अपनी शर्तों पर: जब खूनी खेल में बदली नव्या-परख की कहानी

नव्यालाइब्रेरी में बैठी नोट्स लिख रही थी तभी कब परख उस के पास आ कर बैठ गया उसे पता ही नहीं चला. ‘‘मुझ से इतनी बेरुखी क्यों नव्या, मैं सह नहीं पाऊंगा. वैसे कान खोल कर सुन लो, तुम मेरी नहीं हो सकीं तो और किसी की नहीं होने दूंगा. कितने दिनों से मैं तुम से मिलने का प्रयत्न कर रहा हूं पर तुम कन्नी काट कर निकल जाती हो,’’ वह बोला.

‘‘मेरा पीछा छोड़ दो परख, हमारी राहें और लक्ष्य अलग हैं,’’ नव्या ने उत्तर दिया. दोनों को बातें करता देख कर लाइब्रेरियन ने उन्हें बाहर जाने का इशारा करते हुए द्वार पर लगी चुप रहने का इशारा करने वाली तसवीर दिखाई.

‘‘देखो नव्या, मैं आज तुम्हें अंतिम चेतावनी देता हूं. तुम मुझे दूसरों की तरह समझने की भूल मत करना, नहीं तो बहुत पछताओगी. उपभोग करो और फेंक दो की नीति मेरे साथ नहीं चलेगी. पिछले 2 वर्षों में मैं ने तुम्हारे लिए क्या नहीं किया? पानी की तरह पैसा बहाया मैं ने और इस चक्कर में मेरी पढ़ाई चौपट हो गई सो अलग,’’ परख ने धमकी ही दे डाली.

‘‘क्यों किया यह सब? मैं ने तो कभी नहीं कहा था कि अपनी पढ़ाई पर ध्यान मत दो. घूमनेफिरने का शौक तुम्हें भी कम नहीं है. मैं तो बस मित्रता के नाते तुम्हारा साथ दे रही थी.’’ ‘‘किस मित्रता की बात कर रही हो तुम? एक युवक और युवती के बीच मित्रता नहीं केवल प्यार होता है,’’ परख की आंखों से चिनगारियां निकल रही थीं. लाइब्रेरी से बाहर निकल कर दोनों कुछ देर वादविवाद करते हुए साथ चले. फिर नव्या ने परख से आगे निकलने का प्रयत्न करते हुए तेजी से कदम बढ़ाए. वह सचमुच डर गई थी. तभी परख ने जेब से छोटा सा चाकू निकाला और दीवानों की तरह नव्या पर वार करने लगा. नव्या बदहवास सी चीख रही थी. चीखपुकार सुन कर वहां भीड़ जमा हो गई. कुछ विद्यार्थियों ने कठिनाई से परख को नियंत्रित किया. फिर वे आननफानन नव्या को अस्पताल ले गए. कालेज में यह समाचार आग की तरह फैल गया. सब अपने ढंग से इस घटना की विवेचना कर रहे थे.

नव्या मित्रोंसंबंधियों से घिरी इस सदमे से निकलने का प्रयत्न कर रही थी. हालांकि उस के जख्म अधिक गहरे नहीं थे, पर उसे अस्पताल में भरती कर लिया गया था. नव्या की फ्रैंड निधि ने उस के स्थानीय अभिभावक मौसी और मौसा को फोन कर के सारी घटना की जानकारी दे दी, तो नव्या की मौसी नीला और उस के पति अरुण तुरंत आ पहुंचे. नव्या नीला के गले लग कर फूटफूट कर रोई व आंसुओं के बीच बारबार यह कहती रही, ‘‘मौसी, मुझे यहां से ले चलो. यह खूंख्वार लोगों की बस्ती है. परख मुझे जान से मार डालेगा.’’ नीला नव्या को सांत्वना दे कर धीरज बंधाती रही. पर नव्या हिचकियां ले कर रो रही थी. उसे सपने में भी आशा नहीं थी कि परख उस से ऐसा व्यवहार करेगा. अगले दिन ही नीला उसे अपने घर ले गई. सूचना मिलते ही नव्या के मातापिता आ पहुंचे. सारा घटनाक्रम सुन कर वे स्तब्ध रह गए.

‘‘नव्या, हम ने तो बड़े विश्वास से तुम को यहां पढ़ने के लिए भेजा था. पर तुम्हारे तो यहां पहुंचते ही पंख निकल आए. और नीला, तुम ने ही कहा था न कि छात्रावास में, वह भी देश की राजधानी में रह कर इस की प्रतिभा निखर आएगी पर हुआ इस का उलटा ही. पूरे परिवार की कितनी बदनामी हुई है यह सब जान कर. अब कौन इस से विवाह करेगा?’’ नव्या के पिता गिरिजा बाबू का दर्द उन की आंखों में छलक आया.

‘‘अब तो हम नव्या को अपने साथ ले जाएंगे. कोई और रास्ता तो बचा ही नहीं है,’’ नव्या की मां लीला ने अपना मत प्रकट किया.

‘‘दीदी, जीजाजी, सच कहूं तो जैसे ही मुझे परख से संबंध के बारे में पता चला मैं ने नव्या को घर बुला कर समझाया था. इस ने वादा भी किया था कि यह अपनी पढ़ाई पर ध्यान देगी. पर इसी बीच यह घटना घट गई,’’ नीला ने स्पष्ट किया. ‘‘मैं ने तो उस दिन भी कहा था कि सारी सूचना आप लोगों को दे दें पर नव्या अपनी सहेली निधि को साथ ले कर आई और अपनी मौसी को समझा ही लिया कि वह आप दोनों को सूचित न करे,’’ तभी अरुण ने पूरे प्रकरण पर अपनी चुप्पी तोड़ी.

‘‘मैं ने भी कहां सोचा था कि बात इतनी बढ़ जाएगी. मैं ने तो नव्या को कई बार चेताया भी था कि इस तरह किसी के साथ अकेले घूमनाफिरना ठीक नहीं है पर नव्या ने अनसुना कर दिया,’’ निधि ने अपना बचाव किया. ‘‘ठीक है, मैं ही बुरी हूं और सब तो दूध के धुले हैं,’’ नव्या निधि की बात सुन कर चिहुंक उठी. ‘‘आप लोग व्यर्थ ही चिंतित हो जाओगी इसीलिए आप लोगों को सूचित नहीं किया था. मुझे लगा कि हम इस स्थिति को संभाल लेंगे. निधि ने भी नव्या की ओर से आश्वस्त किया था. पर कौन जानता था कि ऐसा हादसा हो जाएगा,’’ नीला समझाते हुए रोंआसी हो उठी.

अभी यह विचारविमर्श चल ही रहा था कि अरुण ने परख के मातापिता के आने की सूचना दी. ‘‘अब क्या लेने आए हैं? हमारी बेटी की तो जान पर बन आई. इन का यहां आने का साहस कैसे हुआ?’’ लीला बहुत क्रोध में थीं. अरुण और नीला ने उन्हें शांत करने का प्रयत्न किया. ‘‘हम तो उस अप्रिय घटना के प्रति अपना खेद प्रकट करने आए हैं. परख भी बहुत शर्मिंदा है. आप लोगों से माफी मांगनी चाहता है,’’ परख के पिता धीरज आते ही बोले.

‘‘क्या कहने आप के बेटे की शर्मिंदगी के. यहां तो जीवन का संकट उत्पन्न हो गया. बदनामी हुई सो अलग.’’ ‘‘मैं यही विनती ले कर आया हूं कि यदि हम मिलबैठ कर समझौता कर लें तो कोर्टकचहरी तक जाने की नौबत नहीं आएगी,’’ धीरज ने किसी प्रकार अपनी बात पूरी की.

‘‘चाहते क्या हैं आप?’’ अरुण ने प्रश्न किया.

‘‘यही कि नव्या परख के पक्ष में अपना बयान बदल दे. हम तो इलाज का पूरा खर्च उठाने को तैयार हैं,’’ धीरज ने एकएक शब्द पर जोर दे कर कहा.

‘‘ऐसा हो ही नहीं सकता. यह हमारी बेटी के सम्मान का प्रश्न है,’’ गिरिजा बाबू बहुत क्रोध में थे.

‘‘आप की बेटी हमारी भी बेटी जैसी है. मानता हूं इस में हमारा स्वार्थ है पर यह बात उछलेगी तो दोनों परिवारों की बदनामी होगी, बल्कि मेरे पास तो एक और सुझाव भी है. गलत मत समझिए. मैं तो मात्र सुझाव दे रहा हूं. मानना न मानना आप के हाथ में है,’’ परख के पिता शांत और संयत स्वर में बोले.

‘‘क्या सुझाव है आप का?’’

‘‘हम दोनों का विवाह तय कर देते हैं. सब के मुंह अपनेआप बंद हो जाएंगे.’’ ‘‘यह दबाव डालने का नया तरीका है क्या? बेटा हमला करता है और उस का पिता विवाह का प्रस्ताव ले कर आ जाता है. कान खोल कर सुन लीजिए, जान दे दूंगी पर इस दबाव में नहीं आऊंगी,’’ घायल अवस्था में भी नव्या उठ कर चली आई और पूरी शक्ति से चीख कर फूटफूट कर रोने लगी. नव्या को इस तरह बिलखता देख कर सभी स्तब्ध रह गए. किसी को कुछ नहीं सूझा तो बगलें झांकने लगे और परख के पिता हड़बड़ा कर उठ खड़े हुए.

‘‘आप लोग बच्ची को संभालिए हम फिर मिलेंगे,’’ परख के पिता अपनी पत्नी के साथ तेजी से बाहर निकल गए. ‘‘देखा आप ने? अभी भी ये लोग मेरा पीछा नहीं छोड़ रहे. मेरा दोष क्या है? यही न कि लड़की होते हुए भी मैं ने घर से दूर आ कर पढ़ने का साहस किया. पर ये होते कौन हैं मेरे लिए ऐसी बातें कहने वाले?’’ नव्या का प्रलाप जारी था. गिरिजा बाबू अभी भी क्रोध में थे. जो कुछ हुआ उस के लिए वे नव्या को ही दोषी मान रहे थे और कोई कड़वी सी बात कहनी चाहते थे पर नव्या की दशा देख कर चुप रह गए. परख और उस के मातापिता अगले दिन फिर आ धमके. परख भी उन के साथ था. उस के लिए उन्होंने जमानत का प्रबंध कर लिया था.

‘‘ये लोग तो बड़े बेशर्म हैं. फिर चले आए,’’ गिरिजा बाबू उन्हें देखते ही भड़क उठे.

‘‘जीजाजी, यह समय क्रोध में आने का नहीं है. बातचीत करने में कोई हानि नहीं है.हमें तो केवल यह देखना है कि इस मुसीबत से बाहर कैसे निकला जाए,’’ नीला ने उन्हें शांत करना चाहा. ‘‘इतना निरीह तो मैं ने स्वयं को कभी अनुभव नहीं किया. सब नव्या के कारण. सोचा था परिवार का नाम ऊंचा करेगी पर इस ने तो हमें कहीं मुंह दिखाने लायक भी नहीं रखा,’’ गिरिजा बाबू परेशान हो उठे. ‘‘ऐसा नहीं कहते. वह बेचारी तो स्वयं संकट में है. चलिए बैठक में चलिए. वे लोग प्रतीक्षा कर रहे हैं. इस मसले को बातचीत से ही सुलझाने का यत्न करिए,’’ नीला और लीला समवेत स्वर में बोलीं.

अरुण गिरिजा बाबू को ले कर बैठक में आ बैठे. परख ने दोनों का अभिवादन किया.

‘‘यही है परख,’’ अरुण ने गिरिजा बाबू से परिचय कराया.

‘‘ओह तो यही है सारी मुसीबत की जड़,’’ गिरिजा बाबू का स्वर बहुत तीखा था. ‘‘देखिए, ऐसी बातें आप को शोभा नहीं देतीं. इस तरह तो आप कड़वाहट को और बढ़ा रहे हैं. हम तो संयम से काम ले रहे हैं पर आप उसे हमारी कमजोरी समझने की भूल कदापि मत करिए,’’ धीरज ने भी उतने ही तीखे स्वर में उत्तर दिया. ‘‘अच्छा, नहीं तो क्या करेंगे आप? हमें भी चाकू से मारेंगे? सच तो यह है कि आप की जगह यहां नहीं जेल में है.’’

‘‘कोई चाकूवाकू नहीं मारा. छोटा सा पैंसिल छीलने का ब्लेड था जिस से जरा सी खरोंच लगी है. आप लोगों ने बात का बतंगड़ बना दिया,’’ परख बड़े ठसके से बोला मानो उस ने नव्या पर कोई बड़ा उपकार किया हो.

‘‘देखा तुम ने अरुण? कितना बेशर्म है यह व्यक्ति. इसे अपनी करनी पर तनिक भी पश्चाताप नहीं है. ऊपर से हमें ही रोब दिखा रहा है,’’ गिरिजा बाबू आगबबूला हो उठे.

‘‘लो भला, मैं क्यों पश्चाताप करूं? मैं कहता हूं बुलाइए न अपनी बेटी को. अभी दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा,’’ परख बोला.

‘‘लो आ गई मैं. कहो क्या कहना है? मुझे कितनी चोट लगी है इस का हिसाबकिताब हो चुका है. उस के लिए तुम्हारे प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं है. बात निकली है तो अब दूर तलक जाएगी. अब जब कोर्टकचहरी के चक्कर लगाओगे तो सारी चतुराई धरी की धरी रह जाएगी.’’ ‘‘मैं ने तो कभी अपनी चतुराई का दावा नहीं किया. चतुर तो तुम हो. मुझे कितनी होशियारी से 2 साल मूर्ख बनाती रहीं. बड़े होटलों, रिजोर्ट में खानापीना, सिनेमा देखना और कपड़े धुलवाने से ले कर प्रोजैक्ट बनवाने तक का काम बड़ी होशियारी से करवाया.’’

‘‘तो क्या हुआ? तुम तो मेरे सच्चे मित्र होने का दावा करते थे. अब बिल चुकाने का रोना रोने लगे. भारतीय संस्कृति में ऐसा ही होता है. बिल सदा युवक ही चुकाते हैं, युवतियां नहीं.’’ ‘‘तुम्हारे मुंह से भारतीय संस्कृति की दुहाई सुन कर हंसी आती है. हमारी संस्कृति में तो लड़कियों को युवकों के साथ सैरसपाटा करनेकी अनुमति ही नहीं है. पर तुम तो भारतीय संस्कृति का उपयोग अपनी सुविधा के लिएकरने में विश्वास करती हो. युवक भी अपनापैसा उन्हीं पर खर्च करते हैं जिन से उन की मित्रता हो, हर ऐरेगैरे पर नहीं. वैसे भी तुम्हारे जैसी लड़की क्या जाने प्रेम, मित्रता जैसे शब्दों के अर्थ. तुम तो न जाने मेरे जैसे कितने युवकों को मूर्ख बना रही थीं. पर मैं उन लोगों में से नहीं हूं कि इस अपमान को चुप रह कर सह लूं,’’ परख भी क्रोध से बोला.

‘‘इसीलिए मुझे जान से मारने का इरादा था तुम्हारा? तो ठीक है अब ये सब बातें तुम अदालत में कहना,’’ नव्या ने धमकी दी.

‘‘देख लिया न आप ने? यह है आज की पीढ़ी. इन्हें हम ने यहां पढ़ने के लिए भेजा था. ये दोनों यहां मस्ती कर रहे थे. बड़ों के सामने भी कितनी बेशर्मी से बातें कर रहे हैं,’’ अब परख की मां रीता ने अपना मत प्रकट किया. ‘‘आप को बुरा लगा हो तो क्षमा कीजिए आंटी. पर मैं भी इक्कीसवीं सदी की लड़की हूं. अपने साथ हुए अत्याचार का बदला लेना मुझे भी आता है.’’ ‘‘अत्याचार तो मुझ पर हुआ है, मुझे कौन न्याय दिलाएगा? 2 वर्षों तक अपना पैसा और समय मैं ने इस लड़की पर लुटाया. अब यह कहती है कि हमारी राहें अलग हैं. इस के चक्कर में मेरी तो पढ़ाई भी चौपट हो गई,’’ परख के मन का दर्द उस के शब्दों में छलक आया.

‘‘अब समझ में आया कि एक युवक और युवती के बीच सच्ची मित्रता हो ही नहीं सकती. मैं जिसे अपना सच्चा मित्र समझती थी वह तो कुछ और ही समझ बैठा था,’’ नव्या अपनी ही बात पर अड़ी थी. ‘‘जब बड़े विचारविमर्श कर रहे हों तो छोटों का बीच में बोलना शोभा नहीं देता. अब केवल हम बोलेंगे और तुम दोनों केवल सुनोगे. दोष तुम दोनों का ही है. तुम्हारा इसलिए परख कि तुम अपनी पढ़ाईलिखाई छोड़ कर प्रेम की पींगें बढ़ाने लगे और नव्या तुम्हें नईनई आजादी क्या मिली तुम तो सैरसपाटे में उलझ गईं. या तो तुम परख के इरादे को भांप नहीं पाईं या फिर जान कर भी अनजान बनने का नाटक करती रहीं. तुम तो सारी बातें अपनी मौसी से भी तब तक छिपाती रहीं जब तक तुम्हारी मौसी ने बलात सब कुछ उगलवा नहीं लिया,’’ अरुण के स्वर की कड़वाहट स्पष्ट थी.

‘‘इन सब बातों का अब कोई अर्थ नहीं है. परख की ओर से मैं आप को नव्या बेटी की सुरक्षा का विश्वास दिलाता हूं और चाहता हूं कि आप इस अध्याय को यहीं समाप्त कर दें,’’ धीरज ने आग्रह किया. ‘‘परख ने जो किया वह क्षमा के योग्य नहीं है. अत: इस बात को समाप्त करने का तो प्रश्न ही नहीं उठता. हम अपनी बेटी के सम्मान की रक्षा के लिए किसी भी सीमा तक जा सकते हैं,’’ गिरिजा बाबू क्रोधित स्वर में बोले. धीरज गिरिजा बाबू और अरुण को कक्ष के एक कोने में ले गए. वहां कुछ देर के वादप्रतिवाद के बाद वे सहमत हो गए कि इस बात को समाप्त करने में ही दोनों परिवारों की भलाई है. नव्या ने सुना तो भड़क उठी, ‘‘कोई और परिवार होता तो परख को जीवन भर चक्की पिसवाता पर हमारे परिवार में मेरी औकात ही क्या है, लड़की हूं न,’’ नव्या ने रोने का उपक्रम किया.

‘‘अब रहने भी दो मुंह मत खुलवाओ. कोई दूसरा परिवार तुम से कैसा व्यवहार करता इस बारे में हम कुछ न कहें इसी में सब की भलाई है,’’ नीला ने अपनी नाराजगी दिखाई.

‘‘ठीक है, यदि सभी अपनी जिद परअड़े हैं तो मेरी भी सुन लें. मैं कहीं नहीं जारही. यहीं रह कर पढ़ाई करूंगी,’’ नव्या बड़ीशान से बोली. ‘‘अवश्य, तुम यहां रह कर पढ़ोगी अवश्य, पर अकेले नहीं. अपनी मां के साथ रहोगी उन की छत्रछाया में. अपनी मां के नियंत्रण में रहोगी हमारी शर्तों पर,’’ गिरिजा बाबू तीखे स्वर में बोलते हुए बाहर निकल गए, जिस से थोड़ी सी ताजा हवा में सांस ले सकें. बगीचे में पड़ी बैंच पर बैठ कर व दोनों हाथों में मुंह छिपा कर देर तक सिसकते रहे. 4 महीने के बाद उन्होंने सुना कि परख और नव्या फिर दोस्तों के बीच मिल रहे हैं. उन के दोस्तों ने उन के बीच सुलह करा दी. 6 महीने बाद दोनों ने फिर अपने मातापिता को बुलाया और इस बार दोनों ने शर्माते हुए कहा, ‘‘हम शादी करना चाहते हैं.’’ गिरिजा बाबू और अरुण दोनों एकदूसरे का मुंह ताक रहे थे और यह समझ में नहीं आ रहा था उन्हें कि क्या कहें, क्या न कहें.

बिना शर्त: मिन्नी के बारे में क्या जान गई थी आभा

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साठ पार का प्यार – भाग 2

पर समीर को तो लगता कि सब सुहानी को बेवकूफ बनाते हैं. उन के कानों पर जूं न रेंगती. उन के पास तो वक्त ही वक्त था इन सब बातों पर ध्यान देने के लिए. सुहानी कई कामों में लगी रहती. कई सामाजिक कामों से भी उस ने खुद को जोड़ रखा था. वह एक लेडीज क्लब की मैंबर भी थी. उसे समीर की इन बेकार की बातों से उलझन होती. वह चाहती, समीर भी अपनी नियमित दिनचर्या बनाएं, ताकि उन की सेहत भी ठीक रहे और वे किसी सामाजिक संस्था से भी जुड़ें जिस से व्यस्त रहें और से उन की मानसिक सेहत भी ठीक रहे.

सोचतेसोचते सुहानी पार्क में पहुंच गई. रोज वह पास की ही सड़क पर वाक कर लेती थी, पर उस दिन वह घर से थोड़ी दूर पार्क में चली गई थी. वहां हर तरह, हर उम्र के स्त्रीपुरुष थे. कोई दौड़ रहा था, कोई चल रहा था, कोई कसरत कर रहा था.

सुहानी थोड़ी देर बैंच पर बैठ गई. बस, उसी दिन से सुहानी के दिमाग में एक तरकीब आई समीर को बदलने की. बोलने से तो समीर कभी नहीं मानेंगे, उसे पता था. देखते हैं आगेआगे होता है क्या. सुहानी होंठों ही होंठों में मुसकराई और फिर उठ कर चलने लगी. इस तरह से पूरा घंटा पार्क में बिता कर वह घर वापस आ गई.

‘‘आज तो बहुत देर कर दी, रोज तो आधे घंटे में वापस आ जाती थी,’’ समीर उस के चेहरे को देख कर घूरते हुए बोले.

‘‘आज से पार्क जाना शुरू कर दिया है,’’ सुहानी एक मस्त अंगड़ाई सी ले कर कुरसी पर बैठ कर जूते के फीते खोलती हुई बोली, ‘‘मजा आ गया आज तो, वहां तो बहुत लोग आते हैं हर उम्र के.’’ वह मजे से एक आंख दबा कर आगे बोली, ‘‘फोर्टीज से ले कर सिक्सटीज तक के. इस से ऊपर के भी आते हैं. जल्दी ही नए दोस्त बन जाएंगे, फिर जौगिंग का अपना ही मजा आएगा.’’

वह जूते उठा कर कमरे में चली गई. ‘क्या कह गई थी सुहानी’ समीर उस की कही बात पर मन ही मन अटकलें लगाने लगे. सुहानी यों भी हंसमुख थी. सेहत ठीक थी. बिजी रहने से उस की मानसिक सेहत भी अच्छी रहती थी. पर उस दिन से तो वह और भी खुश व मस्त रहने लगी थी. हर समय गुनगुनाती, हंसतीखिलखिलाती सुहानी को देख कर समीर का ध्यान दूसरी बातों से हट कर सुहानी पर ही केंद्रित हुआ जा रहा था.

वे समझ नहीं पा रहे थे कि सुहानी में इतना बदलाव कैसे आया. सुहानी को दोपहर में खाना खाने के बाद सोने की आदत थी. पर एक दिन सोने के बजाय वह साड़ी प्रैस करने लगी.

‘‘सुहानी, तुम कहीं जा रही हो?’’

‘‘हां,’’ सुहानी साड़ी उठा कर कमरे में तैयार होने चली गई. तैयार हो कर वह जब बाहर निकली तो समीर उसे देख कर चौंक गए.

सुहानी ने यों तो अपनी उम्र को बांध ही रखा था. पर आज तो आलम कुछ अलग ही था. आज तो सुहानी को देख कर उन का दिल भी कुछ खास अंदाज में धड़क गया. स्टाइलिश साड़ी और स्टाइलिश ब्लाउज.

‘‘यह साड़ी कब खरीदी,’’ समीर साड़ी को घूरते हुए बोले, ‘‘मेरे साथ तो कभी नहीं ली?’’

‘‘खरीदी कहां डियर, तुम मुझे इतना चटख रंग कहां लेने देते. वह तो जब पिछली बार पुणे गई थी तो भाभी ने जबरदस्ती दिला दी थी.’’

‘‘तो तुम ने दिखाई क्यों नहीं अभी तक?’’

‘‘मैं ने सोचा कहीं तुम्हें पसंद नहीं आई तो तुम मुझे इस का ब्लाउज भी नहीं सिलवाने दोगे. आज मेरी एक सहेली के घर पर सारी सहेलियां इकट्ठी हो रही हैं.’’

‘‘क्यों?’’

‘‘बस, ऐसे ही. हंगामा पार्टी है.’’

‘‘हंगामा पार्टी? क्या मतलब? बर्थडे पार्टी, रिसैप्शन पार्टी, मैरिज पार्टी, रिटायरमैंट पार्टी तो सुनी हैं. आजकल के युवाओं की तथाकथित ब्रेकअप पार्टी के बारे में भी पढ़ा है, लेकिन यह हंगामा पार्टी क्या होती है?’’

‘‘मतलब,’’ सुहानी किसी नवयौवना की तरह पलकें झपकाती हुई बोली, ‘‘लव इन सिक्सटीज डियर. तेज म्यूजिक पर डांस करेंगे, मस्ती करेंगे, गाना गाएंगे और…’’

‘‘और?’’

‘‘और उस के बाद केक काटेंगे खाएंगेपिएंगे, बस,’’ कहती हुई सुहानी ने हथेलियां एकदूसरे पर झाड़ दीं.

‘‘मैं यहां अकेला बैठा रहूं और तुम अपनी सहेलियों के साथ हंगामा पार्टी करो,’’ समीर झुंझला कर बोले.

‘‘लव इन सिक्सटीज डियर. मजबूरी है, खुद से प्यार करना सीख रही हूं. यह कोई आसान बात नहीं. जब खुद से प्यार करूंगी तभी तो तुम से…’’ सुहानी ने बात अधूरी छोड़ दी और अपना सिर समीर के कंधों पर टिका कर, मदभरी नजरों से समीर की आंखों में देखने लगी. फिर जानलेवा मुसकराहट समीर पर डाल कर सुहानी बाहर निकल गई.

‘बहकने का पूरा सामान है आजकल सुहानी के पास. यह क्या हो गया सुहानी को,’ समीर सोच रहे थे, आखिर इस के पीछे रहस्य क्या है.

सुहानी के मिशन को लगभग एक हफ्ता हो गया था. एक दिन समीर सुबह नहाधो कर अखबार पढ़ने बैठे ही थे कि अचानक बैडरूम से तेज म्यूजिक की आवाज सुन कर चौंक गए. वे उठ कर बैडरूम की तरफ भागे. उन्होंने बैडरूम का भिड़ा दरवाजा थोड़ा सा खोल कर अंदर झांका. सुहानी अंदर नहाने के लिए घुसी थी पर अंदर का दृश्य देख कर उन का दिल किया कि सिर पर हाथ रख कर वहीं बैठ जाएं.

सुहानी तेज म्यूजिक पर जोरजोर से नृत्य कर रही थी. जैसे भी उस से हो पा रहा था, वह हाथपैर मार रही थी. उन्होंने अंदर जा कर म्यूजिक औफ कर दिया.

‘‘यह क्या कर रही हो सुहानी, हाथपैर तोड़ने का इरादा है क्या? तुम तो नहाने जा रही थी?’’

‘‘हां, पर मेरा दिल किया कि थोड़ी देर नाच लूं. उस दिन हंगामा पार्टी में खूब नाचे थे. थोड़ा पसीना निकलेगा, फिर सुस्ता कर नहा लूंगी,’’ सुहानी म्यूजिक औन करती हुई आगे बोली, ‘‘आओ न, तुम भी नाचो.’’ वह समीर को खींचने लगी.

‘‘अरेरेरे, यह क्या कर रही हो, ये सब वाहियात बातें मुझ से नहीं होतीं? तुम्हीं करो. मुझे वैसे भी डांस करना कहां आता है.’’

‘‘डांस न सही, थिरक तो सकते ही हो समीर. थिरकना तो सब को आता है. आओ न, कोशिश तो करो. देखो, कितना मजा आता है…’’

वह आंखों में सारे रहस्यभर कर, चुहलभरे अंदाज में भौंहों को नचा कर आगे बोली, ‘‘तुम्हारी सुरा और सुंदरी से भी ज्यादा मजा है थिरकने में. कर के तो देखो. जिस्म के अंग खुल जाएंगे, दिमाग की तनी नसें ढीली पड़ जाएंगी…’’

उस ने समीर का हाथ खींचा और जबरदस्ती साथ में डांस करने लगी. अपने हाथों से पकड़पकड़ कर उन के हाथपैर इधरउधर फेंकने लगी. कभी गोल चक्कर घुमा देती, कभी कमर और हाथ पकड़ कर दो कदम आगे, दो कदम पीछे डांस करने लगती.

करतेकरते समीर को भी लगा, कुछ मजा आ रहा है. बदन भी थोड़ाबहुत संगीतमय हो रहा था, सुरताल पर सही थिरकने लगा था. वे भी कोशिश करने लगे. थोड़ी देर तो सुहानी जबरदस्ती करती रही, पर थोड़ी देर बाद वे हलकीफुलकी कोशिश खुद भी करने लगे. सुहानी को इतना मस्त देख कर उन का दिल भी कर रहा था कि वे खुद भी उस की मस्ती में डूब जाएं.

थोड़ी देर बाद वे थक कर बैठ गए. सुहानी ने म्यूजिक औफ कर दिया.

‘‘क्यों, मजा आया न…’’

समीर को भी लग रहा था. बदन के सारे सैल्स जैसे खुल कर ढीले पड़ गए हों और वे खुद को बहुत खुश व जिस्म में आराम महसूस कर रहे थे.

सुहानी थोड़ी देर सुस्ता कर नहाने चली गई और समीर बैठ कर अखबार पढ़ने लगे.

‘बकवास, कितना बोर अखबार है, रोज एकजैसी खबरें. चाहे आधे घंटे में खत्म कर लो, चाहे 2 घंटे तक चाटते रहो. मैटर नहीं बदलने वाला, वही रहेगा,’ यह बड़बड़ाते समीर ने अखबार एक तरफ पटका और सुहानी के विषय में सोचने लगे.

‘मजे तो सुहानी ले रही है जिंदगी के. उसे देख कर लगता ही नहीं कि वह जीवन के 59 वसंत देख चुकी है.’

संतुलित सहृदया: भाग 1- एक दिन जब समीरा से मिलने आई मधुलिका

समीरा की पहली ऐनिमेशन फिल्म के पुरस्कृत होने पर उसे बधाई देने उस के सहपाठी अनंत के साथ उस का दोस्त मयंक भी आया था. ‘‘मयंक सुबह ही मुंबई से आया है… मेरे पास ठहरा है,’’ अनंत ने कहा, ‘‘तुम्हें मुबारक देने आना जरूरी था, लेकिन मयंक को अकेला कैसे छोड़ता, इसलिए साथ ले आया.’’

‘‘बहुत अच्छा किया. मुझे भी इन से मिल कर अच्छा लगा,’’ समीरा मयंक की ओर मुड़ी, ‘‘वैसे दिल्ली किस सिलसिले में आना हुआ?’’ ‘‘नौकरी की तलाश में…’’

‘‘बेहतर नौकरी की तलाश कह यार,’’ अनंत ने बात काटी, ‘‘यह उस लोकप्रिय टीवी चैनल में प्रोग्राम प्लैनर है, जिस के सीरियल वर्षों तक चलते हैं और भाई को कुछ नया करने को नहीं मिलता. इसीलिए चैनल बदल रहा है.’’ ‘‘अच्छा तो आप भी हमारी ही बिरादरी के हैं.’’ ‘‘जी हां, तभी तो अनंत से दोस्ती है.’’

‘‘तुम्हारे से भी हो सकती है अगर तुम इसे भी इनाम मिलने की खुशी की दावत में शामिल कर लो,’’ अनंत ने कहा, ‘‘और मुझे तो दावत आज ही चाहिए समीरा.’’ ‘‘जरूर. पहले घर पर ही सीता काकी के बनाए गाजर के हलवे से मुंह मीठा करो, फिर खाना खाने बाहर चलेंगे,’’ समीरा चहकी.

फिर कुछ ही देर में एक प्रौढ़ महिला चाय और नाश्ता ले आई. ‘‘मजा आ गया,’’ मयंक ने नाश्ता करते हुए कहा, ‘‘बाहर कहीं खाने जाने के बजाय घर पर ही क्यों न खाना खाएं अनंत? भई मैं तो रोजरोज बाहर खाना खा कर आजिज आ चुका हूं.’’

‘‘अगर समीरा को खिलाने में परेशानी न हो तो मैं भी बाहर के बजाय घर पर ही अरहर की दाल और चावल खाना पसंद करूंगा.’’ ‘‘बिटिया को काहे की परेशानी? मैं हूं न सब बनाने को,’’ सीता काकी बोली, ‘‘दालचावल के साथ और क्या बनाऊं?’’

‘‘भुनवा आलूप्याज का रायता और रोटी,’’ कह कर मयंक समीरा की ओर मुड़ा, ‘‘सीता काकी तुम्हारे साथ ही रहती हैं समीरा?’’ ‘‘हां, काकी के रहने से घर वाले भी निश्चिंत हो गए हैं.’’

‘‘यानी अब शादी का तकाजा नहीं करते?’’ मयंक ने चुटकी ली. ‘‘उस का अभी सवाल ही नहीं उठता… मेरे बड़े भाई की शादी के बाद मेरी तरफ ध्यान देंगे… भैया सिर्फ मेरी पसंद की लड़की से शादी करेंगे और फिलहाल तो मैं अपने कैरियर में पैर जमाने में इतनी व्यस्त हूं कि भैया के लिए लड़की पसंद करने की फुरसत ही नहीं है.’’

‘‘भैया तुम्हारी पसंद की लड़की ही क्यों चाहते हैं?’’ अनंत ने पूछा. ‘‘क्योंकि मम्मीपापा के बाद हम दोनों भाईबहन ही एकदूसरे का सहारा होंगे, इसलिए हमारे जीवनसाथी हमारी पसंद के होने चाहिए. भैया ने किताबीकीड़ा होने की वजह से कभी लड़कियों में दिलचस्पी नहीं ली, मगर अब पत्नी ऐसी चाहते हैं, जो घरपरिवार के साथसाथ उन के बिजनैस का भी दायित्व संभाले और सोसायटी में उभरते उद्योगपति की सुंदर, स्मार्ट पत्नी भी लगे.’’

‘‘लगता है आप की फैमिली भी मेरे परिवार की ही तरह सोचती है,’’ मयंक ने कहा, ‘‘बड़े भैया के लिए लड़की दीदी और मैं पसंद करेंगे और मेरी बीवी सिर्फ भाभी, क्योंकि परिवार की संयुक्तता तो देवरानीजेठानी के तालमेल पर ही निर्भर करती है.’’ ‘‘तेरा तो यार दिनरात लड़कियों से पाला पड़ता है… कोई पसंद आ गई तो क्या करेगा?’’ अनंत ने चुटकी ली.

‘‘तभी तो लड़कियों से हायबाय तक बहुत संभल कर करता हूं… खड़ूस, नकचढ़ा, अकड़ू न जाने कितने उपनाम हैं मेरे… भाभी आ जाएं फिर आंखों से मांबहन का चश्मा उतार कर आसपास देखूंगा कि कोई भाभी की कसौटी पर उतरने लायक है या नहीं,’’ मयंक हंसा. दोनों दोस्तों ने चटखारे लेले कर खाना

खाया और फिर मयंक ने कहा, ‘‘पेट तो भर गया काकी, लेकिन आंखें नहीं भरीं… कल वापस मुंबई जा रहा हूं, लेकिन जब भी आऊंगा खाना यहीं खाऊंगा.’’ कुछ सप्ताह के बाद अनंत ने बताया कि मयंक रविवार सुबह दिल्ली आ रहा है.

‘‘उफ, शुक्रवार शाम को मैं आगरा जा रही हूं,’’ समीरा के मुंह से बेखास्ता निकला, ‘‘भैया के लिए एक रिश्ता आया है… लड़की भैया के लिए उपयुक्त है, लेकिन रिश्ता पक्का मेरे पसंद करने के बाद होगा. इसलिए मेरा जाना जरूरी है.’’ ‘‘वापस कब आओगी?’’

‘‘रविवार की रात को. अगर किसी रस्मवस्म के लिए रुकना पड़ा तो सोमवार को.’’ ‘‘रस्म दिन में करवा कर रविवार की शाम को ही वापस आ जाओ,’’ अनंत ने आग्रह किया, ‘‘मयंक तुम्हारे न होने पर सोचेगा कि मैं ने तुम्हें उस का संदेशा नहीं दिया.’’

‘‘कौन सा संदेशा?’’ समीरा के दिल की धड़कनें तेज हो गई. ‘‘होमली फील करने के लिए शाम तुम्हारे घर गुजारेगा.’’

थोड़ी सी मायूसी तो हुई, मगर फिर सोचा कि अनंत से और क्या कहलवाता? इतना इशारा तो कर ही दिया कि मेरा घर अपना सा लगता है. ‘‘मैं रविवार की शाम तक जरूर आ जाऊंगी,’’ समीरा ने कह तो दिया, मगर वह जानती थी कि अगर शादी तय हो गई तो जल्दी लौटना नहीं हो सकेगा. वह रास्ते भर इसी बारे में सोचती रही.

