Wedding Special: ताकि दमकती रहे दुल्हन की स्किन

किसी भी लड़की के जीवन में शादी एक महत्त्वपूर्ण अवसर होता है. हर लड़की इस दिन सब से खूबसूरत और आकर्षक दिखना चाहती है. शादी से पहले कई तरह की चीजें होती हैं जैसे शादी की शौपिंग करना, तरहतरह की रस्में निभाना व अन्य तैयारी करना. इस वजह से कई बार दुल्हन को थकान, बेचैनी और तनाव से गुजरना पड़ता है, जिस की वजह से वह अपनी त्वचा का सही तरीके से खयाल नहीं रख पाती. ऐसे में उसे यह चिंता सताती है कि वह चमकतीदमकती त्वचा पाने के लिए क्या करे.

कई ऐसे टिप्स हैं, जिन्हें आजमा कर भावी दुल्हन मनचाही त्वचा पा सकती है. वेदिक लाइन के इन टिप्स पर अमल करना आसान है और आप रोज इन्हें अमल में ला सकती हैं ताकि उस दिन के लिए अपनी खूबसूरत त्वचा को और निखार सकें:

2 महीने बाकी

– कम से कम 2 लिटर पानी रोज जरूर पीएं. पानी न ज्यादा ठंडा हो और न गरम यानी रूम वातावरण पर हो. पानी वजन नहीं बढ़ने देगा और शारीरिक तंत्र को साफ रखेगा. यह शरीर से भी हानिकारक तत्त्वों को आसानी से बाहर निकाल देगा.

– नारियल पानी पीने को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लें. चेहरे पर चमक लाने का बहुत आसान उपाय है नारियल पानी पीना. यह न केवल त्वचा साफ करता है, बल्कि शरीर को पोषण भी देता है.

– फलों की प्रचुरता वाली अच्छी क्वालिटी की फेशियल किट चेहरे पर लगाना शुरू करें. शादी से 1 दिन पहले फेशियल न करें. अगर पहले ट्राई नहीं किया हो तब तो बिलकुल भी नहीं. शुरुआत करने के लिए सब से अच्छी है नैचुरल फेशियल किट, जिस में पपीता, नीबू आदि के अर्क होते हैं.

– 1 बार दिन में और 1 बार रात में फेसवाश करना न भूलें. अगर मेकअप करती हैं, तो अच्छी क्वालिटी के मेकअप रिमूवर पर खर्च करने में संकोच न करें. रात को इस का इस्तेमाल करना न भूलें यानी बिना मेकअप हटाए बिलकुल न सोएं.

– खानपान में मल्टीविटामिन और कैल्सियम को शामिल करें. फेशियल प्रोडक्ट्स भी ऐसे ही लें, जिन में प्रचुर मात्रा में विटामिन ई शामिल रहे.

– पौष्टिक और सही खाना खाएं. मसलन, आप चौकलेट जितना खाएंगी आप की त्वचा को उतना ही नुकसान पहुंचेगा और वजन भी बढ़ेगा.

– सनस्क्रीन का इस्तेमाल अभी से शुरू कर देना चाहिए. इस का शादी से कोई लेनादेना नहीं है. हां, इस के इस्तेमाल से पहले यह जरूर देख लें कि आप की स्किन टाइप और एसपीएफ के हिसाब से आप के लिए कौन सा सनस्क्रीन सही रहेगा. एसपीएफ इस पर निर्भर करता है कि आप बाहर तेज धूप में कितनी देर रहती हैं.

1 महीना बाकी

– जब शादी में 1 महीना रह जाए तो इस महीने की शुरुआत व्यापक तौर पर स्पैशलाइज्ड फैशियल से करें. 2 हफ्ते के अंतराल पर गोल्ड फेशियल और डायमंड फेशियल कराने पर आप को चेहरे पर इस का असर दिखेगा. इस में मौजूद प्राकृतिक तत्त्वों की मदद से फेशियल के बाद आप की त्वचा का रोमरोम खुल जाएगा, इस की अच्छी तरह सफाई हो जाएगी, त्वचा को भरपूर पोषण मिलेगा और त्वचा में कसावट व रौनक आएगी.

– ज्यादा मेकअप से बचें. थोड़ा कम मेकअप करेंगी तो इस से बहुत फर्क पड़ेगा. आप की त्वचा को सुकून लेने का मौका मिलेगा और त्वचा पर कीलमुंहासे निकलने या किसी और तरह का नुकसान पहुंचने की आशंका कम हो जाएगी. बीबी क्रीम से भी काम चल जाएगा, जो आप को मेकअप फ्री लुक देगी और त्वचा से दागधब्बे हटा कर उसे साफ बनाएगी.

– होंठों की देखभाल को कभी नजरअंदाज न करें. फ्रूटी वाला लिप बाम हमेशा साथ रखें.

भारती मोदी

Winter Special: सर्दियों में स्टाइलिश लुक के लिए ट्राय करें ये श्रग कलेक्शन

जींस श्रग को किसी भी तरह के ड्रेस के साथ पहना जा सकता है. यह दिखने में बहुत स्टाइलिश और आकर्षक होता है साथ ही सर्दियों में हल्की ठंड से बचने के लिए यह आपकी मदद भी करता है. इसके खूबसूरत कलर आपके आउटफिट को बिलकुल नया लुक देते हैं.

श्रग के डिजाइन

1. जींस श्रग की डिजाइन कुछ इस प्रकार की होती है कि, वे सीने के नीचे हिस्से पर बटन या जिप से जुड़े रहते हैं और ऊपरी हिस्सा खुला हुआ सा होता है, यह आपको माडर्न लुक देता है. कुछ डिजाइनर श्रग्स केवल आस्तीन तक ही होती है जो पीठ के हिस्से को कवर करती है. यह देखने में स्वेटर की तरह लगता है.

2. श्रग्स की श्रृंखला में डेनिम के श्रग अपने आप में बेहद खास है, जिसे स्पेगेटी स्ट्रेप टाप के साथ पहना जा सकता है.

3. शार्ट जींस के श्रग इस बार की सर्दियों के दौरान फिर से फैशन में हैं और बहुत ट्रैंडी होने की वजह से प्रचलित भी हो रहे हैं इसे युवतियों द्वारा काफी पसंद किया जा रहा है.

4. इनके अलावा कौटन से बने, हाथ से बुने हुए और लेस के श्रग भी आसानी से बाजारों में उपलब्ध होते हैं. यह बहुत नाजुकता के साथ शरीर से चिपके रहते हैं और आपकी आउटफिट को और भी खूबसूरत बनाने में आपकी मदद करते हैं.

अलग अलग तरहों से श्रग पहनने के तरीके

1. अगर आप अपने बोरिंग ड्रेसिंग आइडिया से ऊब चुकी हैं तो इस बार इस तरह के नए श्रग आइडिया अपनाए. कपड़े के ऊपर से इस्तेमाल किए जाने वाले इस परिधान को अलग अलग स्टाइलिश तरीकों से पहना जा सकता है.

2. श्रग को विरोधाभासी कपड़ों के साथ पहन कर आप ज्यादा आकर्षक दिख सकती हैं. जैसे लंबे फिट टी शर्ट्स के साथ या मिनी स्कर्ट के साथ श्रग बेहतरीन लगते हैं.

3. हल्के बुने हुये श्रग जींस के साथ शाम के किसी समारोह में आपको एक फार्मल लुक दे सकते हैं.

4. छोटे और फिटिंग वाले श्रग ड्रेस को एक अलग और रोचक आभास देने में मदद करते हैं जो देखने में भी अच्छा लगता है. इसे एसेसरीज के साथ मैच कर के आप सब के सामने एक प्रभावी रूप से खुद को प्रस्तुत कर सकती हैं.

5. उदाहरण के लिए एक सिल्क के टाप के साथ ट्वीड श्रग आपको एक अलग सा लुक देता है. कुछ ईवनिंग श्रग खूबसूरती बढ़ाने के साथ ही साथ हल्के गरम भी होते हैं और शाम के वक्त ठंड से भी बचाएं रखते हैं.

6. फार्मल लुक के लिए पहनी जाने वाली ड्रेसों के साथ चमकीले या मेटेलिक डिजाइन के श्रग पहन कर ड्रेस की खूबसूरती को बढ़ाया जा सकता है. यह आपको एक अलग और खास लुक देता है.

7. श्रग के साथ एक नया और आकर्षक लुक पाने के लिए आपको बाजार में उपलब्ध ट्रैंडी और नए डिजाइनर श्रग का इस्तेमाल करना चाहिए, इसके लिए आप नाट या टाई वाले ट्रैंडी श्रग का प्रयोग कर सकती हैं. यह आपके पूरे लुक को बदलकर एक नया स्टाइलिश लुक प्रदान करता है.

8. श्रग के रंग के साथ मैच करते हुये ड्रेस को पहनने से बचें यह आपके लुक को बोरिंग बनाता है और देखने में आकर्षक नहीं लगता. श्रग एक ऐसा कपड़ा है जो आसानी से पहना और निकाला जा सकता है , अगर आप गर्मी महसूस कर रही हैं तो इसे आसानी से निकाल कर अपने बैग या पर्स में रख सकती हैं.

दूरियां: भाग 4- क्या काम्या और हिरेन के रिश्ते को समझ पाया नील

अगले दिन हिरेन जिद करने लगा कि कुछ खरीदारी करते हैं. मैं अधिकतर जींस पहनती हूं तो मु  झे शर्ट, टीशर्ट की दुकान पर ले गया. काम्या वहां पुरुषों के विभाग में शर्ट देखने में व्यस्त थी. उस ने हमें नहीं देखा. बड़ी अजीब फंकी सी शर्ट देख रही थी. खैर, मैं ने नील के लिए एक चैकदार शर्ट खरीदी और बाहर जाने लगी तो काम्या से टकरा गई.

काम्या ने अपनी ली हुई शर्ट दिखाते हुए पूछा, ‘‘यह कैसी शर्ट है?’’

शर्ट चटक औरेंज रंग की थी. मैं व्यक्तिगत तौर पर ऐसी शर्ट पसंद नहीं करती. लेकिन मैं ने उस से कहा अच्छी है और आगे बढ़ गई.

नील की याद इतनी सता रही थी कि बरदाश्त नहीं हो रहा था. आखिर मैं ने फोन किया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका.

अगले दिन हमारा काम खत्म हो गया. लेकिन हिरेन ने जानबू  झ कर एक

दिन अधिक रखा था आसपास घूमने का. मु  झे जान कर बड़ी बोरियत हुई. मेरा बिलकुल मन नहीं था एक भी दिन और रुकने का.

जब घर पहुंची तो नील घर पर नहीं था, सोचा उस की शर्ट निकाल कर पहन लेती हूं. मैं ऐसा अकसर करती जब भी उस की नजदीकी का एहसास करना होता था. अलमारी खोलते ही सामने औरेंज रंग की शर्ट दिखी. हाथ में ले कर देखा तो यह वही शर्ट थी जो काम्या ने अपने बौयफ्रैंड के लिए खरीदी थी. अब कहनेसुनने को कुछ नहीं बचा था. स्थिति एकदम साफ थी. एक कागज पर संदेश लिखा:

‘‘मैं तुम्हें छोड़ कर जा रही हूं. अब हमारे रिश्ते में ऐसा कुछ नहीं बचा कि हम साथ रहें,’’ मैं किसी वकील से बात कर के आगे सहेली के घर रहने आ गई.

उस के बाद नील के बहुत फोन आए, लेकिन मैं ने फोन नहीं उठाया. जानती थी उस की आवाज सुन कर रो पड़ूंगी और कमजोर पड़ जाऊंगी. 17 महीनों से एक जिंदा लाश की तरह घूम रही हूं. हिरेन ने बहुत मदद की, दाद देनी पड़ेगी बंदा जितना मेरे साथ धैर्य से पेश आ रहा है कोई नहीं आ सकता. वकील से भी उस ने जोर दे कर समय लिया वरना मैं तो टालती जा रही थी.

नील ने जब मेरा हाथ पकड़ कर दबाया तो मैं अतीत से बाहर निकली.

‘‘ऐसा एकदम से क्या हुआ कि तुम घर छोड़ कर चली गई? कारण जानने के लिए मैं पागल हो गया था… तुम्हारे औफिस के इतने चक्कर लगाए, लेकिन किसी ने अंदर नहीं घुसने दिया. तुम कहां रहने चली गई मैं नहीं जान सका. तुम मेरा फोन नहीं उठाती थी.’’

मैं आहत स्वर में बोली, ‘‘बनो मत, तुम शिमला में काम्या के साथ थे. बस मु  झ से तलाक का इंतजार कर रहे हो उस से शादी करने के लिए.’’

‘‘मु  झे नहीं मालूम तुम किस काम्या की बात कर रही हो… मैं तो बस एक काम्या को जानता हूं जो मेरे औफिस में काम करती है और मु  झे बिलकुल पसंद नहीं है. हर समय मेरे पीछे पड़ी रहती है. मैं शिमला अपने दोस्तों निखिल और सोमेश के साथ गया था… वे बहुत समय से पीछे पड़े थे, लेकिन मैं टाल जाता था. जब तुम ने बताया तुम बाहर जा रही हो तो तुम्हारे बिना मैं भी यहां रह कर क्या करता. मेरे हां कहते ही दोनों ने शिमला का कार्यक्रम बना लिया.’’

‘‘तुम सच छिपाने की कोशिश मत करो. काम्या ने तुम्हें औरेंज रंग की शर्ट तोहफे में दी थी.’’

‘‘तुम पागल हो गई हो. मैं उस बददिमाग लड़की से तोहफा क्यों लूंगा भला? वह शर्ट मैं ने स्वयं खरीदी थी तुम्हें चिढ़ाने के लिए. मु  झे मालूम था उस का रंग और प्रिंट देख कर तुम कितना गुस्सा खाओगी.’’

मैं उठ कर अपने कमरे में चली गई. अब यहां रुकने से कोई लाभ नहीं, पुरानी यादों से बचने

आई थी, लेकिन फिर उसी भंवर में फंस गई. नील को भी यहीं आना था, उस को छोड़ कर जाने का मन नहीं कर रहा था. 2 दिन ही सही, फिर पता नहीं जिंदगी में कभी मिलें न मिलें.

तभी बाहर का दरवाजा खोलने की आवाज आई. उसे मेरी परवाह नहीं लगता है चला गया. जो थोड़ीबहुत उम्मीद थी उसे भी खत्म कर के ही दम लेगा. मैं थोड़ी देर बाद नहाने चली गई, जब बाहर आई तो नील कमरे में मेरा इंतजार कर रहा था.

‘‘तुम एकदम से नहीं दिखाई दी तो मु  झे लगा तुम गुस्सा हो कर चली गई. देखो आज छोटी दीवाली है. मैं कुछ लडि़यां, दीपक और रंगोली के रंग लाया हूं. आखिरी ही सही हम एक बार इस नए घर में पतिपत्नी का नाटक कर के दीवाली मनाते हैं.’’

फिर उस की नजर मु  झ पर ठहर गई. हाथ का सामान नीचे रखते हुए बोला, ‘‘तू सही कहती है मैं तुम्हारी देह देख कर पागल हो जाता हूं.’’

फिर वह एकदम मेरे करीब आ कर मु  झे बांहों में कस कर किस करने लगा. कायदे से मु  झे उसे धक्का दे कर अपने से अलग कर देना चाहिए था, लेकिन मैं ऐसा नहीं कर सकी. कितनी संतुष्टि मिल रही थी उस की नजदीकी से… तन और मन कितने बेचैन थे… तृप्त हो गए.

वह हांफ रहा था, होंठों को अलग करते हुए बोला, ‘‘शादी के इतने साल बाद भी इतनी बेचैनी, कैसे रह सकेंगे एकदूसरे के बिना? यार एक अनजान लड़की ने क्या कह दिया तूने सच मान लिया. मु  झे देखा तूने उस के साथ कभी और वह शर्ट मैं ने स्वयं खरीदी थी. मैं तु  झे रसीद भी दिखा सकता हूं.’’

मैं आहिस्ता से उस से अलग होते हुए सोच रही थी कह तो यह सही रहा है. मैं ने अपना फोन खोल कर देखा हिरेन की कई कौल्स आई हुई थीं.

मेरी सहेली का संदेश था, ‘‘कहां हो यार तुम्हारा बौस पागल हो रहा है.’’

कमाल है हिरेन को क्या परेशानी है… 2 दिन की छुट्टी है. मैं कहीं भी जाऊं उसे क्या… मेरे मन में न जाने क्या आया कि मैं ने निर्मला को फोन मिलाया.

वह बेरुखी से बोली, ‘‘हैलो, बोलो क्या बात है?’’

‘‘कुछ नहीं निर्मलाजी बस दीवाली की शुभकामनाएं देने के लिए फोन मिलाया था.’’

उन की आवाज एकदम बदल गई, ‘‘ओह, अच्छाअच्छा, आप को भी बहुतबहुत शुभकामनाएं. कल पार्टी में नहीं शामिल हुई… हिरेन सर का मूड बड़ा खराब रहा.’’

सुन कर कुछ अजीब लगा. बोली, ‘‘बस तबीयत कुछ ठीक नहीं लग रही थी. इसलिए शोरशराबे से दूर अपनी मम्मी से मिलने आ गई थी. आप ने इतने कम नोटिस पर शिमला जाने का टिकट करवा दिया, आप भी कमाल हो.’’

‘‘इस में कमाल क्या, हमारी ट्रैवल एजेंट्स से सांठगांठ रहती है, 2 टिकट ही तो करवाए थे. उस में कोई दिक्कत नहीं होती, अधिक हो तो थोड़ी परेशानी हो जाती है.’’

‘‘2 टिकट? लेकिन मैं तो अकेले गईर् थी?’’

‘‘तुम्हारी बगल में काम्या बैठ कर गई थी. उस का टिकट भी मैं ने ही करवाया था हिरेन सर के कहने पर. वह सर की ममेरी बहन है… उस ने तुम्हें बताया नहीं?’’

‘‘मैं इतनी थकी हुई थी कि प्लेन में बैठते ही नींद आ गई. इस कारण हमारी खास बात नहीं हुई,’’ फिर थोड़ी देर इधरउधर की बातें

कर के मैं ने फोन काट दिया.

नील मेरे निकट आते हुए बोला, ‘‘क्या हुआ?’’

‘‘हिरेन और काम्या भाईबहन हैं और शिमला में ऐसे नाटक कर रहे थे मानो एकदूसरे को जानते तक नहीं हैं.’’

यह दोनों की चाल थी… शक का बीज बोया. नील तुम्हें और काम्या मु  झे पाना चाहती थी… शिमला में वह मु  झ पर नजर रख रही होगी. जैसे ही मैं ने वह शर्ट खरीदी उस ने भी वैसी एक और खरीद ली होगी. मैं अभी हिरेन के घर जा कर उस की ऐसी धुनाई करूंगा कि साला आगे से मेरी बीवी की तरफ आंख उठा कर देखने की भी हिम्मत नहीं करेगा.’’

‘‘रहने दो नील हमारे रिश्ते में दरार पड़ गई थी तभी दूसरों को सेंध लगाने का मौका मिला,’’ मैं उस के एकदम करीब जा कर बोली, ‘‘मैं आज ही हिरेन की नौकरी से इस्तीफा दे कर कहीं और काम ढूंढ़ लूंगी… अपने बीच किसी तीसरे को नहीं आने देंगे,’’ मु  झे लगा मेरे दिल का अंधेरा छंट गया है और अब हम रात को मिल कर दीए सजाएंगे असली पतिपत्नी की तरह.

Winter में वर्कआउट करने से होते हैं बहुत फायदे

सर्दियां हम सभी को आलसी और सुस्त बना देती हैं. खासतौर से इन दिनों में सुबह जिम जाने या बिरुतर से उठने का मन ही नहीं करता, जो बहुत आम है. ऐसे में वर्कआउट रूटीन गड़बड़ा जाता है और शरीर में तमाम रोग पैदा हो जाते हैं. विशेषज्ञ कहते हैं कि सर्दियों में अक्सर लोग घर से बाहर निकलने से परहेज करते हैं. ये ही उनकी  सबसे बड़ी भूल  है. खासतौर से सर्दियों में कसरत को छोडऩा अच्छा नहीं माना जाता. इससे व्यक्ति को कई छोटी -मोटी समस्याएं होने लगती हैं. तो अगर आप भी इन लोगों में से एक हैं, तो सर्दियों में घर के अंदर छिपे रहने से पहले ठंड में वर्कआउट करने के फायदों के बारे में जरूर जान लें.

1. सर्दियों में घर से बाहर जाकर वर्कआउट करने के फायदे

अधिक कैलोरी बर्न करेंगे- एक स्टडी के अनुसार घर से बाहर जाकर एक्सरसाइज करने से ज्यादा कैलोरीज बर्न होती है. जिससे वजन कम करने में मदद मिलती है. यदि आप बाहर जाकर एक्सरसाइज नहीं करना चाहते, तो आप किसी ठंडे कमरे में सो सकते हैं. ऐसा करने से भी आप वजन घटा सकते हैं. दरअसल, ठंडे कमरे में सोने के कारण आपका शरीर ब्राउन फैट का उत्पादन करना शुरू कर देता है, जो कि अन्य किसी भी टिश्यू से 300 गुना अधिक गर्मी पैदा करता है.

2. दिल के लिए फायदेमंद

जिस तरह आपके शरीर को मुख्य तापमान को नियंत्रित  करने के लिए मेहनत करनी पड़ती है, ठीक उसी तरह आपके दिल को आपके पूरे शरीर में ब्लड पंप करने के लिए मेहनत करनी पड़ती है. यदि आपका दिल स्वस्थ है, तो बाहर व्यायाम करने से आपका दिल और भी मजबूत होगा. वर्कआउट करने से भविष्य में कठिन कसरत के लिए ज्यादा सहनशक्ति का निर्माण हो सकता है. हां, लेकिन यदि आपका दिल कमजोर है, तो दिल पर अतिरिक्त दबाव डालना हानिकारक हो सकता है. इसलिए अपने डॉक्टर से बात करके पता करें कि क्या आपके लिए व्यायाम करना वास्तव में स्वस्थ है.

3. वार्म अप होना नहीं भूलेंगे

ठंड का मौसम आपकी मांसपेशियों को और भी सख्त बना देता है. ऐसे में जब आप वर्कआउट के लिए घर से बाहर निकलते हैं, तो वर्कआउट से पहले और बाद में वॉर्म अप और कूल डाउन के लिए कुछ मिनट निकालने का मौका मिल जाएगा. सर्दियों के दौरान गर्म होने और ठंडा होने की आदत डालें, ताकि गर्म मौसम के वापस आने पर आप उस आदत को जारी रख सकें.

4. जरूरी विटामिन -डी मिलेगा

सर्दियों में विटामिन- डी की कमी होना बहुत आम है. क्योंकि इन दिनों में हम सबसे ज्यादा समय घर के अंदर बिताते हैं, जिससे हमारा शरीर धूप के संपर्क में नहीं आ पाता और विटामिन डी की कमी हो जाती है. ऐसे में घर के बाहर कसरत करने से आपको अपनी हड्डियों को स्वस्थ रखने , बीमारियों और अन्य स्वास्थ्य स्थितियों से बचने में मदद मिलेगी. हड्डियों की मजबूती के लिए खासतौर से विटामिन डी बहुत फादेमंद है. लेकिन ध्यान रखें, भले ही कसरत ठंड में अच्छी है, लेकिन आपकी त्वचा के लिए हानिकारक है. इसलिए 10-15 मिनट से ज्यादा धूप में ना रहें.

5. ज्यादा खुश और ऊर्जावान महसूस करेंगे

यदि आप वर्कआउट के बाद अच्छी उऊर्जा का अनुभव करते हैं, तो आप ठंड के मौसम में कसरत के बाद भी बेहतर महसूस करेंगे. गर्म , उमस भरा मौसम आपके बूड को खराब कर सकता है, लेकिन सर्द मौसम उत्तेजक है. घर से बाहर की जाने वाली एक्सरसाइज आपको खुश और ऊर्जावान महसूस कराएगी. क्योंकि जैसे-जैसे आप अपने शरीर को गर्म रखने के लिए ज्यादा मेहनत करेंगे, उतना ही एंडोर्फिन का उत्पादन होगा. बता दें कि एंडोर्फिन एक फील गुड हार्मोन है.

अब बिना किसी टेंशन के आप सर्दियों में भी बाहर जाकर वर्कआउट कर सकते हैं और अपने शरीर को चुस्त और दुरूस्त रख सकते हैं.

दूरियां: भाग 3- क्या काम्या और हिरेन के रिश्ते को समझ पाया नील

जब मैं ने नील को बताया कि मु  झे 5 दिनों के लिए लखनऊ जाना है तो वह बड़बड़ाने लगा. यह मेरे लिए बड़ी परेशानी की बात हो गई थी कि पति का मिजाज देखूं या नौकरी. मेरा मन बड़ा खिन्न सा रहता. उस से बात करने का भी मन नहीं करता.

जाने से 2 दिन पहले निर्मलाजी ने बताया मु  झे लखनऊ

नहीं शिमला जाना होगा. वहां जो टीम औडिट करने गई है उस के एक सदस्य की तबीयत खराब हो गई है. मु  झे क्या फर्क पड़ता था फिर कहीं भी जाना हो. नील को बताने का मन नहीं हुआ. इसलिए कि फिर दोबारा उस की बड़बड़ शुरू हो जाएगी. अच्छा हुआ नहीं बताया. मु  झे नील का वह रंग देखने को मिला जिस पर मु  झे अभी तक विश्वास नहीं हो रहा है.

‘‘मैं जब 5 दिनों के लिए बाहर गई थी 2 महीने पहले तो क्या तुम शिमला गए थे?’’

नील आश्चर्य से, ‘‘हां, लेकिन तु  झे कैसे पता?’’

‘‘मैं भी तब शिमला में थी और मैं ने तुम्हें देखा था.’’

‘‘तुम तो लखनऊ जाने वाली थी और अगर शिमला गईर् थी तो बताया क्यों नहीं? साथ में घूमते बड़ा मजा आता.’’

‘‘अच्छा और जिस के साथ घूमने का कार्यक्रम बना कर गए थे उस बेचारी को म  झधार में छोड़ देते?’’

नील असमंजस से देखते हुए बोला, ‘‘तुम क्या बोल रही हो मु  झे नहीं पता… राहुल और सौरभ बहुत दिनों से कह रहे थे कहीं घूमने चलते हैं… मैं बस टालता जा रहा था. जब तुम जा रही थी तो मैं ने उन्हें कार्यक्रम बनाने के लिए हां कह दी.’’

‘‘रहने दो… तुम   झूठ बोल रहे हो, तुम वहां काम्या के साथ रंगरलियां मनाने गए थे.’’

नील आश्चर्य से बोला, ‘‘कौन काम्या? तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है, लड़ने के बहाने ढूंढ़ती हो. अलग होना चाहती हो… हिरेन का साथ चाहती हो… ठीक है, पर गलत इलजाम मत लगाओ. अब मैं   झूठ क्यों बोलूंगा जब हम अलग हो रहे हैं… वैसे भी मैं   झूठ नहीं बोलता हूं.’’

‘‘बहुत अच्छे, तुम हिरेन को ले कर मु  झ पर कोई भी इलजाम लगाओ वह ठीक है.’’

‘‘तुम हिरेन के लिए क्या महसूस करती हो मैं नहीं जानता, लेकिन हिरेन के दिल में तुम्हारे लिए क्या है मैं सम  झता हूं… मेरे लिए तुम क्या हो तुम नहीं जानती हो, तुम मेरी जिंदगी की धुरी हो, सबकुछ मेरा तुम्हारे इर्दगिर्द घूमता है.’’

उस की आंखें और भी बहुत कुछ कहना चाहती थीं, लेकिन उस की बात सुन कर मेरी आंखों में आंसू आ गए. उस की इस तरह की चिकनीचुपड़ी बातों में आ कर मैं मीरा की तरह उसे कृष्ण मान कर उस की दीवानी हो जाती थी.

जब मैं शिमला जाने वाले प्लेन में सवार हुई, बहुत उदास थी. पहली बार 5 दिनों के

लिए नील से अलग हो रही थी और उस ने केवल बाय कह कर मुंह फेर लिया. शुरू में हम औफिस के लिए भी जब निकलते थे तो ऐसा लगता

7-8 घंटे कैसे एकदूसरे के बिना रहेंगे, बहुत देर तक एकदूसरे के गले लगे रहते. प्लेन में मेरी बगल वाली सीट पर बैठी लड़की बहुत उत्साहित थी. कुछ न कुछ बोले जा रही थी. मु  झे उस की आवाज से बोरियत हो रही थी.   झल्ला कर मैं ने पूछा, ‘‘पहली बार प्लेन में बैठी हो या पहली बार शिमला जा रही हो?’’

वह शरमाते हुए बोली, ‘‘पहली बार अपने प्रेमी से इस तरह मिलने जा रही हूं. वह शादीशुदा है… जब तक तलाक नहीं हो जाता हमें इसी तरह छिपछिप कर मिलना पड़ेगा. तलाक मिलते ही हम शादी कर लेंगे.’’

मेरी उस की प्रेम कहानी में कोई दिलचस्पी नहीं थी. मैं आंखें बंद कर सिर टिका कर सोने की कोशिश करने करने लगी. लेकिन जब नाश्ता आया तो यह नाटक नहीं चला और वह दोबारा शुरू हो गई. उस के औफिस में ही काम करता था और उस के अनुसार दिखने में बहुत मस्त था. लेकिन बेचारा दुखी था. बीवी   झगड़ालू थी. दोनों में बिलकुल नहीं बनती थी. उस लड़की की बकबक से बचने के लिए मैं कान में इयर फोन लगा कर बैठ गई.

उतरते समय वह कुछ परेशान लगी, बोली, ‘‘मैं पहली बार इस तरह अकेली यात्रा कर रही हूं मु  झे बहुत घबराहट हो रही है. अगर वे नहीं आए तो मैं क्या करूंगी. आप मु  झे प्लीज अपना फोन नंबर और नाम बता दो. अगर जरूरत पड़ी तो मैं आप से सहायता मांग लूंगी. मेरा नाम काम्या है. मैं सुगम लिमिटेड में काम करती हूं.’’

मु  झे ऐसे लोगों से चिढ़ होती है जो बेमतलब चिपकते हैं. मैं ने उस से परिचय मांगा था… बेमतलब उतावली हो रही थी अपने बारे में बताने को. लेकिन वह उस कंपनी में काम करती है, जिस में नील भी नौकरी करता है.

हिरेन मु  झे एयरपोर्ट पर लेने आया. देख कर बड़ा खुश हुआ. अच्छे होटल में ठहरने की व्यवस्था की थी. कमरे तक पहुंचा कर हिरेन बोला, ‘‘आज रविवार है. कल से काम करेंगे. तुम अभी आराम करो. जब उठो तो कौल करना. कहीं घूमने चलेंगे.’’

‘‘बाकी सब कहां हैं?’’

‘‘वे सब चले गए… उन का काम खत्म हो गया. अब बस मेरा और तुम्हारा काम रह गया है.’’

मैं चुपचाप कमरे में अपने फोन को हाथ में पकड़ कर बैठ गई. अगर नील का फोन आया यह पूछने के लिए कि मैं ठीक से पहुंच गई कि नहीं और मैं इधरउधर हुई तो बात नहीं हो पाएगी. अत: मैं शाम तक ऐसे ही बैठी रही पर उस का फोन नहीं आया.

तभी दरवाजे पर दस्तक हुई. खोला तो सामने हिरेन था.

‘‘यह क्या कपड़े भी नहीं बदले… जब से ऐसे ही बैठी हो. मैं इंतजार करता रहा तुम्हारे बुलाने का. तैयार हो जाओ हम बाहर घूमने चलते हैं वहीं कुछ खा कर आ जाएंगे,’’ वह बोला.

मैं बेमन सी हो गई और फिर सिरदर्द का बहाना बना कर जल्दी वापस आ कर कमरे में सो गई.

अगले दिन जिस होटल में ठहरे थे वहीं का औडिट करना था, इसलिए सुबह से शाम तक काम करते रहे. शाम को हिरेन फिर घूमने की जिद करने लगा. अकेले रोज उस के साथ इस तरह घूमना मु  झे ठीक नहीं लग रहा था. लेकिन क्या करती.

घूमतेघूमते काम्या दिख गई. अकेली थी. फिर चिपक गई. उस दिन मु  झे उस का साथ बुरा नहीं लगा. हिरेन से उस का परिचय करा कर हम इधरउधर की बातें करने लगे. काम्या ने बताया कि उस का बौयफ्रैंड कल आने वाला था सड़क मार्ग से पर गाड़ी खराब हो गई तो बीच में कहीं रुकना पड़ा. अब रात तक आएगा. वह अकेली थी. हमारे साथ घूमने लगी, हिरेन बोर हो रहा था, लेकिन मु  झे क्या.

