहां की चट्टानें अपने भीतर छुपे हुए इतिहास की ये धरोहर अपने उस काल की कहानी खामोशी से कहती नजर आती हैं. वाघोरा नदी यहां की खूबसूरती में और चार चांद लगा देती है. कहा जाता है कि गुफाओं की खोज आर्मी ऑफिसर जॉन स्मिथ व उनके दल ने सन् 1819 में की थी. वे यहां शिकार करने आए थे. तभी उन्हें कतारबद्ध 29 गुफाएं नजर आई. इसके बाद ही ये गुफाएं पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हो गईं.

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