‘‘सुनील को मधुलिका का विवरण और फोटो इतना अच्छा लगा कि उस ने और जगह मना करवा दिया. कहने लगा कि मेरी पसंद समीरा को भी जरूर पसंद आएगी,’’ मैं ने बताया तभी मधुलिका के मामा जो रिश्ता करवा रहे थे का फोन आया, ‘‘देखिए, कृपाशंकरजी आप के इस आश्वासन पर कि आज आप की बेटी आ जाएगी मैं ने देवराज जीजाजी को सपरिवार बुला लिया है…’’ ‘‘मेरी बेटी आ गई है, राघवजी,’’ कृपाशंकर ने बात काटी, ‘‘शाम को मिल लें.’’

‘‘दोपहर को लंच पर आ जाएं ताकि शाम तक तय हो जाए,’’ राघव ने कहा, ‘‘असल में एक अजीब सी शर्त है मधु की शादी के लिए… उसे भरीपूरी क्लोजनिट फैमिली चाहिए. ऐसे ही एक और परिवार का प्रस्ताव भी है जीजाजी के पास… अगर आप के यहां बात नहीं बनती तो जीजाजी उन लोगों से तुरंत मिलना चाहते हैं. इसीलिए जल्दी में हैं.’’ ‘‘देखिए, हम ने तो तसवीर पसंद कर के ही मिलने का फैसला किया है,’’ स्पष्टवादी पापा ने कहा, ‘‘समीरा की व्यवस्तता के कारण मिलने में देर हो गई. खैर, लंच पर मिलते हैं.’’

समीरा ने राहत की सांस ली. दूसरी पार्टी भी जल्दी में है, इसलिए रोके की रस्म तो आज ही हो जानी चाहिए ताकि काम का बहाना बना कर वह कल ही दिल्ली लौट आए. मधुलिका तसवीर से भी अधिक आकर्षक थी. तटस्थ लगने की कोशिश करने के बावजूद सुनील की मुखमुद्रा से तो लग रहा था कि वह उस पर मर मिटा है.

मधुलिका का छोटा भाई मोहित समीरा से बड़ी दिलचस्पी से ऐनिमेशन फोटोग्राफी के बारे में पूछ रहा था. ‘‘लगता है फोटोग्राफी का बहुत शौक है तुम्हें?’’ समीरा ने पूछा.

‘‘हमारे यहां सभी को फोटोग्राफी का शौक है. मधु दीदी से तो पापा ने एमबीए करने के बजाय फोटोग्राफी का प्रोफैशनल कोर्स करने को कहा भी था.’’ ‘‘फिर आप ने किया क्यों नहीं? समीरा ने मधुलिका से पूछा.’’

बोझ: भाग 2- सुबोध के होश क्यों उड़ गए

रात में मैं ने खाना नहीं खाया. सुबोध से वैसे भी मेरा मन तिक्त था, इसलिए अलग कमरे में लेट गई. तभी दीर्घा का फोन आया, ‘‘सुधा, कहना तो नहीं चाहती पर कहना इसलिए पड़ रहा है कि कहीं तुम्हारे मन में मेरे प्रति दुर्भावना न समा जाए. पहले तो मैं तुम से बिना मिले लौट आने की अभद्रता के लिए माफी मांगती हूं. दूसरी बात जो मैं तुम से कहना चाह रही हूं क्या तुम सुन सकोगी?’’

मेरे कान खड़े हो गए. ऐसा कौन सा राज है, जो दीर्घा खोलना चाहती है और वह मेरे सुनने लायक क्यों नहीं है? मेरा उस राज से क्या ताल्लुक है? कहीं…? मेरा मन कुछ सोच

कर विचलित होने लगा फिर भी दीर्घा के मुख

से सुनने का लोभ संवरण न

कर सकी.

‘‘सुबोध नाम है न तेरे पति का?’’ दीर्घा ने पूछा तो मैं ने डरते हुए हां में जवाब दिया.

‘‘तो सुन, वही मेरा पति है.’’

यह सुन कर एकदम से मु झे काठ मार गया. मैं अवाक रह गई. कुछ देर कुछ नहीं सू झा. फिर किसी तरह अपनेआप को संभाला और कांपते स्वर में पूछा, ‘‘दीर्घा, तुम्हें धोखा तो नहीं हुआ?’’

‘‘कोई धोखा नहीं हुआ. वह घर मेरा जानापहचाना है,’’ अब शक की कोई गुंजाइश नहीं रही. मैं निढाल बिस्तर पर पड़ गई. मु झ से न तो रोते बन रहा था न ही हंसते. इतना बड़ा धोखा किया सुबोध ने मु झ से? माना कि मैं उस के प्यार में डूबी रही पर उसे तो अपने बीवीबच्चे का खयाल होना चाहिए था. जिसे अपने खून के रिश्ते का मोह नहीं, वह भला मेरा क्या मोह करेगा? कल कोई और मिलेगा तो उसे लाएगा. सुबोध का मेरे प्रति प्रेम मु झे महज दिखावा और प्रेम कम वासना ज्यादा लगने लगा. बहरहाल, अब किया क्या जा सकता था? अगर मैं कोई बखेड़ा खड़ा करती हूं तो घर में अशांति पैदा होगी. सुबोध ने हमेशा मेरे साथ सकरात्मक व्यवहार किया. कभी कोई शिकायत का मौका नहीं दिया. आर्थिक संपन्नता के बाद भी जब मैं ने अकेलेपन से बचने के लिए एक स्कूल में पढ़ाना चाहा, तो सुबोध ने कोई एतराज नहीं किया. काफी सोचविचार के बाद मैं ने इस मामले को दबा देने में ही भलाई सम झी.

एक दिन मेरे घर एक रजिस्टर्ड लिफाफा आया. उस रोज सुबोध घर पर नहीं था और संयोग से मैं ने उस दिन स्कूल से छुट्टी ले रखी थी. मैं लिफाफा खोलना तो नहीं चाहती थी पर मन नहीं माना तो खोला. पत्र सुबोध के नाम था. मैं उसे पढ़ने लगी. उस में लिखा था-

सुबोध,

इसे संयोग ही कहा जाएगा कि जिस के लिए तुम ने अपनी ब्याहता को छोड़ा वह मेरी सहेली है. अब और कुछ कहने या करने के लिए नहीं रह गया. तुम मु झ से छुटकारा चाहते हो तो मैं तैयार हूं. मेरा घर तो बरबाद हो गया. अब मैं अपनी सहेली का घर बरबाद नहीं होने देना चाहती. वैसे भी उस पति और घर के लिए क्या लड़ना, जिस ने मु झे चित्त से उतार दिया हो. अगली बार जब तुम तारीख पर आओगे, मैं तुम्हें बिना किसी व्यवधान के तलाक दे दूंगी.

-तुम्हारी दीर्घा

दीर्घा के त्याग के आगे मैं खुद को बौना सम झने लगी. मेरी मन भीग गया. मु झे सपने में भी दीर्घा से ऐसे व्यवहार की उम्मीद न थी. मु झे अफसोस होने लगा कि मैं ने क्यों नहीं सुबोध के सामने दीर्घा की बात उठाई? क्यों सिर्फ अपने हित की सोची? कम से कम सुबोध को इतना एहसास तो दिला ही देना चाहिए था कि उस ने सुधा का साथ जो नाइंसाफी की उस के लिए मैं उसे कभी माफ नहीं करूंगी.

उस दिन मैं ने मन बना लिया कि जैसे ही सुबोध मेरे कमरे में सोने के लिए आएगा, मैं उस से यह जान कर रहूंगी कि उस ने सुधा के साथ ऐसा क्यों किया?

सुबोध आया तो मैं ने उस से पूछा, ‘‘क्या तुम दीर्घा को जानते हो?’’

दीर्घा का नाम सुनते ही वह सकपकाया. पर अगले पल संयत हो गया, ‘‘दीर्घा, कौन दीर्घा?’’ उस ने अनजान बनना चाहा.

‘‘तुम्हारी पत्नी,’’ मेरे चेहरे पर व्यंग्य के भाव तिर गए.

अब छिपाने के लिए कुछ नहीं रह गया, तो थोड़ी देर तो सुबोध चुप रहा. फिर इतमीनान से कहने लगा, ‘‘बेशक तुम जो जानना जो चाहती हो, जान सकती हो. पर हकीकत यह है कि मैं ने किसी को धोखा नहीं दिया. जब पहली बार मैं ने तुम्हें अपनी ममेरी बहन के घर में देखा था, तभी से मैं तुम्हें चाहने लगा था. यह अलग बात थी कि तुम इस से बेखबर थीं.

मैं ने अपनी मां से तुम से शादी करने की इच्छा जाहिर की तो वे बिफर गईं और कहने लगीं कि तुम्हारे पापा इस शादी के लिए हरगिज तैयार नहीं होंगे. इस का कारण उन्होंने तुम्हारा विजातीय होना बतलाया. तब मैं ने मां से उन की विजातीय होने का सवाल उठाया तो पापा सुन कर बिफर पड़े. वे बोले कि मैं ने जो सामाजिक तिरस्कार भोगा है क्या तुम भी भोगोगे? पापा का यह कथन मेरी सम झ से परे था. शादी के 25 साल गुजर गए तिस पर यह शिकायत? फिर पापा कहने लगे कि आज भी बिरादरी में लोग मु झे अच्छी नजरों से नहीं देखते हैं. बेशक तेरी मां भी सवर्ण थी पर थी तो दूसरी जाति की. यह तो अच्छा हुआ कि घर में कोई लड़की नहीं हुई. वरना उस की शादी के तो लाले पड़ जाते.

‘‘मेरे यह पूछने पर कि क्या मां ने कभी आप को शिकायत का मौका दिया? पापा के पास कोई जवाब नहीं था. जाहिर है, वे मां से संतुष्ट थे. फिर तुम से क्यों नहीं? उन की यही बात मु झे नागवार लगी. मेरी भूल यह थी कि मैं ने तुम से अपने मन की बात नहीं की. इस बीच मेरी अरेंज मैरेज हो गई, जो मैं नहीं चाहता था. शादी के बाद भी मैं तुम्हें नहीं भूला था. शादी के 2 साल बाद जब मैं अपनी ममेरी बहन के यहां गया तो मौका पा कर मैं ने तुम से अपने मन की बात कह डाली. फिर जब तुम ने अपने मन की बात कही तो मु झे यकीन ही नहीं हुआ कि तुम भी मु झ से उतना ही प्यार करती हो.

मैं तुम्हारी रजामंदी से इतना उत्साहित था कि यह कहना मुनासिब नहीं सम झा कि मैं शादीशुदा हूं, क्योंकि यदि ऐसा करता तो तुम्हारे खो जाने का भय था. इसीलिए बिना देर किए मैं ने तुम से कोर्ट मैरिज कर ली. फिर जब घर में सब के सामने इस विवाह का खुलासा किया तो पापा आपे से बाहर हो गए. वे दीर्घा को छोड़ने के पक्ष में नहीं थे. उन्होंने मु झे अलग रहने तक के लिए कह दिया. पर मम्मी ने सम झाया कि जब लड़का ही तैयार नहीं है, तो दीर्घा को रखने का क्या तुक? कोई औरत सौत बरदाश्त नहीं कर सकती. घर में रहेगी तो कलह रहेगा. अंतत: यही फैसला हुआ कि तुम ससुराल आ कर रहोगी पर भूले से भी कोई इस विवाह की चर्चा तुम से नहीं करेगा. कोशिश की जाएगी कि तुम्हें पता ही न चले. संयोग से एकाध बार दीर्घा यहां आई भी तो तुम स्कूल में रहीं, इसलिए तुम उस के बारे में कभी जान ही न सकीं.’’

मु झे दीर्घा से सहानुभूति थी पर अपने हितों की बलि दे कर नहीं. उस रोज के बाद न ही दीर्घा ने कभी मु झे फोन किया न मैं ने कभी उस का हाल जानने की कोशिश की.

मैं एक लड़की से प्यार करता हूं और कैसे पता लगाऊं कि वह मुझ से प्यार करती है

सवाल

मैं कालेज में पढ़ता हूं और एक लड़की को पसंद करता हूं. वह मेरे घर के पास रहती है. वह जब बाहर आती है तो बारबार मेरी तरफ देखती है. मैं उस से बात कैसे करूं और कैसे पता लगाऊं कि वह मुझ से प्यार करती है.

जवाब

आप कह रहे हैं कि वह आप के घर के पास ही रहती है. यदि आप एक ही सोसाइटी या कालोनी में रहते हैं तो आजकल ज्यादातर सोसाइटी-कालोनी में कल्चर इवैंट, फैस्टिवल साथसाथ मनाए जाते हैं. सब लोग इकट्ठे होते हैं. ऐसे में उस लड़की से बात करने का कोई न कोई बहाना आप निकाल सकते हैं. यह सब आप की सूझबूझ पर निर्भर करता है कि आप कैसे और क्या युक्ति निकालते हैं. उस की मदद का अवसर भी तलाश कर के बात की जा सकती है. जब तक आप उस से बात नहीं करेंगे तब तक आप उस के बारे में जानकारी कैसे हासिल करेंगे.

घर पर बनाएं मसाला सोया हांड़ी और दम आलू

आज हम आपके लिए लेकर आए स्वादिष्ट और जबरदस्त फूड रिसेपी. आइए आपको बताते है इन डिश की रेसिपी.

  1. मसाला सोया हांड़ी

सामग्री

1. 2 कप सोया चंक्स भिगोया

 2. 1 कप ब्रैडक्रंब्स

 3. 1/2 इंच टुकड़ा अदरक कटा

 4. 1 छोटा चम्मच लहसुन कटा

 5. 1 छोटा चम्मच लालमिर्च पाउडर

6. 1 चुटकी चाटमसाला

 7. 1 छोटा चम्मच हरीमिर्च पेस्ट

 8. 1 बड़ा चम्मच कौर्नफ्लोर

9. पर्याप्त तेल

10. 100 ग्राम भुना मसाला

11. 1 छोटा चम्मच धनिया पाउडर

12. 1 छोटा चम्मच जीरा पाउडर

13. 11/2 बड़े चम्मच ब्राउन शुगर

14.  2 बड़े चम्मच इमली का पेस्ट

15.  नमक स्वादानुसार.

विधि

सोया चंक्स को छोटे टुकड़ों में काट लें. फिर इन में ब्रैडक्रंब्स, अदरक, लहसुन, आधा लालमिर्च पाउडर, चाटमसाला, हरीमिर्च पेस्ट, नमक और 2 बड़े चम्मच पानी मिला कर मिक्सर में पेस्ट बनाएं. इसे एक बरतन में डाल कर कौर्नफ्लोर मिलाएं. फिर इस मिश्रण को बराबर भागों में बांट कर ओवल शेप दें और एक आइसक्रीम स्टिक से बांध दें. फिर पैन में तेल गरम कर चारों तरफ से सुनहरा होने तक पकाएं. फिर पेपर पर सुखाएं. फिर उसी पैन में भुना मसाला मिलाएं. बचा लालमिर्च पाउडर, धनिया पाउडर, जीरा पाउडर, ब्राउन शुगर व इमली का पेस्ट मिला कर 2-3 मिनट पकाएं. फिर 1 कप पानी व नमक मिलाएं और मसाला गाढ़ा होने तक पकाएं. सोयाचाप को आइसक्रीम स्टिक से निकाल कर टुकड़ों में काट कर ग्रेवी में डाल कर थोड़ी देर पकाएं. सर्विंग प्लेट में डाल कर गरमगरम सर्व करें.

2. दम आलू

सामग्री

1. 15 छोटे आलू नमक मिले पानी में उबले हुए

2. 1 बड़ा प्याज कटा

3. 3/4 कप गाढ़ा दही

4. 1 तेजपत्ता

5. 1 चुटकी हींग

6. 1 छोटा चम्मच लालमिर्च पाउडर

7. 1/4 छोटा चम्मच हलदी पाउडर

8. 1 बड़ा चम्मच अदरकलहसुन पेस्ट

9. 1 बड़ा चम्मच साबूत धनिया

10. 1/2 छोटा चम्मच जीरा

11.  1 हरी इलायची

12. 1 छोटा टुकड़ा दालचीनी

13. 4 लौंग

14.  8-10 काजुओं का पाउडर

15. 1/2 बड़ा चम्मच कसूरीमेथी

16. 5 बड़े चम्मच तेल

17. 2 बड़े चम्मच धनियापत्ती कटी

18. नमक स्वादानुसार.

विधि

आलुओं को छील कर कांटे से भेद दें. फिर पैन में 2 बड़े चम्मच तेल गरम कर आलुओं को धीमी आंच पर सुनहरा तल कर अलग बरतन में रख दें. साबूत धनिया, जीरा, इलायची, दालचीनी, लौंग व काजू पाउडर को मिला कर अलग रख लें. अब बचे 3 बड़े चम्मच तेल को उसी पैन में डाल कर गरम करें. उस में हींग डाल कर 8-10 सैकंड पकाएं. अब उस में तेजपत्ता और कटा प्याज मिला कर सुनहरा होने तक भूनें. फिर अदरकलहसुन का पेस्ट मिला कर पकाएं. पहले से तैयार सूखा मसाला मिला कर पकाएं. दही को फेंट कर मिलाएं. फिर इस में हलदी पाउडर, लालमिर्च पाउडर मिलाएं. इसे 2-3 मिनट तब तक लगातार चलाती रहें जब तक तेल अलग न हो जाए. अब इस में फ्राइड आलू, कसूरीमेथी और नमक मिला कर धीमी आंच पर 2 मिनट फ्राई करें. इस में 3/4 कप पानी डाल कर उबालें. जब उबलने लगे तब आंच धीमी कर दें. ग्रेवी गाढ़ी कर लें. आंच से उतार कर सर्विंग बाउल में डालें. धनियापत्ती डाल कर गरमगरम सर्व करें.

हैवी ब्रैस्ट पर कैसी हो ड्रैस

एक महिला की ब्रैस्ट का सामान्य आकार उस की खूबसूरती में चार चांद लगाता है. आज के मौडर्न समय में हर महिला चाहती है उस की फिगर एकदम परफैक्ट व सैक्सी हो. लेकिन कुछ महिलाएं अपने स्तनों के बढ़े हुए आकार से बहुत परेशान रहती हैं. कई बार तो वे लोगों की घूरती नजरों से असहज हो उठती हैं और दुपट्टे से ब्रैस्ट को छिपाने की कोशिश करने लगती हैं.

एक सर्वे से पता चला है कि ज्यादातर पुरुष महिलाओं की ब्रैस्ट की तरफ घूरते हैं, जो महिलाओं को असहज कर देता है क्योंकि उन्हें यह पसंद नहीं कि कोई उन की ब्रैस्ट को घूरे.

नीमा कहती हैं कि मैं यह समझ नहीं पाती हूं कि औरतों की ब्रैस्ट को ले कर पुरुषों में इतना फैसिनेशन क्यों है? उन का साइज छोटा है या बड़ा, उन्हें इस से क्या करना है. पुरुष क्यों नहीं समझ पाते कि ब्रैस्ट भी शरीर का एक हिस्सा है और इसे लेकर तमाम तरह के सवाल औरतों को परेशान करते हैं.

ब्रैस्ट कब बढ़ती है

स्तनों का बढ़ना प्यूबर्टी यानी यौवन से शुरू होता है. प्यूबर्टी में लड़कियों के शरीर में हारमोनल बदलाव आते हैं. शरीर में बालों की ग्रोथ होने लगती है. ब्रैस्ट का आकार बढ़ने लगता है. उन्हें पीरियड्स होते हैं. प्युबर्टी से शुरू हो कर ब्रैस्ट मेनोपौज की उम्र तक बढ़ सकती है.

कैसा हो आउटफिट

बिग ब्रैस्ट वाली महिलाएं अकसर ऐसे आउटफिट की तलाश करती है, जिस में उन की ब्रैस्ट ज्यादा बड़ी नजर न आए. हैवी ब्रैस्ट वाली महिलाओं के लिए शौपिंग एक बड़ी परेशानी हो जाती है क्योंकि उन्हें अपने साइज और फिटिंग के आउटफिट जल्दी नहीं मिल पाते हैं. घंटों मौल और दुकानों के चक्कर लगाने के बाद भी अपने लिए उन्हें अपनी पसंद की ड्रैस नहीं मिल पाती है. अगर मिलती भी है, तो हैवी ब्रैस्ट साइज के चलते कपड़े ठीक तरह से फिट नहीं आते हैं.

कपड़ों को शरीर के अनुरूप पहना जाए, तो आप का लुक और अधिक सुंदर दिखता है. कई बार महिलाएं ऐसे कपड़े पहन लेती हैं, जिन से उन की बौडी शेप भड़काऊ और भद्दी दिखने लगती है. हैवी ब्रैस्ट साइज वाली महिलाओं को कपड़े का चुनाव बहुत ही सोचसम?ा कर करना चाहिए ताकि उन की हैवी ब्रैस्ट खराब न दिखे.

तो जानते हैं हैवी ब्रैस्ट वाली महिलाएं अपनी पसंद के आउटफिट को कैसे कैरी कर सकती हैं और खूबसूरत दिख सकती हैं:

हैवी ब्रैस्ट के लिए सही ब्रा का चुनाव

ज्यादातर महिलाएं अपनी बड़ी ब्रैस्ट को छोटा दिखाने के लिए छोटी साइज की ब्रा खरीद लाती हैं ताकि उन का शरीर सुडौल और आकर्षक दिखाई दे. लेकिन इस से उन का शरीर आकर्षक दिखने के बजाय और खराब नजर आने लगता है. इसलिए बड़ी ब्रैस्ट वाली महिलाओं को हमेशा ब्रा खरीदते समय सही साइज का चयन करना चाहिए. कई महिलाएं अपनी उम्र के अनुसार ब्रा का चयन नहीं करतीं. न्यू दिल्ली, मैक्स हौस्पिटल की हैड व गाइनेकोलौजिस्ट डा. उमा वैद्दनाथन का कहना है कि शरीर के अन्य अंगों की तरह बौडी के इस अंगों का भी उतना ही खयाल रखना चाहिए.

सही नाप की ब्रा पहनें

हैवी ब्रैस्ट को सही शेप देने के लिए आप सब से पहले सही साइज की ब्रा पहनें. आप जब भी ब्रा खरीदने जाएं इस बात का ध्यान रखें कि वह न ज्यादा ढीली हो और न ही ज्यादा टाइट. जिस साइज में आप को आराम महसूस हो उसी साइज की ब्रा पहनें ताकि आप की बौडी शेप में नजर आए. हैवी ब्रैस्ट साइज के लिए सही ब्रा चुनते समय आप को कुछ बातों का खास ध्यान रखना होगा ताकि आप को किसी प्रकार की कोई परेशानी न हो क्योंकि खराब फिटिंग वाली ब्रा पीठ और कंधे के दर्द का कारण भी बन सकती है.

रात के समय ब्रा पहन कर सोएं या नहीं

कई महिलाएं रात में ब्रा उतार कर सोती हैं. वैसे जिन की ब्रैस्ट का साइज छोटा होता है वे ब्रा न भी पहन कर सोएं तो कोई फर्क महसूस नहीं होता है, लेकिन जिन की ब्रैस्ट का साइज बड़ा होता है, सोते समय उन की ब्रैस्ट एक तरफ लुढ़क जाने के कारण सोने में असुविधा होती है. हैवी ब्रैस्ट वाली महिलाएं रात में स्पोर्ट ब्रा पहन कर सोएं तो इस से ब्रैस्ट मूवमैंट में आसानी होती है.

शेपवियर पहनें

बिग ब्रैस्ट वाली महिलाएं कैमिसोल या शेपवियर पहन सकती हैं. ये दोनों ही चीजें बड़े स्तनों के लिए परफैक्ट हैं. आप को मार्केट में अलगअलग तरह के शेपवियर मिल जाएंगे. इन्हें अपनी ड्रैस के अंदर पहनें और फिर देखें अपना लुक.

फैब्रिक चुनते वक्त रखें ध्यान

किसी भी आउटफिट या स्टाइल को कैरी करने के लिए जरूरी है पहले अपने बौडी को सम?ाना. साटन, सिल्क, जौर्जेट और कौटन कपड़े आप की बौडी के लिए सही चुनाव हो सकते हैं. ऐसे कपड़े आप के शरीर पर और वजन डालने के बजाय आप के शरीर को संतुलित दिखाते हैं. इस के अलावा हैवी ब्रैस्ट वाली महिलाओं के ऊपर लेयर्ड पैटर्न वाले आउटफिट बहुत अच्छे लगते हैं. इसलिए आप जैकेट, कोट या लेयर्ड पैटर्न वाले आउटफिट चुनें. लेयर्ड आप के ब्रैस्ट को छिपाते हैं.

हाई नैक न पहनें

जिन महिलाओं की ब्रैस्ट का साइज बड़ा हो उन्हें हाई नैक कपड़े नहीं पहनने चाहिए. दरअसल, जब आप हाई नैक आउटफिट पहनती हैं तो इस से आप की ब्रैस्ट अधिक हैवी व फुलर नजर आती है यानी आप की ऊपरी बौडी और अधिक हैवी दिखने लगती है. ऐसे में कोशिश करें कि आप अपने वार्डरोब में ऐसी कुरती, टौप या ब्लाउज को शामिल करें जो वी नैक या स्कूप नैक हों.

आप चाहें तो राउंड आउटफिट भी पहन सकती हैं. यह आप के लुक को ऐलिगैंट तरीके से स्टाइलिश दिखाएगा. लेकिन अगर आप को हाई नैक पहनना ही पसंद है, तो आप सौलिड कलर या फिर ब्लैक कलर की हाई नैक का चयन कर सकती हैं और उस के ऊपर ऐक्सैसरीज कैरी करें ताकि आप की ब्रैस्ट से ध्यान हट कर ऐक्सैसरीज पर जा सके और आप को बुरा भी फील न हो.

नैक एरिया पर करें फोकस

अगर आप का ब्रैस्ट एरिया हैवी है तो आप को कोई भी आउटफिट कैरी करते हुए उस के नैक एरिया पर खासतौर से ध्यान देना चाहिए. आप ऐसी कोई भी ड्रैस पहनने से बचें, जिस की नैकलाइन पर हैवी वर्क हो. इस से आप को दोगुना नुकसान होगा. सब से पहले तो हर किसी का ध्यान आप की नैकलाइन व बैस्ट एरिया पर जाता है.

इस के अलावा अगर नैकलाइन एरिया पर रफल्स वर्क है तो छाती का एरिया ज्यादा उभरा हुआ दिखता है. इसलिए हैवी ब्रैस्ट वाली महिलाओं को ऐसी ड्रैस पहनने से बचना चाहिए जिस में रफल्स वर्क हो. अगर आप को रफल्स पसंद है तो ऐसी ड्रैस चुनें जिस में या तो रफल्स नीचे की ओर हो या एकदम ब्रैस्ट एरिया को हाईलाइट न कर रहा हो.

अगर आप की ब्रैस्ट हैवी है तो आप के लिए रैप ड्रैस या अंगरखा कुरता पहनना सही रहेगा. यह न केवल आप को एक स्मार्ट लुक देगा, बल्कि आप की हैवी ब्रैस्ट को भी बैलेंस करेगा. दरअसल, रैप ड्रैस या अंगरखा कुरता आप की ब्रैस्ट एरिया को डिवाइड करता है जिस से ब्रैस्ट बहुत अधिक हैवी नजर नहीं आती है.

नूडल स्ट्रैप ड्रैसेज को करें अवौइड

हैवी ब्रैस्ट वाली महिलाओं को नूडल स्ट्रैप टौप या नूडल स्ट्रैप कुरती पहनने से बचना चाहिए. सही यह होगा कि आप इस की जगह अधिक वाइड स्ट्रैप ड्रैसेज पहनें. ये आप की अप्पर बौडी लुक को बैलेंस करती हैं. वहीं अगर बात स्लीव्स पहनने की है तो आप के लिए थ्रीफोर्थ स्लीव्स या क्वार्टर स्लीव्स आउटफिट पहनना अच्छा आइडिया हो सकता है. इस से आप की ब्रैस्ट हैवी नजर नहीं आएगी.

क्या कहता है सर्वे

एक सर्वे के मुताबिक, हैवी ब्रैस्ट वाली महिलाओं को ऐक्सरसाइज करने में भी परेशानी होती है. इसलिए कई महिलाएं अपनी ब्रैस्ट को कम करने की दवा खाती हैं या फिर सर्जरी की मदद लेती हैं. लेकिन इन दोनों के ही साइडइफैक्ट हैं.

सर्जरी विभाग के डाक्टरों का कहना है कि जिन महिलाओं की ब्रैस्ट का साइज बड़ा होता है उन्हें अपने अतिरिक्त वजन की वजह से कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, लेकिन वे अकसर इस बात को नजरंदाज कर देती हैं जिस से उन की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है. अपनी बड़ी ब्रैस्ट से परेशान महिलाएं सर्जरी का सहारा लेती हैं. लेकिन हैवी ब्रैस्ट को कम करने के लिए व्यायाम ज्यादा सही होता है क्योंकि दवा के साइड इफैक्ट्स हो सकते हैं. पुशअप, चैस्ट प्रैस, चैस्ट फ्लाइस, डंबल पुलोवर्स, वाल प्रैस, ट्राइसेप डिप्स आदि व्यायाम कर के आप अपनी ब्रैस्ट को शेप में ला सकती हैं.

इस के अलावा सही डाइट से भी हैवी ब्रैस्ट को कम किया जा सकता है. ब्रैस्ट का अधिकतर हिस्सा ऐपिडोज टिशू यानी फैट होता है. अगर आप अपने शरीर से फैट कम करती हैं तो इस की काफी हद तक संभावना है कि ब्रैस्ट का आकार अपनेआप घट सकता है.

ऐक्सपर्ट के मुताबिक, महिलाओं में ब्रैस्ट का साइज बड़ा होने से कई बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है. 2008 में की गई रिसर्च के मुताबिक, बड़ी ब्रैस्ट वाली 20 साल की लड़कियों में अगले 10 सालों में डायबिटीज का खतरा बढ़ गया. 2012 में वैज्ञानिकों ने पाया था कि बड़ी ब्रैस्ट से कोई जोखिम नहीं है लेकिन उस से विसरल फैट जमने का जोखिम जरूर बढ़ जाता है.

Wedding Special: शादी बोझ नहीं

विवाह अब युवकों के लिए भी गले की फांस बनता जा रहा है. अब तक समझ जाता था कि विवाह से लड़की किसी दूसरे घर की सेवा करने वाली नौकरानी बन कर रह जाती है पर अब विवाह कानूनों में औरतों के पक्ष में कानून बनने की वजह से विवाह युवकों के लिए खौफ बन रहे हैं.

अब लड़कियों को यह मालूम है कि उन की नए या थोड़े पुराने हो चुके पति से नहीं बनी तो उन के पास पति का घर छोड़ने का ही औप्शन नहीं है, उस की जिंदगी दूभर करने का भी है. डोमैस्टिक वायलैंस का केस कर के उसे जेल भिजवाना भी उस के हाथ में है और मैंटेनैंस में मोटी रकम मांग कर उसे वर्षों परेशान करने का भी है.

धनबाद की एक लड़की का विवाह 2018 में हुआ. पति से नहीं बनी तो वह फिर मांबाप के पास आ कर रहने लगी. वह कमाऊ थी, अपने पैरों पर खड़ी थी पर उस ने फैमिली कोर्ट में पति पर मैंटेनैंस का मुकदमा कर दिया और कहा कि पति की आय सवा लाख रुपए है.

पति को फैमिली कोर्ट ने हर माह क्व40 हजार देने को कहा. पति हाई कोर्ट गया. हाई कोर्ट के जज ने कहा कि पतियों के साथ अब कुछ गलत हो रहा है और शादी उन के लिए बोझ नहीं बननी चाहिए. जहां पति चाहता था कि उसे कोई मैंटेनैंस न देनी पड़े, हाई कोर्ट ने पति के प्रति सिंपैथी जताते हुए बस उसे 15 हजार रुपये की राहत दी और मैंटेनैंस 40 हजार रुपये से घटा कर 25 हजार रुपये कर दी.

पतिपत्नी का जब तलाक होने लगे या दोनों इस तरह अलग रह रहे हों कि उन्हें तलाकशुदा मान लिया जाए तो लड़कियों को पूर्व पति से नाता तोड़ लेना चाहिए. केवल उन मामलों में मैंटेनैंस मांगी जानी चाहिए जहां बच्चे हों या पत्नी बेरोजगार हो अथवा पत्नी के मांबाप गरीब हों.

जो कहते हैं कि शादी को संस्कार मानो वे भूल जाते हैं कि इस संस्कार में तो पति को कई पत्नियां लाने का हक भी था और पत्नी को घर से निकालने का हक भी. राजा राम तक ने बिना अपने मुंह से बोले गर्भवती सीता को घर से निकाल दिया था. भीम अपनी पत्नी हिडिंबा को जंगल में ही छोड़ आया था.

विवाह संस्कार है तो औरतों की बेडि़यों के रूप में. आज जो औरतें पतियों को छोड़ना नहीं चाहतीं उस के पीछे भी भावना यही रहती है कि किसी तरह पति से संबंध न टूटे और मैंटेनैंस के मुकदमे इसीलिए किए जाते हैं कि पति का बिल्ला पत्नी के माथे पर लगा रहे. समाज तलाकशुदा और विधवा को आज भी छुट्टी गाय की तरह देखता है और वह पगपग पर बुरी नजर महसूस करती है. इसीलिए खुद कमाने वाली पत्नी पति का घर छोड़ने के बाद भी अदालतों के चक्कर लगाती रहती है ताकि समाज को कह सके कि वह है तो विवाहित पर पति से बस विवाद है.

अपने पर्म्ड बालों का ध्यान रखने के लिए इन टिप्स का करें प्रयोग

पर्म्ड हेयर का अर्थ है केमिकल प्रक्रिया द्वारा बालों को घुंघराले करवाना. अगर आप घुंघराले बालों की दीवानी हैं तो आप के लिए यह प्रक्रिया काफी लाभदायक हो सकती है. इस तरह से घुंघराले किए गए बाल वैसे तो परमानेंट कहे जाते हैं लेकिन यह कुछ ही महीनों तक कर्ली रहते हैं. आपको लंबे समय तक बालों को ज्यों का त्यों रखने के लिए इन्हें मेंटेन करने की कोशिश करनी चाहिए. ऐसे बालों को संभालना थोड़ा मुश्किल हो जाता है लेकिन सही टिप्स की मदद से आप इन्हें आसानी से मैनेज कर सकती हैं. आइए जानते हैं क्या होते हैं पर्म्ड हेयर और आप ऐसे बालों का ख्याल किस प्रकार से रख सकती हैं ताकि आपको इन्हें संभालते समय आसानी रहे.

क्या हैं पर्म्ड हेयर?

पर्मिंग ऐसी प्रक्रिया होती है जिसमें आपके बालों को केमिकल का प्रयोग करके अलग अलग तरह के स्ट्रक्चर में बदल दिया जाता है. इसमें आपके बालों को या तो कर्ली कर दिया जाता है या फिर वेवी बना दिया जाता है. पर्म प्रक्रिया अलग अलग प्रकार की होती है और आप अपने मन चाहे टेक्सचर के अनुसार बालों में इस प्रक्रिया का प्रयोग करवा सकती हैं.

पर्म्ड बालों का ध्यान कैसे रखें?

प्रक्रिया के 48 घंटों तक न धोएं बाल : अगर आपने हाल ही में पर्मिंग करवाई है तो आपको अगले 48 घंटों तक अपने बालों को पानी लगने से बचाना होगा. आपको अपने बालों को जैसे हैं वैसे ही रहने देना होगा और उन्हें किसी भी तरह से डिस्टर्ब करने से बचना होगा.

अपने बालों को थोड़ा ढीला रखें : आपको बाल टाइट बांधने से बचना होगा. पोनी टेल करने से भी बचें. सोने के दौरान भी बालों के लिए एक सिल्क के तकिया कवर का प्रयोग कर सकती हैं.

अपने बालों को धूप से बचाएं : अपने बालों को धूप से बचाने की कोशिश करें. आपको बाहर निकलना बंद कर देना चाहिए. अगर निकलती हैं तो बालों में कोई स्कार्फ या फिर यूवी किरणों से बचाने वाले किसी कंडीशनर का प्रयोग कर सकती हैं.

केमिकली तैयार किए गए बालों के हिसाब से ही खरीदें प्रोडक्ट : अपने हेयर स्टाइलिस्ट से पूछ कर ही अपने बालों के हिसाब से ही प्रोडक्ट खरीदें.

बालों को कंडीशन करें : पर्मिंग से आपके बालों का प्राकृतिक पोषण गायब हो जाता है इसलिए आपको बालों को मॉइश्चर प्रदान करने के लिए उन्हें अच्छे से कंडीशन करते रहना होगा. आपको हफ्ते में कम से कम दो बार अपने बालों को कंडीशन करना होगा.

नियमित रूप से ट्रिमिंग करवाती रहें : आपको बालों में नियमित रूप से ट्रिमिंग और टच अप करवाते रहना होगा. वैसे तो पर्म्स को परमेंटेंट हेयर स्टाइल कहा जाता है लेकिन यह भी केवल कुछ ही महीनों तक चलते हैं. इसलिए आपको हर 3 महीने में इन्हें मेंटेन करने के लिए ट्रिमिंग करवाते रहना चाहिए.

कलरिंग करवाने से बचें : जब आपने पर्मिंग करवाई हो तो आपको कुछ महीनों तक बालों में कलरिंग करवाने से बचना होगा. कलरिंग के दौरान ऐसा केमिकल आपके बालों में प्रयोग किया जा सकता है जिससे आपके पर्म प्रभावित हो सकते हैं.

बालों में ब्रश का प्रयोग न करें : बालों को कंघी करने के लिए ब्रश का प्रयोग करने की बजाए किसी वाइड टूथ वाली कंघी का प्रयोग कर सकती हैं.

अगर आप इन सभी टिप्स का प्रयोग करती हैं तो आपके बालों में पर्मिंग काफी लंबे समय तक टिक सकती है और आप इन्हें अच्छे से कैरी कर सकती हैं

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