Love Story in Hindi: बोइंग बी 787, लंदन की फ्लाइट की अनाउंसमैंट के साथ ही सिद्धार्थ और कैथरीन दोनों ने एकदूसरे को नजर भर कर देखा और उठ खड़े हुए.
‘‘आई विल मिस यू सिड.’’
‘‘मी टू.’’
एक हाथ से लगेज ट्रौली को खींचते हुए सिद्धार्थ ने दूसरे हाथ में कैथरीन का हाथ पकड़ा हुआ था. चैक इन गेट पर पहुंचते ही कैथ ने अपना हाथ छुड़ा कर सिद्धार्थ को गले से लगा लिया.
‘‘आई एम गोइंग टू मिस यू अ लौट. आई वांट टू स्पैंड माई लाइफ विद यू.’’
‘‘मी टू कैथ.’’
कैट के आंसुओं को सिड ने अपने कंधे पर महसूस किया. फिर उसे खुद से अलग करते हुए बोला, ‘‘यू आर स्टूपिड.’’
‘‘आई नो दैट,’’ हंसती हुई कैथ और भी प्यारी लग रही थी.
वहीं सिड भी बेहद गुड लुकिंग था लेकिन कम बोलने वाला और थोड़ा शर्मीला एअरक्राफ्ट इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था और काफी शांत स्वभाव था उस का.
बस कुछ ही पलों में चैक इन की औपचारिकताओं के बाद कैथ कांच के उस पार थी और सिड इस तरफ. दोनों ने हाथ हिला कर एकदूसरे को अलविदा कहा और वापस अपनीअपनी दिशा में मुड़ गए.
एअरपोर्ट से निकल कर सिड के कदम तेजी से वापस अपनी गाड़ी की ओर बढ़ गए. गाड़ी का गेट खोला चाबी घुमाई और चल पड़ा अपने रास्ते पर.
‘‘तुम्हें मैं भूल जाऊंगा ये बातें दिल में न लाना… मैं जब भी याद आऊं तो चले आना चले आना…’’
यह एफएम भी दिल की बात जान लेता है जैसे सिड ने महसूस किया क्योंकि म्यूजिक आन करते ही यही लाइंस कानों में पड़ीं और ड्राइव करते हुए उस का ध्यान कोई एक महीना पीछे पहुंच गया…
यह पिछला 1 महीना कितना यादगार बीता था उस का कैथ के साथ. उसे याद आ रहा था वह पल जब कैथ से पहली बार मिला था वह. खेत के पास वाली सड़क के किनारे बड़ी सी गाड़ी से टेक लगाए परेशान सी खड़ी थी वह और सिड को जाता देख उसने झट से उसे आवाज दी थी, ‘‘हैलो. ऐक्सक्यूज मी.’’
सिड तो जैसे बच कर भागना चाहता था लेकिन वह एकदम उस के सामने आ कर
खड़ी हो गई, ‘‘प्लीज. आई डिस्परेटली नीड यार हैल्प.’’
गुलाबी रंगत, ब्राउन आंखे,लहराते बाल और ऊपर से यह खुशामदी अंदाज जैसे कैथ को देखता ही रह गया था वह.
उफ, अब तो कोई रास्ता ही नहीं बचा था सिड के पास, इसलिए उसे कहना पड़ा, ‘‘यस व्हाट डू यू वांट?’’
अब कैथ ने उसे अपनी फोन की सक्रीन पर एक ऐड्रैस दिखाया. तब जाके मालूम
पड़ा कि यहां पंजाब में उस के दादादादी का घर है और वह उन्हीं से मिलने यहां आई है लेकिन इस घर पर जब वह पहुंची थी तब कुछ लोगों ने उसे बाहर से ही लौटा दिया यह कह कर कि उस के दादादादी उस से मिलना नहीं चाहते.
‘‘आई जस्ट वांट टू मीट माई पैटरनल फैमिली, माई ग्रैंड पेरैंट्स ऐंड आई वांट टू एक्सप्लोर हिज प्लेस.’’
