Festive Special: डिनर में बनाएं पालक पनीर पुलाव

आहार विशेषज्ञों के अनुसार ब्रेकफास्ट और लंच की अपेक्षा रात का भोजन बहुत हल्का होना चाहिए. महिलाओं के लिए किसी भी समय का भोजन बहुत बड़ी समस्या होता है क्योंकि अक्सर घर के प्रत्येक सदस्य की पसन्द अलग अलग होती है, और ऐसा भोजन बनाना बहुत बड़ी चुनौती होती है जो परिवार के सभी सदस्यों को पसन्द आ जाये.

आज हम आपको पालक और पनीर से बनने वाली एक ऐसी एक रेसिपी बनाना बता रहे हैं जो पौष्टिकता से भरपूर तो है ही साथ घर के प्रत्येक सदस्य को भी अवश्य पसन्द आएगा. पालक पनीर पुलाव में प्रोटीन, आयरन, केल्शियम तो होता ही है साथ ही यह अपने आप में सम्पूर्ण भोजन भी है क्योंकि इसे बनाने के बाद आपको कुछ और बनाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी.

कितने लोंगों के लिए           6

बनने में लगने वाला समय     30 मिनट

मील टाइप                          वेज

सामग्री

पालक                            500 ग्राम

पनीर                              250 ग्राम

बासमती चावल               125 ग्राम

बारीक कटा प्याज             1

लहसुन                             4 कली

कटी हरी मिर्च                    4

साबुत लाल मिर्च                2

कटे टमाटर                       2

जीरा                               1/4 टीस्पून

कटा अदरक                     1 छोटी गांठ

नमक                               स्वादानुसार

घी                                   1 टेबलस्पून

तेल                                  पर्याप्त मात्रा में

काजू                                10

नीबू का रस                       1 टीस्पून

चाट मसाला                       1/2 टीस्पून

बारीक कटा हरा धनिया     2 बड़ी लच्छी

विधि

चावल को बनाने से 20 मिनट पूर्व साफ पानी से धोकर दोगुने पानी में भिगो दें. 20 मिनट बाद तीन गुने पानी में 90 प्रतिशत तक उबालकर चलनी से पानी निकालकर ठंडा होने रख दें.

पालक को उबलते पानी में 3-4 मिनट के लिए डालकर तुरन्त बर्फ के ठंडे पानी में डालकर ब्लांच कर लें ताकि पालक का हरा रंग बरकरार रहे. चलनी से पानी अलग करके मिक्सी में पेस्ट के रूप में पीस लें.

पनीर को आधे इंच के चौकोर टुकड़ों में काट कर गरम तेल में सुनहरा होने तक तल लें. इसी कढ़ाई में काजू भी तलकर निकाल लें. अब एक पैन में 2 टेबलस्पून घी डालकर  जीरा तड़काकर लहसुन, अदरक और प्याज को भून लें. जब प्याज सुनहरा सा होने लगे तो पालक प्यूरी डालकर चलाएं. उबले चावल और 1/2 टीस्पून नमक डालकर भली भांति चलाकर गैस बंद कर दें.

अब एक दूसरे पैन में 1 टीस्पून घी और एक टीस्पून तेल डालें. कटी हरी मिर्च, साबुत लाल मिर्च और कटे टमाटर डालकर 1/4 टीस्पून नमक डालकर टमाटर के गलने तक पकाएं. जब टमाटर अच्छी तरह गल जाएं तो पनीर के तले टुकड़े डालकर चलाएं. अब  पनीर को पालक के चावलों में मिलाएं. चाट मसाला और नीबू का रस डालकर बूंदी या पुदीने के रायते के साथ सर्व करें .

Top 10 Majedar Kahaniya: मजेदार कहानियां हिंदी में

Top 10 Majedar Kahaniya: गृहशोभा डिजिटल पर आपको मिलेगी मनोरंजन से भरपूर फैमिली स्टोरी, सोशल स्टोरी, रोमांटिक स्टोरी और क्राइम स्टोरी. आज हम आपके के लिए लेकर आए बेहतरीन मजेदार कहानियाँ. गृहशोभा की ये खास मजेदार कहानियां पढ़कर आपको भरपूर ज्ञान मिलेगा. इन कहानियों को पढ़कर आपको जीवन को समझने की राह मिलेंगी. गृहशोभा मैगजीन पर पढ़े बेहतरीन अनसुनी हिंदी कहानियाँ . जो अवश्य ही आपके जीवन में सफलता लाएंगी और नए व सकारात्मक आयाम.

Best funny stories: इन कहानियों को पढ़कर आपको नैतिक शिक्षा का ज्ञान प्राप्त होगा

  1. तबादला: उसे कौनसा दंश सहना पड़ा

Majedar Kahaniya

‘‘इन से मिलिए, यह मेरे विभाग के वरिष्ठ अफसर राजकुमारजी हैं. जब से यह आए हैं स्वास्थ्य विभाग का कामकाज बहुत तेजी से हो रहा है. किसी भी फाइल को 24 घंटे के अंदर निबटा देते हैं,’’ स्वास्थ्य मंत्री मोहनलाल ने राजकुमार का परिचय अपनी पार्टी के एक अन्य वरिष्ठ मंत्री रामचंद्रजी से कराया. रामचंद्र ने एक उड़ती नजर राजकुमार पर डाली और बोले, ‘‘आप के विभाग में मेरे इलाके के कई डाक्टर हैं जिन के बारे में मुझे आप से बात करनी है. मैं अपने सचिव को बता दूंगा. वह आप से मिल लेगा. आप जरा उन पर ध्यान दीजिएगा.’’

मजेदार कहानी पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें     

2. फेसबुक फ्रैंडशिप: वर्चुअल दुनिया में सचाई कहां है

hindi Majedar Kahaniya

शुरुआत तो बस यहीं से हुई कि पहले उस ने फेस देखा और फिदा हो कर फ्रैंड रिक्वैस्ट भेजी. रिक्वैस्ट 2-3 दिनों में ऐक्सैप्ट हो गई. 2-3 दिन भी इसलिए लगे होंगे कि उस सुंदर फेस वाली लड़की ने पहले पूरी डिटेल पढ़ी होगी.

लड़के के फोटो के साथ उस का विवरण देख कर उसे लगा होगा कि ठीकठाक बंदा है या हो सकता है कि तुरंत स्वीकृति में लड़के को ऐसा लग सकता है कि लड़की उस से या तो प्रभावित है या बिलकुल खाली बैठी है जो तुरंत स्वीकृति दे कर उस ने मित्रता स्वीकार कर ली.

यह तो बाद में पता चलता है कि यह भी एक आभासी दुनिया है. यहां भी बहुत झूठफरेब फैला है. कुछ भी वास्तविक नहीं. ऐसा भी नहीं कि सभी गलत हो. ऐसा भी हो सकता है कि जो प्यार या गुस्सा आप सब के सामने नहीं दिखा सकते, वह अपनी पोस्ट, कमैंट्स, शेयर से जाहिर करते हो.