अभिनेत्री शालिनी पांडे क्यो हुईं घर छोड़ने को मजबूर

खुबसूरत, हंसमुख और स्पष्टभाषी अभिनेत्री शालिनी पांडे ने तेलुगु, तमिल और हिंदी फिल्मों से अभिनय की शुरुआत की हैं. उनकी तेलगू फिल्म अर्जुन रेड्डी उनकी पहली सफल फिल्म रही, जिससे उन्हें अभिनय इंडस्ट्री में जगह मिली. उन्होंने तमिल फिल्में भी की है. उनकी हिंदी फिल्म जयेशभाई जोरदार है, जिसमे उन्होंने मुद्रा पटेल की भूमिका निभाई है.

शालिनी ने अपने करियर की शुरुआत मध्यप्रदेश के जबलपुर के एक थिएटर ग्रुप से की थी. उन्होंने 2017 में विजय देवरकोंडा के साथ तेलगू फिल्म अर्जुन रेड्डी से अपने फिल्मी कैरियर की शुरुआत की. इसमें उन्होंने तेलगू भाषा न जानते हुए भी अपनी डबिंग खुद की. फिल्म व्यावसायिक रूप से सफल रही और और उन्हें बेस्ट डेब्यू एक्ट्रेस तेलगू फिल्म का अवार्ड मिला. इसके बाद वह 2018 में हिंदी फिल्म मेरी निम्मो में एक कैमियो भूमिका में दिखाई दीं. अभी वह कई वेब सीरीज और फिल्मों में काम कर रही है. उन्होंने गृहशोभा के लिए खास बात की आइये जाने उनकी कहानी उनकी जुबानी. नई प्रोजेक्ट के बारें में शालिनी का कहना है कि अभी एक प्रोजेक्ट की शूटिंग चल रही है. एक कम्पलीट हो चुकी है, जो अगले साल रिलीज होगी.

मिली प्रेरणा

एक्टिंग में आने की प्रेरणा के बारें में शालिनी का कहना है कि मेरे परिवार में कोई भी अभिनय फील्ड से नहीं है. अधिकतर इंजिनियर है, लेकिन मैं जबलपुर की हूँ, इसलिए मेरे परिवार की इच्छा थी मैं अच्छी पढ़ाई कर लूँ और मुझे याद भी नहीं है कि किस क्षण मुझे लगा कि मुझे अभिनय ही करना है, लेकिन थोड़ी बड़ी होने पर, थिएटर से जुड़ने पर महसूस हुआ कि मुझे अभिनय करना पसंद है, ये मुझे ख़ुशी देती है. केवल एक ही नहीं बल्कि किसी की भी परफॉरमेंस को करने की इच्छा होती थी. स्कूल में कभी किसी फ्रेंड ने भी नहीं कहा कि मैं एक्ट्रेस जैसी दिखती हूँ या एक्टिंग कर सकती हूँ, क्योंकि तब मैं स्पोर्ट्स में काफी रूचि रखती थी. पढाई में ध्यान भी तब कम था. कॉलेज के दौरान मुझे एक्टिंग का अनुभव हुआ, इससे पहले मैं बहुत झल्ली थी.

 

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मुश्किल था समझाना  

शालिनी कहती है कि पेरेंट्स को मैंने मजाक – मजाक में अभिनय करने की बात कहती थी और उन्होंने भी सीरियस नहीं लिया, कॉलेज के लास्ट इयर में मैंने अपने पिता को कहा था. परिवार में कोई भी इस क्षेत्र से नहीं है, इसलिए मुझे कैसे क्या करना है, इस बारें में भी जानकारी नहीं थी. इतना पता था कि मुंबई जाकर रहना पड़ेगा और काम के लिए संघर्ष करना पड़ेगा. मैंने उनसे 2 साल मांगे ताकि मैं शहर और काम को समझ सकूँ. इससे पहले मैं कभी भी जबलपुर से बाहर नहीं निकली थी.

मेरे पिता ने बहुत ही ख़राब रिएक्शन दिया. उनकी सोच थी कि मैं हायर एजुकेशन के लिए बाहर जाऊं या फिर कैंपस सिलेक्शन में बैठकर जॉब ले लूँ, लेकिन मैंने किसी भी जॉब में नहीं बैठी. इसलिए कोई आप्शन अब नहीं रहा. पिता बहुत अधिक नाखुश हुए. उनके हिसाब से मुझे इंजिनियर बनना था, लेकिन मैंने वह नहीं किया. बहुत मनाया पर उन्होंने नहीं माना काफी ड्रामा वाली स्टोरी रही. इसके बाद मैंने खुद घर छोड़ने का प्लान बनाया क्योंकि माँ भी पिता की बात को सही ठहरा रही थी. मेरी माँ अब मान चुकी है. अगर मैं तब नहीं निकलती तो इंडस्ट्री में नहीं आ सकती थी और मुझे इंजिनियर की पढ़ाई में मन भी नहीं था. घर से निकलने के बाद मुझे आजादी मिल रही थी और मैं हमेशा से थोड़ी टॉमबॉय जैसी ही थी. पिताजी कैसे भी मान ही नहीं रहे थे, फिर मैंने एक झूठा जॉब एप्लीकेशन मंगवाई और मुंबई काम के बहाने आ गई. मुंबई आकर मैंने ईमेल कर दिया कि मैं वापस नहीं आ रही हूँ और मैंने उन्हें  जॉब की बात झूठी कही थी. फिर मैंने पेरेंट्स के साथ कुछ समय तक बात भी नहीं किया, लेकिन अब सब ठीक हो चुका है.

 

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मिला ब्रेक

वह आगे कहती है कि मैं एक ऑडिशन ग्रुप में शामिल थी और जब मुंबई आ रही थी, तो किसी का कॉल मेरे लिए फिल्म अर्जुन रेड्डी के लिए था. निर्देशक संदीप रेड्डी वांगा मेरे फेसबुक पिक्चर्स को देखकर मुझसे बात करना चाह रहे थे. मुंबई आकर मैं उनसे मिली और उस फिल्म को मैंने किया. मुझे संघर्ष नहीं लगा, क्योंकि मैं एक्टिंग करना चाह रही थी, पहली बार घर से बाहर निकली थी, जो मुझे मिला, सब कुछ मैंने अकेले किया, लाइफ की पूरी डिसिजन मैं खुद ले पा रही थी, ये सब मेरे लिए काफी एन्जॉय करने वाला था. मुंबई आने के 8 महीने बाद फिल्म शुरू हो गई थी. मुझे याद है कि उस समय मेरे पास बहुत कम पैसे थे, साइनिंग अमाउंट जो बहुत थोड़ी सी थी, उसी से मैंने अपना खर्चा चलाया. पिता ने मुझे कुछ भी पैसे नहीं दिए थे, मेरे पास जो पैसे थे उसे लेकर मैं आई थी. यहाँ आकर थिएटर ग्रुप के दोस्तों ने मुझे हेल्प किया, वे आज मेरे परिवार की तरह है. मैं बहुत लकी रही.

मिली सफलता  

शालिनी का कहना है कि फिल्म अर्जुन रेड्डी के बाद मैं साउथ में चली गई कई फिल्में की. हैदराबाद  और चेन्नई गई, लेकिन मुझे मुंबई आकर हिंदी फिल्म करना था, इसलिए यहाँ आ गई और यहाँ काम कर रही हूँ. अर्जुन रेड्डी फिल्म से मुझे सफलता मिली और लोगों ने मेरे काम को पहचाना. मुंबई में भी उसका फल मिला. हिंदी फिल्म जयेशभाई जोरदार भी मेरी अच्छी फिल्म रही. मुझे कैमरे के सामने रहना पसंद है. अलग भूमिका निभाना अच्छा लगता है. मेरी माँ मेरी मेरी कामयाबी से खुश है. पिता भी अब पसंद करने लगे है.

 

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ठगों से पड़ा पाला

कास्टिंग काउच के बारें में पूछने पर वह कहती है कि पहली बार साउथ की अच्छी फिल्म की टीम मिली थी, जो मेरे लिए एक लक की बात रही. इसके अलावा मैं स्पष्टभाषी हूँ, किसी को कुछ कहने से परहेज नहीं करती . अगर कोई चीज मुझे पसंद नहीं तो मैं ‘ना’ कहना जानती हूँ. लोग कहते है कि कास्टिंग काउच है और वह होता होगा, लेकिन मुझे सामना नहीं करना पड़ा. कुछ ऐसे ठगी मिले है, जिन्होंने पैसे ठग लिए है, लेकिन बाक़ी बातों को मैं खुद ही सम्हाल लेती थी. यही वजह थी कि मेरे पेरेंट्स भी मुझे इस इंडस्ट्री में आने नहीं देना चाहते थे. मेरी एजेंसी भी इस बात का ध्यान रखती है और मुझे प्रोटेक्ट करती है.

अन्तरंग दृश्य

शालिनी की ड्रीम बहुत बड़ी है. वह हंसती हुई कहती है कि मैं अधिक से अधिक काम करना चाहती हूँ. सबकुछ करना है. सभी अच्छे डायरेक्टर के साथ काम करना चाहती हूँ. वेब सीरीज में इंटिमेट सीन्स को करने में भी कोई समस्या नहीं. इसमें मैं शूट करने के तरीके, निर्देशक का विजन, मेरी सोच आदि सभी की चर्चा करने के बाद ही मैं करने में सहज हो सकती हूँ. मैं बहुत वोकल हूँ और अगर किसी सीन्स की अल्टरनेटिव नहीं है, तो करने में कोई हर्ज़ नहीं. मैं डायरेक्टर की एक्टर हूँ. कही भी अगर मुझे किसी अभिनय को करने में अगर सहजता नहीं है, तो मैं उसे नहीं करना चाहती और मुझे ना कहने में भी कोई एतराज नहीं. मैं किसी भी बात को कहने में शर्माती नहीं. शाहरुख़ मेरा लव है, उनके साथ काम करने की बहुत इच्छा है. मैं एक बार उनसे मिली हूँ और उनका चार्मिंग फेस मुझे बहुत पसंद है.

खुद करती हूँ समाधान

शालिनी लाइफ में लो फेज आने पर उसका समाधान वह खुद ही खोज लेती है. उनका कहना है कि मेरे पास दो रेस्क्यू किये हुए डॉग्स है, दोनों हमेशा मुझे खुश रखते है. मैं कभी अकेला महसूस नहीं करती. बड़ी डॉग एजे और छोटी का नाम वीजे है. इसके अलावा मुझे दोस्तों के साथ ट्रेवल करना, किताबे पढना आदि पसंद हूँ. मैं मन में किसी के बारें में गुस्सा नहीं पालती, उसे भूल जाना बेहतर समझती हूँ.

 

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फैशन और फ़ूड

फैशन समय के साथ समझ में आया है. असल में फैशन पैसे से ही आती है. जब आप कमाने लगते है तो आप फैशन को समझने लगते है. मैं मूडी हूँ, इसलिए समय के अनुसार ही कपडे पहनना पसंद करती हूँ. मैं वेजिटेरियन हूँ और अलग – अलग डिशेज को ट्राई करना पसंद करती हूँ.

वित्तीय आत्मनिर्भर होना जरुरी

किसी को भी लाइफ में अच्छी जिंदगी बिताने के लिए वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर होने की जरुरत है, जिससे आप अपनी आज़ादी को खुद ही ला पाते है. ये आत्मनिर्भरता पिता, पति या किसी के पास रहने पर भी होना जरुरी है. ये हर महिला के पास होना जरुरी है. पैसा हमेशा ही खुशियों को पास ला सकती है. इसमें पैसे के साथ आपका जुड़ाव और उसका प्रयोग आप कैसे करें वह व्यक्ति पर निर्भर करता है.

 

करण जोहर ने थॅूंक कर चाटते हुए कार्तिक आर्यन से मिलाया हाथः क्या यह दोस्ती लंबी चलेगी..?

बौलीवुड में करण जोहर और उनकी प्रोडक्शन कंपनी ‘‘धर्मा प्रोडक्शन’’ एक बड़ा नाम है. करण जोहर ने 1995 में फिल्म ‘‘दिलवाले दुलहनिया ले जाएंगे’’ से अभिनय के क्षेत्र में कदम रखा था. मगर 1998 में ‘कुछ कुछ होता है’’ से वह लेखक व निर्देशक बन गए. फिर 2003 में फिल्म ‘‘कल हो न हो’’ से वह लेखक, निर्देशक व निर्माता बन गए. इतना ही नहीं इस फिल्म में छोटा सा किरदार भी निभाया. वह अब तक  52 फिल्मों का निर्माण या निर्देशन कर चुके हैं. तो वहीं सोलह फिल्मों में अभिनय,कुछ टीवी शो का संचालन वगैरह काफी कुछ कर चुके हैं. उनकी अकड़ व अहम जगजाहिर है. उनके बैनर की कई फिल्में बाक्स आफिस पर अपनी लागत तक नहीं वसूल पायी. मसलन ‘कलंक’,‘डाइव’,‘घोस्ट स्टोरीज’,‘सूर्यवंशी’,‘गहराइयां’,‘जुग जुग जियो’,‘लाइगर’,‘ब्रम्हास्त्र’, ‘सेल्फी’,‘रौकी और रानी की प्रेम कहानी’ जैसी फिल्में सुपर फ्लाप हो चुकी हैं. बीच में खबर आयी थी कि उन्हे मुकेश अंबानी से तीन सौ करोड़ का कर्ज लेना पड़ा. करण जोहर ने सिद्धार्थ मल्होत्रा के संग ‘योद्धा’ बनायी है,जो कि पिछले डेढ़ वर्ष से प्रदश्र्षित नही हो पा रही है.तो वहीं ‘मिस्टर एंड मिसेस माही’ भी बनी पड़ी. जिगरा’, ‘स्क्रूढीला’, ‘बेधड़क’, अनाम एक्षन फिल्म’ सहित छह फिल्मों की घोषणा कर चुके हैं.

लेकिन उनकी फिल्मों की शूटिंग आगे नहीं बढ़ पा रही है. गाड़ी एकदम से रूकी हुई है.ऐसे मोड़ पर करण जोहर ने कार्तिक आर्यन संग अपनी दुश्मनी भुला दी और कार्तिक के साथ कभी फिल्म न बनाने की कसम को तोड़ते हुए कार्तिक के साथ दोस्ती कर ली और कार्तिक आर्यन को हीरो लेकर एक फिल्म बनाने का ऐलान किया है,इस फिल्म का निर्देशन संदीप मोदी करेंगे और यह फिल्म 15 अगस्त 2025 में प्रदर्शित की जाएगी. इसके अलावा इस फिल्म को लेकर कुछ भी तय नही है.

 

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ज्ञातब्य है कि कुछ वर्ष पहले कार्तिक आर्यन को लेकर करण जोहर फिल्म ‘दोस्ताना 2’’ बनाने जा रहे थे,पर अचानक दोनों के बीच अनबन हो गयी और तब करण जोहर ने कार्तिक आर्यन के खिलाफ काफी कुछ कहा था. उस वक्त खबर उड़ी थी कि इस झगड़े का बीज कार्तिक आर्यन के मैनेजर व पीआर ने बोया. उन दिनों कार्तिक आर्यन लगातार सफल हो रहे थे. लेकिन अब हालात बदल चुके हैं. कार्तिक आर्यन की ‘फ्रेडी’,‘शहजादा’ व ‘सत्यप्रेम की कथा’ असफल हो चुकी हैं. कार्तिक आर्यन ने स्वयं ‘शहजादा’ का निर्माण भी किया था,इसके चलते उन्हे काफी बड़ा नुकसान हुआ. तो वहीं कार्तिक आर्यन ने उस पीआर व मैनेजर से छुटकारा पा लिया है,जिसकी वजह से करण जोहर के साथ उनके झगड़े की बात उड़ी थी. इन दिनों उनके पास फिल्म ‘‘चंदू चैंम्पियन’’ के अलावा कोई फिल्म नही है. यह फिल्म बनकर तैयार है,जिसके जनवरी 2024 में प्रदर्शित होने की खबरें हैं. ऐसे में कार्तिक आर्यन को भी मजबूत सहारे की तलाश थी.

 

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सूत्रों पर यकीन किया जाए तो कार्तिक आर्यन ने सीधे करण जोहर से दोस्ती नही की. बल्कि एकता कपूर की कंपनी ‘बालाजी टेली फिल्मस’ के साथ की है.जी हाॅ! संदीप मोदी के निर्देशन में कार्तिक आर्यन जिस फिल्म को करने वाले हैं,उसका निर्माण एकता कपूर की कंपनी ‘बालाजी टेलीफिल्मस’ और करण जोहर की कंपनी ‘धर्मा प्रोडक्शन’ मिलकर कर रहा है. पर बौलीवुड का एक तबका मानकर चल रहा है कि यह फिल्म कभी नही बनने वाली है. इस फिल्म की घोषणा खुद को सूर्खियों में लाने के लिए की गयी है. बहरहाल,हम तो चाहेंगे कि कार्तिक आर्यन व करण जोहर का यह नया दोस्ताना बना रहे और फिल्में बनती रहें. भारतीय सिनेमा जिंदा रहेगा,तो लाखों लोगों का पेट भरता रहेगा.

मुझे जानना है कि मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में खानपान की क्या भूमिका है?

सवाल

अवसाद और दूसरे मानसिक विकारों के बढ़ते मामलों को देखते हुए मैं यह जानना चाहती हूं कि मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में खानपान की क्या भूमिका है?

जवाब

पोषक तत्त्वों से भरपूर डाइट का सेवन करें. फाइबर, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और अच्छी वसा के साथ ही माइक्रो न्यूट्रिएंट्स जैसे मिनरल्स और विटामिंस उचित मात्रा में हों. अगर शरीर में ऊर्जा का स्तर ठीक होगा तो हम डिप्रैशन और ऐंग्जाइटी से बच जाएंगे. जंक और प्रोसैस्ड फूड्स के बजाय घर पर बना सादा खाना खाएं. अपने डाइट चार्ट में फलों, सब्जियों, सूखे मेवों और साबूत अनाज को अधिक मात्रा में शामिल करें. अगर जरूरी हो तो 2-3 महीनों तक मल्टी विटामिन लें, लेकिन उस से अधिक समय नहीं.

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अगले महीने मेरी डिलिवरी है. मैं जानना चाहती हूं पोस्ट पार्टम डिप्रैशन क्या होता है और क्या यह सामान्य है?

जवाब

बच्चे के जन्म के बाद6 सप्ताह तक बेबी ब्ल्यूजया प्रैगनैंसी ब्लूज होना सामान्य है. इस दौरान बहुत ज्यादा हारमोन परिवर्तन होते हैं, इसलिए महिलाएं बहुत अस्थिर महसूस करती हैं. उन्हें रोना आना, चिड़चिड़ापन, परेशान होना, उदासी, रात में नींद न आना, बच्चे को संभालने में परेशानी होना, थकान, स्तनपान कराने में परेशानी होना जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है. इस स्थिति को पोस्ट पार्टम डिप्रैशन भी कहते हैं. लेकिन अगर यह स्थिति 6 सप्ताह के बाद भी बनी रहे तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए क्योंकि अगर समय रहते इसे ठीक नहीं कराया जाए तो यह पोस्ट पार्टम डिप्रैशन चलता रहता है केवल इस के रूप बदलते रहते हैं.

-डा. जया सुकुलक्लीनिकल साइकोलौजिस्ट, हैडस्पेस हीलिंग, नोएडा द्य  

पाठक अपनी समस्याएं इस पते पर भेजें : गृहशोभा, ई-8, रानी झांसी मार्ग, नई दिल्ली-110055.

स्रूस्, व्हाट्सऐप मैसेज या व्हाट्सऐप औडियो से अपनी समस्या 9650966493 पर भेजें. 

Winter Special : सर्दियों में रखें दिल को हैल्दी

सर्दियों का मौसम यानी अच्छा खाना और कई सारे त्योहार, इसीलिए भारत में लोग सालभर सर्दियों की राह देखते हैं. गरमगरम स्नैक्स और मिठाई का लुत्फ उठाने का यह मौसम सभी को प्यारा लगता है. सर्दियां अपने साथ ले कर आती हैं साल के बड़े त्योहार, मौजमस्ती, दोस्तों, परिवारजनों के साथ मनाए जाने वाले जश्न. यही मौसम होता है जब हमारे दिल की संवेदनशीलता बढ़ती है.

सर्दियों में तापमान में गिरावट का स्वास्थ्य पर काफी असर पड़ सकता है खासकर दिल पर. इस से हार्ट अटैक, हार्ट फेल्योर, फ्लू आदि का खतरा बढ़ता है. हृदय और सर्क्युलेटरी सिस्टम पर ठंडे मौसम का असर पड़ सकता है.

इस के अलावा सर्दियों में लोगों की सक्रियता कम हो जाती है. आराम करने और शरीर को गरम रखने के लिए लोग घरों के भीतर ही रहना पसंद करते हैं. इस का असर यह होता है कि शरीर को जितनी कसरत की जरूरत होती है उतनी इस मौसम में नहीं हो पाती है.

तापमान में बदलाव की वजह से शरीर में फिजियोलौजिकल बदलाव होते हैं. इसीलिए सर्दियों में स्वास्थ्य के लिए सब से बड़ा जोखिम बायोलौजिकल होता है. सिंपैथेटिक नर्वस सिस्टम सक्रिय हो जाती है जिस की वजह से रक्तवाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं. हृदय को खून की आपूर्ति कम हो जाती है, जिस से ब्लड प्रैशर बढ़ता है और हार्ट अटैक व स्ट्रोक का जोखिम भी बढ़ता है.

सर्दियों में कोरोनरी धमनियां सिकुड़ जाती हैं, जिस से कोरोनरी हृदय रोग के कारण सीने में होने वाला दर्द और ज्यादा बढ़ सकता है. एक तरफ शरीर के तापमान को स्थिर रखने के लिए हृदय को अतिरिक्तमेहनत करनी पड़ती है तो दूसरी ओर सर्द हवाएं हृदय की इस मेहनत को और भी कठिन बना सकती हैं क्योंकि सर्द हवाओं की वजह से शरीर की गरमी तेजी से कम होती है. यदि आप के शरीर का तापमान 95 डिग्री से नीचे चला जाता है तो हाइपोथर्मिया हृदय की मांसपेशियों को नुकसान पहुंचा सकता है.

भारत में सर्दियां यानी कई सारे बड़े त्योहार, छुटियां, कई सारे जश्न मनाना, खूब सारा खाना और कम नींद लेना. इन सब का हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. छुट्टियां और त्योहार इमोशनल रिस्पौंसेज को बढ़ा सकते हैं. उन्हें अगर नियंत्रित नहीं किया जाए तो हृदय का तनाव बढ़ सकता है. सर्दियों के दौरान होने वाला भावनात्मक तनाव, जिसे सीजनल इफैक्टिव डिसऔर्डर भी कहते हैं स्ट्रैस हारमोंस के लैवल्स को बढ़ा सकता है. इस से हार्ट अटैक या स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है.

सर्दियों में लोग शरीर में गरमी बनाए रखने के लिए घरों के भीतर रहना पसंद करते हैं. अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो शरीर में सर्कुलेशन कम न हो इस के लिए घर के भीतर होते हुए भी पर्याप्त ऐक्टिविटी करते रहें. सर्दियों में जुकाम, गले में खराश और खांसी जैसी हलकी बीमारियां भी होती रहती हैं. वैसे तो ये काफी मामूली बीमारियां है, लेकिन अगर आप का हृदय पहले से दूसरी कुछ वजह से तनाव में है तो आप के लिए ये बीमारियां भी खतरनाक साबित हो सकती हैं.

जोखिम

पहले से मौजूद हृदय रोग सब से स्पष्ट जोखिम कारक है. यह दर्शाता है कि व्यक्ति एक चुनौती के साथ शुरुआत कर रहा है. इसलिए सवाल यह नहीं है कि क्या हो सकता है, लेकिन क्या होने की संभावना है. किसी भी वृद्ध व्यक्ति के लिए ठंड के मौसम में गरम रहना काफी ज्यादा कठिन होता है क्योंकि डिलेड मैटाबोलिक रिएक्शन से शरीर में गरमी का चलना मुश्किल हो जाता है. ऐसे में हृदय पर रक्त पंप करने के लिए अतिरिक्त दबाव पैदा होता है. साथ ही हाई ब्लड प्रैशर, धूम्रपान, बीमारियों का पारिवारिक इतिहास, हाई कोलैस्ट्रौल, मोटापा, शराब का ज्यादा सेवन जैसे कारक सर्दियों के दौरान हार्ट अटैक की संभावना को बढ़ा सकते हैं. ठंड के मौसम का हृदय की स्थिति पर प्रभाव कुछ कारकों की वजह से कम या ज्यादा हो सकता है. उदाहरण के तौर पर धूम्रपान और शराब जैसे जोखिम कारकों के चलते सर्दियों में हार्ट अटैक का कारण बनने की संभावना अधिक होती है क्योंकि वासोकंस्ट्रिक्शन पर उन का सीधा असर पड़ता है और उस की वजह से ब्लड प्रैशर बढ़ता है. पहले से किसी बीमारी का होना या शरीर का रिकवरी स्टेज में होना यह दर्शाता है कि शरीर जितना मजबूत और शक्तिशाली होना चाहिए उतना नहीं होता है. नतीजतन उस व्यक्ति को इन्फैक्शन होने का खतरा सब से अधिक होता है. कुछ बीमारियां हृदय पर और अधिक दबाव डाल सकती हैं.

सर्दियों में अपने हृदय को स्वस्थ रखने के लिए इन उपायों को अपनाएं शरीर को गरम रखना सब से जरूरी है. गरम या एक के ऊपर एक ज्यादा कपड़े पहनें ताकि शरीर गरम रहें और शरीर से गरमी निकल जाने को रोका जा सके. इस तरह आप अपने हृदय को अतिरिक्त काम करने से बचा सकते हैं. अगर आप को बाहर जाना है तो बाहर की ठंड और गतिविधियों के हिसाब से सही कपड़े पहनें. जब आप एक के ऊपर एक कपड़े पहनते हैं तब अगर आप का ऐक्टिविटी लैवल बढ़ जाता है तो आप ऊपर के कुछ कपड़े निकाल सकते हैं. आप को अपने शरीर को गरम रखना है, ओवरहीट नहीं करना है. अगर पसीना आ रहा है तो ऊपर के 1-2 कपड़े निकाल कर आप शरीर को थोड़ा ठंडा भी कर सकते हैं.

अपनेआप को शारीरिक रूप से सक्रिय बनाए रखें. हर समय घर के बाहर जा कर ही कसरत करना जरूरी नहीं है. तापमान अगर ठंडा है तो सुबह जल्दी घर से बाहर निकल कर ऐक्सरसाइज न करें. अगर बाहर निकल सकते हैं तो स्ट्रैचेस या दौड़ने जैसी हलकी ऐक्सरसाइज की जा सकती है. लाइट ऐरोबिक्स, योगा, होम वर्कआउट्स, नाचना या मैडिटेशन जैसी गतिविधियां आप घर पर भी कर सकते हैं.

नियमित व्यायाम करें

नियमित कसरत से आप का शरीर गरम रहता है तो आप को फिट रहने में मदद मिलती है. कसरत करते समय अपने टारगेट हार्ट रेट तक पहुंचने का प्रयास करें. हृदय को स्वस्थ रखने के लिए हर दिन कम से कम 30 मिनट, हफ्ते में 5 दिन ऐरोबिक ऐक्सरसाइज करना जरूरी है.

सर्दियों में कंफर्ट फूड खाने के लिए जी ललचाना स्वाभाविक बात है, लेकिन खाने के मामले में संतुलन रखना सब से जरूरी होता है. सर्दियों में बनने वाले तरहतरह के व्यंजनों का स्वाद चखना चाहिए, लेकिन शरीर को स्वस्थ रखना है तो न्यूट्रिएंट्स आवश्यक होते हैं.

फलों और सब्जियों में पाए जाने वाले विटामिन और मिनरल शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत रखते हैं. तला हुआ, फैटी, मीठा और हाई कोलैस्ट्रौल वाला खाना खाने से बचें क्योंकि इस से हृदय की बीमारी का खतरा बढ़ सकता है. सर्दियों में अकसर हाई कोलैस्ट्रौल वाला खाना खाया जाता है, जिस से हृदय के स्वास्थ्य पर काफी बुरा असर पड़ सकता है, इसलिए संतुलित आहार लेना आवश्यक है.

कड़ी निगरानी रखें

छोटे दिन और लंबी रातें, घर के भीतर ज्यादा समय बिताना इन की वजह से आप उदास या अशांत महसूस कर सकते हैं. सूरज की रोशनी न होने से कई लोगों को पर्याप्त विटामिन डी नहीं मिल पाता है. इस से डिप्रैशन बढ़ सकता है. योगा और मैडिटेशन के साथसाथ सक्रिय रहना, दोस्तों और परिवार के संपर्क में रहना जरूरी है जिस से आप बेहतर महसूस कर सकते हैं.

तनाव बहुत ज्यादा बढ़ने से शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली के कार्य में बाधा आ सकती है खासकर सर्दियों में तनाव प्रबंधन जरूरी होता है. स्ट्रैस हारमोंस ब्लड प्रैशर को बढ़ा कर प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर कर सकते हैं. ब्लड शुगर, ब्लड प्रैशर, किडनी और स्वास्थ्य की दूसरी समस्याओं पर कड़ी निगरानी रखें.

इन स्थितियों पर ध्यान नहीं रखा गया तो हृदय के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है. बहुत ज्यादा थका देने वाले काम न करें और अगर आप पहले से हार्ट के मरीज हैं तो कोई भी वजनदार और कठोर काम न करें. काम करते हुए बीच में छोटे ब्रेक लें. अचानक कोल्ड स्ट्रोक्स को टालने के लिए हार्ट के मरीजों को सर्दियों में घर के भीतर ही रहना चाहिए. बहुत ज्यादा शराब पीना, स्मोकिंग और किसी भी तरीके से तंबाकू के सेवन से बचें क्योंकि इस से हृदय की स्थिति और ज्यादा बिगड़ सकती है.

पर्याप्त आराम जरूरी

अच्छे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए पर्याप्त आराम करना जरूरी होता है. हृदय की बीमारियां, हाई ब्लड प्रैशर, डायबिटीज और स्ट्रोक जैसी कई स्वास्थ्य समस्याएं नींद पूरी न होने के कारण पैदा होती हैं. किसी भी वयस्क व्यक्ति के लिए हर रात को 7 से 9 घंटे सोना आवश्यक होता है.

अगर आप का नाइट रूटीन नियमित है तो आप को बेहतर नींद आ सकती है. नाइट रूटीन बैठाने के लिए आप को कुछ छोटी एड्जस्टमैंट्स करनी पड़ सकती हैं, जिस से आप शांत नींद की आदत डाल सकते हैं.

सेहत का खास खयाल

कार्डिएक समस्याओं के लक्षणों को सम?ाना सर्दियों में और भी ज्यादा महत्त्वपूर्ण होता है. कई बार हार्ट अटैक वार्निंग इंडिकेटर अचानक पैदा होते हैं, सीने में बहुत ज्यादा जलन, परेशानी, बहुत ज्यादा पसीना आना, सांस लेने में तकलीफ, जबड़े, बांहों या कंधों में लंबे समय तक दर्द आदि हार्ट अटैक के वार्निंग इंडिकेटर हैं.

हालांकि पुरुषों और महिलाओं में ये लक्षण अलगअलग हो सकते हैं. पुरुषों को कभीकभी बेचैनी या चक्कर आने की शिकायत हो सकती है, लेकिन महिलाओं में असामान्य लक्षण पैदा होने की संभावना काफी अधिक होती है, जिस के कारण वे कभीकभी चेतावनियों को अनदेखा कर सकती हैं.

ठंड का मौसम शरीर और मन दोनों के लिए काफी मुसीबत भरा हो सकता है. अगले कुछ महीनों में अपनी सेहत का खास ध्यान रखें. ठंडा तापमान हृदय के लिए कठिन हो सकता है, लेकिन स्वस्थ जीवनशैली अपना कर आप इस मौसम का लुत्फ उठा सकते हैं.

किसी भी लक्षण को अनदेखा न करें बल्कि तुरंत डाक्टर से संपर्क करें. कार्डियक लक्षणों को सम?ाने और उन के इलाज में थोड़ी सी भी देरी न केवल समस्या की जटिलता को बढ़ा सकती है वरन जानलेवा भी हो सकती है.

-डा. नीलेश गौतम

कंसल्टैंट, इंटरवैंशनल कार्डियोलौजी, पीडी हिंदुजा हौस्पिटल ऐंड रिसर्च सैंटर, खार.

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