‘कटहल’ फेम सान्या मल्होत्रा के हंसमुख चेहरे का राज क्या है, जानें यहां

कर्ली हेयर, खुबसूरत नाकनक्श और हंसमुख अभिनेत्री सान्या मल्होत्रा ने इंडस्ट्री में अपनी एक अलग पहचान बनाई है. दिल्ली की एक पंजाबी परिवार में जन्मी सान्या ने दिल्ली से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की और दिल्ली विश्वविद्यालय के गार्गी कॉलेज से स्नातक की उपाधि प्राप्त की. वह एक ट्रेन्ड बैले डांसर भी है. बहुत कम लोग जानते है कि बचपन में सान्या हकलाया करती थी, जिसे उन्होंने समय के साथ दूर किया.

सान्या वर्ष 2013 में, डांस रियलिटी शो ‘डांस इंडिया डांस‘ में भाग लेने के लिए मुंबई आई थी, लेकिन दुर्भाग्यवश शीर्ष 100 से आगे नहीं जा सकी, हालांकि, उन्होंने इस शो में भाग लेने में नाकाम रहने के बादनृत्य छोड़ दिया, क्योंकि उन्हें लगता था कि ये क्षेत्र उनके लिए ठीक नहीं है,लेकिन मुंबई में रहने के लिए कोशिश करने लगी, इसके लिए उन्होंने शुरुआत में कई विज्ञापनों में मॉडलिंगकिया, लेकिन उनका अभिनय कैरियर की शुरुआत 2016 में आमिर खान की स्पोर्ट्स ड्रामा फिल्‍म दंगल से की थी, जिसमें उन्होंने पहलवान बबीता फोगाट का किरदार निभाया था.इसके बाद उन्‍होंने कॉमेडी-ड्रामा फिल्‍म ‘बधाई हो’,‘फोटोग्राफ’, ‘लूडो’, ‘पगलेट’आदि कई फिल्मों, शोर्ट फिल्मों और वेब सीरीजमें अभिनय किया.सान्या के लिए बॉलीवुड बिल्कुल नई दुनिया थी, क्योंकि उनका कोई फिल्मी बैकग्राउंड नहीं था. इसलिए उन्हें पहचान बनाने में मुश्किल हुई और ये सबके लिए मुश्किल होता है,लेकिन इसे उन्होंने अधिक महत्व नहीं दिया. उनका कहना है कि हर किसी को कुछ उतार-चढ़ाव से गुजरना पड़ता है. सान्या ने अभिनय से पहले आमिर खान के प्रोडक्शन हाउस में कुछ दिनों तक इंटर्न के रूप में भी काम किया इससे उन्हें फिल्मों के बारें में जानकारी अच्छी मिली थी और अभिनय करने में भी आसानी हुई.

नेटफ्लिक्स पर आने वाली कॉमेडी ड्रामा फिल्म ‘कटहल’ में सान्या, पुलिस ऑफिसर महिमा की मुख्य भूमिका निभा रही है. उन्होंने गृहशोभा के साथ ख़ास बातचीत की, आइये जाने सान्या मल्होत्रा के जर्नी की कहानी उनकी जुबानी.

सान्या को हमेशा अलग प्रकार की फिल्मों में काम करना पसंद है, इसलिए वह हर तरह की भूमिका जो रियल लाइफ से जुडी हो उसमें काम करना पसंद करती है. इस फिल्म की खास बात के बारें में जिक्र करती हुई वह कहती है किमैंने कभी ऐसी कहानी के साथ काम नहीं किया है, इसके लेखक अशोक मिश्रा है. यह एक रियल लाइफ की कहानी है और बहुत अधिक रिलेटेबल भी है. इसमें कॉमेडी और मस्ती दोनों है, क्योंकि यहाँ एक राजनेता के दो कटहल चोरी हो जाती है, जिसे पूरा पुलिस फ़ोर्स खोज रहा है, ये बहुत ही मजेदार कांसेप्ट है. वन लाइनर सुनते ही मुझे बहुत पसंद आ गया था और मुझे इसे करने की इच्छा पैदा हुई. कटहल की पूरी शूटिंग ग्वालियर में हुई है. कठिन नहीं था, क्योंकि डायरेक्टर का निर्देशन बहुत अच्छा है, लेकिन संवाद को पकड़ना मेरे लिए मुश्किल था. ग्वालियर की भाषा को सीखने में कुछ समय लगा. एक बार भाषा पर पकड़ हो जाने पर केवल शूट में ही नहीं, बाकी समय में भी मैं वैसी ही भाषा बोलने लगी थी.

पुलिस की भूमिका को निभाना सान्या के लिए आसान नहीं था,वह कहती है कि पुलिस की भूमिका निभाना मेरे लिए एक गर्व की बात है,पुलिस की वर्दी मैंने फिल्म में पहनी है, पर उसकी डिग्निटी और रेस्पोंसिबिलिटी का एहसास मेरे अंदर आया है. इसके लिए मैं ग्वालियर गई थी, वहां पर पुलिसवालों ने मेरा बहुत साथ दिया, मुझे उनके काम करने के तरीके को समझना था. मैं वहां लेडी पुलिस ऑफिसर से मिली, उनके साथ 2 दिन समय बिताई. वहां मैंने उनके काम को देखकर बहुत प्रभावित भी हुई, क्योंकि वह महिला ऑफिसर अपनी ड्यूटी के साथ-साथ घर भी सम्हाल रही थी. ये सामंजस्य सिर्फ एक महिला पुलिस ही कर सकती है.वह एक पत्नी के साथ-साथ माँ भी है. ये सब मेरे लिए प्रेरणादायक रही.

 

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नहीं बनी टाइपकास्ट

टाइपकास्ट न होने को लेकर सान्या का कहना है कि मैंने सीरियस और ड्रामा हर तरह की फिल्में की है. यही वजह है कि मुझे अलग वैरायटी की फिल्मों में अभिनय का मौका भी मिला है,दंगल,पटाखा, लूडो, पगलेट आदि सारी फिल्में एक दूसरे से अलग और ख़ास चरित्र की है. कभी ड्रामा, कभी रोमांस, कभी कॉमेडी, कभी एक्शन है. मैं खुद को खुशनसीब समझती हूँ कि निर्देशक भी मुझे अपनी फिल्मों में इमेजिन करते है और मुझे एप्रोच करते है. मुझे एक्टिंग करना बहुत पसंद है और आप जो भी करवा लो, कर सकती हूँ.

हर फिल्म ने सिखाया बहुत कुछ

दंगल से अबतक की जर्नी में आप खुद कितनी ग्रो की है? पूछने पर अभिनेत्री का कहना है, मुझे लगता है कि कुछ सालों तक मैं अपने काम से खुश नहीं रहती थी. फिल्में रिलीज भी हुई, सबने प्रशंसा भी की, लेकिन मुझे कुछ कमी मुझमे नजर आती थी, लगता था मैं कुछ और अधिक अच्छा कर सकती हूँ. धीरे-धीरे अब लगने लगा है कि मैं ठीक हूँ और अच्छा काम कर रही हूँ, ये शिफ्ट फिल्म ‘पगलैट’ के बाद मुझमे आई है, क्योंकि इस फिल्म के बाद मेरे कैरियर में भी काफी बदलाव आया. मुझे काफी कॉन्फिडेंस मिला. अब मैं समझने लगी हूँ कि मेरी जर्नी अब ठीक चल रही है.

करती हूँ मेहनत

एक्टिंग में रियलिटी को दर्शाने के लिए सान्या बहुत मेहनत करती है, वह हंसती हुई कहती है कि मैं बहुत मेहनत खुद से करती हूँ,लेकिन फिल्ममेकिंग एक टीम एफर्ट है. मैं रोल छोटा हो या बड़ा मेहनत में कोई कमी नहीं करती और चरित्र को समझने की पूरी कोशिश करती हूँ. स्क्रिप्ट में मैं खुद से क्या डाल सकती हूँ इसकी कोशिश पहली फिल्म दंगल से ही रही है. वैसे देखा जाय तो एक कलाकार से अधिक डायरेक्टर का ही फिल्म को बनाने में योगदान होता है. वे जैसा चाहते है, एक्टिंग वैसी ही करनी पड़ती है. आगे मैं फिल्म, जवान, साम बहादुर आदि कई फिल्में कर रही हूँ.

है चुनौती ओटीटी को

सान्या आगे कहती है कि ओटीटी से फिल्म इंडस्ट्री में बहुत बदलाव आया है,क्रिएटिविटी बहुत बढ़ी है, शोर्ट फिल्म, वेब सीरीज,आदि बहुत कुछ बनाया जा रह है, इससे केवल कलाकार को ही नहीं, लेखक, निर्देशक, टेकनीशियन आदि सभी को काम मिल रहा है, ओटीटी के लिए फिल्में अधिक रिलेटेबल और अच्छी कहानियों को दिखाने की चुनौती है.

 

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हँसे खुलकर

सान्या की हंसमुख चेहरे के राज के बारें में पूछने पर हंसती हुई कहती है कि मेरी हंसमुख होने की वजह मेरी सोच है और मैं किसी बात को कभी भी अधिक नहीं सोचती, कम चीजों में ही खुश रहती हूँ और खुश रहना मुझे अच्छा लगता है. भूमिका कितनी भी सीरियस हो या कॉमेडी, मुझे हंसने के लिए कुछ खोजना नहीं पड़ता. फिल्मे भी मैं मनोरंजन वाली करना चाहती हूँ, क्योंकि हर व्यक्ति के जीवन में समस्याएं है और सीरियस फिल्में देखना कोई पसंद नहीं करता.

माँ है मेरी दोस्त

माँ के साथ बिताये पल के बारें में पूछने पर सान्या कहती है कि मैं अपनी माँ के साथ हर बात को शेयर करती हूँ, ऐसा किये बिना मुझे चैन नहीं होता. ये बचपन से मेरी आदत है. स्कूल से घर आने के बाद जब माँ किचन में रोटियां बना रही होती थी, मैं दरवाजे के आगे खड़ी होकर स्कूल में टीचर, बच्चों आदि से जुडी सारी बातें घंटो शेयर करती थी. आज भी अगर मुझे किसी प्रकार की कोई समस्या है तो माँ से शेयर अवश्य करती हूँ. माँ से अधिक वह मेरी दोस्त है. माँ के हाथ का बना राजमा चावल मुझे बहुत पसंद है. अभी मैं दिल्ली में हूँ, उन्हें पता है, लेकिन अभी तक राजमा चावल भेजा नहीं है. मैं एकबार उन्हें फिर से याद दिलाने वाली हूँ.

दिया सन्देश

मेरा मेसेज सभी से है कि हमेशा अच्छी और मनोरंजक फिल्में देखे, क्योंकि इससे मूड पर असर करता है, आप ख़ुशी का अनुभव कर सकते है. खुश रहना जीवन में बहुत जरुरी है. वयस्कों से लेकर यूथ सभी को जीवन में खुश रहने के बारें में खुद को सोचना है, ख़ुशी कोई देता नहीं, उसे खुद ही ढूँढना पड़ता है. मैंने इन कॉमेडी फिल्मों को कई बार देखा है, जिसमे अंगूर, हेराफेरी, हाउसफुल आदि फिल्में है, इसे देखने से मेरे अंदर ख़ुशी का अनुभव होता है और मेरा मूड अच्छा हो जाता है.

इंडिपेंडेंट फिल्ममेकर की किस समस्या का जिक्र कर रहे है संजय छाबड़िया, पढ़े इंटरव्यू

निर्माता संजय छाबड़िया ने बचपन से फिल्म और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों को अपने घर में आते देखा है, क्योंकि उनके पिता गोरधन छाबड़िया भी एक निर्माता रहे है. उनका सम्बन्ध हिंदी सिनेमा के प्रमुख फाइनेंसरों के साथ रहा. वे गेलेक्सी एक्सपोर्ट के साथ मिलकर ओवरसीज में फिल्में डिस्ट्रीब्यूट किया करते थे. यही वजह है कि संजय छाबडिया का भी शुरू से फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ाव रहा है.

मराठी इंडस्ट्री के साथ पिछले 20 वर्षों से फिल्मों का निर्माणकर रहे एवरेस्ट एंटरटेनमेंट के शांत और सौम्य स्वभाव के संजय छाबडिया मानते है कि मराठी इंडस्ट्री संस्कृति और कला प्रेमी है और हर तरह की फिल्में बनाना पसंद करते है, इसलिए उनके साथ काम करना उन्हें पसंद  है. अभी उन्होंने मराठी फिल्म ‘महाराष्ट्र शाहिर’है, जो लोक गायक, लेखक, एक्टर साहिर साबलेकी जीवनी पर आधारित है,ऐसेअनसंग हीरो की म्यूजिकल बायोपिक फिल्म को बनाते हुए वे व्यवसाय से अधिक युवा पीड़ी को कुछ अच्छा दिखाने के बारें में सोचतेहै, क्योंकि आज के युवा इंटेलिजेंट है और उन्हें क्या देखना है, वे जानते है. संजय ने अपनी जर्नी के बारें में गृहशोभा से ख़ास बात की और बताया कि इस मैगज़ीन को वे सालों से पढ़ते आ रहे हैं. ये उन्हें उनकी माँ और उनकी पसंदीदा मैगज़ीन है.

बायोपिक में ड्रामा होना जरुरी

क्या बायोपिक बनाना कमर्शियली रिस्की नहीं होता ? पूछने पर संजय बताते है कि जिस बायोपिक में ड्रामा हो, उसे बनाने में मजा आता है. किसी बायोपिक को डॉक्यूमेंट्री बनाने से कोई उसे देखना पसंद नहीं करता और मैं बॉक्सऑफिस अपील को देखता हूँ. अंग्रेजी फिल्म ‘एल्विस’भी बायोपिक है, जिसमे ड्रामा है और दर्शकों ने काफी पसंद किया. ये मराठी फिल्म भी ड्रामा वाली म्यूजिकल बायोपिक है, जिसे सभी को पसंद आयेगा.

है चुनौतियाँ

कोविड के बाद लोग थिएटर में जाना पसंद नहीं करते और ओटीटी ने एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री को पूरी तरह से काबू में कर लिया है, ऐसे में किसी फिल्म मेकर के लिए दर्शकों को थिएटर तक लाना बड़ी चुनौती होती है. संजय कहते है कि ये वाकई एक बड़ी चुनौती है,आज थिएटर में लोग उसी फिल्म को देखने जाते है, जिसकी प्रमोशन उन्हें थिएटर तक खींचकर ले जाती है औरउन्हें लगता है कि ऐसी कोई चीज, जो इस फिल्म में है, तो वे थिएटर में जाते है. मसलन उसका संगीत अच्छा हो, उसका प्रोडक्शन स्केल बड़ा हो,जो घर पर देख पाना संभव नहीं,फिल्म की एक्टिंग में जो लोग जुड़े है, वे बड़े हो, तब जाते है. पेंडेमिक के बाद बहुत कठिन हो चुका है, हर फिल्म को देखने दर्शक हॉल तक नहीं जाते. आज के दर्शक स्मार्ट हो चुके है, वे चुनते है कि कौन सी फिल्म में उन्हें जाना है,किसमें नहीं. ऑडियंस आज चूजी हो चुका है. छोटी फिल्मों के लिए तो ऑडियंस को हॉल तक खीच लाना बहुत चुनौती होती है.

हूँ प्रेरित मराठी संस्कृति से

मराठी संस्कृति से संजय बहुत प्रेरित हूँ उनका कहना है कि महाराष्ट्र का कल्चर बहुत ही अच्छा है, यहाँ के थिएटर से लेकर फिल्में सभी इनकी संस्कृति को दिखाती हुई होती है, इतना ही नहीं मैंने कई संभ्रांत परिवार के बच्चों को भी मराठी में बोलते हुए देखा है,जबकि दूसरे रीजनल कम्युनिटी में बच्चे हिंदी और अंग्रेजी ही बोलते है. साहित्य इनका बहुत रिच है.

मिली प्रेरणा

फिल्म निर्माण की प्रेरणा के बारें में पूछने पर संजय कहते है कि मैं इस व्यवसाय में पिछले 20 वर्षों से हूँ. मैंने वर्ष 2003 में शुरुआत की थी. हमने एक होम वीडियो पब्लिशिंग कंपनी एवरेस्ट मल्टीमीडियाके रूप में शुरुआत की थी, तीन साल की छोटी अवधि में 125 से अधिक फिल्मों की एक मजबूत वीडियो लाइब्रेरी का निर्माण किया, जिसमें ‘खुदा गवाह’, ‘आंखें’, ‘अर्जुन’, ‘शोला और शबनम’, ‘जैसी फिल्में शामिल है. नागिन’, ‘जानी दुश्मन’, ‘कटी पतंग’, ‘अमानुष’ और ‘नरम गरम’ आदि फिल्में जो एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की अच्छी मनोरंजक फिल्मों में जानी जाती है. इसके बाद मैंने मराठी इंडस्ट्री की ओर रुख किया, क्योंकि तबतक मराठी फिल्मों का डिस्ट्रीब्यूशन अच्छी तरह नहीं हो पा रहा था और मेरे लिए ये एक अच्छा अवसर था. मैंनेइसे आगे लाने में पूरी मेहनत की है. मराठी इंडस्ट्री से मुझे सम्मान मिला है. अभी मैं बहुत सारी मेनस्ट्रीम की फिल्में कर रहा हूँ.मैं साल में करीब 4 फिल्में प्रोडक्शन करने की कोशिश करता हूँ. मैंने कई पुरस्कार भी जीते हैं.

संजय आगे कहते है कि वे दिन गए जब व्यावसायिक वजहों को अधिक देखा जाता था और फिल्मों में सुपरस्टार की मुख्य भूमिका होना जरुरी माना जाता था. अभी हर कलाकार सुपरस्टार है.  कहानी और विषय अब जरुरी है, क्योंकि दर्शक इंटेलिजेंट है.  कहानी मजबूतहोने पर हमें सुपरस्टार की आवश्यकता नहीं होती.इसलिए मैंने कई महिला प्रधान फिल्मों का भी निर्माण किया है.आगे दो मराठी फिल्मे, वेब सीरीज, गुजराती फिल्म बना रहे है.

मिली सफलता

मराठी इंडस्ट्री में जाने के लिए फिल्ममेकर संजय छाबडिया को एक हिम्मत की आवश्यकता थी, क्योंकि इसके  रीजनल सेगमेंट और उसके डिस्ट्रीब्यूशन को समझना आसान नहीं था, जिसमे स्टोरीटेलिंग, फिल्मों का निर्माण, दर्शकों की रूचि आदि को समझने में भी काफी समय लगा. वे कहते है कि मैंने सबसे पहले महेश मांजरेकर की महत्वाकांक्षी पुस्तक ‘मी शिवाजीराजे भोसले बोल्तॉय’ की फिल्म के निर्माण में हाथ बढाया. फिल्म बॉक्सऑफिस पर हिट हुई, क्योंकि यह फिल्म न केवल अब तक की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली मराठी फिल्म बनी,बल्कि इसने कई लोगों को प्रेरित भी किया.इसके बाद ‘शिक्षणच्या आइचा घो’, ‘मोरया’ और ‘तुकाराम’ जैसे यादगार क्लासिक्स फिल्मों का प्रोडक्शन किया, जिन्हें समीक्षकों के साथ-साथ व्यावसायिक सफलता भी मिली. मैं फिल्में पैशन के साथ बनाता हूँ, व्यावसायिक दृष्टिकोण को अधिक नहीं देखता. मुझे कहने में ख़ुशी होती है कि फिल्ममेकर राजकुमार हिरानी की फिल्में ऐसी होती है, जो एक अच्छी फिल्म होने के साथ-साथ अच्छा व्यवसाय भी करती है. सभी फिल्ममेकर को ऐसी कोशिश हमेशा करनी चाहिए.

मिलकर करें काम

संजय कहते है कि कॉर्पोरेट और इंडिपेंडेंट फिल्ममेकर दोनों को साथ मिलकर काम करना चाहिए, क्योंकि एक इंडिपेंडेंट फिल्ममेकर अपने बलबूते और रिस्क पर पैसा लगाता है, फिल्म रिलीज करता है. इसमें इंडिपेंडेंट फिल्ममेकर स्टोरी, स्टारकास्ट और दर्शकों के रुझान पर बहुत अच्छी तरह से सोच-विचार करता है, क्योंकि खुद का पैसा लगाता है. कॉर्पोरेट भी छानबीन करता है,लेकिन उनका एक अलग स्टाइल ऑफ़ वर्किंग होता है.उनके काम लेने के तरीके, डिस्ट्रीब्यूशन और इंफ्रास्ट्रक्चर अच्छी होती है. दोनों की अच्छी पार्टनरशिप होने पर दोनों को लाभ होता है और आजकल ये हिंदी और साउथ की फिल्मों में हो भी रहा है. क्रिएटिविटी का ज्ञान, जो इंडिपेंडेंट फिल्ममेकर के पास होता है, कोर्पोरेट के पास नहीं होता. एक इंडिपेंडेंट फिल्ममेकर के पास क्रिएटिव एबिलिटी, अच्छी कहानियां और फिल्मे बनाने की ताकत होती है, जबकि कॉर्पोरेट की ताकत है, अच्छी तरह से लोगों के पास फिल्म को पहुँचाना. दोनों में ही खूबियाँ और खामियां है,इसलिए दोनों को मिलकर काम करना जरुरी है.

गुलदस्ता – भाग 1: गलत पते पर आखिर क्यों गुलदस्ता आता था?

डोर बेल बजी तो अमन ने दरवाजा खोला फिर वही गलत पते पर बुके वाला खड़ा था.

‘‘अरे भैया फिर?’’ अमन ने अपना मत्था ठोक लिया, ‘‘हर शनिवार ही गलत पते पर गुलदस्ता लाते हो. भाई क्या चाहते हो? यह ऊपर 40 नंबर वाले का बुके है. अराधना नाम देखो न. 38 नंबर हमारा है. नाम अमन है. कितनी बार बताना पड़ेगा. जो भेजता है उस को बोलते क्यों नहीं कि सही पता लिखा करे…’’

‘‘प्लीज साहब आप ही दे देना… 40 नंबर वाली मैडम बहुत देर से आती है न? मुझे दुकान बंद कर 7 बजे अपने कमरे पर जाना होता है… मां बीमार है न साहब…’’ लड़का दांत निपोर कर यों कहता कि उसे लेना ही पड़ता.

‘‘मैडम को आप ही बोल देना साहब कि भेजने वाले को सही पता, लिखाने को.’’

‘‘अरे मेरा छुट्टी के दिन बस यही काम रह गया है कि तू देता जाए और मैं पहुंचाता जाऊं और वह भी बुके एक लड़की को… यह 8वां शनिवार है. आगे से मैं लूंगा नहीं… तू ही और्डर लिया कर न…’’

‘‘क्या बात करते हो साहबजी 4 पैसे किसी तरह जोड़ पाता हूं, गरीब के पेट पर लात न मारना साहब…’’ वह रोंआसा सा हो गया.

‘‘ठीक है ठीक है जा भई जान मत खा ला दे दे दूंगा… मैं ही कुछ करता हूं तेरी मैडम का…’’ अमन ने बुके ले कर दरवाजा बंद कर दिया. लड़कियों से बात करने में वह वैसे ही घबराता था. इसीलिए उन से बचता रहता.

‘क्या मुसीबत है,’ सोचते हुए बुके एक ओर टेबल पर रखा. फूल कुम्हलाएं नहीं इसलिए हमेशा की तरह जग में पानी ला कर उस में उसे खड़ा कर रख दिया. फिर सोचने लगा कि अब इंतजार करूं उन मैडम का कि कब उन के कदमों की आहट सुनूं और मैं झट उन की अमानत उन्हें पेश करूं… लानत है यार… दिनभर काम से थका मैं न टीवी देखूं, न किसी से फोन पर बात ही करूं कि कहीं आन की आहट न सुनाई दे और फिर अमानत पहुंचाने में बहुत देर हो जाए या इसी सब में भूल जाऊं तो सुबह उठते ही जा कर जबरदस्ती ऐटीकेट में सौरी कहते हुए देना पड़े… अजीब मुसीबत है… 9 बजे का अलार्म ही लगा लेता हूं. आज तो जा कर उस की घंटी बजा कर बोल ही दूंगा कि अपने वैलविशर को सही पता लिखने को तो बोल दे और बुके के लिए शनिवार शाम को घर पर ही रहा करे, वह अपना मन पक्का कर रहा था.

अमन कौफी बना कर ले आया. लैपटौप पर मंडे को अपनी क्लास के लिए एनीमेशन प्रोजैक्ट को ही चैक करने लगा. अमन ऐनीमेशन इंस्टिट्यूट में हाल ही में नियुक्त हुआ था. वहां से निकल कर कोचिंग सैंटर में पढ़ाने जाता. फैमिली में मातापिता और भाई का परिवार था जो बरेली में रहता था. यहां वह अकेला ही था.

8 बजे उस का टिफिन आ गया. खाने के बाद वह उनींदा हो चला. पर जागना होगा मैडमजी का गुलदस्ता जो देना है. सोचते हुए सो गया. जब अलार्म बजा तब उसे पता चला. बालों को ठीक किया, पांवों में स्लिपर्स डालीं, ‘बुके दे आऊं जान छूटे अब तक तो आ ही गई होगी मैडम… आज बोल ही दूंगा भेजने वाले को अपना सही पता बता दे, वरना रोजरोज की ड्यूटी तो अब करने से रहा…’ सोच वह बड़बड़ाता हुआ सीढि़यां चढ़ गया.

बैल दबाई तो लड़की बाहर आई.

‘‘यह आप का बुके फिर मुझे डिलिवर कर गया. दरअसल, गलती उस की भी नहीं भेजने वाला नाम तो आप का लिखता है पर घर का नंबर मेरा. मेरे बताने पर वह लड़का बारबार यहां आता है पर आप का घर लौक मिलता है, फिर वह मुझे ही…’’ कहते हुए उस के कान व गाल लाल हो उठे थे.

बुके हाथ में ले कर लड़की का चेहरा पहले के जैसे ही खिल उठा. उस की घबराहट, शर्म का मजा लेते हुए मुसकरा कर उस ने थैंक्स कहा और डोर बंद करने लगी.

‘‘एक मिनट मैडम, आप उन्हें सही पता बता दें तो बेहतर होगा और शनिवार शाम घर पर रहा करें… घबरा कर उस ने शेष शब्दों को अपने अंदर अपनी सम?ा से समय पर ही रोक लिया.

‘‘किसे?’’

‘‘अरे उसे जो आप को बुके मतलब यह गुलदस्ता भेजता है…’’ कह मन में सोचने लगा कि दिमाग से थोड़ा हटी हुई है क्या.

‘‘मुझे क्या मालूम? पता नहीं कौन भेजता है.’’

‘‘अरे तो आप रखती क्यों हैं?’’

‘‘फिर आप रखेंगे क्या? तो लीजिए…’’ उस ने बुके उस की ओर बढ़ा दिया.

‘‘अजीब बात है… भला मैं कैसे ले सकता हूं?’’

‘‘फूलों का क्या कुसूर 2 दिन की वैसे भी जिंदगी है बेचारों की… फेंके भी तो नहीं जा सकते…’’ वह उन्हें चेहरे के पास ला कर खिल उठी और गहरी सांस ले खुशबू सूंघने लगी.

‘‘अजीब लड़की है आप जिस को जानती नहीं उस से बुके कैसे ले लेती हैं? कुछ ऊंचनीच हो जाए… समझ नहीं आता पुलिस को रिपोर्ट क्यों नहीं करतीं?’’

‘न जाने किस अधिकार’ अपनेपन से वह उस पर ?ाल्ला उठा था. उस ने बाद में महसूस किया. किसी और का उसे इस तरह फूल देना उसे क्यों इतना बुरा लग रहा है… कहीं उस के प्रति उस का ?ाकाव तो नहीं हो रहा…? वह सोच में कुछ पल गुम रहा.

‘‘फिर तो आप ही पकड़े जाओगे… आप से ही तो मैं ने लिया है. आप मेरे पड़ोसी हो बस इतना जानती हूं,’’ वह हंसी थी.

अमन सीढि़यां उतरने को हुआ कि पीछे से आवाज आई, ‘‘अरे आप रखना चाहें तो आप ही रख लें अमन.’’

वह हैरानी से उसे देखने लगा.

‘‘आतेजाते आप का नाम कई बार पढ़ा है… आप ने पहले भी बताया था अपना 38 फ्लैट नंबर…’’ वह मुसकराई.

‘‘मैं ही डिलिवरी बौय को बोल दूंगा और्डर ही न लिया करे या उस का नामपता ले ले जो भेजता है, फिर बताता हूं उसे.’’

‘‘अरे किसी बेचारे गरीब के पेट पर क्यों लात मारेंगे… उस का क्या कुसूर… न फूलों का कुसूर… वह आप को दे जाता है आप मुझ तक… इस में बुरा क्या है… हां आप को थोड़ी तकलीफ जरूर होती है. आप उस से बोलिएगा मेरे दरवाजे पर ही रख जाया करेगा. 2-3 घंटे यों ही पड़े रहेंगे, बेचारे थोड़ा मुरझाएंगे ही तो

क्या हुआ…’’

वह फिर उतरने को हुआ कि फिर आवाज आई, ‘‘मगर शायद उन के मुरझने का दर्द आप को भी होता इसलिए आप इन्हें पानी में रख देते हैं सो नाइस ऐंड स्वीट औफ यू… थैंक्स अ लौट,’’ कहते हुए वह मुसकराई कि बंदा कितना सीधासादा है…

सरप्राइज: मां और बेटी की अनोखी कहानी- भाग 1

अजयटूर पर जाने से पहले पास खड़ी अपनी मां तनुजा को गंभीर देख मुसकराते हुए बोला, ‘‘अरे मां, 1 हफ्ते के लिए ही तो जा रहा हूं, आप क्यों मेरे हर बार जाने पर इतना चुप, उदास हो जाती हैं?’’

तनुजा ने फीकी हंसी हंस कर पास खड़ी अजय की पत्नी रिनी को देखा जो उन्हें घूरघूर कर देख रही थी.

अजय ने फिर कहा, ‘‘मां, रिनी को देखो, इस ने कितनी जल्दी मेरी टूरिंग जौब से एडजस्ट कर लिया है,’’ फिर तनुजा के गले में प्यार से बाहें डाल दीं. कहा, ‘‘टेक केयर, मां. शनिवार को सुबह आ ही जाऊंगा. बाय रिनी, तुम दोनों अपनाअपना ध्यान रखना.’’

अजय चला गया, घर का दरवाजा बंद कर रिनी ने फौरन अपने नाइट सूट की जेब में रखा अपना मोबाइल निकाला और कोई नंबर मिलाया और फिर अपने बैडरूम की तरफ चली गई. तनुजा वहीं सोफे पर बैठ गईं. रिनी ने भले ही अपने बैडरूम का दरवाजा बंद कर लिया था पर वह इतनी धीरे नहीं बोल रही थी कि तनुजा को सुनाई न पड़े. टू बैडरूम फ्लैट में रिनी दरवाजा बंद कर के कितना भी यह सोचे कि वह अकेले में बात कर रही है पर आवाज तनुजा के कानों तक पहुंच ही जाती है हमेशा. इस का रिनी को अंदाजा ही नहीं है.

तनुजा ने सुन लिया कि अब रिनी अपने बौयफ्रैंड यश के साथ मूवी और लंच के लिए जा रही है. आधे घंटे के अंदर रिनी सजीधजी पर्स उठा कर बाहर निकल गई, तनुजा से एक शब्द भी बिना बोले. तनाव से तनुजा का सिर भारी होने लगा. बैठीबैठी सोचने लगीं कि मांबेटे के जीवन पर यह लड़की ग्रहण बन कर कहां से आ गई. अजय ने जब तनुजा को रिनी के बारे में बताया था तो तनुजा को खुशी ही हुई थी. उन के मेहनती, सरल से बेटे के जीवन में आई इस लड़की का तनुजा ने दिल खोल कर स्वागत किया था.

इस घर में 2 ही तो जने थे, मांबेटा. अजय के पिता तो एक सड़क दुर्घटना में सालों

पहले इस दुनिया से जा चुके थे. रिनी को उन्होंने खूब लाड़प्यार से बहू स्वीकारा था. उस के मातापिता भी इसी शहर में थे. दोनों कामकाजी थे. रिनी अकेली संतान थी. तनुजा मौडर्न, सुशिक्षित महिला  थीं. वे काफी साल अध्यापन में व्यस्त रही थीं.

आज तनुजा बैठ कर पिछले साथ की घटनाओं पर फिर एक बार नजर डाल रही थीं. विवाह के बाद कुछ दिन तो सामान्य ही बीते थे पर रिनी का रवैया उन्हें तब खटकने लगा था जब अजय के टूर पर जाते ही रिनी का कोई न कोई दोस्त घर जा जाता था. लड़कियां तो कभीकभार इक्कादुक्का ही आती थीं, लड़के कई आते थे. तनुजा पुराने विचारों की भी नहीं थीं कि लड़कीलड़के की दोस्ती को गलत ही समझे पर यहां कुछ तो था जो उन्हें खटक रहा था. यही यश एक दिन आया था. उन्हें हैलो आंटी कहता हुआ सीधे रिनी के बैडरूम में चला गया था. तनुजा को बहुत गुस्सा आया था कि यह कौन सा तरीका है. तनुजा ने रिनी को आवाज दी तो यश ने बैडरूम के बाहर आ कर कहा, ‘‘आंटी, रिनी के सिर में दर्द है, वह आराम कर रही है.’’

तनुजा ने पूछ लिया, ‘‘तुम क्या कर रहेझ्र हो फिर?’’

‘‘उस के पास बैठा हूं, रिनी ने ही मुझे फोन पर बुलाया है,’’ कह कर यश ने बैडरूम का दरवाजा बंद कर लिया.

तनुजा के तनमन में अपमान व क्रोध की एक ज्वाला सी उठी. उन का मन हुआ कि रिनी के बैडरूम का दरवाजा भड़भड़ा कर खुलवा दें और यश को घर के बाहर कर दें पर ऐसा कुछ करने की नौबत ही नहीं आई.

रिनी ही स्लीवलैस पारदर्शी गाउन में उन के सामने पैर पटकते हुए खड़ी हो गई, ‘‘आप आज यह बात साफसाफ जान ही लें कि मैं अपनी मरजी से जीने वाली लड़की हूं, मैं किसी से नहीं डरती. और हां, अपने बेटे से मेरी शिकायत करने के लिए मुंह खोला तो अंजाम क्या होगा, इस की कल्पना भी आप नहीं कर सकतीं.’’

तनुजा ने डांट कर पूछा, ‘‘क्या कर लोगी? बेशर्म लड़की.’’

‘‘आप और आप के बेटे के खिलाफ पुलिस स्टेशन जा कर शिकायत कर दूंगी… मारपिटाई और दहेज का केस कर मांबेटे को जेल में डलवा दूंगी… जानती हैं न कानून आजकल लड़की की पहले सुनता है.’’

तनुजा पसीने से नहा गईं कि यह बित्ती सी लड़की उन्हें धमकी दे रही है. उफ, हम कहां फंस गए? मेरे शरीफ बेटे के जीवन में यह लड़की कहां से आ गई. थोड़ी देर बाद रिनी यश के साथ बाहर चली गई.

और एक अकेला यश ही नहीं, अरुण, ईशान और अनिल भी रिनी के पास आतेजाते रहते थे. तनुजा के रातदिन तो आजकल इसी चिंता में बीत रहे थे कि किस तरह बेटे को इस से छुटकारा मिले. उन्होंने एक दिन रिनी से कहा, ‘‘तुम अजय के जीवन से चली क्यों नहीं जाती? इन्हीं में से एक के साथ रहना.’’

रिनी ने टका सा जवाब दिया, ‘‘नहीं, रहूंगी तो यहीं, मैं एक के साथ बंध कर नहीं रह सकती.’’

‘‘तो फिर अजय से विवाह क्यों किया?’’

‘‘मम्मीपापा मुझ से परेशान थे. कहते थे शादी कर यहां से जाओ. यहां सिर्फ आप थीं. बंधना मेरा स्वभाव ही नहीं. अच्छा होगा, आप मुंह बंद रखें और जैसे मुझे जीना है, जीने दें. इसी में मांबेटे की भलाई है.’’

टूर पर अजय रोज तनुजा से बात करता था, रिनी से भी संपर्क में रहता था.

तनुजा रिनी के अभिनय पर हैरान रह जाती थी.

अजय टूर से आया तो शनिवार, रविवार दोनों दिन रिनी आदर्श पत्नी की तरह अजय के आगेपीछे घूमती रही, उस की पसंद की चीजें बनाती रही. तनुजा को गंभीर देख अजय ने हंस कर पूछा, ‘‘क्यों मां, मेरे पीछे सासबहू में झगड़ा हुआ क्या?’’

रिनी फौरन बोली, ‘‘हम सासबहू हैं ही नहीं, हम तो मांबेटी हैं.’’

तनुजा चुप रहीं. कई बार मन में आया कि अजय को सब सचसच बता दें… रिनी के चरित्र की पोलपट्टी खोल कर रख दें पर रिनी ने कानून की धमकी दी थी और वे जानती थीं कि मांबेटा दोनों परेशानी में पड़ सकते हैं. आजकल वे रातदिन यही सोच रही थीं कि कैसे इस बेलगाम लड़की से छुटकारा मिले.

आगे पढ़ें- क्या अजय को पता चली रिनी की सच्चाई?

Summer Special: आप भी ट्राय करें त्वचा की रंगत निखारने वाले ये 4 उबटन

मौसम में परिवर्तन, तेज हवा, धूल व प्रदूषण से त्वचा निरंतर प्रभावित होती है. ऐसे में उस की उचित देखभाल न की जाए तो असमय ही चेहरे की त्वचा झुर्रियों व झांइयों का शिकार होने लगती हैं. अपनी त्वचा की प्रकृति के अनुसार घरेलू उबटनों का प्रयोग कर के उसे स्वस्थ सुंदर व चमकदार बनाया जा सकता है.

सौंदर्य विशेषज्ञा डाली कपूर कहती हैं कि उबटन से त्वचा कांतिमय बनती है. उस में गजब का निखार आ जाता है. तभी तो शादी के 1 माह पहले से दुलहन को रोज उबटन लगाया जाता है. बस इस बात का ध्यान रखना आवश्यक है कि उबटन के लिए जिस सामग्री का इस्तेमाल कर रही हैं वह आप की त्वचा के अनुकूल हो, साथ ही जब उबटन को स्क्रब करें तो हलके हाथों से करें. ताकत के साथ उबटन को न छुड़़ाएं. ऐसा करने से त्वचा क्षतिग्रस्त हो सकती है. उस पर रैशेज पड़ सकते हैं. हलके हाथों से गोलाई में घुमाते हुए उबटन हटाएं.

फायदे अनेक

उबटन के प्रयोग से त्वचा में नमी व चमक बनी रहती है. वह मृत त्वचा को हटा कर त्वचा को नई ताजगी प्रदान करता है. उबटन के प्रयोग से त्वचा का रक्तसंचार सुचारू बना रहता है, क्योंकि इस के उतारने में त्वचा की खुद ही मालिश हो जाती है. उबटन रंग को भी निखारता है. झुर्रियों, झांड़यों से त्वचा को छुटकारा दिलाता है.

ज्यादातर उबटनों में हलदी का प्रयोग किया जाता है. अत: त्वचा कई रोगों से बची रहती हैं. अनेक लाभ होने के बावजूद उबटन का प्रयोग सदैव अपनी त्वचा के अनुरूप ही करना चाहिए. जैसे सूखी त्वचा के लिए कभी खट्टे फल जैसे नीबू, संतरे का रस प्रयोग नहीं करना चाहिए.

1 रंगत निखारने का उबटन

– 2 चम्मच मलाई, 1 चम्मच बेसन व चुटकी भर हलदी मिला कर पेस्ट बना कर चेहरे पर लगाएं. 10-15 मिनट बाद चेहरा धो ले. रंगत निखरने लगेगी.

– 1 चम्मच उरद दाल को कच्चे दूध में भिगो दें. पीस कर पेस्ट बनाएं. फिर इस में थोड़ा सा गुलाबजल मिला कर चेहरे पर लगाएं. थोड़ी देर सूखने दें. फिर धीरेधीरे गोलाई में रगड़ते हुए उतार दें और चेहरे को धो लें. त्वचा चमक उठेगी.

– 2 चम्मच बेसन, 1 चम्मच सरसों का तेल व थोड़ा सा दूध मिला कर पेस्ट बना लें. पूरे शरीर पर इस उबटन को लगा लें. कुछ देर बाद हाथ से रगड़ कर छुड़ाएं और नहा लें. त्वचा मुलायम हो जाएगी.

– मसूर की दाल को पीस कर पाउडर बना लें. फिर 2 चम्मच दाल के पाउडर में 1 अंडे की जरदी मिला कर पेस्ट बना लें. इस में 2 बूदें नीबू का रस व 1 बड़ा चम्मच कच्चा दूध मिला कर रोज चेहरे पर लगाएं. सूखने पर छुड़ा लें और चेहरे को ठंडे पानी से धो लें.

– 1 चम्मच दही, 1 बड़ा चम्मच बेसन, चुटकी भर हल्दी व 2-3 बूंदें नीबू का रस मिला कर गाढ़ा लेप तैयार करें. इसे हाथपांवों चेहरे व बाकी शरीर पर लगा कर 5-10 मिनट लगा रहने दें. फिर धीरेधीरे हाथ से छुड़ा कर नहा लें.

– 1 चम्मच मुलतानी मिट्टी पाउडर में थोड़ी सी मलाई व कुछ बूदें गुलाबजल की मिला कर पेस्ट बना लें. इसे चेहरे पर लगा कर सूखने दें. फिर ठंडे पानी से चेहरा धो लें.

– 1 चम्मच सरसों को दूध में मिला कर बारीक पीस लें, फिर चेहरे पर लगाएं. सरसों के उबटन से न केवल रंगत में निखार आएगा, त्वचा की चमक भी बनी रहेगी.

– दही त्वचा की रंगत निखारता है. नीबू से तैलीयता कम होती हैं. इन दोनों को मिला कर बनाया गया उबटन त्वचा को निखारता है.

– खरबूजे और सीताफल के बीजों को बराबर मात्रा में ले कर पीस लें. फिर दूध मिला कर चेहरे और गरदन पर लगाएं. फिर छुड़ा कर नहा लें. कुछ दिनों के प्रयोग से रंगत निखरने लगेगी.

– 1 ब्रैडस्लाइस को थोड़े से दूध में भिगो कर चेहरे पर लगाएं. 5-10 मिनट बाद रगड़ कर छुड़ा लें. ताजे पानी से चेहरा धो लें. मृत त्वचा हट कर नई त्वचा आ जाएगी.

