युवाओं का अड्डा इंस्टाग्राम बना मुसीबतों का गड्ढा

सोशल मीडिया का नाम सुनते ही आजकल सब के दिमाग में बस एक ही नाम आता है इंस्टाग्राम. इंस्टाग्राम युवाओं के बीच सब से ज्यादा यूज किया जाने वाला सोशल प्लेटफौर्म बन गया है. इसे अब तक प्लेस्टोर पर एक बिलियन से ज्यादा लोग इंस्टौल कर चुके हैं. इंस्टाग्राम को 6 अक्तूबर, 2010 में लौंच किया गया था. इसे शुरू करने वाले केविन सिस्ट्रौम और माइक क्रेगर थे. इंस्टाग्राम एक अमेरिकन कंपनी है.

इंस्टाग्राम में युवा अपनी छोटी वीडियोज, जिन्हें रील्स कहा जाता है और अपनी पिक्चर शेयर करते हैं. एक तरह से यह युवाओं का ऐसा अड्डा बन चुका है जहां युवा अपनी रिप्रेजैंटेशनल एक्सप्रैशन को जाहिर करता है. बस, सवाल बनता है कि क्या वह इस तरह के प्लेटफौर्म्स को सही से यूज कर पा रहा है?

बात करें अगर इंस्टाग्राम के फौलोअर्स की तो इंस्टाग्राम पर सब से ज्यादा फौलोअर्स खुद इंस्टाग्राम के ही हैं. इस के बाद फुटबौल प्लेयर क्रिस्टियानो रोनाल्डो जिन के 603 मिलियन से भी ज्यादा फौलोअर्स हैं. वहीं भारत में इंस्टाग्राम पर सब से ज्यादा फौलोअर्स क्रिकेटर विराट कोहली के हैं. विराट कोहली के बारे में हाल ही में खबर आई थी कि वे एक स्पौंसर्ड इंस्टाग्राम पोस्ट के लगभग 11 करोड़ रुपए चार्ज करते हैं, जिसे बाद में उन्होंने खुद नकार दिया था. कोहली के इंस्टाग्राम पर 257 मिलियन से भी ज्यादा फौलोअर्स हैं. वहीं, कोहली के बाद भारत में दूसरे नंबर पर बौलीवुड से हौलीवुड तक लंबी छलांग लगाने वाली प्रियंका चोपड़ा हैं. वे ग्लोबल आइकन हैं. उन के लगभग 89 मिलियन फौलोअर्स हैं.

अब फेसबुक को पीछे छोड़ कर इंस्टाग्राम नंबर वन पर आ गया है. इस की बढ़ती पौपुलैरिटी को देखते हुए फेसबुक ने साल 2012 में इसे खरीद लिया. अब फेसबुक और इंस्टाग्राम दोनों आपस में लिंक्ड हैं. ये मेटा के पार्ट हैं, जिसे मार्क जुकरबर्ग चलाते हैं. अब इंस्टाग्राम पर जो फोटो या रील पोस्ट की जाती है सिर्फ एक सैंटिग से वह फेसबुक पर भी अपलोड हो जाती है. है न कमाल की बात. ऐसे ही यह युवाओं की पहली पसंद नहीं बना है.

इंस्टाग्राम एक ऐसा प्लेटफौर्म है जहां पर यूजर्स न सिर्फ अपनी फोटो, वीडियो अपलोड करते हैं बल्कि नए दोस्त भी बनाते हैं और अपने टैलेंट को दिखाने के लिए उन्हें किसी रिऐलिटी शो के आगे हाथ नहीं गिड़गिड़ाने होते. यही वजह है कि युवाओं ने इसे अपना अड्डा बना लिया है. इस में बहुत से युवा अपनी टैलेंट वीडियो अपलोड कर के दुनिया में नाम कमा रहे हैं.

कई लोग गाना, डांस, मेकअप, स्टाइलिंग, कुकिंग, ट्रैवलिंग, स्टडी टिप्स और न्यूज जैसी रील्स बना कर इंस्टाग्राम पर अपलोड कर रहे हैं. इन्हें देखने और फौलो करने वालों की संख्या भी हजारोंलाखों में है. यही फौलोअर्स उन की कमाई का जरिया भी हैं.

समय बरबाद करते युवा

वहीं, कुछ लोग इस पर दिनरात अपना समय भी बरबाद कर रहे हैं, जिन का काम सिर्फ इंस्टाग्राम पर रील्स देखना है. इस तरह से वे सिर्फ समय की बरबादी कर रहे हैं. इन्हें यह सम?ाना चाहिए कि इंस्ट्राग्राम पर रील्स देखने से कैरियर नहीं बनेगा. कैरियर बनाने के लिए इन्हें पढ़ाई करनी होगी. इस के अलावा अपने टैलेंट पर काम करना होगा. ऐसे खलिहर लोग सिवा वक्त की बरबादी के, सोसाइटी में अपना कोई योगदान नहीं दे रहे.

कहते हैं, ‘अगर किसी चीज के फायदे हैं तो नुकसान भी हैं.’ ऐसे ही इंस्टाग्राम के फायदे के साथसाथ कुछ नुकसान भी हैं. असल में इंस्टाग्राम के यूजर्स आपस में अपनी लाइफ कंपेयर करने लगते हैं, जो कि गलत है. सब का घर, फैमिली और फाइनैंशियल स्टेटस अलगअलग होता है. लेकिन यूजर्स यह भूल जाते हैं.

अगर कोई अमीर यूजर यूएस, यूके की ट्रिप एंजौय कर रहा है और उस की वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड कर रहा है तो दूसरा यूजर जो फाइनैंशियली इतना स्ट्रौंग नहीं है, वह अपनेआप को उस से कंपेयर करने लगता है. जबकि दोनों का फाइनैंशियल स्टेटस बहुत अलग है. ऐसे में जब वह ट्रिप पर जा नहीं पाता तो वह डिप्रैस्ड हो जाता है.

इंस्टाग्राम हमारी मैंटल हैल्थ के लिए सही नहीं है. इस विषय में एक रिसर्च की गई. यूनाइटेड किंगडम की रौयल सोसाइटी फौर पब्लिक हैल्थ द्वारा प्रकाशित स्टेटस औफ मांइड रिसर्च में इंग्लैंड, स्कौटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड के 1,479 युवाओं के इनपुट लिए गए. इन की उम्र 14 से 24 साल थी. इस रिसर्च का मुद्दा यह जानना था कि अलगअलग सोशल मीडिया प्लेटफौर्मों ने उन की मैंटल और फिजिकल हैल्थ को कैसे इफैक्ट किया है.

रिसर्च में इंस्टाग्राम को मैंटल हैल्थ के लिए सब से खराब सोशल मीडिया नैटवर्क कहा गया. यह हाईलैवल की टैंशन, डिप्रैशन, बदमाशी, फोमो की भावना जागने वाला प्लेटफौर्म माना गया.

इंस्टाग्राम कितना घातक साबित हो सकता है, यह तो आप जान ही गए हैं, इसलिए आप में कोई टैलेंट है तो वह आप जरूर इंस्टाग्राम पर खुद को दिखाएं, लेकिन इस के भीतर इतना न घुस जाएं कि आप को समस्या होने लगे.

Basil Seed water : सर्दी में बीमारियां होंगी छूमंतर पिएं 1 गिलास तुलसी बीज का पानी

Benefits of Basil seed water: सर्दियों का मौसम आ चुका है ऐसे में ठंड पड़नी शुरु हो चुकी है. बदलते मौसम में शरीर का ध्यान रखना बेहद जरुरी है. सर्दियों में खासी-जुकाम काफी लोगों परेशान करता है. इस मौसम में सेहत का ध्यान रखना जरुरी है साथ ही इम्यूनिटी को स्ट्रांग रखना चाहिए. अक्सर ठंड के मौसम में बच्चों से लेकर बुर्जुगों की इम्यूनिटी काफी कमजोर होती है जिस वजह से वह बीमार पड़ जाते है. सर्दियों में अगर आप रोजना तुलसी के बीज का पानी पीते हैं तो कई सारे फायदे देखने को मिलेंगे और बीमारियां भी कोसों दूर रहेंगी.

बॉडी को फिट और स्वस्थ रखने के लिए हमें अपनी खराब आदतों को ठीक करना काफी जरुरी है. अगर आप तुलसी के बीज का पानी पीते है तो आपकी शुगर काफी कंट्रोल में रहती है.

  1. डिहाइड्रेशन की कमी

तुलसी के बीज में कई सारे पोषक तत्वों पाएं जाते हैं. तुलसी के बीज में विटामिन (जैसे विटामिन के), खनिज (कैल्शियम जैसे), और एंटीऑक्सीडेंट जैसे आवश्यक तत्व मौजद होते है. जो हमारे स्वास्थ्य के लाभकारी है. जिन लोगों को डिहाइड्रेशन की कमी रहती है उनके लिए सबसे बेस्ट है रोजना तुलसी के बीज का पानी पिएं. कम पानी पीने की वजह से लोगों में डिहाइड्रेशन कमी काफी हो जाती है तो इससे काफी बचाव किया जा सकता है.

2. एसिडिटी

अगर आपको पेट संबधिंत काफी समास्याएं होती है तो तुलसी के बीज का पानी जरुर पिएं. तुलसी के बीज में म्यूसिलेज, एक जेल जैसा पदार्थ होता है जो पानी में भीगने से फूल जाता है. यह पानी पीने से शरीर में गैस की परेशानी और एसिडिटी की समस्याओं से छुटकारा मिल जाता है.

3. मोटापा

आपको मोटापे की काफी ज्यादा शिकायात है कि कई प्रयास कर लिए लेकिन वजन कम नहीं होता इसलिए 1 गिलास तुलसी बीज का पानी लगातर हफ्ते तक पिएं. आपको हफ्ते भर में काफी असर दिखेगा.

4. इम्यूनिटी बूस्ट

जैसा कि ऊपर आपको बताया है कि तुलसी के बीज में कई पोषक तत्व पाएं जाते है. ठंड के मौसम में तुलसी के बीज का पानी पीने से इम्यूनिटी बूस्ट होती है और सर्दी-जुकाम जैसी बीमारी से भी आप निजात पा सकते हैं.

5. ब्लड शुगर लेवल

तुलसी के बीज का सेवन करने से ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल रहता है. डायविटीज के रोगियों के यह बेहद फायदेमंद है. इसमें कई पोषक तत्व और मिनरल्स मौजूद है. शरीर को फिट और ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल करने के लिए अगर आप रोजाना तुलसी का पानी पीते हैं तो आपका ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है.

मेरा मन पढ़ाई में नहीं लगता, मैं क्या करूं?

सवाल-

मैं 21 वर्षीय युवती हूं. मुझे घूमनाफिरना, मौजमस्ती करना अच्छा लगता है. मेरा मन न तो पढ़ाई में लगता है और न ही घर के कामों में. इन वजहों से घर में भी सब मुझ से नाराज रहते हैं. बताएं मैं अपनी आदतें कैसे बदलूं?

जवाब-

आप अपनी आदतें बिलकुल बदल सकती हैं. अभी आप को घूमनाफिरना, मौजमस्ती करना बेशक अच्छा लग रहा हो, लेकिन जब आप के दोस्त मेहनत और पढ़ाई से आगे बढ़ जाएंगे, नौकरी करने लगेंगे, तो तब आप को बहुत पछतावा होगा.

आप की घर के कामों में भी दिलचस्पी नहीं है, तो जाहिर है आप न तो अपना कैरियर संवार पाएंगी और न ही घर के कामों में ही दक्ष हो पाएंगी.

यों तो मातापिता काफी हद तक अपने बच्चों को बरदाश्त करते हैं, उन के ऐब छिपाते हैं, बावजूद उन्हें प्रेम करते हैं, मगर जब आप की शादी होगी तो जरूरी नहीं कि ससुराल में सब आप को इसी रूप में स्वीकार कर लें.

इसलिए बेहतर होगा कि आप समय रहते खुद को बदलने का जतन करें. इस के लिए आप को अपनी रूटीन लाइफ बदलनी होगी.

रात को जल्दी सोएं और सुबह जल्दी उठ कर बाहर टहलने जाएं, व्यायाम करें. अच्छी पत्रिकाएं और किताबें पढ़ें. कोई ऐसा काम करें, जिस से दूसरों का भला हो, साथ ही घर के कामकाज में भी हाथ बंटाएं.

शुरुआत में ये सब थोड़ा बोझिल लगेगा पर जल्द ही आप को अपनी जिम्मेदारियों का एहसास होने लगेगा और आप न सिर्फ घरपरिवार की चहेती बन जाएंगी, अपना कैरियर भी संवार पाएंगी.

कभी-कभी औफिस में काम करतेकरते अचानक मूड औफ हो जाता है या फिर घर में कोई नईपुरानी बात याद कर मन बेचैन हो उठता है तो आप को सतर्क हो जाना चाहिए. सतर्क तो आप को उस वक्त भी हो जाना चाहिए जब खुद आप को ऐसा लगने लगे कि आप की रूटीन जिंदगी में बेवजह का खलल पड़ने लगा है.

आप वक्त पर अपने तयशुदा काम नहीं कर पा रही हैं, भूख कम या ज्यादा लग रही है, नींद पूरी नहीं हो पा रही है, आप पति, घर बच्चों पर पहले जैसा ध्यान नहीं दे पा रही हैं, बातबात पर चिड़चिड़ाहट, गुस्से या डिप्रैशन का शिकार होने लगी हैं तो तय मानिए आप अपनी ब्रैन सैल्स को मैनेज नहीं कर पा रही हैं. यह एक ऐसी वजह है जिसे हरकोई नहीं जानता, लेकिन इस का शिकार जरूर होता है.

इन लक्षणों में से आप किसी एक का भी शिकार हैं तो  तय यह भी है कि आप की ही कुछ आदतें आप की ब्रेन सैल्स को नुकसान पहुंचा रही हैं, जिस का एहसास या अंदाजा आप को जानकारी के अभाव के चलते नहीं होता. लेकिन ये सबकुछ सामान्य है और वक्त रहते आदतें सुधार ली जाएं तो सबकुछ ठीक और आप के कंट्रोल में भी हो सकता है.

क्या हैं ब्रेन सैल्स

नुकसान चाहे जिस भी वजह से हो रहा है उसे अगर वैज्ञानिक और तकनीकी तौर पर सम झ लिया जाए तो फिर कोईर् खास मुश्किल नुकसान से बचने में पेश नहीं आती. बात जहां तक ब्रेन सैल्स को सम झने की है तो उन के बारे में इतना जानना ही काफी है कि वे हमारे शरीर का महत्त्वपूर्ण हिस्सा हैं जो हमें हर फीलिंग से न केवल परिचित कराती हैं, बल्कि उन से होशियार रहने के लिए भी सचेत करती हैं.

लव यू पापा: तनु ने उस रात आखिर क्या किया

‘‘अरे तनु, तुम कालेज छोड़ कर यहां कौफी पी रही हो? आज फिर बंक मार लिया क्या? इट्स नौट फेयर बेबी,’’ मौल के रेस्तरां में अपने दोस्तों के साथ बैठी तनु को देखते ही सृष्टि चौंक कर बोली. फिर तनु से कोई जवाब न पा कर खिसियाई सी सृष्टि उस के दोस्तों की तरफ मुड़ गई. पैरों में हाईहील, स्टाइल से बंधे बाल और लेटैस्ट वैस्टर्न ड्रैस में सजी सृष्टि को तनु के दोस्त अपलक निहार रहे थे.

‘‘चलो, अब आ ही गई हो तो ऐंजौय करो,’’ कहते हुए सृष्टि ने कुछ नोट तनु के पर्स में ठूंस सब को बाय किया और फिर रेस्तरां से बाहर निकल गई. ‘‘तनु, कितनी हौट हैं तुम्हारी मौम… तुम तो उन के सामने कुछ भी नहीं हो…’’

यह सुनते ही रेस्तरां के दरवाजे तक पहुंची सृष्टि मुसकरा दी. वैसे उस के लिए यह कोई नई बात नहीं थी, क्योंकि उसे अकसर ऐसे कौंप्लिमैंट सुनने को मिलते रहते थे. मगर तनु के चेहरे पर अपनी मां के लिए खीज के भाव साफ देखे जा सकते हैं. सृष्टि बला की खूबसूरत है. इतनी आकर्षक कि किसी को भी मुड़ कर देखने पर मजबूर कर देती है. उसे देख कर कोई भी कह सकता है कि हां, कुछ लोग वाकई सांचे में ढाल कर बनाए जाते हैं.

16 साल की तनु उस की बेटी नहीं, बल्कि छोटी बहन लगती है. जिस खूबसूरती को लोग वरदान समझते हैं वही सुंदरता सृष्टि के लिए अभिशाप बन गई थी. 5 साल पहले जब तनु के पिता की एक दुर्घटना में मृत्यु हो गई तब इसी खूबसूरती ने 1-1 कर सब नातेरिश्तेदारों, दोस्तों और जानपहचान वालों के चेहरों से नकाब उठाने शुरू कर दिए थे.

नकाबों के पीछे छिपे कुछ चेहरे तो इतने घिनौने थे कि उन से घबरा कर सृष्टि ने यह दुनिया ही छोड़ने का फैसला कर लिया. मगर तभी तनु का खयाल आ गया. उसे लगा कि जब वही इस दुनिया का सामना नहीं कर पा रही है तो फिर यह नादान तनु कैसे कर पाएगी. फिर उन्हीं दिनों उस की जिंदगी में आए थे अभिषेक… अभिषेक सृष्टि के पति के सहकर्मी थे और उन की मृत्यु के बाद अब सृष्टि के, क्योंकि सृष्टि को उसी औफिस में अपने पति के स्थान पर अनुकंपा के आधार पर नौकरी मिल गई थी. अभिषेक अब तक कुंआरे क्यों थे, यह सभी के लिए कुतूहल का विषय था.

यह राज पहली बार खुद अभिषेक ने ही सृष्टि के सामने खोला था कि पिताविहीन घर में सब से बड़े होने के नाते छोटे भाईबहनों की जिम्मेदारियां निभातेनिभाते कब खुद उन की शादी की उम्र निकल गई, उन्हें पता ही नहीं चला और इन सब के बीच उन का दिल भी तो कभी किसी के लिए ऐसे नहीं धड़का था जैसे अब सृष्टि को देख कर धड़कता है. यह सुन कर एकबार को तो सृष्टि सकपका गई, मगर फिर सोचा कि क्यों कटी पतंग की तरह खुद को लुटने के लिए छोड़ा जाए… क्यों न अपनी डोर किसी विश्वासपात्र के हाथों सौंप कर निश्चिंत हुआ जाए. मगर अपने इस निर्णय से पहले उसे तनु की राय जानना बहुत जरूरी था और तनु की राय जानने के लिए जरूरी था उस का अभिषेक से मिलना और फिर उन्हें अपने पिता के रूप में स्वीकार करने को सहमत होना, क्योंकि तनु अभी तक अपने पिता को भूल नहीं पाई थी. भूली तो वह भी कहां थी, मगर हकीकत यही है कि जीवन की सचाइयों को कड़वी गोलियों की तरह निगलना ही पड़ता है और यह बात उस की तरह तनु भी जितनी जल्दी समझ ले उतना ही अच्छा है.

अभिषेक का सौम्य और स्नेहिल व्यवहार… नानी का तनु को दुनियादारी समझाना और थोड़ीबहुत सामाजिक सुरक्षा की जरूरत भी, जोकि शायद खुद तनु ने महसूस की थी…सभी को देखते हुए तनु ने बेमन से ही सही मगर सृष्टि के साथ अभिषेक के रिश्ते को सहमति दे दी. अभिषेक को उन के साथ रहते हुए लगभग साल भर होने को आया था, लेकिन तनु अभी भी उन्हें अपने दिल में बसी पिता की तसवीर के फ्रेम में फिट नहीं कर पाई थी. वह उन्हें अपनी मां के पति के रूप में ही स्वीकार कर पाई थी, अपने पिता के रूप में नहीं. तनु ने एक बार भी अभिषेक को पापा कह कर नहीं पुकारा था.

पिता का असमय चले जाना और मां की नई पुरुष के साथ नजदीकियां तनु को भावनात्मक रूप से बेहद कमजोर कर रही थीं. बातबात में चीखनाचिल्लाना, अपनी हर जिद मनवाना, हर वक्त अपने मोबाइल से चिपके रहना, अभिषेक के औफिस से घर आते ही अपने कमरे में घुस जाना तनु की आदत बनती जा रही थी. उस की मानसिक दशा देख कर कई बार सृष्टि को अपने फैसले पर अफसोस होने लगता. मगर तभी अभिषेक तनु के इस व्यवहार को किशोरावस्था के सामान्य लक्षण बता कर सृष्टि को इस गिल्ट से बाहर निकाल देते थे.

अभिषेक का साथ पा कर सृष्टि की मुरझाती खूबसूरती फिर से खिलने लगी थी. अभिषेक भी उसे हर समय सजीसंवरी देखना चाहते थे. इसीलिए उस के कपड़ों, गहनों और अन्य ऐक्सैसरीज पर दिल खोल कर खर्च करते थे. शायद लेट शादी होने के कारण पत्नी को ले कर अपनी सारी दबी इच्छाएं पूरी करना चाहते थे. मगर इस के ठीक विपरीत तनु अपनेआप को बेहद अकेला और असुरक्षित महसूस करने लगी थी. अपनेआप से बेहद लापरवाह हो चुकी थी.

धीरेधीरे तनु के कोमल मन में यह भावना घर करने लगी थी कि मां की सुंदरता ही उस के जीवन का सब से बड़ा अभिशाप है. जब कभी कोई उस की तुलना सृष्टि से करता तो तनु के सीने पर सांप लोट जाता था. उसे सृष्टि से घृणा सी होने लगी थी. अब तो उस ने सृष्टि के साथ बाहर आनाजाना भी लगभग बंद कर दिया था. उस के दिमाग में यही उथलपुथल रहती कि अगर मां इतनी सुंदर न होती तो अभिषेक का दिल भी उन पर नहीं आता और तब वे सिर्फ तनु की मां होतीं, अभिषेक या किसी और की पत्नी नहीं.

मां को भी तो देखो. कितनी इतराने लगी हैं आजकल… पांव हैं कि जमीन पर टिकते ही नहीं… हर समय अभिषेक आगेपीछे जो घूमते रहते हैं. तो क्या यह सब अभिषेक के प्यार की वजह से है? अगर अभिषेक इन की बजाय मुझे प्यार करने लगें तो? फिर मां क्या करेंगी? कैसे एकदम जमीन पर आ जाएंगी… कल्पना मात्र से ही तनु खिल उठी. तनु के मन में ईर्ष्या के नाग ने फन उठाना शुरू कर दिया. उस के दिमाग ने तेजी से सोचना शुरू कर दिया. कई तरह की योजनाएं बननेबिगड़ने लगीं. अचानक तनु के होंठों पर एक कुटिल मुसकान तैर गई. आखिर उसे रास्ता सूझने लगा था.

हां, मैं अब अभिषेक को अपना बनाऊंगी… उन्हें मां से दूर कर के मां का घमंड तोड़ दूंगी… तनु ने यह फैसला लेने में जरा भी देर नहीं लगाई. मगर यह इतना आसान नहीं है, यह बात भी वह अच्छी तरह से जानती थी. अपनी योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए उस ने अभिषेक पर पैनी नजर रखनी शुरू कर दी. उस की पसंदनापसंद को समझने की कोशिश करने लगी. उस के औफिस से आते ही वह उस के लिए पानी का गिलास भी लाने लगी थी. हां, अभिषेक को देख कर प्यार से मुसकराने में उसे जरूर थोड़ा वक्त लगा था. ‘‘मां, सिर में बहुत तेज दर्द है… थोड़ा बाम लगा दो न…’’ तनु जोर से चिल्लाई तो अभिषेक भाग कर उस के कमरे में गए. देखा तो तनु बिस्तर पर औंधे मुंह पड़ी थी. शौर्ट पहने सोई तनु ने अपने शरीर पर चादर कुछ इस तरह से डाल रखी थी कि उस की खुली जांघों ने अभिषेक का ध्यान एक पल के लिए ही सही, अपनी तरफ खींच लिया. उन्हें अटपटा सा लगा तो चादर ठीक से ओढ़ा कर उस के सिर पर हाथ रखा. बुखार नहीं था. सृष्टि सब्जी लेने गई थी, अभी तक लौटी नहीं थी. इसीलिए वे तनु के सिरहाने बैठ कर उस का माथा सहलाने लगे. तनु ने खिसक कर अभिषेक की गोद में सिर रख लिया तो अभिषेक को अच्छा लगा. उन्हें विश्वास होने लगा कि शायद अब उन के रिश्ते में जमी बर्फ पिघल जाएगी.

धीरेधीरे तनु अभिषेक से खुलने लगी. कभीकभी सृष्टि की अनुपस्थिति में वह अभिषेक को जिद कर के बाहर ले जाने लगी. चलतेचलते कभी उस का हाथ पकड़ लेती तो कभी उस के कंधे पर सिर टिका लेती. अभिषेक भी पूरी कोशिश करते थे उसे खुश करने की. वे उस की जिंदगी में पिता की हर कमी को पूरा करना चाहते थे. मगर कभीकभी वे सोच में पड़ जाते थे कि आखिर तनु उन से क्या चाहती है, क्योंकि तनु ने अब तक उन्हें पापा कह कर संबोधित नहीं किया था. वह हमेशा उन से बिना किसी संबोधन के ही बात करती थी.

बाहर जाते समय कपड़ों के मामले में तनु अभिषेक के पसंदीदा रंग के कपड़े ही पहनती थी. एक दिन पार्क में बेंच पर अभिषेक के कंधे से लग कर बैठी तनु ने अचानक अभिषेक से पूछ लिया, ‘‘मैं आप को कैसी लगती हूं?’’ ‘‘जैसी हर पिता को अपनी बेटी लगती है… एकदम परी जैसी…’’ अभिषेक ने बहुत ही सहजता से जवाब दिया. मगर इसे सुन कर तनु के चेहरे की मुसकान गायब हो गई. फिर मन ही मन बड़बड़ाई कि किस मिट्टी का बना है यह आदमी… मैं तो इसे अपने मोहजाल में फंसाना चाह रही हूं और यह है कि मुझ में अपनी बेटी ढूंढ़ रहा है… या तो यह इंसान बहुत नादान है या फिर बहुत ही चालाक… कहीं ऐसा तो नहीं कि यह मेरी पहल का इंतजार कर रहा है? लगता है अब मुझे अपना मास्टर स्ट्रोक खेलना ही पड़ेगा और फिर मन ही मन कुछ तय कर लिया. ‘‘अभिषेक, मां की तबीयत बहुत खराब है. उन्हें मेरी जरूरत है. मुझे 2-4 दिनों के लिए वहां जाना होगा. तुम तनु का खयाल रखना प्लीज…’’ सृष्टि ने अभिषेक के औफिस लौटते ही कहा तो तनु की जैसे मन मांगी मुराद पूरी हो गई हो. वह ऐसे ही किसी मौके का तो इंतजार कर रही थी. वह कान लगा कर उन दोनों की बातें सुनने लगी. थोड़ी ही देर में सृष्टि ने कैब बुलाई और 4 दिनों के लिए अपनी मां के घर चली गई. जातेजाते उस ने तनु को गले लगा कर समझाया कि वह अपना और अभिषेक का खयाल रखे.

अभिषेक को रात में सोने से पहले शावर बाथ लेने की आदत थी. जब वह नहा कर बाथरूम से बाहर आया तो तनु को अपने बैड पर सोते देख चौंक गया. कमरे की डिम लाइट में पारदर्शी नाइटी से तनु के किशोर अंग झांक रहे थे. तनु दम साधे पड़ी अभिषेक की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रही थी. अभिषेक कुछ देर तो वहां खड़े रहे, फिर धीरे से तनु को चादर ओढ़ाई और लाइट बंद कर के लौबी में आ कर बैठ गए. सुबह दूधवाले ने जब घंटी बजाई तो उसे भान हुआ कि वह रात भर यह सोफे पर ही सो रहा था. तनु हताश हो गई. अभिषेक को अपनी ओर खींचने के लिए किस डोरी से बांधे उसे… उस के सारे हथियार 1-1 कर निष्फल हो रहे थे. कल तो मां भी वापस आ जाएंगी… फिर उसे यह सुनहरा मौका नहीं मिलेगा… उसे जो कुछ करना है आज ही करना होगा. तनु ने आज आरपार का खेल खेलने की ठान ली.

रात लगभग आधी बीत चुकी थ्ीि. अभिषेक नींद में बेसुध थे. तभी अचानक किसी के स्पर्श से उन की आंख खुल गई. देखा तो तनु थी. उस से लिपटी हुई. अभिषेक कुछ देर तो यों ही लेटे रहे, फिर धीरे से करवट बदली. अभिषेक तनु के मुंह पर झुकने लगे. तनु अपनी योजना की कामयाबी पर खुश हो रही थी. अभिषेक ने धीरे से उस के माथे को चूमा और फिर अपने ऊपर आए उस के हाथ को छुड़ा तनु को वहीं सोता छोड़ लौबी में आ कर सो गए. उस दिन संडे था. सृष्टि कुछ ही देर पहले मां के घर से लौटी थी. नहानेधोने और नाश्ता करने के बाद सृष्टि अभिषेक को मां की तबीयत के बारे में बताने लगी. तनु के कान उन दोनों की बातों की ही तरफ लगे थे. वह डर रही थी कि कहीं अभिषेक उस की हरकतों की शिकायत सृष्टि से न कर दे. अचानक सृष्टि ने जरा शरमाते हुए कहा, ‘‘अभि, मां चाहती हैं किअब हम दोनों का भी एक बेबी आना चाहिए.’’

यह सुनते ही तनु को झटका सा लगा. ‘लो, अब यही दिन देखना बाकी रह गया था. अब इस उम्र में मां फिर से मां बनेंगी… हुंह,’ तनु ने सोच कर मुंह बिचका दिया.

‘‘सृष्टि मुझे तनु के प्यार में कोई हिस्सेदारी नहीं चाहिए… मैं तुम से यह बात छिपाने के लिए माफी चाहता हूं, मगर तुम से शादी करने से पहले ही मैं ने फैसला कर लिया था कि मुझे तनु अपनी एकमात्र संतान के रूप में स्वीकार है, इसलिए मैं ने बिना किसी को बताए हमारी शादी से पहले ही अपना नसबंदी का औपरेशन करवा लिया था,’’ अभिषेक ने कहा. यह सुन कर सृष्टि और तनु दोनों ही

चौंक उठीं. ‘‘हमें तनु का खास खयाल रखना होगा सृष्टि… 16 साल की तनु मन से अभी भी 6 साल की अबोध बच्ची है… यह अपनेआप को बहुत अकेला महसूस करती है… कोई भी बाहरी व्यक्ति इस के भोलेपन का गलत फायदा उठा सकता है. बिना बाप की यह मासूम बच्ची कितनी डरी हुई है. यह मुझे पिछले 3 दिनों में एहसास हो गया. तुम्हें पता है, इसे रात में कितना डर लगता है? इसे जब डर लगता था तो यह कितनी मासूमियत से मुझ से लिपट जाती थी… नहीं सृष्टि मैं तनु का प्यार किसी और के साथ नहीं बांट सकता… मैं बहुत खुशनसीब हूं कि कुदरत ने मुझे इतनी प्यारी बेटी दी है,’’ अभिषेक अपनी ही रौ में बहे जा रहे थे.

सृष्टि अपलक उन्हें निहार रही थी. और तनु? वह तो शर्म से पानीपानी हुई जैसे जमीन में गड़ जाना चाहती थी. फिर जैसे ही अभिषेक ने आ कर उसे गले से लगाया तो वह सिसक उठी. आंखों से बहते आंसुओं के साथ मन का सारा मैल धुलने लगा. सृष्टि ने पीछे से आ कर दोनों को अपनी बांहों में समेट लिया. अभिषेक ने तनु के गाल थपथपाते हुए कहा, ‘‘अब बना है यह सही माने में स्वीट होम…’’

तनु ने मुसकराते हुए धीरे से कहा, ‘‘लव यू पापा,’’ और फिर उन से लिपट गई.

संतुलित सहृदया: एक दिन जब समीरा से मिलने आई मधुलिका

स्किन टाइटनिंग के लिए बेस्ट हैं ये 3 फेस मास्क

अगर आपको खूबसूरत चेहरा चाहिए तो आपको इस बात का पता होगा कि त्‍वचा अगर टाइट बनी रहती है तो चेहरा अपने आप चमकने लगता है. मगर उम्र के साथ साथ हमारी त्‍वचा भी ढीली पड़ने लगती है, रूखी दिखने लगती है और उस पर बहुत सी झुर्रियां आ जाती हैं. इस चीज को हटाने के लिये आप घर पर ही फेस मास्‍क तैयार कर सकती हैं, जिससे त्‍वचा टाइट नजर आने लगेगी. तो आइए जानें त्‍वचा को टाइट बनाने वाले कुछ खास फेसमास्क के बारे में.

  1. एग वाइट मास्‍क

अंडे को फोड़ कर उसका सफेद भाग पीले वाले से अगल कर दें. फिर इसे सीधे अपने चेहरे पर लगा कर सुखा लें. बाद में हल्‍के गरम पानी से चेहरा धो लें. इसके अलावा आप अंडे में मुल्‍तानी मिट्टी, ग्‍लीसरीन और शहद मिला कर भी प्रयोग कर सकती हैं.

2. अंडा और दही

1 अंडे में 1 चम्‍मच दही और आधा चम्‍मच चीनी मिलाइये. अंडे को फेंट कर उसमें ये सभी चीजें मिक्‍स करें और चेहरे पर लगाएं. जब चेहरा सूख जाए तब इसे धो लें.

3. पत्‍तागोभी और चावल

पत्‍तागोभी की दो तीन पत्‍तियों को पीस कर उसमें 2 चम्‍मच चावल का आटा मिक्‍स करें. फिर उसमें बादाम या औलिव औइल डाल कर चेहरे पर लगाएं. अगर चेहरा औइली है तो पैक में तेल ना मिलाएं. पत्‍ता गोभी की पत्‍तियां चेहरे से झुर्रियां मिटाती हैं.

4. पत्‍तागोभी और शहद मास्‍क

पत्‍ता गोभी की पत्‍तियों का पेस्‍ट बना कर उसमें दही और शहद मिलाएं. अगर स्‍किन ड्राई है तो उसमें बदाम या औलिव औइल मिलाएं. इस पेस्‍ट को चेहरे पर 20 मिनट तक रहने दें और फिर हल्‍के गरम पानी से धो लें.

गहराता शक: भाग 1-आखिर कुमुद को पछतावा क्यों हुआ?

कुमुद को पछतावा हो रहा था कि उस ने समय रहते सुमित्रा की बात पर ध्यान क्यों नहीं दिया. शादी से पहले उस प्राइवेट कालेज में सुमित्रा उस की घनिष्ठ सहेली थी. कुमुद के विवाह की बात चल रही थी. सुमित्रा विवाहित थी और शादी के बाद अब फिर बीए पूरा करने कालेज जा रही थी. एक दिन खाली घंटी में लाइब्रेरी के एक कोने में बैठ कर उस ने जोजो बातें कुमुद को सम?ाई थीं, वे याद आने लगीं.

कुमुद ने करवट बदली. घड़ी में 3 बज गए पर उस का पलंग से उठने का मन नहीं हो रहा था. चाय में अभी देरी थी. वह सुमित्रा की बातें सोचने लगी…

सुमित्रा ने बड़ी गंभीरता से कहा था, ‘‘कुम, मेरी बात पर ध्यान दे. पत्रपत्रिकाओं या किताबों में पढ़ी बातें कह रही हूं, व्हाट्सऐप वाली नहीं. जो कुछ जिंदगी में थोड़ा सा देखा हुआ है, जो गंभीर पढ़ा था, जो भोगा है वही बता रही हूं कि किसी भी हालत में किसी लड़के को पत्र मत लिखना, डायरी न रखना कंप्यूटर पर चाहे पासवर्ड से सेफ क्यों न हों. डायरी रखनी हो तो बस रोजमर्रा की मामूली बातें लिखना, शरत की नायिका की तरह उस में अपनी भावुकता किसी के बारे में बघारने मत बैठ जाना, सम?ा? सब से बड़ी बात सैल्फी लेने में हिचकना. कम से कम सैल्फी या फोटो ही अच्छे रहते हैं.’’

कुमुद ने हंस कर पूछा, ‘‘तू ये बातें कैसे जानती है? क्या कोई…’’

‘‘चुप रह, बेवकूफ लड़की,’’ सुमित्रा ने गुस्से से उसे डांटा, ‘‘तुझे क्या पता. हंस रही है. उस सोमेन को ज्यादा मुंह न लगा. कोई खास

बात हो तुम लोगों के बीच, इस से बहस नहीं, पर वह नौजवान लड़का है. उस के प्रति या तो पूरी तरह समर्पित हो कर उस पर मर मिट और उस से अभी शादी कर ले या फिर उस से दूर रह.’’

कुमुद ने गंभीरता से कहा, ‘‘सुमि, सोमेन या किसी लड़के से मैं मित्र या भाई का संबंध रखूं तो क्या हो गया, लोगों की तो आदत है कि जहां किसी लड़की को किसी लड़के से मिलते देखा नहीं कि झट उन्हें प्रेमीप्रेमिका मान बैठते हैं. अपना दिल साफ रहना चाहिए, बस. प्रेम विवाह तो आज की जरूरत है.’’

‘‘भई, अब तू जाने, तेरा काम जाने,’’ सुमित्रा ने ऊब कर कहा, ‘‘मेरा काम तुझे समझना था सो समझ दिया. ये सारे किताबी सिद्धांत हैं. मेरा मतलब है जरा होशियार रह.

प्रेम विवाह पर पात्र भी तो देखा जाता है. देखसुन कर काम कर. अब मैं कुछ नहीं कहूंगी, तू बच्ची नहीं.’’

सुमित्रा की ये बातें कुमुद के कानों में लगातार गूंज रही थीं. खट की आवाज पर वह चौंकी. बाई ने  पलंग की बगल के स्टूल पर चाय की ट्रे ला कर रख दी थी.

कुमुद ने पूछा, ‘‘नीता कहां हैं, देखो.’’

तभी परदा हटा कर चमकतीदमकती नीता भीतर आई. बोली, ‘‘लो भाभी, मैं आ गई. जरा हाथमुंह धोने बाथरूम तक गई थी.’’

कुमुद ने देखा, नीता के सुंदर चेहरे पर से पानी की बूंदें टपक रही थीं. कई बड़ीबड़ी बूंदें कनपटियों के बालों में उलझ हुई थीं. उस ने प्यार से कहा, ‘‘चेहरे से पानी तो पोंछ लो.’’

कुमुद चाय बनाने लगी.

नीता ने आंचल से मुंह थपक कर पानी सुखाते हुए कहा, ‘‘भैया के आने का समय तो 5 बजे का है. तब तुम्हें चाय फिर पीनी पड़ेगी, भाभी.’’

