क्या आपको पता है इन 10 नूडल्स के बारे में

‘‘टू मिनट नूडल्स,’’ यानी मैगी से तो सब वाकिफ हैं, पर क्या आप को पता है की दुनियाभर में कितनी तरह के नूडल्स खाए जाते हैं? जी हां, ढेरों तरह के.

कोई झक सफेद, तो कोई पतली सुतली जैसे या फिर कोई चौड़े रिबन जैसे बने होते हैं. कुछ आटे से बने होते हैं तो कुछ चावल, मैदे, आलू, अंडे, शकरकंद या कुट्टू से. और भी तरहतरह के नूडल्स मार्केट में उपलब्ध हैं. आकार, रंग में भिन्न ये नूडल्स बनाए भी कई तरीके से जाते हैं और नाम भी अलगअलग होते हैं.

बच्चे तो इन्हें चाव से खाते ही हैं, बड़े भी खूब पसंद करते हैं. बनाने में भी आसान और स्वाद भी भरपूर. मनचाही सब्जियों को मिला कर इन्हें पौष्टिक भी बनाया जा सकता है.

आज ऐसे ही कुछ नूडल्स के बारे में जानते हैं जो चीन की सीमा को लांघ कर कई अन्य देशों में भी उतने ही लोकप्रिय बन गए हैं.

  1. यूनान राइस नूडल्स

यों तो चावल के नूडल्स कई आकर के मिलते हैं, लेकिन गोल और सामान्य स्पैगेटी की तरह के नूडल्स सब से ज्यादा लोकप्रिय हैं जिन्हें यूनान नूडल्स या मी जिआन भी कहते हैं. दक्षिणी पश्चिमी चीन के यूनान प्रोविंस से लोकप्रिय हुए ये नूडल्स अकसर ग्लूटेन फ्री चावल और पानी के मिश्रण से बनाए जाते हैं. कई तरह की डिशेज बनाई जाती हैं जिन में सब से ज्यादा लोकप्रिय ‘क्रौसिंग द ब्रिज राइस नूडल्स’ है. चिकन, पोर्क एवं मसाले खासकर स्टार ऐनीज और अदरक के साथ बनाए गए सूप के साथ तैयार नूडल्स को परोसा जाता है.

  1. मी फेन या राइस सेंवइयां

पतले नूडल्स जो भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका में आम मिलते हैं, चीनी में इन्हें मी फेन और थाई में सन मी कहते हैं. दक्षिणी चीन से आए ये नूडल्स बहुत ही पतले, भंगुर और उजले होते हैं. इन्हें पकाना बहुत ही आसान होता है. 10 मिनट तक गरम पानी में डुबो कर रखना पर्याप्त है. पानी निकाल कर चाहें तो ब्राथ में डाल लीजिए अथवा तवे पर सब्जियों के साथ हलका फ्राई कर लीजिए. बहुत ही फ्लेवरफुल और कम तैलीय होने की वजह से ये लोगों में बहुत ही लोकप्रिय हैं. फिलीपींस के प्रसिद्ध व्यंजन ‘पंसित’ भी राइस नूडल्स, सब्जियां, चिकन, श्रिंप, सोया सौस आदि के साथ टौस कर बनाए जाता हैं. ‘पैड थाई’ बनाने में भी इसी तरह के नूडल्स प्रयोग किए जाते हैं.

  1. हे फन

ये मोटे और चपटे नूडल्स हैं जिन्हें थाई में सन यई कहा जाता है. माना जाता है कि ये सर्वप्रथम दक्षिणी चीन के ग्वांग?ाउ प्रांत में बने थे. कैंटोनीज डिश ‘चाउ फन’ में ये नूडल्स मीट अथवा वैजिटेबल्स के साथ ड्राई फ्राई किए जाते हैं या फिर इन्हें गाढ़ी और स्टार्ची सौस के साथ पका लिया जाता है. चावल के आटे और पानी से बने नूडल्स अमूमन लंबी स्ट्रिप्स या शीट्स के रूप में मार्केट में मिलते हैं जिन्हें मनचाहे आकार में काट कर काम में लाया जा सकता है.

यीन जेन फन या सिल्वर नीडल नूडल्स एकदम सफेद और बहुत ही छोटे आकार के होते हैं. महज 5 सीएम लंबे और 5 एमएम व्यास के. इन नूडल्स के दोनों सिरे नुकीले होते हैं. मलयेशिया और सिंगापुर में इन्हें रत नूडल्स के नाम से भी जाना जाता है. राइस और पानी के मिश्रण को महीन छलनी के माध्यम से सीधे उबलते हुए पानी में डाल कर बनाया जाता है. इन्हें टूटने से बचाने के लिए बनाने वक्त कौर्न स्टार्च भी मिलाया जाता है.

