ससुर अमिताभ बच्चन संग डांस करती नजर आई ऐश्वर्या राय, वायरल हुआ वीडियो

Aishwarya Rai Bachchan Dance video: बॉलीवुड के गलियारों से इन दिनों एश्वर्या राय बच्चन के ससुराल से अलगाव होने की खबरें काफी फैल रही है. सोशल मीडिया पर कहा जा रहा है कि एश्वर्या राय बच्चन की ससुरालवालों के संग काफी अनबन की खबरें आ रही है. हालांकि अभी तक एश्वर्या और उनके ससुरालवालों ने इस पर कोई बयान नहीं दिया है. फिलहाल इन सबके बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी वायरल हो रहा है. इस वीडियो में वह अपने ससुर अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan), शाहरुख खान (Shah Rukh Khan), करण जौहर (Karan Johar) सहित तमाम स्टार्स के साथ डांस करती नजर आ रही हैं.

आपको बता दें कि, मुंबई के धीरूभाई इंटरनेशनल स्कूल के एनुअल फंक्शन के मौके पर ये स्टार्स नजर आए और डांस किया. इन स्टार्स का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद फैंस जमकर रिएक्शन दे रहे हैं.

ऐश्वर्या और अभिताभ ने किया डांस

दरअसल, मुंबई के धीरूभाई इंटरनेशनल स्कूल में बॉलीवुड के तमाम सितारें के बच्चे पढ़ते है. स्कूल के एनुअल फंक्शन के मौके पर शाहरुख खान, ऐश्वर्या राय बच्चन, करीना कपूर खान, करण जौहर, शाहिद कपूर सहित तमाम स्टार्स अपने बच्चों को लेकर पहुंचे थे. इन स्टार्स ने अपने बच्चों की परफॉर्मेंस देखी और जमकर तारीफ की. इसके वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहे है. वहीं धीरूभाई इंटरनेशनल स्कूल से सामने से एक वीडियो आया जो काफी वायरल हो रहा है. इस वीडियो में ऐश्वर्या बच्चन, अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, करण जौहर और सुहाना खान सहित तमाम सितारे डांस करते नजर आ रहे हैं. ये सभी शाहरुख खान की फिल्म ‘ओम शांति ओम’ के गाने ‘दीवानगी-दीवानगी’ पर झूम रहे हैं.

 

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एश्वर्या राय बच्चन की ससुरालवालों के संग अनबन की खबरें

दरअसल, एश्वर्या राय बच्चन अपने ससुराल यानी बच्चन हाउस को छोड़कर अलग रहने की खबरे काफी सुर्खियों में है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एश्वर्या राय बच्चन ने जलसा हाउस छोड़ दिया है और अलग रह रही हैं. रिपोर्ट में बताया गया है कि ऐश्वर्या राय बच्चन की अपनी सास जया बच्चन के साथ बातचीत नहीं हो रही है और इसी वजह से परिवार में झगड़ा हुआ है. वहीं, जलसा में उनकी ननद श्वेता बच्चन के परमानेंट शिफ्ट होने की वजह से झगड़ा बढ़ गया है.

खाई में गिरकर छोटी अनु की होगी मौत, अनुपमा का हुआ बुरा हाल

Anupamaa upcoming twist: टीवी सीरियल ‘अनुपमा’ (Anupamaa) में इन दिनों काफी ड्रामा देखने को मिल रहा है वहीं शो के मेकर्स टीआरपी के लिए नए-नए ट्विस्ट लेकर आते रहते है. इस सीरियल में रुपाली गांगुली और गौरव खन्ना को जोड़ी दर्शकों को खूब पसंद आ रही है. लेकिन इस शो में जल्द आने वाले लीप से ये जोड़ी टूट जाएगी. अनुपमा सीरियल की गिरती टीआरफी के चलते शो के मेकर्स सीरियल में जल्द ही लीप का ट्विस्ट लेकर आ सकते है. जिससे अनुपमा की जिंदगी काफी बदल जाएगी. दरअसल, इस शो में अभी काफी ड्रामा देखने को मिलेगा. अपकमिंग एपिसोड में अनुपमा, किंजल, छोटी अनु और परी की जान खतरे में पड़ जाएगी.

छोटी अनु की वजह से आया बड़ा खतरा

रुपाली गांगुली (Rupali Ganguly) और गौरव खन्ना (Gaurav Khanna) स्टारर ‘अनुपमा’ के अपकमिंग एपिसोड में देखने को मिलेगा कि अनुपमा, किंजल, छोटी अनु और परी पिकनिक के बाद कार से घर लौट रहे होते हैं उसी दौरान किंजल के पास वनराज का फोन आता है. किंजल फोन नहीं उठाती. इसी दौरान अनुपमा परी को गोद में ले लेती है, जिससे छोटी अनु को मिर्ची लग जाती है और वह भी कार में अनुपमा की गोद में आने की जिद्द करती है. इस वजह से किंजल का बैलेंस बिगड़ जाता है और कार एक खंबे से टकरा जाती है. यहां पर कार खाई में जाने से बच जाती है, लेकिन जैसे ही अनुपमा घबराहट में दरबाजा खोलती है तो उसका पैर खाई में जाने से वह डर जाती है.

 

वनराज शाह करेगा तमाशा

टीवी सीरियल अनुपमा में देखने को मिलेगा कि इस परिस्थिति में अनुपमा काफी परेशान होती है वह शांत होकर परेशानी से निकालने की सोचती है. तभी छोटी अनु बार-बार आगे आने की जिद्द करती है, जिससे कार खाई में खिसकने लगती है. उस दौरान अनुपमा उसे सुनाकर बैठा देती है. वहीं दूसरी ओर शाह हाउस में वनराज शाह काफी तमाशा करता है. वह बार-बार अनुपमा को कोसता है. इसके साथ ही वह तोषू से कहता नजर आता है किंजल को ढूंढो.

वहीं अनुज भी अनुपमा को लेकर परेशान रहता है वह फिर शाह पहुंच जाता है वहां अनुज और वनराज की काफी बहस होती है.

अनुपमा सबकी जान बचाएगी

टीवी सीरियल ‘अनुपमा’ में आगे देखने को मिलेगा कि अनुपमा किंजल को होश में लाती है उसे कार से निकालती है अनुपमा उसके बाद परी को निकालती है. फिर खुद निकलती है. आखिर में अनुपमा छोटी अनु को बाहर निकलने लगती है, तो कार का दरवाजा बंद हो जाता है. इस मौके पर कार धीरे-धीरे खाई की ओर खिसकने लगती है, जिससे छोटी अनु की जान खतरे में पड़ जाती है. हालांकि, अनुपमा हार नहीं मानती. वह कार का कांच तोड़कर अपनी बेबली को बाहर निकाल लेती है.

