अनुपमा की जान लेने पर उतारू होगी माया, शाह परिवार में जोर शोर से शुरूहुआ फेयरवेल

रुपाली गांगुली और गौरव खन्ना स्टारर ‘अनुपमा’ में अब कई ट्विस्ट आ चुके है. दर्शक काफी समय से अनुपमा के अमेरिका जाने का इंतजार कर रहे है. लेकिन शो मेकर्स आए दिना नया मोड़ लेकर आ रहे है.  अनुपमा के सामने चुनौतियां कम न होने का नाम नहीं ले रहा है. ‘अनुपमा’ के बीते एपिसोड में देखने को मिला कि अनुज अनुपमा की फेयरवेल पार्टी की तैयारियां करता है. अनुपमा के लिए अनुज की तैयारियां देखकर माया बौखला जाती है और अपना गुस्सा आटे पर निकालती है. लेकिन ‘अनुपमा’ में आने वाले टर्न्स यहीं पर खत्म नहीं होते हैं.

शाह हाउस में होगा अनुपमा का स्वागत

‘अनुपमा’ के अपकमिंग एपिसोड में देखने को मिलेगा कि अनुपमा तैयार होकर शाह हाउस में पहुंचती है. वह भगवान से प्रार्थना करती है सबकुछ अच्छा हो. जैसे वह गेट खोलती है वहां सब आरती लेकर उसका भव्य स्वागत करते है. बा के साथ सभी लोग आरती करते है. इसके बाद खुद ही अनुपमा मंदिर में जाकर दिया जलाती है और सब उसके साथ पूजा करते है. लेकिन इन सब पर बा अपनी हरकतों पर शर्मिंदगी होती है और वह कहती हैं कि आज तक मैंने अनुपमा के साथ केवल बुरा ही किया है.

 

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अनुपमा से मिलने के लिए अनुज बेताब होगा

रुपाली गांगुली और गौरव खन्ना स्टारर ‘अनुपमा’ में देखने को मिलेगा कि अनुपमा से मिलने के लिए अनुज बेताब होगा. कपाड़िया हाउस में तैयारियां चल रही होती है. लेकिन अनुपमा को वहां 6 बजे जाना होता है. ऐसे में अनुज अंकुश से कहता है कि आज ये 6 जल्दी क्यों नहीं बज रहे हैं. अनुज अंकुश से कहता है कि अनुपमा मेरी जान है और अगर वो चली गई तो मैं कैसे जीयूंगा. हालांकि अंकुश उससे बताता है कि उसका दिल कह रहा है कि अनुपमा नहीं जाएगी. लेकिन अनुज उसे शांत करा देता है और कहता है, “मैं अपनी अनु के रास्ते में रोड़ा नहीं बनना चाहता.”

अनुपमा को नुकसान पहुंचाएगी माया

शो का मनोरंजन यहीं खत्म नहीं होता. ‘अनुपमा’ में आगे देखने को मिलेगा कि अनुज अनुपमा से मिलने के लिए बेताब होता है. माया अनुज की बेताबी देखकर बौखला जाती है. वह फेयरवेल पार्टी में भी अनुपमा को नुकसान पहुंचाने का सोचेगी. माया गिफ्ट पैक उठाकर कहेगी कि कुछ तो ऐसा जरूर करना पड़ेगा, जिससे ये परेशानी हमेशा के लिए दूर हो जाए.

Monsoon Special: ड्राई स्किन के लिए ट्राय करें ये 5 होम मेड एलोवेरा फेस वॉश

Monsoon का सीजन आ गया है, ऐसे मे बारिश के मौसम में आमतौर पर स्किन ड्राई हो जाती है. ड्राई स्किन से छुटकारा पाने के लिए सबसे अच्छा एलोवेरा मना जाता है. एलोवेरा एक रसीला पौधे की प्रजाति है जो एलो जीनस से संबंधित है. इसका उपयोग सदियों से औषधीय और त्वचा देखभाल गुणों के लिए किया जाता रहा है. एलोवेरा के पौधों में आमतौर पर मोटी पत्तियां होती हैं जो जेल जैसे पदार्थ से भरी होती हैं.

एलोवेरा पौधे की पत्तियों से प्राप्त जेल विटामिन, खनिज, एंजाइम, अमीनो एसिड और एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर होता है. यह अपने सुखदायक, मॉइस्चराइजिंग और उपचार गुणों के लिए जाना जाता है. एलोवेरा जेल का व्यापक रूप से विभिन्न त्वचा देखभाल उत्पादों, सौंदर्य प्रसाधनों और प्राकृतिक उपचारों में उपयोग किया जाता है.

अपना खुद ही DIY एलोवेरा फेस वॉश बना सकते है, आप अपनी त्वचा को गहरी नमी प्रदान करने के लिए इस पौधे की शक्ति का उपयोग कर सकते हैं. इस लेख में, हम 5 सरल और प्रभावी DIY एलोवेरा फेस वॉश बनाने का तरीका बताएंगे जो आपकी त्वचा को तरोताजा और गहराई से नमीयुक्त महसूस कराएंगे.

  1. बेसिक एलोवेरा फेस वॉश

2 बड़े चम्मच शुद्ध एलोवेरा जेल में 1 बड़ा चम्मच शहद और 1 बड़ा चम्मच बादाम का तेल मिलाएं. इस मिश्रण से अपने चेहरे पर धीरे-धीरे मालिश करें, फिर गुनगुने पानी से धो लें. यह मूल नुस्खा आपकी त्वचा को गहरा जलयोजन और पोषण प्रदान करता है.

2. एलोवेरा और नारियल तेल फेस वॉश

2 बड़े चम्मच एलोवेरा जेल को 1 बड़े चम्मच नारियल तेल के साथ मिलाएं. जब तक सामग्री पूरी तरह मिश्रित न हो जाए, तब तक अच्छी तरह हिलाएं. इस मिश्रण से अपने चेहरे पर गोलाकार गति में मालिश करें, फिर गर्म पानी से धो लें. यह फेस वॉश शुष्क या निर्जलित त्वचा के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है.

3. एलोवेरा और ग्रीन टी फेस वॉश

एक कप ग्रीन टी बनाएं और इसे ठंडा होने दें. 2 बड़े चम्मच एलोवेरा जेल को 1 बड़े चम्मच ठंडी ग्रीन टी में मिलाएं. इस मिश्रण को अपने चेहरे पर लगाएं और कुछ मिनटों तक धीरे-धीरे मालिश करें. पानी से धो लें. यह फेस वॉश त्वचा को मॉइस्चराइज और आराम देने में मदद करता है, जबकि ग्रीन टी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट अतिरिक्त लाभ प्रदान करते हैं.

4. एलोवेरा और खीरे का फेस वॉश

आधे खीरे को पीसकर उसका रस छान लें. 2 बड़े चम्मच एलोवेरा जेल में 1 बड़ा चम्मच खीरे का रस मिलाएं। इस मिश्रण को अपने चेहरे पर लगाएं और धीरे से मालिश करें. ठंडे पानी से धो लें. यह फेस वॉश ताज़ा है और त्वचा को हाइड्रेट और शांत करने में मदद करता है.

5. एलोवेरा और ओटमील फेस वॉश

2 बड़े चम्मच ओटमील को बारीक पीस लें. इसे 2 बड़े चम्मच एलोवेरा जेल और पर्याप्त पानी के साथ मिलाकर पेस्ट बना लें. पेस्ट को अपने चेहरे पर लगाएं और धीरे से मालिश करें. गर्म पानी के साथ धोएं. यह फेसवॉश त्वचा को एक साथ एक्सफोलिएट और मॉइस्चराइज़ करता है.

आधुनिक नारी: भाग 1- अनिता को अनिरुद्ध की खुशी पर शक क्यों हुआ?

उस दिन जब अविनाश अपने दफ्तर से लौटा तो बहुत खुश दिख रहा था. उसे इतना खुश देख कर अनिता को कुछ आश्चर्य हुआ, क्योंकि वह दफ्तर से लौटे अविनाश को थकाहारा, परेशान और दुखी देखने की आदी हो चुकी थी.

अविनाश का इस कदर परेशान होना बिना वजह भी नहीं था. सब से बड़ी वजह तो यही थी कि पिछले 10 सालों से वह इस कंपनी में काम कर रहा था, पर उसे आज तक एक भी प्रमोशन न मिला था. वह कंपनी के मैनेजर को अपने काम से खुश करने की पूरी कोशिश करता, पर उसे आज तक असफलता ही मिली थी.

प्रमोशन न होने के कारण उसे वेतन इतना कम मिलता था कि मुश्किल से घर का खर्च चल पाता था. उस की कंपनी बहुत मशहूर थी और वह अपना काम अच्छी तरह से सम?ा गया था, इसलिए वह कंपनी छोड़ना भी नहीं चाहता था.

अनिता अविनाश के दुखी और परेशान रहने की वजह जानती थी, पर वह कर ही क्या सकती थी.

उस दिन अविनाश को खुश देख कर उस से रहा नहीं गया. वह चाय का कप अविनाश को पकड़ा कर अपना कप ले कर बगल में बैठ गई और उस से पूछा, ‘‘क्या बात है, आज बहुत खुश लग रहे हो?’’

‘‘बात ही खुश होने की है. तुम सुनोगी तो तुम भी खुश होगी.’’

‘‘अरे, ऐसी क्या बात हो गई है? जल्दी बताओ.’’

‘‘कंपनी का मैनेजर बदल गया. आज नए मैनेजर ने कंपनी का काम संभाल लिया. बड़ा भला आदमी है. उम्र भी ज्यादा नहीं है. मेरी ही उम्र का है. पर इतनी छोटी उम्र में मैनेजर बन जाने के बाद भी घमंड उसे छू तक नहीं गया है. आज उस ने सभी कर्मचारियों की एक मीटिंग ली. उस में सभी विभागों के हैड भी थे. उस ने कहा कि यह कंपनी हम सभी लोगों की है. इसे आगे बढ़ाने में हम सभी का योगदान है. हम सब एक परिवार के सदस्यों की तरह हैं. हमें एकदूसरे की मदद करनी चाहिए. कंपनी के किसी भी सदस्य को कोई परेशानी हो तो वह मेरे पास आए. मैं वादा करता हूं सभी की बातें सुनी जाएंगी और जो सही होगा वह किया जाएगा.

‘‘आखिर में उस ने कहा कि इस इतवार को मेरे घर पर कंपनी के सभी कर्मचारियों की पार्टी है. आप सभी अपनी पत्नियों के साथ आएं ताकि हम सब लोग एकदूसरे को अच्छी तरह से जान और सम?ा सकें. लगता है अब मेरे दिन भी बदलेंगे. तुम चलोगी न?’’

‘‘तुम ले चलोगे तो क्यों नहीं चलूंगी?’’ कह कर मुसकराते हुए अनिता वापस रसोई में चली गई.

कंपनी के कर्मचारियों की

संख्या 100 से अधिक थी, जिन के रात के खाने का प्रबंध था. मैनेजर ने अपने घर के सामने एक बड़ा सा शामियाना लगवाया था. मैनेजर अपनी पत्नी के साथ शामियाने के दरवाजे पर ही उपस्थित था और आने वाले मेहमानों का स्वागत कर रहा था. मेहमान एकएक कर के आ रहे

थे और मैनेजर से अपना परिचय नाम और काम के जिक्र के साथ दे रहे थे.

अविनाश ने भी मैनेजर से हाथ मिलाया और अनिता ने उन की पत्नी को नमस्कार किया. अचानक मैनेजर की निगाह अनिता पर पड़ी तो उस के मुंह से निकला, ‘‘अरे, अनिता तुम? तुम यहां कैसे?’’

अनिता भी चौंक उठी. उस के मुंह से बोल तक न फूटे.

‘‘पहचाना नहीं? मैं अनिरुद्ध…’’

‘‘पहचान गई, तुम काफी बदल गए हो.’’

‘‘हर आदमी बदल जाता है, पर तुम नहीं बदलीं. आज भी वैसी ही दिख रही हो,’’ कहते हुए अनिरुद्ध ने अपनी पत्नी की तरफ संकेत किया, ‘‘अनिता, यह है अंजलि मेरी पत्नी और तुम्हारे पति कहां हैं?’’

अनिता ने अविनाश को आगे कर के इशारा किया और अंजलि को अभिवादन कर उस से बातें करने लगी.

अब तक सिमटा हुआ अविनाश सामने आ कर बोला, ‘‘सर, मैं हूं अविनाश. आप की कंपनी के ऐड विभाग में सहायक.’’

‘‘यह तो बड़ी अच्छी बात है,’’ कहते हुए अनिरुद्ध ने अंजलि से कहा, ‘‘अंजलि, यह है अनिता. बचपन में हम दोनों एक ही सरकारी कालोनी में रहते थे और एक ही स्कूल में एक ही क्लास में पढ़ते थे. इन के पिताजी पापा के बौस थे.’’

‘‘पर आज उलटा है. आप अविनाश के बौस के भी बौस हैं,’’ कह कर अनिता हंस पड़ी.

‘‘नहीं, हम लोग आज से बौस और मातहत के बजाय एक दोस्त के रूप में काम करेंगे. क्यों अविनाश, ठीक है न? खैर, और बातें किसी और दिन करेंगे, आज तो बड़ी भीड़भाड़ है,’’ कहते हुए अनिरुद्ध अन्य मेहमानों की तरफ मुखातिब हुआ, क्योंकि अब तक कई मेहमान आ कर खड़े हो चुके थे.

पार्टी समाप्त होने पर अन्य लोगों की तरह अविनाश और अनिता भी वापस अपने घर लौट आए. अविनाश बहुत खुश था. उस से अपनी खुशी संभाले नहीं संभल रही थी. सोते समय अविनाश ने अनिता से पूछा, ‘‘क्या यह सच है कि मैनेजर साहब तुम्हारी कालोनी में रहते थे और तुम्हारी क्लास में पढ़ते थे?’’

‘‘इस में  झूठ की क्या बात है? जब पिताजी की नियुक्ति जौनपुर में थी तो हमारी कोठी की बगल में ही अनिरुद्ध का क्वार्टर था और अनिरुद्ध मेरी ही क्लास में पढ़ता था. अनिरुद्ध पढ़ने में तेज था, इसलिए वह आज तुम्हारी कंपनी में मैनेजर बन गया और मैं पढ़ने में कमजोर थी, इसलिए तुम्हारी बीवी बन कर रह गई,’’ कह कर अनिता मुसकरा तो पड़ी पर यह मुसकराहट जीवन की दौड़ में पिछड़ जाने की कसक को भुलाने के लिए थी.

अविनाश तो किसी और दुनिया में मशगूल था. उसे इस बात की बड़ी खुशी थी कि मैनेजर साहब उस की पत्नी के पुराने परिचितों में से हैं.

‘‘मैनेजर साहब इतना तो सोचेंगे ही कि मेरा प्रमोशन हो जाए.’’

‘‘पता नहीं, लोग बड़े आदमी बन कर अपना अतीत भूल जाते हैं.’’

‘‘नहीं अनिता, मैनेजर साहब ऐसे आदमी नहीं लगते. देखा नहीं, कितनी आत्मीयता से हम लोगोें से वे मिले और यह बताने में भी नहीं चूके कि तुम्हारे पिता उन के पिता के बौस थे.’’

‘‘मुझे नींद आ रही है. वैसे भी कल सुबह उठ कर प्रमोद को तैयार कर के स्कूल भेजना है,’’ कह कर अनिता ने नींद का बहाना बना कर करवट बदल ली. थोड़ी ही देर में अविनाश भी खर्राटे भरने लगा.

नींद अनिता की आंखों से कोसों दूर थी. उस ने कुशल स्त्री की भांति अविनाश को सिर्फ इतना ही बताया था कि वह अनिरुद्ध से परिचित है. वह बड़ी कुशलता से यह छिपा गई कि दोनों एकसाथ पढ़तेपढ़ते एकदूसरे को चाहने लगे थे. 12वीं कक्षा में तो दोनों ने अपने प्यार का इजहार भी कर दिया था. पर दोनों जानते थे कि उन दोनों की आर्थिक स्थिति में बहुत अंतर है और दोनों की जाति भी अलग है, इसलिए घर वाले दोनों को विवाह करने की अनुमति कभी नहीं देंगे. दोनों ने यह तय किया था कि पढ़ाई पूरी करने के बाद वे दोनों नौकरी तलाशेंगे और उस के बाद अपनी मरजी से विवाह कर लेंगे.

पर आदमी का सोचा हुआ सब कुछ होता

कहां है. 12वीं कक्षा का परीक्षाफल भी नहीं निकला था कि अनिता के पिता का स्थानांतरण वाराणसी हो गया और अनिता और अनिरुद्ध द्वारा बनाया गया सपनों का महल ढह कर चूर हो गया. तब न तो टैलीफोन की इतनी सुविधा थी और न ही आनेजाने के इतने साधन. इसलिए समय बीतने के साथसाथ दोनों को एकदूसरे को भुला भी देना पड़ा.

कहते हैं कि स्त्री अपने पहले प्यार को कभी भुला नहीं पाती. आज इतने दिन बाद अनिरुद्ध को अपने सामने पा कर अनिता के प्यार की आग फिर से भड़क गई. अविनाश जितनी बार अनिरुद्ध को सर कहता अनिता शर्म से मानो गड़ जाती. आज वह अनिरुद्ध के सामने खुद को छोटा महसूस कर रही थी. उस के मन के किसी कोने में यह भी खयाल आया कि अगर उस का पहला प्यार सफल हो गया होता, तो आज वही कंपनी के मैनेजर की पत्नी होती. सभी उस का सम्मान करते और उसे छोटीछोटी चीजों के लिए तरसना न पड़ता. यही सब सोचतेसोचते अनिता की आंख लग गई.

अविनाश का सारा काम विज्ञापन विभाग तक ही सीमित था. विज्ञापन विभाग का प्रमुख उस के सारे काम देखता था. अविनाश को यह उम्मीद थी कि अनिरुद्ध अगले ही दिन उसे बुलाएगा और मौका देख कर वह उस के प्रमोशन की बात कहेगा. अनिता से अपने पुराने परिचय का इतना खयाल तो वह करेगा ही. पर धीरेधीरे 1 सप्ताह बीत गया और अनिरुद्ध का बुलावा नहीं आया तो अविनाश निराश हो गया.

लेकिन एक दिन जब अविनाश को अनिरुद्ध का बुलावा मिला तो उस की खुशी का ठिकाना न रहा. वह तत्काल इजाजत ले कर अनिरुद्ध के कमरे में पहुंच गया. अनिरुद्ध ने उसे बैठने के लिए इशारा किया और बोला, ‘‘उस दिन काफी भीड़ थी, इसलिए कायदे से बात न हो पाई. ऐसा करो, कल छुट्टी है अपनी पत्नी और बच्चों के साथ आओ, आराम से बातें करेंगे. एक बात और दफ्तर में किसी को भी पता न चले कि हम लोग परिचित हैं. यह जान कर लोग तुम से अपने कामों की सिफारिश के लिए कहेंगे और मुझे दफ्तर चलाने में दिक्कत आएगी. समझ रहे हो न?’’

‘‘जी सर,’’ अविनाश अभी इतना ही कह पाया था कि चपरासी कुछ फाइलें ले कर अनिरुद्ध के कमरे में आ गया. अविनाश वापस अपनी सीट पर लौट आया पर आज वह बहुत खुश था.

घर लौट कर अविनाश अनिता से बोला, ‘‘आज मैनेजर साहब ने मुझे अपने कमरे में बुलाया था. कह रहे थे कि भीड़ के कारण कायदे से बातें नहीं हो पाईं, कल अपनी पत्नी और बच्चों के साथ आओ, इतमीनान से बातें करेंगे.’’

आत्मनिर्भर बनने के 5 सही कदम

नीलम ने बचपन से ही अपना काम खुद किया है, जब वह केवल 5 साल की थी, तब वह बाहर से सामान लाने अपने छोटे भाई को लेकर जाती थी, इससे भाई को भी काम के बारें में धीरे-धीरे सबकुछ समझ में आने लगा था. यही वजह है कि किसी नए शहर में जाकर आज नीलम को जॉब करना, घर खोजना, वहां की परिस्थितियों से एडजस्ट करने में किसी प्रकार की समस्या नहीं हुई.

खुद की निर्णय वह खुद ले सकती है. इसके लिए वह अपने पेरेंट्स को धन्यवाद् देती है, क्योंकि उनके विश्वास और मजबूत सोच की वजह से वह इतना कुछ कर पाई, जिसका फायदा उसे अब मिल सहा है. उसे याद आता है, जब उसने बाज़ार जाते हुए पैसे गिरा दिए, पर उसके पिता डांटने के वजाय वापस फिर से पैसे दिए और सावधान रहने की सलाह दिया. इसके बाद नीलम ने हमेशा पिता की बात को ध्यान में रखा और कभी भी उससे ऐसी गलती नहीं की.

रोमा भी एक ऐसी इकलौती लड़की है, जिसने जॉब को अच्छी तरह से करने के लिए अपने पेरेंट्स से अलग फ्लैट लेकर रहने का निश्चय लिया, क्योंकि घर से जॉब पर जाने-आने में 2 घंटे लगते थे. आज वह खुश है, क्योंकि उसका फैसला सही रहा, हालाँकि उसके पेरेंट्स चाहते नहीं थे, लेकिन वह अपने निर्णय पर अटल रही और उन्हें समझाया कि उसका उनसे अलग रहना एक जरुरी है, जिससे वह जॉब अच्छी तरह से कर सकें और इसे वे साधारण तरीके से लें.

असल में आत्मनिर्भर बनने के लिए सबसे ज़रूरी है, बजट से लेकर इंवेस्टमेंट तक खुद मैनेज करना, ऐसे में अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग खुद करना पड़ता है. कॉन्फिडेंट होना इंडिपेंडेंट होने की तरफ पहला कदम होता है. इसके अलावा इसमें सेल्फ लव यानि आप जैसे हैं वैसे खुद को स्वीकार करना जैसे अपने व्यक्तित्व, शरीर, विचार, दिलचस्पी और अपने हालात को समझना. साथ ही परिस्थितियां अनुकूल नहीं हैं, ये शब्द खुद से या दूसरो से कभी भी ना कहना. इसके साथ-साथ निश्चयात्मक बनना, अपने स्किल को बढ़ाना, किसी से कुछ पूछने में संकोच न करना और एक्स्प्लोर करने से पीछे न हटना आदि.

  1. सेल्फ लव

सेल्फ लव की अगर बात करें, तो आज की व्यस्त जीवन शैली में व्यक्ति खुद के बारें में सोचने में असमर्थ होता है, जिसमे उसकी प्रतियोगिता हमेशा सामने वाले से बनी रहती है और खुद को कमतर समझते रहते है. असल में सेल्फ लव एक एक्साइटिंग कांसेप्ट है, जिसमे खुद की अच्छाइयों और कमियों दोनों को साथ-साथ पूरी तरह से एक्सेप्ट करना पड़ता है. ये एक फील गुड फैक्टर नहीं होता, जिसमे शारीरिक, मानसिक आदि की कमी को सराहते हुए, गले लगाने जैसा होता है, इससे खुद को प्रचुर मात्रा में ख़ुशी मिलती है, ग्रोथ में कमी नहीं होती और व्यक्ति खुद को सेहतमंद समझने लगता है.

2. नई स्किल्स सीखे

कई बार बचपन में व्यक्ति कई चीजे सीखता है और उसमे से कुछ चीजे बहुत रुचिपूर्ण हो सकती है, जो अब व्यक्ति को आगे बढ़ने में सहयक होती है. नई-नई स्किल्स की जानकारी से व्यक्ति के जीवन के कई नए रास्ते खुल जाते है. स्किल्स व्यक्ति का खुद के लिए किया गया एक इन्वेस्टमेंट है, क्योंकि नई स्किल्स से व्यक्ति किसी पर निर्भर नहीं होता और उसकी निपुणता उसके अंदर होती है, जो उसे नई जानकारी के साथ-साथ ग्रो करने में सहायक होती है.

3. फैसले खुद लेना सीखे  

हर दिन कुछ न कुछ नई घटनाएं घटती रहती है, ऐसे में खुद ही निर्णय लेना पड़ता है, हो सकता है कि व्यक्ति का फैसला गलत हो, लेकिन उसके लिए भी खुद को ही तैयार रहना पड़ता है. फैसला गलत होने पर भी खुद को आगे कुछ निर्णय लेने से रोके नहीं. मसलन अगर आपकी जॉब उसी शहर में किसी दूर  एरिया में है, तो आप अलग फ्लैट लेकर रहने का निश्चय वाकई एक अच्छा कदम है, क्योंकि इससे आप खुद की सोशल, इमोशनल, इकोनोमिकल स्थिति को अच्छी तरह से बैलेंस कर सकते है.

हो सकता है कि आप के पेरेंट्स आपकी इस निर्णय से असहज हो, लेकिन आपके खुलकर बातचीत से उन्हें आपके मकसद को समझने में आसानी होगी. इसके अलावा व्यक्ति को खुद के काम खुद करने, खुद की देखभाल करने आदि की शुरुआत पहले से ही कर देनी चाहिए. आत्मनिर्भर होने के लिए खुद के साथ-साथ दूसरों की बातों को भी उसके दृष्टिकोण से सोचें और उसकी गहराई में जाए, तब किसी बात के दोनों पहलुओं को अलग तरीके से और ऑब्जेक्टिवली जान सकते है.

4. पूछने से न कतराएं

आत्मनिर्भर का ये मतलब नहीं कि व्यक्ति हर बात को जानता हो, अगर किसी भी चीज की जानकारी न हो, समाधान न मिले, कही खो जाय, कंफ्यूज हो, तो पूछने से कभी न कतराएं. इससे व्यक्ति को एक सही निर्देश मिल सकता है. जैसे अगर आप खाना बनाना नहीं जानते है, तो किसी से पूछ सकते है या किताबों या मैगजीन की रेसिपी, या विडियो का सहारा ले सकते है. इससे खुद को कमजोर या बेकार न समझे, बल्कि इतने सक्षम आप खुद है कि अपनी समस्याओं का हल खुद पा सकते है और ये एक मोरल बूस्ट होता है.

5. करें एक्स्प्लोर

जितना एक्स्प्लोर व्यक्ति करता है, उतना ही उसे किसी बातकी जानकारी मिलती है. इसके लिए किसी नए स्थान में ट्रेवल करने के साथ-साथ किताबें और मैगजीन आदि पढना जरुरी होता है. उसमे ऐसी कई नई जानकारियाँ होती है. इससे किसी भी परिस्थिति को हैंडल करने के बारें में व्यक्ति समझ सकता है. अपने आसपास होने वाले किसी भी इवेंट्स में जाएँ और नई जानकारी प्राप्त करें. इसके अलावा अन्वेषण के कई प्रकार है, जिसमे अकेले ट्रेवल करना, किसी प्रोजेक्ट का टीम लीडर बनना, रोज के किसी छोटे-छोटे फैसले को खुद लेना आदि कई है.

इस बारें में मुंबई की क्लिनिकल एंड काउंसलिंग साइकोलॉजीस्ट कुमुद सिंह कहती है कि असल में बच्चे हर चीज अपने पेरेंट्स से ही सीखते है, पेरेंट्स अगर मोबाइल अधिक चलाते है, तो वे भी मोबाइल पर अधिक रहना पसंद करते है. बच्चे वही करते है, जो पेरेंट्स करते है. पेरेंट्स जो चाहते है, बच्चों को वैसा करना पसंद नहीं होता. इसलिए बचपन से ही पेरेंट्स को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वे उनके रोल मॉडल बने और ऐसी चीज न करें, जो बच्चों के विकास में बाधक बने. इसके अलावा छोटे बच्चों को कंट्रोल कभी न करें, उन्हें सिर्फ रेगुलेट करें. उन्हें अनुसाशन में रहने की वैल्यू पता होने पर वे खुद ही इसे बचपन से अपना लेते है.

इस प्रकार आत्मनिर्भर व्यक्ति में आत्मविश्वास, साहस और  नेत्तृत्व के गुण में वृद्धि होती है, जो एक सफल जीवन जीने के लिए काफी होता है.

Pandya Store में आएगा 15 साल का लीप, बदल जाएगी पूरी स्टार कास्ट

अभी हाल ही में स्टार प्लास के सीरियल ‘गुम हैं किसी के प्यार में’ नया प्रोमो आया था. उस प्रोमो में शो में जनेरेशन लीप को दिखाया गया. शो का प्रोमो दर्शको को पसंज नहीं आया था. प्रोमो में दिखाया गया था कि सत्या और सई की बेटी सवि की कहानी दिखाया जाएगा. लेकिन फैंस को प्रोमो पसंद नहीं आया. वहीं अब स्टार प्लास का सबसे फेमस सीरियल ‘पांड्या स्टोर’ में जल्द ही 15 साल का लीप आने वाला है. शो के मेकर्स 15 साल का लीप लेकर आ रहे है. ऐसे में शो के फैंस को बड़ा झटका लग सकता है. कहा जा रहा है शो के सभी एक्टर्स इस शो को छोड़गे.

15 साल का लीप

बताया जा रहा है 15 साल के लीप के बाद शो की पूरी कहानी बदल जाएगी. शो को मजेदार बनाने के लिए मेकर्स नए-नए ट्विस्ट और टर्न्स लेकर आते है. ये टीवी शो तमिलियन शो पांडियन स्टोर्स पर बेस्ड है. ये शो जनवरी 2021 में शुरू हुआ था. शो की मुख्य कास्ट की बात करें तो कृतिका देसाई, शाइनी दोशी, किंशुक महाजन, कंवर ढिल्लन, अक्षय खरोडिया, मोहित परमार, एलिस कौशिक जैसे स्टार्स नजर आ रहे हैं.

 

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सभी एक्टर्स छोड़गे शो

‘शो को अब चेंज की जरूरत है. कुछ समय पहले शो ने 7 साल का लीप लिया था. अब शो की कहानी बच्चों के इर्द-गिर्द घूम रही है तो शो में आगे उन्हीं को फोकस में रखने की प्लानिंग है. शो में 15 साल का लीप आएगा और शो के एक्टर्स शो छोड़ देंगे. क्योंकि शो की पूरी कहानी ही बदल जाएगी. शो में पुरानी कास्ट में से केवल कृतिका देसाई ही नजर आएंगी. मेकर्स नए एक्टर्स की तलाश में हैं.’ वहीं अब इस शो में केवल सास का रोल निभाने वाली कृतिका देसाई ही नजर आएंगी, बाकी एक्टर्स शो को अलविदा कह देंगे.

इस शो के करंट ट्रैक की बात करें तो शो में इन दिनों एलियन का प्लॉट दिखाया जा रहा है.

Bigg Boss Ott 2: जिया और आलिया फंसी नॉमिनेशन में, किसकी होगी घर से बिदाई

Bigg Boss Ott 2 सीजन का अगाज तो हो चुका है. टीवी का सबसे कॉन्ट्रोवर्शियल रियलिटी शो बिग बॉस हर साल किसी न किसी विवाद को लेकर चर्चा में रहता है. कॉन्ट्रोवर्शियल रियलिटी शो होने की वजह से इस शो की खासी पॉपुलैरिटी है. बिग बॉस ओटीटी 2 फैंस के बीच धमाल मचा रहा है. शो सिर्फ जियो सिनेमा पर स्ट्रीम हो रहा है, इसके बावजूद दर्शकों का शो के भर-भरकर प्यार मिल रहा है.

इस बार बिग बॉस में पूजा भट्ट, आकांक्षा पुरी, आलिया सिद्दीकी, अविनाश सचदेव, और जिया शंकर तमाम सितारे बिग बॉस ओटीटी 2 में आए. शो अपने 2 दूसरे हफ्ते में पहुंच गया है. इस बार बिग बॉस ओटीटी 2, 45 दिन के लिए जियो सिनेमा पर सट्रीम होगा.

पलक हुई घर से बेघर

बिग बॉस ओटीटी 2 के पहले हफ्ते में नॉमिनेट हुए कंटेस्टेंट में से इस रविवार को पलक पुरसवानी बिग बॉस ओटीटी 2 से बेघर हो गई. जनता के कम वोट्स के कारण पलक को बिग बॉस के घर से निकाला गया है. अब बिग बॉस ओटीटी 2 अपने दूसरे हफ्ते में पहुंच गया है.

जिया और आलिया हुई नॉमिनेट

बिग बॉस ओटीटी 2 के दूसरे हफ्ते का नॉमिनेशन टास्क घर में हो गया है, जिसमें आलिया सिद्दीकी और जिया शंकर पूरी फंस गई हैं. बिग बॉस ने घरवालों को एक टास्क दिया था, जिसमें घरवालों को किन्हीं तीन कंटेस्टेंट्स के नाम के आगे बजर दबाकर नॉमिनेट करना था. इस दौरान जिस भी कंटेस्टेंट्स के लिए तीन या उससे ज्यादा बजर दबेंगे, जो सीधा नॉमिनेट हो जाएगा.

इसके साथ ही टास्क में आलिया सिद्दीकी के लिए पूजा भट्ट, अविनाश सचदेव, पलक नाज और बेबिका धुर्वे ने बजर दबाया. वहीं जिया शंकर को मनीषा रानी, बेबिका धुर्वे और अविनाश ने नॉमिनेट किया.

बिग बॉस के घर से किसका पत्ता होगा साफ

इस बार बिग बॉस ओटीटी 2 सिर्फ 6 हफ्ते के लिए स्ट्रीम होगा. बिग बॉस ओटीटी 2 के पहले हफ्ते में पलक पुरसवानी और पुनीत सुपरस्टार निकल चुके है. वहीं अब सोशल मीडिया पर कहा जा रहा है कि इस हफ्ते शो से आलिया सिद्दीकी शो से बाहर हो जाएगी. फिलहाल फैंस को आलिया का गेम समझ नहीं आ रहा, वह शो में नजर नहीं आ रही. इस वजह से आलिया के एविक्ट होने का अंदाजा लगाया जा रहा है.

Monsoon Special: इस बारिश में अपने मेकअप को बचाने के लिए 3 टिप्स

Monsoon के मौसम में खास मेकअप की जरूरत होती है, नहीं तो उमस आपके लुक को जल्दी खराब कर सकती है. यह होंठों के रंग को ख़राब कर सकता है, मस्कारा को ख़राब कर सकता है और आपकी त्वचा को रूखा बना सकता है. इसे रोकने के लिए, हम बरसात के दिनों में परफेक्ट मेकअप के लिए कुछ मेकअप टिप्स साझा करते हैं. ये बेहतरीन मेल्ट- प्रूफ मेकअप टिप्स ताकि आपका मास्टरपीस बारिश के दौरान भी पूरे दिन टिका रहे.

1. क्रीम बेस्ड प्रोडक्ट

यदि आप क्रीम- आधारित उत्पादों का उपयोग कर रहे हैं, तो यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि आपको बरसात के दिनों में कम से कम प्रोडक्ट का उपयोग करना होगा. तीव्र नमी के कारण, यह भी सुनिश्चित करें कि यदि आप क्रीम उत्पादों का उपयोग कर रहे हैं, तो आपको इसे अच्छी तरह से मिश्रण करना होगा और इसे पाउडर उत्पाद के साथ सेट करना होगा ताकि यह हिल न जाए. इसके अलावा, यह आपको त्वचा पर एक मैट, मखमली फिनिश पाने में मदद करेगा, जो एक ‘एयरब्रश’ प्रभाव प्रदान करेगा.

2. सेटिंग पाउडर का प्रयोग करें

बरसात के मौसम में मेकअप के साथ सेटिंग पाउडर जरुर इस्तेमाल करें.सुनिश्चित करें कि आपका मेकअप किसी अच्छे सेटिंग पाउडर से अच्छी तरह सेट हो जाए. इससे मेकअप लंबे समय तक टिका रहेगा.  पाउडर की थोड़ी मात्रा को समान रूप से चेहरे पर लगा लें. इसके लिए आप  एक बड़े ब्रश का उपयोग करें.

3. बोल्ड, खुशनुमा रंग की लिपस्टिक अपनाए

आमतौर पर एक महिला को अपनी लिपस्टिक बहुत पसंद होती है. अगर आपके पास एक साथ कई लिपस्टिक हैं तो यह कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी. लेकिन बोल्ड लिप कलर के बारे में कुछ ऐसा है जो महिलाएं खासकर मानसून के दौरान बिल्कुल पसंद करती है. इसके अतिरिक्त, बरसात के मौसम में अपनी त्वचा का हमेशा ख्याल रखें ,हमेशा अपने हाथ धोएं और अपना चेहरा साफ़ रखे. कम से कम प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करें, ज्यादा फाउंडेशन न लगाएं. हमे अपने मेकअप को हल्का और सांस लेने योग्य रखना चाहिए.

इस मौसम में आपको मेकअप को पिघलाने वाली ताकत जैसे- गर्मी, उमस और बारिश  का सामना करना पड़ेगा. तो ऐसे में आप मेकअप की परतों के साथ बाहर निकलना और प्रकृति के नखरे के आगे झुकना सबसे बुद्धिमानी भरा विचार नहीं हो सकता है, लेकिन पूरी तरह से सिंपल चेहरे  के साथ जाना भी एक विकल्प नहीं है.

राजनीति भी व्यवसाय

विरासत की राजनीति भारतीय जनता पार्टी का एक लुभावना नारा है जिस में कम पढ़ेलिखों को तो छोडि़ए, अच्छे पढ़ेलिखे भी फंस जाते हैं. राजाओं के जमाने में राजा का बेटा ही राजा बने का सिद्धांत था. लोकतंत्र में यह गलत है पर जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, सोनिया गांधी और अब राहुल गांधी की राजनीति को विरासत की राजनीति ठहराने के साथ इसे लोकतंत्र पर धब्बा बता कर वोट बटोरे जा रहे हैं.

अगर भारतीय जनता पार्टी की रगों में कहीं भी लोकतंत्र के प्रति आस्था होती तो इस आरोप में दम होता. भारतीय जनता पार्टी ने अपनी राजनीति न लोकतंत्र की भावनाओं पर खड़ी की है, न बराबरी के सिद्धांत पर और न ही स्वतंत्र विचारों की रक्षा पर. उस ने अपनी राजनीति पूरी तरह राममंदिर के नाम पर खड़ी की है. राम जन्म स्थल का नाम ले कर एक आंधी उड़ाई है जिस में जनता को पूरी तरह से सफलता से बहकाया गया है.

अगर राम जन्म स्थल ही भाजपा का मुख्य उद्देश्य व लक्ष्य है तो भाजपा कैसे विरासत की राजनीति के विरोध की बात कह सकती है? राम का जन्म अगर अयोध्या के बड़े राजा दशरथ के महल में हुआ था और राजा दशरथ के पुत्र होने के बाद उन्हें राजसिंहासन मिलना तय था तो इसे लोकतंत्र के लिए कैसे आदर्श कहा जा सकता है? जब राजमहल की राजनीति (आश्चर्य है कि सतयुग में इस तरह की राजनीति थी) के कारण राम को गद्दी पर अधिकार छोड़ना पड़ा तो वह छोटे भाई भरत को मिला, किसी अन्य जनता के चुने प्रतिनिधि को नहीं.

ठीक है, उस काल में संविधान जैसी कोईर् चीज नहीं थी, वोटिंग नाम की बात नहीं थी, लेकिन बात आज की हो रही है कि उसी जबान से विरासत को कोसा जाता है और फिर राज्य के वारिस दशरथ पुत्र राम का गुणगान ही नहीं किया जाता, बल्कि उन के लिए मरनामारना भी ठीक माना जाता है. अयोध्या के मंदिर के नाम पर तो हजारों जानें गईं, अब हर साल रामनवमी पर कुछ जानें चली जाती हैं, क्यों, एक वारिस की महत्ता को आज भी कायम रखने के लिए?

कांग्रेस की यह बड़ी गलती है कि उस ने किसी और नेता को पनपने नहीं दिया. मोरारजी देसाई, कामराज, नारायण दत्त तिवारी, शरद पवार, ममता बनर्जी, जगन रेड्डी आदि सैकड़ों उभरते नेताओं को अपनी पार्टियां बनानी पड़ीं जिन में से कुछ तो नष्ट हो गईं, कुछ भारतीय जनता पार्टी में चली गईं तो कुछ बाहर रह कर गुलाम नबी आजाद की तरह कांग्रेस की जड़ों में तेजाब डालती रहती हैं.

विरासत की राजनीति को चुनावी हथकंडा बनाना भारतीय जनता पार्टी के लिए दोमुखी बात करना है. यह बात कांग्रेस छोड़े नेता कह सकते हैं लेकिन राम और कृष्ण के भक्त नहीं कह सकते क्योंकि इन के भगवानों को नाम का स्तर पारिवारिक विरासत के विवाद के कारण मिला. कृष्ण भी विरासत में मिले. राज के बंटवारे में मुख्य पात्र थे वे.

राजनीति में विरासत की कोई जगह नहीं है पर यह सही है कि राजनीति जिन घरों में रोज चर्चा का हिस्सा होती है वहां के बच्चे स्वाभाविक तौर पर इस में कूद पड़ते हैं. हर देश में यह हो रहा है. राजनीति भी दूसरे व्यवसायों की तरह है जिस में बचपन की ट्रेनिंग बहुत काम आती है.

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