बरसात की काई: भाग 3- क्या हुआ जब दीपिका की शादीशुदा जिंदगी में लौटा प्रेमी संतोष?

अगले दिन दीपिका ने 1 नहीं 2 बार उदय से फोन पर बात की. ‘‘सुबह के समय उदय खुश था, किंतु अभी जब मैं ने बात की तो वह कुछ चुप सा था. क्या बात हो सकती है?’’

‘‘दफ्तर के किसी काम में उलझा होगा. तुम्हें यहां उदय के मूड के बारे में बात करनी थी तो आई ही क्यों?’’ उदय के जिक्र से संतोष चिढ़ने लगा था. आज का दिन भी सुस्त बीता. जैसा सोचा था, वैसे कुछ नहीं हो रहा था. जबजब संतोष दीपिका को बिस्तर पर ले जाता, उस का व्यवहार इतना शिथिल रहता मानो सब कुछ उस की इच्छा के खिलाफ हो रहा हो. जिस अल्हड़ यौवन की खुशबू में संतोष खिंचा चला आता था, वह कहीं गायब हो चुकी थी. ऊपर से होटल का खर्च अलग. अगली शाम को ही दोनों ने लौटने की सोच ली.

‘‘कह दूंगी उदय से कि आप की याद आ रही थी.’’

दीपिका के कहने पर संतोष ने उस की आंखों को भेदते हुए पूछा, ‘‘कहीं यही सच तो नहीं?’’

दीपिका चुप रही. किंतु उस की झुकी नजरों ने भेद खोल दिया था. संतोष की उदासीन भावभंगिमा उस के उदास चेहरे से मेल खा रही थी. दीपिका को उस के घर रवाना कर संतोष अपने घर निकल गया.

शाम को घर लौटने पर अचानक दीपिका को अपने समक्ष पा उदय थोड़ा हैरान हुआ.

‘‘सरप्राइज,’’ चिल्ला कर दीपिका ने उदय के गले में बांहें डाल दीं.

‘‘जल्दी कैसे आ गई तुम? तुम्हें तो 2 दिन बाद आना था?’’ उदय के स्वर में कोई आवेग नहीं था.

‘‘क्यों, तुम्हें खुशी नहीं हुई क्या? अरे, तुम्हारी याद जो मेरा पीछा नहीं छोड़ रही थी, इसलिए जल्दी चली आई,’’ खाना लगाते हुए दीपिका चहक रही थी. आज उस का सुर उत्साह से लबरेज था, ‘‘इतने थके से क्यों लग रहे हो? तबीयत तो ठीक है न?’’

‘‘हां, थोड़ी थकान है. जल्दी सो जाऊंगा तो सुबह तक स्वस्थ महसूस करूंगा.’’

अगली सुबह जब उदय दफ्तर के लिए निकल रहा था तब संतोष को घर में आते देख पूछ बैठा, ‘‘आज इतनी जल्दी आ गए आप संतोष? लगता है मन नहीं लगता आप का दीपिका के बिना… और कितने दिन चलेगी आप की संगीत की कक्षा?’’

उदय के हावभाव देख कर संतोष और दीपिका दोनों को हैरानी हुई. अमूमन संतोष को देख उदय प्रसन्न होता था, उन की संगीत कक्षा की प्रगति के बारे में पूछता था, एक संगीत समारोह रखने की बात कहता था किंतु आज उदय उदासीन था. आज संतोष भी उदास था और दीपिका थोड़ी चिंतित कि क्यों आ गया संतोष इतनी सुबह… उदय के दफ्तर जाने का इंतजार भी नहीं किया.

उदय के चले जाने के बाद दीपिका ने कहा, ‘‘संतोष, मैं आजीवन तुम्हारी आभारी रहूंगी. तुम मेरे जीवन में एक बार फिर लौट कर आए. तुम ने मुझे वही खुशी के पल देने चाहे, जिन के लिए शायद मैं भागती फिरती पर कभी उन्हें पाने की लालसा को शांत नहीं कर पाती. अच्छा हुआ जो पल तुम ने मेरी झोली में डाले. अब मैं समझ गई हूं कि मुझे अपने जीवन में क्या चाहिए मृगतृष्णा के वे क्षण या ठोस धरातल भरी जिंदगी.’’

‘‘संतोष, मैं शादीशुदा हूं, यह बात शायद मैं भूल गई थी. एक षोडशी की तरह मैं अपने प्रेमी की बांहों में खो कर अपना संसार तलाश रही थी. यदि तुम मुझे मेरी इस गृहस्थी से दूर, होटल के उस कमरे में नहीं ले जाते तो मुझे कभी नहीं ज्ञात होता कि मैं इस गृहस्थी में कितनी रम चुकी हूं. जब तुम इस घर में आते हो तब मुझे इस घर को छोड़ कर जाने का कोई भय नहीं होता. लेकिन इस घर के बाहर कदम रखने पर मैं ने जाना कि इस पहचान के बिना मैं कितनी अधूरी हूं.

‘‘उदय की क्या गलती है. उन्होंने हमेशा मेरा ध्यान रखा, मुझे पूरा प्यार दिया, अपने परिवार में सम्मान दिया. मैं किस हक से उन की नाक पूरे समाज में कटवा दूं? मेरी इस एक हरकत से उदय का प्यार पर से विश्वास उठ जाएगा. अपनी जिंदगी में रंग भरने हेतु मैं उन की जिंदगी को स्याह नहीं कर सकती.’’

‘‘काश, हमारी शादी हो गई होती तो मैं तुम्हें कभी खुद से अलग नहीं  होने देता पर अब… अब तुम्हारी मरजी के आगे मैं बेबस हूं,’’ पिछले दिनों के अनुभव और आज दीपिका के मत के आगे संतोष के पास चुप रहने के अलावा और कोई चारा नहीं था. वह उलटे पांव लौट गया.

दीपिका सारे घर में बेचैन घूमती रही. सारा दिन सोचती रही कि कैसे उस के कदम इतनी गलत दिशा में उठ गए. सारा दिन मंथन करने के बाद उस ने निर्णय लिया कि वह उदय को सब कुछ बता देगी. बस, दिल पर इतना भारी बोझ ले कर आगे की पूरी जिंदगी तय करना बहुत मुश्किल होगा.

शाम को जब उदय घर लौटा तब दीपिका ने शांत स्वर में उसे सारी बात बता दी.

उदय मुंह नीचे किए बैठा सुनता रहा और दीपिका नजरें नीची किए सब कहती गई, ‘‘मुझे माफ कर दो उदय. मुझ से बहुत बड़ा गुनाह हो गया. आगे मेरी जिंदगी में जो होगा वह तुम्हारे निर्णय पर निर्भर करेगा.’’

उदय चुपचाप उठ कर चला गया और रात भर बैठक में ही रहा. दीपिका अपने कक्ष में चली गई. बैठक में बैठे हुए उदय विचारों के भंवर में घूमने लगा…

3 दिन पहले उदय को दफ्तर के कार्य से पास के शहर जाना पड़ा था. अपना काम पूरा करने के बाद वह मायके गई अपनी पत्नी के लिए पसंदीदा मिठाई लेने बाजार पहुंच गया. वहां घूमते हुए वह हूबहू दीपिका के हाथ से बने स्वैटर को देख स्तब्ध रह गया. ध्यान दिया तो वह स्वैटर संतोष ने पहना था और उस की बांहों में बांहें डाले उदय की पत्नी दीपिका लहरा रही थी. यह दृश्य देख कर उदय के मन में रोष, प्रतिघात, वेदना, संताप के मिलेजुले भाव तूफान मचाने लगे. उस का सिर घूमने लगा. इतना बड़ा विश्वासघात? उस की अपनी जीवनसंगिनी ने उस के साथ इतना बड़ा धोखा किया. उस समय उदय खून का घूंट पी कर रह गया था. लेकिन आज दीपिका के सब कुछ बताने पर उदय के मनमस्तिष्क में एक प्रतिद्वंद्व शुरू हो गया. अब तक वह दीपिका को सजा देने की सोच रहा था, बस इस प्रतीक्षा में था कि वह उसे कुछ बताती है या नहीं. किंतु आज दीपिका के आत्मसमर्पण करने पर उस की आंखों से बह रही प्रायश्चित्त की धारा ने उदय के मन की अग्नि पर कुछ छींटे छिड़क दिए थे.

सारी रात इसी ऊहापोह में गुजरी. वह दीपिका को सजा दे या उस के प्रायश्चित्त को देखते हुए उसे माफ कर दे. यदि दीपिका को सजा देता है तो क्या खुद उस की तपिश से बच पाएगा? अपनी गृहस्थी तोड़ बैठेगा और जग हंसाईर् होगी वह अलग. पर इतने बड़े विश्वासघात के पश्चात क्या वह अपनी पत्नी पर भरोसा कर पाएगा?

अल्लसुबह दीपिका घर के रोजमर्रा के कार्यों में लग गई. एक हिचकिचाहट अवश्य थी उस की भावभंगिमा में. चाय का प्याला थमा वह उदय के पास बैठ गई, ‘‘क्या निर्णय लिया आप ने? आप का हर निर्णय मुझे स्वीकार्य होगा.’’

‘‘दीपिका, मैं यह बात पहले से जानता हूं. जब तुम मायके का बहाना बना कर दूसरे शहर चली गई थीं तब मैं ने तुम दोनों को एकसाथ देख लिया था. उस पर तुम्हारे मायके भी मेरी बात हुई थी जहां से मुझे यकीनन पता चल गया कि तुम अपने मायके नहीं गई हो. मैं तुम्हारे बताने के इंतजार में ही था. उदय की ये बातें सुन कर दीपिका की आंखों से प्रायश्चित्त की बूंदें टपक पड़ीं.

‘‘यदि मैं ने तुम्हें माफ नहीं किया तो इस अग्नि में मैं भी सारी उम्र जलता रहूंगा. लेकिन माफ करना इतना सरल नहीं. पता नहीं मैं दोबारा तुम पर कब भरोसा कर पाऊंगा. किंतु मैं अपनी गृहस्थी नहीं तोड़ना चाहता. सारी रात सोचने के बाद मैं इस नतीजे पर पहुंचा हूं कि तुम्हारी आंखों में जो प्रायश्चित्त दिखाई दे रहा है और अतीत में जो हम ने सुखद पल व्यतीत किए हैं, उन की तुलना में आज का यह धोखा कहीं हलका है. इसलिए मैं तुम्हें एक मौका और दूंगा परंतु इस मौके का भरपूर फायदा उठाना तुम्हारी जिम्मेदारी है.’’