सिड को उस पर तरस आ गया. फिर भी उस को कैथ के यहां होने पर हैरानी हो रही थी.
‘‘मैडम यू आर अ ब्रिटिश सिटिजन. यू डौंट नीड टू बी हेअर लाइक दिस.’’
फिर कैथ ने बताया कि वह एक गाइड के साथ यहां गांव में आई है लेकिन वह अब वापस चलने को कह रहा है. यह गाइड गांव में रुकना नहीं चाहता और कैथ अपने परिवार से मिले बिना वापस नहीं जाना चाहती.
‘‘देखिए मैम अभी तो शाम हो गई है कुछ ही देर में रात हो जाएगी तो आज तो नहीं हो पाएगा. आप ऐसा कीजिए कल सुबह आइए फिर चल सकते हैं इस एड्रैस पर. अभी आप अपने होटल लौट जाइए.’’
‘‘ओके,’’ बड़ी खुशी से कैथ ने जवाब दिया. उसे भरोसा हो गया था सिड के वादे पर.
फिर कैथ ने एक और रिक्वैस्ट की थी कि सिड उन की गाड़ी के साथ उन्हें गांव के
बाहर मेन रोड तक छोड़ दे.
‘‘हां बिल्कुल और तो कोई काम ही नहीं है मु झे,’’ सिड कुछ झुंझलाया सा राजी हो गया.
वह अपनी बाइक पर कैथ की गाड़ी के आगेआगे चल पड़ा. लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था.
कैथ की कार कच्ची सड़क की ढलान से निकलते हुए जैसे ही आगे बढ़ी तभी किसी चीज से जोरदार टक्कर हुई और गाड़ी का अगला टायर पंक्चर हो गया. साथ ही हैडलाइट चकनाचूर हो गई और इंजन गर्रर की आवाज के साथ झटके लेने लगा.
‘‘यह देख सिड को उस ड्राइवर कम गाइड पर बहुत गुस्सा आया, यह आप का हाईवे नहीं है गाइड यानी ड्राइवर. गांव की कच्ची सड़क है. चलानी नहीं आती तो यहां क्यों ले आए गाड़ी को… लेकिन अब तो सुबह से पहले कुछ नहीं हो सकता.’’
और हार कर सिड कैथ को अपनी बाइक पर बैठा कर अपने घर के लिए चल पड़ा.
‘‘आई एम सो सौरी.’’
‘‘सौरीवौरी छोडि़ए मैडम. बात यह है कि मैं अपने घर पर क्या कहूंगा? यह किसे ले कर आया हूं? हिंदी तो सम झ आती है न आप को?’’ सिड इस समय बहुत गुस्से में था.
‘‘ओ यस आई अंडरस्टैंड इंडी.’’
‘‘हा… हा… इंडी. थैंक गौड.’’
‘‘ट्रस्ट मी. मेरे डैड ने मु झे इंडी सिखाया है.’’
‘‘इंडी?’’ सिड को हंसी आ गई.
शाम तेजी से रात में बदलने लगी थी. सिड ने पगडंडीनुमा रास्ते पर तेजी से बाइक दौड़ा दी और कुछ देर बाद वह कैथ के साथ अपने बड़े से हवेलीनुमा घर के गेट पर पहुंच गया.
खूंटी पर लटकती लालटेन की हलकी रोशनी कमरे में पसरी हुई थी. कडि़यों की छत वाले उस कमरे में 4 पलंग बिछे थे.
बड़ी वाली मसहरी पर गरम टोपा पहने और रजाई में खुद को लपेटे बैठे पापा उन दोनों को गौर से देख रहे थे. पास ही कुरसी पर शाल में लिपटी मां बैठी थीं और बेंत की कुरसियों पर सिड और कैथ सकुचाते हुए से बैठे थे.
‘‘हां तो अमनदीप की बेटी हो तुम?’’
कैथ ने नजर ऊपर उठाई और हां में सिर हिलाया.
‘‘तो अब क्यों मिलना चाहती हो अपने
पापा के मांबाप से? छोड़ो वापस चली जाओ… अब भूल चुके हैं सब उस को.’’
‘‘यस औफकोर्स आई विल गो बैक अंकल. बट… ऐक्चुअली…’’
और सिड जो अभी तक चुप बैठा था ने कैथ का पक्ष रखा, ‘‘पापा दरअसल वह उन से इसलिए मिलना चाहती है ताकि उन को अपने पापा का सच बता सके. उन के लिए जो गलतफहमियां उन लोगों के दिल में हैं उन्हें दूर कर सके.’’
‘‘कैसी गलतफहमी बेटा?’’ अब मां ने पूछा और तब जा कर पता चला था कि कैथ के पिता को लंदन से एक अच्छी जौब का औफर आया था. वे अपने मांबाबा की इकलौती संतान थे शायद इसीलिए उन के पिताजी उन्हें बाहर जाने नहीं दे रहे थे लेकिन वे उन से छिप कर लंदन चले गए थे. लंदन में उन्हें अच्छी जौब तो मिल गई लेकिन उन से उन का परिवार हमेशा के लिए छूट गया. फिर वहीं उन्होंने क्रिस्टीन से शादी कर ली लेकिन कुछ साल बाद ही उन का तलाक हो गया. फिर उन्होंने कभी दोबारा शादी नहीं की. अकेले ही कैथ की परवरिश की.
हां लंदन जाने के बाद उन्होंने कई बार यहां आना चाहा ताकि एक बार अपने मांबाप से मिल सकें लेकिन कभी अपने बाबा के सामने आने की हिम्मत ही न कर सके.
वे हमेशा अपने परिवार को अच्छा रहनसहन देना चाहते थे. इसीलिए उन्होंने उस हाई प्रोफाइल जौब के लिए अप्लाई किया था. लेकिन ऐसा हो नहीं पाया. कैथ ने बताया कि
उस ने सारी जिंदगी अपने पापा को अपने देश और अपने मां बाबा के लिए तड़पते देखा है. वे हर पल उन्हें याद करते रहे और उन से बिछुड़ने के दुख से बेचैन रहे और इस दुनिया से ही चले गए.
कई साल तक वे दादाजी के जिस अकाउंट में पैसे भेजते रहे, बाद में पता चला कि वे
पैसे तो दादाजी को मिले ही नहीं बल्कि हर बार कोई और ही उन के अकाउंट से पैसे निकाल रहा था. ये सब सुन कर उन्हें बहुत दुख हुआ. वे यह सोच कर रोते ही रहे कि पता नहीं मांबाबा किस हाल में होंगे.
कैथ की दास्तान सुन कर सिड और मम्मीपापा सभी बहुत भावुक हो गए थे.
सिड के पापा ने कहा कि ठीक है कल ही उन लोगों के पास चलते हैं और हां वे किसी भी तरह की मदद करने के लिए तैयार हैं. उन्होंने यह भी बताया कि वे लोग हर साल 1 या 2 बार अपने गांव आते हैं. और इस बार सिड की भी छुट्टियां थीं तो उसे भी ले आए.
अगले ही दिन ये चारों लोग कैथ के बताए पते पर चल पड़े. किसी तरह लोगों से पूछते हुए वे लोग उस घर तक पहुंच ही गए. वे बड़ा सा पुराना घर अपनी उम्र की दास्तान खुद बयां कर रहा था. लकड़ी के पुराने से दरवाजे से वे लोग अंदर दाखिल हुए. कुछ छोटी बच्चियां हैंडपंप से पानी भरती दिखाई दीं. कुछ उस कच्चे आंगन में झाड़ू लगातीं. अंदर बरामदे में एक बुजुर्ग एक पुरानी चारपाई की जोड़तोड़ कर रहे थे. इन लोगों को देखते ही वे चौंक गए थे और उन्होंने अपनी पत्नी को आवाज लगाई थी, ‘‘देख तो तेरे मायके से कोई आया लगता है.’’
‘‘मेरे मायके में है ही कौन,’’ कहती हुई दादी रसोई से बाहर आ गई थीं.