मेरी नाक की हड्डी टेढ़ी है इसी वजह से मुझे सांस लेने में तकलीफ होती है, कोई उपाय बताएं

सवाल

मेरी नाक की हड्डी टेढ़ी है. इस से न केवल मेरा लुक खराब होता है बल्कि कभीकभी मुझे सांस लेने में भी परेशानी होती है. क्या करूं?

जवाब

कई लोगों की नाक की हड्डी मुड़ी हुई होती है. नाक की हड्डी टेढ़ी तब होती है जब नाक की दोनों नलियों (नासा मार्ग) के बीच की दीवार (नैजल सेप्टम) नाक के बीच में होने के बजाय एक तरफ खिसक जाती है. ज्यादातर लोगों में नाक की हड्डी टेढ़ी होने से उन की नाक की एक नली दूसरी से छोटी पड़ जाती है. लगता है आप की नाक की हड्डी ज्यादा टेढ़ी है क्योंकि ऐसा होने पर ही नाक एक तरफ से बंद हो जाती है जिस से नाक में कम हवा पहुंच पाती है और सांस लेने में दिक्कत होने लगती है. कई लोगों में टेढ़ी नाक के कारण नोज ब्लीड की समस्या भी होने लगती है. राइनोप्लास्टी (नाक की सर्जरी) ही इस का सब से कारगर उपचार है.

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मेरी उम्र 35 वर्ष है. पिछले कुछ दिनों से मेरे कानों में घंटी बजने की समस्या हो रही है. क्या करूं?

जवाब

किसी स्वास्थ्य समस्या के कारण या लगातार अत्यधिक शोर वाले स्थानों में रहने के कारण कई लोगों को कानों में घंटी बजने की समस्या हो जाती है जिसे चिकित्सीय भाषा में टिन्निटस कहते हैं. अगर किसी स्वास्थ्य समस्या के कारण कानों में घंटी बज रही है तो पहले उस का उपचार किया जाता है. कई बार इस का कारण सिर्फ कानों तक ही सीमित होता है जैसे इयर वैक्स के कारण कानों में ब्लौकेज हो रही हो तो उसे साफ किया जाता है, कानों की रक्त नलिकाओं से संबंधित कोई समस्या है तो उसे दवा या सर्जरी के द्वारा ठीक करने का प्रयास किया जाता है. अगर उम्र बढ़ने के कारण सुनने की क्षमता प्रभावित होने से यह समस्या हो रही हो तो हियरिंग ऐड के इस्तेमाल से आराम मिलता है.

पाठक अपनी समस्याएं इस पते पर भेजें : गृहशोभा, ई-8, रानी झांसी मार्ग, नई दिल्ली-110055.

स्रूस्, व्हाट्सऐप मैसेज या व्हाट्सऐप औडियो से अपनी समस्या 9650966493 पर भेजें.  

वीकेंड पर अकेली कामकाजी महिलाएं इन टिप्स से रखें खुद को व्यस्त

आज संडे है और बैंक कर्मी 45 वर्षीया सबीना जी सुबह से ही बहुत जल्दी जल्दी घर का सारा काम निबटा रहीं है क्योकिं हर रविवार को सुबह 12 बजे से लेकर 2 बजे तक का समय उनका अपना होता है जिसमें वे अपनी हम उम्र 6 महिलाओं के साथ बैठकर बुनाई करतीं है और साथ में गप्पें भी लगातीं हैं. वे कहतीं हैं, ” पूरे सप्ताह तक काम करने के बाद हम सन्डे का इंतजार करते हैं ताकि परस्पर मिलकर कुछ अपनी कह सकें और दूसरे की सुन सकें. हम साथ बैठकर बुनाई करते हैं जिससे हमें खाली गप्पें मारने का गिल्ट नहीं रहता. ”

युवावस्था में ही कुछ परिस्थितियों के कारण आजीवन अकेले रहने का निर्णय ले लेने वाली अबीरा जी कहतीं हैं,” पूरे सप्ताह ऑफिस में व्यस्त रहने के बाद वीकेंड पर अकेला घर खाने को दौड़ता था…इस समस्या से बचने के लिए हम 8 महिलाओं ने अपना एक क्लब बनाया है जिसमे हम सब मिलकर घूमने जाते हैं और एक दूसरे के साथ गप्पें लगाकर खुद को हल्का कर लेते हैं.”

पहले की तुलना में आज अकेली रहने वाली महिलाओं की संख्या निरन्तर बढ़ती ही जा रही है. पहले जहां घरेलू परिस्थितियों वश या कुछ जिम्मेदारियों के चलते महिलाओं को एकाकी जीवन जीना पड़ता है वहीं आज महिलाएं स्वेच्छा से अकेले रहकर जीवन जीना चाहतीं हैं. कामकाजी अकेली महिलाओं का पूरा सप्ताह तो काम करते निकल जाता है परन्तु वीकेंड पर उन्हें खुद को व्यस्त रखना काफी मुश्किल हो जाता है. 45 वर्षीया प्राप्ति कहती है, “मुझे कभी लाइफ भर अकेले रहने के अपने निर्णय पर पछतावा नहीं होता बल्कि ऐसा लगता है कि मनमाफिक और बंदिश फ्री जीवन जीने का श्रेष्ठत्तम तरीका है अकेले रहना पर हां वीकेंड पर मौज मस्ती के लिए फ्रेंड्स का साथ होना भी बहुत जरूरी है. यदि आप कामकाजी हैं और सिंगल हैं तो निम्न उपाय वीकेंड पर आपको व्यस्त रखने में काफी मददगार साबित हो सकते हैं-

1-बुनाई है रिलैक्स बूस्टर

भले ही आज हाथ के बुने स्वेटर्स का चलन कम हो गया हो परन्तु बुनाई मेलजोल बढ़ाने, व्यस्त रहने और स्वयं को रिलैक्स रखने का बहुत अच्छा तरीका है. बुनाई करते समय फन्दों को डालना, किस फंदे पर कौन सी डिजाइन डालनी है, कौन सा फंदा कब उल्टा और कब सीधा लेना है इन सबको बार बार याद करना पड़ता है जिससे मस्तिष्क की एक्सरसाइज होती है और मेमोरी शार्प होती है. साथ ही यह उंगलियों की बेस्ट एक्सरसाइज भी होती है.

किसी भी डिजाइन को जब पूर्ण कर लिया जाता है तो उसे देखकर मन को बहुत सुकून का अहसास होता है जो मन मस्तिष्क को शांति प्रदान करने के साथ साथ तनाव से भी मुक्ति देता है.

स्वेटर्स के स्थान पर आप अपने घर के लिए कुशन कवर्स, मोजे, डायनिंग टेबल के मैट्स और रनर बनाकर बुनाई के फायदे ले सकतीं हैं.

2-क्लीनिंग देगी सप्ताह भर का सुकून

एक सरकारी दफ्तर में अधिकारी के पद पर कार्य करने वाली रीता जी कहतीं हैं,” पूरे सप्ताह तो घर देखने का समय ही नहीं मिलता परन्तु वीकेंड पर मैं अपनी मेड के साथ मिलकर पूरे घर की क्लीनिंग के साथ साथ किचिन की डीप क्लीनिंग करती हूं क्योंकि अकेले होने से घर तो साफ ही रहता है परन्तु किचिन में तो भले ही एक बन्दे का खाना बने या 4 का गंदगी तो होती ही है. इन 2 दिनों में मैं पूरी किचिन को मैनेज करती हूं जिससे मुझे पूरे सप्ताह आराम रहता है.

आगामी दिनों की तैयारी करेगी काम आसान एक मल्टीनेशनल कंपनी में मैनेजर ऋचा अपने वीकेंड के दिनों के बारे में बताते हुए कहतीं हैं, “अकेले होने का सबसे बड़ा फायदा है कि हमें सिर्फ अपने खाने के बारे में ही सोचना है इसीलिए वीकेंड पर मैंआने वाले सप्ताह की मील प्लानिंग करके फ्रिज के ऊपर लगे व्हाइट बोर्ड पर लिख देती हूं इससे  पूरे सप्ताह भर तक उल्टा पुल्टा और जंक फूड खाने से तो बची ही  रहती हूं साथ ही आपको हर दिन “क्या खाऊं, क्या बनाऊं जैसी समस्या से भी दो चार नहीं होना पड़ता.”

3-खुद को रिलैक्स करें

प्रायवेट स्कूल की प्रिंसिपल निकिता श्रीवास्तव कहतीं है, “पूरे सप्ताह तक काम करने के बाद वीकेंड मेरे लिए अमृत समान होता है इन दिनों में मैं कुकिंग, पेन्टिंग और शॉपिंग करती हूं जो मेरी हॉबी हैं यदि वीकेंड न हो तो हम तो सारे दिन काम ही करते रहें.

मीडिया सेक्टर में काम करने वाली अंजना जी वीकेंड के बारे में कहतीं है, ” मैं मूवी की बहुत शौकीन हूं और मुझे वीकेंड का इंतजार रहता है ताकि अपनी मनपसंद मूवी को थियेटर में जाकर देख सकूं.

4-मेलजोल बढ़ाएं

आजकल फ्लेट कल्चर का युग है जिसमें हर कोई अपने में ही व्यस्त है. स्कूल टीचर अनन्या कहती हैं, “वीकेंड मेरे लिए सबसे अच्छा होता है क्योंकि इन दिनों में मैं अपने दोस्तों, रिश्तेदारों और पड़ोसियों से मिलती हूं क्योंकि आजकल सब बहुत अधिक व्यस्त होते हैं कि आपसी मिलना जुलना हो ही नही पाता मुझे सबसे मिलना बहुत पसंद है यही नहीं इन दिनों में मैं अपने फ्रेंड्स को अपने घर बुलाती हूं क्योंकि मुझे खाना बनाना और खिलाना दोनों ही बहुत पसंद हैं.

धर्म नहीं चाहता औरते शिक्षित बने

सनातन धर्म के नाम पर जो अन्याय औरतों के साथ पौराणिक कथाओं में दिखता है उसे छोड़ भी दें तो भी आधुनिककाल में जब प्रिंटिंग प्रैस के कारण शिक्षा हरेक को सुलभ होने लगी और जहाजों पर चढ़ कर बराबरी, नैतिकता, तर्क और कानून की बातें पूरे विश्व में फैलने लगीं तो भारत में ऐसे लोगों की कमी न आई है जो सवर्ण औरतों को भी पिछली सदियों में घसीट ले जाना चाहते हैं, 100-125 साल पहले की.

अंगरेजों के आने के बाद भी महाराष्ट्र में पेशवाओं का राज काफी हद तक कायम था क्योंकि 1857 से पहले मराठा साम्राज्य छत्रपति शिवाजी या उन के वशंजों के हाथों में नहीं, उन के नियुक्त सलाहकार ब्राह्मणों जिन्हें पेशवा कहा जाता था, के हाथों में चला गया था. पेशवाओं के जमाने में गांवगांव तक सरकार का कंट्रोल था जिसे आज फिर लाने की कोशिश की जा रही है.

उस युग में जो महज 100-200 साल पहले की बात है, पिताजी और भाइयों को सरकार से सजा मिलती थी अगर वे नाबालिग लड़कियों का विवाह नहीं कर पाते थे. पेशवाओं के नियुक्त मामलतदार हर घर पर नजर रखते थे और हर

9 साल की आयु तक की नाबालिग लड़की का विवाह करा देना सनातनी कर्तव्य था. पेशवाओं ने अपने संगीसाथी सारस्वत ब्राह्मणों को राज्य से बाहर कर दिया था क्योंकि वे पेशवाओं के कुछ नियमों को मानने को तैयार नहीं थे.

पेशवाओं के आदेशानुसार ब्राह्मणों की विधवाओं की शादी वर्जित थी जबकि शूद्र अपनी विधवाओं को आसानी से ब्याह सकते थे. 1818 में पेशवाओं का राज फिरकी की लड़ाई के बाद समाप्त हो गया पर पेशवाओं के बनाए नियम घरघर मौजूद रहे और आज भी हैं.

1830 के आसपास महाराष्ट्र में भास्कर पांडुरंग और भाऊ महाजन ने कास्ट के फंदों में फंसी हिंदू उच्च जातियों को निकालने की कोशिश भी की थी. उन्होंने संक्रांति और गणेश पूजा का विरोध किया था कि इन पर होने वाला खर्च शिक्षा और चिकित्सा सुविधा देने पर किया जाना चाहिए.

इन सुधारों का विरोध करने वालों के गुट भी खड़े होने लगे और इन में बाल गंगाधर तिलक का नाम मुख्य इसलिए है कि उन के नाम को आज भी महान स्वतंत्रता सेनानी के रूप में लिया जाता है जबकि वे सामाजिक सुधारों के घोर विरोधी थे. उन के सहयोगी राष्ट्रवादी संगठनों ने कहना शुरू कर दिया कि जाति व औरतों की शिक्षा देशद्रोह के समान है. तिलक का दावा था कि वे ही हिंदू समाज के असली प्रतिनिधि हैं न कि ज्योतिराव फुले जैसे लोग जिन्होंने स्त्री शिक्षा के लिए काम किया.

बाल गंगाधर तिलक के सहयोगी वी एन मांडलिक जो वायसराय की ऐग्जीक्यूटिव काउंसिल के सदस्य थे, ब्रिटिश शिक्षा प्रणाली का लगातार विरोध करते रहे क्योंकि वह शिक्षा सवर्ण औरतों और शूद्रों दोनों को दी जा रही थी.

बाल गंगाधर तिलक ने सब के लिए प्राइमरी शिक्षा का घोर विरोध किया. तिलक का कहना था कि इतिहास, जियोग्राफी, गणित, फिलौसफी सवर्ण लड़कियों या बढ़ई, मोची, लुहार के बच्चों का पढ़ाना मूर्खता है क्योंकि यह शिक्षा उन के किसी काम की नहीं है. तिलक का कहना था कि प्राइमरी शिक्षा टैक्सपेयर द्वारा दिए धन से दी जा रही है और टैक्सपेयर यह फैसला कर सकते हैं कि कौन क्या पढ़ेगा.

तिलक की यह भावना आज भी सुनाई दी जाती है. आरक्षण के खिलाफ आवाज उठाने वाले कहते हैं कि  शिक्षा उन 3% लोगों के हाथों में हो जो ईश्वर के द्वारा विशेष स्थान पाए हुए हैं. मैरिट का नाम जो लिया जाता है वह गलत है क्योंकि यही 3% शिक्षा पौलिसी बनाते हैं, यही ऐग्जाम पेपर सैट करते हैं, यही 3% जांचते हैं, यही इंटरव्यू बोर्ड में बैठते हैं. ये न तो औरतों को उन का सही स्थान देना चाहते न अन्य जातियों को.

1884 में जब सुधारक महादेव गोविंद रानाडे ने लड़कियों का स्कूल खोला और सरकारी सहायता मांगी तो तिलक ने इस का घोर विरोध किया और कहा कि ‘शिक्षा औरतों को अनैतिक’ बना देगी. तिलक औरतों को किसी भी हालत में इंग्लिश, साइंस और गणित की शिक्षा देने के खिलाफ थे क्योंकि इस से औरतें स्वतंत्र सोच वाली हो जाएंगी.

आज भी यह सोच जारी है. आज भी औरतों को अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है. औरतों की क्रिकेट या हाकी टीम को वह स्थान नहीं मिलता जो पुरुषों की टीमों को मिलता है. सुप्रीम कोर्ट में 34 न्यायाधीशों में से केवल 3 महिला न्यायाधीश हैं. यह स्थिति हर जगह है.

भारतीय जनता पार्टी में कोई औरत मुख्य स्थान नहीं रखती. सुषमा स्वराज और उमा भारती के दिन लद गए हैं जब भाजपा की सोच में सुधार होने लगा था. आज राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु तक केवल दिखावटी हैं और उन्हें संविधान की मुख्य संस्था को नईर् पार्लियामैंट बिल्डिंग के उद्घाटन पर फटकने तक नहीं दिया गया और भगवा वस्त्रधारी पुरुष बिना कोई चुनाव लड़े आ बैठे और संसद भवन का उद्घाटन कर गए.

बाल गंगाधर तिलक का नाम बारबार लेना एक तरह से यह दोहराना है कि औरतों को शिक्षा देना शास्त्रों के खिलाफ है. खेद यह है कि बचपन से ही तिलक की जीवनी बच्चों को पढ़ा दी जाती है जिस का अर्थ है कि बचपन से ही जैंडर भेद उन के मन में बैठा दिया जाता है.

पिंपल्स को फोड़ना क्यों हो सकता है नुकसानदायक?

अगर आपकी स्किन पर बहुत जल्दी-जल्दी पिंपल्स आने लगते हैं तो इसके पीछे आपका लाइफ स्टाइल और जेनेटिक कारण हो सकते हैं. ऐसी स्थिति में आपको अपने डर्मेटोलॉजिस्ट की सहायता लेनी चाहिए. लेकिन अगर आपको कभी कभार पिंपल्स आते हैं तो आपका मन करता होगा कि इन्हें एकदम से फोड़ कर इन से राहत पाई जाए लेकिन ऐसा करने से आपको लाभ की बजाय हानि हो सकती है. पिंपल्स को फोड़ने से जो उनके अंदर मौजूद  लिक्विड आपकी स्किन के गहरे भागों में जा सकता है और आपकी स्किन को और ज्यादा लाल बना सकता है. इससे आपको सूजन भी हो सकती है. आइए जानते हैं क्यों आपको पिंपल्स को फोड़ना नहीं चाहिए और इसकी बजाय क्या करना चाहिए.

 जब आप पिंपल पॉप करते हैं तो क्या होता है?

जब भी आपको स्किन पर कोई पिंपल नजर आता है तो अपनी मानसिक संतुष्टि के लिए और पिंपल से छुटकारा पाने के लिए बहुत सारे लोग उसे या तो उंगलियों की मदद से फोड़ लेते हैं या फिर किसी ट्विजर की मदद से उसे निकालने की कोशिश करते हैं. ऐसा करने से बचें क्योंकि इससे आपको लाभ से ज्यादा हानि हो सकती है.

अगर आप पिंपल पॉप करते हैं तो आपकी स्किन के कुछ टिशु भी लॉस हो सकते हैं और आपकी वहां की स्किन के आसपास का भाग ज्यादा एजिंग के लक्षणों से जूझ सकता है. इससे आपको दर्द तो होता ही है लेकिन साथ में इंफेक्शन का रिस्क भी बढ़ सकता है। ऐसे स्थान पर डार्क स्पॉट होने का रिस्क काफी ज्यादा बढ़ सकता है. पिंपल के ठीक होने के बाद आपको वहां पर बहुत जिद्दी दाग हो सकते हैं जो काफी मुश्किल से जाते हैं.

कई बार पिंपल्स के फोड़ने के बाद स्किन में सूजन आ जाती है और जैसे जैसे वह सूजन ठीक होती है तो उसमें काले निशान बनने शुरू हो जाते हैं जो देखने में काफी भद्दे लग सकते हैं. इसलिए आपको कभी भी खुद से पिंपल फोड़ने की कोशिश नहीं करनी चाहिए.

 पिंपल पॉप करने की बजाए क्या करना चाहिए?

  • आप किसी क्रीम या फिर ऑइंटमेंट का प्रयोग कर सकते हैं जो बिना डॉक्टर की राय के लिया जा सकता है. बेंजोसाइल और सैलिसिलिक एसिड ऐसी स्थिति में आपके काफी मददगार साथी हो सकते हैं.
  • आप पिंपल पर किसी गर्म कपड़े या फिर बैंडेज का प्रयोग कर सकते हैं.
  • किसी भी नुकीली या फिर तीखी चीज से पिंपल को छूने की कोशिश न करें क्योंकि ऐसा करने से आपको नुकसान पहुंच सकता है. इससे इन्फेक्शन और इन्फ्लेमेशन का खतरा बढ़ सकता है.
  • अगर आपकी स्किन एक्ने प्रॉन है और पिंपल्स होना आपके लिए साधारण बात है तो आपको पिंपल्स के हिसाब से ही अपने स्किन केयर प्रोडक्ट्स का चुनाव करना चाहिए.
  • किसी स्किन के डॉक्टर से इनका इलाज करवाने की पहल भी कर सकते हैं.

निष्कर्ष

भविष्य में पिंपल्स न हो इसलिए आप अपनी डाइट और लाइफस्टाइल पर भी थोड़ा ध्यान दे सकते हैं. अगर आपको स्किन से जुड़ी कोई समस्या है तो आपको डॉक्टर के पास जाना चाहिए और उनके द्वारा बताई गई दवाइयां का प्रयोग करना चाहिए. एक अच्छा स्किन केयर रूटीन भी आपको स्किन की कई समस्याओं से बचा सकता है इसलिए अपने स्किन केयर रूटीन को बेहतर बनाने की कोशिश करें और सस्ते या फिर बिना गुणवत्ता वाले प्रोडक्ट्स का प्रयोग करने से बचें जो आपकी स्किन को नुकसान पहुंचा सकते हैं.

जाने कैसे कॉस्मेटिक और मेकअप प्रोडक्ट्स की वजह से आपकी आंखें प्रभावित होती हैं?

मेकअप प्रोडक्ट्स का प्रयोग करने से आपकी स्किन को बहुत नुकसान पहुंच सकता है यह बात तो हम सब ही जानते हैं लेकिन आंखों को ऐसे कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स का प्रयोग करने से सबसे ज्यादा नुकसान झेलना पड़ता है. हम आंखों के लिए बहुत अलग-अलग तरह के उत्पादों का प्रयोग करती है जैसे आई लाइनर मस्कारा आदि लेकिन अगर इन चीजों का प्रयोग ध्यान से नहीं किया जाए तो आपकी आंखों को काफी नुकसान पहुंच सकता है. इनका गलत प्रयोग करने से या ज्यादा मात्रा में प्रयोग करने से आपकी आंखों में इंफेक्शन हो सकता है या इन्फ्लेमेशन जैसी समस्या का भी सामना करना पड़ सकता है. आईए जानते हैं कैसे इन प्रोडक्ट्स का प्रयोग करने से आपकी आंखें प्रभावित हो सकती हैं और इस प्रभाव से बचने के कुछ टिप्स के बारे में.

काजल, आई लाइनर द्वारा होने वाला नुकसान : काजल और आई लाइनर का प्रयोग करने से आपकी आई लिड में मौजूद ग्लैंड ब्लॉक हो सकती है. इससे आपकी आई लिड में इन्फ्लेमेशन जैसी समस्या आ सकती है. अगर यह समस्या क्रोनिक रूप ले लेती है तो आपको ड्राई आई जैसी समस्या भी देखने को मिल सकती है.

मस्कारा और आई शैडो : अगर आप ग्लिटर, आई शैडो और मस्कारा का गलत प्रयोग करने लगती हैं तो इससे आपकी आंखों में कंजक्टिवाइटिस जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है. आपको इन्फ्लेमेशन और पिग्मेंटेशन का सामना भी करना पड़ सकता है.

फॉक्स आई लैश : ऐसी आई लैश आपकी पलकों से ग्लू द्वारा चिपकाई जाती हैं। ग्लू से आपकी सेंसटिव स्किन को नुकसान पहुंच सकता है. अगर आपको इसका प्रयोग ढंग से करना नहीं आता है तो ग्लू आपकी आंख में भी गिर सकती है. इससे डर्मेटाइटिस या एलर्जी का खतरा बढ़ सकता है.

कॉन्टैक्ट लेंस : कॉन्टैक्ट लेंस का प्रयोग करने से आपकी आंखों में कुछ अन्य चीजें भी फंस सकती है जिनकी वजह से आपकी आंखों को गंभीर इन्फेक्शन होने का खतरा बढ़ सकता है.

आंखों को सुरक्षित रखने की टिप्स

  • अपनी आंखों पर कभी भी एक्सपायर हुए प्रोडक्ट्स का प्रयोग न करें और न ही खराब हुए प्रोडक्ट्स का प्रयोग करें.
  • मेकअप लगाने से पहले आपको अपनी आंखों और चेहरे को अच्छे से साफ कर लेना चाहिए.
  • अपने ही टूल्स और मेकअप का प्रयोग करें. किसी दूसरी महिला का सामान अपनी आंखों के लिए प्रयोग न करें.
  • किसी भी तरह का मेकअप प्रयोग करने से पहले सबसे पहले आपको कॉन्टैक्ट लेंसेस का प्रयोग कर लेना चाहिए.
  • अगर आपको आंखों में इंफेक्शन है या आंखें लाल हो गई है तो बिलकुल भी लेंसेस का प्रयोग न करें.
  • इन्फेक्शन का खतरा कम करने के लिए हर 6 से 8 महीने में अपने प्रोडक्ट्स को बदलती रहें.
  • किसी ठंडी जगह पर ही अपने मेकअप प्रोडक्ट्स को संभाल कर रखें ताकि उनमें बैक्टीरिया न घुस सके.
  • सोने से पहले हमेशा मेकअप को उतार दें और मेकअप को उतारने से पहले कॉन्टैक्ट लेंस को उतार दें. कभी भी इन चीजों के साथ न सोएं.
  • अगर आपको पहले से ही कोई इन्फेक्शन है तो आई मेकअप का प्रयोग भूल कर भी न करें.

