लड़कियों पर हावी क्यों फिगर फोबिया

कई वर्षों से सिनेमा, टीवी और मौडलिंग के बढ़ते दबाव की वजह से सौंदर्य के मानदंड तेजी से बदलने लगे हैं. साफ शब्दों में कहा जाए तो आजकल जरूरत से ज्यादा खूबसूरत दिखने की अनर्गल चाहत, ऊपर से फैशन का अनावश्यक दबाव और उस पर खुले बाजार की मार ने यहां बहुतकुछ बदल डाला है.

सौंदर्य की इस मौजूदा परिभाषा से इत्तफाक रखने वाले भी इस सचाई को स्वीकार करने लगे हैं कि फिगर का यह फोबिया कई तरह की मुसीबतों को जन्म देने लगा है. सौंदर्य में नए अवतार जीरो फिगर की चाहत युवतियों के दिलोदिमाग पर इस हद तक हावी है कि वे सौंदर्य ही नहीं, अपने स्वास्थ्य को भी दांव पर लगा रही हैं.

नकल में माहिर होती युवा पीढ़ी को अब इस बात से कोई सरोकार नहीं है कि कल तक प्रीति जिंटा, रानी मुखर्जी और काजोल जैसी गोलमटोल व गदराए यौवन की मल्लिकाएं लोगों की पहली पसंद हुआ करती थीं. आज तो जिसे देखो वही दिशा पाटनी, अनन्या पांडे, आलिया भट्ट और दीपिका पादुकोण जैसी फिगर पाना चाहती हैं.

टीवी, सिनेमा और मौडलिंग की इस भेड़चाल पर टिप्पणी करते हुए मशहूर मौडल और मिस चंडीगढ़ रह चुकीं दिशा शर्मा ने कहा कि करीना कपूर की फिल्म ‘टशन’ जैसी फिगर प्राप्त करने के लिए अब कालेजगोइंग युवतियां ही नहीं, बल्कि नवविवाहिता और कईकई बच्चों की मांएं भी डाइटिंग के साथसाथ जिस प्रकार ऐंटीबायोटिक दवाएं गटक रही हैं, उस ने उन के सामने कई तरह की शारीरिक समस्याएं खड़ी कर दी हैं.

दरअसल भारत में जीरो फिगर की गपशप पहली बार करीना कपूर ‘टशन’ फिल्म से ले कर आई थीं. इस फिल्म में करीना कपूर ने तोतिया रंग की सैक्सी बिकिनी पहनी थी. उस सीन को समुद्र में फिल्माया गया. इस के बाद से ही बड़े जोरशोर से जीरो फिगर यानी सैक्सी दिखना सम?ा गया. हाल में दीपिका पादुकोण ने भी फिल्म ‘पठान’ में बिकिनी पहनी. वह तो बवाल भगवा बिकिनी पर मच गया, वरना जिस करीने से दीपिका पादुकोण की फिगर को फिल्माया गया उस ने यंग लड़कियों के दिमाग में जरूर रश्क पैदा किया होगा.

आज जितने भी फैशन शो होते हैं वहां जीरो फिगर वाली मौडल ही रहती हैं. हालांकि कई पश्चिमी देशों ने जीरो फिगर वाली मौडल्स की प्रतियोगिताओं और फैशन परेडों के इतर ऐसी मौडल्स के लिए भी प्रतियोगिताएं आयोजित करनी शुरू की हैं जो चरबीयुक्त हैं. लेकिन इस के बावजूद जीरो फिगर आज युवतियों के सिर चढ़ कर बोल रहा है.

समस्या यह है कि इस से मासिकधर्म में गड़बड़ी, सिर चकराने और पेट में जलन होने की शिकायतें देखी गई हैं लेकिन बाजारवाद ने जीरो फिगर को इस हद तक लोकप्रिय बना दिया है कि तमाम समस्याओं के बावजूद यह ट्रैंड में रहता है.

जीरो फिगर की अवधारणा

सौंदर्य के मानक हर समय और स्थान के अनुरूप कभी स्थायी नहीं होते. जीरो फिगर 32-22-34  के नाम में परिभाषित है. इस में छाती 32 इंच, हिप 34 इंच और कमर की माप 22 इंच है, जो आमतौर पर किसी 8-9 साल की बच्ची का होता है.

इसी साइज को मौडलिंग और सौंदर्य प्रतियोगिता की दुनिया में मुफीद माना जाता है. हलकी और छरहरी काया की प्राप्ति के लिए कम से कम भोजन कर के मौडलिंग के क्षेत्र में जमी लड़कियों की मजबूरी को तो समझ जा सकता है मगर आजकल इस के लिए लड़कियों का मकसद युवाओं को आकर्षित करना भी है. भले ही इस के लिए उन्हें कोई भी कीमत चुकानी पड़े.

आजकल कमर ही क्यों, चेहरे पर चरबी की जरा सी भी परत जमा न हो, इस के लिए अब कौस्मेटिक सर्जरी के अलावा भी बहुत से विकल्पों का इस्तेमाल किया जा रहा है. चंडीगढ़ स्थित एक जिम की संचालिका कहती हैं, ‘‘केवल फिगर की दीवानगी में शरीर को कंकाल बनाना सम?ादारी की बात नहीं है. यह एक जनून है और हद से गुजर जाने के बाद यही चाहत आगे चल कर मानसिक बीमारी बन जाती है.’’

बेकाबू हो रही है ग्लैमर की स्थिति

ग्लैमरस फिगर वैसे तो हर औरत की चाहत होती है लेकिन जीरो फिगर की चाहत में युवतियां जिस प्रकार संतुलित आहार तक को नजरअंदाज कर रही हैं, वह अत्यंत घातक है. इस से शरीर में पौष्टिक तत्त्वों की कमी से पाचनतंत्र भी कमजोर पड़ जाता है, जिस से इंसान की भूख मर जाती है.

इस से एनोरौक्सिया की चपेट में आने पर चक्कर आना, बेहोशी के दौरे पड़ने की संभावना भी बढ़ जाती है. साथ ही, इस से गर्भाशय की समस्या और हड्डियों के कमजोर होने का भी खतरा बना रहता है.

औरत के शरीर को रोज औसतन 1,500 से 2,500 कैलोरी की जरूरत होती है लेकिन जब यह घट कर 1,200 रह जाती है तो शरीर अंदरूनी हिस्सों और हड्डियों से इस कमी को पूरा करना शुरू कर देता है, जोकि स्वास्थ्य के लिए काफी बुरा संकेत है.

समय से पहले बुढ़ापे को आमंत्रण

फिगर को मैंटेन रखने का दबाव मौडलिंग, एंकरिंग और अभिनय से जुड़ी युवतियों पर रहने की बात तो फिर भी समझ में आती है लेकिन शादी की तारीख नजदीक आते ही विवाह की तैयारियों में जुटी युवतियां भी जीरो फिगर की गिरफ्त में आए बिना नहीं रहतीं.

शादी से ठीक पहले कमर को पतला करने का क्रेज युवतियों के दिलोदिमाग पर इस कदर हावी होता है कि इस के लिए वे 15 से 16 किलोग्राम वजन कम कर लेती हैं. 18 से 25 साल के आयुवर्ग की युवतियों में यह प्रवृत्ति सर्वाधिक देखने को मिलती है.

हाल ही में वेटवाचर पत्रिका द्वारा कराए गए सर्वे में कहा गया है कि युवतियां भूख मार कर भले ही छरहरे बदन की मल्लिकाएं बन जाएं मगर थोड़े समय बाद उन का रूप प्रौढ़ औरत जैसा दिखाई देने लगता है. वे उम्र से पूर्व ही बड़ी दिखाई देने लगती हैं. सच तो यह है कि भरे गाल और मांसल देह वाली औरत बड़ी उम्र में भी ज्यादा युवा दिखाई देती है.

डाइटिंग के साइड इफैक्ट

आमतौर पर महिलाएं पतली होने के लिए डाइटिंग पर फोकस करती हैं. मशहूर महिला रोग विशेषज्ञ डा. सुषमा नौहेरिया की राय में वजन कम करने और फिर खुद को संतुलित रखने के लिए जौगिंग, व्यायाम का सहारा लेना डाइटिंग और वजन घटाने वाली दवा लेने से कहीं बेहतर है.

अत्यधिक डाइटिंग से समूचे शरीर पर दुष्प्रभाव पड़ता है, मसलन, उपवास की स्थिति से शरीर में पाचक तत्त्वों का संचार कम होने से इंसान की पाचनशक्ति क्षीण हो जाती है, जिस से लिवर और मांसपेशियों पर बुरा असर पड़ता है. कुछ मामलों में हार्मोन असंतुलन की वजह से युवतियों में मासिकधर्म भी अनियमित होता देखा गया है. अत्यधिक व्यायाम या जिम जाने से शरीर में पानी की कमी के साथसाथ चेहरे पर झुर्रियां और आंखों के नीचे काले घेरे भी नजर आने लगते हैं.

सुंदर माझे घर: दीपेश ने कैसे दी पत्नी को श्रद्धांजलि

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 नेलपौलिश ज्यादा दिनों तक नाखूनों पर टिकाने के लिए क्या करूं?

सवाल-

मुझे नेलपौलिश लगाना अच्छा लगता है. लेकिन नाखूनों पर पौलिश ज्यादा दिन नहीं टिकती. क्या ऐसा कोई उपाय है जिस से नेलपौलिश ज्यादा दिनों तक नाखूनों पर टिक सके?

जवाब-

हाथों को खूबसूरत दिखाने के लिए नेलपौलिश लगाना एक आम बात है. कई रंगों में उपलब्ध नेलपौलिश हाथों को सुंदर दिखाने के लिए इस्तेमाल की जाती है. पर कई बार ऐसा होता है कि नेलपौलिश लगाने के बाद जैसे ही आप पानी से जुड़ा कोई काम करती हैं तो नेलपौलिश छूट जाती है. उस पर भी ये एकसाथ नहीं हटती है और देखने में नाखून सुंदर नहीं दिखाई देते. ऐसे में परमानैंट जैल नेलपौलिश जो परमानैंट मेकअप का एक हिस्सा है, उस से किसी भी तरह के नाखूनों को कृत्रिम रूप से सुंदर बनाया जा सकता है. जैल नेलपौलिश नाखूनों पर 10 दिनों से 3 हफ्तों तक टिकी रहती है.

ये टिप्स भी पढ़ें-

खूबसूरत नेल पौलिश हमारे नाखून को और भी आकर्षक बनाते हैं. पर नेल पौलिश कुछ ही दिनों में नाखून पर से उतर जाती है या कलर छोड़ देती है और बार बार नेल पौलिश लगाना संभव नहीं हो पाता. इस समस्या से हम में से कई लडकियां परेशान हैं. अगर गहरे रंग की नेल पौलिश छूटने लगे तो वह बहुत ही खराब लगती है. लेकिन आप हर दिन वही नेल पौलिश तो नहीं लगाती फिरेंगी और ना ही घर के काम काज या खाना बनाना छोड देंगी. नेल पौलिश किस तरह से लंबे समय तक नाखूनों पर टिके इसके लिये आइये जानते हैं कुछ टिप्सः

साफ नाखूनों पर लगाएं

हमेशा नेल पौलिश को साफ नाखूनों पर ही लगाएं. इससे कोई फरक नहीं पडता कि आपने पहले कोई नेल पौलिश लगाई थी या नहीं. नाखून के आस पास का प्राकृतिक तेल, नेल पौलिश को ज्यादा समय के लिये ठहरने नहीं देती. इसलिये नाखूनों को अच्छे से साफ करें.

नाखून साफ करें

नया कलर कोट लगाने से पहले अपने नाखूनों को साफ करें. पुरानी नेल पौलिश को नेल रिमूवर से छुड़ा कर फाइलर से नेल को शेप करें. उसके बाद हाथों को साफ पानी से धोएं.

बरसात की काई: भाग 1- क्या हुआ जब दीपिका की शादीशुदा जिंदगी में लौटा प्रेमी संतोष?

शाम ढलते देख कर दीपिका ने बिस्तर समेटना शुरू किया. उस के हलके भूरे रेशम से बाल बारबार उस के गुलाबी गालों पर गिर रहे थे और वह उन्हें बारबार अपनी कोमल उंगलियों से कानों के पीछे धकेल रही थी.

‘‘अब उठो भी… यह चादर समेटने दो,’’ कहते हुए दीपिका ने संतोष को हिलाया, जो अब भी बिस्तर पर लेटा था.

‘‘रहने दो न इन जुल्फों को अपने सुंदर मुखड़े पर… जैसे चांद को बादल ढकने की कोशिश कर रहे हों,’’ संतोष ने दीपिका को अपनी जुल्फें पीछे करते देख कहा.

‘‘शाम होने को आई है, जनाब. अब भी इन बादलों को घर नहीं भेजा तो आज तुम्हारे इस चांद को घरनिकाला मिल जाएगा, समझे?’’

‘‘तुम्हें किस बात का डर है? न घर की कमी है और न घर ले जाने वाले की… जिस दिन तुम हां कह दो उसी दिन मैं…’’

‘‘बसबस, हां कर तो चुकी हूं… अब जाओ भी. उदय घर आते ही होंगे… तब तक मैं सब ठीकठाक कर लूं,’’ दीपिका फटाफट हाथ चलाते घर व्यवस्थित करते हुए बोली, ‘‘कल कितने बजे आएंगे, गुरुदेव?’’

