हेल्दी टिफिन हेल्दी किड्स कॉम्पटीशन

हेल्दी टिफिन बच्चों को हेल्दी रखने में सहायक होते हैं. हालांकि खाने में स्वाद और स्वास्थ्य दोनों को संतुलित करना मुश्किल है. ये एक ऐसी समस्या है, जिसका मदर्स हमेशा से समाधान निकालने की कोशिश में लगी रहती हैं. टिफिन सिर्फ हेल्दी फूड सर्व करने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसे साफ हेल्दी लंच बौक्स में परोसना भी जरूरी होता है. एंटी बैक्टीरियल एक्सो, सिर्फ सफाई नहीं करता, बल्कि गंदे बर्तनों पर 10 सेकंड में 700 पर्सेंट बढ़ने वाले बैक्टीरिया का खात्मा भी करता है और लंच बौक्स को साफ करके टिफिन बौक्स को भी हेल्दी बनाता है.

आइए आपको बताते हैं कुछ मजेदार रेसिपीज के बारे में…

  1. वेज काठी रोल

1 कप आटे का डो बना कर रेस्ट देने के बाद चपाती बना कर देशी घी में सेंक लें. पैन में तेल गरम कर पहले 50 ग्राम पनीर क्यूब्स को सुनहरा तलें फिर पनीर निकाल कर इसी पैन में 2 कुटे लहसुन और 1 कटी हरीमिर्च फ्राई कर 1 कप कटी मिक्स वैज (शिमला मिर्च, गाजर पत्तागोभी) फ्राई कर लें. इसमें पनीर, नमक और थोड़ा कालीमिर्च पाउडर मिक्स करें. आधा चम्मच सोया सॉस और 1 चम्मच टोमेटो सॉस इसमें मिक्स कर थोड़ा फ्राई करके निकाल लें. रोटी में मेयोनीज या बटर लगा कर तैयार फिलिंग भरें और रोल तैयार है.

प्रतियोगिता की विजेता: गीता कपूर, दिल्ली

स्पाइसी पनीर काठी रोल्स

2. कौर्न पिकअप्स

1 कप मैदे में नमक व बटर मिक्स कर गूंध लें. ग्राइंडर में कौर्न, ग्रीन चिली, 2 लहसुन कलियां, थोड़ी अदरक ग्राइंड कर लें. पैन में तेल गरम कर राई और करीपत्ता भूनें फिर ग्राइंड किया पेस्ट और 1 कप दूध मिला कर गाढ़ा होने तक पकाएं. मिश्रण ठंडा होने पर 1 बड़ा चम्मच चीज मिक्स करें. मैदे के डो से चौकोर व छोटी चपातियां बेलें. इनमें कौर्न की फिलिंग भर कर पानी से अच्छी तरह सील करें बटर से ग्रीस कर 10 मिनट तक 180 डिग्री पर बेक करें.

 

हमें अपने हेल्दी और टेस्टी लंच बौक्स रेसिपीज को grihshobha@delhipress.biz पर भेजें या 9650966493 पर व्हाट्सऐप करें. ताकि आप दूसरी मदर्स की मदद कर सकें और यहां आपको अपनी हेल्दी रेसिपीज को फीचर करने का मौका मिल सकें.

स्कैन करें और जानें कि आपके बच्चों के लंच बौक्स स्वास्थय समस्याओं का कारण कैसे हो सकते हैं.

EXO

रेसिपी भेजने की अंतिम तिथि: 25 दिसंबर 2023

चयनित रेसिपीज को पत्रिका में प्रकाशन और 1000/- का अमेजन गिफ्ट वाउचर जीतने का मौका.

Wedding Special: अभिनेत्रियाँ जो शादी से पहले हुई प्रेग्नेंट

बॉलीवुड ने हमेशा अजीबोगरीब सरप्राइज देकर अपने फैन्स को चकित किया है और फैन्स भी इन ख़बरों को सुनने के लिए तौयार रहते है. इसी कड़ी में अभिनेत्रियों का अपने कोस्टार, क्रिकेटर, निर्माता, निर्देशक आदि के प्रेम में पड़ जाना आम बात है, जिसमे वे शादी से पहले ही माँ बन जाती है. प्रेम – प्रसंग, शादी और बच्चे ये कांसेप्ट सालों से चली आ रही है, इसमें कई ऐसी अभिनेत्रियाँ है, जो शादी से पहले प्रेग्नेंट तो हुई और उसे छुपाकर रखना उचित समझा, लेकिन आज की तारीख में बहुतों की सोच बदल चुकी है. शादी से पहले माँ बनने को आज गलत नहीं ठहराया जाता. बॉलीवुड की कई ऐसी एक्ट्रेसेस है, जो शादी से पहले माँ बन चुकी है.

नीना गुप्ता

आज से पहले शादी के बिना प्रेग्नेंट होने को एक गलत बात माना जाता था, जिसका जिक्र कई बार अभिनेत्री नीना गुप्ता ने कई बार अपने इंटरव्यू में कहा है. 80 के दशक में जब वह वेस्टइंडीज के प्रसिद्ध क्रिकेटर विवियन रिचर्ड्स के साथ प्रेम संबंधों में रही और बिन ब्याहे ही माँ बनकर बेटी मसाबा को जन्म दिया तो परिवार से लेकर आसपास के सभी ने उसकी कड़ी आलोचना की, उनसे परिवार और कैरियर का रिश्ता भी टुटा, लेकिन उन्होंने किसी बात पर बिना ध्यान दिए ही आगे बढ़ती गयी. आज वह खुश है, क्योंकि उनकी बेटी मसाबा उनके साथ है और उनकी हर बात में साथ देती है.

 

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हालाँकि विवियन ने बेटी को अपना नाम दिया, पर नीना को पत्नी का दर्जा नहीं दिया. नीना ने सिंगल मदर बनकर बेटी को पाला, जो एक प्रसिद्ध फैशन डिज़ाइनर है. इसके बाद साल 2008 में नीना ने चार्टेड एकाउंटेंट विवेक मेहरा से शादी की और अब खुश है. नीना हमेशा से स्पष्टभाषी रही है, जिसका प्रभाव उसके कैरियर पर भी पड़ा, पर वह इससे घबराती नहीं.

श्री देवी

80 की दशक में हिंदी सिनेमा जगत में राज करने वाली अभिनेत्री श्रीदेवी ने पहले मिथुन चक्रवर्ती से शादी की थी. बाद में उन्होंने मिथुन को डिवोर्स देकर निर्माता,निर्देशक बोनी कपूर से शादी की. श्री देवी भी शादी से पहले सात महीने की प्रेग्नेंट थीं.

 

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इलियाना डिक्रूज

बॉलीवुड एक्ट्रेस इलियाना डिक्रूज कुछ महीनों पहले ही मां बनी हैं. उन्होंने एक अगस्त, 2023 को अपने बेटे का दुनिया में स्वागत किया है. एक्ट्रेस सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं और अपने फैंस के साथ अपने बेटे की तस्वीरें शेयर करती रहती हैं, लेकिन उनके चाहने वालों को आजतक पता नही चला है कि उनके बेटे का पिता कौन है. उन्होंने अपने बेटे का नाम कोआ फीनिक्स डोलन रखा है और पहली थैंक्स गिविंग उसके साथ मना रही है.

 

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अलिया भट्ट

अभिनेत्री अलिया भट्ट भी शादी से पहले प्रेग्नेंट हुई थी, यही वजह है कि उन्होंने 14 अप्रैल 2022 को अभिनेता रणवीर कपूर से शादी की और उन्होंने नवम्बर 2022 को बेटी राहा को जन्म दिया. उन्होंने इस बात को छुपाकर रखा और शादी के दो महीने बाद ही प्रेग्नेंट होने की बात शेयर की.

 

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दीया मिर्ज़ा

बॉलीवुड एक्ट्रेस दीया मिर्जा भी शादी पहले प्रेग्नेंट हो गई थीं. उन्होंने बिजनेसमैन वैभव रेखी से शादी की है. शादी के चार महीने बाद ही दीया मिर्जा ने बेटे को जन्म दिया था. असल में दीया ने 15 फरवरी 2021 को वैभव रेखी से दूसरी शादी की थी. जब दीया हनीमून पर गईं, तो उन्होंने बेबी बंप के साथ तस्वीरें शेयर कर सबको चौंका दिया. इससे ये साफ हो गया था कि दीया शादी से पहले ही प्रेग्नेंट हो गई थीं.

नेहा धूपिया

नेहा धूपिया ने अपने बॉयफ्रेंड अंगद बेदी के साथ 10 मई वर्ष 2018 के दौरान गुपचुप शादी रचाई, क्योंकि शादी से पहले नेहा प्रेग्नेंट थीं. नेहा ने अंगद बेदी से आनन-फानन में शादी कर ली. अचानक शादी की खबर के दो महीने बाद ही नेहा ने ये कहकर सबको सरप्राइज कर दिया कि वो प्रेग्नेंट हैं. इसके बाद नेहा ने नवंबर 2018 में बेटी मेहर को जन्म दिया.

 

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कल्कि कोचलिन

बॉलीवुड के मशहूर डायरेक्टर अनुराग कश्यप से तलाक के बाद एक्ट्रेस कल्कि कोचलिन का अफेयर इजरायली शख्स गाय हर्शबर्ग से रहा. कहा जाता है कि इस रिश्ते की वजह से कल्कि बिना शादी के मां बन गईं और वह इसे गलत नहीं ठहराती.

 

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एमी जैक्सन

सिंह इज ब्लिंग’ फेम अभिनेत्री एमी जैक्सन ने हिंदी के अलावा साउथ सिनेमा में अपनी एक्टिंग कर चुकी है. एक्ट्रेस एमी जैक्सन का नाम बिन ब्याही मां बनने वाली एक्ट्रेसेस की लिस्ट में शामिल है. एमी जैक्सन साल 2019 में चर्चा में आई थीं,जब उनका नाम बॉयफ्रेंड जॉर्ज पायनिटू से जुड़ा. दोनों बिना शादी के ही पैरेंट्स भी बने. एक्ट्रेस ने बेटे एंड्रियाज को जन्म दिया था. हालांकि, बाद में दोनों के अलग होने की खबरें भी आई. एमी ने अभी तक शादी नहीं की है. वह अब एक बच्चे की सिंगल मां हैं.

 

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गैब्रिएला-डेमेट्रिएड्स

मॉडल एक्ट्रेस गैब्रिएला-डेमेट्रिएड्स भी बिना शादी के मां बन चुकी हैं. गैब्रिएला-डेमेट्रिएड्स एक्टर अर्जुन रामपाल की गर्लफ्रेंड हैं. दोनों ने अभी तक शादी नहीं की, लेकिन दोनों एक बेटे के अरिक के पैरेंट्स हैं. अर्जुन रामपाल वर्ष 1998 में सुपरमॉडल मेहर जेसिया से शादी की थी. इस शादी से दो बेटियां महिका और मायरा हैं. मेहर अर्जुन का तलाक हो गया है. इसके बावजूद भी अर्जुन ने गैब्रिएला संग शादी नहीं की है.

 

माही गिल

अभिनेत्री माही गिल ने 17 साल की उम्र में ही शादी कर ली थी. लेकिन यह शादी नहीं चल सकी और जल्द ही रिश्ता खत्म हो गया. इसके बाद माही ने कभी शादी नहीं की, लेकिन साल 2019 में उनकी ढाई साल की बेटी वेरोनिका है, ये कहकर सबकों चौका दिया था. जब उनसे इस बारें में बात की गई तो उन्होंने कहा कि वह अपने बॉयफ्रेंड के साथ गोवा में रिलेशनशिप में रहती है. शादी के बगैर भी परिवार और बच्चे हो सकते हैं, अगर बिना शादी के बच्चे हो गए हैं, तो भी इसमें किसी को कोई प्रॉब्लम नहीं होनी चाहिए. शादी करना अच्छी बात है, लेकिन हर किसी की अपनी जिंदगी है, हर किसी के अपने सिद्धांत और एक पर्सनल चॉइस है.

 

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इसके अलावा कोंकना सेन शर्मा, सारिका, स्वरा भास्कर जैसी कई हीरोइनों ने शादी से पहले माँ बन अपने फैंस को चकित किया है.

शाहरुख की बेटी की फिल्म निर्देशक सुजाय और सिद्धार्थ मिल कर डुबाएंगे

यूं तो शाहरुख खान की बेटी सुहाना खान बतौर अभिनेत्री जोया अख्तर की फिल्म ‘‘द अर्चीज’’ में नजर आने वाली हैं.जो कि लगभग डेढ़ वर्ष बाद अब सात दिसंबर को ‘नेटफ्लिक्स’ पर स्ट्रीम होने वाली है. लेकिन इस फिल्म में सुहाना खान के साथ अमिताभ बच्चन की नातिन आगस्त्या नंदा,बोनी कपूर व श्रीदेवी की बेटी खुशी कपूर,अदिति सहगल, वेदांग रैना व मिहिर आहुजा सहित कई नवोदित कलाकार हैं.

शायद शाहरुख खान को इस बात का अहसास हो चुका है कि ‘द अर्चीज’ से उनकी बेटी सुहाना खान के कैरियर को कोई फायदा नही होना है.इसी वजह से अब शाहरुख खान खुद अपनी बेटी सुहाना खान के लिए सिद्धार्थ आनंद के साथ मिलकर  फिल्म ‘किंग’ का निर्माण कर रहे हैं. इस फिल्म में शाहरुख खान भी अपनी बेटी सुहाना के साथ अभिनय करने वाले हैं.इस फिल्म के निर्देशन की जिम्मेदारी सुज्वाॅय घोष को दी गयी है. मगर सिद्धार्थ आनंद इस फिल्म के सुपर निर्देशक हैं.

मजेदार बात यह है कि सुज्वाॅय घोष और सिद्धार्थ आनंद दो विपरीत धुरी के निर्देशक हैं. सुज्वाॅय घोष अब तक ‘झंकार बीट्स’, ‘अलादीन’, ‘कहानी’, ‘कहानी 2’,‘बदला’ और ‘लस्ट स्टोरीज 3’ सहित कई फिल्में निर्देशित कर चुके हैं.सुज्वाॅय घोष के बारे में मशहूर है कि वह उन निर्देशकों में से हैं,जो कि सेंसर बोर्ड में इस बात को नही बता पाते कि फिल्म का कोई दृश्य उनकी फिल्म के लिए कितना मायने रखता है. वहीं सिद्धार्थ आनंद ‘सलाम नमस्ते’,‘तारा रम पम’,‘बचना ऐ हसीनों’,‘वार’ और ‘पठान’ सहित बीस वर्ष के कैरियर मंे महज नौ फिल्में निर्देशित की हैं.

फिल्म ‘‘पठान’’ में सिद्धार्थ आनंद के निर्देशन में शाहरुख खान अभिनय कर चुके हैं.और सिद्धार्थ आनंद के निर्देशन से शाहरुख खान अति प्रसन्न हैं.इसीलिए उन्होने सुहाना खान की फिल्म ‘किंग’ में एक्शन दृश्यों के अलावा चेजिंग व रोमाचंक दृश्यों के निर्देशन की जिम्मेदारी सिद्धार्थ आनंद को सौंपी है.जबकि फिल्म का निर्देशन सुज्वाॅय घोष करने वाले हैं.

अब शाहरुख खान ने क्या सोचकर फिल्म में दो निर्देशक रखे हैं,यह तो वही जाने…मगर बौलीवुड में शंका जाहिर की जा रही है कि शाहरु खान का यह दांव कहीं फिल्म ‘किंग’ के साथ ही सुहाना खान का कैरियर भी डुबा न दें.क्योकि दो अलग अलग स्टाइल के  निर्देशकों के निर्देशन से बनी फिल्म में जर्क आना स्वाभाविक है.दूसरी बात यदि दोनों के मन में खुद को बेहतरीन बताने की बता आ गयी,तब भी फिल्म का सत्यानाश होना तय है. वहीं बौलीवुड का एक तबका मानकर चल रहा है कि शाहरुख खान को सिद्धार्थ आनंद या सुज्वाॅय घोष में से किसी पर भी पूरा भरोसा नही है.इसलिए उन्होने अलग अलग तरह के दृश्यों के लिए अलग अलग निर्देशक रखे हैं..लेकिन फिल्म ‘किंग’ के सफल व बेहतरीन फिल्म बनने की बजाय ‘चूँ चूँ का मुरब्बा’ बनने की संभावनाएं ज्यादा नजर आ रही हैं.

चीयर गर्ल: भाग 1- फ्रैंड रिक्वैस्ट एक्सैप्ट करने के बाद क्या हुआ उसके साथ

जीहां मैं चीयर गर्ल हूं उस की जिंदगी में और यह भूमिका मैं पिछले 3 वर्षों से निभा रही हूं. आप सोच रहे होंगे यह क्या अजीब सा नाम या रिश्ता है. यह रिश्ता तो है ही नहीं बस यह एक अजीब सा एक पागलपन है जो मैं सबकुछ जानते हुए भी कर रही हूं और वह अपने को खास अनुभव करने के लिए करता है.

आज भी याद है मुझे वह दिन, शायद 15 जनवरी की बात होगी, एक फ्रैंड रिक्वैस्ट आई थी, कुछ म्यूच्युअल फ्रैंड भी थे इसलिए मैं ने स्वीकार कर ली. रिक्वैस्ट होते ही, उधर से मैसेज आरंभ हो गए, मैं ने भी जवाब देने आरंभ कर दिए.

मैसेज आया, ‘‘तुम बहुत खूबसूरत हो.’’

मैं ने लिखा, ‘‘हा… हा… हा…’’

मैसेज आया, ‘‘अरे बाबा सच बोल रहा हूं, तुम्हारा पति बहुत खुशहाल वाला है.’’

मैं ने फिर लिखा, ‘‘हा… हा… हा… पर इस हा… हा… में अंदर का दर्द, आंखों में आंसू बन कर आ गया,’’ उस ने नंबर मांगा.

मैं ने लिखा, ‘‘इतनी जल्दी? अभी तो मैं तुम को जानती भी नहीं… बस यह जानती हूं कि हम एक ही स्कूल में पढ़े थे.’’

मैसेज आया, ‘‘तभी तो मांग रहा हूं, जानने के लिए पर खूबसूरत लड़कियों के नखरे होते हैं, कोई बात नहीं रहने दो.’’

मैं ने मन में सोचा कि कोई किशोरी तो नहीं हूं और न ही यह मेरा कोई आशिक, 2 सभ्य लोग क्यों नहीं नंबर ऐक्सचेंज कर सकते हैं?

न जाने बातों में क्या कशिश थी कि मैं ने सहर्ष नंबर दे दिया. 1 मिनट में ही मेरे मोबाइल की स्क्रीन पर नंबर फ्लैश हो रहा था. कुछ सोचते हुए मैं ने फोन उठा लिया. उधर से एक बहुत बेलौस हंसी सुनाई दे रही थी एक ऐसी हंसी जिस के लिए मैं तरस रही थी.

वह बोला, ‘‘बस इसलिए फोन किया कि कोई गुंडा नहीं हूं, एक सीधासादा इंसान हूं और तुम सच में बहुत खूबसूरत हो.’’

मैं थोड़ा सा शरमा गई पर मन ही मन खुश भी हो रही थी. बस ‘‘थैंक यू’’ बोल पाई थी और फोन काट दिया. फिर कुछ देर बाद व्हाट्सऐप पर उस का मैसेज था, ‘‘थैंक्स फौर टौकिंग ऐंड ब्यूटीफुल पिक्चर औफ मम्मी ऐंड डाटी.’’

मैं एक शादीशुदा 40 वर्षीय औरत हूं जो अपनी बिखरी हुई शादी से गुजर रही हूं. मेरा पति मेरा हो कर भी मेरा नहीं है, यह बात मुझे बहुत सालों से पता है पर समाज और बच्चों की खातिर मैं इस रिश्ते को निभा रही हूं. पति मुझे समाज में अपना नाम दे रहा है और मैं उस के मकान को घर बना कर संजो रही हूं.

प्यार जैसा बहुत कुछ था हमारे रिश्ते में शादी के पहले 2 वर्षों तक, फिर जिम्मेदारियों

के बोझ तले पता नहीं क्या हो गया कि शादी रह गई और प्यार काफूर हो गया.

आज पति का देर से आना भी नहीं खल रहा था. अपने नए फेसबुक फ्रैंड का बहुत देर तक प्रोफाइल चैक करती रही.

इसी बीच मैं ने देखा उस ने मेरी लगभग सब पिक्चर्स को लाइक कर दिया है. हर पिक्चर पर बहुत प्यारे कमैंट दिए हैं. मन ही मन में 40 वर्ष की उम्र में भी 14 वर्ष की किशोरी की तरह इतरा रही थी.

फिर जब बच्चे इधरउधर ट्यूशन इत्यादि जाते हम रोज फोन पर बात करते. उस की बातों ने मेरी जिंदगी को पंख लगा दिए, खुद को खास महसूस करने लगी, फिर से एक औरत की तरह महसूस करने लगी. बहुत दिनों बाद पार्लर का मुंह देखा पर हर कार्य कराते हुए उस का चेहरा ही सामने था.

हम दोनों जब भी फोन पर बात करते वह यही बोलता कि मैं कितनी खूबसूरत हूं और इस उम्र में भी कितना मैंटेन कर रखा है. पर उस की बातों से एक अजीब सा डर भी मन में समा गया क्योंकि आईना उस की बातों की गवाही नहीं

देता था.

देखतेदेखते 2 माह बीत गए और वह बारबार मिलने के लिए दबाव बना रहा था. मैं मिलने के लिए उत्सुक थी पर फिर भी डर रही थी फिर कहीं जो आकर्षण मेरी तसवीरों ने पैदा किया है वह मिलने के बाद खत्म न हो जाए. फिर भी हम ने मार्च में मिलना निश्चित किया. उस ने कहा साड़ी उस की पसंदीदा ड्रैस है.

बच्चों के जाने के बाद बहुत देर तक अलमारी खोल कर खड़ी रही, फिर फिरोजी रंग की साड़ी निकाली और उस से मेल खाते कानों के बूंदे, बहुत देर तक तैयार होती रही. जब गहरे गुलाबी रंग की लिपस्टिक लगा रही थी तो आईने में खुद को देख कर संतुष्ट हो गई.