‘‘और?’’ कुमुद मुसकराई, ‘‘बरामदे पर चाय की मेज सजाए. खुद भी सजधज कर मधुर मुसकान बिखेरते तुम्हारे भैया का स्वागत भी तो करना पड़ेगा. आखिर आजकल मैं औफिस से 10 दिन की पेड लीव पर हूं.’’

नीता हंसी, ‘‘सच भाभी, क्या वाहियात औपचारिकता है.’’

‘‘जरूरी है,’’ कुमुद ने हलके व्यंग्यात्मक भाव से कहा, ‘‘कोई बेचारा दिनभर चक्की में जुत कर घर लौटे तो दूसरा दरवाजे पर खड़ा उस का स्वागत करे, यही नया नियम बनाया है आज के मनी वैज्ञानिकों ने.’’

नीता ने बगल की बुक शैल्फ से हैराल्ड राबिंस की किताब ‘द पाइरेट’ उठाई. 1-2 पृष्ठ उलटेपलटे, फिर बोली, ‘‘फिर भी भाभी जरा उन विकसित उन्नत देशों की स्त्रियों को देखो, जो अपने को बड़ी स्वतंत्र, पुरुष की बराबरी का समझती हैं. उन्हें किस प्रकार पुरुषों की गुलामी में सामूहिक रूप से जीना पड़ रहा है, कैसे वे आर्थिक, सामाजिक चक्रव्यूह में फंसी नाचती रहती हैं. पुरुषों की नजर में उन की कीमत सिर्फ उन के शरीर की है. वहां तो सामाजिक निर्माण में स्त्रियों की अभी भी मर्दों के बराबर की भूमिका नहीं. वहां के समाज ने उन्हें फुसलाने को ऊंची पोस्टों पर रख तो लिया है, पर असल में सारे फैसले पुरुष मैजोरिटी से ही होते हैं. ऊंचे पद पर बैठी औरत पर अभी भी हर जगह पुरुष का अहं चलता है. उस का निजी सम्मान उस की गर्लफ्रैंड या पत्नी में बसता है.’’

‘‘दूसरी तरफ,’’ कुमुद बोली, ‘‘हम लोगों में भी गांव की और मजदूरपेशा स्त्रियां पुरुष के साथ ज्यादा बराबरी का दर्जा रखती हैं. हम तो कभी गृहिणी बन जाती हैं तो कभी ड्राइंग रूमी शो पीस.’’

नीता ने जरा गंभीर हो कर पूछा, ‘‘तुम्हारे वे ओल्ड फ्रैंड तो बहुत मानते हैं तुम्हें, भाभी?’’

कुमुद के हाथ का कप हौले से कांप गया. नीता का ध्यान उधर नहीं था. वह अपनी ही रौ में कहती रही, ‘‘बड़े सीधे लगते हैं.’’

‘‘हां, सीधासादा है,’’ कुमुद की आवाज जैसे कहीं दूर से आ रही हो, ‘‘छोड़ो उसे. उस से मेरा कोई विशेष संबंध नहीं है. यों ही पड़ोस के नाते दोस्ती है.’’

नीता चाय की चुसकी लेती रही. कुमुद को पहले क्या पता कि उस कमबख्त सुमित्रा की बातें कैसे आड़े आएंगी. किसे पता था उस के पड़ोस का वही सोमेन यहीं की ब्रांच में बदल कर आ पहुंचेगा और बीच बाजार में उस से भेंट भी होगी.

उस ने कभी सोमेन को एक नटखट, गैरजिम्मेदार और खिलाड़ी टाइप के नौजवान से अधिक कुछ नहीं समझ था. पड़ोस का मुंहबोला भाई होने के नाते वह प्राय: घर में आता रहता. कुमुद की मां को वह आंटी कहता. कुमुद को जरा चोर निगाहों से देखता था, जो इस अवस्था में सहज स्वाभाविक ही था. कुमुद को याद है, हर साल रक्षाबंधन पर जब वह उन के घर जाती तो प्राय: किसी जरूरी काम से वह दिनभर बाहर रहता. उसे राखीटीका सब ढोंग प्रतीत होते.

कुमुद इन बातों का अर्थ समझती थी पर उस की नई उम्र में एक कुतूहल, एक सुखद सी उत्तेजना के सिवा इन का महत्त्व कुछ और नहीं था. कभीकभार जब कई लोग कहीं जा रहे होते तो वह भी साथ रहता था. रात वाली पार्टियों के बाद उसे घर छोड़ने भी वही आता. समवयस्क किशोरियों की भांति वह भी लड़कों को अपने प्रति आकर्षित देख प्रसन्न होती. उम्र की मांग के अनुरूप इस का भी विभिन्न तरीकों से अंदाजा लगाती रहती कि उस में लड़कों को खींचने योग्य कितना आकर्षण है. वह गु्रप फोटो में अकसर साथ होता.

यही छोटा सा, नगण्य खेल उस की विवाहिता सहेली सुमित्रा की नजरों से बच न पाया. कुमुद को उस ने तभी वे बातें समझाई थीं. उस ने उसे देर रात घर छोड़ते भी देखा था और साथ में कई दोस्तों के साथ रेस्तरांओं में खातेपीते भी.

कुमुद सोचने लगी, ‘क्या किया उस ने आखिर? सोमेन को कभी कोई साहस भी न हो पाया कि उसे उस से कुछ है या उस से कोई अपेक्षा है. वही बिंदास सा सामान्य खेल था, जो घर वालों की उपस्थिति में टीनऐजर्स खेल लेते हैं. कभी भी कोई प्यारव्यार या क्रश की बात नहीं, कोई फिल्मी डायलाग नहीं? कोई व्हाट्सऐप चैंट नहीं. न ही किसी तरह की कोई रंचमात्र की हरकत, न उस की रसीद. सोमेन उन दिनों बड़े दब्बू किस्म का लड़का था.’

फिर वह क्यों डरती है सोमेन से. नहीं, वह सोमेन से नहीं डरती. वह तो डरती है खुद से, रघु की संभावित प्रतिक्रियाओं से, उस के पति के अधिकारबोध से, उस की पतिसुलभ मानसिकता से, नीता से और सब से, एक सोमेन को छोड़ वह सब से डर रही है.

नीता चाय का खाली कप रख कर जा चुकी थी. कुमुद ने विचारमग्न सा दूसरा कप तैयार किया.

आज से एक सप्ताह पहले सोमेन बाजार में अकस्मात मिल गया. कुमुद नीता के साथ एक दुकान पर खड़ी साडि़यां और रघु के लिए शर्ट देख रही थी.

बगल के काउंटर पर कपड़े पसंद करता सोमेन उसे देख लपक आया. खुशीखुशी बोला, ‘‘हैलो, कुमुद तुम हो? भई वाह, खूब मिली. मेरी बदली यहीं की ब्रांच में हुई है. परसों ही तो आया हूं. तुम से मिलने की सोच रहा था.’’

कुमुद ने नमस्कार करते हुए कहा, ‘‘सोमेन भैया, यह मेरी ननद है नीता… तुम कभी घर पर आना न, पता तो जानते ही होंगे.’’

सोमेन बुजुर्गों की तरह हंसा, ‘‘पता नहीं जानूंगा. तिलक ले कर मैं भी तो आया था.’’

पता नहीं, सोमेन से यों भेंट होना कुमुद को पसंद नहीं आ रहा था. वह यह भी देख रही थी कि सालभर पहले का दब्बू सा सोमेन अब काफी तेज लग रहा है. तेजी से बोलने लगा है. पहले सा मन में बात दबाता नहीं लगा.

शेष जीवन: भाग 2- विनोद के खत में क्या लिखा था

‘‘तुम्हें तो बहाना चाहिए मुझे ताना मारने का.’’

‘‘क्यों न मारूं ताना? एक बाली तक खरीद कर ला न सके. जो हैं वही बेटी के काम आ रहे हैं. मुझे पहनने का मौका कब मिला?’’ ‘‘बूढ़ी घोड़ी लाल लगाम,’’ विनोद ने हंसी की, ‘‘अब कौन सा सजसंवर कर बरात की शोभा बढ़ानी है तुम्हें.’’

‘‘जब थी तब ही कौन सा गहनों से लाद दिया था.’’

‘‘स्त्री का सब से बड़ा गहना उस का पति होता है.’’

‘‘रहने दीजिए, रहने दीजिए. खाली बातों से हम औरतों का दिल नहीं भरता. मैं मर्दों के चोंचले अच्छी तरह से जानती हूं. हजारों सालों से यही जुमले कह कर आप लोगों ने हम औरतों को बहलाया है.’’

‘‘तुम्हें कौन बहला सकता है.’’

‘‘बहकी हूं तभी तो 30 साल तुम्हारे साथ गुजार दिए.’’

‘‘नहीं तो क्या किसी के साथ भाग जातीं?’’

‘‘भाग ही जाती अगर कोई मालदार मिलता,’’ सुमन ने भी हंसी की. ‘‘भागना क्या आसान है? मुझ जैसा वफादार पति चिराग ले कर भी ढूंढ़तीं तो भी नहीं मिलता.’’ ‘‘वफादारी की चाशनी से पेट नहीं भरता. अंटी में रुपया भी चाहिए. वह तो आप से ताउम्र नहीं हुआ. थोड़े से गहने बचे हैं, उन्हें बेटी को दे कर खाली हो जाऊंगी,’’ सुमन जज्बाती हो गई, ‘‘औरतों की सब से बड़ी पूंजी यही होती है. बुरे वक्त में उन्हें इसी का सहारा होता है.’’ ‘‘कल कुछ बुरा हो गया तो दवादारू के लिए कुछ भी नहीं बचेगा.’’ सुमन के साथ विनोद भी गहरी चिंता में डूब गए, जब उबरे तो उसांस ले कर बोले, ‘‘यह मकान बेच देंगे.’’

‘‘बेच देंगे तो रहेंगे कहां?’’

‘‘किराए पर रह लेंगे.’’ ‘‘कितने दिन? वह भी पूंजी खत्म हो जाएगी तब क्या भीख मांगेंगे?’’ ‘‘तब की तब देखी जाएगी. अभी रेखा की शादी निबटाओ,’’ विनोद यथार्थ की तरफ लौटा. गहने लगभग 3 लाख रुपए के थे. एकाध सुमन अपने पास रखना चाहती थी. एकदम से खाली गले व कान से रहेगी तो समाज क्या कहेगा? खुद को भी अच्छा नहीं लगेगा. यही सोच कर सुमन ने तगड़ी और कान के टौप्स अपने पास रख लिए. वैसे भी 2 लाख रुपए के गहने ही देने का तय था. जैसेजैसे शादी के दिन नजदीक आ रहे थे वैसेवैसे चिंता के कारण सुमन का ब्लडप्रैशर बढ़ता जा रहा था. एकाध बार वह चक्कर खा कर गिर भी चुकी थी. विनोद ने जबरदस्ती ला कर दवा दी. खाने से आराम मिला मगर बीमारी तो बीमारी थी. अगर जरा सी लापरवाही करेगी तो कुछ भी हो सकता है. विनोद को शुगर और ब्लडप्रैशर दोनों था. तमाम परेशानियों के बाद भी वे आराम महसूस नहीं कर पाते. वकालत का पेशा ऐसा था कि कोई मुवक्किल बाजार का बना समोसा या मिठाई ला कर देता तो ना नहीं कर पाते. सुमन का हाल था कि वह अपने को देखे कि विनोद को. आखिर शादी का दिन आ ही गया, जिस को ले कर दोनों परेशान थे. रेखा सजने के लिए ब्यूटीपार्लर गई. विनोद की त्योरियां चढ़ गईं, ‘‘अब यह खर्चा कहां से दें? 5 हजार रुपए कम होते हैं. एकएक पैसा बचा रहा हूं जबकि मांबेटी बरबाद करने पर तुली हुई हैं.’’ ‘‘बेटी पैदा की है तो सहन करना भी सीखिए. इस का पेमैंट रेखा खुद करेगी. अब खुश.’’

यह सुन कर विनोद ने राहत की सास ली और चैन से बैठ गया. फुटकर सौ तरह के खर्च थे. शादी के चंद दिनों पहले वर के पिता बोले कि सिर्फ डीजे लाएंगे. अगर बैंड पार्टी करनी हो तो अपने खर्च पर करें. विनोद को तो कोई फर्क नहीं पड़ा, सुमन ने मुंह बना लिया, ‘‘कैसा लगेगा बिना बैंड पार्टी के?’’ ‘‘जैसा भी लगे, हमें क्या. हमें शादी से मतलब है. रेखा सात फेरे ले ले तो मैं गंगा नहाऊं.’’ विनोद के कथन पर सुमन चिढ़ गई, ‘‘चाहे तो अभी नहा लीजिए. लोकलाज भी कुछ चीज है. सादीसादी बरात आएगी तो कैसा लगेगा?’’ ‘‘जैसा भी लगे. मैं फूटी कौड़ी भी खर्च करने वाला नहीं,’’ थोड़ा रुक कर, ‘‘जब उन्हें कोई एतराज नहीं तो हम क्यों बिलावजह टांग अड़ाएं?’’

‘‘मुझे एतराज है,’’ सुमन बोली.

‘‘तो लगाओ अपनी जेब से रुपए,’’ विनोद खीझे.

‘‘मेरे पास रुपए होते तो मैं क्या आप का मुंह जोहती,’’ सुमन रोंआसी हो गई. तभी राकेश आया. दोनों का वार्त्तालाप उस के कानों में पड़ा. ‘‘दीदी, तुम बिलावजह परेशान होती हो. बाजे का मैं इंतजाम कर देता हूं.’’ सुमन ने जहां आंसू पोंछे वहीं विनोद के रुख पर वह लज्जित हुई. विनोद को अब भी आशंका थी कि लड़के वाले ऐन मौके पर कुछ और डिमांड न कर बैठें. सजधज कर रेखा बहुत ही सुंदर दिख रही थी. विनोद और सुमन की आंखें भर आईं. भला किस पिता को अपनी बेटी से लगाव नहीं रहेगा. विनोद को आज इस बात की कसक थी कि काश, उस की अच्छी कमाई होती तो निश्चय ही रेखा की बेहतर परवरिश करता. रातभर शादी का कार्यक्रम चलता रहा. भोर होते ही रेखा की विदाई होने लगी तो सभी की आंखें नम थीं. रेखा का रोरो कर बुरा हाल था. सिसकियों के बीच बोली, ‘‘मम्मी, पापा, मैं चली जाऊंगी तो आप लोगों का खयाल कौन करेगा?’’

‘‘उस की चिंता मत करो, बेटी,’’ सुमन नाक पोंछते हुए बोली. अपनी बड़ी मौसी की तरफ मुखातिब हो कर रेखा भर्राए कंठ से  बोली, ‘‘मौसी, इन का खयाल रखना. इन का मेरे सिवा है ही कौन?’’

‘‘ऐसा नहीं कहते, हम लोग भरसक इन की देखभाल करेंगे,’’ मौसी रेखा के सिर पर हाथ फेरते हुए बोलीं. ‘‘मम्मी को अकसर गरमी में डिहाइड्रेशन हो जाता है. आप खयाल कर के दवा का इंतजाम कर दीजिएगा ताकि रातबिरात मां की हालत बिगड़े तो संभाला जा सके.’’

‘‘तू उस की फिक्र मत कर. मैं अकसर आतीजाती रहूंगी.’’ सुमन इस कदर रोई कि उस की हालत बिगड़ गई. एक हफ्ता बिस्तर पर थी. विनोद का भी मन नहीं लग रहा था. ऐसा लग रहा था मानो उन के शरीर का कोई हिस्सा उन से अलग हो गया हो. हालांकि रेखा 2 साल से बाहर नौकरी कर रही थी लेकिन तब तक एहसास था कि वह विनोद के परिवार का हिस्सा थी. अब तो हमेशा के लिए दूसरे परिवार का हिस्सा बन गई. उन्हीं के तौरतरीके से जीना होगा उसे. सुमन की तबीयत संभली तो रेखा को फोन किया.

‘‘हैलो, बेटा…’’

‘‘कैसी हो, मम्मी,’’ रेखा का गला भर आया.

‘‘ठीक हूं.’’

‘‘अपना खयाल रखना.’’

‘‘अब रखने का क्या औचित्य? बेटाबहू होते तो जीने का बहाना होता,’’ सुमन का कंठ भीग गया.

‘‘मम्मी,’’ रेखा ने डांटा, ‘‘आइंदा इस तरह की बातें कीं तो मैं आप से बात नहीं करूंगी,’’ उस ने बातचीत का विषय बदला, ‘‘जयपुर जा रही हूं,’’ रेखा के स्वर से खुशी स्पष्ट थी. ‘‘यह तुम लोगों ने अच्छा सोचा. यही उम्र है घूमनेफिरने की. बाद में कहां मौका मिलता है, घरगृहस्थी में रम जाओगी.’’ रेखा ने फोन रख दिया. विनोद ने सुना तो खुश हो गए. यहां भी सुमन ताना मारने से बाज न आई, ‘‘एक हमारी शादी हुई. बहुत हुआ तो आप ने रिकशे पर बिठा कर किसी हाटबाजार के दर्शन करा दिए. हो गया हनीमून…’’

‘‘बुढ़ापे में तुम्हें हनीमून सूझ रहा है.’’

‘‘मैं जवानी की बात कर रही हूं. शादी के पहले दिन आप रुपयों का रोना ले कर बैठ गए. आज 30 साल बाद भी रोना गया नहीं. कम से कम रेखा का पति इतना तो समझदार है कि अपनी बीवी को जयपुर घुमाने ले जा रहा है.’’ ‘‘सारी दुनिया बनारस घूमने आती है और तुम्हें जयपुर की पड़ी है,’’ विनोद ने अपनी खीझ मिटाई. ‘‘आप से तो बहस करना ही बेकार है. नईनई शादी की कुछ ख्वाहिशें होती हैं. उन्हें क्या बुढ़ापे में पूरी करेंगे?’’ ‘‘अब ऊपर जा कर पूरी करना,’’ कह कर विनोद अपने काम में लग गए. 3 साल गुजर गए. इस बीच रेखा 1 बेटे की मां बनी. ससुराल वाले ननिहाल का मुख देखने लगे. सुमन ने अपने हाथों की एक जोड़ी चूड़ी बेच कर अपने नाती के लिए सोने की पतली सी चेन, कपड़े और फल व मिठाइयों का प्रबंध किया. विनोद की हालत ऐसी नहीं थी कि वे इस सामान को ले जा सकें. वजह, उन्हें माइनर हार्ट का दौरा पड़ा था. चूंकि घर में और कोई नहीं था सो वे ही किसी तरह इलाहाबाद गए.

चोरी की पोल खुलते ही बौबी देओल का अपने प्रशंसक पर फूटा गुस्सा

हालिया प्रदर्शित संदीप रेड्डी वांगा की फिल्म ‘‘एनीमल’’में बौबी देओल का छोटा सा किरदार है.इसके एक दृश्य में बौबी देओल सिर पर शराब का गिलास रख कर नृत्य करते हुए नजर आ रहे हैं.जब हर तरफ से बौबी को तारीफ मिलने लगी,तो बौबी देओल इस कदर हवा में उड़ने लगे कि वह अनाप शनाप बकने लगे हैं.लोगो के संग उनका व्यवहार भी बहुत गलत हो गया है.अपने अहम में चूर बौबी देओल ने दावा किया है कि फिल्म ‘एनीमल’ में सिर पर शराब का गिलास रखकर डांस करने का उनका जो दृश्य है, वह पूरी तरह से मौलिक और उनके दिमाग की उपज है.बौबी देओल का दावा है कि उन्होने ही निर्देशक संदीप रेड्डी वांगा को इस डांस के दृश्य को इस तरह फिल्माने के लिए सलाह दी थी.

अपने अहम में डूबे बड़बोले बौबी देओल ने जाने अनजाने इस बात को कबूल कर लिया कि वह दूसरी फिल्मों के दृश्यों की चोरी करने में माहिर हैं.जी हाॅ! पूरी दुनिया जानती है कि 29 जनवरी 1993 को मेहुल कुमार निर्देशित फिल्म ‘‘तिरंगा’’ प्रदर्शित हुई थी.इस फिल्म में नाना पाटेकर व स्व.राज कुमार शराब पीते हुए डांस करते हैं.इस नृत्य में नाना पाटेकर अपने सिर पर शराब का गिलास रखकर डांस करते हैं.यही वजह है कि बौबी देओल के ही एक प्रशंसक ने सोशल मीडिया पर फिल्म ‘तिरंगा’’ के इस डांस वाले दृश्य को सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए बौबी देओल से सवाल पूछ लिया कि वह सिर्फ चोरी करने में ही क्यों यकीन करते हैं?

सोशल मीडिया पर इस सच के सामने आने के बाद बौबी देओल का मूड़ इतना खराब हो गया कि अब वह अपने प्रशंसकों को धक्का मार दूर भगाने लगे है. यह कटु सत्य है. दो दिन पहले बौबी देओल मुंबई एअरपोर्ट पर नजर आए.उन्हे देखकर उनका एक प्रशंसक बौबी देओल के पास पहंुच गया और उसने  बौबी देबोल से एक सेल्फी लेने के लिए कहा.गुस्से में तमतमाए बौबी देओल ने उसे धक्का मारकर आगे बढ़ गए…और उनका यह प्रशंसक उनके व्यवहार से अचंभित रह गया.

फिल्म ‘एनीमल’ की सफलता से अहम में चूर बौबी देओल भूल गए कि वह कई वर्षों से घर पर बैठे हुए थे.बीच में वह वेब सीरीज ‘‘आश्रम’’ में जरुर नजर आए थे,पर इससे उनके अभिनय कैरियर पर कोई असर नही हुआ था.अब ‘एनीमल’ में बामुश्किल दस मिनट के छोटे किरदार की तारीफ हुई,तो वह हवा में उड़ रहे हैं. फिलहाल उनके पास एक भी हिंदी फिल्म नही है.दक्षिण में उन्हे एक फिल्म मिलने की बात कही जा रही है.पर अभी तक इस फिल्म की पटकथा भी तैयार नही है.यह फिल्म कब शुरू होगी,किसे पता…मगर बौबी देओल का यही रवैया रहा,तो उन्हे ही उसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा….           .

मेरे कानों में मैल बहुत जमा है कैसे साफ करुं

सवाल

मेरे कानों में मैल बहुत जमा होता है. थोड़ा कड़ा भी हो जाता है. क्या करूं?

जवाब

अधिकतर लोग सोचते हैं कि हमें हमारे शरीर की तरह कानों को भी साफ रखना चाहिए. लेकिन कानों के मामले में आप को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि ये स्वयं अपनेआप को साफ कर लेते हैं. कई बार हम कानों को साफ करने के चक्कर में उन में कोई नुकीली चीज डाल देते हैं जिस से अस्थायी रूप से सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है या कान का परदा फट सकता है. इसलिए अपने कानों में बिना सोचेसम?ो कुछ न डालें. इयर वैक्स अपनेआप इयर कैनाल से बाहर आ जाता है. अगर इयर वैक्स कड़ा हो गया है और इयर कैनाल को अवरुद्ध कर रहा है तो डाक्टर से संपर्क करें.

-डा. विपाशा ब्रजपुरिया

सीनियर कंसल्टैंट, ईएनटी डिपार्टमैंट, एकार्ड सुपर स्पैश्यलिटी हौस्पिटल, फरीदाबाद. 

पाठक अपनी समस्याएं इस पते पर भेजें : गृहशोभा, ई-8, रानी झांसी मार्ग, नई दिल्ली-110055.

स्रूस्, व्हाट्सऐप मैसेज या व्हाट्सऐप औडियो से अपनी समस्या 9650966493 पर भेजें.

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