लड़की है कठपुतली नहीं

क्रौप टौप काफी ट्रेंड में है. यह पहनने पर कूल फीलिंग देते हैं. इतना ही नहीं ये सैक्सी भी लगते हैं. लेकिन कई घरों में लड़कियों के क्रौप टौप पहनने पर पाबंदी होती है. जो लोग क्रौप टौप पहनने के विरोध में हैं, उन का कहना है क्रौप टौप अश्लीलता को बढ़ावा देता है. इस में कमर दिखती है. क्रौप टौप बनाने वाली कंपनियां अपनी बिक्री के लिए लड़कियों को बिगाड़ रही हैं.

क्रौप टौप अश्लीलता को बढ़ावा नहीं देते. इस विषय पर जाग्रति राय अपना एक ऐक्सपीरियंस शेयर करते हुए कहती हैं, ‘‘मैं 20 साल की हूं. एक दिन मैं क्रौप टौप और जींस पहन सोफे पर बैठ कर टीवी देख रही थी. तभी मेरे पापा आए और गुस्से में मुझ से बोले कि जाग्रति यह तुम ने किस तरह के कपड़े पहने हुए हैं? जाओ जा कर कपड़े बदलो. क्या तुम्हें कपड़े पहनने की जरा भी अकल नहीं है? अब तुम बड़ी हो गई हो. लगता है बाहर जा कर तुम ज्यादा ही बिगड़ गई हो. मुझे तुम्हारा बाहर जाना बंद करना पड़ेगा. तभी तुम्हें अकल आएगी. पापा को इतने गुस्से में देख कर मैं डर गई. मैं ने कपड़े तो बदल लिए लेकिन मैं अपने कमरे से बाहर नहीं आई.’’

जाग्रति के पापा सुरेंद्र राय का उस पर गुस्सा करने का कारण था जाग्रति का क्रौप टौप पहनना. वे लड़कियों के छोटे कपड़े पहनने के सख्त खिलाफ हैं.

कपड़े पहने पर बेशर्मी क्यों

क्या मौडर्न कपड़े पहनना बेशर्मी की निशानी है? इस पर जाग्रति कहती हैं, ‘‘क्रौप टौप पहनना बेशर्मी नहीं है. यह बिलकुल ब्लाउज की तरह होता है. बस फर्क यह है कि ब्लाउज साड़ी के साथ पहना जाता है और क्रौप टौप जींस, स्कर्ट, शौर्ट्स, प्लाजो के साथ पहना जाता है.’’

लड़कियों की घरों में बेइज्जती किस तरह से होती है, इस का एक उदाहरण दीपिका रावत देती हैं. गाजियाबाद की रहने वाली दीपिका बताती हैं, ‘‘जब भी वह कभी सुबह लेट सो कर उठती थी तो मम्मी कहती थीं कि ससुराल में भी ऐसे ही देर से उठोगी तो 2 दिन में सास मायके छोड़ जाएगी. मैं अकेली ऐसी लड़की नहीं हूं जिस ने यह सब सुना है. हमारे देश की लगभग हर लड़की ने अपने घर में यह सब कभी न कभी सुना ही होगा. देर से उठने का नियम क्या सिर्फ लड़कियों पर लागू होता है? लड़कों को इस से बाहर क्यों रखा गया है? क्या उन का देर से उठना इस सोसाइटी को मंजूर है? इस तरह के दकियानूसी चोंचले सिर्फ लड़कियों के लिए बनाए गए हैं क्योंकि वे कभी नहीं चाहते कि लड़कियां उन के हाथों से फिसलें. वे लड़कियों को अपनी मुट्ठी में कैद रखना चाहते हैं.’’

वैसे तो इस सोसाइटी ने लड़कियों के लिए न जाने कितने नियम बनाए हुए हैं. इन्हीं में से एक नियम है लड़कियों का पैर फैला कर बैठना. यह सोसाइटी लड़कियों के पैर फैला कर बैठने की आदत को गलत नजर से देखती है. अगर कोई लड़की पैर फैला कर बैठती है तो इसे सैक्स सिंबल भी समझ लिया जाता है. जो लोग लड़कियों के पैर फैला कर बैठने को गलत कहते हैं उन का मानना है कि ऐेसी लड़कियां अच्छे घर की नहीं होतीं. इन में संस्कारों की कमी होती है. लड़कियां ऐसी हरकत कर के लड़कों को अट्रैक्ट करना चाहती हैं.

संस्कार या बंदिशें

लड़कियों के पैर फैला कर बैठने के तरीके को ले कर 25 साल की सुरभि यादव अपने बचपन का एक ऐक्सपीरियंस बताते हुए कहती हैं, ‘‘मैं जब 16 साल की थी तब अपने मम्मीपापा के साथ एक पार्टी में गई थी. वहां मैं कंफर्टेबली पैर फैला कर अपने दोस्तों के साथ खाना ऐंजौय कर रही थी. तभी पापा ने मुझे आंखें दिखाते हुए अपने पास आने का इशारा किया.

‘‘जब मैं उन के पास गई तो वे मेरा हाथ पकड़ कर साइड में ले गए. उन्होंने गुस्से भरी नजरों से मुझे देखा और कहा कि तुम्हें ढंग से बैठना नहीं आता क्या जो पैर फैला कर बेशर्मों की तरह बैठी हो? देख नहीं रही हो कि लोग तुम्हें किस तरह से घूर रहे हैं? जाओ जा कर ठीक से बैठो. पापा की इन बातों को सुन कर मैं हैरान हो गई. लेकिन मेरे पास कोई जवाब नहीं था इसलिए मैं चुपचाप जा कर पैरों को क्रौस कर के बैठ गई.

‘‘इस सोसाइटी ने लड़कियों के शोषण के लिए तरहतरह के नियम बनाए हुए हैं. यह सोसाइटी बस उन्हें किसी भी तरह कंट्रोल करना चाहती है. इस के लिए वह समयसमय पर उन्हें टोकती है, रोकती है और न जाने किसकिस तरह की पाबंदियां उन पर लगाई जाती हैं. फैमिली द्वारा बारबार उन्हें नीचा दिखाना? उन्हें गलत समझना, उन की बेइज्जती करना लड़कियों के मन में परिवार वालों के लिए गुस्सा और नफरत पैदा कर देता है. ऐसी लड़कियां चिड़चिड़ी हो जाती हैं. उन्हें बातबात पर गुस्सा आने लगता है. ऐसी लड़कियां अपने मम्मीपापा के बूढ़े होने पर उन से दूरी बना लेती हैं. वे उन से मिलती भी नहीं हैं क्योंकि उन के अंदर बेइज्जती की कड़वी यादें बसी होती हैं. मैं समझती हूं कि अगर आप को इज्जत चाहिए तो आप को इज्जत देनी भी पड़ेगी.’’

इशारों की गुलाम नहीं

लड़कियों की बेइज्जती में सोसाइटी का बहुत बड़ी भूमिका है. इस सोसाइटी ने लड़कियों को कठपुतली समझ रखा है, जिस की बागडोर उन्होंने पुरुषों के हाथों में दी हुई है. वे जैसे मरजी चाहें वैसे इसे घुमा सकते हैं. तभी तो उन के हंसने को ले कर भी उन्हें कड़े नियमकायदे बताए गए हैं. ज्यादा जोर से नहीं हंसना, ज्यादा खिलखिला कर नहीं हंसना, इस तरह से हंसना है, इस तरह से नहीं वगैरहवगैरह.

हर लड़की को उस की लाइफ में उस के परिवार वालों ने कभी न कभी जरूर टोका होगा. कभी तो उसे धीरे हंसने के लिए कहा ही होगा. उन्हें ऐसा करने के लिए इस सोसाइटी ने पढ़ायालिखाया है ताकि उन्हें अपने काबू में रख सकें.

35 साल की रिचा कुमारी एक मैरिड वूमन हैं. वे पेशे से ग्राफिक डिजाइनर हैं. वे बताती हैं कि कुछ महीने पहले उन के फ्रैंड्स गैटटूगैदर करने उन के ससुराल में आए थे. जब उन की फ्रैंड यामिनी ने जोक सुनाया तो वे जोरजोर से हंसने लगीं. उन के हंसने की आवाज हौल में बैठे उन के सासससुर तक भी गई. जब दूसरी बार ऐसा फिर से हुआ तो उन की सास ने उसे सब के सामने टोकते हुए कहा कि तुम्हें इस तरह से नहीं हंसना चाहिए. महिलाओं का इस तरह से हंसना सभ्य नहीं माना जाता है. तुम थोड़ा आराम से हंसो. 5 साल बाद भी वे यह वाकेआ नहीं भूली हैं.

यह कैसी सोच

लड़कियों की बेइज्जती न सिर्फ घर में होती है बल्कि यह बीच सड़क पर भी होती है. उन की यह बेइज्जती कोई बाहर वाला नहीं करता वरन अपनी फैमिली के मैंबर द्वारा की जाती है. रिचा कहती है कि लड़कियां अगर अपने लिए स्टैंड लें तो किसी की मजाल नहीं कि वह उन के बारे में कुछ उलटा बोल सके.’’

प्रीति वर्मा 18 साल की है. वह अपने मम्मीपापा की इकलौती संतान है. एक दिन जब प्रीति अपने फ्रैंड निखिल अरोड़ा के साथ हाथ पकड़ कर रोड पार कर रही थी तभी रोड की दूसरी साइड कार से आते उस के पापा सचिन वर्मा ने उन्हें देख लिया. उन्होंने कार को साइड में लगा कर रोड क्रौस किया और प्रीति के पास आ कर उस का हाथ ?ाटकते हुए उसे निखिल से दूर किया. इस के बाद उन्होंने प्रीति को सचिन के सामने ही थप्पड़ मार दिया. फिर उन्होंने प्रीति को कार में बैठाया और सीधे घर ले कर आ गए.

सचिन ने घर आते ही प्रीति को सुनाते हुए कहा, ‘‘हमारे भरोसे का तुम यह सिला दे रही हो? बाहर जाते ही तुम अपने संस्कार भूल गई. इस तरह सड़क पर लड़के के हाथों में हाथ डाल कर चलना हमारे संस्कार में नहीं है. इस तरह से तुम हमारी नाक कटा रही हो. अगर दोबारा मैं ने इस तरह का कुछ भी सुना तो तुम्हारा बाहर जाना बंद हो जाएगा.’’

रिश्तों में दरार डालती हैं गलतफहमियां कई बार गलतफहमी रिश्तों में दरार लाने का कारण बन जाती है. ऐसा ही सचिन वर्मा और प्रीति के साथ भी हुआ. लेकिन प्रीति अपने दोस्त के सामने अपनी बेइज्जती को नहीं भूली. इसलिए अब वह एक शहर में होते हुए भी जल्दी अपने घर नहीं जाती है.

ऐसा ही एक वाकेआ अदा शर्मा के साथ भी हुआ था. 30 साल के महेंद्र शर्मा ने जब अपनी 23 साल की बहन अदा शर्मा को एक कैफे में लड़के के साथ कौफी पीते देखा तो वह उस पर भड़क गया. उस ने न आव देखा न ताव सीधा अदा को और उस के फ्रैंड को थप्पड़ मार दिए. महेंद्र शर्मा का ऐसा करना उस की रूढि़वादी सोच को दिखाता है. उस ने यह जानने की कोशिश नहीं की कि वह लड़का कौन है. वह अदा का बौयफ्रैंड है या बस फ्रैंड. बिना सच जाने, बिना सोचेसमझे उस का ऐसा करना अदा के लिए शर्मींदगी का कारण बन गया.

इस घटना के बाद अदा के जितने भी मेल फ्रैंड थे सब ने उस से दूरी बना ली. वे उस के साथ चलने से डरने लगे. उन्हें डर लगने लगा कि न जाने कब उस का भाई या पापा आ जाए और उन्हें बिना किसी बात के मारने लगे.

अदा कहती है, ‘‘मेरे भाई की इस हरकत ने मेरे दोस्तों को मु?ा से दूर कर दिया. हमारी सोसाइटी में लड़कियों को ऐसी सिचुएशन से कई बार गुजरना पड़ता है, जबकि इस में उन की कोई गलती भी नहीं होती सिवा उन के लड़की होने की.’’

कई बार लड़कियों की बेइज्जती अपने ही घर में इतनी बढ़ जाती है कि उस की अपनी फैमिली उस के कैरेक्टर पर सवाल उठाने लग जाती है. ऐसा अकसर कम पढ़ेलिखे और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के घर में होता है. ऐसा ही एक घर मोली गौड़ा का है.

मौली गौड़ा 24 साल की है. वह मुंबई की घनी आबादी वाली एक चाल में रहती है. आएदिन उस के घर उस के छोटे भाई जयंत गौड़ा की फीमेल फ्रैंड आती रहती थी. लेकिन जब मोली का दोस्त पंकज कंपा घर आया तो उस के पापा मुकेश मौली पर बरस पड़े. वे चिल्लाते हुए बोले, ‘‘यह मेरा घर है या कोई कोठा जो मुंह उठा कर कोई भी आ जाता है? तुम ने मेरे घर को क्या कोठा सम?ा लिया है जो जब चाहा किसी को भी ले आती हो? कभी कोई दोस्त. तुम्हारा कोई कैरेक्टर है या नहीं या तुम्हारा एक लड़के से मन नहीं भरता. जो आए दिन कोई न कोई यहां आता ही रहता है?’’

इतना सुनते ही मौली रोते हुए कमरे में चली गई. यह सब सुन कर उस का दोस्त भी वहां से चला गया. इस घटना के बाद वह फिर कभी मौली के घर नहीं आया.

पहले घर में इज्जत जरूरी इस तरह की बातें गरीब तबके के लोगों के लिए आम हो गई हैं. ज्यादा पढ़ेलिखे न होने के कारण वे इस तरह के शब्दों का यूज करते हैं. लेकिन इस बात को अनदेखा नहीं किया जा सकता कि आखिर वह किसी लड़की या महिला के लिए  ऐसा कैसे कह सकते हैं जो महिलाओं के चरित्र का हनन करती है. लेकिन फिर भी धड़ल्ले से महिलाओं के लिए अपशब्दों का यूज किया जाता है.

जो लोग अपने घर में लड़कियों और महिलाओं की बेइज्जती करते हैं वे यह नहीं समझ पाते कि ऐसा कर के वे अपने लिए ही गड्ढा खोद रहे हैं क्योंकि बेइज्जती या अपमान सहने वाली लड़कियां दोबारा उस घर में पैर नहीं रखना चाहती हैं. फिर चाहे उन के घर वाले उन्हें लाख बुलाएं.

ऐसे में जिस कपल ने अपनी इकलौती बेटी की बेइज्जती की होती वे अपनी बेटी को देखने के लिए तरस जाते हैं क्योंकि वह उन्हें देखना तक नहीं चाहती. बेइज्जती सहने वाली कुछ लड़कियां अगर अपने घर जाती भी हैं तो सीधे मुंह किसी से बात नहीं करती हैं. अगर उन के इस व्यवहार को खत्म करना है तो उन्हें अपने घर की लड़कियों और औरतों का मानसम्मान करना होगा, उन से इज्जत से बात करनी होगी.

पनीर से बनाइये ये मीठी नमकीन डिश

किसी भी खास अवसर पर जब खास भोजन बनाया जाता है तो मेन्यू में पनीर से बनी डिश अवश्य शामिल होती है. पनीर जिसे दूध से फाड़कर बनाया जाता है भारतीय भोजन में विशेष स्थान रखता है. बच्चे बडों सभी का फेवरिट पनीर केल्शियम, प्रोटीन, और विटामिन्स से भरपूर होता है. यह एक ऐसा खाद्य पदार्थ है जिससे विविध मिठाईयां, परांठे, सब्जियां और पुलाव आदि बनाया जाता है. आज हम आपको पनीर से बनने वाली 2 रेसिपीज बनाना बता रहे हैं जो आप किसी ही अवसर पर बड़ी आसानी से बना सकतीं हैं इन्हें घर में उपलब्ध सामग्री से बड़ी आसानी से बनाया जा सकता है तो आइए देखते हैं कि इन्हें कैसे बनाया जाता है-

  1. केरेमल पनीर बाइट

कितने लोगों के लिए  – 6

बनने में लगने वाला समय  –  20 मिनट

मील टाइप –  वेज

सामग्री

  1.  1 कटोरी किसा पनीर                         
  2. 1 कटोरी मिल्क पाउडर                         
  3. 1 कटोरी किसा गुड़                           
  4. 1/2 कटोरी मिल्क पाउडर                         
  5. 1 टेबल स्पून घी                               
  6. पिस्ता कतरन सजाने के लिए                         
  7. 1/4 टी स्पून इलायची पाउडर     

विधि

पनीर और मिल्क पाउडर को एक साथ अच्छी तरह मिक्स कर लें ताकि पनीर के रेशे खत्म हो जाएं. अब गरम घी में गुड़ डालकर धीमी आंच पर पिघलाएं जब गुड़ पिघल जाए तो इलायची पाउडर, पनीर और मिल्क पाउडर का मिश्रण डालें. लगातार चलाते हुए धीमी आंच पर मिश्रण के पैन के किनारे छोड़ने तक पकाएं. जब मिश्रण गाढा होकर पैन के बीच में इकट्ठा होने लगे तो तैयार मिश्रण को चिकनाई लगी एक चौकोर ट्रे में जमा दें. उपर से पिस्ता कतरन डालकर एक कटोरी से हल्का सा दबा दें ताकि पिस्ता बर्फी में अच्छी तरह चिपक जाएं. ठंडा होने पर 1-1 इंच के क्यूब्स में काटकर सिल्वर फॉयल या चोकलेट पेपर में लपेटकर फ्रिज में रखें. आप फ्रिज में इन्हें 15 दिन तक स्टोर कर सकतीं हैं.

2. पिज्जा पनीर रैप

कितने लोगों के लिए  – 6

बनने में लगने वाला समय –  30 मिनट

मील टाइप  –    वेज

सामग्री

  1. 1 कप मैदा                             
  2. 100 ग्राम पनीर                           
  3. 50 ग्राम शिमला मिर्च                   
  4. 1 बारीक कटा प्याज             
  5. 1/4 टी स्पून लाल मिर्च पाउडर               
  6. 1/2 टी स्पून अमचूर पाउडर                   
  7. 1/4 टी स्पून जीरा                           
  8. 1/4  टी स्पून चाट मसाला                     
  9. 1 टी स्पून तेल                         
  10. 2 टेबलस्पून पिज्जा सॉस                     
  11. 1 टीस्पून पिज्जा सीजनिंग   

विधि

मैदा को पानी की सहायता से कड़ा गूंथ लें. छोटी छोटी लोई लेकर तवे पर हल्का सा सेंककर  रोटी बना लें. पनीर और शिमला मिर्च को बारीक बारीक काट लें. गरम तेल में जीरा और प्याज भूनकर पनीर, शिमला मिर्च और नमक डालकर 5 मिनट तक खोलकर ही पकाएं. जब पानी सूख जाए तो लाल मिर्च, अमचूर पाउडर, पिज्जा सीजनिंग और चाट मसाला मिलाकर फिलिंग तैयार करें. अब तैयार रोटी पर पिज्जा सॉस लगाकर 2 चम्मच पनीर की फिलिंग  फैलाएं. इसे साईड से फोल्ड करते हुए रैप तैयार करें. रैप के उपर ब्रश से तेल लगाएं और अवन में 250 डिग्री पर 10 मिनट तक बेक करें. अवन न होने पर नानस्टिक तवे पर चिकनाई लगाकर धीमी आंच पर दोनों तरफ सेंकें. बीच से काटकर टोमेटो सॉस के साथ सर्व करें.

गठबंधन: भाग 3- क्यों छिन गया कावेरी से ससुराल का प्यार

कावेरी ससुराल पहुंचने ही वाली थी कि उसे नमन का भेजा हुआ रिपोर्ट का फोटो मिल गया. जब कावेरी ने फोटो डाउनलोड कर देखा तो उसे अपनी आंखों पर विश्वास ही नहीं हुआ. रिपोर्ट बता रही थी कि वह गर्भवती है. कावेरी का मन बल्लियों उछलने लगा. वह जल्द ही उदित से मिल कर यह सुखद समाचार उसे सुनाना चाहती थी.

उत्साह से भरी कावेरी दौड़ती हुई उदित के पास जा पहुंची. उदित से आंखें बंद करने को कह कर उस ने पर्स से मोबाइल निकाला और रिपोर्ट का फोटो उदित के सामने कर दिया.

उदित ने आंखें खोलीं तो नजरें मोबाइल स्क्रीन पर ठहर गईं. रिपोर्ट में ‘प्रैगनैंसीपौजिटिव’ देखते ही उस के चेहरे का रंग उड़ गया. माथे पर त्योरियां चढ़ाते हुए बोला, ‘‘क्या मजाक है यह?’’

‘‘मजाक नहीं, यह सच है उदित,’’ कावेरी खुशी से चहक उठी.

‘‘लेकिन यह कैसे हो सकता है?’’ उदित आशंका से घिरा था.

‘‘हो गया बस, कैसे? यह तो मु झे भी नहीं पता,’’ अदा से कंधे उचकाती हुई कावेरी उदित से लिपट गई.

कावेरी को अपने से अलग कर उदित आक्रोशित हो लगभग चीख उठा, ‘‘ऐसा नहीं हो सकता… कभी नहीं. हुआ तो हुआ कैसे?’’

‘‘क्या हो गया है आप को?’’ इस बार कावेरी तुनक कर बोली, ‘‘यह क्या अनापशनाप बोले जा रहे हैं आप इतनी देर से? मैं ने तो सोचा था कि आप यह खुशखबरी सुन खुशी से  झूम उठेंगे. लेकिन…’’

‘‘कैसी खुशखबरी? कैसी खुशी? सुन लो तुम आज कि… मैं पिता नहीं बन सकता,’’ उत्तेजना और क्रोध में उदित के मुंह से सच निकल गया.

कावेरी सिर पकड़ कर बैठ गई. उसे लग रहा था कि वह चक्कर खा कर गिर जाएगी.

अपनी रोबीली आवाज में उदित फिर चिल्लाया, ‘‘क्या मैं जान सकता हूं कि यह बच्चा किस का है? शायद उस नमन का ही, जिस ने तुम्हें यह रिपोर्ट भेजी है.’’

कावेरी यह सहन न कर सकी. तैश में आ कर बोली, ‘‘अब सम झी कि आप ने मु झे हमारे टैस्ट की रिपोर्ट्स क्यों नहीं दिखाई थीं. क्यों नहीं जाना चाहते थे डाक्टर के पास. कितना बड़ा धोखा…’’

बौखलाया सा उदित कुछ बोलने की स्थिति में नहीं था. बेचैन हो कर वह कमरे में इधरउधर चक्कर लगाने लगा. असमंजस में पड़ी कावेरी भी आंखों पर हाथ रख बैड पर लेट गई.

कुछ देर बाद कमरे की चुप्पी कावेरी का मोबाइल बजने से टूट गई. कौल नमन का था, ‘‘उखड़ी सी आवाज में हैलो बोल मोबाइल पर बात करते हुए वह कमरे से सटी बालकनी में जा खड़ी हुई.’’

नमन बोला, ‘‘उदित का सिडनी टूर कैसा रहा? तुम्हारी तबीयत कैसी है अब? वैसे मैं ने एक जरूरी बात बताने के लिए किया है फोन. अरे, मैं ने जिस रिपोर्ट का फोटो भेजा था वह तुम्हारी नहीं है. पहले किसी और कावेरी की रिपोर्ट दे दी थी मु झे उन लोगों ने. कुछ देर पहले क्लीनिक से फोन आया तो मैं दोबारा जा कर सही वाली रिपोर्ट लाया हूं. अभी व्हाट्सऐप पर तुम्हारी असली रिपोर्ट भेज रहा हूं. कोई बड़ी बीमारी नहीं बस थोड़ा इन्फैक्शन हो गया था.

‘‘ओह, मैं भी कुछ सम झ नहीं पा रही थी कि आखिर यह हुआ क्या? हां, लेकिन उस गलत रिपोर्ट ने उदित को बेनकाब कर दिया है,’’ कहते हुए कावेरी ने पूरी घटना संक्षेप में बता दी.

अब उदित को बता दो रिपोर्ट का सच, ‘‘सब ठीक हो जाएगा,’’ कह कर नमन ने फोन काट दिया और असली रिपोर्ट कावेरी को भेज दी.

फोन पर कावेरी की हताशा में डूबी आवाज सुनने के बाद नमन चिंतित था, लेकिन उसे इस बात की प्रसन्नता भी थी कि उदित को ले कर उस का अनुमान सही निकला और एक छोटी सी युक्ति लगा कर उस  झूठ से परदा उठाने में वह सफल भी हो गया.

हुआ यों कि शाम को जब नमन कावेरी की रिपोर्ट लेने पहुंचा तो जो रिपोर्ट उसे  मिली उस पर ‘प्रैगनैंसी पौजिटिव’ देख कर वह चौंक गया. फिर रिपोर्ट पर मोबाइल नंबर व घर का पता देखा तो वह कावेरी का नहीं था. नमन सम झ गया कि यह रिपोर्ट किसी और कावेरी की है.

इस से पहले कि वह काउंटर पर जा कर सही रिपोर्ट लेता, उस ने अपने मोबाइल से उस रिपोर्ट की एक फोटो इस तरह खींच कर रख लिया, जिस में एड्रैस और मोबाइल नंबर दिखाई न दे. इस के बाद नमन ने कावेरी की असली रिपोर्ट ले कर अपने पास रख ली. रिपोर्ट नौर्मल थी, इसलिए उसे कावेरी तक पहुंचाने की जल्दी भी महसूस नहीं हुई नमन को.

गलत रिपोर्ट वाला फोटो कावेरी को भेजने के कुछ देर बाद भेजी नमन ने असली रिपोर्ट ताकि कावेरी उदित को गलत रिपोर्ट दिखा सके और इस बारे में कावेरी और उदित की बातचीत भी हो पाए. गलत रिपोर्ट देखने के बाद उदित की प्रतिक्रिया द्वारा सच झूठ की तह तक पहुंचना चाहता था नमन.

सही रिपोर्ट भेजने के बाद नमन आशा कर रहा था कि उदित अब शर्मिंदा हो कर सच छिपाने के लिए कावेरी से क्षमा मांग लेगा और दोनों का वैवाहिक जीवन एक सुखद मोड़ ले लेगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं.

उदित को जब कावेरी ने बताया कि प्रैगनैंसी वाली रिपोर्ट गलत थी तो निर्लज्जता और दोगुने वेग से वह कावेरी पर चिल्ला उठा, ‘‘तो अब अपने दोस्तों के साथ मिल कर मेरा मजाक भी उड़ाना शुरू कर दिया तुम ने. न जाने क्या सम झती हो अपनेआप को… सिडनी में ही खुश था मैं. सोच रहा हूं सब छोड़छाड़ कर वहीं चला जाऊं.’’

कावेरी का मन वितृष्णा से भर उठा. मन के चूरचूर होने की पीड़ा मुख पर साफ  झलक रही थी. मन किया कि जोर से चीख उठे. मुंह से जैसे बोल अपनेआप ही निकल पड़े, ‘‘अपने किए पर शर्मिंदा होने की जगह आप मु झे, मेरे दोस्तों पर कीचड़ उछाल रहे हैं? अब तक आप के व्यवहार को मैं आप का स्वभाव सम झ सहन करती आ रही थी, लेकिन आप तो पहले दिन से ही मु झे नीचा दिखाने के मौके तलाश रहे थे.

‘‘क्या हो गया अगर पतिपत्नी में से कोई भी संतान को जन्म देने में असमर्थ है? वह आप भी हो सकते थे या मैं भी. रिश्तों का घटाजोड़ नहीं जानती मैं, लेकिन इतना सम झती हूं कि प्यार दिमाग से नहीं दिल से होता है. पतिपत्नी का रिश्ता प्रेम पर टिका होता है… दिमाग का खेल नहीं चलता यहां. आप क्या छोड़ेंगे मु झे? मैं आज ही, अभी पतिपत्नी के नाम पर कलंक बन चुके इस रिश्ते से अपने को अलग करती हूं.’’

उदित हक्काबक्का सा देखता रह गया और बैग लिए कावेरी उलटे पांव मायके लौट आई.

सुधांशु भी क्या कहते सब जानने के बाद? कुछ दिनों की जद्दोजहद के बाद तलाक हो गया.

अपनी योग्यता के बल पर स्कूल में टीचर बन कावेरी पूरी हिम्मत से स्वयं को  संभाले थी, लेकिन मन में कहीं न कहीं एक रिक्तता निरंतर अनुभव कर रही थी. धीरेधीरे उस के वजूद पर छा रही वह उदासी उस की उमंगों और खुशियों को लील ही जाती यदि उस दिन नमन अपना दिल उस के सामने खोल न देता.

‘‘कावेरी, तुम्हें कभी कहने का साहस न जुटा सका. हमेशा एक जुड़ाव सा महसूस होता रहा है तुम संग. कुछ कहना भी चाहा कभी तो अपाहिज पांव ने जैसे मेरी सारी हिम्मत छीन ली. तुम्हारी शादी हुई तो सब्र कर लिया और हमेशा तुम्हें खुश देखना चाहा.

‘‘अब भी तुम्हें उदास देखता हूं तो लगता है कहीं से खुशियों की गठरी बांध लाऊं और सब तुम पर निछावर कर दूं,’’ नमन बोला.

‘‘अपाहिज? क्या कह रहे हो नमन? अपाहिज तो उदित था जिस की सोच ही पंगु थी. काश, तुम ने कुछ साल पहले ही बता दी होती मु झे अपने मन की बात,’’ कावेरी का गला रुंध गया.

‘‘तो अब भी क्या बिगड़ा है? कावेरी, क्या तुम मेरी जीवनसंगिनी बन कर खुश रह सकोगी?’’

कावेरी की आंखें ही नहीं मन भी भीग गया. लगा जैसे नमन ने चाहत के दुपट्टे में सम्मान का सिक्का, उमंग सी हलदी, दूर्वा जैसी खुशी, चावल के दानों सा विश्वास तथा आशा के पुष्प रख कस कर गांठ लगा दी हो और उसे कावेरी की कोमल भावनाओं की चूनर से बांध दिया हो.

‘‘गठबंधन तो आज हो गया हमारा,’’ कह कर कावेरी नमन के गले लग गई.

हमेशा हाथों को मुलायम बनाए रखने के खास टिप्स बताएं?

सवाल

मेरे हाथों की स्किन बेजान और ड्राई दिखने लगी है. हमेशा हाथों को मुलायम बनाए रखने के खास टिप्स बताएं?

जवाब

हाथों को सुंदर बनाए रखने के लिए स्क्रब करना बेहद जरूरी होता है. हाथों को स्क्रब करने से त्वचा से मृत कोशिकाएं हट जाती हैं और हाथ सुंदर दिखने लगते हैं. इस के बाद हाथों पर मौइश्चराइजर लगाना जरूरी होता है. इस से त्वचा पर मौइस्चर बना रहता है.

हाथों के लिए स्क्रब बनाने के लिए 1 मुट्ठी बादाम पीस कर पाउडर बना लें. उस में आधा चम्मच शहद डाल कर पेस्ट बना लें. इस पेस्ट से हाथों को  स्क्रब करें. चीनी, नमक और नारियल तेल से बना स्क्रब भी यूज कर सकती हैं.

इस स्क्रब को बनाने के लिए 1 चम्मच नारियल तेल और 1 चम्मच शहद को अच्छी तरह मिला लें. अब इस में एकचौथाई कप नमक और चीनी मिलाएं. अब इस में थोड़ा सा नीबू का रस मिला कर 30 सैकंड तक ब्लैंड करें. इस से हाथों पर स्क्रब करने से मृत कोशिकाएं हट जाती है.

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लौकडाउन के दौरान घर का काम करते हुए हाथों और पैरों का इस्तेमाल सब से ज्यादा होता है. आजकल हमें ऐसे कई तरह के काम करने पड़ रहे हैं जो हाथों की त्वचा को सीधा नुकसान पहुंचाते हैं. जैसे कपड़े धोते समय तरहतरह के डिटर्जेंट का उपयोग करना पड़ता है. उन में केमिकल्स कंपोनेंट काफी हाई होता है. यही नहीं कपड़े धोते समय कभी गर्म तो कभी ठंडे पानी का इस्तेमाल होता है. यह सब हमारे हाथों के लिए काफी परेशानी पैदा करते हैं. त्वचा पर रैशेज या फिर इरिटेशन हो जाती है.

मृगमरीचिका एक अंतहीन लालसा: भाग 2-मीनू ने कैसे चुकाई कीमत

ऋषभ के चेन्नई से आ जाने के बाद हमारी मुलाकात उतनी आसान न रही और न ही हमारे मिलने की कोई उपयुक्त जगह. 10-12 दिनों में ही हमारे बीच में जिस्मानी दूरी आने से हम बौखला उठे और फिर आपसी रजामंदी से भाग जाने का निर्णय ले लिया, किसी भी अंजाम की परवाह किए बगैर. मयंक का तो पहले ही अपने परिवार से कोई खास जुड़ाव नहीं था. इधर उस के शारीरिक आकर्षण में बंधी मैं भी घायल हिरनी सी उस के साथ चलने को तत्पर हो उठी.

एक दिन खुशी के स्कूल की छुट्टी थी. तब ऋषभ के औफिस जाने के बाद मैं ने खुशी को खिलापिला कर सुला दिया और चल पड़ी अपने नए सफर की ओर.

अब सोचती हूं तो बहुत धिक्कारती हूं खुद को परंतु उस वक्त वासना की आंधी के आगे मेरा सतीत्व और ममत्व दोनों हार गए थे. गोवा के एक रिजोर्ट में 2-3 दिन रहने के बाद जब हमारी खुमारी कुछ उतरी, तो समझ आया कि जीवन में शारीरिक जरूरतों के अलावा भी बहुत कुछ जरूरी होता है. उस का कारण यह था कि मयंक जो 10-15 हजार रुपए अपने घर से लाया था, वे खत्म होने को थे. मेरे पास जो भी कैश था, मैं ने मयंक के हाथ में रख दिया.

‘‘इस से क्या होगा?’’ उस के चेहरे पर नाराजगी के भाव थे. ‘‘तो मैं क्या करूं, जो मेरे पास था तुम्हें दे दिया. अब क्या करना है तुम जानो,’’ मैं गुस्से में बोली.

‘‘अच्छा तो क्या सारी जिम्मेदारी मेरी है. तुम भी तो कुछ ला सकती थीं?’’ उस ने झुंझला कर कहा.

‘‘तो प्यार का दम भरते ही क्यों थे जब तुम्हारी जेब खाली थी? बहुत बड़े मर्द बनते थे न? अब कहां गई तुम्हारी मर्दानगी? बातें तो चांदसितारों की करते थे. क्या तुम्हें इन खर्चों के बारे में पहले नहीं सोचना चाहिए था?’’ मैं ने गुस्से में अपने पहने हुए गहने उतार कर उस के हाथों में रख दिए. ‘‘मुझ पर चीखने की बजाय अपने गरीबान में झांको और देने ही हैं तो सारे गहने दो… यह मंगलसूत्र भी,’’ मयंक ने उतावलेपन से मेरी ओर बढ़ते हुए कहा.

‘‘नहीं इसे मैं नहीं दूंगी. यह ऋ षभ के प्यार की निशानी है,’’ मैं ने भावावेश में कहा. ‘‘वाह रे सतीसावित्री. पति और बच्ची को छोड़ते समय तुम्हारा कलेजा नहीं पसीजा और अब उस की निशानी को रखने का नाटक कर रही हो,’’ मयंक अब बेशर्मी पर उतर आया था.

‘‘तुम्हें शर्म नहीं आती… आज मैं तुम्हारे कारण ही अपनी हरीभरी गृहस्थी को छोड़ कर यहां हूं. यहां तक कि अपनी बेटी खुशी को भी छोड़ दिया मैं ने तुम्हारे लिए,’’ मैं लगभग चीखते हुए बोली. ‘‘तो कोई एहसान नहीं किया. तुम्हारा पति तुम्हें जो नहीं दे पाया, वह मैं ने दिया है. बड़े मजे किए हैं तुम ने मेरे साथ मैडम,’’ मयंक ने अपना असली रंग दिखाना शुरू कर दिया था.

मयंक के इस बदले रूप को देख कर मैं हैरान रह गई. मन का क्षोभ, बेबसी और ठगे जाने की पीड़ा आंखों से बह निकली. मन के किसी कोने में घर से भागने का मलाल भी हुआ और अपनी नामसझी पर गुस्सा भी आया. मुझे रोता देख मयंक मेरे पास आया और हमेशा की तरह मुझे दुलारने की कोशिश की, लेकिन आज उस की यह हरकत मुझे बहुत नापाक लगी. आवेश में आ कर मैं ने उस के गाल पर जोरदार तमाचा जड़ दिया, ‘‘दूर हो जा मुझ से, मेरे पास आने की हिम्मत भी मत करना.’’

‘‘अरे पागल हो गई है क्या? क्यों चिल्ला रही है? भीड़ इकट्ठी हो जाएगी. मत भूल कि हम यहां भाग कर आए है… तुम्हारी जो मरजी आए करो,’’ कह कर मयंक पैर पटकता हुआ कमरे से बाहर चला गया. उस वक्त अपनी हालत के लिए अपने सिवा किसे कोसती. ऋ षभ ने 1-2 बार अप्रत्यक्ष रूप से मुझे समझाने की कोशिश भी की थी, परंतु उस समय मुझ पर मयंक के प्यार का ऐसा भूत सवार था कि बिना कोई आगापीछा सोचे मैं यह काम कर बैठी. अब मैं अपनी उसी करनी पर शर्मिंदा हो कर रोए जा रही थी.

शाम हो गईं मयंक नहीं लौटा. अब मैं और घबरा गई. अगर उस ने भी मुझे छोड़ दिया तो मैं क्या करूंगी, कहां जाऊंगी? एक तो अनजानी जगह उस पर हाथ में दो पैसे भी नहीं… शायद सच्चे रिश्तों को नकारने की मुझे सजा मिली थी. मेरी बरबादी की शुरुआत हो चुकी थी. ऋ षभ जैसे सच्चे जीवनसाथी और अपनी मासूम बच्ची को धोखा दे कर मैं ने जो वासनाजनित गलत राह चुनी थी उस की भयावहता का यह सिर्फ आगाज था. मयंक को मैं कौल पर कौल किए जा रही थी, पर उस का मोबाइल स्विच्ड औफ था. वहां इसी तरह ऋ षभ भी तो परेशान हो रहे होंगे, यह विचार आते ही उन्हें फोन लगाना चाहा, पर फिर रुक गई कि किस मुंह से और क्या सफाई दूंगी मैं? मयंक द्वारा लाई गई इस नई सिम में और कोई भी नंबर सेव नहीं था. रात होने को थी. मेरा सारा धैर्य जवाब दे चुका था.

तभी दरवाजे पर हुई आहट से दौड़ कर दरवाजा खोला तो हैरानपरेशान ऋ षभ को देखते ही चौंक पड़ी. मन चाहा कि लिपट जाऊं उन से और जी भर कर रो लूं, पर अपनी करतूत याद आते ही मुझ पर मानो घड़ों पानी पड़ गया. मयंक के पापा भी उन के साथ थे, पर मुझे कमरे में अकेली पा कर वे बाहर ही बैठ गए मयंक के इंतजार में. ऋ षभ ने पास आ कर स्नेह से मेरी पीठ पर हाथ रखा तो मैं पिघल कर उन के सीने से लग गई, ‘‘मुझे माफ कर दो ऋ षभ, मुझ से बहुत बड़ी गलती हो गई,’’ मैं ने हिचकियां लेते हुए कहा.

काफी देर तक खड़े रह ऋ षभ अपनी मूक संवेदनाएं प्रकट करते रहे, फिर बोले, ‘‘घर चलो मीनू, खुशी तुम्हारी राह देख रही है.’’ ‘‘नहीं ऋ षभ अब मैं वहां क्या मुंह ले कर जाऊंगी. खुशी से क्या कहूंगी? मैं ने जो भी किया है, उस की कोई माफी नहीं,’’ कह मैं सिसक उठी.

ऋ षभ काफी देर तक मुझे समझाते रहे. उन्होंने बताया कि किस तरह मयंक के किसी दोस्त से हमारी जानकारी निकाल कर बड़ी मुश्किल से यहां आए हैं. मैं मन ही मन और भी लज्जित हो गई. आखिरकार मैं लौटने को तैयार हो गई. करती भी क्या. मयंक का असली रंग तो देख ही चुकी थी. ‘‘अंकलजी, आप मयंक से बात कर उसे ले आना, मैं मीनू को ले कर जा रहा हूं,’’ चिंतित बैठे मयंक के पिता से ऋ षभ ने कहा और मेरा हाथ पकड़ कर बाहर आ गए.

घर पहुंचते ही दादी के हाथों से छिटक कर खुशी मम्मामम्मा कहते हुए मेरे गले आ लगी. मैं उसे जोर से छाती से लगा कर प्यार करने लगी. वहां मौजूद सभी लोगों को शायद यह प्यार बनावटी लग रहा हो, पर मैं वास्तव में शर्मिंदा थी. ऋ षभ की वजह से सभी ने ज्यादा रिएक्ट नहीं किया, पर उन की निगाहों में खासी नाराजगी दिखी. मेरा अपना भाई भी मुझ से दूर खड़ा था. मुझे लौटे 2-3 दिन बीत चुके थे. सारा समय मैं अपने कमरे में ही रहती थी. ऋ षभ आ कर मुझे खाना खिला जाते. नन्ही खुशी तो जैसे चहक उठी थी. पर मेरे सासससुर व भाई ने अभी तक मुझ से कोई बात नहीं की थी.

Monsoon Health Tips: बारिश के मौसम में कुछ इस तरह संक्रमण से बचें

भारत में मौनसून की सब से ज्यादा प्रतीक्षा रहती है, क्योंकि यह मौसम हरेक को गरमी से राहत देता है, लेकिन साथ ही इस मौसम के कारण कई बीमारियों के पनपने की भी आशंका रहती है. बुजुर्ग और बच्चों पर इस मौसम का सब से ज्यादा प्रभाव पड़ता है, क्योंकि उन की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है.

कई तरह के कीटाणु और संक्रमण मौनसून के साथ आते हैं. पेरैंट्स के लिए बहुत जरूरी है कि वे बच्चों को इन बीमारियों का शिकार होने से बचाएं और कुछ आवश्यक सावधानी बरतें. इस मौसम में नमी के कारण कीटाणुओं की संख्या में वृद्धि होती हैं. बच्चों को इन कीटाणुओं से दूर रखने के लिए काफी सावधानी बरतनी चाहिए.

मौनसून के दौरान स्वाइन फ्लू के मामले बढ़ जाते हैं. इस के अलावा, त्वचा की बीमारियां, दूषित पानी से उत्पन्न बीमारियां और मच्छर जनित बीमारियां काफी बढ़ जाती हैं.

  1. वायरल बुखार

यह सब से आम बीमारी है, जो मौनसून के दौरान बच्चों को प्रभावित करती है. तापमान में  बहुत ज्यादा उतारचढ़ाव बच्चे के शरीर को बैक्टीरिया के हमले के प्रति अतिसंवेदनशील बनाता है जिस के कारण वायरल, सर्दी और फ्लू होता है. इस का इलाज यदि शुरुआती चरण में किया जाए तो ठीक रहता है वरना देरी से गंभीर संक्रमण का खतरा हो सकता है.

2. डेंगू

यह इस मौसम की आने वाली सब से गंभीर बीमारियों में से एक है. एडिस व इजिप्टी मच्छरों द्वारा काटे जाने पर होने वाली यह एक आम और खतरनाक बीमारी है. ये मच्छर गरम और आर्द्र जलवायु में पैदा होते हैं. डेंगू का प्रकोप भारत में सब से ज्यादा है. इस के शुरुआती लक्षण बुखार, सिरदर्द, बदन पर चकत्ते उभरना आदि हैं.

3. मलेरिया

यह बीमारी मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से होती है. ये मच्छर बरसात का पानी इकट्ठा होने से पनपते हैं. इस के लक्षण लगातार बुखार के साथ कंपकंपी और गंभीर थकावट होती है. यदि बच्चे में इस का लक्षण दिखे तो तुरंत डाक्टर को दिखाएं, ताकि बीमारी गंभीर रूप न ले सके.

4. कोलेरा

यह एक गंभीर बैक्टीरियल बीमारी है जिस से गंभीर डिहाइड्रेशन होता है. यह रोग प्रदूषित भोजन और पानी में मौजूद बैक्टीरिया के कारण होता है. यह बीमारी साफसफाई और स्वच्छता की कमी से होती है. इस बीमारी के लक्षण हैं उलटी आना, अचानक दस्त होना, मतली, मुंह का खुश्क होना और मूत्र में कमी.

5. टायफाइड

यह दूषित पानी और भोजन से पैदा होने वाली एक आम बीमारी है. इस बीमारी के आम लक्षण लंबे समय तक बुखार, पेट में तेज दर्द और सिरदर्द हैं.

6. चिकनगुनिया

यह मच्छर से उत्पन्न होने वाली वायरल बीमारी है जो डेंगू की तरह है. इस के कारण बुखार और जोड़ों में तेज दर्द होता है जो लंबे समय तक रहता है. यह बीमारी मादा मच्छर के काटने से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलती है. इस का कोई उचित इलाज या टीकाकरण नहीं है. यदि आप का बच्चा इस बीमारी से पीडि़त है, तो उसे भरपूर आराम करना चाहिए और उसे डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए भरपूर तरल पदार्थ दिए जाने चाहिए.

7. पेट का संक्रमण

इस सीजन में यह बच्चों को होने वाली सब से आम बीमारी है. दूषित भोजन और पानी पीने से बच्चों के पेट में संक्रमण होने की आशंका रहती है. इस के शुरुआती लक्षण उलटी, सिरदर्द और हलका बुखार हैं.

8. पीलिया

यह भी प्रदूषित भोजन और पानी पीने से फैलता है. पीलिया के लक्षण हैं आंखों और नाखूनों में पीलापन आना, भूख और स्वाद में कमी, कमजोरी, कंपकंपी के साथ तेज बुखार होना. इस बीमारी के लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. यह जानलेवा बीमारी है.

9. लेप्टोस्पाइरोसिस

स्पाइरल आकार वाले बैक्टीरियम स्पायरोछेते द्वारा लेप्टोस्पाइरोसिस बीमारी होती है. इस का दूषित पानी के साथ घनिष्ठ संबंध है. इस बीमारी के लक्षणों में तेज बुखार, कंपकंपी, सिरदर्द, और लिवर का फेल हो जाना शामिल हैं. अगर इस बीमारी को अनदेखा किया जाए तो यह बीमारी घातक हो सकती है.

10. हैपेटाइटिस ए

यह बीमारी लिवर को काफी प्रभावित करती है. यह दूषित भोजन और पानी के इस्तेमाल से होती है. हैपेटाइटिस ए के सामान्य लक्षण हैं- बुखार, उलटी और शरीर में चकत्ते होना. यह एक वायरस है जो किसी को भी आसानी से प्रभावित कर सकता है. यह एक संक्रमित बीमारी है.

– डा. शब्बीर चामढाव  

(लेखक सैफी अस्पताल, मुंबई में बालरोग विशेषज्ञ हैं)

Kalki 2898 AD का टीजर रिलीज, प्रभास-दीपिका के लुक से फैंस हुए इंप्रेस

साउथ सिनेमा के सुपरस्टार प्रभास, बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन, एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण और एक्टर कमल हसन समेत फिल्म कल्की में नजर आने वाले है. इस फिल्म को के प्रोजेक्ट के नाम से भी जाना जाता है.

गुरुवार को एक इवेंट में निर्माताओं ने फिल्म का शीर्षक और टीज़र जारी किया. फिल्म की पहली झलक में अमिताभ बच्चन, दीपिका पादुकोण और प्रभास भविष्य की दुनिया में फंसे हुए हैं और अंधेरी ताकतों से लड़ रहे हैं. कल्कि 2898 AD साल 2024 में रिलीज होगी.

फैंस प्रभास के लुक से हुए इंप्रेस

‘कल्की 2898 एडी’ फिल्म में प्रभास के लुक ने जहां लोगों को निराश किया था, वहीं फिल्म के टीजर ने दर्शकों को राहत दिलाई है. प्रभास की ‘कल्की 2898 एडी’ का टीजर देखने के बाद लोगों ने इसे ‘ब्लॉकबस्टर’ तक घोषित कर दिया है. टीजर पर आ रहे रिएक्शन को देखकर कहा जा सकता है कि लोग वाकई में इससे इंप्रेस हुए हैं.

‘कल्कि 2898 एडी’ फिल्म  मशहूर नाग अश्विन द्वारा लिखित और निर्देशित है. इस विज्ञान-फाई फिल्म की घोषणा वैजयंती मूवीज की 50वीं वर्षगांठ पर की गई थी. यह फिल्म 600 करोड़ रुपये के भारी बजट पर बनी है, जो इसे अब तक की सबसे महंगी भारतीय फिल्म है.

फैंस ने जमकर की तरीफ

प्रभास की के-प्रोजेक्ट यानी ‘कल्कि 2898 एडी’ का टीजर रिलीज होते ही काफी चर्चाओं में आ गया है. टीजर देखने के बाद लोग जमकर तरीफ कर रहे है. एक यूजर ने प्रभास की अपकमिंग फिल्म ‘सालार’ से इसकी तुलना करते हुए लिखा, “मैं नाग अश्विन पर भरोसा करता हूं. अगर आप मुझसे निजी तौर पर पूछें तो ‘प्रोजेक्ट के’ की पहली झलक ‘सालार’ से ज्यादा दमदार लग रही है. जबरदस्त कॉन्सेप्ट और बड़ा जोखिम.”

दूसरे यूजर ने प्रभास का ‘कल्की 2898 एडी’ से जुड़ा लुक शेयर करते हुए लिखा, “दुनिया को बता दो कि प्रभास वापिस आ चुका है. एक अन्य यूजर ने लिखा, “ये शॉट तो पूरा बाहूबली की वाइब्स दे रहा है. प्रभास ने फैंस को जबरदस्त चीज दी है.

50 की उम्र में फिर पिता बने Arjun Rampal, गर्लफ्रेंड ने दिया बेटे को जन्म

बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता अर्जुन रामपाल और गैब्रिएला डेमेट्रिएड्स के घर एक नन्हा मेहमान आया है. अर्जुन रामपाल की गर्लफ्रेंड गैब्रिएला डेमेट्रिएड्स ने बेटे को जन्म दिया है. बता दें अर्जुन रामपाल 50 की उम्र में 4 बच्चो के पिता बन चुके है. अर्जुन और गैब्रिएला का एक बड़ा बेटा है. अर्जुन रामपाल और उनकी गर्लफ्रेंड गैब्रिएला डेमेट्रिएड्स गुरुवार 20 जुलाई को दूसरी बार पेरेंट्स बन गए हैं.

फिलहाल अर्जुन रामपाल और उनकी फैमिली घर में नन्हा मेहमान आने का जश्न मना रहे हैं. एक्टर ने खुद ट्विटर पर पोस्ट कर फैंस और फ्रेंड्स को ये गुड न्यूज शेयर की.

मिल रही है ढ़ेर सारी बधाइयां

अर्जुन रामपाल और गैब्रिएला डेमेट्रिएड्स को बेटे के जन्म पर कई सारी गुड विशिज मिल रही है. फिल्मी जगत से कई स्टार ने शुभकमनाएं दी है. बॉलीवुड अभिनेता सुनील शेट्टी समेत कई बॉलीवुड के दिग्गज सितारों ने कमेंट कर अर्जुन रामपाल और गैब्रिएला डेमेट्रिएड्स को बेटे के जन्म की बधाई दी.

 

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अर्जुन रामपाल ने पोस्ट में लिखा

अर्जुन रामपाल ने अपनी पोस्ट में लिखा था, “मुझे और मेरे परिवार को एक प्यारे से बेटे से नवाजा गया है. मां और बेटा दोनों ही एकदम स्वस्थ हैं. डॉक्टर और नर्स की जबरदस्त टीम को शुक्रिया. बेटे के आने से हमारी खुशी सातवें आसमान पर है. आप सभी के प्यार और समर्थन के लिए शुक्रिया.”

इसी के साथ ही अर्जुन रामपाल ने अपने पोस्ट में एक फोटो भी शेयर की, जिसपर ‘हेलो वर्ल्ड’ लिखा था. उनकी इस पोस्ट पर सुनील शेट्टी ने हार्ट शेप इमोजी शेयर किया. वहीं बॉबी देओल ने कमेंट कर लिखा, “आपको ढेर सारी शुभकामनाएं.” दिव्या दत्ता ने पोस्ट पर कमेंट करते हुए लिखा, “दिल से बधाइयां.”

एक्टर अर्जुन रामपाल और गैब्रिएला डेमेट्रिएड्स कई सालों से रिलेशनशीप में है. अर्जुन पहली पत्नी मेहर जेसिया से अलग होने के बाद से गैब्रिएला डेमेट्रिएड्स के संग रिलेशनशीप में आ गए है. साल 2019 में गैब्रिएला ने आरिक को जन्म दिया था. इसके अलावा अर्जुन की पहली पत्नी से दो प्यारी बेटियां है जिनका नाम माहिका और मायरा है.

स्त्री रोग में क्रांति ला रही एडवांस लेप्रोस्कोपिक सर्जरी

पिछले कुछ वर्षों में, स्त्री रोग (गायनेकोलॉजी) से जुड़े मामलों में लेप्रोस्कोपिक सर्जरी काफी प्रभावशाली साबित हुई है. इन मिनिमली इनवेसिव प्रक्रियाओं में स्त्री रोग से जुड़े मामलों में बीमारी का पता लगाने और इलाज करने के लिए छोटे कट लगाए जाते हैं और स्पेशलाइज्ड उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है. लैप्रोस्कोपी सर्जरी ने गायनेकोलॉजी के क्षेत्र में क्रांति ला दी है जिससे मरीज की रिकवरी कम वक्त में हो जाती है, निशान कम आते हैं और बेहतर परिणाम आते हैं. गुरुग्राम के सीके बिरला हॉस्पिटल में ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी विभाग की डायरेक्टर डॉक्टर अंजलि कुमार ने इस विषय पर विस्तार से जानकारी दी.

  1. लैप्रोस्कोपिक हिस्टेरेक्टॉमी

परंपरागत रूप से, हिस्टेरेक्टॉमी (सर्जरी के जरिए यूट्रस निकालना) पेट में चीरे के माध्यम से की जाती थी, जिसमें मरीज की रिकवरी में लंबा समय लग जाता था. हालांकि, लेप्रोस्कोपिक हिस्टेरेक्टॉमी एक मिनिमली इनवेसिव प्रक्रिया है जिसके चलते मरीज की रिकवरी तुरंत होती है, ऑपरेशन के बाद दर्द कम होता है और निशान भी बहुत कम होते हैं. रोबोटिक-असिस्टेड लेप्रोस्कोपिक हिस्टेरेक्टॉमी जैसी एडवांस तकनीक से इलाज को और मजबूती मिली है. इसमें, जटिल शारीरिक संरचनाओं को भी डॉक्टर ज्यादा आसानी से नेविगेट कर लेते हैं और ऑपरेशन में इससे काफी मदद मिलती है. जिन महिलाओं को यूटेरिन फाइब्रॉएड, एंडोमेट्रियोसिस या पीरियड्स के दौरान ज्यादा ब्लीडिंग होती है उनके लिए ये प्रक्रिया काफी कारगर है.

2. एंडोमेट्रियोसिस

एंडोमेट्रियोसिस में यूट्रस के बाहर एंडोमेट्रियल टिशू बढ़ जाते हैं. ये गंभीर पेल्विक पेन और बांझपन का कारण बन सकता है. एंडोमेट्रियोसिस घावों के लिए लेप्रोस्कोपिक प्रक्रिया एक बहुत ही स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट मेथड बन गया है. इसमें डॉक्टर एंडोमेट्रियोसिस इम्प्लांट्स को विजुलाइज करने, उनका मैप बनाने, और ठीक से हटाने के लिए लेप्रोस्कोपिक उपकरणों का उपयोग करते हैं, जिससे मरीजों को लंबे समय तक राहत मिलती है. इन मिनिमली इनवेसिव प्रक्रिया से न केवल लक्षण कम होते हैं, बल्कि प्रजनन क्षमता भी इससे प्रिजर्व होती है. महिलाओं को इसका काफी लाभ मिलता है.

3. ओवेरियन सिस्टेक्टोमी 

ओवेरियन अल्सर, तरल पदार्थ से भरी थैली जो अंडाशय पर बनती है. इसमें दर्द, हार्मोनल असंतुलन और फर्टिलिटी संबंधी परेशानियां होने का डर रहता है. लेप्रोस्कोपिक सिस्टेक्टोमी की मदद से डॉक्टर अल्सर को हटाते हैं और स्वस्थ ओवेरियन टिशू को संरक्षित करते हैं, इससे ओवेरियन फंक्शन बेहतर होता है और फर्टिलिटी भी सुधरती है.

इंट्राऑपरेटिव अल्ट्रासाउंड और फ्लोरेसेंस इमेजिंग जैसी एडवांस तकनीक से अल्सर की सटीक पहचान की जाती है और फिर उसे हटाया जाता है. इस प्रक्रिया में जोखिम कम रहता है. ओपन सर्जरी की तुलना में लेप्रोस्कोपिक सिस्टेक्टोमी के बाद दर्द कम होता है, अस्पताल में मरीज को कम वक्त रहना पड़ता है और वो रोजमर्रा के काम भी जल्दी वापसी हो जाती है.

4. मायोमेक्टोमी

यूटेरिन फाइब्रॉएड के कारण पीरियड्स में बहुत ज्यादा ब्लीडिंग होती है, पेल्विक पेन होता है और प्रजनन संबंधी परेशानियां भी हो जाती हैं. मायोमेक्टोमी में गर्भाशय को संरक्षित करते हुए फाइब्रॉएड को सर्जरी के जरिए हटाया जाता है. जो महिलाएं गर्भधारण करना चाहती हैं, उनके लिए ये एक बेहतर उपाय है. लैप्रोस्कोपिक मायोमेक्टोमी पारंपरिक ओपन सर्जरी से ज्यादा पॉपुलर है क्योंकि इसमें छोटे चीरे लगाए जाते हैं, ब्लड लॉस कम होता है और मरीज की रिकवरी भी तेजी से होती है. रोबोटिक-असिस्टेड लेप्रोस्कोपिक मायोमेक्टोमी से सर्जरी काफी सटीक हुई है और इसके परिणामस्वरूप बेहतर प्रजनन रिजल्ट आते हैं.

5. ट्यूबल रिवर्सल

जिन महिलाओं की ट्यूबल लिगेशन (सर्जिकल नसबंदी) होती है, उनके लिए ट्यूबल रिवर्सल सर्जरी प्रजनन क्षमता को बहाल करने का अवसर प्रदान करती है. लेप्रोस्कोपिक ट्यूबल रीनेस्टोमोसिस में फैलोपियन ट्यूबों को फिर से जोड़ा जाता है, जिससे प्राकृतिक गर्भधारण की संभावनाएं बढ़ती हैं. मिनिमली इनवेसिव सर्जरी से निशान कम आते हैं और ऑपरेशन के बाद मरीज को कम परेशानी होती है जिससे महिलाओं को अपनी रुटीन की गतिविधियों में तेजी से लौटने में मदद मिलती है. लैप्रोस्कोपिक तकनीक, माइक्रोसर्जिकल स्किल्स से साथ जुड़ी होती है जिससे ट्यूबल रिवर्सल सर्जरी की सफलता दर और परिणामों में काफी सुधार होता है.

एडवांस गायनेकोलॉजी लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के आने से प्रजनन आयु के दौरान स्त्री रोग संबंधी तमाम परेशानियों को ठीक करने के मामले में क्रांति आई है. मिनिमली इनवेसिव प्रक्रियाएं, जैसे कि लेप्रोस्कोपिक हिस्टेरेक्टॉमी, एंडोमेट्रियोसिस एक्साइशन, ओवेरियन सिस्टेक्टोमी, मायोमेक्टोमी और ट्यूबल रिवर्सल से मरीजों को ओपन सर्जरी की तुलना में काफी लाभ पहुंचा है.

तेजी से रिकवरी, कम निशान और बेहतर प्रजनन रिजल्ट के चलते लेप्रोस्कोपिक सर्जरी से स्त्री रोगों से पीड़ित महिलाओं के लिए आशा की किरण मिली है. तकनीक भी लगातार बढ़ रही है, जिससे ये उम्मीद की जा रही है कि लैप्रोस्कोपिक तकनीक भी आगे विकसित होगी जिससे और बेहतर रिजल्ट प्राप्त होंगे और महिलाओं की रिप्रोडक्टिव हेल्थ में सुधार आएगा.

Monsoon special: बारिश के मौसम में बनाएं ये 3 हैल्दी चाट

मानसून के प्रारम्भ होते ही चारों तरफ ठंडक घुल जाती है. यद्यपि बारिश के मौसम में हमारी पाचन क्षमता कमजोर हो जाती है और आहार विशेषज्ञ हल्का भोजन खाने की सलाह देते हैं परन्तु यही वो मौसम होता है जब मन हरदम कुछ चटपटा खाने का करने लगता है. बाजार में मिलने वाली ज्यादा तली भुनी डिशेज को सेहतमंद नहीं कहा जा सकता इसलिए इस मौसम में उन्हें खाने से बचना चाहिए. तो क्यों घर पर ही थोड़े से प्रयास से कुछ टेस्टी और हेल्दी बनाया जाए जिससे स्वाद भी पूरा हो जाये और सेहत भी प्रभावित न हो.

आज हम आपको ऐसी ही 3 चाट रेसिपी बता रहे हैं जो मौसम के अनुकूल भी हैं और इन्हें आप झटपट घर में उपलब्ध सामग्री से बड़ी आसानी से बना भी सकतीं हैं तो आइए देखते हैं कि इन्हें कैसे बनाया जाता है-

  1. चीजी पाइनेपल चाट

कितने लोगों के लिए  –  4

बनने में लगने वाला समय –  20

मील टाइप  –  वेज

सामग्री

  1.   4 स्लाइस टिंड पाइनेपल 
  2. 1 टीस्पून दरदरी भुनी मूंगफली 
  3. 1/4 टीस्पून काली मिर्च पाउडर   
  4. 1/8 टीस्पून काला नमक                         
  5. 1/8 टीस्पून चाट मसाला                         
  6.   1/2 टीस्पून बटर                                   
  7. 1 चुटकी चिली फ्लैक्स                           
  8. 1 चीज क्यूब 

विधि

पाइनेपल के टिन को सावधानी पूर्वक खोलकर स्लाइस को बाहर निकालकर पानी से अच्छी तरह धो लें. अब एक पैन में बटर डालें और पाइनेपल को सुनहरा होने तक दोनों तरफ से सेंक लें. अब पाइनेपल को 1 इंच के टुकड़ों में काट लें और इसमें चिली फ्लैक्स को छोड़कर सभी मसाले व मूंगफली मिला लें. इन कटे पाइनेपल को पैन में फिर से डालकर ऊपर से चीज क्यूब को ग्रेट करें और चिली फ्लैक्स बुरक दें. ढककर चीज के मेल्ट होने तक एकदम धीमी आंच पर पकाएं. गर्मागर्म चाट प्लेट में डालकर सर्व करें.

2. क्रिस्पी आलू टुक चाट

कितने लोगों के लिए  – 5

बनने में लगने वाला समय – 20 मिनट

मील टाइप –  वेज

सामग्री

  1. 4 आलू                                   
  2. 1 टीस्पून हरी चटनी                           
  3. 1 टीस्पून इमली की मीठी चटनी         
  4.  1 टीस्पून घी या तेल                           
  5. 1 बारीक कटी हरी मिर्च           
  6. 1/4 टीस्पून चिली फ्लैक्स                         
  7. 1/4 टीस्पून चाट मसाला                       
  8. 1 टीस्पून बारीक कटी हरी धनिया         
  9. 1 टेबलस्पून अनार के दाने                     
  10. 1 टीस्पून फीकी सेव                           

विधि

आलू को प्रेशर कुकर में डालकर धीमी आंच पर केवल 1 सीटी ले लें. ठंडा होने पर इन्हें 4 टुकड़ों में काट लें. अप्पे पैन में घी लगाकर इन टुकड़ों को डालें और धीमी आंच पर उलटते पलटते हुये आलुओं के सुनहरा होने तक पकाएं. जब आलू गोल्डन ब्राउन हो जाएं तो एक इन्हें सर्विंग प्लेट में डालें. चटनियां, मसाले, सेव और अनार के दाने डालकर सर्व करें.

3. पेरी पेरी कॉर्न चाट

कितने लोगों क़े लिए –   4

बनने में लगने वाला समय  –  20 मिनट

मील टाइप  –  वेज

सामग्री

  1. 2 कप ताजे स्वीट कॉर्न                 
  2. 1/2 कप बारीक कटी शिमला मिर्च     
  3. 1 बारीक कटा प्याज                   
  4. 2 बारीक कटी हरी मिर्च               
  5. 1/4 कप बारीक कटा पनीर                 
  6. 1/2 टीस्पून पेरी पेरी मसाला                       
  7. 1 टीस्पून नीबू का रस                           
  8. 1/4 टीस्पून चाट मसाला                           
  9. 1/2 टीस्पून बटर                                       
  10. 1/8 टीस्पून काली मिर्च पाउडर   

विधि

कॉर्न के दानों को प्रेशर कुकर में डालकर 1/4 टीस्पून नमक और 1 टेबलस्पून पानी डालकर तेज आंच पर 1 सीटी ले लें. अब एक पैन में बटर डालकर कटी हरी मिर्च, प्याज और शिमला मिर्च डालकर तेज आंच पर 2 मिनट तक चलाते हुए पकाकर गैस बंद कर दें. ठंडा होने पर इसमें कॉर्न, पनीर सभी मसाले व नीबू का रस मिलाएं. हरे धनिये से गार्निश करके सर्व करें.

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