इधर कुआं उधर खाई

हर मोबाइल में कैमरा होना एक टैक्नोलौजी का कमाल है पर हर नई टैक्नोलौजी की तरह उस में भी खतरे भरे हैं. अब इस कैमरे का वाशरूमों में लड़कियों के कपड़े बदलने के दौरान वीडियो बनाने के लिए जम कर इस्तेमाल किया जा रहा है जिसे बाद में ब्लैकमेल के लिए या यों ही मजा लेने के लिए वायरल कर दिया जाता है.

भारत की महान जनता भी ऐसी है कि इस तरह के सैक्सी वीडियो को देखने के लिए हर समय पागल बनी रहती है और इंस्टाग्राम, फेसबुक, ऐप्स, थ्रैड्स, यूट्यूब पर हरदम जुड़ी रहती है तो इसलिए कि इस तरह का कोई वीडियो डिलीट होने से पहले मिस न हो जाए.

दिल्ली के आईआईटी में स्टूडैंट्स के एक प्रोग्राम में फैशन शो के दौरान लड़कियों के ड्रैस बदलने व कौस्ट्यूम पहनने के समय वाशरूम की खिड़की से एक सफाई कर्मचारी शूटिंग करता पकड़ा गया. इस तरह के मामले तो आम हैं पर जिन लड़कियों के वीडियो वायरल हो जाते हैं उन की कितनी रातें हराम हो जाती हैं.

आजकल ऐडिटिंग टूल्स भी इतने आ गए हैं कि इन लड़कियों की बैकग्राउंड बदल कर इन्हें देहधंधे में लगी तक दिखाया जा सकता है, वह भी न के बराबर पैसे में.

अच्छा तो यही है कि मोबाइल का इस्तेमाल बात करने या मैसेज देने के काम आए और उसे कैमरों से अलग किया जाए. कैमरा आमतौर पर दूसरों की प्राइवेसी का हनन करता है. पहले जो कैमरे होते थे दिख जाते थे और जिस का फोटो खींचा जा रहा होता था वह सतर्क हो जाता था और आपत्ति कर सकता था.

अब जराजरा सी बात पर मोबाइल निकाल कर फोटो खींचना या वीडियो बनाना अब बड़ा फैशन बन गया है और लोग रातदिन इसी में लगे रहते हैं. यह पागलपन एक वर्ग पर बुरी तरह सवार हो गया है और टैक्नोलौजी का इस्तेमाल हर तरह से घातक होने लगा है.

मोबाइल बनाने वाली कंपनियां लगातार कैमरों में सुधार कर रही हैं पर यह बंद होना चाहिए. कैमरे की डिजाइन अलग होनी चाहिए और केवल अलग रंगों में मिलनी चाहिए ताकि इस का गलत इस्तेमाल कम से कम हो. यह टैक्नोलौजी विरोधी कदम नहीं है, यह कार में सेफ्टी ब्रेक, एअर बैलून जैसा फीचर है.

हर मोबाइल एक प्राइवेसी हनन का रास्ता बन जाए उतना खतरनाक है जैसा सुरक्षा के नाम रिवाल्वरों को हरेक हाथों में पकड़ा देना जो अमेरिका में किया जा रहा है. वहां हर थोड़े दिनों में कोई सिरफिरा 10-20 को बेबात में गोलियों की बौछारों से भून डालता है पर चर्च समर्थक इसे भगवान की मरजी और अमेरिकी संविधान के हक का नाम देते हैं. जब अमेरिका का संविधान बना था तब हर जगह पुलिस व्यवस्था नहीं थी और लोगों को गुंडों, डाकुओं और खुद सरकार की अति से बचना होता था.

मोबाइल कैमरे किसी भी तरह काम के नहीं हैं. वैसे ही सरकारों ने देशों को सर्विलैंस कैमरों से पाट रखा है. इस पर मोबाइल कैमरे बंद होने चाहिए. कैमरे बिकें, एक अलग डिवाइस की तरह. ऐसा करने से कम लोग कैमरे लेंगे और जो लेंगे उन में अधिकांश जिम्मेदार होंगे. वे अमेरिका के गन कल्चर की तरह काम करें, यह संभव है पर फिर भी उम्मीद की जाए कि निर्दोष मासूम लड़कियां अपने बदन की प्राइवेसी को बचा कर रख सकेंगी. वैसे यह मांग मानी जाएगी, इस में शक है क्योंकि जनता को अफीम की तरह मोबाइल कैमरों की लत पड़ चुकी है और ड्रग माफिया की तरह मोबाइल कंपनियां अरबों रुपए लगा कर ऐसे किसी बैन को रोकने में सक्षम हैं.

यों ही अचानक: अकेले पड़ गए मुकुंद की जिंदगी में सारिका को क्या जगह मिली

दूरियां: भाग 2- क्या काम्या और हिरेन के रिश्ते को समझ पाया नील

वैसे तो मु  झे उस के छूने से, उस के करीब आने से एक नैसर्गिक प्रसन्नता और तृप्ति मिलती थी, लेकिन उन दिनों औफिस के माहौल से बहुत परेशान थी. घर आते ही मन करता था नील के कंधे पर सिर रख कर औफिस की भड़ास निकाल कर थोड़ा रोने का. लेकिन उसे आधे घंटे में ट्यूशन पढ़ाने निकलना होता था. मेरे आते ही वह मु  झे बांहों में खींच कर चूमने लगता.

उस दिन कुछ तबीयत ठीक नहीं थी और औफिस में भी कुछ अधिक ही कहासुनी हो गई. भरी बैठी थी. अत: उस के करीब आते ही सारा आक्रोश उस पर निकल गया. धक्का देते हुए बोली, ‘‘इस तन के अलावा और कुछ नहीं सू  झता क्या?’’

वह ठिठक गया. फिर एकदम पलट कर बाहर चला गया.

रात को 12 बजे तक आता था और मेरी नींद न खुले, इसलिए ड्राइंगरूम में ही सो जाता

था. उस रात भी उस ने ऐसा ही किया. सुबह जब मेरी आंख खुली वह तैयार हो कर औफिस जा रहा था. बिना कुछ खाए और बोले वह चला गया. शाम को मेरे आने से 1 घंटा पहले घर आ जाता था और मेरे आते ही हम आधा घंटा अपनी तनमन की सब बातें करते थे. इस के अलावा हमारे पास एकदूसरे के लिए समय नहीं होता था. लेकिन अब मेरे आने से पहले वह निकल जाता था. रोना तो बहुत आता था, पर मैं सही थी. उस के पास मु  झ से बात करने के लिए 2 पल भी नहीं होते थे.

वह खड़ा हो गया. मेरे कंधों को जोर से पकड़ चीखते हुए बोला, ‘‘तुम ने उस दिन मेरे प्रेम को गाली दी, जीवन में अगर अपने से अधिक किसी को प्यार किया तो वह तुम हो. अगर केवल तुम्हारे तन का भूखा होता तो कालेज में 3 साल तक बिना हाथ लगाए नहीं रहता. मन तो तब बहुत मचलता था, लेकिन वादा किया था कि तुम्हारी इज्जत से कभी खिलवाड़ नहीं करूंगा. वही तो आधा घंटा मिलता था करीब आने का. सारा दिन बीत जाता तुम्हारे बारे में सोचतेसोचते… तुम्हारे नजदीक आ कर पूर्णता का एहसास होता, स्फूर्ति आ जाती, दुनिया का सामना करने की ताकत मिल जाती. मेरे प्रेम की अभिव्यक्ति थी वह, तुम में समा कर इतने गरीब हो जाने का एहसास था कि लगता हम एक हैं.’’

उस ने मेरे कंधे छोड़ दिए, आवाज थरथरा रही थी. आंखों में दर्र्द था और वह लड़खड़ाते हुए बाथरूम में चला गया. मेरा मन भारी हो गया. उस की नजरों से कभी सोचने की कोशिश नहीं की. दोनों एकदूसरे का साथ चाहते थे, लेकिन अलगअलग तरीके से. जीवन की भागदौड़ में समय इतना कम जरूरतें इतनी अधिक सब बिखर गया. बात केवल इन गलतफहमियों के कारण बिगड़ी होती तो शायद संभल जाती, लेकिन हमारे रिश्ते में धोखा और   झूठ भी शामिल हो गए थे. कमरे में जा कर लेट गई और रोतेरोते कब सो गई पता नहीं चला.

सुबह फिर बाहर के दरवाजे के खुलने की आवाज से आंख खुली. ताला कुछ सख्त लगता है. कमरे से बाहर आई तो नील खानेपीने का सामान ले कर आया था. चेहरे पर वही उस की चिरपरिचित मुसकान. कितने भी गुस्से में हो बहुत जल्दी सामान्य हो जाता है, मैं बातों को मन में रख कर अपना भी दिमाग खराब कर लेती हूं और दूसरों से भी चिढ़ कर बात करने लगती हूं.

‘‘नीलू, आज गरमगरम कौफी पीते हैं… नीचे कुछ खानेपीने की दुकानें खुल गई हैं,’’ कह मैं जल्दी से मंजन कर आई. फिर हम कल की तरह बालकनी में फर्श पर बैठ कर नाश्ता करने लगे.

नील आसमान की तरफ देखते हुए बोला, ‘‘यहां से

सुबहशाम आसमान की छटा कितनी निराली दिखती है. अद्भुत नजारा है. अगर हम साथ रहते तो कितना अच्छा लगता. रोज यहां बैठ कर बातें करते.’’

कह तो सही रहा था, लेकिन जो नहीं हो सकता मैं उस के बारे में बात नहीं करना चाहती. नाश्ते में एक पेस्ट्री भी रखी थी. हम अकसर छोटी से छोटी खुशी सैलिब्रेट करने के लिए मीठे में एक पेस्ट्री ले आते थे, दोनों आधीआधी खा लेते थे.

‘‘यह पेस्ट्री किस खुशी में?’’

‘‘याद है आज ही के दिन हमें मिले 4 महीने हुए थे और तुम ने मेरे साथ डेट पर जाना स्वीकार कर लिया था.’’

‘‘तुम भी कमाल करते हो न जाने कैसी छोटीछोटी बातें याद रख लेते हो. वह डेटवेट नहीं थी. कालेज कैंटीन में बैठ कर कौफी पी थी बस.’’

‘‘केवल तुम से संबंधित बातें ही याद रख पाता हूं. कैंटीन में उस दिन साथ बैठ कर कौफी पीना एक महत्त्वपूर्ण कदम था. जब तुम पहले दिन कालेज आई थी तो हिरेन और मेरी तुम पर एकसाथ नजर पड़ी थी. दोनों के मुंह से निकला था कि वाह, कितनी खूबसूरत लड़की है. हम दोनों के दिल पर तुम ने एकसाथ दस्तक दी थी. हम ने निश्चय किया कि हम दोनों तुम्हें लाइन मारेंगे और जिस की तरफ तुम्हारा   झुकाव होगा, दूसरा रास्ते से हट जाएगा. उस दिन कैंटीन में कौफी पीते हुए यह खामोश ऐलान था कि तुम मेरी गर्लफ्रैंड हो.’’

मु  झे ये सब नहीं पता था, हिरेन ने शुरू में मु  झे प्रभावित करने की कोशिश तो की थी. नील गुलाब देता तो वह गुलदस्ता लाता. वह पैसे वाले घर से था, इसलिए महंगे तोहफे देता था, लेकिन मु  झे नील पहली नजर में ही भा गया था. उस के हंसमुख व्यवहार और केयरिंग ऐटिट्यूड के आगे सब फीका था. धीरेधीरे हम दोनों सम  झ गए थे कि हमारा एकदूसरे के बिना गुजारा नहीं और हमारे परिवार को हमारा साथ गवारा नहीं.

नील के ब्राह्मण परिवार को मेरे खानपान से दिक्कत थी तो मेरे मातापिता को नील की आर्थिक स्थिति खल रही थी. वैसे मेरे परिवार के पास भी कुछ खास नहीं था, लेकिन पिताजी को लगता अपनी बहनों की तरह मैं भी अपनी खूबसूरती के बल पर पैसे वाले घर में स्थान बना सकती हूं.

स्नातक करते ही हम दोनों ने शादी की और जो नौकरी मिली पकड़ ली. फिर किराए का घर ढूंढ़ना शुरू किया. क्व10-12 हजार से कम का कोई अच्छा मकान नहीं मिल रहा था. बहुत धक्के खा कर 2 कमरों का प्लैट क्व7 हजार किराए पर मिला, वह भी बस कामचलाऊ था. तब हम ने निर्णय लिया आगे सोचसम  झ कर जीवन की राह पर चलेंगे. पहले कुछ पैसे जमा करेंगे. अपना स्वयं का घर नहीं बन जाता तब तक परिवार नहीं बढ़ाएंगे.

शुरू की हमारी जिंदगी बड़ी खुशहाल रही, दोनों 6 बजे तक घर आ जाते. फिर बहुत बातें करते और सपने देखते. किराया देने के बाद अधिक नहीं बचता था, लेकिन एकदूसरे के साथ मस्त थे. फिर नील को लगा कुछ और पैसे कमाने के लिए ट्यूशन पकड़ लेनी चाहिए और मु  झे लगा पदोन्नति और अच्छे वेतन के लिए एम. कौम. कर लेना चाहिए. बस हम दोनों दौड़ में शामिल हो गए, एक बेहतरीन भविष्य की कामना में. इतने थके रहने लगे कि एकदूसरे के लिए समय नहीं होता. बस   झुं  झलाहट रहने लगी.

इस बीच नील का मन सीए की पढ़ाई करने का भी करता बीचबीच में. वह बहुत होशियार है. मु  झे कई बार लगता इतनी जल्दी शादी कर के कहीं पछता तो नहीं रहा. वह आगे पढ़ कर बहुत कुछ कर सकता था.

इस बीच नील के पिताजी का देहांत हुआ तो उस के बड़े भाई ने घर बेचने का निर्णय ले लिया. घर खस्ता हालत में था, फिर भाई को पैसे चाहिए थे फ्लैट खरीदने के लिए. वह दूसरे शहर में रहता था. नील की माताजी मेरे कारण हमारे साथ नहीं रहना चाहती थीं. मकान बेच कर जो रकम मिली उस के

3 हिस्से हुए. 2 हिस्से माताजी व भाई साहब के साथ चले गए. अपने हिस्से से हम ने भी फ्लैट बुक करा दिया. हमारी मुसीबतें और बढ़ गईं. जहां रहते थे उस का किराया, फ्लैट की किश्तें, फिर जिंदा रहने के लिए रोटी और कपड़ा भी जरूरी था. अब हमारे बीच खीज भी रहने लगी. ऐसा नहीं था हम हमेशा एकदूसरे से सड़े रहते थे. जब किसी का जन्मदिन या छुट्टी होती तो प्रेम भी खूब लुटाते, लेकिन अकसर एकदूसरे से बचते या चिढ़ कर बात करते.

मजबूरन मु  झे नौकरी भी छोड़नी पड़ी. वहां का माहौल बरदाश्त के बाहर हो गया था. नील को यह बिलकुल अच्छा नहीं लगा. लेकिन मेरी परेशानी सम  झते हुए कुछ बोला नहीं. उन्हीं दिनों हिरेन से फिर मुलाकात हुई. वह सीए कर चुका था और अपने पिता की फर्म में काम करता था. परेशान देख जब उस ने कारण पूछा तो पुराने दोस्त के सामने बाढ़ के पानी की तरह सारा उदगार तीव्रता से उमड़ पड़ा. उस ने तुरंत अपनी फर्म में बहुत अच्छे वेतन के साथ नौकरी का प्रस्ताव दे दिया और मैं ने सहर्ष स्वीकार भी कर लिया. नील को यह बात भी अच्छी नहीं लगी, लेकिन इस बार वह चुप नहीं रहा.   झगड़ा किया और बहुत कुछ बोल गया.

उस समय सम  झ नहीं सकी थी नील के आक्रोश का कारण, लेकिन आज सम  झ गई. उस के स्वाभिमान को ठेस पहुंची थी. अब हमारे बीच बोलचाल खत्म हो गई थी. मैं कुछ भी बोलने से डरती कि वह बखेड़ा न खड़ा कर दे. वह सामने पड़ते ही मुंह फेर कर इधरउधर हो जाता.

हिरेन के पास दिल्ली के बाहर कई दूसरे शहरों का भी काम था. वह अकसर बाहर जाता रहता था. मु  झे नौकरी करते हुए अधिक समय नहीं हुआ था, फिर भी मेरा नाम लखनऊ जाने वाली टीम में शामिल था.

नीना गुप्ता ने कहा, वह कभी रिश्ते पर सलाह नहीं देंगी: ‘मैंने हमेशा गलत लोगों को डेट किया है’

बॉलीवुड अभिनेत्री नीना गुप्ता के इंटरव्यू अक्सर मार्मिक जीवन सबक से भरे होते हैं. हालांकि, हाल ही में एक बातचीत में अभिनेत्री ने डेटिंग संबंधी कोई भी सलाह देने से इनकार कर दिया और बताया कि ऐसा क्यों है. उन्होंने अपने पति विवेक मेहरा के साथ थेरेपी लेने के बारे में भी बात की और बेटी मसाबा के तलाक के बारे में भी बताया और बताया कि कैसे इससे वह “स्तब्ध” हो गईं.

नीना ने रणवीर अल्लाहबादिया को उनके यूट्यूब चैनल पर बताया, “मैं एक बार थेरेपी के लिए गई थी. जब मैं अपने पति से मिली, तो वह पहले से ही शादीशुदा थे और उसके बच्चे भी थे, इसलिए बहुत सारी समस्याएं थीं. तो, एक बार फिर हम दोनों साथ में थेरेपी के लिए गए. नीना ने बताया कि बात करना स्वस्थ है, भले ही वह खुद से ही क्यों न हो, नीना ने आगे कहा, “मैं दीवार से भी बात कर सकती हूं.”

नीना ने कहा- मैं रिश्ते पर सलाह देने वाली गलत व्यक्ति हूं

जब नीना से उनके फैंस को रिश्ते पर सलाह देने के लिए कहा गया, तो उन्होंने तुरंत इनकार कर दिया और कहा, “मैं रिश्ते पर सलाह देने वाली गलत व्यक्ति हूं. मैंने हमेशा गलत लोगों को डेट किया है.’ कृपया मुझसे न पूछें क्योंकि मैं बहुत ही मूर्खतापूर्ण और बुरा उत्तर दूँगी”

 

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नीना ने बेटी को दी गलत सलाह

अभिनेत्री नीना गुप्ता ने अपनी बेटी मसाबा की मधु मंटेना के साथ पहली शादी को लेकर हुई गलती को भी साझा किया और कहा, “मसाबा शुरू में शादी नहीं करना चाहती थीं. वह अपने होने वाले पति के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहना चाहती थी. लेकिन मैंने कहा, “नहीं, आप उसके साथ शिफ्ट नहीं होंगी. तुम शादी कर लो.’ यह एक गलती थी, वे अलग हो गए. मैं तबाह हो गई थी, मैंने इसकी कभी कल्पना भी नहीं की थी क्योंकि मैं और मेरे पति दोनों ही मसाबा के पूर्व पति से प्यार करते थे और अब भी करते हैं. वह वास्तव में एक अच्छे इंसान हैं और नहीं बनी तो नहीं बनी. जब उसने मुझे बताया तो मैं एक महीने तक स्तब्ध रह गई. वह बहुत कठिन समय था. यह आपके हाथ में नहीं है, यह किसी और का जीवन है.

मसाबा वेस्टइंडीज क्रिकेटर विवियन रिचर्ड्स की बेटी हैं

मसाबा गुप्ता, एक्ट्रेस नीना गुप्ता और वेस्टइंडीज क्रिकेट के दिग्गज विवियन रिचर्ड्स की बेटी हैं. नीना और विवियन ने कभी शादी नहीं की और मसाबा का पालन-पोषण नीना ने भारत में किया. मसाबा ने 2015 में मधु मंटेना से शादी की, लेकिन उनकी शादी 2019 में समाप्त हो गई थी. मसाबा ने बाद में 27 जनवरी, 2023 को अभिनेता सत्यदीप मिश्रा से शादी की, जिन्होंने मसाबा मसाबा बेवसीरिज में उनके पूर्व पति की भूमिका निभाई थी.

Anupamaa में होने जा रही है इस किरदार की धमाकेदार एंट्री, अनु के जीवन में आया तूफान

टीवी की दुनिया का सबसे हिट सीरियल ‘अनुपमा’ काफी समय से नंबर वन पर बना हुआ है लेकिन अब इस शो की लगातर टीआरपी गिरती ही जा रही है. सीरियल की नंबर वन की गद्दी छिन गई है ऐसे में शो के मेकर्स ‘अनुपमा’ में नए-नए ट्विस्ट लेकर आ रहे है. इस सीरियल के कई कलाकरों को एक झटके से गायब कर दिया है, जिसमें एक्टर सुधांशु पांडे (Sudhanshu Pandey) भी शामिल है. वनराज के रुप में आ रहे सुधांशु पांडे शो में तड़का लगाने का काम करते है. वह किसी न किसी तरह अनुपमा की जिंदगी में तहलका मचाने का काम करते थे, लेकिन बीते कुछ दिनों से सुधांशु पांडे  शूटिंग के सेट से गायब थे. अब जल्द ही शो में उनकी वापसी होने वाली है. वह सीरियल में फिर से  नया धमाका कर सकते हैं.

‘अनुपमा’ के सेट पर लौटे सुधांशु पांडे

रुपाली गांगुली और गौरव खन्ना स्टारर ‘अनुपमा’ में नजर आ रहे सुधांशु पांडे काफी लंबे समय से ब्रेक पर थे इस बात का खुलासा उन्होंने इंस्टाग्राम पर लाइव आकर किया. सुधांशु ने बताया कि समर की मौत के बाद सीरियल में काफी इमोशनल ट्रेक चल रहा था. जिस वजह से वह इस एपिसोड से बाहर नहीं आ पाए. ऐसे में उन्हें ब्रेक की जरुरत है. वहीं एक्टर ने अपने चाहते फैंस को कमबैक की खबर दे दी है. सुधांशु ने अपने इंस्टाग्राम पर शूटिंग के सेट के कुछ वीडियो शेयर किए है. जिसमें उन्होंने लिखा है कि, लौट के बूद्ध घर को आए. सुधांशु पांडे ने शो की शूटिंग शुरू कर दी है वह जल्द ही सीरियल में नजर आएंगे. दावा किया जा रहा है कि सुधांशु शो में कई सारे ट्विस्ट ला सकते है. वह अनुपमा की जिंदगी में नई परेशानी खड़ी कर सकते हैं या फिर पाखी की बद्तमीजी पर करारा जवाब दे सकते हैं.

 

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शाह हाउस खाली हो गया

टीवी सीरियल ‘अनुपमा’ में समर की मौत के बाद कई सारे ट्विस्ट आ चुके है. शो में समर के मौत के बाद कुंवर अमरजीत की एंट्री हुई, जो तिपेश का रोल निभा रहे है. सीरियल में जल्द ही तिपेश और डिंपी की लव स्टोरी नजर आ सकती है. इसके अलावा सीरियल में शाह हाउस एकदम खाली हो चुका है. बा और बापू जी कपाड़िया हाउस में अनुपमा के साथ रह रहे है. जहां रोज ड्रामा देखने को मिलता है. वहीं काव्या और डिंपी शाह हाउस में अकेले रह रही है.

मेरी उम्र 52 साल है और मैं कई बार अपनी चीजें कहीं रख कर भूल जाती हूं

सवाल

मैं 52 वर्षीय कामकाजी महिला हूं. मुझे चीजों को याद रखने में काफी परेशानी हो रही है. मैं कभी अपनी चीजें कहीं रख कर भूल जाती हूं तो कभी मामूली से जोड़घटाव भी बिना कैलकुलेटर के नहीं कर पाती हूं?

जवाब

आप की उम्र 52 साल है. इस उम्र तक अधिकतर महिलाएं मेनोपोज की स्थिति तक पहुंच जाती हैं. इस दौरान हारमोन संबंधी परिवर्तन बहुत अधिक होते हैं. कई महिलाओं में

प्री मेनोपोजल सिंड्रोम बहुत सालों तक चलता है. उस की वजह से ब्रेन फौग, याददाश्त कमजोर होना, मूड स्विंग जैसी समस्याएं होने लगती हैं. शरीर में हारमोनों का स्तर सामान्य बनाए रखने के लिए अनुशासित जीवनशैली का पालन करें. संतुलित व पोषक भोजन का सेवन करें और नियमित रूप से ऐक्सरसाइज करें. जरूरी चीजों को लिख कर रखें.

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मैंने कहीं डिजिटल डिमेंशिया के बारे में पढ़ा था. मैं जानना चाहती हूं यह क्या होता है और इस से कैसे बचा जा सकता है? 

जवाब

आज हमारे जीवन में गैजेट्स का इस्तेमाल बहुत बढ़ गया है. हमारी इन पर निर्भरता इतनी बढ़ गई है कि हम अपने मस्तिष्क का इस्तेमाल ही नहीं करते. हमें कोई मोबाइल नंबर याद नहीं रहता, हम साधारण से जोड़घटाव भी बिना कैलकुलेटर के नहीं कर पाते हैं. धीरधीरे हमारी काग्नेटिव स्किल यानी सीखनेसम?ाने की क्षमता कम होने लगती है. यही डिजिटल डिमेंशिया है. इस के कारण मस्तिष्क का वह हिस्सा प्रभावित होता है जो याद रखने को ले कर निर्धारित है. इस के शिकार लोगों को जगह और रास्ते याद रखने में परेशानी होना, साधारण जोड़घटाव न कर पाना, चीजों को भूलने जैसी समस्याएं होने लगती हैं. जब जरूरत हो तभी गैजेट्स का इस्तेमाल करें. कुछ चीजों को बिना गैजेट्स के भी करने की आदत डालें. सप्ताह में एक दिन डिजिटल डिटौक्स करें. इस दिन गैजेट्स का इस्तेमाल बिलकुल न करें.

-डा. जया सुकुलक्लीनिकल साइकोलौजिस्ट, हैडस्पेस हीलिंग, नोएडा

पाठक अपनी समस्याएं इस पते पर भेजें : गृहशोभा, ई-8, रानी झांसी मार्ग, नई दिल्ली-110055.

स्रूस्, व्हाट्सऐप मैसेज या व्हाट्सऐप औडियो से अपनी समस्या 9650966493 पर भेजें. 

Winter Special: सर्दी के ये लजीज पकवान

सर्दी  दस्तक दे चुकी है इस मौसम में लजीज पकवान खाना लोगों को ज्यादा पसंद होता है. सर्दियों में सभी घरों में विभिन्न प्रकार के खानें की चीजें बनती है तो इस सर्दी को मौसम में अपने घर बनाएं ये लजीज डिशज. आइए आपको रेसिपी बताते है.

  1. चिकन सूप

सामग्री

1. 3-4 पीस बोनलैस चिकन

 2. 1/2 घीया

 3.  1 आलू

  4. 1 प्याज

5. 1/2 छोटा चम्मच अदरक

 6.  1/2 छोटा चम्मच लहसुन

7.   थोड़ी सी कालीमिर्च

 8. 2 गिलास पानी

9.   नमक स्वादानुसार.

विधि

सारी सामग्री को प्रैशर कूकर में डाल कर

10 मिनट तक पकाएं. फिर ब्लैंडर में ब्लैंड कर के गरमगरम सर्व करें.

2. मैकरोनी सलाद

सामग्री सलाद ड्रैसिंग की

1.  2 बड़े चम्मच सिरका

 2. 1/2 छोटा चम्मच मिक्स्ड हर्ब

 3.  1 बड़ा चम्मच औलिव औयल

  4. 2 बड़े चम्मच पाइनऐप्पल सिरप

5.  1/2 छोटा चम्मच लहसुन

6.  नमक स्वादानुसार.

सामग्री सलाद की

1. मैकरोनी

 2. 1 कटा खीरा

3.  1 प्याज कटा

4. पाइनऐप्पल कटा

5.  1 गाजर कटी

6.  1-1 लाल, पीली व हरी शिमलामिर्च कटी.

विधि

एक पैन में मैकरोनी को उबाल कर छान लें. फिर इस में सभी सब्जियां डालें. फिर इसे सलाद में डाल कर फ्रिज में ठंडा कर सर्व करें.

3.  चिकन बिरयानी

सामग्री

 1.  1 किलोग्राम चिकन

 2.  2 बड़े चम्मच औयल

 3. 1 छोटा चम्मच जीरा

 4.  3-4 प्याज कटे

 5.  1 छोटा चम्मच अदरक व लहसुन पेस्ट

 6.  थोड़ा सा साबूत गरममसाला (दालचीनी, लौंग, इलायची, तेजपत्ते, कालीमिर्च).

 7.  4 टमाटरों की प्यूरी

8.  1/2 छोटा चम्मच हलदी

9. 1/2 छोटा चम्मच लालमिर्च पाउडर

10.  1/2 छोटा चम्मच धनिया पाउडर

11. 1/2 छोटा चम्मच गरममसाला

 12.   1/2 गिलास पानी

 13.  1 गिलास चावल

14.  नमक स्वादानुसार.

विधि

एक कड़ाही में तेल गरम कर प्याज व मसालों को अच्छी तरह पकाएं. फिर इस में टमाटरों की प्यूरी डाल कर 2-3 मिनट तक चलाएं. बाद में थोड़े से पानी में चिकन डाल कर 10 मिनट तक कूकर में पकने दें. जब चिकन अच्छी तरह पक जाए तब उस में नमक, हलदी, लालमिर्च पाउडर डालें. 1 गिलास चावलों में थोड़ा सा पानी डालें और फिर कूकर में 2-3 सीटियां लगने तक

Winter Special: विंटर में ऐसे सजायें वार्डरोब

सर्दियों के लिए अपनी वार्डरोब तैयार करते समय थोड़ा ध्यान रखने से आप बेमतलब की टेंशन से बची रहेंगी. सर्दियों में ऊनी कपड़ों के लिए वार्डरोब में एक्सट्रा स्पेस बनाना पड़ता है. सही से मैनेज न करने पर आपको ऐन मौके पर कपड़े नहीं मिलते. इसलिए वार्डरोब को सही से मैनेज करना बहुत जरूरी है.

कलर्स

आप सर्दी के कपड़ों को उनके कलर के हिसाब से रख सकती हैं. फार्मल, पार्टी वेयर को एक तरफ रखें और कैजुअल और डेली वेयर के कपड़ों को दूसरी तरफ रखें.

स्लीव लेंथ

आप ऊनी कपड़ों को स्लीव के हिसाब से भी रख सकती हैं. लांग स्लीव्स और फुल स्लीव्स वाले कपड़ों की भी अलग कैटेगरी बनाई जा सकती है.

करें हैंगर्स का इस्तेमाल

कोट और ब्लेजर्स को टांगने के लिए हैंगर्स का इस्तेमाल करें. इससे आपका वार्डरोब भरा-भरा नहीं लगेगा. सूट्स, ड्रेसेज, साडिय़ां व कोट्स हैंगर्स पर और बाकी की जरूरतों का सामान बाक्स में रखें.

फोल्ड करके रखें कपड़े

स्वेटर्स, स्वेट शर्ट और जींस को फोल्ड करके रखें, ऐसा करने आपके वार्डरोब में जगह बचेगी.

आई लेवल पर रखें सामान

जो आपके रोजाना इस्तेमाल में आने वाले कपड़ें हैं उन्हें आईलेवल पर रखें. कम प्रयोग किया जाने वाला सामान नीचे या ऊपर रखा जा सकता है.

उसे किस ने मारा- भाग 3: क्या हुआ था आकाश के साथ

इसी की आशंका जाहिर करते हुए मैं ने जबजब दीपाली को समझाना चाहा तबतब एक ही उत्तर मिलता, ‘यह बात मैं भी समझती हूं वसुधा, पर केवल दालरोटी से ही तो काम नहीं चलता. अभी बच्चे छोटे हैं, बड़े होंगे तो उन की पढ़ाई, शादीविवाह में भी तो खर्चा होगा, अगर अभी से कुछ बचत नहीं कर पाए तो आगे कैसे होगा.

रोधो कर जिंदगी घिसटती ही गई. पहला झटका आकाश को तब लगा जब उस के पिताजी को हार्ट अटैक आया. डाक्टर ने आकाश से पिता की बाईपास सर्जरी करवाने की सलाह दी. उस समय आकाश के पास इतने पैसे नहीं थे कि वह खुद के खर्चे पर उन का इलाज करवा पाता. उस के पिताजी उस पर ही आश्रित थे, अत: कानून के अनुसार उन की बीमारी का खर्चा आकाश को कंपनी से मिलना था. उस ने एडवांस के लिए आवेदन कर दिया, पर कागजी खानापूर्ति में ही लगभग 2 महीने निकल गए.

आकाश पिताजी को ले कर अपोलो अस्पताल गया. आपरेशन के पूर्व के टेस्ट चल रहे थे कि उन्हें दूसरा अटैक आया और उन्हें बचाया नहीं जा सका. डाक्टरों ने सिर्फ इतना ही कहा कि इन्हें लाने में देर हो गई.

मां पिताजी से बिछड़ने का दुख सह नहीं पाईं और कुछ ही महीनों के अंतर पर उन की भी मृत्यु हो गई.

आकाश टूट गया था. उसे इस बात का ज्यादा दर्द था कि पैसों के अभाव में वह अपने पिता का उचित उपचार नहीं करा पाया. जबजब इस बात से उस का मन उद्वेलित होता, पिताजी की सीख उस के इरादों को और मजबूत कर देती. अंगरेजी की एक कहावत है ‘ग्रिन एंड बियर’ यानी सहो और मुसकराओ, यही उस के जीने का संबल बन गई थी.

मांपिताजी को तो वह खो चुका था. पल्लव तो अभी छोटा था पर अब बड़ी होती अपनी बेटी की ठीक से परवरिश न कर पाने का दोष भी उस पर लगने लगा था. डोनेशन की मोटी मांग के लिए रकम वह न जुटा पाने के कारण उस स्कूल में बेटी स्मिता का दाखिला नहीं करा पाया जिस में कि दीपाली चाहती थी.

जिस राह पर आकाश चल रहा था उस पर चलने के लिए उसे बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही थी, दुख तो इस बात का था कि उस के अपने ही उसे नहीं समझ पा रहे थे. तनाव के साथ संबंधों में आती दूरी ने उसे तोड़ कर रख दिया. मन ही मन आदर्श और व्यावहारिकता में इतना संघर्ष होने लगा कि वह हाई ब्लडप्रेशर का मरीज बन गया.

अपने ही अंत:कवच में आकाश ने खुद को कैद कर लिया पर दीपाली ने उस की न कोई परवा की और न ही पति को समझना चाहा. उसे तो बस, अपने आकांक्षाओं के आकाश को सजाने के लिए धन चाहिए था. वह रोकताटोकता तो दीपाली सीधे कह देती, ‘अगर तुम अपने वेतन से नहीं कर पाते हो तो लोन ले लो. जिस समाज में रहते हैं उस समाज के अनुसार तो रहना ही होगा. आखिर हमारा भी कोई स्टेटस है या नहीं, तुम्हारे जूनियर भी तुम से अच्छी तरह रहते हैं पर तुम तो स्वयं को बदलना ही नहीं चाहते.’

यह वही दीपाली थी जिस ने मधुयामिनी की रात साथसाथ जीनेमरने की कसमें खाई थीं, सुखदुख में साथ निभाने का वादा किया था. पर जमाने की कू्रर आंधी ने उन्हें इतना दूर कर दिया कि जब मिलते तो लगता अपरिचित हैं. बस, एहसास भर ही रह गया था. बच्चे भी सदा मां का ही पक्ष लेते. मानो वह अपने ही घर में परित्यक्त सा हो गया था.

अपनी लड़ाई आकाश स्वयं लड़ रहा था. प्रमोशन के लिए इंटरव्यू काल आया. इंटरव्यू भी अच्छा ही रहा. पैनल में उस का नाम है, यह पता चलते ही कुछ लोगों ने बधाई देनी भी शुरू कर दी पर जब प्रमोशन लिस्ट निकली तो उस में उस का नाम नहीं था, देख कर वह तो क्या पहले से बधाई देने वाले भी चौंक गए. पता चला कि उस का नाम विजीलेंस से क्लीयर नहीं हुआ है.

उस पर एक सप्लायर कंपनी को फेवर करने का आरोप लगा है, इस के लिए चार्जशीट दायर कर दी गई है. वैसे तो आकाश फाइल पूरी तरह पढ़ कर साइन किया करता था पर यहां न जाने कैसे चूक हो गई. रेट और क्वालिटी आदि की स्कू्रटनी वह अपने जूनियर से करवाया करता था. उन के द्वारा पेश फाइल पर जब वह साइन करता तभी आर्डर प्लेस होता था.

इस फाइल में कम रेट की उपेक्षा कर अधिक रेट वाले को सामान की गुणवत्ता के आधार पर उचित ठहराते हुए आर्डर प्लेस करने की सिफारिश की गई थी. साइन करते हुए आकाश यह भूल गया था कि वह किसी प्राइवेट कंपनी में नहीं एक सरकारी कंपनी में काम करता है जहां सामान की क्वालिटी पर नहीं सामान के रेट पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है.

नियम तो नियम है. इसी बात को आधार बना कर कम रेट वाले कांटे्रक्टर ने आकाश को दोषी ठहराते हुए एक शिकायती पत्र विजीलेंस को भेज दिया था.

नियमों के अनुसार तो गलती उन से हुई थी क्योंकि उन्होंने नियमों की अनदेखी की थी पर उस में उन का अपना कोई स्वार्थ नहीं था वह तो सिर्फ बनने वाले सामान की क्वालिटी में सुधार लाना चाहता था.

आफिस में कानाफूसी प्रारंभ हो गई, ‘बड़े ईमानदार बनते थे. आखिर दूध का दूध पानी का पानी हो ही गया न.’

‘अरे, भाई ऐसे ही लोगों के कारण हमारा विभाग बदनाम है. करता कोई है, भरता कोई है.’

दीपाली के कानों तक जब यह बात पहुंची तो वह तिलमिला कर बोली, ‘तुम तो कहते थे कि मैं किसी का फेवर नहीं करता. जो ठीक होता है वही करता हूं, फिर यह गलती कैसे हो गई. कहीं ऐसा तो नहीं है कि तुम मुझ से छिपा कर पैसा कहीं और रख रहे हो.’

उस के बाद उस से कुछ सुना नहीं गया, उसी रात उसे जो हार्ट अटैक आया. हफ्ते भर जीवनमृत्यु से जूझने के बाद आखिर उस ने दम तोड़ ही दिया.

खबर सुन कर वसुधा एवं सुभाष, आकाश के साथ बिताए खुशनुमा पलों को आंखों में संजोए आ गए. सदा शिकायतों का पुलिंदा पकड़े दीपाली को इस तरह रोते देख कर, आंखें नम हो आई थीं. पर बारबार मन में यही आ रहा था कि सबकुछ लुटा के होश में आए तो क्या किया?

मां को रोते देख कर मासूम बच्चे अलग एक कोने में सहमे से दुबके खड़े थे, शायद उन की समझ में नहीं आ रहा कि मां रो क्यों रही हैं तथा पापा को हुआ क्या है. मां को रोता देख कर बीचबीच में बच्चे भी रोने लगते. उन्हें ऐसे सहमा देख कर, दीपाली स्वयं को रोक नहीं पाई तथा उन्हें सीने से चिपका कर रो पड़ी. उसे रोता देख कर नन्हा पल्लव बोला, ‘आंटी, ममा भी रो रही हैं और आप भी लेकिन क्यों. पापा को हुआ क्या है, वह चुपचाप क्यों लेटे हैं, बोलते क्यों नहीं हैं?’

उस की मासूमियत भरे प्रश्न का मैं क्या जवाब देती पर इतना अवश्य सोचने को मजबूर हो गई थी कि बच्चों से उन की मासूमियत छीनने का जिम्मेदार कौन है? एक जिंदादिल, उसूलों के पक्के इनसान को किस ने मारा.

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