मिनी वर्कआउट से करें वजन कम

जैसा कि नाम से पता चलता है, मिनी वर्कआउट वर्कआउट के 5-10 मिनट के सैशन होते हैं जिन्हें आप कभी भी, कहीं भी कर सकते हैं. ‘फिटनैस हैबिट जिम’ के संचालक असफर ताहिर पिछले 11 सालों से लोगों के स्वास्थ्य और फिटनैस के लिए कार्य कर रहे हैं. फिटनैस फ्रीक असफर ताहिर कहते हैं, ‘‘शादी के बाद जब महिलाओं का वजन बढ़ना शुरू होता है तब वे इस पर ध्यान नहीं देती हैं. थोड़े ही दिनों में जब वजन दोगुना हो जाता है तब परेशान होती हैं कि कैसे घटाएं.

फिर आपाधापी में महीने 2 महीने के लिए जिम जौइन कर लेती हैं. लेकिन इस से कोई फायदा नहीं है. अगर आप को फिट रहना है तो ऐक्सरसाइज आप की आदत होनी चाहिए और जरूरी नहीं कि इस के लिए आप बहुत सारे पैसे खर्च करें और बहुत सारा समय दें. अगर मिनी वर्कआउट को महिलाएं और लडकियां अपनी रोज की आदत बना लें तो उन्हें मोटापे का सामना कभी नहीं करना पड़ेगा.’’

मिनी वर्कआउट के बारे में बात करते हुए ताहिर कहते हैं, ‘‘लोग सोचते हैं कि वजन घटाने के लिए उन्हें 45-60 मिनट के लंबे वर्कआउट सैशन करने की जरूरत होती है, लेकिन मैं आप को बताऊं कि 15 मिनट का मिनी वर्कआउट भी उतना ही फायदेमंद हो सकता है. खासतौर से लेडीज के लिए. अगर मिनी वर्कआउट रोजमर्रा के काम या औफिस के दौरान 1-2 बार भी कर लें तो वजन घटाने, पूरा दिन सक्रिय रहने और बहुत सारी कैलोरी बर्न करने में मदद मिलती है जो कसरत के एक लंबे सैशन से बेहतर है.

इस तरह का वर्कआउट आप के व्यस्त शैड्यूल में शामिल करना आसान भी है. अगर आप के पास जिम जाने का टाइम या पैसे नहीं हैं, तो जिम न करें, घर में रह कर सिर्फ 15 मिनट रोज ऐक्सरसाइज करें. आप का वजन धीरेधीरे कम होने लगेगा और पूरी बौडी टोन्ड हो जाएगी.’’

  1. हैल्दी और यंग

भारत में ज्यादातर महिलाएं अभी भी हाउसवाइफ हैं. उन का सुबह का वक्त सब से ज्यादा व्यस्त होता है जब पति, बच्चों और सासससुर का नाश्ता बनाना है, बच्चों को स्कूल के लिए रैडी करना है, उन का और पति का लंच पैक करना है, बच्चों को स्कूल बस तक छोड़ना है या स्कूल तक उन को खुद छोड़ कर आना है, ऐसे बहुतेरे काम एक गृहिणी सुबहसुबह ऐक्सप्रैस ट्रेन की तरह निबटाती है.

घरपरिवार की जिम्मेदारी संभालने के चक्कर में महिलाएं खुद के लिए समय नहीं निकाल पाती हैं. उन के पास जिम या योगा क्लासेज जौइन करने का समय नहीं होता है, लेकिन पति की नजरें तो पत्नी को आकर्षक, हैल्दी और यंग ही देखना चाहती हैं तो उन की ख्वाहिश पूरी करने के लिए और अपने स्वास्थ्य के लिए भी आप को कोई न कोई वर्कआउट जरूर करना चाहिए.

मिनी वर्कआउट पर बात करते हुए जिम कोच असफर ताहिर कई ऐसी ऐक्सरसाइज बताते हैं जो आसान भी हैं और सिर्फ 15 मिनट करने से ही आप गजब की चुस्तीफुरती महसूस करेंगी. इन आसान कसरतों से आप फिट भी रहेंगी और आप का वजन भी कंट्रोल में रहेगा.

इन में मुख्य हैं- बर्पीज ऐक्सरसाइज जो व्यायाम सब से तीव्र अभ्यासों में से एक है और आप के शरीर में लगभग सभी मांसपेशियों को स्ट्रौंग करता है. इस के साथ ही जंपिंग जैक, हाई नीज, माउंटेन क्लाइंबिंग, सीटेड इन ऐंड आउट और प्लैंक जैसी ऐक्सरसाइज कम समय में अच्छा रिजल्ट देती हैं.

ताहिर कहते हैं कि ये सभी ऐक्सरसाइज किसी जिम ट्रेनर से पूछ कर या यूट्यूब पर देख कर सीखी जा सकती हैं. इन में से कोई एक भी अपना लें और दिन में 1-2 दफा कर लें तो

1 हफ्ते में रिजल्ट दिखने लगता है. इस के अलावा कुछ अन्य गतिविधियां हैं जिन्हें आप आसानी से कर सकती हैं जैसे-

2. रनिंग

सुबह उठ कर सब से पहले सामने वाले पार्क में या खुली सड़क पर सिर्फ 15 मिनट तेजी से वाक कर आएं या दौड़ लगा आइए. इस से आप के फेफड़ों में फ्रैश एयर पहुंचेगी और आप का ब्लड सर्कुलेशन अच्छा होगा. कुछ दिनों में ही आप को महसूस होगा कि आप का वजन कम हो रहा है.

3. पुश अप्स

घर पर की जाने वाली यह सब से असरदार ऐक्सरसाइज है. जमीन पर मैट बिछा लें और किसी टेबल या बैड के नीचे पैर फंसा कर सिर्फ 15 मिनट पुश अप्स करें. इस से आप की मसल्स मजबूत होने और वेट को बैलेंस करने में भी मदद मिलेगी.

4. साइड लैग ऐक्सरसाइज

पैरों को पतला और आकर्षक बनाने के लिए इस ऐक्सरसाइज को भी करें. साइड लेग ऐक्सरसाइज को आप घर पर आसानी से कर सकती हैं. किसी मैट पर बैठ जाएं और इस व्यायाम को करें. इस से जांघों और पेट पर जमा फैट घटेगा और लेग्स टोन्ड होंगी.

5. ब्रिज ऐक्सरसाइज

ब्रिज ऐक्सरसाइज घर में काम के दौरान अकसर महिलाएं कमर दर्द से परेशान रहती हैं. ऐसे में ब्रिज ऐक्सरसाइज फायदेमंद है. इस से वजन घटाने में मदद मिलेगी और कमर दर्द में आराम मिलेगा. इस के लिए आप को जमीन पर लेटना है और फिर कमर को ऊपर की ओर उठा कर ब्रिज पोजीशन में आना है.

अपने हाथों को साइड में रखें और हिप्स को थोड़ा ऊपर उठाएं. अपने पैर को सीधा स्ट्रैच करें और फिर ऊपर की ओर स्ट्रैच करें और नीचे की ओर ले कर आएं. इसी तरह दूसरे पैर से करें. ऐसा करीब 10 से 15 मिनट करें. इस से वजन घटाने में मदद मिलेगी.

6. हाफ क्लौक मूवमैंट

बैडरूम की दीवार से 1 फुट के फासले पर दीवार की तरफ पीठ कर के खड़ी हो जाएं. दोनों पैरों के बीच 1 फुट का गैप रखें. बांहों को आगे की तरफ फैलाएं और उस के बाद क्लौकवाइज और ऐंटीक्लौकवाइज कमर से खुद को घुमाते हुए पीछे की दीवार पर हाथों को छुआएं. करीब 10 मिनट की यह ऐक्सरसाइज आप की कमर को पतला करेगी, पीठ पर चढ़ गए मांस को हटाएगी, कमर दर्द में राहत देगी और आप को चुस्त बनाएगी.

ऐक्सरसाइज के साथसाथ असफर ताहिर खानपान पर भी ध्यान देने को कहते हैं. अधिक चीनी, फास्ट फूड, चौकलेट से दूर रह कर अगर प्रोटीन डाइट को अपने मैन्यू में शामिल कर लें तो इस से मसल्स स्ट्रौंग होंगी और शरीर से फैट कम होगा. ताहिर कहते हैं कि भारतीय खाने में हम कार्बोहाइड्रेट्स और स्टार्च ज्यादा खाते हैं. साथ में कोई मीठी चीज भी जरूर लेते हैं. यह हमारे शरीर में मोटापा बढ़ाता है और मसल्स को कमजोर करता है.

आप रोजाना ऐक्सरसाइज करते हैं और अगर आप का वजन 80 किलोग्राम है तो आप को करीब 160 कैलोरी प्रोटीन डाइट चाहिए. यह प्रोटीन ओट्स से, चिकन ब्रैस्ट,

छोले, राजमा, पनीर और सोयाबीन से आसानी से मिल सकता है. जब शरीर में प्रोटीन बढ़ता है तो फैट यानी चरबी कम होती है और मसल्स मजबूत होती हैं, जो शरीर को अच्छा पोस्चर और लुक देती हैं.

सनग्लासेज: जो आप को रखें कूल

आप का चेहरा छोटा, लंबा, वर्गाकार या फिर सिकुड़ा हुआ है, क्या सनग्लासेज खरीदते समय इस बारे में सोचते हैं? ऐसा सोचने की जरूरत क्यों पड़ती है?

दरअसल, सूर्य की हानिकारक किरणों से आंखों की सुरक्षा करने में व खूबसूरती बढ़ाने में यहां तक कि आंखों के इर्दगिर्द की बारीक ?ार्रियों को छिपाने में सनग्लासेज महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. कुछ लोग सनग्लासेज का इस्तेमाल फैशन की दौड़ में आगे रहने के लिए करते हैं तो कुछ अपनी आंखों की सुरक्षा तथा सुकून के लिए.

जिन लोगों की आंखों की रोशनी कमजोर होती है वे फोटोक्रोमिक लैंस वाले सनग्लासेज चुनते हैं ताकि उन की नजर भी साफ रह सके और आंखों को सूर्य की अल्ट्रावायलेट किरणों से भी सुरक्षा हो सके. वहीं साइक्लिंग और राफ्टिंग के प्रेमी अपनी जरूरत के अनुरूप सनग्लासेज चुनते हैं.

आप चाहें अपने लिए कोई भी फ्रेम चुनें, लेकिन आराम से सम?ौता कभी न करें. उपयुक्त फ्रेम के चुनाव को ध्यान में रखते हुए आप को अपने चेहरे के आकार के अनुरूप फ्रेम का चयन करना चाहिए यानी उसी आकार का फ्रेम चुनें, जो आप के चेहरे पर फिट बैठता हो.

  1. चेहरे के अनुरूप

अभिनेत्री रानी मुखर्जी जैसे गोल चेहरे के लिए आयताकार फ्रेम सर्वश्रेष्ठ माना जाता है. गोल चेहरे की लंबाई और चौड़ाई समान होती है और आयताकार फ्रेम उन के चेहरे को लंबा दिखाता है. यह फ्रेम चेहरे पर सही कंट्रास्ट बनाते हुए चेहरे को छरहरा लुक देता है. गोलाकार चेहरे वालों को कोणीय फ्रेम चुनना चाहिए ताकि चेहरे की बनावट थोड़ी अलग नजर आए.

आयताकार चेहरे के लिए ऐविएटर फ्रेम सर्वश्रेष्ठ है. चूंकि ऐसे चेहरे लंबे होते हैं इसलिए ऐविएटर फ्रेम लंबे चेहरे को छोटा दर्शाता है. इस आकार के चेहरे वालों को आयताकार सनग्लासेज पहनने से बचना चाहिए, क्योंकि उस से उन का चेहरा और लंबा नजर आता है.

वर्गाकार चेहरे वालों को अंडाकार फ्रेम वाला सनग्लासेज पहनना चाहिए, जो संकीर्ण हो. यह कंट्रास्ट लुक प्रदान करेगा. इस से आप के चेहरे का आकार सौम्य दिखेगा.

जिन लोगों के चेहरे का आकार दिल के आकार जैसा होता है यानी जिन का ललाट चौड़ा, लेकिन जबड़ों का आकार पतला होता है उन पर संकीर्ण फ्रेम सब से ज्यादा अच्छा लगता है. ऐसे लोगों को ऐविएटर या शेड्स फ्रेम के इस्तेमाल से बचना चाहिए, क्योंकि उस से उन के चेहरे का आकार और स्पष्ट दिखेगा. सब से अच्छा विकल्प हलके रंग के रिमलेस फ्रेम का इस्तेमाल होगा, क्योंकि उस से उस व्यक्ति का चेहरा पतला होने का भ्रम रहेगा. दिल के आकार के चेहरे वाले व्यक्ति मौउ जिम की क्लासिक लाइन शृंखला के केमाना सनग्लासेज लगाने पर खूबसूरत दिखेंगे.

अंडाकार चेहरे वालों के लिए यह समस्या नहीं होती कि किस प्रकार का फ्रेम चुनें किस प्रकार का नहीं. उन के पास बहुत सारे विकल्प होते हैं, अंडाकार चेहरे वाले व्यक्ति के लिए शेड्स चुनना भी सब से आसान होता है. अंडाकार चेहरे पर हर तरह का सनग्लासेज बिलकुल सटीक दिखता है, क्योंकि इस आकार का चेहरा संतुलित और समानुपात में ढला होता है.

2. प्रैस्क्रिप्शन सनग्लास

जो लोग दृष्टिदोष में सुधार चाहते हैं, अब उन्हें टैक्नोलौजी की सुविधा से युक्त सनग्लासेज से वंचित रहने की जरूरत नहीं.

चिलचिलाती धूप में आप को भी कभी न कभी मौजमस्ती या कोई काम करने का मौका मिलता होगा, तब आप ऐसे सनग्लासेज की सख्त आवश्यकता महसूस करते होंगे, जो गरमी से ?ालसती आप की आंखों को ठंडक प्रदान करे.

आंखों की रोशनी दुरुस्त करने के लिए चश्मा लगाने वाले बहुत सारे लोग सनग्लासेज के फायदे और आराम से वंचित रह जाते हैं, क्योंकि वे अपनी नजर के चश्मे की जगह सुरक्षा के लिए सनग्लासेज का इस्तेमाल नहीं कर सकते. जिन लोगों को नजर की परेशानी होती है, उन के लिए चश्मे के बगैर गाड़ी चलाना खतरनाक हो सकता है, यहां तक कि नजर ठीक रखने वाली ऐनक के बगैर सड़क पर टहलना भी उन के लिए खतरनाक रहता है.

तो क्या नजर के चश्मे पहनने वाले लोग चिलचिलाती धूप से बचने और फैशन स्टेटमैंट के लिए सनग्लासेज का इस्तेमाल कर ही नहीं सकते? नहीं, कतई नहीं. आजकल कमजोर नजर वाले ऐसे प्रैस्क्रिप्शन सनग्लासेज आसानी से प्राप्त कर सकते हैं, जिन में नजर सुधारने और धूप से आंखों को बचाने की दोनों क्षमताएं होती हैं.

नजर का चश्मा पहनने वाले कई लोग अकसर इस दोहरे मकसद के लिए परंपरागत लैंस का इस्तेमाल करते हैं और अलगअलग मौसम के अनुसार चश्मा बदलने की असुविधा से बच जाते हैं. लेकिन परंपरागत लैंस कभीकभी ऐडजस्ट नहीं हो पाते. प्रैस्क्रिप्शन सनग्लासेज विशेष टैक्नोलौजी समर्थित सनग्लासेज होता है, जिस में व्यक्ति की नजर सुधारने के लिए पावर लैंस भी होता है.

पहले जहां सनग्लासेज को ज्यादातर लोग फैशन ऐक्सैसरीज मानते थे, वहीं अब आंखों की सेहत की सुरक्षा के लिए भी ऐसे सनग्लासेज पहनने का चलन बढ़ने लगा है, जो सूर्य की अल्ट्रावायलेट किरणों से हमारी आंखों को सुरक्षा देते हैं.

वाइट पैंट: जब 3 सहेलियों के बीच प्यार ने दी दस्तक

इस बार जब मायके आई तो घूमते हुए कालेज के आगे से गुजरना हुआ. तभी अनायास ही वह सफेद पैंट पहना हुआ शख्स आंखों के आगे लहरा गया जिस का नाम ही हम लोगों ने वाइट पैंट रखा हुआ था. और सोचते हुए कालेज के दिन चलचित्र जैसे आंखों के आगे नाचने लगे.

बात तब की है जब हम ने कालेज में नयानया ऐडमिशन लिया था. उस जमाने में कालेज जाना ही बहुत बड़ी बात होती थी. हर कोई स्कूल के बाद कालेज तक नहीं पहुंच पाता था. तो हम खुद को बहुत खुशनसीब समझते थे जो कालेज की चौखट तक पहुंचे थे. इंटर कालेज के कठोर अनुशासन के बाद कालेज का खुलापन और रंगबिरंगे परिधान एक अलग ही दुनिया की सैर कराते थे.

हमारे लिए हर दिन नया दिन होता था. कालेज हमें कभी बोर नहीं करता था. हम 3 सहेलियां थीं सरिता, सुमित्रा और सुदेश. हम हमेशा साथसाथ रहती थीं, इसीलिए सभी लोग हमें त्रिमूर्ति भी कहते थे.

हम तीनों अकसर क्लास खत्म होने के बाद खुले मैदान में बैठ कर घंटों गपें लड़ाती थीं. इसी क्रम में हम तीनों ने महसूस किया कि कोई हमारे आसपास खड़ा हो कर हम पर नजर रखता है और इस बात को हम तीनों ने ही नोट किया. हम ने देखा मध्यम कदकाठी का एक लड़का, जो बहुत खूबसूरत नहीं था, उस के गेहुएं रंग में सिल्की बाल अच्छे ही लग रहे थे. शर्ट जैसी भी पहने था. लेकिन पैंट वह हमेशा सफेद ही पहनता था. रोजरोज उसे सफेद पैंट में देखने के कारण हम ने उस का नाम ही वाइट पैंट रख दिया था जिस से हमें उस के बारे में बात करने में आसानी रहती थी.

हमारा काम था क्लास के बाद मैदान में बैठ कर टाइम पास करना और उस का काम एक निश्चित दूरी से हम को देखते रहना. जब यह क्रम काफी दिनों तक चलता रहा तो हमें भी कुतूहल हुआ कि आखिर यह हम तीनों में से किसे पसंद करता है. सो, हम तीनों ने सोचा क्यों न इस बात का पता लगाया जाए. तो इत्तफाक से एक दिन सुदेश नहीं आई लेकिन हम ने देखा कि वाइट पैंट फिर भी हमारे आसपास उपस्थित है. तो इतना तो पक्का हो गया कि सुदेश वह लड़की नहीं है जिस के लिए वह हमारा ग्रुप ताकता है. कुछ समय बाद सुमित्रा उपस्थित न रही. फिर भी उस का हमें ताकना बदस्तूर जारी रहा. अब सुमित्रा भी इस शक के घेरे से बाहर थी. अब रह गई थी एकमात्र मैं और फिर किसी कारणवश मैं ने भी छुट्टी ली तो अगले दिन कालेज जाने पर पता चला कि मेरे न होने पर भी उस का ताकना जारी था.

अब तो हम तीनों को गुस्सा आने लगा. लेकिन कर भी क्या सकते थे. हम कहीं भी जा कर बैठते, उसे अपने आसपास ही पाते. हम ने कई बार अपने बैठने की जगह भी बदली, मगर उसे अपने ग्रुप के आसपास ही पाया. तीनों में मैं थोड़ी साहसी और निडर थी. हम रोज उसे देख कर यही सोचते कि इसे कैसे मजा चखाया जाए. लेकिन हमारे पास कोई आइडिया नहीं था और वैसे भी, इतने महीनों तक न उस ने कुछ बात की और न ही कभी कोई गलत हरकत. इसलिए भी हम कुछ नहीं कर सके. लेकिन उस का हमेशा हमारे ही ग्रुप को ताकना हमें किसी बोझ से कम नहीं लगता था. एक दिन हमारे बैठते ही जब वह भी आ गया तो मैं ने कहा चलो, आज इसे मजा चखाते हैं. तो दोनों बोलीं, ‘कैसे?’

?मैं ने कहा, ‘यह रोज हमारा पीछा करता है न, तो चलो आज हम इस का पीछा करते हैं.’ वे दोनों बोलीं, ‘कैसे?’ मैं ने कहा, ‘तुम दोनों सिर्फ मेरा साथ दो. जैसा मैं कहती हूं, बस, मेरे साथसाथ वैसे ही चलना.’ उन दोनों ने हामी भर दी. फिर हम वहीं बैठे रहे. हम ने देखा लगभग एक घंटे बाद वह लाइब्रेरी की तरफ गया तो मैं ने दोनों से कहा कि चलो अब मेरे साथ इस के पीछे. आज हम इस का पीछा करेंगे और इसे सताएंगे. मेरी बात सुन कर वे दोनों खुश हो गईं. और हम तीनों उस के पीछेपीछे लाइब्रेरी पहुंच गए. जितनी दूरी पर वह खड़ा होता था, लगभग उतनी ही दूरी बना कर हम तीनों खड़े हो गए. जब उस की नजर हम पर पड़ी तो वह हमें देख कर चौंक गया और हलके से मुसकरा कर अपने काम में लग गया.

उस के बाद वह पानी पीने वाटरकूलर के पास गया तो हम भी उस के पीछेपीछे वहीं पहुंच गए. अब तक वह हम से परेशान हो चुका था. फिर वो नीचे आया और मैदान के दूसरे छोर पर बने विज्ञान विभाग की तरफ चल दिया. हम भी उस के पीछेपीछे चल दिए. वह विज्ञान विभाग के अंदर गया और काफी देर तक बाहर नहीं आया. हम बाहर ही मैदान में बैठ कर उस के बाहर आने का इंतजार करने लगे.

लगभग 35 मिनट के बाद वह चोरों की तरह झांकता हुआ बाहर निकला, तो उस ने हम तीनों को उस के इंतजार में बैठे पाया. 10 बजे से इस चूहेबिल्ली के खेल में 2 बज चुके थे. वह हम से भागतेभागते बुरी तरह थक चुका था. वह कालेज से बाहर निकला और ऋषिकेश की तरफ पैदल चलने लगा. हम भी उस के पीछे हो लिए. वह मुड़मुड़ कर हमें देखता और आगे चलता जाता. जब थकहार कर उसे हम किसी भी तरह टलते नहीं दिखे तो आखिर में वह हरिद्वार जाने वाली बस में चढ़ गया और हमारे सामने से हमें टाटा करते हुए मुसकराते हुए निकल गया. हम तीनों अपनी इस जीत पर पेट पकड़ कर हंसती रहीं और फिर उस दिन के बाद कभी दोबारा हम ने वाइट पैंट को अपने आसपास नहीं देखा.

2 हिस्से: जब खुशहाल शादी पहुंची तलाक तक

‘‘कहां थीं तुम? 2 घंटे से फोन कर रहा हूं… मायके पहुंच कर बौरा जाती हो,’’ बड़ी देर के बाद जब मोनी ने फोन रिसीव किया तो मीत बरस पड़ा.

‘‘अरे, वह… मोबाइल… इधरउधर रहता है तो रिंग सुनाईर् ही नहीं पड़ी… सुबह ही तो बात हुई थी तुम से… अच्छा क्या हुआ किसलिए फोन किया? कोई खास बात?’’ मोनी ने उस की झल्लाहट पर कोई विशेष ध्यान न देते हुए कहा.

‘‘मतलब अब तुम से बात करने के लिए कोई खास बात होनी चाहिए मेरे पास… क्यों ऐसे मैं बात नहीं कर सकता? तुम्हारा और बच्चों का हाल जानने का हक नहीं है क्या मुझे? हां, अब नानामामा का ज्यादा हक हो गया होगा,’’ मीत मोनी के सपाट उत्तर से और चिढ़ गया. उसे उम्मीद थी कि वह अपनी गलती मानते हुए विनम्रता से बात करेगी.

उधर मोनी का भी सब्र तुरंत टूट गया. बोली, ‘‘तुम ने लड़ने के लिए फोन किया है तो मुझे फालतू की कोई बात नहीं करनी है. एक तो वैसे ही यहां कितनी भीड़ है और ऊपर से मान्या की तबीयत…’’ कहतेकहते उस ने अपनी जीभ काट ली.

‘‘क्या हुआ मान्या को? तुम से बच्चे नहीं संभलते तो ले क्यों जाती हो… अपने भाईबहनों के साथ मगन हो गई होगी… ऐसा है कल का ही तत्काल का टिकट बुक करा रहा हूं तुम्हारा… वापस आ जाओ तुम… मायके जा कर बहुत पर निकल आते हैं तुम्हारे. मेरी बेटी की तबीयत खराब है और तुम वहां सैरसपाटा कर रही हो… नालायकी की हद है… लापरवाह हो तुम…’’ हालचाल लेने को किया गया फोन अब गृहयुद्ध में बदल रहा था. मीत अपना आपा खो बैठा था.

‘‘जरा सा बुखार हुआ है उसे… अब वह ठीक है… और सुनो, मुझे धमकी मत दो. मैं 10 दिन के लिए आई हूं. पूरे 10 दिन रह कर ही आऊंगी… मैं अच्छी तरह जानती हूं कि मेरे मायके आने से सांप लोटने लगा है तुम्हारे सीने पर… अभी तुम्हारे गांव जाती जहां 12-12 घंटे लाइट नहीं आती… बच्चे वहां बीमार होते तो तुम्हें कुछ नहीं होता… पूरा साल तुम्हारी चाकरी करने के बाद 10 दिन को मायके क्या आ जाऊं तुम्हारी यही नौटंकी हर बार शुरू हो जाती है,’’ मोनी भी बिफर गई. उस की आवाज भर्रा गई पर वह अपने मोरचे पर डटी रही.

‘‘अच्छा मैं नौटंकी कर रहा हूं… बहुत शह मिल रही है तुम्हें वहां…

अब तुम वहीं रहो. कोई जरूरत नहीं वापस आने की… 10 दिन नहीं अब पूरा साल रहो… खबरदार जो वापस आईं,’’ गुस्से से चीखते हुए मीत ने उस की बात आगे सुने बिना ही फोन काट दिया.

मोनी ने भी मोबाइल पटक दिया और सोफे पर बैठ कर रोने लगी. उस की मां पास बैठी सब सुन रही थीं. वे बोलीं, ‘‘बेटी, वह हालचाल पूछने के लिए फोन कर रहा था. देर से फोन उठाने पर अगर नाराज हो रहा था तो तुम्हें प्यार से उसे हैंडल करना था. खैर, चलो अब रोओ नहीं. कल सुबह तक उस का भी गुस्सा उतर जाएगा.’’

मोनी अपना मुंह छिपाए रोते हुए बोली, ‘‘मम्मी, सिर्फ 10 दिन के लिए आई हूं. जरा सी मेरी खुशी देखी नहीं जाती इन से… पतियों का स्वभाव ऐसा क्यों होता है कि जब भी हमें मिस करेंगे, हमारे बिना काम भी नहीं चलेगा तब प्यार जताने के बदले, हमारी कदर करने के बदले हमीं पर झलाएंगे, गुस्सा दिखाएंगे… हम से जुड़ी हर चीज से बैर पाल लेंगे. यह क्या तरीका है जिंदगी जीने का?’’

‘‘बेटी, ये पुरुष होते ही ऐसे हैं… ये बीवी से प्यार तो करते हैं पर उस से भी ज्यादा अधिकार जमाते हैं. बीवी के मायके जाने पर इन को लगता है कि इन का अधिकार कुछ कम हो रहा है, तो अपनेआप अंदर ही अंदर परेशान होते हैं. ऐसी झल्लाहट में जब बीवी जरा सा कुछ उलटा बोल दे तो इन के अहं पर चोट लग जाती है और बेबात का झगड़ा होने लगता है… तेरे पापा का भी यही हाल रहता था,’’ मां ने मोनी के सिर पर हाथ फेरते हुए उसे चुप कराया.

‘‘पर मम्मी औरत को 2 भागों में आखिर बांटते ही क्यों हैं ये पुरुष? मैं पूरी ससुराल की भी हूं और मायके की भी… मायके में आते ही ससुराल की उपेक्षा का आरोप क्यों लगता है हम पर? यह 2 जगह का होने का भार हमें ही क्यों ढोना पड़ता है?’’ मोनी ने मानो यह प्रश्न मां से ही नहीं, बल्कि सब से किया हो.

मां उसे अपने सीने से लगा कर चुप कराते हुए बोलीं, ‘‘इन के अहं और ससुराल में छत्तीस का आंकड़ा रहता ही है… मोनी मैं ने कहा न कि पुरुष होते ही ऐसे हैं. यह इन की स्वाभाविक प्रवृत्ति है… और पुरुष का काम ही है स्त्री को 2 भागों में बांट देना, जिन में एक हिस्सा मायके का और दूसरा ससुराल का बनता है… जैसे 2 अर्ध गोलाकार से एक गोलाकार पूरा होता है वैसे ही एक औरत भी इन 2 हिस्सों से पूर्ण होती है.’’

मोनी मूक बनी सब सुन रही थी. कुछ समझ रही थी और कुछ नहीं समझने की कोशिश कर रही थी. शायद यही औरत का सच है.

जमाना बदल गया: भाग 1- ऐश्वर्या ने सुशांत को कैसे सिखाया सबक?

‘‘हैलोपापा, मेरा कैंपस सलैक्शन हो गया है,’’ ऐश्वर्या ने लगभग चिल्लाते हुए कहा. उस से अपनी खुशी छिपाए नहीं छिप रही थी.

‘‘बधाई हो बेटा,’’ पापा की प्रसन्नता भरी आवाज सुनाई दी, ‘‘किस कंपनी में हुआ है?’’

‘‘रिवोल्यूशन टैक्नोलौजी में. बहुत बड़ी सौफ्टवेयर कंपनी है. इस की कई देशों में शाखाएं हैं,’’ ऐश्वर्या ने खुशी से बताया, ‘‘कालेज में सब से ज्यादा पैकेज मुझे मिला है. ज्यादातर बच्चों को तीन से साढ़े तीन लाख रुपए तक के पैकेज मिले हैं, लेकिन मुझे साढ़े चार लाख रुपए का पैकेज मिला है. लेकिन…’’

‘‘लेकिन क्या?’’

‘‘यह कंपनी 2 साल का बौंड भरवा रही है. समझ में नहीं आ रहा क्या करूं?’’

‘‘दूसरी कंपनियां भी तो कम से कम 1 साल का बौंड भरवाती ही हैं. अगर अच्छी शुरुआत मिल रही है तो 2 साल का बौंड भरने में कोई बुराई नहीं है, क्योंकि 2 साल बाद अगर कंपनी बदलती हो तो तुम्हें इस से ऊपर का जंप मिलेगा जबकि तुम्हारे दूसरे साथियों को मुश्किल से उतना मिल पाएगा जितने से तुम शुरुआत कर रही हो,’’ पापा ने राय दी.

‘‘थैंक्यू पापा, आप ने मेरी उलझन दूर कर दी.’’

ऐश्वर्या लखनऊ के एक इंजीनियरिंग कालेज की छात्रा थी. हर सेमैस्टर में टौप करती थी. सभी उस की प्रतिभा का लोहा मानते थे. सभी को विश्वास था कि सब से अच्छा पैकेज उसी को मिलेगा.

2 दिन बाद जब ऐश्वर्या घर पहुंची तो पापा ने उसे गले से लगा लिया. मम्मी ने उस के ऊपर आशीर्वादों की बौछार करते हुए पूछा, ‘‘तुम्हारी पोस्टिंग कहां होगी?’’

‘‘बैंगलुरु में?’’

घर में जश्न का माहौल था. खुशियों के बीच छुट्टियां कब बीत गईं पता ही नहीं चला. ऐश्वर्या जब नौकरी जौइन करने पहुंची तो कंपनी की भव्यता देख दंग रह गई. बैंगलुरु के आई टी हब में एक मल्टी स्टोरी बिल्डिंग की छठी मंजिल पर कंपनी का शानदार औफिस था.

सुबह 10 बजे कंपनी के सभी कर्मचारी मिनी औडिटोरियम में 15 मिनट तक मैडिटेशन करते उस के बाद अपनेअपने कार्यस्थल पर चले जाते. जूनियर कर्मचारियों के लिए हाल में छोटेछोटे क्यूबिकल्स बने थे, जबकि मैनेजर और ऊपर के अधिकारियों के लिए कैबिनों की व्यवस्था थी. किंतु सभी क्यूबिकल्स और कैबिनों की साजसज्जा एक ही तरह की थी, जिस से कंपनी का ऐश्वर्य झलकता था.

ऐश्वर्या की नियुक्ति प्रोजैक्ट मैनेजर सुशांत की टीम में हुई थी. उस की गिनती कंपनी के प्रमुख अधिकारियों में होती थी. अपनी काबिलीयत के बल पर उस ने बहुत तेजी से तरक्की की थी.

पहले ही दिन उस ने ऐश्वर्या का स्वागत करते हुए कहा, ‘‘ऐश्वर्याजी, मेरी टीम कंपनी की लीड टीम है. कंपनी के सब से महत्त्वपूर्ण प्रोजैक्ट हमारी टीम को ही मिलते हैं. मुझे विश्वास है कि आप के आने से हमारी टीम और मजबूत होगी.’’

‘‘सर, मैं आप की अपेक्षाओं पर खरी उतरने की पूरी कोशिश करूंगी,’’ ऐश्वर्या के चेहरे से भरपूर आत्मविश्वास झलक उठा.

सुशांत ने सच ही कहा था. कंपनी के सब से महत्त्वपूर्ण प्रोजैक्ट उस की टीम को ही

मिलते थे, इसलिए सभी को दूसरों की अपेक्षा मेहनत भी ज्यादा करनी पड़ती थी. देखते ही देखते पहला महीना बीत गया. ऐश्वर्या को ज्यादा काम नहीं दिया गया. इस बीच वह काम को समझतीसीखती रही.

पहली तनख्वाह मिलने पर उस ने पूरे 25 हजार की खरीदारी कर डाली और फिर हवाईजहाज से लखनऊ पहुंच गई.

‘‘मम्मी, यह देखिए बैंगलौरी सिल्क की साड़ी और पशमीना शाल दोनों आप पर बहुत खिलेंगी,’’ ऐश्वर्या ने मम्मी के कंधों पर साड़ी रखते हुए कहा.

साड़ी और शाल वास्तव में बहुत खूबसूरत थी. मम्मी का चेहरा खिल उठा.

‘‘पापा, आप के लिए गरम सूट और घड़ी,’’ कह ऐश्वर्या ने 2 पैकेट पापा की ओर बढाए.

सूट पापा के मनपसंद रंग का था और घड़ी भी बहुत खूबसूरत थी. पापा का चेहरा भी खिल उठा.

‘‘तुम ने कितने की खरीदारी कर डाली?’’ मम्मी ने पूछा.

‘‘ज्यादा नहीं, सिर्फ 25 हजार की,’’ ऐश्वर्या मुसकराई.

सुन मम्मी की आंखें फैल गईं, ‘‘अब पूरे महीने का खर्चा कैसे चलाओगी?’’

‘‘जैसे पहले चलाती थी. पापा जिंदाबाद,’’ ऐश्वर्र्या खिलखिला पड़ी.

‘‘हांहां क्यों नहीं. अभी मेरे रिटायरमैंट में6 महीने बाकी हैं. तब तक तो अपनी  लाडली का खर्चा उठा ही सकता हूं,’’ पापा ने भी ठहाका लगाया.

2 दिन बाद ऐश्वर्या बैंगलुरु  लौट गई. अगले दिन लंच के बाद उस के सीनियर ने उसे एक टास्क दिया, जिसे पूरा करतेकरते 7 बज गए, लेकिन टास्क पूरा नहीं हुआ. कंपनी के ज्यादातर कर्मचारी चले गए थे, पर ऐश्वर्या अपने काम में जुटी रही. जानती थी कि यह काम आज ही पूरा होना जरूरी है.

‘‘मैडम, आप अभी तक घर नहीं गईं?’’ अपने चैंबर से निकलते सुशांत की नजर उस पर पड़ी.

‘‘सर, एक छोटा सा टास्क था, जो पूरा नहीं हो पाया. लेकिन मैं कर लूंगी.’’

‘‘लाइए मैं देखता हूं क्या है?’’ सुशांत ने कहा.

ऐश्वर्या कंप्यूटर के सामने से हट गई. सुशांत ने चंद पलों तक स्क्रीन पर खुले प्रोग्राम

को देखा, फिर उस की उंगलियां तेजी से कीबोर्ड पर चलने लगीं.

करीब 5 मिनट बाद सुशांत मुसकराया, ‘‘लीजिए आप का टास्क पूरा हो गया.’’

जिस काम को ऐश्वर्या कई घंटों से नहीं कर पा रही थी उसे सुशांत ने 5 मिनट में ही पूरा कर दिया. ऐश्वर्या उस की प्रतिभा की कायल हो गई.

‘‘थैंक्यू सर,’’ ऐश्वर्र्या ने कृतज्ञता प्रकट की.

‘‘इस की जरूरत नहीं,’’ सुशांत हलका सा मुसकराया, ‘‘थैंक्स के बदले क्या आप मेरे साथ 1 कप कौफी पीना चाहेंगी?’’

ऐश्वर्या भी काफी थक गई थी. उसे भी कौफी या चाय की जरूरत महसूस हो रही थी, इसलिए उस ने हामी भर दी.

सुशांत उसे एक महंगे रैस्टोरैंट में ले गया. वहां हाल के साथसाथ टैरेस में भी बैठने की व्यवस्था थी. सुशांत सीधे टैरेस में आ गया. वहां अपेक्षाकृत भीड़ कम थी और शांति भी थी. टैरेस से बाहर के दृश्य बहुत खूबसूरत नजर आ रहे थे. शहर की जगमगाती लाइटें देख कर लग रहा था जैसे सितारे जमीं पर उतर आए हों.

‘‘ऐश्वर्याजी, कंपनी की तरफ से 2 इंजीनियर 1 साल के लिए अमेरिका भेजे जा रहे हैं. आप ने उस के लिए आवेदन क्यों नहीं दिया? कौफी की चुसकियां लेते हुए सुशांत ने पूछा.’’

‘‘सर, मैं बिलकुल नई हूं, इसलिए आवेदन नहीं किया.’’

‘‘बात नए या पुराने की नहीं है. बात प्रतिभा की है और इस मामले में आप किसी से कम नहीं हैं. आप को आवेदन करना चाहिए. 3 लाख प्रति माह के साथसाथ कंपनी की तरफ से बोनस भी मिलेगा. 1 साल बाद जब लौटेंगी तो आप की मार्केट वैल्यू काफी बढ़ चुकी होगी,’’ सुशांत ने समझाया.

‘‘लेकिन सर, मैं बहुत जूनियर हूं. क्या मेरा चयन हो पाएगा?’’

‘‘उस की चिंता छोडि़ए. यह प्रोजैक्ट मेरा है. कौन अमेरिका जाएगा और कौन नहीं, इस का फैसला मुझे ही करना है.’’

ऐश्वर्या सोच में पड़ गई. वह तत्काल कोई निर्णय नहीं ले पा रही थी.

तब सुशांत ने कहा, ‘‘कोई जल्दी नहीं है. आप अच्छी तरह सोच लीजिए. कल शाम हम फिर यहीं मिलेंगे. तब आप अपना फैसला सुना दीजिएगा.’’

Adipurush: मेकर्स ने बदले डायलॉग, ‘जलेगी तेरे बाप की’ की जगह अब होंगे ये शब्द

प्रभास, कृति सेनॉन और सैफ अली खान स्टारर ‘आदिपुरुष’ (Adipurush) फिल्म 16 जून को काफी लंबे अरसे के बाद बड़े स्क्रीन पर रिलीज हो गई है. जब से आदिपुरुष मूवी रिलीज हुई तभी से विवादो में आ गई है. दरअसल, ‘आदिपुरुष’ (Adipurush) के डायलॉग्स को लेकर जमकर बवाल हो रहा है.

मनोज शुक्ला मुंतशिर हुए ट्रोल

फिल्म निदर्शक ओम राउत की ‘आदिपुरुष’ फिल्म में हनुमान ने लंका दहन के दौरान एक डायलॉग बोला था, ‘कपड़ा तेरे बाप का, तेल तेरे बाप का, आग तेरे बाप की और जलेगी भी तेरे बाप की.’

फिल्म में इस डायलॉग को सुनकर दर्शक बुरी तरह से भड़क गए थे. यहां तक कि लोगों को ‘आदिपुरुष’ के राइटर मनोज शुक्ला मुंतशिर को काफी खरी- खोटी सुनाई. ‘आदिपुरुष’ को लेकर दर्शकों की इस प्रतिक्रिया को देख मेकर्स ने फिल्म के डायलॉग्स के कुछ विवादित डायलॉग्स को बदलने का फैसला लिया था. मनोज शुक्ला मुंतशिर ने दावा किया गया था कि एक हफ्ते के भीतर हनुमान  और रावण द्वारा बोले गए इन आपत्तिजनक डायलॉग्स को बदल दिया जाएगा. अब ‘आदिपुरुष’ के इन डायलॉग्स को बदल दिया गया है.

‘आदिपुरुष’ के बादल गए डायलॉग्स

सोशल मीडिया पर ‘आदिपुरुष’ की वीडियो क्लिप जमकर वायरल हो रहे है. जिसमें देखा जा सकता है कि हनुमान  की पूंछ में आग लगी है और वह मेघनाद से कह रहे हैं, “कपड़ा तेरी लंका का, तेल तेरी लंका का, आग भी तेरी लंका की, जलेगी भी तेरी लंका ही.”

लेकिन वीडियो में देखा जा सकता है कि भले ही फिल्म का डायलॉग बदल गया हो लेकिन हनुमान  की लिपसिंग में अभी भी मैंच नहीं हो रही ऐसे लग रहा है हनुमान जी, ‘बाप’ ही बोल रहे हो. ऐसे में देखना होगा कि ‘आदिपुरुष’ के ये बदले हुए डायलॉग्स दर्शकों को खुश कर पाते हैं या फिर नहीं?

मनोज शुक्ला मुंतशिर ने दी सफाई

मनोज मुंतशिर ने ‘आदिपुरुष’ के डायलॉग्स को लेकर कहा कि, “यह कोई गलती नहीं थी. बजरंगबली और सभी पात्रों के लिए ये डायलॉग्स बहुत ही सोच- समझकर लिखे गए थे. हमने केवल इसे सरल बनाया था क्योंकि हमें एक बात समझनी होगी अगर किसी फिल्म में कई किरदार हैं तो सभी की भाषा एक जैसी नहीं हो सकती.” इसके अलावा मनोज मुंतशिर ने यह भी कहा था कि उन्होंने बेहद ही पवित्रता के साथ इस फिल्म के डायलॉग्स लिखे हैं.

Monsoon special: आज ही खरीदें ट्रेंडी और शानदार फैशनेबल कुर्ती

Monsoon season आने वाला है. Monsoon सीजन में कपड़ो की शॉपिंग करना बेहद जरूरी होता है. आमतौर पर महिलाओं को काफी टेंशन होती है किस तरह के कपड़े खरीदें. चिंतन करना छोड़िए, आज हम आपको बताएंगे Monsoon सीजन के फैशनेबल कुर्ता कैसे से खरीदें. ऑफिस से लेकर पार्टी तक, आप ये फैशनेबल कुर्ता पहन सकते हैं. आप शॉपिंग एप  के जरिए Monsoon सीजन के ट्रेंडी और फैशनेबल कुर्ती खरीद सकते है.

  1. कॉटन प्रिंटेड स्ट्रेट कुर्ती

महिलाओं के लिए कॉटन प्रिंटेड फ्लोरल स्ट्रेट कुर्ती Monsson के लिए के सबसे बेहतरीन ऑपशन है.  कुर्ती  इसमें खूबसूरत फ्लोरल प्रिंट है. यह कुर्ती आपको शॉपिंग एप पर मिल जाएगी.

2.शिफॉन की कुर्ती

अगर आप बारिश के मौसम में शिफॉन का कपड़ा पहनेंगे तो आपको काफी आसानी होगी. दरअसल, बारिश में कपड़ा जल्दी सूखता नहीं है, पर अगर आपका आउटफिट शिफॉन फैब्रिक का होगा तो ये थोड़ी सी हवा से भी सूख जाएगा. ऐसे में महिलाओं के लिए शिफॉन की कुर्ती बेस्ट रहेगी. आपको शॉपिंग एप पर कई सारी शिफॉन की कुर्ती मिल जाएगी.

3. नाइलॉन 

बारिश के मौसम में नाइलॉन कपड़ा बेस्ट होता है. ऐसे में आप Monsoon सीजन के फैशनेबल नाइलॉन कुर्ती पहन सकते है. यह बहुत जल्दी सूखता है. इसको पहनते वक्त बस इस बात का ध्यान रखें कि ये ज्यादा टाइट ना हों, वरना स्किन से जुड़ी परेशानियां सामने आ सकती हैं.

4. फ्लोरल प्रिंट कुर्ती

बरसात के मौसम के लिए अगर आप परफेक्ट प्रिंट की तलाश कर रहे हैं, तो फ्लोरल प्रिंट आपके लिए परफेक्ट ऑप्शन बन सकता है. ऐसे में आप Monsoon सीजन में फ्लोरल प्रिंट  कुर्ती पहन सकते है. ये आपको ट्रेंडी और फैशनेबल लुक देगा.

5.टाइट कपड़ों से रहें दूर

बरसात के मौसम में ध्यान रखें, कभी ज्यादा टाइट कपड़े नहीं पहनने चाहिए. भीगने के बाद ये शरीर से चिपक जाते हैं जो काफी अजीब लगते हैं. इसीलिए बरसात के मौसम  में टाइट कपड़े पहनने से बचे.

अनुपमा को लगी चोट तो अनुज ने उठाया गोद में, माया हुई गुस्से से बेहाल

रुपाली गांगुली और गौरव खन्ना स्टारर ‘अनुपमा’ लंबे समय से टीआरपी पर नंबर वन बना हुआ है. दर्शको के बीच ‘अनुपमा’ की खासी दिवानगी दिखी जा सकती है. शो के मेकर्स आए दिन ‘अनुपमा’ में तड़का डालते रहते है. टीवी सीरियल ‘अनुपमा’ के मेकर्स शो के नंबर वन बने रहने के लिए नए-नए ट्विस्ट और टर्न्स लेकर आते ही रहते है. ‘अनुपमा’ में के अपकमिंग एपिसोड में देखने को मिलेगा कि अनुपमा को लगी चोट, वहीं माया का गुस्सा विक्रराल रूप ले लेता है. इसके साथ ही  ‘अनुपमा’ शो में पाखी कपाड़िया हाउस में अनुपमा के लिए फेयरवेल पार्टी का आयोजन के लिए किंजल को फोन पर बताती है.

अनुपमा को लगी चोट

टीवी सीरियल ‘अनुपमा’ में के अपकमिंग एपिसोड में दर्शको देखने को मिलेगा कि अनुपमा मार्किट जाती है वहां वह अनुज से टकरा जाती है. अनुज अनुपमा से पूछता है, ये चोट तुम्हें कैसे लगी. ‘अनुपमा’ के न्यु प्रोमो में देखने को मिला कि अनुपमा के चोट लगी होती है तो अनुज अनुपमा को गोद में उठा लिया.

माया का दिखा रूद्र रूप

टीवी सीरियल ‘अनुपमा’ के नए प्रोमो में देखने को मिला कि माया गुस्से में बेहाल हो जाती है. माया किचन में होती है और वह किचन में आटा गूंथने के समय अपना सारा गुस्सा निकाल रही है. माया गुस्से में पागल हो जाती है.

फेयरवेल पार्टी का प्लान करती पाखी

‘अनुपमा’ में मनोंरंजन का डोज यहीं खत्म नहीं होता. शो के मेकर्स शो मे नए-नए ट्विस्ट लेकर आते ही रहते है. टीवी सीरियल ‘अनुपमा’ के अपकमिंग एपिसोड में देखने को मिलेगा कि पाखी किंजल को फोन करती है वह किंजल से कहती है कि अनुपमा के लिए फेयरवेल पार्टी का आयोजन के लिए कहती है, किंजल बा को बताती है. इस पर बा कहती है उसका दिमाग खराब है. उस कपाड़िया हाउस में पागल औरत रहती है. अनुपमा वहां क्यों जाएगी?

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