इनहेलर का सही इस्तेमाल कर पाएं अस्थमा पर काबू

महानगरों में दिनों-दिन बढ़ते प्रदूषण और धूम्रपान व तंबाकू की लत के साथ-साथ सांस संबंधी बीमारियों का खतरा भी बढ़ता जा रहा है. एम्स के पल्मोनरी मेडिसिन एंड स्लीप डिसार्डर्स विभाग के सहायक प्रोफेसर डा करण मदान ने बताया कि दिल्ली में 15-39 साल के आयु वर्ग में क्रौनिक औब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिसीज (सीओपीडी) यानी फेफड़े की बीमारी मौत का पहला और 40-69 साल से अधिक के आयु वर्ग में मौत का तीसरा प्रमुख कारण है. साल 1990 में सीओपीडी मौत और विकलांगता का 13वां सबसे बड़ा कारण था, जोकि साल 2016 में तीसरा प्रमुख कारण बन गया है. इससे श्वसन रोगों के बोझ और उन पर नियंत्रण की लगातार बढ़ती जरूरत का पता चलता है.

रोग प्रबंधन की चुनौतियों के बारे में चेस्ट फिजिशियन डा प्रवीण पांडे ने कहा कि अस्थमा और सीओपीडी के प्रबंधन में प्रमुख चुनौतियां हैं- अनुपालन में सुधार और प्रभावी व उपयोग में सरल इनहेलर का विकास. उन्होंने कहा कि कई रोगी दवाओं व इनहेलर का गलत उपयोग करते हैं जिससे रोग पर नियंत्रण कठिन हो जाता है. नतीजतन उन्हें ओरल थेरेपी दी जाती है, जोकि दुखदायी हो सकती है. डा पांडे कहते हैं कि अस्थमा की इनहेल्ड थेरेपी में रोग नियंत्रण की क्षमता है, लेकिन ज्यादातर रोगियों में अक्सर नियंत्रण नहीं हो पाता है. एशिया पैसिफिक अस्थमा इनसाइट्स मैनेजमेंट (एपी-एआइएम) सर्वे के अनुसार, भारत में अस्थमा के सभी रोगियों में मर्ज या तो अनियंत्रित है या आंशिक रूप से नियंत्रित है. इस कमजोर नियंत्रण का प्रमुख कारण इनहेलर की कमजोर तकनीक है.

इनहेल्ड दवाएं अस्थमा और सीओपीडी जैसी सांस संबंधी बीमारी के प्रबंधन में अनिवार्य हैं. ये सीधे फेफड़ों में दवा पहुंचाती हैं और कम खुराक में भी तेजी से काम करती हैं. इनहेल्ड दवाएं रोग की स्थिति में सुधार करती हैं, लक्षणों पर नियंत्रण करती हैं, संख्या और रोग की गंभीरता को कम करती हैं और जीवन की गुणवत्ता में सुधार करती हैं. दवाओं को फेफड़ों तक पहुंचाने वाले यंत्र दवाओं जितने ही महत्त्वपूर्ण हैं. इनहेलर यंत्रों में प्रेशराइज्ड मीटर्ड डोज इनहेलर (एमडीआइ), ड्राई पाउडर इनहेलर(डीपीआइ) और नेबुलाइजर्स शामिल हैं. देश में लगभग 90 फीसद डाक्टर अपने क्लीनिक में पहली बार आने वाले अस्थमा और सीओपीडी के कम से कम 40 फीसद रोगियों को इनहेलर यंत्रों के इस्तेमाल की सलाह देते हैं. एक अध्ययन में कहा गया कि 71 फीसद रोगियों को पीएमडीआइ के उपयोग में कठिनाई हुई.

अस्थमा या सीओपीडी से पीड़ित 246 रोगियों वाले एक अन्य अध्ययन में 81.4 फीसद एमडीआइ उपयोगकर्ताओं को कठिनाई हुई. एक अन्य अध्ययन से पता चला कि 90 फीसद रोगी डीपीआइ का सही उपयोग नहीं कर पाए. परसेप्ट अध्ययन में भारत में इनहेलेशन थेरेपी पर डाक्टरों के ज्ञान और अभ्यास का मूल्यांकन किया गया और पाया गया कि लगभग 61 फीसद डाक्टरों की यंत्र तकनीक सही नहीं है और 67 फीसद डाक्टर इनहेलेशन थेरेपी के मुताबिक काम नहीं करते हैं, जिससे परिणाम अच्छे नहीं आते हैं.

सिप्ला लिमिटेड के ग्लोबल चीफ मेडिकल औफिसर डा जयदीप गोगते ने कहा कि बीते सालों में इनहेल्ड पद्धति में विकास हुआ है, लेकिन गलत इनहेलर तकनीक के कारण परिणाम अच्छे नहीं मिले. इसका अनुपालन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी समस्या है. अमेरिका, जापान और यूरोप में डाटा मानिटर हेल्थकेयर औफ पल्मोनोलौजिस्ट्स और प्राइमरी केयर फिजिशियंस के एक सर्वे में पाया गया कि रोग प्रबंधन में अनुपालन एक अहम समस्या है. उन्होंने दावा किया कि रोगियों को इनहेलेशन थेरेपी और सही इनहेलर तकनीक के लाभों के बारे में शिक्षित करने से इनहेलर को स्वीकायर्ता मिलेगी. इससे रोगी इसका सही उपयोग कर पाएंगे जिससे रोग का बेहतर नियंत्रण हो सकेगा.

तुम ने क्यों कहा मैं सुंदर हूं- भाग 4 : क्या दो कदम ही रहा दोनों का साथ

लेखक- मनोरंजन सहाय सक्सेना

‘‘कुछ समय बाद मैं और तुम सेवानिवृत्त हो गए. मैं अब वकील साहिबा को देखने के लिए नियमितरूप से मानसिक अस्पताल जाने लगा और उन के साथ काफी समय गुजारने लगा. एक दिन अस्पताल की डाक्टर ने मुझ से कहा, ‘देखिए, अब वह बिलकुल स्वस्थ हो गई है. वह वकालत फिर से कर पाएगी, यह तो नहीं कहा जा सकता मगर एक औरत की सामान्य जिंदगी जी पाएगी, बशर्ते उसे एक मित्रवत व्यक्ति का सहारा मिल सके जो उसे यह यकीन दिला सके कि वह उसे तन और मन से संरक्षण दे सकता है.

‘‘पत्नी की मृत्यु के बाद मैं ने अपनी संतानों द्वारा मुझे लगभग पूरी तरह इग्नोर कर दिए जाने के चलते गहराए अकेलेपन से छुटकारा पाने के लिए उन का दिल से मित्र बनने का संकल्प लिया. इस बारे में बच्चों से बात की, तो पुत्र ने तो केवल इतना कहा, ‘आप तो हमें भारतीय सभ्यता, संस्कृति और सामाजिक नैतिकता की बातें सिखाया करते थे, अब हम क्या कहें.’ मगर बड़ी पुत्री ने कहा, ‘आया का देर से आने की सूचना देने के बावजूद आप का औफिस चले जाना और इस बीच उसी दिन मम्मी की दवाइयों का असर समय से पहले ही खत्म होने के कारण उन का बीच में जाग जाना व अपनी दवाइयां घातक होने की हद तक अपनेआप खा लेना पता नहीं कोई कोइंसीडैंट था या साजिश. ऐसी क्या मजबूरी थी कि आप पूरे दिन की नहीं, तो आधे दिन की छुट्टी नहीं ले सके उस दिन. लगता है मम्मी ने डिप्रैशन में नींद की गोलियों के साथ ब्लडप्रैशर कम करने की गोलियां इतनी ज्यादा तादाद में खुद नहीं ली थीं. किसी ने उन्हें जान कर और इस तरह दी थीं कि लगे कि ऐसा उन्होंने डिप्रैशन की हालत में खुद यह सब कर लिया.’

‘‘यह सुन कर तो मैं स्तब्ध ही रह गया. छोटी पुत्री ने, ‘अब मैं क्या कहूं, आप हर तरह आजाद हैं. खुद फैसला कर लें,’ जैसी प्रतिक्रिया दी. तो एक बार तो लगा कि पत्नी की बची पड़ी दवाइयों की गोलियां मैं भी एकसाथ निगल कर सो जाऊं, मगर यह सोच कर कि इस से किसी को क्या फर्क पड़ेगा, इरादा बदल लिया और पिछले कुछ दिनों से सब से अलग इस गैस्टहाउस में रहने लगा हूं. परिचितों को इसी उपनगर में चल रहे किसी धार्मिक आयोजन में व्यस्त होने की बात कह रखी है.’’ यह सब कह कर मेरे मित्र शायद थक कर खामोश हो गए.

काफी देर मौन पसरा रहा हमारे बीच, फिर मित्र ने ही मौन भंग किया, और बड़े निर्बल स्वर में बोले, ‘‘मैं ने तुम्हें इसलिए बुलाया है कि तुम बताओ, मैं क्या करूं?’’