  1. लामिआन या हैंड पुल्ड नूडल्स

हाथ से खींच कर लंबे किए गए चीनी नूड्ल्स. गेहूं के आटे, नमक, पानी से बनाए जाने वाले इन नूडल्स में कभीकभी लचीलापन देने के लिए अल्कलाइन भी मिलाए जाते हैं. पकने के बाद ये बहुत मुलायम, चिकने होते हैं और ये हमेशा ताजे ही परोसे जाते हैं. उत्तर पश्चिमी चीन के प्रसिद्ध व्यंजन ‘डानडान नूडल्स’ में यही नूडल्स उपयोग में लाए जाते हैं.

  1. फन जी या ग्लास नूडल्स

बहुत ही पतले, लंबे और लगभग पारदर्शी इन नूडल्स के रंगों में भिन्नता, इन्हें बनाने में प्रयुक्त स्टार्च सामग्री पर निर्भर करती है. मूंग बींस, आलू, शकरकंद अथवा सागूदाने के हिसाब से ये या तो सफेद, हलके स्लेटी या फिर भूरे रंग के हो सकते हैं. इन्हें या तो 3 से 5 मिनट के लिए उबाल कर या फिर गरम पानी में कुछ देर तक भिगोने के बाद प्रयोग में लाया जा सकता है.

  1. मीसुआ

चीन के फुजिआन राज्य के पतले नमकीन और सब से लंबे नूडल्स. गीले आटे को 30 मीटर तक खींच कर इन नूडल्स को बनाया जाता है. चीन में जन्मदिन की पार्टियों में यही नूडल्स सर्व किए जाते हैं. चीनी मान्यताओं के हिसाब से इन नूडल्स को लंबी उम्र से जोड़ कर देखा जाता है. इन नूडल्स को सूप के साथ सर्व कर सकते हैं या फिर कम आंच पर सब्जियों के साथ टौस कर भी तैयार किया जाता है.

  1. चाउमिन

चाउमिन के तो हम सब दीवाने हैं. चाउमिन का शाब्दिक अर्थ है फ्राइड नूडल्स. आकर में पतले और क्रिस्पी नूडल्स सब से पहले ग्वांगडोंग चीन में बने थे. इन्हें बनाने से पहले उबालना जरूरी होता है. इन की मोटाई के हिसाब से 2 से 6 मिनट तक. इन्हें ठंडे पानी से धो कर और पानी निकाल कर मनचाही  सब्जियों, अंडों अथवा मांस के साथ टौस कर तैयार किया जाता है.

  1. वानटोन नूडल्स

पतले आकार के ये नूडल्स अंडे, पानी और लाइ वाटर (सोडियम या पोटैशियम हाईड्राक्साइड का घोल) से बनाया जाता है. इन्हें इन के आकार और रंग की वजह से एंजेल हेयर पास्ता भी कहते हैं. दक्षिणी चीन और हौंगकौंग में बने इन नूडल्स को थोड़ी देर तक गरम पानी में उबाल कर ठंडे पानी के नीचे रखा जाता है. कैंटोनी डिश ‘श्रिंप वानटोन’ लोगों को बहुत भाती है.

  1. नाइफ कट नूडल्स

इस तरह के नूडल्स की स्ट्रैंड हर दूसरे स्ट्रैंड से आकार, लंबाई में भिन्न होती  है. गौरतलब है कि काफी अभ्यास के बाद ही कोई शैफ इन नूडल्स को बनाने में महारत हासिल करता है. अन्य नूडल्स के मुकाबले ये नूडल्स मोटे होते हैं और नूडल्स के दोनों किनारे भी खुरदरे होते हैं.

  1. लामिआन

मुलायम, सिल्की और चाउमिन से थोड़े मोटे इन एग नूडल्स को बनाने का तरीका अलग होता है. इस का शाब्दिक अर्थ है टास्ड नूडल्स. इन्हें उबालना पड़ता है फिर बहुत ही कम सौस, पकी हुई सब्जियों, मांस के साथ टौस कर लिया जाता है.