सही तो है, यदि बरसात में हमारे आंगन में काई जम जाए तो क्या हम आंगन तोड़ बैठते हैं? नहीं, हम उस हिस्से को सुखा कर उस काई को साफ करते हैं और फिर ध्यान रखते हैं कि हमारे घर में अनचाही उपज न पनपे. बरसाती काई का उग जाना इस बात का संकेत नहीं कि हमारे आंगन में कोई कमी है, अपितु वह केवल इतना सा संदेश है कि हमारे घरआंगन को थोड़े और ध्यान की आवश्यकता है.

कैसा हो नवजात का आहार

किसी भी महिला के जीवन में बच्चे को जन्म देना सब से ज्यादा खुशी के पलों में से एक है और बच्चा जब किलकारी भरने लगता है और घुटनों के बल चलने लगता है तो घर में सब की खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहता. नवजात शिशु की सिर्फ 3 मांगें होती हैं. पहली, वह अपनी मां के बाजुओं की गरमाहट चाहता है, तो दूसरी, वह स्तनपान का अपना आहार चाहता है और तीसरी, वह मां की उपस्थिति में अपनी सुरक्षा चाहता है. उस की ये तीनों ही मांगें स्तनपान से पूरी हो जाती हैं.

बच्चे के जन्म के पहले ही दिन से बच्चा और मां एक अटूट बंधन में बंध जाते हैं, जो स्तनपान द्वारा और मजबूत होता जाता है. लेकिन पहले बच्चे के जन्म के समय मां को उस की देखभाल और आहार के बारे में ज्यादा पता नहीं होता, इसलिए कई बार वह गलतियां कर बैठती है.

नवजात शिशु का आहार कैसा हो इस के बारे में बता रहे हैं एशियन इंस्टिट्यूट औफ मैडिकल साइंस के सीनियर कंसल्टैंट जसप्रकाश सेन मजूमदार.

  1. शुरुआती आहार

शिशु जब जन्म लेता है तो वह सिर्फ मां के दूध पर ही निर्भर रहता है. उसे पानी देने की भी जरूरत नहीं पड़ती. मां का दूध शिशु के लिए शुद्ध, मिलावट रहित और पोषक तत्त्वों से भरपूर होता है. इस का सही मात्रा में सेवन करवाने से बच्चा स्वस्थ रहता है और मां व शिशु में इस से भावनात्मक रिश्ता बन जाता है. ब्रैस्ट मिल्क में इम्युनोग्लोबुलिन (सुरक्षात्मक प्रोटीन) मिला होता है, जो शिशु को बाहरी संक्रमण से बचाता है.

2. 6 माह का होने तक आहार

नवजात शिशु शुरू में कुछ दिनों तक दिन में लगातार कई बार कुछ अंतराल पर दूध की मांग करता है. उस में पहले हफ्ते में वह दिन में 8 से 15 बार दूध की मांग करता है, तो पहले हफ्ते के बाद 6 से 8 बार. जो शिशु स्तनपान करते हैं वे डब्बाबंद दूध पीने वाले शिशुओं की तुलना में अधिक बार दूध पीने की मांग करते हैं. फिर 6 से 8 सप्ताह के बीच शिशु स्तनपान और सोने के नियम का पालन करने लग जाता है.

जसप्रकाश सेन मजूमदार का कहना है कि शिशु के जन्म से ले कर 6 महीने तक सिर्फ ब्रैस्ट फीडिंग करवानी चाहिए. इस में पहले दिन से 15 से 20 दिन तक हर 2 घंटे पर दोनों ब्रैस्ट से फीडिंग कराएं. इस के अलावा यदि शिशु की मांग और है, तो इस से ज्यादा भी फीडिंग करा सकती हैं. ऐसा करने से उसे पानी की भी जरूरत नहीं पड़ती है.

3. 6 माह का होने पर

6 माह की आयु से शिशु की अच्छी सेहत, बढ़त और विकास के लिए ऊर्जा के अतिरिक्त स्रोत और अन्य आवश्यक तत्त्व जरूरी होते हैं. उस के लिए मां का दूध पर्याप्त नहीं होता. इसलिए जब शिशु 6 माह का हो जाए तब मां के दूध के साथ उसे अर्ध ठोस आहार भी देना शुरू कर देना चाहिए. वह आहार ठोस आहार इसलिए नहीं होना चाहिए, क्योंकि ठोस आहार वक्त से पहले खिलाने से मोटापा, मधुमेह, उदर रोग, ऐलर्जी तथा अन्य विकृतियों का जोखिम बढ़ जाता है. इसी तरह अगर 6 महीने के बाद आहार देने में देरी की जाए तो बच्चे की सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है.

4. 6 महीने से 24 महीने का होने तक

यह समय किसी भी बच्चे के लिए अति संवेदनशील समय होता है, क्योंकि बच्चे के शरीर का सब से तीव्र विकास इसी समय होता है. बच्चे के शारीरिक वजन के आधार पर पोषण की जरूरत इस समय उच्चतम स्तर पर होती है. यही वह समय होता है जब कई बच्चों में कुपोषण की शुरुआत होने लगती है. बच्चे की पाचन प्रणाली 6 महीने की उम्र में ही इस काबिल हो जाती है कि वह अर्ध ठोस आहार को पचा पाए, क्योंकि 4 से 6 माह के दौरान उस का पेट और गुरदे परिपक्व हो जाते हैं. इस से मां के दूध के अलावा अन्य आहार को पचाने में उसे दिक्कत नहीं होती.

क्या दें आहार 6 महीने के शिशु को

  •  6 महीने के शिशु को मां के दूध के साथ फू्रट जूस दें, जिस में संतरा, मौसमी, कीनू व सेब का जूस हो. ध्यान रखें कि जूस घर पर ही निकाल कर दें. वह बाजार का न हो.
  • केले को मैश कर के दही या दूध के साथ दें.
  • कस्टर्ड बना कर खिलाएं.
  •  चावल, सूजी की खीर व दलिया को दूध में पका कर खिलाएं.
  • लौकी, गाजर, आलू जो उसे पसंद आए, उस का सूप बना कर दें. इन सब्जियों को मूंग की दाल की खिचड़ी में भी मिला कर दे सकती हैं.
  • चावल के साथ मूंग की दाल मिला कर प्लेन खिचड़ी दें.
  •  ग्लूकोज बिस्कुट और दूध, दही दें.
  • इडली, सांभर दें.
  •  इन सब ठोस आहार के साथ पानी हमेशा उबाल कर ठंडा कर के ही दें और कम से कम डेढ़, 2 साल तक बच्चे को ब्रैस्ट फीडिंग कराएं.

आहार कैसे दें

पहली बार शिशु को कोई भी आहार कम मात्रा में ही देना चाहिए ताकि वह उस के स्वाद से परिचित हो सके. फिर धीरेधीरे उस की मात्रा बढ़ाती जाएं.

वैसे कोई भी नया भोजन देने से वह बच्चे को शुरुआत में अपच हो सकता है, इसलिए कोई भी एक खाद्यपदार्थ नियमित न दें. उसे बदलबदल कर दें और उस का असर देखें कि कहीं उसे उस से ऐलर्जी तो नहीं हो रही है. यह भी समों कि किसी भी फूड से अगर किसी बच्चे को ऐलर्जी हो रही है, तो यह जरूरी नहीं कि वह दूसरे बच्चे को भी नुकसान पहुंचाएगा.

क्यों होती है ऐलर्जी

बच्चे की सेहत की बुनियाद स्वस्थ खानपान पर ही टिकी होती है, लेकिन कई बार किसी खाने की चीज से बच्चे को ऐलर्जी हो जाती है. दरअसल, खानेपीने के जरीए जब बच्चे के शरीर में कोई बाहरी पदार्थ आता है तो उस का इम्यून सिस्टम शरीर की अन्य बीमारियों से लड़ने के बजाय उस बाहरी पदार्थ के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हो कर गंभीर प्रतिक्रिया व्यक्त करने लगता है. इसी वजह से बच्चे में ऐलर्जी के लक्षण दिखने लगते हैं. अगर कोई चीज खाने के बाद बच्चे को पेट या सिर में दर्द, जीमिचलाना, खांसी, त्वचा पर चकत्ते, खुजली या दाने निकलने जैसी कोई समस्या हो तो उसे नजरअंदाज न करें.

इन के अलावा बच्चे में ऐलर्जी के कई और लक्षण भी देखने को मिलते हैं.

फिक्स्ड फूड ऐलर्जी: जिस चीज से बच्चे को ऐलर्जी होती है उसे खाते ही उस के होंठों में सूजन और गले में खुजली होने लगती है. ऐसी ऐलर्जी की पहचान और उपचार आसान है.

साइक्लिकल फूड ऐलर्जी: ज्यादातर बच्चों को यही ऐलर्जी होती है, लेकिन इस की पहचान और उपचार बहुत मुश्किल है. इस तरह की ऐलर्जी के लक्षण कभीकभी 3 दिन बाद दिखाई देते हैं, क्योंकि इस की प्रतिक्रिया इम्यून सिस्टम पर निर्भर करती है. आमतौर पर इस के लक्षण अलगअलग तरह से प्रकट होते हैं. अगर किसी बच्चे को दूध से ऐलर्जी है तो ऐसा भी हो सकता है कि उसे पनीर, दही या आइसक्रीम से भी ऐलर्जी हो. कुछ बच्चों को गेहूं, अंडा, मछली, लीची, अंगूर और अजीनोमोटो से भी ऐलर्जी होती है. इस ऐलर्जी के लक्षण अलगअलग होते हैं. कुछ बच्चों में उम्र बढ़ने के साथ ये लक्षण खत्म हो जाते हैं और कुछ में हमेशा बने रहते हैं.

ऐलर्जी से बचाव

  •  बच्चे की एक फूड डायरी बनाएं जिस में रोज सुबह से रात तक उसे खाने को कब क्या दिया गया और वह खाना किनकिन चीजों से मिल कर बना था, उस का पूरा विवरण दर्ज करें. इस से उपचार में मदद मिलेगी.
  •  रोज यह देखें कि कौन सी चीज खाने के बाद बच्चे में ऐलर्जी के लक्षण दिखते हैं. उस खास चीज के आगे स्टार का निशान लगा दें और बच्चे को कम से कम 4 दिनों तक उस खास चीज से दूर रखें.
  • 5वें दिन बच्चे को वही चीज फिर से खाने को दें जिसे बंद किया था. उस खाने के बाद की प्रतिक्रिया का बारीकी से निरीक्षण करें. अगर वही चीज दोबारा शुरू करने से बच्चे में ऐलर्जी के लक्षण दिखें तो समों उसे साइक्लिकल ऐलर्जी है. उसे तुरंत डाक्टर के पास ले जाएं.
  •  ऐलर्जी से बचाने के लिए खानेपीने की चीजों के पैकेट पर लिखा विवरण ध्यान से पढ़ लें ताकि पहले से ही यह मालूम रहे कि जो बच्चे को खिलाने जा रही हैं उस में कोई ऐसा तत्त्व नहीं है जिस से उसे ऐलर्जी हो.
  • जिस चीज से बच्चे को बारबार ऐलर्जी होती हो, उसे उस चीज से दूर रखें.
  •  बच्चे में ऐलर्जी का कोई भी लक्षण दिखाई दे तो पहले उस का टैस्ट कराएं और किसी अच्छे डाक्टर से इलाज कराएं, क्योंकि थोड़ी सी सावधानी से ऐलर्जी की समस्या से निबटा जा सकता है.
  • इन सब बातों का कोई भी मां ध्यान रखेगी तो आसानी से अपने बच्चे को ऐलर्जी से बचा पाएगी.

ध्यान देने वाली बातें

  • 6 माह के बाद बच्चे के दांत निकलने शुरू हो जाते हैं. इस समय उस के दांतों में इरिटेशन होता है. उस इरिटेशन को शांत करने के लिए वह किसी भी चीज को मुंह में डाल लेता है और अपने मुंह में रखे रहता है. इस से दस्त होने की संभावना होती है. इस आदत को कम करने के लिए बच्चे को बिस्कुट या टोस्ट दें जिसे वह चूसता रहे.
  • बच्चे का खाद्यपदार्थ पूरी तरह से पका हो.
  •  खाद्यपदार्थ मिर्चमसाले वाला व वसायुक्त न दें. वही दें जो वह पचा पाए.
  • कैफीन युक्त पदार्थ न दें. इस से नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा.
  •  बहुत से बच्चों में अंगूठा चूसने की आदत होती है और यह आदत छुड़ाई न जाए तो उस के बड़े होने तक बनी रहती है. इस के लिए डाक्टर से सलाह ले कर अपने बच्चे के अंगूठे में दवा लगा दें, जिस से अंगूठा चूसने की उस की आदत छूट जाएगी. इस के अलावा घर पर ही आप उस के हाथों में कौटन के ग्लब्स पहना दें या अंगूठे पर नीम की पत्ती का लेप लगा दें. एक बार इस का टेस्ट लेने के बाद वह दोबारा मुंह में उंगली नहीं डालेगा.

अगर है इकलौती संतान तो हो जाएं सावधान

जिन मातापिता का एक ही बेटा या बेटी है, वे सावधान हो जाएं. एक अध्ययन में दावा किया गया है कि जिन दंपतियों का एक ही बच्चा है तो उस के मोटापे का शिकार होने की संभावना 2 या 2 से अधिक बच्चों वाले परिवार की तुलना में ज्यादा होती है. यह अध्ययन 12,700 बच्चों पर किया गया. यह अध्ययन यूरोपीय रिसर्च प्रोजैक्ट आईडैंटिफिकेशन ऐंड प्रिवैंशन औफ डाइटरी ऐंड लाइफस्टाइल इंडस्ट हैल्थ इफैक्ट्स इन चिल्ड्रन ऐंड इंफैक्ट्स का हिस्सा है. इस प्रोजैक्ट का उद्देश्य 2 से 9 साल तक के बच्चों के खानपान, जीवनशैली और मोटापा व उस के प्रभावों पर गौर करना है. यूनिवर्सिटी औफ गोथेनबर्ग स्थित साहग्रैस्का ऐकैडमी में अनुसंधानकर्ता मोनिका हंसबर्गर का कहना है कि जिस परिवार में एक ही बच्चा है, उस में मोटापे का खतरा ज्यादा बच्चों वाले परिवार की तुलना में 50% से अधिक होता है. इस की वजह छोटे परिवार का माहौल और पारिवारिक संरचना में अंतर हो सकता है. अध्ययन के अनुसार यूरोप में 2.20 करोड़ बच्चे मोटापे के शिकार हैं. इटली, साइप्रस और स्पेन में बच्चों में मोटापा यूरोप के उत्तरी देशों की तुलना में 3 गुना अधिक है.

बीमारियों का खतरा

लगभग 70% मोटे बच्चों के भारीभरकम वयस्क में स्थानांतरित होने की पूरी आशंका रहती है. एकतिहाई बच्चे अपनी किशोरावस्था तक मोटे हो जाते हैं. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में 13 से 16 साल के बीच की उम्र सीमा में हर 10 में से 1 स्कूली बच्चा मोटापे का शिकार है. ऐसोचैम द्वारा विश्व हृदय दिवस के ठीक पहले किए गए सर्वेक्षण में 25 निजी और सरकारी स्कूलों के 3,000 बच्चों को शामिल किया गया. बच्चों में तेजी से बदलती जीवनशैली और खानपान की आदतों को इस के लिए जिम्मेदार बताया गया. लगभग 35% अभिभावक अपने बच्चों को रोज 40 से 100 रुपए दिन के समय कैंटीन में भोजन करने के लिए देते हैं, जबकि 51% बच्चे 30-40 रुपए पास्ता और नूडल्स में खर्च करते हैं. सर्वेक्षण में कहा गया है कि मोटापे के शिकार बच्चों में हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा 35% तक बढ़ जाता है. मोटे बच्चों में उच्च रक्तचाप, उच्च कोलैस्ट्रौल स्तर, मधुमेह और दिल के दौरे का खतरा बढ़ जाता है.

यदि आप का बच्चा मोटा है

क्या आप नहीं चाहेंगे कि आप का बच्चा ताउम्र स्वस्थ और निरोगी रहे? लेकिन यदि वह बचपन में ही मोटापे की गिरफ्त में आ गया तो उस का परिणाम उसे ताउम्र भुगतना पड़ेगा. मोटापे से संबंधित नौनकम्युनिकेबल बीमारियां जैसे टाइप-2 डायबिटीज, मैलाइटस, इंसुलिन रैजिसटैंस, मैटाबोलिक सिंड्रोम और पौलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम ओवरवेट बच्चों को शिकार बना सकते हैं. यदि आप का बच्चा मोटा है तो उसे कैंसर का खतरा अन्य बच्चों की अपेक्षा ज्यादा है. वजन बढ़ने के कारण 10 तरह के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है. मैडिकल जर्नल लैंसेट में प्रकाशित शोध में कहा गया है कि मोटापे के कारण गर्भाशय का कैंसर बढ़ने का खतरा ज्यादा है. इस के बाद पित्ताशय, गुरदा, गर्भाशय, थायराइड और ब्लड कैंसर की बारी आती है. बौडी मास इंडैक्स ज्यादा होने के कारण लिवर, मलाशय, अंडाशय और स्तन कैंसर होने का खतरा ज्यादा रहता है. लंदन स्कूल औफ हाइजीन ऐंड ट्रीपकल मैडिसिन के शोधकर्ताओं ने यह अध्ययन 50 लाख लोगों पर किया. वैसे मोटापा सौ रोगों की जड़ है. इस से उच्च रक्तचाप और हृदय रोग होने की आशंका भी बढ़ जाती है. जर्नल न्यूट्रीशन ऐंड डायबिटीज में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, बच्चों में मोटापे का संबंध उन का खानपान, उन की टीवी देखने की आदत और घर के बाहर खेलने जाने के वक्त पर बहुत निर्भर करता है और इस में मातापिता की भूमिका महत्त्वपूर्ण है. अध्ययन के अनुसार जिस परिवार में 1 ही बच्चा है, वह मुश्किल से ही बाहर खेलने जाता है. वह घर में ही दुबका रहता है और शिक्षा का स्तर भी प्राय: कम ही होता है. उस का अधिकांश वक्त बैडरूम में टीवी देखने में व्यतीत होता है.

परेशानी का सबब

एक शोध से पता चला है कि 97% इकलौते बच्चे ओवरइटिंग और ओवरडाइट के कारण मोटापे के शिकार हुए हैं. शोध में 5 से 8 साल की आयु के इकलौते स्कूली बच्चों को शामिल किया गया था. यह भी पाया गया कि ये बच्चे अपनी डाइट की तुलना में ऐक्सरसाइज बहुत कम करते हैं. एक सर्वे से पता चलता है कि 8 से 18 साल की उम्र के बच्चे औसतन 3 घंटे प्रतिदिन टीवी देखने में खर्च करते हैं. इकलौता बच्चा आमतौर पर घर पर ही रहता है. मैदानी खेलों से उस का कोई नाता नहीं रहता. पलंग या कुरसी पर बैठेबैठे या तो वह वीडियो गेम खेलता है या फिर टीवी देखता है. टीवी के सामने बैठ कर ही वह भोजन करता है. इस से उसे इस बात का पता ही नहीं चलता कि कितना खा गया. शुरू में तो मांबाप अपने इकलौते को गोलमटोल होते देख बडे़ खुश होते हैं, लेकिन जब वह ओवरवेट या गुब्बारे की भांति फूलता चला जाता है, तो उन्हें चिंता सताने लगती है. सच भी है, यदि 5 साल के बच्चे का वजन 75 किलोग्राम और 8 साल के बच्चे का वजन 140 किलोग्राम हो जाए तो यह न केवल बच्चों के लिए अपितु मातापिता के लिए भी परेशानी का सबब बन जाता है.

उड़ता है मजाक

सोशल मीडिया पर मोटापे को ले कर तकलीफदेह और डराने वाले मजाक बहुत ज्यादा होते हैं. विशेष कर ट्विटर ऐसे चुटकुलों का अहम ठिकाना बना हुआ है. अमेरिका के नैशनल इंस्टिट्यूट औफ हैल्थ के शोधकर्ताओं का कहना है कि यह अध्ययन ब्लौग, ट्विटर, फेसबुक, फोरम, लिकर और यूट्यूब जैसी सोशल साइटों पर वजन को ले कर होने वाली चर्चाओं को ले कर किया गया. इस में ट्विटर शीर्ष पर रहा जहां मोटापे का सब से ज्यादा मजाक उड़ाया जाता है और कमैंट किए जाते हैं. ट्विटर के बाद फेसबुक दूसरे स्थान पर है. शोधकर्ताओं ने 2 महीनों के दौरान 13.7 लाख पोस्ट का अध्ययन किया, जिन में फैट, ओबेस, ओबैसिटी या ओवरवेट जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया था. इन में सर्वाधिक इस्तेमाल ‘फैट’ शब्द का हुआ और ज्यादातर यह प्रयोग नकारात्मक था. जाहिर है ऐसे कमैंट्स से बच्चों में हीनभावना पैदा होती है और वे कुंठा के शिकार हो जाते हैं. वैज्ञानिकों द्वारा किए गए शोध से यह बात सामने आई है कि बच्चों के अभिभावक अपने बच्चों के मोटापे के प्रति समय के बाद चेतते हैं. वे तब अपने बच्चों के बारे में जान पाते हैं जब वे मोटापे की गिरफ्त में पूरी तरह आ चुके होते हैं.

शारीरिक मेहनत भी है जरूरी

बच्चे स्लिप और चुस्तदुरुस्त हों तो ही अच्छे लगते हैं. इसलिए शैशव अवस्था से ही उन के मोटापे पर निगरानी रखें. उन का खानपान इस प्रकार निर्धारित करें कि वे कभी मोटापे का शिकार न हों. बच्चों के स्वस्थ विकास के लिए पोषक आहार मिलना जरूरी तो है पर वह संतुलित होना चाहिए. किसी भी चीज की अति बुरी होती है. अपने बच्चों की फिटनैस पर ध्यान दें. इस के लिए कमर्शियल फिटनैस क्लबों की सेवाएं ली जा सकती हैं. मांबाप को चाहिए कि वे अपने ओवरवेट बच्चे को डाक्टर को दिखाएं. इस के अलावा डाइटिशियन से उस की खुराक निर्धारित करवाएं. बच्चों की सेहत का ध्यान रखना मांबाप का फर्ज है. दिन भर में एक बार जरूर बच्चे को अपने साथ खाना खिलाएं. खाने में साबूत अनाज, फलों, सब्जियों की मात्रा ज्यादा रखें तथा जंक और प्रोसैस्ड फूड पर लगाम लगाएं. बच्चों से अच्छी बात मनवाने के लिए जबरदस्ती न करें और न ही किसी तरह का लालच दें, बल्कि उन्हें दोस्त बन कर समझाएं ताकि वे अपनी खानपान संबंधी आदतों में सुधार करें तथा टीवी या कंप्यूटर के सामने घंटों गुजारने के बजाय उन का समय मैदान में खेलकूद में गुजरे.

आत्मनिर्भर बनें एवॉन के साथ

हर स्त्री अपने लिए आत्मसम्मान से भरी खूबसूरत जिंदगी की कल्पना करती है. वह अपने पैरों पर खड़ी होना चाहती है. दौलत और शोहरत कमाना चाहती है. लेकिन साथ ही उसे अपने परिवार से भी बहुत प्यार होता है. वह अपने पति और बच्चों की केयर करती है. उन के लिए हर तरह के समझौते करने को तैयार रहती है. तभी तो पढ़ी लिखी और काबिल होने के बावजूद बहुत सी महिलाएं नौकरी नहीं कर पातीं. क्योंकि उन के ऊपर पूरे परिवार की जिम्मेदारी होती है. ऐसे में कितना ही अच्छा हो अगर स्त्री को घर से काम करने और पैसे कमाने का अवसर मिले. इस से वह घर भी देख सकेगी और आगे बढऩे के अपने सपने को भी जी पाएगी. महिलाओं के लिए कुछ ऐसा ही मौका एवॉन कंपनी की तरफ से दिया जाता है.

एवॉन : खूबसूरती के व्यवसाय से बनें सशक्त

अपनी पसंद के काम करने के घंटे, अपना जुनून, अपना तरीका, यानी आप अपनी शर्तों पर एवॉन के साथ अपना व्यवसाय शुरू कर सकती हैं. खुद के लिए सुविधाजनक शेड्यूल के अनुसार फुल टाइम या पार्ट टाइम काम घर बैठे कर सकती हैं. इस से आप अपने घर को भी पूरा समय दे पाएंगी, आने जाने में समय की बर्बादी भी नहीं होगी और न ही ट्रेवलिंग की थकान होगी. घर बैठे अपने ग्राहकों के साथ कम्युनिकेट कर आप उन को सही प्रोडक्ट ढूंढने में मदद कर सकती हैं और अच्छी इनकम पा सकती हैं.

एवॉन के अवार्ड विनिंग और वल्र्ड क्लास नए नए ब्यूटी प्रोडक्ट्स की बिक्री करना बहुत आसान है. दुनिया भर के 100 से अधिक देशों की महिलाओं की कम्युनिटी इस काम में इन्वॉल्व हैं. 60 लाख से अधिक एवॉन ब्यूटी एंड फैशन एडवाइजर्स हैं जो सशक्त महिलाएं हैं और दूसरों को भी आगे बढऩे के लिए प्रेरित करती हैं.

केवल अपनी मंथली ब्यूटी शॉपिंग या परिवार के लिए गिफ्ट्स की खरीददारी कहीं और से न कर के एवॉन से करें तो आप अपनी बचत 55त्न तक बढ़ा सकती है. फिर अपने दोस्तों और परिवार को एवॉन के अच्छे प्रोडक्ट्स रेकमेंड कर के आप अपना नेटवर्क बढ़ा सकती है. एवॉन टीम हर कदम पर प्रोडक्ट और बिजनेस ट्रेनिंग में मदद कर आप को अपना नेटवर्क बढ़ाने में मदद करेगी.

दरअसल एवॉन का मानना है कि एक स्वतंत्र महिला ही एक खूबसूरत महिला होती है. एवॉन मानता है कि महिलाएं पहले से ही मजबूत हैं. उन्हें सही दिशा मिले तो वे कुछ भी कर सकती हैं. इसलिए एवॉन हर कदम पर उन का साथ देता है. एवॉन के प्रोडक्ट्स में सब के लिए कुछ न कुछ है. स्किन केयर प्रोडक्ट्स से ले कर फ्रेग्रेन्स, कलर कॉस्मेटिक्स और फैशन भी. यह वह ब्रांड है जिसे 138 वर्षों से लाखों लोग पसंद करते आ रहे हैं.

एवॉन के बारे में

एवॉन कंपनी एक तरह की इंटरनेशनल नेटवर्क मार्केटिंग कंपनी है. इस कंपनी की शुरुआत 1886 में न्यूयॉर्क में हुई थी और आज यह एक विश्वसनीय कंपनी के रूप में जानी जाती है. एवॉन के प्रोडक्ट इस के खुद की साइट और अमेजन, फ्लिपकार्ट और मिंत्रा जैसे साइट पर बिकते हैं. यह इनोवेटिव क्वालिटी वाले ब्यूटी प्रोडक्ट्स उपलब्ध कराता है.

ये प्रोडक्ट्स मुख्य रूप से महिलाओं को महिलाओं के माध्यम से बेचे जाते हैं. यह काम महिलाएं अपनी सुविधा के हिसाब से कर के अपना खुद का ब्यूटी बिजनेस स्थापित करती है. इस तरह घर बैठे आत्मनिर्भर बनती हैं. एवॉन का मकसद ऐसी दुनिया बनाना है जहाँ अधिक से अधिक आत्मनिर्भर और सशक्त महिलाएं हों क्योंकि सशक्त महिलाएं ही दुनिया में खूबसूरती लाती हैं.

सच है सुंदरता सिर्फ चेहरे पर मेकअप करने से कहीं अधिक होती है. स्त्री सशक्तिकरण और उन की आत्मनिर्भरता सब से महत्वपूर्ण है. एवॉन के साथ आप के पास अपनी पसंद का काम कर के पैसा कमाना शुरू करने का मौका है. इस की प्रतिनिधि बन कर आप एक बेहतर जिंदगी की शुरुआत कर सकती हैं.

कैसे जुड़ें एवॉन से

एवॉन से जुडऩा बहुत आसान है. आप को दिए गए क्यूआर कोड को स्कैन करना होगा. फिर “Hi” लिख कर भेजे और अपने केवाईसी दस्तावेजों को व्हाट्सएप पर साझा करें. इस के बाद आप अपनी जर्नी शुरू कर सकती हैं. अधिक जानने के लिए आप एवॉन की सेल्स टीम द्वारा प्रोडक्ट डेमो प्रा्प्त कर सकती हैं. इस के बाद आप अपना नेटवर्क बना कर इनकम लाखों में भी कमा सकती हैं.

एवॉन कंपनी कई तरह के ऑफर्स भी निकालती रहती है. इस से आप को कई तरह के फायदे मिल सकते हैं मसलन आप अब्रॉड ट्रिप या होम अप्लायंसेज वगैरह जीत सकती हैं, आप को कैश रिवार्ड्स और डिस्कोन्ट्स वगैरह मिल सकते हैं, हर महीने गिफ्ट मिल सकता है. इसलिए एवॉन के शानदार प्रोडक्ट्स यूज़ कर जहां आप अपने आप को संवार सकती हैं वहीं इस से जुड़ कर अपना जीवन भी संवार सकती हैं.

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जमाना बदल गया: भाग 3- ऐश्वर्या के साथ ऐसा क्या किया सीनियर सुशांत ने?

अपमानित ऐश्वर्या अपनी सीट पर लौट आई. अगर वह डिसमिस कर दी गई, तो इस दाग के कारण दूसरी कंपनी में नौकरी मिलना असंभव हो जाएगा. एक ही उपाय शेष था कि वह खुद ही यह नौकरी छोड़ दे. लेकिन यह भी आसान न था. उस ने 2 साल का बौंड भर रखा था. उस से पहले नौकरी छोड़ने पर 5 लाख की क्षतिपूर्ति देनी पड़ेगी. कहां से लाएगी इतने रुपए? पापा तो 3 माह बाद रिटायर होने वाले हैं. अपनी बेबसी पर ऐश्वर्या की आंखें छलछला आईं.

‘‘ऐश्वर्या, क्या बात है, इतना परेशान क्यों  हो?’’ तभी स्नेहा ने उस के कंधे पर हाथ रखते हुए पूछा. इन दोनों की अच्छी दोस्ती हो गई थी.

ऐश्वर्या के होंठ कांप कर रह गए. वह चाह कर भी कुछ न कह सकी. उस की आंखों से आंसू टपक पड़े.

‘‘यहां नहीं, चलो कैंटीन में चल कर बात करते हैं,’’ स्नेहा ने उस का हाथ पकड़ कर खींचा तो ऐश्वर्या उठ खड़ी हुई.

फिर स्नेहा उसे अपने औफिस की कैंटीन के बजाय दूसरी मंजिल पर बनी एक दूसरी

कैंटीन में ले गई. सुबह होने के कारण वहां सन्नाटा था. उस के काफी कुरेदने पर ऐश्वर्या ने सुबकते हुए पूरी बात बताई, जिसे सुन स्नेहा का चेहरा तमतमा उठा.

‘‘इस का मतलब वह यह घिनौना खेल तुम्हारे साथ भी खेल रहा है,’’ स्नेहा ने दांत पीसे.

‘‘तुम्हारे साथ भी का मतलब?’’ ऐश्वर्या की आंखों में आशंका के चिह्न उभर आए.

‘‘उस ने मुझे भी अमेरिका जाने का लालच दिया था. मेरे मना करने पर 2 महीने से मुझे भी बातबात पर परेशान कर रहा है,’’ स्नेहा ने रहस्योद्घाटन किया.

‘‘इस का मतलब जो 2 लड़कियां अमेरिका गई हैं उन्होंने उस की शर्त…’’ ऐश्वर्या ने जानबूझ कर अपना वाक्य अधूरा छोड़ दिया.

‘‘उस की सचाई वे जानें, लेकिन सुशांत की सचाई हम लोगों के सामने है. इसे सबक सिखाना जरूरी है वरना यह लड़कियों को हमेशा इसी तरह खिलौना समझ कर खेलता रहेगा,’’ स्नेहा ने मुट्ठियां भींचते हुए कहा.

‘‘लेकिन हम कर ही क्या सकती हैं?’’

‘‘बहुत कुछ,’’ स्नेहा ने कहा और फिर अपनी योजना समझाने लगी.

उस के बाद दोनों औफिस लौट आईं. थोड़ी देर बाद ऐश्वर्या सुशांत के चैंबर में पहुंच कर बोली, ‘‘सर, मुझ से यहां काम नहीं हो पाएगा.’’

‘‘तो?’’

‘‘अगर अभी भी संभव हो तो मुझे अमेरिका भेज दीजिए. आप की बहुत मेहरबानी होगी.’’

‘‘संभव होना या न होना तो मेरे ही हाथ में है, लेकिन वहां जाने की शर्त आप जानती हैं? क्या आप को वह मंजूर है?’’ सुशांत ने अपनी नजरें ऐश्वर्या के चेहरे पर टिका दीं.

‘‘सर, मैं अभी कुछ कह पाने की स्थिति में नहीं हूं, लेकिन शाम को आप मेरे फ्लैट पर आ जाएं. मैं वहीं सोच कर बताऊंगी.’’

‘‘ओके, बेबी, मैं 8 बजे तक पहुंच जाऊंगा,’’ सुशांत ने अपनी खुशी छिपाते हुए कहा.

ऐश्वर्या से वह दिन काटे नहीं कटा. रहरह कर उस का दिल बुरी तरह धड़कने लगता था. शाम को अपने फ्लैट पर आ गई. नहाने के बाद उस ने एक खूबसूरत साड़ी पहनी और सुशांत का इंतजार करने लगी.

ठीक 8 बजे घंटी बजी तो उस ने दरवाजा खोला. सामने सुशांत खड़ा था. उस ने भीतर आ कर दरवाजा बंद किया और ऐश्वर्या को प्रशंसात्मक नजरों से देखते हुए बोला, ‘‘साड़ी में तुम्हारी सुंदरता बहुत निखर आई है. बहुत ही दिलकश लग रही हो.’’

ऐश्वर्या ने कोई उत्तर नहीं दिया. सुशांत ने उस के करीब आते हुए कहा, आज की रात यादगार बना दो. मैं तुम्हें निश्चित तौर पर अमेरिका भिजवा दूंगा.

ऐश्वर्या अपने में सिमट कर रह गई. उस के मौन को स्वीकृत मान सुशांत की हिम्मत बढ़ गई. उस ने ऐश्वर्या को अपनी बांहों में भर कर उस पर चुंबनों की बौछार कर दी.

‘‘सर, यह क्या कर रहे हैं आप?’’ ऐश्वर्या कसमसाई.

‘‘तुम्हारे कैरियर को बनाने की तैयारी,’’ सुशांत ने उसे अपने सीने से भींचते हुए अपने अधर उस के अधरों की ओर बढ़ाए.

‘‘कैरियर बनाने की तैयार या जिंदगी बरबाद करने की तैयारी कर रहे हैं आप?’’ ऐश्वर्र्या का स्वर अचानक सख्त हो उठा.

‘‘ऐश्वर्या, इतना करीब आ कर अब लौटना मुश्किल है. मैं प्रोबेशन पीरियड पूरा होते ही तुम्हारी प्रमोशन भी कर दूंगा. बस जो हो रहा है उसे हो जाने दो,’’ सुशांत का स्वर कामवासना से कांप रहा था.

‘‘जरूर हो जाने देती अगर…’’

‘‘अगर क्या?’’

‘‘अगर, इस लैपटौप का वैब कैमरा औन न होता,’’ ऐश्वर्या ने मेज पर रखे लैपटौप की ओर इशारा किया.

लैपटौप को देख सुशांत यों उछला जैसे सांप देख लिया हो. उस ने घबराए स्वर में पूछा, ‘‘क्या इस का कैमरा औन है?’’

‘‘सिर्फ औन ही नहीं है, बल्कि इस कैमरे में हो रही हरकतों की कहीं दूर रिकौर्डिंग भी हो रही है,’’ ऐश्वर्या ने सुशांत को परे धकेलते हुए कहा.

‘‘रिकौर्डिंग हो रही है? सुशांत बुरी तरह घबरा उठा.’’

‘‘हां सुशांत, तुम लोगों को औरत के अंदर जिस्म के अलावा और कुछ दिखाई ही नहीं पड़ता. उस की प्रतिभा, उस की योग्यता का तुम्हारी नजरों में कोई मूल्य नहीं है. जितनी पढ़ाई और मेहनत तुम ने की है उतनी हम ने भी की है, लेकिन तुम पुरुष हो इसलिए आगे बढ़ना तुम्हारा अधिकार है, लेकिन हमें आगे बढ़ने के लिए अपनी अस्मत की कीमत चुकानी पड़ेगी,’’ ऐश्वर्या ने घबराए सुशांत के चेहरे पर एक घृणा भरी नजर डाली, ‘‘लेकिन अब जमाना बदल गया है. तुम इस तरह हमारा शोषण नहीं कर सकते. तुम्हें अपनी जलील हरकतों की कीमत चुकानी पडे़गी.’’

यह सुन सुशांत के चेहरे का रंग उड़ गया. उस ने जल्दी से लैपटौप बंद कर दिया.

‘‘इस से कोई फायदा नहीं होने वाला, क्योंकि एक और छिपा कैमरा तुम्हारी रिकौर्डिंग कर रहा है,’’ ऐश्वर्या ने दांत भींचते हुए कहा.

‘‘क्या एक कैमरा और है?’’ सुशांत बुरी तरह घबरा उठा.

‘‘तुम्हारे जैसे धूर्तों से सुरक्षित रहने के लिए क्या यह जरूरी नहीं था?’’ ऐश्वर्या व्यंग्य से मुसकराई, ‘‘तुम्हारा खेल अब पूरा हो चुका है. यह रिकौर्डिंग आज ही कंपनी के चेयरमैन के पास पहुंच जाएगी.’’

‘‘ऐसा मत करना. मेरे छोटेछोटे बच्चे हैं. उन की जिंदगी बरबाद हो जाएगी. वे सड़क पर आ जाएंगे,’’ सुशांत हाथ जोड़ कर गिड़गिड़ाया.

‘‘हम लोग भी तो तुम्हारे बच्चों जैसे ही हैं. तुम्हें हम पर कभी दया नहीं आई,’’ ऐश्वर्या ने मुट्ठियां भींचीं.

‘‘प्लीज, मुझे माफ कर दो. मेरी बीवी बहुत सैंसिटिव है, उसे यह सब पता चलेगा तो वह सुसाइड कर लेगी,’’ सुशांत ने अपना सिर ऐश्वर्या के कदमों पर रख दिया.

जिस सर्वशक्तिमान सुशांत नाम से कंपनी के लोग थर्राते थे वह उस के चरणों पर पड़ा था. उस ने सुशांत पर घृणा भरी नजर डाली और फिर बोली, ‘‘मुझे इमोशनली

ब्लैकमेल करने की कोशिश दोबारा न कीजिएगा. जो किया है उस की सजा आप को भुगतनी ही पड़ेगी.’’

‘‘अगर मैं नौकरी से निकाल दिया गया, तो उस की सजा मेरे छोटेछोटे बच्चों को मिलेगी. प्लीज उन के वास्ते मुझे माफ कर दो. मैं वादा करता हूं कि आज के बाद कोई गलत हरकत नहीं करूंगा. अगर तुम कहोगी तो मैं यह कंपनी छोड़ कर भी चला जाऊंगा.’’

ऐश्वर्या कोई तीखा उत्तर देने ही जा रही थी कि तभी उस के मोबाइल की घंटी बज उठी. स्क्रीन पर स्नेहा का नंबर चमक रहा था. उसने मोबाइल औन किया तो उधर से स्नेहा की आवाज आई, ‘‘ऐश्वर्या, यह सही कह रहा है. इस के कुकर्मों की सजा इस के बीवीबच्चों को मिल जाएगी, जबकि उन का इस में कोई दोष नहीं है. मैं ने वैब कैमरे की रिकौर्डिंग सुरक्षित कर ली है. इसे चेतावनी दे कर सुधरने का एक मौका दे दो.’’

‘‘ओके’’ कह ऐश्वर्या ने मोबाइल औफ कर दिया.

चंद पलों तक आंखें बंद कर ऐश्वर्या ने कुछ सोचा, फिर सुशांत पर घृणा भरी नजर डालते हुए बोली, ‘‘तुम्हारे कुकर्मों की सजा तुम्हारे बच्चों को न मिले, इसलिए फिलहाल हम इस रिकौर्डिंग को सुरक्षित रख रही हैं, लेकिन अगर आइंदा तुम्हारे बारे में कभी कोई गलत खबर मिली, तो यह रिकौर्डिंग फौरन सही हाथों में पहुंच जाएगी.

‘‘बहुतबहुत धन्यवाद. मैं कल ही इस कंपनी से इस्तीफा दे दूंगा,’’ सुशांत ने आभार व्यक्त करते हुए कहा.

‘‘उस की जरूरत नहीं है, क्योंकि दूसरी कंपनी में जा कर तुम क्या कर रहे हो, हमें पता नहीं चल पाएगा. इसलिए तुम इसी कंपनी में रहोगे ताकि तुम्हारे जैसे आदमखोरों पर नजर रखी जा सके.’’ लेकिन अब मैं तुम्हारे साथ काम नहीं कर सकती. इसलिए बेहतर होगा कि तुम खुद अपनी टीम बदल लो. कारण जो उचित समझना मैनेजमैंट को समझा देना.

सुशांत के पास ऐश्वर्या की बातों का कोई जवाब नहीं था. बदले हुए जमाने में नारी की शक्ति का उसे भरपूर एहसास हो चुका था. वह अपने पस्त शरीर को अपने कदमों पर घसीटते हुए वहां से चल दिया.

बरसात की काई: भाग 2- क्या हुआ जब दीपिका की शादीशुदा जिंदगी में लौटा प्रेमी संतोष?

संतोष के आग्रह को दीपिका ठुकरा न सकी. कुछ घंटों की असहजता के बाद दोनों पहले की तरह घुलमिल गए. वही हंसीमजाक, वही मधुर स्वरलहरी भरा अभ्यास.

‘‘अपने अतीत में घटे हादसों पर शोकाकुल होने से अब क्या लाभ? जो होना था वह हो चुका. अब आगे की सुध लेने में ही समझदारी है,’’ अगले दिन अभ्यास के बाद उदास संतोष को दीपिका समझा रही थी. उसे संतोष का उदास चेहरा देख कर पीड़ा होती थी.

‘‘तुम्हें अपने सामने किसी और को देख मुझे जो पीड़ा होती है शायद तुम समझ नहीं सकतीं. तुम मेरी थीं और अब…’’ कहते हुए संतोष ने दीपिका की बांहें कस कर पकड़ लीं.

कुंआरी लाज को बचाए रखना हर लड़की को धरोहर में सिखाया जाता है.

लेकिन अब दीपिका कुंआरी नहीं थी, शादीशुदा थी. अब वह इस सीमा को लांघ चुकी थी. शादी के बाद उस ने मजबूरी में इस सीमा को लांघा, तो क्या अब अपनी खुशी के लिए नहीं लांघ सकती और फिर घर की चारदीवारी में किसी को क्या खबर लगेगी. फिर उस के पति ने स्वयं ही संतोष को उस के कमरे में धकेल दिया था. संतोष और दीपिका स्वयं को नहीं रोक सके. उन के प्यार का सागर उमड़ा और फिर बांध को तोड़ते चला गया.

इस घटना के बाद दीपिका का उन्मुक्त व्यवहार लौट आया था. उदय इस से काफी प्रसन्न था. उसे लग रहा था कि दीपिका संगीत में डूब कर इतनी खुश है.

‘‘कभी कोई स्वैटर हमारे लिए भी बना दो,’’ आसमानी रंग का स्वैटर देख उदय के मुंह में पानी आ गया, ‘‘क्या लाजवाब डिजाइन डाली है इस बार तुम ने.’’

‘‘अगली बार आप के लिए बना दूंगी, पक्का. यह तो अपने चचेरे भाई के लिए बना रही हूं. दरअसल, अगले महीने उस का जन्मदिन आ रहा है.’’

‘‘तो हो क्यों नहीं आतीं तुम अपने मायके? काफी अरसे से गई नहीं.’’

‘‘नहीं, नहीं, मुझे नहीं जाना. आप के खानेपीने का क्या होगा और फिर…’’

‘‘मैं कोईर् दुधमुंहा बच्चा हूं, जो इतनी चिंता करती हो? मायके जाने में भला कौन लड़की मना करती है? तुम तसल्ली से जाओ और सब से मिल कर आओ. मैं अपनी देखभाल खुद कर लूंगा,’’ उदय ने जोर दिया तो दीपिका मना न कर सकी.

‘‘अब क्या होगा, अब हम कैसे मिलेंगे? उस शहर में मिलना असंभव है, किसी ने देख लिया तो अनर्थ हो जाएगा,’’ आज दोपहरी में दीपिका का अभ्यास में बिलकुल मन नहीं लग रहा था.

‘‘तुम चिंता मत करो. तुम से मिले बिना मैं भी नहीं रह सकता हूं. कुछ सोचता हूं…’’ संतोष ने आखिर एक उपाय निकाल लिया, ‘‘तुम और मैं यहीं इसी शहर में किसी होटल में रह लेंगे 3-4 दिन. उदय को तुम खुद ही फोन करती रहना अपने मोबाइल से. होटल के कमरे से बाहर ही नहीं निकलेंगे तो कोई हमें देखेगा कैसे? हंस कर कहते हुए संतोष दीपिका के बदन पर अठखेलियां करने लगा.’’

टे्रन के टिकट हाथ में लिए उदय को बाय करती दीपिका ट्रेन में सवार हो गई. अगले स्टेशन पर संतोष उस की प्रतीक्षा कर रहा था. वहां से दोनों होटल चले गए. रिसैप्शन पर गलत नाम बताने की सोची, किंतु आजकल आईडैंटिटी पू्रफ, घर का पता, पैन कार्ड आदि की कौपी रखी जाती है, इसलिए असली नामपता बताते हुए दोनों की हालत खराब हो रही थी. हर जगह सीसीटीवी कैमरे लगे थे, जिन से मुंह छिपाते दीपिका को किसी कालगर्ल वाली अनुभूति हो रही थी.

‘‘मुझे पता होता कि ऐसा अनुभव रहेगा तो मैं कभी नहीं आती,’’ दीपिका को खुद पर गिलानी हो रही थी.

‘‘अब तो कमरे में आ गए हैं… छोड़ो न बातों को और आ जाओ मेरी बांहों में,’’ संतोष ऐसे लालायित था जैसे आज उस की सुहागरात हो.

‘‘ठहरो, पहले उदय को फोन कर के बता तो दूं कि मैं पहुंच गई हूं.’’

‘‘अरेअरे, यह क्या कर रही हो? अभी नहीं, तुम कल सवेरे पहुंचोगी. भूल गईं कि अभी तुम ट्रेन में सफर कर रही हो.’’

संतोष का अट्टहास दीपिका को जरा भी अच्छा नहीं लगा. एक ही कमरे में, बिना किसी लोकलाज के बावजूद दीपिका का यौवन संतोष की बांहों को टालने लगा. सिरदर्द का बहाना बना कर वह जल्दी सो गई.

अगली सुबह जब दीपिका ने चाय का और्डर दिया तो 2-3 वेटरों को उस ने अपनी ओर देख फुसफुसाते हुए पाया. ‘हो न हो ये हम दोनों के भिन्न नाम और पते के बारे में बात कर रहे होंगे… क्या सोच रहे होंगे ये मेरे बारे में… छि…’ दीपिका के मन का चोर बारबार सिर उठा रहा था.

‘‘अब तो फोन कर लूं उदय को? अब तक तो ट्रेन पहुंच गई होगी,’’ थोड़ीथोड़ी देर में यही राग अलापती दीपिका से संतोष भी परेशान हो उठा. बोला ‘‘हां, कर लो.’’

‘‘तुम्हारे चायपानी का इंतजाम तो ठीक है न? पता नहीं कैसे यह ट्रेन लेट हो गई. अकसर तो समय पर पहुंचती है,’’ उदय के सुर में चिंता घुली थी. शुक्र है दीपिका ने फोन उठाते ही यह नहीं कहा कि मैं ठीक से पहुंच गई. एक बार फिर वह बच गई. वह बहुत घबरा गई. बोली, ‘‘यदि मेरे मुंह से निकल जाता कि मैं ठीकठाक पहुंच गई तो क्या होता, संतोष?’’

‘‘कहा तो नहीं न. मत घबराओ इतना. कल वैसे ही तुम्हारे सिर में दर्द था. आज सोचसोच कर और सिरदर्द कर लोगी,’’ इस चोरीछिपे की पिकनिक से न तो दीपिका खुश थी और न ही संतोष को चैन था.

‘‘चलो, आज नीचे रेस्तरां में चल कर नाश्ता कर के आते हैं. तुम्हारा थोड़ा मन बहल जाएगा,’’ संतोष बोला.

उदय के साथ रहने से दीपिका को स्वास्थ्यवर्धक नाश्ता करने की आदत हो गईर् थी. उस ने ओट्स और आमलेट लिया. संतोष ने कालेज के दिनों की तरह आलू के परांठे और रायता मंगवाया.

‘‘दीपू, इतना हलका नाश्ता क्यों? पेट ठीक नहीं है क्या?’’ संतोष ने पूछा.

‘‘अब हम कालेज में पढ़ते लड़केलड़की नहीं रहे, संतोष. उम्र के साथ हमें अपना खानपान और मात्र भी बदलनी चाहिए. उदय कहते हैं कि…’’ पर फिर दीपिका संभल कर चुप हो गई.

यह क्या हो रहा था उसे… बारबार उदय का खयाल, उदय की बात. उदय का नाम सुन संतोष के चेहरे का रंग फीका पड़ गया. दोनों ने चुपचाप नाश्ता किया और फिर कमरे में लौट आए.

‘‘मैं बहुत बोर हो रही हूं, चलो कहीं घूम आएं,’’ दीपिका के अनुरोध पर संतोष मान गया. कमरे में पड़ेपड़े टीवी देख कर वह भी उकता रहा था. देर शाम तक दोनों ने आसपास के बाजार की खाक छानी और रात को कमरे में लौट आए. कपड़े बदल कर दीपिका बिस्तर पर लेट तो गई, किंतु जैसे वह उदय को टालती थी, वैसे आज उस का हृदय संतोष को टालने को कर रहा था. यह अजीब अपराधबोध की भावना क्यों जकड़ रही थी उसे आज?

संतोष को वह टाल नहीं पाई. मगर उस की ठंडी प्रतिक्रिया पर संतोष ने शिकायत अवश्य की, ‘‘यह क्या यंत्रचालित सी व्यवहार कर रही हो आज? क्या हुआ है?’’

दीपिका ने कोई उत्तर नहीं दिया. उस का मन स्वयं नहीं समझ पा रहा था कि जिन घडि़यों के लिए वह तरसती रही, आज जब वे सामने हैं, तो क्यों वह भाग कर उन्हें नहीं पकड़ लेना चाहती?

Gum hain Kisi Ke Pyar Mein Promo: दर्शको को पसंद नहीं आई शक्ति और भाविका की जोड़ी, किया ट्रोल

स्टार प्लास का सबसे धांसू टीवी सीरियल ‘गुम हैं किसी के प्यार में’ कई कोशिशे कर लीं टीआरपी में नंबर वन बनने की लेकिन ऐसा कुछ धमाल कर नहीं पाए. यहां तक कि अब ‘गुम है किसी के प्यार में’ में सई और विराट की कहानी को खत्म करके सवि की कहानी को भी शुरू करने का फैसला कर दिया है. जल्द ही ‘गुम है किसी के प्यार में’ शो में लीप आने वाला है. जिसके बाद सवि की प्रेम कहानी शुरु होगी.

अभी हाल ही में शो के मेकर्स ने सीरियल ‘गुम है किसी के प्यार में’ का नया प्रोमो रिलीज किया है. इस प्रोमो में बॉलीवुड अभिनेत्री रेखा नजर आ रही है. रेखा प्रोमो में प्यार, फर्ज और इज्जत का ताल्लुक समझा रही है. लेकिन हैरानी की बात तो यह है कि दर्शको को इस प्रोमो में लव ट्रायएंगल देखने को मिला.

 

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शक्ति और भाविका की जोड़ी को दर्शको ने किया ट्रोल

टीवी सीरियल ‘गुम हैं किसी के प्यार में’ जबसे नया प्रोमो रिलीज हुआ है. तब से शक्ति और भाविका की जोड़ी को लोग पसंद नहीं कर रहे. प्रोमो में दिखाया गया है कि इशान (Shakti Arora) किसी और से प्यार करता है, लेकिन मजबूरी में और परिवार की इज्जत की खातिर उसे सवि (Bhavika Sharma) से शादी करनी पड़ती है. प्रोमो के मुताबिक पहले सई प्यार और फर्ज के बीच पिसती थी तो वहीं अब सवि प्यार और फर्ज के बीच खड़ी होगी. ‘गुम है किसी के प्यार में’ का यह नया प्रोमो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. वहीं प्रोमो देख के कुछ यूजर्स ने इसकी तरीफ की, तो कुछ लोग दोबरा लव ट्रायएंगल देखकर परेशान हो गए और वहीं अन्य लोग शो को बंद करने की मांग कर रहे है.

 

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देंखे नया प्रोमो ‘गुम हैं किसी के प्यार में’

स्टार प्लास का धमाकेदार शो ‘गुम हैं किसी के प्यार में’ लीप आने वाला है. ऐसे में शो के मेकर्स ने ‘गुम हैं किसी के प्यार में’ का नया प्रोमो रिलीज कर दिया. इस प्रोमो को देखकर दर्शक परेशान हो गए है और वह शक्ति और भाविका की जोड़ी लगातर ट्रोल कर रहे है. तो चलिए आप भी देखिए ‘गुम हैं किसी के प्यार में’ का नया प्रोमो.

आप भी खरीद सकते हैं Rashmika Mandanna का ये गुलाबी कुर्ता, जानें कीमत

श्रीवल्ली रश्मिका मंदाना फिर से आपका दिल चुरा लेंगी! पुष्पा अभिनेत्री ने ट्रेडिशनल पहनावे में अपनी एक नई तस्वीर के साथ अपने प्रशंसकों को खुश किया. यह कहना बिलकुल सही होगा कि रश्मिका अपने एथनिक ग्लैमर और एथनिक आकर्षण से सब को मंत्रमुग्ध कर दिया.

गुलाबी कुर्ता सेट में रश्मिका बेहद खूबसूरत लग रही थीं.  Janasya लेबल का पहनावा सरसों और हरे रंग के सुंदर पुष्प प्रिंटों और नेकलाइन और आस्तीन पर जटिल गोटा-पट्टी लहजे से सजाया गया कुर्ता सेट है . उन्होंने अनारकली कुर्ता को मैचिंग पलाज़ो और एक अतिरिक्त हरे रंग के साथ के साथ कैरी किया है

रश्मिका ने अपने लुक को भारी झुमके और छोटी हरी बिंदी के साथ पूरा किया। इसके साथ ही हल्के गुलाबी टोन में मेकअप किया है जिसमें वह बहुत खूबसूरत लग रही है. जब वह तस्वीरों के लिए पोज़ दे रही थीं और तब उनका एथनिक लुक बेहद सुंदर लग रहा है, फोटो में तो वह पूरी तरह मुस्कुरा रही थीं.

रश्मिका मंदाना का एथनिक वॉर्डरोब में शामिल कर सकती है
वैसे आप इस फ्लोरल-प्रिंट कुर्ता सेट को अपने एथनिक वॉर्डरोब में भी शामिल कर सकती हैं. यह Janasya लेबल की वेबसाइट पर 2,999 रुपये में कई आकारों में खरीदने के लिए उपलब्ध है.

रश्मिका की एथनिक आउटफिट कलेक्शन
रश्मिका का एथनिक आउटफिट कलेक्शन के कुछ शानदार तस्वीरों से भरा हुआ है. अभिनेत्री पारंपरिक सिलवर सूट के प्रति अपनी रुचि दिखाने का कोई मौका नहीं छोड़ती. इन तस्वीरों में आप देख सकते है.

वहीं रश्मिका के  काम की बात करें तो , रश्मिका मंदाना ने हाल ही में रणबीर कपूर-स्टारर एनिमल की शूटिंग पूरी की. यह फिल्म 11 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है.
इन दिनों रश्मिका पुष्पा 2: द रूल की शूटिंग में बिजी हैं. वहीं एक्ट्रेस जल्द ही मल्टी लिंग्वल फिल्म रेनबो, और रणबीर कपूर ही में मेकर्स ने फिल्म का प्री-टीजर भी रिलीज किया था, जिसे ऑडियंस ने काफी पसंद किया. यह मूवी 11 अगस्त को सिनेमाघरों में दस्तक देगी. साथ ही इसी तारीख पर रिलीज होने वाली दो बड़ी फिल्मों ‘गदर 2’ और ‘ओएमजी 2’ से भिड़ेगी.

कॉन्जेनिटल हार्ट डिजीज: रोग नहीं दोष है, जाने कैसे

रश्मिका को बचपन में कॉन्जेनिटल हार्ट डिजीज यानि जन्मजात हृदय रोग था, जिसमे उनके हार्ट में एक छेद था, जिसे डॉक्टर्स ने इलाज किया और अब उसे कोई समस्या नहीं है, लेकिन जब वह बड़ी हुई, उसके शादी को लेकर समस्या होने लगी, क्योंकि हर लड़के वालों को लगता था कि उसे हार्ट की बीमारी है. शादी के बाद उसका मैरिटल लाइफ अच्छा नहीं होगा.

कई अच्छे-अच्छे रिश्ते टूट गए, इससे रश्मिका को डिप्रेशन होने लगा, उसके पेरेंट्स चिंतित होने लगे, लेकिन एक रिश्ता पक्का हुआ और आज रश्मिका दो बच्चों की माँ है और उसे किसी प्रकार की कोई समस्या हार्ट को लेकर नहीं है और न ही उनके बच्चों को हार्ट सम्बन्धी कोई बीमारी है. दरअसल ये कोई बीमारी नहीं, इसका शादी और बच्चे पैदा होने से कोई सम्बन्ध नहीं होता. ये एक प्रकार का दोष है, जिसका इलाज संभव है.

असल में किसी भी बच्चे के जन्म के समय उसके हार्ट में किसी भी तरह की कोई गड़बड़ी होने पर इस स्थिति को कॉन्जेनिटल हार्ट डिजीज कहा जाता है. इस बीमारी से पीड़ित बच्चे के दिल की बाहरी परत यानी दीवार, हार्ट वाल्व और ब्लड वैसल्स ज्यादा प्रभावित होते हैं.

इस बारें में मुंबई की कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल की पेडिएट्रिक कार्डियोवस्क्युलर कंसलटेंट और सर्जन डॉ स्मृति रंजन मोहंती कहती है कि

गर्भावस्था के दौरान भ्रूण के ह्रदय के भीतर एक या उससे ज़्यादा संरचनाओं के सामान्य विकास में दोष रह जाने के कारण जन्मजात ह्रदय दोष (सीएचडी)  होता है, यह दोष कई प्रकार के हो सकते हैं मसलन ह्रदय में छेद, अलगअलग कार्डियक संरचनाओं में विकृति या हार्ट चेम्बर्स में रक्त वाहिकाओं के असामान्य कनेक्शन्स ( बड़ी आर्टरीज की जगह बदलना, हाइपोप्लास्टिक लेफ्ट हार्ट्स, पल्मनरी वेनस कनेक्शन्स पूरी तरह से विषम होना, एओर्टिक आर्चेस में बाधा, पल्मनरी धमनी से विषम लेफ्ट कोरोनरी आर्टरी, एबस्टिन की विसंगति और अन्य 127 से ज़्यादा तरह के अलगअलग कॉम्बिनेशन्स) इसमें शामिल होते हैं.  जन्मजात का अर्थ यह है कि यह दोष जन्म के समय से ही मौजूद होता है.

बीमारी नहीं, हृदय दोष

इसके आगे डॉ. स्मृति कहती है कि सालाना हर 100 बच्चों में से 1 को जन्मजात हृदय दोष होता है. हर साल करीबन 2.5 मिलियन बच्चें इससे प्रभावित होते हैं. छोटी आयु में कॉन्जेनिटल हार्ट डिजीज होने पर भी कई बार उसके लक्षण दिखाई न देना संभव है या कई अलग-अलग तरह के लक्षण होते है, मसलन

  • लगातार पसीना आना,
  • बच्चे को दूध पिने में कठिनाई,
  • त्वचा या होंठों का नीला पड़ना,
  • वज़न ठीक से न बढ़ना,
  • विकास में कठिनाइयाँ,
  • बार-बार खांसी और सर्दी होना आदि हो सकते हैं.

व्यस्को में लक्षण निम्न है

  • वयस्कों को थकान,
  • बेहोशी और धड़कन तेज़ होना आदि लक्षण हो सकते हैं.
  • इन गंभीर और पीड़ादायक लक्षणों की वजह से जीवन की गुणवत्ता ख़राब हो सकती है, अन्य गंभीर बीमारियां होने का खतरा बहुत ज़्यादा हो सकता है, मृत्यु होने का भी डर रहता है.

 जन्मजात हृदय दोष दुर्बल कर देने वाले और जान के लिए खतरा हो सकते हैं, लेकिन उनमें से कई दोषों का इलाज संभव है. यही कारण है कि उन्हें “रोग” नहीं, बल्कि “दोष” कहते हैं. जल्द से जल्द निदान और इलाज करने से सीएचडी के मरीज़ों की ज़िंदा बचने की दर कार्डियक केयर केंद्रों में 95% के करीब पहुंच रही है. इसका मतलब यह है कि उचित और समय पर देखभाल मिलने से सीएचडी के मरीज़ बच्चें भी अन्य किसी भी बच्चे की तरह लगभग सामान्य जीवन जी सकते हैं.

सही डायग्नोसिस और करेक्टिव सर्जरी है इलाज

डॉक्टर कहती है कि भ्रूण के 2डी (2D) इको स्कैन से गर्भ में विकसित हो रहे बच्चे के ह्रदय की तस्वीर ली जा सकती है. जन्म से पहले ही, जल्द से जल्द सीएचडी का निदान किया जाने से, इलाज की योजना बनाकर और प्रसव के तुरंत बाद आवश्यक कार्डियक देखभाल शुरू की जा सकती है. दूसरा सबसे अच्छा विकल्प है कि सीएचडी का निदान कर पाने के लिए जन्म के बाद हर बच्चे का 2डी (2D) इको किया जाएं. जब हृदय संबंधी समस्या की क्लिनिकल संभावना हो तब यह करना और भी ज़रूरी है.

आगे के इलाज के लिए जब मरीज़ को डेडिकेटेड कार्डियक सेंटर में भेजा जाता है, बाल रोग विशेषज्ञों, रेडियोलॉजिस्ट, पेडिएट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट, कार्डियक सर्जन, एनेस्थिसियोलॉजिस्ट, इंटेंसिविस्ट और अन्य विशेषज्ञों की एक व्यापक टीम यह सुनिश्चित करती है कि बच्चे को सर्वोत्तम संभव देखभाल मिले. सीएचडी के लिए इलाज योजना को मरीज़ की व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुसार तैयार किया जाता है. यह इलाज या तो इंटरवेंशनल या सर्जिकल, या दोनों का कॉम्बिनेशन भी हो सकता है. इसके इलाज की सफलता दर बहुत अच्छी है.

अमेरिका जैसे देशों में पांच साल की उम्र में ही इस हार्ट डिजीज से पीड़ित बच्चों की सर्जरी कर दी जाती है. भारत में इसकी सर्जरी ज्यादातर मामलों में देरी से होती है. इसकी सर्जरी एंजियोग्राफी के जरिए अंब्रेला डिवाइस से की जाती है. इस डिवाइस के जरिए दिल का छेद बंद किया जाता है. दिल में एक से ज्यादा समस्याएं होती हैं, तो ओपन हार्ट सर्जरी की जाती है. अगर समस्या मामूली सी होती है, जो दवाई से भी इसका इलाज किया जाता है. इसके इलाज का खर्चा भी बीमारी के आधार पर होता है, जो डेढ़ लाख से 5 लाख तक हो सकता है.

गलती नहीं पेरेंट्स की

डॉ. स्मृति का इस बारें में कहना है कि जन्मजात ह्रदय दोष होना किसी की भी गलती नहीं है, न माता की, न पिता की और न उससे प्रभावित होने वाले बच्चे की. अधिकतम दोषों का निवारण उन्हें दूर करने से ही होता है, करेक्टिव सर्जरी सही इलाज होता है. कई लोगों को गलतफहमी होती है कि जन्मजात ह्रदय दोष वाले बच्चें जीवित नहीं रहते या सामान्य ज़िन्दगी नहीं जी पाते हैं. सच यह है कि जिन्हें इलाज मिलते हैं ऐसे 95% से ज़्यादा बच्चें लंबी आयु तक, पूरी तरह से सामान्य जीवन जीते हैं.

सामाजिक कु-प्रथाओं को दूर करना जरुरी  

जन्मजात हृदय विकार के अधिकांश के परिवारों की बाधाएं लॉजिस्टिकल और सामाजिक-आर्थिक होती है. कई लोग मानते हैं कि इलाज काफी ज़्यादा महंगे होते हैं.जबकि ऐसा नहीं है, इसमें पॉलिसी धारकों, बीमाकर्ताओं, बैंकरों, फिलांथ्रोपिस्ट्स आदि एक साथ मिलकर काम करना ज़रूरी है. इससे सीएचडी के मरीज़ों को और उनके परिवारों को इलाज़ करवाने में सुविधा होती है. इसके अलावा केवल वित्तीय समर्थन ही नहीं, बल्कि लोगों में जागरूकता पैदा करना, शिक्षा को बढ़ावा देना, गलतफहमियों, कलंकों को दूर करना आदि है. इस दोष में भावनात्मक समर्थन भी काफी महत्वपूर्ण होता है.

ये सही है कि भारत में हर बच्चे को हृदय स्वास्थ्य से जुडी हर देखभाल और सुविधा मिले और यह तभी संभव है. इसके अलावा समाज बड़े पैमाने पर सीएचडी के महत्व को समझे, संकल्प ले और इससे पीड़ित बच्चे की सही इलाज के लिए  कदम बढ़ाए. यह कठिन है, लेकिन असंभव नहीं है. हालांकि, स्वस्थ जीवन शैली को अपनाने से इस बीमारी की जोखिम को कम करने और सभी की स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद मिल सकती है, जल्द से जल्द पहचान और निदान के लिए एक मजबूत प्राथमिक देखभाल प्रणाली और उपचार के लिए एक बहु आयामी टीम होना जरुरी है,  इससे एक सम्पूर्ण मॉडल विकसित कर हृदय रोग विशेषज्ञों तक पहुंचने वाली बाधाओं को दूर किया जा सकता है.

Sara Ali Khan: किसी के बोलने से फर्क नहीं पड़ता

12 अगस्त, 1995 को पटौदी परिवार में जन्मी सारा अली खान अभिनेत्री अमृता सिंह और अभिनेता सैफ अली खान की बेटी हैं. कोलंबिया विश्वविद्यालय से इतिहास और राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिगरी हासिल करने के बाद सारा ने 2018 में सुशांत सिंह राजपूत के साथ रोमांटिक फिल्म ‘केदारनाथ’ से अभिनय जगत में कदम रखा था. इस के बाद उन्होंने ऐक्शन कौमेडी फिल्म ‘सिंबा’ की. ‘फोर्ब्स इंडिया’ की 2019 की 100 सैलिब्रिटीज सूची में सारा का नाम भी दर्ज हुआ. इस के बाद वे आनंद एल राय द्वारा निर्देशित फिल्म ‘अतरंगी रे’ में नजर आईं. हाल ही में उन की फिल्म ‘जरा हट के जरा बच के’ प्रदर्शित हुई है, जिस में विक्की कौशल उन के हीरो हैं.

अभिनय कैरियर

2018 में प्रदर्शित फिल्म ‘केदारनाथ’ में सारा ने एक ऐसी हिंदू लड़की की भूमिका निभाई, जिसे एक मुसलिम कुली से प्यार हो जाता है. इस फिल्म के लिए उन्होंने अपने सह अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मदद से शुद्ध हिंदी बोलनी सीखी थी.

‘केदारनाथ’ के प्रदर्शन के कुछ सप्ताह बाद सारा ने रणवीर सिंह के साथ रोहित शेट्टी की ऐक्शन फिल्म ‘सिंबा’ में अभिनय किया. उन्होंने ‘केदारनाथ’ की शूटिंग बीचबीच में रोक कर ‘सिंबा’ की शूटिंग की थी. इस के लिए वे विवादों में भी घिरी थीं. बहरहाल, ‘केदारनाथ’ और ‘सिंबा’ में सारा महज सुंदर व ग्लैमरस नजर आई थीं. उन के अंदर अभिनय प्रतिभा का अभाव था.

 

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इस के बाद सारा अली खान निर्देशक इम्तियाज अली की रोमांटिक फिल्म ‘लव आज कल’ में कार्तिक आर्यन के साथ नजर आई. इसी फिल्म के दौरान कार्तिक आर्यन के साथ उन के रोमांस की खबरें गरम हुई थीं, पर किसी ने भी इसे स्वीकार नहीं किया था. बाद में इन के ब्रेकअप की भी खबरें आईं. फिल्म ‘लव आज कल’ में सारा अली खान का किरदार काफी जटिल था, जिस के साथ वे न्याय नहीं कर पाईं. 2020 में ही वे वरुण धवन के साथ हास्य फिल्म ‘कुली नंबर वन’ में भी नजर आईं.

इस फिल्म के लिए भी सारा अली खान के अभिनय की जम कर आलोचना हुई. 2021 में आनंद एल. राय की फिल्म ‘अतरंगी रे’ में उन के सह अभिनेता अक्षय कुमार और धनुष थे. इस में पोस्टट्रौमैटिक स्ट्रैस डिसऔर्डर वाली एक महिला के किरदार में नजर आईं. मगर यह फिल्म भी सिनेमाघरों के बजाय ओटीटी प्लेटफौर्म ‘डिज्नी हौटस्टार’ पर स्टीम हुई. फिर 2023 की शुरूआत में ‘डिज्नी हौट स्टार’ पर स्टीम हुई पवन कृपलानी की फिल्म ‘गैसलाइट’ में ग्लैमरस लड़की के बजाय व्हील चेयर पर रहने वाली अपाहिज लड़की के किरदार में नजर आईं. इस में उन के ऐक्शन दृश्य भी हैं.

इस फिल्म से उन के प्रशंसकों को कुछ उम्मीदें जगी थीं और अब हाल ही में सारा की लक्ष्मण उत्तेकर निर्देशित फिल्म ‘जरा हट के जरा बच के’ प्रदर्शित हुई. इस फिल्म में उन के सह नायक विक्की कौशल हैं. फिल्मकार ने फिल्म की पूरी कहानी को सारा के किरदार सौम्या आहुजा दुबे के ही इर्दगिर्द बुना है. पर सारा निराश करती हैं. जब शुरुआत में साड़ी पहने हुए बिंदी लगाए सौम्या के किरदार में सारा अली खान परदे पर नजर आती हैं, तो एहसास होता है कि इस में सारा के अभिनय का जादू नजर आएगा. मगर चंद दृश्यों बाद यह भ्रम दूर हो जाता है.

काम न आया अभिनय

बौलीवुड का एक तबका मानता है कि सारा को उन की प्रतिभा के बल पर नहीं बल्कि उन के पिता सैफ अली खान के प्रभाव के चलते ही फिल्में मिल रही हैं.

होमी अदजानिया की फिल्म ‘मर्डर मुबारक’ में भी अभिनय कर रही हैं. वहीं बायोपिक फिल्म ‘ऐ वतन मेरे वतन’ में स्वतंत्रता सेनानी ऊषा मेहता का किरदार निभा रही हैं. ‘ऐ वतन मेरे वतन’ सिनेमाघरों के बजाय सीधे ओटीटी प्लेटफौर्म ‘अमेजन प्राइम वीडियो’ पर स्ट्रीम होगी.

 

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प्रोफैशनल अदाकारा क्यों नहीं बन पा रहीं

बौलीवुड का एक तबका मानता है कि अपनी कंजूसी के चलते सारा अभिनय के प्रशिक्षण पर भी पैसा खर्च नहीं करना चाहतीं. मगर 2 दिन बाद ही सारा ने अबू धाबी में अपनी कंजूसी की एक मिसाल पेश की, जिस का खुलासा उन्होने स्वयं एक औनलाइन वीडियो इंटरव्यू में किया. वास्तव में सारा अपनी नई फिल्म ‘जरा हट के जरा बच के’ के प्रमोशन के सिलसिले में ‘आइफा अवार्ड’ के समारोह में एक दिन के लिए आबू धाबी गई थीं.

 

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वहां वे पूरी टीम के साथ एक दिन रुकी थीं और अपनी मितव्ययता जीवनशैली के चलते रोमिंग पर पैसे खर्च करने के बजाय अपने हेयर ड्रैसर के हौट स्पौट का उपयोग किया.

सारा अली खान और उन के रिश्ते

इम्तियाज अली की फिल्म ‘लव आज और कल 2’ के दौरान फिल्म के सह कलाकार कार्तिक आर्यन के साथ सारा डेट कर रही थीं. दोनों ने कभी भी अपने रिश्ते की पुष्टि या खंडन नहीं किया हालांकि फिल्म निर्माता करण जौहर ने पिछले साल एक साक्षात्कार में उन के कथित ब्रेकअप के बारे में बात की थी. सारा की क्रिकेटर शुभमन गिल को डेट करने की भी खबरें थीं हालांकि दोनों में से किसी ने भी अपने इस अफवाह भरे रिश्ते की पुष्टि नहीं की.

क्या सीखा

‘‘मेरी सब से बड़ी सीख यह रही है कि उतारचढ़ाव जीवन का एक हिस्सा हैं. जब आप अपने सब से निचले स्तर पर होते हैं, तो आप को उठना और अपनी सब से तेज दौड़ लगानी होती है क्योंकि जब आप कम आत्मविश्वास महसूस कर रहे होते हैं और आप बैकफुट पर खेलना शुरू करो, यह सब से खराब है. मुझे नहीं लगता कि मुझे कोई पछतावा है.’’

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