अनोखा रिश्ता- भाग 1: कौन थी मिसेज दास

जयशंकर से गले मिल कर जब मैं अपनी सीट पर जा कर बैठा तो देखा मनीषा दास आंचल से अपनी आंखें पोंछे जा रही थीं. उन के पांव छूते समय ही मेरी आंखें नम हो गई थीं. धीरेधीरे टे्रन गुवाहाटी स्टेशन से सरकने लगी और मैं डबडबाई आंखों से उन्हें ओझल होता देखता रहा.

इस घटना को 25 वर्ष बीत चुके हैं. इन 25 वर्षों में जयशंकर की मां को मैं ने सैकड़ों पत्र डाले. अपने हर पत्र में मैं गिड़गिड़ाया, पर मुझे अपने एक पत्र का भी जवाब नहीं मिला. मुझे हर बार यही लगता कि श्रीमती दास ने मुझे माफ नहीं किया. बस, यही एक आशा रहरह कर मुझे सांत्वना देती रही कि जयशंकर अपनी मां की सेवा में जीजान से लगा होगा.

मेरे लिए मनीषा दास की निर्ममता न टूटी जिसे मैं ने स्वयं खोया, अपनी एक गलती और एक झूठ की वजह से. इस के बावजूद मैं नियमित रूप से पत्र डालता रहा और उन्हें अपने बारे में सबकुछ बताता रहा कि मैं कहां हूं और क्या कर रहा हूं.

एक जिद मैं ने भी पकड़ ली थी कि जीवन में एक बार मैं श्रीमती दास से जरूर मिल कर रहूंगा. असम छोड़ने के बाद कई शहर मेरे जीवन में आए, बनारस, इलाहाबाद, लखनऊ, दिल्ली, देहरादून फिर मास्को और अंत में बर्लिन. इन 25 वर्षों में मुझ से सैकड़ों लोग टकराए और इन में से कुछ तो मेरी आत्मा तक को छू गए लेकिन मनीषा दास को मैं भूल न सका. वह जब भी खयालों में आतीं  मेरी आंखें नम कर जातीं.

मां की तबीयत खराब चल रही थी. 6 सप्ताह की छुट्टी ले कर भारत आया था. मां को देखने के बाद एक दिन अनायास ही मनीषा दास का खयाल जेहन में आया तो मैं ने गुवाहाटी जाने का फैसला किया और अपने उसी फैसले के तहत आज मैं मां समान मनीषा दास से मिलने जा रहा हूं.

गुवाहाटी मेल अपनी रफ्तार से चल रही थी. मैं वातानुकूलित डब्बे में अपनी सीट पर बैठा सोच रहा था कि यदि श्रीमती दास ने मुझे अपने घर में घुसने नहीं दिया या फिर मुझे पहचानने से इनकार कर दिया तब? इस प्रश्न के साथ ही मैं ने मन में दृढ़ निश्चय कर लिया कि चाहे जो हो पर मैं अपने मन की फांस को निकाल कर ही आऊंगा.

मेरे जेहन में 25 साल पहले की वह घटना साकार रूप लेने लगी जिस अपराधबोध की पीड़ा को मन में दबाए मैं अब तक जी रहा हूं.

मैं गुवाहाटी मेडिकल कालिज में अपना प्रवेश फार्म जमा करवाने गया था. रास्ते में मेरा बटुआ किसी ने निकाल लिया. उसी में मेरे सारे पैसे और रेलवे के क्लौक रूम की रसीद भी थी. इस घटना से मेरी तो टांगें ही कांपने लगीं. मैं सिर पकड़ कर प्लेटफार्म की एक बेंच पर बैठ गया.

इस परदेस में कौन मेरी बातों पर भरोसा करेगा. मुझे कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था. तभी एक लड़का मेरे पास समय पूछने आया. मैं ने अपनी कलाई उस की ओर बढ़ा दी. वह स्टेशन पर किसी को लेने आया था. समय देख कर वह भी मेरे बगल में बैठ गया. थोड़ी देर तक तो वह चुप रहा फिर अपना परिचय दे कर मुझे कुरेदने लगा कि मैं कहां से हूं, गुवाहाटी में क्या कर रहा हूं? मैं ने थोड़े में उसे अपना संकट सुना डाला.

थोड़ी देर की खामोशी के बाद वह बोला, ‘धनबाद का किराया भी तो काफी होगा.’

‘हां, 100 रुपए है.’ यह सुन कर वह बोला कि यह तो अधिक है. पर तुम  अपना जी छोटा न करो. मां को आने दो उन से बात करेंगे.

तभी एक टे्रन आने की घोषणा हुई और वह लड़का बिना मुझ से कुछ कहे उठ गया. उस की बेचैनी मुझ से छिपी न थी. ट्रेन के आते ही प्लेट-फार्म पर ऐसी रेलपेल मची कि वह लड़का मेरी आंखों से ओझल हो गया.

15 मिनट बाद जब प्लेटफार्म से थोड़ी भीड़ छंटी तो मैं ने देखा कि वह लड़का अपनी मां के साथ मेरे सामने खड़ा था. मैं ने उठ कर उन के पांव को छुआ तो उन्होंने धीरे से मेरा सिर सहलाया और बस, इतना ही कहा, ‘जयशंकर बता रहा था कि तुम्हारा सूटकेस क्लौक रूम में है जिस की रसीद तुम गुम कर चुके हो. सूटकेस का रंग तो तुम्हें याद है न.’

मैं उन के साथ क्लौक रूम गया. अपना पता लिखवा कर वह सूटकेस निकलवा लाईं. जयशंकर ने अपनी साइकिल के कैरियर पर मेरा सूटकेस लाद लिया और मैं ने उस की मां का झोला अपने कंधे से लटका लिया. पैदल ही हम घर की तरफ चल पड़े.

आगेआगे जयशंकर एक हाथ से साइकिल का हैंडल और दूसरे से मेरा सूटकेस संभाले चल रहा था, पीछेपीछे मैं और उस की मां. जयशंकर का घर आने का नाम ही न ले रहा था. रास्ते भर उस की मां ने मुझ से एक शब्द तक न कहा, वैसे जयशंकर ने मुझे पहले ही बता दिया था कि मेरी मां सोचती बहुत हैं बोलती बहुत कम हैं. तुम इसे सहज लेना.

रास्ते भर मैं जयशंकर की मां के लिए एक नाम ढूंढ़ता रहा. उन के लिए मिसेज दास से उपयुक्त कोई दूसरा नाम न सूझा.

आखिरकार हम एक छोटी सी बस्ती में पहुंचे, जहां मिसेज दास का घर था, जिस की ईंटों पर प्लास्टर तक न था. देख कर लगता था कि सालों से घर की मरम्मत नहीं हुई है. छत पर दरारें पड़ी हुई थीं. कई जगहों से फर्श भी टूटा हुआ था पर कमरे बेहद साफसुथरे थे. दरवाजों और खिड़कियों पर भी हरे चारखाने के परदे लटक रहे थे. इन 2 कमरों के अलावा एक और छोटा सा कमरा था जिस में घर का राशन बड़े करीने से सजा कर रखा गया था.

मिसेज दास ने मुझे एक तौलिया पकड़ाते हुए हाथमुंह धोने को कहा. जब मैं बाथरूम से बाहर निकला तो संदूक पर एक थाली में कुछ लड्डू और मठरी देखते ही मेरी जान में जान आ गई.

मिसेज दास ने आदेश देते हुए कहा, ‘तुम जयशंकर के साथ थोड़ा नाश्ता कर लो फिर उस के साथ बाजार चले जाना. जो सब्जी तुम्हें अच्छी लगे ले आना. तब तक मैं खाने की तैयारी करती हूं.’