अगर आप मेकअप का प्रयोग कभी कभार ही करती हैं और बहुत ही ध्यान से प्रोडक्ट्स को अप्लाई करती है तो आप काफी आसानी से बिना किसी नुकसान के मेकअप प्रयोग कर सकती हैं. लेकिन अगर आपका प्रोफेशन ऐसा है जिसमें आपको काफी ज्यादा मेकअप का प्रयोग करना पड़ता है तो आपको सुरक्षा के टिप्स का प्रयोग जरूर करना चाहिए.

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संतुलित सहृदया: भाग 2- एक दिन जब समीरा से मिलने आई मधुलिका

‘‘उस में एक तरह से यायावर बनना पड़ता है और मुझे भरेपूरे परिवार में रहना पसंद है.’’ ‘‘लेकिन परिवार में रहते हुए तो आप की अपनी प्रतिभा का पूर्ण विकास नहीं हो सकता?’’

‘‘अकेले रहते हुए या कहिए आज की न्यूक्लीयर फैमिली में केवल व्यावसायिक पहलू को ही प्राथमिकता मिलती है. दूसरी सभी योग्यताएं या शौक तो समय की कमी या समझौतों की बलि चढ़ जाते हैं. दहेज या रूढि़वादी वाले मामलों को छोड़ दें तो संयुक्त परिवारों में रहने वालों के न्यूक्लीयर फैमिलीज में अधिक तलाक होते हैं,’’ मधुलिका मुसकराई, ‘‘वैसे अगर आप में प्रतिभा है और आप को संतुलित वातावरण मिलता है तो फिर आप की प्रतिभा को कहीं भी निखरने में देर नहीं लगेगी.’’ ‘‘फैमिली और प्रोफैशनल लाइफ क्लैश

नहीं करेंगी?’’ ‘‘अगर आप दोनों में तालमेल बना कर रखें तो कभी नहीं. मगर यह तभी हो सकता है जब आप को दोनों से प्यार हो.’’

‘‘लगता है खुश रखोगी मेरे भैया को,’’ समीरा मुसकरा कर बोली. ‘‘मैं किसी व्यक्ति विशेष की खुशी में नहीं पूरे परिवार की खुशी में यकीन रखती हूं,’’ मधुलिका ने बड़ी बेबाकी से कहा.

समीरा कहां हार मानने वाली थी. बोली, ‘‘वह व्यक्ति विशेष भी परिवार के खुश होने पर ही खुश होगा…’’ ‘‘और परिवार व्यक्ति विशेष के खुश होने पर,’’ मधुलिका ने बात काटी, ‘‘दोनों एकदूसरे के पूरक जो हैं.’’

तभी खाने का बुलावा आ गया. खाना बढि़या था. सभी ने बहुत तारीफ करी. ‘‘खाने की नहीं, हमारी बिटिया की बात करिए वह पसंद आई या नहीं?’’ राघव ने पूछा.

‘‘उसे तो नपसंद करने का सवाल ही नहीं उठता अंकल,’’ समीरा चहकी. ‘‘जी हां, आप की बिटिया अब हमारी है देवराजजी,’’ कृपाशंकर ने जोड़ा.

‘‘तो फिर रोके की रस्म कर दें?’’ ‘‘कल शाम को करेंगे खूब धूमधाम से… मैं ने इवेंट मैनेजमैंट वालों से बात की हुई है. अभी फोन पर कह देता हूं कि शानदार समारोह का आयोजन शुरू कर दें हमारे बगीचे में… आप लोग भी अपने परिचितों को आमंत्रित कर लीजिए राघवजी… एक ही बेटा है हमारा. अत: इस की शादी की छोटी से छोटी रस्म भी बड़े धूमधड़ाके से होगी.’’

समीरा चौंक पड़ी कि तो फिर वह कल सुबह दिल्ली कैसे जाएगी? कल शाम को तो उसे जैसे भी हो दिल्ली में रहना ही है. ‘‘यह रोके की रस्म इतनी हड़बड़ाहट में करने की क्या जरूरत है पापा? पहले लड़के और लड़की को 1-2 बार आपस में मिलने, बात करने दीजिए,’’ समीरा बोली, ‘‘फिर अगले सप्ताहांत इतमीनान से तैयारी कर के दावत और रोका करिएगा.’’

‘‘अगले सप्ताहांत तक हम यहां नहीं रुक सकते,’’ मधुलिका की मां बोलीं, ‘‘ये तो आज शाम को ही निकलना चाह रहे हैं, क्योंकि सोमवार को इन की जरूरी मीटिंग है और मोहित का प्रोजैक्ट प्रेजैंटेशन.’’ ‘‘तो शाम को निकल जाओ आंटी, मैं भी कल जा रही हूं. अगले सप्ताहांत हम सब फिर आ जाएंगे दावत और रस्म के लिए,’’ समीरा चहकी.

‘‘तो फिर तुम्हारे लड़केलड़की को अकेले मिलवाने के प्रस्ताव का क्या होगा?’’ राघव बोले. ‘‘लड़की को रोक लो अंकल और अगर यह नहीं हो सकता तो भैया को जयपुर घूमने भेज दो,’’ समीरा ने सुझाव दिया.

‘‘यह बढि़या रहेगा,’’ देवराज ने कहा, ‘‘हम तो आप को जयपुर बुलाना चाहते ही हैं अपने गरीबखाने पर.’’ ‘‘हम फिर कभी आएंगे देवराजजी… फिलहाल तो सुनील अकेला ही आएगा,’’ कृपाशंकर ने कहा.

‘‘मैं भी नहीं जा सकता पापा… अगले सप्ताह प्रदूषण नियंत्रण विभाग वाले फैक्टरी का निरीक्षण करने आ रहे हैं,’’ सुनील बोला. ‘‘ज्यादा भाव मत खाओ भैया… पापा हैं न संभाल लेंगे सब,’’ समीरा बोली.

‘‘नहीं समीरा, मुझे प्रदूषण नियंत्रण के बारे में कुछ भी मालूम नहीं है,’’ कृपाशंकर बोले. ‘‘भैया से समझ लेना पापा… अभी तो चलिए… इन लोगों को भी आज ही जयपुर के लिए निकलना है,’’ समीरा उठ खड़ी हुई, ‘‘अगले सप्ताह रोके की दावत पर मिलेंगे.’’

समीरा को लगा कि सुनील और मम्मी रोके की रस्म टलने से खुश नहीं हैं, लेकिन इस समय तो उसे केवल अपनी खुशी से मतलब था जो दिल्ली जा कर मयंक से मिलने पर ही मिलेगी.

रास्ते में ही मम्मीपापा दावत की रूपरेखा बनाने लगे जो घर पहुंचने तक बहस में बदल गई. दावत में गानेबजाने के आयोजन पर दोनों में मतभेद था. इस से पहले कि बहस झगड़े में बदलती फोन की घंटी बजी. सुनील बराबर के कमरे में फोन सुनने चला गया.

‘‘बांसुरी बनने से पहले ही बांस नहीं रहा, इसलिए आप लोग भी शांत हो जाएं. देवराजजी का फोन था, खेद प्रकट करने को कि मधुलिका का रिश्ता मुझ से नहीं करेंगे, सुनील ने सपाट स्वर में कहा.’’ ‘‘ऐसे कैसे नहीं करेंगे?’’ समीरा आवेश में चिल्लाई, ‘‘मैं पूछती हूं उन से वजह.’’

‘‘उन्होंने वजह बता दी है जो तुम सुन नहीं सकोगी.’’

‘‘क्यों नहीं सुन सकूंगी, बताओ तो?’’ ‘‘उन का कहना है कि हमारे घर में मम्मीपापा या मेरी नहीं सिर्फ तुम्हारी मरजी चलती है समीरा. बहन के इशारों पर चलने वाले वर को वह अपनी बेटी नहीं देंगे और आज जो हुआ है उसे देखते हुए उन का सोचना सही है,’’ सुनील का स्वर तल्ख हो गया.

‘‘तू ठीक कहता है, समीरा ही तो फैसले ले रही थी सब की बात काट कर,’’ मम्मी ने कहा. ‘‘अगर मेरे फैसले गलत थे तो आप सही फैसले ले लेतीं न उसी समय… एक तो सब कामधाम छोड़ कर यहां आओ और फिर बेकार के उलाहने सुनो,’’ समीरा मुंह बना कर अपने कमरे में चली गई.

कुछ देर के बाद मम्मी ने यह कह कर वातावरण हलका करना चाहा कि शादीब्याह संयोग से होते हैं, किसी के कहने या चाहने से नहीं. सुनील भी यथासंभव सामान्य व्यवहार करने की कोशिश कर रहा था, लेकिन लग रहा था कि उसे गहरा आघात लगा है, जिस से उबरने में समय लगेगा. लेकिन समीरा खुश थी कि उसे अब दिल्ली जाने से कोई रोकेगा नहीं. दिल्ली लौटने पर उम्मीद से ज्यादा खुशी मिल गई. मयंक ने बताया कि उसे नौकरी मिल गई है. ‘‘जौइन कब करोगे?’’

‘‘कल गाड़ी और फ्लैट की चाबियां भी मिल जाएंगी, मगर अभी अनंत के पास ही रहूंगा… मुंबई से सामान लाने के बाद अपने फ्लैट में शिफ्ट करूंगा.’’ ‘‘फ्लैट है कहां?’’ समीरा ने उत्सुकता

से पूछा. ‘‘तुम्हारे पड़ोस यानी डिफैंस कालोनी में, लेकिन अगर दूर भी होता तो भी चलता, क्योंकि जब मिलना हो तो फासलों से कुछ फर्क नहीं पड़ता.’’

‘‘मिलने पर फर्क फासलों से नहीं फुरसत से पड़ता है यार,’’ अनंत बोला. ‘‘यह भी तू ठीक कहता है,’’ मयंक ने उसांस ले कर कहा, ‘‘क्योंकि जौइन करने से पहले ही चेतावनी मिल गई है कि किसी प्रोग्राम की ऐडवांस प्लैनिंग मत करना.’’

समीरा को अनंत का टोकना अच्छा नहीं लगा. ‘‘मगर बगैर ऐडवांस प्लैनिंग के फुरसत का मजा तो उठा सकते हैं?’’

‘‘दैट्स द स्पिरिट समीरा, वी आलवेज कैन,’’ मयंक फड़क कर बोला, ‘‘अनंत कह रहा था तुम अपने भैया के लिए लड़की देखने गई थीं.’’ समीरा सकपका गई. बोली, ‘‘मगर भैया फिलहाल शादी करने के मूड में ही नहीं हैं.’’

सिल्वर जुबली गिफ्ट: भाग 1- क्यों गीली लकड़ी की तरह सुलगती रही सुगंधा

दोपहर से ही मेहमानों की गहमागहमी थी. सभी दांतों तले उंगली दबाए भव्य आयोजन की चर्चा में व्यस्त थे. ‘‘कम से कम 2-3 लाख रुपए का खर्चा तो आया ही होगा,’’ एक फुसफुसाहट थी.

‘‘कैसी बात करती हो मौसी, इतने तो अब गांव की दावतों में खर्च हो जाते हैं. यह तो फाइवस्टार की दावत है और वह करीब 1,500 आदमियों की,’’ एक खनकती आवाज ने अपने समसामयिक ज्ञान को बोध कराया. ‘‘अब भइया, ये न मनाएंगे ऐसी मैरिज एनिवर्सरी तो क्या हम मनाएंगे. इन के शहर में ही तो 400 साल पहले एक बादशाह ने वक्त के माथे पर ताजमहल का अमिट तिलक लगाया था,’’ डाह से भरा कुछ फटा सा स्वर गूंजा.

‘‘सही बात है जहां पलोबढ़ो वहां की आबोहवा का असर तो पड़ता ही है.’’ जितने मुंह उतनी ही बातें सुनाई दे रही थीं और पास ही के कमरे में अपनी सिल्वर जुबली पार्टी के लिए तैयार होती सुगंधा के कानों में भी पड़ रही थीं. उस ने सोचा, ‘ठीक ही तो कह रहे हैं सब, इंद्र मेरे अरमानों की कब्र तो शादी की पहली रात को ही खोद चुका था और पिछले 25 वर्षों से मेरी भावनाओं को लगातार पत्थर कर के उस कब्र पर मकबरा भी बना रहा है. अगर तथ्यों की बारीकियों में जाएं तो ताजमहल के हर पत्थर पर भी फरेब की ही इबारत लिखी दिखाई देगी, मुहब्बत की नहीं.’

सुगंधा के मन में पिछले 25 वर्षों से बर्फ बन कर जमी वेदना आर्द्र हो कर बाहर निकलने को व्याकुल हो रही थी. उस का मन हो रहा था कि वह इस दुख को अपनी आवाज बना ले और दुनिया को चीखचीख कर बताए कि हर चमकती चीज सोना नहीं होती, यहां तक कि संसारभर में मुहब्बत का प्रतीक माने जाने वाले ताजमहल की हकीकत भी घिनौनी ही है. आज सुगंधा और इंद्र के विवाह के

25 साल पूरे हो चुके थे. सुगंधा ने ब्यूटीशियन को पेमैंट दे कर विदा किया और आदमकद दर्पण में खुद को निहारने लगी. इंद्र ने आज के दिन के लिए शहर के सब से नामी ड्रैस डिजाइनर से खासतौर पर साड़ी तैयार करवाई थी. दर्पण में खुद का रूप निहारने पर मन गर्व के सागर में गोते खाने लगा. अनायास ही वह दिन याद आ गया जब उस ने 25 साल पहले इसी तरह तैयार होने के बाद खुद को आदमकद दर्पण में निहारा था. फर्क था तो भावनाओं का, तब मन में पिया मिलन की लहरें हिलोरें ले रही थीं और आज 25 साल पहले सुहागरात को हुई उस की ख्वाहिशों की लाश का रंज टीस रहा था. थकने लगी थी वह अब यह सब बरदाश्त करतेकरते. मन करता था कि भाग जाए कहीं सब की निगाहों से दूर, कहीं बहुत दूर, किसी ऐसी दुनिया में जहां वह सुकून की सांस ले सके.

शादी से सिल्वर जुबली तक के सफर में कितने ही ज्वारभाटे आए थे. वह आज वरमाला के दिन से कहीं ज्यादा खूबसूरत लग रही थी. 25 साल से रिश्ते की कड़वाहट का जहर पीती रही थी. मन इस जहर की कड़वाहट से संतृप्त हो दम तोड़ने को छटपटा रहा था. मगर तन, वह तो बेशर्म बन कर और निखरता चला गया था. तभी दरवाजे पर दस्तक की आवाज ने सुगंधा के मानसपटल पर चल रहे अतीत के चलचित्र में विघ्न डाला. ‘‘जल्दी से बाहर आओ माई लव, पार्टी शुरू होने का समय हो चुका है, अब तक तो ज्यादातर मेहमान होटल पहुंच चुके होंगे. अच्छा नहीं लगता कि हम ‘स्टार्स औफ द इवनिंग’ हो कर भी सब से बाद में वहां पहुंचें,’’ इंद्र ने कमरे में दाखिल होते हुए सुगंधा से कहा. इंद्र अपने चचेरे भाई विजय के साथ दूसरे कमरे में तैयार हो कर आया था.

‘‘लोग उम्र के साथ ढलते जाते हैं मगर भाभीजान, आप तो उम्र के साथ पुरानी शराब की तरह दिलकश होती जा रही हैं,’’ विजय भी इंद्र के पीछेपीछे चले आए और आदतानुसार उन्होंने मुगलिया अंदाज में सीधा हाथ अपने माथे पर रख कर, थोड़ा सा बाअदब मुद्रा में झुकते हुए कहा, ‘‘इस से पता चलता है कि जागीरदार ने अपनी जागीर की हिफाजत में बड़ी ही एहतियात बरती है.’’ इंद्र खुद की तारीफ करने का कोई अवसर व्यर्थ नहीं जाने देता था.

सुगंधा पर उन की बातों का कोई असर हो रहा है या नहीं, इस की परवा किए बिना दोनों भाई अपनी ही बातों पर जोरजोर से कहकहे लगाने लगे. घर में आए हुए सारे रिश्तेदार भी अब तक होटल जाने के लिए निकल चुके थे. होटल और घर की दूरी सिर्फ एक किलोमीटर की थी, मगर इंद्र ने सब की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए किराए की कई कारों का इंतजाम करा रखा था. कुछ पास के शहरों में रहने वाले रिश्तेदार अपनी कारों में ही आए थे. सब से आखिर में सुगंधा, इंद्र और विजय ही घर में बचे थे. इंद्र के निर्देशानुसार विजय ने इंद्र की निजी कार को लाल गुलाब की लडि़यों से बड़ी ही खूबसूरती के साथ सजाया था और भाईभाभी के शोफर की भूमिका भी बखूबी निभाई.

होटल के रिसैप्शन हौल में घुसते ही भव्यता की रंगीन चकाचौंध ने सुगंधा की बुद्धिमत्ता का हरण करना शुरू कर दिया और वह रंगीन चकाचौंध कुछ पल के लिए उस के जीवन के काले यथार्थ पर हावी होेने लगी. सुगंधा की दशा सुंदरवन में कुलांचें मारती हिरनी सी हो गई, उसे वहम होने लगा कि उस की जिंदगी तो इतनी भव्य है, फिर वह दुखी और एकाकी कैसे हो सकती है. सचाई भव्यता का ग्रास बन कर सुगंधा की बुद्धिमत्ता को ग्रहण लगा रही थी. मित्र, परिचित, रिश्तेदार सभी बधाइयां देने स्टेज पर आ रहे थे और सुगंधा व इंद्र के सुखी वैवाहिक जीवन का राज जानने को उत्सुक थे.

कुछ चेहरों पर डाह था तो कुछ पर बढि़या दावत मिलने की संतुष्टि. कोई कहता कि एकदूसरे के लिए बने हैं. हकीकत इस के विपरीत कितनी बेनूर, बेरंग थी, इस का इल्म किसी को न था. दुनिया की नजरों में सुगंधा और इंद्र की शादी एक आदर्श मिसाल थी, मगर बंद दरवाजों के पीछे का विद्रूप सच सुगंधा अपने मन की सात परतों में छिपाए बैठी थी. इंद्र की बातों का वह एक आंसरिंग मशीन के जैसे ही जवाब देती आई थी. सामाजिकरूप से वह ब्याहता थी, मगर इंद्र को भावनात्मक तलाक तो वह बहुत पहले ही दे चुकी थी.

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