दिल धकधक कर रहा था पर फिर भी वहां चली गई. एक सफेद कार मेरी बाजू में आ खड़ी हो गई. अंदर वही बैठा था. अपनी तसवीर से अधिक आकर्षक. मेरे बैठते ही उस ने दोस्ती का हाथ आगे बढ़ाया. मैं ने भी हाथ मिलाया और फिर वही मदमस्त हंसी.

वह ठहाके पर ठहाके लगा रहा था. घरपरिवार की बातें इत्यादि. मैं हवा की तरह हलका महसूस कर रही थी बहुत सालों बाद. उस ने रेस्तरां के सामने कार रोकी और मुझ से बोला, ‘‘मैडम क्या और्डर करूं?’’

मैं ने बोला, ‘‘कुछ भी कर दो.’’

कुछ स्टार्टर्स आए, वह बीचबीच में कनखियों से मुझे देख रहा था. मेरा चेहरा लाल हो रहा था. मेरी स्थिति भांपते हुए वह बोला, ‘‘इतनी क्यों शरमा रही हो? मैं क्या तुम्हें पसंद करने आया हूं? हम तो ऐसे ही 2 दोस्तों की तरह मस्ती करने आये हैं.’’

मुझे अपने गंवारूपन पर शर्म आ रही थी. विवाह से पहले कुछ घर के माहौल के कारण और कुछ अपने दब्बूपन के कारण कभी कोई पुरुष मित्र नहीं बनाया. विवाह मांबाप की मरजी से हुआ और फिर जिंदगीरूपी चक्की में पिस गई.

खाने के पश्चात कार में बैठ कर हम यों ही सड़कें नापने लगे. फिर यह क्या एक अनजनी सुनसान सड़क पर जाते ही वह मेरे शरीर से खेलने लगा. मैं थोड़ा सा विरोध करने लगी तो वो धीमे से बोला, ‘‘यह क्या बच्चों की तरह व्यवहार कर रही हो… मुझे ये नखरे नहीं चाहिए.’’

मैं थोड़ा सा कन्फ्यूज हो गई और उस के साथ एक असुरक्षा की भावना भी कि कहीं यह मुझे छोड़ कर न चला जाये.

मैं कुछ झिझकते हुए बोली, ‘‘मैं इस के लिए तैयार नहीं थी.’’

वह बिना कुछ कहे अपने हिसाब से मेरे शरीर पर हाथ फेरता रहा और वही वाक्य दोहराता रहा जो अकसर पुरुष इस स्थिति में दोहराते हैं.

चशमा लगाने से मेरे आंखों के चारों ओर काले घेरे हो गए हैं, कोई उपाय बताएं?

सवाल

मेरी उम्र 21 साल है. लंबे समय से चश्मा लगाने से आंखों के चारों ओर काले घेरे बन गए हैं. ये घेरे बुरे लगते हैं. इन की वजह से मैं बहुत परेशान रहती हूं. घर से बाहर जाना भी अच्छा नहीं लगता. कृपया कोई उपाय बताएं?

जवाब

अगर आप चश्मे का प्रयोग आवश्यकता से कम करती हैं तो आप की आंखों की मांसपेशियां जोर डालने के कारण कमजोर हो जाती हैं. इस से आप का ब्लड सर्कुलेशन कम होने लगता है जिस के कारण आप के काले घेरे बढ़ जाते हैं. आप इस बात का विशेष ध्यान रखें कि आंखों पर अतिरिक्त जोर न पड़े. चश्मा लगाने पर भी आप की आंखों पर दबाव लगे तो किसी विशेषज्ञ से आंखों की जांच दोबारा करवाएं अन्यथा अपने चश्मे का प्रयोग निरंतर करें. बेहतर होगा कि आप चश्मे की जगह लैंस लगवा लें. आजकल लैंस नैचुरल ही नहीं कई खूबसूरत रंगों में मिलते हैं और आप की खूबसूरती में चारचांद भी लगाते हैं.

इस के अलावा अपनी आंखों पर बादाम के तेल की कुछ बूंदों से आंखों पर रिंग फिंगर से हलकेहलके बाहर से अंदर की ओर लाते हुए गोले में मसाज करें. खीरे को कद्दूकस कर के अपनी आंखों पर 10 से 12 मिनट तक रखें. इस से भी आप के काले घेरे काफी हद तक सही हो जाएंगे. ऐलोवेरा के एक पत्ते को ले कर धो कर उस के अंदर से पल्प निकाल लें. गूदे में कुछ बूंदें विटामिन ए तेल डालने और कुछ बूंदें ड्रौप्स हनी की डाल लें. फिर इन तीनों को मिक्स कर के इस से अपनी आंखों के चारों तरफ कुछ देर तक मसाज करें और छोड़ दें. सुबह आंखों को धो लें.

ऐसा लगातार करने से आप की आंखों के काले घेरे काफी हद तक ठीक हो जाएंगे.

समस्याओं के समाधान ऐल्प्स ब्यूटी क्लीनिक की फाउंडर, डाइरैक्टर डा. भारती तनेजा द्वारा      

पाठक अपनी समस्याएं इस पते पर भेजें : गृहशोभा, ई-8, रानी झांसी मार्ग, नई दिल्ली-110055.

स्रूस्, व्हाट्सऐप मैसेज या व्हाट्सऐप औडियो से अपनी समस्या 9650966493 पर भेजें.      

सच्चाई: क्या सपना सचिन की शादी के लिए घरवलों को राजी कर पाई- भाग 3

‘‘आप मिली हैं न, जीजाजी से भी तो मिलवाना है इसे,’’ सचिन बोला, ‘‘आप घर पर ही आराम करिए, मैं सिमरन को ले कर वहीं आ जाऊंगा.’’

‘‘इस से अच्छा और क्या होगा, जरूर आओ,’’ सपना मुसकराई, ‘‘खाना हमारे साथ ही खाना.’’

शाम को सचिन और सिमरन आ गए. सलिल की चुटकियों से शीघ्र ही वातावरण अनौपचारिक हो गया. जब किसी काम से सपना किचन में गई तो सचिन उस के पीछेपीछे आया.

‘‘आप ने मम्मी से बात की दीदी?’’

‘‘हां, हालचाल पूछ लिया सब का.’’

‘‘बस हालचाल ही पूछा? जो बात करनी थी वह नहीं की? आप को हो क्या गया है दीदी?’’ सचिन ने  झल्ला कर पूछा.

‘‘तजरबा, सही समय पर सही बात करने का. सिमरन कहीं भागी नहीं जा रही है, शादी करेगी तो तेरे से ही. जहां इतने साल सब्र किया है थोड़ा और कर ले.’’

‘‘इस के सिवा और कर भी क्या सकता हूं,’’ सचिन ने उसांस ले कर कहा.

इस के बाद सपना ने सिमरन से और भी आत्मीयता से बातचीत शुरू कर दी. यह सुन कर कि सचिन औफिस के काम से मुंबई जा रहा है, सपना उस शाम सिमरन के घर चली गई. उस का घर बहुत ही सुंदर था. लगता था बनवाने वाले ने बहुत ही शौक से बनवाया था.

‘‘बहुत अच्छा किया तुम ने यह घर न बेच कर सिमरन. जाहिर है, शादी के बाद भी यहीं रहना चाहोगी. सचिन तैयार है इस के लिए?’’