नाश्ता करने के बाद मैं जयशंकर के साथ सब्जी खरीदने के लिए बाजार चला गया. वापस लौटने तक मिसेज दास पूरे बरामदे की सफाई कर के पानी का छिड़काव कर चुकी थीं. दोनों चौकियों पर दरियां बिछी हुई थीं और वह एक गैस के स्टोव पर चावल बना रही थीं. घर वापस आते ही जयशंकर अपनी मां के साथ रसोई में मदद करने लगा और मैं वहीं बरामदे में बैठा अपनी वर्तमान दशा पर सोचता रहा. कब आंख लग गई पता ही न चला.

फिल्म ‘‘गदर 2’’ के बाद भी सनी देओल को क्यों नहीं मिल रही फिल्में

90 के दशक के सफल कलाकार,दो राष्ट्रीय और एक फिल्मफेअर अवार्ड जीत चुके अभिनेता, निर्माता,निर्देशक सनी देओल अपने एटीट्यूड व पुत्र मोह में निरंतर अपने कैरियर को बरबाद करने के साथ ही कंगाली की ओर भी बढ़ रहे हैं.

नब्बे के दशक में सनी देओल की तूती बोलती थी.‘घायल’, ‘दामिनी’,‘डर’,‘घातक’,‘अजय’,‘जिद्दी ’,‘बार्डर’,‘अर्जुन पंडित’, ‘दिल्लगी’, ‘गदरःएक प्रेम कथा’ जैसी फिल्मों में अपने उत्कृष्ट अभिनय से उन्होने दर्शकों का दिल जीत लिया था.लेकिन उसके बाद सनी देओल का एटीट्यूड और लोगों के प्रति व्यवहार इस कदर बदला कि उनके कैरियर का पतन शुरू हो गया.

2001 में अनिल शर्मा निर्देशित फिल्म ‘‘गदर एक प्रेम कथा’’ के बाद सनी देओल की किसी भी फिल्म ने सफलता दर्ज नही की. 2023 में जब अनिल शर्मा ‘गदर एक प्रेम कथा’ की सिक्वअल ‘‘गदर 2’’ लेकर आए तो इस फिल्म की सफलता ने एक बार फिर सनी देओल को सफलता का स्वाद चखा दिया. हर किसी को उम्मीद थी कि इस फिल्म की सफलता के बाद सनी देओल का कैरियर पुनः सरपट दौड़ने लगेगा.उनके पास फिल्मों के आफर भी आए. मगर सनी देओल ने तो अहम में चूर होकर अपने एटीट्यूड को बदलने के लिए तैयार ही नही हुए. सनी देओल को फिल्म ‘गदर 2’ के लिए बीस करोड़ रूपए पारिश्रमिक राशि के तौर पर मिले थे. लेकिन ‘गदर 2’ की सफलता के बाद सनी देओल ने हर फिल्म के लिए पचास करोड़ रूपए मांगने के साथ ही फिल्म में अपने बेटों के लिए भी किरदार की मांग शुरू कर दी. परिणामतः निर्माताओं ने सनी देओल से दूरी बनानी शुरू कर दी.इतना ही नही सनी देओल के बदले एटीट्यूड के चलते ‘जी स्टूडियो’ निर्मित सनी देओल की फिल्म ‘बाप’ का प्रदर्शन भी टल गया.यह फिल्म कब प्रदर्शित होगी,किसी को नहीं पता..

‘गदर 2’ को मिली सफलता के बाद अनिल शर्मा ने सनी देओल व अपने बेटे को लेकर नई फिल्म शुरू करनी चाही,मगर सनी देओल ने उनसे भी पचास करोड़ की मांग कर दी.जिसके चलते अनिल शर्मा ने सनी देओल की बजाय नाना पाटेकर को लेकर फिल्म ‘जर्नी’ की शूटिंग शुरू कर दी.इसके बाद सनी देओल को निर्देशक राज कुमार संतोषी की तरफ से तीन फिल्मों के आफर मिले,पर राज कुमार संतोषी की फिल्मों के निर्माता सनी देओल को पचास करोड़ रूपए देने को तैयार नहीं हुए और वह फिल्में भी उनके हाथ से निकल गयी.

इसके बाद अभिनेता आमिर खान ने बतौर निर्माता फिल्म ‘‘लाहौर 1847’’ बनाने का ऐलान किया,जिसके निर्देशन की जिम्मेदारी राज कुमार संतोषी ही संभाल रहे हैं.आमिर खान ने ख्ुाद सनी देओल से बात की और सनी देओल ने इस फिल्म को करने के लिए हामी भर दी.आमिर खान उन्हे कितनी पारश्रिमिक राशि दे रहे हैं,इसका अभी तक खुलासा नहीं हुआ है.

19 अक्टूबर को सनी देओल के जन्मदिन पर फिल्म ‘लाहौर 1947’ का पोस्टर लांच होना था,मगर ऐसा नही हुआ. सूत्रों के अनुसार सनी देओल ने पोस्टर लांच से चार दिन पहले अपना एटीट्यूड दिखाया और आमीर खान ने फिल्म को ठंडे बस्ते में डाल दिया. तो वहीं कुछ सूत्र बताते हैं कि आमीर खान व भाजपा सांसद सनी देओल के विचारों ने टकराव पैदा कर दिया. इसलिए यह फिल्म अधर में लटक गयी. जबकि कुछ सूत्र दावा कर रहे हैं कि आमीर खान इस फिल्म की पटकथा में अपने हिसाब से कुछ बदलाव करा रहे हैं.और अब वह स्वयं इस फिल्म में एक किरदार निभाना चाहते हैं. इस वजह से ‘लाहौर 1947’ की आधिकारिक तौर पर घोषणा रोक दी गयी.पटकथा को अंतिम रूप दिए जाने के बाद भी इस फिल्म में सनी देओल रहेंगे या नही,पता नहीं…वैसे सनी देओल का दावा है कि वह फिल्म ‘लाहौर 1947’ का हिस्सा है.

उधर चर्चाएं गर्म हैं कि सनी देओल ने एक बार फिर लेखक व निर्देशक डाॅ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी का हाथ थामा है.डाॅं. चंद्र प्रकाश द्विवेदी लिखित कहानी व पटकथा पर बनने वाली एक फिल्म में सनी देओल और उनके दोनो बेटे करण देओल व राजवीर देओल अभिनय करेंगे .फिल्म के निर्देशक डाॅ.चंद्रप्रकाश द्विवेदी होंगे.फिल्म का निर्माण कौन करेगा.यह बात अभी तक सामने नही आयी है और यह फिल्म कब शुरू होगी,इस पर भी रहस्य बना हुआ है. सनी देओल और डाॅ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी का पुराना संबंध है.डाॅ.चंद्रप्रकाश द्विवेदी के लेखन व निर्देशन में बनी फिल्म ‘‘मोहल्ला अस्सी’’ में सनी देओल अभिनय कर चुके हैं,जिसने बाक्स आफिस पर पानी तक नही मांगा था.

अब नहीं बनेगी टाइगर वर्सेस पठान

12 नवंबर,दीवाली के दिन आदित्य चोपड़ा ने अपने प्रोडक्शन हाउस ‘यशराज फिल्मस’ के बैनर तले बनी ‘स्पाई युनिवर्स’ की फिल्म ‘‘टाइगर 3’’ को पूरे विश्व के सिनेमाघरों में प्रदर्शित की थी.फिल्म देखने के बाद दर्शकों को बड़ी निराशा हुई थी. फिल्म ‘टाइगर 3’ में भारतीय लोकतंत्र को बचाने की बात करने की बजाय टाइगर पाकिस्तानी आईएसआई एजंसी के साथ मिलकर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री की सुरक्षा की लड़ाई लड़ते हैं.फिल्म में बेसिर पैर की कहानी है. आदित्य चोपड़ा को अहसास था कि उनकी यह फिल्म लोगों को पसंद नहीं आएगी.इसी के चलते यशराज फिल्मस ने अपनी प्रथा को तोड़ते हुए फिल्म का प्रेस शो आयोजित करने की बजाय हर पत्रकार को ‘बुक माई शो’ का वाउचर भेजा था.इसके अलावा ‘बल्क बुकिंग’ और ‘कारपोरेट बुकिंग’ कर दर्शकों तक मुफ्त में फिल्म देखने के लिए टिकटें पहुॅचायी गयीं.लेकिन फिल्म को दर्शक नहीं मिल रहे थे.तब फिल्म के प्रदर्शन के दस दिन बाद सलमान खान ने भी पत्रकारों को ग्रुप इंटरव्यू दिया,जिसमें सिर्फ ‘टाइगर 3’ का ही गुणगान किया.फिल्म के प्रदर्शन के साथ ही पूरी पी आर मशीनरी ‘टाइगर 3’ को अति सफलतम फिल्म साबित करने में जुट गयी थी.सभी ‘समोसा क्रीटिक्स’ भी जमकर इस फिल्म के पक्ष में माहौल बनाने के लिए ताकत लगा दी। हर दिन बाक्स आफिस के गलत आंकड़े पेश किए गए.

मगर अफसोस साढ़े तीन सौ करोड़ की लागत में मनीष शर्मा के निर्देषन में बनी फिल्म ‘‘टाइगर 3’’ अपने प्रदर्शन के 19 दिन बाद भी अपनी लागत वसूल नही कर पायी.यदि हम ‘यशराज फिल्मस’ के ही आंकड़ों पर यकीन करें,तो यह फिल्म अब तक लगभग 280 करोड़ ही कमा सकी है.सभी जानते हैं कि इसमें से कई तरह के खर्च और जीएसटी  आदि निकालने के बाद निर्माता के हिस्से बामुश्किल 15 से बीस प्रतिशत की ही रकम आती है.यानी कि ‘टाइगर 3’ बाक्स आफिस पर बुरी तरह से असफल हो चुकी है.और ‘यशराज फिल्मस’ को कई सौ करोड़ का नुकसान हो चुका है.मगर अभी भी यशराज फिल्मस खुलकर कबूल करन को तैयार नही है कि उसे ‘टाइगर 3’ में भी नुकसान हुआ.

लेकिन यशराज फिल्मस ने एक बड़ा कदम उठाते हुए मार्च 2024 में फिल्म ‘‘टाइगर वर्सेस पठान’ की जो शूटिंग शुरू होने वाली थी,उसे  रद्द करते हुए ऐलान किया है कि इस फिल्म की शूटिंग 2024 में नही होगी.ज्ञातब्य है कि इस फिल्म में शाहरुख खान के साथ सलमान खान अभिनय करने वाले थे.यह दोनों कलाकार घर पर खाली बैठे हुए हैं.यह भी ‘स्पाई युनिवर्स’ की ही अगली फिल्म है.पर सूत्रों पर यकीन किया जाए तो, 2024 क्या,अब यह फिल्म कभी नही बनेगी.

हम यहां याद दिला दें कि  ‘टाइगर 3’ सीरीज की ही 2017 में प्रदर्शित फिल्म ‘‘टाइगर जिंदा है’’ ने  लगभग 340 करोड़ कमाए थे.पर ‘टाइगर 3’ तो वहां तक भी नही पहुॅच पायी है. इतना ही नहीं इसी सीरीज की पहली फिल्म ‘‘एक था टाइगर’’,जो कि 15 अगस्त 2012को प्रदर्शित हुई थी. 75 करोड़ की लागत वाली इस फिल्म ने 335 करोड़ कमाए थे. अब इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि ‘‘टाइगर 3’’ कितनी बुरी तरह से असफल हुई है. यह हालत तब है जब ‘यशराज फिल्मस’ ‘टाइगर 3’ बाक्स आफिस के आंकड़े बढ़ा चढ़ा कर बता रहा है.

मेरा ब्रैस्ट का आकार बहुत छोटा है, मेरी हैल्प कीजिए?

सवाल

मेरी उम्र 22 साल है. मेरी शादी होने वाली है. मैं देखने में तो ठीक लगती हूं पर मेरी समस्या यह है कि मेरी ब्रैस्ट का आकार बहुत छोटा है. मैं जबरदस्त हीनभावना की शिकार होती जा रही हूं. मेरी हैल्प कीजिए?

जवाब

सब से पहले आप किसी गाइनेकोलौजिस्ट से अपने शरीर की अच्छी तरह से जांच करवाएं और हारमोंस की भी जांच करा लें. अगर उस में कुछ परेशानी होगी तो उस की दवा लें जिस से कि आप के स्तनों का आकार बढ़ सकता है. इस के अलावा आप कुछ ऐसे विशेष व्यायाम करें जिन से ब्रैस्ट के विकास में हैल्प मिलती है जैसेकि आप स्विमिंग बैकस्ट्रो कर सकती हैं, रस्सी को पीछे से आगे की ओर कूद कर भी आप व्यायाम कर सकती हैं. किसी अच्छे ब्रैस्ट डेवलपमैंट तेल से ब्रैस्ट पर नीचे से ऊपर की ओर ले जाते हुए मालिश करना शुरू कर दीजिए. इस से भी कुछ फर्क जरूर पड़ता है. इस से रक्तसंचार में वृद्धि होगी और ब्रैस्ट के विकास में सहायता मिलेगी.

आहार में दूध, पनीर, फल और अंडों आदि का इस्तेमाल करें. इस से आप को न्यूट्रिशन अच्छा मिलेगा और ब्रैस्ट में बढ़ोत्तरी होगी. किसी अच्छे कौस्मैटिक क्लीनिक में जा कर ब्रैस्ट के विकास की विशेष सिटिंग भी ले सकती हैं. बंदगोभी के बड़ेबड़े पत्ते ले कर बर्फ के ठंडे पानी में डालें और ठंडा होने पर उन्हें अपनी ब्रैस्ट पर लगा कर कुछ देर तक रखें. इस से भी स्तनों के आकार बढ़ाने में हैल्प मिलती है. अगर कोई भी उपाय कामयाब न हो तो सर्जरी भी करा सकती हैं. इस में जो कट होता है वह बिलकुल ब्रैस्ट के नीचे होता है जोकि आमतौर पर दिखाई नहीं देता और यह सर्जरी काफी सालों तक चल जाती है. इस से आप का आत्मविश्वास बढ़ेगा और आप अपनी जिंदगी को बेहतर जी पाएंगी.

-समस्याओं के समाधान ऐल्प्स ब्यूटी क्लीनिक की फाउंडर, डाइरैक्टर डा. भारती तनेजा द्वारा 

पाठक अपनी समस्याएं इस पते पर भेजें : गृहशोभा, ई-8, रानी झांसी मार्ग, नई दिल्ली-110055.

स्रूस्, व्हाट्सऐप मैसेज या व्हाट्सऐप औडियो से अपनी समस्या 9650966493 पर भेजें.

 

Winter Special: सर्दियों में बनाएं मिक्स दाल वड़ा

सर्दियों में साउथ इंडियन फूड की बात ही अलग है और बनाना हो घर में तो ये और भी मजेदार बात होती है तो ऐसे में हम लेकर आएं है मिक्सड दाल वड़ा की रेसिपी जिसे आप घर में चंद मिनटो में बना सकते है. और घरवालों को सर्व कर सकते है.

सामग्री

1/2 कप चने की दाल,

1/4 कप धुली मूंग दाल,

2 लालमिर्च साबूत,

1 छोटा चम्मच जीरा,

2 छोटे चम्मच धनिया साबूत,

चुटकी भर हींग

2 बड़े चम्मच कौर्नफ्लोर

8-10 करीपत्ते

1 बड़ा चम्मच धनियापत्ती बारीक कटी

वड़े तलने के लिए पर्याप्त रिफाइंड औयल

नमक स्वादानुसार.

विधि

-दोनों दालों को अलगअलग पानी में 5 घंटे भिगोएं. फिर पानी निथार कर दोनों दालों को मिला लें. आधी दाल को हैंडब्लैंडर के चौपर में डाल कर दरदरा पीस लें. बची दाल में सभी खडे़ मसाले डाल कर मिक्सी में पीस लें. मिश्रण को मिलाएं.

-इस में नमक, हींग पाउडर, धनियापत्ती और हाथ से तोड़ कर करीपत्ते मिला दें. कौर्नफ्लोर मिक्स कर के हाथ से छोटेछोटे वड़े बनाएं. फिर गरम तेल में धीमी आंच पर सुनहरा होने तक तल लें. इन वड़ों को चटनी के साथ टिफिन में ले जा सकते हैं.

दूरियां: क्या काम्या और हिरेन के रिश्ते को समझ पाया नील

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Winter Special: इन 4 प्लेस को चुनें विंटर डेस्टिनेशन

सर्दियां आ ही गईं हैं. कुछ ही दिनों में आपके सुबह की शुरूआत सूरज की किरणों के बजाए कोहरे से होने लगेगी. सर्दियों का मौसम ट्रेवल के नजरीए से बेहतरीन है. सर्दियों में आप बिना पसीना बहाए मिलों चल सकती हैं, थकान भी कम होती है. पहाड़ी इलाकें बर्फ की चादर ओढ़ लेते हैं और समुद्री इलाकों में भी सुकून महसूस होता है. जाड़ों की नर्म धूप और आंगन में लेटकर, गीत के यह लफ्ज ही काफी हैं सर्दियों की खूबसूरती बयां करने के लिए. अगर आप भी सर्दियों में विदेश जाने का प्लान बना रही हैं तो अपने प्लानिंग में इन शहरों को जरूर शामिल करिए.

1. एथेंस, ग्रीस

किसी भी हेरिटेज डेस्टीनेशन को एक्सप्लोर करने के लिए सर्दियों का मौसम बेस्ट है. चाहे वह प्राचीन एक्रोपोलिस शहर के पार्थेनन की खूबसूरत स्थापत्यकला हो या ज्यूस का प्राचीन मंदिर, एथेंस का इतिहास अद्वितीय है. गर्मियों के मुकाबले सर्दियों में ग्रीस की राजधानी में घूमना ज्यादा आसान है. आपको ज्यादा पैसे भी खर्च नहीं करने पड़ेंगे क्योंकि सर्दियों में टूरिस्ट की संख्या घट जाती है.

2. वेनिस, इटली

वेनिस, बस नाम ही काफी है. न जाने कितने ही लोग आधी दुनिया का सफर कर यहां की खूबसूरती को निहारने पहुंचते हैं. पानी के ऊपर बसे हुए इस शहर की अलग ही बात है. यहां का आर्किटेक्चर इस शहर को अलग पहचान देता है. पुराने जमाने के संरक्षित चर्च, शापिंग स्ट्रीट, वाकवे, कैफे. इंतजार किस बात का है, बस अपने हमसफर का हाथ थामिए और पहुंच जाइए वेनिस.

3. ट्रांसिलवेनिया, रोमानिया

रहस्य और प्रकृति की अनछुई खूबसूरती वाला शहर है ट्रांसिलवेनिया. यहां आपको मध्यकालीन यूरोप की झलक देखने को मिलेगी. यहां फगारस की पहाड़ियों में आपको अपनी जिन्दगी का सबसे यादगार रोड ट्रिप का मजा लेने का मौका मिलेगा वहीं कार्पेथियन की पहाड़ियों में तरह तरह के पेड़-पौधे और जानवरों से रूबरू होने का अवसर भी मिलेगा. वाइल्डलाइफ प्रेमियों के लिए तो कार्पेथियन स्वर्ग से कम नहीं है. ट्रांसिलवेनिया आकर ड्रेकुला का कासल देखना मत भूलिएगा.

4. कोपनहैगन, डेनमार्क

इस शहर का अलग ही मिजाज है. चाहे वह फैशन हो या आर्किटेक्चर या फिर म्यूजियम. यहां विश्व के सबसे जायकेदार रेस्त्रां भी हैं. चारों तरफ बर्फ की चादर और गर्म काफी आपको इस शहर को भूलने नहीं देंगे.

Wedding Special: शादी से पहले कुछ इस तरह निखारें अपनी सुंदरता

अपनी शादी का दिन हर किसी के लिए खास होता है और इस मौके पर हर दुलहन सुंदर दिखना चाहती है. लेकिन हमारे देश में शादी के दौरान होने वाली पारंपरिक रस्मों को व्यवस्थित ढंग से निभाना टेढ़ी खीर है, इसलिए इस दौरान दुलहन और सही ढंग से अपना खयाल नहीं रख पाती. हालांकि शादी तो 1 दिन की होती है परंतु उस की यादें हमेशा के लिए होती हैं, इसलिए कपड़े और स्थल वगैरह पहले ही तय कर लिए जाते हैं. लेकिन इन सब के बीच दुलहन अपनी त्वचा और स्वास्थ्य का खयाल आमतौर पर नहीं रख पाती.

जब कि आप अच्छी दिखती हैं तो बेहतर महसूस करती हैं और ऐसा होने से आप का आत्मविश्वास भी बढ़ जाता है. ऐसा भी कहा जाता है कि लंबे समय तक लोगों की याददाशत में बने रहने का एकमात्र रास्ता है कि उस दिन आप सब से अलग दिखें. इस के लिए आजकल शरीर की रूपरेखा संवारना (बौडी कंटूरिंग), त्वचा का जीर्णोद्धार (स्किन रिजुविनेशन), दागधब्बे हटाना (स्कार रिमूविंग), चेहरे को आकर्षक बनाना (फेस लिफटिंग), लेजर चिकित्सा और डर्मल फिलर्स आदि विभिन्न प्रकार के उपचार उपलब्ध हैं, जो आप की त्वचा तथा शरीर में फिर से जान भरते हैं. इन उपचारों का सब से बड़ा फायदा यह है कि ये मुंहासे, बालों का गिरना, ब्लैकहैड्स, पिगमैंटेशन, झुर्रियों व दागधब्बों को रोकते हैं और आप के चेहरे की खोई रंगत आप को वापस दिलाते हैं.

ये सभी उपचार एक ब्राइडल पैकेज में आते हैं और वह पैकेज कैसा हो यह आप की त्वचा पर निर्भर करता है. उस में वह सब मौजूद होता है, जो आप की त्वचा को शादी जैसे मौके के लिए सुंदर बनाने के लिए चाहिए. मेडलिंक्स के डा. गौरंग के अनुसार, अगर आप स्किन ट्रीटमैंट की योजना बना रही हैं, तो आप को शादी के दिन के 6 महीने पहले से ही तैयारी शुरू कर देनी चाहिए.अगर शादी की तैयारी के लिए आप फिलर्स (भराव) व बोटोक्स की सोच रही हैं तो आप को इसे समय रहते करवाना होता है. बोटोक्स की प्रक्रिया पूरी होने में 3 से 4 महीने का वक्त लगता है, इसलिए इस के अनुसार योजना बनाएं. झुर्रियां व शिकन को हटाने में यह अद्भुत ढंग से काम करता है और आप के चेहरे की मांसपेशियों को चिकना बना कर उन में जान फूंक देता है. अंतत: इस का असर आप की मुसकराहट पर भी दिखता है.

  • अगर आप के चेहरे पर काले धब्बे हैं, तो इस के उपचार के लिए किसी त्वचा रोग विशेषज्ञ की सलाह लें. लेजर उपचार, फोटो फेशियल्स तथा पैड्स व क्रीम जैसे उत्पाद आप की त्वचा में चमक ला सकते हैं.
  • अगर आप के चेहरे व शरीर पर बहुत अधिक बाल हैं और आप लेजर हेयर रिमूवल चिकित्सा की योजना बना रही हैं, तो इसे भी 6 महीने पहले कराने की जरूरत है. स्थिति के अनुरूप इस उपचार के कई सत्र की आवश्यकता पड़ सकती है.
  • बौडी कंटूरिंग के अंतर्गत आप के शरीर के वजन और चरबी को कम किया जाता है ताकि आप के शरीर को सुडौल बनाया जा सके. इस के लिए शादी के 3-4 महीने पहले योजना बनाएं ताकि आप इस की अभ्यस्त हो सकें.
  • इस के अलावा आप रोज अपनी त्वचा को क्लीन, ऐक्सफोलिएट और मौइश्चराइज करना सुनिश्चित करें. आज के समय में जब हर तरफ प्रदूषण का स्तर बढ़ा हुआ है, दिनप्रतिदिन हमारी त्वचा अपनी प्राकृतिक चमक खोती जा रही है और ऐसे में प्री ब्राइडल प्रक्रिया वास्तव में बहुत जरूरी हो चुकी है.

क्या है प्री ब्राइडल प्रक्रिया

मूल रूप से यह शादी के पहले की जाने वाली त्वचा की पूरी देखभाल प्रक्रिया का समूह है. जिसे 1 पूरा दिन स्पा में बिता कर या फिर 4 महीने की पूरी दिनचर्या को अपना कर पूरा किया जा सकता है. मूल बात यह है कि ये अपनाने योग्य प्रक्रियाएं हैं और यदि शादी के कुछ दिन पूर्व आप यह सब 1 दिन में पूरा करना चाह रही हैं तो ये प्रक्रियाएं हैं:

  • मैनिक्योर.
  • पैडिक्योर.
  • फैशियल (यह प्रक्रिया आप के चेहरे को दुलहन वाली चमक देती है).
  • वैक्सिंग.
  • थ्रेडिंग.
  • हेयर स्पा.
  • बौडी पौलिश.
  • बौडी मसाज.

इन सब के बाद अगर संभव हो तो आप प्री ब्राइडल बाथ चुन सकती हैं, जो प्राचीन समय का उपचार है. इस में गुलाब की पंखुडि़यों आदि का इस्तेमाल किया जाता है, जो बौडी सिस्टम को सुकून देने वाला होता है. इन सब के अलावा अगर आप 2 या 3 या 4 महीने के प्री ब्राइडल की पूरी प्रक्रिया कराती हैं, तो हर महीने आप को इन प्रक्रियाओं को दोहराना चाहिए:

  • मैनिक्योर.
  • पैडिक्योर.
  • फेशियल क्लीनअप (त्वचा की स्थिति के अनुसार).
  • वैक्सिंग.
  • हेयर केयर.

अगर ये सारी प्रक्रियाएं आप के बजट से बाहर हो रही हैं, तो शादी के पहले कम से कम एक बार प्री ब्राइडल जरूर कराएं.

दमकती त्वचा हासिल करें

अगर आप आनुवंशिक तौर पर बहुत अच्छी त्वचा की मालकिन नहीं हैं, तो दोषरहित और दमकती त्वचा हासिल करने के लिए आप को प्रयास की जरूरत है. हालांकि तमाम तरह के लोशन व फेशियल इस में सहायक हैं, परंतु उस स्वस्थ चमक का कोई विकल्प नहीं है, जो प्राकृतिक तौर पर हासिल की जाती है. इस के नुसखे निम्नलिखित हैं:हर रोज 2 लिटर पानी पीएं यह शरीर से जहरीले तत्त्वों को बाहर करने में सहायक होता है. पानी की मात्रा का ध्यान रखने के लिए आप अपने लिए एक पानी की बोतल अलग रख लें. इस से आप को सहज ही पता लग जाएगा कि आप ने 2 लिटर पानी पीया या नहीं.

हर रोज नारियल पानी पीएं

अपनी त्वचा को स्वस्थ बनाने का यह ऐसा नुसखा है जिस से आप की त्वचा सचमुच अंदर से चमक उठेगी. अगर रोज एक नारियल खरीद पाना संभव न हो, तो आप एक बार में इकट्ठा उन्हें खरीद सकती हैं.

मल्टी विटामिन लें

वैसे कोई भी दवा लेने के पूर्व डाक्टर की सलाह लें, परंतु शादी के कुछ महीने पहले से मल्टी विटामिन लेना आप के शरीर व स्वास्थ्य को रौनक देता है, जिस से आप की त्वचा भी दमकती है.

व्यायाम करें और स्वस्थ आहार लें

जंक फूड से तोबा और व्यायाम आप के शरीर से जहरीले तत्त्वों को बाहर निकाल देता है, जिस का सीधा असर आप की त्वचा के स्वास्थ्य पर होता है और आप की त्वचा से आप का स्वस्थ शरीर प्रतिबिंबित होता है.

खुश रहें

एक स्वस्थ तन परंतु उस के साथ नाखुश मन, यह कभी सुंदर चेहरे का प्रतीक नहीं होता. हालांकि व्यायाम का आप की मनोदशा पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है, क्योंकि खुश रखने वाले सभी हारमोन व्यायाम के दौरान मुक्त होते हैं. फिर भी आप को स्वयं को भीतर से अच्छा महसूस करने के अन्य प्रयास भी करते रहना चाहिए. ऐसा करना तब और जरूरी हो जाता है जब आप की शादी होने वाली हो, क्योंकि अपनी नौकरी के साथसाथ शादी की तैयारी हेतु विभिन्न कार्यों को निबटाना आप के लिए गंभीर तनाव का कारण बन सकता है.

कुछ अन्य नुसखे

एक स्वस्थ दिनचर्या के अलावा अपनी त्वचा की देखभाल के लिए यह भी करें:

दिन में 2 बार चेहरा साफ करें

हमें मालूम है कि हम में से कई रात में आलस महसूस करते हैं, इसलिए कुछ करना नहीं चाहते. परंतु रात में बिस्तर पर जाने से पहले आप को अपना चेहरा निश्चित तौर पर धोना चाहिए. आप को अपना मेकअप हटा लेना चाहिए. मेकअप के साथ सोना नुकसानदेह है. यह भी सुनिश्चित करें कि मेकअप रिमूवर को भी धो कर चेहरे से पूरी तरह साफ कर दिया गया हो, क्योंकि कुछ रिमूवर आप की त्वचा पर तैलीय अवशेष छोड़ देते हैं, जो कई बार धोने से भी साफ नहीं होते. मेकअप हटाने के बाद वह बिलकुल साफ हो जाए, ऐसा सुनिश्चित करने के लिए गुलाबजल में भिगोए हुए कौटन पैड का इस्तेमाल करें.

मौइश्चराइजर का इस्तेमाल करें

एक दुलहन के लिए रोज 2 बार मौइश्चराइजर का इस्तेमाल करने की सलाह के पीछे एक खास कारण यह है कि इस से उस का मेकअप उस खास दिन तक बिलकुल सटीक हो जाता है. यह छोटे हिस्सों में नहीं सिमटता और सहजता से फैलता है और कोई परत नहीं बनाता. ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि मौइश्चराइजर आप के चेहरे पर अतिरिक्त तेल उत्पादित करना बंद कर देता है. आप 1 महीने तक यह जारी रखें. आप को अंतर महसूस हो जाएगा.

सनस्क्रीन लोशन तत्परता से लगाएं

आप की उम्र 20 वर्ष से 40 वर्ष के बीच कुछ भी हो, धूप की वजह से होने वाली समस्याओं के लक्षण कभी भी दिख सकते हैं. इन लक्षणों में भूरे धब्बे व सूक्ष्म बदरंग निशान शामिल होते हैं, जो बिना किसी चेतावनी के दिखने शुरू हो जाते हैं तथा आप कुछ भी कर लें हटने का नाम नहीं लेते. दुलहन के तौर पर आप निश्चित तौर पर कंसीलर का पूरा पैक आजमाना चाहेंगी ताकि ये दागधब्बे गायब हो जाएं. परंतु क्या यह सही नहीं होगा कि जितना संभव हो इन समस्याओं को दूर ही रखा जाए? धूप के वक्त बाहर जाने से पहले 15-20 मिनट तक सनस्क्रीन लोशन लगाएं (30 से 50 एसपीएफ की मात्रा पर्याप्त होगी) और अगर आप को ज्यादा देर तक धूप में बाहर रहना हो तो 2 घंटे में इस प्रक्रिया को दोहराएं.

हर हफ्ते फेसपैक लगाएं

सप्ताह में 1 बार घर पर फेसपैक लगाएं. तैलीय त्वचा वाली लड़कियों के लिए मुल्तानी मिट्टी का फेसपैक उपयुक्त होगा, जबकि जो लड़कियां शुष्क त्वचा से परेशान हैं, वे शहद आधारित पैक का इस्तेमाल करें, जो नमी बनाए रखने में कारगर होता है.

त्वचा रोग विशेषज्ञ से परामर्श लें

अगर आप त्वचा की किसी समस्या जैसे मुंहासे या त्वचा के रंग में परिवर्तन आदि का सामना कर रही हैं, तो शादी के 3 महीने पहले ही किसी त्वचा रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें. उपचार के नजर आने वाले परिणाम के सामने आने में देरी होती है, इसलिए जितनी जल्दी हो समस्या के सामने आते ही डाक्टर के पास जाएं. यहां तक कि आप को त्वचा से संबंधित कोई समस्या न भी हो तो भी 1 से 2 बार त्वचा रोग विशेषज्ञ के पास जरूर जाएं, क्योंकि ये डाक्टर आप को आप के लिए जरूरी प्री ब्राइडल व सामान्य स्किन केयर उपचार के बारे में बताते हैं. जैसे फेसपैक से ले कर फेशियल तक. ये सब आप की त्वचा के प्रकार व उस की जरूरत के अनुसार निर्धारित किए जाते हैं.

कुछ फेशियल की मदद लें

क्या सभी दुलहनों को फेशियल की आवश्यकता होती है? शायद नहीं. परंतु क्या सभी दुलहनों को फेशियल करवाना चाहिए? अधिकतर मामलों में हां. जब तक आप के त्वचा रोग विशेषज्ञ इस के लिए बिलकुल मना नहीं कर देते, आप को कुछ तरह के फेशियल करा लेने चाहिए. सामान्यतया शादी से पहले 2-3 फेशियल काफी होते हैं और यह निश्चित करें कि लास्ट फेशियल शादी के पहले कार्यक्रम से कम से 48 घंटे पूर्व हो. ध्यान देने योग्य एक बात यह भी है कि अगर आप जीवन में पहली बार फेशियल कराने जा रही हैं, तो वह शादी के 1 माह पूर्व नहीं कराना चाहिए. इसे 2-3 महीने पूर्व ही कराएं ताकि पता लगे कि वह आप की त्वचा के अनुकूल है या नहीं.

अंतिम 30 दिनों में कुछ नया न अपनाएं

एक स्वस्थ दिनचर्या, आहार और 8 घंटे की नींद आप के लिए जरूरी है. लेकिन शादी के ठीक पहले कुछ नए उत्पाद को आजमाना अच्छा नहीं होगा. विभिन्न प्रकार के उत्पादों को ले कर अपनी त्वचा या बालों पर उन्हें न आजमाएं. यहां बताए गए नुसखों में से कम से कम 80 प्रतिशत नुसखों को जरूर आजमाएं ताकि आप के मेहमान आप की आकर्षक त्वचा के बारे में सोचने पर मजबूर हो जाएं.

-डा. अजय कश्यप
(चीफ कौस्मैटिक सर्जन, मेडस्पा)

Winter Special: गर्भावस्था में करने होंगे ये व्यायाम

शिशु को जन्म देना पृथ्वी का सब से बड़ा चमत्कार है. और इस चमत्कार को अंजाम देने के लिए महिलाओं की मदद करता है व्यायाम. जी हां, समय बदल चुका है और साथ ही महिलाओं का गर्भावस्था के दौरान और बाद में व्यवसाय के प्रति दृष्टिकोण भी. गर्भावस्था के दौरान व्यायाम करने से होने वाले फायदे बेहद महत्त्वपूर्ण हैं. यह सिर्फ आप और आप के गर्भस्थ शिशु को ही लाभ नहीं पहुंचाता बल्कि आप के प्रसव को आसान बनाता है. और प्रसव के बाद आप के शरीर को शेप में भी लाता है.

व्यायाम के फायदे गर्भधारण करने के शुरूआत में और गर्भावस्था के बाद में करने पर अलगअलग हैं, जैसे गर्भधारण के शुरूआत में व्यायाम करना शिशु के विकास में सहायक होता है वहीं गर्भधारण करने के बाद के समय में व्यायाम आप को फिट रखने में, आप के वजन को नियंत्रित रखने में और प्रसव पीड़ा को कम करने में सहायक होता है.

कुल मिला कर जीवन के इस महत्त्वपूर्ण चरण के दौरान नियमित रूप से व्यायाम महिलाओं को सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखने, गर्भधारण और प्रसव पीड़ा को आसान बनाने में उन की सहायता करता है. आप ने नयानया अभ्यास शुरू किया हो या आप पहले से ही व्यायाम करने की अनुभवी हों. गर्भाधारण एक ऐसा समय होता है जब आप को नियमित आधार पर व्यायाम करना चाहिए न कि शिशु के जन्म का इंतजार करना चाहिए.

व्यायाम गर्भावस्था में होने वाली मां और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों के लिए फायदेमंद है.

गर्भावस्था के दौरान व्यायाम से होने वाले अन्य लाभ ये हैं:

– यह मूड को फै्रश रखता है.

– अच्छी नींद आती है.

– पीठ के निचले हिस्से में होने वाले दर्द को कम करता है.

-शारीरिक परेशानियों को कम करता है.

– औक्सीजन और रक्तसंचारण को सुधारता है.

– शारीरिक रूप से फिट होने के कारण कम समय और कम दर्द में प्रसव होने की संभावनाएं बढ़ाता है.

बहुत सी महिलाएं जानना चाहती हैं कि इस दौरान कौनकौन से व्यायाम करने चाहिए और उन की आवृत्ति और अवधि क्या होनी चाहिए?

जवाब यह है कि व्यायाम शरीर को मजबूती प्रदान करने वाले होने चाहिए. इस के लिए आप तैराकी करें, टहलें और अपने शरीर को स्ट्रैच करें. ये व्यायाम हफ्ते में 3 बार किए जा सकते हैं. होने वाली माएं ध्यान रखें कि उतनी ही देर तक व्यायाम करें जितनी देर तक वे इस में कम्फ र्ट महसूस करें. यह बात बेहद महत्त्वपूर्ण है कि आप अपने शरीर और सुविधा के अनुसार ही व्यायाम करें क्योंकि व्यायाम के दौरान हार्ट रेट सामान्य ही होनी चाहिए. आप इसे इस तरह ले सकती हैं कि व्यायाम के समय आप आराम से किसी से बातचीत कर सकें.

गर्भावस्था के दौरान किए जाने वाले खास व्यायाम निम्नलिखित हैं:

  • स्क्वाट्स

यह पैरों के लिए बहुत अच्छा व्यायाम है.

पैरों को कंधे के बराबर में खोलें. अपनी रीढ़ की दिशा में नाभी को अंदर खीचें और एबडौमिनल्स को टाइट करें. धीरेधीरे अपने शरीर को नीचे की ओर झुकाएं जैसे कि आप कुरसी पर बैठी हों. यदि आप इतनी नीचे जा सकें कि आप के पैर आप के घुटनों की सीध में आ जाएं तो अच्छा होगा. लेकिन ऐसा न हो तो आप जितनी कोशिश कर सकती हैं उतना ही नीचे जाएं. यह सुनिश्चित कर लें कि आप के घुटने आप के पैरों की उंगलियों के पीछे हैं.4 तक गिनती गिनें और फिर धीरेधीरे अपने शरीर को पहले वाली स्थिति में वापस ले आएं.इस प्रक्रिया को 5 बार दोहराएं.

  • केगेल व्यायाम

केगेल व्यायाम मूत्राशय, गर्भाशय और आंत का समर्थन करने वाली मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद करता है. गर्भावस्था के दौरान इन मजबूत मांसपेशियों के सहारे आप आराम से प्रसव पीड़ा को झेल सकती हैं और शिशु को जन्म दे सकती हैं. केगेल करने के लिए आप को ऐसा सोचना पड़ेगा जैसे आप मूत्र के प्रवाह को रोकने का  प्रयास कर रही हों. ऐसा करते वक्त आप पैल्विक फ्लोर की मांसपेशियों को नियंत्रित करेंगी. ऐसा करते वक्त 5 बार गिनती गिनें. इस प्रक्रिया को 10 बार दोहराएं. यह व्यायाम दिन में 3 बार करना चाहिए.

  •  ऐबडौमिनल व्यायाम

इस अभ्यास से पेट की मांसपेशियां मजबूत बनती हैं. जमीन पर पैरों को मोड़ कर बैठें और पीठ एकदम सीधी रखें. अब अपने पेट को अंदर की तरफ लें और उन्हें टाइट रख कर 10 सैकंड तक रखें. लेकिन यह सुनिश्चित कर लें कि ऐसा करते वक्त आप को सांस नहीं रोकनी है. इस के बाद आराम से अपनी प्रारंभिक अवस्था में लौट आएं. इस प्रक्रिया को 10 बार दोहराएं.

  • कैट ऐंड कैमल व्यायाम

यह अभ्यास आप की पीठ और पेट को मजबूत बनाता है.इस अभ्यास को करने के लिए चटाई पर हाथों और घुटनों के बल बैठ जाएं. घुटने आप के कूल्हे की सीध में होने चाहिए और कलाई कंधों की सीध में. साथ ही यह सुनिश्चित कर लें कि पेट लटक न रहा हो.अब अपना सिर झुकाएं और अपने पेट को अंदर की तरफ ले जाएं. अपनी रीढ़ की हड्डी को ऊपर की तरफ निकालें. इस अवस्था में 10 सैकंड तक रहें. लेकिन सांस लेना बंद न करें.

व्यायाम के लिए चेतावनी संकेत

-सीने में दर्द, पेट में दर्द, पैल्विक पेन या लगातार संकुचन.

– भ्रूण की स्थिति में ठहराव आना.

– योनि से तेजी से तरल पदार्थ का स्राव होना.

– अनियमित या तेज दिल की धड़कन.

– हाथपैरों में अचानक सूजन आ जाना.

– चलने या सांस लेने में दिक्कत.

– मांसपेशियों में कमजोरी.

-व्यायाम तब भी हानिकारक है जब आप को गर्भावस्था से संबंधित कोई परेशानी हो.

-प्लेसैंटा का गर्भाशय ग्रीवा के पास होना या गर्भाशय ग्रीवा को पूरी तरह से कवर करना.

– पिछले प्रसव के दौरान आई समस्याएं जैसे प्रीमैच्योर बेबी का जन्म या समय से पहले लेबर पेन उठी हो.

-कमजोर गर्भाशय.

तुम बहुत अच्छी हो: भाग 1- रीवा के बारे में भावेश क्या जान गया था

‘‘औफिस  से लौटते हुए भावेश सीधे मौल की ओर चला गया. उसे अपने लिए एक नई ड्रैस खरीदनी थी. अगले हफ्ते हैड औफिस में एक बड़ा अधिवेशन होने वाला था. वह खरीदारी कर के जैसे ही शौप से मुड़ा सामने से उसे एक खूबसूरत लड़की आते दिखाई दी. छोटी सी स्कर्ट और स्लीवलैस टौप में दुबलीपतली लड़की बहुत खूबसूरत लग रही थी. अचानक उस की नजरें उस पर टिक गईं. उसे वह चेहरा जाना पहचाना सा लगा. जिस से वह चेहरा मेल खा रहा था उस की इस रूप में कल्पना नहीं की जा सकती थी.

भावेश का मन यह मानने के लिए भी तैयार नहीं था. उस ने भी एक गहरी नजर भावेश पर डाली. अनायास उस के मुंह से निकल गया, ‘‘रीवा.’’

उस ने पलट कर देखा. नजरें मिलते ही वह उसे पहचान गई और पलट कर सीधे भावेश के गले लग गई. बोली, ‘‘भावेश तुम? उम्मीद नहीं थी तुम से इस तरह कभी मुलाकात होगी.’’

हड़बड़ा कर भावेश ने इधरउधर देखा. शुक्र था वहां कोई नहीं था. जल्दी से अपने को अलग करते हुए बोला, ‘‘मैं भी तुम्हें पहचान नहीं पाया. मन इस बात को स्वीकार नहीं कर पा रहा था. इसीलिए अनायास तुम्हारा नाम मुंह से निकल गया.’’

‘‘अच्छा ही हुआ. मुझे भी तुम पहचाने से लगे थे. तुम्हारी ओर से कोई परिचय न पा कर मैं ने यह बात अपने दिमाग से झटक दी. कितने बदल गए हो तुम भावेश.’’

‘‘तुम ने कभी अपने ऊपर नजर डाली है. तुम क्या थी और क्या हो गई?’’

‘‘कुछ भी तो नहीं बदला है. बस कपड़े और स्टाइल बदल गया.’’

‘‘इसी से असली पहचान बनती है. मैं ने हमेशा तुम्हें सीधीसादी, कुरतासलवार और चुन्नी मे लिपटी, लंबी चुटिया वाली लड़की के रूप में देखा. मैं सोच भी कैसे सकता था तुम इतनी बदल सकती हो. खैर छोड़ो इस बात को. यहां कैसे आना हुआ?’’

‘‘अकसर खरीदारी करने के लिए यहां चली आती हूं.’’

‘‘चलो सामने कैफे में चल कर कौफी पीते हैं.’’

दोनों खरीदारी भूल कर कैफे में पहुंच गए. दोनों  एकदूसरे को हसरत भरी निगाहों से देख रहे थे .भावेश ज्यादा नहीं बदला था लेकिन रीवा ने सिर से ले कर पैर तक एकदम अपना हुलिया बदल दिया था.

‘‘यहां क्या कर रही हो रीवा, लगता है किसी अच्छी कंपनी में काम मिल गया है.’’

‘‘यही समझ लो. तुम्हारे बारे में पता लग गया था कि तुम एक मल्टीनैशनल कंपनी में काम कर रहे हो.’’

‘‘किस ने बताया?’’

‘‘बहुत दिन पहले तुम्हारे दोस्त रुपेश से मुलाकात हुई थी. उसी ने बताया था. तुम पढ़ने में अच्छे थे. स्वाभाविक था किसी अच्छी जगह नौकरी कर रहे होंगे.’’

‘‘पढ़ने में तुम भी हमेशा अव्वल रही. शायद उसी की बदौलत तुम यहां तक पहुंची हो? घर वालों ने तुम्हें इतनी आसानी से आने दिया?’’

‘‘जहां चाह वहां राह. बस यही सोच कर घर से निकल पड़ी और आज मजे में हूं. घर वाले भी खुश हैं और मैं भी.’’

‘‘घरगृहस्थी बसाई या नहीं?’’

‘‘मैं इतनी जल्दी इन झमेलों में पड़ने वाली नहीं हूं. पहले थोड़ा जिंदगी के मजे ले लूं उस के बाद देखी जाएगी आगे क्या करना है,’’ बात करते हुए काफी देर हो गई थी.

‘‘जिस काम के लिए आई हो वह तो रह गया.’’

‘‘कोई बात नहीं  मैं कल आ कर कर लूंगी. मुझे कोई जल्दबाजी नहीं. तुम अभी तक सिंगल हो या…’’

‘‘अभी सिंगल ही हूं.’’

‘‘अच्छा किया. जल्दी रिश्तों में बंध जाने से जिंदगी के मजे चले जाते हैं,’’ रीवा ठहाका लगाते हुए बोली.

थोड़ी देर बाद दोनों अपनेअपने घर चले आए. भावेश उसे घर छोड़ना चाहता था लेकिन रीवा टाल गई. घर आ कर भावेश के दिमाग पर अभी तक रीवा ही छाई हुई थी. नए रंग रूप में उसे देख कर वह हैरान रह गया था. दोनों एक ही छोटे गांव में पलेबढ़े थे. दोनों ने इंटर तक साथ पढ़ाई की थी. वह क्लास में लड़कियों में पढ़ाई में सब से आगे रहती थी. सीधीसादी रीवा को उस ने हमेशा साधारण पहनावे में देखा था. उस के पिताजी खेती कर घर का गुजारा करते थे और भावेश के पिताजी प्राथमिक विद्यालय में टीचर थे. उसे रीवा हमेशा से अच्छी लगती थी.

रीवा किसी से ज्यादा घुलतीमिलती नहीं थी. उस की सब से अच्छी सहेली प्रीति थी. उसी से वह घुलमिल कर बात करती थी. बाकी किसी को वह कभी नजर उठा कर देखती तक नहीं थी. इंटर करने के बाद वह पढ़ाई के लिए शहर चला आया था. उस के बाद रीवा का क्या हुआ उसे कोई खबर नहीं मिली. शहर की भागदौड़ में उस का गांव से नाता छूट गया. पिताजी रिटायर हो गए थे और वे भी शहर में एक छोटा घर बना कर रहने लगे थे.

मास्टर्स डिगरी पूरी कर के भावेश ने एमबीए कर लिया था और इस बड़े शहर आ कर अच्छीखासी नौकरी कर रहा था. वह अभी 27 साल का था. रीवा भी इतनी ही रही होगी. गांव से संबंध रखने वाली लड़की का अभी तक कुंआरा रहना उस की समझ से परे था. जहां तक वह उस के मांबाबूजी को जानता था वे संकुचित विचारों के समाज की परवाह करने वाले लोग थे. रीवा ने पहले उस से कभी आमनेसामने खड़े हो कर बात भी नहीं की थी और आज वही रीवा मौल में जिस तरह उस से लिपट गई उस की उसे सपने में भी कल्पना नहीं थी.

उस क्षण को याद कर भावेश एक बार फिर रोमांचित हो गया. स्कूल में प्यार प्रदर्शित करने के लिए वह कभी उस से आंखें मिला कर बात भी नहीं कर पाया था और आज इतने सालों बाद रीवा ने खुद आगे बढ़ कर उसे ऐसे गले लगा लिया था मानो कितने सालों के बिछड़े हुए हों. बातों ही बातों में भावेश ने उस का फोन नंबर ले लिया था. घर आ कर उस का वह आकर्षक रूप उस की नींद उड़ा रहा था. उस का जी चाहा तुरंत नंबर मिला कर उस से बात कर ले. तभी अंतर्मन ने उसे ऐसा करने से रोक दिया कि इतने समय बाद मुलाकात होते ही उतावली दिखाने की जरूरत नहीं है.

भावेश ने अपने हाथ रोक लिए. उस के बारे में सोचतेसोचते कब नींद आ गई उसे पता ही नहीं चला. सुबह उठ कर औफिस जाने की तैयारी में व्यस्त हो गया. आज उसे औफिस की ओर सब स्मार्ट लड़कियां रीवा के सामने एकदम फीकी लग रही थीं.

मानवी से भावेश की अच्छी दोस्ती थी लेकिन आज वह उस से बात करने के लिए जरा भी उत्सुक नहीं था. रोज औफिस आते ही पहले उसी के कैबिन में खड़ा हो जाता था.

भावेश का बदला हुआ व्यवहार देख कर मानवी बोली, ‘‘क्या बात है कोई परेशानी है?’’

‘‘ऐसी कोई बात नहीं है. एक काम दिमाग में घूम रहा है उसी की वजह से आज मैं तुम्हें समय नहीं दे पाया,’’ भावेश बात बदल कर बोला.

‘‘ठीक है पहले तुम अपनी समस्या सुलझ लो हम बाद में बात करते हैं,’’ कह कर वह भी अपने काम में व्यस्त हो गई.

भावेश को औफिस में काम के दौरान रीवा ही दिखाई दे रही थी. जब वह अपने पर संयम न रख सका तो लंच टाइम में उस ने रीवा को कौल किया.

‘‘लगता है कल से मेरे ही ख्वाबों में खोए हुए हो,’’ रीवा हंसते हुए बोली.

भावेश को लगा जैसे किसी ने उस की चोरी पकड़ ली. बोला, ‘‘तुम्हें कैसे पता?’’

‘‘एक औरत हूं. मर्दों की आंखों के भाव और दिल के जज्बात पढ़ने बखूबी आते हैं मुझे.’’

‘‘खैर, छोड़ो यह बताओ क्या हम आज शाम को मिल सकते हैं?’’

‘‘आज नहीं भावेश. मुझे जरूरी काम है. कल कोशिश करती हूं.’’

रीवा की बातों से जो चमक भावेश के चेहरे पर आई थी वह यह सुन कर बुझ गई. अपने को संयत कर वह बोला, ‘‘कोई बात नहीं  मैं एक दिन और इंतजार कर लेता हूं.’’

‘‘वह तो करना ही पड़ेगा.’’

‘‘कल इतने सालों बाद तुम्हें देख कर अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हुआ. कितनी बदल गई हो तुम.’’

?‘‘बदलाव तो समय की मांग है. मैं उस का अपवाद नहीं हूं. तुम अपने को देखो तुम भी तो बदल गए.’’

‘‘ठीक कह रही हो. एक मुलाकात समय के बड़े से बड़े अंतराल को भर देती है. लगता ही नहीं हम इतने सालों बाद मिले.’’

‘‘झूठ मत बोलो. लगा तो जरूर होगा. इस से पहले मैं ने तुम से कभी बात भी नहीं की थी.’’

‘‘वह माहौल कुछ और था. अब समय कुछ और चल रहा है. अब तुम भी आत्मनिर्भर हो और मैं भी. ठीक है कल मिलने पर ढेर सारी बातें होंगी,’’ बाय कह कर रीवा ने फोन काट दिया.

भावेश महसूस कर रहा था कि उस की बातें बहुत प्रैक्टिकल थीं. उन में कोई बनावट नहीं दिखाई दे रही थी. कुछ देर तक उस के ख्वाबों में रहने के बाद वह वर्तमान में लौट आया और अपने काम में व्यस्त हो गया. शाम की चाय उस ने मानवी के साथ पी. उस का बदला हुआ व्यवहार वह महसूस कर रही थी लेकिन कुछ कह कर अपने को छोटा नहीं दिखाना चाहती थी.

भावेश को अगले दिन का इंतजार था. मैसेज कर के मिलने की जगह और समय बता दिया था. औफिस से छूटते ही भावेश वहां पहुंच गया. अभी 15 मिनट बाकी थे. उस से समय काटे नहीं कट रहा था. उसे खुद समझ नहीं आ रहा था वह रीवा को देख कर इतना बेचैन क्यों हो गया? इतने सालों से उस ने उस के बारे में सोचा तक नहीं और कल उसे देखते ही मन में दबी भावना मुखर हो गई थी. तभी दूर से उसे रीवा आती दिखाई दी. उस ने आज और भी छोटे कपड़े पहने थे.

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