मेरी पीठ में तेज दर्द होता है कृपया मुझे इस का कारण और समाधान बताएं?

सवाल

मेरी उम्र 60 साल है. पिछले महीने स्ट्रोक के कारण मैं जमीन पर सीने के बल गिर पड़ा, जिस के बाद मेरे सीने और रीढ़ में असहनीय दर्द उठा था. हालांकि एक अच्छे अस्पताल में इलाज कराया गया, लेकिन इलाज के बाद भी मेरी पीठ के निचले हिस्से में तेज दर्द हो रहा है, जिस के कारण न तो मैं बैठ कर खापी रहा हूं और न ही करवट बदल पा रहा हूं. कृपया मुझे इस का कारण और समाधान बताएं?

जवाब

आप के इस दर्द का कारण आर्थ्राइटिस या पुराने इलाज की कोई गलती हो सकती है. आप ने जिस अस्पताल में इलाज कराया है उन्हें इस समस्या की जानकारी दें. अस्पताल में आप की पीठ की एमआरआई की जाएगी. उस से दर्द का कारण पता चल जाएगा. कारण के अनुसार आप का उचित इलाज किया जाएगा. चूंकि आप को स्ट्रोक की समस्या थी और उम्र भी ज्यादा है, इसलिए किसी भी प्रकार के दर्द को हलके में न लें. समस्या हलकी होने पर सिर्फ मैडिकेशन से काम बन जाएगा. अनदेखा करने पर यह दर्द वक्त के साथ गंभीर हो सकता है. इसलिए बिना देर किए इस की जांच कराएं.

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मेरी उम्र 70 साल है. मेरे जोड़ों में अकसर दर्द बना रहता है. इलाज चल रहा है, लेकिन कोई खास फायदा नहीं मिल रहा है. परिवार वालों का कहना है कि इस उम्र में तो दर्द होना आम बात है, लेकिन मेरे लिए यह दर्द बरदाश्त करना मुश्किल हो रहा है. क्या इस से छुटकारा पाने का कोई और तरीका है?

जवाब

इस उम्र में शरीर कई बीमारियों की चपेट में आने लगता है. इस उम्र में दर्द की शिकायत सभी को होने लगती है लेकिन इस का मतलब यह नहीं है कि इस से छुटकारा नहीं पाया जा सकता है. आप ने बताया कि आप का इलाज चल रहा है. हर इलाज की एक प्रक्रिया होती है, जिस का असर होने में समय लगता है. हालांकि आज दर्द से नजात पाने के कई नौन इनवेसिव विकल्प मौजूद हैं, जैसेकि रेडियोफ्रीक्वैंसी ट्रीटमैंट, जौइंट रिप्लेसमैंट, रीजैनरेटिव मैडिसिन आदि. अपने डाक्टर से सलाह कर जरूरत के अनुसार उचित विकल्प का चुनाव कर सकती हैं. इस के साथ ही अपनी जीवनशैली और आहार में सुधार करें. अच्छा खाना खाएं, व्यायाम करें, हफ्ते में 2 बार जोड़ों की मालिश कराएं, शराब और धूम्रपान से दूर रहें, नियमित रूप से जोड़ों की जांच कराएं.

पाठक अपनी समस्याएं इस पते पर भेजें : गृहशोभा, ई-8, रानी झांसी मार्ग, नई दिल्ली-110055.

स्रूस्, व्हाट्सऐप मैसेज या व्हाट्सऐप औडियो से अपनी समस्या 9650966493 पर भेजें.

थप्पड़ है स्त्री के वजूद का अपमान

मेरठ के कंकरखेड़ा क्षेत्र में इस 26 दिसम्बर को बीटेक की एक छात्रा को सहपाठी लड़के द्वारा थप्पड़ मारने का मामला सामने आया. दरअसल छात्रा ने साथ में पढ़ने वाले इस छात्र की दोस्ती का प्रस्ताव ठुकरा दिया था. जिस के बाद उस छात्र ने कक्षा में अन्य छात्रों के सामने ही बीटेक की सीनियर छात्रा को कई थप्पड़ जड़े. वह इतने पर ही शांत नहीं हुआ बल्कि गुस्से में कुर्सी उठाकर लड़की को मारने की कोशिश की. लड़की ने भाग कर अपनी जान बचाई. बाद में लड़की ने यह घटना घर पर परिजनों को बताई और थाने में रिपोर्ट लिखवाने पहुंची. छात्रा ने आरोप लगाया कि आरोपी कई दिन से उस पर दोस्ती करने का दबाव बना रहा था. दोस्ती स्वीकार न किए जाने पर वह हिंसा पर उतर आया.

इस बार के बिग बॉस में  ईशा मालवीय और अभिषेक कुमार ऐसे कंटेस्टेंट हैं जो अपने पास्ट रिलेशन को ले कर चर्चा में रहते हैं. अभिषेक ईशा के एक्स बॉयफ्रेंड हैं. एक साल पहले उन का रिश्ता ख़त्म हो चुका है. उन का रिश्ता टूटने की वजह भी कहीं न कहीं अभिषेक का थप्पड़ और उस की तरफ अग्रेसिव व्यवहार ही था. ईशा ने अंकिता और खानजादी से बात करते वक्त बताया था कि उस ने एक बार अभिषेक को अपने दोस्तों से मिलवाया. ईशा के ज्यादा दोस्त होने की वजह से अभिषेक को गुस्सा आ गया था और उस ने ईशा को सबके सामने थप्पड़ मार दिया था. थप्पड़ की वजह से ईशा के आंख के नीचे  निशान पड़ गए थे. इसी के बाद उन का रिश्ता टूटता चला गया.

कुछ समय पहले डायरेक्टर अनुभव सिन्हा की फिल्म ‘थप्पड़’ कुछ ऐसे ही विषय को ले कर आई थी. इस में बात शुरू होती है सिर्फ एक थप्पड़ से लेकिन ये पूरी फिल्म महज थप्पड़ के बारे में नहीं थी बल्कि उस के इर्द-गिर्द तैयार हुए पूरे ताने बाने और हर उस सवाल को कुरेद के निकालने की कोशिश करती दिखी जिसने इस ‘सिर्फ एक थप्पड़’ को पुरुषों के हक का दर्जा दे दिया.

इस में अमृता की भूमिका में तापसी पन्नू अपने पति विक्रम के साथ एक परफेक्ट शादीशुदा जिंदगी बिताती दिखती है. अमृता सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक बस अपने पति और परिवार के इर्द गिर्द घिरी जिंदगी में बिजी है और इस ‘परफेक्ट’ सी जिंदगी में बहुत खुश है. लेकिन इसी बीच एक दिन उन के घर हुई पार्टी में विक्रम अमृता को एक जोरदार थप्पड़ मार देता है और सब कुछ बदल जाता है. किसी ने सोचा न था कि एक थप्पड़ रिश्ते की नींव हिला देगी. लेकिन अमृता ‘सिर्फ एक थप्पड़’ के लिए तैयार नहीं थी. एक औरत की जंग शुरू होती है एक ऐसे पति के साथ जिसका कहना है कि मियां बीवी में ये सब तो हो जाता है. उस के आसपास के लोगों के लिए ये बात पचा पाना बहुत मुश्किल था कि सिर्फ एक थप्पड़ की वजह से कोई स्त्री अपने ‘सुखी संसार’ को छोड़ने का फैसला कैसे ले सकती है जबकि पुरुष को तो समाज ने स्त्री को मारने पीटने का हक़ दिया ही हुआ है.

सवाल स्त्री के मान का

सच यही है कि एक थप्पड़ स्त्री के मान सम्मान और अस्तित्व पर सवाल खड़ा करता है. एक थप्पड़ यह दर्शाता है कि आज भी पुरुषों ने औरत को अपनी प्रॉपर्टी समझ रखी है. जबरन उस पर अपना हक़ जमाना चाहते हैं. अगर स्त्री ने हक़ नहीं दिया तो थप्पड़ की गूँज में उसे अहसास दिलाना चाहते हैं कि उस की औकात क्या है. समाज में उसका दर्जा क्या है.

 महिलाओं के खिलाफ हिंसा

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक महिलाओं से हिंसा पूरी दुनिया का भयंकर मर्ज़ है.  दुनिया की 70 फीसदी महिलाओं ने अपने करीबी साथियों के हाथों हिंसक बर्ताव झेला है. फिर चाहे वो शारीरिक हो या यौन हिंसा. दुनियाभर में हर रोज़ 137 महिलाएं अपने क़रीबी साथी या परिवार के सदस्य के हाथों मारी जाती हैं.

हमारे समाज में अक्सर लड़कियां और लड़के दोनों ही पुराने रिवाजों से बंधे हुए होते हैं. लड़कियों को ये सिखाया जाता है कि घर के काम करना, पति की सेवा करना और उस की हर बात मानना उन का कर्तव्य है. उन्हें सिखाया जाता है कि पुरुष महिलाओं का मौखिक , शारीरिक या यौन शोषण करने के लिए स्वतंत्र हैं. इस का उन्हें कोई नतीजा भी नहीं भुगतना होगा.

बचपन से लड़कियों का 40 फीसदी समय ऐसे कामों में जाता है जिसके पैसे भी नहीं मिलते. इस का ये नतीजा होता है कि उन्हें खेलने, आराम करने या पढ़ने का समय लड़कों के मुक़ाबले कम ही मिल पाता है.

 प्यू रिसर्च सेंटर की स्टडी

हाल ही में अमेरिकी थिंक टैंक प्यू रिसर्च सेंटर ने एक दिलचस्प स्टडी की थी. इस में भारत में महिलाओं के बारे में पुरुषों की सोच का अध्ययन किया गया. स्टडी में पाया गया कि ज्यादातर भारतीय इस बात से काफी हद तक सहमत है कि पत्नी को हमेशा पति का कहना मानना चाहिए.

ज्यादातर भारतीय इस बात से पूरी तरह या काफी हद तक सहमत हैं कि पत्नी को हमेशा ही अपने पति का कहना मानना चाहिए. एक अमेरिकी थिंक टैंक के एक हालिया अध्ययन में यह कहा गया है. प्यू रिसर्च सेंटर की यह नई रिपोर्ट हाल ही में जारी की गई. रिपोर्ट 29,999 भारतीय वयस्कों के बीच 2019 के अंत से लेकर 2020 की शुरुआत तक किए गए अध्ययन पर आधारित है.

इस के अनुसार करीब 80 प्रतिशत इस विचार से सहमत हैं कि जब कुछ ही नौकरियां है तब पुरुषों को महिलाओं की तुलना में नौकरी करने का अधिक अधिकार है. रिपोर्ट में कहा गया है कि करीब 10 में नौ भारतीय (87 प्रतिशत) पूरी तरह या काफी हद तक इस बात से सहमत हैं कि पत्नी को हमेशा ही अपने पति का कहना मानना चाहिए. यही नहीं  इस रिपोर्ट के अनुसार ज्यादातर भारतीय महिलाओं ने इस विचार से सहमति जताई कि हर परिस्थिति में पत्नी को पति का कहना मानना चाहिए.

 महिलाओं पर केंद्रित होती हैं ज्यादातर गालियां

नारी शक्ति की बात तो होती है लेकिन अभी भी महिलाएं दोयम दर्जे पर हैं. पढ़ी लिखी महिलाएं भी प्रताड़ित हो रही हैं. अगर आपको किसी को अपमानित करना है तो आप उसके घर की महिला को गाली दे देते हैं. उसका चरम अपमान हो जाता है. और वो मर्दों के अहंकार को भी संतुष्ठ करता है. किसी पुरुष से बदला लेना होगा तो बोलेंगे स्त्री को उठा लेंगे, महिला अपमानित करने का माध्यम बन जाती है. गांव में तो बहुत होता था पहले अमूमन ये देखा गया था कि ये गालियां समाज के निचले पायदान पर रहने वाले लोग ही देते थे लेकिन अब आम पढ़े लिखे लोग भी देने लगे हैं.

जब भी कोई बहस झगड़े में तब्दील होने लगती है तो गालियों की बौछार भी शुरू हो जाती है. ये बहस या झगड़ा दो मर्दों के बीच भी हो रहा हो तब भी गालियां महिलाओं पर आधारित होती हैं. कुल मिला कर गालियों के केन्द्र में महिलाएं होती हैं. दरअसल समय के साथ स्त्री पुरुषों की संपत्ति होती चली गई और उस संपत्ति को गाली दी जाने लगी. ये गाली दे कर मर्द अपने अहंकार की तुष्टि करते हैं और दूसरे को नीचा दिखाते हैं. महिलाएं परिवार की इज़्ज़त के प्रतीक के तौर पर देखी जाती हैं. इज़्ज़त को बचाना है तो उसे देहड़ी के अंदर रखिए. महिलाएं समाज में कमज़ोर मानी जाती हैं. आप किसी को नीचा दिखाना चाहते हैं, तंग करना चाहते हैं तो उन के घर की महिलाओं- मां, बहन या बेटी को गालियां देना शुरू कर दीजिए.

गाली सिर्फ़ गाली देना ही नहीं है वो मानसिकता का प्रतीक भी है जो विभत्स गाली देते हैं और उसे व्यावहारिकता में लाते हैं इसलिए निर्भया जैसे मामले दिखाई देते हैं.

 धर्म है इस सोच का जिम्मेदार

जितने भी धर्म हैं, हिंदू, इस्लाम, कैथोलिक ईसाई, जैन, बौद्ध, सूफी, यहूदी, सिक्ख आदि सभी के संस्थापक पुरुष हैं स्त्री नहीं. न ही स्त्री किसी धर्म की संचालिका है. न वह पूजा-पाठ, कथा, हवन करानेवाली पंडित है, न मौलवी है, न पादरी है. वह केवल पुरुष की आज्ञा का पालन करने के लिए इस संसार में जन्मी है. धर्म का मूल आधार ही पुरुष सत्ता है. स्त्री का दोयम दर्जा सिर्फ हिंदू धर्म में ही नहीं, हर धर्मग्रंथ में वह चाहे कुरान हो, बाइबल हो या कोई और धर्मग्रंथ हो स्त्रियों को हमेशा पुरुष से कमतर माना गया. सिमोन द बोउवार ने कहा था- ‘जिस धर्म का अन्वेषण पुरुष ने किया वह आधिपत्य की उसकी इच्छा का ही अनुचिंतन है.’

धर्म की आड़ में कहानियों के माध्यम से स्त्री जीवन को दासी और अनुगामिनी के रोल मॉडल दिखा कर उसी सांचे में ढालने का प्रयास किया जाता है. सीता, सावित्री, माधवी, शकुंतला, दमयंती, द्रौपदी, राधा, उर्मिला जैसी कई नायिकाओं के ‘रोल मॉडल’ को सामने रखकर सदियों से स्त्री का अनावश्यक शोषण चलता आ रहा है. पुरुष सत्ता स्वीकृत भूमिका से अलग किसी स्थिति में स्त्री को देखना पसंद नहीं करती. इसलिए धार्मिक आचार संहिता बनाकर वह स्त्री की स्वतंत्रता और यौन शुचिता पर नियंत्रण रखती है.

दुनिया का कोई देश या जाति हो उसका धर्म से संबंध रहा है. सभी धर्मों में स्त्री की छवि एक ऐसी कैदी की तरह रही है जिसे पुरुष के इशारे पर जीने के लिए बाध्य होना पड़ता है. वह पितृसत्तात्मक समाज की बेड़ियों से जकड़ी होती है.

धर्मों में स्त्री सामान्यतः उपयोग और उपभोग की वस्तु है. उसकी ऐसी छवि गढ़ी गई है जिससे स्त्री ने भी स्वयं को एक वस्तु मान लिया है. धर्म ने स्त्री को हमेशा पुरुष की दासी के रूप में चित्रित किया. रामचरितमानस में सीता को अग्निपरीक्षा देनी पड़ती है और महाभारत में द्रौपदी को चीरहरण जैसे सामाजिक कलंक से गुजरना पड़ता है.

स्त्री अधिकार की बात हमारे धर्मग्रंथों में कभी की ही नहीं गई. वह पुरुष के शाप से शिला बन जाती है, पुरुष के ही स्पर्श से फिर से स्त्री बन जाती है. पुरुष गर्भवती पत्नी को वनवास दे देता है, पुरुष अपनी इच्छा से उसे वस्तु की तरह दांव पर लगा देता है. सभी धर्मग्रंथों में उसे नरक की खान, ताड़न की अधिकारी और क्या-क्या नहीं कहा गया.

हिंदू धर्म की कोई भी किताब आप उठा कर देख लें उस में स्त्रियों के लिए कर्तव्य की लंबी सूची होगी लेकिन अधिकारों की नहीं. गीता प्रेस की एक किताब ‘स्त्रियों के लिए कर्तव्य शिक्षा’ है. इसे पढ़ कर देखा जा सकता है कि स्त्रियों को हम किस काल में धकेले रखना चाहते हैं.

महिला को चोट पहुंचाने के पुरुष अनेक बहाने दे सकता है जैसे कि वह अपना आपा खो बैठा या फिर वह महिला इसी लायक है .परंतु वास्तविकता यह है कि वह हिंसा का रास्ता केवल इसलिए अपनाता है क्योंकि वह केवल इसी के माध्यम से वह सब प्राप्त कर सकता है जिन्हें वह एक मर्द होने के कारण अपना हक समझता है.

आज की बहुत सी महिलाएं शिक्षित होकर भी पुरानी धार्मिक रूढ़ियों की अनुगामिनी बनी रहती हैं. देश की स्त्रियां अंधविश्वासों की तरफ फिर लौट रही हैं, महंतों-बाबाओं की तरफ दौड़ रही हैं और प्रवचनों में भीड़ की शोभा बढ़ा रही हैं. उन्हें देखकर लगता है कि वे शायद इक्कीसवीं शताब्दी में नहीं बल्कि बारहवीं या तेरहवीं शताब्दी में हैं.

इन स्थितियों से महिलाएं तभी उबर सकती हैं जब वे पुरुष सत्ता और धर्मगुरुओं के षड्यंत्र को जान सकें और अपनी शक्ति की पहचान कर सकें. अपने मान की रक्षा के लिए खुद खड़ी हों न कि दूसरों की राह देखें.

 

शाम के नाश्ते में बनाएं चिली पनीर पॉकेट

मौसम कोई भी हो शाम होते होते बच्चों बड़ों सभी को हल्की फुल्की भूख लगने ही लगती है. यूं भी इस समय सर्दियां चल रहीं हैं और इस समय में हमारी पाचन शक्ति बढ़ जाती है और इसीलिए भूख भी जमकर लगती है. अब प्रश्न यह उठता है कि रोज रोज क्या ऐसा बनाया जाए जो आसानी से बने भी और जिसे सब लोग स्वाद से खाएं भी. बाजार से लाया गया नाश्ता जहां बजट फ्रेंडली भी नहीं होता दूसरे हाइजिंनिक भी नहीं रहता इसके अतिरिक्त बाजार से सीमित मात्रा में नाश्ता मंगवाया जाता है जिससे सब लोग भरपेट खा भी नहीं पाते वहीं घर पर बने नाश्ते को सब जमकर खा सकते हैं. आज हम आपके लिए ऐसी ही रेसिपी लेकर जिसे आप आसानी से घर की चीजों से ही बना सकते हैं तो आइए देखते हैं कि इसे कैसे बनाया जाता है-

कितने लोगों के लिए  6

बनने में लगने वाला समय   30 मिनट

मील टाइप  वेज

सामग्री

ब्रेड स्लाइस     6

पनीर  250 ग्राम

चौकोर कटी शिमला मिर्च    2

चौकोर कटा प्याज    2

अदरक, लहसुन हरी मिर्च पेस्ट      1/2 टीस्पून

सोया सॉस   1/2 टीस्पून

ग्रीन चिली सॉस   1/2 टीस्पून

वेनेगर  1/4 टीस्पून

टोमेटो सॉस  1 टीस्पून

चिली फ्लैक्स  1/4 टीस्पून

नमक   1/4 टीस्पून

कश्मीरी लाल मिर्च          

तेल तलने के लिए

बारीक कटा हरा प्याज    1 टेबलस्पून

मैदा  2 टेबलस्पून

पानी  1 टीस्पून

विधि

ब्रेड स्लाइसेज को किसी कटोरी से गोल काटकर किनारों को अलग कर दें. बचे किनारों को मिक्सी में पीसकर ब्रेड क्रम्ब्स बना लें. अब मैदा को पानी के साथ अच्छी तरह घोलकर स्लरी तैयार कर लें. कटे ब्रेड स्लाइसेज को स्लरी में भिगोकर ब्रेड क्रम्ब्स में अच्छी तरह कोट कर लें. इसी प्रकार सारे ब्रेड स्लाइसेज को तैयार करके 15 मिनट के लिए फ्रिज में रख दें. 15 मिनट बाद गर्म तेल में मध्यम आंच पर सुनहरा होने तक तलकर ब्रेड स्लाइसेज को बटर पेपर पर निकाल लें. गर्म में ही इन्हें बीच से दो हिस्सों में काट दें. अब 1 टीस्पून तेल में अदरक, लहसुन, हरी मिर्च का पेस्ट भूनकर कटी सब्जियां डालकर मध्यम आंच पर सुनहरा होने तक भूनें. अब इसमें पनीर के टुकड़े डालकर अच्छी तरह चलाएं. सभी सॉसेज, वेनेगर, चिली फ्लैक्स, कश्मीरी लाल मिर्च और नमक डालकर चलाएं. जब पानी सूख बिल्कुल सूख जाए तो गैस बंद करके कटा हरा प्याज डालकर चलाएं. तैयार चिली पनीर को कटे ब्रेड के पॉकेट में अच्छी तरह भरकर सर्व करें.

एक संकल्प बदल सकता है जीवन जीने का तरीका

खट्टी मीठी यादों के साथ साल दर साल कैलेंडर बदलते जाते हैं और साथ ही बदलती जाती है हमारी सोच, आदतें और जीवन के प्रति हमारा नजरिया. कुछ लोगो की आदत होती है नया साल आते ही कुछ ना कुछ संकल्प लेने लगते हैं जैसे अपनी किसी बुरी  आदत को छोड़ना, कुछ लक्ष्य हासिल करना  या कुछ अच्छी  आदतों  को अपनाना. कुछ लोग इन में कामयाब भी होते हैं और कुछ का संकल्प दो  से तीन दिन में फुर होते नजर आते हैं जो लोग अपने संकल्प  हासिल करते जाते हैं उनके लिए हर वर्ष खुशियों भरा साबित होता है. लेकिन जो नाकामयाब होते है या संकल्प  को कामयाब बनाने की कोशिश तक  नहीं करते वे सिर्फ हाथ मलते रह जाते हैं और या तो खुद में कमी निकलते है या हालातो का रोना रोते हैं नई  साल पर लिये संकल्प को अगर पुरी निष्ठां के साथ पूरा  करते है तो हम अपने वर्तमान के साथ साथ अपनी  आने वाली पीढ़ी का भी भविष्य  सवार सकते हैं क्योंकि अक्सर बच्चे माता पिता को देख कर उनकी जैसी आदते अपनाते हैं. यदि कुछ कर गुजरने की इच्छा है तो आप हमारे बताए ये टिप्स अपना कर जीवन में लिए हर संकल्प को आसानी से पूरा कर सकते हैं.

दृढ निश्चय लें– जो भी आप कार्य करने जा रहे हैं उसके लिए दृढ संकल्प लें की आप हर परिस्थिति में अपने लक्ष्य को पाकर ही रहेंगे.

समय  की कीमत समझें अपने काम को आगे के लिए ना छोड़े. सही समय आने का इंतज़ार ना करें, क्योंकि सही समय कभी आता नहीं बल्कि लाना पड़ता है.

रिश्तों को महत्व दें -आज कल हम अपने आप में इतने मग्न रहने लगे  हैं कि हम अपने रिश्ते नातो को वक़्त ही नहीं देते जबकि रिश्ते जीवन की पूंजी कि तरह होते हैं जो हर अच्छे बुरे वक़्त में हमारे साथ खडे होते है मनोवैज्ञानिक नजरिए से देखे तो अकेले व्यक्ति को भौतिक, भावनात्मक, मानसिक व आर्थिक सहयोग नहीं मिल पाता. जबकि जो अपने रिश्तों कि कदर करता है उस  अकेले व्यक्ति की पीड़ा पूरे परिवार व रिश्तेदारों की पीड़ा बन जाती है. इसलिए इन्हें अपनी सेविंग्स समझ कर आगे बढ़े और हर साल अपने रिश्तों को और भी बहतर बनाने कि कोशिश करते रहें.

खानपान को बदले – अच्छा खाना स्वस्थ जीवन की  नीव होता है और यदि हम स्वस्थ रहते हैं तो हम अपना हर काम को बड़ी ही लग्न से करते हैं अच्छी डाइट और व्यायाम हमारे भीतर पॉजिटिव एनर्जी पैदा करता है जिससे हमारे अंदर किसी भी कार्य को समय पर सफलता के साथ पूरा करने का जस्बा बढ़ता जाता है. और आप शरारिक व मानसिक रूप से स्वस्थ रहते हैं.

अपने कार्य को गंभीरता से लें कभी भी किसी की देखा देखी  ना करें, यह नहीं सोचे  की आपके दोस्तों ने अपना संकल्प तोड़ दिया तो आप भी उसे पूरा कर के क्या करेंगे बल्कि पुरी शिदत्त से अपने संकल्प को पाने की कोशिश करें जिससे आप और लोगो की प्रेरणा बने.

जिस तरह आप किसी काम को किसी भी हाल में करने के लिए दृढ़ संकल्प लेते हैं. ठीक उसी तरह आप अपनी जिंदगी संवारने के लिए भी आने वाले नए साल पर कुछ  संकल्प ले जिससे आप अपने आने वाले साल को ही नहीं बल्कि जीवन को बेहतर बना सकें हमारी यही कामना है कि  आपका 2024 ही नहीं बल्कि आपका जीवन ही मंगलमय हो.

मैं वह नहीं: भाग 3- आखिर पाली क्यों प्रेम करने से डरती थी

तभी वहां मौली आ गई. उसे देख कर वह बोली, ‘‘दी, तुम ने कभी बताया नहीं तुम्हारा कोई बौयफ्रैंड भी है?’’

‘‘कैसी बात करती हो मौली यह मेरा बौयफ्रैंड नहीं है.’’

‘‘झूठ बोल रही है तुम्हारी दी. यह भी मु?ो प्यार करती है लेकिन कहने से डरती

है. इस के मन में पता नहीं क्या है जिस से यह उबर नहीं पा रही है.’’

‘‘दी, तुम किस्मत वाली हो जो तुम्हें इतना चाहने वाले दोस्त मिले हैं. आज के जमाने में रिश्ते कपड़ों की तरह हो गए हैं. इस्तेमाल करो और फेंक दो. दी मु?ो लगता है तुम्हें इन्हें सम?ाना और कुछ वक्त देना चाहिए.’’

‘‘तुम कुछ नहीं सम?ाती मौली.’’

‘‘दी, मैं इतनी छोटी भी नहीं हूं. मु?ा से भी कई युवा दोस्ती करना चाहते हैं. देख रही हूं ये तुम्हारे लिए दूसरे शहर से यहां आए हैं. कोई किसी के लिए इतना वक्त नहीं निकालता जितना इन्होंने निकाला है. होश में आओ दी और इन्हें पहचानने की कोशिश करो. कब तक इसी तरह खुद से भागती रहोगी?’’

‘‘मैं भी यही सम?ा रहा हूं. जिंदगी में हादसे होते रहते हैं. उन का हिस्सा बन जाना कहां की सम?ादारी है? जो बीत गया उसे भूलने की कोशिश करो. जिंदगी को खुले दिल से अपना लो तो वह जन्नत बन जाती है.’’

‘‘आप ठीक कहते हैं. बड़ी मम्मी के चले जाने का दी पर बहुत बड़ा असर पड़ा है और उस के बाद वह किसी को अपना नहीं सकी.

सब दी को खुश देखना चाहते हैं लेकिन यह अपनी ही दुनिया में रहती है,’’ मौली बोली तो पाली को लगा जैसे किसी ने उस की चोरी पकड़ ली हो.

पहली बार पाली को एहसास हुआ कि वह मम्मी की मौत को भुला नहीं पाई और खो जाने के डर से कभी किसी को अपने जीवन का हिस्सा न बन सकी.

‘‘मैं तुम्हारे फोन का इंतजार करूंगा पाली और तब तक इसी शहर में रहूंगा जब तक तुम

मेरे प्यार को स्वीकार नहीं कर लेती,’’ कह कर वह चला गया. मौली और पाली भी चुपचाप घर चली आईं.

दोनों की बातों ने आज पाली को ?ाक?ार कर रख दिया था. पहली बार वह अपना आत्मविश्लेषण करने के लिए मजबूर हो गई. उसे लगा मौली ठीक कहती है. यह तो खुशी की बात है कि उसे इतने अच्छे पापा, नई मम्मी और छोटी बहन के रूप में मौली मिली लेकिन उस ने कभी उन्हें दिल से स्वीकार ही नहीं किया. दोस्त और प्रेमी के रूप में भी पार्थ जैसा हैंडसम लड़का उस के जीवन में आना चाहता है और वह उसे नकारते चली जा रही थी.

सारी रात पाली सो नहीं सकी. मौली उस की बेचैनी को महसूस कर रही थी लेकिन कुछ कह कर उस के विचारों की डोर को तोड़ना नहीं चाहती थी. सुबह वह देर से उठी.

मौली ने पूछा, ‘‘दी, तबीयत तो ठीक है?’’

‘‘हां ठीक हूं. रात देर तक नींद आई… सुबह आंख लग गई.’’

‘‘दी, बुरा मत मानना पार्थ बहुत अच्छ हैं. उन्हें अपना लो. मु?ो यकीन है वे कभी शिकायत का मौका नहीं देंगे.’’

‘‘तुम ठीक कहती हो मौली. मैं ही स्वार्थी हो गई थी. खोने के डर से मैं कभी किसी को अपना ही नहीं सकी. कुदरत न करे कभी किसी बच्चे को मांबाप के बगैर रहना पड़े.’’

‘‘बीमारी पर किसी का बस नहीं है. बड़ी मम्मी को पापा ने बचाने की बहुत कोशिश की थी लेकिन उन का साथ इतना ही लिखा था. वे तुम्हें छोड़ कर चली गईं. उसी का बदला तुम पूरी दुनिया से ले रही हो और वह भी अपनेआप से लड़ कर.’’

‘‘तुम ठीक कह रही हो. मैं खुद इस बात

को नहीं सम?ा सकी. बस अंदर एक खालीपन था. लगता था उसे मम्मी के अलावा कोई नहीं

भर सकता. उसी ने मु?ो सब से दूर कर दिया.’’

‘‘अभी भी देर नहीं हुई है दी. तुम्हें पार्थ को अपना लेना चाहिए.’’

‘‘तुम उस का नाम कैसे जानती हो?

मैं ने तो कभी उस का जिक्र भी नहीं किया?’’ पाली बोली तो मौली खिलखिला कर हंसने

लगी.

‘‘दी, तुम्हें भले ही यह जिंदगी अपनी

लगती रही हो लेकिन उस पर हमारा भी उतना

ही हक है दी. यही सोच कर पार्थ परसों मु?ा

से मिले थे. वे तुम्हारे बारे में बहुत कुछ जानना चाहते थे. मैं ही किसी अजनबी को बताने में हिचक रही थी. कल उन के कहने पर ही मैं कौफीहाउस आई थी.’’

‘‘तो यह सब तुम्हारी शरारत थी.’’

‘‘मु?ो भी एक हैंडसम जीजू चाहिए

इसीलिए मैं ने पार्थ का साथ दिया,’’ मौली बोली.

यह सुन पाली भी हंसने लगी. पहली बार उस ने उसे खिलखिलाते हुए देखा.

‘‘देर किस बात की है दी? पार्थ को फोन मिलाइए और मिलने के लिए बुला लो. मैं भी देखना चाहती हूं तुम कैसे अपने प्यार का इजहार करती हो?’’

‘‘सच कहूं कुदरत ने मु?ा से मम्मी छीन कर बहन के रूप में तुम्हें लौटा दिया. एक तुम ही हो जिसे मैं अपना सम?ाती हूं.’’

‘‘सब अपने हैं दी. तुम मम्मी से बात कर के तो देखो उन्होंने कभी हम दोनों में कोई भेद नहीं किया. वे बहुत अच्छी हैं.’’

‘‘जानती हूं उन्हें खोने के डर से मैं उन के पास कभी गई ही नहीं. सोचती थी कहीं तुम्हें भी मेरी जैसी स्थिति से न गुजरना पड़े.’’

‘‘ऐसा कभी नहीं होगा दी,’’ कह कर मौली पाली से लिपट गई.

दोपहर में पाली ने पार्थ को फोन कर मिलने के लिए बुला लिया. पार्थ की खुशी का ठिकाना न था. वह निर्धारित समय से पहले कौफीहाउस पहुंच गया.

आज पाली बिलकुल बदली हुई थी. उस का चेहरा खुशी से चमक रहा था. खुले बाल और टाइट जींस में वह बेहद खूबसूरत लग रही थी.

आते ही पाली ने पार्थ का हाथ पकड़ लिया और बोली, ‘‘चलो, घूमने चलते हैं. आज मैं अपना समय इस जगह पर नहीं तुम्हारे साथ किसी खुली जगह बिताना चाहती हूं.’’

दोनों एकदूसरे के हाथ में हाथ डाले कौफीहाउस से बाहर चले गए. मौली उन्हें दूर तक जाते हुए देखती रही और दी के सुनहरे भविष्य की कल्पना में खो गई.

5 Tips: कैसे रखें स्वस्थ और चमकदार बाल

सर्दी का मौसम आ गया है. इन दिनों सूरज की हानिकारक यूवीए और यूवीबी किरणों से बालों को कम नुकसान होता है. लेकिन सर्दी में भी कई कारण है जिन के चलते बालों को नुकसान पहुंचता है, इसलिए इस मौसम में भी बालों की देखभाल व सुरक्षा का ध्यान रखें. शीतलहर, सूखी हवा और कठोर मौसम में बालों का टूटना अधिक  होता है. इस दौरान बाल बहुत ज्यादा शुष्क हो जाते हैं. इसलिए जरूरी है कि इस मौसम में हम अपने बालों का कुछ ज्यादा ही खयाल रखें.

आइए जानते हैं, हेयर ऐक्सपर्ट व डा. एस क्लिनिक के फाउंडर डा. अरविंद पोसवाल से कुछ आसान टिप्स:

1. बालों को सही तरह से सुखाएं

सर्दी में बालों को पूरी तरह से सुखाना कठिन होता है. गीले बालों को बांधें नहीं, क्योंकि यह बालों और सिर में डैंड्रफ, ब्रेकेज और दोमुंह बालों जैसी कई समस्याओं को पैदा करता है. बालों को कभी भी तौलिए से न सुखाएं, क्योंकि रगड़ के कारण बाल टूटते हैं. बालों को सुखाने का सब से अच्छा तरीका है धीरेधीरे तौलिए के साथ अतिरिक्त नमी निचोड़ें और फिर धीमी सैटिंग पर हेयर ड्रायर का उपयोग कर लें, पर ध्यान रहे कि हेयर ड्रायर करने की दूरी बालों से कम से कम 15 सैंटीमीटर हो.

2. तेल से बालों का ध्यान रखें

2 चम्मच जैतून का तेल गरम करें. हलके हाथों से उसे सिर पर लगाएं और मालिश करें. धीमी मालिश से तेल बालों की जड़ों तक प्रवेश करता है और उन्हें मजबूत करता है. यह स्कल्प को मौइस्चराइज करने और रक्त संचार करने में मदद करता है और इस से बालों के रोमछिद्रों को पर्याप्त पोषण मिलता है, जिस से बाल स्वस्थ और मजबूत होने के साथसाथ झड़ने और गिरने से भी बचते हैं.

3. बाल कंडीशनिंग करना न भूलें

बालों को सर्दी के दौरान नमी की आवश्यकता होती है और ऐसे में बालों की कंडीशनिंग और देखभाल काफी महत्त्वपूर्ण है. हेयर औयल्स और गहरे कंडीशनिंग पैक का उपयोग सप्ताह में एक बार बालों को स्वस्थ बनाए रखने के लिए महत्त्वपूर्ण है. इन औयल्स और कंडीशनिंग पैक्स को बालों में लगा कर कुछ देर छोड़ने के बाद किसी अच्छे शैंपू से धो लें और फिर कंडीशनर का बालों के सिरों पर इस्तेमाल करें.

ध्यान रहे कि कंडीशनर बालों के सिरों पर करें. कंडीशनर को कुछ मिनट के लिए बालों पर लगा कर छोड़ दें और फिर ठंडे या गरम पानी से धोएं. कोशिश करें कि बालों को ठंडे पानी से ही धोएं, जिस से बालों की नमी बनी रहेगी और बाल चमकदार और खूबसूरत दिखेंगे.

4. फ्रीज से निबटें

सर्दी में सब से कष्टप्रद चीजों में से एक फ्रीज है. स्वेटर, स्कार्फ, दस्ताने सभी आप के बालों पर भारी पड़ते हैं, ये बालों को और भी ज्यादा स्टैटिक बना देते हैं. फ्रीज से निबटने के लिए बालों पर बाजार में उपलब्ध वेंटेड हेयर ब्रश से कंघी करें. साथ ही साथ, बालों को केवल कुनकुने या ठंडे पानी से धोएं क्योंकि गरम पानी सभी नैचुरल औयल्स को खींच लेता है जो बालों की सुरक्षा व पोषण के लिए जरूरी होता है.

5. डैंड्रफ से लड़ें

हवा में नमी की कमी के कारण सर्दी के दौरान सिर की स्कल्प पहले से रूखी रहती है और उस में खुजली होने लगती है. इस से डैंड्रफ और जलन जैसी समस्याएं हो जाती हैं, जो बालों के कमजोर हो कर टूटने व झड़ने का कारण बनती हैं. ज्यादातर लोगों को यह पता नहीं होता कि डैंड्रफ की समस्या सही देखभाल के साथ खत्म हो सकती है. इस के लिए केवल जैतून या नारियल के तेल के कुछ चम्मच और नीबू के रस का एक चम्मच चाहिए.

तेल कुछ सैकंड तक गरम करें और फिर नीबू का रस उस में मिलाएं. इस तेल और नीबू के रस मिश्रण से सिर में मालिश करें और इसे 20-30 मिनट तक सिर पर लगा रहने दें. इस के बाद किसी अच्छे शैंपू से बालों को धो लें.

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New Year Special: नए साल में रहना चाहते हैं स्वस्थ, तो बस अपनाएं ये आसान टिप्स

आज हर उम्र के लोग स्वास्थ्य को लेकर जागरूक हो चुके है. इस बारें में मुंबई के कोकिलाबेन धीरूबाई अम्बानी हॉस्पिटल कंसल्टेंट कार्डियोलॉजिस्ट डॉ प्रवीण कहाले कहते हैं कि कोविड के बाद लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ी है और ये अच्छी बात है, लेकिन कुछ बातें हर व्यक्ति को नए साल में समझने की जरुरत है, जो निम्न है.

अपना वज़न नियंत्रण में रखें

ध्यान रखें कि आपका वज़न जो सही होना चाहिए वही है. इसके लिए आपको अतिरिक्त कैलरीज़ से बचना होगा और नियमित रूप से कसरत करनी होगी. लिफ्ट के बजाय सीढ़ियों का इस्तेमाल करने जैसे आसान उपाय आप हर दिन कर सकते हैं. बैठे रहना आपके लिए उतना ही हानिकारक है जितना, पैसिव स्मोकिंग है, लगातार लंबे समय तक बैठे रहने से हृदय की बीमारियों का खतरा बढ़ता है. जब आप बैठे रहते हैं तब आप अपने शरीर को उतना ही नुकसान पहुंचाते हैं जितना लकड़ी के धुंए में रहने से होता है. इसीलिए, कसरत न करने या बैठे रहने को पैसिव स्मोकिंग माना जाता है.

  • पैक्ड फूड्स खाना कम या बंद करें और स्वस्थ आहार को चुनें. रोज़ के खाने में बहुत सारी सब्ज़ियां
    होनी चाहिए, नमक और चीनी की मात्रा कम करें.
  • आहार पर नियंत्रण रखने के साथ-साथ, कसरत पर भी नियंत्रण रखना ज़रूरी है. बहुत ज़्यादा कसरत
    की वजह से कई बार समस्याएं खड़ी हो जाती हैं, कई बार लोग बॉडी बनाने के लिए स्टेरॉइड्स और
    इस तरह की दूसरी दवाइयां लेते हैं, जिससे कार्डिओवस्क्युलर यानी ह्रदय की बिमारियों का खतरा
    बढ़ता है.
  • बच्चों को डिजिटल दुनिया से दूर रखिए, उन्हें खेलने, कसरत करने के लिए बढ़ावा दें. बैडमिंटन, टेबलटेनिस, क्रिकेट और फुटबॉल जैसे आउटडोर खेल खेलने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए. इससे बच्चों में सहनशीलता बढ़ती है और हृदय की बिमारियों का खतरा कम होता है.

जीवनशैली में इन महत्वपूर्ण बदलावों को लाने के अलावा अच्छी गहरी नींद लेना बेहद जरूरी है.
कितनी नींद ले रहे हैं, उसके साथ-साथ नींद की गुणवत्ता भी महत्वपूर्ण है. सोने से पहले मोबाइल
उपकरणों और टेलीविजन से दूर रहें, क्योंकि यह आपके सर्केडियन रिदम को तोड़ता है या परेशान
करता है, जो अच्छे स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. स्वास्थ्य अच्छा रख पाने के लिए नींद एक
महत्वपूर्ण पहलू है. दोपहर के समय में छोटी झपकी ले सकते हैं, लेकिन दिन में लंबे समय तक सोने से
निश्चित रूप से आपके हृदय संबंधी जोखिम बढ़ेगी. ये कुछ निवारक उपाय और स्वस्थ जीवन शैली को
अपनाकर आप अपना ह्रदय स्वस्थ रख सकते हैं.

  •  अलग-अलग उम्र के लोगों के लिए कसरत भी अलग-अलग तरह की होती हैं, जिन लोगों को जोड़ों का
    दर्द या अन्य समस्या होती है, वे जॉगिंग और ट्रेडमिल के बजाय तैरने और साइकिल चलाने जैसे स्थिर
    व्यायाम कर सकते हैं, इस तरह के उपकरण जिम और घर में भी आसानी से उपलब्ध होते हैं.
  • यह ज़रूरी नहीं है कि हाई स्पीड वाला व्यायाम करें. मध्यम तीव्रता वाले व्यायाम नियमित रूप से,
    लगातार करके आप तनाव को दूर रख सकते हैं, ध्यान रखें कि कभी-कभी व्यायाम हानिकारक हो
    सकता है.
  • विटामिन डी, विटामिन बी12 जैसे पोषक तत्वों की कमी की जांच कराते रहें और आयरन की कमी मानकर उसकी पूर्ति करते रहें, युवा महिलाओं के साथ-साथ वयस्क महिलाओं में भी विटामिन, आयरन की कमी बेहद आम समस्या है. कुल स्वास्थ्य को अच्छा रख पाने और विशेष रूप से हृदय के स्वास्थ्य को अच्छा रख पाने के लिए पोषण की दृष्टी से यह एक महत्वपूर्ण पहलु है.
  • किसी व्यक्ति को डायबिटीज, रक्तचाप या कोलेस्ट्रॉल न हो तो भी, मोटापे और वज़न ज़्यादा होने से ह्रदय की बीमारी का खतरा 25 प्रतिशत तक बढ़ता है. डायबिटीज और मोटापा एक जानलेवा कॉम्बिनेशन है, क्योंकि मोटापे के कारण डायबिटीज की संभावना बढ़ती है और एक बार अगर मरीज़ को हाई शुगर हो जाता है, तो हार्ट अटैक की संभावना कई गुना बढ़ जाती है.
  • धूम्रपान हार्ट अटैक की बहुत महत्वपूर्ण वजह होती है. सिगरेट के धुंए में जो केमिकल्स होते हैं उनसे शरीर में खून गाढ़ा हो जाता है, वाहिकाओं और शिराओं धमनियों में क्लॉट्स जमा होने लगते हैं.

अच्छे स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है प्रोसेस्ड फूड कम खाना और नमक, चीनी की मात्रा कम रखना.
उम्र बढ़ने पर कार्डियोवेस्क्युलर रिस्क को कम करने के लिए बचपन से ही कुछ बातों का ख्याल
रखना चाहिए. शरीर को नमक और चीनी की आवश्यकता नहीं होती, यह दो चीज़ें आपके शरीर को
नहीं, बल्कि सिर्फ जीभ को खुश रखने के लिए होती हैं. अब आपको सोचना होगा कि नए साल में आप
सिर्फ जीभ को खुश रखना चाहते हैं या पूरे शरीर को?

ठंड में बच्चे की स्किन का ऐसे रखें ख्याल

सर्दी के मौसम में ठंडी हवाएं चलने लगती हैं. इस दौरान उन की कोमल स्किन का खास ध्यान रखना जरूरी है. इस बारे में क्यूटिस स्किन सौल्यूशन की स्किनरोग विशेषज्ञा डा. अप्रतिम गोयल कहती हैं कि असल में बच्चों की स्किन वयस्कों की स्किन से 5 गुना नाजुक होती है. सही देखभाल से उस में रैडनैस या रैशेज होने की संभावना नहीं रहती. इस के अलावा सर्दी के मौसम में ड्राई स्किन के लिए ऐक्स्ट्रा पोषण की जरूरत होती है, क्योंकि बच्चों की स्किन वयस्कों की स्किन से पतली होती है. ऐसे में सर्द हवाओं और ठंड से वह डैमेज होने लगती है.

बाहर की ठंड और घर के अंदर की हीट से स्किन के सूखा होने और उस पर रैशेज होने की संभावना अधिक बढ़ जाती है. इस के अलावा जिन बच्चों की स्किन शुष्क किस्म की होती है, उन के लिए यह मौसम और भी घातक हो जाता है.

ठंड का बच्चों की स्किन पर प्रभाव

– रैड, रफ और स्कैली गाल.

– गालों, बटक्स और कलाइयों पर स्किन का ड्राई और परतदार होना.

– फटे होंठ.

– ऐक्जिमा होना.

– हीट रैश.

देखभाल

ठंड के मौसम में बच्चों की स्किन के प्रति थोड़ी सी भी अनदेखी घातक सिद्ध हो सकती है. अत: पेश हैं कुछ सु झाव:

– बच्चों के लिए मौइस्चराइजिंग क्रीम का प्रयोग उन की ड्राई और खारिश वाली स्किन पर करें. उस क्रीम में डाइमेथिकोन, सिरामाइडस, लिकोरिस, विटामिन ई आदि होना जरूरी है. ये बच्चों की स्किन को नम रखते हैं. सुगंध और कलर फ्री उत्पाद, जिन में पीएच बैलेंस हो उन्हें चुनें.

– जब बच्चा थोड़ा बड़ा होने लगता है तो कई बार उस की स्किन पर सफेद पैचेस दिखाई देने लगते हैं. ऐसे में अच्छे मौइस्चराइजर का प्रयोग करने से पैचेस गायब हो जाते हैं. 18 महीने के बाद बच्चे को विंटर में भी सनस्कीन लगाना अच्छा रहता है.

– फटे होंठ आम समस्या है. 5 साल से कम उम्र के बच्चों के होंठ अधिक फटते हैं. इस के लिए वैसलीन का प्रयोग करना ठीक रहता है.

– अधिक ऊनी कपड़े पहनाने से हीट रैश की संभावना अधिक बढ़ जाती है. इस के लिए बच्चों की स्किन की नियमित जांच करते रहना चाहिए. हीट रैश होने पर हलके और मुलायम ऊनी कपड़े पहनाना ही सही रहता है.

– जाड़े में बच्चों के डायपर को थोड़ेथोड़े अंतराल पर बदलें और डायपर एरिया को अच्छी तरह साफ कर दें, क्योंकि गीले डायपर से इन्फैक्शन और रैशेज होने का खतरा रहता है. बच्चे की स्किन को हमेशा हलके हाथों से साफ करें.

– ठंड में बच्चे की नहाने की अवधि कम रखें. नहाने के बाद 5 मिनट में उसे मौइस्चराइज कर कपड़े पहना दें. कुनकुने पानी से स्नान कराएं, सोप फ्री क्लींजर्स का प्रयोग करें ताकि स्किन का औयल बना रहे.

अगर बच्चे को ऐक्जिमा हुआ है तो स्किनरोग विशेषज्ञ से सलाह लें ताकि समय रहते उस का सही इलाज हो सके.

घरेलू नुसखे

– नारियल का तेल स्किन के लिए बहुत अच्छा होता है. बच्चे को नहलाने के बाद इसे लगाएं या नहलाने के 1 घंटा पहले भी लगा सकती हैं.

यह स्किन की नमी को प्रोटैक्ट करता है और स्किन की सौफ्टनैस को बनाए रखता है.

– सूखे व फटे होंठों और गालों पर देशी घी लगाया जा सकता है. दादीनानी का यह नुसखा स्किन के लिए सुरक्षित और अच्छा उपाय है, जो जाड़े में बहुत लाभदायक होता है.

– 2 बड़े चम्मच ओट्स को पीस कर एक बालटी में भिगो दें. फिर इस में थोड़ा औलिव औयल मिला कर बच्चे को इस पानी से नहलाएं.

माना कि घरेलू नुसखे अच्छे होते हैं, लेकिन किसी भी प्रकार के रैशेज या रैडनैस होने पर डाक्टर की सलाह जरूर लें.

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