और जब उन्हें पता चला कि ये उन के इकलौते बेटे की निशानी है तो दोनों फूटफूट कर रोए. दादी ने अपनी खुरदरी उंगलियां कैथ के चेहरे पर घुमाईं जैसे छूना चाहती हों अपने बिछड़े हुए बेटे को. दादा का भी सारा गुस्सा जैसे कभी का खत्म हो चुका था. अब तो बस जो बचा था वह था पछतावा. अपने बेटे को पहले जीते जी खोने का और बाद में इस दुनिया से जाने का. दादा से यह भी पता चला कि किस तरह फर्जी कागज बनवा कर उन के भाई की संतानों ने उन की सारी जमीन अपने नाम करा ली.
कैथ उन की बातें सुन कर बस लगातार रोए जा रही थी. उस ने कुछ दिन यहीं उन के साथ गुजारने का फैसला किया. सिड के मांपापा ने हर तरह की मदद का आश्वासन दिया और इन दोनों को दादादादी के पास छोड़कर लौट गए.
अब तो वह करना था जिस के लिए कैथ यहां आई थी यानी उन को जीने के लिए कुछ सुविधाएं मुहैया कराना. यही तो चाहते थे उस के पापा भी. इन दोनों ने दादादादी को इस के लिए मना ही लिया.
बस फिर क्या था. अगले ही दिन से घर में जरूरी चीजों की खरीदारी शुरू हो गई.
सब से पहले पानी की मोटर और टंकी की व्यवस्था की गई. फिर गीजर, रूम हीटर और गरमियों के लिए एसी सबकुछ इंस्टाल कर दिया गया. साथ ही फर्नीचर, सुंदरसुंदर परदे और चादरें भी खरीदी गईं. दोनों यों साथसाथ गृहस्थी को सजाते जैसे यह उन का ही आशियाना हो और कभीकभी दोनों में किसी मामूली सी बात पर बहस हो जाती तो कभी सिड प्यार से कैथ को मना लेता. दोनों रातरात तक दादीदादा से बातें करते फिर न जाने कब सो जाते.
सिड ने उन दोनों के लिए 2 स्मार्टफोन ला कर दे दिए. अब तो कभी सब मिल कर मूवी देखते तो कभी फोटो खींचते. उन्होंने दोनों बुजुर्गों को वीडियो कौल करना सिखाया और इस की खूबखूब प्रैक्टिस भी करा दी.
कभी कैथ दादी के साथ बिस्तर पर बैठी सामने पलंग पर लेट दादा को वीडियो कौल लगा देती तो वीडियो में उन्हें देख कर दादा खूब हंसते. बदले में सिड भी दादा के फोन से दादी को
पुराने गाने का क्लिप भेज देता और दादी मुसकरा देतीं. कुछ ही दिनों में दादादादी के घर में खूब रौनक हो गई और सुखसुविधाएं भी नजर आने लगीं.
बुजुर्ग चाहे कितना ही मना करें लेकिन जब सुविधाएं मिलती हैं तो उन्हें अच्छा लगता है. यही कैथ के दादादादी के साथ भी हुआ. ये उन्हें अपनी जिंदगी के बेहतरीन दिन महसूस हो रहे थे. उम्र के इस पड़ाव में आ कर कोई उन्हें इतना खास महसूस कराएगा यह वे कभी नहीं सोच सकते थे.
कैथ जब दादी के सिर में मालिश करती तो दादी उसे ढेरों दुआएं देतीं. वहीं सीड को कैथ का यह घरेलू अंदाज बेहद प्यारा लगता. उसे अकसर कैथ में एक बिलकुल देशी लड़कियों वाली छवि दिखाई देती और वह मन ही मन उस मर मिटता.
उधर कैथ को भी सिड बहुत अच्छा लगने लगा था. लेकिन दोनों अपनी सीमाएं जानते थे इसीलिए दोनों ने किसी से कुछ नहीं कहा.
दादी कहतीं कि अब तू चली जाएगी तो हम नहीं रह पाएंगे. एक बार दादी ने कहा था कि बेटा किरीन वह उसे इसी नाम से बुलातीं, तू हमेशा के लिए अपने देश में रुक जा और कैथ ने एक नजर सिड पर डालते हुए कहा था कि हां दादी रुक भी सकती हूं.
फिर एक शाम छत पर बैठी कैथ डूबते सूरज को निहार रही थी कि तभी सिड भी छत पर आ गया. सफेद रेशमी सूट खुले बालों में कैथ बहुत खूबसूरत लग रही थी, ‘‘यहां क्या कर रही हो?’’ सिड ने पूछा.
कैथ ने पलट कर देखा. ब्लू शर्ट और औफ व्हाइट जींस में सिड भी बहुत स्मार्ट लग रहा था. दोनों एकदूसरे को देखते रह गए. डूबते सूरज की लालिमा में कैथ का गुलाबी चेहरा दमक रहा था.
‘‘सुनो सिड.’’
‘‘हां बोलो कैथ.’’
‘‘ऐक्चुअली…अ नथिंग…’’
‘‘हा… हा… तुम भी न कैथ,’’ और कैथ मुसकरा कर वापस सूरज को देखने लगी. तभी नीचे से दादी की आवाज आई और दोनों सीढि़यों की तरफ भागे.
सीढि़यों पर कैथ ने इतना ही कहा, ‘‘मेरा वीजा खत्म हो रहा है.’’
‘‘रियली? ऐसा कैसे हो सकता है? मैं तो तुम्हें यहां की सिटिजन सम झ रहा था,’’ कहते हुए सिड जोर से हंस पड़ा और कैथ गुस्से में पैर पटकती नीचे आ गई और आखिरकार कैथ के वापस जाने का दिन भी आ गया.
दादादादी ने कैथ से दोबारा जल्दी मिलने का वादा लिया. सिड के मां पापा भी कैथ को कार तक छोड़ने आए.
सिड ही कैथ को एअरपोर्ट पहुंचाने आया था और यह वह आखिरी लमहा था जिस में वे बिछड़ने वाले थे कि तभी इस लमहे में कैथ ने वह कह दिया जिस का इंतजार तो दोनों को था लेकिन कह नहीं पाए थे.
‘‘तेरे साथ तकदीरा लिखवाऊंगा, मैं तेरा बण जाऊंगा…’’ गाड़ी में एफएम अभी भी औन था. घर तक पहुंचते रात हो गई थी. गेट के सामने पहुंच
कर उस ने गाड़ी का हौर्न बजाया. गेट मां ने ही खोला.
अंदर आ कर अपने कमरे में पलंग पर औंधे मुंह गिर गया सिड. अपने दिल के गलियारे में बड़ा सूनापन महसूस हो रहा था उसे.
तभी पीछे से मां ने उस के कंधे पर थपथपाया. बेटे का हाल मां से छिपा नहीं था. मां ने उसे फोन पकड़ाते हुए कहा, ‘‘अभी मैसेज कर उसे. प्लेन से बाहर आते ही वह तेरा मैसेज चेक करेगी.’’
‘‘क्या?’’ सिड अवाक सा बोला.
‘‘हां, अब हर बात वही कहेगी क्या?’’
‘‘और फिर फोन करना उसे. तू पसंद करता है न कैथ को?’’
‘‘हां मां. शायद.’’
‘‘शायद क्या. तेरी आंखों में सब नजर आ रहा है.’’ मां हंस पड़ीं.
‘‘मुझे और तेरे पापा को भी कैथ बहुत पसंद है. बात पक्की करते हैं उस के दादादादी से मिल कर.’’
‘‘वाह मां,’’ कहते हुए सिड ने मां को गले लगा लिया.
‘‘और कल ही पैकिंग कर हमें भी तो वापस घर जाना है. छुट्टियां खत्म हो रही हैं तेरी.’’
‘‘हां मां करता हूं.’’
सिड की खुशी का अब कोई ठिकाना न था. अब उसे अपना प्रेम प्रफुल्लित होता नजर आ रहा था.
लेखक- सबा नूरी
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