इन 6 स्मार्ट स्ट्रैटेजीज से बढ़ाएं अपनी वर्क परफॉरमेंस

हमारा काम यानी जॉब, हमारी लाइफ का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है. हम अपने दिन का अधिकतर समय अपने वर्कप्लेस में गुजारते हैं. बात चाहे नौकरी में प्रमोशन की हो या प्रोडक्टिविटी को बढ़ाने की, वर्कप्लेस में सफलता की एक ही कुंजी है और वो है इफेक्टिव स्ट्रेटजीज को बनाना. कम्युनिकेशन स्किल्स को इम्प्रूव करने से लेकर अच्छी फीडबैक पाने तक कुछ स्मार्ट स्ट्रैटिजिज से आप अपनी वर्क परफॉरमेंस को बढ़ा सकते हैं. आइए जानते हैं इन स्ट्रैटिजिज के बारे में.

वर्क परफॉरमेंस बढ़ाने के लिए स्मार्ट स्ट्रैटिजिज

कुछ स्मार्ट स्ट्रैटिजिज बनाने से आप अपने वर्कप्लेस में टॉप परफॉर्मर बन सकते हैं, जिससे न केवल आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा बल्कि आपके जीवन में भी सुधार होगा. इसके लिए परसिस्टेंट व प्रेरित रहें और जिज्ञासु बनें. जानें इन स्मार्ट स्ट्रैटिजिज के बारे में:

  1. क्लियर गोल सेट करें

क्लियर गोल को सेट करने से आप अपना फोकस बढ़ा सकते हैं और मोटिवेट रह सकते हैं. लेकिन, इस बात का ध्यान रखें कि यह गोल स्पेसिफिक, रिलेवेंट और प्राप्त करने योग्य हों. इससे आप ट्रैक पर रह सकते हैं और वो सब अचीव कर सकते हैं, जो आप चाहते हैं.

2. फीडबैक से सीखे

फीडबैक परफॉरमेंस को सुधारने का एक बेहतरीन टूल है. नियमित रूप से अपने सहकर्मियों या सुपरवाइजर से अपने काम को लेकर फीडबैक लें. इससे आप अपनी स्ट्रेंथ्स और वीकनेस को भी पहचान पाएंगे और बेहतर तरीके से काम करेंगे.

3. कम्युनिकेशन स्किल को सुधारें

स्ट्रांग कम्युनिकेशन स्किल वर्कप्लेस पर सफलता के लिए बहुत जरूरी है. इस बात को सुनिश्चित करें कि आप अपने वर्बल एंड रिटन कम्युनिकेशन्स में क्लियर हों. इसके अलावा, दूसरों की बात सुनें और उन्हें उनकी समस्याओं को रिजॉल्व करने की भी कोशिश करें.

4.अपना ख्याल रखें

अपनी परफॉरमेंस को सही रखने के लिए अपनी खास देखभाल करना जरूरी है. इस बात का ध्यान रखें कि आप पर्याप्त रेस्ट करें, हेल्दी डाइट लें, नियमित रूप से व्यायाम करें और जरूरत पड़ने पर ब्रेक अवश्य लें.

5. नई चीजें सीखना न भूलें

नए स्किल्स और नॉलेज से आप न केवल अपना ज्ञान बढ़ाएंगे बल्कि अपनी जॉब में और भी अच्छा कर पाएंगे. ट्रेनिंग सेशंस में भाग लें, किताबें और लेख पढ़ें और अपने क्षेत्र के विशेषज्ञों से सीखने के अवसर तलाशें.

6. सकारात्मक रहें

पॉजिटिव एटीट्यूड से आप अपनी प्रोडक्टिविटी और परफॉरमेंस को बढ़ा सकते हैं. सकारात्मकता पर ध्यान केंद्रित करें, ग्रोथ माइंडसेट को विकसित करें और अपनी उपलब्धियों का सेलेब्रेट करें. इन सब बातों को ध्यान में रखने से आप एक दिन वो सब पा लेंगे, जिन चीजों को आप डिजर्व करते हैं.

अपने हुनर से हराएं अकेलापन

अपने जीवन के 55 वसंत देख चुकी नीता आंटी आजकल अपने अकेलेपन से परेशान हैं. वजह बच्चे अपनी जौब के कारण उन से दूर दूसरे शहर में हैं. पति अपनी जौब की जिम्मेदारियों के कारण उन्हें प्रौपर समय नहीं दे पा रहे हैं. बेचारी नीता आंटी करें तो क्या करें.

अब इस उम्र में नीता आंटी कोई नई जौब तो नहीं कर सकतीं. खाली समय में उन्हें अकेलापन काटने को दौड़ता. यह स्थिति आज की इस व्यस्त जीवनशैली में कई गृहिणियों की हो गई है. शुरू में वे घर व बच्चों की जिम्मेदारियों को निभाने के कारण जौब नहीं कर पाती हैं. बाद में जिम्मदारियों के पूरा हो जाने के बाद अपने जीवन में खालीपन सा महसूस करती हैं.

अब वे अपने इस अकेलेपन को दूर करने में स्वयं को असहज पाती हैं. वे सम?ा नहीं पाती हैं कि आखिर करें तो क्या करें. बहुत कम महिलाएं अपनी जीवन के इस मोड़ पर एक नई शुरुआत के बारे में सोचती हैं. उन्हें लगता है कि अब तो जीवन की सांध्य बेला हो चली है, अब क्या किया जा सकता है. अब क्या करना कुछ नया कर के.

प्रकृति हर इंसान को किसी न किसी हुनर के साथ इस दुनिया में भेजती है. आवश्यकता बस अपने उस हुनर को पहचानने की होती है. हमारे आसपास ऐसे कई उदाहरण मिल जाएंगे. हमें उन से प्रेरणा लेने की आवश्यकता भर होती है. इस बात को अकसर सत्य कर दिखाया कुमारी दीपशिखा ने. वे एक गृहिणी होने के साथसाथ पिछले 10 वर्षों से अपना खुद का सिलाई संस्थान भी चला रही हैं. वे अपने घर के एक कमरे में युवतियों व महिलाओं को सिलाई का काम सिखाती हैं. इस से उन्हें बेहद खुशी मिलती है. उन का कहना है कि हम महिलाएं अपना सारा जीवन घर को संवारने में लगा देते हैं. अपना ध्यान ही नहीं रहता. जबकि हमें भी अपने शौक व हुनर को सामने लाना चाहिए. वैसे भी आज जमाना आत्मनिर्भरता का है.

पहचानें अपना हुनर

महिलाएं तो हुनर की शान होती हैं. किसी में गायन, तो किसी में वाद्ययंत्रों को बजाने की कला, तो कोई कुकिंग में ऐक्सपर्ट होती है. किसी में चित्रकला भरी होती है, किसी का लेखन उत्कृष्ट होता है तो कोई मेहंदी डिजाइनिंग में ऐक्सपर्ट होती है. अत: अपने अकेलेपन को कहें बायबाय और अपने हुनर को पहचान कर उसे निखारें.

हिचकिचाहट दूर करें

अपने हुनर की शुरुआत को ले कर मन में आ रही हर हिचकिचाहट को दूर करें. हो सकता है कि आप को पहली बार में सफलता न मिले या फिर लोग मजाक उड़ाएं. लेकिन इन सब को नजरअंदाज करना सीखें, जिस भी काम को करने की आप ने ठानी हो, उसे पूरे दिल से करें. इस से होगा यह कि आज जो आप का उपहास उड़ा रहे हैं कल वही सफलता मिलने पर आप की तारीफ भी करेंगे.

निशु श्रीवास्तव को सिलाई का जबरदस्त शौक था. लेकिन अपने शौक के लिए वे समय नहीं निकाल पा रही थीं. फिर जब बच्चे आए तो यों ही उन के कपड़े सिलने का विचार आया. जब बच्चों को मम्मी के हाथों बने कपड़े सुंदर लगे तो उन की सोच बदल गई. आज वे अपने खाली समय में अपना हुनर आजमाती हैं.

अपडेट करती रहें स्किल्स

आप ने अपनी पसंद और हुनर का जो भी काम शुरू किया है, उसे आज के समय के हिसाब से अपडेट करती रहें क्योंकि आप ने यह सब सालों पहले सीखा था. आज उस में थोड़ा बदलाव कर सकती हैं.

इस तकनीकी युग में अपनी कला को थोड़ा तकनीकी टच भी दें. यूट्यूब और गूगल पर हर कला से संबंधित अनेक वीडियोज और जानकारी भरी पड़ी रहती है. उस की मदद से अपनी कला को निखारें.

नजर खुली रखें

आज ड्राइंग, कुकिंग, होम डैकोर यानी हर कला की बाजार में मांग है. बस जरूरत है एक खुली नजर की. हमारे आसपास उस कला से रिलेटेड कई विशेषज्ञ भी मौजूद हैं. उन से काउंसलिंग लें. ऐसे कई लोग हैं जिन्होंने बिना किसी विश्वविद्यालीय डिगरी के सफलता का परचम लहराया है. इसलिए पूरे आत्मविश्वास के साथ अपना कदम बढ़ाएं. आज यह जरूरी है कि आप अपने बारे में भी सोचें. अपनी पसंद का काम चुनें. क्या पता आप का हुनर आप को नई पहचान दे दे. इसलिए अपने हुनर को आजमाएं. इस से आपका अकेलापन तो दूर होगा ही आप में आत्मविश्वास भी कई गुना बढ़ जाएगा. आमदानी अलग से होगी.

सिर्फ तुम: भाग 1- जब प्यार बन गया नासूर

‘‘यह   भी कोई जीना है, न खुल कर बोल सकते हैं, न हंस सकते हैं और न ही कहीं घूम सकते हैं,’’ रोजरोज की घुटन से तंग आ कर आखिर मोनिका फट ही पड़ी.

‘‘यही तो परिवार है, जहां सब के लिए जगह है, प्यार है. जिन्होंने हमें योग्य बनाया, उन के लिए भी तो हमारे कुछ दायित्व हैं,’’ अनुपम ने उसे समझना चाहा.

‘‘अब वह जमाना नहीं रहा अनु, आज हर परिवार इस बात को अच्छी तरह समझता है कि पतिपत्नी को अपने मनमुताबिक जीवन जीने का अधिकार है और तुम हो कि अपनेआप बड़प्पन का बोझ ओड़े पड़े हो… इस घुटनभरे घर में तो सारे सपने बिखर गए मेरे…’’ मोनिका की भृकुटियां तन गईं.

‘‘मुझे नहीं मालूम था कि तुम इस तरह के सपने पाले बैठी थीं.’’

‘‘मुझे भी नहीं पता था कि तुम्हारे साथ अपना जीवन बरबाद करने जा रही हूं.’’

प्रेम विवाह से आह्लादित मोनिका पति के प्यार में खुल कर जीना चाहती थी, लेकिन परिवार में ऐसी स्वतंत्रता के लिए जगह नहीं थी. कुछ दिनों तक उस ने दबी आवाज में अपना दुख व्यक्त किया, लेकिन जब अनुपम ने उस की बात को गंभीरता से नहीं लिया तो उस के सब्र का बांध टूटना ही था, सो टूट गया. उस दिन से दोनों के बीच संबंधों में शिथिलता आ गई. दोनों बात तो करते लेकिन उस में औपचारिकता ने घर बना लिया था.

दीपावली की छुट्टियां पड़ीं तो मोनिका अपने मायके जाने की जिद करने लगी. घर वाले चाहते थे, बहू उन के पास रहे. अनुपम ने भी समझया, लेकिन वह नहीं मानी. इस से आगे बढ़ कर उस ने अनुपम को भी मायके में दीपावली मनाने को कहा. अनुपम को यह व्यवहार कांटे जैसा लगा, लेकिन विवाद से बचने के लिए थोड़ी नानुकुर के बाद उस ने समर्पण कर दिया. अपने घर वालों को उस ने यह सांत्वना दे कर मनाया कि एक दिन बाद आ जाएगा. अम्मांबाबूजी और छोटे भाईबहनों के चेहरों पर उपजी वेदना को महसूस कर के वह मर्माहत हो उठा था.

अनुपम मोनिका के साथ गया पर दुखी मन से. वह कुपित था उस के ढीठ व्यवहार पर. दूसरे दिन सासससुर ने भी उसे अघोषित रूप में समझना शुरू कर दिया, ‘‘बेटा, कुछ अपने होने वाले परिवार के बारे में भी सोचो, कल को बच्चे होंगे, उन की शिक्षा, कैरियर सब देखना होगा. बेहतर हो तो अलग घर ले लो. छोटे घर में कैसे गुजर होगी. दोनों कमाते हो, कोई आर्थिक परेशानी तो है नहीं…’’ आदिआदि.

अनुपम बुझे मन से हांहूं करता रहा. लेकिन यह बात उसे चुभ गई कि

मोनिका ने अपने मातापिता के माध्यम से यह नया जाल फेंका. वह लौटना चाहता था, मगर मोनिका ने कुछ प्यार की अल्हड़बाजी और कुछ रूठनेमनाने के बहाने कुछ दिन और रुकने का अड़ंगा लगा दिया. वह दोहरे तनाव में फंस गया. घर से अम्मांबाबूजी और बहनभाई के फोन पर फोन आ रहे थे और इधर मोनिका उसे अपने पल्लू से बांधे पड़ी थी. वह घर वालों से बहाने बनातेबनाते थक गया. पूरी छुट्टियां खत्म होने के बाद ही दोनों लौटे.

घर आते ही स्थिति पहले से ज्यादा तनावपूर्ण हो गई. घर वालों की कुपित मुखमुद्रा और अघोषित टीकाटिप्पणी ने मोनिका के माथे पर आक्रोश की रेखाएं खींच दीं. अनुपम तो पहले से ही खिन्नता से भरा हुआ था. मोनिका के घर वालों ने अलग होने के लिए जो पट्टी उसे पढ़ाई थी, उस का प्रभाव भी कुछ दिनों बाद दोनों पतिपत्नी के संबंधों पर पड़ने लगा. उस को ले कर दोनों के बीच हो रहे वाक्युद्ध की जानकारी जब अनुपम के घर वालों के कानों तक पहुंची तो रविवार की छुट्टी के दिन अच्छाखासा बखेड़ा हो गया.

‘‘हमारे यहां शुरू से ही सारी बहुएं घर में ही रहती आई हैं. अलग होने के संस्कार नहीं हैं हमारे,’’ अम्मां ने मोरचा संभाल लिया.

‘‘अब समय बदल गया है, पहले जैसी बातें नहीं थोपी जा सकतीं,’’ मोनिका ने अम्मां की बात को काटा तो अनुपम की भौंहें तन गईं. उस ने मोनिका को सम?ाना चाहा, लेकिन विवाद और तर्कों का सिलसिला थमने के बजाय और बढ़ता गया.

इस पर मोनिका ने अपने मायके में फोन कर के आग में घी डालने का काम कर डाला. कुछ देर में उस के मम्मीपापा भी आ धमके. जैसी मोनिका वैसे ही उस के घर वाले. पापा तो चुप रहे, लेकिन मम्मी ने अनुपम और उस के परिवार वालों को काफी खरीखोटी सुना डाली.

मामला शांत होने पर मोनिका के मम्मीपापा तो चले गए, लेकिन अनुपम के अंदर अपमान की ग्रंथि भर गए. इस घटना से अनुपम और मोनिका के बीच संबंधों में आई तनातनी एवं टूटन और बढ़ गई. इस से मुक्ति पाने और मोनिका के लगातार जिद पकड़े रहने पर अनुपम ने अलग रहने पर सहमति दे दी, हालांकि वह स्वयं और उस का परिवार इस के पक्ष में कतई नहीं था. कालेज के परिसर में कोई क्वार्टर खाली नहीं था, इसलिए पास में ही एक मकान किराए पर ले कर दोनों उस में शिफ्ट हो गए.

मोनिका अपनी इस जीत पर अंदर ही अंदर जश्न मना रही थी. उस ने सोचा, अब अपने लटकों झटकों से अनुपम की सारी नाराजगी दूर कर देगी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं क्योंकि अनुपम के अंदर मोनिका के सामने विवश हो कर झुकने और स्वयं एवं परिवार को अपमानित किए जाने का कांटा लगातार चुभ रहा था. इस के प्रतिकार में उस ने मोनिका के परिवार से संबंध औपचारिक स्तर तक सीमित कर लिए. जब कभी मोनिका के परिवार के लोग आते तो वह उन में कोई रुचि नहीं लेता. ऐसे अवसरों पर अकसर वह घर से बाहर चला जाता और बहुत देर बाद लौटता.

अनुपम के इस व्यवहार के कारण मोनिका के अंदर भी अपमान का जहर भरने लगा. इस की परिणति पहले हलकी बहस, फिर आरोपों के तीखे वाण और फिर कई दिनों के लिए संवादहीनता के रूप में होने लगी. उन के बीच ऐसा परिवेश निर्मित हो गया, जिस में 2 व्यक्ति साथ तो रह रहे थे, लेकिन दोनों अकेले. घरेलू जरूरतों के लिएज़्ज्यादातर अनुमान और आभास का सहारा, संवादहीनता से उपजी असहनीय त्रासदी.

दोनों के बीच चल रही तनातनी के बीच बच्चे की पैदाइश भी टाल दी गई. यह कैसी स्थिति आ गई थी घर में, इस की तो कल्पना तक नहीं की थी. धीरेधीरे दोनों के अंदर विवाह को ले कर पश्चात्ताप ने घर बनाना शुरू कर दिया. इस से मुक्ति पाने के लिए वे कल्पनाओं में वैकल्पिक दिवास्वप्न देखने लगे- काश, किसी और से विवाह करते तो यह त्रासदी नहीं सहनी पड़ती.

व्यक्ति के अंदर नैसर्गिक भावनाओं की पूर्ति का प्रवाह हमेशा बना रहता है. मोनिका और अनुपम भी इस से अलग नहीं थे. समय बीतने के साथ संवादहीनता की स्थिति ने अनुपम और मोनिका के अंदर अपनी भावनाओं को किसी दूसरे व्यक्ति के साथ शेयर करने की भूख बढ़ा दी.

घर की नीरवता से दम घुटने लगा तो अनुपम अपनी साथी प्रोफैसर प्रेरणा की ओर आकर्षित होने लगा. कंचन काया और सौंदर्य से परिपूरित प्रेरणा ने कुछ माह पूर्व ही जौइन किया था. अनुपम उस की ओर खिंचा जा रहा था, लेकिन प्रेरणा को तो जैसे कोई मतलब ही नहीं था. वह सामान्य संबंधों तक ही सीमित रही. इस से अनुपम के अंदर प्रेरणा से प्रेम पाने के लिए बेचैनी और बढ़ती गई. वह उस के प्रेमसागर में डूब जाने के लिए तरहतरह के प्रयास करने लगा, लेकिन प्रेरणा ने उसे उपेक्षित ही बनाए रखा.कारण, वह पहले से ही किसी के प्रेमपाश में बंधी हुई थी. उसे छोड़ कर एक विवाहित आदमी से क्यों जुड़ती?

अनुपम इस से अनभिज्ञ था. ऐसे में वह दोहरी वेदना से भरे द्वंद्व में फंसा. पत्नी दूर हो चुकी थी और प्रेमिका पास नहीं आ रही थी. तो क्या सारा जीवन ऐसे ही रिक्तता में बीत जाएगा, यह प्रश्न रहरह कर उस के मन में उभरने लगा.

Cannes 2023: साड़ी में सारा का कातिलना अंदाज, मृणाल ठाकुर ने पहनी मोनोकिनी

76 वे Cannes Film Festival का आगज बीते मंगलवार को हो गया है. इंटरनेशनल Cannes Festival का फ्रेंच रिवेरा में आगज हो गया है. रेड कार्पेट पर सितारों ने आपना जलवा दिखाया है. पहले ही दिन बॉलीवुड एक्ट्रेस सारा अली खान ने रेड कार्पेट पर डेब्यू किया था. सारा ने Cannes 2023 में देशी अवतार में धांसू एंट्री की थी. रेड कार्पेट पर सारा अली खान ब्राइडल लुक में नजर आई थी. Cannes Film Festival के दूसरे दिन सारा अली खान देशी अंदाज में नजर आई है. सारा ने अपनी एक बार अपनी कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर की हैं जिन्हें लोग पसंद कर रहे हैं. सारा अली खान के फैंस उनकी खूबसूरती के साथ ही उनकी ड्रेस को भी पंसद कर रहे हैं. सारा अली खान के शेयर करते ही उनकी तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही है.

सारा ने शेयर की तस्वीर

सारा ने अपने इस्टाग्राम पर कुछ तस्वीरें शेयर की है जिसमे वह बहुत खूबसूरत लग रही है. सारा अली खान की ये तस्वीरें Cannes Film Festival के दूसरे दिन की हैं. सारा ने एकदम नए अंदाज में साड़ी पहनी है. सारा अली खान ने डिजाइनर अबू जानी संदीप खोसला की डिजाइन की गई साड़ी पहनी है.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by CineRiser (@cineriserofficial)

मृणाल ठाकुर ने मोनेकिनी में दिखाया बोल्ड अवतार

एक्ट्रेस मृणाल ठाकुर ने Cannes Film Festival में डेब्यू किया है. मृणाल की तस्वीरें सोशल मीडिया पर छाई हुई है. मृणाल ने कान फेस्टिवल में ब्लैक मोनोकिनी पहने और ऊपर से जैट शाइन ब्लैक कलर का ओवर कोट पहने दिखाई दीं. एक्ट्रेस इस ड्रेस में काफी सिजलिंग लग रही थीं.  मृणाल की हॉट तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है. इसके साथ ही मृणाल ठाकुर ने अपनी तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर की है. एक्ट्रेस की इन फोटो पर तरह-तरह के कमेंट आ रहे है. ब्लैक मोनोकिनी में देखकर यूजर ने कहा सुंदरी तो किसी ने कहा-काली मैना. तो किसी ने एक्ट्रेस के ड्रेस की ट्रान्सपेरेंसी पर कमेंट किया.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Filmibeat (@filmibeatofficial)

 

मेरा मसकारा सूख गया है, मैं इसे कैसे इस्तेमाल कर सकती हूं?

सवाल

मैं अपनी आईलैशेज को कर्ल और ब्यूटीफाई करने के लिए मसकारा का इस्तेमाल करती हूं, लेकिन मेरा मसकारा बहुत पुराना तो नहीं है मगर सूख गया है. अभी उस में काफी मसकारा रहता है. मैं उस को किस तरह से फिर से इस्तेमाल कर सकती हूं?

जवाब

आप अपने मसकारा के अंदर थोड़ा सा आईलैंस सौल्यूशन जोकि लैंस लगाते वक्त इस्तेमाल होता है मसकारा में डाल दें. इस से मसकारा गीला हो जाएगा और आप उसे दोबारा इस्तेमाल कर पाएंगे. मगर ध्यान रखें कि मसकारा को इस्तेमाल करते वक्त ब्रश को बारबार पंप करना नहीं चाहिए. इस से मसकारा जल्दी सूख जाता है क्योंकि हवा अंदर चली जाती है. बहुत देर तक मसकारा को खुला भी नहीं छोड़ना चाहिए. इस से भी हवा अंदर चली जाती है और मसकारा सूख जाता है. अपने मसकारा को ध्यान से मैंटेन कीजिए ताकि दोबारा से न सूखे.

ये भी पढ़ें-

सवाल

मैं जब भी नेलपौलिश लगाती हूं तो सूखने से पहले ही खराब हो जाती हैनेलपौलिश लगाने का सही तरीका क्या है?

जवाब

नेलपौलिश लगाते वक्त 2 कोट्स लगाने की जरूरत होती है. इंपौर्टैंट है कि पहला कोट जब पूरी तरह से सूख जाए तो ही दूसरा कोट लगाना चाहिए. इस से नेलपौलिश खराब नहीं होती. उसे लगाने के बाद नेल्स को कभी भी गरम हवा नहीं लगनी चाहिए बल्कि उन को ठंडे पानी में डाल कर निकाला जा सकता है और फिर ठंडे ड्रायर से सुखाया जा सकता है. आजकल सिंगल कोट वाली नेलपौलिश भी मिलती है जिस से दोबारा कोट लगाने की जरूरत नहीं पड़ती और जल्दी से सूख भी जाती है. मगर बैस्ट है कि जब आप चाहें परमानैंट नेलपौलिश लगवा लें. इस में एक जैल नेलपौलिश लगाई जाती है और उसे एक लैंप के अंदर बेक किया जाता है. इस से नेलपौलिश 1-2महीनों के लिए परमानैंट लग जाती है. यह जनरल नेलपौलिश के मुकाबले जल्दी लगती है और देर तक टिकती है.

मां को दें मेकओवर का तोहफा

‘‘मम्मा आज जल्दी से तैयार हो जाओ. हमें कहीं बाहर चलना है,’’ मीनल ने अपनी मां साधना से कहा.

‘‘मगर जाना कहां है? देख अभी मुझे

बहुत काम है, तू जा,’’ कह कर साधना ने उसे टालना चाहा.

मीनल अड़ गई, ‘‘कोई नहीं मम्मा मैं काम निबटाने में आप की हैल्प कर देती हूं. आप बस तैयार हो जाओ.’’

‘‘तैयार क्या होना है, सलवारसूट पहना हुआ है. दुपट्टा डाल लेती हूं,’’ साधना बोली.

‘‘ओके मम्मा, आप तो वैसे भी रोज यही पहनते हो.’’

‘‘चल ठीक है, अब बता जा कहां रहे हैं

हम लोग?’’

‘‘अरे मम्मा मेरी फ्रैंड है न दीपा, बस उसी से मिलने जाना है,’’ मीनल ने जवाब दिया.

‘‘अरे तो मुझे ले कर क्यों जा रही है?’’ साधना अभी भी जाने के मूड में नहीं थी.

‘‘मम्मा प्लीज चलो. आप ज्यादा सवाल मत करो. बस मुझे अकेले नहीं जाना इसलिए आप को ले जा रही हूं,’’ मीनल ने बहाना बनाया.

अपने बिखरे हुए बालों का जूड़ा बना कर साधना बेटी के साथ निकल गई. मीनल ने औटो किया. औटो एक ब्यूटीपार्लर के सामने रुका तो साधना चौंकती हुई बोली, ‘‘यह तू मुझे कहां ले कर आई है? तू ने तो कहा था दीपा के घर जा रहे हैं पर यह तो ब्यूटीपार्लर है.’’

‘‘मम्मा यह किसी और का नहीं बल्कि दीपा का ही ब्यूटीपार्लर है.’’

दीपा ने साधना को बैठाते हुए कहा, ‘‘आंटी आप यहां आराम से चेयर पर बैठो. हमें 2-3 घंटे दे दो और फिर जादू देखो. आप का पूरा मेकओवर हो जाएगा.’’

अगले 2-3 घंटे दीपा और उस की सहयोगी ने मिल कर साधना का कायाकल्प कर दिया. उस के बंधे हुए लंबे बालों को खोला. फिर शैंपू कर के स्टैप कट में हेयर कटिंग की. ब्राउन शेड में हेयर कलरिंग भी कर दी. बालों के बाद चेहरे पर मेहनत की गई. फेशियल वगैरह करने के बाद जब हलका सा मेकअप लगाया तो साधना अपनी ही बदली हुई शक्ल देख कर हैरान रह गई.

खुद पर ध्यान न देना

एक समय था जब साधना युवा थी और वह भी अपने चेहरे और बालों को खूबसूरत बनाए रखने के लिए बहुत कुछ करती थी. मगर शादी के बाद जब बच्चे हुए तो वह पूरी तरह परिवार में रम गई. उस को अपनी केयर करने या खूबसूरत दिखने का खयाल ही नहीं रहता था. 35 साल की उम्र में ही उस के चेहरे पर थकावट और फाइनलाइंस साफ नजर आने लगी थीं.

शादी से पहले वह हमेशा अपने बालों को खुला रखती थी, मगर अब तो रोज सुबह बालों का जूड़ा बना कर घर के कामों में लगना ही उस का डेली रूटीन बन गया था. बालों में सफेदी आनी शुरू हो रही थी और उस का शरीर भी अब उतना आकर्षक नहीं रह गया था. वह हमेशा ढीला कुरता और पाजामी पहना करती और ऊपर से एक साइड से दुपट्टा डाल लेती. अपने रखरखाव पर वह इस से ज्यादा समय नहीं देती थी.

मगर अब उस की बेटी मीनल बड़ी हो गई थी और उस ने मदर्स डे के मौके पर अपनी मां का मेकओवर करने का फैसला लिया था.

ब्यूटीपार्लर के बाद मीनल अपनी मां को ले कर मौल पहुंची. वहां उस ने बहुत खूबसूरत सा पैपलम टौप और स्ट्रेट जींस खरीदी. फिर उसे मां को पहनने को दिया. साधना जींस और टौप पहनने में हिचक रही थी, मगर मीनल के जोर देने पर उस ने वह ड्रैस पहन ली. अब मीनल ने एक खूबसूरत सा हैंड पर्स और प्लेटफौर्म हील्स खरीदीं.

साधना ने उसे टोका, ‘‘इतने रुपए बेकार खर्च क्यों कर रही है और ये रुपए आए कहां से?’’

‘‘मम्मा पहली बात ये रुपए बरबाद नहीं हो रहे बल्कि इन का सही प्रयोग हो रहा है और दूसरी बात ये रुपए मेरे जेब खर्च से बचाए हुए हैं.’’

साधना ने प्यार से बेटी का माथा चूम लिया. फिर साधना जब जींसटौप के साथ हील्स पहन कर घर लौटी तो साधना को खुद उस के पति नहीं पहचान पाए. घर में हरकोई उसे देखता ही रह गया. साधना का कायाकल्प हो गया था और वह बहुत ही खूबसूरत लग रही थी. उस की उम्र 28 साल से अधिक की नहीं लग रही थी. सब करेंगे तारीफ

मां का मेकओवर कर आज मीनल बहुत खुश थी. उस ने मां से वादा किया कि वह घर के कामों में थोड़ी हैल्प कराएगी मगर मां को ऐसे ही बनसंवर कर रहना होगा. साधना के चेहरे पर आत्मविश्वास भरी प्यारी सी मुसकान थी.

सच है कि जिंदगी की पहली शिक्षक मां होती है. पहली दोस्त भी मां ही होती है और सब से बढ़ कर जिंदगी देने वाली भी मां ही होती है. ऐसी मां के ऊपर जिंदगी कुरबान भी कर दी जाए तो कम है. मगर अफसोस अकसर हम अपनी जिंदगी में इसी मां को इग्नोर करने लगते हैं.

हमारे पास उस मां के लिए ही समय की कमी हो जाती है जिस मां ने अपना सारा समय हमें दिया होता है.

बच्चों की देखभाल और जिम्मेदारियों के चलते मां को खुद के लिए समय ही नहीं मिल पाता जिस में वह सज और संवर सके. मदर्स डे एक ऐसा दिन है जिसे आप यादगार बनाना चाहते हैं तो मेकअप से ले कर ड्रैसिंगसैंस और नए हेयरस्टाइल के मेकओवर के जरीए मां को और भी ज्यादा खूबसूरत दिखाने में कामयाब हो सकते हैं.

मेकअप मेकओवर

शायद ही कोई महिला हो जिसे मेकअप का क्रेज न हो. कई महिलाएं मेकअप ट्रैंड को फौलो करने के लिए यूट्यूब का भी सहारा लेती हैं. देखा जाए तो मेकअप करने के काफी सारे तरीके हैं जिस का कोई खास रूल नहीं है. लेकिन 30-40 साल की मां को मेकअप करते वक्त अपनी स्किन टोन के हिसाब से ही मेकअप करना चाहिए क्योंकि इस उम्र में चेहरे पर फाइनलाइंस नजर आने लगती हैं.

सैलिब्रिटी मेकअप आर्टिस्ट गुंजन अघेरा पटेल से जानते हैं कि मां को किस तरह का मेकअप करना चाहिए:

फाउंडेशन सलैक्शन

. नौर्मल स्किन के लिए पाउडर फाउंडेशन का चुनाव करें.

. ड्राई स्किन है तो लिक्विड, स्टिक या हाईड्रेटिंग पाउडर फाउंडेशन का इस्तेमाल करें.

. औयली स्किन के लिए औयल फ्री लिक्विड या पाउडर फाउंडेशन का सलैक्शन करें.

. कौंबिनेशन स्किन के लिए जिस जगह पर औयल ज्यादा आता है उस जगह पर पाउडर फाउंडेशन ज्यादा करें और जहां कम औयल हो वहां पर पाउडर फाउंडेशन का इस्तेमाल कम करें.

स्किन टोन के हिसाब से मेकअप

. यलो बेस्ड और पिंक बेस्ड फाउंडेशन ज्यादातर हर तरह की स्किन टोन पर सूट करता है.

. पिंक बेस्ड फाउंडेशन काफी ज्यादा गोरी रंगत को ठीक करता है.

. डस्की स्किन टोन के लिए रोजी, रैडिश या ब्लू बेस के फाउंडेशन को सलैक्ट करना चाहिए.

लिपस्टिक के कलर का सलैक्शन

. अपने नैचुरल लिप कलर से 2 शेड डीप कलर की लिपस्टिक को इस्तेमाल करें.

. पिंक और रैड शेड के साथ ऐक्सपैरिमैंट करें. यह हर आउटफिट से मैच होता है.

. दिन में लिपस्टिक का शेड लाइट और रात में डार्क रखें.

. फेयर स्किन के लिए पिंक अंडरटोन, मीडियम के लिए क्रैनबेरी और ब्रिक रैड, डार्क कौंप्लेक्शन के लिए ब्राउन और बरगंडी शेड चुनें.

हेयर मेकओवर

व्यक्तित्व को निखारने में हेयरस्टाइल की काफी ज्यादा भूमिका होती है. हेयरस्टाइल ही पहली ऐसी चीज होती है जो सामने वाले का ध्यान सब से पहले आकर्षित करती है. मदर्स डे पर अगर आप भी अपनी मां के बालों के साथ कुछ ऐक्सपैरिमैंट करने की सोच रही हैं तो उन के चेहरे के हिसाब से ही परफैक्ट हेयरस्टाइल का चुनाव करें.

कैसा हो हेयरस्टाइल

. गोल चेहरे पर कुछ बालों को चेहरे के दोनों तरफ से बाहर आने दें. चौपी लेयर्ड बौब, डिफाइंड पिक्सी या डीप लेयर वाले ओपन हेयर ट्राई कर सकती हैं.

. ओवल चेहरे पर छोटे बालों में ब्लंट बौब और लंबे बालों के साथ लाइट लेयर कट अच्छे लगेंगे.

. डायमंड फेस पर लौंग, साइड स्वैप्ट बैंग्स और टैक्सचर्ड बौब ट्राई कर सकती हैं.

स्किन टोन के हिसाब से चुने हेयर कलर

. फेयर स्किन टोन पर लाइट ब्राउन, हनी चैस्टनट, डार्क ब्लांड हाईलाइट्स खूब फबते हैं.

. मीडियम स्किन टोन पर चौकलेट ब्राउन, बेस कलर, चैस्टनट जैसे कलर्स के अलावा गोल्डन ब्राउन, डीप रिच ब्राउन हेयर कलर अच्छे लगते हैं.

. डस्की स्किन पर डार्क चौकलेट ब्राउन कलर अच्छा लगता है. इस के अलावा आप चौकलेट ब्राउन, रैड अंडरटोन और डार्क ब्राउन कलर भी ट्राई कर सकती हैं.

ड्रैसिंग मेकओवर

मदर्स डे पर बच्चे सब से ज्यादा अपनी मांओं को साड़ी गिफ्ट में देते हैं. हालांकि साड़ी ही एक ऐसा परिधान है जिस के आगे सभी ड्रैसेज फेल हो जाती हैं. ऐसे में अगर आप अपनी मां के लिए साड़ी खरीदने वाली हैं तो आप बौडी शेप के हिसाब से ही साड़ी का सलैक्शन करें.

इस संदर्भ में सीमा कलावाडि़या (फाउंडर ऐंड फैशन डिजाइनर, सिम्स स्टूडियो) कुछ टिप्स बता रही हैं:

बौडी शेप के हिसाब से सही साड़ी

अगर है प्लस साइज

. प्लस साइज की महिलाओं के लिए शिफौन, सौफ्ट ऐंड फाइन सिल्क और जौर्जेट की साड़ी का चयन करना चाहिए.

. प्रिंटेड और ब्रौड प्रिंटेड साडि़यों की जगह महीन प्रिंट की साडि़यां चुनें.

अगर बौडी शेप है पतली

. पतली महिलाएं किसी भी तरह की साड़ी कैरी कर सकती हैं. कौटन, औरगेंजा और नैट की साडि़यों का चुनाव बेहतर औप्शन होगा.

. ब्रौड प्रिंट, हौरिजैंटल लाइंस के साथसाथ हैवी वर्क की साडि़यां भी खूब फबेंगी.

अगर हाइट है लंबी

. लंबी हाइट की महिलाओं पर सुपर नैट, कौटन और सिल्क की साडि़यां अच्छी लगेंगी.

. हौरिजैंटल प्रिंट्स का चुनाव करें. वर्टिकल प्रिंट्स का चुनाव करेंगी तो हाइट और भी ज्यादा लगेगी.

. सौलिड कलर या बिना प्रिंट्स वाली साड़ी लंबी हाइट पर अच्छी लगती है.

अगर हाइट है कम

. कम हाइट वाली महिलाओं को ऐसी साड़ी का चयन करना चाहिए जिस में कम वौल्यूम हो.

. वर्टिकल वाली साड़ी का सलैक्शन करें.

. नाभि के नीचे से साड़ी ड्रेप करें इस से हाइट ज्यादा नजर आएगी.

आजकल मांएं वर्किंग भी और हाउसवाइफ भी होती हैं. उन्हें दोनों ड्यूटी निभानी होती हैं और कोई आ गया तो प्रेजैंटेबल भी दिखना होता है. ऐसे में आप उन के लिए कुछ ऐसी ड्रैसेज सलैक्ट करें जिन में मां मौडर्न भी लगे और कंफर्टेबल भी महसूस करे:

इस संदर्भ में फैशन डिजाइनर आशिमा शर्मा  मां के फैशन मेकओवर के लिए कुछ टिप्स दे

रही हैं:

आजकल महिलाओं में लौंग स्कर्ट (जोधपुरी/ राजस्थानी डिजाइन वाली) काफी पौपुलर हैं. चिकनकारी के टौप/शर्ट के साथ पेयर करने पर यह वैस्टर्न और इंडियन लुक का फ्यूजन लगता है. साथ में कलरफुल चौड़े कंगन यानी ब्रैंड बैंगल्स ले सकते हैं. इस के साथ मेकअप भी हलका यानी न्यूड मेकअप अच्छा लगता है.

. स्ट्रेट जींस जिसे बौयफ्रैंड जींस भी कहते हैं

अपनी मां के लिए खरीद सकते हैं. यह बिलकुल खुले पैर की होती है इसलिए मिडल एज की महिलाएं इसे आराम से पहन सकती हैं. वे इसे घर के बाहर भी पहन सकती हैं और डेली यूज में भी रख सकती हैं क्योंकि यह कंफर्टेबल होती है. इसे इंडियन प्रिंट वाली शौर्ट कुरतियों के साथ पेयर किया जाता है.

. रैप अराउंड वाली स्कर्ट आजकल महिलाओं में बहुत चल रही है खासकर मैट्रो सिटीज में इसे पहने हुए स्टाइलिश महिलाएं अकसर दिख जाती हैं. आप भी अपनी मां के लिए इसे ले कर आएं. इसे पहन कर मां का लुक बदल जाएगा और वे काफी मौडर्न नजर आएगी.

. शौर्ट टौप के साथ श्रग पहन कर एक डिसैंट और स्मार्ट लुक मिलता है खासकर जींस के साथ यह काफी प्रेजैंटेबल लुक देता है.

. आजकल ट्राउजर भी बहुत चल रहे हैं. आप अपनी मां के लिए लाइट ब्लू या लाइट ब्राउन जैसे ट्रैंडी कलर ले सकते हैं. इस में वह फैशनेबल दिखेगी.

. नीलैंथ की ए लाइन शिफ्ट ड्रैस, कैपरी, शर्ट ड्रैस, काफ्तान, पैपलम टौप आदि महिलाओं के बीच काफी पौपुलर हैं. ये ड्रैसेज स्मार्ट लुक देती हैं.

. अगर आप की मां थोड़ी हैल्दी है तो याद रखिए आजकल प्लस साइज के बहुत सारे ब्रैंड्स आ गए हैं जो ऐसी महिलाओं के लिए स्टाइलिश आउटफिट्स तैयार करते हैं. आप अपनी मां के लिए खूबसूरत ए लाइन ड्रैस ले सकते हैं. यदि मां दुबली है तो शर्ट ड्रैस, काफ्तान या श्रग के औप्शन बेहतर होंगे.

ज्वैलरी सैट

आप अपनी मां के लिए आजकल के ट्रैंड के हिसाब से किसी भी तरह की ज्वैलरी का सैट खरीद सकती हैं. आर्टिफिशियल ज्वैलरी सैट आप को लगभग क्व400 से ले कर क्व1,500 के बीच में आसानी से मिल जाएगा.

स्किन केयर प्रोडक्ट

अगर आप चाहते हैं कि आप की मां हमेशा जवां और खूबसूरत दिखे तो आप उसे स्किन केयर प्रोडक्ट की एक पूरी रेंज गिफ्ट कर सकते हैं. मां के लिए डे, नाइट क्रीम से ले कर लिप टिंट, अंडर आई क्रीम, बीबी क्रीम और वे सारी जरूरी चीजें शामिल हो सकती हैं जो बढ़ती उम्र के साथ महिलाओं को चाहिए.

फिटनैस बैंड

मदर्स डे पर अपनी मां को देने के लिए फिटनैस बैंड एक बेहतरीन गिफ्ट है. यह न सिर्फ मां की हर मूवमैंट पर नजर रखेगा बल्कि उन्हें फिटनैस के प्रति और मोटिवेट भी करेगा. ऐसे में आप एक फिटनैस ट्रैकर या बैंड अपनी मां को दे सकते हैं और उन्हें एक हैल्दी लाइफ जीने के लिए प्रेरित कर सकते हैं.

स्पा औफर करें

उन्हें हेयर और बौडी स्पा, मेकअप प्रोडक्ट्स या बौडी मसाज औफर करें. इस से मां की जरूरतें भी पूरी हो जाएंगी और वह स्पैशल भी फील करेगी.

समलैंगिक विवाह : क्या देश में समलैंगिकता के दरवाजे खुलते जा रहे हैं

समलैंगिक विवाह पर आज सुप्रीम कोर्ट के साथ-साथ देश के गली चौराहे पर चर्चा शुरू हो गई है . सच यह है कि अगर एक आदमी पक्ष में है तो अनेक लोग विरोध में. आज सुप्रीम कोर्ट में समलैंगिक संबंधों पर लगातार चर्चा हो रही है जो मीडिया के माध्यम से आम लोगों के बीच चर्चा का बयास बन गई है .

दरअसल, दुनिया के कुछ  देशों में समलैंगिकता के लिए दरवाजे खुलते चले जा रहे हैं. ऐसे में भारत में यह विषय तो चर्चा का और साथ ही कानून के दरवाजे पर अपने अधिकार के लिए दस्तक देने की कवायद तो होनी ही थी .जहां बहुत सारे लोग समलैंगिकता को लेकर के नाक  सिकोड़ रहे है वही विरोध के स्वर के बीच समर्थन में भी आवाज सुनाई पड़ने लगी है. ऐसे में समाज में यह विषय चर्चा का विषय है और लोग इस पर खुलकर चर्चा कर रहे हैं यह एक अच्छी बात है क्योंकि संवाद से ही समाज में जनमत बनता है और निष्कर्ष निकाले जाते हैं जो आने वाले समय और पीढ़ी के लिए नजीर बन जाते हैं.

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के अधिवक्ता डॉ उत्पल अग्रवाल के मुताबिक मैं कई दिनों से देश में चल रहे समलैंगिकता के विषय में चर्चा से आहत हूं यह क्या हो रहा है समाज किस दिशा में जाएगा यह विचार करके मैं चिंतित हूं और मैं खुलकर सरकार के समक्ष अपनी बात एक पत्र के माध्यम से रख चुका हूं कि भारत सरकार को इसमें दखल देना चाहिए यह भारत की संस्कृति के लिए एक बड़ा  प्रश्न चिन्ह बन जाएगा.

वही सामाजिक कार्यकर्ता महंत शिवदास के मुताबिक जब दुनिया में समलैंगिकता को लेकर के संवेदनशील की भावना सामने आई है तो भारत भला कैसे पीछे रह सकता है. आखिर यह भी तो हमारे समाज के हिस्सा हैं ऐसे में उन्हें अधिकार तो मिलना ही चाहिए.

हास्यास्पद स्थितियां

अधिकार और कर्तव्य तो देश के हर नागरिक का तय होना चाहिए और यह मिलना भी चाहिए  इसमें दो राय नहीं हो सकती. मगर समलैंगिकता, विवाह और समाज यह एक ऐसा त्रिकोण है जिसे लेकर देश और देश की आवाम जो इस आहट से जहां चिंतित है वही नई परिस्थितियों के लिए समाज अपने आपको तैयार करता हुआ भी दिखाई दे रहा है अगर आने वाले समय में सुप्रीम कोर्ट से समलैंगिक संबंधों को  हरी झंडी  मिल जाती है तो  निसंदेह इसका स्वागत भी होगा तो विरोध भी. और अगर बाधाएं आई मामला धरा का धरा रह जाएगा तो आने वाले समय में इसकी स्वीकारोक्ति के लिए प्रयास बंद हो जाएंगे ऐसा नहीं है. जो तथ्य सामने आ रहे हैं उसके आधार पर कहा जा सकता है कि भारतीय समाज समलैंगिक विवाह को अनुमति देने के लिए तैयार नहीं है और इस पर हास्य व्यंग के साथ अभी से फुलझड़ियां छोड़ी जाने लगी है.                 दरअसल अनेक चिकित्सक और संबद्ध चिकित्सा पेशेवर समलैंगिकता को एक ‘विकार’ मानते हैं, जो समलैंगिक शादियों को कानूनी मान्यता देने की सूरत में समाज में और बढ़ेगा यह दावा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की महिला शाखा से संबद्ध संगठन ‘संवर्धिनी न्यास’ के सर्वेक्षण में सामने आया है.

आरएसएस के समानांतर महिला संगठन ‘राष्ट्र सेविका समिति’ की एक वरिष्ठ कार्यकर्ता के  मुताबिक सर्वेक्षण के निष्कर्ष देशभर के चिकित्सा पेशेवरों से मिली 318 प्रतिक्रियाओं पर आधारित हैं, जिनमें आधुनिक विज्ञान से लेकर आयुर्वेद तक, आठ अलग-अलग उपचार पद्धतियों के चिकित्सा पेशेवर शामिल हैं.  सर्वेक्षण में शामिल 70 फीसद चिकित्सक और संबद्ध चिकित्सा पेशेवरों ने ‘समलैंगिकता को एक विकार’ बताया है जबकि 83 फीसद ने ‘समलैंगिक संबंधों में यौन रोगों के संचरण की अधिक आशंका होने की पुष्टि की है .’

संगठन के मुताबिक सर्वेक्षण में हिस्सा लेने वाले चिकित्सा पेशेवरों ने कहा कि समलैंगिक शादियों को कानूनी मान्यता देने का फैसला मरीजों को ठीक करने और उन्हें सामान्य स्थिति में लाने के बजाय समाज में इस विकार को और बढ़ावा दे सकता है.

सर्वेक्षण के नतीजे बताते हैं कि इस तरह के मनोवैज्ञानिक विकार से जूझ रहे मरीजों को ठीक करने के लिए काउंसलिंग बेहतर विकल्प है. सर्वेक्षण में समलैंगिक शादियों को कानूनी मान्यता देने की मांग पर कोई भी निर्णय लेने से पहले जनता की राय जानने का सुझाव दिया गया है.

 

Summer Special: घर पर बनाइए आसानी से बेक्ड टोफू पोटली

गर्मियों में अक्सर बच्चों को खाना अच्छा नहीं लगता हैं. ऐसे में मांए बच्चों के लिए चिंतित हो जाती हैं आखिर बच्चों को क्या खिलाएं. आइए आज हम आपको इस लेख में बताएंगे टेस्टी बेक्ड टोफू पोटली की आसान रेसिपी

बेक्ड टोफू पोटली की सामग्री

  1. 1/2 कप टोफू
  2. 1 कप मैदा
  3. 1 बड़ा चम्मच मूंगफली
  4. 1 छोटा चम्मच हरीमिर्च
  5. 1 छोटा चम्मच अदरक पेस्ट
  6. 2 बड़े चम्मच धनियापत्ती
  7. 1 छोटा चम्मच चाटमसाला
  8. 1/2 छोटा चम्मच जीरा
  9. 1 छोटा चम्मच धनिया पाउडर
  10. 1/2 छोटा चम्मच लालमिर्च
  11. चुटकीभर हींग
  12. 2 छोटे चम्मच तेल
  13. नमक स्वादानुसार

विधि

मैदे में चुटकी भर नमक और 1 चम्मच तेल डाल कर अच्छी तरह मसलें. फिर थोड़ाथोड़ा हलका गरम पानी मिलाते हुए आटे की तरह गूंथें और ढक कर रख दें. कड़ाही में 1 चम्मच तेल डाल कर गरम करें. इस में हींग, जीरा, अदरक पेस्ट और हरीमिर्च पेस्ट डाल कर भूनें. मैश किया टोफू और बाकी सारी सामग्री भी डाल कर अच्छी तरह मिलाते हुए भूनें. मिश्रण को आंच से उतार कर ठंडा होने दें. गुंधे मैदे को मसल कर मुलायम कर के छोटेछोटे पेड़े बना लें. प्रत्येक पेड़े को पूरी की तरह बेलें. 1-1 बड़ा चम्मच टोफू का मिश्रण ले कर इन की पोटलियां बना लें. ऊपर से थोड़ा तेल लगा कर 200 डिग्री सैंटीग्रेट तक प्रीहिटेड ओवन में 19-20 मिनट रखें. यदि पोटलियों ब्राउन नहीं हुई हों तो 3-4 मिनट और रखें. पोटलियां पूरी तरह बेक होने पर टमाटर की चटनी के साथ सर्व करें.

ओनियन पैन केक सामग्री

 

  1.  1 बड़ा कप सूजी
  2. 1/2 कप दही
  3. 1  आवश्यकतानुसार प्याज के छल्ले
  4. 1 छोटा चम्मच लालमिर्च कटी
  5. 1 छोटा चम्मच फ्रूट साल्ट
  6. रिफाइंड तेल आवश्यकतानुसार
  7. नमक स्वादानुसार

 विधि

सूजी में दही, नमक व लालमिर्च मिलाएं. आवश्यकतानुसार पानी मिला कर फेंटें. गाढ़ा घोल तैयार कर लें. ध्यान रहे कि घोल में गांठ न रहे. नौनस्टिक तवे को हलका गरम करें. तैयार घोल में फ्रूट साल्ट मिला कर थोड़ा और फेंटें. हलके गरम तवे पर एक कड़छी घोल डाल कर गोलाई में फैलाएं. अब इस पर प्याज के छल्ले डालें. किनारों पर तेल छोड़ते हुए दोनों ओर से पैन केक सेंक लें. हरी चटनी के साथ परोसें.

Cannes 2023 में बॉलीवुड हसीनाओं का जलवा, सारा अली खान ने किया डेब्यू

कान फेस्टिवल 2023 का आगज हो चुका है. मंगलवार को फ्रेंच रिवेरा में कान फिल्म फेस्टिवल का आगज हो गया है. इस रेड कार्पेट पर सितारों ने आपना जलवा दिखाया है. पहले ही दिन बॉलीवुड की इस हसीना ने रेड कार्पेट पर डेब्यू किया है. इस बीच सोशल मीडिया पर इस हसीना की तस्वीरें वायरल हो रही है।  कान फिल्म फेस्टिवल में बॉलीवुड एक्ट्रेस सारा अली खान ने किया डेब्यू। वायरल तस्वीरों में देखे तो सारा अली खान ने Cannes 2023 में देशी अवतार में सारा ने धांसू एंट्री की है. रेड कार्पेट पर सारा अली खान ब्राइडल लुक में आई नजर. एक्ट्रेस ने इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में अपने देशी लुक से धमाल मचा दी है.

Cannes 2023 में सारा लंहगा पहनकर पहुंची थी. बता दें, सारा ने मशहूर फैशन डिजाइनर अबू जानी संदीप खोसला के आउफिट में नजर आईं। इस दौरान एक्ट्रेस ने एक खूबसूरत लहंगा पहना था। लहंगा के साथ सारा ने आइवरी क्रीम का सिर पर दुपट्टा कैरी किया है. इसके साथ ही सारा ने मैंचिग इयररिंग्स और हाथ में डायमंड का ब्रेसलेट कैरी किया हुआ है। इसी के साथ उन्होंने मिनिमल मेकअप किया। एक्ट्रेस का ये लुक ब्राइडल लुक देख हर कोई उनका दीवाना हो गया।

मिस वर्ल्ड मानुषी छिल्लर ने भी किया डेब्यू

कान फिल्म फेस्टिवल (2023) में मिस वर्ल्ड का खिताब जीतने वाली मानुषी छिल्लर (Manushi Chhillar) ने भी किया डेब्यू.  अपने लुक से रेड कार्पेट मानुषी ने शोभा बढ़ाई।  मिस वर्ल्ड मानुषी ने वाइट कलर का स्लीवलेस गाउन पहना था, जिसमें वह किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थीं। उन्होने वाइट गाउन के साथ एक नेकपीस पहना हुआ जो काफी खूबसूरत लग रहा है. यह ग्रीन कलर का नेकपीस उनका वाइट ‘सिंड्रेला’ गाउन के साथ चार चांद लगा रहा है.

मानुषी छिल्लर की वर्क फ्रंट की बात करें तो एक्ट्रेस जल्द ही एक्टर जॉन अब्राहम संग नजर आएंगी। इसके अलावा उनके पास वरुण तेज संग ‘ऑपरेशन वैलेंटाइन’ भी है. इसी के साथ एक्ट्रेस उर्वशी रौतेला भी कान 2023 के रेड कार्पेट पर अपना जलवा दिखाया। इस दौरान एक्ट्रेस पिंक कलर का गाउन पहनें नजर आईं। इस तस्वीर में उर्वशी किसी बार्बी डॉल से कम नहीं लग रही थीं।

 

View this post on Instagram

 

A post shared by ZEAL (@zeal_up_your_life)

 

रंगोली: पति और करियर के बीच फंसी एक महिला

आज रंगोली का बर्थडे है और उसे पूरी उम्मीद थी कि उस के मम्मीपापा उसे अच्छा और महंगा गिफ्ट अवश्य देंगे. केक काटने से पहले रंगोली ने अपना गिफ्ट मांगा तो मोहित और  सुप्रिया ने उसे सुनहरे कागज में लिबटा पैकेट पकड़ा दिया.

पैकेट खोलते ही वीवो का फोन देख कर रंगोली ने नाक सिकोड़ ली. उस का मूड खराब हो गया. पैकेट को फेंकते हुए बोली, ‘‘आप दोनों ने  खुद तो आई फोन ले रखे हैं और मु झे यह दे रहे हैं.’’

इस से पहले मोहित और सुप्रिया कुछ बोलते, रंगोली दनदनाती हुई अपने कमरे में चली गई और दरवाजा बंद कर लिया. उस ने इतना भी नहीं सोचा कि मेहमान क्या सोच रहे होंगे. सुप्रिया खिसियाते हुए बोली, ‘‘आजकल के बच्चे भी न बस.’’

मोहित बोला, ‘‘चलो केक बाद में काटेंगे, पहले डिनर कर लेते हैं. तब तक मैं रंगोली को मना भी लूंगा.’’

17 वर्ष की रंगोली तूफान मेल थी. खुलता हुआ रंग जो गोरा कहा जा सकता था, बड़ीबड़ी शरबती आंखें, घने घुंघराले बाल जो रेशम की तरह मुलायम थे, मीडियम कद और भोली सी मुसकान. रंगोली का चेहरा उस के तेवरों से बिलकुल मेल नहीं खाता था और यही बात रंगोली को और अधिक आकर्षक बनाती थी. वह मोहित और सुप्रिया की इकलौती संतान थी.

रंगोली न सुनने की आदी नहीं थी. उसे हर चीज अपने हिसाब से चाहिए होती थी और इस बात के लिए वह किसी हद तक भी जा सकती थी.

बाहर मोहित दरवाजा खटखटा रहा था, ‘‘बेटा सब लोग बाहर इंतजार कर रहे हैं. अच्छा बाबा तुम्हारी पसंद का मोबाइल दिला देंगे.’’

रंगोली ने  झट दरवाजा खोल दिया. अब उस ने शौर्ट और एक बहुत डीप नैक टौप पहन रखा था.

मोहित बोलतेबोलते रुक गया पर वह अपने से ही नजरें चुरा रहा था. उसे साफ दिख रहा था कि उस के दोस्त कामलोलुप नजरों से रंगोली को देख रहे हैं.

मेहमानों के जाने के बाद मोहित सुप्रिया से बोला, ‘‘तुम उस की मां हो, कम से कम उसे कपड़े पहनने का ढंग तो सिखा दो.’’

सुप्रिया चिढ़ते हुए बोली, ‘‘नजरें लोगों की गंदी हैं, रंगोली की गलती नहीं है.’’

सुप्रिया को खुद टिपटौप रहना पसंद था. वह खुद आधुनिक परिधान पहनना पसंद करती थी, इसलिए रंगोली को कुछ नहीं कहती थी.

आज रंगोली अपने दोस्तों के साथ पार्टी कर रही थी. उस ने आज भी काफी खुले परिधान पहने हुए थे. पार्टी में कुछ नवयुवक रंगोली की तरफ ही देख रहे थे जो उस के बौयफ्रैंड कृष्णम को पसंद नहीं आ रहा था. देखते ही देखते बात बढ़ गई और मारपिटाई की नौबत आ गई. कृष्णम भी 17 वर्ष का ही था तो 22 वर्ष के युवकों का कैसे सामना कर पाता. मुश्किल से उन्हीं में से एक युवक जिस का नाम ईशान था ने कृष्णम को बचाया. रंगोली का मूड औफ हो गया था.

कृष्णम और रंगोली के बाकी दोस्त रंगोली की इस हरकत को देख कर स्तब्ध रह गए थे. रंगोली दनदनाती हुई उस जगह से बाहर निकली तो ईशान बोला, ‘‘क्या मैं तुम्हें छोड़ सकता हूं?’’

ईशान की स्पोर्ट्स बाइक देख कर रंगोली ने हां कर दी. बाइक हवा से बातें करने लगी. ईशान ने जब बाइक को एक कैफे के सामने रोका तो रंगोली ने कोई आनाकानी नहीं की. दोनों खूब सारी बातें करते रहे. जहां ईशान को रंगोली का बोल्ड ऐंड ब्यूटीफुल अंदाज भाया था वहीं रंगोली को लगा कि ईशान जैसा ही बौयफ्रैंड होना चाहिए जो जरूरत पड़ने पर हैल्प तो कर सके. कृष्णम तो अभी खुद बच्चा है. रंगोली ने वहीं बैठेबैठे ईशान और अपनी सैल्फी सभी सोशल मीडिया साइट्स पर अपडेट कर दी. रंगोली ने आजकल के युवाओं की तरह अपनी जिंदगी में नए बौयफ्रैंड का ऐलान कर दिया था.

ईशान एक अमीर परिवार का युवक था. वह रंगोली पर खूब खर्चा करता था. रंगोली की मम्मी सुप्रिया अपनी सोशल लाइफ में इतनी बिजी थी कि उसे इस बात का इल्म ही नहीं था कि रंगोली ने अपने से बड़ी उम्र के लड़के के साथ दोस्ती कर ली हैं.

आजकल रंगोली के पांव घर पर नहीं टिकते थे. ईशान रंगोली को खूब घुमाताफिराता. उस के साथ रंगोली ने अपनी सारी हदें पार कर ली पर रंगोली को इस बात का कोई मलाल नहीं था.

जब से ईशान रंगोली की जिंदगी में आया था तब से उसे पैसों की कमी नहीं रही थी. अब उस ने अपने मम्मीपापा से पौकेट मनी के लिए भी कहना छोड़ दिया था.

मोहित और सुप्रिया को लग रहा था कि रंगोली सम झदार हो गई हैं परंतु उन्हें नहीं पता था कि अब वह अपनी जरूरतों के लिए उन पर निर्भर नहीं रही है.

मोहित और सुप्रिया की आंखें तब खुलीं जब एक दिन सुप्रिया की बड़ी बहन ने रंगोली को ईशान के साथ होटल से बाहर निकलते देखा. मोहित और सुप्रिया ने जब इस बारे में रंगोली से बात की तो उस ने कंधे उचकाते हुए कहा, ‘‘अब पहले आप लोगों की यह प्रौब्लम थी कि मैं आप लोगों का खर्चा कराती हूं. अब जब मैं कुछ मांग नहीं रही हूं तो भी प्रौब्लम है.’’

मोहित बोला, ‘‘यह कोई उम्र है कालेज के लड़कों के साथ घूमने की?’’

रंगोली फटाक से बोली, ‘‘जब आप लोगों की अब तक उम्र है इधरउधर घूमने की तो अगर मैं भी घूम रही हूं तो क्या गलत है?’’

मोहित और सुप्रिया आगे कुछ नहीं बोल पाए. दोनों की ही अपनीअपनी मित्रमंडली है. एकदूसरे से ऊब कर दोनों ने अपनी खुशियों के ठिकाने इधरउधर बना रखे हैं और यह बात रंगोली अच्छी तरह जानती थी.

ईशान धीरेधीरे रंगोली को प्यार करने लगा. रंगोली की खुशी के लिए वह उस की गलतियों को भी नजरअंदाज करने लगा था. जब रंगोली

20 वर्ष की हुई तो उस ने ईशान से अपने लिए एक स्पा पार्लर खोलने के लिए कहा.

ईशान बोला, ‘‘इस की क्या जरूरत है रंगोली?’’

रंगोली भोली मुसकान के साथ बोली, ‘‘मैं इंडिपैंडैंट बनना चाहती हूं.’’

ईशान को पता था कि अगर वह क्व25 लाख की रकम अपनी गर्लफ्रैंड के लिए मांगेगा तो उस के मातापिता कभी नही देंगे. इसलिए उस ने अपने मम्मीपापा को यह बोला कि उसे खुद बिजनैस के लिए चाहिए.ईशान प्यार में इतना दीवाना था कि उस ने पार्लर में बस रंगोली का ही नाम डाल दिया. रंगोली को जब ईशान ने स्पा के कागज पकड़ाए तो रंगोली भावुक हो कर ईशान के गले लग गई.

ईशान बोला, ‘‘अरे मैं और तुम अलग थोड़े ही हैं, जो तुम्हारा है वह मेरा भी है.’’

सुप्रिया और मोहित भी रंगोली के स्पा पार्लर के मुहूर्त में आए थे. दोनों ने ही बेटी की तरफ से आंखें मूंद ली थीं यह जानते हुए भी कि सारा पैसा ईशान का है. दोनों अपनी बेटी की काबिलीयत का गुणगान कर रहे थे. रंगोली का स्पा पार्लर धीरेधीरे मशहूर हो रहा था. उसे अपना काम निकलना बखूबी आता था और उस ने शहर के सारे पैसे वाले लोगों को अपना क्लाइंट बना लिया था.

1 साल के भीतर ही रंगोली का स्पा पार्लर नंबर 1 बन गया था. अब उसे पैसों के लिए ईशान की जरूरत नहीं रही थी. वह अब अपने जीवन में एक नया साथी चाहती थी. वह ईशान से बोर हो गई थी.

अब जब भी ईशान आता रंगोली उसे इग्नोर करने लगी थी. शुरूशुरू में तो ईशान को सम झ नहीं आया पर बाद में रंगोली के बदले तेवर देख कर उसे बहुत बुरा लगा. एक दिन उस ने रंगोली से सीधे पूछ लिया तो रंगोली ने भी साफ बोल दिया, ‘‘ईशान मैं तुम्हें धोखे में नहीं रखना चाहती हूं. अब मेरी दिलचस्पी तुम में खत्म हो गई है.’’

ईशान व्यंग्य करते हुए बोला, ‘‘हां तुम्हारी दिलचस्पी मेरे पैसों में ही थी जो अब तुम्हारे पास भी हैं.’’ रंगोली बड़ी अदा से बाल  झटकते हुए बोली, ‘‘तुम्हारी भी तो मेरी खूबसूरती में दिलचस्पी थी और रही बात तुम्हारे पैसों की तो उन्हें मैं तुम्हें लौटा दूंगी.’’

ईशान थके स्वर में बोला, ‘‘मेरा विश्वास कैसे लौटा पाओगी?’’ रंगोली बिना कुछ बोले अपने काम में लग गई. ईशान के जिंदगी से जाने के बाद रंगोली नित नए लड़कों के साथ समय बिताने लगी थी. वह अब किसी एक साथी के साथ नहीं बंधना चाहती थी. अपने नित नए बने संबंधों के सहारे कामयाबी की सीढि़यां चढ़ती चली गई. पर फिर भी खुश नहीं थी.

एक स्पा पार्लर की मालकिन के पास वह रुतबा नहीं होता है जिस की कभी रंगोली ने कामना करी थी. अपने नित नए बनते रिश्तों के कारण वह पहले ही काफी नाम कमा चुकी थी.

रंगोली के मम्मीपापा ने पहले तो उसे प्यार, फिर गुस्से से सम झाया और बाद में उसे उस के हाल पर छोड़ दिया. रंगोली की शादी होने की संभावना धूमिल होती जा रही था. वह खुद किसी सामान्य व्यक्ति से शादी करने के लिए तैयार नहीं थी. दिन महीनों में और महीने सालों में परिवर्तित हो रहे थे.

रंगोली अब 27 वर्ष की हो चुकी थी. उस के नएपुराने आशिक विवाह होने के बाद पालतू बन गए थे. जो पहले रंगोली के साथ खुलेआम घूमते थे अब बस रात के अंधेरे में रंगोली का साथ चाहते थे. रंगोली जो भी करती थी खुलेआम करती थी. छिपछिप कर कुछ करना उसे कतई पसंद नहीं था इसलिए फिलहाल जिंदगी के इस मोड़ पर अकेली थी और अपनी जिंदगी से ऊब रही थी.

तभी उस की जिंन्दगी में अनिरुद्ध आया. अनिरुद्ध का स्थानीय राजनीतिक पार्टी में बड़ा दबदबा था. एक दिन भूलेभटके वह रंगोली के स्पा पार्लर में मसाज लेने आया था और न जाने उस मसाज ने क्या जादू किया कि अब अनिरुद्ध रोज आने लगा था.

अनिरुद्ध का रंगोली बहुत ध्यान रखती थी. उसे अनिरुद्ध से राजनीतिक बहस करने में और राजनीतिक गलियारों के बारे मे जानने में बड़ा मजा आता था. अनिरुद्ध शुरू में तो रंगोली को बस एक खूबसूरत महिला ही सम झता था पर बाद में रंगोली की प्रखर बुद्धि से बहुत प्रभावित हो गया.

बहुत सारे मामलों में रंगोली की सलाह अनिरुद्ध के बहुत काम आती थी. वह रंगोली का साथ अपनी जिंदगी में चाहता था परंतु वह 43 वर्ष का तलाकशुदा था. जब अनिरुद्ध ने रंगोली से इस बारे में बात करी तो मानो रंगोली को मन की मुराद मिल गई.

रंगोली के मम्मीपापा ने तो माथा पीट लिया था. रंगोली के पापा मोहित बोले, ‘‘रंगोली अब तक तू ने पूरी उम्र मनमानी करी है पर हम तु झे कुएं में कूदने नहीं देंगे. अनिरुद्ध तु झ से पूरे 16 वर्ष बड़ा है और वह बहुत बदनाम राजनीतिज्ञ है, उस के खिलाफ कितने ही केस चल रहे हैं.’’

रंगोली बोली, ‘‘मैं अपनी मरजी की मालिक और मेरे सपनों की उड़ान एक स्पा पार्लर पर समाप्त नहीं होती है. मैं अपनी उड़ान इस शहर तक नहीं सीमित रखना चाहती हूं. अनिरुद्ध का साथ मेरी उड़ान को नए आयाम देगा, पैसा बहुत कमा लिया है अब थोड़ा सी पावर भी चाहिए.’’

फिर रंगोली और अनिरुद्ध ने कोर्ट में विवाह कर लिया था. अनिरुद्ध से विवाह के पश्चात रंगोली ने राजनीतिक गलियारों में अपना दबदबा बनाना आरंभ कर दिया था. जल्द ही उस के नाम का डंका बजने लगा. रंगोली के मातापिता ने भी अब बेटी से बनाने में ही अपनी भलाई समझी.

रंगोली के वे रिश्तेदार जो उसे चालू और न जाने क्याक्या कहते थे अब वही रिश्तेदार घंटों रंगोली से मिलने के लिए प्रतीक्षा करते रहते थे.

रंगोली के बढ़ते कद से अब अनिरुद्ध को भी परेशानी होने लगी थी. वह अब रंगोली पर मां बनने के लिए दबाव डालने लगा था पर रंगोली आने वाले विधानसभा के चुनाव में लड़ना चाहती थी.

अनिरुद्ध ने रंगोली से कहा, ‘‘रंगोली मु झे अब मेरा वारिस चाहिए.’’

रंगोली ने व्यंग्य से कहा, ‘‘आप ने मु झ से विवाह क्या वारिस पैदा करने के लिए किया था? आप भूल रहे हैं कि आप के पहले विवाह से भी 2 बच्चे हैं जो आप के ही उत्तराधिकारी बनेंगे.’’ अब अनिरुद्ध रंगोली से बेजार सा हो गया था. वो उसे अपनी पत्नी कम प्रतिद्वंद्वी अधिक लगती थी. उसे अच्छे से पता था कि अगर रंगोली को एक बार सत्ता का स्वाद लग गया तो वह उसे भी दूध से मक्खी की तरह निकाल बाहर कर देगी. जब रंगोली को अनिरुद्ध की पार्टी से टिकट नहीं मिला तो वह विरोधी दल में जा कर मिल गई. वहां से उसे टिकट भी मिल गया और मजे की बात वह अपने पति अनिरुद्ध के खिलाफ ही खड़ी हो गई.

अनिरुद्ध विधानसभा के चुनाव के साथ अपनी पार्टी में अपनी साख भी हार चुका था. अब रंगोली और अनिरुद्ध पतिपत्नी थे मगर बस कागजों में रंगोली में जैसेजैसे नए रंग जुड़ रहे थे उस का समीकरण बदलता जा रहा था.

अब रंगोली प्रदेश की युवा नेत्री थी और मुख्यमंत्री की करीबी मानी जाती थी. रंगोली की नजर अब मंत्री के पद पर थी. रंगोली के रातबेरात घर से बाहर रहने के कारण अनिरुद्ध ने उसे अल्टीमेटम दे दिया था, ‘‘मु झ और सत्ता में से एक को चुन लो.’’

रंगोली ने मुसकराते हुए तलाक के कागज अनिरुद्ध को पकड़ा दिए और कहा, ‘‘नेताजी बिना किसी ऐलिमनी के डाइवोर्स दे रही हूं. अब सत्ता ही मेरा प्यार है क्योंकि यह मर्दों की तरह मु झे अपनी जागीर नहीं सम झती है बल्कि वह मु झे मानसम्मान दिलाती है जो कभी कोई भी साथी नहीं दिला पाया था.’’ रंगोली जिंदगी के सभी रंगों से गुजरती हुई अब पूरी होने की ओर अग्रसर थी

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें