चीयर गर्ल: भाग 3- फ्रैंड रिक्वैस्ट एक्सैप्ट करने के बाद क्या हुआ उसके साथ

रूही ने विद्रूप मुसकान के साथ कहा, ‘‘देख तू उस का घर तोड़ रही है.’’

मैं संयत स्वर में बोली, ‘‘मैं नहीं उन की शादी की घुटन इस के लिए जिम्मेदार है, मेरा और उस का रिश्ता शीशे की तरह साफ है. रूही अगर वह बाहर भी सैक्स कर के आएगा तो मुझे पता होगा और न मैं इस बात पर कोई बवाल करूंगी… जब तक हम एक साथ होते हैं बिना किसी तीसरे की परछाईं के.’’

‘‘मैं और वह इस बंधन में एकदम आजाद हैं और यही इस रिश्ते की खूबसूरती है.’’

रूही बोली, ‘‘तो शादी कर ले, बंदा देखनेभालने में बुरा नहीं है.’’

मैं बोली, ‘‘शादी के बाद मैं उस की जागीर बन जाऊंगी. मैं उस के साथ ऐसे ही खुश हूं.’’

रूही को कुछ समझ नहीं आ रहा था, इसलिए उठते हुए बोली, ‘‘तुम्हें पता है समाज में तुम जैसी औरतों को क्या बोलते हैं?’’

मैं ने कहा, ‘‘रूही तुम्हारे समाज में ऐसे आदमियों को क्या बोलते हैं जो शादीशुदा होने के बाद भी मेरे जैसी औरतों में खुशी की तलाश करते हैं?’’

और फिर मैं ने संयत स्वर में कहा, ‘‘रूही मेरी जैसी औरतों को समाज में चीयर गर्ल बोलते हैं, जो समाज की सोच से डरे और थके हुए मर्दों को चीयर करती हैं.’’

वह बारबार मुझे फोन मिला रहा था. इन लमहों को वह किसी के साथ

भी नहीं बांटना चाहता था और रूही का फोन पिछले 2 घंटों में साइलैंट था.

अब जब बच्चें स्कूल जाते तो वह माह में 1 बार घर भी आने लगा था पर हम दोनों न किसी से कुछ पूछते या कहते थे. कभीकभी अगर मैं कुछ कहना चाहती, उस से पहले ही वह टोक देता, ‘‘इस के लिए एक बीवी ही काफी है मेरी जिंदगी में उस की जगह लेने की कोशिश मत करो.’’

जब कभी उसे कोई समस्या होती या वह किसी बात के कारण उदास महसूस करता, मैं अपने घर के काम को छोड़ कर घंटों उस से बात करती, उसे यह जताती कि वह मेरे लिए कितना खास है. उस के मनोबल को बढ़ाती और फिर वह चंद रोज के लिए गायब हो जाता पर अब मुझे भी कुछ फर्क नहीं पड़ता था क्योंकि मेरी यह भूमिका मेरी अपनी खुशी से है, मैं उस पर कोई एहसान नहीं कर रही हूं जिस तरह से वह जो भी मेरे लिए करता है वह उस की खुशी है.

ऐसा ही एक रोज बातचीत के दौरान मैं उस से बोली, ‘‘क्या मैं ने तुम्हारी बीवी की जगह लेने की कभी कोशिश करी है, जो तुम हर समय मुझे सुनाते रहते हो?’’

वह बोला, ‘‘सोचना भी मत, हम सिर्फ दोस्त हैं, मैं अपने परिवार से बहुत प्यार करता हूं.’’

दोस्ती का शब्द सुन कर मुझे हंसी आ गई क्योंकि यह रिश्ता दोस्ती से कहीं आगे था.

एक रोज ऐसे ही बात करते हुए वह बोला, ‘‘तुम नहीं जानती, मेरी जिंदगी में तुम कितनी मूल्यवान हो तुम्हें मैं किसी के साथ बांटने की सोच भी नहीं सकता.मैं तुम्हें कैसा लगता हूं?’’ उस ने कहा.

मैं ने हुलसते हुए कहा, ‘‘मेरे दिल में बस तुम्हीं हो, मैं आप के सिवा किसी और के बारे में सोच भी नहीं सकती. मैं बस अब पूरी जिंदगी आप की बन कर रहना चाहती हूं.’’

वह अभिमान के साथ बोला, ‘‘बांटना सीखो, तुम्हारी यही बात मुझे नापसंद है.’’

मैं ने भी शरारत के साथ कहा, ‘‘जनाब मेरी जैसी महिला मित्र की बहुत डिमांड है सफल शादीशुदा पुरुषों की दुनिया में.’’

यह बात सुन कर वह चुप हो गया.

वह महीने में 1 बार जरूर ऐसी ही परीक्षा लेता था, जिस में मैं हमेशा उसे बातों में घुमा देती थी. उसे बस मेरा शरीर चाहिए था, अपनी प्रशंसा चाहिए थी. इस में मेरा भी फायदा था, एक अकेली औरत हर किसी पर विश्वास नहीं कर सकती थी. वह चाहे थोड़ा अभिमानी था पर भरोसेमंद है.

इस रिश्ते में सबकुछ वह तय करता हैं पर मैं भी अपने हिसाब से उस का उपभोग कर रही हूं. हम दोनों चाह कर भी इस से बाहर नहीं आ पा रहे हैं या यों कहें आना नहीं चाहते हैं.

एक रोज उस का मैसेज आया कि वह काम से आ रहा है और मुझ से मिल कर जाएगा.

मैं पार्लर गई, सबकुछ कराया ताकि उस को आकर्षित कर पाऊं, वैसे भी इस बार वह पूरे 4 माह के पश्चात आ रहा था. मैं हर वह चीज करती हूं जिस से इस रिश्ते में हमेशा ताजगी बनी रहे.

सुबह से मैं प्रतीक्षा कर रही थी. उस का फोन आया कि  वह कुछ देर बाद मीटिंग के पश्चात निकलेगा. मैं ने औरेंज और बैगनी रंग का सूट पहना और तैयार हो गई. तभी उस का मैसेज आया, उसे मीटिंग में देर हो जाएगी.

मैं ने मैसेज किया, ‘‘कोई बात नहीं मिले बिना मत जाना.’’

फिर मैसेज आया, ‘‘शायद न आ पाऊं.’’

सुबह से शाम हो गई थी. मैं फट पड़ी और फोन करने लगी. वह काटता रहा फिर मैसेज आया ‘ड्राइविंग.’ रात मैं मैसेज आया, ‘‘बात करना चाहती हो तो कर लो.’’

बिना कुछ सोचे नंबर मिलाया, उधर से तलख आवाज कानों से टकराई, ‘‘क्यों परेशान कर रही हो. अगर मिल सकता तो मिल कर ही जाता था. क्या कोई और काम नहीं है मुझे? तुम मेरी प्राथमिकता नहीं हो.’’

पिघला सीसा मेरे कानों से टकराया, ‘‘तुम्हें पहले ही बताया था न मैं ने मेरी बीवी की जगह लेने की कोशिश मत करो.’’

मैं ने भी पलट कर जवाब दिया, ‘‘बीवी की जगह न लूं पर फिर बीवी वाले काम किस हक से तुम मेरे साथ करते हो? खराब शादी में फिर भी कुछ हक था पर यहां तो कुछ भी नहीं सिवा अनिश्चितता के. हां अगर दोस्त हैं तो फिर क्यों मेरी भावनाएं कोई माने नहीं रखतीं.’’

उस ने कुछ नहीं कहा और एक सन्नाटा खिंचा रहा बहुत देर तक.

उस घटना को 3 दिन गुजर गए, मैं बुरी तरह से आहत थी. चौथे दिन उस का मैसेज

आया, ‘‘जानम मेरा मूड औफ था, तुम नहीं समझोगी तो कौन समझेगा?’’

मैं फिर से 7वें आसमान पर थी कि मैं उस के लिए खास हूं. पर उस घटना के पश्चात वह बोलने से पहले सोचता जरूर है और अब उस की बीवी भी हमारे बीच में कभी नहीं आती.

फिर एक रोज प्रेमक्रीड़ा के दौरान उस ने पूछा, ‘‘तुम्हें पता है तुम मेरी जिंदगी में क्या हो?’’

मैं ने कहा, ‘‘हां मैं तुम्हारी जिंदगी की चीयर गर्ल हूं, जो तुम्हारे जीवन को विविध रंग से भरती हूं ताकि तुम जिंदगी की एकरसता से बोर न हो जाओ.’’

‘‘मैं चीयर गर्ल हूं तुम्हारा मनोबल बढ़ाने के लिए, चाहे इस में मेरा खुद का व्यक्तित्व ही क्यों लहूलुहान न हो जाए. वह चीयर गर्ल जिसे भावनायों को दूर रहना हैं, वो चीयर गर्ल जिसे बस तुम्हारी जिंदगी की बाहरी रेखा में रह कर ही तुम को चीयर करना है.’’

यह कहने की ताकत पता नहीं कहां से मुझ में आ गई. फिर एक शांति छा गई बाहर भी और भीतर भी. मुझे लगा अब शायद उस का अहम घायल हो गया है और वह कभी लौट कर नहीं आएगा. पर 2 दिन की खामोशी के बाद उस का मैसेज आया, ‘‘जानम तुम्हारा गुस्सा स्वाभाविक है पर तुम्हें नहीं पता मैं तुम को कितना मिस कर रहा हूं. हम तो इतने अच्छे दोस्त हैं, फिर यह सब क्यों कर रही हो?’’

उस की आदत या यों कहें लत पड़ गई थी कि मैं अपनेआप को रोक नहीं पा रही थी. मोबाइल हाथ में उठाया और फिर न जाने क्या सोच कर उस का नंबर मिला दिया.

उधर से उस की आवाज आई, ‘‘सुनो तुम जो भी हो और जिस भी भूमिका में मेरी जिंदगी में रहना चाहती हो, मुझे मंजूर है, मैं तुम्हें खोना नहीं चाहता हूं, तुम वास्तव में मेरी चीयर गर्ल हो.’’

और फिर से हमारी कभी न खत्म होने वाली बातें शुरू हो गई थीं, अब वह मुझे ले कर पहले से ज्यादा संजीदा और भावुक हो गया है और मैं उसी की तरह पहले से ज्यादा खिलंदड़ हो गई हूं.

वापसी एक प्यार की- भाग 3

वह बोलती जा रही थी और वंदना को दुखभरी कहानी कहीं कचोट रही थी कि क्या पता उसे भी ऐसा कुछ देखना पड़े… परिवार की अपेक्षाएं तो नहीं बदलतीं… नहीं, वह ऐसी स्थिति कभी आने ही नहीं देगी…

‘‘अब तो छोटीछोटी बातों को ले कर हमारे बीच झगड़े होने लगे. मेरी जिद थी या तो हम दोनों अलग हो जाएं या फिर परिवार को छोड़ कर अलग किराए का घर ले कर रहें. पर हुआ वह जो नहीं होना चाहिए था. मेरी स्वार्थी सोच ने हमें कानून की ड्योढ़ी पर पहुंचा दिया.’’

वंदना ने देखा, देवकी की आंखें नम हो गई थीं. वह चुप थी. गला भर आया था… जानती है भविष्य के लिए देखे सुंदर सपने जब कांच की तरह टूटते हैं तो कैसा लगता है…

‘‘क्या तुम देव से प्यार करती हो? उसे अपनाना चाहती हो? सोच लो नया

जीवन, चुनौतियों से भरा है.’’

‘‘जानती हूं. मैं उस से प्यार करती हूं… उसे अपनाना चाहती हूं,’’ वंदना के स्वर में स्वीकारोक्ति थी.

‘‘तो एक बात कहूंगी.’’

‘‘कहो,’’ वंदना ने देवकी की तरफ देखा.

‘‘मेरी मां कहती थीं ससुराल के सभी रिश्ते बाहर से बने रिश्ते होते हैं. इन्हें ओढ़ने के बाद इन्हें अपनाने के लिए न जाने कितने समझौते करने पड़ते हैं. यहां हर सदस्य को जोड़ने के लिए बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, इस बात को गांठ बांध लो,’’ देवीकी ने दृढ़ता से कहा, ‘‘तुम एक समझदार और साहसी स्त्री हो. देव के साथ जीवन शुरू करने का सूत्र तुम्हें दे दिया है. निर्णय तुम्हें ही लेना है. वैसे देव बहुत संजीदा व्यक्ति है…’’

देवकी ने जो कुछ कहा था वह सुझाव के साथ सुलझा हुआ न्याय पक्ष था एक स्त्री का एक स्त्री के लिए.

वंदना जा चुकी थी, किंतु देवकी इस मुलाकात के बाद अपने को अस्थिर महसूस कर रही थी.

देवकी का घर जाने का मन नहीं कर रहा था. वह वहीं काफी देर तक बैठी रही. आज उसे देव बारबार याद आ रहा था. तथी अचानक सामने टेबल पर नजर पड़ी. वंदना अपना मोबाइल भूल गई थी.

जानती थी थोड़ी देर में उस का फोन जरूर आएगा. इसीलिए बैठी रही… कहीं आसपास ही होगी. शायद लेने आ जाए.

वह थोड़ी देर पहले हुई मुलाकात के बारे में सोच रही थी…

देव वंदना से कुछ दिन बाद जुड़ने वाला है. फोन कर के बता तो सकता था. इसी बहाने पूछ लेती कैसे हो? शादी करने जा रहे हो, बधाई हो.

अम्मां (देवकी की मां) को पता लगेगा तो जरूर कहेंगी कि अरे, कहां से मराठी पकड़ लाया है रे… इस से तो हमारी देवकी क्या बुरी थी? बेशक थोड़ी गुस्सैल है तो क्या हुआ? इतने झंझटों में तो मैं भी उबल पड़ती हूं… मैं भी तो तेरे पापा से झगड़ पड़ती हूं. तब तो कोई कुछ नहीं कहता. देखा नहीं घर के कामों में कितनी ऐक्सपर्ट है हमारी देवकी. मीना और लक्ष्मी प्रेमा तो उसे जरूर याद करती होंगी…

भाभी हमेशा हमारा होमवर्क कराती थीं. अम्मां प्यार में कह देती थीं कि अरी लड़कियो अब छोड़ो… सारा दिमाग खा कर दम लेंगी?

परीक्षा के समय भाभी पूरीपूरी रात चाय बना कर देती थीं. खुद भी जागती थीं हमें पढ़ाने के लिए, ये सब जरूर याद करती होंगी. बताओ भला ऐसा कोई करेगा? कहना न भूलती होंगी जो भी हो भाभी जैसा कोई नहीं. हंसतीखिलखिलाती लड़कियों के चेहरे आज भी नहीं भूली है देवकी. आज भी तीनों के लिए कितना प्यार उमड़ता है… यह बात वंदना को बताना बेकार है. वह क्या समझेगी?

इन सब से इतर घर, मायके, पड़ोस के लोगों को जब पता लगा देवकी का तलाक हो गया है, तो कइयों ने कहा 3-3 लड़कियों का बोझ… बाप रे… आसान नहीं है ऐसी ससुराल में निभाना… घबरा गई होगी… तभी तो छोड़ कर आ गई.

कइयों ने तो यह भी कहा था कि आजकल की लड़कियों को तो छोटी फैमिली चाहिए. बहुत कुछ सुना था देवकी ने. तंजों से आजिज आ गई थी वह… समझ नहीं आता था कि क्या करे, कहां जाए.

बस एक मां थीं, जिन के आंसू नहीं रुकते थे, ‘‘बेटी, रिश्ते हमेशा समझौतों की नींव पर टिकते हैं. चाहे आज हो या कल यह बात एकदम अटल है, सत्य है… वापस चली जा.’’

आज भी सब याद आता है तो कई बार मन डूबने लगता है. यही सोच सूत्र तो

वंदना को पकड़ाया है- खुश रहना है, अपने को वहां जमाना है, तो रिश्ते की मजबूती जरूरी है यानी तुम्हें झुकना पडे़गा. मगर यह बात है तो मैं क्यों न झुकी?

आज वंदना को समझा रही हूं तो खुद भी तो झुक सकती थी. सीधी सी बात, छोटी सी बात मुझे क्यों न समझ आई? मैं यहीं चूक गई.

भारी मन से घर आ गई थी, परंतु सोच ने पीछा न छोड़ा. सच यह है कि अब वंदना से मिल कर उसे पछतावा हो रहा था.

कितनी बेवकूफ थी मैं. आज मेरे पास कुछ भी नहीं है… न मन में कोई उत्साह है, न उमंग है, न कोई अपना कहने वाला है. अपना आत्मीय भी कोई नहीं है. उधर कुछ समय बाद वंदना के पास सबकुछ होगा, जो कभी उस का था. देव भी, वह घर भी. शायद लोग इसे ही सौतिया डाह कहते हैं. …तो वह क्या करे? क्या वापस उस घर में जा सकती है? मन ने फौरन कहा कि यह भी कोई पूछने वाली बात है? अरे, एक फोन ही तो करना है देव को.

याद है तलाक का निर्णय सुनने के बाद देव ने उसे रोक कर कहा था कि देवकी तलाक का निर्णय तुम्हारा है, मेरा नहीं. मेरे घर के दरवाजे हमेशा तुम्हारे लिए खुले हैं… जब चाहो, लौट आना…

तो क्या वह देव के पास लौट जाए?

दूसरे दिन सुबह देवकी देर से उठी. सुबह क्या दोपहर हो गई थी. बड़ी देर तक अलसाई सी बिस्तर पर पड़ी सोचती रही… तो देव के साथ मेरी जगह कोई और होगा? नहीं, वह आज भी देव से उतना ही प्यार करती है जितना पहले करती थी, बल्कि उस से भी ज्यादा. देव भी मुझे खासा मिस करता होगा… वंदना से जुड़ना उस के अकेलेपन को खत्म करने का बेमानी सच है, जिसे सिर्फ देव जानता है, यह मुझे पता है.

2 दिन बीत गए वंदना का फोन नहीं आया, तो देवकी ने खुद फोन किया, ‘‘वंदना, तुम्हारा फोन मेरे पास रह गया है. आ कर ले जाओ.’’

‘‘पता है… मेरे पास एक और फोन है, उस से काम चल रहा है. आज शाम को आती हूं… मैं सोच भी रही थी कि आप से मिलूं… ठीक है, शाम को 6 बजे मैक्डोनल मिलते हैं.’’

देवकी ने महसूस किया वंदना के स्वर में अतिरिक्त उल्लास था…

फोन करने के बाद देवकी हिम्मत बटोर रही थी कि कैसे बताऊंगी सब… सुन कर उस का क्या रिएक्शन होगा? छोड़ो सब देखा जाएगा… अभी से क्या सोचना… बस निर्णय पर अटल है वह.

शाम को देवकी मैक्डोनल में बैठी थी. तभी वंदना ने प्रवेश किया. उस का खिला चेहरा बता रहा था कि वह खुश है.

‘‘हैलो वंदना,’’ देवकी मुसकराई

‘‘हैलो… कुछ मंगाएं?’’ शायद इस मुलाकात को वंदना सैलिब्रेट करना चाहती थी, पर देवकी ने न कह दी. फिर पर्स से फोन निकाल कर वंदना की ओर बढ़ाया.

‘‘थैंक्स,’’ कह कर वंदना आगे बोलने ही वाली थी कि देवकी बीच में बोल उठी, ‘‘वंदना फोन देने के बहाने से मैं ने तुम्हें यहां बुलाया है, मगर मुझे कुछ और भी बताना था.’’

‘‘क्या?’’

‘‘मैं ने देव के पास वापस जाने का निश्चय कर लिया है…’’

वंदना जैसे सोते से जागी. देवकी की आंखें उस के चेहरे पर गड़ी थीं. कभीकभी शब्द भी कितने लाचार और निरीह लगते हैं, देवकी सोच रही थी. मगर कहना तो था ही. यों भी किसी को अंधेरे में रखना उस के लिए नामुमकिन है. दुनिया में दुख बांटने वाले बहुत हैं पर आपस में सुख बांटने वाले कम होते हैं. सच स्वीकार कर किसी के आगे कह देना दीर्घकाल में सुखदाई होता है.

मन की बात कहने के बाद वंदना का चेहरा देखा. अथक पीड़ा थी वहां… रुके आंसू

अब गिरे कि अब… देवकी वंदना को देख नहीं पा रही थी. मुंह घुमा लिया.

वंदना… वह तो सन्न थी. लगा जैसे किसी ने उस के हाथों से अमृत कलश छीन लिया. एक बार? दो बार? यह तो तीसरी बार भी… और कितनी बार… इस बार तो उस ने पूरी सावधानी बरती थी. फिर भी…

हाथ में फोन पकड़े मैक्डोनल से बाहर आ गई. आंखें आसमान की तरफ उठी थीं. वहां तो ढेरों बादल थे. शायद आंधी आने वाली थी. पूरे आसमान में सिर्फ एक ही परीक्षा वह भी तेज हवा के झोंकों से अपनेआप को बचाने का असफल प्रयास कर रहा था… लगा जैसे खुद वंदना है… विवश हो छटपटा रही थी.

एक हफ्ते बाद देवकी को एक ईमेल मिला-

‘देवकी, वापसी मुबारक. तुम ने सही निर्णय लिया. तुम से मिलने के बाद मैं बहुत संवेदनशील और भावुक हो गई थी, लेकिन जल्द ही मुझे विश्वास हो गया कि देव और तुम एकदूसरे से बहुत मुहब्बत करते हैं, जबकि मेरा प्यार उस के पासंग में भी नहीं था.

‘सच कहूं, देव ने मुझे कभी प्यार किया ही नहीं, वह मुझ से हमदर्दी रखता था, जिसे मैं ने अब महसूस किया है. सच में वह तुम्हें छोड़ कर किसी से भी प्यार नहीं कर पाएगा.

‘मैं खुश हूं कि तुम दोनों को अपना प्यार वापस मिल गया… मैं तुम दोनों को इस जीवन में कभी खोना नहीं चाहती… तुम ने मुझे भविष्य के लिए जो टिप्स दिए हैं वैसे तो कभी मेरी मां ने भी नहीं दिए. उत्तर जरूर देना.

-वंदना.’

पढ़ कर देवकी मुसकरा दी और फिर उसी वक्त उत्तर दे दिया:

‘वंदना,

‘घर वापसी का क्रैडिट तुम्हें देती हूं. इस वक्त मैं देव के घर पर हूं. देव मेरे हाथ की बनी चाय पी रहा है.

‘कबूल… कबूल. दोस्ती हजार बार कबूल हम जल्दी मिलेंगे.

‘तुम्हारे दोस्त

‘देवकी व देव.’

नेटफ्लिक्स ने ठुकरायी ‘‘मैक्सिमम सिटी” : अनुराग कश्यप बौलीवुड को अलविदा कह केरला में बनेंगें शिक्षक ??

इन दिनों बौलीवुड में विचारधारा का संघर्ष अपने चरमोत्कर्ष पर है.अनुराग कश्यप और अमरीका के ‘वाशिंगटन पोस्ट’ में छपे लेख पर यकीन किया जाए तो इन दिनों केंद्र सरकार ‘नेटफ्लिक्स’ और ‘अमेजाॅन प्राइम’ जैसे ओटीटी प्लेटफार्म और फिल्मकारों पर परोक्ष या अपरोक्ष दबाव बनाकर उनके काम में दखलंदाजी करते हुए उन्हे सरकारी विचारधारा के अनुरूप ही वेब सीरीज या फिल्में स्ट्रीम करने के लिए मजबूर कर रही हैं.‘वाशिंगटन पोस्ट’ के अनुसार अब ओटीटी प्लेटफार्म ने कुछ एडवोकेट को नौकरी दे रखी है,जो कि फिल्मकारों द्वारा दी गयी स्क्रिप्ट पढ़कर आवश्यक संशोधन करने की सलाह देते हैं,जिससे भारत सरकार नाराज न हो.‘वाशिंगटन पोस्ट’ ने सरकार को कटघरे में खड़ा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी. इस लेख में अनुराग कश्यप का विशेष रूप से उल्लेख है.बौलीवुड में चर्चाएं गर्म हैं कि इस लेख को अनुराग कश्यप ने ही लिखवाया है.

वास्तव में अनुराग कश्यप ओटीटी प्लेटफार्म ‘नेटफ्लिक्स’ के लिए सुकेतु मेहता की ‘मैक्सिमम सिटी‘ के रूपांतरण पर काम कर रहे थे,जिसके लिए 2020 में नेटफ्लिक्स से अनुराग कश्यप को अनुमति मिली हुई थी.अनुराग कश्यप ने इस पर काम करते हुए लंबी चैड़ी रकम लगाकर इसे बनाया.पर अचानक 2021 में देष के राजनीतिक माहौल के दबाव में नेटफ्लिक्स ने इस वेब सीरीज को स्ट्ीम करने से हाथ खड़ा कर दिए.यानी कि नेटफ्लिक्स ने इसे डिब्बे में बंद कर दिया.इससे अनुराग कश्यप को जबरदस्त आर्थिक नुकसान हुआ और वह डिप्रेषन में चले गए.अनुराग कश्यप ने एक इंटरव्यू में दावा किया कि नेटफ्लिक्स के इस कदम से  उन पर बहुत बुरा असर पड़ा. इसी वजह से वह अवसाद में चले गये, अत्यधिक शराब पीने लगे और उस समय उन्हें दो दिल के दौरे भी पड़े.अभी भी वह डिप्रेशन से पूरी तरह उबरे नही है. अनुराग कश्यप के इस इंटरव्यू के बाद ही ‘वाशिंगटन पोस्ट’ में लेख छपा.इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि इस लेख के पीछे अनुराग कश्यप हैं.अनुराग ने यह भी कहा कि नेटफ्लिक्स के ‘मैक्सिमम सिटी‘ से बाहर निकलने में वैध तर्क का अभाव है. उन्हें लगा कि या तो उनके द्वारा बनाया गया कंटेंट संवेदनशील था या फिर वह ओटीटी प्लेटफॉर्म के लिए एक संवेदनशील व्यक्ति बन गए थे.

वैसे उसके बाद अनुराग कश्यप ने 2021 के बाद राहुल भट्ट और सनी लियोन को लेकर थ्रिलर फिल्म ‘कैनेडी‘ का निर्देशन किया,जो कि जी 5 पर स्ट्रीम हो रही है. तो वहीं वह नवाजुद्दीन सिद्दीकी के साथ ‘हड्डी‘ में नजर आए थे,यह भी  ‘जी5’ पर स्ट्रीमिंग हो रही है.ऐसे में अचानक दो साल बाद गड़े मुर्दे को उखाड़ने के पीछे अनुराग कश्यप का क्या मकसद है,वही जाने. पर अब वह हमेशा के लिए बौलीवुड को अलविदा करने की बात भी कर रहे हैं.सूत्रों का दावा है कि अनुराग कश्यप जल्द ही शिक्षक के रूप में आ सकते हैं.उन्हे केरला के एक कालेज में पढ़ाने का काम मिला है.

मगर हम अनुराग कश्यप को जितना नजदीक जानते हैं,उससे यह नही लगता कि अनुराग कश्यप खुद को बौलीवुड से दूर रख पाएंगे.

चीयर गर्ल: भाग 2- फ्रैंड रिक्वैस्ट एक्सैप्ट करने के बाद क्या हुआ उसके साथ

न जाने क्यों बहुत दिनों बाद यह प्यार की फुहार हो रही थी. क्या यह गलत हैं मन ही मन में मना कर रही थी पर शरीर की भी एक भूख होती है, यह मैं ने उसी दिन जाना और न चाहते हुए भी मेरे शरीर ने उस का साथ दिया और बहुत महीनों बाद या यों कहें वर्षों बाद शरीर रुई की तरह हलका महसूस हो रहा था.

फिर अपने मन की करने के बाद वह बहुत प्यार से बोला, ‘‘बेबी हम फोन पर रोज बात तो करते हैं, इसलिए मैं अपना समय बातों में बरबाद नहीं करना चाहता हूं.’’

मुझे थोड़ा सा बुरा लग रहा था पर फिर भी मैं सुन रही थी. जाने से पहले उस ने मेरे माथे पर चुंबन अंकित किया, ‘‘तुम मेरे लिए बहुत खास हो.’’

यह सुन कर फिर से मैं लट्टू हो गई कि मैं किसी के लिए खास हूं.

उस ने घर जाने के बाद मुझ से मेरे अनुभव के बारे में पूछा, मैं ने भी मन ही मन में सोचा क्यों न मैं भी उस की चीयर गर्ल बन जाऊं, मैं ने हंसते हुए कहा, ‘‘रुई जैसा हलका अनुभव कर रही हूं वर्षों बाद.’’

उस ने बच्चों की तरह उत्साहित होते हुए कहा, ‘‘सच में बेबी’’ और फिर फोन पर ही किस की आवाज आई और फोन रख दिया.

रोज मेरा मन उस से बात करने के लिए बेताब होने लगा. मैं रोज मैसेज कर के पूछती. कभीकभी मैसेज पढ़ता ही नहीं था और कभीकभी पढ़ कर भी इग्नोर कर देता. कभीकभी मैसेज करता ‘जरूर जानम’. वह मैसेज पढ़ने के बाद वह पूरा दिन या रात मेरे लिए खास हो जाती, मैं पागलों की तरह खुश हो जाती. वह अपनी सहूलियत के मुताबिक बातें करता, कभी बातें जीवनसाथी से संबंधित होतीं तो कभी जीवनदर्शन से संबंधित और कभीकभी वे बहुत ही बेलगाम होतीं शायद उन बेलगाम बातों को हम अश्लील की पराकाष्ठा में डाल सकते हैं.

इस बीच 2 बार और हम मिले, दोनों बार ही वही कहानी दोहराई गई. मैं न चाहते हुए

भी वह सब करती रही जो उसे अच्छा लगा था. कभीकभी थोड़ा अजीब सा लगता पर क्या करती वह मेरी जरूरत बन गया था.

अब उस ने शायद यह बात समझ ली थी. इसी बीच मेरी बिखरी हुई शादी और बिखर गई और मैं पति से अलग हो गई. इस घटना के पश्चात वह अधिक सतर्क और चौकन्ना हो गया. अब वह थोड़ा सा फासला बना कर रखना चाहता था और मैं भी उस से सहमत थी. हम एक नई तरह की डोर में बंधने जा रहे थे जो कांच की तरह पारदर्शी थी.

4 दिन से फोन पर बात नहीं हुई थी. मैं बहुत अधिक बेचैन महसूस कर रही थी. न चाहते हुए भी मैं ने फोन मिलाया. उधर से किसी ने नहीं उठाया. मैं ने फिर मिलाया उधर से काट दिया गया. न जाने क्या हुआ मुझे मैं ने फिर मिलाया.

उस ने फोन उठाया और चिड़े हुए स्वर में बोला, ‘‘समझ नहीं आता तुम्हें, मैं घर में व्यस्त हूं बच्चों के साथ. जब फ्री रहूंगा खुद कर लूंगा.’’

मेरी कोई बात सुनने से पहले फोन कट गया. मेरी आंखें फिर गीली थीं, पर मुझे इस रिश्ते के नए समीकरणों की आदत अब डालनी थी.

वह सबकुछ जान कर भी मुझे कठपुतली की तरह नचा रहा था और मैं भी उस के लिए एक लत की तरह होती जा रही थी. शादीरूपी कुएं से फिसल कर शायद मैं खाई में गिर रही थी. पर इस खाई की गहराई नहीं जान पा रही थी.

अब मैं ने एक निर्णय ले लिया था. निर्णय था जिंदगी को अपनी शर्तों पर जीने का. हां मैं उस की महिला मित्र हूं तो क्या हुआ, क्यों नहीं मैं इन भावनाओं के ज्वार में न बह कर, इस रिश्ते को एक सिंबायोसिस के रूप में परिवर्तित कर दूं, जिस में दोनों का ही फायदा हो.

2 दिन पश्चात उस का फोन आया. मैं ने पहले की तरह लपक कर फोन नहीं उठाया. कुछ देर घंटी बजने के बाद उठाया.

वह बोला, ‘‘माफ  करना जानम, मेरा मूड खराब था और तुम नहीं समझोगी तो कौन समझेगा.’’

मैं सबकुछ जानते हुए भी न चाहते हुए पिघल गई. वह बता रहा था कैसे उस की औफिस

की सहकर्मी उसे अपने जाल में फंसाने के लिए तत्पर है.

मैं थोड़ी सी असुरक्षा के साथ बोली, ‘‘मुझे अच्छा नहीं लगता तुम किसी और की तरफ देखो.’’

वह मुसकरा कर बोला, ‘‘ऐसा क्यों?’’

मैं बोली, ‘‘पता नहीं.’’

उस ने अभिमान के साथ कहा, ‘‘मैडम, मैं एक शिकारी हूं, मैं एक शिकार से संतुष्ट नहीं हो सकता हूं.’’

यह अब एक आम बात हो गई थी. शायद वह संकेतों से मुझे समझा रहा था कि उसे बस मेरी एक दोस्त की तरह जरूरत है, मैं उस के पौरुष के अहम की संतुष्टि के लिए हूं क्योंकि उस का पौरुष उसे कभी यह स्वीकार नहीं करने देगा कि मैं भी उस के लिए जरूरी हूं. पर अब इस जिंदगीरूपी खेल में मुझे चीयर गर्ल की भूमिका निभाने में मजा आने लगा था.

और अब मैं ने भी अपना थोड़ा अंदाज बदल लिया था. मैं भी उसे उन पुरुषों के बारे में बताने लगी जो मुझ में दिलचस्पी लेते थे. उस की आंखों में असुरक्षा देख कर मुझे बड़ा आनंद आता था.

अब मैं इतनी मजबूर भी नहीं थी कि उस का एक दिन फोन न आना, उस का एक मैसेज मेरा दिन के अच्छे या बुरे होने का निर्णय करता था.

एक रोज ऐसे ही बात करतेकरते वह मेरी सहेलियों की बात करने लगा. फेसबुक के कारण मेरा पूरा जीवन उस के लिए खुली किताब की तरह था. उस ने एक बहुत बेशर्मी भरा प्रस्ताव रखा और मैं फिर भी सुनती रही, जिस में वह मुझे अपनी खास सहेली के साथ उस के दोस्त के घर आने को कह रहा था.

अचानक मुझे भी गुस्सा आ गया, ‘‘पैसा लगता है सैक्स के लिए फ्री में सब नहीं होता.’’

वह ठहाके लगाते हुए बोला, ‘‘जानम तुम तो मेरी हो, तुम्हारी तो बहुत खूबसूरत सहेलियां भी हैं कुछ मेरे दोस्तों का भी भला हो जाएगा.’’

मैं ने भी नहले पर दहला मारा और कहा, ‘‘तुम से मैं अब बोर हो गई हूं, वैसे भी जैसे तुम शिकारी हो, मैं भी अब शिकारी बन गई हूं.’’

यह सुनते ही उस का चेहरा फक पड़ गया पर फिर भी बोला, ‘‘हांहां क्यों नहीं.’’

मगर उस दिन के बाद से उस के दोस्तों और मेरी सहेलियों की बातें हमारी जिंदगी में हमेशा के लिए गायब हो गईं.

आप सोच रहे होंगे मैं एक मूर्ख महिला हूं, शायद आप सही सोच रहे हैं समाज के नजरिए से. पर मैं अपने आत्मस्वाभिमान से समझौता करे बिना वह सबकुछ कर रही हूं जिस से मुझे खुशी महसूस होती है. उस से बात करना मेरी जरूरत बन गया था पर अब धीरेधीरे मैं भी उस की जरूरत बन गई हूं.

अब कभीकभी हम एकसाथ इधरउधर भी चले जाते हैं. पर यह तय है कि इन मुलाकातों का असर हमारे परिवार पर नहीं होगा. जब भी हम कहीं बार जाते हम एकदूसरे में खोए रहते, रातदिन बैठ कर बस वही बातें करते जिन्हें हम सामाजिक दायरों के कारण किसी से नहीं कर पाते.

मेरा बस यह कहना मैं उस की हूं उसे पागल करने के लिए काफी था. जब कभी वह जिंदगी की चाकरी से ऊब कर मेरे पास आता तो मैं चीयर गर्ल की भूमिका बखूबी निभा कर उसे उल्लसित कर देती और फिर उत्साह से परिपूर्ण हो कर मेरे लिए वह सबकुछ करता जिस की उपेक्षा एक महिला को पुरुष से होती है.

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ऐसे ही एक बार हम दोनों 2 दिन के लिए महाबलेश्वर गये और वहीं पर मुझे रूही

मिली. रूही और मैं कालेज की सहेलियां थीं. कभी हम एक जिस्म और जान थे, पर शादी के बाद धीरेधीरे हम दूर हो गए.

मुझे देखते ही वह आंखें गोलगोल घुमाते हुए बोली, ‘‘तेरी त्वचा से तो उम्र का पता ही

नहीं लगता.’’

फिर एकाएक उस को देख कर अचकचा गई और बोली, ‘‘आप का परिचय.’’

मैं ने कहा, ‘‘ये हैं मेरे बहुत ही करीबी दोस्त.’’

रूही आश्चर्यचकित खड़ी रही और फिर बिना कुछ कहे निकल गई.

रात को मैं यों ही टहलने निकली तो देखा रूही भी वहीं थी, पता चला वह भी इसी होटल में ठहरी हुई है. मैं और रूही होटल के रेस्तरां में कौफी पीने चले गए. मुझे मालूम था कि रूही मुझ से कुछ पूछना चाहती है.

कौफी से उड़ती हुई भाप, भीनीभीनी सर्दी और न खत्म होने वाली बातें… उस की बातों में उस के बच्चे और पति थे और मेरी बातों में थे मेरे बच्चे. रूही अपने को रोक नहीं पाई और आखिर पूछ ही लिया, ‘‘तेरे जीवनसाथी कहां हैं?’’

मैं ने भी पहेली बुझाते हुए कहा, ‘‘हैं भी और नहीं भी, पिता के रूप में मेरे बच्चों के लिए हैं पर मेरी जिंदगी में नहीं.’’

रूही दादीअम्मां की तरह बोली, ‘‘यह सब ठीक नहीं हैं, जो तुम कर रही हो… शादी कर लो.’’

मैं ने भी शांत स्वर में बोला, ‘‘रूही क्या सही और क्या गलत है यह हमारी मनोभावनाएं तय करती हैं, मैं और वह बिना किसी को ठेस पहुंचाए इस रिश्ते में बंधे हैं.’’

रेत से फिसलते रिश्ते: भाग 3- दीपमाया को कौनसा सदमा लगा था

लेखिका- शोभा बंसल

दीपमाया मानो नींद से जागी और होंठों को दबा धीरे से बोली, “नहीं, ऐसा कुछ नहीं था. असल में जीवन ने बहुत बड़ी करवट ले ली थी.

“मैं ने रोजर को हमेशा तनाव व चिंता में देखा. तो सोचा, शायद काम का तनाव होगा क्योंकि खर्चे भी बढ़ गए थे.

“फिर एक दिन मैं ने रोजर के मोबाइल पर उस के अपने एक खास दोस्त के साथ लिपलौकिंग किसिंग का बहुत ही वाहियात फोटो देखा तो मेरा माथा ठनका.

“मैं तो जैसे आकाश से गिरी. यह तो रोजर का नया रूप था. इसी कारण बच्चे होने के बाद हम दोनों के एकदो बार जो भी संबंध बने थे उन में वह प्यार व रोमांच की जगह एक एथलीट वाली फीलिंग थी.

“फिर भी, मुझे फोटो वाली बात एक झूठ ही लग रही थी. इस झूठ को ही सच में न पाने के लिए मैं ने एक डिटैक्टिव एजेंसी की मदद ली.

“पता चला कि रोजर बाय-सैक्सुअल है, गे नहीं. मेरे पैरोंतले से जमीन निकल गई.

“इस प्यार के चक्कर में न मैं घर की रही न घाट की. गोवा तो मेरे लिए परदेस था. किस के पास जाती, फरियाद करती कि मेरी खुशी को सही दिशा दिखा दो,” यह कह माया ने अपना सिर थाम लिया.

फिर पानी का घूंट ले कर लंबी सांस भरी और बताने लगी, “जब एक दिन यह तनाव मेरे लिए असहनीय हो गया तो मैं ने रोजर से सीधेसीधे कौन्फ्रौंट कर लिया. और सब तहसनहस हो गया, मानो बवंडर ही आ गया.

“रोजर की आंखों में खून उभर आया. उस ने बिना किसी लागलपेट के इस सचाई को स्वीकार कर लिया और कहा कि ‘यह तो सोसाइटी में आम बात है. अकसर शादी के कुछ वर्षों बाद जब जिंदगी में बोरियत भर जाती है और प्यार बेरंगा हो जाता है तो ज्यादातर पुरुष यही रवैया अपनाते हैं. उस के अमीर मौसा ने कभी उस के साथ बचपन में यही किया था, तब भी उस के मातापिता ने उस की शिकायत को नौर्मल लिया और चुप रहने को कहा था.’

“फिर रोजर ने दीपमाया को धमकी देते सख्त हिदायत दी कि ‘इस छोटी सी घटना को बहुत बड़ा इश्यू न बनाओ. आपसी संबंधों की बात और घर की बात घर में ही रहने दे. बाहर लोगों को पता चलेगा तो सोसाइटी में बदनामी होगी.’ इस सब से मैं बेहद टूट गई.”

“कहां तो मैं सोच रही थी कि अपनी गलती के परदाफाश होने पर रोजर मुझ से माफी मांगेगा या एक प्रैंक बोल कर मुझ को सीने से लगा लेगा, पर यहां तो सब ही उलटपुलट हो गया. कितनी ही रातें मैं ने जागते काटीं.

“जब पीड़ा असहनीय हो गई तो मैं ने एक सैक्सोलौजिस्ट दोस्त की सहायता ली. उस ने मुझे यही सलाह दी कि रोजर ने मुझे कोई धोखा नहीं दिया वह तो अपना वैवाहिक जीवन नौर्मल ही व्यतीत कर रहा है. उस की कुछ शरीरिक इच्छाएं हैं जिन को वह अपने तरीके से पूरा कर रहा है. मुझे उस की उस जिंदगी में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए. मुझे इस सब को स्वीकार कर सब्र से काम लेना चाहिए और अपने प्यार से रोजर को वापस अपनी तरफ खींचना चाहिए.

“रोजर ने भी प्रौमिस किया कि वह यह सब छोड़ अब अपनी शादी और घर गृहस्थी पर फोकस करेगा.

“पर कथनी और करनी में बहुत अंतर होता है. घर परेशानियों व तनाव के सैलाब में डूबने लगा.

मैं ने अपने रिश्ते को बेइंतहा प्यार, इसरार, इकरार से रिवाइव करने की कोशिश की. मैं हरदम इसी चिंता में रहती कि कहीं मेरे रोजर को एचआईवी या एड्स की बीमारी न पकड़ ले या वह ड्रग्स लेना न शुरू कर दे. हमारे बच्चों पर क्या असर होगा? कहीं कोई रोजर का दोस्त हमारे बच्चे को अपना शिकार न बना ले?

“इन सब बैटन का मेरी मानसिक व शारीरिक सेहत पर भी असर दिखने लगा.

“आखिर परेशान हो मैं ने एक दिन जिंदगी की लगाम थामने के लिए एक थेरैपिस्ट की सहायता लेनी शुरू कर दी. उस ने मुझे बताया कि मैं इनसिक्योरिटी की गिरफ्त में पड़ रही थी कि कहीं मेरा रोजर एक दिन मुझे अकेला छोड़ अपनी नई दुनिया में शिफ्ट कर जाएगा, फिर समाज क्या कहेगा, वह कहां जाएगी? इस के लिए अब उसे अपना आर्थिक रूप से स्वावलंबी होना बहुत जरूरी था.

“फिर आगे की मीटिंग में उसी थेरैपिस्ट ने बताया कि ऐसे मैरिटल क्राइसिस या वैवाहिक उथलपुथल में पत्नी को ही सामाजिक, आर्थिक व भावनात्मक प्रताड़ना सहनी पड़ती है. ज्यादातर ऐसे रिश्ते का अंत अलगाव या डिवोर्स होता है.

“अपना अंधा भविष्य देख मेरी आंखों के आगे अंधेरा छा गया. जिस के प्यार के लिए मैं अपनों के मुंह पर कालिख पोत कर घर छोड़ भागी थी, ऐसे में घरवाले क्या मुझे गले लगाते.

“कितनी ही बार हताशा में मैं ने गहरे समंदर के बीचोंबीच समाधि लेने का मन बनाया. मेरा कोई न था. पर बच्चों का प्यार मुझे रोक लेता. इसी तरह कई वर्ष निकल गए. बच्चे बड़े होने लगे थे. वे भी हम दोनों के बीच आई दरार को समझ रहे थे.

“रोजर के दोगले व्यवहार से मैं भारत से भाग कर ऐसी जगह मुंह छिपाना चाहती थी जहां मुझे कोई न पहचानता हो. तभी मुझे नेपाल के एक कालेज में गणित के लैक्चरर की नौकरी मिल गई. उन दिनों तो नेपाल आनाजाना आसान था और यहां की नागरिकता बिना किसी परेशानी के मिल गई.

“रोजर ने दोनों बच्चे अपने पास ही रख लिए कि वह परदेस में अकेली क्याक्या झेलेगी और फिर जब उस का मन अच्छा हो जाए तो उस के पास वापस आ जाए. पर यहां के लोगों और यहां की सभ्यता में मुझे बेहद सुकून मिला. फिर, बस, वार्डन की नौकरी पाते ही मेरा अकेलापन भी दूर भागने लगा. अब मैं यहीं पर खुश हूं.” यह सब बता कर वह मुसकरा दी.

मिली को भी अच्छा लगा कि उस की प्यारी सखी दीपमाया कम से कम अपने दुख से उबर तो पाई.

अगले दिन मौका पाते ही फिर मिली ने दीपमाया को पकड़ लिया, “अच्छा चलो, जो हुआ सो हुआ. अब यह बताओ कि तुम्हारे बच्चे क्या कर रहे हैं. उन का क्या कहना है तुम्हारे और रोजर के रिश्ते को ले कर?”

दीपमाया ने पहले तो बहुत टालमटोल किया. फिर मिली के जोर देने पर बताया कि उस का बेटा तो अब विदेश में ही सैटल हो गया है. वह अपने पापा के दोहरे जीवन के बारे में सब जानता है लेकिन इस विषय पर कुछ बात नहीं करना चाहता और चुप्पी साध कर बैठा है.

बेटी अपने पापा के साथ गोवा में होटल का व्यवसाय देखती है और वह हमेशा अपनी मम्मी यानी मुझ को ही गलत समझती आई है कि मैं ने उस के पापा को उन के मनमुताबिक जीवन जीने का अवसर नहीं दिया और बिना वजह उन को बदनाम कर रही हूं.

मिली ने फिर सवाल किया, “अच्छा, तो अब फिर रोजर से तुम्हारी मुलाकात होती है या नहीं?” यह सुन दीपमाया मुसकरा पड़ी, “मिली, अब यह सब जान कर क्या करेगी?”

फिर दीपमाया ने आगे कहा, “रोजर को मैं छोड़ कर आई थी. रोजर ने तो मुझ को कभी नहीं छोड़ा. यहां भी हर पल उस का अदृश्य साया मेरे साथ परछाई बन रहता है. उस की पलपल की खबर रखता है.”

और फिर उदास मन से मैं कहने लगी, “अब तो शायद मेरी जिंदगी का आखिरी वक्त चल रहा है क्योंकि मैं सर्विक्स कैंसर से पीड़ित हूं. जब से रोजर को इस का पता चला है तब से वह ज्यादा ही केयरिंग हो गया है. वह मुझे अपने पास गोवा बुला रहा है. मैं वहां जाना नहीं चाहती.”

यह सुन मिली ने दीपमाया को दिलासा दी कि, “कुछ बातें जो अपने वश में न हों उन्हें ऊपर वाले पर छोड़ देना चाहिए. हो सकता है तुम्हारा ऐसा ही विवाहित जीवन व्यतीत होना हो. हर दोस्ती में सैक्स तो जरूरी नहीं. जरूरी है सच्चा प्यार. तुम्हारा रोजर तुम्हें अभी भी सच्चा प्यार करता है. अब यहां अकेले घुटने से अच्छा है तुम उस से फिर दोस्ती कर गोवा आनाजाना शुरू करो, ताकि पुराने रिश्ता फिर से मजबूत हो सके. वर्तमान समय में पतिपत्नी का रिश्ता ही अटूट और सच्चा है, इस बात को अपने पल्ले गांठ बांध कर रख लो.

“फिर कभी अपने को अकेला मत महसूस करना. यह तुम्हारी सखी है न, तुम्हारे साथ जिंदगी के आखिरी पल तक तुम्हारा साथ निभाएगी.” यह कह मिली ने दीपमाया की ठंडी गीली हथेलियों को अपने गरम हाथों में थाम लिया.

वापसी एक प्यार की- भाग 2

बीए करने के बाद सरकारी विभाग में नौकरी की अर्जी दी. 2 साल में नंबर आया और वह भी दिल्ली में. खुश थी वह. बहुत खुश थी कि इस घुटन से छुटकारा मिलेगा… अब उस का अपना आसमान होगा… पंख अपने हैं तो उड़ान भी मनमाफिक होगी. इस मन पर तो अपना अधिकार है. अब वह एकदम आजाद है. कहीं, किसी की रोकटोक नहीं.

दिल्ली के औफिस में उसी के शहर की एक लड़की शिल्पा से जल्दी दोस्ती हो गई. शिल्पा ने अपने ही पीजी में उसे जगह भी दिला दी. जल्द ही उस ने नए परिवेश को अपना लिया और नए परिवेश ने भी उसे अपनाने में देर न की.

इसी बीच मैट्रो ट्रेन में देव से परिचय हुआ था. वंदना देव से मिल कर खुश थी. सूखी धरती पर प्यार की बूंदें पड़ती रहीं… प्यार की इस बारिश ने मन को इतना भिगोया कि वहां प्यार की नदी बहने लगी. देव के चेहरे पर मासूम सी गंभीरता थी. वह कम बोलता था. सब से बड़ी बात थी वह स्त्रीपुरुष के बीच खींची गई लक्ष्मण रेखा को बखूबी पहचानता था.

दोनों खूब मिले, हर दिन मिले और फिर दोस्ती लंबी होती गई. पिछले खोए प्यार की कहानी भी देव से शेयर की थी वंदना ने पर संभल कर…

इतने लंबे समय ने वंदना को खूब मांजा है और पीड़ा ने वयस्क बना दिया है. अब वह पहले वाली वंदना नहीं रही. आगे कुछ भी कदम उठाने से पहले खूब ठोकबजा कर देख लेगी…

देव के घर का पता उस की सहेली शिल्पा ने ला कर दिया था. शिल्पा ने ही बताया, ‘‘देव तलाकशुदा है.

‘‘मुझे पता है. शिल्पा मुझे यह भी पता है कि देव का परिवार मध्यवर्गीय है, पर हमारा परिवार भी कौन सा अमीर परिवारों में आता है… बस देव की पत्नी से एक बार मिलना चाहती हूं. मैं उसी के मुंह से सारी कहानी साफसाफ और सच क्या है, सुनना चाहती हूं. जानती हूं, सब मुश्किल है पर शिल्पा यह जरूरी भी है.’’

शिल्पा को वंदना की बात ठीक लगी.

देव की पूर्व पत्नी से मिल कर ही इस रिश्ते को आगे बढ़ाना चाहिए… खाली देव का यह कहना कि मैं तलाकशुदा हूं, काफी नहीं है.

जल्द ही देव की पूर्व पत्नी का नाम, पता, कहां काम करती है और फोन नंबर वगैरह सबकुछ शिल्पा ने पता कर लिया. साथ ही देव के बारे में भी सारी डिटेल पता कर ली.

देव डीडीए फ्लैट कालकाजी में रहता है. शिल्पा ने वंदना को समझाया था, ‘‘देख, मैं यहां 10 सालों से हूं. दिल्ली और मुंबई के कल्चर में बहुत अंतर है. सब ठीकठाक लगे तो शादी के लिए हां कहने से पहले एक बार देव के घर वालों से जरूर मिल लेना.’’

‘‘हां, यह सही है.’’

देव की पत्नी का नाम देवकी है. एक रोज वंदना ने उस का नंबर मिलाया, ‘‘आप देवकी बोल रही हैं?’’

‘‘हां,’’ उधर से जवाब आया.

‘‘क्या मैं आप से मिल सकती हूं?’’

‘‘जरूर पर आप का नाम?’’

‘‘मैं वंदना हूं.’’

‘‘कोई खास काम है क्या?’’ देवीकी ने पूछा.

‘‘वह तो मिल कर ही बताऊंगी,’’ वंदना ने धीरे से कहा.

‘‘ठीक है मिलते हैं.’’

‘‘कहां?’’

‘‘मेरा औफिस नेहरू प्लेस में है. वहीं मैक्डोनल में…’’

‘‘ठीक है आज ही शाम 6 बजे आती हूं.’’

‘‘ठीक है.’’

बिना किसी लागलपेट के वंदना असली मुद्दे पर आ गई थी, ‘‘मैं आप से देव के बारे में कुछ जानना चाहती हूं.’’

‘‘कौन देव?’’

‘‘आप के पूर्व पति देव.’’

‘‘ओह,’’ देवकी शायद इस प्रश्न के लिए तैयार न थी. फिर भी कुछ सोचने लगी कि ऐसे प्रश्नों का सामना तो उसे करना ही था एक न एक दिन… जब तलाक लिया है तो उस से जुड़े प्रश्नों से डरना कैसा…? फिर बोली, ‘‘आप बोलिए, क्या जानना चाहती हैं…?’’

‘‘आप गुस्सा तो नहीं होंगी?’’ वंदना ने बड़ी हिम्मत कर के कहा. वह उस के मूड को समझना चाहती थी.

‘‘नहीं कतई नहीं… पूछिए, क्या जानना चाहती हैं? वैसे देव से शादी करना चाहती हैं तो उस के तलाक वगैरह के बारे में जानना तो जरूरी है.’’

वंदना अवाक सी उस के चेहरे को ताक रही थी. वंदना ने देखा वह सामान्य होने का प्रयास कर रही है.

उस ने कुछ रुक कर सामने रखे गिलास से पानी पीया. फिर बोली, ‘‘कहूं क्या…? सच कहूं तो प्रेमी का पति बन जाना एक हादसा है और यह हादसा बहुतों के साथ होता है… यह हादसा शायद तुम्हारे जीवन में भी होने वाला है. मेरे साथ भी ऐसा खूबसूरत हादसा हो चुका है. वैसे शादी से पहले मैं इसे हादसा नहीं मानती थी, बल्कि 2 समझदार लोगों की प्यारी सी सोच का प्यारा सा परिणाम मानती थी. पर उसे हादसा बनाना हमारे हाथ में है, इसलिए यह दुखद हादसा बन गया… कहानी कहां से शुरू करूं समझ नहीं आ रहा… ठीक है, बताती हूं…

‘‘हमारा रिश्ता टूटने के कई कारण थे,’’ देवकी ने बिना किसी भूमिका के असली बात कहने की सोची.

‘‘हमारे बीच हुए झगड़े में कौन कहां गलत था आज भी समझ से परे है. पर मैं कहांकहां गलत थी ये सब मुझे अब समझ में आया है… मैं कहूं कि झगड़े का कारण केवल देव थे तो यह सही नहीं है.’’

वंदना चुपचाप देवकी का चेहरा देख रही थी कि कैसी औरत है. सब से पहले अपनी ही कमियां गिना रही है… ऐसा तो कोई नहीं करता और वह भी ऐसे रिश्ते में… यानी आगे यह जो बताएगी वह सब सच ही होगा… कुछ भी थोपा हुआ नहीं होगा.

यहां वंदना यही सच सुनने तो आई है… शिल्पा ने यही तो उसे समझाया था,‘

‘वंदना, देवकी को पूरा मौका देना कि वह बोल सके… सारी बातें उसी के मुंह से कहलवाने का प्रयत्न करना… समझो तुम सिर्फ एक श्रोता हो. सच जान कर ही तुम सही निर्णय ले सकोगी.’’

‘‘…सुना है देव आजकल ज्यादा पीने लगा है. यहां तक कि अपना आपा तक खो देता है… तुम तो सब जानती होंगी?’’

यानी देवकी देव के बारे में सब जानती है यानी देव के संपर्क में है. चुप थी वंदना. इस तरह के प्रश्न की आशा भी न थी.

देवकी ने वंदना के आगे अतीत खोल दिया…

‘‘सच कहूं तो देव पहले ऐसा न था. हम दोनों बहुत अच्छे दोस्त थे. मैं आज भी उस का प्यार और दोस्ती नहीं भूलती हूं.

‘‘हम दोनों के परिवार बिलकुल साधारण थे. मेरे परिवार में सिर्फ 4 लोग थे. मैं, मेरे मम्मीपापा और छोटा भाई जबकि उस के परिवार में 3 बहनें, देव और उस के मम्मीपापा. तीनों बहनें देव से छोटी हैं. घर में देव ही कमाता है. पापा तो रिटायर हैं और ज्यादातर बीमार रहते हैं.’’

‘‘देव की तनख्वाह भी कुछ खास नहीं थी. जब देव से मेरी दोस्ती हुई और 2 साल तक रही तो मैं चाहती थी देव शादी के लिए हां कर दे. पर देव की मां का कहना था कि पहले तेरी बहनों की शादी हो जाए. फिर तुम शादी करना. इस के विपरीत मैं देव पर दबाव डाल रही थी कि तुम से विवाह नहीं किया तो पापा मेरा विवाह कहीं और कर देंगे… देव ने मेरी जिद के आगे घुटने टेक दिए और हम ने कोर्ट में शादी कर ली.

‘‘देव के मम्मीपापा को बहुत बुरा लगा. जहां तक परिवार का संबंध था तो मैं ने सोचा था मैं उन्हें संभाल लूंगी. किंतु मेरी सोच और प्रयास सूखे पत्तों की तरह उड़ गए. धीरेधीरे रिश्तों के बरतन बजने लगे. मैं परिवार से कटती गई और परिवारजन मुझ से दूर होते गए.’’

देवकी को वंदना बड़े ध्यान से सुन रही थी, ‘‘लेकिन आप की सोच तो झूठी बन गई… आप ने तो कहा था आप सबकुछ संभाल लेंगी?’’

‘‘वंदना ऐसा ही होता है. हम जिस रास्ते को दूर से देखते हैं उस की दुरूहता का एहसास तब होता है जब हम उस पर चलते हैं… किसी परिवार को अपनाने के लिए पति से जुड़े लोगों के प्रति त्याग और समर्पण बेहद जरूरी है. इस के लिए सब्र और समझदारी चाहिए.’’

‘‘एक बात है. आप तो उस परिवार को बहुत समय से जानती थीं. उन के साथ पहले से खूब घुलमिल गई थीं. फिर यह चूक कैसे हो गई?’’ वंदना न चाहते हुए भी प्रश्न कर बैठी.

चुप थी देवकी… शायद कुछ सोच रही थी. फिर बोली, ‘‘शायद मैं स्वार्थी हो गई थी… मैं सिर्फ देव को अपने साथ देखना चाहती थी, जबकि देव अपने साथ पूरे परिवार को ले कर चलना चाहता था, जिस की परिवार को अपेक्षा थी और यह उस परिवार का अधिकार भी था.’’

वंदना ने देखा देवकी का चेहरा बहुत मायूस हो गया था.

‘‘मैं हर वह जतन करती, जिस से देव अपने परिवार से दूर हो सके.’’

 

Wedding Special: 6 वेडिंग पार्टी हेयरस्टाइल्स जो आपको बना दें और भी खूबसूरत

वैडिंग पार्टी में जाने के लिए तैयार होते समय हर लड़की की ख्वाहिश होती है कि वह दुलहन से भी ज्यादा खूबसूरत और आकर्षक दिखे. उस की ड्रैस और हेयरस्टाइल ऐसा हो कि लोगों की निगाहें उस पर ही टिकी रहें.आइए, हम आप को कुछ ऐसे सिंपल मगर आकर्षक हेयरस्टाइल्स के बारे में बताते हैं जिन्हें आप वैडिंग पार्टी में जाने के लिए ट्राई कर सकती हैं:

1. सौफ्ट हेयर लुक

वैडिंग पार्टी में आप एक सौफ्ट हेयर लुक ले सकती हैं. बालों को बारबार सैक्शन में डिस्ट्रीब्यूट कर के सौफ्ट कर्ल्स बनाएं. टोंग रौड या स्ट्रेटनिंग रौड का इस्तेमाल कर आप कर्ल्स बना सकती हैं. पूरे कर्ल्स बनने के बाद अपनी फिंगर की सहायता से इसे थोड़ा लूज कर लें. इस तरह आप सौफ्ट कर्ल्स बना लेंगी. सौफ्ट कर्ल्स को और ज्यादा अट्रैक्टिव बनाना चाहती हैं तो आगे से हलका सा ब्रैड भी ले सकती हैं.

इस से बहुत खूबसूरत इंडोवैस्टर्न लुक नजर आएगा. अब बालों को फ्रैश फ्लौवर्स के साथ ऐक्सैसराइज कर लें. अपने किसी क्लोज फैमिली वैडिंग या पार्टी में जाने के लिए यह बहुत सुंदर ट्रैंडिंग और सदाबहार हेयरस्टाइल लुक है.

2. विक्टोरियन बन

जब आप किसी क्लोज फंक्शन में जा रही हों जैसेकि आप दूल्हा या दुलहन की बहन या भाभी हों तो इस तरह का कोई टाइडअप हेयरस्टाइल यानी जूड़ा बना सकती हैं. यह फ्रंट में आप को प्रौपर स्लीक सैटिंग देता है. आप फ्रंट में फिंगर सैटिंग से इसे और आकर्षक बना लें. सामने वाले पार्टीशन को बराबर सैक्शन के साथ फिंगर सैटिंग के साथ फ्रंट स्वाइप कर लें ताकि थोड़ा सा हिस्सा माथे के ऊपर भी आ रहा हो.फिर आप टीके के साथ भी इसे डैकोरेट कर सकती हैं. पीछे बहुत सुंदर ब्रैड के साथ बन बना सकती हैं. इस में आप नौर्मल चोटी भी बना सकती हैं और खूबसूरत फ्रैश फ्लौवर्स के साथ इसे डैकोरेट कर सकती हैं.

3. प्रिंसेस ब्रैड

यह एक तरह से ट्रैंडी हेयरस्टाइल है. इस स्टाइल को ब्राइड भी कैरी कर सकती है और किसी वैडिंग पार्टी में जाने के लिए आप भी अपना सकती हैं. इस में बहुत सुंदर तरीके से मैस्सी चोटी बनाई जाती है. आप इस स्टाइल को अपने औरिजनल बालों के साथ भी बना सकती हैं या फिर ऐक्सटैंशन भी अटैच कर सकती हैं. इस को बहुत सुंदर तरीके से आप लैफ्ट टू राइट और राइट टू लँफ्ट बनाएंगी. फिर धीरेधीरे अपनी फिंगर्स के साथ इसे ओपन करेंगी.

यह एक मैस्सी लुक देता है जोकि बहुत ट्रैंडी है. आप ब्रैड को भी जगहजगह फ्रैश फ्लौवर्स से डैकोरेट कर सकती हैं. इस से यह और भी सुंदर लगेगा. फ्रैश फ्लौवर्स में आप रोजेज यूज कर सकती हैं, जिप्सी फ्लौवर या कारनेशंस भी यूज कर सकती हैं.

4. रिंग्लेट बन

यह हेयरस्टाइल क्लोज फंक्शन में जाने के लिए परफैक्ट है. चाहे आप ब्राइड हैं, कौकटेल में जाना है या इंगेजमैंट में यह हेयरस्टाइल अलग लुक देगा. यह स्टाइल लहंगे के साथ बहुत सुंदर लगता है. इस में हर साइड से फिंगर्स के साथ रफ टैक्सचर दिया जाता है. रफ टैक्सचर के बाद बालों को स्प्रे की सहायता से टाई किया जाता है. पीछे जो बाल रह जाते हैं उन्हें जूड़े की फौर्म में रिंग्स में बनाएं. इसे कौइन सैटिंग्स कहते हैं, जिस में बाद में बीड्स लगा कर बालों की सैटिंग करें. फिंगर सैटिंग के साथ फ्रंट सैटिंग करें. रिंग सैटिंग के साथ जूड़े में छोटेछोटे पार्टीशन में बाल ले कर इन्हें सैट करें.

5. नैचुरल कर्ल्स ऐंड वेव्स

इस में बहुत सी आकर्षक वेव्स और सौफ्ट कर्ल्स बनाएं. फिर इन की सैंटर पार्टिंग न कर के साइड पार्टिंग करें. साइड पार्टिंग कर के एक साइड पर बाल छोड़ दें और दूसरी साइड पर पिनअप कर के वहां पर बहुत सुंदर तरीके से ऐक्सैसरीज लगा कर उसे हाईलाइट करें. अगर आप कोई हैवी आउटफिट पहन रही हैं और आप अपने बालों को मिनीमाइज करना नहीं चाहतीं तो इस तरह से आप बहुत अच्छा इक्विलिब्रियम मैंटेन कर सकती हैं और ओपन हेयरस्टाइल में आप नैचुरल लुक दे सकती हैं.

6. हाफ ब्रैड बन

इस हेयरस्टाइल को आप बहुत आराम से और बहुत सुंदर तरीके से कैरी कर सकती हैं. पीछे पफ दे कर इस में थोड़ा सा वौल्यूम दें. बीच में भी पफ दे कर वौल्यूम दें. फ्रंट में ब्रैड बनाएं जो लूज होना चाहिए. यह ब्रैड 3 पार्टीशन वाला नहीं है बल्कि 2 वाला हो. इसे ट्विस्ट ब्रैड भी कहते हैं. ट्विस्ट ब्रैड के साथ इसे हलकेहलके हाथ से ओपन करें ताकि एक वौल्यूम माथे की साइड में आए. वह इस को इंग्लिश लुक देगा.

जब आप एक ऐसे फंक्शन में जा रही हों जहां आप एक बन कैरी कर सकती हैं तो बहुत अच्छे तरीके से यह हेयरस्टाइल कैरी कर सकती हैं. यह देखने में बहुत सिंपल व सुंदर है और बनाने में भी सिंपल है. अगर आप इसे फ्रैश फ्लौवर्स के साथ कैरी करती हैं तो यह बहुत अच्छा लगेगा. लेख मेकअप आर्टिस्ट और स्टार ऐकैडमी की डाइरैक्टर आश्मीन मुंजाल से की गई बातचीत पर आधारित है

Winter Special: सर्दियों के नए फैशन ट्रेंड्स

जैसे जैसे मौसम बदलता है तो हमें अपने कपड़ों व पहनने के स्टाइल को भी बदलना पड़ता है. ऐसे में कुछ लोगों को अपने कपड़ों को लेकर बहुत अधिक दुविधा रहती है कि आज कल क्या ट्रेंड में है और उन्हें अपने कपड़े कैसे स्टाइल करने हैं. अतः आज हम आप के लिए सर्दियों या पतझड के मौसम में चलने वाले ट्रेंड्स की कुछ लिस्ट लेकर आए हैं.

यदि आप इन स्टाइल से प्रेरित होकर स्वयं का भी स्टाइल कुछ ऐसा ही बनाएंगे तो सभी आप के फैशन स्टाइल की तारीफें करेंगे. तो आइए जानते हैं उन नए ट्रेंड्स के बारे में.

ब्राइट पॉप कलर्स के सूट

पतझड़ व सर्दियों के मौसम में आप कई रंगो के साथ खेल सकते हैं. आप केवल डार्क रंगो का प्रयोग करने की बजाए तेज व ब्राइट रंगो के जंप सूट या कोई भी फॉर्मल कपड़े पहन सकती हैं. यह लूक आप ऑफिस के साथ साथ अपने दोस्तों के साथ कॉफी पार्टी के दौरान भी पहन कर जा सकती हैं. इनके साथ आप हील्स का प्रयोग कर सकती हैं. हील्स के साथ साथ हल्की फुल्की एसेसरी व एक क्लेच बैग का भी प्रयोग करें.

 

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ब्राउन लैदर कोट्स

 

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इस लूक में आप स्टाइल को साथ रख कर गहरी सर्दियों को भी मात दे सकती हैं. यह ब्राउन लैदर कोट हर साल ही फैशन में ट्रेंड करता है. आप इसे किसी मैच करने वाले रंग के ट्राउजर के साथ पहन सकते हैं या फिर इसके अंदर ही एक मिनी स्कर्ट डाल सकते हैं. आप इसके साथ नीले, ग्रे व काले रंग का प्रयोग कर सकते हैं. आप इस कोट को कमर से एक बेल्ट की सहायता से बांध कर एक ड्रेस की तरह भी पहन सकते हैं.

नेचुरल टोन

यह पिछले कई सालों से ट्रेंड करता आ रहा है और आगे भी करने वाला है. यदि आप सर्दियों में न्यूट्रल रंगो के कपड़े पहनेंगे तो एक बहुत ही प्यारा व शानदार लूक आएगा. आप लैदर की स्कर्ट के साथ मिट्टी रंग का स्वेटर पहन सकते हैं. या फिर आप सैंड क्लर का जंप सूट भी ट्राई कर सकती हैं. इसमें आप कई रंग ट्राई कर सकती हैं जैसे केमल, सैंड व बफ आदि. इससे आप के वॉर्डरोब को भी एक नया लुक मिलेगा.

बूट्स टक्ड  मोहरे के ट्राउजर्स

 

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नए स्टाइल को मिक्स व मैच करने से ही एक नया ट्रेंड सामने आ जाता है. यदि आप के पास कोई स्ट्रेट लेग ट्राउजर है तो आप उसे अपने बूट्स में टक कर सकती हैं. इससे कोई भी इंसान आप को एक फैशन स्टाइलिस्ट मानने की भूल कर बैठेगा. ऐसा आप पूरे सूट के साथ भी कर सकते हैं.

नेचुरल टोंस विद ब्लू

यदि आप न्यूट्रल रंगो को नीले रंग के साथ मैच करके पहनते हैं तो यह लूक बहुत ही पॉपुलर है. यदि आप के पास कोई ब्राउन सूट है तो आप उसके साथ नीले रंग का बैग कैरी कर सकती हैं. या फिर यदि आप के पास ब्राउन लैदर कोट है तो उसके साथ ब्ल्यू ट्राउजर पहन सकती हैं. आप इस कॉम्बो से बहुत सारे अलग अलग आउटफिट्स पहन सकते हैं जिसमें आप एक दम शानदार दिखने वाली हैं.

Winter Special: फैमिली के लिए बनाएं सेम बीज पुलाव

अगर आप दोपहर में अपनी फैमिली को राइस की नई रेसिपी खिलाना चाहते हैं तो सेम बीज पुलाव की ये रेसिपी ट्राय करें.

सामग्री

2 कप उबले चावल

1/2 कप सेमफलियों के बीज

1 तेजपत्ता

1/2 कप प्याज लंबाई में कटा

1/2 छोटा चम्मच बिरयानी मसाला

1 इंच टुकड़ा दालचीनी का

2 बड़े चम्मच रिफाइंड औयल

सजावट के लिए थोड़ी सी धनियापत्ती बारीक कटी

नमक स्वादानुसार.

विधि

एक नौनस्टिक पैन में तेल गरम कर के प्याज को लाल होने तक भून लें. फिर बचे तेल में तेजपत्ता, दालचीनी डालें और सेम के बीज डाल कर 3 मिनट धीमी आंच पर सौते करें. इस में चावल, बिरयानी मसाला और नमक डाल दें. 1 मिनट उलटेंपलटें और फिर सर्विंग डिश में पलटें. भुना प्याज व धनियापत्ती से सजा कर सर्व करें. 

Winter Special: इस तरह करें आंखों की देखभाल

आंखों को स्वस्थ व चमकदार बनाए रखने के लिए उन की नियमित देखभाल जरूरी है. इन की छोटी से छोटी परेशानी भी सीधे हमारी दूर व पास की चीजें देखने की क्षमता को प्रभावित करती है. परिणामस्वरूप हम अपने रोजमर्रा के काम उतनी फुरती और दक्षता से नहीं कर पाते जितना कि पहले कर पाते थे. आंखों की उचित देखभाल न होने पर कुछ लोग अंधेपन के शिकार भी हो जाते हैं.

अगर आप की आंखें पूर्णतया स्वस्थ हैं, तो भी आप को उन की देखभाल करने की जरूरत है ताकि नजर कमजोर होने पर महंगे उपकरणों यानी चश्मा व कौंटैक्ट लैंस वगैरह व महंगे उपचार जैसे कि सर्जरी आदि से बचा जा सके. वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डा. विष्णु गुप्ता से हुई बातचीत के आधार पर हम आप को नेत्र रोगों से बचने के कुछ टिप्स बता रहे हैं:

पढ़ते समय

पढ़ते समय सब से ज्यादा काम आंखों को करना पड़ता है. इसलिए पढ़ते समय निम्न बातों का ध्यान रखें ताकि आप की आंखों पर अतिरिक्त दबाव न पड़े:

कभी भी कमर के बल सीधे लेट कर या फिर अधलेटी मुद्रा में न पढ़ें. यह पोस्चर हमारी आंखों को प्रभावित करता है.

किताब और आंखों के बीच की दूरी कम से कम 25 सैंटीमीटर होनी चाहिए.

ध्यान रहे, पढ़ने के लिए पर्याप्त रोशनी होनी आवश्यक है. धुंधली रोशनी में पढ़ने का प्रयास न करें. इस से आंखों पर अधिक जोर पड़ता है.

चलती बस या ट्रेन में पुस्तक या अखबार न पढ़ें.

पढ़ते समय हमारी आंखें अधिक सक्रिय रहती हैं. इसी सक्रियता के चलते पढ़ते समय हमारी पलकें झपकने का औसत सामान्य औसत से काफी कम हो जाता है. सामान्य स्थिति में हम प्रति मिनट 22 बार पलक झपकाते हैं, लेकिन पढ़ते समय यह औसत सिर्फ 10-12 ही रह जाता है. पलक झपकाने का औसत घटते ही आंखों में आने वाले आंसुओं की परत उड़ने लगती है और वे सूखेपन का शिकार हो जाती हैं. जिस के परिणामस्वरूप आंखों में खुजली और जलन के साथसाथ पानी आने की शिकायत भी हो सकती है.

अगर आप को लगतार कई घंटे पढ़ना है तो बीचबीच में 5 से 10 मिनट तक पढ़ाई रोक कर आंखों को आराम अवश्य दें. आंखों को कई बार झपकें. आंखों को बंद रखते हुए आईबौल्स (नेत्रगोलक) को गोलगोल घुमाएं.

किसी दूर रखी वस्तु को टारगेट बना कर उसे देर तक देखें, इस से आप की फोकस करने की शक्ति बढ़ेगी.

टैलीविजन देखते समय

टैलीविजन देखने के लिए कम से कम 6 फुट की दूरी पर बैठें.

अगर आप को अधिक समय कंप्यूटर पर काम करना होता है, तो ऐंटीरिफ्लैक्शन कोटेड ग्लासेज का प्रयोग करें. इस से आंखों पर अधिक जोर नहीं पडे़गा.

टैलीविजन देखते व कंप्यूटर पर काम करते समय भी हमारा पलकें झपकाने का औसत बहुत कम हो जाता है, जिस से आंखें सूखेपन का शिकार हो सकती हैं. इस से बचने के लिए खाने में चिकनाई का प्रयोग अधिक करें.

बीचबीच में काम रोक कर आंखें बंद कर थोड़ी देर के लिए उन्हें आराम दें.

दुपहिया वाहन चलाते समय धूल व मिट्टी के कणों व तेज रोशनी से आंखों को बचाने के लिए ऐंटीग्लेयर चश्मा जरूर पहनें.

अगर आप कैमिकल से जुड़ा कोई काम करते हैं, तो काम करते समय अपनी आंखों पर हमेशा गौगल्स पहनें और कैमिकलों के बहुत पास न जाएं.

थकान दूर करने के लिए

दिन में 2-3 बार आंखों पर ठंडे पानी से छींटे मारें.

अपनी दोनों हथेलियों को तब तक रगड़ें जब तक कि वे गरम न हो जाएं और फिर उन्हें 60 सैकंड तक अपनी आंखों पर रखें. इस दौरान अपने मन में 1 से 60 तक गिनती गिनें. इस क्रिया को 2-3 बार दोहराएं. इस से आप की थकी हुई आंखों को राहत मिलेगी.

जब भी घर से बाहर जाएं, हरेभरे पेड़पौधों को एकटक देखें. हरा रंग आंखों को बहुत सुकून देता है.

अगर आप ज्यादा समय तक ऐयरकंडीशन में बैठती हैं तो पानी की कमी से आंखें सूजीसूजी सी लगती हैं, इसलिए ज्यादा से ज्यादा पानी पीएं. दिन में कम से कम 10 गिलास.

हर प्रकार से स्ट्रैस से बचें, क्योंकि यह सीधा आंखों पर असर करता है.

खानपान

आंखों में चमक लाने के लिए भोजन में विटामिन ए, सी और ई अधिक मात्रा में लें. यानी रसदार फल, पपीता, हरी पत्तेदार सब्जियां, टमाटर, गाजर, खीरा, अंडे, मछली, दूध आदि.

खाने में कार्बोहाइड्रेट अधिक मात्रा में लें. कम कार्बोहाइड्रेट वाली डाइट लेने से शरीर में पानी की मात्रा कम हो जाती है, जिस से आंखों की चमक पर असर पड़ता है. अगर आप कम कार्बोहाइड्रेट वाली डाइट ले रही हैं तो दिन में कम से कम 10 गिलास पानी अवश्य पीएं.

घरेलू नुसखे

आंखों पर कच्चे आलू के गोल टुकड़े रख कर 20 मिनट तक आंखें बंद कर लेटें. इस से आंखों के आसपास के काले घेरे भी दूर हो जाएंगे.

2 वेस्ट टी बैग्स प्रयोग के बाद सुबह काम पर निकलते समय फ्रिज में रख दें. घर लौटने पर उन टी बैग्स को बंद आंखों पर रख कर थोड़ी देर आराम करें, कम से कम 15 मिनट तक.

दिन भर की थकी आंखों को आराम देने के लिए ठंडे दूध में भीगे व निचुड़े हुए कौटन पैड आंखों पर रखें. ठंडे पानी में या फिर कुनकुने पानी में भीगे कौटन पैड भी निचोड़ कर आंखों पर रख सकती हैं.

खीरे के गोल टुकड़े भी 20 मिनट तक आंखों पर रखे जा सकते हैं.

1 चम्मच सूखा आंवला रात भर पानी में भिगो कर रखें और अगले दिन सुबह मलमल के कपड़े से छान कर इस पानी में 1 कप पानी और मिला कर इस पानी से रोज आंखें धोएं.

अगर आप की आंखें सूजी रहती हैं, तो एक आलू को छिलके सहित रगड़ कर बंद आंखों पर 20 मिनट तक रखें.

अगर आप की आंखें लाल हैं और उन में जलन महसूस हो रही है, तो सिर की दही से मालिश करें.

मेकअप

वैसे तो जहां तक संभव हो, आंखों में सुरमा, काजल, आईलाइनर, मसकारा आदि नहीं लगाना चाहिए. लेकिन आजकल तो मेकअप के बिना जैसे जीवन अधूरा है, इसलिए मेकअप का सामान खरीदते व लगाते समय निम्न बातों का ध्यान रखें:  आंखें बहुत संवेदनशील होती हैं, इसलिए आई मेकअप के सामान को ले कर कोई समझौता न करें. हमेशा किसी अच्छी कंपनी का सामान ही उपयोग करें.

परफ्यूम आंखों को नुकसान पहुंचाता है. इसलिए उसे लगाते समय ध्यान रखें कि उस के छींटे आंखों में न पड़ें. कानों के पीछे परफ्यूम का प्रयोग न करें.

सोने से पहले अपने चेहरे को अच्छी तरह से धोएं. ध्यान रहे कि सोते समय आप के चेहरे पर कोई मेकअप नहीं होना चाहिए, क्योंकि मेकअप में प्रयोग क्रीम, आईशैडो, आईलाइनर, काजल आदि हमारी त्वचा व आंखों को नुकसान पहुंचाते हैं. इसलिए घर पहुंचते ही तुरंत मेकअप को हटा दें. सोते समय चेहरा धोने के बाद सिर्फ अच्छी किस्म की नाइटक्रीम का ही प्रयोग करें.

अन्य ध्यान देने योग्यबातें

आंखों का कोई भी ड्रौप खरीदते समय उस की ऐक्सपाइरी डेट अवश्य चैक करें.

आंखों की दवा की शीशी का प्रयोग खोलने की तिथि से 1 महीने के भीतर ही करें.

अगर आप की आंखें स्वस्थ हैं तब भी साल में 1 बार उन्हें आंखों के विशेषज्ञ से अवश्य चैक करवाएं. अगर आप की दूर की या फिर नजदीक की नजर कमजोर है, आप चश्मे या फिर कौंटैक्ट लैंस का प्रयोग करती हैं तो हर 6 महीने बाद अपनी आंखें टैस्ट करवाएं. नंबर बदलने पर तुरंत चश्मा बदलें.

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