मजेदार कहानी पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें     

3. मैं चुप रहूंगी: विजय की असलियत जब उसकी पत्नी की सहेली को पता चली

Majedar Kahaniya in hindi

पिछले दिनों मैं दीदी के बेटे नीरज के मुंडन पर मुंबई गई थी. एक दोपहर दीदी मुझे बाजार ले गईं. वे मेरे लिए मेरी पसंद का तोहफा खरीदना चाहती थीं. कपड़ों के एक बड़े शोरूम से जैसे ही हम दोनों बाहर निकलीं, एक गाड़ी हमारे सामने आ कर रुकी. उस से उतरने वाला युवक कोई और नहीं, विजय ही था. मैं उसे देख कर पल भर को ठिठक गई. वह भी मुझे देख कर एकाएक चौंक गया. इस से पहले कि मैं उस के पास जाती या कुछ पूछती वह तुरंत गाड़ी में बैठा और मेरी आंखों से ओझल हो गया. वह पक्का विजय ही था, लेकिन मेरी जानकारी के हिसाब से तो वह इन दिनों अमेरिका में है. मुंबई आने से 2 दिन पहले ही तो मैं मीनाक्षी से मिली थी.

मजेदार कहानी पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें  

4. सपना: कैसा था नेहा का सफर
मजेदार हिंदी कहानियां

सरपट दौड़ती बस अपने गंतव्य की ओर बढ़ रही थी. बस में सवार नेहा का सिर अनायास ही खिड़की से सट गया. उस का अंतर्मन सोचविचार में डूबा था. खूबसूरत शाम धीरेधीरे अंधेरी रात में तबदील होती जा रही थी. विचारमंथन में डूबी नेहा सोच रही थी कि जिंदगी भी कितनी अजीब पहेली है. यह कितने रंग दिखाती है? कुछ समझ आते हैं तो कुछ को समझ ही नहीं पाते? वक्त के हाथों से एक लमहा भी छिटके तो कहानी बन जाती है. बस, कुछ ऐसी ही कहानी थी उस की भी… नेहा ने एक नजर सहयात्रियों पर डाली. सब अपनी दुनिया में खोए थे. उन्हें देख कर ऐसा लग रहा था जैसे उन्हें अपने साथ के लोगों से कोई लेनादेना ही नहीं था. सच ही तो है, आजकल जिंदगी की कहानी में मतलब के सिवा और बचा ही क्या है.

मजेदार कहानी पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें  

5. भरोसेमंद- शर्माजी का कड़वा बोलना लोगों को क्यों पसंद नही आता था?

hindi Majedar Kahaniya

‘‘बड़ी खुशी हुई आप से मिल कर. अच्छी बात है वरना अकसर लोग मुझे पसंद

नहीं करते.’’

‘‘अरे, ऐसा क्यों कह रहे हैं आप?’’

‘‘मैं नहीं कह रहा, सिर्फ बता रहा हूं आप को वह सच जो मैं महसूस करता हूं. अकसर लोग मुझे पसंद नहीं करते. आप भी जल्द ही उन की भाषा बोलने लगेंगे. आइए, हमारे औफिस में आप का स्वागत है.’’

शर्माजी ने मेरा स्वागत करते हुए अपने बारे में भी शायद वह सब बता दिया जिसे वे महसूस करते होंगे या जैसा उन्हें महसूस कराया जाता होगा. मुझे तो पहली ही नजर में बहुत अच्छे लगे थे शर्माजी. उन के हावभाव, उन का मुसकराना, उन का अपनी ही दुनिया में मस्त रहना, किसी के मामले में ज्यादा दखल न देना और हर किसी को पूरापूरा स्पेस भी देना.

मजेदार कहानी पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें   

6. वजूद से परिचय: भैरवी के बदले रूप से क्यों हैरान था ऋषभ?

Majedar Kahaniya

‘‘मम्मी… मम्मी, भूमि ने मेरी गुडि़या तोड़ दी,’’ मुझे नींद आ गई थी. भैरवी की आवाज से मेरी नींद टूटी तो मैं दौड़ती हुई बच्चों के कमरे में पहुंची. भैरवी जोरजोर से रो रही थी. टूटी हुई गुडि़या एक तरफ पड़ी थी.
 
मैं भैरवी को गोद में उठा कर चुप कराने लगी तो मुझे देखते ही भूमि चीखने लगी, ‘‘हां, यह बहुत अच्छी है, खूब प्यार कीजिए इस से. मैं ही खराब हूं… मैं ही लड़ाई करती हूं… मैं अब इस के सारे खिलौने तोड़ दूंगी.’’
 
भूमि और भैरवी मेरी जुड़वां बेटियां हैं. यह इन की रोज की कहानी है. वैसे दोनों में प्यार भी बहुत है. दोनों एकदूसरे के बिना एक पल भी नहीं रह सकतीं.
मजेदार कहानी पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें    

7. आदमी का स्वार्थ: पेड़ के पास क्यों आता था बच्चा

hindi Majedar Kahaniya

उस बालक को मानो सेब के उस पेड़ से स्नेह हो गया था और वह पेड़ भी बालक के साथ खेलना पसंद करता था. समय बीता और समय के साथसाथ नन्हा सा बालक कुछ बड़ा हो गया. अब वह रोजाना पेड़ के साथ खेलना छोड़ चुका था. काफी दिनों बाद वह लड़का पेड़ के पास आया तो बेहद दुखी था.

मजेदार कहानी पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

8. हिमशिला : माँ चुपचाप उसकी और क्यों देख रही थी

hindi Majedar Kahaniya

उस ने टैक्सी में बैठते हुए मेरे हाथ को अपनी दोनों हथेलियों के बीच भींचते हुए कहा, ‘‘अच्छा, जल्दी ही फिर मिलेंगे.’’

मैं ने कहा, ‘‘जरूर मिलेंगे,’’ और दूर जाती टैक्सी को देखती रही. उस की हथेलियों की गरमाहट देर तक मेरे हाथों को सहलाती रही. अचानक वातावरण में गहरे काले बादल छा गए. ये न जाने कब बरस पड़ें? बादलों के बरसने और मन के फटने में क्या देर लगती है? न जाने कब की जमी बर्फ पिघलने लगी और मैं, हिमशिला से साधारण मानवी बन गई, मुझे पता ही नहीं चला. मेरे मन में कब का विलुप्त हो गया प्रेम का उष्ण सोता उमड़ पड़ा, उफन पड़ा.

मजेदार कहानी पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें    

9.भाभी हमारे यहां ऐसे ही होता है

Majedar Kahaniya in hindi

निधिकी शादी को 5 वर्ष हो चुके थे. सासससुर और पति नितिन के साथ उस ने बेहतर सामंजस्य बैठा लिया था, लेकिन उस की नकचढ़ी ननद निकिता अब भी मानती नहीं थी कि निधि उन के घर की परंपरा को निभा पा रही है.

अकसर निकिता किसी न किसी बात पर मुंह बना कर बोल ही देती, ‘‘भाभी, हमारे यहां ऐसा ही होता है.’’

उस की यही बात निधि को चुभती थी. शुरूशुरू में अपने कमरे में जा कर रोती भी थी. पति नितिन को भी बताया तो उन्होंने भी यह कह कर टाल दिया, ‘‘उस की बात को दिल से मत लगाओ, घर में सब से छोटी है, सब की प्यारी होने से थोड़ी मुंहफट हो गई है. अनसुना कर

मजेदार कहानी पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

10. बेकरी की यादें: नया काम शुरु करने पर क्या हुआ दीप्ति के साथ

hindi Majedar Kahaniya

मिहिरऔर दीप्ति की शादी को 2 साल हो गए थे, दोनों बेहद खुश थे. अभी वे नई शादी की खुमारी से उभर ही रहे थे कि मिहिर को कैलिफोर्निया की एक कंपनी में 5 सालों के लिए नियुक्ति मिल गई. दोनों ने खुशीखुशी इस बदलाव को स्वीकार कर लिया और फिर कैलिफोर्निया पहुंच गए.

मजेदार कहानी पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें  

 

औकात से ज्यादा: भाग 3- सपनों की रंगीन दुनिया के पीछे का सच जान पाई निशा

पापा तो निशा के जाने से पहले ही काम पर निकल जाते थे, इसलिए नए खरीदे कपड़े पहन कर औफिस जाती निशा का सामना उन से नहीं हुआ. मगर मम्मी तो उसे देख भड़क गईं, ‘‘तू ये कपड़े पहन कर औफिस जाएगी? कुछ शर्मोहया भी है कि नहीं?’’‘‘क्यों? इन कपड़ों में कौन सी बुराई है?’’ निशा ने तपाक से पूछा. ‘‘सारे जिस्म की नुमाइश हो रही है और तुम को इस में कोई बुराई नजर नहीं आ रही. उतारो इन्हें और ढंग के दूसरे कपड़े पहनो,’’ निशा की नौकरी को ले कर पहले से ही नाखुश मम्मी ने कहा. ‘‘मेरे पास इतना वक्त नहीं मम्मी कि दोबारा कपड़े बदलूं. इस समय मैं काम पर जा रही हूं. शाम को इस बारे में बात करेंगे,’’ मम्मी के विरोध की अनदेखी करते निशा घर से बाहर निकल आई. उस दिन घर से औफिस को जाते निशा को लगा कि उस को पहले से ज्यादा नजरें घूर रही हैं. ऐसा जरूर कपड़ों में से दिखाई पड़ने वाले उस के गोरे मांसल जिस्म की वजह से था. शर्म आने के बजाय निशा को इस में गर्व महसूस हुआ. उधर, अपने बदले रंगरूप की वजह से निशा को औफिस में भी खुद के प्रति सबकुछ बदलाबदला सा लगा. बिजलियां गिराती निशा के बदले रंगरूप को देख काम करने वाली दूसरी लड़कियों की आंखों में हैरानी के साथसाथ ईर्ष्या का भाव भी था. यह ईर्ष्या का भाव निशा को अच्छा लगा. यह ईर्ष्याभाव इस बात का प्रमाण था कि वह उन के लिए चुनौती बनने वाली थी.

निशा के अपना रंगरूप बदलते ही निशा के लिए औफिस में भी एकाएक सबकुछ बदलने लगा. अपने केबिन की तरफ जाते हुए संजय की नजर निशा पर पड़ी और इस के बाद पहली बार उस को अकेले केबिन में आने का इंटरकौम पर हुक्म भी तत्काल ही आ गया. केबिन में आने का और्डर मिलते ही निशा के बदन में सनसनाहट सी फैल गई. उस को इसी घड़ी का तो इंतजार था. केबिन में जाने से पहले निशा ने गर्वीले भाव से एक बार दूसरी लड़कियों को देखा. वह अपनी हीनभावना से उबर आई थी. अकेले केबिन में एक लड़की होने के नाते उस के साथ क्या हो सकता था, उस की कल्पना कर के निशा मानसिक रूप से इस के लिए तैयार थी. दूसरे शब्दों में, केबिन की तरफ जाते हुए निशा की सोच बौस के सामने खुद को प्रस्तुत करने की थी. निशा को इस बात से भी कोई घबराहट नहीं थी कि अपने बौस के केबिन में से बाहर आते समय उस के होंठों की लिपस्टिक का रंग फीका पड़ सकता था. वह बिखरी हुई हालत में नजर आ सकती थी. निशा मान रही थी कि बहुत जल्दी बहुतकुछ हासिल करना हो तो उस के लिए किसी न किसी शक्ल में कोई कीमत तो अदा करनी ही पड़ेगी.

निशा जब संजय के केबिन में दाखिल हुई तो उस की आंखों में खुले रूप से संजय के सामने समर्पण का भाव था. संजय की एक शिकारी वाली नजर थी. निशा के समर्पण के भाव को देख वह अर्थपूर्ण ढंग से मुसकराया और बोला, ‘‘तुम एक समझदार लड़की हो, इसलिए जानती हो कि कामयाबी की सीढ़ी पर तेजी से कैसे चढ़ा जाता है? अपने बौस और क्लाइंट को खुश रखो, यही तरक्की का पहला पाठ है. मेरा इशारा तुम समझ रही हो?’’

‘‘यस सर,’’ निशा ने बेबाक लहजे से कहा.

‘‘गुड, तुम वाकई समझदार हो. तुम्हारी इसी समझदारी को देखते हुए मैं इसी महीने से तुम्हारी सैलरी में 2 हजार रुपए की बढ़ोतरी कर रहा हूं,’’ निशा के गदराए जिस्म पर नजरें गड़ाते संजय ने कहा.

‘‘थैंक्यू सर, इस मेहरबानी के बदले में मैं आप को कभी भी और किसी भी मामले में निराश नहीं करूंगी,’’ उसी क्षण खुद को संजय के हवाले कर देने वाले अंदाज में निशा ने कहा. इस पर उस को अपने करीब आने का इशारा करते हुए संजय ने कहा, ‘‘तुम आज के जमाने की हकीकत को समझने वाली लड़की हो, इसलिए तेजी से तरक्की करोगी.’’ इस के बाद कुछ समय संजय के साथ केबिन में बिता कर  अपने होंठों की बिखरी लिपस्टिक को रुमाल से साफ करती निशा बाहर निकली तो वह नए आत्मविश्वास से भरी हुई थी. औकात से अधिक मिलने को ले कर मम्मी जिस आशंका से इतने दिनों से आशंकित थीं उस में से तो निशा गुजर भी गई थी. औकात कम होने पर तरक्की करने का यही तो सही रास्ता था. इसलिए संजय के केबिन के अंदर जो भी हुआ था उस के लिए निशा को कोई मलाल नहीं था.

सैलरी में 2 हजार रुपए की बढ़ोतरी हुई तो बिना देरी किए निशा ने सवारी के लिए स्कूटी भी किस्तों पर ले ली. अपनी स्कूटी पर सवार हो नौकरी पर जाते निशा का एक और बड़ा अरमान पूरा हो गया था. वह जैसे हवा में उड़ रही थी. इस के साथ ही निशा ने घर में यह ऐलान भी कर दिया कि अब से वह अपने काम से देरी से वापस आया करेगी. पापा कुछ नहीं बोले, किंतु मम्मी के माथे पर कई बल पड़ गए, पूछा, ‘‘इस देरी से आने का मतलब?’’

‘‘ओवरटाइम मम्मी, ओवरटाइम.’’

मम्मी ने दुनिया देखी थी, इसलिए उन्होंने कहा, ‘‘मुझ को तुम्हारा देर से घर आना अच्छा नहीं लगेगा.’’ ‘‘तुम को तो मेरा नौकरी पर जाना भी कहां अच्छा लगा था मम्मी, मगर मैं नौकरी पर गई. अब भी वैसा ही होगा. एक बात और, तुम को मुझे मेरी औकात से ज्यादा मिलने पर ऐतराज था. मगर मुझ को 2 महीने में ही मिलने वाली तरक्की ने साबित कर दिया कि मेरी कोई औकात थी.’’ बड़े अहंकार से कहे गए निशा के शब्दों पर मम्मी बोलीं, ‘‘हां, मैं देख रही हूं और समझ भी रही हूं. सचमुच बाहर तेरी औकात बढ़ गई है. मगर मेरी नजरों में तेरी औकात पहले से कम हो गई है.’’ मम्मी के शब्दों की गहराई में जाने की निशा ने जरूरत नहीं समझी. इस के बाद घर देर से आना निशा के लिए रोज की बात हो गई. काफी रात हुए घर आना अब निशा की मजबूरी थी. अपने बौस के साथसाथ क्लाइंट को भी खुश करना पड़ता था. औफिस में निशा की अहमियत बढ़ रही थी मगर घर में स्थिति दूसरी थी. मम्मी लगातार निशा से दूर हो रही थीं, किंतु निशा की कमाई के लालच में पापा अब भी उस के करीब बने हुए थे. निशा के देरसबेर घर आने को वे अनदेखा कर जाते थे. दिन बीतते गए. एक दिन निशा को ऐसा लगा कि अपनी लालसाओं के पीछे भागते हुए वह इतनी दूर निकल आई थी जहां से वापसी मुश्किल थी. अपने फायदे के लिए संजय ने निशा का खूब इस्तेमाल किया था. इस के बदले में उस को मोटी सैलरी भी दी थी. निशा ने बहुतकुछ हासिल किया था, किंतु एक औरत के रूप में बहुतकुछ गंवा कर.

कभीकभी यह चीज निशा को सालती भी थी. ऐसे में उस को मम्मी की कही हुई बातें भी याद आतीं. लेकिन जिस तड़कभड़क वाली जिंदगी जीने की निशा आदी हो चुकी थी उस को छोड़ना भी निशा के लिए अब मुश्किल था. वापसी के रास्ते बंद थे. औफिस की दूसरी लड़कियों के सीने में जलन और ईर्ष्या जगाती निशा काफी समय तक अपने बौस संजय की खास और चहेती बनी रही और सैलरी में बढ़ोतरी करवाती रही. फिर एक दिन अचानक ही निशा के लिए सबकुछ नाटकीय अंदाज में बदला. एक खूबसूरत सी दिखने वाली लीना नाम की लड़की नौकरी हासिल करने के लिए संजय के केबिन में दाखिल हुई और इस के बाद निशा के लिए केबिन में से बुलावा आना कम होने लगा. लीना ने सबकुछ समझने में निशा की तरह 2 महीने का लंबा समय नहीं लिया था और कुछ दिनों में ही संजय की खासमखास बन गई थी. लीना की संजय के केबिन में एंट्री के बाद उपेक्षित निशा को अपनी स्थिति किसी इस्तेमाल की हुई सैकंडहैंड चीज जैसी लगने लगी थी. लेकिन उस के पास इस के अलावा कोई चारा नहीं था कि वह अपनी सैकंडहैंड वाली सोच के साथ समझौता कर ले.

वसीयत: भाग 2- भाई से वसीयत में अपना हक मांगने पर क्या हुआ वृंदा के साथ?

अफसोस, मैं चाह कर भी रातों में उन के दर्द के साथ जागने के और कुछ न कर सकी. बस पैरों को हलकेहलके दबाती रहती. जब हाथों का स्पर्श ढीला पड़ जाता तो वरुण समझ जाते कि मैं थक गई हूं, तब मेरा मन रखने को कह देते कि अब आराम है. सो जाओ. इंदौर तक डाक्टरों से इलाज कराया, मगर रोग था कि पकड़ में ही नहीं आ रहा था.

फिर मित्रों के कहने पर कि बाहर किसी स्पैशलिस्ट को दिखाया जाए. अत: मुंबई दिखाने का तय हुआ. प्रियांश अभी 6-7 माह का ही था. मुझे छोटे बच्चे के साथ परेशानी होगी, इसलिए वरुण के एक मित्र अखिलेशजी और मांजी दोनों ही साथ मुंबई आए. मेरे लिए आदेश था कि तुम चिंता न करो. फोन से सूचना देते रहेंगे. उन्हें गए 2-3 दिन हो गए, मगर कोई खबर नहीं.

मैं रोज पूछती कि क्या कहा डाक्टर ने तो मांजी का यही जवाब होता कि अभी डाक्टर टैस्ट कर रहे हैं, रिपोर्ट नहीं आई है. आने पर पता चलेगा.

5वें दिन मांजी, अखिलेशजी और वरुण तीनों ही बिना किसी सूचना के घर आ गए. मैं तो अचंभित ही रह गई.

‘‘यह क्या मांजी? न कोई फोन न खबर… आप तो इलाज के लिए गए थे न? क्या कहा डाक्टर ने? सब तो ठीक है?’’

मगर सभी एकदम खामोश थे.

‘‘कोई कुछ बताता क्यों नहीं?’’

कोई क्या कहता. सभी सदमे में जो थे.

वरुण का चेहरा भी उतरा था. मांजी को तो मानो किसी ने निचोड़ दिया हो. सब भी था. वह मां भला क्या जवाब देती जिस ने पति के न रहने पर जाने कितनी जिल्लतों को सह कर अपने बेटे को इस उम्मीद पर बड़ा किया कि उस का हंसताखेलता परिवार देख सके. जीवन के अंतिम क्षणों में उस की अर्थी को कंधा देने वाला कोई है तो मौत से भी बेपरवाही थी. मगर आज उसी मां के इकलौते बेटे को डाक्टर ने चंद सांसों की मोहलत दे कर भेजा है.

जी हां, डाक्टर ने बताया कि वरुण को लंग्स कैंसर है जो अब लाइलाज हो चुका है. दुनिया का कोई डाक्टर अब कुछ नहीं कर सकता. उन के अनुसार 4-5 महीने जितने भी निकल जाए बहुत हैं.

जो घर कभी प्रियांश की किलकारियों से गूंजता था वहां अब वरुण के दर्द की कराहें और एक बेबस मां की आंहें ही बस सुनाई देती थीं. मैं उन दोनों के बीच ऐसी पिस कर रह गई थी कि खुल कर रो भी नहीं पाती थी. घर का जब मजबूत खंभा भरभरा कर गिरने लगे तो कोई तो हो जो अंतिम पलों तक उसे इस उम्मीद पर टिकाए रखे कि शायद कोई चमत्कार हो जाए.

घर में अब हर समय मायूसी छाई रहती. किसी काम में मन न लगता, जिंदगी के दीपक की लौ डूबती सी लगती. डाक्टरों ने अपने हाथ खड़े कर दिए थे. फिर भी ममता की डोर और

7 फेरों के अटूट बंधन में अब भी आशा का एक नन्हा दीपक टिमटिमा रहा था.

मगर धर्म और आस्था नाम की तो कोई चीज है नहीं दुनिया में, फिर भी जब व्यक्ति संसार से हताश हो जाता है तो इसी आखिरी छलावे के पीछे भागता है. यों तो कैंसर नाम ही इतना घातक है कि मरीज उस के सदमे से ही अपनी जीजिविषा खो बैठता है.

डाक्टर भी अपनी जगह गलत नहीं थे, मगर बावरा मन भला कैसे मानता? अत: जो जहां भी रोशनी की किरण दिखाता हम वरुण को ले कर दौड़ पड़ते. प्रेम और ममता के आगे विज्ञान का ज्ञान भी धरा रह जाता है.

हम सभी जानते थे कि वरुण एक लाइलाज बीमारी से जूझ रहे हैं. मगर फिर भी कीमो थेरैपी कराई कि कहीं कोई चमत्कार हो जाए, पैसा पानी की तरह बह रहा था. व्यापार तो लगभग ठप्प ही समझो. इधर वरुण की भागमभाग में प्रियांश की अनदेखी होने से वह भी बीमार हो गया. सच जिंदगी हर तरफ से इम्तिहान ले रही थी. हम वरुण को 6 माह से ज्यादा न जिला पाए.

मांजी तो एक जिंदा लाश बन कर रह गईं. अगर प्रियांश न होता हमारे पास, तो शायद हम दोनों भी उस दिन ही मर गई होतीं. मगर जिंदा थे, इसलिए आगे की चिंता सताने लगी. व्यापार खत्म हो चुका था, घर बैंक के लोन से बना था. अभी तो मात्र एकचौथाई किश्तें ही भर पाए थे और अब यह क्रम जारी रहे, उस की कोई संभावना नहीं थी. अत: मकान भी हाथ से जाता रहा.

किसी ने सच कहा है बुरे वक्त पर ही अपनेपराए इनसानों की परख होती है. इस मुश्किल घड़ी में दोनों बहनों ने अपने अनुसार बहुत मदद की, मगर अमृत भैया कुछ मुंह चुराने लगे हैं, यह खयाल एक पल को मन में आया अवश्य था, मगर अचानक परेशानियों के हमले से इतनी विचलित थी कि इस बारे में गंभीरता से सोच सकूं, इतना समय ही नहीं मिला. जबकि मां अभी जिंदा थीं. किंतु शायद मां की हुकूमत नहीं रह गई थी अब घर में, भुक्तभोगी थीं.

अत: समझ पा रही थी कि हमारे समाज में आज भी वैधव्य के आते औरत का रुतबा कम हो जाता है. बचपन वाली वे मां कहीं खो गई थीं, जो मेरे जरा से रोने पर दोनों बहनों कृष्णा व मृदुला और अमृत भैया से उन की चीजें भी मुझे दिला दिया करती थीं.

मन में कहीं कुछ कसकता था तो वह यह कि वरुण के अभाव में प्रियांश को वह खुशी, वह सुख नहीं दे पाई जिस का कि वह हकदार था. हालांकि बहनें उस के खिलौनों और कपड़ों का पूरापूरा ध्यान रखतीं, मगर यह तो स्नेहा था उन का. हक तो फिर भी नहीं. हालात कुछ ऐसे बने कि गृहस्थी, किराए के एक छोटे से मकान में सिमट कर रह गई. हालात इजाजत न देते कि घर से बाहर जा कर कोई नौकरी करती, क्योंकि मांजी और प्रियांश की देखभाल ज्यादा जरूरी थी.

सामने एक तरफ दिशाहीन जीवन था, तो दूसरी ओर प्रियांश का अंधकारमय भविष्य. क्या होगा? चिंता में सीढि़यों पर बैठी थी कि अचानक कृष्णा दीदी को करीब पा कर चौंक गई, ‘‘अरे दीदी आप? कब आईं? पता ही नहीं चला.’’

‘‘अभी आई हूं. तुम शायद किसी सोच में खोई थीं.’’

‘‘हां दीदी, यह बेल देख रही थी, कितने जतन से इसे लगाया था. रोज सींचती थी. देखो कैसे अब फूलों से लद गई है. मन को बहुत सुकून देती यह. मैं ने इसे उस पेड़ के सहारे ऊपर चढ़ा दिया था… देखो न कल रात तेज आंधी से वह पेड़ धराशायी हो गया. अपना आश्रय छिनते ही देखो कैसे जमीन पर आ गिरी है, एकदम निर्जीव… असहाय बिलकुल हमारी तरह… एक आलंबन के बिना हमारी जिंदगी भी तो ऐसी ही हो कर रह गई है… बिलकुल असहाय… है न दीदी?’’

Anupamaa: काव्या के बच्चे की होगी मौत, अनुज को खूब सुनाएगी पाखी

रुपाली गांगुली और गौरव खन्ना स्टारर ‘अनुपमा’ में इन दिनों ढ़ेर सारा ड्रामा चल रहा है. समर की मैत के बाद शाह हाउस में मातम छाया हुआ है. अनुपमा पूरे परिवार को खुश रखने के लिए कसम खा ली है. अनुपमा ने अपने बेटे समर से वादा किया है उसी वजह से वह पूरे परिवार को नॉर्मल करने में लग गई है.  वहीं शो में अनुपमा और वनराज मिलकर समर को इंसाफ दिलाने में लग गए है. बीते एपिसोड में देखने को मिला कि अनुपमा और वनराज सनी के पापा को करारा जवाब देते है. शो में अब नए तमाशे देखने को मिलेंगे.

पाखी खारी-खोटी सुनाएंगी अनुज को

टीवी सीरियल अनुपमा के अपकमिंग एपिसोड में देखने को मिलेगा कि अनुपमा और वनराज परिवार का साथ देते हुए शाह परिवार के सभी लोग मिलकर सोनू और सुरेश को घर से बाहर निकाल देते हैं. इसी बीच अनुपमा साफ-साफ कहती है कि वह सोनू को सजा दिला कर रहेगी. शो में आगे देखने को मिलेगा कि शाह हाउस में पाखी के लिए एक गिफ्ट आता है, जो समर ने बुक करवाया था. वो गिफ्ट को देखकर पाखी जोर-जोर से रोने लगती है. तभी वहां अनुज आ जाता है पाखी वहां से जाने लगती है. इस दौरान पाखी अनुज को समर की मौत का जिम्मेदार बोल देती है.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by 🖤Anupamaa🖤 (@anupamaa.fanpage)

 

काव्या का होगा एक्सीडेंट

रुपाली गांगुली और गौरव खन्ना स्टारर ‘अनुपमा’ के अपकमिंग एपिसोड में देखने को मिलेगा कि वनराज और अनुपमा को पुलिस स्टेशन से पता चलेगा कि लॉकअप से सोनू निकलकर और पुलिस वालों को उसके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिलता. दोनों हिम्मत करके घर वापिस आते है. वहीं दूसरी तरफ काव्या अस्पताल से चैकअप करवाकर वापिस आती है.

तभी ऑटो वाला उसे गलत रास्ते पर ले जाता है. ऑटो तेज चलने की वजह से काव्या को दिक्कत भी होने लगती है. वह चिल्ला चिल्लाकर लोगों से मदद मांगने लगती है. इस दौरान ऑटो ड्राइवर उसे बोलता है, ‘अपने पति से बोले कि सोनू का केस वापिस ले ले. वरना एक बच्चा खो चुका है, दूसरा भी खो देगा.’ इसके बाद वह काव्या को सड़क पर गिरा देता है, जिस वजह से उसके पेट पर लग जाती है. दावा है कि काव्या अपने बच्चे को खो देगी.

ननद श्वेता बच्चन ने किया खुलासा, ऐश्वर्या राय की इस चीज से करती है नफरत

सदी के महानायक का अभी हाल ही में 11 अक्टूबर को 81वां जन्मदिन मनाया गया है. इस बीच बिग बी की बेटी श्वेता बच्चन इन दिनों काफी सुर्खियों में है. दरअसल, श्वेता को सोशल मीडिया पर काफी ट्रोल किया जा रहा है. वहीं श्वेता की बेटी नव्या ने हाल ही में पेरिस फैशन वीक में रैंप डेब्यू किया था. जिसका वीडियो उन्होंने शेयर किया था. इस फैशन वीक का हिस्सा ऐश्वर्या राय भी रही थीं. लेकिन श्वेता ने उस वीडियो में ऐश्वर्या को टैग नहीं किया.  इसी वजह से उन्हें काफी ट्रोल किया जा रहा है. ऐसा पहली बार नहीं है श्वेता और ऐश्वर्या बीच अनबन देखी जा रही है. श्वेता एक बार बता चुकी है उन्हें  ऐश्वर्या के बारे में क्या बिल्कुल पसंद नहीं है.

ऐश्वर्या की इस चीज से नफरत करती है

अभिषेक बच्चन एक बार अपनी बहन के साथ करण जौहर के शो कॉफी विद करण में गए थे. जहां करण ने अपने चैट शो में श्वेता से ऐश्वर्या के बारे में सवाल पूछे थे. करण ने श्वेता से पूछा था कि वह ऐश्वर्या के बारे में कया पसंद करती हैं, क्या झेलती हैं और क्या नफरत करती हैं. श्वेता ने ऐश्वर्या के बारे में कहा कि वह सेल्फ मेड, स्ट्रॉन्ग वुमेन और एक बहुत अच्छी मां हैं. वहीं वह ऐश्वर्या के टाइम मैनेजमेंट को झेलती है. इस बात से नफरत करती हैं कि वह कॉल और मैसेज का जवाब देने में बहुत टाइम लेती हैं.

ऐश्वर्या ने फोटो किया क्रॉप

हाल ही में अमिताभ बच्चन का जन्मदिन मनाया गया है. अमिताभ के जन्मदिन पर पूरा परिवार एक साथ था. जिसमें नव्या, अगस्तय, आराध्या और जया बच्चन नजर आए थे. वहीं ऐश्वर्या ने ये फोटो शेयर की थी तो उसमे उन्होंन सभी को क्रॉप कर दिया था सिर्फ आराध्या और अमिताभ उस फोटो में नजर आ रहे थे. फोटो में आराध्या बिग बी को हग करती नजर आ रही है.

डांडिया नाइट्स के लिए ट्राई करें लॉन्ग लास्टिंग मेकअप

डांडिया नाइट्स का क्रेज़ हर किसी को होता है जिस की  तैयारी में हम सब कई दिनों पहले से ही जुट जाते हैं कौन सी  ड्रेस हमें पहननी  है, उसकी मैचिंग ज्वेलरी, मेकअप केसा करना है,डांडिया स्टिक डेकोरेशन, जैसे सभी काम हम पहले से ही तय कर चुके होते हैं लेकिन फिर भी एक चिंता हमें सताती रहती हैं कि गरबा करते समय कहीं मेकअप खराब ना हो जाए. इसलिए आज हम आपके लिए लाएं हैं कुछ ऐसे टिप्स जो आपको लॉन्ग लस्टिंग मेकअप करने में मदद करेंगे. अच्छा मेकअप  सिर्फ अच्छे प्रोडक्ट को खरीदने से नहीं मिलता बल्कि जरूरी हैं उनका सही तरिके से प्रयोग करना. और सुन्दर दिखने के लिए जरूरी हैं आपके मेकअप का बेस बेहतर हो  क्योंकि जब तक नीव अच्छी नहीं होती घर को मजबूती नहीं मिलती इसी तरह यदि हमारे बेस अच्छा नहीं होगा तब तक हमारा ओवर आल मेकअप भी अच्छा नहीं होगा.

बेस मेकअप करने के लिए हमें कुछ जरूरी बातों का ख्याल रखना चाहिए, जिससे कि आप लॉन्ग लस्टिंग मेकअप व सबसे सुंदर लुक पा सकें. तो आइए जानते हैं कुछ ऐसे टिप्स के बारे में…

  1. प्रेप जरूर करें

जब भी आप तैयार हों तो अपनी स्किन को प्रेप करना ना भूले अक्सर महिलाएं जल्दबाज़ी में तैयार होती हैं और इस स्टेप को स्किप कर जाती हैं जब कि यह अच्छे बेस व लॉन्ग लस्टिंग मेकअप के लिए  बेहद जरूरी हैं स्किन प्रेप का अर्थ  है पहले स्किन को अच्छे से क्लीन करें जिसके लिए आप फेस वाश, क्लीनसिंग मिल्क की मदद लें सकती हैं मार्किट में आयूर, हिमालया, लोटस, लक्मे आदि  कम्पनी के ये सभी प्रोडक्ट आसानी से मिल जाते हैं आप किसी भी एक प्रोडक्ट से स्किन प्रेप कर सकती हैं.

2. प्राइमर स्किप न करें

प्राइमर बेस मेकअप का एक अहम हिस्सा होता है इसे करने से रोम छिद्र बंद हो जाते हैं,स्किन स्मूद होती हैं, एजिंग फैक्टर्स को कम करता  है,रेडनेस को छिपाता है. लेकिन  ज्यादातर महिलाएं प्राइमर को ही स्किप कर देती हैं. जिसके कारण उनका बेस मेकअप ज्यादा देर तक नहीं टिकता और मेकअप कुछ ही देर में भद्दा दिखने लगता है.

इसके लिए आप मार्किट से लोटस, लक्मे, एल ऐ गर्ल, मय्बेलेन के प्राइमर खरीद सकते हैं. इस्तेमाल के बाद फर्क आपको खुद दिखने लगेगा.

3.  ब्लॉटिंग पेपर का करें प्रयोग

यदि ओयली स्किन पर हम मेकअप करते हैं तो मेकअप जल्दी खराब होने लगता हैं इसलिए  एक्सेस ऑयल को कम करने के लिए ब्लॉटिंग पेपर का प्रयोग करें पेपर को चेहरे पर लगाएं और चेहरे के जिन हिस्सों पर पसीना ज्यादा आता है वहाँ अच्छे से प्रेस करें, ऐसा करने से अतिरिक्त ऑयल अपने आप पेपर सोख लेता है.

4.  टिप्स जो हमेशा याद रखें

  • जब भी आप मेकअप करें तो मेकअप के बाद ब्रशेस को सही तरीके से धोना न भूलें. क्योंकि गंदे ब्रशस से स्किन तो खराब होती ही है साथ में मेकअप बेस भी कुछ ही देर में फटा हुआ दिखने लगता है.
  • ज्यादा मेकअप की लायर्स ना लगाएं क्योंकि इससे मेकअप की तह बनने लगेंगी, जिससे  मेकअप में क्रैक आने लगते हैं.
  • अपनी मेकअप किट  शेयर करने से बचें.
  • एक्सपायरी डेट चेक कर के ही प्रोडक्ट का इस्तेमाल करें.

भूख न लगने और थकान होने का कारण और इलाज बताएं?

सवाल-

मेरी उम्र 47 वर्ष है. मेरी समस्या यह है कि मुझे बिलकुल भूख नहीं लगती. थकान बहुत होती है. कुछ भी करने की इच्छा नहीं होती है. बताएं मैं क्या करूं?

जवाब-

आप रोजाना आधे से 1 घंटा व्यायाम करें, अपनी मांसपेशियों पर काम करें और हो सके तो इस के लिए किसी जिम का सहारा लें. शरीर की सुबहशाम स्ट्रैचिंग करें. रोज 2 घंटे टहलें. धूप का सेवन करें, मल्टी विटामिन और प्रोटीन का सेवन करें, पानी या जूस अर्थात तरल पदार्थों का सेवन ज्यादा करें, कैफीन, शराब और तंबाकू का कम सेवन करें तथा पौष्टिक भोजन लें.

ये भी पढ़ें-

क्या आपको भी भूख नहीं लगती, अगर हां तो आप कुछ कुदरती नुस्खें अपनाकर अपनी भूख बढ़ा सकती हैं. मुनक्का के सेवन से आप अपनी भूख बढ़ा सकती हैं.

जानिए मुनक्का के सेवन के फायदे…

1. अगर आपको भूख कम लगती है तो रात को दूध में 30-40 मुनक्‍का को उबालकर नियमित रूप से पीएं भूख बढ़ जाएगी. इससे शरीर की कमजोरी भी दूर होगी.

2. कई बार कब्ज की वजह से भी भूख नहीं लगती है. कब्ज बहुत ज्यादा है तो मुनक्का के दूध के साथ ईसबघोल भी मिला लें. इससे कब्ज भी दूर होगी और पेट भी साफ रहेगा.

3. जिन लोगों को बार-बार घबराहट होती है और हृदय में दर्द होता है तो उनके लिए भी रामबाण है मुनक्का.

4. 8 से 10 मुनक्का को 2 लौंग के साथ पानी में उबालें. बाद में मुनक्का को पीसकर छानकर चाय की तरह पीएं. ये नुस्खा डायबिटीज के मरीजों के लिए भी अच्छा है.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz   सब्जेक्ट में लिखे…  गृहशोभा-व्यक्तिगत समस्याएं/ Personal Problem

Festival special: दिवाली पकवान खा कर भी रहें फिट

रोशनी और उल्लास से भरा दिवाली का त्यौहार भी नजदीक आ रहा है. एक ऐसा त्यौहार जिसमें मिठाईयों और नमकीन की भरमार होती है. जो कि सेहत के लिए हानिकारक साबित हो सकती है. लेकिन अगर आपने अपना और अपने परिवार का थोड़ा ध्यान रखा, तो ये रोशनी का त्यौहार आपके लिए काफी खुशियां ला सकता है. जानिए इस रोशनी के त्योहार में कैसे रखें अपनी सेहत को ठीक.

कम मात्रा में ले चीना और वसा

इस सीजन में में सबसे ज्यादा मिठाईयां खाते है. जिसे मार्केट में खरीदने पर भरपूर मात्रा में वसा और चीनी का इस्तेमाल होता है. इसलिए कोशिश करें कि मिठाईयां घर पर ही बनाएं. इसके साथ ही कम मात्रा में घी, तेल का इस्तेमाल करें. आप चाहें तो शुगर फ्री भी उपयोग कर सकते हैं या शहद का प्रयोग कर सकते हैं. अगर मीठी डिश में मिठाइयों की जगह फ्रूट्स लें. कोल्ड ड्रिंक्स के जगह पर नींबू पानी, नारियल पानी या अन्य फ्रूट्स जूस आदि नेचुरल ड्रिंक्स लें.

कम से कम खाएं

त्यौहारों के मौसम में हम खाने के मामले में सबसे आगे होते है. ये भी भूल जाते है कि इससे हमारी सेहत में बुरा प्रभाव पड़ता है. यहां तक कि हम अपनी डाइट चार्ट को यह कह कर भूल जाते हैं कि त्योहार एक-दो दिन का ही तो होता है. जिसके कारण हमारे शरीर में भरपूर मात्रा में कैलोरीज चली जाती हैं. दिवाली के मौके में हम भरपूर मात्रा में मिठाई, चॉकलेट और पकवान खाते हैं. जो कि वजन बढ़ने का एक कारण बन सकता है. इसलिए इस मौसम में खाना को नियंत्रित करके ही खाएं.

ज्यादा से ज्यादा लें प्रोटीन

इस मौसम में हम सबसे ज्यादा कैलोरी वाली चीजें खाते है. सभी डेयरी प्रोडक्ट में भरपूर मात्रा में कैलोरी होता है. इसलि इनकी जगह प्रोटीन वाली चीजें खाने की कोशिश करें. जैसे कि ड्राई फ्रूट्स में बादाम, अंजीर आदि. या फिर आप ब्राउन राइस, रागी, सूप के पैकेट आदि मिलाकर बना सकते है. यह आपकी सेहत के लिए एक गिफ्ट होगा.

यूरिया साफ करें

यूरिया शरीर के लिए विषाक्त होता है, तो शरीर में अतिरिक्त यूरिया होने से ऊर्जा का ह्रास होगा. और शरीर में ऊर्जा का निम्न स्तर, चीनी की लालसा को बढ़ाता है. तो इस त्यौहार के दौरान अधिक से अधिक पान पियें और अन्य पौष्टिक पेय जैसे, जूस नींबू पानी आदि पीते रहें.

अगर हो प्री-दिवाली पार्टी

अगर आपकी दिवाली की रात को बाहर पार्टी का प्लान है, तो थोड़ा सचेत रहें. घर से निकलने से पहले पौष्टिक सा आहार ले लें. इससे न सिर्फ आप अनावश्यक और हानिकारक खाद्य पदार्थ खाने से बचेंगे बल्कि, एल्कोहॉल के अतिरिक्त सेवन से भी बचेंगे.

न होने दें पानी की कमी

त्योहार के सीजन में काम अधिक होने जाने के कारण भागदौड़ करना पड़ता है. जिसके कारण हमारे शरीर में पानी की कमी हो जाती है. जिससे शरीर में एनर्जी और थकान सी महसूस होने लगती है. इसलिए काम के साथ-साथ समय निकाल पानी पीतें रहें.

करें छोटी प्लेट का इस्तेमाल

कई बार होता है कि हम बड़ी प्लेट लेकर खाना लगते है. जिसके कारण हम अधिक खाना खा लेते है. इसलिए जहां तक संभव हो तो छोटे बर्तनों का इस्तेमाल करें. साथ ही दुबारा खाना खाने से बचें.

एक्सरसाइज

भाग-दौड़ में हम अपनी रूटीन को भूल ही जाते हैं. इसलिए साथ में एक्सरसाइज जरूर करते रहें. नहीं तो आपको थकावट और अन्य समस्याएं हो सकती हैं.

वसीयत: भाग 1- भाई से वसीयत में अपना हक मांगने पर क्या हुआ वृंदा के साथ?

बचपन में मां कहा करती थीं कि बेटियों से डर नहीं लगता उन के साथ क्या होगा उस से डर लगता है. शायद ठीक ही कहती थीं. वृंदा को आज इस कहावत का अर्थ भलीभांति समझ आ गया है. मानो मां उस के भविष्य का लेखा पहचान गई थीं. इसीलिए यह कहावत दोहराती थीं. फिर 1 या 2 नहीं पूरी

3 बेटियां जो उतर आई थीं उन के आंगन में. इसीलिए मां को फिक्र होती कि कैसे होगी तीनों की परवरिश. पहले पढ़ाई फिर ब्याह? सब से छोटी मैं (वृंदा) थी.

मां को चिंतातुर देख पिताजी कहते, ‘‘क्यों बेकार में चिंता से गली जा रही हो. सब अपनीअपनी मेहनत ले कर आई हैं.’’

‘‘अजी, तुम्हें क्या पता जब मैं 4 औरतों के बीच बैठती हूं तो उन का पहला सवाल यही होता है कि कितने बच्चे हैं आप के? जब मैं कहती 4. 1 लड़का और 3 बेटियां तो सुनते ही सब के मुंह इस तरह खुले रह जाते मानो कोई अनचाहा जीव देख लिया हो. फिर उन की टिप्पणियां शुरू हो जातीं…

‘‘आज तो एक बच्चे को पालना ही कितना महंगा है उस पर 4-4 बच्चे. उन में भी 3 बेटियां, बहनजी कितनी टैंशन होती होगी न आप को…’’

‘‘उफ, तो यह टैंशन उन औरतों की हुई है तुम्हें… तुम बैठती ही क्यों हो ऐसी औरतों के बीच? अगर अब कुछ कहें तो कहना कि बहनजी हमारी बेटियां हैं. कैसे पालनी हैं हम देख लेंगे. आप टैंशन न लो.’’

पिताजी बड़े ही मजाकिया तरीके से मां को शांत कर देते. समय को देखते हुए शायद मां की चिंता भी जायज थी. दरअसल, कुल को रोशन करने वाला चिराग तो उन के घर में पहली बार में ही जल गया था, यह तो संयोग कहिए कि उस के बाद कृष्णा, मृदुला और फिर मैं एक के बाद एक

3 बेटियां आती चली गईं. पापा बिजली विभाग में अच्छे पद पर थे, इसलिए आर्थिक परेशानी न थी. मैं घर में सब से छोटी थी, इसलिए सब की लाडली थी. उसी लाड़प्यार ने मुझे कुछकुछ शरारती भी बना दिया था. किसी भी बात को ले कर जिद करना मैं अपना हक समझती. मेरी हर जिद पूरी भी कर दी जाती. यहां तक कि कभी दीदी और भैया की कोई चीज पसंद आती तो झट रोतेरोते मांपापा के पास पहुंच जाती कि मुझे वह दीदी वाला खिलौना चाहिए… वह भैया वाली कार दिलाओ न.

तब मां झंझट टालते हुए दीदीभैया से कहतीं, ‘‘अरे कृष्णा, मृदुला दे दो न बेटा… छोटी है यह. क्यों रुला रहा है अपनी छोटी बहन को… इतनी सी चीज नहीं दे सकता. कैसा भाई है…’’

पापा ने अपनी सामर्थ्य के अनुसार हम सभी को कौन्वैंट स्कूलों में पढ़ाया. अमृत की व्यवसाय में रुचि थी, इसलिए एमबीए कर के उन्होंने अपना बिजनैस जमा लिया. दोनों बहनों ने भी अच्छी शिक्षा पाई. फिर पापा ने तीनों का विवाह भी अपनी हैसियत के अनुसार अच्छा घर देख कर कर दिया. बीच शहर में लंबाचौड़ा मकान भी बन गया. दोनों बहनें अपनीअपनी ससुराल चली गईं. रह गए घर में मैं, मांपापा और भैयाभाभी. हम बहनें पापा के बहुत करीब थीं. अपने मन की हर बात उन से शेयर करतीं, इसलिए दोनों बेटियों के जाने पर पापा उन्हें बहुत मिस करते. वे कहते कि अब वृंदा का ब्याह आराम से करूंगा… घर में जब तक अमृत के बच्चे भी हो जाएंगे.

एक दिन अचानक हमारी खुशियों पर उस समय ग्रहण लग गया जब एक सड़क हादसे में पापा हमें छोड़ कर चले गए. उन के जाने का सब से अधिक खमियाजा मां के बाद मुझे ही भुगतना पड़ा. सब का घरसंसार बस चुका था. मगर मेरे सपने तो अभी कुंआरे ही थे. अब कौन इतने अरमानों से मुझे डोली में बैठा कर बिदा करेगा? वक्त कैसे पल में करवट बदलता है, यह मैं ने पापा के जाने पर देखा. घर की सब से लाडली बेटी देखते ही देखते बोझ लगने लगी. शायद इसी को चक्रव्यूह कहते हैं. घर में सभी को मेरे ब्याह की चिंता सताने लगी.

चूंकि सारी व्यवस्था पापा ने पहले ही कर रखी थी, इसलिए आर्थिक रूप से कोई परेशानी न सही, मगर कुछ अरमान थे, जिन्हें दौलत के तराजु में नहीं तोला जा सकता. खैर, यहीं आ कर मानसिकता का रहस्य खुलता है कि हम न चाहते हुए भी घटनाओं का उलझना देखते रहते हैं, अनजान दिशा में बढ़ते चले जाते हैं.

व्यापार के सिलसिले में भैया का यहांवहां, आनाजाना लगा रहता था. वहीं उन की मुलाकात वरुण से हुई. भैया को वरुण होनहार, सज्जन और लायक लगे. उन के परिवार में मां के अलावा और कोई न था. इस से अच्छा रिश्ता कोई हो ही नहीं सकता… छोटा परिवार अपने में स्टैबलिश. हर मांबाप ऐसे रिश्ते को झपट कर हथिया लेते हैं. मां ने भी फौरन हां कर दी. मेरी जिम्मेदारी से मुक्ति पा कर मां तो मानो गंगाजी नहा गईं.

वरुण का अपना व्यापार था. उन के भी पिता नहीं थे. परिवार के इकलौते बेटे. मां और वे. कुल मिला कर हम 3 प्राणी थे. किसी प्रकार की कोई परेशानी न थी. अपनी मेहनत और लगन से वरुण ने व्यापार भी अच्छाखासा जमा लिया था. कालीन पर चलतेचलते सफर का अंदाजा ही नहीं हुआ कब 2 साल बीत गए. अब तो प्रियांश भी गोद में आ गया था.

मगर वक्त हर जख्म पर मरहम लगा देता है. पापा की स्मृतियां धीरेधीरे धूमिल होती जा रही थीं. वरुण के प्यार और प्रियांश की परवरिश में मैं ने खुद को पूरी तरह रमा दिया था. सब कुछ ठीक चल रहा था कि कुछ दिनों से वरुण पैरों में दर्द रहने की शिकायत करने लगे.

शुरू में सोचा काम की थकान की वजह से हो रहा होगा. वरुण ने घर बनाने के लिए बैंक से लोन ले रखा था. बस उस की पूर्ति के लिए रातदिन मेहनत करते. कुछ घरेलू उपचार किए, मालिश कराई, मगर दर्द था कि मिटने का नाम ही न लेता. वरुण दिनबदिन कमजोर होते जा रहे थे. न खाने में, न ही सोने में उन की रुचि रही. सारी रात पैरों की पीड़ा से कराहते.

सच, देखी नहीं जाती थी उन की यह तकलीफ. इन 4 महीनों में तोड़ कर रख दिया था इस दर्द ने उन्हें. वजन तेजी से घट रहा था. सिर के बाल तेजी से सफेद होने लगे. नींद पूरी न होने से चिड़चिड़े से हो गए थे. इन 4 महीनों के दर्द ने उन्हें 40 साल का सा लुक दे दिया था.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें