चिडि़या खुश है: नमिता दिखावटी जिंदगी क्यों जी रही थी

नमिता और अजय की आज शादी है. हमारे शहर के सब से बड़े उद्योगी परिवार का बेटा है अजय, जो अमेरिका से पढ़ाई पूरी कर के अपना कारोबार संभालने हिंदुस्तान आ गया है. अजय के बारे में अखबारों में बहुत कुछ पढ़ने को मिला था. उस की उद्योग विस्तार की योजना, उस की सोच, उस की दूरदृष्टि वगैरहवगैरह और नमिता, हमारे साथ पढ़ने वाली बेहद खूबसूरत लड़की. नमिता की खूबसूरती और उस के कमिश्नर पापा का समाज में रुतबा, इसी के बलबूते पर तो यह शादी तय हुई थी.

कला, काव्य, संगीत आदि सारे रचनात्मक क्षेत्रों में रुचि रखने वाली और पढ़ाई कर के कुछ बनने की चाह रखने वाली नमिता ने अजय जैसा अमीर और पढ़ालिखा वर पाने के लिए अपनी पढ़ाई अधूरी छोड़ दी. रईस खानदान में शादी की तुलना में पढ़ाई का कोई महत्त्व नहीं रहा.

शादी में पानी की तरह पैसा बहाया गया. शादी के फोटो न केवल भारत में बल्कि विदेशी पत्रिकाओं में भी छपवाए गए. नमिता की खूबसूरती के बहुत चर्चे हुए. नवविवाहित जोड़ा हनीमून के लिए कहां गया, इस के भी चर्चे अखबारों में हुए. फिर आए दिन नमिता की तसवीरें गौसिप पत्रिकाओं में छपने लगीं. लोग उसे रईस कहने लगे और वह पेज 3 की सदस्य बन गई.

एक दिन उस्ताद जाकिर हुसैन का तबलावादन का कार्यक्रम हमारे शहर में था.

हम दोस्तों ने नमिता को फोन किया और पूछा, ‘‘चलोगी उस्ताद जाकिर हुसैन का तबला सुनने?’’

हंस कर वह बोली, ‘‘मैं तो कल शाम ही उन से मिलने होटल में गई थी. हमारे बिजनैस हाउस ने ही तो यह कार्यक्रम आयोजित किया है. आज रात उन का खाना हमारे घर पर है. अजय चाहते हैं घर की सजावट खास भारतीय ढंग से हो और व्यंजन भी लजीज हों. इसलिए आज मुझे घर पर रह कर सभी इंतजाम देखने होंगे. आप लोग तबलावादन सुन कर आओ न. हां, आप लोगों को फ्री पास चाहिए तो बताना, मैं इंतजाम कर दूंगी.’’

हम दोस्तों ने उस का आभार मानते हुए फोन रख दिया.

एक दिन पेज 3 पर हम ने उस की तसवीरें देखीं. बेशकीमती साड़ी पहने, मेकअप से सजीधजी गुडि़या जैसी नमिता अनाथालय के बच्चों को लड्डू बांट रही थी. ऐसे बच्चे, जो एक वक्त की रोटी के लिए किसी के एहसान के मुहताज हैं. उन के पास जाते हुए कीमती साड़ी व गहने पहन कर जाना कितना उचित था? वह चाहे गलत हो या सही, मगर बड़े उद्योगी परिवार की सोच शायद यही थी कि बहू की फोटो अनाथों के साथ छपेगी तो वह ऐसी ही दिखनी चाहिए.

उस के जन्मदिन पर बधाई देने के लिए हम ने उसे फोन मिलाना चाहा. काफी देर तक कोई जवाब नहीं मिला, तो हम ने सोचा नमिता अजय के साथ अपना जन्मदिन मना रही होगी. दोनों कहीं बाहर घूमने गए होंगे.

2 घंटे बाद उस का फोन आया, ‘‘मैं तो फलां मंत्रीजी की पत्नी के साथ चाय पार्टी में व्यस्त थी.’’

‘‘मगर उस मंत्री की बीवी के साथ तुम क्या कर रही थीं, वह भी आज के दिन? काफी देर तक तुम ने फोन नहीं उठाया, तो हमें लगा तुम और अजय कहीं घूमने गए होगे.’’

‘‘नहीं रे, अजय एक नई फैक्टरी शुरू करना चाहते हैं. कल उसी फैक्टरी के प्रोजैक्ट की फाइल मंत्रीजी के दफ्तर में जाने वाली है. सब काम सही ढंग से हो जाए, इस के लिए मंत्रीजी की पत्नी से मैं मिलने गई थी. जब पापा कमिश्नर थे, तब इन मंत्रीजी से थोड़ीबहुत जानपहचान थी. अजय कहते हैं, ऐसे निजी संबंध बड़े काम आते हैं.’’

‘‘फिर भी नमिता… शादी के बाद अजय के साथ यह तुम्हारा पहला जन्मदिन है?’’

‘‘अजय ने तो सवेरे ही मुझे सरप्राइज गिफ्ट दे कर मेरा जन्मदिन मनाया. पैरिस से मेरे लिए औरेंज कलर की साड़ी ले कर आए थे.’’

‘‘नमिता, औरेंज कलर तो तुम्हें बिलकुल पसंद नहीं है. क्या वाकई तुम्हें वह साड़ी अच्छी लगी?’’ हम ने पूछा.

‘‘अजय चाहते थे कि मैं औरेंज कलर के कपड़े पहन कर मंत्रीजी की पत्नी से मिलने जाऊं. मंत्रीजी बीजेपी के हैं न.’’

शादी को 1 साल हो गया, तो नमिता के बंगले के लौन में ही बड़ी सी पार्टी का आयोजन था. हम दोस्तों को भी नमिता ने न्योता भेजा, तो हम सारे दोस्त उसे बधाई देने उस के बंगले पर पहुंचे. बंगले के सामने ही बड़ी सी विदेशी 2 करोड़ की गाड़ी खड़ी थी.

नमिता ने चहकते हुए कहा, ‘‘डैडीजी, यानी ससुरजी ने यह कार हमें तोहफे में दी है.’’

‘‘नमिता, तुम्हें तो जंगल ट्रैक में ले जाने लायक ओपन जीप पसंद है.’’

‘‘हां, मगर अजय कहते हैं ऐसी जीप में घूमना फूहड़ लगता है. यह रंग और मौडल अजय ने पसंद किया और डैडी ने खरीद ली. अच्छी है न?’’

पार्टी में ढेरों फोटो खींचे जा रहे थे. गौसिप मैगजीन में अब चर्चे होंगे. नमिता ने किस डिजाइनर की साड़ी पहनी थी, कौन से मेक के जूते पहने थे, कौन से डायमंड हाउस से उस का हीरों का सैट बन कर आया था वगैरहवगैरह…

मम्मीडैडी की पसंद ऐसी है, अजय ऐसा चाहते हैं, अजय वैसा सोचते हैं, पार्टी का आयोजन कैसा होगा, मेन्यू क्या होगा, यह सब कुछ जैसा अजय चाहते हैं वैसा होता है, हम ने नमिता से सुना.

दया आई नमिता पर. नमिता, एक बार अपनेअंदर झांक कर तो देखो कि तुम क्या चाहती हो? तुम्हारा वजूद क्या है? तुम्हारी अपनी पहचान क्या है? तुम किस व्यक्तित्व की मलिका हो?

शादी के बाद मात्र एक दिखावटी गुडि़या बन कर रह गई हो. अच्छे कपड़े, भारी गहने, बेशकीमती गाडि़यों में घूमने वाली रईस. मंत्री की पत्नी तक पहुंचने का एक जरिया. यह सब जो तुम कर रही हो, इस में तुम्हारी सोच, चाहत, पसंदनापसंद कहां है? तुम तो एक नुमाइश की चीज बन कर रह गई हो.

फिर भी तुम खुश हो? इंसान पढ़लिख कर अपनी सोच से समाज में अपना स्थान, अपनी पहचान बनाना चाहता है. शादी के बाद अमीरी के साथसाथ समाज में रुतबा तो तुम्हें मिल गया. फिर अपने सोचविचारों से कुछ बनने की, अपना अस्तित्व, अपनी पहचान बनाने की तुम ने जरूरत ही नहीं समझी? दूसरों की सोच तुम्हारा दायरा बन कर रह गई. दूसरों का कहना व उन की पसंदनापसंद को मानते हुए तुम चारदीवारी में सिमट कर रह गईं.

चिडि़या जैसी चहकती हुई नमिता पार्टी में इधरउधर घूम रही थी. मोतियों का चारा पा कर यह चिडि़या बहुत खुश थी. चांदी की थाली में खाना खाते हुए उसे बड़ा आनंद आ रहा था.

अपनी उपलब्धि पर इतराती नमिता अपनेआप को बड़ी खुशकिस्मत समझती थी. नमिता को देख कर ऐसा लगता था, उस की खुशी व चहचहाना इसलिए है, क्योंकि वह समझ नहीं रही है कि वह सोने के पिंजरे की चिडि़या बन गई है. यहां उस के लिए अपनी सोच की उड़ान भरना नामुमकिन है.

अपनी पसंदनापसंद से जिंदगी जीने की उसे इजाजत नहीं है. खुद की जिंदगी पर वह अपने व्यक्तित्व की मुहर नहीं लगा सकती. अपनी जिंदगी पर उस का कोई अधिकार नहीं है.

सोने के पिंजरे में बंद वह बड़ी खुशहाल जिंदगी बिता रही है, लेकिन वह अपनी पहचान मिटा रही है. सोने के पिंजरे में यह चिडि़या इसलिए बहुत खुश है, क्योंकि इसे अपनी कैद का एहसास नहीं है.

कंगना रनौत की तेजस का हुआ बुरा हाल, हो रहे शो कैंसल

कंगना रनौत इन दिनों अपनी हालिया रिलीज तेजस को लेकर सुर्खियों में बनी हुई हैं. सर्वेश मेवाना द्वारा निर्देशित इस फिल्म में कंगना एक भारतीय वायु सेना अधिकारी की भूमिका निभा रही हैं और यह बॉलीवुड की पहली हवाई एक्शन फिल्म है. फिल्म को दर्शकों से मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली है लेकिन दर्शक तेजस में वीएफएक्स के काम से वास्तव में खुश नहीं थे.

क्या है तेजस का हाल

दरअसल, कंगना रनौत स्टारर यह फिल्म पहले दिन से ही बॉक्स ऑफिस पर संघर्ष कर रही है. पहले दिन धीमी शुरुआत से लेकर वीकेंड शुरुआती तक कम कलेक्शन हुआ है, तेजस को बॉक्स ऑफिस पर बहुत ही बुरा कठिन समय का सामना करना पड़ रहा है. और अब हालिया अपडेट के मुताबिक, तेजस मुश्किल में फंसती दिख रही है क्योंकि शून्य टिकट बिक्री के कारण फिल्म के शो रद्द कर दिए गए हैं.

“रविवार को भी फिल्म की कमाई खराब थी. हर शो में मुश्किल से 10-12 लोग होते हैं. सोमवार से 50% से ज्यादा शो बंद कर दिए गए हैं. फिल्म उतनी बुरी नहीं है जितना कलेक्शन से पता चलता है. माना कि वीएफएक्स खराब है. लेकिन यह देखने योग्य है. हालांकि, फिल्म को पूरी तरह से खारिज कर दिया गया है,”  मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसी ही स्थिति बिहार के पूर्णिया में देखने को मिली जहां रूपबनी सिनेमा के मालिक को टिकट नहीं बिकने के कारण सुबह का शो रद्द करना पड़ा.

 

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एक भी टिकट नहीं बिका

टिकटों की बिक्री नहीं होने और शो रद्द होने से, तेजस के बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन पर असर पड़ने की संभावना है. मीडिया में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, तेजस आज (पांचवें दिन/पहले बुधवार) 40 लाख रुपये की कमाई कर चुकी है, जिससे कुल कलेक्शन 4.60 करोड़ रुपये हो जाएगा. दिलचस्प बात यह है कि तेजस का बॉक्स ऑफिस पर मुकाबला विक्रांत मैसी की 12वीं फेल से हो रहा है, जो अच्छा प्रदर्शन कर रही है. बॉक्स ऑफिस पर अच्छी शुरुआत के बाद 12वीं फेल आज (5वें दिन) 1.6 करोड़ रुपये की कमाई कर सकती है, जिससे फिल्म का कुल कलेक्शन 9.59 करोड़ रुपये हो जाएगा.

BB 17: अंकिता लोखंडे ने इनके साथ किया कैंडल नाइट डिनर, देखते रहे पति

सलमान खान का कॉन्ट्रोवर्शियल रियलिटी शो बिग बॉस 17 दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. इस शो को फैंस काफी पसंद कर रहे है. बिग बॉस के घर में अंकिता लोखंडे और उनके पति विकी जैन के बीच में विवाद बढ़ता ही जा रहा हैं. शो में दोनों के बीच प्यार देखने को कम मिलता है लड़ाई ज्यादा होती है. अक्सर कपल के बीच बहस शुरु हो जाती है. वहीं अंकिता विकी के बदले रवैय, उनके नजरअंदाज करने से परेशान है. इसी बीच वह बीबी हाउस में किसी और के साथ डिनर डेट एन्जॉय कर रही है. विकी के साथ होते हुए भी वह किसी और कंटेस्टेंट के साथ कैंडल नाइट पर गई है.

अंकिता और नावेद की कैंडल नाइट डेट

दरअसल, अंकिता और नावेद को स्पेशल खाना मिलता है. इस स्पेशल खाने में दोनों को पिज्जा, फिश और सूप मिला. अब ये स्पेशल खाना किस लिए मिला इसकी अभी तक कोई जानकारी नहीं है. अब वजह जो भी हो अंकिता और नावेद इस खाने को एंजॉय करते हुए देखा गया है. दोनों के लिए कैंडल डिनर के लिए सेटअप रखा गया है. उनके चारों और कैंडल रखा गया है.

विकी देखते रह गए

अंकिता और नावेद को साथ में स्पेशल खाना एंजॉय करते हुए विकी देखते ही रह गए. वहीं अंकिता खाने को एंजॉय कर रही थी. इसके साथ ही ईशा दोनों को बोलती है कि आप लोग इस खाने को वेस्ट मत करना जितना खाना होगा उतना खा लेना, उसके बाद बचे हुए खाने को फ्रिज में रख देना. इस पर अंकिता कहती है कि कल मेरा करवाचौथ व्रत है इसलिए मैं तो बहुत खाने वाली हूं.

विकी-अंकिता की लड़ाई नहीं खत्म हो रही

वहीं शो में अंकिता और विकी की किचन में फिर से लड़ाई हुई. किचन एरिया में अभिषेक लेकर काफी बहस हुई. बात इतनी बढ़ जाती है कि अंकिता कह देती है मुझे तुमसे बात नहीं करनी है तो विकी कहता है मत करना. अंकिता यह भी कहती है अभिषेक विकी का प्यार है.

नास्तिक बहू: भाग 2- नैंसी के प्रति क्या बदली लोगों की सोच

“अब क्या बताऊं सुषमा, तुम तो जानती ही हो नैंसी को, उस का मन कहां लगता है इन सब में, उस से तो बस फैशन करवा लो, बिना मिर्चमसाला के खाना बनवा लो या फिर इधरउधर घूमने को कह दो, एक पैर में खड़ी रहती है,” नलिनी दुखी और शिकायती अंदाज में बोली “अच्छा छोड़ इन सब बातों को, ठीक ही है जो वह नहीं आ रही है. वैसे भी मुझे तुम्हें बहुत जरूरी बात बतानी है, जो मैं उस के सामने तुम्हें बता नहीं पाऊंगी. अब तुम जल्दी बाहर मिलो मैं फोन रखती हूं,” अपनी सारी बातें रहस्यमय तरीके से कहने के बाद सुषमा ने फोन रख दिया.

सोसाइटी के मंदिर प्रांगण में मेला सा लगा हुआ था. खूब धूम मची हुई थी, यह एक प्रकार का साप्ताहिक मेला का आयोजन जैसा ही था. हफ्ते में 1 दिन भजनकीर्तन सभी महिलाओं के मनोरंजन के साथ ही साथ सुसंस्कारी होने का परिचायक भी था.

आसपास के सोसाइटी की औरतें भी पूरे मेकअप में इतना सजधज कर आई थीं जैसे शादीब्याह में आई हों या फिर कोई फैशन शो चल रहा हो. छोटेछोटे समूह बना कर सभी औरतें एकदूसरे से गुफ्तगू करने में लगी हुई थीं. उन में से कोई अपने कान का न‌या झुमका दिखा रही थी, तो कोई अपनी साड़ी पर इतरा रही थी, कोई अपनी सास की दुष्टता के कर्मकांड बयां कर रही थी. कोई अपनी बहू के आतंक पर रो रही थी, तो कोई अपने ही घर की कहानी सुना रही थी. सभी अपनीअपनी गाथाएं सुनाने में लगी हुई थीं.

नलिनी भी अपनी संगी सुषमा और उस की बहू के संग प्रांगण में पहुंची. वहां पहुंचते ही सुषमा की बहू रमा अपनी सास को छोड़ कर कर अपनी हमउम्र और अपनी सहेलियों के पास खिसक ली. खूब ढोल, ताशे और मंजीरे बजे, भक्ति गीतों से पूरा परिसर गुंजायमान हो उठा. कुछ बुजुर्ग महिलाएं वहां पर उपस्थित महिलाओं को भजनकीर्तन, पूजाअर्चना का जीवन में महत्त्व समझा कर अपनेअपने घरों का पोथापुराण ले कर बैठ गईं और फिर बाकी महिलाएं भी इधरउधर की बेकार की बातें ले कर शुरू हो गईं. यह सब हर सप्ताह का दृश्य था.

नलिनी और सुषमा दोनों भजन के बाद अलगथलग एक कोने में जा बैठीं तब नलिनी ने कहा,”तुम फोन पर कह रही न कि तुम मुझे कुछ बताना चाहती हो तो अब बताओ तुम क्या बताना चाहती हो.”

सुषमा ठंडी सांसें भरती हुई बोली,”देखो नलिनी, मैं तुम से जो कहने जा रही हूं उसे धैर्य और ध्यान से सुनना. तुम्हारी बहू नैंसी संस्कारी नहीं है यह बात तो तुम जानती ही हो लेकिन यह नहीं जानतीं कि अब वह इस बात को पूरी तरह से सिद्ध करने जा रही है. जिस बहू के पास भजनकीर्तन के लिए समय नहीं है, उस के पास अपने सासससुर और परिवार के लिए समय कहां से होगा,” यह सुन नलिनी आश्चर्य से सुषमा का हाथ थामती हुई बोली,”तुम क्या कह रही हो मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा, तुम साफसाफ कहो न तुम्हें जो भी कहना है.”

तभी सुषमा धीरे से बोली,”नैंसी, तुम्हें और तुम्हारे पति को वृद्धाश्रम भेजने की तैयारी कर रही है, मेरी बहू रमा ने उसे वृद्धाश्रम से बाहर निकलते हुए देखा था और उस के हाथों में कुछ कागज भी थे, शायद वृद्धाश्रम के फौर्म होंगे…”

सुषमा का इतना कहना था कि नलिनी की आंखें भर आईं, उस के और नैंसी के बीच विचारों का मदभेद अवश्य था लेकिन इतना भी नहीं था कि नैंसी उन्हें ओल्ड‌ऐज होम भेजने की सोचे. नलिनी की आंखों में पानी देख सुषमा बोली,”मैं ने तो तुझे पहले ही कहा था कि नैंसी को सत्संग और भजनकीर्तन में अपने साथ जबरदस्ती ले कर आया कर तभी तो वह संस्कारी बन पाएगी लेकिन तुम ऐसा कर नहीं पाई, यह उसी का नतीजा है. मेरी बहू को देख सुबहशाम ईश्वर आराधना करती है, मन लगा कर भजनकीर्तन करती है तभी तो संस्कारी है, धर्मकर्म, पापपुण्य सब जानती है इसलिए परिवार को साथ ले कर चलती है.”

सुषमा और नलिनी की बातें अभी समाप्त नही हुई थीं लेकिन धीरेधीरे अब मंदिर परिसर खाली होने लगा था. सब अपनेअपने घर की ओर जाने लगे थे. तभी सिर पर पल्लू ओढ़े रमा भी वहां आ गई और सुषमा से बोली,”मम्मीजी, चलिए अब हम भी चलते हैं.”

सुषमा उठ खड़ी हुई और नलिनी से बोली,”चलो नलिनी.”

नलिनी शांत रही फिर बोली,”तुम दोनों चलो मैं थोड़ी देर रुक कर जाऊंगी.”

नलिनी के ऐसा कहने पर सुषमा और उस की बहू चले गए. नलिनी काफी देर तक अकेली बैठी रही फिर मन में कुछ निश्चय कर घर लौट आई. नलिनी देर से लौटी है यह देख नैंसी दौड़ कर उस के करीब आ कर बोली,”मम्मीजी, आज आप को आने में बहुत देर हो गई, मैं कब से आप की राह देख रही थी.”

नलिनी ने कोई जवाब नहीं दिया और अपने कमरे की ओर मुड़ गई. तभी उस की नजर टेबल पर रखे कागज पर पड़ी जिस में बड़ीबड़ी अक्षरों में वृद्धाश्रम लिखा था, जिसे पढ़ने के लिए नलनी को चश्मे की जरूरत नहीं थी. नलिनी समझ गई कि सुषमा जो कह रही थी वह सही है.

नलिनी की आंखों से लुढ़कते हुए आंसू उस के गालों पर आ गए और वह फौरन अपने कमरे में चली गई और दरवाजा अंदर से बंद कर लिया. नैंसी ने बहुत आवाज लगाई लेकिन नलिनी ने दरवाजा नहीं खोला, बस इतना कहा कि कुछ देर के लिए मैं अकेले रहना चाहती हूं. नैंसी चुपचाप दरवाजे से लौट ग‌ई, उसे कुछ समझ नहीं आया.

उस रात नलिनी ने किसी से कोई बात नहीं की. नैंसी के लाख मनुहार के बाद भी नलिनी ने खाना भी नहीं खाया. नलिनी के पति सौरभ ने पूरी कोशिश की कि नलिनी कुछ बोले लेकिन वह कुछ नहीं बोली जैसे उस ने न बोलने का प्रण कर लिया हो इस प्रकार मौन रही. इसी प्रकार 4 दिन बीत ग‌ए 5वें दिन नलिनी अपना और अपने पति का सामान पैक करने लगी. यह देख सौरभ बोले,”यह सब तुम क्या कर रही हो?”

नलिनी बिना जवाब दिए पैकिंग में लगी रही तभी वहां नैंसी और उस के पति अमन भी आ गए. नलिनी को इस प्रकार सामान पैक करता देख नैंसी से रहा नहीं गया और वह जोर से बोली,”मम्मीजी, यह सब क्या है, न आप ठीक से खाना खा रही हैं, न किसी से कुछ बोल रही हैं और अब यह पैकिंग… जब तक आप हमें बताएंगी नहीं कि प्रौब्लम क्या है हमें पता कैसे चलेगा… आप बताइए तो सही कि आखिर बात क्या है?”

Diwali Beauty Tips: पर्मानेंट ग्लो के लिए घर पर ट्राई करें हर्बल फेशियल

दीवाली फेस्टिवल नजदीक आ गया है इस त्योहार में संदुर और नेचुरल ग्लो पाने के लिए आमतौर पर महिलाएं काफी पैसा स्किन केयर प्रोडक्ट में खर्च कर देती है. कैमिकल बेस्ड प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करने से स्किन ग्लो तो करती है लेकिन बाद में वहीं त्वचा डल, रुखी और बेजान नजर आती है. ऐसे में कई लोग चेहरे पर चमक लाने के लिए पर्लर में जा कर फेशियल करवाना पसंद करते है. हालांकि कैमिकल बेस्ड फेशियल से कुछ समय निखार रहता है उसके बाद स्किन बेहद डल और बेजान दिखने लगती है. ऐसे में दीवाली पर पर्मानेंट ग्लो पाने के लिए आप हर्बल फेशियल ट्राई कर सकते है.

निखरी और खूबसूरत त्वचा पाने के लिए फेशियल अच्छा ऑप्शन हो सकता है लेकिन कैमिकल युक्त फेशियल का असर चेहरे पर कुछ समय तक ही रहता है जिसके बाद चेहरे पर निखार गायब हो जाता है. ऐसे में नेचुरल ग्लो कैरी करने के लिए हर्बल फेशियल सबसे बेस्ट है. तो आइए जानते है स्किन केयर में हर्बल फेशियल करने के तरीके..

ऐसे बनाएं हर्बल फेशियल

सामग्री

घर पर हर्बल फेशियल करने के लिए 2-3 चम्मच शहद, 2-3 चम्मच चावल या ओट्स का आटा, 1 चम्मच घिसा आलू, आधा कप नारियल का पानी या दूध, आधा कप संतरे का रस, 3 ग्रीन टी बैग, ¼ कप पपीता, 4 स्ट्रॉबेरी, आधा कप केला, 2 चम्मच जैतून का तेल, 2 चम्मच बादाम का तेल और कुछ आइस क्यूब या ठंडा पानी रख लें.

कैसे करें फेशियल

  1. फेस क्लीन करें

सबसे पहले आप साफ पानी से फेस वॉश करें. इसके बाद घिसे आलू को फेस पर लगाकर सर्कुलर मोशन में घुमाते हुए 5 मिनट तक मसाज करें. इससे आपके चेहरे की गंदगी साफ हो जाएगी. इसके बाद चेहरे को साफ गीले कपड़े से पोछ लें.

2. चेहरे पर स्क्रब करें

दूसरा स्टेप फॉलो करने के लिए पपीते को पीस कर चावल या ओट्स के आटे में मिला लें. अब इस पेस्ट से 2 मिनट तक चेहरे की मसाज करें. फिर 5 मिनट बाद टिशू पेपर को भिगो कर चेहरा पोछ लें.

3. हर्बल टोनर लगाएं

ग्रीन टी का टोनर फेस के लिए सबसे बेस्ट हो सकता है. इसके लिए आप ग्रीन टी को पानी में उबालें. अब इस पानी से चेहरे पर स्टीम लें. इससे आपके चेहरे के डर्ट पार्टिकल्स, ब्लैकहेड्स और बैक्टीरिया आसानी से निकल जाएंगे. वहीं स्टीम लेने के बाद 5 मिनट तक फेस पर आइस क्यूब रब करें. इससे चेहरे के ओपेन पोर्स बंद हो जाएंगे.

4. हर्बल मॉइश्चराइजर चेहरे पर लगाएं

सबसे पहले आप मॉइश्चराइजर का इस्तेमाल करने के लिए शहद, केला, संतरे का जूस और नारियल के दूध या पानी को मिक्स करके पेस्ट बना लें. अब इस मिक्सचर से 10 मिनट तक चेहरे की मसाज करें. इसके साथ ही मसाज के बीच-बीच में जैतून या बदाम का तेल लगाते रहे. इसके बाद चेहरे को साफ गीले कपड़े से पोछ लें.

5. हर्बल फेस पैक ट्राई करें

फेशियल के अतिंम स्टेप में हर्बल पैक बनाने के लिए स्ट्रॉबेरी को मैश करके इसमें चावल का आटा और शहद मिलाकर चेहरे पर लगाएं. अब आप चेहरे को ठंडे पानी से धो लें. इसके साथ ही फेशियल के बाद चेहरे पर लाइट मॉइश्चराइजर लगाना न भूले.

11 टिप्स: टीनऐज युवा से दोस्ती के

टीनऐज युवा बहुत सारे बदलावों से गुजरते हैं. इस का सब से बड़ा कारण है हारमोंस. एक तरफ जहां शरीर में तेजी से बदलाव आते हैं, वहीं ये हारमोंस उन की फीलिंग्स और भावनाओं में भी कई तरह के बदलाव लाते हैं. प्यार, अट्रैक्शन, गुस्सा, हर्ट होने जैसी फीलिंग्स अब युवाओं में बढ़ने लगती हैं. जहां एक तरफ वे इन फीलिंग्स और बदलावों को सम  झने की कोशिश कर रहे होते हैं, वहीं स्कूल में पढ़ाई का प्रैशर भी बढ़ने लगता है. यह प्रैशर और हारमोंस बच्चे के बदलते स्वभाव के लिए जिम्मेदार होते हैं.

सकारात्मक रिश्ता बनाए रखने के लिए इन टिप्स को अपनाएं:

  1. जानकारी रखें

भले ही युवा चाहते हैं कि उन पर भरोसा रखा जाए और उन्हें आजादी भी दी जाएं, लेकिन मांबाप इस बात की जानकारी जरूर रखें कि युवा या किशोर कहां जा रहे हैं, किस से मिल रहे हैं, क्या कर रहे हैं या दोस्त कौन हैं.

2. लक्ष्य तक पहुंचने में करें मदद

हर टीनऐजर अपना एक लक्ष्य बनाता है और उसे पूरा करना चाहता है. ऐसे में मांबाप उस की मदद चाहता है और उसे बताया जाए कि उस के इस लक्ष्य को प्राप्त करने में बड़े उस के साथ हैं, साथ ही असफल होने पर उस के आत्मविश्वास को बनाए रखने में हरसंभव उस की मदद भी करेंगे.

3.दोस्त बनें

टीनऐजरों की बेहतर परवरिश के लिए पेरैंट्स बनने के साथसाथ एक दोस्त का रिश्ता भी बनाना होगा जिस से किशोर व युवा अपनी परेशानियां या हर तरह की बातें उन के साथ खुल कर सा  झा कर सकें ताकि वे किसी तरह की गलत चीजों में फंसने से बचे रहें. उन का दोस्ताना व्यवहार टीनऐजरों को करीब रखेगा तभी बड़े उन्हें सहीगलत की जानकारी बेहतर तरीके से बता सकेंगे.

4.कुछ समय साथ में गुजारें

यह जरूरी है कि बड़े दिनभर में कम से कम 1 घंटा जरूर साथ गुजारें. यह समय साथ खाना खाने का, कुकिंग का या सफाई का हो सकता है या कुछ और. रात में सोने से पहले आप साथ में 20-25 मिनट की वाक कर सकते हैं और दिनभर की बातों को सा  झा कर सकते हैं. टीनऐजरों के साथ वीडियो गेम्स, बोर्ड गेम्स खेले जा सकते हैं. उन से राजनीति पर गंभीर चर्चा की जा सकती है. बुक्स या पत्रिकाओं में लिखी बातों की चर्चा की जा सकती है.

5.धैर्य रखें

टीनऐजरों को एक बेहतर परवरिश देने का तरीका है कि मांबाप धैर्य रखें. टीनऐजर खुद इतने बदलावों से गुजर रहा है कि बड़ों से सहयोग की जरूरत होती है. यहां बड़े सम  झें कि उन का बच्चा या बच्ची अजीब तरीके से व्यवहार क्यों कर रहा है. उस के मूड स्विंग्स को ले कर उस पर चिल्लाएं नहीं. ऐसे में एक पेरैंट होने के नाते बड़े उस की परेशानियों को अच्छी तरह से सम  झें. इस के लिए थोड़ा धैर्य रखें. डांटडपट और गुस्सा न करें. याद रखें कि टीनऐज तक आतेआते टीनऐजर खुद जोर से बोलना, गुस्सा करना सीख चुके होते हैं. उन्हें बहुत सी ऐसी बातें भी मालूम होती हैं जो बड़ों को नहीं मालूम होती.

टीनऐजरों से उस के मन का हाल पूछें. लेकिन अगर वह बड़ों को अपनी कोई बात नहीं बताना चाहता तो उस पर जवाब देने की जबरदस्ती न की जाए. बस उसे यह भरोसा दिलाएं कि बड़े उस के साथ हैं. जब भी वह बात करने के लिए आए तो बड़े उसे पूरा समय दें. उसे कुरेदने के बजाय खुद बोलने का मौका दें. इस से वह किसी भी तरह का दबाव का प्रैशर महसूस नहीं करेगा और बड़ों से खुल कर अपनी बात कह पाएगा.

6. सिखाएं बड़ों का आदरसम्मान करना 

कई बार अपने गुस्से और   झुं  झलाहट में टीनऐजर अपनी हदें पार कर जाते हैं और मातापिता को भलाबुरा बोल देते हैं. ऐसे में बड़े संयम बनाए रखें. मां उन से कहे कि वह उन का गुस्सा या परेशानी सम  झ सकते हैं, लेकिन फिर भी उन्हें मां से इस तरह से बात नहीं करनी चाहिए.

उन्हें प्यार से सम  झाया जाए कि उन के शरीर और मन में जो बदलाव आ रहे हैं बड़े उन्हें अच्छी तरह से सम  झ रहे हैं. लेकिन फिर भी कुछ चीजें हैं जिन्हें बिलकुल बरदाश्त नहीं किया जाएगा जैसे   झूठ बोलना, गालीगलौच, बड़ों की बेइज्जती, बड़ों से तेज आवाज में बात करना. यदि किशोर या युवा ये चीजें करता है तो बड़े उसे बिना डांटे उस की गलती का एहसास दिलाएं और आगे से ध्यान रखने के लिए कहें.

7. उन पर भरोसा करें

इस उम्र में किशोर व युवा अपने दोस्तों के बहुत करीब होते हैं. वे परिवार वालों से ज्यादा अपने दोस्तों को अपनी पर्सनल बातें बताते हैं. ऐसे में बड़े टीनऐजरों के दोस्तों के बारे में बातें करें, पर उन की गलतियां जानने की कोशिश न करें. बस, यह जानने की कोशिश करें कि कहीं उन की कोई सहेली या दोस्त ऐसा तो नहीं जो कुछ गलत करने के लिए उकसा रहा हो?

यदि बड़ों को ऐसा लगता है तो युवा को आगाह करें और समझाएं. अगर युवा इस आयु में नई बातें जानने में उत्सुक होते हैं कि वह कोई गलत काम नहीं कर रहा है, तो उस की जासूसी न की जाए उस पर भरोसा किया जाए. कई बार वे खुद गलतियां करने के बाद ही सीखते हैं इसलिए उन्हें हक है अपनी गलतियों से सीखने का एक मौका जरूर मिले.

8. तुलना न करें

किशोर युवाओं को कोई भी गलत काम करते हुए देख कर मांबाप तुरंत उसे उस की क्लास के टौपर, अपने दोस्त के बच्चे या किसी पड़ोस के बच्चे से कंपेयर करने लगते हैं, ‘देखो, मडानाजी का लड़का तुम्हारी क्लास में ही है और स्कूल और कोचिंग दोनों जगह टौप करता है,’ ‘तुम से अच्छा तो तुम्हारा छोटा भाई है, खेलने पर कम और पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान लगाता है’ जैसी बातें लगभग सभी मातापिता जानेअनजाने में करते ही हैं. ऐसा भूल कर भी न कहें. उस में हीनभावना भी आ सकती है जो उस के लक्ष्य में आगे बढ़ने में बाधा बन सकती है. इस से आप अपने बच्चे को खुद से दूर कर लेंगे.

मांबाप को भी सम  झना होगा कि हर टीनऐजर अपनी अलग खासीयत और क्षमता के साथ बिलकुल अलग होते हैं. टीनऐजर मांबाप का पैदा किया होता है पर वह इंडीपैंडेंट ईकाई है, यह समझ लें. जरूरी नहीं है कि हरकोई टौप ही करे क्योंकि कोई बच्चा पढ़ाई में अच्छा होता है, कोई ड्राइंगपेंटिंग में, कोई खेलकूद में तो कोई और किसी फील्ड या गतिविधि में. इसीलिए बड़े हरेक की खासीयत यानी उस का टेलैंट पहचानें और उसे उसी की गति और सुविधा से आगे बढ़ने दें.

9.खुश रहें

यदि कोई किशोर युवा अपनी समस्याएं ले कर मांबाप के पास आता है तो उन को खुश होना चाहिए कि वह चाहता है कि उस की बात ध्यान से सुनी जाए. इस के लिए पर्याप्त समय दिया जाए. यह कह कर पीछा न छुड़ाया जाए कि अभी नहीं बाद में बताना, यह क्या बारबार तुम अपनी हर समस्या को ले कर आ जाते हो, अपनी समस्या खुद हल करना सीखो वगैरहवगैरह.

10. बनाएं कुछ रूल्स

हो सकता है कि वे ओवर स्मार्ट बनने के चक्कर में आप को या आप की बोली हुई चीजों को नजरअंदाज करने लगे. घर में बहुत ज्यादा सख्ती अच्छी नहीं लगती है, लेकिन पूरी तरह ढील देना भी ठीक नहीं है. घर में माहौल को बैलेंस बनाए रखने के लिए कुछ रूल्स बनाए जाएं तो युवा सहर्ष उन्हें अपना लेंगे. अगर रूल्स बताने के साथसाथ इन्हें बनाए जाने की वजह भी बताएं साथ ही इस से क्या फायदा होगा यह भी बताएं. ऐसे में वह यह सम  झ पाएगा कि उसे कब और कहां, कैसे, क्यों व्यवहार करना है.

11. हर सिचुएशन में रहें शांत

टीनऐजर खुद स्मार्ट होते हैं पर उन्हें लगता है कि पेरैंट्स का दिया हुआ ज्ञान पुराने जमाने का है. वे अपनी हर परेशानी या समस्या या कोई भी जानकारी मातापिता से पूछने के बजाय अपने दोस्तों या गूगल से पूछते हैं. तब कई बार पेरैंट्स और बच्चे का ईगो बीच में आने लगता है और यह   झगड़े या नैगेटिविटी का कारण बनने लगता है. इस सिचुएशन में आप को एक मैच्योर पर्सन की तरह व्यवहार करना चाहिए. शांत रह कर सिचुएशन को संभालने की कोशिश करें.

टीनऐज पेरैंट्स और टीनऐजर दोनों के लिए  एक कठिन दौर है लेकिन एक अच्छे मातापिता बन कर निश्चित रूप से वे जीवन के उम्र के इस पड़ाव को आसान बनाने में आप मदद कर सकते हैं. अपने व्यवहार और आदतों में बदलाव से यदि वे कूल पेरैंट्स रहेंगे तो इस बात की बहुत संभावना है कि किशोर व युवा मांबाप की बात मानें या सुनें और उन्हें बड़ों के साथ कुछ भी शेयर करने में किसी तरह की हिचक या संकोच न हो.

इसीलिए टीनऐजर को एक समझदार पेरैंट की सख्त जरूरत होती है. उस के साथ ही बड़ों को भी अपने व्यवहार में बदलाव लाने की जरूरत है.

त्योहार है खास तो डिश भी खास

त्योहारों को मौसम हमारे दिलदिमाग पर ऐसा छाता है कि हर तरफ से सकारात्मक ऊर्जा आने के साथ-साथ हमारी एपेटाइट भी बढ़ जाती है. हम याद करने लगते हैं वो दिन जब मां किचन में तरह-तरह के पकवान बनाती थी और हम पकवानों की खुशबू से बेचैन हो कर   झट से उनका स्वाद चखने को बेकरार रहते थे. स्वाद के गलियारों से एक ऐसी डिश निकर कर आती है, छानार कौफ्ता लेकिन सवाल वही कि क्या वो मां के हाथ वाला जादू अब इस डिश में जग पाएगा.

छानार कोफ्ता डिश में मसालों का सही मिश्रण होना बहुत जरूरी है और इस सही मिश्रण और संतुलन के साथ आता है सनराइज़ का शाही गरममसाला. जब यह सनराइज़ का शाही गरममसाला ग्रेवी में घुलता है तो देता है वही मां के हाथों के स्वाद का एहसास, तो आइए, त्योहार को छानार कोफ्ता के साथ और भी स्पेशल बनाते हैं.

छानार कोफ्ता

सामग्री छेना बॉल्स की

1/2 किलो सूखा छेना या पनीर, 1 चम्मच बेसन, थोड़ा सा लालमिर्च पाउडर, थोड़ी सी हरी मिर्चें बारीक कटीं, नमक स्वादानुसार, तलने के लिए तेल.

सामग्री करी की

1 कप प्याज का पेस्ट, 1 कप टमाटर का पेस्ट, 1 छोटा चम्मच अदरक-लहसुन का पेस्ट, 2 चम्मच काजू, पॉपी सीड्स का पेस्ट, 5-6 किशमिश, 1 चम्मच सनराइज़ शाही गरममसाला, 2 हरी मिर्चें कटीं, 1 छोटा चम्मच चीनी, नमक स्वादानुसार, 1 चम्चम घी, जरूरतानुसार तेल.

विधि छेना बॉल्स की

तेल छोड़ कर छेना बॉल्स की सारी सामग्री एक साथ अच्छी तरह मिक्स कर लें और 15 मिनट तक रेस्ट करने के लिए ढक कर रखें. अब कड़ाही में तेल गरम करें और मिश्रण की बॉल्स या पैटीज बना कर सुनहरा होने तक तल कर निकाल लें.

विधि ग्रेवी की

कड़ाही में तेल और घी को गरम कर एक के बाद एक प्याज, टमाटर और अदरक-लहसुन का पेस्ट भून लें. अब सनराइज़ शाही गरम मसाला मिला कर धीमी आंच पर चलाते हुए अच्छी तरह भूनें. काजू पॉपी सीड्स  का पेस्ट मिला कर कुछ देर भूनें. जरूरतानुसार पानी और चीनी व नमक मिला कर एक उबाल आने दें. अब छेना बॉल्स और किशमिश मिला दें. धीमी आंच पर बॉल्स ग्रेवी में सोक होने दें. तैयार हो जाने पर हरी धनिया से सजा कर राइस के साथ सर्व करें.

मंदिर के नाम पर झूठों का सहारा

हिंदूमुसलिम, हिंदूमुसलिम करतेकरते हिंदूसिख, हिंदूसिख होना ही था. जो पत्नी अपने पति को भाइयों की संपत्ति को हड़पने को उकसाएगी उस के भाईबहन उसी की संपत्ति हड़पने की प्लानिंग कर रहे हों तो गलत नहीं होगा. जब आप बेमतलब के झगड़ों के लिए कीकर के बीज बोएंगे तो कीकर का जंगल ही उगेगा, उस में से आम नहीं निकलेंगे.

आज भारत में औरतें अपने पिता की संपत्ति में से हक के लिए जब लड़ती हैं तो उन्हें यह याद रखना होगा कि उन की ननदें भी ऐसा करेंगी. या तो समस्या को प्यार और दुलार से न्यायोचित ढंग से सुलझा लो वरना एक जगह लगी आग की चिनगारियां दूसरी की साड़ी पर भी छेद करेंगी.

भारत के हिंदू कट्टरवादियों ने दिल खोल कर खुशी जाहिर की आखिर मुसलमानों, दलितों, शूद्रों को सबक सिखाने वाली सरकार मंदिर के नाम पर झूठों का सहारा ले कर बन ही गई और शायद पुरानी पौराणिक परंपरा फिर आ जाएगी जिस में नीची जातियां सेवा के लिए तैयार रहेंगी. इन कट्टरवादियों की औरतों ने साथ दिया पर ये औरतें भूल गईं कि इस का असर होगा कि उन्हें घरों में बिना तालों के बंद कर दिया जाएगा. इन के टेलैंट का इस्तेमाल सिर्फ तंबोला खेलने में बरबाद कर दिया जाएगा.

ये भूल गईं कि हिंदूमुसलिम से शुरू हुई आग अन्य धर्मों तक तो पहुंचेगी ही और कनाडा में बसे लाखों सिख जो मजदूरी करने गए थे पर अब सैकड़ों एकड़ जमीन के मालिक हैं, अपनी खालिस्तान की बेहूदा मांग को उसी तरह खड़ा करेंगे जैसे हर तार्किक को भारत में पाकिस्तानी उग्रवादी, नक्सली, देशद्रोही कह दिया जाता है.

पंजाब में खालिस्तान की मांग अंदरअंदर ही सुलग रही हो तो पता नहीं पर इतना साफ है कि भारतीय जनता पार्टी का सफाया हो चुका है और उस के साथ प्रकाश सिंह बादल की पार्टी अकाली दल धूल में जा चुकी है जो हिंदूमुसलिम विवाद को शह दे रही थी. पंजाब ने फ्रस्टे्रशन में ड्रग्स का रास्ता चुना है और भारत से बाहर बसे सिखों ने खुल्लमखुल्ला खालिस्तान का. भारतकनाडा संबंध बेहद खराब हो चुके हैं और अमेरिका, इंगलैंड, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड अपने भाई कनाडा के साथ हैं. खालिस्तानी नारे इन देशों में भी गूजेंगे, यह दिख रहा है.

इस का हल फालतू में तूतू, मैंमैं करने से नहीं होगा. जिस से मतभेद हैं उस के साथ किचन में बैठ कर मामले को ठंडा करने से होगा. पर लट्ठ मारने की आदी हो चुकी हिंदूमुसलिम करने वाली जनता और उस की समर्थक सरकार से इस की कोई उम्मीद नहीं है. जो भी पार्टी में, किट्टी में, व्हाट्सऐप पर हिंदूमुसलिम कर रहा है, वह सोच ले कि वह देश के समाज को तारतार कर रहा है, वह दीवाली के पटाखों से पड़ोसियों के घर जला रहा है.

मेरे घुटनों में दर्द होता है, कहीं मुझे गठिया तो नहीं हैं?

सवाल

मेरी उम्र 38 साल है. दरअसल मेरे घुटनों में अकसर दर्द बना रहता है. हलका चलने पर ही दर्द शुरू हो जाता है. क्या यह गठिया के लक्षण हैं? इस से कैसे छुटकारा पाया जा सकता है?

जवाब

अगर घुटने में दर्द और जकड़न हो और चलनेफिरने पर घुटनों में आवाज आए तो गठिया की शुरुआत हो चुकी है. इस के बढ़ने पर घुटनों को मोड़ने में कठिनाई होती है. घुटनों में विकृतियां भी हो सकती हैं. घुटनों की दिक्कतों की जल्दी शुरुआत का एक और कारण मोटापा और खराब पोषण है. करीब 90त्न की कमी है जो बोन मैटाबोलिज्म को नियंत्रित करने के लिए जरूरी है. समस्या से छुटकारा पाने के लिए व्यायाम करें, सैर करें और वजन को संतुलित रखें. इस के साथ ही अस्पताल जा कर समस्या की जांच कराएं वरना आप की लापरवाही आप पर भारी पड़ सकती है.

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मेरी उम्र 28 साल है. जब मैं भारी चीजें उठाता हूं या ऐक्सरसाइज करता हूं तो मेरे जोड़ों में दर्द होने लगता है. कभी यह दर्द हलका होता तो कभी तेज हो जाता है. इस दर्द का क्या कारण है और इस से छुटकारा पाने का इलाज क्या है?

आप जिन लक्षणों का जिक्र कर रहे हैं वे अवैस्कुलर नैक्रोसिस की बीमारी की ओर इशारा करते हैं. यह एक ऐसी स्थिति है जिस में बोन टिशू मरने लगते हैं जिस के कारण हड्डियां गलने लगती हैं. बीमारी का समय पर इलाज जरूरी है अन्यथा एक समय के बाद जब बीमारी गंभीर हो जाती है तो हड्डियां पूरी तरह गलने लगती हैं. इस के बाद आप को गंभीर आर्थ्राइटिस की बीमारी हो सकती है.

-डा. अखिलेश यादव

वरिष्ठ प्रत्यारोपण सर्जन, जौइंट रिप्लेसमैंट, सैंटर फौर नी ऐंड हिप केयर, गाजियाबाद. 

पाठक अपनी समस्याएं इस पते पर भेजें : गृहशोभा, ई-8, रानी झांसी मार्ग, नई दिल्ली-110055.

स्रूस्, व्हाट्सऐप मैसेज या व्हाट्सऐप औडियो से अपनी समस्या 9650966493 पर भेजें.

पिएं ये तीन जूस, तेजी से कम होगा आपका वजन

जिस तरह की लोगों की जीवनशैली बन गई है वजन का बढ़ना लोगों की सबसे बड़ी समस्या बन गई है. वजन कम करने के लिए लोग वर्क आउट, एक्सरसाइज, जिम, डाइटिंग जैसी ना जाने कौन कौन सी चीजें करते हैं. पर उससे उन्हें मनमुताबिक फायदा नहीं होता. वजन कम करने के लिए बेहद जरूरी है कि आप किसी भी खाद्य पदार्थ से परहेज ना करें. इस खबर में हम आपको कुछ जूसों के बारे में बताएंगे जिसे अपनी डाइट में शामिल कर आप अपने वजन को कम कर सकती हैं.

गाजर का जूस

गाजर में फाइबर की मात्रा काफी अधिक होती है. फाइबर के पाचन में काफी वक्त लगता है और इसे खाने से ज्यादा भूख भी नहीं लगती. अगर आप जल्दी अपना वजन कम करना चाहती हैं तो आज ही अपनी टेली डाइट में गाजर को शामिल करें. 100 ग्राम गाजर में करीब 41 कैलोरी और 3 ग्राम फाइबर होता है. गाजर और चुकंदर के जूस में आंवला का रस भी मिला सकते हैं.

टमाटर का जूस

वजन कम करने के में टमाटर काफी लाभकारी होता है. आपको बता दें कि टमाटर में बहुत कम कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा होती है. 100 ग्राम टमाटर में करीब 18 कैलोरी और 3.86 ग्राम कार्बोहाइड्रेट होता है. अगर आप वजन कम करना चाहती हैं तो अभी से टमाटर के जूस का सेवन शुरू कर दें. इसमें पानी की खूब मात्रा होती है. टमाटर के साथ चुकंदर का रस मिलकार भी पी सकते हैं.

सेब का जूस

सेब सेहत के लिए काफी लाभकारी होता है. ये एक लो कौलोरी वाला फल है. आपको बता दें कि 100 ग्राम सेब में 50 कैलोरी होती है. वजन कम करने के लिए इसे अपनी डाइट में शामिल करना एक अच्छा आइडिया है.

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