आप भी खरीद सकते हैं Rashmika Mandanna का ये गुलाबी कुर्ता, जानें कीमत

श्रीवल्ली रश्मिका मंदाना फिर से आपका दिल चुरा लेंगी! पुष्पा अभिनेत्री ने ट्रेडिशनल पहनावे में अपनी एक नई तस्वीर के साथ अपने प्रशंसकों को खुश किया. यह कहना बिलकुल सही होगा कि रश्मिका अपने एथनिक ग्लैमर और एथनिक आकर्षण से सब को मंत्रमुग्ध कर दिया.

गुलाबी कुर्ता सेट में रश्मिका बेहद खूबसूरत लग रही थीं.  Janasya लेबल का पहनावा सरसों और हरे रंग के सुंदर पुष्प प्रिंटों और नेकलाइन और आस्तीन पर जटिल गोटा-पट्टी लहजे से सजाया गया कुर्ता सेट है . उन्होंने अनारकली कुर्ता को मैचिंग पलाज़ो और एक अतिरिक्त हरे रंग के साथ के साथ कैरी किया है

रश्मिका ने अपने लुक को भारी झुमके और छोटी हरी बिंदी के साथ पूरा किया। इसके साथ ही हल्के गुलाबी टोन में मेकअप किया है जिसमें वह बहुत खूबसूरत लग रही है. जब वह तस्वीरों के लिए पोज़ दे रही थीं और तब उनका एथनिक लुक बेहद सुंदर लग रहा है, फोटो में तो वह पूरी तरह मुस्कुरा रही थीं.

रश्मिका मंदाना का एथनिक वॉर्डरोब में शामिल कर सकती है
वैसे आप इस फ्लोरल-प्रिंट कुर्ता सेट को अपने एथनिक वॉर्डरोब में भी शामिल कर सकती हैं. यह Janasya लेबल की वेबसाइट पर 2,999 रुपये में कई आकारों में खरीदने के लिए उपलब्ध है.

रश्मिका की एथनिक आउटफिट कलेक्शन
रश्मिका का एथनिक आउटफिट कलेक्शन के कुछ शानदार तस्वीरों से भरा हुआ है. अभिनेत्री पारंपरिक सिलवर सूट के प्रति अपनी रुचि दिखाने का कोई मौका नहीं छोड़ती. इन तस्वीरों में आप देख सकते है.

वहीं रश्मिका के  काम की बात करें तो , रश्मिका मंदाना ने हाल ही में रणबीर कपूर-स्टारर एनिमल की शूटिंग पूरी की. यह फिल्म 11 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है.
इन दिनों रश्मिका पुष्पा 2: द रूल की शूटिंग में बिजी हैं. वहीं एक्ट्रेस जल्द ही मल्टी लिंग्वल फिल्म रेनबो, और रणबीर कपूर ही में मेकर्स ने फिल्म का प्री-टीजर भी रिलीज किया था, जिसे ऑडियंस ने काफी पसंद किया. यह मूवी 11 अगस्त को सिनेमाघरों में दस्तक देगी. साथ ही इसी तारीख पर रिलीज होने वाली दो बड़ी फिल्मों ‘गदर 2’ और ‘ओएमजी 2’ से भिड़ेगी.

कॉन्जेनिटल हार्ट डिजीज: रोग नहीं दोष है, जाने कैसे

रश्मिका को बचपन में कॉन्जेनिटल हार्ट डिजीज यानि जन्मजात हृदय रोग था, जिसमे उनके हार्ट में एक छेद था, जिसे डॉक्टर्स ने इलाज किया और अब उसे कोई समस्या नहीं है, लेकिन जब वह बड़ी हुई, उसके शादी को लेकर समस्या होने लगी, क्योंकि हर लड़के वालों को लगता था कि उसे हार्ट की बीमारी है. शादी के बाद उसका मैरिटल लाइफ अच्छा नहीं होगा.

कई अच्छे-अच्छे रिश्ते टूट गए, इससे रश्मिका को डिप्रेशन होने लगा, उसके पेरेंट्स चिंतित होने लगे, लेकिन एक रिश्ता पक्का हुआ और आज रश्मिका दो बच्चों की माँ है और उसे किसी प्रकार की कोई समस्या हार्ट को लेकर नहीं है और न ही उनके बच्चों को हार्ट सम्बन्धी कोई बीमारी है. दरअसल ये कोई बीमारी नहीं, इसका शादी और बच्चे पैदा होने से कोई सम्बन्ध नहीं होता. ये एक प्रकार का दोष है, जिसका इलाज संभव है.

असल में किसी भी बच्चे के जन्म के समय उसके हार्ट में किसी भी तरह की कोई गड़बड़ी होने पर इस स्थिति को कॉन्जेनिटल हार्ट डिजीज कहा जाता है. इस बीमारी से पीड़ित बच्चे के दिल की बाहरी परत यानी दीवार, हार्ट वाल्व और ब्लड वैसल्स ज्यादा प्रभावित होते हैं.

इस बारें में मुंबई की कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल की पेडिएट्रिक कार्डियोवस्क्युलर कंसलटेंट और सर्जन डॉ स्मृति रंजन मोहंती कहती है कि

गर्भावस्था के दौरान भ्रूण के ह्रदय के भीतर एक या उससे ज़्यादा संरचनाओं के सामान्य विकास में दोष रह जाने के कारण जन्मजात ह्रदय दोष (सीएचडी)  होता है, यह दोष कई प्रकार के हो सकते हैं मसलन ह्रदय में छेद, अलगअलग कार्डियक संरचनाओं में विकृति या हार्ट चेम्बर्स में रक्त वाहिकाओं के असामान्य कनेक्शन्स ( बड़ी आर्टरीज की जगह बदलना, हाइपोप्लास्टिक लेफ्ट हार्ट्स, पल्मनरी वेनस कनेक्शन्स पूरी तरह से विषम होना, एओर्टिक आर्चेस में बाधा, पल्मनरी धमनी से विषम लेफ्ट कोरोनरी आर्टरी, एबस्टिन की विसंगति और अन्य 127 से ज़्यादा तरह के अलगअलग कॉम्बिनेशन्स) इसमें शामिल होते हैं.  जन्मजात का अर्थ यह है कि यह दोष जन्म के समय से ही मौजूद होता है.

बीमारी नहीं, हृदय दोष

इसके आगे डॉ. स्मृति कहती है कि सालाना हर 100 बच्चों में से 1 को जन्मजात हृदय दोष होता है. हर साल करीबन 2.5 मिलियन बच्चें इससे प्रभावित होते हैं. छोटी आयु में कॉन्जेनिटल हार्ट डिजीज होने पर भी कई बार उसके लक्षण दिखाई न देना संभव है या कई अलग-अलग तरह के लक्षण होते है, मसलन

  • लगातार पसीना आना,
  • बच्चे को दूध पिने में कठिनाई,
  • त्वचा या होंठों का नीला पड़ना,
  • वज़न ठीक से न बढ़ना,
  • विकास में कठिनाइयाँ,
  • बार-बार खांसी और सर्दी होना आदि हो सकते हैं.

व्यस्को में लक्षण निम्न है

  • वयस्कों को थकान,
  • बेहोशी और धड़कन तेज़ होना आदि लक्षण हो सकते हैं.
  • इन गंभीर और पीड़ादायक लक्षणों की वजह से जीवन की गुणवत्ता ख़राब हो सकती है, अन्य गंभीर बीमारियां होने का खतरा बहुत ज़्यादा हो सकता है, मृत्यु होने का भी डर रहता है.

 जन्मजात हृदय दोष दुर्बल कर देने वाले और जान के लिए खतरा हो सकते हैं, लेकिन उनमें से कई दोषों का इलाज संभव है. यही कारण है कि उन्हें “रोग” नहीं, बल्कि “दोष” कहते हैं. जल्द से जल्द निदान और इलाज करने से सीएचडी के मरीज़ों की ज़िंदा बचने की दर कार्डियक केयर केंद्रों में 95% के करीब पहुंच रही है. इसका मतलब यह है कि उचित और समय पर देखभाल मिलने से सीएचडी के मरीज़ बच्चें भी अन्य किसी भी बच्चे की तरह लगभग सामान्य जीवन जी सकते हैं.

सही डायग्नोसिस और करेक्टिव सर्जरी है इलाज

डॉक्टर कहती है कि भ्रूण के 2डी (2D) इको स्कैन से गर्भ में विकसित हो रहे बच्चे के ह्रदय की तस्वीर ली जा सकती है. जन्म से पहले ही, जल्द से जल्द सीएचडी का निदान किया जाने से, इलाज की योजना बनाकर और प्रसव के तुरंत बाद आवश्यक कार्डियक देखभाल शुरू की जा सकती है. दूसरा सबसे अच्छा विकल्प है कि सीएचडी का निदान कर पाने के लिए जन्म के बाद हर बच्चे का 2डी (2D) इको किया जाएं. जब हृदय संबंधी समस्या की क्लिनिकल संभावना हो तब यह करना और भी ज़रूरी है.

आगे के इलाज के लिए जब मरीज़ को डेडिकेटेड कार्डियक सेंटर में भेजा जाता है, बाल रोग विशेषज्ञों, रेडियोलॉजिस्ट, पेडिएट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट, कार्डियक सर्जन, एनेस्थिसियोलॉजिस्ट, इंटेंसिविस्ट और अन्य विशेषज्ञों की एक व्यापक टीम यह सुनिश्चित करती है कि बच्चे को सर्वोत्तम संभव देखभाल मिले. सीएचडी के लिए इलाज योजना को मरीज़ की व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुसार तैयार किया जाता है. यह इलाज या तो इंटरवेंशनल या सर्जिकल, या दोनों का कॉम्बिनेशन भी हो सकता है. इसके इलाज की सफलता दर बहुत अच्छी है.

अमेरिका जैसे देशों में पांच साल की उम्र में ही इस हार्ट डिजीज से पीड़ित बच्चों की सर्जरी कर दी जाती है. भारत में इसकी सर्जरी ज्यादातर मामलों में देरी से होती है. इसकी सर्जरी एंजियोग्राफी के जरिए अंब्रेला डिवाइस से की जाती है. इस डिवाइस के जरिए दिल का छेद बंद किया जाता है. दिल में एक से ज्यादा समस्याएं होती हैं, तो ओपन हार्ट सर्जरी की जाती है. अगर समस्या मामूली सी होती है, जो दवाई से भी इसका इलाज किया जाता है. इसके इलाज का खर्चा भी बीमारी के आधार पर होता है, जो डेढ़ लाख से 5 लाख तक हो सकता है.

गलती नहीं पेरेंट्स की

डॉ. स्मृति का इस बारें में कहना है कि जन्मजात ह्रदय दोष होना किसी की भी गलती नहीं है, न माता की, न पिता की और न उससे प्रभावित होने वाले बच्चे की. अधिकतम दोषों का निवारण उन्हें दूर करने से ही होता है, करेक्टिव सर्जरी सही इलाज होता है. कई लोगों को गलतफहमी होती है कि जन्मजात ह्रदय दोष वाले बच्चें जीवित नहीं रहते या सामान्य ज़िन्दगी नहीं जी पाते हैं. सच यह है कि जिन्हें इलाज मिलते हैं ऐसे 95% से ज़्यादा बच्चें लंबी आयु तक, पूरी तरह से सामान्य जीवन जीते हैं.

सामाजिक कु-प्रथाओं को दूर करना जरुरी  

जन्मजात हृदय विकार के अधिकांश के परिवारों की बाधाएं लॉजिस्टिकल और सामाजिक-आर्थिक होती है. कई लोग मानते हैं कि इलाज काफी ज़्यादा महंगे होते हैं.जबकि ऐसा नहीं है, इसमें पॉलिसी धारकों, बीमाकर्ताओं, बैंकरों, फिलांथ्रोपिस्ट्स आदि एक साथ मिलकर काम करना ज़रूरी है. इससे सीएचडी के मरीज़ों को और उनके परिवारों को इलाज़ करवाने में सुविधा होती है. इसके अलावा केवल वित्तीय समर्थन ही नहीं, बल्कि लोगों में जागरूकता पैदा करना, शिक्षा को बढ़ावा देना, गलतफहमियों, कलंकों को दूर करना आदि है. इस दोष में भावनात्मक समर्थन भी काफी महत्वपूर्ण होता है.

ये सही है कि भारत में हर बच्चे को हृदय स्वास्थ्य से जुडी हर देखभाल और सुविधा मिले और यह तभी संभव है. इसके अलावा समाज बड़े पैमाने पर सीएचडी के महत्व को समझे, संकल्प ले और इससे पीड़ित बच्चे की सही इलाज के लिए  कदम बढ़ाए. यह कठिन है, लेकिन असंभव नहीं है. हालांकि, स्वस्थ जीवन शैली को अपनाने से इस बीमारी की जोखिम को कम करने और सभी की स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद मिल सकती है, जल्द से जल्द पहचान और निदान के लिए एक मजबूत प्राथमिक देखभाल प्रणाली और उपचार के लिए एक बहु आयामी टीम होना जरुरी है,  इससे एक सम्पूर्ण मॉडल विकसित कर हृदय रोग विशेषज्ञों तक पहुंचने वाली बाधाओं को दूर किया जा सकता है.

Sara Ali Khan: किसी के बोलने से फर्क नहीं पड़ता

12 अगस्त, 1995 को पटौदी परिवार में जन्मी सारा अली खान अभिनेत्री अमृता सिंह और अभिनेता सैफ अली खान की बेटी हैं. कोलंबिया विश्वविद्यालय से इतिहास और राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिगरी हासिल करने के बाद सारा ने 2018 में सुशांत सिंह राजपूत के साथ रोमांटिक फिल्म ‘केदारनाथ’ से अभिनय जगत में कदम रखा था. इस के बाद उन्होंने ऐक्शन कौमेडी फिल्म ‘सिंबा’ की. ‘फोर्ब्स इंडिया’ की 2019 की 100 सैलिब्रिटीज सूची में सारा का नाम भी दर्ज हुआ. इस के बाद वे आनंद एल राय द्वारा निर्देशित फिल्म ‘अतरंगी रे’ में नजर आईं. हाल ही में उन की फिल्म ‘जरा हट के जरा बच के’ प्रदर्शित हुई है, जिस में विक्की कौशल उन के हीरो हैं.

अभिनय कैरियर

2018 में प्रदर्शित फिल्म ‘केदारनाथ’ में सारा ने एक ऐसी हिंदू लड़की की भूमिका निभाई, जिसे एक मुसलिम कुली से प्यार हो जाता है. इस फिल्म के लिए उन्होंने अपने सह अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मदद से शुद्ध हिंदी बोलनी सीखी थी.

‘केदारनाथ’ के प्रदर्शन के कुछ सप्ताह बाद सारा ने रणवीर सिंह के साथ रोहित शेट्टी की ऐक्शन फिल्म ‘सिंबा’ में अभिनय किया. उन्होंने ‘केदारनाथ’ की शूटिंग बीचबीच में रोक कर ‘सिंबा’ की शूटिंग की थी. इस के लिए वे विवादों में भी घिरी थीं. बहरहाल, ‘केदारनाथ’ और ‘सिंबा’ में सारा महज सुंदर व ग्लैमरस नजर आई थीं. उन के अंदर अभिनय प्रतिभा का अभाव था.

 

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इस के बाद सारा अली खान निर्देशक इम्तियाज अली की रोमांटिक फिल्म ‘लव आज कल’ में कार्तिक आर्यन के साथ नजर आई. इसी फिल्म के दौरान कार्तिक आर्यन के साथ उन के रोमांस की खबरें गरम हुई थीं, पर किसी ने भी इसे स्वीकार नहीं किया था. बाद में इन के ब्रेकअप की भी खबरें आईं. फिल्म ‘लव आज कल’ में सारा अली खान का किरदार काफी जटिल था, जिस के साथ वे न्याय नहीं कर पाईं. 2020 में ही वे वरुण धवन के साथ हास्य फिल्म ‘कुली नंबर वन’ में भी नजर आईं.

इस फिल्म के लिए भी सारा अली खान के अभिनय की जम कर आलोचना हुई. 2021 में आनंद एल. राय की फिल्म ‘अतरंगी रे’ में उन के सह अभिनेता अक्षय कुमार और धनुष थे. इस में पोस्टट्रौमैटिक स्ट्रैस डिसऔर्डर वाली एक महिला के किरदार में नजर आईं. मगर यह फिल्म भी सिनेमाघरों के बजाय ओटीटी प्लेटफौर्म ‘डिज्नी हौटस्टार’ पर स्टीम हुई. फिर 2023 की शुरूआत में ‘डिज्नी हौट स्टार’ पर स्टीम हुई पवन कृपलानी की फिल्म ‘गैसलाइट’ में ग्लैमरस लड़की के बजाय व्हील चेयर पर रहने वाली अपाहिज लड़की के किरदार में नजर आईं. इस में उन के ऐक्शन दृश्य भी हैं.

इस फिल्म से उन के प्रशंसकों को कुछ उम्मीदें जगी थीं और अब हाल ही में सारा की लक्ष्मण उत्तेकर निर्देशित फिल्म ‘जरा हट के जरा बच के’ प्रदर्शित हुई. इस फिल्म में उन के सह नायक विक्की कौशल हैं. फिल्मकार ने फिल्म की पूरी कहानी को सारा के किरदार सौम्या आहुजा दुबे के ही इर्दगिर्द बुना है. पर सारा निराश करती हैं. जब शुरुआत में साड़ी पहने हुए बिंदी लगाए सौम्या के किरदार में सारा अली खान परदे पर नजर आती हैं, तो एहसास होता है कि इस में सारा के अभिनय का जादू नजर आएगा. मगर चंद दृश्यों बाद यह भ्रम दूर हो जाता है.

काम न आया अभिनय

बौलीवुड का एक तबका मानता है कि सारा को उन की प्रतिभा के बल पर नहीं बल्कि उन के पिता सैफ अली खान के प्रभाव के चलते ही फिल्में मिल रही हैं.

होमी अदजानिया की फिल्म ‘मर्डर मुबारक’ में भी अभिनय कर रही हैं. वहीं बायोपिक फिल्म ‘ऐ वतन मेरे वतन’ में स्वतंत्रता सेनानी ऊषा मेहता का किरदार निभा रही हैं. ‘ऐ वतन मेरे वतन’ सिनेमाघरों के बजाय सीधे ओटीटी प्लेटफौर्म ‘अमेजन प्राइम वीडियो’ पर स्ट्रीम होगी.

 

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प्रोफैशनल अदाकारा क्यों नहीं बन पा रहीं

बौलीवुड का एक तबका मानता है कि अपनी कंजूसी के चलते सारा अभिनय के प्रशिक्षण पर भी पैसा खर्च नहीं करना चाहतीं. मगर 2 दिन बाद ही सारा ने अबू धाबी में अपनी कंजूसी की एक मिसाल पेश की, जिस का खुलासा उन्होने स्वयं एक औनलाइन वीडियो इंटरव्यू में किया. वास्तव में सारा अपनी नई फिल्म ‘जरा हट के जरा बच के’ के प्रमोशन के सिलसिले में ‘आइफा अवार्ड’ के समारोह में एक दिन के लिए आबू धाबी गई थीं.

 

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वहां वे पूरी टीम के साथ एक दिन रुकी थीं और अपनी मितव्ययता जीवनशैली के चलते रोमिंग पर पैसे खर्च करने के बजाय अपने हेयर ड्रैसर के हौट स्पौट का उपयोग किया.

सारा अली खान और उन के रिश्ते

इम्तियाज अली की फिल्म ‘लव आज और कल 2’ के दौरान फिल्म के सह कलाकार कार्तिक आर्यन के साथ सारा डेट कर रही थीं. दोनों ने कभी भी अपने रिश्ते की पुष्टि या खंडन नहीं किया हालांकि फिल्म निर्माता करण जौहर ने पिछले साल एक साक्षात्कार में उन के कथित ब्रेकअप के बारे में बात की थी. सारा की क्रिकेटर शुभमन गिल को डेट करने की भी खबरें थीं हालांकि दोनों में से किसी ने भी अपने इस अफवाह भरे रिश्ते की पुष्टि नहीं की.

क्या सीखा

‘‘मेरी सब से बड़ी सीख यह रही है कि उतारचढ़ाव जीवन का एक हिस्सा हैं. जब आप अपने सब से निचले स्तर पर होते हैं, तो आप को उठना और अपनी सब से तेज दौड़ लगानी होती है क्योंकि जब आप कम आत्मविश्वास महसूस कर रहे होते हैं और आप बैकफुट पर खेलना शुरू करो, यह सब से खराब है. मुझे नहीं लगता कि मुझे कोई पछतावा है.’’

लड़कियों पर हावी क्यों फिगर फोबिया

कई वर्षों से सिनेमा, टीवी और मौडलिंग के बढ़ते दबाव की वजह से सौंदर्य के मानदंड तेजी से बदलने लगे हैं. साफ शब्दों में कहा जाए तो आजकल जरूरत से ज्यादा खूबसूरत दिखने की अनर्गल चाहत, ऊपर से फैशन का अनावश्यक दबाव और उस पर खुले बाजार की मार ने यहां बहुतकुछ बदल डाला है.

सौंदर्य की इस मौजूदा परिभाषा से इत्तफाक रखने वाले भी इस सचाई को स्वीकार करने लगे हैं कि फिगर का यह फोबिया कई तरह की मुसीबतों को जन्म देने लगा है. सौंदर्य में नए अवतार जीरो फिगर की चाहत युवतियों के दिलोदिमाग पर इस हद तक हावी है कि वे सौंदर्य ही नहीं, अपने स्वास्थ्य को भी दांव पर लगा रही हैं.

नकल में माहिर होती युवा पीढ़ी को अब इस बात से कोई सरोकार नहीं है कि कल तक प्रीति जिंटा, रानी मुखर्जी और काजोल जैसी गोलमटोल व गदराए यौवन की मल्लिकाएं लोगों की पहली पसंद हुआ करती थीं. आज तो जिसे देखो वही दिशा पाटनी, अनन्या पांडे, आलिया भट्ट और दीपिका पादुकोण जैसी फिगर पाना चाहती हैं.

टीवी, सिनेमा और मौडलिंग की इस भेड़चाल पर टिप्पणी करते हुए मशहूर मौडल और मिस चंडीगढ़ रह चुकीं दिशा शर्मा ने कहा कि करीना कपूर की फिल्म ‘टशन’ जैसी फिगर प्राप्त करने के लिए अब कालेजगोइंग युवतियां ही नहीं, बल्कि नवविवाहिता और कईकई बच्चों की मांएं भी डाइटिंग के साथसाथ जिस प्रकार ऐंटीबायोटिक दवाएं गटक रही हैं, उस ने उन के सामने कई तरह की शारीरिक समस्याएं खड़ी कर दी हैं.

दरअसल भारत में जीरो फिगर की गपशप पहली बार करीना कपूर ‘टशन’ फिल्म से ले कर आई थीं. इस फिल्म में करीना कपूर ने तोतिया रंग की सैक्सी बिकिनी पहनी थी. उस सीन को समुद्र में फिल्माया गया. इस के बाद से ही बड़े जोरशोर से जीरो फिगर यानी सैक्सी दिखना सम?ा गया. हाल में दीपिका पादुकोण ने भी फिल्म ‘पठान’ में बिकिनी पहनी. वह तो बवाल भगवा बिकिनी पर मच गया, वरना जिस करीने से दीपिका पादुकोण की फिगर को फिल्माया गया उस ने यंग लड़कियों के दिमाग में जरूर रश्क पैदा किया होगा.

आज जितने भी फैशन शो होते हैं वहां जीरो फिगर वाली मौडल ही रहती हैं. हालांकि कई पश्चिमी देशों ने जीरो फिगर वाली मौडल्स की प्रतियोगिताओं और फैशन परेडों के इतर ऐसी मौडल्स के लिए भी प्रतियोगिताएं आयोजित करनी शुरू की हैं जो चरबीयुक्त हैं. लेकिन इस के बावजूद जीरो फिगर आज युवतियों के सिर चढ़ कर बोल रहा है.

समस्या यह है कि इस से मासिकधर्म में गड़बड़ी, सिर चकराने और पेट में जलन होने की शिकायतें देखी गई हैं लेकिन बाजारवाद ने जीरो फिगर को इस हद तक लोकप्रिय बना दिया है कि तमाम समस्याओं के बावजूद यह ट्रैंड में रहता है.

जीरो फिगर की अवधारणा

सौंदर्य के मानक हर समय और स्थान के अनुरूप कभी स्थायी नहीं होते. जीरो फिगर 32-22-34  के नाम में परिभाषित है. इस में छाती 32 इंच, हिप 34 इंच और कमर की माप 22 इंच है, जो आमतौर पर किसी 8-9 साल की बच्ची का होता है.

इसी साइज को मौडलिंग और सौंदर्य प्रतियोगिता की दुनिया में मुफीद माना जाता है. हलकी और छरहरी काया की प्राप्ति के लिए कम से कम भोजन कर के मौडलिंग के क्षेत्र में जमी लड़कियों की मजबूरी को तो समझ जा सकता है मगर आजकल इस के लिए लड़कियों का मकसद युवाओं को आकर्षित करना भी है. भले ही इस के लिए उन्हें कोई भी कीमत चुकानी पड़े.

आजकल कमर ही क्यों, चेहरे पर चरबी की जरा सी भी परत जमा न हो, इस के लिए अब कौस्मेटिक सर्जरी के अलावा भी बहुत से विकल्पों का इस्तेमाल किया जा रहा है. चंडीगढ़ स्थित एक जिम की संचालिका कहती हैं, ‘‘केवल फिगर की दीवानगी में शरीर को कंकाल बनाना सम?ादारी की बात नहीं है. यह एक जनून है और हद से गुजर जाने के बाद यही चाहत आगे चल कर मानसिक बीमारी बन जाती है.’’

बेकाबू हो रही है ग्लैमर की स्थिति

ग्लैमरस फिगर वैसे तो हर औरत की चाहत होती है लेकिन जीरो फिगर की चाहत में युवतियां जिस प्रकार संतुलित आहार तक को नजरअंदाज कर रही हैं, वह अत्यंत घातक है. इस से शरीर में पौष्टिक तत्त्वों की कमी से पाचनतंत्र भी कमजोर पड़ जाता है, जिस से इंसान की भूख मर जाती है.

इस से एनोरौक्सिया की चपेट में आने पर चक्कर आना, बेहोशी के दौरे पड़ने की संभावना भी बढ़ जाती है. साथ ही, इस से गर्भाशय की समस्या और हड्डियों के कमजोर होने का भी खतरा बना रहता है.

औरत के शरीर को रोज औसतन 1,500 से 2,500 कैलोरी की जरूरत होती है लेकिन जब यह घट कर 1,200 रह जाती है तो शरीर अंदरूनी हिस्सों और हड्डियों से इस कमी को पूरा करना शुरू कर देता है, जोकि स्वास्थ्य के लिए काफी बुरा संकेत है.

समय से पहले बुढ़ापे को आमंत्रण

फिगर को मैंटेन रखने का दबाव मौडलिंग, एंकरिंग और अभिनय से जुड़ी युवतियों पर रहने की बात तो फिर भी समझ में आती है लेकिन शादी की तारीख नजदीक आते ही विवाह की तैयारियों में जुटी युवतियां भी जीरो फिगर की गिरफ्त में आए बिना नहीं रहतीं.

शादी से ठीक पहले कमर को पतला करने का क्रेज युवतियों के दिलोदिमाग पर इस कदर हावी होता है कि इस के लिए वे 15 से 16 किलोग्राम वजन कम कर लेती हैं. 18 से 25 साल के आयुवर्ग की युवतियों में यह प्रवृत्ति सर्वाधिक देखने को मिलती है.

हाल ही में वेटवाचर पत्रिका द्वारा कराए गए सर्वे में कहा गया है कि युवतियां भूख मार कर भले ही छरहरे बदन की मल्लिकाएं बन जाएं मगर थोड़े समय बाद उन का रूप प्रौढ़ औरत जैसा दिखाई देने लगता है. वे उम्र से पूर्व ही बड़ी दिखाई देने लगती हैं. सच तो यह है कि भरे गाल और मांसल देह वाली औरत बड़ी उम्र में भी ज्यादा युवा दिखाई देती है.

डाइटिंग के साइड इफैक्ट

आमतौर पर महिलाएं पतली होने के लिए डाइटिंग पर फोकस करती हैं. मशहूर महिला रोग विशेषज्ञ डा. सुषमा नौहेरिया की राय में वजन कम करने और फिर खुद को संतुलित रखने के लिए जौगिंग, व्यायाम का सहारा लेना डाइटिंग और वजन घटाने वाली दवा लेने से कहीं बेहतर है.

अत्यधिक डाइटिंग से समूचे शरीर पर दुष्प्रभाव पड़ता है, मसलन, उपवास की स्थिति से शरीर में पाचक तत्त्वों का संचार कम होने से इंसान की पाचनशक्ति क्षीण हो जाती है, जिस से लिवर और मांसपेशियों पर बुरा असर पड़ता है. कुछ मामलों में हार्मोन असंतुलन की वजह से युवतियों में मासिकधर्म भी अनियमित होता देखा गया है. अत्यधिक व्यायाम या जिम जाने से शरीर में पानी की कमी के साथसाथ चेहरे पर झुर्रियां और आंखों के नीचे काले घेरे भी नजर आने लगते हैं.

सुंदर माझे घर: दीपेश ने कैसे दी पत्नी को श्रद्धांजलि

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 नेलपौलिश ज्यादा दिनों तक नाखूनों पर टिकाने के लिए क्या करूं?

सवाल-

मुझे नेलपौलिश लगाना अच्छा लगता है. लेकिन नाखूनों पर पौलिश ज्यादा दिन नहीं टिकती. क्या ऐसा कोई उपाय है जिस से नेलपौलिश ज्यादा दिनों तक नाखूनों पर टिक सके?

जवाब-

हाथों को खूबसूरत दिखाने के लिए नेलपौलिश लगाना एक आम बात है. कई रंगों में उपलब्ध नेलपौलिश हाथों को सुंदर दिखाने के लिए इस्तेमाल की जाती है. पर कई बार ऐसा होता है कि नेलपौलिश लगाने के बाद जैसे ही आप पानी से जुड़ा कोई काम करती हैं तो नेलपौलिश छूट जाती है. उस पर भी ये एकसाथ नहीं हटती है और देखने में नाखून सुंदर नहीं दिखाई देते. ऐसे में परमानैंट जैल नेलपौलिश जो परमानैंट मेकअप का एक हिस्सा है, उस से किसी भी तरह के नाखूनों को कृत्रिम रूप से सुंदर बनाया जा सकता है. जैल नेलपौलिश नाखूनों पर 10 दिनों से 3 हफ्तों तक टिकी रहती है.

ये टिप्स भी पढ़ें-

खूबसूरत नेल पौलिश हमारे नाखून को और भी आकर्षक बनाते हैं. पर नेल पौलिश कुछ ही दिनों में नाखून पर से उतर जाती है या कलर छोड़ देती है और बार बार नेल पौलिश लगाना संभव नहीं हो पाता. इस समस्या से हम में से कई लडकियां परेशान हैं. अगर गहरे रंग की नेल पौलिश छूटने लगे तो वह बहुत ही खराब लगती है. लेकिन आप हर दिन वही नेल पौलिश तो नहीं लगाती फिरेंगी और ना ही घर के काम काज या खाना बनाना छोड देंगी. नेल पौलिश किस तरह से लंबे समय तक नाखूनों पर टिके इसके लिये आइये जानते हैं कुछ टिप्सः

साफ नाखूनों पर लगाएं

हमेशा नेल पौलिश को साफ नाखूनों पर ही लगाएं. इससे कोई फरक नहीं पडता कि आपने पहले कोई नेल पौलिश लगाई थी या नहीं. नाखून के आस पास का प्राकृतिक तेल, नेल पौलिश को ज्यादा समय के लिये ठहरने नहीं देती. इसलिये नाखूनों को अच्छे से साफ करें.

नाखून साफ करें

नया कलर कोट लगाने से पहले अपने नाखूनों को साफ करें. पुरानी नेल पौलिश को नेल रिमूवर से छुड़ा कर फाइलर से नेल को शेप करें. उसके बाद हाथों को साफ पानी से धोएं.

बरसात की काई: भाग 1- क्या हुआ जब दीपिका की शादीशुदा जिंदगी में लौटा प्रेमी संतोष?

शाम ढलते देख कर दीपिका ने बिस्तर समेटना शुरू किया. उस के हलके भूरे रेशम से बाल बारबार उस के गुलाबी गालों पर गिर रहे थे और वह उन्हें बारबार अपनी कोमल उंगलियों से कानों के पीछे धकेल रही थी.

‘‘अब उठो भी… यह चादर समेटने दो,’’ कहते हुए दीपिका ने संतोष को हिलाया, जो अब भी बिस्तर पर लेटा था.

‘‘रहने दो न इन जुल्फों को अपने सुंदर मुखड़े पर… जैसे चांद को बादल ढकने की कोशिश कर रहे हों,’’ संतोष ने दीपिका को अपनी जुल्फें पीछे करते देख कहा.

‘‘शाम होने को आई है, जनाब. अब भी इन बादलों को घर नहीं भेजा तो आज तुम्हारे इस चांद को घरनिकाला मिल जाएगा, समझे?’’

‘‘तुम्हें किस बात का डर है? न घर की कमी है और न घर ले जाने वाले की… जिस दिन तुम हां कह दो उसी दिन मैं…’’

‘‘बसबस, हां कर तो चुकी हूं… अब जाओ भी. उदय घर आते ही होंगे… तब तक मैं सब ठीकठाक कर लूं,’’ दीपिका फटाफट हाथ चलाते घर व्यवस्थित करते हुए बोली, ‘‘कल कितने बजे आएंगे, गुरुदेव?’’

‘‘वही, करीब 12 बजे,’’ कहते ही संतोष कुछ सुस्त हो गया, ‘‘अब यों चोरीछिपे मिलना अच्छा नहीं लगता मानो हम प्यार नहीं कोई गुनाह कर रहे हों.’’

‘‘गुनाह तो कर ही रहे हैं हम, संतोष.

यदि हमारी शादी हो गई होती तब अलग बात थी पर अब मैं उदय की पत्नी हूं… तुम मेरे घर में मेरे संगीत अध्यापक की हैसियत से आते हो. इस स्थिति में हमारा यह रिश्ता गुनाह ही तो हुआ न?’’

‘‘ऐसा क्यों भला? पहले हम दोनों ने प्यार किया… उदय तुम्हारी जिंदगी में बाद में आया. अगर तुम्हारे और मेरे घर वाले जातबिरादरी के चक्कर में न पड़ कर हमारे प्यार के लिए राजी हो गए होते और आननफानन में तुम्हारी शादी दूसरे शहर में न करवा दी होती तो…’’

‘‘छोड़ो पुरानी बातों को. यह क्या कम है कि दूसरे शहर में भी हम एकदूसरे से टकरा गए और एक बार फिर मिल गए. शायद प्रकृति को भी मेरे मन में तुम्हारे लिए इतना प्यार देख मुझ पर दया आ गई और उस ने हमारे समीप्य का रास्ता सुझा दिया.’’

दफ्तर से लौटने के बाद शाम ढले उदय बरामदे में बैठा शाम की चाय की  चुसकियां ले रहा था. दीपिका वहीं बैठी स्वैटर बुन रही थी. संतोष को दीपिका के हाथ से बनी चीजें बहुत भाती थीं. इसीलिए वह संतोष के लिए कभी स्वैटर तो कभी दस्ताने बुनती रहती. उदय के पूछने पर कह देती कि अपनी किसी सहेली या छोटे भाई के लिए बना रही है. फिर बनाने के बाद खुशी से अपने पहले प्यार संतोष को उपहारस्वरूप दे आती.

दीपिका और उदय की शादी को 2 वर्ष बीत चुके थे. इन 2 वर्षों की शुरुआत में दीपिका बेहद उदासीन रही. उदय सोचता कि नया शहर, नया साथी और नई जिंदगी के चलते वह अपने पुराने जीवन को याद कर उदास रहती है. किंतु असली वजह थी उस का प्यार संतोष का उस से बिछड़ जाना. दीपिका बारबार उस शाम को कोसती जब वह और संतोष मूवी देख कर बांहों में बांहें डाले लौट रहे थे कि बड़े भाई साहब से उन का अचानक सामना हो गया. बिजली ही टूट पड़ी थी. वहीं बाजार से घसीटते हुए उसे घर लाया गया था. अब उस का कमरा ही उस का संसार बना दिया गया था. न कोई मिलने आएगा, न वह किसी से मिलने जा सकेगी. ढाई दिन भूख हड़ताल भी की दीपिका ने, किंतु कोई न पिघला. पेट की ज्वाला ने उसे ही पिघला दिया. संतोष से मिलने का कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था. घर वाले पुराने विचारों के थे और ऊपर से संतोष विजातीय भी था.

‘अगर उस लड़के की जान की सलामत चाहती है, तो भूल जा उसे’, ‘एक बार आप आज्ञा दे दो भाई साहब उस कमीने के टुकड़े भी नहीं मिलेंगे,’ ‘मेरा मन करता है कि इस निर्लज्ज को ही जहर दे कर मार डालूं’ जैसे कठोर वाक्यों से उस की सुबह और शाम होने लगी थी. धीरेधीरे उस का मनोबल टूटने लगा था. फिर 15 दिनों के भीतर उस की शादी तय कर दी गई. उस की अपने होने वाले पति या आने वाली जिंदगी के बारे में कुछ भी जानने की लालसा नहीं थी. वह एक मुरदे की भांति वही करती गई, जो उस के घर वालों ने उस से करने को कहा. विवाहोपरांत वह दूसरे शहर में पहुंच गई जहां उदय की नौकरी थी. घर में केवल उस का पति और वह ही रहती थी. ससुराल वाले दूसरे शहर में रहते थे.

उदय बहुत अच्छा व्यक्ति था. किंचित गंभीर किंतु सरल. किसी भी लड़की के लिए ऐसा जीवनसाथी मिलना बेहद खुशी की बात होती. वह अपनी पत्नी की हर खुशी का ध्यान रखता. यहां तक कि सुहागरात पर दीपिका के चेहरे पर दुख की छाया देख उदय ने उसे जरा भी तंग नहीं किया. सोचा पहले वह अपने नए परिवेश में समा जाए.

कुछ दिन उदास रहने के बाद दीपिका ने भी अपना मन लगाने में ही भलाई समझी. वह अपने नए घर, अपने नए रिश्तों में अपनी खुशी तलाशने लगी.

उस शाम घर में एक छोटी सी पार्टी थी. उदय के सभी मित्र आमंत्रित थे. उदय के जिद करने पर दीपिका ने एक छोटा सा गीत सुनाया. सारी महफिल उस के सुरीले गायन पर झूम उठी थी. सभी वाहवाह करते नहीं थक रहे थे. उदय मंत्रमुग्ध रह गया था.

‘‘मुझे पता नहीं था कि मेरी बीवी ने इतना अच्छा गला पाया है. तुम संगीत की शिक्षा क्यों नहीं लेतीं? तुम्हारा मन भी लगा रहेगा और शौक भी पूरा हो जाएगा,’’ उस रात सब के जाने के बाद उदय ने कहा था.

दीपिका चुप रही थी. वह संगीत की कक्षा ही तो थी जहां उस की मुलाकात संतोष से हुईर् थी. दोनों के सुर इतनी अच्छी तरह से मेल खाते थे कि उन के गुरु ने स्वत: ही उन की जोड़ी बना दी थी. फिर साथ अभ्यास करतेकरते कब संगीत ने उन दोनों के दिल के तार आपस में जोड़ दिए, उन्हें पता ही नहीं चला. गातेगुनगुनाते दोनों एक उज्ज्वल संगीतमय भविष्य के सपने संजोने लगे थे. लेकिन उस एक शाम ने उन के सभी सपनों को चकनाचूर कर दिया था और आज फिर उदय संगीत का विषय ले बैठा था.

दीपिका के चुप रहने के बावजूद उस की इच्छाओं का ध्यान रखने वाले उस के पति ने इधरउधर से पता कर उस के लिए एक संगीत अध्यापक का इंतजाम कर दिया, ‘‘आज से रोज तुम्हें नए सर संगीत का अभ्यास करवाने आया करेंगे.’’

संतोष को अपने संगीत अध्यापक के नए रूप में देख कर दीपिका हैरान रह गई. विस्फारित आंखों उसे ताकती वह कुछ न बोल सकी. हकीकत से अनजान उदय ने दोनों की मुलाकात करवाई और फिर ‘आल द बैस्ट’ कहता हुआ दफ्तर चला गया.

‘‘तुम यहां कैसे? क्या मेरा पीछा करते हुए…?’’ दीपिका के मुंह से पहला वाक्य निकला.

‘‘नहीं दीपू, मैं तुम्हारा पीछा नहीं कर रहा. मैं तो इस शहर में रोजगार ढूंढ़ने आया और किसी के कहने पर यहां नौकरी की तलाश में पहुंच गया.’’

‘‘मुझे दीपू कहने का हक अब तुम खो चुके हो, संतोष. अब मैं शादीशुदा हूं. तुम्हारे लिए एक पराई स्त्री.’’

पता नहीं नियति को क्या मंजूर था, जो संतोष और दीपिका को एक बार फिर एकदूसरे के समक्ष खड़ा कर दिया था. अपनीअपनी जिंदगी में दोनों आगे बढ़ने को प्रयासरत थे, परंतु इस अप्रत्याशित घटना से दोनों को एक बारगी फिर धक्का लगा था.

‘‘मुझे तुम संगीत सिखाने आने दो दीपू. नहींनहीं दीपिका. फीस के पैसों से मेरी मदद हो जाएगी. उदय के सामने मैं कोई बात नहीं आने दूंगा, यह मेरा वादा रहा.’’

जमाना बदल गया: भाग 2- ऐश्वर्या ने सुशांत को कैसे सिखाया सबक?

ऐश्वर्या घर लौट आई. ठंडे दिमाग से सोचा तो उसे यह मौका उपयुक्त लगा. पापा 6 महीने बाद रिटायर होने वाले थे. उस का पैकेज तो साढ़े चार लाख रुपए सालाना का था, लेकिन हाथ में केवल 30 हजार ही प्रतिमाह आते थे. इतने में अपना खर्चा चलाना मुश्किल था, घर की मदद करना तो दूर की बात थी.

वह अगले दिन शाम को जब रैस्टोरैंट में पहुंची तो सुशांत टैरेस में उस की प्रतीक्षा कर रहा था. हलकाहलका संगीत बज रहा था. शाम बहुत ही खूबसूरत थी.

ऐश्वर्या ने जब अमेरिका जाने की इच्छा जताई तो सुशांत ने कहा, ‘‘बहुत सही निर्णय लिया है आप ने. वहां से लौटने के बाद आप के कैरियर में चार चांद लग जाएंगे. मैं कोशिश करूंगा कि वहां की हमारी सहयोगी कंपनी आप के रहने की व्यवस्था भी कर दे.’’

यह सुन ऐश्वर्या का चेहरा प्रसन्नता से खिल उठा कि अमेरिका में रहना सब से महंगा है.

अगर उस का इंतजाम हो जाए तो 1 साल में काफी पैसे बचाए जा सकते हैं. अत: उस ने कृतज्ञता भरे स्वर में कहा, ‘‘सर, आप जो मेहरबानी कर रहे हैं, समझ में नहीं आता कि उसे मैं कैसे चुका पाऊंगी.’’

‘‘आप चाहें तो उसे आज ही चुका सकती हैं,’’ सुशांत ने कहा.

‘‘कैसे?’’ ऐश्वर्या ने अपनी बड़ीबड़ी पलकें ऊपर उठाते हुए पूछा.

‘‘देखिए, यह दुनिया गिव ऐंड टेक के फौर्मूले पर चलती है. मांबाप किसी बच्चे को पालतेपोसते हैं, तो बदले में अपेक्षा करते हैं कि बच्चा बुढ़ापे में उन की देखभाल करेगा. एक अध्यापक किसी को शिक्षा देता है, तो बदले में तनख्वाह लेता है. सरकार भी अगर जनता को सुरक्षा और अन्य ढेर सारी सुविधाएं देती है, तो बदले में उस से टैक्स लेती है. इस दुनिया में मुफ्त में कुछ भी नहीं मिलता,’’ सुशांत के चेहरे पर किसी दार्शनिक जैसे भाव उभर आए थे.

ऐश्वर्या की समझ में नहीं आया कि वह कहना क्या चाहता है. अत: उस ने अचकचाते हुए पूछा, ‘‘जी, मुझे क्या करना होगा?’’

‘‘बस कुछ दिनों के लिए मेरी बन जाओ. मैं आप के कैरियर को इतनी ऊंचाइयों पर पहुंचा दूंगा कि लोग देख कर ईर्ष्या करेंगे,’’ कह सुशांत ने सीधे ऐश्वर्या की आंखों में झांका.

ऐश्वर्या को अपने आसपास की चीजें हिलती महसूस हुईं. उस ने हमेशा कालेज में टौप किया लेकिन क्या अब उस की प्रतिभा और काबिलीयत का कोई मोल नहीं? वह बस मांस का एक लोथड़ा है, जिस की कीमत लगाई जा रही है. देह व्यापार का एक सुसंस्कृत  प्रस्ताव उस के सामने था. अपमान से उस की आंखें छलछला आईं.

‘‘ऐश्वर्याजी, कोई जोरजबरदस्ती नहीं. यह एक प्रस्ताव मात्र है. आप मान लेंगी तो ठीक नहीं मानेंगी तो भी ठीक. कंपनी में आप की पोजीशन पर कोई असर नहीं पड़ेगा. आप पहले की ही तरह अपना काम करती रहेंगी,’’ सुशांत ने अपने स्वर में भरपूर चाश्नी घोलते हुए कहा.

‘‘माफ कीजिएगा सर, आप ने मुझे गलत समझा. मैं बिकाऊ नहीं हूं,’’ अपने आंसुओं को रोकते हुए ऐश्वर्या खड़ी हो गई.

‘‘अरे, आप खड़ी क्यों हो गईं? आराम से कौफी तो पी लीजिए.’’

‘‘ऐश्वर्या ने उस की बात का कोई उत्तर नहीं दिया और तेजी से वहां से चली गई. अपने फ्लैट आ कर वह बुरी तरह फफक पड़ी. उस ने सफलता के लिए शौर्टकट अपनाने वाली बहुत सी लड़कियों के किस्से सुन रखे थे, लेकिन उसे भी ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ेगा, ऐसा उस ने कभी सोचा भी न था. अब तो उस के लिए इस कंपनी में काम करना मुश्किल हो जाएगा, क्योंकि सुशांत हर कदम पर उस के लिए समस्याएं खड़ी करेगा. तो क्या उसे यह कंपनी छोड़ देनी चाहिए? लेकिन उस ने तो 2 साल नौकरी करने का बौंड भर रखा है.’’

पूरी रात ऐश्वर्या करवटें बदलती रही. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करे. अगले दिन वह सहमीसहमी सी औफिस पहुंची. उसे पूर्ण विश्वास था कि आज सुशांत किसी न किसी बहाने उसे जलील करेगा, लेकिन उस का व्यवहार तो पहले की ही तरह मृदु और शिष्ट था. ऐसा लग रहा था जैसे कुछ हुआ ही न हो.

1 सप्ताह ऐश्वर्या सहमीसहमी सी रही, फिर सामान्य हो गई. उसे लगा कि शायद सुशांत को अपने किए पर पछतावा होगा. धीरेधीरे महीना बीत गया. कोई खास घटना नहीं हुई.

एक दिन सुशांत ने उसे अपने चैंबर में बुला कर कहा, ‘‘ऐश्वर्या, यह अमेरिका के हमारे एक खास क्लाइंट का प्रोजैक्ट है. इसे 48 घंटे में पूरा करना है. क्या आप इसे कर पाएंगी?’’

‘‘जी, मैं पूरी कोशिश करूंगी.’’

‘‘गुड,’’ सुशांत ने कहा, ये कंपनी के खास क्लाइंट हैं, इसलिए ध्यान रहे कि कोई गड़बड़ न हो.

‘‘ओके सर,’’ कह ऐश्वर्या अपनी सीट पर लौट आई. उस ने उस प्रोजैक्ट को आराम से देखा, तो लगा कि यह तो बहुत आसान है. सुशांत सर बेकार में परेशान हो रहे थे. वह इसे आज ही पूरा कर सकती है.

ऐश्वर्या ने काम शुरू कर दिया लेकिन उस का अंदाजा गलत निकला. वह उस प्रोजैक्ट पर जैसेजैसे आगे बढ़ती गई वैसेवैसे उस की जटिलताएं भी बढ़ती गईं. दोपहर तक वह कोई खास काम नहीं कर पाई. उसे लगने लगा कि 2 दिनों में यह काम पूरा कर पाना संभव नहीं है.

वह लंच के बाद सुशांत से इस के बारे में कुछ पूछने गई, लेकिन वह किसी मीटिंग के सिलसिले में बाहर गया था और अगले दिन ही लौटना था. उस ने दूसरे सीनियर्स से भी बात की, लेकिन किसी ने भी पहले कभी ऐसे प्रोजैक्ट पर काम नहीं किया था.

अगले दिन सुशांत ने औफिस आते ही प्रोजैक्ट की प्रगति देखी तो बुरी तरह भड़क उठा, ‘‘यह क्या? आप ने तो कुछ किया ही नहीं? मैं औफिस में नहीं था, तो आप हाथ पर हाथ रख कर बैठी रहीं.’’

‘‘ऐसा नहीं है सर, इस में कुछ प्रौब्लम आ गई थी, जिस के बारे में कोई कुछ नहीं बता पाया. मैं ने दोपहर बाद क्लाइंट को कई बार फोन भी किया, लेकिन उस ने उठाया नहीं,’’ ऐश्वर्या ने सफाई दी.

‘‘ऐश्वर्या, आप होश में तो हैं,’’ सुशांत चीख सा पड़ा, ‘‘आप पढ़ीलिखी हैं. आप को इतनी तमीज तो होनी चाहिए कि जिस समय आप फोन कर रही थीं उस समय अमेरिका में रात होगी और क्लाइंट सो रहा होगा. खैर मनाइए कि उस की नींद नहीं टूटी वरना आप की नौकरी चली जाती.’’

‘‘सर, तो मैं और क्या करती?’’ अपनी बेबसी पर ऐश्वर्या की आंखें छलछला आईं.

‘‘अपने दिमाग का इस्तेमाल करतीं और काम पूरा करतीं,’’ सुशांत ने बुरी तरह डपटा. फिर प्रोजैक्ट को देख कर कुछ बातें बता उसे उस की सीट पर भेज दिया.

ऐश्वर्या ने लाख कोशिश की, लेकिन प्रोजैक्ट उस दिन पूरा नहीं हो पाया. इस से नाराज हो कर सुशांत ने उसे एक मैमो पकड़ा दिया.

धीरेधीरे सुशांत का असली रंग सामने आने लगा था. वह सब से कठिन काम ऐश्वर्या को सौंपता और उस के पूरा न होने पर डांटने के साथसाथ मैमो भी पकड़ाता रहता.

एक दिन सुशांत ने सुबहसुबह ही ऐश्वर्या को अपने चैंबर में बुला कर कहा, ‘‘3 महीने में आप को 11 मैमो मिल चुके हैं. अगर आप ने अपने काम में सुधार नहीं किया तो कंपनी आप को डिसमिस करने के लिए मजबूर हो जाएगी. इसे आप आखिरी चेतावनी समझिएगा.’’

Tunisha Sharma Case: शीजान खान की बहन शफाक नाज का छलका दर्द

टीवी एक्ट्रेस तुनीषा शर्मा की आत्महत्या केस में एक्टर शीजान खान को आरोपी है. तुनीषा शर्मा ने 20 साल की उम्र में आत्महत्या कर ली. तुनीषा शर्मा 24 दिंसबर को टीवी सीरियल के सेट पर मृत पाई गई थी. तुनीषा की मां वनिता शर्मा ने शीजन खान पर खुदखुशी उकसाने का आरोप लगाया था. तुनीषा शर्मा आत्महत्या मामले में शीजन खान को गिरफ्तार कर लिया गया था. लेकिन अब  इस मामले में शीजन खान को बेल मिल गई है. शीजन खान फिलहाल केपटाउन में खतरों के खिलाड़ी 13 की शूटिंग कर रहे हैं.

इन सबके बीच शीजान की बहन एक्ट्रेस शफाक नाज़ ने एक इंटरव्यू में फैमिली की मुश्किलों के बारे में बात की.

शफाक नाज का छलका दर्द

शीजान खान की बहन और एक्ट्रेस शफाक नाज़ ने एक इंटरव्यू में अपने भाई शीजान खान के तुनीषा आत्महत्या मामले में गिरफ्तार होने के बाद फैमिली के सामने आई परेशानियों के बारे में बात की.

शफाक नाज ने कहा, “ जो कुछ हुआ है उस पर प्रोसेस करने के लिए मैं अभी भी स्ट्रगल कर रही हूं. मैं अभी भी अपने इमोशंस को समझने की कोशिश कर रही हूं. कभी-कभी यह सब बहुत जबरदस्त होता है. वह कहती हैं, ”किसी को इस बात का अंदाजा नहीं है कि मैं किस दौर से गुजर रही हूं.’

 

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लोग कहते है ‘कातिल की बहन’

शफाक नाज़ ने आगे इंटरव्यू में बताया कि “लोगो ने मेरी और मेरे परिवार की एक इमेज बना ली है. जब मैं सोशल मीडिया पर जाती हूं, मुझे हमारे खिलाफ ऐसे कठोर कमेंट्स देखने को मिलते है वे ‘ ये तो कातिल की बहन है’ जैसी बातें लिखने से पहले सोचते नहीं है. मैं यह नहीं कह सकती मुझे फर्क नहीं पड़ता . यकीकन मुझे ये प्रभावित करता है, यह मुझे तोड़ देता है.”

 

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 चिंता में हैं शफाक

शफाक ने आगे कहा, “ “मुझे लगने लगा कि मैं लाइफ में अच्छी चीज़ों के लायक नहीं हूं. मैं बहुत ज्यादा टेंशन से जूझ रही हूं. हर दिन से निपटना कठिन होता जाता है. ऐसे भी दिन होते हैं जब मुझमें अपने बिस्तर से उठने की ताकत भी नहीं होती है.”

नए डायलॉग्स के बाद भी नहीं चला ‘आदिपुरुष’ का जादू, सातवे दिन बॉक्स ऑफिस पर हुए धड़ाम

प्रभास, कृति सेनॉन और सैफ अली खान स्टारर ‘आदिपुरुष’ (Adipurush) फिल्म 16 जून को काफी लंबे अरसे के बाद बड़े स्क्रीन पर रिलीज हो गई है. आज शुक्रवार को फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अपने 7 दिन पूरे कर लिए है. जब से आदिपुरुष मूवी रिलीज हुई तभी से विवादो में आ गई है. दरअसल, ‘आदिपुरुष’ (Adipurush) के डायलॉग्स को लेकर जमकर बवाल हो रहा है. डायरेक्टर ओम राउत की ‘आदिपुरुष’ ने पहले दिन ही रिकॉर्डतोड कमाई की थी. लेकिन अब ‘आदिपुरुष’ का बॉक्स ऑफिस पर बुरा हाल.

गुरुवार का कलेक्शन

रिपोर्ट्स के मुताबिक इस गुरुवार को आदिपुरुष की कहानी भी बुधवार से कुछ अलग नहीं है. रविवार को फिल्म का इंडिया कलेक्शन 69 करोड़ रुपये के करीब था, लेकिन सोमवार को इसने सिर्फ 16 करोड़ की कमाई की. इसके बाद से फिल्म की कमाई हर रोज, पिछले दिन के मुकाबले लगातार गिर रही है.

आदिपुरुष’ ने बॉक्स ऑफिस पर 5 से 6 करोड़ रुपये का ही कलेक्शन किया है. बुधवार को फिल्म ने 7.25 करोड़ रुपये कमाए थे, जिसके मुकाबले अगले दिन का कलेक्शन गिर गया है. वहीं फिल्म ने इंडिया में हिंदी वर्जन मे 7वे दिन 3 करोड़ कमाई की.

डायलॉग्स के बाद भी नहीं चला ‘आदिपुरुष’ का जादू

‘आदिपुरुष’ रामायण बेस्ड मूवी है. ‘आदिपुरुष’ के रिलीज होते ही वह अलोचनाओं में घिर गई है क्योंकि दर्शको को ‘आदिपुरुष’ के VFX डिजाइन और डायलॉग्स पसंद नहीं आए. सोशल मीडिया पर लोगो ने ‘आदिपुरुष’ के डायलॉग्स को लेकर डायरेक्टर ओम राउत और मनोज शुक्ला मुंतशिर को जमकर ट्रोल किया गया है. पहले दिन के बाद से ही फिल्म के डायलॉग राइटर मनोज मुंतशिर को अपनी सफाई देनी शुरू करनी पड़ी. हालांकि, अंत में यही तय हुआ कि फिल्म के सभी विवादित डायलॉग बदल दिए जाएगे. अब फिल्म के नए डायलॉग्स आने के बाद भी ‘आदिपुरुष’ की कमाई पर कोई फर्ख नहीं पड़ा. ‘आदिपुरुष’ बॉक्स ऑफिस पर पिट गई है.

 

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 150 रुपये की टिकट

‘आदिपुरुष’ के डायरेक्टर ओम राउत ने दर्शको थियटर में लाने के लिए ‘आदिपुरुष’ की टिकट 150 रुपये तक कर दी थी लेकिन ये ऑफर सिर्फ 2 दिन तक के लिए. 22 और 23 जून तक फिल्म की टिकट 150 रुपये है. इस ऑफर के बाद भी ‘आदिपुरुष’ का बॉक्स ऑफिस पर बुरा हाल है.

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