‘‘सचिन तो बगैर किसी शर्त के मेरी हर बात मानने को तैयार है, लेकिन मैं बगैर उस के मम्मीपापा की रजामंदी के शादी नहीं कर सकती. मांबाप से उन के बेटे को विमुख कभी नहीं करूंगी. प्रेम तो विवेकहीन और अव्यावहारिक होता है दीदी. उस के लिए सचिन को अपनों को नहीं छोड़ने दूंगी.’’

‘‘यह तो बहुत ही अच्छी बात है सिमरन. चाचाचाचीजी यानी सचिन के मम्मीपापा भी बहुत अच्छे हैं. अगर उन्हें ठीक से सम झाया जाए यानी तुम्हारी शर्त का कारण बताया जाए तो वे भी सहर्ष मान जाएंगे. लेकिन सचिन ने उन्हें कारण बताया ही नहीं है.’’

‘‘बताता तो तब न जब उसे खुद मालूम होता. मैं ने उसे कई बार बताने की कोशिश की, लेकिन वह सुनना ही नहीं चाहता. कहता है कि जब मेरे साथ हो तो भविष्य के सुनहरे सपने देखो, अतीत की बात मत करो. मु झे भी अतीत याद रखने का कोई शौक नहीं है दीदी, मगर अतीत से या जीवन से जुड़े कुछ तथ्य ऐसे भी होते हैं जिन्हें चाह कर भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, उन के साथ जीना मजबूरी होती है.’’

‘‘अगर चाहो तो उस मजबूरी को मु झ से बांट सकती हो सिमरन,’’ सपना ने धीरे से कहा.

‘‘मैं भी यही सोच रही थी दीदी,’’ सिमरन ने जैसे राहत की सांस ली, ‘‘अकसर देर से जाने और बारबार छुट्टी लेने के कारण न नौकरी पर ध्यान दे पा रही थी न पापा के इलाज पर, अत: मैं नौकरी छोड़ कर पापा को इलाज के लिए मुंबई ले गई थी. वहां पैसा कमाने के लिए वैक्यूम क्लीनर बेचने से ले कर अस्पताल की कैंटीन, साफसफाई और बेबी सिटिंग तक के सभी काम लिए. फिर मम्मीपापा के ऐतराज के बावजूद पैसा कमाने के लिए 2 बार सैरोगेट मदर बनी.

 

तब तो मैं ने एक मशीन की भांति बच्चों को जन्म दे कर पैसे देने वालों को पकड़ा

दिया था, लेकिन अब सोचती हूं कि जब मेरे अपने बच्चे होंगे तो उन्हें पालते हुए मुझे जरूर उन बच्चों की याद आ सकती है, जिन्हें मैं ने अजनबियों पर छोड़ दिया था. हो सकता है कि विचलित या व्यथित भी हो जाऊं और ऐसा होना सचिन और उस के बच्चे के प्रति अन्याय होगा. अत: इस से बेहतर है कि यह स्थिति ही न आने दूं यानी बच्चा ही पैदा न करूं. वैसे भी मेरी उम्र अब इस के उपयुक्त नहीं है. आप चाहें तो यह सब सचिन और उस के परिवार को बता सकती हैं. उन की कोई भी प्रतिक्रिया मु झे स्वीकार होगी.’’

‘‘ठीक है सिमरन, मैं मौका देख कर सब से बात करूंगी,’’ सपना ने सिमरन को आश्वासन दिया.

सिमरन ने जो कहा था उसे नकारा नहीं जा सकता था. उस की भावनाओं का खयाल रखना जरूरी था. सचिन के साथ तो खैर कोई समस्या नहीं थी, उसे तो सिमरन हर हाल में ही स्वीकार थी, लेकिन उस के घर वालों से आज की सचाई यानी सैरोगेट मदर बन चुकी बहू को स्वीकार करवाना आसान नहीं था. उन लोगों को तो सिमरन की बड़ी उम्र बच्चे पैदा करने के उपयुक्त नहीं है कि दलील दे कर सम झाना होगा. सचिन के प्यार के लिए इतने से कपट का सहारा लेना तो बनता ही है.

Winter Special: ठंड में क्या खाएं क्या नहीं

प्रकृति की रंगीन फूड बास्केट न केवल खूबसूरत और आकर्षक दिखाई देती है, बल्कि आप को सर्दी के दिनों में पोषक पदार्थों से भरपूर आहार भी प्रदान करती है. इस मौसम में आप की हड्डियों को गरमाहट देने, आप को सर्दीजुकाम से बचाने और आप के परिवार की प्रतिरक्षण क्षमता बढ़ाने के लिए बहुत से मौसमी फल और सब्जियां उपलब्ध हैं, जिन का सही तरीके से उपयोग कर आप स्वस्थ व फिट भी रह सकते हैं.

सर्दियों में भूख को दबाना नहीं चाहिए. इस के बजाय आप को इस बात पर गौर करना चाहिए कि आप इस मौसम में स्वास्थ्यप्रद तरीके से कैसे प्राकृतिक खाद्यपदार्थों का उपयोग कर सकते हैं:

हरी पत्तेदार सब्जियां बेहतरीन भोजन हैं क्योंकि उन में फाइबर, फौलिक ऐसिड, विटामिन सी, पोटैशियम, मैग्नीशियम और अन्य पोषक पदार्थ पर्याप्त मात्रा में होते हैं. तो हरी सब्जियां खाएं और स्वस्थ व फिट रहें.

कम चीनी वाली गाजर की खीर खाएं. सर्दियों में गाजर का विभिन्न रूपों में सेवन करना स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद है.

सिट्रस फल विटामिन सी से भरपूर होते हैं. इन का सेवन प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाता है और सर्दीजुकाम से लड़ने की ताकत देता है. इसलिए उन्हें खाने पर भी ध्यान दें.

सर्दियों में सामान्य तापमान के भोजन का सेवन करना चाहिए और दिल के मरीजों को तेल युक्त एवं तले खाद्यपदार्थों के सेवन से बचना चाहिए. नमक का सेवन भी नियंत्रित मात्रा में करना चाहिए. उन्हें संतृप्त वसा के बजाय खाना पकाने में असंतृप्त वसीय पदार्थों का इस्तेमाल करना चाहिए. यानी रिफाइंड, जैतून या सरसों के तेल में खाना बनाना चाहिए.

मधुमेह के रोगियों को चीनी का सेवन नियंत्रित रूप से करना चाहिए. उन्हें रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट के सेवन से बचना चाहिए और कौंप्लैक्स कार्बोहाइड्रेट का सेवन करना चाहिए. यानी साबूत गेहूं, जई और मल्टीग्रेन आटे का इस्तेमाल करना उन की सेहत के लिए फायदेमंद होता है.

सर्दियों में हरी सब्जियों व अन्य फलों और सब्जियों के सेवन से शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर भी सही मात्रा में बना रहता है.

पानी और तरल पदार्थों का सेवन पर्याप्त मात्रा में करना चाहिए और बच्चों व बुजुर्गों को ठंडी चीजों जैसे आइसक्रीम आदि के सेवन से बचना चाहिए.

जो लोग सर्दियों में वजन कम करना चाहते हैं, उन्हें वसा और तेल युक्त पदार्थों जैसे परांठों का सेवन नहीं करना चाहिए. उन के आहार में फाइबर, फलों, सलाद और तरल पदार्थों की पर्याप्त मात्रा होनी चाहिए. अनाज, मल्टीग्रेन आटा, ब्राउन ब्रैड और उच्च फाइबर से युक्त बिस्कुट भी वजन कम करने में मददगार होते हैं.

अमरूद, गाजर, सेब, हरी पत्तेदार सब्जियां, कच्चे फल, संतरा और खीरा फायदेमंद होते हैं और घर में बने टमाटर, मिलीजुली सब्जियों और हरी पत्तेदार सब्जियों के सूप हमेशा बाजार में मिलने वाले पैक्ड सूप से बेहतर होते हैं.

यह मौसम त्योहारों और शादियों का मौसम भी होता है, इसलिए कई मौकों पर बिना सोचेसमझे लोगों का खाना खूब होता है. दरअसल, अधिकतर लोगों को यह पता नहीं होता है कि उन्हें क्या खाना चाहिए और क्या नहीं. ऐसे में नीचे बताए जा रहे टिप्स त्योहारों के मौसम में आप के आहार की योजना बनाने में फायदेमंद हो सकते हैं:

ओवरईटिंग से बचें

इस का तात्पर्य केवल भोजन की मात्रा से ही नहीं, बल्कि कैलोरी से भी है. उदाहरण के लिए एक रसगुल्ले में 250 कैलोरी होती है, जबकि कौर्नफ्लैक्स के एक बाउल में केवल 100 कैलोरी होती है. त्योहारों के मौसम में हमें कैलोरी पर पूरा ध्यान रखना चाहिए ताकि वजन को बढ़ने से रोका जा सके.

क्या न खाएं

आप को नमक एवं चीनी का ज्यादा सेवन करने के साथसाथ तेल एवं मसाले युक्त खाद्यपदार्थों के सेवन से भी बचना चाहिए. अपने आहार की योजना कुछ इस तरीके से बनाएं कि अगर आप कुछ हैवी या स्पैशल खाना चाहते हैं, तो उसे दोपहर के भोजन के समय खाएं ताकि दिन की गतिविधियों के दौरान अतिरिक्त कैलोरीज बर्न हो जाएं. उस दिन नाश्ते को हलका और रात के भोजन में जहां तक हो सके कम कैलोरीज का सेवन करें.

ताजा भोजन लें

ताजा फलसब्जियों का सेवन करें. इस के अलावा किसी भी पैक्ड खाद्यपदार्थ का सेवन करने से पहले उस की ऐक्सपायरी डेट जरूर पढ़ें. उच्च तापमान पर रखे गए भोजन के दूषित होने की संभावना अधिक होती है. कुछ जीवाणु जैसे ई. कोली, कलेबसेला, शेगेला आदि उच्च तापमान पर तेजी से पनपते हैं. ये जीवाणु डायरिया, डिहाइड्रेशन, मतली, उलटी आदि का कारण बन सकते हैं. इसलिए जहां तक हो सके खाद्यपदार्थों और मिठाइयों को फ्रिज में रखें.

त्योहारों में दोस्तों और रिश्तेदारों के यहां आनाजाना लगा रहता है. इस से न केवल रिश्ते मजबूत होते हैं, बल्कि त्योहारों की मिठास भी बनी रहती है. ऐसे में अगर कोई बीमार हो जाता है, तो जल्द से जल्द डाक्टर की सलाह लें. और अगर आप को लगता है कि किसी खास खाद्यपदार्थ के सेवन के कारण ऐसा हुआ है तो उस का सेवन परिवार के दूसरे लोग न करें.

सर्दियां आराम करने, अपने परिवारजनों और दोस्तों से मिलने और अच्छा एवं स्वास्थ्यप्रद भोजन खाने के लिए अच्छा समय है. सर्दियों में एकसाथ मिल कर खाना भी अच्छा अनुभव होता है. खासकर अगर आप त्योहारों के समय एकसाथ बैठ कर खाते हैं, तो रोजमर्रा की परेशानियों, तनाव को भी पूरी तरह से भूल जाते हैं. तो अपने अच्छे शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के लिए सही आहार का चुनाव करें और साल के इस सब से खास समय का आनंद उठाएं.

– सुनीता त्रिपाठी
सीनियर डाइटीशियन, प्राइमस सुपर स्पैशलिटी अस्पताल.

रेत से फिसलते रिश्ते: भाग 2- दीपमाया को कौनसा सदमा लगा था

लेखिका- शोभा बंसल

दीपमाया ने अपनी कजरारी आंखों को अपनी लंबी पलकों की आड़ में छिपाते हुए कहा कि वह विवाहित है, सुहागन भी पर तलाकशुदा नहीं. पर वहां ज्यादातर लोग यह समझते हैं कि माया मैम विधवा हैं और उसे बेहद इज्जत व मान देते हैं.

“मिली, तुम तो जानती हो कि गणित मेरा फेवरेट सब्जैक्ट था.”

“हां याद है,” मैं ने कहा, “मैं तो सारी इक्वेशन तुम्हारी सहायता से ही सुलझा पाती थी.”

यह सुनते ही दीपमाया ने हताशा से कहा, “पर मिली, मैं तो यहीं मात खा गई. रिश्तों के समीकरण/इक्वेशन समझ ही न पाई. पतिपत्नी से जुड़े सवालों के जवाब ढूंढने में ही उलझ कर रह गई. वहां गोवा में तुम थीं नहीं, तो किस की हैल्प लेती, किस से अपनी पीड़ा शेयर करती?” दीपमाया की आंखें भर आईं.

“अब तुम्हारी प्रेम कहानी में गोवा कहां से आ गया?” मैं ने पूछा.

उस ने बताया, “एक दिन हम दोनों (रोजर और दीपमाया) अपनेअपने परिवार वालों का कड़ा विरोध देख घर से पैसागहना ले गोवा भाग आए. यहां रोजर के एक खास मित्र के परिवार ने हमें पनाह दी और हम दोनों की शादी करवा दी. उधर मेरे घरवालों ने जीतेजी मेरा पिंडदान कर सारे संपर्क तोड़ दिए.

“जब शादीब्याह में बड़ों का आशीर्वाद न मिले, तो बद्दुआ तो लग ही जाती है न. इस बात का एहसास मुझे आज तक होता है.

“रोजर मेरी पीड़ा को समझता था. वह मुझे हर तरह से खुश रखने की कोशिश करता. हम दोनों ने घर गृहस्थी की शुरुआत मिलजुल कर की. मैं गणित की ट्यूशन लेने लगी तो रोजर रात को क्लब वगैरह में गिटार बजाता. मैं उस का साथ देने के लिए वहां गाना गाती.

“जल्दी ही रोज़र अपनी जिंदादिली व खुशमिजाजी के चलते गोवा के सोशल सर्कल में फेमस हो गया और धीरेधीरे हम दोनों ने अपना बार व रैस्तरां खोल लिया. इस सब सफलता में हम दोनों अपनेअपने परिवार वालों की बेरुखी भूल कर अपने में मस्त जीवन जीने लगे.

“तभी एक और खुशी आई. मैं प्रैग्नैंट हो गई. इसी प्रैग्नैंसी ने सब बदल दिया.”

दीपमाया ने आगे बताया, “प्रैग्नैंसी में मैं ट्विंस कैरी कर रही थी. इस से मेरा शरीर बेडौल हो गया. हारमोंस के खेल ने मूड स्विंग्स कर दिए और डाक्टर ने मुझे कंप्लीट रैस्ट बता दिया. मायके और ससुराल वाले तो पहले से ही मुंह मोड़े बैठे थे.

“बेचारे रोजर से जितना हो सकता, मेरी सहायता करता और हर वक्त मेरा ध्यान रखता. घर और काम ने उस की सोशलाइजिंग को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया. शायद कहीं उस के भीतर मुझे ले कर चाम और चाहत की लड़ाई भी चल रही थी.”

दीपमाया ने पश्चात्ताप के मूड में मिली को देखते हुए बताया कि, “शायद, मेरे से भी कुछ भूल हो गई. वह बिना शिकायत मेरी केयर करता रहा और मैं बिना उस की तकलीफ समझे उस पर निर्भर होती गई. मैं ने उस के हैल्पिंग एटीट्यूड को टेकन फौर ग्रांटेड लेना शुरू कर दिया था. जबकि मुझे अपने प्रैग्नैंसी पीरियड को ब्रेवली लेना चाहिए था. यह तो हर स्त्री की लाइफ का कौमन फीचर है.

“मेरे मूड स्विंग्स और मेरे गुस्से से रोजर आहत हो जाता. लेकिन पलट कर जवाब न देता. अब रोजर ने चुप्पी लगानी शुरू कर दी.

“बस, यहीं से मेरे से गलती हो गई. मैं ने उस के इस चेंज को अनदेखा कर दिया.

“जिस रोजर को पाने के लिए मैं ने अपना मायका भुला दिया था, उसी को मैं मां बनते ही नजरअंदाज करने लगी. घर का सारा काम नौकरचाकर के ऊपर छोड़ दिया. तिनकेतिनके जोड़, सजासंवारा घर बेरौनक होने लगा. रोज़र ने कहा भी कि वह मेरा साथ पाने को तरस गया है. वह अकसर शिकायत करता कि मेरी बौडीशेप ख़राब हो गई है. मुझे अपनी फिटनैस पर भी ध्यान देना चाहिए.

“शायद, उसे तब मुझे अपने साथ ले जाने में शर्म आती थी, सही भी था. वह तो अभी भी उतना ही स्मार्ट और यंग था न. मैं बच्चों की परवरिश का बहाना कर देती और वक्त की कमी का तकाजा देती. पत्नी का फ़र्ज़ भूलती जा रही थी मैं.

“अब हमें मिले महीने हो जाते. जब मैं डिमांड करती, तो रोजर कहता कि ‘दीप तुम्हारे साथ अब वह मजा नहीं आता, तुम्हें लेडी डाक्टर को दिखाना चाहिए.’ मैं क्या कहती कि डिलीवरी के बाद ही डाक्टर ने उसे सही ढंग से ब्रेस्ट फीडिंग करवाने और केगल ऐक्सरसाइज करने की पूरी जानकारी दी थी पर मैं ने इन सब को इग्नोर कर दिया था.

“देखो न, आज उसी का तो खमियाजा भुगत रही हूं.”

टेबल पर ठंडी होती काली कौफी का सिप लेते, उसे शायद अपने जीवन के कड़वाहटभरे लम्हे को शेयर करना आसान लगा.

सो, उस ने अपनी बात जारी रखते आगे कहा, “फिर मैं ने महसूस किया कि रोजर ज्यादा समय घर से बाहर ही बिताने लगा था. एक दिन मैं ने रोजर को गोवा के साउथ बीच पर एक हीरोइन के साथ फ्लर्टिंग करते देखा, तो मैं ने हंस कर इग्नोर कर दिया. यह बात भी रोजर को चुभ गई. उस ने मेरे ‘आई डोंट केयर एटीट्यूट’ को अपने प्रति बेपरवाही समझी. वह चाहता था कि मैं उस से पत्नी की तरह लड़ाईझगड़ा करूं और मनाऊं. उस ने मुझे ताना भी दिया, ‘माया, बच्चे पैदा कर तुम्हारा मकसद पूरा हो गया है. सो, अब तुम्हारे लिए मैं यानी रोजर केवल पैसा कमाने की मशीन बन गया हूं.’

“यह मेरे लिए अलार्मिंग साइन था.

“आईने में अपना बेडौल शरीर, सूजी आंखें और उलझे बाल देख मैं हैरान रह गई कि यह वही दीपमाया है जिस पर न केवल रोजर, बल्कि पूरा कालेज लट्टू था. मुझे अपने बेपरवाह मिजाज और लापरवाही पर बहुत गुस्सा व शर्मिंदगी महसूस हुई.

“सो, मैं ने सब बदलने का फैसला किया. जिम जाना शुरू किया. डायटीशियन से बात की. प्लास्टिक सर्जन से पूरे फिगर का मेकओवर करवाया और फिर अपनी पुरानी फिगर वापस लाने के लिए मुझे एक साल कड़ी मेहनत करनी पडी.

“वह बेहद ही मुश्किल वक्त था. पर अपने रोजर को वापस पाने के लिए मुझे कुछ भी करना मंज़ूर था. हम दोनों ने मुसीबत के पलों में हंसतेमुसकराते हुए तिनकातिनका जोड़ घर और बिजनैस खड़ा किया था. सो, तब मेरा एक ही ध्येय था अपने रोजर को अपने परिवार में उचित स्थान दिलवाना. पर इस सब में बहुतकुछ बदल चुका था और जिंदगी मेरे हाथ से रेत की तरह फिसल रही थी जिसे मैं देख ही न पाई.”

मिली ने देखा कि अचानक दीपमाया की आंखें पनीली हो उठीं और वह क्षितिज में विचरण करने लगी मानो अपना खोया अच्छा पल ढूंढ रही हो या उस सौतन को, जिस ने उस के जीवन के रंग सोख लिए थे.

मिली ने माया को झकझोर कर पूछा, “कौन थी वह सौतन जिस ने तुम्हारा सुखचैन छीन लिया, माया?”

Winter Special: झटपट बनाएं शेजवान नूडल्स

स्वादिष्ट नूडल्स भला किसे अच्छे नहीं लगते! अगर आप भी नूडल्स की शौकीन हैं तो आइए जानें घर में झटपट शेजवान नूडल्स बनाने की रेसिपी.

सामग्री

नूडल्स- 1 पैकेट

बारीक कटी शिमला मिर्च- 1

बारीक कटा प्याज- 1

बारीक कटा गाजर- 1

तेल- 1 चम्मच

शेजवान चटनी- 2 चम्मच

बारीक कटा हरा प्याज- 2 चम्मच

बारीक कटा अदरक- 1 चम्मच

बारीक कटा लहसुन- 1 चम्मच

कटी हुई हरी मिर्च- 1 चम्मच

विधि

सबसे पहले नूडल्स को उबाल लें. एक पैन में तेल गर्म करें और उसमें अदरक, लहसुन और हरी मिर्च डालकर अच्छे से भूनें. अब कटी हुई सभी हरी सब्जियां डालें और चार से पांच मिनट तक भूनें.

इसके बाद सेजवान चटनी और उबले हुए नूडल्स डालकर तीन से चार मिनट तक पकाएं. सबसे अंत में हरा प्याज डालकर मिलाएं.

तैयार है लजीज शेजवान नूडल्स गर्मागर्म सर्व करें.

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वापसी एक प्यार की: भाग 1

वंदना पीजी से निकल कर बाहर रोड पर आ गई. मोबाइल में टाइम देखा. 8 बज रहे थे. मैट्रो स्टेशन पहुंच कर देव को देख कर चौंकी, ‘‘तुम? इतनी जल्दी आ गए?’’

जवाब में देव ने मुसकराते हुए कहा, ‘‘आज तुम भी तो समय से पहले आ गई हो.’’

‘‘हूं,’’ वंदना के मुंह से निकला.

‘‘कल संडे था. कहां रहीं?’’ देव ने पूछा.

‘‘कहीं नहीं.’’

‘‘आज कहीं जाना है शाम को?’’

‘‘नहीं.’’

‘‘तो चले कहीं?’’

‘‘नहीं.’’

‘‘क्यों?’’

‘‘देव, बताना जरूरी तो नहीं है,’’ वंदना उस के किसी प्रश्न का उत्तर नहीं देना चाहती थी. उसे अचानक पता नहीं क्या हो गया. थोड़ी देर पहले बहुत खुश थी. देव के बारे में सच जान कर कहीं उदासी फैल गई थी.

देव भी हैरान था कि आखिर अचानक क्या हो गया? चेहरा मुरझाया सा क्यों लग रहा है?

तभी ट्रेन आ गई. भीड़ अंदर समा गई. 1 मिनट में ट्रेन चल भी दी. अंदर घुसने पर गरमी से राहत मिली. वंदना की चोर नजरें देव को तलाश रही थीं… बैठा होगा किसी कोने में. वैसे भी कल की देवकी से हुई मुलाकात का उस पर मिश्रित असर हुआ था… सिर झटक कर सामने बैठी नवविवाहिता को देखने लगी. लड़की गहरे लाल रंग के पंजाबी सूट में थी. उस ने खूब गहरा मेकअप कर रखा था. मांग सिंदूर से लाल थी. उम्र 23-24 के आसपास थी. कैसे इस उम्र में लड़कियों की शादी हो जाती है… जब वह इस उम्र में थी तो तब उस के जीवन में अमित आया था. तब वह मुंबई में थी.

अतीत खिसक कर आगे आ गया था…

अमित का छरहरा बदन, बड़ीबड़ी आंखें, घुंघराले बाल, उस पर दूधिया रंग, लगता था कुदरत ने फुरसत में बनाया है. उम्र कोई 26-27 साल. वह एम कौम कर रहा था.

उस का सुदर्शन चेहरा आज तक यादों में बसा है. यों ही मैट्रो में मुलाकात हो गई थी. उस का हैलो कहना मन के अंदर ऐसा उतरा कि मैट्रो में लोग पहचान गए थे कि वे दोनों कहां खड़े हो कर बतियाते हैं. मैं और अमित रोज मिलते. खूबसूरत बिंबों का जिक्र होता… खुशी के बीच एक ही अफसोस होता कि यह संडे क्यों आता है? वे खिलखिलाते चेहरे, लोगों का हमें प्यार में लिपटे देखते हुए मुसकराना… कितना मादक था सबकुछ….

दोनों को लगता आसमान के परिंदे भी ढली शाम में हमें प्यार करते देख खुश हो आवाज कर रहे हैं. दोनों को लगता वे भी परिंदों के साथ अनंत आकाश की अंतहीन यात्रा में शामिल हैं…वंदना को अच्छी तरह याद है काम से छूटते ही भागती थी, लोकल पकड़ने को. प्लेटफौर्म के बाहर अमित उस का इंतजार कर रहा होता था. लगता बरसों से वह ऐसे ही यहां खड़ा है… सिर्फ उस के लिए. मुसकराते हुए कहता कि चलो बटाटा वड़ा खाते हैं… ऐनर्जी चाहिए हम दोनों को.

वह मुसकराहट के साथ उस का हाथ पकड़ती और फिर और्डर दे देती कि भैया 2 बटाटा वड़ा, तीखी मिर्ची के साथ. तब वंदना एक शोरूम में सेल्स गर्ल थी.

एक दिन वह नहीं आया. आंखें बारबार प्लेटफौर्म पर ढूंढ़ती. क्या करे, किस से पूछे. फोन किया. कोई जवाब नहीं. स्विच औफ. दिल धकधक करने लगा जैसे रेल का इंजन चल रहा हो.

फिर दूसरा दिन, तीसरा दिन… और कितने ही दिन. बेमन से काउंटर पर खड़ीखड़ी

ड्रैसेज खोलती, लपेटती रहती. बारबार मिस्ड कौल देखने को मोबाइल चैक करती… सन्नाटा सिर्फ सन्नाटा था हर जगह.

3 महीने निकल गए… यों ही अकेली सड़क पर चलती जाती जैसे रेगिस्तान में नदी ढूंढ़ने चली जा रही हो… अंतहीन यात्रा पर…

कभी सोचती कि पता तो जरूर लेना था… कैसी बेवकूफ है वह. जिसे इस कदर चाहती थी उस का पताठिकाना तो पूछना चाहिए था.

वंदना की दशा देख एक दिन शिल्पा ने कहा, ‘‘यह मुंबइया प्यार और वह भी इस उम्र का… यह तो ऐसा ही होता है.’’

थोड़ा होश आने पर लगा कि शिल्पा ठीक कहती है… उस की खुशियों की चाबी गुम हो गई है… कब, कहां, मिलेगी, कौन जाने.

घर में बीमार पिता हैं, मां हैं, 2 छोटी बहनें और 1 भाई है. वंदना घर में सब से बड़ी है. घर का खर्च वही चलाती है. आर्थिक मजबूरी के कारण इंटर करने के बाद नौकरी करनी पड़ी. बहनों ने भी पढ़ाई अधूरी छोड़ नौकरी कर ली थी.

वंदना 24 पार कर चुकी थी. सोचती थी मांपिता उस की शादी की बात चलाएंगे, परंतु घर में इस बात को ले कर कभी कोई हलचल ही नहीं हुई.

किसी का कोई पैगाम नहीं. रिश्ते के नाम पर सन्नाटा छाया था.

सोचती कभी किसी रिश्तेनातेदार ने फोन भी तो नहीं किया. वंदना अब भी अमित के इंतजार में कई बार उस रूट पर चली जाती, 3 साल पहले की तरह…

ट्रेन में बैठती तो आंखें अमित को ही ढूंढ़तीं… वह पहला प्यार था उस का.

फिर एक दिन उस की मुलाकात अनिकेत से हुई. पास की चाल में रहता था. वह ज्यादा सुंदर न था, ठीकठीक था. किसी औफिस में क्लर्क था. दोनों का एक ही रास्ता था. प्यार का भी एक ही रास्ता होता है. नजदीकियां बढ़ने लगीं. दोनों अकसर बाजार में साथसाथ होते. एक रोज छोटी बहन मीना ने देख लिया और फिर अम्मां को बता दिया.

अम्मां झोली पसार कर वंदना के आगे खड़ी हो गईं, ‘‘रहम कर बेटा… पहले इन छोटी बहनों को बेड़ा पार कर दे. फिर प्यार की पींगें बढ़ाने की सोचना… मैं कुछ नहीं कहूंगी. पर अभी नहीं… तू चली गई तो कौन हमारा खर्च उठाएगा?’’

प्यार के सभी बिंब भरभरा कर ढह गए. समझ गई रेगिस्तान में फूलों की बगिया लगाना मना है या फिर वह खुद ही सूखा ठूंठ है, जिस पर प्यार के पंछी को बैठने की मनाही है. उसे लगता प्यार के मेले उस के लिए नहीं लगे.

वंदना की दशा उस बच्चे जैसी हो गई जो मेला खत्म होने के बाद खाली डब्बों में कुछ ढूंढ़ता है और फिर कुछ न मिलने पर डब्बे पर गुस्सा निकालता है. लेकिन वंदना नहीं जानती कि वह रूठे तो किस से, गुस्सा निकाले तो किस पर. इन रिश्तों पर गुस्सा करे, जिन्हें आंख बंद कर के ढोए जा रही है… और रिश्तों के भविष्य की जिम्मेदारी उसी के कंधों पर है… नहीं, अपने बारे में उसे खुद ही सोचना होगा…

बहुत सोचने के बाद समझ में आया उसे कि यह जगह ही छोड़ देनी चाहिए यानी दूसरी जगह नौकरी ढूंढ़नी चाहिए पर थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा.

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