मित्र के सवाल करने पर मुझे अपना फैसला सुनाने का मौका मिल गया. सो, मैं बोला, ‘‘अभिनव तुम्हें क्या करना है, तुम दोनों अकेले हो. वकील साहिबा के अंदर की औरत को तुम ने ही जगाया था और उन के अंदर की जागी हुई औरत ने तुम्हारे हताशनिराश जीवन में नई उमंग पैदा की और तुम्हारे परिवार को तनमन से अपने प्यार व सेवा का नैतिक संबल दे कर टूटने से बचाया. ऐसे में उसे जीवन की निराशा से टूटने से उबार कर नया जीवन देने की तुम्हारी नैतिक जिम्मेदारी बनती है. उस के द्वारा तुम्हारे परिवार पर किए गए एहसानों को चुकाने का समय आ गया है. तुम वकील साहिबा से रजिस्ट्रार औफिस में बाकायदा विवाह करो, जिस से वे तुम्हारी विधिसम्मत पत्नी का दर्जा पा सकें और भविष्य में कभी भी तुम्हारी संतानें उन्हें सता न सकें. तुम्हारे संतानों की अब अपनी दुनिया है, उन्हें उन की दुनिया में रहने दो.’’

मेरी बात सुन कर मित्र थोड़ी देर कुछ फैसला लेने जैसी मुद्रा में गंभीर रहे, फिर बोले, ‘‘चलो, उन के पास अस्पताल चलते हैं.’’

मित्र के साथ अस्पताल पहुंच कर डाक्टर से मिले, तो उन्होंने सलाह दी कि आप उन के साथ एक नई जिंदगी शुरू करेंगे, इसलिए उन्हें जो भी दें, वह एकदम नया दें और अपनी दिवंगत पत्नी के कपड़े या ज्वैलरी या दूसरा कोई चीज उन्हें न दें. साथ ही, कुछ दिन उस पुराने मकान से भी कहीं दूर रहें, तो ठीक होगा.

डाक्टर से सलाह कर के और उन्हें कुछ दिन अभी अस्पताल में ही रखने की अपील कर के हम घर लौटे तो पड़ोसी ने घर की चाबी दे कर बताया कि उन की छोटी बेटी सरकारी गाड़ी में थोड़ी देर पहले आई थी. आप द्वारा हमारे पास रखाई गई घर की चाबी हम से ले कर बोली कि उन्होंने मां की मृत्यु के बाद आप को अकेले नहीं रहने देने का फैसला लिया है, और काफी बड़े सरकारी क्वार्टर में वह अकेली ही रहती है, इसलिए अभी आप का कुछ जरूरी सामान ले कर जा रही है. आप ने तो कभी जिक्र किया नहीं, मगर बिटिया चलते समय बातोंबातों में इस मकान के लिए कोई ग्राहक तलाशने की अपील कर गई है.

ताला खोल कर हम अंदर घुसे तो पाया कि प्रशासनिक अधिकारी पुत्री उन के जरूरी सामान के नाम पर सिर्फ उन की पत्नी का सामान सारे वस्त्र, आभूषण यहां तक कि उन की सारी फोटोज भी उतार कर ले गई थी. एक पत्र टेबल पर छोड़ गई थी. जिस में लिखा था, ‘हम अपनी दिवंगता मां की कोई भी चीज अपने बाप की दूसरी बीवी के हाथ से छुए जाना भी पसंद नहीं करेंगे. इसलिए सिर्फ अपनी मां के सारे सामान ले जा रही हूं. आप का कोईर् सामान रुपयापैसा मैं ने छुआ तक नहीं है. मगर आप को यह भी बताना चाहती हूं कि अब हम आप को इस घर में नहीं रहने देंगे. भले ही यह घर आप के नाम से है और बनवाया भी आप ने ही है, मगर इस में हमारी मां की यादें बसी हैं. हम यह बरदाश्त नहीं करेंगे कि हमारे बाप की दूसरी बीवी इस घर में हमारी मां का स्थान ले. आप समझ जाएं तो ठीक है. वरना जरूरत पड़ी तो हम कानून का भी सहारा लेंगे.’

पत्र पढ़ कर मित्र कुछ देर खिन्न से दिखे. तो मैं ने उन्हें थोड़ा तसल्ली देने के लिए फ्रिज से पानी की बोतल निकाल कर उन्हें थोड़ा पानी पीने को कहा तो वे बोले, ‘‘आश्चर्य है, तुम मुझे इतना कमजोर समझ रहे हो कि मैं इस को पढ़ कर परेशान हो जाऊंगा. नहीं, पहले मैं थोड़ा पसोपेश में था, मगर अब तो मैं ने फैसला कर लिया है कि मैं इस मकान को जल्दी ही बेच दूंगा. पुत्री की धमकी से डर कर नहीं, बल्कि अपने फैसले को पूरा करने के लिए. इस की बिक्री से प्राप्त रकम के 4 हिस्से कर के 3 हिस्से पुत्र और पुत्रियों को दे दूंगा, और अपने हिस्से की रकम से एक छोटा सा मकान व सामान्य जीवन के लिए सामान खरीदूंगा. उस घर से मैं उन के साथ नए जीवन की शुरुआत करूंगा. मगर तब तक तुम्हें यहीं रुकना होगा. तुम रुक सकोगे न.’’ कह कर उन्होंने मेरा साथ पाने के लिए मेरी ओर उम्मीदभरी नजर से देखा. मेरी सांकेतिक स्वीकृति पा कर वे बड़े उत्साह से, ‘‘किसी ने सही कहा है, अ फ्रैंड इन नीड इज अ फ्रैंड इनडीड,’’ कहते हुए कमरे के बाहर निकले, दरवाजे पर ताला लगा कर चाबी पड़ोसी को दी और सड़क पर आ गए. नई जिंदगी की नई राह पर चलने के उत्साह में उन के कदम बहुत तेजी से बढ़ रहे थे.

साठ पार का प्यार – भाग 1

सुबहसुबह रजाई से मुंह ढांपे समीर  काफी देर तक जब पत्नी के उठाने का और गरमागरम चाय के कप का इंतजार करतेकरते थक गए तो रजाई से धीरे से मुंह निकाल कर बाहर झांका, ‘अभी तक कहां है सुहानी’ तो जो कुछ नजर आया, उस पर यकीन करना मुश्किल हो गया.

उलटेसीधे गाउन पर 2-3 स्वेटर पहने, मुंह और सिर भी शौल से लपेटे रहने वाली सुहानी आज गुलाबी रंग का चुस्त ट्रैक सूट पहने, ड्रैसिंग मिरर के सामने खुद को कई एंगल से निहारनिहार कर खुश हो रही थी.

‘‘यह क्या कर रही हो सुहानी,’’ समीर हैरानी से पलकें झपकाते हुए बोले.

‘‘ओह, उठ गए तुम. मैं जौगिंग पर जा रही हूं.’’ वह ‘जौगिंग’ शब्द पर जोर डालती हुई मीठी मुसकराहट के साथ आगे बोली, ‘‘मैं ने चाय पी ली, तुम्हारी रखी है, गरम कर के पी लेना.’’

‘‘लेकिन तुम इतने कम कपड़े पहन कर कहां जा रही हो, सर्दी लग जाएगी. वाक पर तो रोज ही जाती हो, आज यह जौगिंग की क्या सूझी,’’ समीर उठ कर बैठते हुए बोले. उन्हें सामने खड़ी सुहानी पर अभी भी विश्वास नहीं हो रहा था.

‘‘डार्लिंग,’’ सुहानी प्यार से उन के गालों पर हलकी सी चिकौटी काटती, दिलकश मुसकराहट बिखेरती हुई बोली, ‘‘पहले सारे किस्सेकहानियों में फोर्टीज की बात होती थी, अब सिक्सटीज की बात होती है. सुना नहीं, ‘लव इन सिक्सटीज?’ ’’

वह थोड़ा सा उन से सट कर बैठती हुई आगे बोली, ‘‘मैं ने सोचा, लव दूसरे से करना जरूरी है क्या, क्यों न खुद से ही शुरुआत की जाए. पहले खुद से, फिर तुम से,’’ उस ने रोमांटिक अंदाज में समीर के होंठों पर उंगली फेरने के साथ उन की आंखों में झांका.

समीर को गले से थूक निगलना पड़ा. 64 साल की उम्र में भी बांछें खिल गईं. मन ही मन सोचने लगे, ‘वैसे तो हाथ ही नहीं आती है…अब उम्र हो गई है, ये है, वो है. बिगड़ी घोड़ी सी बिदक जाती है. आज क्या हो गया.’

‘‘लेकिन इतने कम कपड़ों में तुम्हें ठंड नहीं लगेगी,’’ बुढ़ापे में चिंता स्वाभाविक थी.

‘‘अंदर से सारा इंतजाम किया हुआ है,’’ वह अंदर पहने कपड़े दिखाती हुई बोली, ‘‘ठंड नहीं लगेगी. अब तुम भी रजाई फेंक कर उठ जाओ और चाय गरम कर के पीलो,’’ उस ने फिर एक बार समीर के होंठों को हौले से छूने के साथ मस्तीभरी नजरों से देखा.

समीर को लगा कि शायद सुहानी कहीं मस्ती में उन के होंठों को चूम ही न ले. पर सुहानी का इतना नेक इरादा न था. वह उठ खड़ी हुई.

उस ने एकदो बार अपनी ही जगह पर खड़े हो कर जूते फटकारे. थोड़ी उछलीकूदी.

‘‘यह क्या कर रही हो?’’ समीर की हैरानी अभी भी कम नहीं हो रही थी.

‘‘बौडी को वार्मअप कर रही हूं डियर,’’ कह कर, तीरे नजर उन पर डाल कर, उन्हें खुश करती, 2 उंगलियों से बाय करती, बलखाती हुई सुहानी बाहर निकल गई.

समीर बेवकूफों की तरह थोड़ी देर वैसे ही बैठ कर उस भिड़े दरवाजे को देखते रहे जो अचानक लगे धक्के से अभी भी हिल रहा था. फिर हकीकत में वे रजाई फेंक कर उठ खड़े हो गए.

सड़क पर सुहानी हलकी चाल से दौड़ रही थी. उस का पहला दिन था. एक तय चाल से वाक करना और हलकी चाल से दौड़ना, दोनों बातें अलग थीं. अधिक थकान न हो, इसलिए वह बहुत एहतियात बरत रही थी. समीर को रिटायर हुए 4 साल हो गए थे. रिटायर होने के बाद भी 2 साल तक वे छिटपुट इधरउधर जौब करते रहे, पर 2 साल से पूरी तरह घर पर ही थे. समीर को सेहत का पाठ पढ़ातेपढ़ाते सुहानी थक चुकी थी. समीर सेहत के मामले में लापरवाह थे.

सुहानी अपनी सेहत का पूरा खयाल रखती थी, रोज वाक पर जाती थी, खाने में परहेज करती थी. पर समीर के पास हर बात के लिए कारण ही कारण थे. कभी नौकरी की व्यस्तता का बहाना, फिर कभी रिटायरमैंट केबाद कुछ समय आराम करने का बहाना. 2 साल से हर तरह से खाली होने के बावजूद समीर को सुबह की सैर पर ले जाना टेढ़ी खीर था. वे आलसी इंसान थे. आराम से उठो, सब तरह का खाना खाओपियो, ऐश करो.

समीर का बढ़ता वजन, बढ़ता पेट देख कर सुहानी को चिंता होती. उन का बढ़ता ब्लडप्रैशर, कभीकभी शुगर का बढ़ना उस की पेशानी में बल डाल देता. वह सोच में पड़ जाती कि कैसे समीर को अपनी सेहत पर ध्यान देने की आदत डाले, कैसे समझाए समीर को, कैसे उन का आलसीपन दूर करे.

इसी कशमकश में डूबतीउतराती सुहानी की नजर एक दिन पत्रिका में छपे एक लेख ‘लव इन सिक्सटीज’ पर पड़ी. वाह, कितना रोमांचक और रोमैंटिक टाइटल है. उस लेख को पढ़ कर पलभर के लिए उसे भी रोमांच हो आया. उस का दिल किया कि थोड़ा रोमांस वह भी कर ले समीर से. पर समीर के थुलथुलेपन को देख कर उस का सारा रोमांस काफूर हो गया.

बात सिर्फ सेहत के प्रति लापरवाही की होती, तो भी एक बात थी, पर घर में दिनभर खाली रहने के चलते समीर को हर छोटीछोटी बात पर टोकने की आदत पड़ गई थी. घर में काम वाली, धोबी, प्रैसवाला, माली सभी समीर के इस रवैए से परेशान रहने लगे थे.

‘ठीक से काम नहीं करती हो तुम, पोंछा ऐसे लगाते हैं क्या, बरतन भी कितने गंदे धोती हो. प्रैस कितनी गंदी कर के लाता है यह प्रैसवाला, लगता है बिना प्रैस किए ही तह कर दिए कपड़े.’’ कभी माली के पीछे पड़ जाते, ‘‘कुछ काम नहीं करता यह माली, बस आता है और फेरी लगा कर चला जाता है. तुम भी इसे देखती नहीं हो…’’

कभी सुहानी के ही पीछे पड़ जाते, ‘‘तुम कामवाली को गरम पानी क्यों देती हो काम करने के लिए? गीजर चला कर बरतन धोती है, गरम पानी से पोंछा लगाती है. उस से बिजली का बिल बढ़ता है. कामवाली को सर्दी की वजह से आने में देर हो जाती तो समीर की भुनभुनाहट शुरू हो जाती. रोज देर से आने लगी है, तुम इसे कुछ कहती क्यों नहीं, लगता है इस ने सुबह कहीं काम पकड़ लिया है?’’

पोंछा लगा कर कामवाली कमरे का पंखा चला देती तो वे हर कमरे का पंखा बंद कर के बड़बड़ाते रहते, ‘मैं तो नौकर हूं न, पंखे बंद करना मेरा काम है. सर्दी हो या गरमी, इसे पंखे जरूर चलाने हैं.’

माली से जब वे अपने हिसाब से काम कराने लगते तो उसे कुछ समझ नहीं आता और वह भाग खड़ा होता. जब सुहानी कई बार फोन कर के मिन्नतें करती तब जा कर वह आता. कामवाली डांट खा कर जबतब छुट्टी कर लेती. प्रैसवाला कईकई दिनों के लिए गायब हो जाता. सुहानी को काम करने वालों को रोकना मुश्किल हो रहा था. पर समीर थे कि अपने निठल्लेपन से बाज नहीं आ रहे थे.

काम वाले जबतब सुहानी से साहब की शिकायत करते रहते. सुहानी समीर को कई बार समझाती, ‘इन के पीछे क्यों पड़े रहते हो समीर. तुम अपने काम से काम रखा करो. इन सब को जैसे मैं इतने सालों से हैंडिल कर रही थी, अब भी कर लूंगी. तुम्हारे ऐसे रवैए से ये सब किसी दिन भाग खड़े होंगे.’

बोझ: भाग 1- सुबोध के होश क्यों उड़ गए

मौल में टहलते हुए मेरी नजर अपनी क्लासमेट दीर्घा पर पड़ी, तो थोड़ी देर तो मैं उसे पहचान न सकी क्योंकि वह पहले से काफी दुबली हो गई थी और उस के चेहरे का रंग फीका पड़ गया था. फिर उसे पहचाना तो, ‘‘दीर्घा,’’ कह कर मैं ने उसे आवाज दी. साथ ही तेजी से उस की तरफ बढ़ी. वह मेरी आवाज पर मुड़ी और उस ने मु झे पहचानने में देरी न की.

‘‘सुधा,’’ वह मुसकराई.

‘‘यहां कानपुर में क्या कर रही हो?’’

मैं ने पूछा.

‘‘मौसी के यहां आई हूं. मेरा बेटा बबलू घूमने की जिद कर रहा था, इसलिए चली आई.’’

‘‘अब तो वह काफी बड़ा हो गया होगा?’’

‘‘हां, 10 साल का है. ठहरो, अभी तुम को उस से मिलाती हूं,’’ कह कर दीर्घा ने बबलू को आवाज दी. वह कुछ बच्चों के साथ खेल रहा था.

‘‘बेटा, ये तुम्हारी सुधा मौसी हैं,’’ दीर्घा बोली तो उस ने बिना देर किए मेरे पैर छुए. मु झे अच्छा लगा.

‘‘तुम्हारे पतिदेव नहीं दिख रहे?’’ मैं ने इधरउधर नजरें दौड़ाईं. फिर महसूस किया कि पति के नाम पर उस का चेहरा उदास हो गया. अनायास ही मेरी नजर उस की सूनी मांग पर गई. मैं किसी निष्कर्ष पर पहुंचती, उस से पहले वह बोली, ‘‘मेरा उन से तलाक का मुकदमा चल रहा है.’’

‘‘क्यों?’’ मेरे सवाल पर वह बेमन से मुसकरा कर बोली, ‘‘सब यहीं पूछ लेगी? चल उधर चल कर बैठते हैं.’’

हम दोनों फू्रट ले कर पार्क में आ कर बैठ गए. वह कहने लगी, ‘‘तू तो जानती है कि मेरे पापा सरकारी नौकरी में थे. उन का ट्रांसफर इलाहाबाद से जबलपुर हो गया, तो बीए कर के

मैं भी वहीं चली गई. वहां पापा की मुलाकात सुबोध से हुई जो उन्हीं के विभाग के कर्मचारी थे और अविवाहित थे. पापा को वे अच्छे लगे, तो बिना देरी किए मेरी शादी के लिए उन्होंने उन के मम्मीपापा से संपर्क किया, तो संयोग से वे इलाहाबाद के ही रहने वाले निकले. वहां बात बन गई तो मेरी शादी उन के साथ हो गई. सुबोध से मु झे एक बेटा बबलू हुआ. फिर 2 साल ठीकठाक गुजरे. वे कभीकभी इस शादी को ले कर असंतोष प्रकट करते, तो मैं उसे दिल से नहीं लेती थी. सोचती थी कि मर्दों की तो यह फितरत ही होती है. वे अकसर अपने मांबाप से मिलने इलाहाबाद जाते रहते. एक बार गए तो जबलपुर नहीं लौटे, वहीं से नौकरी से इस्तीफा दे दिया.’’

‘‘इस्तीफा, क्यों?’’

‘‘मैं भी नहीं सम झी. अचानक कोई सरकारी नौकरी छोड़ता है क्या? वैसे मेरा ससुराल

संपन्न था. शहर में बड़ा सा मकान था. उस से अच्छाखास किराया आता था. पर उन का एकाएक नौकरी छोड़ कर व्यापार करना मेरी सम झ से परे था.’’

‘‘तो क्या तुम भी इलाहाबाद गई थीं?’’

‘‘जाना तो चाहती थी पर वे ही मना कर देते. कहते जब उचित होगा तो बुला लूंगा. तब तक अपने मांबाप के पास रहो. हां, यह जरूर था कि वे हर महीने मु झे रुपए भेजते थे. धीरेधीरे 1 साल हो गया. पापा बारबार कहते कि मु झे ससुराल जाना चाहिए. परंतु मैं ही मना कर देती. सोचती, न जाने क्या सोच कर उन्होंने आने के लिए मना किया है और चली जाती तो निश्चय ही उन्हें बुरा लगता.’’

‘‘फिर क्या हुआ?’’

‘‘होना क्या था, मु झे विश्वस्त सूत्रों से पता चला कि उन्होंने एक विजातीय लड़की से प्रेम विवाह कर लिया और उसी के साथ रहने भी

लगे हैं.’’

‘‘तुम्हारे सासससुर ने एतराज नहीं किया?’’

‘‘मैं नहीं जानती. हां, अपना हक मांगने गई तो किसी ने मु झे घर में घुसने नहीं दिया. उलटे चरित्र पर कीचड़ उछाल कर बाहर का रास्ता दिखा दिया.’’

‘‘कितना आसान होता है स्त्री पर लांछन लगाना,’’ मैं बुदबुदाई फिर दीर्घा से बोली, ‘‘तुम को प्रतिरोध करना चाहिए था. जबरदस्ती घर में घुस कर हक जमाना चाहिए था.’’

‘‘यह इतना आसान नहीं था. ससुराल में हक पति से बनता है. जब पति ही नहीं रहा, तो किस मुंह से हक जमाती?’’

‘‘उसे अपने बच्चे का भी खयाल नहीं आया?’’

‘‘जो आदमी रासरंग में डूबा हो उसे भला अपने खून का खयाल क्या आएगा?’’ उस की आंखों में वेदना की रेखा उभर आई. अगले ही पल वह उस से उबरी. मुसकराकर बोली, ‘‘सुना है वह तेरी तरह ही तीखे नाकनक्श वाली सुंदर महिला है,’’ फिर बोली, ‘‘उस रोज के बाद

मैं ने हमेशा के लिए उस से अलग होने का फैसला ले लिया.’’

दीर्घा की आपबीती सुन कर मु झे बहुत

दुख हुआ.

वापस इलाहाबाद आई तो काफी दिनों तक दीर्घा मेरे जेहन में बनी रही. मैं ने इस की चर्चा अपने पति सुबोध से की. पहले तो वह सकपकाया फिर सामान्य होते हुए बोला, ‘‘तुम तो बेमतलब का किस्सा ले कर बैठ जाती हो. जिस की समस्या है वह जाने. तुम अपना माथा क्यों खराब करती हो?’’

‘‘वह व्यक्ति मेरे सामने आ जाए तो मैं उसे नहीं छोडूंगी,’’ मेरे इस कथन पर सुबोध ने हंस कर बात को टाला.

दीर्घा जब कभी फुरसत में होती मु झ से फोन पर अवश्य बात करती. ऐसे ही एक रोज उस ने कहा कि परसों तलाक की तारीख पड़ी है. मैं इलाहाबाद आऊंगी तो तुम से अवश्य मिलूंगी. मैं उस दिन का इंतजार करने लगी. सुबोध सुबह 10 बजे से ही अपने काम के सिलसिले में घर से निकला हुआ था. सासससुर नौकरी पर गए थे. मैं घर में बिलकुल अकेली थी. सोचा, दीर्घा आएगी तो खूब बातें करेंगे, मगर 3 बज गए वह नहीं आई. सुबोध आया तो मेरी बेसब्री को ताड़ गया.

मैं ने कहा, ‘‘दीर्घा का इंतजार कर रही हूं.’’

‘‘दीर्घा, दीर्घा, दीर्घा,’’ वह एकाएक उबल पड़ा, ‘‘तुम्हें और कोई दोस्त नहीं मिला?’’

‘‘आप दीर्घा का नाम सुन कर आपे से बाहर क्यों हो गए? यह हमारा आपसी मामला है,’’ मैं ने भी उसी लहजे में जवाब दिया.

‘‘मु झ से ज्यादा कोई तुम्हारा करीबी होगा?’’ सुबोध बोला.

‘‘मैं तुलना नहीं कर रही हूं,’’ मैं गुस्से से बोली. हम दोनों में तूतू मैंमैं हो रही थी कि दीर्घा ने दस्तक दी. मैं तेजी से चल कर फाटक तक आई तो मु झे देख कर वह मुड़ने लगी. मु झे आश्चर्य हुआ कि वह क्यों ऐसा कर रही है?

‘‘दीर्घा,’’ मैं ने आवाज दी पर वह अनसुनी कर के चल दी. जब कई बार आवाज लगाने के बाद भी उस ने पीछे मुड़ कर नहीं देखा तो मु झे गुस्सा आया. लेकिन यह सोच कर चिंता से घिर गई कि आखिर दीर्घा ने ऐसा क्यों किया? मैं वापस घर में आई और बिना कुछ बोले बिस्तर

पर पड़ गई. मेरे दिमाग में सैकड़ों सवाल हथौड़े की भांति प्रहार करने लगे. दीर्घा का इस तरह

चले जाने की क्या वजह हो सकता है? मैं ने हर तरीके से हल ढूंढ़ना चाहा पर किसी नतीजे पर न पहुंच सकी.

नया स्वाद रहे हमेशा याद

आज हम आपके लिए लेकर आए स्वादिष्ट और जबरदस्त फूड रिसेपी. आइए आपको बताते है इन डिश की रेसिपी.

  1. वैज हांड़ी बिरयानी

   सामग्री

  1. 11/2 कप बासमती चावल

    2. 1/2 कप फूलगोभी 

    3. 1/2 कप हरे मटर

    4.  1/2 कप बींस 

   5. 2 शिमलामिर्च

   6. 2 आलू उबले 

   7. 2 चौथाई प्याज

  8.  2 प्याज कटे

  9. 1 कप दही

10. 1 टुकड़ा दालचीनी 

  11. 2 लौंग

12.  2 तेजपत्ते 

 13. 2 इलायची

14. 1 छोटा चम्मच लालमिर्च पाउडर

15.  1/4 छोटा चम्मच हलदी पाउडर

16.  4 कालीमिर्च

17. 1 छोटा चम्मच लहसुन कसा

18. 1 छोटा चम्मच अदरक कद्दूकस किया

19.  चुटकी भर हींग

20.  बड़ा चम्मच धनियापत्ती कटी

21. 1 बड़ा चम्मच नीबू का रस

 22.  10 बादाम 

23. 10 काजू

 24.  4 बड़े चम्मच घी 

 25. नमक स्वादानुसार.

विधि

गोभी, मटर और बींस में नमक डाल कर उबालें और एक तरफ रख दें. चावलों को 30 मिनट तक पानी में भिगोए रखें. फिर पानी निकाल कर नमक मिलाएं और एक प्लेट में फैलाएं. एक बरतन में घी गरम कर उस में प्याज डाल कर सुनहरा होने तक फ्राई करें और निकाल कर एक तरफ रख दें. ऐसे ही काजुओं को सुनहरा होने तक फ्राई कर के एक तरफ रख लें. शिमलामिर्च को पका कर एक तरफ रख लें. एक बड़े बरतन में 6 कप पानी गरम करें. उस में कालीमिर्च, लौंग, इलायची, तेजपत्ते और नमक मिलाएं. फिर इस में चावल मिलाएं और 8-10 मिनट पकाएं. अब चावलों को एक बड़ी प्लेट में फैलाएं. चौथाई प्याज, लहसुन व अदरक का पेस्ट गरम घी में डाल कर 3 मिनट पकाएं. अब इस में लालमिर्च पाउडर, हलदी पाउडर, गरममसाला, हींग, प्याज और आलुओं को छोड़ कर बाकी सब्जियां मिलाएं. इन्हें तेल छोड़ने तक पकाएं. अब इस में फेंटा हुआ दही मिला कर 3 मिनट पकाएं और आलू मिलाएं. फिर अलग रख दें. एक हांड़ी के तले में चिकनाई लगा कर चावल फैलाएं. ऊपर पकी हुई सब्जियां फैलाएं. अब बाकी सभी फ्राइड सामग्री को इस के ऊपर डालें. ऊपर से नीबू का रस छिड़कें. अब फिर से इस विधि को सामग्री समाप्त होने तक दोहराएं. अब ढक्कन बंद कर किनारों को लोई से बंद करें. अब इस ओवन को पहले से 130 डिग्री तापमान पर गरम किए बरतन में रखें. 15-20 मिनट उसी में रहने दें. फिर गरमगरम सर्व करें.

  2. मलाई कोफ्ता

सामग्री

1.  4 आलू उबले

  2. 250 ग्राम पनीर

 3. 50 ग्राम मैदा

 4.  1 बड़ा चम्मच धनियापत्ती कटी

 5. 3 प्याज

 6. 1 बड़ा चम्मच अदरकलहसुन पेस्ट

7. 2 टमाटरों का पेस्ट

8. 200 एमएल मलाई या क्रीम

9.  50 ग्राम किशमिश

10. 50 ग्राम काजू

 11. 1/2 छोटा चम्मच हलदी पाउडर

 12.  1/2 छोटा चम्मच लालमिर्च पाउडर

13.  1/2 छोटा चम्मच किचन किंग मसाला

14.  1 बड़ा चम्मच कसूरीमेथी

 15. 1 बड़ा चम्मच चीनी

16.  नमक स्वादानुसार.

विधि

कोफ्तों की 4-5 घंटे फ्रिज में रखे ठंडे उबले आलुओं के कोफ्ते आसानी से बनते हैं. उबले आलू, पनीर और मैदे को मैश करें. यह न ज्यादा कड़ा और न ज्यादा मुलायम हो. अब इस में नमक व धनियापत्ती मिलाएं. किशमिश और 25 ग्राम काजू को बारीक काट कर, 1/2 छोटा चम्मच चीनी भी मिलाएं. अब आलू मिश्रण की बौल्स बना कर अंदर ड्राई फू्रट भरें और फ्राई करें. अगर फ्राई करते समय कोफ्ता टूटने लगे तो मैदा मिलाएं.

विधि ग्रेवी की

प्याज, अदरकलहसुन पेस्ट और टमाटर पेस्ट फ्राई करें. बचे काजू को 2 बड़े चम्मच गरम दूध मिला कर पेस्ट बनाएं. कसूरीमेथी के अलावा भी सूखे मसालों का पेस्ट बनाएं और तेल में तब तक फ्राई करें जब तक तेल अलग न हो जाए. अब इस में 1/2 कप पानी मिलाएं. ग्रेवी तैयार होने पर इस में क्रीम या मलाई मिलाएं. अब चीनी और कसूरी मेथी मिलाएं. उबाल आने पर इस में फ्राइड कोफ्ते डाल कर गरमगरम चपातियों या पुलाव के साथ सर्व करें.

मेरी उम्र 19 साल है मैं अपने से 2 साल बड़े लड़के से प्यार करती हूं, बताएं मैं क्या करूं?

सवाल

मैं 19 साल की हूं और अपने से 2 साल बड़े लड़के से प्यार करती हूं. हम ने कई बार सैक्स का आनंद भी उठाया है. वह मुझे बहुत प्यार करता है और मुझ से शादी करना चाहता है. उस के घर वालों को भी कोई ऐतराज नहीं है पर मेरे घर वाले तैयार नहीं हो रहे, क्योंकि वह अलग जाति का है और मैं अलग जाति की. हमारे रिश्ते के बारे में घर वालों को पता चला तो मेरी पढ़ाई छुड़वा दी और मोबाइल भी ले लिया. फिर भी मैं लड़के से चोरीछिपे बात कर लेती हूं. बौयफ्रैंड मुझ से बिना बात किए नहीं रह सकता. इस की वजह से उस की पढ़ाई भी डिस्टर्ब हो रही है. वह कह रहा है कि अगर घर वाले नहीं मान रहे तो अभी रुको, 4 साल बाद जब मेरी पढ़ाई पूरी हो जाएगी तो हम शादी कर लेंगे. मगर इस दिल को कैसे तसल्ली दूं, जो दिनरात उसी के लिए धड़क रहा है? बताएं मैं क्या करूं?

जवाब

अभी आप की उम्र काफी छोटी है. यह उम्र पढ़लिख करकुछ बनने की होती है. मगर आप कच्ची उम्र में ही गलती कर बैठीं. यहां तक कि जिस्मानी संबंध भी बना लिए.आप के पेरैंट्स का सोचना सही है. वे भी यही चाहते होंगे कि पहले आप अपने पैरों पर अच्छी तरह खड़ी हो जाएं, कैरियर बना लें तभी शादी की सोचेंगे.खैर, जो होना था सो हो गया. अब समझदारी इसी में है कि आप पहले अपने घर वालों को विश्वास में ले कर अपनी पढ़ाई जारी रखें. बौयफ्रैंड को भी अपना कैरियर बनाने दें.अगर वह 4 साल इंतजार करने को कह रहा है तो उस का सोचना भी सही है. अगर वहआप से सच्ची मुहब्बत करता है तो 4 साल बाद ही सही, आप से जरूर विवाह करेगा.रही बात एकदूसरे की जाति अलगअलग होने की, तो आज के समय में ये सब दकियानूसी बातेंहैं. समाज में ऐसी शादियां खूब हो रही हैं.देरसवेर आप के पेरैंट्स भी मान जाएंगे. अगर न मानें तो आप दोनों कोर्ट मैरिज कर सकते हैं. फिलहाल यही जरूरी है कि आप दोनों ही अपनेअपने कैरियर पर ध्यान दें.

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मैं 33 साल की विवाहिता हूं. पति और 2 बच्चों के साथ खुशहाल जीवन जी रही हूं. शादी से पहले मेरी जिंदगी में एक युवक आया था, जिस से मैं प्यार करती थी, पर किन्हीं वजहों से हमारी शादी नहीं हो पाई थी. अब उस का भी अपना परिवार, पत्नी व बच्चे हैं. इधर कुछ दिनों पहले फेसबुक पर हम दोनों मिले. मोबाइल नंबरों का आदानप्रदान हुआ और अब हम घंटों बातचीत, चैटिंग करते हैं. वह मुझ से मिलना चाहता है. बताएं मैं क्या करूं?

जवाब

वह आप का अतीत था. अब आप दोनों के ही रास्ते अलग हैं. पति, परिवार, बच्चे व सुखद जीवन है. पुरानी यादों को ताजा कर आप दोनों की नजदीकियां दोनों ही परिवारों की खुशियों पर ग्रहण लगा सकती हैं. इसलिए बेहतर यही होगा कि इस रिश्ते को अब आगे न बढ़ाया जाए. हां, अगर वह एक दोस्त के नाते आप से मिलना चाहता है, तो इस में कोई बुराई नहीं. आप घर से बाहर किसी रेस्तरां, पार्क आदि में उस से मिल सकती हैं. बुनियाद दोस्ती की हो तो मिलने में हरज नहीं, बशर्ते मुलाकात मर्यादित रहे. हद न पार की जाए.

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एक्ने के लिए फेशियल स्टीम के फायदे

अगर आप अपनी स्किन पर बहुत सारे पिंपल्स और एक्ने से परेशान हैं तो आप अपने चेहरे पर स्टीमिंग ट्राई कर सकती हैं. स्किन को भांप देने से आपको ढेर सारे लाभ मिल सकते हैं जिसमें आपके चेहरे पर जमी गंदगी दूर हो जाना, एक्ने खत्म होने में मदद मिलना आदि शामिल है. भांप लेने से आपके स्किन केयर प्रोडक्ट्स स्किन द्वारा अच्छे से अब्जोर्ब हो जाते हैं जिस वजह से अच्छे रिजल्ट मिल पाते हैं. आइए जान लेते हैं कैसे फेशियल स्टीमिंग आपकी स्किन के लिए लाभदायक हो सकती है.

स्टीमिंग एक्ने से छुटकारा पाने में किस तरह मदद करती है?

आप को किसी भी तरह का नया उपाय करते समय यह पता होना चाहिए की आप की स्किन पर वह चीज कैसे काम करेगी. आपको तब एक्ने की समस्या होती है जब आप की स्किन के पोर्स में तेल, गंदगी और डेड स्किन सेल्स इकठ्ठी हो जाती हैं. एक्सपर्ट्स के मुताबिक जब आप अपनी स्किन को  स्टीम देती हैं तो आपके पोर्स ओपन हो जाते हैं. इससे आपकी स्किन क्लीन होने लगती है.

एक अन्य स्टडी में यह देखने को मिला की स्टीमिंग से आपकी स्किन प्रयोग किए जाने वाले प्रोडक्ट्स को अच्छे से अब्सोर्ब कर लेती है जिस वजह से आपको अच्छे रिजल्ट देखने को मिलते हैं. भांप लेने के बाद आपकी स्किन सॉफ्ट हो जाती है और आप जिस भी चीज का प्रयोग करती हैं वह अच्छे से काम करने लगती है.

अगर आप किसी भी चीज का प्रयोग करती हैं और वह काम नहीं करती हैं तो इसका अर्थ है की वह आपकी स्किन की गहरी लेयर्स तक नहीं पहुंच पा रही हैं. इस काम में भी स्टीमिंग आपकी मदद करती है. इससे आपके पोर्स क्लीन होते हैं और आपको दुबारा बार बार पिंपल्स के आने की चिंता से मुक्ति मिल सकती है.

एक्ने के लिए फेशियल स्टीम के लाभ

यह आपकी स्किन को साफ करती है 

भांप देने से आपकी स्किन के पोर्स खुलते हैं, आपके चेहरे की गंदगी साफ हो जाती है और बैक्टीरिया से आपको मुक्ति मिलती है

यह सर्कुलेशन को बूस्ट करने में सहायक है 

फेशियल स्टीम लेने से आपके चेहरे तक ब्लड फ्लो अच्छा होता है और इन्फ्लेमेशन कम होती है। इससे आपके चेहरे को ऑक्सीजन और सभी पौष्टिक तत्व प्राप्त होते हैं

यह स्किन को हाइड्रेट करने में सहायक है 

फेशियल स्टीम से आपके चेहरे को हाइड्रेशन मिलती है. जब आपके पोर्स खुले हुए होते हैं तो उनमें से प्राकृतिक ऑयल रिलीज होता है जिससे स्किन मॉश्चराइज रहती है.

कोलेजन डेवलपमेंट होने में मदद मिलती है 

आपके चेहरे को स्टीमिंग के बाद बढ़ी हुई मात्रा में खून प्राप्त होता है जिस वजह से कोलेजन डेवलपमेंट होने में मदद मिलती है.

कैसे करें घर पर ही स्टीम फेशियल?

इसे करने के कई तरीके हैं. आपको एक बड़ा सा बर्तन ले लेना है और उसमें काफी गर्म और उबला हुआ पानी डाल लें. इसके बाद अपने सिर को एक कपड़े से ढंक लें और उस बर्तन के ऊपर मुंह रख लें ताकि आपके चेहरे को गर्म गर्म भांप मिलती रहें. आप चाहें तो इस पानी में अपने पसंद का एसेंशियल ऑयल भी मिला सकती हैं. इससे पहले आपको एक माइल्ड क्लींजर की मदद से अपने चेहरे को साफ भी करना चाहिए.

निष्कर्ष

अगर आप फेशियल स्टीम का प्रयोग करती हैं तो आपको एक्ने के अलावा और भी काफी सारे स्किन से जुड़े लाभ मिल सकते हैं.  इसलिए हफ्ते में एक बार इस फेशियल का प्रयोग जरूर करें.

क्रिसमस पार्टी में दिखना है अट्रैक्टिव तो अपनाए ये टिप्स

पार्टी में जाना हर किसी को पसंद होता है और उस पार्टी की तो बात ही अलग है जो या तो थीम के अनुसार हो या फेस्टिवल के. क्रिसमस आने में अब कुछ ही दिन बाकि हैं. ऐसे में यदि आप पार्टी ऑर्गनिज़ करने जा रहे है या आपको बाहर पार्टी के लिए जाना है तो खुद को स्टाइलिश लुक देना न भूलें. तो चलिए जानते हैं कुछ ऐसे टिप्स जो आपको सभी की नजरों में खास बना देंगे.

  1. सही ऑउटफिट के साथ स्टाइलिश जूते 

अगर आपकी पार्टी की कोई थीम है तो उसी के अनुसार अपनी ड्रेस का चयन करें वरना आप क्रिसमस को ही अपनी थीम मानते हुए लाल व सफेद रंग का ऑउटफिट पहन सकती है. यदि आप वन पीस पहनना चाहती हैं तो साथ में बूट्स पहने और लॉन्ग ड्रेस के साथ हाई हिल्स बेहद अच्छा लुक देंगी.

2. एक्सेससरीज़

आउटफिट के साथ में एक्सेससरीज आपके ड्रेसअप को चार चाँद लगा देते हैं. रेड एंड वाइट हैडबैंड्स या फिर एंब्रॉएड्री वाले हैडबैंड्स का प्रयोग करें साथ ही हल्के से नेकलेस भी पहन सकती हैं.

3. परफेक्ट हेयर स्टाइल 

हाफ-अप, हाफ-डाउन बोहेमियन यानि बोहो हेयरस्टाइल क्रिसमस पार्टी के लिए एकदम परफेक्ट है. इसके आलावा हाफ बन ,स्ट्रैट ,कर्ल हेयर स्टाइल  भी करा सकती हैं.

4. आई मेकअप हो खास 

हमारी ऑंखें बीन बोले ही बहुत कुछ बोल जाती है इसीलिए  इनका मेकअप भी ऐसा हो की सभी की नजरे आप पर टीकी रहें. क्रिसमस पार्टी अधिकतर रात में होती है तो स्मोकी आईज बहुत खूबसूरत लगेंगी और इस के साथ में स्टोन लगाकर फन मेकअप भी अपना सकती हैं.

5. ब्राइट शेड लिपस्टिक 

होठों पर लिपस्टिक ऐसी लगाएं जो लम्बे टाइम तक चले. ब्राइट फ्यूशिया लाल, मेरून ,वाइन रंग की लिपस्टिक लगाएं. शाइन के लिए अपनी ड्रेस से मिलता हुआ हल्का सा हाइलाइटर लगा ले ये आपकी लिस्टिक शेड को नया लुक देगा

अच्छी सेहत के लिए जरूरी है पर्याप्त प्रोटीन

प्रोटीन शरीर में पेशियों, अंगों, त्वचा, ऐंजाइम, हारमोन आदि बनाने के लिए बेहद जरूरी होते हैं. ये छोटे अणु हमारे शरीर में कई महत्त्वपूर्ण काम करते हैं.

हमारे शरीर में 20 प्रकार के एमिनो ऐसिड होते हैं, जिन में से 8 जरूरी एमिनो ऐसिड कहलाते हैं, क्योंकि शरीर इन्हें खुद नहीं बना सकता. इसलिए इन्हें आहार के माध्यम से लेना बहुत जरूरी होता है. शेष 12 एमिनो ऐसिड गैरजरूरी कहे जा सकते हैं, क्योंकि हमारा शरीर खुद इन का उत्पादन कर सकता है. प्रोटीन छोटे अणुओं से बने होते हैं, जिन्हें एमिनो ऐसिड कहते हैं. ये एमिनो ऐसिड एकदूसरे के साथ जुड़ कर प्रोटीन की शृंखला बना लेते हैं.

प्रोटीन से युक्त आहार को पचाने के लिए शरीर को ज्यादा ऊर्जा की जरूरत होती है. इसलिए प्रोटीन को पचाने के दौरान शरीर में जमा कैलोरी (वसा और कार्बोहाइड्रेट) बर्न हो जाती है. इस तरह प्रोटीन का सेवन करने से शरीर का वजन सामान्य बना रहता है.

अगर आप शाकाहारी हैं और ऐनिमल प्रोटीन का सेवन नहीं करते हैं तो आप के लिए प्रोटीन की जरूरत पूरी करना थोड़ा मुश्किल होगा. यही कारण है कि शाकाहारी लोगों में प्रोटीन की कमी होने की संभावना ज्यादा होती है.

एक व्यक्ति को औसतन कितनी मात्रा में प्रोटीन की जरूरत होती है?

हर व्यक्ति को अपने शरीर के अनुसार अलग मात्रा में प्रोटीन की जरूरत होती है. यह व्यक्ति की ऊंचाई और वजन पर निर्भर करता है. सही मात्रा में प्रोटीन का सेवन कई चीजों पर निर्भर करता है जैसे आप कितने ऐक्टिव हैं, आप की उम्र क्या है? आप का मसल मास क्या है? आप की सेहत कैसी है?

अगर आप का वजन सामान्य है, आप ज्यादा व्यायाम नहीं करते, भार नहीं उठाते तो आप को औसतन 0.36 से 0.6 ग्राम प्रति पाउंड (0.8 से 1.3 ग्राम प्रति किलोग्राम वजन) प्रोटीन की जरूरत होती है. औसत पुरुष के लिए 56 से 91 ग्राम रोजाना और औसत महिला के लिए 46 से 75 ग्राम रोजाना.

प्रोटीन की कमी क्या है?

प्रोटीन की कमी बहुत ज्यादा होने पर शरीर में कई बदलाव आ सकते हैं. इन की कमी शरीर के लगभग हर काम को प्रभावित करती है. ये 13 लक्षण बताते हैं कि आप अपने आहार में पर्याप्त प्रोटीन का सेवन नहीं कर रहे हैं.

वजन में कमी: प्रोटीन की कमी के 2 प्रकार हैं-

पहला क्वाशिओरकोर. यह तब होता है जब आप कैलोरी तो पर्याप्त मात्रा में ले रहे हैं, लेकिन आप के आहार में प्रोटीन की कमी है और दूसरा मरैज्मस. यह तब होता है जब आप कैलोरी और प्रोटीन दोनों ही कम मात्रा में ले रहे होते हैं.

अगर आप प्रोटीन का सेवन पर्याप्त मात्रा में नहीं कर रहे हैं, तो हो सकता है कि आप का आहार संतुलित नहीं है. आप के आहार में कैलोरी पर्याप्त मात्रा में नहीं है या आप का शरीर भोजन को ठीक से नहीं पचा पा रहा है. अगर आप बहुत कम मात्रा में कैलोरी का सेवन करते हैं, तो आप का शरीर प्रोटीन का इस्तेमाल ऐनर्जी पाने के लिए करेगा न कि पेशियां बनाने के लिए. इस से आप का वजन कम हो जाएगा. हालांकि कुछ लोगों में वजन बढ़ जाता है, क्योंकि उन के शरीर में प्रोटीन को पचाने के लिए पर्याप्त ऊर्जा नहीं होती.

बाल, त्वचा और नाखूनों की समस्याएं: प्रोटीन की कमी का बुरा असर अकसर बालों, त्वचा और नाखूनों पर पड़ता है, क्योंकि ये अंग पूरी तरह प्रोटीन से बने होते हैं. प्रोटीन की कमी से अकसर सब से पहले बाल पतले होने लगते हैं, त्वचा पर से परतें उतरने लगती हैं और नाखूनों में दरारें आने लगती हैं.

थकान या कमजोरी महसूस होना: जब शरीर को पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन नहीं मिलता तो पेशियां कमजोर होने लगती हैं, शरीर पेशियों में से एमिनो ऐसिड पाने की कोशिश करता है, जिस से मसल मास कम हो जाता है और मैटाबोलिक रेट भी कम होने लगता है. इस से शरीर में ताकत और ऐनर्जी कम हो जाती और आप हमेशा थका हुआ महसूस करते हैं.

चीनी या मीठा खाने की इच्छा: प्रोटीन को पचाने में कार्बोहाइड्रेट की तुलना में ज्यादा समय लगता है. जब आप ज्यादा कार्बोहाइड्रेट से युक्त भोजन खाते हैं, तो ब्लड शुगर अचानक बढ़ती है और फिर कम हो जाती है. इसलिए चीनी या मीठा खाने की इच्छा होती है. इस से बचने के लिए अपने आहार में प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट दोनों की पर्याप्त मात्रा का सेवन करें ताकि आप का शरीर भोजन को धीरेधीरे पचाए और ब्लड शुगर के स्तर में अचानक बदलाव न आए.

ऐनीमिया या खून की कमी: अगर आप के शरीर में प्रोटीन की कमी है तो विटामिन बी12 और फौलेट की कमी होने की संभावना भी बढ़ जाती है, जिस के कारण खून की कमी यानी ऐनीमिया हो सकता है. इस में शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या कम हो जाती है, जिस कारण ब्लड प्रैशर कम हो सकता है और आप थकान भी महसूस कर सकते हैं.

प्रतिरक्षा क्षमता/ इम्यूनिटी: प्रोटीन की कमी से इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है और फिर बारबार बीमार पड़ने लगते हैं. ठीक होने में भी समय लगता है. इम्यून सैल्स प्रोटीन से बने होते हैं. इसलिए अगर आप का आहार संतुलित नहीं है तो आप डोमिनो इफैक्ट से परेशान हो सकते हैं.

ब्लड प्रैशर और हार्ट रेट कम होना: प्रोटीन की कमी से ब्लड प्रैशर कम होने की संभावना बढ़ जाती है. अगर शरीर को सही पोषण न मिले तो इस का असर शरीर के सभी कार्यों पर पड़ता है.

लिवर की समस्याएं: प्रोटीन की कमी और लिवर रोग एकदूसरे से संबंधित हैं. प्रोटीन के बिना आप का लिवर डिटौक्सीफिकेशन का काम ठीक से नहीं कर पाता.

पेशियों और जोड़ों में दर्द: प्रोटीन की कमी होने पर शरीर ऊर्जा की जरूरत पूरी करने के लिए पेशियों से कैलोरी बर्न करने लगता है, जिस से पेशियों एवं जोड़ों में दर्द, कमजोरी महसूस होने लगती है.

पेशियों में कमजोरी: मध्य आयुवर्ग के पुरुषों में अकसर उम्र बढ़ने के साथ सार्कोपेनिया हो जाता है. उन का मसल मास कम होने लगता है. अगर वे अपने आहार में प्रोटीन का सेवन पर्याप्त मात्रा में न करें तो यह समस्या और ज्यादा बढ़ सकती है.

सूजन: अगर आप के शरीर में प्रोटीन की कमी है, तो आप एडिमा यानी सूजन से पीडि़त हो सकते हैं. शरीर में पानी भरने से आप अपनेआप में फुलावट महसूस करते हैं. प्रोटीन टिशूज में खासतौर पर आप के पैरों और टखनों में पानी भरने से रोकता है.

चोट जल्दी ठीक न होना: प्रोटीन की कमी से शरीर की प्रतिरक्षा क्षमता तो कमजोर होती ही है, साथ ही घाव को भरने के लिए नए टिशूज और नई त्वचा बनाने के लिए भी प्रोटीन की जरूरत होती है.

बच्चों का ठीक से विकास न होना: प्रोटीन न केवल पेशियों और हड्डियों को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है, बल्कि शरीर के विकास के लिए भी जरूरी है. इसलिए बच्चों में प्रोटीन की कमी घातक साबित होती है. प्रोटीन की कमी के कारण उन का विकास ठीक से नहीं हो पाता है.

-डा. श्रुति शर्मा, डाइट काउंसलर, बैरिएट्रिक एवं न्यूट्रिशनिस्ट, जेपी हौस्पिटल, नोएडा

Wedding Special: शादी के बाद तीर्थ नहीं यहां जाएं

दोपहर का रसोई का काम निबटा कर मैं अपने बैडरूम में बैड पर लेटी ही थी कि तभी मोबाइल बजने पर जाग गई. फोन की स्क्रीन पर अपनी बैस्टी निर्वीका का नाम देख मैं खुशी से उछल पड़ी.

‘‘इतने दिन लगा दिए यार अपने हनीमून में, एक बार फोन तक नहीं किया मुझे कि मेरी खैरखबर ले लेती. अब विहान जो तुझे मिल गया है. अब मैं कहां की बैस्टी, कैसी बैस्टी?’’ मैं ने निर्वी से कहा.

‘‘अरे मिनी गुस्सा मत कर यार. पिछले कुछ दिन इतने हैक्टिक बीते कि पूछ मत. फिर जो मैं ने पुष्कर जैसे तीर्थस्थल को अपने हनीमून स्पौट के तौर पर चुना, उस में भी बहुत जबरदस्त पंगा  हो गया. विहान को हनीमून के लिए पुष्कर बिलकुल रास नहीं आया. इस के चलते वह दोनों दिन मेरी जान खाता रहा कि तुम हनीमून के लिए आई हो या तीर्थ यात्रा के लिए? सच में हनीमून के लिए मेरा पुष्कर का चुनाव बहुत गलत रहा. कदमकदम पर मंदिर, पंडित, पुजारी, घंटियों, मंत्रों, पूजा की आवाज.

विहान तो कहने लगा, ‘‘हनीमून के लिए तुम्हें चप्पेचप्पे पर मंदिरों वाला यही शहर सू?ा? जहां मूड थोड़ा रोमांटिक होता वहीं कोई मंदिर दिख जाता और रोमांस का सारा मूड चौपट हो जाता.’’

निर्वी की ये बातें सुन मैं बेतहाशा ठठा कर हंस पड़ी, ‘‘मूर्ख लड़की, आखिर पुष्कर जैसे एक धार्मिक शहर को तू ने हनीमून डैस्टिनेशन के तौर पर चुना ही क्यों? पूरे राजस्थान में और भी तो बढि़या जगहें हैं. चित्तौड़, उदयपुर कहीं भी चली जाती. यह तेरी सूई आखिर पुष्कर पर ही क्यों अटक गई, आखिर मैं भी तो सुनूं जरा?’’

‘‘अरे मिनी, तुझे तो पता है झाल, दरिया, नदी मुझे बेहद फैसीनेट करते हैं. मैं ठहरी एक प्रकृति प्रेमी. इस की ब्यूटी मुझे सदा से लुभाती आई है. कुछ वर्षों पहले मैं पुष्कर गई थी. तब वहां गुलाबों के बड़ेबड़े खूबसूरत बगीचे और खूबसूरत झीलें देख मन में खयाल आया था कि अपने हनीमून के लिए पुष्कर जरूर जाऊंगी. मगर शादी की व्यस्तता में गूगल करना भूल ही गई कि ये 2-3 महीने वहां गुलाब खिलते भी हैं या नहीं? विहान से डांट अलग खाई कि तुम जैसा डफर आज तक नहीं देखा जो यह पता लगाए बिना कि वहां इस सीजन में गुलाब खिलते हैं या नहीं तुम ने वहां हनीमून का प्रोग्राम बना लिया,’’ निर्वी रोंआसे स्वर में बोली.

‘‘तुम ने एक बार भी यह नहीं सोचा

पुष्कर जैसी धार्मिक जगह पर मंदिरों की भरमार होगी और मंदिर और रोमांस का दूरदूर तक कोई रिश्ता नहीं.’’

‘‘यार, मेरी सासूमां और दादी सासूमां ने भी इस जगह को फाइनल करने में इंपौर्टैंट भूमिका निभाई. दोनों ने ही कहा, ‘‘जिंदगी की शुरुआत अगर किसी पवित्र जगह पर ईश्वर के आशीर्वाद के साथ हो तो इस से बेहतर कुछ नहीं. तो यह फैक्टर भी हनीमून के लिए पुष्कर के चुनाव में बेहद इंपौर्टैंट रहा.’’

‘‘तेरा कुछ नहीं हो सकता निर्वी, तू झल्ली की झल्ली ही रहेगी,’’ इस बार मैं ने मुसकराते हुए उसे छेड़ा.

‘‘हां यार, छुट्टियों के 2 महत्त्वपूर्ण दिन पुष्कर में जाया हो गए, साथ ही विहान की चिड़चिड़ाहट झली वह अलग. पुष्कर की तुलना में उदयपुर में हर दूसरे कदम पर रोमांटिक मूड

का कबाड़ा करने के लिए कोई मंदिर, घंटेघडि़याल नहीं थे. सो वहां हम ने अपना हनीमून बेहद ऐंजौय किया.’’

‘‘तू तो अब अनुभवी है. तू क्या सोचती है कि क्या हर विवाहित जोड़े को नईनई शादी के बाद हनीमून ट्रिप अवश्य प्लान करना चाहिए? क्या वाकई में हनीमून विवाहित दंपती के सुखद भविष्य की आधारशिला रखता है?’’ मैं ने निर्वी से पूछा.

इस पर निर्वी का कहना है-

परस्पर अंडरस्टैंडिंग का विकास

‘‘हनीमून जिंदगी की व्यस्तता से चुराया गया वह अनमोल समय होता है जब सर्वथा नए परिवेश में पलेबढ़े, बहुत हद तक एकदूसरे से अजनबी 2 इंसानों को एकदूसरे को अच्छी तरह से समझबूझ कर एकदूसरे के स्वभाव, आदत, जीवनमूल्य, जीवनशैली, जीवन के प्रति रवैए के अनुरूप अपनेआप को ढाल कर एक सर्वथा नूतन ढंग से जिंदगी को जीने की तैयारी की शुरुआत करनी पड़ती है.

‘‘मैं ने और विहान ने इस ट्रिप में और एकदूसरे के सामने अपने जीवन मूल्यों और सिद्धांतों का खुलासा किया. हनीमून ट्रिप के इस एकांत में हमें एकदूसरे की मानसिकता और शख्सीयत के बारे में गहराई से जानने का मौका मिला, जो हमारे बीच अंडरस्टैंडिंग विकसित कर भविष्य की साझा जिंदगी को पौजिटिव दिशा देने में निश्चित ही मददगार सिद्ध होगा.

एकदूसरे से अपेक्षाओं और उम्मीदों का जायजा

‘‘इस पीरियड में हमें एकदूसरे की एकदूसरे से अपेक्षाओं और उम्मीदों का जायजा लेने का मौका मिला. विहान एक पत्नी के तौर पर मुझ से किस तरह की मानसिक, भावनात्मक सपोर्ट की अपेक्षा रखता है उस ने मुझे से खुलासा किया. मैं एक पति के रूप में उस से क्या तमन्ना करती हूं, मैं ने उस से चर्चा की.

मानसिक तनाव से मुक्ति

‘‘शादी के 2-3 माह पहले से इस की तैयारियों में और इस के लिए बड़ी रकम का जुगाड़ करने में हम दोनों ही काफी मानसिक तनाव में आ गए थे, साथ ही विहान और उस के मातापिता व भाईबहन के साथ एक ही घर में एक जिम्मेदार बहू, भाभी और ननद के रूप में सफलतापूर्वक एडजस्टमैंट करने का तनाव भी कुछ हद तक मेरे दिमाग में था.

‘‘विहान को टैंशन थी कि वह एक पति के तौर पर हर पैमाने पर मेरी अपेक्षाओं पर खरा उतर पाएगा या नहीं. घरपरिवार से दूर उदयपुर जैसे शांत रमणीक स्थान पर हम दोनों को एकदूसरे के साथ बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप के क्वालिटी टाइम बिता कर इस तनाव से बहुत हद तक मुक्ति मिली.

जीवन में आए खुशनुमा बदलाव पर फोकस

‘‘इस हनीमून के दौरान हम दोनों का ध्यान एकदूसरे पर पूरी तरह केंद्रित था जिस से हमें अपने नए रिश्ते से जीवन में आए सुखद बदलाव पर फोकस करने का मौका मिला और इस का अनुभव हम दोनों ने ही किया.

परस्पर अंतरंगता को नया आयाम

‘‘फिजिकल इंटिमेसी एक सफल विवाह की महत्त्वपूर्ण शर्त होती है. हनीमून के दौरान हम ने अपने बीच के कनैक्शन को खंगाला, अंतरंगता बनाई और परस्पर प्यार और इंटिमेसी के समीकरण का आकलन किया.

‘‘हमें एकांत में बिना किसी गतिरोध के एकदूसरे की कंपनी ऐंजौय करने का अवसर मिला. वक्त बीतने के साथ अमूमन घरगृहस्थी की सौ उल?ानें, दफ्तर और इन की जिम्मेदारियों के बो?ा तले नएनए कपल के लिए ये सब प्राथमिकता बनने लगते हैं और रोमांस बैक

सीट पर आ जाता है. हम दोनों ने अपने विवाहित जीवन के हर दौर में हर हाल में अपने मध्य रोमांस की चिनगारी को जिंदा रखने का प्रण लिया.

भावनात्मक बौंडिंग में मजबूती

‘‘घर, परिवार, मातापिता, भाईबहनों की अनुपस्थिति में एकदूसरे में डूब कर हम दोनों को एकदूसरे के प्रति अपनी चाहत का अंदाजा लगा, जिस से हमारे बीच की भावनात्मक बौंडिंग मजबूत हुई. मेरा मानना है कि यह भावनात्मक नजदीकी हमारे मध्य भरोसे और खुशी का भाव लाएगी जिस से हमारे रिश्ते में लौंगटर्म संतुष्टि पैदा होगी.

‘‘इस ट्रिप में हम ने एक सुखद साथ भविष्य के ख्वाब बुने और उन्हें पूरा करने की दिशा में आवश्यक ठोस प्लान की रूपरेखा बनाई.

‘‘एकांत में एकदूसरे के सान्निध्य में बिताए गए दिन और परस्पर संवाद से मुझे अपनी और विहान की जरूरतों जैसे एकदूसरे की कंपनी, अंतरंगता, रोमांच, साथ पौजिटिव अनुभव, पैशन एवं फन व रोमांस की आवश्यकताओं का एहसास हुआ और हम दोनों उन्हें पूरा करने की जरूरत के प्रति सचेत हुए तथा इस प्रकार हमारी परस्पर प्रतिबद्धता को एक नया आयाम मिला.

‘‘तो मेरी जान, समझ तुम? मैं अब दावे से कह सकती हूं कि विवाहित जीवन के सफर में हनीमून निश्चित तौर पर एक यादगार माइलस्टोन होता है, जो यकीनन नए शादीशुदा दंपती के सुनहरे साथ भविष्य की सशक्त फाउंडेशन साबित होता है.

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