ममता: आकाश की मां को उसकी इतनी चिंता क्यों थी

पता नहीं कहां गया है यह लड़का. सुबह से शाम होने को आई, लेकिन नवाबजादे का कुछ पता नहीं कि कहां है. पता नहीं, सारा दिन कहांकहां घूमताफिरता है. न खाने का होश है न ही पीने का. यदि घर में रहे तो सारा दिन मोबाइल, इंटरनैट या फिर टैलीविजन से चिपका रहता है. बहुत लापरवाह हो गया है.

अगर कुछ कहो तो सुनने को मिलता है, ‘‘सारा दिन पढ़ता ही तो हूं. अगर कुछ देर इंटरनैट पर चैटिंग कर ली तो क्या हो गया?’’

फिर लंबी बहस शुरू हो जाती है हम दोनों में, जो फिर उस के पापा के आने के बाद ही खत्म होती है.

वैसे इतना बुरा भी नहीं है आकाश. बस, थोड़ा लापरवाह है. दोस्तों के मामले में उस का खुद पर नियंत्रण नहीं रहता है. जब दोस्त उसे बुलाते हैं, तो वह अपना सारा कामकाज छोड़ कर उन की मदद करने चल देता है. फिर तो उसे अपनी पढ़ाई की भी फिक्र नहीं होती है. अगर मैं कुछ कहूं तो मेरे कहे हुए शब्द ही दोहरा देगा, ‘‘आप ही तो कहती हैं ममा कि दूसरों की मदद करो, दूसरों को विद्या दान करो.’’

तब मुझे गुस्सा आ जाता, ‘‘लेकिन इस का मतलब यह नहीं कि अपना घर फूंक कर तमाशा देखो. अरे, अपना काम कर के चाहे जिस की मदद करो, मुझे कोई आपत्ति नहीं, पर अपना काम तो पूरा करो.’’

जब वह देखता कि मां को सचमुच गुस्सा आ गया है, तो गले में बांहें डाल देता और मनाने की कोशिश करता, ‘‘अच्छा ममा, आगे से ऐसा नहीं करूंगा.’’

उस का प्यार देख कर मैं फिर हंस पड़ती और उसे मनचाहा करने की छूट मिल जाती.

मेघना की शादी वाले दिन आकाश का एक अलग ही रूप नजर आया. एक जिम्मेदार भाई का. उस दिन तो ऐसा लग रहा था जैसे वह मुझ से भी बड़ा हो गया है. उस ने इतनी जिम्मेदारी से अपना कर्तव्य निभाया था कि वहां मौजूद हर व्यक्ति के मुंह से उस की तारीफ निकल रही थी. मैं और आकाश के पापा भी हैरान थे कि यह इतना जिम्मेदार कैसे हो गया. मेघना भी उस की कर्तव्यनिष्ठता देख कर बेहद खुश थी.

शादी के दूसरे दिन जब मेघना पग फेरे के लिए घर आई तो जनाब घर 2 घंटे लेट आए. पूछने पर पता चला कि किसी दोस्त के घर चले गए थे. मेघना 1 दिन पहले की उस की कर्तव्यनिष्ठता भूल गई और उसे जम कर लताड़ा.

मुझे भी बहुत गुस्सा आया था कि बहन घर पर आई हुई है और जनाब को घर आने का होश ही नहीं है. पर मेरे साथ तो उस ने पूरी बहस करनी थी. अत: कहने लगा, ‘‘क्या ममा, आ तो गया हूं, चाहे थोड़ी देर से ही आया हूं. कौन सा दीदी अभी जा रही हैं… सारा दिन रहेंगी न?’’

गनीमत थी कि बहन के सामने कुछ नहीं बोला और सारा गुस्सा मुझ पर निकाला.

पर आकाश अभी तक आया क्यों नहीं?

मैं ने दीवार पर टंगी घड़ी देखी, 7 बज चुके थे. मुझे बहुत ज्यादा गुस्सा आने लगा कि आज आने दो बच्चू को… आज मुझ से नहीं बच पाएगा… आज तो उस की टांगें तोड़ कर ही रहूंगी.

उस से सुबह ही कहा था कि आज घर जल्दी आना तो आज और भी देर कर दी. उस दिन भी उस से कहा था घर जल्दी आने के लिए और उस दिन तो वह ठीक समय पर घर आ गया था. पता था कि मां की तबीयत ठीक नहीं है.

मैं उठने लगी तो कहने लगा, ‘‘आप लेटी रहो ममा, आज मैं खाना बनाऊंगा.’’

‘‘नहींनहीं, मैं बनाती हूं,’’ मैं ने उठने की कोशिश की पर उस ने मुझे उठने नहीं दिया और बहुत ही स्वादिष्ठ सैंडविच बना कर खिलाए.

लेकिन आज जब सुबह मैं ने कहा था कि आकाश छत से जरा कपड़े उतार लाना तो अनसुना कर के चला गया. अजीब लड़का है… पल में तोला तो पल में माशा. कुछ भी कभी भी कर देता है. उस दिन कामवाली बाई की बेटी की पढ़ाई के लिए किताबें खरीद लाया. लेकिन जब मैं ने कहा कि जरा बाजार से सब्जी ले आ तो साफ मना कर दिया, ‘‘नहीं ममा, मुझ से नहीं होता यह काम.’’

मुझे गुस्सा तो बहुत आया पर चुप रही. बहुत देर हो गई है… सुबह का निकला हुआ है… अभी तक घर नहीं आया. अच्छा फोन कर के पूछती हूं कि कहां है. मैं ने उस के मोबाइल पर फोन किया तो आवाज आई कि जिस नंबर पर आप डायल कर रहे हैं वह अभी उपलब्ध नहीं है. थोड़ी देर बाद कोशिश करें. मुझे फिर से गुस्सा आने लगा कि पता नहीं फोन कहां रखा है. कभी भी समय पर नहीं लगता है.

मैं ने फिर फोन किया, लेकिन फिर वही जवाब आया. अब तो मेरा गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच चुका था कि अजीब लड़का है… फोन क्यों नहीं उठा रहा है?

मैं ने कई बार फोन किया, मगर हर बार एक ही जवाब आया. अब मेरा गुस्सा चिंता में बदल गया कि पता नहीं कहां है… सुबह का घर से निकला है. कह कर गया था कि ‘प्रोजैक्ट’ का काम है. उसे पूरा करना है. मोटरसाइकिल भी इतनी तेज चलाता है कि पूछो मत. कई बार समझा चुकी हूं कि धीरे चलाया कर, पर मानता ही नहीं.

कुछ दिन पहले ही पड़ोस के राहुल का?मोटरसाइकिल से ऐक्सिडैंट हो गया था. शुक्र है जान बच गई और चोट भी ज्यादा नहीं आई पर उस के मातापिता क्व50 हजार के नीचे आ गए. मैं और आकाश राहुल से मिलने अस्पताल गए थे. राहुल के पैरों में पट्टियां बंधी थीं, लेकिन चेहरे पर मुसकान थी.

वह आकाश से बोला, ‘‘आकाश तू भी मोटरसाइकिल बहुत तेज चलाता है… धीरे चलाया कर नहीं तो मेरे जैसा हाल होगा.’’

मेरे कुछ कहने से पहले ही राहुल की मां सुजाता बोल पड़ीं, ‘‘बेटा, ऐसा नहीं कहते.’’

‘‘नहीं सुजाताजी राहुल ठीक कह रहा है… यह लड़का भी मोटरसाइकिल बहुत तेज चलाता है. मैं इस से कई बार कह चुकी हूं पर यह मेरी सुनता ही नहीं. लेकिन राहुल, तुम तो बहुत आराम से चलाते हो, फिर यह ऐक्सिडैंट कैसे हो गया?’’

‘‘आंटी, अचानक आगे से एक गाड़ी आ गई और मेरी मोटरसाइकिल उस से टकरा गई. फिर जब होश आया तो मैं अस्पताल में था.’’

‘आकाश तो राहुल से कई गुना तेज चलाता है… उफ, अब मैं क्या करूं, कहां जाऊं,’ सोच कर मैं ने फिर से फोन लगाया. मगर फिर से वही आवाज आई. अब तो मेरे पसीने छूटने लगे. चिंता के मारे मेरा बुरा हाल हो गया. पता नहीं किसकिस को फोन लगाया, पर आकाश का कुछ भी पता नहीं चला. समय बीतता जा रहा था और मेरी घबराहट भी बढ़ती जा रही थी.

‘आकाश के पापा भी आने वाले हैं,’ यह सोच कर मेरी हालत और खराब हो रही थी.

तभी फोन की घंटी बजी. मैं ने लपक कर फोन उठाया. उधर से आकाश बोल रहा था, ‘‘ममा, मैं घर थोड़ी देर में आऊंगा.’’

‘‘कहां है तू? कहां रखा था फोन? पता है मैं कब से फोन लगा रही हूं… पता है मेरी चिंता के कारण क्या हालत हो गई है?’’ मैं ने एक ही सांस में सब कुछ कह डाला.

‘‘घर आ कर बताऊंगा… अभी मैं फोन काट रहा हूं.’’

मैं हैलोहैलो करती रह गई. फोन बंद हो चुका था. अब मेरा गुस्सा और भी बढ़ गया कि आज तो इस लड़के ने हद कर दी है, आने दो घर बताती हूं. यहां मेरा चिंता के मारे बुरा हाल है और जनाब को अपनी मां से बात करने तक की फुरसत नहीं है.

थोड़ी ही देर बाद डोर बैल बजी. मैं ने दरवाजा खोला. आकाश था. परेशान हालत में था. आते ही बोला, ‘‘ममा, जल्दी से खाना दे दो… आज सुबह से कुछ नहीं खाया है… प्रोजैक्ट के काम में लगा था… सारा दिन उसी में लगा रहा. अभी भी काम पूरा नहीं हुआ है… मुझे फिर से करण के घर जाना है कल ‘प्रैजेंटेशन’ है… वर्क पूरा करना है.’’

मेरा सारा गुस्सा, सारी चिंता जाती रही. मुझ पर ममता हावी हो गई. बोली, ‘‘जल्दी से हाथमुंह धो ले, मैं खाना लगा रही हूं.’’

लौटती बहारें: मीनू के मायके वालों में कैसे आया बदलाव

अंधेर नगरी का इंसाफ: अंबिका के साथ जो कुछ हुआ क्या उस में यशोधर भी दोषी था

मेरा जन्म एक साधारण परिवार में हुआ था, साधारण से भी कम कह सकते हो. मेरे पिता बढ़ई थे, वह भी गांवनुमा छोटे से एक कसबे में. बड़ी मुश्किल से रोजीरोटी का जुगाड़ हो पाता था. मां और बाबा दोनों का एक ही सपना था कि बच्चे अच्छी शिक्षा प्राप्त कर अपना जीवन स्तर सुधार लें. अत: वे अपना पैतृक मकान छोड़ महानगर में आ बसे. नगर के इस हिस्से में एक नई कालोनी बन रही थी और बड़े जोरशोर से निर्माण कार्य चल रहा था. अनेक बहुमंजिला इमारतें बन चुकी थीं व कुछ बननी बाकी थीं. बाबा को रहने के लिए एक ऐसा प्लौट मिल गया, जो किसी ने निवेश के विचार से खरीद कर उस पर एक कमरा बनवा रखा था ताकि चौकीदारी हो सके.

इस तरह रहने का ठिकाना तो मिला ही, खाली पड़ी जमीन की सफाई कर मां ने मौसमी सब्जियां उगा लीं. कुछ पेड़ भी लगा दिए. बाबा देर से घर लौटते और कभी ठेके का काम मिलने पर देर तक काम कर वहीं सो भी जाते. हमारे परिवार में स्त्रियों को बाहर जा कर काम करने की इजाजत नहीं थी. अत: मां घर पर ही रहतीं. घर पर रह कर ही कड़ा परिश्रम करतीं ताकि बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने का उन का सपना पूरा हो सके. हालांकि कई बार इस के लिए मां को परिवार वालों के कटुवचन भी सुनने पड़ते थे.

मुझे याद है, ताऊजी गांव से आए हुए थे. बाबा तो दिन भर काम में व्यस्त रहते अत: वे मां को ही समझाया करते, ‘‘बहुत हो चुकी देवाशीष की पढ़ाई, अब उस से कहो, बाप के साथ काम में हाथ बंटाए ताकि उसे भी कुछ आराम मिल सके. कब तक वह अकेला सब को बैठा कर खिलाता रहेगा. आगे तुम्हें 3 बच्चों की शादी भी करनी है. पता है कितना खर्च होता है बेटी के ब्याह में?’’

मां ताऊजी के सामने ज्यादा बात नहीं करती थीं. वे दबी जबान से मेरा पक्ष लेते हुए बोलीं, ‘‘पर देवाशीष तो अभी आगे और पढ़ना चाहता है… बहुत शौक है उसे पढ़ने का…’’

‘‘ज्यादा पढ़ कर उसे कौन सा इंजीनियर बन जाना है,’’ ताऊजी क्रोध और व्यंग्य मिश्रित स्वर में बोले, ‘‘उलटे अभी बाप के साथ काम में लगेगा तो काम भी सीख लेगा.’’

ताऊजी के शब्द मेरे कानों में कई दिन तक प्रतिध्वनित होते रहे. ‘पढ़लिख कर कौन सा उसे इंजीनियर बन जाना है… पढ़लिख कर…’ और मन ही मन मैं ने इंजीनियर बन जाने का दृढ़ संकल्प कर लिया. मैं हमेशा ही ताऊजी का बहुत सम्मान करता आया हूं. अपनी तरफ से तो वह परिवार के हित की ही सोच रहे थे लेकिन उन की सोच बहुत सीमित थी.

मुझ से छोटी एक बहन और एक भाई था. बड़ा होने के नाते बाबा का हाथ बंटाने की मुझ पर विशेष जिम्मेदारी थी, पर पढ़नेलिखने का मुझे ही सब से अधिक शौक था. अत: मांबाबा का सपना भी मैं ही पूरा कर सकता था और मांबाबा का विश्वास कायम रखने के लिए मैं दृढ़ संकल्प के साथ शिक्षा की साधना में लग गया.

सब पुस्तकें नहीं खरीद पाता था. कुछ तो पुरानी मिल जातीं, बाकी लाइबे्ररी में बैठ कर नोट्स तैयार कर लेता. क्लास में कुछ समझ न आता तो स्कूल के बाद टीचर के पास जा कर पूछता. ताऊजी की बात का बुरा मानने के बजाय उसे मैं ने अपना प्रेरणास्रोत बना लिया और 12वीं पास कर प्रवेश परीक्षा की तैयारी में जुट गया.

वह दिन मेरे जीवन का सब से महत्त्वपूर्ण दिन था, जिस दिन परिणाम  घोषित हुए और पता चला कि एक नामी इंजीनियरिंग कालेज में मेरा चयन हो गया है. मांबाबा का सिर तो ऊंचा हुआ ही, ताऊजी जिन्होंने इस विचार पर ही मां को ताना मारा था, अब अपने हर मिलने वाले को गर्व के साथ बताते कि उन का सगा भतीजा इंजीनियरिंग की बड़ी पढ़ाई कर रहा है.

जीवन एक हर्डल रेस यानी बाधा दौड़ है, एक बाधा पार करते ही दूसरी सामने आ जाती है. इंजीनियरिंग कालेज में दाखिला मिला तो मैं ने सोचा किला फतह हो गया. सोचा ही नहीं था कि साथियों की उपहास भरी निगाहें मुझे इस कदर परेशान करेंगी और जो खुला मजाक न भी उड़ाते वे भी नजरअंदाज तो करते ही. स्कूल में कमोवेश सब अपने जैसे ही थे.

कालेज में छात्र ब्रैंडेड कपड़े पहनते, कई तो अपनी बाइक पर ही कालेज आते. मेरे पास 5 जोड़ी साधारण कपडे़ और एक जोड़ी जूते थे, जिन में ही मुझे पूरा साल निकालना था. मैं जानता था कि फीस और अन्य खर्चे मिला कर यही बाबा के सामर्थ्य से ऊपर था, जो वे मेरे लिए कर रहे थे. अत: मुझे अपनी कड़ी मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर ही यह बाधा पार करनी थी. मैं ने अपने मस्तिष्क में गहरे से बैठा रखा था कि इन बाधाओं को सफलतापूर्वक पार कर आगे मुझे हर हाल में बढ़ना ही है.

वर्ष के अंत तक मैं ने अपनी मेहनत और लगन से अपने टीचरों को खुश कर दिया था. अन्य छात्र भी कड़ी मेहनत कर यहां प्रवेश पा सके थे और मेहनत का अर्थ समझते थे. हालांकि मैत्री का हाथ कम ने ही बढ़ाया लेकिन उन की नजरों से उपहास कम होने लगा था.

नया सत्र शुरू हुआ. हमारे बैच में5 छात्राएं थीं. नए बैच में 10 ने प्रवेश लिया था. अब तक कुछ सीमित क्षेत्रों में ही लड़कियां जाती थीं पर अब मातापिता उन क्षेत्रों में भी जाने की इजाजत देने लगे थे जो पहले उन के लिए वर्जित थे. एक दिन मैं लाइबे्ररी से पुस्तक ले कर बाहर निकला तो देखा कि प्रिंसिपल साहब की सख्त चेतावनी के बावजूद हमारे ही बैच के 4 लड़के रैगिंग करने के इरादे से एक नई छात्रा को घेरे खड़े थे और लड़की बहुत घबराई हुई थी. मैं जानता था कि उन लड़कों में से 2 तो बहुत दबंग किस्म के हैं और किसी भी सीमा तक जा सकते हैं. मेरे मन में फौरन एक विचार कौंधा. मैं तुरंत उस लड़की की ओर यों बढ़ा जैसे वह मेरी पूर्व परिचित हो और बोला, ‘अरे, मनु, पहुंच गई तुम.’ और उसे बांह से पकड़ कर सीधे लड़कियों के कौमन रूम में ले गया. मैं ने रास्ते में उसे समझा भी दिया कि अभी 15-20 दिन अकेले बाहर बिलकुल मत निकलना. जब भी बाहर जाएं 3-4 के ग्रुप में जाएं. एक बार रैगिंग का ज्वार उतर जाने पर फिर सब सुरक्षित है.

उस समय तो मेरी उस लड़की से खास बात नहीं हुई. यहां तक कि उस का असली नाम भी बाद में पता चला, अंबिका, पर वह मेरा आभार मानने लगी थी. रास्ते में मिल जाने पर मुसकरा कर ‘हैलो’ करती. उस की मुसकराहट में ऐसा उजास था कि उस का पूरा चेहरा ही दीप्त हो उठता, बच्चे की मुसकराहट जैसी मासूम और पावन. मेरे लिए यह एक नया अनुभव था. मैं ने तो लड़कों के सरकारी स्कूल में ही तमाम शिक्षा पाई थी. संभ्रांत घर की युवतियों से तो कभी मेरा वास्ता पड़ा ही नहीं था. अपने बैच की लड़कियों की उपस्थिति में भी मैं अब तक सहज नहीं हो पाया था और उन से मित्रवत बात नहीं कर पाता था.

अंबिका कभी लाइब्रेरी में मुझे देखती तो खुद ही चली आती किसी विषय की पुस्तक के लिए पूछने. वह मेरे सीनियर होने की हैसियत से मेरा सम्मान करती थी और महज एक मित्र की तरह मेरी तरफ हाथ बढ़ा रही थी. उस के लिए यह बात स्वाभाविक हो सकती है, पर स्त्रीपुरुष मैत्री मेरे लिए नई बात थी.

मेरे मन में उस के लिए प्यार का अंकुर फूट रहा था, धीरेधीरे मैं उस की ओर बढ़ रहा था. मैं अपनी औकात भूला नहीं था, पर क्या मन सुनतासमझता है इन बातों को? सुनता है बुद्धि के तर्क? और प्यार तो मन से किया जाता है न. उस में धनदौलत, धनीनिर्धन का सवाल कहां से आ जाता है? फिर मैं उस से बदले में कुछ मांग भी तो नहीं रहा था.

यह तो नहीं कह रहा था कि वह भी मुझे प्यार करे ही. सब सपने किस के सच हुए हैं? पर उस से हम सपने देखना तो नहीं छोड़ देते न. मेरा सपना तब टूटा जब मैं ने उसे अनेक बार यशोधर के साथ देखा. यशोधर अंतिम वर्ष का छात्र था. छुट्टी होने पर मैं ने उसे अंबिका का इंतजार करते देखा और फिर वह उसे बाइक पर पीछे बैठा ले जाता. जैसेजैसे वे समीप आते गए मैं स्वयं को उन से दूर करता गया जैसे दूर बैठा मैं कोई रोमानी फिल्म देख रहा हूं, जिस के पात्रों से मेरा कोई सरोकार ही न हो.

कोर्स खत्म हुआ. मेरी मेहनत रंग लाई. मैं इंजीनियर भी बन गया और कैंपस इंटरव्यू में मुझे अच्छी नौकरी भी मिल गई. मैं ने एक बाजी तो जीत ली थी, पर मैं हारा भी तो था. मैं ने चांद को छूने का ख्वाब देखा था बिना यह सोचे कि चांदतारों में ख्वाब ढूंढ़ने से गिरने का डर तो रहेगा ही.

यशोधर की तो मुझ से पहले ही नौकरी लग चुकी थी. अंबिका का अभी एक वर्ष बाकी था और दोनों की बड़ी धूमधाम से सगाई हुई. एक बड़ा सा तोहफा ले कर मैं तहेदिल से उन दोनों को भावी जीवन की ढेर सारी शुभकामनाएं दे आया. प्रेम और वासना में यही तो अंतर है. वासना में आप प्रिय का साथ तलाशते हैं, शुद्ध निर्मल प्रेम में प्रिय की खुशी सर्वप्रिय होती है, जिस के लिए आप निजी खुशियां तक कुरबान कर सकते हैं और मैं देख रहा था कि वह यशोधर के साथ बहुत खुश रहती है.

यों कहना कि मैं ने अपने प्रेम को दफना दिया था, सही नहीं होगा. दफन तो उस चीज को किया जाता है, जिस का अंत हो चुका हो. मेरा प्यार तो पूरी शिद्दत के साथ जीवित था. मैं चुपचाप उन के रास्ते से हट गया था.

सगाई के बाद तो उन दोनों को साथसाथ घूमने की पूरी छूट मिल गई थी. ऐसे ही एक शनिवार को वे रात का शो देख कर लौट रहे थे कि एक सुनसान सड़क पर 4 गुंडों ने उन का रास्ता रोक कर उन्हें बाइक से उतार लिया. यश के सिर पर डंडे से प्रहार कर उसे वहीं बेहोश कर दिया और अंबिका को किनारे घसीट कर ले गए. यश को जब तक होश आया तब तक दरिंदे अंबिका के शरीर पर वहशीपन की पूरी दास्तान लिख कर जा चुके थे. यशोधर ने उस के कपड़े ठीक कर मोबाइल पर उस के घर फोन किया. अंबिका के पिता और भाई तुरंत वहां पहुंच गए और यश को अपने घर छोड़ते हुए अंबिका को ले गए.

अंबिका अस्पताल में थी और किसी से मिलने के मूड में नहीं थी. मैं ने अस्पताल के कई चक्कर लगाए लेकिन सिर्फ उस की मां से ही मुलाकात हो पाई. मैं चाहता था कि वह अपने मन के गुबार को भीतर दबाने के बजाय बाहर निकाल दे तो बेहतर होगा. चाहे क्रोध कर के, चाहे रोधो कर. यही बात मैं उस की मां से भी कह आया था.

मां के समझाने पर वह मान गई और करीब एक सप्ताह बाद मुझ से मिलने के लिए खुद को तैयार कर पाई और वही सब हुआ. उन दुष्टों के प्रति क्रोध से शुरू हो कर अपनी असहाय स्थिति को महसूस कर वह बहुत देर तक रोती रही. मैं ने उस के आंसुओं को बह जाने दिया और उन का वेग थमने पर ही बातचीत शुरू की. उस का दुख देख समस्त पुरुष जाति की ओर से मैं खुद को अपराधी महसूस कर रहा था. न सिर्फ हम इन की दुर्बलता का लाभ उठाते हुए इन पर जुल्म ढहाते हैं विडंबना तो यह है कि अपने अपराध के लिए ताउम्र उन्हें अभिशप्त भी कर देते हैं और उस पर तुर्रा यह कि हम स्वयं को इन से उच्च मानते हैं.

अंबिका आ गई थी और अवसर मिलते ही मैं उस से मिलने चला जाता. उस की मां भी मेरा स्वागत करती थीं, उन्हें लगता था कि मेरे जाने से अंबिका कुछ देर हंसबोल लेती है.

बातोंबातों में मैं अंबिका के मन में यह बात बैठाने का प्रयत्न करता रहता, ‘तुम्हें मुंह छिपा कर जीने की जरूरत नहीं है. तुम बाहर निकलोगी और पहले की ही तरह सिर उठा कर जीओगी. बहुत हो चुका अन्याय, अपराधियों को दंडित करने में अक्षम हमारा समाज अपना क्रोध असहाय लड़कियों पर न उतार पाए, यह देखना हम सब की जिम्मेदारी है. यदि हम युवकों को संस्कारी नहीं बना पा रहे हैं, तो इस का यह हल भी नहीं कि युवतियों को घर की चारदीवारी में कैद कर लें.’

एक महीना बीत चुका था इस हादसे को, अंबिका के शरीर के घाव तो भरने लगे थे लेकिन एक बड़ा घाव उस के मन पर भी लगा था. यशोधर एक महीने में एक बार भी उस से मिलने नहीं आया था. तसल्ली देना तो दूर यश व उस के मातापिता का कभी  टैलीफोन तक नहीं आया. एक सांझ मैं अंबिका के घर पर ही था जब यशोधर के घर से एक व्यक्ति आ कर उन की मंगनी की अंगूठी, कपड़े व जेवर लौटा गया. अंबिका के हरे घावों पर एक और चोट हुई थी. अंबिका की मां को लगा कि वह निराशा में कोई सख्त कदम न उठा ले. अत: उन्होंने मुझ से विनती की कि मैं जितना हो सके उन के घर आ जाया करूं. कालेज का सत्र समाप्त होने में कुछ ही माह बाकी थे पर 2 महीने तक तो वह किसी भी तरह कालेज जाने की हिम्मत ही नहीं जुटा पाई.

मेरे बहुत समझाने पर उस ने कालेज जाना शुरू तो किया पर उसे हर किसी की निगाह का सामना करना मुश्किल लगता. मुश्किल से कालेज तो जाती रही लेकिन पढ़ाई ठीक से न हो पाने के कारण परीक्षा पास न कर सकी और उस का साल बरबाद हो गया. अंबिका से मेरे विवाह की 5वीं वर्षगांठ है और हमारी एक प्यारी सी बिटिया भी है. मैं ने उस पर कोई दया कर के विवाह नहीं किया. आप तो जानते ही हैं कि मैं उसे हमेशा से ही चाहता आया हूं, मैत्री भाव उस के मन में भी था. हर रोज मिलते रहने से, कष्ट के समय उस का साथ देने से उस का झुकाव मेरी ओर बढ़ने लगा था.

2 वर्ष बाद विवाह हुआ था हमारा, लेकिन उस के बाद भी लगभग 3 वर्ष लग गए मुझे उस के मन से उस रात का भय भगाने में. रात को चीख कर उठ बैठती थी वह. उस दौरान उस का बदन पसीने से तरबतर होता. क्या उन दरिंदों को कभी यह सोच कर अपराधबोध होता होगा कि पल भर की अपनी यौन तृप्ति के लिए उन्होंने एक लड़की को सिर्फ तन से ही नहीं मन से भी विक्षिप्त कर दिया है. पर मैं ने भी धीरज बनाए रखा और उस दिन का इंतजार किया जिस दिन तक अंबिका के मन में स्वयं ही मेरे लिए नैसर्गिक इच्छा नहीं जागी.

एक बात का उत्तर नहीं मिला आज तक, अपराध तो पुरुष करता है पर उसे दंडित करने के बजाय समाज एक निरपराध लड़की की पीठ पर मजबूती से सलीब ठोंक देता है, जिसे वह उम्र भर ढोने को मजबूर हो जाती है. अपराधी खुला घूमता है और पीडि़ता दंड भोगती है. इसे अंधेर नगरी का इंसाफ कहा जाए या सभ्य समाज का? कौन देगा इस का उत्तर?

जाल: संजीव अनिता से शादी के लिए क्यों मना कर रहा था

बरखा खूबसूरत भी थी और खुशमिजाज भी. पहले ही दिन से उस ने अपने हर सहयोगी के दिल में जगह बना ली. सब से पक्की सहेली वह अनिता की बनी क्योंकि हर कदम पर अनिता ने उस की सहायता की थी. जब भी फालतू वक्त मिलता  दोनों हंसहंस कर खूब बातें करतीं.

उन दिनों अनिता का प्रेमी संजीव 15 दिनों की छुट्टी पर चल रहा था. इन दोनों की दोस्ती की जड़ों को मजबूत होने के लिए इतना समय पर्याप्त रहा.

संजीव के लौटने पर अनिता ने सब से पहले उस का परिचय बरखा से कराया.

‘‘क्या शानदार व्यक्तित्व है तुम्हारा, संजीव,’’ बरखा ने बड़ी गर्मजोशी के साथ जब संजीव से हाथ मिलाया तब ये तीनों अपने सारे सहयोगियों की नजरों का केंद्र बने हुए थे.

‘‘थैंक यू,’’ अपनी प्रशंसा सुन संजीव खुल कर मुसकराया.

‘‘अनिता, इतने स्मार्ट इंसान को जल्दी से जल्दी शादी के बंधन में बांध ले, नहीं तो कोई और छीन कर ले जाएगी,’’ बरखा ने अपनी सहेली को सलाह दी.

‘‘सहेली, तेरे इरादे तो नेक हैं न?’’ नाटकीय अंदाज में आंखें मटकाते हुए अनिता ने सवाल पूछा, तो कई लोगों के सम्मिलित ठहाके से हौल गूंज उठा.

पहले संजीव और अनिता साथसाथ अधिकतर वक्त गुजारते थे. अब बरखा भी इन के साथ नजर आती. इस कारण उन के  सहयोगियों को बातें बनाने का मौका मिल गया.

‘‘ये बरखा बड़ी तेज और चालू लगती है मुझे तो,’’ शिल्पा ने अंजु से अपने मन की बात कह दी थी, ‘‘वह अनिता से ज्यादा सुंदर और आकर्षक भी है. मेरी समझ से भूसे और

चिंनगारी को पासपास रखना अनिता की बहुत बड़ी मूर्खता है.’’

‘मेरा अंदाजा तो यह है कि संजीव को अनिता ने खो ही दिया है. उस का झुकाव बरखा की तरफ ज्यादा हो गया है, यह बात मुझे तो साफ नजर आती है, ’’ अंजु ने फौरन शिल्पा की हां में हां मिलाते हुए बोली.

अनिता से इस विषय पर गंभीरता से बात सुमित्राजी ने एक दिन अकेले में की. तब बरखा और संजीव कैंटीन से समोसे लाने गए हुए थे.

‘‘तुम संजीव से शादी कब कर रही हो?’’ बिना वक्त बरबाद किए सुमित्रा ने मतलब की बात शुरू की.

‘‘आप को तो पता है कि संजीव पहले एम.बी.ए. पूरा करना चाहता है और उस में अभी साल भर बाकी है,’’ अनिता ने अपनी बात पूरी कर के गहरी सांस छोड़ी.

‘‘यही कारण बता कर 2 साल से तुझे लटकाए हुए है. मैं पूछती हूं कि वह शादी कर के क्या आगे नहीं पढ़ सकता है?’’

‘‘मैडम जब मैं ने 2 साल इंतजार कर लिया है तो 1 साल और सही.’’

‘‘बच्चों जैसी बातें मत कर,’’ सुमित्रा तैश में आ गईं, ‘‘मैं ने दुनिया देखी है. संजीव के रंगढंग ठीक नहीं लग रहे हैं मुझे. उसे बरखा के साथ ज्यादा मत रहने दिया कर.’’

‘‘मैडम, आप इस के बारे में चिंतित न हों. मुझे संजीव और बरखा दोनों पर विश्वास है.’’

‘यों आंखें मूंद कर विश्वास करने वाला इंसान ही जिंदगी में धोखा खाता है, मेरी बच्ची.’’

‘उन के आपस में खुल कर हंसनेबोलने का गलत अर्थ लगाना उचित नहीं है, मैडम. बरखा तो अपने को संजीव की साली मानती है. अपने भावी जीवनसाथी या छोटी बहन पर शक करने को मेरा मन कभी राजी नहीं होगा.’’

‘‘देख, साली को आधी घर वाली दुनिया कहती ही है. तुम ध्यान रखो कि कहीं बरखा तुम्हारा पत्ता साफ कर के पूरी घर वाली ही न बन जाए,’’ अनिता को यों आगाह कर के सुमित्रा खामोश हो गईं, क्योंकि संजीव और बरखा कैंटीन से लौट आए थे.

संजीव और बरखा के निरंतर प्रगाढ़ होते जा रहे संबंध को ले कर कभी किसी ने अनिता को चिंतित, दुखी या नाराज नहीं देखा. उस के हर सहयोगी ने हंसीमजाक, व्यंग्य या गंभीरता का सहारा ले कर उसे समझाया, पर कोई भी अनिता के मन में शक का बीज नहीं बो पाया. जो सारे औफिस वालों को नजर आ रहा था, उसे सिर्फ अनिता ही नहीं देख पा रही थी.

पहले पिक्चर देखने, बाजार घूमने या बाहर खाना खाने तीनों साथ जाते थे. फिर एक दिन बरखा और संजीव को मार्केट में घूमते शिल्पा ने देखा. उस ने यह खबर अनिता सहित सब तक फैला दी.

खबर सुनने के बाद अनिता के हावभाव ने यह साफ दर्शाया कि उसे दोनों के साथसाथ घूमने जाने की कोई जानकारी नहीं थी. उस ने सब के सामने ही संजीव और बरखा से ऊंची आवाज में पूछा, ‘‘कल तुम दोनों मुझे छोड़ कर बाजार घूमने क्यों गए?’’

‘‘तेरा बर्थडे गिफ्ट लाने के लिए, सहेली,’’ बरखा ने बड़ी सहजता से जवाब दिया, ‘‘अब ये बता कि हम सब को परसों इतवार को पार्टी कहां देगी?’’

बरखा का जवाब सुन कर अनिता ने अपने सहयोगियों की तरफ यों शांत भाव से मुसकराते हुए देखा मानो कह रही हो कि तुम सब बेकार का शक करने की गलत आदत छोड़ दो.

अनिता तो फिर सहज हो कर हंसनेबोलने लगी, पर बाकी सब की नजरों में बरखा की छवि बेहद चालाक युवती की हो गई और संजीव की नीयत पर सब और ज्यादा शक करने लगे.

बरखा ने अनिता के जन्मदिन की पार्टी का आयोजन अपने घर में किया.

‘‘आप सब को मैं अपने घर लंच पर बुलाना चाहती ही थी. मेरे मम्मीपापा सब से मिलना चाहते हैं. अनिता के जन्मदिन की पार्टी मेरे घर होने से एक पंथ दो काज हो जाएंगे,’’ ऐसा कह कर बरखा ने सभी सहयोगियों को अपने घर बुला लिया.

बरखा के पिता के बंगले में कदम रखते ही उस के सहयोगियों को उन की अमीरी का एहसास हो गया. बंगले की शानोशौकत देखते ही बनती थी.

बड़े से ड्राइंगहौल में पार्टी का आयोजन हुआ. वहां कालीन हटा कर डांसफ्लोर बनाय गया था. खानेपीने की चीजें जरूरत से ज्यादा थीं. घर के 2 नौकर सब की आवभगत में जुटे हुए थे.

पार्टी के बढि़या आयोजन से अनिता बेहद प्रसन्न नजर आ रही थी. बरखा और उस के मातापिता को धन्यवाद देते उस की जबान थकी नहीं.

‘‘ये मेरे जन्मदिन पर अब तक हुई 24 पार्टियों में बैस्ट है,’’ कहते हुए अनिता को जब भी मौका मिलता वह भावविभोर हो बरखा के गले लग जाती.

इस अवसर पर उन के सहयोगियों की पैनी दृष्टियों ने बहुत सी चटपटी बातें नोट की थीं. यह भी साफ था कि जो ऐसी बातें नोट कर रहे थे. वह सब अनिता की नजरों से छिपा था.

बंगले का ठाठबाट देख कर संजीव की नजरों में उभरे लालच के भाव सब ने साफ पढ़े. बरखा के मातापिता के साथ संजीव का खूब घुलमिल कर बातें करना उन्होंने बारबार देखा.

अनिता से कहीं ज्यादा संजीव बरखा को महत्त्व दे रहा था. वह उसी के साथ सब से ज्यादा नाचा. किसी के कहने का फिक्र न कर वह बरखा के आगेपीछे घूम रहा था.

अनिता से उस दिन किसी ने कुछ नहीं कहा, क्योंकि कोई भी उस की खुशी को नष्ट करने का कारण नहीं बनना चाहता था.

वैसे उस दिन के बाद से किसी को अनिता को समझाने या आगाह करने की जरूरत नहीं पड़ी. संजीव ने सब तरह की लाजशर्म त्याग कर बरखा को खुलेआम फ्लर्ट करना शुरू कर दिया.

बेचारी अनिता ही जबरदस्ती उन दोनों के साथ चिपकी रहती. उस की मुसकराहट सब को नकली प्रतीत होती. वह सब की हमदर्दी की पात्र बनती जा रही थी, लेकिन अब भी क्या मजाल कि उस के मुंह से संजीव या बरखा की शिकायत में एक शब्द भी निकल आए.

‘‘तुम सब का अंदाज बिलकुल गलत है. संजीव मुझे कभी धोखा नहीं देगा, देख लेना,’’ उस के मुंह से ऐसी बात सुन कर लगभग हर व्यक्ति उस की बुद्धि पर खूब तरस खाता.

जन्मदिन की पार्टी के महीने भर बाद स्थिति इतनी बदल गई कि संजीव को बरखा के रूपजाल का पक्का शिकार हुआ समझ लिया गया. अनिता की उपस्थिति की फिक्र किए बिना संजीव खूब खुल कर बरखा से हंसताबोलता. ऐसा लगता था कि उस ने अनिता से झगड़ा कर के संबंधविच्छेद करने का मन बना लिया था.

लेकिन सब की अटकलें धरी की धरी रह गई जब अचानक ही बड़े सादे समारोह में संजीव ने अनिता से शादी कर ली. बरखा उन की शादी में शामिल नहीं हुई. वह अपनी मौसी की बेटी की शादी में शामिल होने के लिए 20 दिन की छुट्टी ले कर मुंबई गई हुई थी.

यों जल्दीबाजी में संजीव का अनिता से शादी करने का राज किसी की समझ में नहीं आया.

लोगों के सीधा सवाल पूछने पर संजीव मुसकान होंठों पर ला कर कहता, ‘‘बरखा से हंसनेबोलने का मतलब यह कतई नहीं था कि मैं अनिता को धोखा दूंगा. आप सब ऐसा सोच भी कैसे सके? अरे, अनिता में तो मेरी जान बसती है और अब मैं उस से दूर रहना नहीं चाहता था.’’

अनिता की खुशी का ठिकाना नहीं था. उस से कोई बरखा के साथ संजीव का जिक्र करता तो वह खूब हंसती.

‘‘अरे, तुम सब बेकार की चिंता करते थे. देखो, न तो मेरी छोटी बहन जैसी सहेली ने और न ही मेरे मंगेतर ने मुझे धोखा दिया. मुझे अपने प्यार पर पूरा विश्वास था, है और रहेगा.’’

उसे शुभकामनाएं देते हुए लोग बड़ी कठिनाई से ही अपनी हैरानी को काबू में रख पाते. संजीव और बरखा का चक्कर क्यों अचानक समाप्त हो गया, इस का कोई सही अंदाजा भी नहीं लगा पा रहा था.

दोनों सप्ताह भर का हनीमून शिमला में मना कर लौटे. बरखा ने फोन कर के अनिता को बता दिया कि वह शाम को दोनों से मिलने आ रही है.

उस के आने की खबर सुन कर संजीव अचानक विचलित नजर आने लगा. अनिता की नजरों से उस की बेचैनी छिपी नहीं रही.

‘‘किस वजह से टैंशन में नजर आ रहे हो, संजीव?’’ कुछ देर बाद हाथ पकड़ कर जबरदस्ती अपने सामने बैठाते हुए अनिता ने संजीव से सवाल पूछ ही लिया.

बहुत ज्यादा झिझकते हुए संजीव ने उस से अपने मन की परेशानी बयान की.

‘‘देखो, तुम बरखा की किसी बात पर विश्वास मत करना… वह तुम्हें उलटीसीधी बातें बता कर मेरे खिलाफ भड़काने की कोशिश कर सकती है,’’ बोलते हुए संजीव बड़ा बेचैन नजर आ रहा था.

‘‘वह ऐसा काम क्यों करेगी, संजीव? मुझे पूरी बात बताओ न.’’

‘‘वह बड़ी चालू लड़की है, अनिता. तुम उस के कहे पर जरा भी विश्वास मत करना.’’

‘‘पर वह ऐसा क्या कहेगी जिस के कारण तुम इतने परेशान नजर आ रहे हो?’’

‘‘उस दिन उस ने पहले मुझे उकसाया… मेरी भावनाओं को भड़काया और फिर… और फिर…’’ आंतरिक द्वंद्व के चलते संजीव आगे नहीं बोल सका.

‘‘किस दिन की बात कर रहे हो? क्या उस दिन की जब तुम उसे घर छोड़ने गए थे क्योंकि उसे स्टेशन जाना था?’’

‘‘हां.’’

‘‘जब तुम उस के घर पहुंचे, तब उस के मम्मीपापा घर में नहीं थे. तब अपने कमरे में ले जा कर उस ने पहले तुम्हारी भावनाओं को भड़काया और जब तुम ने उसे बांहों में भरना चाहा, तो नाराज हो कर तुम्हें उस ने खूब डांटा, यही बताना चाह रहे हो न तुम मुझे?’’ उस के चेहरे को निहारते हुए अनिता रहस्यमयी अंदाज में हौले से मुसकरा रही थी.

‘‘इस का मतलब यह हुआ कि वह फोन कर के पहले ही तुम्हें मेरे खिलाफ भड़का चुकी है,’’ गुस्सा दर्शाने का प्रयास कर रहे संजीव का चेहरा पीला भी पड़ गया था.

‘‘मेरे प्यारे पतिदेव, न उस ने मुझे भड़काने की कोशिश की है और न ही मुझे आप से कोई नाराजगी या शिकायत है. सच तो यह है कि मैं बरखा की आभारी हूं,’’ अनिता की मुसकराहट और गहरी हो गई.

‘‘ये क्या कह रही हो?’’ संजीव हैरान हो उठा.

‘‘देखिए, बरखा ने अगर आप के गलत व्यवहार की सारी जानकारी मुझे देने की धमकी न दी होती… और इस कारण आप के मन में मुझे हमेशा के लिए खो देने का भय न उपजा होता, तो क्या यों झटपट मुझ से शादी करते?’’ यह सवाल पूछने के बाद अनिता खिलखिला कर हंसी तो संजीव अजीब सी उलझन का शिकार बन गया.

‘‘मैं ने कभी तुम से शादी करने से इनकार नहीं किया था,’’ संजीव ने ऊंची आवाज में सफाई सी दी.

‘‘मुझे आप के ऊपर पूरा विश्वास है और सदा रहेगा,’’ अनिता ने आगे झुक संजीव के गाल पर प्यार भरा चुंबन अंकित कर दिया.

‘‘मुझ से तुम्हें भविष्य में कभी वैसी शिकायत का मौका नहीं मिलेगा, अनिता,’’ संजीव ने उस से फौरन वादा किया.

‘‘उस तरफ से मैं बेफिक्र हूं क्योंकि किसी तितली ने कभी तुम्हारे नजदीक आने की कोशिश की तो मैं उस का चेहरा बिगाड़ दूंगी,’’ अचानक ही अनिता की आंखों में उभरे कठोरता के भाव संजीव ने साफ पहचाने और इस कारण उस ने अपने बदन में अजीब सी झुरझुरी महसूस की.

‘‘क्या बरखा से संबंध समाप्त कर लेना हमारे लिए अच्छा नहीं रहेगा?’’ उस ने दबे स्वर में पूछा.

‘‘वैसा करने की क्या जरूरत है हमें, जनाब?’’ अनिता उस की आंखों में आंखें डाल कर शरारती ढंग से मुकराई, ‘‘मुझे आप और अपनी छोटी बहन सी प्यारी सहेली दोनों पर पूरा विश्वास है. फिर उसे धन्यवाद देने का यह तो बड़ा गलत तरीका होगा कि मैं उस से दूर हो जाऊं.’’

संजीव ने लापरवाही से कंधे उचकाए पर उस का मन बेचैन व परेशान बना ही रहा. बाद में बरखा उन के घर आई तो वह संजीव के लिए सुंदर सी कमीज व अनिता के लिए खूबसूरत बैग उपहार में लाई थी. वह संजीव के साथ बड़ी प्रसन्नता से मिली. कोई कह नहीं सकता था कि कुछ हफ्ते पहले दोनों के बीच बड़ी जोर से झगड़ा हुआ था.

अनिता और बरखा पक्की, विश्वसनीय सहेलियों की तरह मिलीं. जरा सा भी खिंचाव दोनों के व्यवहार में संजीव पकड़ नहीं पाया.

जल्दी ही वह भी उन के साथ सहजता से हंसनेबोलने लगा. वैसे वह उन की मानसिकता को समझ नहीं पा रहा था क्योंकि उस के हिसाब से उन दोनों को उस से गहरी नाराजगी व शिकायत होनी चाहिए थी.

‘जो कुछ उस दिन बरखा के घर में घटा, वह कहीं इन दोनों की मिलीभगत से फैलाया ऐसा जाल तो नहीं था जिस में फंस कर उसे अनिता से फटाफट शादी करनी पड़ी?’ अचानक ही यह सवाल उस के मन में बारबार उठने लगा और उस का दिल कह रहा था कि जवाब ‘ऐसा ही हुआ है’ होना चाहिए.

इस बार बॉलीवुड वाइव्स दिवाली पर परिवार को क्या सरप्राइज देने वाली है, जाने यहाँ

दिवाली हर साल खुशियों  और सेलिब्रेशन को साथ लेकर आती है,लेकिन इसमें जरुरी होता है, अपना घर – परिवार जिसके साथ इसे मनाने का आनंद ही कुछ और हो जाता है. कई बार इन सेलेब्स को अपने काम की वजह से घर से दूर रहना पड़ता है, लेकिन आज सोशल मीडिया के सहारे ये अपनों तक पहुँच जाती है. इस बार भी कार्य्सिल के इवेंट पर आई पोपुलर रियलिटी शोज ‘फैबुलस लाइव्स ऑफ बॉलीवुड वाइव्स’ के सभी एक्ट्रेस नीलम कोठारी सोनी, महीप कपूर, भावना पाण्डे और सीमा सजदेह ने दिवाली सेलिब्रेशन को गृहशोभा के साथ शेयर किया है, आइये जानते है, क्या कहती है सभी एक्ट्रेसेस.

नीलम कोठारी सोनी  

‘मेड इन हेवन’ वेब सीरीज में पोपुलर हो चुकी नीलम कहती है कि हर साल की तरह इस बार भी मैं दिवाली पर अच्छे – अच्छे पकवान बनाने वाली हूँ, मुझे खाना बनाना बहुत पसंद है और मैं इस बार अपने परिवार और दोस्तों के लिए स्पेशल पास्ता बनाउंगी, जो उनके लिये सरप्राइज होगा. दिवाली में परिवार का साथ रहने में ही सब अच्छा लगता है. इसके अलावा पूरे घर को सुंदर लाइट्स से सजाना भी मुझे अच्छा लगता है.

महीप कपूर

अभिनेत्री महीप कपूर को दिवाली सेलिब्रेट करना बहुत अच्छा लगता है, इसे वह किसी भी रूप में अपने परिवार के साथ मनाती है, क्योंकि इस दिन जो भी डिशेज बनते है उसमे प्यार होता है, इसलिए स्वाद भी अच्छा होता है. मिठाई उन्हें इस दिन खाना पसंद है. वह कहती है कि बचपन में मेरे पिताजी इस दिन एक लिफाफा मुझे देते थे, जिसमे सरप्राइज गिफ्ट के रूप में पैसे होते थे. आज भी मुझे वही लिफाफा मिलता है, जिसका वह हर साल इन्जार करती है. पैसे जितने भी हो उससे अधिक मुझे उनका प्यार उसमे अधिक झलकता है. मुझे खाना बनाना पसंद है, लेकिन मेरा किचन एकदम साफ सुथरा होना चाहिए, क्योंकि मैं ओसीडी की शिकार हूँ, जो चीज जहाँ हो वहाँ रखी होनी चाहिए, ताकि मैं किचन में घुसते ही मुझे खाना बनाने की चाहत हो.

भावना पांडे

हंसमुख, खूबसूरत मॉडल और एक्ट्रेस भावना पांडे कहती है कि मेरी बेटी अनन्या पांडे को दिवाली सेलिब्रेट करना बहुत पसंद है, लेकिन कई बार काम की व्यस्तता के कारण ऐसा नहीं हो पाता, दिवाली इस बार मैं जोर – शोर से मनाने वाली हूँ, क्योंकि इस दिन पूरे घर को रौशनी से सजाना, दिए जलाना, अपनों से मिलना आदि सब मेरे लिए प्यारा और अनोखा होता है. मैं अदरक की चाय, ब्रेड ओम्लेट के अलावा कुछ पका नहीं सकती, लेकिन इसबार मैं गाजर का हलवा ट्राई करने वाली हूँ.

सीमा सजदेह

डिज़ाइनर और एक्ट्रेस सीमा सजदेह दिवाली पर सबकी पसंद और ना पसंद का ख्याल रखती है, उन्हें इस दिन अच्छी – अच्छी मिठाइयाँ खानी पसंद है, इसके लिए वह खुद बनाती भी है. वह कहती है कि दिवाली सबके साथ मिलजुलकर मनाने का त्यौहार है, इसे मैं अपने दोस्तों के साथ मनाना चाहती हूँ. दिवाली की एक बात उन्हें पसंद नहीं है, जिसमे पटाखों का फोड़ना, जिससे प्रदूषण बढ़ता है और कई बीमारियाँ खासकर साँस की बीमारी से परेशान बच्चों और बुजुर्गों को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है.

मेरे मुंह में दुर्गंध आती है, कोई उपाय बताएं

सवाल

मेरे मुंह से बहुत दुर्गंध आती है. मुझे अपना मुंह खोलने में भी शर्म आती है. मुंह से दुर्गंध क्यों आती है और क्या इसे घरेलू उपायों से ठीक किया जा सकता है?

जवाब

मुंह से दुर्गंध आना एक आम समस्या है. लेकिन कई बार इस का कारण शरीर में पल रही कोई गंभीर बीमारी भी हो सकती है. अगर मुंह की दुर्गंध ओरल हाइजीन न रखने से है तो इसे सामान्य उपायों से दूर किया जा सकता है. लेकिन अगर यह दांतों, मसूड़ों या शरीर में पनप रही किसी बीमारी के कारण है तो उपचार बेहद आवश्यक है. आप कुछ घरेलू उपचार अपना सकती हैं जैसे खाना खाने के तुरंत बाद कुल्ला करें, मुंह की दुर्गंध से तुरंत छुटकारा पाने के लिए एक गिलास पानी में 1 चम्मच नमक डालें और उस से कुल्ला कर लें, प्याज या लहसुन खाने के बाद ताजा पुदीने की पत्तियों को चबा लें, इलायची चबाएं, अपने भोजन में संतरा, नीबू या अंगूर सम्मिलित करें, खाना खाने के बाद शुगर फ्री चूईंगम चबा लें.

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मैं ने सुना है कि मुंह की गंदगी हृदय रोगों का खतरा बढ़ा देती है. क्या यह सही है? अगर सही है तो इस के होने का कारण क्या है ?

जवाब

आप ने बिलकुल सही सुना है. जिन लोगों को दांतों और मसूड़ों से संबंधित समस्याएं होती हैं उन के हृदय रोगों की चपेट में आने का खतरा उन लोगों की तुलना में कई गुना बढ़ जाता है जिन्हें इन से संबंधित कोई समस्या नहीं होती है. चबाने और ब्रशिंग के दौरान बैक्टीरिया और दूसरे रोगाणु रक्त के प्रवाह में प्रवेश कर परिसंचरण तंत्र के दूसरे भागों में पहुंच सकते हैं और कार्डियोवैस्क्युलर डिजीज का कारण बनते हैं. जब ये सूक्ष्मजीव हृदय तक पहुंचते हैं तो ये किसी क्षतिग्रस्त भाग से जुड़ जाते हैं और सूजन का कारण बनते हैं. इस के कारण बीमारियां होती हैं जैसे ऐंडोकार्डिटिस, हृदय की सब से अंदरूनी परत का संक्रमण आदि. दूसरी कार्डियोवैस्क्युलर कंडीशंस जैसे धमनियों का ब्लौक हो जाना और स्ट्रोक भी उस सूजन से संबंधित है जो मुंह में पाए जाने वाले बैक्टीरिया और दूसरे रोगाणुओं के कारण होती है. जब ये सी रिएक्टिव प्रोटीन (रक्त नलिकाओं में सूजन का संकेत) का स्तर बढ़ा देते हैं तो इस के कारण हृदय रोगों और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है.

डा. सुमन यादवहैड, मैक्सिलोफैशियल ऐंड डैंटल डिपार्टमैंट, नुमेड हौस्पिटल, नोएडा.

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इस दीवाली घर रिनोवेशन का है इरादा तो विशेषज्ञ की सलाह से चुनिए बेस्ट टाइल्स

त्योहारों का सीजन आते ही कुछ अपने घर के इंटीरियर मे भी कुछ नयापन लाने की इच्छा जागने लगती है; कुछ ऐसा, जिससे घर को नया रूप मिल जाए. बात जब घर यानी हमारे रहने की जगह की हो रही हो तो टाइल्स पर ध्यान देना बहुत जरूरी है. टाइल्स न केवल घर का सौंदर्य बढ़ाती है बल्कि सजावट के पूरे माहौल की भूमिका लिखती है.

ए.वी.मल्लिकार्जुन असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट, सेल्स एंड मार्केटिंग अपर्णा एंटरप्राइजेज लिमिटेड के बता रहे हैं कि अपने घर को चार चांद लगाने के लिए टाइल्स चुनते समय आपको किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.

टाइल्स का आकार

टाइल पसंद करने से पहले यह समझना जरूरी है कि आप जहां उन्हें लगा रहे हैं, वह जगह कैसी है और किस काम आती है. कमरे के आकार, प्रकाश व्यवस्था और मौजूदा सजावट जैसे कारणों पर विचार करें. बड़ी टाइलें किसी भी जगह को विशालता का रूप प्रदान कर सकती हैं, जबकि छोटी टाइलें कॉम्पैक्ट होने का अहसास जगा सकती है.

सटीक सामग्री:

टाइलें विभिन्न सामग्रियों जैसे सिरेमिक, चीनी मिट्टी के बरतन, प्राकृतिक पत्थर सहित कई तरह की सामग्री में उपलब्ध हैं; सभी की अपनी-अपनी खासियत है. जैसे, चीनी मिट्टी की टाइलें बहुत टिकाऊ और वॉटरप्रूफ होती हैं, इन्हें बाथरूम और रसोई के लिए अच्छा माना जाता है. अधिक महंगी लेकिन प्राकृतिक पत्थर की टाइल्स भव्य लगती है, संगमरमर भी सुरुचिपूर्ण और बेजोड़ विकल्प है, क्योंकि यह सुंदरता और भव्यता को उस स्तर तक ले जाता है, जिसे अन्य सामग्रियों से बनी टाइल्स नहीं ले जा सकतीं. ऐसे ही ग्रेनाइट, चूना पत्थर, ट्रैवर्टीन और बलुआ पत्थर जैसी कई टाइल्स हैं, जिससे घर को आलीशान बनाया जा सकता है.

उपयोग का स्थान/क्षेत्र:

घर के विभिन्न क्षेत्रों की अलग-अलग आवश्यकताएं होती हैं. उदाहरण के लिए, बाथरूम और किचन के लिए टिकाऊ और साफ करने में आसान टाइल्स सबसे सही रहेगी. वहीं, लिविंग रूम को शाही और सुरुचिपूर्ण दिखने की आवश्यकता है. दूसरी ओर, आराम करने की जगह बेडरूम के लिए आप आरामदायक महसूस करवाने वाली टाइल्स पसंद कर सकते हैं.

कलर पैलेट और पैटर्न:

टाइल्स की रंग योजना जगह का मूड निर्धारित करती है. हल्के रंग की टाइलें खुला, हवादार अहसास कराती हैं, जबकि गहरे रंग की टाइलें माहौल को आरामदायक बनाती हैं. इसके अलावा, हेरिंगबोन, सबवे या मोजेक जैसे पैटर्न के साथ प्रयोग करना आपके इंटीरियर में एक खास अहसास जोड़ सकता है.

रखरखाव:

टाइल्स के चयन में उनकी मेंटेनेंस महत्वपूर्ण पहलू है क्योंकि कुछ टाइलों को बहुत ज्यादा रखरखाव, नियमित और विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है, खासकर वे जो प्राकृतिक पत्थरों से बनी होती हैं. यदि आप कम रखरखाव वाले विकल्प की तलाश में हैं तो चमकती हुई सिरेमिक टाइलें या चीनी मिट्टी की टाइलें आपके लिए उपयुक्त हो सकती हैं.

मौजूदा सजावट के साथ मिश्रण:

आपको अपने घर के फर्नीचर, दीवारों और अन्य सजावट के रंगों, बनावट पर विचार करना चाहिए और उनके अनुसार टाइल्स का मिलान करना चाहिए। यह आपके घर में सामंजस्यपूर्ण अनुभव लाता है, जिससे लुक अच्छा बनता है.

बजट फ्रेंडली: आपके बजट के अनुसार बाजार में कई तरह के विकल्प हैं। चमकदार या पॉलिश की हुई टाइलें, टेराकोटा टाइलें एक बजट-फ्रेंडली विकल्प हैं जो आपकी जेब को नुकसान पहुंचाए बिना घर में ग्लैमर डालने के लिए परफैक्ट हैं.

पेशेवर सलाह: यदि आप इस बारे में अनिश्चित हैं कि कौन सी टाइल्स आपके घर के लिए सबसे उपयुक्त होंगी, तो किसी पेशेवर से परामर्श करने में संकोच न करें। वे अपने अनुभव और विशेषज्ञता के आधार पर अच्छी राय देंगे जो आपके बहुत काम आएगी.

रिजल्ट का विजुलाइजेशन

अंतिम निर्णय लेने से पहले, यह कल्पना करने का प्रयास करें कि चुनी गई टाइलें जगह पर लगाने के बार कैसी दिखेंगी. कई टाइल निर्माताओं के पास विजुअलाइजेशन टूल हैं, जिनसे आपको टाइल्स लगाने से पहले यह देखने का मौका मिल जाता है कि लगाने के बाद वे कैसी दिखाई देंगी.

घर के रिनोवेशन प्लान में सही टाइल्स का चयन बहुत महत्वपूर्ण है. तो इस त्योहारी सीजन में अपनी पसंद की ऐसी टाइल्स को घर का हिस्सा बनाएं जो घर की सुंदरता और आराम को बढ़ाए, साथ ही आपकी लाइफ स्टाइल की झलक भी पेश करें.

Diwali Special: ज्वैलरी और आप की स्टाइल स्टेटमैंट

त्योहारों का मौसम यानी रोशनी, उत्साह, दोस्तों और परिवारजनों का साथ और खूबसूरत दिखने का नशा. चाहे दीवाली की पार्टी हो या फिर भैयादूज की गैटटुगैदर हर लड़की इस अवसर पर स्टाइलिश और सुंदर दिखना चाहती है. तभी तो त्योहारों के सीजन में लड़कियां और

महिलाएं अपनी खूबसूरती और फैशन स्टाइल के लिए कितने ही टिप्स आजमाती हैं. ऐसे में सही ज्वैलरी कैरी करने का स्टाइल उन्हें दूसरों से बेहतर बनाने में मदद करता है. आप भी गौर्जियस दिखना चाहती हैं तो इन ज्वैलरी फैशन टिप्स पर ध्यान दें:

ड्रैस के हिसाब से पहनें ज्वैलरी

साड़ी के साथ कैसी हो ज्वैलरी: साड़ी के साथ सही ज्वैलरी पहनी जाए तो आप किसी अप्सरा से कम नजर नहीं आएंगी. साड़ी के साथ नजाकत भी बहुत जरूरी है. ज्वैलरी का चुनाव साडि़यों के टैक्स्चर व रंगों पर निर्भर करता है. हलके रंगों की साड़ी के साथ हलकी व भारी ज्वैलरी दोनों चल जाती हैं. मगर गहरे रंगों की साड़ी के साथ ज्वैलरी बहुत सावधानी से मैच करनी चाहिए.

मोतियों की यानी पर्ल ज्वैलरी सभी प्रकार की साडि़यों के साथ पहनी जा सकती है. साड़ी के साथ बहुत सारी ज्वैलरी एकसाथ न पहनें. भारी नैकपीस के साथ बहुत ही हलके इयर स्टड्स कैरी करें या फिर स्टड्स न ही पहनें. भारी झुमकों यानी डैंगलर्स के साथ खाली गला भी अच्छा लगता है. बस ध्यान रखें कि डिजाइनर ब्लाउज होना चाहिए.

साड़ी के साथ कभीकभी सिर्फ एक ज्वैलरी भी पहनी जा सकती है जो हाईलाइट हो जाती है. हैंडलूम कौटन साडि़यों के साथ अर्टिफिशियल ज्वैलरीज या फिर कोरल डैंगलर्स और ब्रेसलेट्स काफी सुंदर दिखते हैं.

हाथ से बुनी हुई बोमकाई साड़ी के साथ ब्लैक मैटल के गहने बहुत सुंदर दिखते हैं. इसी तरह चंदेरी कौटन या सिल्क के साथ रंगों के हिसाब से सोने या चांदी के गहने ट्राई कर सकती हैं

बनारसी सिल्क, कांचीपुरम सिल्क व असम मोगा सिल्क के साथ स्वर्णाभूषण या चांदी के आभूषण साड़ी को बहुत अच्छा लुक देंगे. असम सिल्क व बनारसी साड़ी के साथ मोती व प्रेशस स्टोंस की ज्वैलरी भी बहुत जंचेगी.

इसी तरह भागलपुरी साड़ी के साथ साड़ी के रंग से मैच करते हुए कान के झुमके और दूसरी ज्वैलरीज अच्छी लगती हैं. हलके रंग की हैंडलूम साड़ी के साथ डायमंड ज्वैलरीज बहुत ही अच्छा कंट्रास्ट मैच है.

सिल्क की साड़ी: सिल्क की साडि़यों का निखार तब आता है जब उन के साथ अच्छी ज्वैलरी भी कैरी की जाए. अगर आप भी सिल्क की साड़ी पहनने का सोच रही हैं तो इस साड़ी के मुताबिक गहने भी पहनें ताकि आप सब से हट कर नजर आएं.

चोकर पहनें: सिल्क की साड़ी के साथ चोकर पैंडैंट और बड़ेबड़े इयररिंग्स खूबसूरत लगते हैं.

सिल्क की हलकी साड़ी के साथ भारी पैंडैंट: किसी पार्टी या फैस्टिवल पर जब आप सिल्क की हलकी साड़ी पहन रही हों तो उस के साथ भारी पैंडैंट कैरी करें. इंडियन ड्रैस के साथ भारी पैंडैंट में आप और भी खूबसूरत दिखेंगी. इस के साथ आप मैचिंग इयररिंग्स, ब्रेसलेट और रिंग्स कैरी कर सकती हैं.

सिल्क की साड़ी के साथ मांगटीका: साड़ी का लुक और सुंदर तब लगता है जब उस के साथ मांगटीका भी पहना जाए. अगर आप  सिल्क की साड़ी पहन रही हैं तो उस के साथ मांगटीका जरूर कैरी करें. यह आप को और भी खूबसूरत और डिफरैंट लुक देगा.

शरारा के साथ कैसी हो ऐक्सैसरीज: त्योहारों के लिए पसंद की जाने वाली ट्रैडिशनल ड्रैसेज में शरारा क्लासी लुक पाने का बैस्ट औप्शन है. शरारा के साथ खास ज्वैलरी स्टाइल ट्राई कर के आप गौर्जियस लुक पा सकती हैं.

झुमके और मांगटीका: शरारा सूट के साथ झुमके काफी फबते हैं. अगर आप कैजुअल शरारा सूट पहनती हैं तो ऐसे में आप शरारा के साथ सिल्वर झुमके भी ट्राई कर सकती हैं. लाल या मैरून शरारा पर सिल्वर झुमकों का कंट्रास्ट काफी अच्छा लगता है. वहीं शरारा के साथ मांगटीका का कौंबिनेशन आप को हैवी लुक देने में मदद करता है.

चोकर: अगर आप गोल गले का शरारा सूट पहन रही हैं तो सूट के साथ चोकर भी कैरी कर सकती हैं. इस के अलावा डीप नैक सूट के लिए कुंदन का सैट पहनना अच्छा औप्शन हो सकता है.

नोज पिन: शरारा में परफैक्ट ट्रैडिशनल लुक पाने के लिए नोज पिन कैरी करना बेहतर विकल्प हो सकता है. इस के लिए आप शरारा से मैचिंग डिजाइनर नोज पिन पहन सकती हैं.

ड्रैस के कलर के अनुसार ऐक्सैसरीज चुनें ऐक्सैसरीज को ड्रैस के कलर के साथ मैच करें: अगर आप कोई ऐसी एक्सैसरीज चुनते हैं जो आप की ड्रैस के कलर की हों तो इस से आप को एक बैलेंस्ड लुक मिलेगा और आप आकर्षक लगेंगी.

उदाहरण के लिए अगर आप कोई लाइट पिंक कलर की ड्रैस पहन रही हैं तो इस के साथ पिंक या रोज कलर की ऐक्सैसरीज चुनें. कलर के शेड में अंतर हो तो भी अच्छा लगता है. मसलन, लाइट पिंक ड्रैस के साथ डार्क पिंक कलर की जूतियां या ब्रेस्लेट खूबसूरत लगता है. इस से आप की मैचिंग भी थोड़ी फैशनेबल लगेगी.

आप ड्रैस के ओवरऔल कलर से ऐक्सैसरीज को मैच करने के बजाय सैकंडरी कलर से भी मैच कर सकती हैं. यह खासतौर पर पैटर्न ड्रैस के साथ बहुत अच्छा लगता है क्योंकि इन में मैच करने के लिए एक से ज्यादा कलर होते हैं. अगर आप पिंक और ब्लू फूलों वाली व्हाइट ड्रैस पहन रही हैं तो पिंक ऐक्सैसरीज भी पहन सकती हैं और ब्लू भी.

अगर ड्रैस बहुत ज्यादा ब्राइट कलर की हो तो न्यूट्रल ऐक्सैसरीज पहनें. उदाहरण के लिए अगर आप अपनी चमकदार गोल्डन ड्रैस के ऊपर उस जैसी ही ब्राइट ऐक्सैसरीज पहनेंगी तो आकर्षक दिखने के बजाय अजीब सा लुक आएगा.

औफ व्हाइट, ब्लैक या ब्राउन जैसे न्यूट्रल कलर की ज्वैलरी लगभग सभी कलर के कपड़ों के साथ अच्छी लगती है. इसी तरह गोल्ड या सिल्वर ज्वैलरी हर ड्रैस के साथ अच्छी लगती है.

अगर आप की ड्रैस सफेद, बेज या ब्राउन जैसे न्यूट्रल कलर की है तो ब्राइट ऐक्सैसरीज पहनें. इस से ड्रैस का लुक ही बदल जाएगा. अपनी ड्रैस की टोन से भी ज्वैलरी को मैच करें. प्रत्येक कलर की अपनी टोन होती है. लाल, नारंगी और पीले ये सभी वार्म टोन वाले कलर हैं जबकि ग्रीन, ब्लू और पर्पल कूल टोन वाले होते हैं.

अब ज्वैलरी की बात की जाए तो गोल्ड एक वार्म टोन वाला कलर है जबकि सिल्वर को आप कूल टोन वाली ज्वैलरी कह सकती हैं.

ड्रैस के कट के आधार पर ऐक्सैसरीज चुनें

वी या यू नैक वाली ड्रैस के साथ नैकलैस पहनें. यह नैकलैस ड्रैस की नैकलाइन के कर्व से मैच करता हुआ होना चाहिए. आप चाहें तो  सिंपल पैंडैंट वाला नैकलैस भी पहन सकती हैं.

इस के विपरीत हौल्टर नैक वाली ड्रैस के साथ नैकलैस पहनने से बचें क्योंकि ऐसी ड्रैस में पहले से ही नैक लाइन में काम होता है. ऐसे में नैकलैस या बड़ेबड़े इयररिंग्स पहनने से आउटफिट बहुत भरा हुआ लगेगा. इसलिए जब भी हौल्टर नैक वाली ड्रैस के साथ ऐक्सैसरीज पहननी हो तो ब्रेसलेट्स पहनें. इस से आप के हाथों पर ज्यादा ध्यान जाएगा और ड्रैस के ऊपरी हिस्से का लुक बैलेंस हो जाएगा.

अगर आप हाई नैक वाली ड्रैस पहन रही हैं तो लंबे नैकलैस पहनने से और भी आकर्षक लुक पाया जा सकता है.

स्ट्रैपलैस ड्रैस के साथ इयररिंग्स पहनें क्योंकि स्ट्रैपलैस ड्रैस आप के हाथों और कंधों को हाईलाइट करती है. नैकलैस पहनने से ड्रैस की चमक फीकी पड़ जाती है. इस के बजाय स्ट्रैपलैस ड्रैस के साथ हैवी इयररिंग्स पहने जा सकते हैं.

मैचिंग ऐक्सैसरीज पहनें अगर आप बहुत सारी ज्वैलरी पहनने वाली हैं तो उसे अपनी मैटल वाली ज्वैलरी के साथ मैच करें. उदाहरण के लिए सभी सिल्वर या फिर सारी गोल्ड ज्वैलरी पहनें. आप मैटल को दूसरी तरह की ज्वैलरी के सैट से भी मिक्स और मैच कर के पहन सकती हैं. उदाहरण के लिए आप लंबे पर्ल वाले नैकलैस के साथ एक छोटा सिल्वर नैकलैस पहनेंगी तो आकर्षक लुक आएगा.

अपनी ऐक्सैसरीज के लिए 1 या 2 ब्राइट कलर ही चुनें. अगर आप एक से ज्यादा भड़कीले रंगों वाली ऐक्सैसरीज पहनना चाहती हैं तो ध्यान रखें कि ऐक्सैसरीज एकसमान कलर की होनी चाहिए.

डायमंड ऐवरग्रीन है…

अभिषेक, अवामा के फाउंडर

ज्वैलरी जनरली जब नैक खाली रहे तब यानी जहां गला खाली हो वहां अच्छी लगती है. अगर नैक पर बहुत ज्यादा हैवी वर्क है तो उस का लुक ज्यादा अच्छा नहीं आता है. ऐंटीक ज्वैलरी औक्सिडाइज्ड होती है. आजकल पुरानी ज्वैलरी का मौडर्न वर्जन आ गया है. वह फिनिशिंग, स्टोन के कौंबिनेशन, मीनाकारी और अलगअलग टैक्स्चर आदि से औथैंटिक लुक के साथ मौडर्न फीलिंग देती है. यह सभी तरह की ड्रैस पर चलती है.

डायमंड ऐवरग्रीन है जो सब की पहली पसंद है. इस के अलावा टैंपल ज्वैलरी जो साउथ में पहले ज्यादा चलती थी अब पैन इंडिया चल रही है. इस में कुछ नक्काशी होती है और कुछ मोर बगैरा के काम होते हैं.

ऐंटीक ज्वैलरी जो कुंदन, स्टोन आदि के होती है आजकल बहुत चल रही है. आजकल पुराने जमाने का नक्काशी वाले काम भी चल रहा है जो पुरानी हैवी काम वाली ज्वैलरी का फील देता है. यह आप को रौयल लुक देता है. फिनिशिंग जितनी अच्छी होगी ज्वैलरी उतनी ही अच्छी लगेगी. पुरानी डिजाइन की ज्वैलरी की बात ही अलग होती है. यह ज्वैलरी दिखती हैवी है मगर होती लाइट है.

बाल खुले हैं तो उन में तो नैकलेस भी ढक जाता है जबकि जूड़ा बना हुआ है तो ईयररिंग्स विजिबल रहेंगे. बाल जितने नीट और क्लीन बंधे हुए होंगे ज्वैलरी उतनी ही बेहतर दिखेगी.

साड़ी पर कैसी ज्वैलरी

साड़ी पर हमेशा ट्रैडिशनल ज्वैलरी ही अच्छी लगती है. आप डायमंड का नैकलैस पहनें या गोल्ड की ऐंटीक लाइट शेड की ज्वैलरी पहनें. अगर आप सिल्क की या प्लेन साड़ी पहन रही हैं तो उस पर टैंपल ज्वैलरी अच्छी लगती है. अगर आप औफ व्हाइट साड़ी पहन रही हैं तो उस के साथ ऐंटीक ज्वैलरी अच्छी निखर कर आती है. कुछ मीनाकारी भी हो तो लुक खूबसूरत आता है. ज्वैलरी हमेशा कंट्रास्ट में खिलती है. औफ व्हाइट के साथ थोड़ी औक्सिडाइटेड की हुई या स्टोन वाली ज्वैलरी अच्छी लगेगी.

रैड कलर की साड़ी के साथ पन्ना, ग्रीन कलर की साड़ी के साथ लाइट ग्रीन कलर के स्टोन वाली ज्वैलरी वैस्टनाइटेड भी लगेगी और यह मौडर्न लुक भी देगी. हाथों में बड़े साइज के रिंग भी पहन सकती हैं जिस से हाथ भी भरेभरे दिखते हैं.

लहंगाचोली के हैवी लुक के साथ चोकर कंप्लीट लुक देगा. नैक हैवी हो गया और आउटफिट भी हैवी है तो बीच में जो थोड़ा गैप रह जाता है वह अच्छा लुक देता है. सूट के साथ इयररिंग्स, ब्रेसलेट और रिंग का कौंबिनेशन अच्छा लगता है. गले में ज्वैलरी का लंबा सैट भी अच्छा लगेगा.

जब कभी आप का हैवी आउटपुट हो तो आप केवल इयररिंग्स और मांगटीका भी पेयरिंग कर के पहन लें तो स्मार्ट लुक मिल जाएगा.

 

राम भरोसे स्वास्थ्य सेवा

नर्सिंग सेवाओं की लगातार बढ़ती मांग ने देशभर में नकली और अधकचरे नर्सिंग कालेजों की बाढ़ सी ला दी है. मध्य प्रदेश में 600 नर्सिंग कालेजों की हो रही जांच में पता चला कि कुछ नर्सिंग कालेज केवल नकली पते पर चल रहे हैं पर वे सुंदर आकर्षक सर्टिफिकेट दे देते हैं जिन के बलबूते पर कुकुरमुत्तों की तरह फैल रहे क्लीनिकों में नौकरियां मिल जाती हैं.

बहुत से डाक्टर और नर्सिंगहोम इन्हें ही प्रैफर करते हैं क्योंकि ये सर्टिफिकेट के बल पर बचे रहते हैं. जहां तक सिखाने की बात है, मोटीमोटी बातें तो किसी को भी 4 दिन में बताई जा सकती हैं. अगर कुछ गलत हो जाए तो अस्पताल इसे मरीज की गलती या मरीज की बीमारी पर थोप कर निकल जाता है.

जिस देश में 80% जनता झाड़फूंक, पूजापाठ पर ज्यादा भरोसा करती हो और छोटे डाक्टर या क्लीनिक में जाना भी उस के लिए मुश्किल हो, वह गलत सेवा दे रही नर्स के बारे में कुछ कहने की हैसियत नहीं रखता.

एक मामले में एक नर्सिंग कालेज 3 मंजिले मकान की एक मंजिल में 3 कमरों में चल रहा था और उस का मालिक प्रिंसिपल

मध्य प्रदेश शिक्षा विभाग का डाइरैक्टर रह चुका है. वह जानता है कि सरकारी कंट्रोल से कैसे निबटा जाता है. नियमों के अनुसार नर्सिंग कालेज में 23 हजार वर्गफुट की जगह होनी चाहिए. उस घरेलू नर्सिंगहोम से 4 बैच निकल भी चुके हैं और नए छात्रछात्राएं आ रहे हैं.

क्या छात्रछात्राओं को मालूम नहीं होता कि वे जिस फेक और फ्रौड मैडिकल या पैरामैडिकल कालेज में पढ़ रहे हैं वह कुछ सिखा नहीं सकता? उन्हें मालूम होता है पर उन का मकसद तो सिर्फ डिगरी या सर्टिफिकेट लेना होता है. यह देश की परंपरा बन गई है जहां प्रधानमंत्री तक अपनी डिगरी के बारे में स्पष्ट कुछ कहने को तैयार नहीं हैं और कभी कुछ कभी कुछ कहते रहे.

ऐसे देश में जहां लोग हजारों की संख्या में लगभग अनपढ़, कुछ संस्कृत वाक्य रट कर करोड़ों का आश्रम चला सकते हैं या धर्म का बिजनैस कर सकते हैं वहां मैडिकल और पैरामैडिकल सेवाओं में जम कर बेईमानी न हो ऐसा कैसे हो सकता है. यह सब मांग और पूर्ति का मामला है. नर्सों की कमी है और किसी सर्टिफिकेट के लिए लड़की या लड़का छोटे डाक्टर या छोटे क्लीनिक के लिए काफी है. पहले भी रजिस्टर्ड मैडिकल प्रैक्टीशनरों के पास जो कंपाउंडर होते थे वे नौसिखिए ही होते थे.

ग्राहक की मानसिकता और उस की सेवा पाने की क्षमता इस मामले के लिए जिम्मेदार है. जब लोग कम पैसों में इलाज कराएंगे तो उन्हें पैरामैडिकल सेवाएं भी अधकचरी मिलेंगी और उन के लिए ट्रेंड करने वाले भी अधकचरे ही होंगे.

आज थोड़े से अक्लमंद लोग क्या कर सकते हैं, यह दिल्ली के एक ज्वैलर के यहां क्व25 करोड़

के डाके से साफ है जिस में एक लड़के ने एक रात में अकेले बिना अंदरूनी सहयोग के तिजोरी काट कर चोरी कर ली और कोई खास सुबूत नहीं छोड़ा. यह तो सैकड़ों कैमरों का कमाल है कि आज हर अपराधी कहीं न कहीं पकड़ा ही जाता है.

नर्सों, फार्मेसिस्टों के बारे में तो पूछिए ही नहीं. पैसे हैं तो अच्छी सेवा मिल जाएगी वरना जैसी मिल रही है उसी से खुश रहिए. यह न भूलें कि आज हर सेवा में बिचौलिए ज्यादा कमा रहे हैं, चाहे वे 4 जनों की फर्म चला रह हों या सैकड़ों टैकसैवी कर्मचारी रख कर औनलाइन सेवा दे रहे हों.

 

7 हैल्थ समस्याओं से बचाता है पू्रंस

कम कैलोरी और ज्यादा फाइबर वाला ड्राईफ्रूट पू्रंस यानी सूखा आलूबुखारा सेहत का ध्यान रखने वालों के बीच आजकल खासा ट्रैंड में है. इस में मौजूद पौलीफिनोल नामक ऐंटीऔक्सीडैंट और पोटैशियम दोनों हड्डियों को मजबूत बनाते हैं. बिगड़ी हुई जीवनशैली में हम छोटी भूख लगने पर कुछ भी खा लेते हैं. जबकि इस के बजाय दिन में एक बार 5-6 पू्रंस खा लें तो शरीर को सही पोषण मिल सकता है.

  1. आंतों को बनाए सेहतमंद

पू्रंस में सौल्यूबल फाइबर काफी मात्रा में होता है जिस से आंतों की सफाई अच्छी तरह होती है. इस के सेवन से आंतें स्वस्थ रहती हैं और कब्ज की समस्या में राहत मिलती है.

2. औस्टियोपोरोसिस में लाभदायक

कई मैडिकल शोधों में यह माना गया है कि औस्टियोपोरोसिस की समस्या से ग्रस्त लोगों में पू्रंस काफी लाभदायक रहा है. इस के संतुलित सेवन से बोन डैंसिटी में सुधार होने की संभावना बढ़ जाती है खासतौर पर यदि किसी महिला को मेनोपौज के बाद यह समस्या हुई है तो उसे डाक्टर की सलाह से इस का सेवन जरूर करना चाहिए.

3. ऐनीमिया से करे बचाव

पू्रंस आयरन के साथसाथ पोटैशियम, विटामिन के, विटामिन बी, जिंक और मैग्नीशियम का भी अच्छा स्रोत है. इस के नियमित सेवन से आप के शरीर के लिए जरूरी मिनरल्स की जरूरत काफी हद तक पूरी हो सकती है.

4. डायबिटीज नियंत्रण में सहायक

चूंकि इस में सौल्यूबल फाइबर पाया जाता है इसलिए यह डाइजेशन प्रोसैस को धीमा करने में सहायक है और जब पाचनक्रिया धीमी हो जाए तो डायबिटीज की समस्या से ग्रस्त लोगों की ब्लड शुगर नियंत्रण में रहती है.

5. मांसपेशियों की चोट से उबारे

पू्रंस में बोरोन नाम का खनिज पाया जाता है जो मांसपेशियों के लिए बहुत जरूरी होता है. यदि आप को मांसपेशियों से जुड़ी समस्याएं हर दूसरे दिन हो जाती हैं तो यह संकेत है कि आप के शरीर में बोरोन की कमी है.

6. दिल की सेहत का रखे खयाल

चूंकि पू्रंस कौलेस्ट्रौल और शुगर को नियंत्रण में रखने में सहायक है इसलिए यह दिल के लिए भी लाभदायक है क्योंकि इन समस्याओं का सीधा असर दिल की सेहत पर पड़ता है.

7. ओबेसिटी कम करे

मोटापा आज की जीवनशैली में सब से बड़ी समस्या है. पू्रंस खाने से आप की बारबार कुछ भी खाने की इच्छा नहीं होती जिस से आप अपने वजन को नियंत्रित रख सकती हैं.

कैसे खाएं: वैसे तो पू्रंस को स्नैक की तरह भी खाया जा सकता है लेकिन दूसरे विकल्प भी हैं:

  •  नाश्ते में ओटमील या दलिया के साथ मिक्स कर खा सकती हैं.
  • दूसरे नट्स के साथ संतुलित मात्रा में मिक्स कर खा सकती हैं.
  • हैल्दी ड्रिंक्स या स्मूदी के साथ इसे ब्लैंड कर सकती हैं.
  • प्यूरी बना कर जैम की तरह इस्तेमाल कर सकती हैं.
  • बेकिंग का शौक है तो कुछ डिशेज में इस का इस्तेमाल किया जा सकता है.

सेहत से जुड़े इन फायदों के साथसाथ पू्रंस के और भी कई फायदे हैं जैसे:

  • यह बालों को मजबूत बनाने में सहायक है.
  • आंखों की रोशनी के लिए फायदेमंद है.
  • इम्यूनिटी बढ़ाने में सहायक है.
  • समय से पहले झुर्रियों का आना रोकने में सहायक है.
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