– 1 चम्मच चने का आटा या बेसन, चुटकी भर हल्दी, 2-3 बूंदें नीबू का रस और थोड़ा सा कच्चा दूध मिला कर लेप बना लें. कुछ दिनों तक इस का प्रयोग चेहरे या पूरे शरीर पर करें. त्वचा निखर उठेगी.

2 रूखी त्वचा के लिए

– 1 बड़ा चम्मच चावल का आटा, 1 छोटा चम्मच शहद व 1 छोटा चम्मच अंडे की सफेदी को मिला कर लेप बना लें. इसे 5 मिनट चेहरा पर लगा कर रखें. फिर चेहरा धो लें.

– 1 बड़ा चम्मच जौ का आटा, 1 अंडे की जरदी, 1 छोटा चम्मच शहद व थोड़ा सा दूध मिला कर चेहरे पर लगाएं. 10-15 मिनट बाद चेहरा धो लें.

– 1 बड़ा चम्मच चंदन पाउडर में गुलाबजल मिला कर लेप बना लें. फिर चेहरे पर 15-20 मिनट लगा कर रखें. बाद में हलके हाथ से रगड़ कर छुड़ा कर चेहरे को धो कर साफ करें.

– 1 पके केले को मसल कर पेस्ट बना लें. इस में थोड़ा सा शहद व कुछ बूंदें नीबू का रस मिला कर चेहरे पर मलें. 5-6 मिनट बाद चेहरे को ठंडे पानी से धो लें. इस से चेहरे में निखार तो आता है, झुर्रियां भी नहीं रहती.

– 1 छोटा चम्मच बादाम का पाउडर, 1 छोटा चम्मच मलाई, 1 बड़ा चम्मच मसूर की दाल का पेस्ट, 1/4 छोटा चम्मच गुलाबजल व कुछ बूदें तेल की मिला कर पेस्ट बना लें. इसे चेहरे व बाकी पूरे शरीर पर लगाएं. कुछ देर बाद  छुड़ा कर नहा लें. त्वचा चमक उठेगी.

3 तैलीय त्वचा के लिए

– 1 बड़ा चम्मच जौ का आटा व 1 बड़ा चम्मच सेब का गूदा मिला कर पेस्ट बना लें. इसे चेहरे पर लगाएं. 10-15 मिनट बाद छुड़ा कर चेहरे को धो लें.

– 2 बड़े चम्मच संतरे के छिलकों के पाउडर में थोड़ा कच्चा दूध व गुलाबजल मिला कर गाढ़ा लेप तैयार करें. चेहरे पर लगाएं. थोड़ी देर लगा रहने दें. फिर चेहरा धो लें. त्वचा कांतिपूर्ण हो जाएगी.

– 1 बड़ा चम्मच दही व 1 छोटा चम्मच खीरे का रस मिला कर 10-15 मिनट चेहरे पर लगाएं. फिर ठंडे पानी से चेहरा धो लें.

– 1 बड़ा चम्मच चंदन पाउडर, 1 छोटा चम्मच नीम की पत्तियां, 1 बड़ा चम्मच गुलाब की पत्तियां, 1 छोटा चम्मच चोकर व चुटकी भर हलदी पाउडर को मिला पेस्ट बनाएं और चेहरे पर 10-12 मिनट लगाएं रखें. सूखने पर थपथपा कर छुड़ाएं और धो लें.

– 1 बड़ा चम्मच जौ का आटा, 1 बड़ा चम्मच चने का आटा, चुटकी भर हलदी, 4-5 बूंदें नीबू का रस व 1 बड़ा चम्मच गुलाबजल मिला कर लेप तैयार करें. इसे चेहरे या शरीर पर लगाएं. सूखने पर छुड़ा कर नहा लें.

4 दाग धब्बेदार त्वचा

– 2 बड़े चम्मच मलाई व कुछ बूंदे गुलाबजल में हलदी की ताजी गांठ पीस कर मिलाएं और चेहरे पर कुछ दिन तक रोज लगाएं. त्वचा बेदाग हो निखर उठेगी.

– 1 बड़ा चम्मच सूखी नीम की पत्तियां, 2 बड़े चम्मच जौ का आटा, 2 बड़े चम्मच चने का आटा, 2 बड़े चम्मच मुलतानी मिट्टी पाउडर, 1/2 चम्मच शहद व कुछ बूंदें नीबू का रस मिला कर लेप तैयार कर चेहरे पर लगाएं. कुछ दिन के प्रयोग से त्वचा साफसुथरी दिखने लगेगी. इस पेस्ट को बना कर 1 हफ्ते तक फ्रिज में रखा जा सकता है.

– दूध में चुटकी भर हलदी, गेहूं का आटा व कुछ बूंदें तेल की डाल कर पेस्ट बना लें. इसे हाथपैरों व चेहरे पर मलें. फिर सूखने पर रगड़ कर छुड़ा लें. ऐसा रोज करें और अपनी रंगत में आए बदलाव को देखें.

PS 2 Film Review: निराश और भ्रमित करती फिल्म पोन्नियिन सेलवन 2

रेटिंगः दो स्टार

निर्माताः मणि रत्नम और सुभाषकरण अलीराजा

लेखक: मणि रत्नम , बी जयमोहन और ई कुमारवेल

निर्देशकः मणि रत्नम

कलाकारः ऐश्वर्या राय बच्चन , विक्रम , कार्ति , जयम रवि , तृषा , शोभिता धूलिपाला , ऐश्वर्य लक्ष्मी , शरत कुमार और प्रभु और प्रकाश राज

अवधिः दो घंटे 45 मिनट

किसी भी उपन्यास को सिनेमा के दृष्य श्राव्य माध्यम में बदलना आसान नही होता है. अब तक लगभग हर फिल्मकार ऐसा करने मे मात खाता आया है.लेकिन मूलतः तमिल फिल्मकार मणिरत्नम के पास दोनों माध्यमों की समझ व संवेदनशीलता है.इसके बावजूद वह कल्की कृष्णमूर्ति के पांच भागों के बृहद उपन्यास ‘‘पोन्नीयिन सेलवन’’ को सिनेमा में ढालते हुए न्याय नही कर पाए.जब इंसान अपने काम के प्रति इमानदार न हो और एक खास विचारधारा के तहत कम करता हो,पर पैसा कमाने के लिए कुछ भी कर ले,तो उसकी कृति गड़बड़ हो जाती हैं.मणिरत्नम हिंदी भाषा के प्रबल विरोधी हैं.मगर पैसा व षोहरत कमाने के लिए उन्होने फिल्म‘‘पोन्नियिन सेलवन 2’’ को तमिल, तेलगू, कन्नड़ ,मलयालम के साथ ही हिंदी में भी प्रदर्षित किया है.मगर उनका हिंदी विरोध फिल्म के प्रचार के दौरान भी जारी रहा.मणि रत्नम और उनकी टीम ने हिंदी में एक भी षब्द नहीं कहा,तमिल या अंग्रेजी में ही जवाब दिए.जबकि कन्नड़ व तेलुगू फिल्म इंडस्ट्ी के कलाकार मुंबई की मीडिया संग हिंदी में बात करने का पूरा प्रयास करते हैं.हमने मलयालम सुपर स्टार ममूटी से भी हिंदी में बात की है.

जब इंसान का मन साफ न हो तो वह अच्छा रचनात्मक काम नही कर सकता.रचनात्मक इंसान व कलाकार को हर भाषा का सम्मान करना चाहिए. मणि रत्नम ने सिनेमाई स्वतंत्रता के नाम पर कल्की कृष्णन के उपन्यास के साथ खिलवाड़ किया है,जिसे लोग पचा नही सकते.वैसे चियान विक्रम की माने तो इस उपन्यास के बारे मंे मंगलोर के अलावा दूसरे हिस्से के लोग कम परिचित हैं.इस उपन्यास को पढ़ चुके लोगों का मानना है कि यह ऐतिहासिक उपन्यास महज काल्पनिक कहानी नही बल्कि में कुछ साक्ष्य-आधारित तथ्य हैं.मगर हिंदी विरोध की रोटी सेंकने वाले जब जब केवल धन कमाने के लिए अपनी फिल्म को हिंदी में भी प्रदर्षित कर रहे हो,तो स्वाभाविक तौर पर आतंरिक कपट उनके काम मंे भी उभरकर आ गया.यदि यह कहा जाए कि मणि रत्नम ने पंद्रहवीं सदी में लिखे गए उपन्यास की हत्या की है,तो कुछ भी गलत नही होगा. इसी उपन्यास पर आधारित मणि रत्नम निर्देषित फिल्म ‘‘पोन्नियिन सेलवन एक’’ कुछ हद तक महाकाव्य को स्थापित करने का प्रयास था,मगर दूसरे भाग में मणि रत्नम पूरी तरह से भटक गए हैं,इसकी मूल वजह यह नजर आती है कि मणि रत्नम ने इस भाग में कहानी का केंद्र नंदिनी व आदित्य कारिकालन की प्रेम कहानी और नंदिनी के अंदर चोल साम्राज्य को समाप्त कर प्रतिषोध लेने की दहक रही अग्नि ही है.परिणामतः उपन्याय के बाकी किरदार एकदम हाषिए पर चले गए हैं.अफसोस वह नंदिनी व उसकी मंा मंदाकिनी की कहानी को भी सही ढंग से कहने की बजाय भटक गए हैं.

कहानीः

कहानी चोल सम्राज्य की है जिसमें सम्राट सुंदर चोल (प्रकाश राज) शासन कर रहे हैं,लेकिन उनकी सेहत ठीक नहीं रहती.ऐसे में वह चाहते हैं कि उनका बड़ा बेटा आदित्य कारिकालन (चियान विक्रम) चोल सम्राज्य का शासक बने.जबकि सुंदर चोल की बेटी कुंदवई (तृषा कृष्णन) चाहती है कि छोटे भाई अरूणमुरी वर्मन अर्थात पोन्नियन सेलवन (जयम रवि) को राजा बनाया जाए. राजकुमार आदित्य के साथी हैं वल्लावरायन (कार्ति) जो चोल सम्राज्य के खिलाफ रचे जा रहे षडयंत्र का पता लगाते हैं.दूसरी ओर पेरिया पाझुवेतरायर (आर. सारथकुमार) और चिना पाझुवेतरायर(आर. प्रथिबान) भाईयों की जोड़ी चोल साम्राज्य को हथियाने की योजना बना रही है.वह सुंदर चोल के भाई के बेटे मधुरंथगन को राजा बनाना चाहते हैं.वहीं पेरिया पाझुवेतरायर की पत्नी नंदिनी (ऐश्वर्या रॉय बच्चन) प्रतिषोध की आग में जल रही हैं और चोल सम्राज्य को समाप्त होते देखना चाहती है.नंदिनी, पांडियन के साथ उसी दिन राजा सुंदर चोल (प्रकाश राज) और आदित्य करिकलन को मारने का फैसला करती है.वह मधुरंधगन (रहमान) के साथ एक सौदा करने के बहाने अदिता करिकलन को कदंबुर किले में आमंत्रित करती है, जिसने चोल साम्राज्य के सिंहासन का दावा करते हुए एक विद्रोह का गठन किया है. एक समय था जब नंदिनी और आदित्य कारिकालन एक दूसरे से प्रेम करते थे.लेकिन दोनों का रिश्ता जिस तरह से टूटा,उसके जख्म आज भी ताजा हैं.क्यांेकि अनाथ नंदिनी को राज्य से बाहर कर दिया गया था.तो वहीं कहानी का एक सिरा नंदिनी की मां मंदाकिनी से जुड़ा है.जब दर्षकों के सामने यह सच आता है कि नंदिनी अनाथ नही है.नंदिनी की मां मंदाकिनी के संग राजा संदुर चोल ने प्यार किया था,पर एक साजिष के तहत षादी नहीं हो पायी थी.

लेखन व निर्देशनः

मणि रत्नम बेहतरीन निर्देषक हैं, इसमें कोई दो राय नही.मगर ‘‘‘पोन्नियिन सेलवन एक’’ के मुकाबले ‘‘पोन्नियिन सेलवन दो’’ यानी कि ‘‘पी एस दो’’ काफी निम्न स्तर की फिल्म है.पूरी भटकी हुई पटकथा है.फिल्म का क्लायमेक्स काफी भ्रमित करने वाला है.चोल षासन के खिलाफ वास्तव में कौन है? यह समझना मुष्किल हो जाता है.आदित्य करिकलन के मित्र पार्थिबेंद्रन पल्लवन (विक्रम प्रभु), चोल षासन के खिलाफ क्यों हो जाते हैं? यह बस एक छोटा सा भ्रम था.

अगर पार्थिबेंद्रन ने बुद्धिमानों की बात पर ध्यान दिया होता, तो एक अनावश्यक युद्ध टल जाता.अब यह किताब का हिस्सा है या फिल्मकार की सिनेमाई स्वतंत्रता है,पता नहीं.षिल्प के प्रति इमानदार होने के बावजूद मणि रत्नम कथानक के साथ न्याय नही कर पाए.जबकि मणि रत्नम इसके सह निर्माता व सह लेखक भी हैं.

फिल्म के भव्य सेट जरुर नयन सुख देते हैं.केवल भव्य सेट और बेहतरीन स्पेषल इफेक्ट आदि से आप फिल्म दर्षक तक नही पहुॅचा सकते.मगर फिल्मकार ने पूरी फिल्म में आकर्षक स्थानों पर चोल राज्य की कहानी को स्थापित कर दर्षकों को टिकट खरीदने के लिए मजबूर किया है,पर वह इसमें सफल नही रहे,इसका सबूत पहले दिन कई शो रद्द होने से मिल गया.

फिल्म की कहानी के साथ दर्षक के न जुड़ पाने की अन्य कई वजहें हैं.कल्की कृष्णमूर्ति का उपन्यास ‘‘पोन्नीयिन सेलवन’’ बहुत बड़ा उपन्यास हैं,जिसमें पूरे चोल साम्राज्य के इतिहास व अन्य घटनाक्रमों का वर्णन है. इतनी विषाल कहानी को महज तीन घ्ंाटे की फिल्म में समेटना असंभव है. दूसरी बात इस कहानी से दर्षक परिचित नही है,तो उसे हर किरदार को सही ढंग से समझाना पड़ेगा,जिसे करने में मणि रत्नम बुरी तरह से विफल रहे हैं.

जी हां! जिसने किताब नहीं पढ़ी है,वह फिल्म देखते समय कहानी का अनुसरण नही कर पाता. तीसरी अहम समस्या यह है कि इस फिल्म से जुड़े दक्षिण के कलाकारों को हिंदी भाषी दर्षक नही पहचानता,इस कारण भी फिल्म देखते समय उसे सब कुछ गडमड ही नजर आता है.ऐसी स्थिति में फिल्म की पटकथा लेखन के समय सावधानी बरती जानी चाहिए थी,पर वैसा नहीं किया गया.

फिल्म की कहानी की षुरूआत आदित्य करिकलन (विक्रम) और नंदिनी (ऐश्वर्या राय) के किशोर वय की प्रेम कहानी के फ्लैषबैक से होती है.इस कहानी की उनकी जो कल्पना है,वह नयनसुख जरुर देती है.मगर इस प्रेम कहानी को भी बहुत बेहतर तरीके से पेष नही किया जा सका.इस प्रेम कहानी मे राजा व राजकुमार की अपनी कुछ मजबूरियां होती हैं,उसकी वजह से जो जटिलता आती है,उसे चित्रित नही किया जा सका.

वंधियावन व कुंधवई की प्रेम कहानी को भी ठीक से चित्रित नही किया गया. फिल्म के कुछ दृष्य काफी अच्छे बन पड़े हैं.एक वह दृष्य जब पांडियन बौद्ध मठ जाकर पूर्णिमा के महोत्सव के अवसर पर पोन्नियिन सेलवन को मारने की साजिष रचते हैं.तब जिस तरह से पोन्नियिन सेलवन हाथी से बात कर हाथी पर सवार हो जाते हैं और अपनी हत्या करने आए महावत को हाथी की सूंड़ से तिस तरह से मौत देते हैं,कमाल का दृष्य बना है.

तो वहीं नंदिनी (ऐश्वर्या राय बच्चन) के मकसद को समझने के बावजूद आदित्य करिकलन (विक्रम) उनके बुलावे पर कदंूबर जाते हैं और जिस तरह से अपने बीच के अजीब रिष्ते की सारी पेचीदगियों को सामने लाते हैं, जो कि जुनून और प्रतिशोध का एक खतरनाक कॉकटेल है.कमाल का दृष्य बन पड़ा है.इस दृष्य में दो लोग हैं,जिन्हें एक दूसरे से कटु अनुभव हुए हैं,फिर भी एक-दूसरे से नफरत करने में असमर्थ हैं.

जबकि प्यार की खातिर करिकलन अपनी जिंदगी देकर प्रायष्चित करना चाहता है क्योंकि नंदिनी के निवेदन के बावजूद कलिकरन ने वीर पांडियन की हत्या कर दी थी.तो वही तीसरा दृष्य राजा संुदर चोल (प्रकाष राज )को अपने साथियों के संग मारने पहुॅची मंदाकिनी(ऐश्वर्या राय) राजा सुंदर चोल के प्यार के आगे अपने ही साथियों के बाणों को झेलकर राजा को बचाते हुए अपने प्राणों की आहुति देती है.

एक तरफ मंदाकिनी प्यार के सच का अहसास कर अपनी जान देकर प्रायष्चित करती है,तो वहीं आदित्य कलिकरन भी प्यार में प्रायष्चित करते हुए अपनी जिंदगी खो देता है.मगर फिल्मकार व पटकथा लेखक यह भूल गए कि यह कहानी महज नंदिनी व आदित्य कलिकरन या पोन्नियिन सेलवन के बारे में नहीं है.

यह वंधियाधवन,रवि पंडायन,पूंगुकुजाहली,नारीवादी कुंदवी (त्रिशा कृष्णन) , वानथी (शोभिता धूलिपाला) और सुमतिराजकुमारी (ऐश्वर्या लक्ष्मी के बारे में भी है. पंद्रहवीं सदी में कल्की कृष् णन ने अपने उपन्यास में जिस तरह से सामजिक संरचना व नारी को सषक्त रूप में पेष किया है,उसका आज हम दस प्रतिषत भी अनुकरण नही कर रहे हैं.डाक्टर बाबा साहेब आंबेडकर ने संविधान लिखते समय जिन बातों को लिखा है,वह सब कल्की कृष्णन के पंद्रहवीं सदी के उपन्यास ‘‘पोन्नियिन सेलवन’’ में लिखा हुआ है.

अफसोस मणि रत्नम किताब को सेल्यूलाइड पर उतारते समय इस बात को गहराई के साथ पेष करने में असमर्थ रहे हैं.फिल्मकार मंदाकिनी,नंदिनी ,राजकुमारी कंुदवाई आदि चरित्रों के साथ न्याय नही कर पाए. हर राज्य /षासन में छल,कपट,धोख, विष्वासघात, स्वामी भक्ति का होना अनिवार्य है.यही सब इस फिल्म का भी हिस्सा है.

थोटा थरानी की प्रोडक्शन डिजाइन और रवि वर्मन की फोटोग्राफी जरुर राहत देती है.तो वहीं संगीतकार ए आर रहमान ने बुरी तरह से निराष किया है.जबकि ए आर रहमान का दावा है कि वह अपना सर्वश्रेष्ठ सिर्फ मणि रत्नम की फिल्मों में देते हैं.

बौद्ध मठ में पोन्नियिन सेलवन के व्यवहार से उनकी धार्मिकता और अटूट नैतिक संहिता उभर कर आती है.तो वही यह बात भी सामने आती है कि वह अपने भाई आदित्य करिकालन की तरह अच्छा योद्धा जरुर नही है,पर वह ऐसा नेता है,जो समय की नजाकत को पहचान कर सही रास्ता अपनाना जानता है.वह तलवारबाजी की तुलना में कहीं अधिक वीर है.वह जिस तरह से खुद को राजकुमार की बजाय अपने तात मधुरंताका (रहमान )को यह पद सौंपता है,उससे आज के नेताओं को सबक लेने की जरुरत है.

मंदाकिनी को वृद्धावस्था में दिखाते समय फिल्मकार ने ऐष्वर्या राय के सिर्फ बाल सफेद किए हैं.लेकिन उनकी आवाज में अंतर नजर नही आता. चाल ढाल में कोई अंतर नजर नही आता.

अभिनयः

अपनी पहली फिल्म ‘इरुवर’ से लेकर ‘पोन्नियिन सेल्वन’ की मंदाकिनी व नंदिनी तक ऐश्वर्या राय बच्चन ने अपने अभिनय कौशल की जिस उड़ान का प्रदर्शन सुनहरे पर्दे पर अब तक किया है, उसमें एक पूरा अध्याय ही मणिरत्नम के नाम का है. यह फिल्म देखने के बाद यह बात समझ में आ जाती है कि ऐष्वर्या राय बच्चन के अंदर की अभिनय प्रतिभा को केवल मणि रत्नम ही परदे पर ला सकते हैं.

सौंदर्य को उसकी पूरी गरिमा और पूरी आभा के साथ पेश करना ऐश्वर्या राय बच्चन से उनके इस किरदार से सीखा जा सकता है और फिल्म ‘हम दिल दे चुके सनम’ की नंदिनी को भी भला कौन भूल सकता है? निष्कपट नंदिनी से कपटपूर्ण नंदिनी तक की ऐश्वर्या राय बच्चन की यह अभिनय यात्रा कमाल की है.

आदित्य करिकालन के किरदार में विक्रम अपने रौद्र, क्रोध और उद्वेग से अपनी पहचान छोड़ने में सफल रहे हैं.जयम रवि,कार्ति,त्रिषा कृष्णन,षोभिता धूलिपाला, ऐष्वर्या लक्ष्मी,प्रकाष राज के हिस्से करने को कुछ खास रहा नहीं.

ऐसे बनीं नंदिनी गुप्ता मिस इंडिया    

अगर आप ने बचपन में सोचा हो और आपके जीवन में ही वह चीज दूर तक ना हो और फिर आगे चलकर वह  आपकी हथेली पर हो तो इसे क्या कहा जाएगा . मिस इंडिया ताज की विजेता नंदिनी गुप्ता के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. आज नंदिनी गुप्ता मिस इंडिया है मगर जब वे छोटी थी और मिस इंडिया की प्रतियोगिता की और देखती तो कभी सोचा भी नहीं था कि मैं भी एक दिन मिस इंडिया बन करके यह गौरव प्राप्त करूंगी.

आज इस आलेख में हम नंदिनी गुप्ता से जुड़ी हुई ऐसी अनछुई बातें आपको बता रहे हैं जो आपको सोचने पर विवश कर देंगी कि इंसान की मेहनत और दूर दृष्टि उसे कहां से कहां पहुंचा सकती है, उसका एक नायाब उदाहरण मिस इंडिया नंदिनी गुप्ता है.

15 अप्रेल 2023 का दिन था . कुछ सर्द और कुछ गर्म मौसम के इस महीने में राजस्थान की 19 बरस की एक लड़की के लिए यह दिन उसकी जिंदगी का एक महत्वपूर्ण दिन था .उसका एक  ख्वाब हकीकत में बदल गया था. नंदिनी गुप्ता 15 अप्रैल के दिन ‘मिस इंडिया 2023’ चुनी गई थी. नंदिनी गुप्ता को पिछले साल 2022 की मिस इंडिया सिनी शेट्टी ने खूबसूरती का ताज पहनाया. वहीं, श्रेया पूंजा को फर्स्ट रनर-अप और स्ट्रेला थौनाओजम लुवांग को सेकेंड रनर-अप घोषित किया गया. मिस इंडिया बनने के बाद नंदिनी गुप्ता अब दुनिया में,मिस वर्ल्ड 2023 में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी.

 

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खास बात यह है कि  नंदिनी गुप्ता कोटा शहर के पुरानी सब्जी मंडी के निवासी सुमित गुप्ता जो की एक कृषक है की बड़ी बेटी हैं. सुमित गुप्ता पेशे से किसान और कॉन्ट्रेक्टर हैं. नंदिनी के पिता सुमित गुप्ता का कोटा जिला के सांगोद के पास भांडाहेड़ा में खेत है. नंदनी की मां हाउस वाइफ हैं. उनकी छोटी बहन अनन्या अभी 9 वीं क्लास की स्टूडेंट हैं.

लगभग 2 महीने तक अपने परिजनों से दूर शहर से दूर  मुंबई में इस प्रतियोगिता की तैयारी करने वाली नंदिनी के लिये यह सफा कैसे मुकाम बन गया पता ही नहीं चला. मिस इंडिया का खिताब जीतने के बाद नंदिनी ने पत्रकारों के साथ बातचीत में कहा,- ‘जब विजेता के तौर पर मेरा नाम पुकारा गया तो पहले तो मुझे अपने कानों पर भरोसा नहीं हुआ था . बचपन में मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि मैं मिस इंडिया बनूंगी, मगर कुछ बरस से मै इसके लिए गंभीर हुई  थी. और जब वचन आया तो ऐसा लगा जैसे कोई मायाजाल मेरे लिए वह जादुई क्षण था.’

 

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पाठकों को यह जानकारी देते चलें कि यह मिस इंडिया प्रतियोगिता का 59वां संस्करण था और आगे नंदिनी गुप्ता अब 71वीं ‘मिस वर्ल्ड’ सौंदर्य प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी. यह प्रतियोगिता 2024 में संयुक्त अरब अमीरात में होने वाली है. वीरों की भूमि के रूप में जाने जाने वाले राजस्थान से इस कोमलंगी  युवती ने सौंदर्य के किले को फतह किया है.  कोटा में सुमित गुप्ता और रेखा गुप्ता के यहां जन्मी नंदिनी की पारिवारिक पृष्ठभूमि सामान्य थी वह मिस इंडिया बनने का ख्वाब सपने में भी नहीं देखती थी , लेकिन प्रारब्ध और छोटे से सपने ने  नंदिनी गुप्ता को सुंदरी का मसीहा बना दिया. दरअसल नंदनी के  नन्हे से सपनों को पंख दिए प्रियंका चोपड़ा की कामयाबी ने. मिस वर्ल्ड 2000 की विजेता प्रियंका चोपड़ा को देखकर नंदिनी को के मन में एक इच्छा प्रकट हुई. वह कहती हैं कि प्रियंका चोपड़ा ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का नाम ही रौशन नहीं किया, बल्कि देश की लाखों लड़कियों को अपने दम पर अपने सपनों को हासिल करने की प्रेरणा भी दी है.

राजस्थान के कोटा के सेंट पाल सीनियर सेकेंडरी स्कूल से पढ़ाई करने वाली नंदिनी गुप्ता रतन टाटा को अपना आदर्श मानती हैं. वह बताती है- ‘मेरे जीवन में सबसे ज्यादा प्रभावशाली व्यक्ति सर रतन टाटा हैं, वह व्यक्ति जो सफलता के शीर्ष पर पहुंचने के बावजूद सदा विनम्र बने रहे. उन्होंने मानवता की भलाई के लिए बहुत कुछ किया है और करोड़ों भारतवासी उन्हें प्यार करते हैं.’

 

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मिस इंडिया बनने के बाद नंदिनी गुप्ता कि परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं था आंखों में खुशियों के आंसू थे. नंदिनी ने कहा, ‘सच बताऊं, मैंने अपने पिता को रोता  हुआ नहीं देखा था, लेकिन मिस  इंडिया बनने के बाद जब उन्होंने मुझे गले से लगाया तो मैंने उनकी आंखों में खुशी के आंसू देखे तो उस पल लगा कि आज उन्हें मुझ पर गर्व होगा. ‘

नंदिनी को क्रिकेट  और फिल्मे देखना और उनमें काम करना दोनों पसंद हैं. उनसे पूछा गया कि अगर उन्हें फिल्मों में काम करने का मौका मिला तो वह किसके साथ काम करना चाहेंगी, नंदिनी ने कहा, ‘पहले मैं शाहिद कपूर और रणबीर कपूर के साथ काम करना चाहती थी, लेकिन अब फिनाले के बाद कार्तिक आर्यन के साथ भी काम करना चाहती हूं.’ यहां यह बताना समीचीन होगा कि कार्तिक आर्यन मिस इंडिया प्रतियोगिता के अंतिम चरण में जज के रूप में मौजूद थे. दिखी आने वाले समय में नंदिनी गुप्ता का यह सपना कब पूरा होता है.

क्या है कोजिक एसिड, जानें इसके फायदे

कोजिक एसिड अलग अलग प्रकार के फंगस से बनाया गया एक कैमिकल है. यह फर्मटेड सोया सॉस और राइस वाइन का प्रोडक्ट भी है. कोजिक एसिड का प्रयोग कभी-कभी फूड इंडस्ट्री में प्राकृतिक फूड को बचाने के रूप में किया जाता है. इसे खाने में प्रयोग करना, कोजिक एसिड के मुख्य प्रयोग में से एक है, इसीलिए कोजिक एसिड कुछ स्वास्थ्य और कॉस्मेटिक प्रोडक्ट में उपयोग होता है. आइए इस आर्टिकल में हम जानते है कि कोजिक एसिड का उपयोग कैसे किया जाता है, इसके क्या क्या स्वास्थ्य लाभ हो सकते हैं.

उपयोग
कोजिक एसिड का प्रयोग मुख्य रूप से स्वास्थ्य और ब्यूटी प्रोडक्ट्स में किया जाता है. स्किन के रंग को हल्का करने के लिए कभी-कभी कोजिक एसिड का प्रयोग किया जाता है. कोजिक एसिड शरीर के स्वास्थ्य के लिए उपयोगी है. इसका उपयोग स्किन की बीमारी जैसे सूरज की किरणों से हुए निशान और उम्र बढ़ने के कारण हुए दाग धब्बों के इलाज के लिए किया जा सकता है.

कोजिक एसिड एक तरह से लाइटनिंग एजेंट के रूप में काम करता है. इसमें मेलोनिन प्रभाव के कारण यह लाइटनिंग एजेंट के रूप में करता है.
मेलानिन हमारे शरीर में प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला रंग है जो आंखों, बालों और स्किन को उनका रंग देता है. मेलेनिन के प्रोडक्शन में मदद करने के लिए टाइरोसिन नामक एक एमिनो एसिड की जरुरत होती है.
कोजिक एसिड हमारे शरीर में टाइरोसिन को बनने से रोककर काम करता है. टाइरोसिन हमारे शरीर में मेलेनिन को बनने से रोकने का काम करता है. मेलेनिन की कमी से स्किन पर हल्का प्रभाव पड़ सकता है.
कोजिक एसिड का उपयोग ज्यादातर क्रीम, लोशन और सीरम जैसे कॉस्मेटिक प्रोडक्ट में किया जाता है.
कुछ साबुनों में भी इसका प्रयोग होता है.
कोजिक एसिड वाले कई तरह के प्रोडक्ट जैसे हाथों या चेहरे पर लगाने वाले साबुन और फेस वॉश को बनाने के लिए किया जाता हैं.
कोजिक एसिड वाले प्रॉडक्ट्स का उपयोग शरीर के अन्य अंगो पर भी किया जा सकता है, जैसे कि पैर और हाथ.
कॉस्मेटिक टॉयलेटरीज़ में उपयोग होने वाले कोजिक एसिड की कंसंट्रेशन अक्सर 1 से 4 प्रतिशत के बीच होती है.
कोजिक एसिड से बनाए गए कुछ प्रोडक्ट, जैसे कि सीरम, जिसको स्किन पर लगाने और एब्जॉर्ब होने के लिए छोड़ दिया जाता है, आदि होते हैं.
कुछ अन्य प्रोडक्ट ,जैसे साबुन, लगाए जाते हैं और वॉश कर लिए जाते हैं.

फ़ायदे
कोजिक एसिड वाले प्रोडक्ट का प्रयोग करने से निम्नलिखित लाभ हो सकते हैं :

एंटी एजिंग इफैक्ट : कोजिक एसिड से बनाए गए प्रोडक्ट स्किन को हल्का कर सकते हैं, जिससे उम्र के कारण हुए दाग धब्बे और सूरज की किरणों से हुई स्किन की बीमारी में सुधार हो सकता है. कोजिक एसिड डार्क स्पॉट्स को कम करके एंटी-एजिंग प्रभाव मिल सकता है.

मेलास्मा का इलाज करें : कोजिक एसिड मेलास्मा को कम करने में भी मदद कर सकता है, मेलाश्मा प्रेगनेंसी के कारण स्किन का काला पड़ने के कारण होता है.

दाग-धब्बों का दिखना कम करे : कोजिक एसिड दाग-धब्बों के कलर बदलने को भी कम कर सकता है. लेकिन एसिड टिश्यू के निशान की मोटाई में सुधार नहीं करता है, यह कुछ प्रकार के निशान से जुड़े काले रंग को कम कर सकता है. निशान को कम करने में यह ज्यादा उपयोगी है.

एंटिफंगल लाभ : कोजिक एसिड कुछ एंटीफंगल लाभ के लिए भी उपयोगी हो जाता है. यह एथलीट फुट और यीस्ट जैसे कुछ फंगल बीमारी को फैलने से रोकने और उनका इलाज करने में मदद कर सकता है.

एंटी बैक्टिरियल इफेक्ट : कोजिक एसिड भी एंटी बैक्टिरियल इफेकट में लाभ प्रदान कर सकता है. यह सामान्य प्रकार के बैक्टेरिया से हुए स्किन रोगो के बढने को कम करने में मदद कर सकता है.

कोजिक एसिड के कई सारे लाभ होते हैं लेकिन अगर आप इसे स्किन के लिए प्रयोग करना चाहती हैं तो पहले डॉक्टर की सलाह ले लें.

Summer Special: घर पर बनाएं बच्चों के लिए ये शानदार मिल्क शेक

बच्चों को अक्सर दूध पीना पसंद नहीं होता, कई बार दूध के साथ बच्चों का छत्तीस का अकड़ा भी रहता है. लेकिन बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए दूध बहुत ज़रूरी खाद्य पदार्थ होता है. इसलिए हर माता-पिता अपने बच्चों को दूध पीने के लिए देते हैं.

ऐसे में ज़रूरी हो जाता है कि दूध ना देकर दूध से तैयार कुछ बेहतरीन रेसिपीज को बनाकर सेवन के लिए ज़रूर दिया जाए. अक्सर देखते हैं कि बच्चों को मिल्क शेक काफी पसंद आता है, ऐसे में आप बच्चों को मिल्क शेक बनाकर पीने के लिए दें सकती हैं. इन मिल्क शेक को बच्चे पीने में आनाकानी भी नहीं करेंगे और दूध का सेवन भी कर लेंगे.

एप्पल मिल्क शेक

दूध-2 कप,
सेब-1,
ड्राई फ्रूट्स-2 चम्मच,
चीनी-1 चम्मच,
खजूर-2

विधि

सबसे पहले आप एक पैन में दूध को गरम कर लें और उसमें खजूर को डालकर कुछ देर के लिए छोड़ दें.
दूध ठंडा होने के बाद मिक्सर में डाल लें. खजूर भी मिक्सर में ज़रूर डालें.

इसके बाद सेब को भी छीलकर बारीक़ काट लें और मिक्सर में डाल लें.

अब लगभग 5 मिनट मिक्स करने के बाद को मिक्सर कर लें.

अब इस मिश्रण को गिलास में निकाल लें और ड्राई फ्रूट्स से गार्निश कर लें.

मैंगो मिल्क शेक

पके आम- 1,
दूध-1 कप,
चीनी-1 चम्मच,
इलायची-पाउडर-1/3 चम्मच,
ड्राई फ्रूट्स-2 चम्मच (ऑप्शनल)

विधि

सबसे पहले आप एक बर्तन में दूध को उबालकर अलग रख लें.
इधर आप आम को छीलकर सभी गूदा को निकाल लें और मिक्सर में डालकर पीस लें.

अब उबले दूध के साथ चीनी और इलायची पाउडर को भी मिक्सर में डालकर अच्छे से मिक्स कर लें.

इसके बाद मिश्रण को गिलास में डालकर ड्राई फ्रूट्स से गार्निश कर लें.

फ्रूट एंड नट मिल्क शेक बनाए

दूध-2 कप,

केला-1 कटा हुआ, सेब-1/2 हिस्सा,

बादाम-1 चम्मच,

अखरोट-1 चम्मच,

पिस्ता-1 चम्मच,

खजूर-2,

चीनी-1 चम्मच,

इलायची पाउडर-1/3 चम्मच

विधि

सबसे पहले आप सभी नट्स को 30 मिनट के लिए पानी में भिगोकर रख दीजिए.

30 मिनट बाद नट्स को पानी से निकालकर बारीक़-बारीक़ काट लीजिए.

इसके बाद मिक्सर में सभी नट्स के साथ फल को भी डालकर अच्छे से मिक्स कर लीजिए.

लगभग चार मिनट मिक्स करने के बाद उबले दूध, चीनी और इलायची पाउडर को भी डालकर ग्राइंड कर लीजिए.

Summer Special: जानें गरमी की 7 परेशानियों का आसान इलाज

समर सीजन में जरा सी लापरवाही आप को गंभीर बीमारियों का शिकार बना सकती है. कुछ हैल्थ प्रौब्लम्स इस मौसम में कौमन होती हैं. आइए, जानते हैं कि क्या हैं वे और कैसे बचें उन से:

1 सनबर्न

सनबर्न इस सीजन की आम समस्या है. धूप में ज्यादा रहने के कारण अल्ट्रावायलेट किरणों के संपर्क में आने से त्वचा के टिशूज जल जाते हैं. सनबर्न के कुछ लक्षण हैं जैसे त्वचा का लाल होना, हलका चक्कर आना और थकान महसूस होना. अगर सनबर्न यूवी किरणों के कारण है तो यह त्वचा कैंसर का कारण भी बन सकता है.

बचाव: खुद को सनबर्न से बचाने के लिए बाहर जाने से 20 मिनट पहले शरीर के खुले हिस्सों पर सनस्क्रीन लोशन लगाएं.

2 हीटस्ट्रोक यानी लू लगना

हीटस्ट्रोक हाइपरथर्मिया का गंभीर रूप है. शरीर में बहुत ज्यादा गरमी अवशोषित होने के कारण ऐसा होता है. इस का इलाज न करना घातक साबित हो सकता है. इस के कुछ लक्षण हैं -सांस लेने में परेशानी, पल्स बढ़ना, शरीर का तापमान बढ़ना, भ्रमित महसूस करना आदि.

बचाव: दोपहर 11 से शाम 4 बजे के बीच जहां तक हो सके घर के भीतर ही रहें. अगर इस दौरान बाहर जाना ही पड़े तो चेहरे और शरीर को स्टोल से अच्छी तरह ढक लें.

3 घमौरियां

इस में ज्यादा तापमान के कारण त्वचा पर लाल रैशेज हो जाते हैं. पसीने की ग्रंथियों के छेद बंद हो जाने से भी ऐसा हो सकता है.

बचाव: प्रभावित हिस्से पर प्रिक्ली हीट पाउडर लगाएं. शरीर के उन हिस्सों पर जहां पसीना ज्यादा आता है, प्रिक्ली हीट पाउडर इस्तेमाल करें. अगर फिर भी लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डाक्टर की सलाह लें.

4 फूड पौइजनिंग

इन दिनों ज्यादा गरमी के कारण भोजन जल्दी खराब हो जाता है. इसलिए हमेशा ताजे खाद्य एवं पेयपदार्थों का ही सेवन करें. अगर आप भोजन को कुछ समय के लिए रखना चाहते हैं तो पूरी सावधानी बरतें. फूड पौइजनिंग आमतौर पर खराब हो चुके भोजन या दूषित पानी के सेवन से होती है. इस के लक्षण हैं- पेट में दर्द, उलटी आना, डायरिया आदि. अत: कच्चे मांस, सड़क किनारे बेचे जाने वाले खुले भोजन का सेवन कतई न करें, क्योंकि इस के खराब होने की संभावना बहुत अधिक होती है.

बचाव: बचे भोजन को हमेशा फ्रिज में रखें. भोजन को अच्छी तरह पकाएं. खाने से पहले देख लें कि यह खराब तो नहीं हो गया है. फल और सब्जियां खरीदते समय ध्यान दें कि इन से किसी तरह की गंध तो नहीं आ रही है.

5 डायरिया

गरमी के मौसम में भोजन जल्दी दूषित होता है, इसलिए इस मौसम में डायरिया की संभावना अधिक होती है.

बचाव: डायरिया से बचने के लिए पानी को हमेशा उबाल कर पीएं. सब्जियों को काटने से पहले और बाद में अच्छी तरह धो लें. शरीर में तरल की कमी न होने दें.

6 पानी से फैलने वाले रोग

हम गरमियों में पानी में ज्यादा समय बिताना पसंद करते हैं. इस से बैक्टीरियल इन्फैक्शन फैलने की संभावना अधिक होती है. पाचनतंत्र संबंधी बीमारियां नदी, झील, पूल आदि के माध्यम से फैल सकती हैं. इस के अलावा इस से त्वचा, कानों और आंखों का संक्रमण, श्वसन, न्यूरोलौजिकल और वायरल बीमारियां भी फैलती हैं.

बचाव: साफ पेयजल का सेवन करें. ध्यान रखें कि जिस स्विमिंग पूल में आप जाते है वहां हमेशा क्लोरीन सही मात्रा में डाली जाती हो.

7 समर कोल्ड

एक तरह का वायरस ऐसी बीमारी पैदा करता है कि आप गरमियों में भी ठंड लगने जैसे लक्षण महसूस करते हैं. इसे ऐंट्रोवायरस कहा जाता है. इस के लक्षण हैं -सिर में दर्द, गले में खराश, मुंह सूखना, रैशेज आदि.

बचाव: आमतौर पर लक्षणों के अनुसार इलाज किया जाता है. ऐसे में फौरन चिकित्सक से संपर्क करें.

क्या खाएं क्या नहीं: खाने के लिए स्वादिष्ठ और सेहतमंद आहार के बहुत से विकल्प हैं. समर में मिलने वाली कई फलसब्जियां सेहत के लिए बहुत अच्छी मानी जाती हैं. इस मौसम में आप को सिट्रस फलों, तरबूज, कच्ची सब्जियां, मछली, ठंडा सूप, सफेद योगर्ट, अंडा, स्मूदी आदि का भरपूर सेवन करना चाहिए. इन के अलावा इस मौसम में ज्यादा कैफीन, कार्बोनेटेड पेयपदार्थों, अलकोहल और ज्यादा चीनी युक्त पदार्थों के सेवन से बचें.

खूब पानी पीएं: पानी शरीर को ठंडा रखता है. हवा में नमी होने के कारण पसीना जल्दी नहीं सूखता. इसलिए चाहे आप को प्यास न लगे तो भी थोड़ीथोड़ी देर बाद पानी पीते रहें.

ऐसा आहार लें जो फाइबरयुक्त हो. आसानी से पचने वाले भोजन का सेवन करें. गरम, तले, मसालेदार भोजन का सेवन न करें.

– डा. आर एस के सिन्हा, जनरल फिजिशियन, सीनियर कंसल्टैंट, जेपी हौस्पिटल, नोएडा

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