‘‘वही, करीब 12 बजे,’’ कहते ही संतोष कुछ सुस्त हो गया, ‘‘अब यों चोरीछिपे मिलना अच्छा नहीं लगता मानो हम प्यार नहीं कोई गुनाह कर रहे हों.’’

‘‘गुनाह तो कर ही रहे हैं हम, संतोष.

यदि हमारी शादी हो गई होती तब अलग बात थी पर अब मैं उदय की पत्नी हूं… तुम मेरे घर में मेरे संगीत अध्यापक की हैसियत से आते हो. इस स्थिति में हमारा यह रिश्ता गुनाह ही तो हुआ न?’’

‘‘ऐसा क्यों भला? पहले हम दोनों ने प्यार किया… उदय तुम्हारी जिंदगी में बाद में आया. अगर तुम्हारे और मेरे घर वाले जातबिरादरी के चक्कर में न पड़ कर हमारे प्यार के लिए राजी हो गए होते और आननफानन में तुम्हारी शादी दूसरे शहर में न करवा दी होती तो…’’

‘‘छोड़ो पुरानी बातों को. यह क्या कम है कि दूसरे शहर में भी हम एकदूसरे से टकरा गए और एक बार फिर मिल गए. शायद प्रकृति को भी मेरे मन में तुम्हारे लिए इतना प्यार देख मुझ पर दया आ गई और उस ने हमारे समीप्य का रास्ता सुझा दिया.’’

दफ्तर से लौटने के बाद शाम ढले उदय बरामदे में बैठा शाम की चाय की  चुसकियां ले रहा था. दीपिका वहीं बैठी स्वैटर बुन रही थी. संतोष को दीपिका के हाथ से बनी चीजें बहुत भाती थीं. इसीलिए वह संतोष के लिए कभी स्वैटर तो कभी दस्ताने बुनती रहती. उदय के पूछने पर कह देती कि अपनी किसी सहेली या छोटे भाई के लिए बना रही है. फिर बनाने के बाद खुशी से अपने पहले प्यार संतोष को उपहारस्वरूप दे आती.

दीपिका और उदय की शादी को 2 वर्ष बीत चुके थे. इन 2 वर्षों की शुरुआत में दीपिका बेहद उदासीन रही. उदय सोचता कि नया शहर, नया साथी और नई जिंदगी के चलते वह अपने पुराने जीवन को याद कर उदास रहती है. किंतु असली वजह थी उस का प्यार संतोष का उस से बिछड़ जाना. दीपिका बारबार उस शाम को कोसती जब वह और संतोष मूवी देख कर बांहों में बांहें डाले लौट रहे थे कि बड़े भाई साहब से उन का अचानक सामना हो गया. बिजली ही टूट पड़ी थी. वहीं बाजार से घसीटते हुए उसे घर लाया गया था. अब उस का कमरा ही उस का संसार बना दिया गया था. न कोई मिलने आएगा, न वह किसी से मिलने जा सकेगी. ढाई दिन भूख हड़ताल भी की दीपिका ने, किंतु कोई न पिघला. पेट की ज्वाला ने उसे ही पिघला दिया. संतोष से मिलने का कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था. घर वाले पुराने विचारों के थे और ऊपर से संतोष विजातीय भी था.

‘अगर उस लड़के की जान की सलामत चाहती है, तो भूल जा उसे’, ‘एक बार आप आज्ञा दे दो भाई साहब उस कमीने के टुकड़े भी नहीं मिलेंगे,’ ‘मेरा मन करता है कि इस निर्लज्ज को ही जहर दे कर मार डालूं’ जैसे कठोर वाक्यों से उस की सुबह और शाम होने लगी थी. धीरेधीरे उस का मनोबल टूटने लगा था. फिर 15 दिनों के भीतर उस की शादी तय कर दी गई. उस की अपने होने वाले पति या आने वाली जिंदगी के बारे में कुछ भी जानने की लालसा नहीं थी. वह एक मुरदे की भांति वही करती गई, जो उस के घर वालों ने उस से करने को कहा. विवाहोपरांत वह दूसरे शहर में पहुंच गई जहां उदय की नौकरी थी. घर में केवल उस का पति और वह ही रहती थी. ससुराल वाले दूसरे शहर में रहते थे.

उदय बहुत अच्छा व्यक्ति था. किंचित गंभीर किंतु सरल. किसी भी लड़की के लिए ऐसा जीवनसाथी मिलना बेहद खुशी की बात होती. वह अपनी पत्नी की हर खुशी का ध्यान रखता. यहां तक कि सुहागरात पर दीपिका के चेहरे पर दुख की छाया देख उदय ने उसे जरा भी तंग नहीं किया. सोचा पहले वह अपने नए परिवेश में समा जाए.

कुछ दिन उदास रहने के बाद दीपिका ने भी अपना मन लगाने में ही भलाई समझी. वह अपने नए घर, अपने नए रिश्तों में अपनी खुशी तलाशने लगी.

उस शाम घर में एक छोटी सी पार्टी थी. उदय के सभी मित्र आमंत्रित थे. उदय के जिद करने पर दीपिका ने एक छोटा सा गीत सुनाया. सारी महफिल उस के सुरीले गायन पर झूम उठी थी. सभी वाहवाह करते नहीं थक रहे थे. उदय मंत्रमुग्ध रह गया था.

‘‘मुझे पता नहीं था कि मेरी बीवी ने इतना अच्छा गला पाया है. तुम संगीत की शिक्षा क्यों नहीं लेतीं? तुम्हारा मन भी लगा रहेगा और शौक भी पूरा हो जाएगा,’’ उस रात सब के जाने के बाद उदय ने कहा था.

दीपिका चुप रही थी. वह संगीत की कक्षा ही तो थी जहां उस की मुलाकात संतोष से हुईर् थी. दोनों के सुर इतनी अच्छी तरह से मेल खाते थे कि उन के गुरु ने स्वत: ही उन की जोड़ी बना दी थी. फिर साथ अभ्यास करतेकरते कब संगीत ने उन दोनों के दिल के तार आपस में जोड़ दिए, उन्हें पता ही नहीं चला. गातेगुनगुनाते दोनों एक उज्ज्वल संगीतमय भविष्य के सपने संजोने लगे थे. लेकिन उस एक शाम ने उन के सभी सपनों को चकनाचूर कर दिया था और आज फिर उदय संगीत का विषय ले बैठा था.

दीपिका के चुप रहने के बावजूद उस की इच्छाओं का ध्यान रखने वाले उस के पति ने इधरउधर से पता कर उस के लिए एक संगीत अध्यापक का इंतजाम कर दिया, ‘‘आज से रोज तुम्हें नए सर संगीत का अभ्यास करवाने आया करेंगे.’’

संतोष को अपने संगीत अध्यापक के नए रूप में देख कर दीपिका हैरान रह गई. विस्फारित आंखों उसे ताकती वह कुछ न बोल सकी. हकीकत से अनजान उदय ने दोनों की मुलाकात करवाई और फिर ‘आल द बैस्ट’ कहता हुआ दफ्तर चला गया.

‘‘तुम यहां कैसे? क्या मेरा पीछा करते हुए…?’’ दीपिका के मुंह से पहला वाक्य निकला.

‘‘नहीं दीपू, मैं तुम्हारा पीछा नहीं कर रहा. मैं तो इस शहर में रोजगार ढूंढ़ने आया और किसी के कहने पर यहां नौकरी की तलाश में पहुंच गया.’’

‘‘मुझे दीपू कहने का हक अब तुम खो चुके हो, संतोष. अब मैं शादीशुदा हूं. तुम्हारे लिए एक पराई स्त्री.’’

पता नहीं नियति को क्या मंजूर था, जो संतोष और दीपिका को एक बार फिर एकदूसरे के समक्ष खड़ा कर दिया था. अपनीअपनी जिंदगी में दोनों आगे बढ़ने को प्रयासरत थे, परंतु इस अप्रत्याशित घटना से दोनों को एक बारगी फिर धक्का लगा था.

‘‘मुझे तुम संगीत सिखाने आने दो दीपू. नहींनहीं दीपिका. फीस के पैसों से मेरी मदद हो जाएगी. उदय के सामने मैं कोई बात नहीं आने दूंगा, यह मेरा वादा रहा.’’

जमाना बदल गया: भाग 2- ऐश्वर्या ने सुशांत को कैसे सिखाया सबक?

ऐश्वर्या घर लौट आई. ठंडे दिमाग से सोचा तो उसे यह मौका उपयुक्त लगा. पापा 6 महीने बाद रिटायर होने वाले थे. उस का पैकेज तो साढ़े चार लाख रुपए सालाना का था, लेकिन हाथ में केवल 30 हजार ही प्रतिमाह आते थे. इतने में अपना खर्चा चलाना मुश्किल था, घर की मदद करना तो दूर की बात थी.

वह अगले दिन शाम को जब रैस्टोरैंट में पहुंची तो सुशांत टैरेस में उस की प्रतीक्षा कर रहा था. हलकाहलका संगीत बज रहा था. शाम बहुत ही खूबसूरत थी.

ऐश्वर्या ने जब अमेरिका जाने की इच्छा जताई तो सुशांत ने कहा, ‘‘बहुत सही निर्णय लिया है आप ने. वहां से लौटने के बाद आप के कैरियर में चार चांद लग जाएंगे. मैं कोशिश करूंगा कि वहां की हमारी सहयोगी कंपनी आप के रहने की व्यवस्था भी कर दे.’’

यह सुन ऐश्वर्या का चेहरा प्रसन्नता से खिल उठा कि अमेरिका में रहना सब से महंगा है.

अगर उस का इंतजाम हो जाए तो 1 साल में काफी पैसे बचाए जा सकते हैं. अत: उस ने कृतज्ञता भरे स्वर में कहा, ‘‘सर, आप जो मेहरबानी कर रहे हैं, समझ में नहीं आता कि उसे मैं कैसे चुका पाऊंगी.’’

‘‘आप चाहें तो उसे आज ही चुका सकती हैं,’’ सुशांत ने कहा.

‘‘कैसे?’’ ऐश्वर्या ने अपनी बड़ीबड़ी पलकें ऊपर उठाते हुए पूछा.

‘‘देखिए, यह दुनिया गिव ऐंड टेक के फौर्मूले पर चलती है. मांबाप किसी बच्चे को पालतेपोसते हैं, तो बदले में अपेक्षा करते हैं कि बच्चा बुढ़ापे में उन की देखभाल करेगा. एक अध्यापक किसी को शिक्षा देता है, तो बदले में तनख्वाह लेता है. सरकार भी अगर जनता को सुरक्षा और अन्य ढेर सारी सुविधाएं देती है, तो बदले में उस से टैक्स लेती है. इस दुनिया में मुफ्त में कुछ भी नहीं मिलता,’’ सुशांत के चेहरे पर किसी दार्शनिक जैसे भाव उभर आए थे.

ऐश्वर्या की समझ में नहीं आया कि वह कहना क्या चाहता है. अत: उस ने अचकचाते हुए पूछा, ‘‘जी, मुझे क्या करना होगा?’’

‘‘बस कुछ दिनों के लिए मेरी बन जाओ. मैं आप के कैरियर को इतनी ऊंचाइयों पर पहुंचा दूंगा कि लोग देख कर ईर्ष्या करेंगे,’’ कह सुशांत ने सीधे ऐश्वर्या की आंखों में झांका.

ऐश्वर्या को अपने आसपास की चीजें हिलती महसूस हुईं. उस ने हमेशा कालेज में टौप किया लेकिन क्या अब उस की प्रतिभा और काबिलीयत का कोई मोल नहीं? वह बस मांस का एक लोथड़ा है, जिस की कीमत लगाई जा रही है. देह व्यापार का एक सुसंस्कृत  प्रस्ताव उस के सामने था. अपमान से उस की आंखें छलछला आईं.

‘‘ऐश्वर्याजी, कोई जोरजबरदस्ती नहीं. यह एक प्रस्ताव मात्र है. आप मान लेंगी तो ठीक नहीं मानेंगी तो भी ठीक. कंपनी में आप की पोजीशन पर कोई असर नहीं पड़ेगा. आप पहले की ही तरह अपना काम करती रहेंगी,’’ सुशांत ने अपने स्वर में भरपूर चाश्नी घोलते हुए कहा.

‘‘माफ कीजिएगा सर, आप ने मुझे गलत समझा. मैं बिकाऊ नहीं हूं,’’ अपने आंसुओं को रोकते हुए ऐश्वर्या खड़ी हो गई.

‘‘अरे, आप खड़ी क्यों हो गईं? आराम से कौफी तो पी लीजिए.’’

‘‘ऐश्वर्या ने उस की बात का कोई उत्तर नहीं दिया और तेजी से वहां से चली गई. अपने फ्लैट आ कर वह बुरी तरह फफक पड़ी. उस ने सफलता के लिए शौर्टकट अपनाने वाली बहुत सी लड़कियों के किस्से सुन रखे थे, लेकिन उसे भी ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ेगा, ऐसा उस ने कभी सोचा भी न था. अब तो उस के लिए इस कंपनी में काम करना मुश्किल हो जाएगा, क्योंकि सुशांत हर कदम पर उस के लिए समस्याएं खड़ी करेगा. तो क्या उसे यह कंपनी छोड़ देनी चाहिए? लेकिन उस ने तो 2 साल नौकरी करने का बौंड भर रखा है.’’

पूरी रात ऐश्वर्या करवटें बदलती रही. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करे. अगले दिन वह सहमीसहमी सी औफिस पहुंची. उसे पूर्ण विश्वास था कि आज सुशांत किसी न किसी बहाने उसे जलील करेगा, लेकिन उस का व्यवहार तो पहले की ही तरह मृदु और शिष्ट था. ऐसा लग रहा था जैसे कुछ हुआ ही न हो.

1 सप्ताह ऐश्वर्या सहमीसहमी सी रही, फिर सामान्य हो गई. उसे लगा कि शायद सुशांत को अपने किए पर पछतावा होगा. धीरेधीरे महीना बीत गया. कोई खास घटना नहीं हुई.

एक दिन सुशांत ने उसे अपने चैंबर में बुला कर कहा, ‘‘ऐश्वर्या, यह अमेरिका के हमारे एक खास क्लाइंट का प्रोजैक्ट है. इसे 48 घंटे में पूरा करना है. क्या आप इसे कर पाएंगी?’’

‘‘जी, मैं पूरी कोशिश करूंगी.’’

‘‘गुड,’’ सुशांत ने कहा, ये कंपनी के खास क्लाइंट हैं, इसलिए ध्यान रहे कि कोई गड़बड़ न हो.

‘‘ओके सर,’’ कह ऐश्वर्या अपनी सीट पर लौट आई. उस ने उस प्रोजैक्ट को आराम से देखा, तो लगा कि यह तो बहुत आसान है. सुशांत सर बेकार में परेशान हो रहे थे. वह इसे आज ही पूरा कर सकती है.

ऐश्वर्या ने काम शुरू कर दिया लेकिन उस का अंदाजा गलत निकला. वह उस प्रोजैक्ट पर जैसेजैसे आगे बढ़ती गई वैसेवैसे उस की जटिलताएं भी बढ़ती गईं. दोपहर तक वह कोई खास काम नहीं कर पाई. उसे लगने लगा कि 2 दिनों में यह काम पूरा कर पाना संभव नहीं है.

वह लंच के बाद सुशांत से इस के बारे में कुछ पूछने गई, लेकिन वह किसी मीटिंग के सिलसिले में बाहर गया था और अगले दिन ही लौटना था. उस ने दूसरे सीनियर्स से भी बात की, लेकिन किसी ने भी पहले कभी ऐसे प्रोजैक्ट पर काम नहीं किया था.

अगले दिन सुशांत ने औफिस आते ही प्रोजैक्ट की प्रगति देखी तो बुरी तरह भड़क उठा, ‘‘यह क्या? आप ने तो कुछ किया ही नहीं? मैं औफिस में नहीं था, तो आप हाथ पर हाथ रख कर बैठी रहीं.’’

‘‘ऐसा नहीं है सर, इस में कुछ प्रौब्लम आ गई थी, जिस के बारे में कोई कुछ नहीं बता पाया. मैं ने दोपहर बाद क्लाइंट को कई बार फोन भी किया, लेकिन उस ने उठाया नहीं,’’ ऐश्वर्या ने सफाई दी.

‘‘ऐश्वर्या, आप होश में तो हैं,’’ सुशांत चीख सा पड़ा, ‘‘आप पढ़ीलिखी हैं. आप को इतनी तमीज तो होनी चाहिए कि जिस समय आप फोन कर रही थीं उस समय अमेरिका में रात होगी और क्लाइंट सो रहा होगा. खैर मनाइए कि उस की नींद नहीं टूटी वरना आप की नौकरी चली जाती.’’

‘‘सर, तो मैं और क्या करती?’’ अपनी बेबसी पर ऐश्वर्या की आंखें छलछला आईं.

‘‘अपने दिमाग का इस्तेमाल करतीं और काम पूरा करतीं,’’ सुशांत ने बुरी तरह डपटा. फिर प्रोजैक्ट को देख कर कुछ बातें बता उसे उस की सीट पर भेज दिया.

ऐश्वर्या ने लाख कोशिश की, लेकिन प्रोजैक्ट उस दिन पूरा नहीं हो पाया. इस से नाराज हो कर सुशांत ने उसे एक मैमो पकड़ा दिया.

धीरेधीरे सुशांत का असली रंग सामने आने लगा था. वह सब से कठिन काम ऐश्वर्या को सौंपता और उस के पूरा न होने पर डांटने के साथसाथ मैमो भी पकड़ाता रहता.

एक दिन सुशांत ने सुबहसुबह ही ऐश्वर्या को अपने चैंबर में बुला कर कहा, ‘‘3 महीने में आप को 11 मैमो मिल चुके हैं. अगर आप ने अपने काम में सुधार नहीं किया तो कंपनी आप को डिसमिस करने के लिए मजबूर हो जाएगी. इसे आप आखिरी चेतावनी समझिएगा.’’

Tunisha Sharma Case: शीजान खान की बहन शफाक नाज का छलका दर्द

टीवी एक्ट्रेस तुनीषा शर्मा की आत्महत्या केस में एक्टर शीजान खान को आरोपी है. तुनीषा शर्मा ने 20 साल की उम्र में आत्महत्या कर ली. तुनीषा शर्मा 24 दिंसबर को टीवी सीरियल के सेट पर मृत पाई गई थी. तुनीषा की मां वनिता शर्मा ने शीजन खान पर खुदखुशी उकसाने का आरोप लगाया था. तुनीषा शर्मा आत्महत्या मामले में शीजन खान को गिरफ्तार कर लिया गया था. लेकिन अब  इस मामले में शीजन खान को बेल मिल गई है. शीजन खान फिलहाल केपटाउन में खतरों के खिलाड़ी 13 की शूटिंग कर रहे हैं.

इन सबके बीच शीजान की बहन एक्ट्रेस शफाक नाज़ ने एक इंटरव्यू में फैमिली की मुश्किलों के बारे में बात की.

शफाक नाज का छलका दर्द

शीजान खान की बहन और एक्ट्रेस शफाक नाज़ ने एक इंटरव्यू में अपने भाई शीजान खान के तुनीषा आत्महत्या मामले में गिरफ्तार होने के बाद फैमिली के सामने आई परेशानियों के बारे में बात की.

शफाक नाज ने कहा, “ जो कुछ हुआ है उस पर प्रोसेस करने के लिए मैं अभी भी स्ट्रगल कर रही हूं. मैं अभी भी अपने इमोशंस को समझने की कोशिश कर रही हूं. कभी-कभी यह सब बहुत जबरदस्त होता है. वह कहती हैं, ”किसी को इस बात का अंदाजा नहीं है कि मैं किस दौर से गुजर रही हूं.’

 

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लोग कहते है ‘कातिल की बहन’

शफाक नाज़ ने आगे इंटरव्यू में बताया कि “लोगो ने मेरी और मेरे परिवार की एक इमेज बना ली है. जब मैं सोशल मीडिया पर जाती हूं, मुझे हमारे खिलाफ ऐसे कठोर कमेंट्स देखने को मिलते है वे ‘ ये तो कातिल की बहन है’ जैसी बातें लिखने से पहले सोचते नहीं है. मैं यह नहीं कह सकती मुझे फर्क नहीं पड़ता . यकीकन मुझे ये प्रभावित करता है, यह मुझे तोड़ देता है.”

 

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 चिंता में हैं शफाक

शफाक ने आगे कहा, “ “मुझे लगने लगा कि मैं लाइफ में अच्छी चीज़ों के लायक नहीं हूं. मैं बहुत ज्यादा टेंशन से जूझ रही हूं. हर दिन से निपटना कठिन होता जाता है. ऐसे भी दिन होते हैं जब मुझमें अपने बिस्तर से उठने की ताकत भी नहीं होती है.”

नए डायलॉग्स के बाद भी नहीं चला ‘आदिपुरुष’ का जादू, सातवे दिन बॉक्स ऑफिस पर हुए धड़ाम

प्रभास, कृति सेनॉन और सैफ अली खान स्टारर ‘आदिपुरुष’ (Adipurush) फिल्म 16 जून को काफी लंबे अरसे के बाद बड़े स्क्रीन पर रिलीज हो गई है. आज शुक्रवार को फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अपने 7 दिन पूरे कर लिए है. जब से आदिपुरुष मूवी रिलीज हुई तभी से विवादो में आ गई है. दरअसल, ‘आदिपुरुष’ (Adipurush) के डायलॉग्स को लेकर जमकर बवाल हो रहा है. डायरेक्टर ओम राउत की ‘आदिपुरुष’ ने पहले दिन ही रिकॉर्डतोड कमाई की थी. लेकिन अब ‘आदिपुरुष’ का बॉक्स ऑफिस पर बुरा हाल.

गुरुवार का कलेक्शन

रिपोर्ट्स के मुताबिक इस गुरुवार को आदिपुरुष की कहानी भी बुधवार से कुछ अलग नहीं है. रविवार को फिल्म का इंडिया कलेक्शन 69 करोड़ रुपये के करीब था, लेकिन सोमवार को इसने सिर्फ 16 करोड़ की कमाई की. इसके बाद से फिल्म की कमाई हर रोज, पिछले दिन के मुकाबले लगातार गिर रही है.

आदिपुरुष’ ने बॉक्स ऑफिस पर 5 से 6 करोड़ रुपये का ही कलेक्शन किया है. बुधवार को फिल्म ने 7.25 करोड़ रुपये कमाए थे, जिसके मुकाबले अगले दिन का कलेक्शन गिर गया है. वहीं फिल्म ने इंडिया में हिंदी वर्जन मे 7वे दिन 3 करोड़ कमाई की.

डायलॉग्स के बाद भी नहीं चला ‘आदिपुरुष’ का जादू

‘आदिपुरुष’ रामायण बेस्ड मूवी है. ‘आदिपुरुष’ के रिलीज होते ही वह अलोचनाओं में घिर गई है क्योंकि दर्शको को ‘आदिपुरुष’ के VFX डिजाइन और डायलॉग्स पसंद नहीं आए. सोशल मीडिया पर लोगो ने ‘आदिपुरुष’ के डायलॉग्स को लेकर डायरेक्टर ओम राउत और मनोज शुक्ला मुंतशिर को जमकर ट्रोल किया गया है. पहले दिन के बाद से ही फिल्म के डायलॉग राइटर मनोज मुंतशिर को अपनी सफाई देनी शुरू करनी पड़ी. हालांकि, अंत में यही तय हुआ कि फिल्म के सभी विवादित डायलॉग बदल दिए जाएगे. अब फिल्म के नए डायलॉग्स आने के बाद भी ‘आदिपुरुष’ की कमाई पर कोई फर्ख नहीं पड़ा. ‘आदिपुरुष’ बॉक्स ऑफिस पर पिट गई है.

 

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 150 रुपये की टिकट

‘आदिपुरुष’ के डायरेक्टर ओम राउत ने दर्शको थियटर में लाने के लिए ‘आदिपुरुष’ की टिकट 150 रुपये तक कर दी थी लेकिन ये ऑफर सिर्फ 2 दिन तक के लिए. 22 और 23 जून तक फिल्म की टिकट 150 रुपये है. इस ऑफर के बाद भी ‘आदिपुरुष’ का बॉक्स ऑफिस पर बुरा हाल है.

मिनी वर्कआउट से करें वजन कम

जैसा कि नाम से पता चलता है, मिनी वर्कआउट वर्कआउट के 5-10 मिनट के सैशन होते हैं जिन्हें आप कभी भी, कहीं भी कर सकते हैं. ‘फिटनैस हैबिट जिम’ के संचालक असफर ताहिर पिछले 11 सालों से लोगों के स्वास्थ्य और फिटनैस के लिए कार्य कर रहे हैं. फिटनैस फ्रीक असफर ताहिर कहते हैं, ‘‘शादी के बाद जब महिलाओं का वजन बढ़ना शुरू होता है तब वे इस पर ध्यान नहीं देती हैं. थोड़े ही दिनों में जब वजन दोगुना हो जाता है तब परेशान होती हैं कि कैसे घटाएं.

फिर आपाधापी में महीने 2 महीने के लिए जिम जौइन कर लेती हैं. लेकिन इस से कोई फायदा नहीं है. अगर आप को फिट रहना है तो ऐक्सरसाइज आप की आदत होनी चाहिए और जरूरी नहीं कि इस के लिए आप बहुत सारे पैसे खर्च करें और बहुत सारा समय दें. अगर मिनी वर्कआउट को महिलाएं और लडकियां अपनी रोज की आदत बना लें तो उन्हें मोटापे का सामना कभी नहीं करना पड़ेगा.’’

मिनी वर्कआउट के बारे में बात करते हुए ताहिर कहते हैं, ‘‘लोग सोचते हैं कि वजन घटाने के लिए उन्हें 45-60 मिनट के लंबे वर्कआउट सैशन करने की जरूरत होती है, लेकिन मैं आप को बताऊं कि 15 मिनट का मिनी वर्कआउट भी उतना ही फायदेमंद हो सकता है. खासतौर से लेडीज के लिए. अगर मिनी वर्कआउट रोजमर्रा के काम या औफिस के दौरान 1-2 बार भी कर लें तो वजन घटाने, पूरा दिन सक्रिय रहने और बहुत सारी कैलोरी बर्न करने में मदद मिलती है जो कसरत के एक लंबे सैशन से बेहतर है.

इस तरह का वर्कआउट आप के व्यस्त शैड्यूल में शामिल करना आसान भी है. अगर आप के पास जिम जाने का टाइम या पैसे नहीं हैं, तो जिम न करें, घर में रह कर सिर्फ 15 मिनट रोज ऐक्सरसाइज करें. आप का वजन धीरेधीरे कम होने लगेगा और पूरी बौडी टोन्ड हो जाएगी.’’

  1. हैल्दी और यंग

भारत में ज्यादातर महिलाएं अभी भी हाउसवाइफ हैं. उन का सुबह का वक्त सब से ज्यादा व्यस्त होता है जब पति, बच्चों और सासससुर का नाश्ता बनाना है, बच्चों को स्कूल के लिए रैडी करना है, उन का और पति का लंच पैक करना है, बच्चों को स्कूल बस तक छोड़ना है या स्कूल तक उन को खुद छोड़ कर आना है, ऐसे बहुतेरे काम एक गृहिणी सुबहसुबह ऐक्सप्रैस ट्रेन की तरह निबटाती है.

घरपरिवार की जिम्मेदारी संभालने के चक्कर में महिलाएं खुद के लिए समय नहीं निकाल पाती हैं. उन के पास जिम या योगा क्लासेज जौइन करने का समय नहीं होता है, लेकिन पति की नजरें तो पत्नी को आकर्षक, हैल्दी और यंग ही देखना चाहती हैं तो उन की ख्वाहिश पूरी करने के लिए और अपने स्वास्थ्य के लिए भी आप को कोई न कोई वर्कआउट जरूर करना चाहिए.

मिनी वर्कआउट पर बात करते हुए जिम कोच असफर ताहिर कई ऐसी ऐक्सरसाइज बताते हैं जो आसान भी हैं और सिर्फ 15 मिनट करने से ही आप गजब की चुस्तीफुरती महसूस करेंगी. इन आसान कसरतों से आप फिट भी रहेंगी और आप का वजन भी कंट्रोल में रहेगा.

इन में मुख्य हैं- बर्पीज ऐक्सरसाइज जो व्यायाम सब से तीव्र अभ्यासों में से एक है और आप के शरीर में लगभग सभी मांसपेशियों को स्ट्रौंग करता है. इस के साथ ही जंपिंग जैक, हाई नीज, माउंटेन क्लाइंबिंग, सीटेड इन ऐंड आउट और प्लैंक जैसी ऐक्सरसाइज कम समय में अच्छा रिजल्ट देती हैं.

ताहिर कहते हैं कि ये सभी ऐक्सरसाइज किसी जिम ट्रेनर से पूछ कर या यूट्यूब पर देख कर सीखी जा सकती हैं. इन में से कोई एक भी अपना लें और दिन में 1-2 दफा कर लें तो

1 हफ्ते में रिजल्ट दिखने लगता है. इस के अलावा कुछ अन्य गतिविधियां हैं जिन्हें आप आसानी से कर सकती हैं जैसे-

2. रनिंग

सुबह उठ कर सब से पहले सामने वाले पार्क में या खुली सड़क पर सिर्फ 15 मिनट तेजी से वाक कर आएं या दौड़ लगा आइए. इस से आप के फेफड़ों में फ्रैश एयर पहुंचेगी और आप का ब्लड सर्कुलेशन अच्छा होगा. कुछ दिनों में ही आप को महसूस होगा कि आप का वजन कम हो रहा है.

3. पुश अप्स

घर पर की जाने वाली यह सब से असरदार ऐक्सरसाइज है. जमीन पर मैट बिछा लें और किसी टेबल या बैड के नीचे पैर फंसा कर सिर्फ 15 मिनट पुश अप्स करें. इस से आप की मसल्स मजबूत होने और वेट को बैलेंस करने में भी मदद मिलेगी.

4. साइड लैग ऐक्सरसाइज

पैरों को पतला और आकर्षक बनाने के लिए इस ऐक्सरसाइज को भी करें. साइड लेग ऐक्सरसाइज को आप घर पर आसानी से कर सकती हैं. किसी मैट पर बैठ जाएं और इस व्यायाम को करें. इस से जांघों और पेट पर जमा फैट घटेगा और लेग्स टोन्ड होंगी.

5. ब्रिज ऐक्सरसाइज

ब्रिज ऐक्सरसाइज घर में काम के दौरान अकसर महिलाएं कमर दर्द से परेशान रहती हैं. ऐसे में ब्रिज ऐक्सरसाइज फायदेमंद है. इस से वजन घटाने में मदद मिलेगी और कमर दर्द में आराम मिलेगा. इस के लिए आप को जमीन पर लेटना है और फिर कमर को ऊपर की ओर उठा कर ब्रिज पोजीशन में आना है.

अपने हाथों को साइड में रखें और हिप्स को थोड़ा ऊपर उठाएं. अपने पैर को सीधा स्ट्रैच करें और फिर ऊपर की ओर स्ट्रैच करें और नीचे की ओर ले कर आएं. इसी तरह दूसरे पैर से करें. ऐसा करीब 10 से 15 मिनट करें. इस से वजन घटाने में मदद मिलेगी.

6. हाफ क्लौक मूवमैंट

बैडरूम की दीवार से 1 फुट के फासले पर दीवार की तरफ पीठ कर के खड़ी हो जाएं. दोनों पैरों के बीच 1 फुट का गैप रखें. बांहों को आगे की तरफ फैलाएं और उस के बाद क्लौकवाइज और ऐंटीक्लौकवाइज कमर से खुद को घुमाते हुए पीछे की दीवार पर हाथों को छुआएं. करीब 10 मिनट की यह ऐक्सरसाइज आप की कमर को पतला करेगी, पीठ पर चढ़ गए मांस को हटाएगी, कमर दर्द में राहत देगी और आप को चुस्त बनाएगी.

ऐक्सरसाइज के साथसाथ असफर ताहिर खानपान पर भी ध्यान देने को कहते हैं. अधिक चीनी, फास्ट फूड, चौकलेट से दूर रह कर अगर प्रोटीन डाइट को अपने मैन्यू में शामिल कर लें तो इस से मसल्स स्ट्रौंग होंगी और शरीर से फैट कम होगा. ताहिर कहते हैं कि भारतीय खाने में हम कार्बोहाइड्रेट्स और स्टार्च ज्यादा खाते हैं. साथ में कोई मीठी चीज भी जरूर लेते हैं. यह हमारे शरीर में मोटापा बढ़ाता है और मसल्स को कमजोर करता है.

आप रोजाना ऐक्सरसाइज करते हैं और अगर आप का वजन 80 किलोग्राम है तो आप को करीब 160 कैलोरी प्रोटीन डाइट चाहिए. यह प्रोटीन ओट्स से, चिकन ब्रैस्ट,

छोले, राजमा, पनीर और सोयाबीन से आसानी से मिल सकता है. जब शरीर में प्रोटीन बढ़ता है तो फैट यानी चरबी कम होती है और मसल्स मजबूत होती हैं, जो शरीर को अच्छा पोस्चर और लुक देती हैं.

सनग्लासेज: जो आप को रखें कूल

आप का चेहरा छोटा, लंबा, वर्गाकार या फिर सिकुड़ा हुआ है, क्या सनग्लासेज खरीदते समय इस बारे में सोचते हैं? ऐसा सोचने की जरूरत क्यों पड़ती है?

दरअसल, सूर्य की हानिकारक किरणों से आंखों की सुरक्षा करने में व खूबसूरती बढ़ाने में यहां तक कि आंखों के इर्दगिर्द की बारीक ?ार्रियों को छिपाने में सनग्लासेज महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. कुछ लोग सनग्लासेज का इस्तेमाल फैशन की दौड़ में आगे रहने के लिए करते हैं तो कुछ अपनी आंखों की सुरक्षा तथा सुकून के लिए.

जिन लोगों की आंखों की रोशनी कमजोर होती है वे फोटोक्रोमिक लैंस वाले सनग्लासेज चुनते हैं ताकि उन की नजर भी साफ रह सके और आंखों को सूर्य की अल्ट्रावायलेट किरणों से भी सुरक्षा हो सके. वहीं साइक्लिंग और राफ्टिंग के प्रेमी अपनी जरूरत के अनुरूप सनग्लासेज चुनते हैं.

आप चाहें अपने लिए कोई भी फ्रेम चुनें, लेकिन आराम से सम?ौता कभी न करें. उपयुक्त फ्रेम के चुनाव को ध्यान में रखते हुए आप को अपने चेहरे के आकार के अनुरूप फ्रेम का चयन करना चाहिए यानी उसी आकार का फ्रेम चुनें, जो आप के चेहरे पर फिट बैठता हो.

  1. चेहरे के अनुरूप

अभिनेत्री रानी मुखर्जी जैसे गोल चेहरे के लिए आयताकार फ्रेम सर्वश्रेष्ठ माना जाता है. गोल चेहरे की लंबाई और चौड़ाई समान होती है और आयताकार फ्रेम उन के चेहरे को लंबा दिखाता है. यह फ्रेम चेहरे पर सही कंट्रास्ट बनाते हुए चेहरे को छरहरा लुक देता है. गोलाकार चेहरे वालों को कोणीय फ्रेम चुनना चाहिए ताकि चेहरे की बनावट थोड़ी अलग नजर आए.

आयताकार चेहरे के लिए ऐविएटर फ्रेम सर्वश्रेष्ठ है. चूंकि ऐसे चेहरे लंबे होते हैं इसलिए ऐविएटर फ्रेम लंबे चेहरे को छोटा दर्शाता है. इस आकार के चेहरे वालों को आयताकार सनग्लासेज पहनने से बचना चाहिए, क्योंकि उस से उन का चेहरा और लंबा नजर आता है.

वर्गाकार चेहरे वालों को अंडाकार फ्रेम वाला सनग्लासेज पहनना चाहिए, जो संकीर्ण हो. यह कंट्रास्ट लुक प्रदान करेगा. इस से आप के चेहरे का आकार सौम्य दिखेगा.

जिन लोगों के चेहरे का आकार दिल के आकार जैसा होता है यानी जिन का ललाट चौड़ा, लेकिन जबड़ों का आकार पतला होता है उन पर संकीर्ण फ्रेम सब से ज्यादा अच्छा लगता है. ऐसे लोगों को ऐविएटर या शेड्स फ्रेम के इस्तेमाल से बचना चाहिए, क्योंकि उस से उन के चेहरे का आकार और स्पष्ट दिखेगा. सब से अच्छा विकल्प हलके रंग के रिमलेस फ्रेम का इस्तेमाल होगा, क्योंकि उस से उस व्यक्ति का चेहरा पतला होने का भ्रम रहेगा. दिल के आकार के चेहरे वाले व्यक्ति मौउ जिम की क्लासिक लाइन शृंखला के केमाना सनग्लासेज लगाने पर खूबसूरत दिखेंगे.

अंडाकार चेहरे वालों के लिए यह समस्या नहीं होती कि किस प्रकार का फ्रेम चुनें किस प्रकार का नहीं. उन के पास बहुत सारे विकल्प होते हैं, अंडाकार चेहरे वाले व्यक्ति के लिए शेड्स चुनना भी सब से आसान होता है. अंडाकार चेहरे पर हर तरह का सनग्लासेज बिलकुल सटीक दिखता है, क्योंकि इस आकार का चेहरा संतुलित और समानुपात में ढला होता है.

2. प्रैस्क्रिप्शन सनग्लास

जो लोग दृष्टिदोष में सुधार चाहते हैं, अब उन्हें टैक्नोलौजी की सुविधा से युक्त सनग्लासेज से वंचित रहने की जरूरत नहीं.

चिलचिलाती धूप में आप को भी कभी न कभी मौजमस्ती या कोई काम करने का मौका मिलता होगा, तब आप ऐसे सनग्लासेज की सख्त आवश्यकता महसूस करते होंगे, जो गरमी से ?ालसती आप की आंखों को ठंडक प्रदान करे.

आंखों की रोशनी दुरुस्त करने के लिए चश्मा लगाने वाले बहुत सारे लोग सनग्लासेज के फायदे और आराम से वंचित रह जाते हैं, क्योंकि वे अपनी नजर के चश्मे की जगह सुरक्षा के लिए सनग्लासेज का इस्तेमाल नहीं कर सकते. जिन लोगों को नजर की परेशानी होती है, उन के लिए चश्मे के बगैर गाड़ी चलाना खतरनाक हो सकता है, यहां तक कि नजर ठीक रखने वाली ऐनक के बगैर सड़क पर टहलना भी उन के लिए खतरनाक रहता है.

तो क्या नजर के चश्मे पहनने वाले लोग चिलचिलाती धूप से बचने और फैशन स्टेटमैंट के लिए सनग्लासेज का इस्तेमाल कर ही नहीं सकते? नहीं, कतई नहीं. आजकल कमजोर नजर वाले ऐसे प्रैस्क्रिप्शन सनग्लासेज आसानी से प्राप्त कर सकते हैं, जिन में नजर सुधारने और धूप से आंखों को बचाने की दोनों क्षमताएं होती हैं.

नजर का चश्मा पहनने वाले कई लोग अकसर इस दोहरे मकसद के लिए परंपरागत लैंस का इस्तेमाल करते हैं और अलगअलग मौसम के अनुसार चश्मा बदलने की असुविधा से बच जाते हैं. लेकिन परंपरागत लैंस कभीकभी ऐडजस्ट नहीं हो पाते. प्रैस्क्रिप्शन सनग्लासेज विशेष टैक्नोलौजी समर्थित सनग्लासेज होता है, जिस में व्यक्ति की नजर सुधारने के लिए पावर लैंस भी होता है.

पहले जहां सनग्लासेज को ज्यादातर लोग फैशन ऐक्सैसरीज मानते थे, वहीं अब आंखों की सेहत की सुरक्षा के लिए भी ऐसे सनग्लासेज पहनने का चलन बढ़ने लगा है, जो सूर्य की अल्ट्रावायलेट किरणों से हमारी आंखों को सुरक्षा देते हैं.

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