-चेतना वर्धन           

शार्क टैंक की नमिता थापर जूझ रही हैं IVF से, जानिए ये कैसे करता है काम

‘शार्क टैंक इंडिया’ का दूसरा सीजन भी पहले सीजन की तरह बहुत प्रचलित हो रहा है. इस शो में नए उद्यमी यानी इंटरप्रेन्योर पार्टिसिपेट करते हैं और अपने बिजनेस आइडियाज को इस शो के जजेज के सामने बताते हैं ताकि वो उनके बिजनेस में निवेश करें. यह शो के जजेज न केवल सक्सेसफुल और अमीर हैं, बल्कि उनका जीवन अन्य लोगों को प्रेरित भी करता है. समय- समय पर शो में यह जजेज अपने निजी जीवन के बारे में बताते हैं. हाल ही में इसकी एक जज नमिता थापर ने अपनी  IVF जर्नी के बारे में बताया था. आईये जानें नमिता थापर की IVF जर्नी के बारे में और पाएं जानकारी IVF के बारे में.

नमिता थापर की IVF जर्नी

नमिता थापर एमक्योर फार्मा की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं. ‘शार्क टैंक इंडिया’ की जज अनुसार उनकी पहली प्रेग्नेंसी सामान्य थी. लेकिन, दूसरी प्रेग्नेंसी में उन्हें बहुत समस्या हुई क्योंकि वो कंसीव नहीं कर पा रही थी. वो इसके बाद दो बार IVF ट्रीटमेंट से गुजरी, जो दोनों बार फेल हो गया. उनके मुताबिक यह ट्रीटमेंट बहुत ही मुश्किल होता है, जिसमें महिला शारीरिक और मानसिक समस्याओं से गुजरती है. नमिता थापर का कहना था कि चार साल में दो अटेम्प्स के बाद उन्होंने इस ट्रीटमेंट को न लेने का निर्णय लिया. लेकिन, इसके कुछ समय बाद उन्होंने नेचुरली कंसीव किया. आज वो दो बच्चों की हैप्पी मदर है.

क्या है IVF और कैसे करता है यह काम?

IVF का फुल फॉर्म है इन विट्रो फर्टिलाइजेशन. यह प्रोसिजर्स की एक काम्प्लेक्स सीरीज है जिनका इस्तेमाल फर्टिलिटी में मदद करता है और यह जेनेटिक प्रॉब्लम्स को दूर करने में भी सहायक है. इस प्रोसीजर में पुरुषों के स्पर्म और महिलों के अंडाणुओं को आर्टिफिशियल तरीके से फर्टिलाइज किया जाता है. बाद में फीटस के विकसित होने पर इसे महिला के यूटरस में ट्रांसफर कर दिया जाता है. IVF की मदद से हेल्दी बेबी की मां बनना कई फैक्टर्स पर निर्भर करता है जैसे उम्र और इंफर्टिलिटी का कारण आदि. इसके साथ ही यह प्रोसीजर महंगा और इंवेसिव भी है. यही नहीं, इसमें बहुत अधिक समय भी लगता है.

IVF ट्रीटमेंट एक मुश्किल प्रोसीजर है लेकिन आजकल बहुत से लोग इसका इस्तेमाल कर के पेरेंट्स बनने का सुख पा रहे हैं. आजकल का लाइफस्टाइल ऐसा है कि लोग या तो अधिक उम्र में शादी करते हैं या फॅमिली प्लानिंग देरी से करते हैं. जिससे पुरुषों और महिलाओं में इनफर्टिलिटी की परेशानियां बढ़ रही हैं. ऐसे में आज के दौर में यह कई लोगों के लिए प्रोसीजर वरदान की तरह साबित हो रहा है.

जब जिंदगी तमाशे में डूब जाए

छिछली होती सोच का नतीजा यह है कि आज किसी भी हिंदी, अंगरेजी अखबार या चैनल को खोल लें उस में ज्यादातर खबरें सैलिब्रिटीज के खाने, पहनने, बीच पर नहाने, एअरपोर्ट पर आनेजाने पर होती हैं. ऐश्वर्या राय, अभिषेक बच्चन और उन की बेटी आराध्य न्यूयौर्क से मुंबई आईं तो फोटोग्राफरों का हुजूम जमा था और जब ये फोटो इंस्टाग्राम पर डाले गए तो हजारों नहीं लाखों तक लाइक्स मिले.

शाहरुख खान के जन्मदिन के मौके पर उन के घर के सामने खड़ी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज तक करना पड़ा. तमन्ना भाटिया और विजय का किसिंग फोटो इतना वायरल हुआ कि टाइम्स औफ इंडिया ने इस की पूरी खबर बना कर छाप दी और उस का औनलाइन वीडियो जम कर चला. दीया मिर्जा अपने पति वैभव और स्टैप डौटर समायरा के साथ दिखीं, यह इंडियन एक्सप्रैस के लिए खबर थी.

आखिर इस सब का मतलब क्या है? ये आम जिंदगी को किस तरह प्रभावित करते हैं कि इन सैलिब्रिटीज के कपड़ों पर, बोलने पर, रंग पर, फैशन पर समय और शक्ति बरबाद की जाए? तमाशा हरेक को अच्छा लगता है पर जब जिंदगी तमाशे में डूब जाए और हरकोई टिकटौक या इंस्टाग्राम की रील्स के लाइक्स गिनने शुरू कर दे तो साफ है कि जनता की सोच की शक्ति गहरे पानी में डूब चुकी है.

तमाशा उबाऊ मेहनती जिंदगी से राहत पाने के लिए अच्छा है पर इस के लिए अपना समय और मेहनत मोबाइलों पर लाइक्स डालने में लगा लेने वाली जनता को वे परेशानियां उठानी ही पड़ेंगी, जो आज दिख रही हैं. आज दुनियाभर में एक तरह की अशांति है. कोविड-19 का डर इतना नहीं रह गया जितना कि नौकरियां खोने का. पैसे की तंगी का, पतिपत्नी या प्रेमीप्रेमिका का भय है.

यह इसलिए है कि जिंदगी को जिस गंभीरता से जीना जरूरी है उसे हम भूलने लगे हैं. हमारी जिंदगी की डोर अब कुछ सितारों, कुछ सैलिब्रिटीज के हाथों में हो गई है. ऐसा नहीं है कि पहले सबकुछ अच्छा था. सदियों तक लोग राजाओं और देवीदेवताओं के गुलाम रहते थे और वे जो अत्याचार करते, अनाचार करते, सहते थे. इतिहास बारबार अकालों, बीमारियों, युद्धों से भरा है. दुनियाभर में विशाल किले और मंदिर, चर्च, मसजिदें हैं पर आम लोगों के घर अभी पिछले कुछ सौ साल पहले बनने शुरू हुए जब साइंस और तकनीक ने धर्म और राजाओं की थोपी सोच से मुक्ति दिलाई.

अफसोस कि कहीं पेले, कहीं विराट कोहली, कहीं अमिताभ, कहीं लेडी गागा की चर्चाएं लोगों को फिर बहकाने लगी हैं और शासक व धर्म भी उन की सहायता से जनता को बेवकूफ बनाए रखने में सफल हो रहे हैं. आज वैज्ञानिक व चिंतक सिर्फ दिखावटी मजदूर रह गए हैं. वे गुलामों की तरह के हैं. उन से ज्यादा नहीं. यह चुनना हरेक का अपना फैसला कि उस का आदर्श कोई तमाशबीन है या वह जो खोज करता है, सवालों के हल ढूंढ़ता है, निर्माण करता या करवाता है. आप का फैसला क्या है?

मकड़जाल – रवि की कोनसी बात से मानवी के होश उड़ गए ?

आज मानवी की आंख जरा देर से खुली, लेकिन जब वह सो कर उठी तब उस ने एक अजीब सी बेचैनी महसूस की. अपनी बिगड़ी हालत देख कर वह समझ गई कि जरूर उस का गर्भपात हुआ है. तब उस ने अधीरता से रवि को आवाज लगाई, पर उस की आवाज उसे नहीं सुनाई दी.

‘जरूर रवि मेरे लिए चाय बना रहा होगा,’ यही सोच कर वह देर तक आंखें मूंदे बिस्तर पर पड़ी रही, लेकिन जब काफी देर के बाद भी रवि नहीं आया तब मानवी का माथा ठनका.

फिर वह किसी तरह अपनी बची शक्ति समेट कर बड़ी मुश्किल से उठी और धीरेधीरे चलती हुई किचन की तरफ बढ़ गई.

पर यह क्या? रवि तो किचन में भी नहीं था. तभी उस की नजर घर में फैले सामान पर पड़ी. सामने वाली अलमारी का ताला टूटा पड़ा था और उस में रखा सारा कीमती सामान गायब था.

ये सब देख कर मानवी की चीख निकल गई. तब वह धम से सामने पड़े सोफे पर बैठ गई और अनायास ही उस का दिल भर आया.

एक तरफ वह बहुत कमजोरी महसूस कर रही थी तो दूसरी तरफ मानसिक व आर्थिक रूप से भी अक्षम हो चुकी थी.

