जिंदगी का गणित: भाग 2

‘‘अभी आई,’’ कह कर वह बच्चे को पालने में लिटा फिर वहां आ गई. परंतु अब राहुल बाहर जाने को उद्यत था. उसे बाहर फाटक तक छोड़ने गई तो उस ने पलट कर रमा को हाथ जोड़ कर नमस्कार किया और हौले से मुसकरा कर हिचकते हुए कहा, ‘‘यह तो अशिष्टता ही होगी कि पहली मुलाकात में ही मैं आप से इतनी छूट ले लूं, लेकिन कहना भी जरूरी है…’’

रमा एकाएक घबरा गई, ‘बाप रे, यह क्या हो गया. क्या कहने जा रहा है राहुल, कहीं मेरे मन की कमजोरी इस ने भांप तो नहीं ली?’

रमा अपने भीतर की कंपकंपी दबाने के लिए चुप ही रही. राहुल ही बोला, ‘‘असल में मैं अपने एक दोस्त के साथ रहता हूं. अब उस की पत्नी उस के पास आ कर रहना चाहती है और वह परेशान है. अगर आप की सिफारिश से मुझे कोई बरसाती या कमरा कहीं आसपास मिल जाए तो बहुत एहसान मानूंगा. आप तो जानती हैं, एक छड़े व्यक्ति को कोई आसानी से…’’ वह हंसने लगा तो रमा की जान में जान आई. वह तो डर ही गई थी कि पता नहीं राहुल एकदम क्या छूट उस से ले बैठे.

‘‘शाम को अपने पति से इस सिलसिले में भी बात करूंगी. इसी इमारत में ऊपर एक छोटा सा कमरा है. मकान मालिक इन्हें बहुत मानता है. हो सकता है, वह देने को राजी हो जाए. परंतु खाना वगैरह…?’’

‘‘वह बाद की समस्या है. उसे बाद में हल कर लेंगे,’’ कह कर वह बाहर निकल गया. गहरे ऊहापोह और असमंजस के बाद आखिर रमा ने अपने पति विनोद से फिर नौकरी करने की बात कही. विनोद देर तक सोचता रहा. असल परेशानी बच्चे को ले कर थी.

‘‘अपनी मां को मैं मना लूंगी. कुछ समय वे साथ रह लेंगी,’’ रमा ने सुझाव रखा.

‘‘देख लो, अगर मां राजी हो जाएं तो मुझे एतराज नहीं है,’’ वह बोला, ‘‘उमेशजी हमारे जानेपरखे व्यक्ति हैं. उन की कंपनी में नौकरी करने से कोई परेशानी और चिंता नहीं रहेगी. फिर तुम्हारी पसंद का काम है. शायद कुछ नया करने को मिल जाए.’’

राहुल के लिए ऊपर का कमरा दिलवाने की बात जानबूझ कर रमा ने उस वक्त नहीं कही. पता नहीं, विनोद इस बात को किस रूप में ले. दूसरे दिन वह बच्चे के साथ मां के पास चली गई और मां को मना कर साथ ले आई. विनोद भी तनावमुक्त हो गया.

रमा ने फिर से नौकरी आरंभ कर दी. पुराने कर्मचारी उस की वापसी से प्रसन्न ही हुए, पर राहुल तो बेहद उत्साहित हो उठा, ‘‘आप ने मेरी बात रख ली, मेरा मान रखा, इस के लिए किन शब्दों में आभार व्यक्त करूं?’’

रमा सोचने लगी, ‘यह आदमी है या मिसरी की डली, कितनी गजब की चाशनी है इस के शब्दों में. कितने भी तीखे डंक वाली मधुमक्खी क्यों न हो, इस डली पर मंडराने ही लगे.’ एक दिन उमेशजी ने कहा था, ‘कंपनी में बहुत से लोग आएगए, पर राहुल जैसा होनहार व्यक्ति पहले नहीं आया.’

‘लेकिन राहुल आप की डांटफटकार से बहुत परेशान रहता है. उसे हर वक्त डर रहता है कि कहीं आप उसे कंपनी से निकाल न दें,’ रमा मुसकराई थी.

‘तुम्हें पता ही है, अगर ऐसा न करें तो ये नौजवान लड़के हमारे लिए अपनी जान क्यों लड़ाएंगे?’ उमेशजी हंसने लगे थे.

‘‘राहुल, एक सूचना दूं तुम्हें?’’ एक दिन अचानक रमा राहुल की आंखों में झांकती हुई मुसकराने लगी तो राहुल जैसे निहाल ही हो गया था.

‘‘अगर आप ने ये शब्द मुसकराते हुए न कहे होते तो मेरी जान ही निकल जाती. मैं समझ लेता, साहब ने मुझे कंपनी से निकाल देने का फैसला कर लिया है और मेरी नौकरी खत्म हो गई है.’’

‘‘आप उमेशजी से इतने आतंकित क्यों रहते हैं? वे तो बहुत कुशल मैनेजर हैं. व्यक्ति की कीमत जानते हैं. आदमी की गहरी परख है उन्हें और वे आप को बहुत पसंद करते हैं.’’

‘‘क्यों सुबहसुबह मेरा मजाक बना रही हैं,’’ वह हंसा, ‘‘उमेशजी और मुझे पसंद करें? कहीं कैक्टस में भी हरे पत्ते आते हैं. उस में तो चारों तरफ सिर्फ तीखे कांटे ही होते हैं, चुभने के लिए.’’

‘‘नहीं, ऐसा नहीं है,’’ वह बोली, ‘‘वे तुम्हें बहुत पसंद करते हैं.’’

‘‘उन्हें छोडि़ए, रमाजी, अपने को तो अगर आप भी थोड़ा सा पसंद करें तो जिंदगी में बहुतकुछ जैसे पा जाऊं,’’ उस ने पूछा, ‘‘क्या सूचना थी?’’

‘‘हमारे ऊपर वाला वह छोटा कमरा आप को मिलना तय हो गया है. 500 रुपए किराया होगा, मंजूर…?’’ रमा ने कहा तो राहुल ने अति उत्साह में आ कर उस का हाथ ही पकड़ लिया, ‘‘बहुतबहुत…’’ कहताकहता वह रुक गया.

उसे अपनी गलती का एहसास हुआ तो तुरंत हाथ छोड़ दिया, ‘‘क्षमा करें, रमाजी, मैं सचमुच कमरे को ले कर इतना परेशान था कि आप अंदाजा नहीं लगा सकतीं. कंपनी के काम के बाद मैं अपना सारा समय कमरा खोजने में लगा देता था. आप ने…आप समझ नहीं सकतीं, मेरी कितनी बड़ी मदद की है. इस के लिए किन शब्दों में…’’

‘‘कल से आ जाना,’’ रमा ने झेंपते हुए कहा.

किसीकिसी आदमी की छुअन में इतनी बिजली होती है कि सारा शरीर, शरीर का रोमरोम झनझना उठता है. रगरग में न जाने क्या बहने लगता है कि अपनेआप को समेट पाना असंभव हो जाता है. पति की छुअन में भी पहले रमा को ऐसा ही प्रतीत होता था, परंतु धीरेधीरे सबकुछ बासी पड़ गया था, बल्कि अब तो पति की हर छुअन उसे एक जबरदस्ती, एक अत्याचार प्रतीत होती थी. हर रात उसे लगता था कि वह एक बलात्कार से गुजर रही है. वह जैसे विनोद को पति होने के कारण झेलती थी. उस का मन उस के साथ अब नहीं रहता था. यह क्या हो गया है, वह खुद समझ नहीं पा रही थी.

मां से अपने मन की यह गुत्थी कही थी तो वे हंसने लगीं, ‘पहले बच्चे के बाद ऐसा होने लगता है. कोई खास बात नहीं. औरत बंट जाती है, अपने आदमी में और अपने बच्चे में. शुरू में वह बच्चे से अधिक जुड़ जाती है, इसलिए पति से कटने लगती है. कुछ समय बाद सब ठीक हो जाएगा.’

‘पर यह राहुल…? इस की छुअन…?’ रमा अपने कक्ष में बैठी देर तक झनझनाहट महसूस करती रही.

राहुल ऊपर के कमरे में क्या आया, रमा को लगा, जैसे उस के आसपास पूरा वसंत ही महकने लगा है. वह खुशबूभरे झोंके की तरह हर वक्त उस के बदन से जैसे अनदेखे लिपटता रहता.

वह सोई विनोद के संग होती और उसे लगता रहता, राहुल उस के संग है और न जाने उसे क्या हो जाता कि विनोद पर ही वह अतिरिक्त प्यार उड़ेल बैठती.

नींद से विनोद जाग कर उसे बांहों में भर लेता, ‘‘क्या बात है मेरी जान, आज बहुत प्यार उमड़ रहा है…’’

वह विनोद को कुछ कहने न देती. उसे बेतहाशा चूमती चली जाती, पागलों की तरह, जैसे वह उस का पति न हो, राहुल हो और वह उस में समा जाना चाहती हो.

दाग: भाग 1- माही ने 2 बच्चों के पिता के साथ अफेयर के क्यों किया?

सुबह सुबह मेरा 2 कमरों वाला घर कचरे का ढेर दिखता है. पति को औफिस, बेटे को स्कूल और दोनों बेटियों को कालेज जाने की हड़बड़ी रहती है, इसलिए वे सारे सामान को जैसेतैसे फेंक कर चले जाते हैं. उन के जाने के बाद मैं घर की साफसफाई करती हूं. रात में खाई मूंगफली के छिलकों को उठा कर डस्टबिन में डालने जा ही रही थी कि मेरा मोबाइल बज उठा. सुबहसुबह घर के इतने सारे काम ऊपर से ये मोबाइल कंपनी वाले लेटैस्ट गानों की सुविधाओं के साथ फोन करकर के परेशान कर देते हैं. मैं ने थोड़े गुस्से से फोन पर नजर डाली, तो गुस्सा जले कपूर की तरह उड़ गया. फोन बड़ी ननद का था. मन में थोड़ा डर समा गया कि क्या बात हो गई, जो दीदी ने इतनी सुबह फोन किया? वे ज्यादातर फोन दोपहर में करतीं.

‘‘हां, प्रणाम दीदी, सब ठीक तो है?’’

‘‘नहीं कविता, कुछ ठीक नहीं है.’’

‘‘क्यों, क्या हुआ?’’ मैं घबरा गई कि कोई बुरी खबर न सुनने को मिले, क्योंकि ज्यादातर दिल दहला देने वाली खबरें सुबह ही मालूम पड़ती हैं.

खैर, दीदी बताने लगीं, ‘‘देखो न कविता, माही की तबीयत खराब है. उस की सहेली बता रही थी कि वह रातरात भर जगी रहती है. पूछने पर कहती है कि उसे नींद नहीं आती. बेचैनी होती है.’’

‘‘उसे कब से ऐसा हो रहा है?’’

‘‘2-3 महीनों से,’’ दीदी सुबक पड़ीं.

‘‘अरे दीदी, आप रोती क्यों हैं? मैं हूं न. मैं आज उस से मिल लूंगी,’’ कह मैं ने घड़ी देखी. 9 बज रहे थे, ‘‘अब तो वह कालेज चली गई होगी. आप चिंता न कीजिए. शाम को उस से मिल कर मैं आप को फोन करूंगी. चायनाश्ता किया आप ने?’’

‘‘नहीं…’’

‘‘अभी तक आप भूखी हैं? जाइए, नाश्ता कीजिए. मैं भी सारे काम कर के नहाने जा रही हूं. टैंशन न लीजिए,’’ कह मैं ने फोन बंद कर दिया.

घर के काम करने के साथ माही मेरे दिमाग में घूमने लगी. अच्छीभली लड़की को यह क्या हो गया? हमारे सभी रिश्तेदारों के बच्चों में वह सब से तेजतर्रार है. पढ़नेलिखने, खेलकूद सब में अव्वल. अभी वह इंजीनियरिंग के प्रथम वर्ष में है. हमेशा अपने बेटे और दोनों बेटियों को उस से कुछ सीख लेने की बात कहती हूं, पर वे तीनों बहरे हो जाते हैं. मैं फालतू में उन पर हर महीने 8-10 हजार रुपए खर्च करती हूं.

दोपहर में चावलदाल बना कर सत्तू की पूरियां और चने की सब्जी बनाई ताकि माही भी खा ले. उसे सत्तू की पूरियां बहुत पसंद हैं. होस्टल में ये सब कहां मिलता है. मैं ने फोन कर के उसे अपने आने का प्रोग्राम नहीं बताया. एक तरह से उसे सरप्राइज देना था. घर बंद कर के चाबी बगल वाली आंटी को दे दी. पति और बच्चों के पास फोन कर दिया.

होस्टल शहर से 27-28 किलोमीटर दूर है. वहां जाने में 2 बसें बदलनी पड़ती

हैं. बस के भरने में घंटों लग जाते हैं. यही कारण था कि मैं माही से मिलने जल्दी नहीं जाती थी.

करीब 4 बजे मैं होस्टल पहुंची. लड़कियां ट्यूशन के लिए जा रही थीं.

‘‘नमस्ते मामीजी,’’ माही की सहेली भारती मुसकराई.

‘‘खुश रहो बेटा, माही कहां है?’’

‘‘अपने कमरे में.’’

‘‘अच्छा,’’ कह कर मैं वार्डन रमा के कैबिन में चली गई.

रजिस्टर में साइन कर सीढि़यां चढ़ माही के कमरे में दाखिल हुई. देखा लाइट बंद थी. वह छत पर टकटकी लगाए पलंग पर लेटी थी. मैं दबे पांव पीछे से उस के पास गई और उस की आंखों को अपने हाथों से ढक दिया.

‘‘कौन है?’’ वह हड़बड़ाई.

‘‘पहचानो…’’

‘‘अरे, मामीजी आप…’’ आवाज पहचान कर उस के सूखे अधरों पर मुसकान फैल गई. उस ने लाइट जलाई.

मैं पलंग पर बैठ गई. मेरे हाथों में उस के आंसू लग गए थे, ‘‘रो रही थी क्या?’’

‘‘नहीं तो?’’ उस ने आंखें पोंछ लीं.

मैं ने उसे ध्यान से देखा. सूखे फूल की तरह मुरझा गई थी वह. आंखें लाल थीं. बाल भी बिखरे थे.

‘‘क्या हो गया है तुम्हें? बिलकुल मरियल दिख रही हो. सुबह में दीदी मतलब तुम्हारी मम्मी का फोन आया कि तुम्हारी तबीयत खराब है. तुम मेरे पास चली आती या अपने घर चली जाती. डाक्टर को दिखाया? क्या बोला? दवा ले रही हो?’’ एक ही बार में मैं ने सवालों की झड़ी लगा दी.

‘‘अरे मामी, मैं ठीक हूं. आप परेशान न होइए. रुकिए, आप के लिए चाय लाती हूं,’’ माही अपने हलके भूरे बालों को समेटते हुए पलंग से उतरने लगी.

‘‘मैं चाय पी कर आई हूं. कहीं मत जा. तुम्हारे लिए सत्तू की पूरियां लाई हूं. खा लो,’’ मैं ने उसे लंचबौक्स पकड़ाया. यह सोच कर कि अभी वह खा लेगी. जैसे पहले मेरे सामने ही निकाल कर खाती और मेरी तारीफ करती कि मामीजी, आप कितना अच्छा खाना बनाती हैं. साथ में यह फरमाइश भी करती कि अगली बार गुझिया लाना. मैं भी उस की फरमाइश पूरी करती.

पर यह क्या, बाद में खा लूंगी कह कर उस ने लंचबौक्स बगल के स्टूल पर रख दिया. लंचबौक्स रखते हुए एक किताब नीचे गिर गई. किताब के अंदर रखी दवा फर्श पर बिखर गई. मैं ने उसे झट से उठा लिया, ‘‘यह तो नींद की दवा है. क्या तुम्हें नींद नहीं आती?’’ मैं ने उस की आंखों में झांकते हुए पूछा.

वह नजरें नहीं मिला पाई, ‘‘ऐसी कोई बात नहीं है. आप बैठिए न. मैं चाय ले कर आ रही हूं.’’

‘‘तुम पीओगी?’’

‘‘नहीं.’’

‘‘तो बस, मेरे पास बैठो. मुझे जल्दी निकलना होगा. पढ़ाईलिखाई कैसी चल रही है?’’

‘‘कुछ खास नहीं.’’

पता नहीं क्यों माही मुझ से नजरें मिला कर बातें नहीं कर रही थी. मैं जब इस से पहले मिलने आती थी, तो चहक कर मुझ से मिलती. एक दोस्त की तरह होस्टल और सहेलियों की हर छोटीबड़ी बातें मुझ से शेयर करती. शुरू से ही यह मेरे करीब रही है और मैं भी इसे उतना ही प्यार करती हूं.

26 January Special: परंपराएं- क्या सही थी शशि की सोच

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क्या स्किन केयर में आप भी हाइजीन को करती हैं इग्नोर, तो जान लें ये जरूरी बातें

ब्यूटी के साथ हाइजीन का खयाल रखना भी बहुत जरूरी है. बाजार में कई तरह के प्रोडक्ट्स उपलब्ध हैं, जो त्वचा सुंदर बनाने का भरोसा दिलाते हैं. लेकिन असल में खूबसूरत स्किन के लिए सब से जरूरी है अपने लाइफस्टाइल और हाइजीन में बदलाव. यदि अपनी दिनचर्या में हाइजीन का खयाल रखेंगे तो सुंदरता भी बनी रहेगी.

त्वचा को साफ, स्वच्छ और मुलायम बनाने के लिए बस आवश्यकता है अच्छे स्किन केयर रूटीन की. त्वचा को साफ और मुलायम रखने के लिए रोज इस पर काम करना होगा. कोई बहाना नहीं चलेगा.

कई महिलाएं त्वचा को स्वस्थ रखने वाले स्किन केयर रूटीन के मामले में बहुत आलसी होती हैं. इस के चलते उन की त्वचा को नुकसान पहुंचाता है. एक स्ट्रिक्ट रूटीन के बिना सभी प्रयास बेकार हो सकते हैं.

ये टिप्स आप की त्वचा को स्वस्थ, कोमल और आकर्षक बनाएंगे:

दिन की शुरुआत ड्राई ब्रशिंग के साथ

दिन की शुरुआत में ड्राई ब्रशिंग का प्रयोग करना चाहिए. ड्राई ब्रशिंग मृत कोशिकाओं को हटाने के लिए उपयोग की जाने वाली प्राचीन तकनीक है और इस से शरीर में रक्त संचार सुचारु होता है. रोज ड्राई ब्रशिंग करने से त्वचा चमकने लगती है.

– ऐसा ड्राई ब्रश को चुनें, जो नैचुरल फाइबर से बना हो न कि प्लास्टिक से. नैचुरल फाइबर से बने ब्रश से त्वचा खुरदरी नहीं होती है.

– बाहर से अंदर की तरफ अपने पैरों से शुरू कर ऊपर की तरफ बढ़ते हुए थोड़ोथोड़ा कर आराम से ब्रश को शरीर पर चलाएं. पैर, बौडी और हाथों पर ब्रश चलाएं. चेहरे के लिए छोटे और मुलायम ब्रश का इस्तेमाल करें.

– ड्राई ब्रशिंग शुरू करते समय हमेशा ब्रश और त्वचा सूखी होनी चाहिए. गीली त्वचा पर ब्रश करने से उतना असर नहीं होगा.

चेहरे को मौइस्चराइज करें

चेहरा धोने के बाद ब्रेकआउट और जलन को रोकने के लिए मौइस्चराइजर लगाना न भूलें. चेहरा धोने के बाद रूखा और बेजान हो जाता है और जलन भी होती है खासकर सर्दियों के मौसम में यह समस्या ज्यादा होती है. मार्केट में अलगअलग प्रकार के मौइस्चराइजर उपलब्ध हैं. आप उन का अपनी त्वचा के अनुसार प्रयोग कर सकती हैं.

चेहरे पर नीबू रस या टूथपेस्ट का प्रयोग न करें

हम सभी ने अकसर पिंपल्स और धब्बों के लिए कई अलगअलग प्रकार के घरेलू नुसखों के बारे में सुना है. यदि उन में से किसी भी उपचार में नीबू का रस या टूथपेस्ट अपने चेहरे पर लगाना शामिल है, तो ऐसा बिलकुल न करें, क्योंकि नीबू का रस बेहद ऐसिडिक होता है और रैडनैस और जलन पैदा कर सकता है.

टूथपेस्ट में सफेद करने वाले तत्त्व होते हैं, जो नीबू के रस की तरह त्वचा को नुकसान पहुंचा सकते हैं. इस के स्थान पर मुंहासों से छुटकारा पाने के लिए ऐंटीस्पौट ट्रीटमैंट या ऐसैंशियल औयल का विकल्प चुन सकती हैं.

मेकअप ब्रश को हर हफ्ते धोएं

अधिकांश महिलाएं ऐसा नहीं करती हैं, लेकिन जब सुंदरता और स्वच्छता की बात आती है तो यह गलत कदम हो सकता है. न केवल आप के मेकअप ब्रश के बिल्डअप आप की त्वचा को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि ब्रश पर बचा मेकअप भी आप की त्वचा पर आगे होने वाले मेकअप को खराब कर सकता है.

यूज्ड मेकअप ब्रश को धोने के लिए बेबी वाश या बेबी शैंपू और गरम पानी का प्रयोग करें. इस से आप की त्वचा स्वच्छ बनी रहेगी.

ऐक्सफोलिएटिंग क्लींजर का प्रयोग करें

ऐक्सफोलिएटिंग क्लींजर का प्रयोग करें. आप इसे आसानी से किसी भी किराने या दवा की दुकान से खरीद सकती हैं. ऐसे क्लींजर में होने वाले छोटेछोटे ग्रैन्यूल्स आप की त्वचा की सफाई करते हैं. सभी प्रकार की स्किन के लिए ऐक्सफौलिएटिंग क्लींजर उत्तम होते हैं.

सनस्क्रीन लगाएं

सनस्क्रीन केवल बीच पर छुट्टियां मनाने के लिए ही अच्छा नहीं है, बल्कि इस का हर दिन प्रयोग किया जाना चाहिए. भले आप घर के अंदर ही क्यों न हों. सनस्क्रीन त्वचा को सूर्य की किरणों से बचाने और झर्रियों की शुरुआत से लड़ने में मदद कर सकता है. अधिकांश मेकअप उत्पाद एसपीएफ के साथ आते हैं.

आप मौइस्चराजर खरीदते हुए यह जरूर ध्यान रखें कि बाहर पैक पर एसपीएफ फैक्टर लिखा हो जिस से न केवल आप अपने फेस को कवर कर सकती हैं, बल्कि इस के साथ अपने पूरे शरीर को भी धूल से बचा सकती हैं.

मेकअप ब्रश या टूथब्रश टौयलेट में न ले जाएं

आप जो नहीं जानती हैं वह यह है कि जब आप शौचालय को फ्लश करती हैं तो शौचालय से पानी के पार्टिकल्स 16 फुट ऊपर तक पहुंच सकते हैं. इस का मतलब यह है कि सिंक या शौचालय द्वारा आप के सभी ब्रशों में ये पार्टिकल्स घर कर सकते हैं. इस से ब्रश कीटाणुओं के रहने के लिए एकदम सही जगह भी बन जाएगा और आप की हैल्थ को नुकसान होने का सहज जरीया भी बनेगा. इस अस्वाभाविक जोखिम से बचने के लिए अपने ब्रश को बंद कैबिनेट में या जहां तक संभव हो शौचालय से दूर रखें. सब से बेहतर यह है कि टूथब्रश कैप का प्रयोग करें.

खूब पानी पीएं

पानी का प्रयोग अधिक करना चाहिए. पानी त्वचा को हाइड्रेटेड रखते हैं. अपनी त्वचा को हाइड्रेटेड रखना ही आप की त्वचा की बनावट में सुधार करेगा और इसे अच्छे स्वास्थ्य के लिए मौइस्चराइज रखेगा. इस के अतिरिक्त मीठे पेय पीने से बचें. ये न केवल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं, बल्कि त्वचा पर मुंहासे और सूजन भी पैदा कर सकते हैं.

टैनिंग से बचें

आप की त्वचा को सूर्य के ओवरऐक्सपोजर से बहुत नुकसान हो सकता है. सनबर्न से बचने के लिए आप ज्यादा से ज्यादा प्राकृतिक सनस्क्रीन का उपयोग करने का प्रयास करें जो त्वचा की प्राकृतिक चमक को बढ़ाते हैं और ज्यादा टैनिंग से भी बचाते हैं.

पिंपल्स को पौप न करें

यदि आप के चेहरे पर पिंपल्स आ रहे हैं तो उन्हें पौप करने से बचें. चेहरे पर आ रहे पिंपल्स को पौप करने या उन्हें बारबार छूने से चेहरे पर निशान पड़ जाएंगे और जलन व लामिला पैदा होगी जो लंबे समय तक बनी रह सकती है. इसलिए यह ध्यान रखें कि अगली बार जब आप चेहरे पर पिंपल्स महसूस करें तो एक फेसमास्क का प्रयोग करें या फिर एक ऐंटीस्पौट ट्रीटमैंट का प्रयोग करें.

-पचौली वैलनैस क्लीनिक की कौस्मैटोलौजिस्ट प्रीति सेठ से बातचीत पर आधारित

मेरा होने वाला पति विवाह से पहले मेरा मैडिकल चैकअप कराना चाहता है?

सवाल-

मैं 20 वर्षीय युवती हूं. सगाई हो चुकी है. जल्द ही शादी होने वाली है. मैं कई बार शारीरिक संबंध बना चुकी हूं. अब समस्या यह है कि मेरा होने वाला पति विवाह से पहले मेरा मैडिकल चैकअप कराना चाहता है. यदि ऐसा हुआ तो मेरे अवैध संबंधों की बाबत सब जान जाएंगे. जब से उस ने यह बात कही है मेरी रातों की नींद उड़ गई है. बताएं, क्या करूं?

जवाब-

आप को ऐसे शक्की व्यक्ति से विवाह हरगिज नहीं करना चाहिए, जो शादी से पहले ही इस तरह की शर्तें रख रहा है वह बाद में न जाने क्या करे. ऐसे दकियानूसी खयाल रखने वाला मनोरोगी लगता है. अत: किसी प्रकार का संकोच न करें और साफसाफ मना कर दें.

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श्वेता और अमन की कुंडली व गुण मिला कर विवाह कराया गया. ज्योतिषी ने दावा करते हुए कहा था, ‘‘श्वेता और अमन जीवनभर खुश रहेंगे.’’

मगर विडंबना देखिए कि शादी के दूसरे दिन ही श्वेता आंखों में आंसू लिए घर लौट आई. उसे शादी में आए किसी रिश्तेदार से पता चला कि अमन को एड्स है. विवाह से पहले अमन ने उस से इतनी बड़ी बात छिपा ली थी. यदि ज्योतिष के पाखंड में न पड़ कर दोनों की मैडिकल जांच की गई होती तो श्वेता को यह दुख न भोगना पड़ता.

आज के विज्ञान के युग में भी ज्यादातर लोगों को ऐसा लगता है कि मैडिकल टैस्ट कराना बेकार है. मैडिकल टैस्ट कराने में उन के अहंकार को चोट पहुंचती है. उन्हें लगता है कि जब उन्हें बीमारी है ही नहीं तो बेकार में मैडिकल टैस्ट क्यों कराया जाए. कुछ लोग सबकुछ भाग्य के भरोसे छोड़ देते हैं. कुछ सोचते हैं कि शादी के बाद कोई बीमारी हो जाएगी तब भी तो निभाना पड़ेगा. कुछ को ऐसा भी लगता है कि मैडिकल टैस्ट पर क्यों बेकार में इतने रुपए खर्च किए जाएं. मगर यदि डाक्टर की सलाह ले कर छोटी सी सावधानी बरतते हुए विवाह से पहले कुछ टैस्ट करा लिए जाएं तो दोनों परिवार बहुत सी परेशानियों से बच सकते हैं.

अब समय बदल रहा है. आजकल बड़ी उम्र में विवाह होते हैं. मैडिकल साइंस भी दिनप्रतिदिन तरक्की कर रही है. आज का युवावर्ग बहुत समझदार हो गया है. पहले की तरह मात्र जन्मपत्री मिला कर शादी कर लेना युवाओं को भी अब मान्य नहीं. सफल एवं सुरक्षित वैवाहिक जीवन के लिए यह जरूरी है कि विवाह से पहले लड़कालड़की अपनी इच्छा से अपनी मैडिकल जांच जरूर कराएं ताकि औलाद और खुद को रोगों से बचाया जा सके. इस से वैवाहिक जीवन में प्रेम और स्थिरता बनी रहेगी.

Winter Special: सर्दियों में बढ़ाना चाहते हैं खाने का स्वाद, तो बनाएं गोभी मसाला

पति का लंच, बच्चे का टिफिन और संडे का ब्रंच तब तक पूरे नहीं होते जब तक फूलगोभी का जायका नहीं मिलता. मां भी तो यही करती थी, दोपहर में जब स्कूल का टिफिन खोलते थे और जायकेदार मसाला गोभी पूरी या पराठों के साथ दिखती थी तो मुंह में पानी आ जाता था.

शुक्र है कि मां के हाथों की बनी गोभी मसाला का जायका फिर याद दिलाने के लिए सनराइज़ का शाही गरम मसाला है. इस के इस्तेमाल से फूलगोभी का स्वाद भी बरकरार रहता है डिश का जायका भी बढ़ जाता है.

गोभी मसाला

सामग्री

250 ग्राम गोभी के टुकड़े,

1 बड़ा प्याज,

1 टमाटर कटा,

1/2 छोटा चम्मच

अदरक-लहसुन का पेस्ट,

1 चम्मच

सनराइज़ शाही गरम मसाला,

जरूरतानुसार तेल,

नमक स्वादानुसार,

धनियापत्ती गार्निश के लिए.

विधि

कड़ाही में तेल गरम कर प्याज भूनें और फिर अदरक-लहसुन का पेस्ट डालकर चलाते हुए भनें. गोभी के टुकड़े मिलाकर  2 मिनट तक भूनें. अब सनराइज़  शाही गरम मसाला  और थोड़ा पानी मिलाकर थोड़ी देर ढक कर पकाएं.  अब टमाटर और नमक मिलाकर धीमी आंच पर चलाते हुए अच्छी तरह भूनें. धनियापत्ती से गार्निश कर पराठों के साथ परोसें.

Winter Special: अदरक की मदद से करें कमर और जांघों की फैट कम

अदरक में कई गुण होते हैं. खाने का स्वाद बढ़ाने से लिए व्यक्ति को स्वस्थ रखने के लिए अदरक काफी फायदेमंद और लाभकारी है. दाल का स्वाद बढ़ाना हो या ठंढ में चाय में गर्मी लानी हो, अदरक काफी कारगर होता है. इसके अलावा खांसी, कफ में ये काफी फायदेमंद है.

इस खबर में हम आपको बताएंगे कि अदरक से आप वजन कैसे कम कर सकेंगी. इसके अलावा आप इसका प्रयोग हिप्स, वेस्ट और थाइज पर जमा फैट बर्न करने में कर सकती हैं.

कैसे बनाएं ये रेसिपी

1.5 लीटर पानी में आप 3 से 4 टुकड़े अदरक के डाल लें. इसके बाद इसे हल्के आंच पर उबाल लें. करीब 15 मीनट तक पानी उबालने के बाद आप उसे हल्का ठंडा होने दें. अब इस पानी का सेवन कर आप अपना वजन कम कर सकेंगी.

गुणकारी है अदरक

आपको बता दें कि अदरक में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं. इसकी वजह से जोड़ों के दर्द और सूजन से राहत मिलती है. यह गठिया और पुराने औस्टियोआर्थराइटिस जैसे रोगों के लिए अत्यधिक प्रभावी है.

कोलेस्ट्रौल को घटाने में है लाभकारी

अदरक में ऐसे कई गुण होते हैं जिस वजह से यह कोलेस्ट्रैल लेवल को भी कम करता है. आपको बता दें कि कोलेस्ट्रौल बढ़ने से कैंसर और हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ जाता है. अदरक का पानी पीने से सीरम और लीवर में कोलेस्ट्रॉल का लेवल कम होता है. इसके अलावा इससे ब्लड प्रेशर भी समान्य रहता है.

40 के बाद कुछ इस तरह रखें अपनी आंखों का ख्याल

“तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रखा क्या हैं ” ‘इस तरह के ना जाने कितने गाने आपने जवानी में  अपनी आँखों के लिए सुने होंगे या किसी के लिए गाये होंगे. लेकिन ढलती उम्र के साथ आपकी आँखों कि खूबसूरती भी मानो खोने लगती है.हमारी ऑंखें चेहरे की  खूबसूरती में चार चाँद लगा देती हैं. लेकिन बढ़ती उम्र के साथ चेहरे की रंगत तो खोती  ही है साथ में आँखों पर काले घेरे, झाई, आँखों का अंदर की  तरफ जाना सभी के लिए आम बात है लेकिन कुछ लोग समय रहते अपने चेहरे व आँखों का ख्याल कर लेते है और कुछ लापरवाही करते हैं. आँखों के पास की  स्किन हमारे चेहरे की स्किन से काफ़ी नाजुक होती है जिस कारण बढ़ती उम्र, तनाव, अच्छी नींद ना लेना,डाइट सही ना लेना, विटामिन सी  की कमी होने का असर बहुत जल्दी हमारी आँखों पर दिखने लगता है. इस लेख में हम आपको कुछ ऐसे टिप्स बताने जा रहें हैं जिस के जरिए आप अपनी आँखों की खूबसूरती को लम्बे समय तक बरकरार रख सकते हैं और यह परेशानी कोई  जेंडर देख कर नहीं होती इसलिए आप महिला हैं  या पुरुष दोनों में से कोई भी इन टिप्स को फॉलो  कर सकते हैं.

आहार पर दे ध्यान

40 की उम्र में अपनी आंखों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है सही डाइट लेना. गाजर,आंवला, मछली, अड़े जैसे पर्दार्थ के साथ ओमेगा -3 फैटी एसिड, विटामिन सी और विटामिन ई से भरपूर पर्दार्थ  अपनी डाइट में शामिल करें. इनसे  आँखों की रौशनी भी बढ़ती है और साथ ही चेहरे और आँखों को झाई से भी बचाते हैं.

सही क्रीम व मॉइश्चराइजर का प्रयोग

आंखो के आस पास झाई या काले घेरे होने लगे हैं तो विटामिन सी  युक्त क्रीम का प्रयोग करें।विटामिन सी स्किन को ऑक्सीडेटिव डैमेज होने से बचाता हैं व स्किन को स्ट्रॉन्ग भी  बनाता है. दिन में दो से तीन बार स्किन को मॉइस्चरइज़ अवश्य करें इससे स्किन हाइड्रेट रहती है. बादाम के  तेल या नारियल के तेल से आँखों के पास अच्छे से मसाज करें क्योंकि इस में विटामिन ई होता हैं जिससे  आँखों की एक्सरसाइज भी हो जाती हैं और उन्हें काले घेरे, अंदर की तरफ जाने से बचाने में मदद करता है.

एलोवेरा हैं गुणकारी

एलोवेरा एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुणों से भरपूर होता है आंखों के पास से स्किन को साफ कर ले और एलोवेरा पल्प  से अच्छे से मसाज कर के 15 मिनट बाद धो दे इससे स्किन भी रिपेयर होंगी. साथ ही आँखों में जलन व खुजली से भी राहत मिलेगी.

 स्क्रीन से दूरी बनाए

आज के समय में हम फ़ोन, कंप्यूटर का अत्यधिक उपयोग करते हैं जिससे स्क्रीन टाइम बहुत ज्यादा बढ़ने लगा है और आँखों पर अधिक दबाव बना रहता है इसलिए फोन का प्रयोग कम करें और यदि जरूरी भी हैं  तो आँखों को हर 30 मिनट बाद आराम दे व पानी से धोए.

चेक अप अवश्य कराएं

40 की उम्र के बाद परेशानी ना होने पर भी ग्लूकोमा की जांच कराएं और यदि किसी के परिवार में  मधुमेह, उच्च रक्तचाप के रोगी हैं या खुद पीड़ित हैं तो हर 6 महीने में आँखों  की जाँच अवश्य कराएं.

जानिए कितने प्रकार की होती है बिरयानी और उनमें क्या है अंतर

बिरयानी जिसे मुख्यतया चावल और कुछ सब्जियों के द्वारा बनाया जाता है परन्तु चूंकि इसे बनाने का तरीका बहुत ख़ास होता है जिसके कारण यह न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी अपने नाम से ही जानी जाती है. भारत में सिन्धी, थालास्सेरी, कोलकाता, कोल्हापुरी, श्रीलंकन जैसी अनेकों बिरयानी पायी जातीं हैं परन्तु हैदराबादी, मुरादाबादी और नबाबों के शहर लखनऊ की बिरयानी न केवल भारत में बल्कि पूरे विश्व में अपने स्वाद और फ्लेवर के लिए बहुत प्रसिद्ध है. बिरयानी वेज और नानवेज दोनों प्रकार की होती है. नानवेज बिरयानी को मीट, पके चावल और मसालों के साथ पकाया जाता है वहीँ नानवेज बिरयानी को सब्जियों, पके चावल, और मसालों की परत लगाकर बनाया जाता है. दरअसल बिरयानी बनाने में उसके मसालों का ही ख़ास महत्व होता है और इसे बनाने में प्रयोग किये जाने वाले मसाले ही उसकी अपनी पहचान होती हैं तो आइये आज हम जानते हैं तरह तरह की बिरयानी के अंतर और उसमें प्रयोग किये जाने वाले मसालों के बारे में

  1. हैदराबादी बिरयानी

हैदराबादी बिरयानी अपने तीखेपन के लिए जानी जाती है इसे बनाने के लिए तीखी लाल मिर्च, स्टार, गरम मसाला और धनिया पाउडर का प्रयोग किया जाता है. इसे दम लगाकर पकाया जाता है जिससे इसमें मसालों का फ्लेवर निखर कर आता है इसीलिए इसका स्वाद अन्य बिरयानी से एकदम अलग होता है. इसे धनिया, पोदीना की पत्तियों से गार्निश करके मिर्च के सालन और रायते के साथ सर्व किया जाता है.

2. मुरादाबादी बिरयानी

उत्तर भारत के मुरादाबाद शहर की फेमस मुरादाबादी बिरयानी को दालचीनी, प्याज और लहसुन की अच्छी खासी मात्रा के साथ बनाया जाता है. इसे भाप की जगह सीधा गैस पर पकाया जाता है जिससे इसका स्वाद काफी अलग होता है. हैदराबादी बिरयानी की अपेक्षा यह काफी कम तीखी होती है.

3. लखनऊ की बिरयानी

नबाबों के शहर लखनऊ की बिरयानी को अवधी बिरयानी भी कहा जाता है. इसे खुशबू और स्वाद के लिए जाना जाता है इसे बनाने में केसर, जायफल और इलायची का काफी मात्रा में प्रयोग किया जाता है. इसे दही के साथ एकदम धीमी आंच पर पकाया जाता है. इसे दही के साथ सर्व किया जाता है.

4. कलकत्ता की बिरयानी

इसे भी लेयरिंग करके मसालों, मीट, सब्जी के साथ बनाया जाता है परन्तु कलकत्ता की बिरयानी में आलू का प्रयोग अवश्य किया जाता है जो इसे अन्य बिरयानी से अकदम अलग करता है. इसे पीले चावल से बनाया जाता है और कम मसालों का प्रयोग किया जाता है. जायफल और केवडा वाटर इसकी सुगंध और स्वाद को बढ़ाता है.

5. अम्बुर की बिरयानी

तमिलनाडु की अम्बुर बिरयानी को सीरागा साम्बा नामक विशेष प्रकार के चावलों के द्वारा पकाया जाता है जिनका स्वाद सामान्य चावलों से काफी अलग होता है. इसे खट्टी बैगन की करी जिसे तमिल में एन्नाई कथरिका कहा जाता है के साथ सर्व किया जाता है.

क्या है लेयरिंग और दम

सामान्य चावलों को जहां उबालकर बनाया जाता है वहीँ बिरयानी बनाते समय चावलों को पानी में उबालकर आधा पकाया जाता है. सब्जियों या मीट को दही और मसालों के साथ मेरिनेट करके हाफ कुक किया जाता है और फिर जिस बर्तन या हांड़ी में आप बिरयानी पका रहे हैं उसमें चावल और सब्जियों की क्रमशः परत 3 से 4 परतें लगाई जातीं हैं. मूलतः दम को हांड़ी या भगौने में लगाया जाता है ताकि उसकी भाप बाहर न निकले. दम लगाने के लिए गीले आटे को बर्तन के ढक्कन के चारों तरफ लगाकर बिरयानी को एकदम धीमी आंच पर पकाया जाता है ताकि मसालों के फ्लेवर अच्छी तरह चावलों में आ जायें.

बिरयानी बनाते समय रखें इन बातों का ध्यान

  • बिरयानी बनाने के लिए बाजार में विशेष रूप से चावल आता है उससे ही बिरयानी बनाएं क्योंकि सामान्य चावल के मुकाबले उसका दाना काफी लम्बा होता है जो कि प्रत्येक बिरयानी की खासियत होती है. सामान्य चावल से बनाने पर बिरयानी का स्वाद और टेक्सचर दोनों ही नहीं आ पाते.
  • बिरयानी को अधिक स्वादिष्ट बनाने के लिए प्याज को लम्बाई में काटकर नमक के पानी में डालें और फिर उन्हें हाथ से निचोड़कर गरम तेल में सुनहरा होने तक तलकर बटर पेपर पर निकाल लें और बिरयानी के ऊपर डालकर सर्व करें.
  • बिरयानी का वास्तविक स्वाद प्राप्त करने के लिए रेडीमेड बिरयानी मसाला का प्रयोग करना उत्तम रहता है.
  • बिरयानी तेल या रिफाइंड के स्थान पर घी और मक्खन से बनाने पर अधिक स्वाद आता है.
  • बिरयानी को बथुआ, बूंदी या मिक्स वेज रायते और हरे धनिया व पोदीने की चटनी के साथ सर्व करें.
  • यदि आप घर पर हांड़ी बिरयानी बना रहे हैं तो हांड़ी को गैस पर सीधे न रखकर कोई स्टैंड रखकर उसके ऊपर हांड़ी को रखें अन्यथा बिरयानी के तेज आंच पर तले में जल जाने की सम्भावना रहती है.
  • बिरयानी में सुगंध के लिए केवडा, रोज एसेंस का प्रयोग सावधानी से करें इसके लिए आप बिरयानी की मात्र के अनुसार कुछ बूंदों को पानी में मिलाकर बिरयानी में डालें.
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