उसे आज समझ आ रहा था कि उस ने रवि के साथ लिव इन में रह कर कितनी बड़ी भूल की है.

‘कुछ भी ऐसा मत करना मेरी बेटी, जिस से बाद में हमें पछताना पड़े,’ दिल्ली आते समय उस के बाबूजी उस से बोले थे.

‘ओह, बाबूजी… मैं वहां कुछ बनने जा रही हूं, इसलिए कुछ भी ऐसेवैसे की तो गुंजाइश ही नहीं है…’ इतना कह कर उस ने आगे बढ़ कर अपने बाबूजी के चरणस्पर्श कर लिए थे.

फिर वह अपनी आंखों में ढेर सारे सपने लिए दिल्ली आ पहुंची थी. छोटे शहर की मानवी को दिल्ली स्वप्न नगरी से कम नहीं लगी थी. अपनी मंजिल की तरफ बढ़ते हुए कब रवि उस का हमसफर बन बैठा, इस का एहसास तो उसे बहुत देर में हुआ.

तभी अचानक मानवी को याद आने लगा कि रात को रवि ने जो ड्रिंक उसे औफर किया था, जरूर उस में उस ने कुछ मिलाया होगा. तभी तो उस ड्रिंक को पीते ही उसे बेहोशी छाने लगी थी और शायद इसी वजह से उस का यह गर्भपात हुआ.

अब तो जैसे उस की सोचनेसमझने की शक्ति चुक गई थी. अभी कल ही तो रवि ने उस से मंदिर में शादी की थी. वैसे यह बात नहीं थी कि मानवी ने यह निर्णय जल्दबाजी में लिया था बल्कि लगातार 2 साल लिव इन में रहने के बाद ही उस ने यह निर्णय लिया था.

फिर अचानक मानवी को सारी बीती बातें रवि की सोचीसमझी चाल का हिस्सा लगने लगी थीं.

‘2 महीने का गर्भ है मुझे, अब तो शादी कर लो मुझ से,’ मानवी जब रवि से बोली तो वह खुश होने के बजाय उलटा उस पर ही बरस पड़ा था.

‘पता नहीं, तुम आजकल की लड़कियों को क्या होता जा रहा है. सरकार गर्भनिरोध के नितनए तरीकों पर लाखों रुपए बरबाद कर रही है, पर तुम लोगों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगती. मैं तो मस्तमौला हूं पर तुम तो ध्यान रख सकती थी,’ रवि अचानक आक्रामक हो उठा था.

ये सब सुन कर मानवी का मुंह उतर गया था. फिर वह रोंआसी सी अपने कमरे की तरफ बढ़ गई थी.

थोड़ी देर रो लेने के बाद जब उस का जी हलका हुआ, तब उस ने रवि को अपने सामने खड़ा पाया. उस के हाथ में एक ट्रे थी, जिस में कौफी के 2 मग और मानवी के मनपसंद वैज सैंडविच थे.

‘‘लो जानेमन, गुस्सा थूको और नाश्ता कर लो, ऐसी स्थिति में तो तुम्हें बिलकुल भूखा नहीं रहना चाहिए और फिर हमारा नन्हा शैतान भी तो भूखा होगा…’’ इतना कह कर रवि ने अपने हाथों में पकड़ी ट्रे मानवी के सामने रख दी थी.

‘‘वैसे तुम जानते सबकुछ हो पर अनजान बनने का नाटक करते हो, शायद इसी वजह से मैं तुम्हें अपना दिल दे बैठी,’’ इतना कह कर मानवी ने रवि को खींच कर अपने पास बैठा लिया और फिर वे दोनों नाश्ता करने लगे.

‘‘मानवी, ऐसा करते हैं कि आज दोपहर में मूवी देखते हैं और फिर लंच भी बाहर ही कर लेंगे,’’ रवि खाली ट्रे उठाते हुए बोला, ‘‘पर हां, आज का सारा खर्च तुम्हें ही करना होगा, क्योंकि मेरी हालत जरा टाइट है.’’

‘‘वह तो ठीक है जनाब, पर आज तुम्हारा आशिकी भरा व्यवहार देख कर मुझे तुम पर बहुत प्यार आ रहा है,’’ यह कहतेकहते वह रवि से लिपट गई थी.

‘‘मैं एक बात सोच रहा था कि अगर अब जिम्मेदारी आ रही है तो उस से निबटने के लिए प्लानिंग भी करनी पड़ेगी.’’

रवि मानवी को चूमते हुए बोला, ‘‘अगर कुछ इंतजाम हो जाए तो मैं अपना कोई काम ही शुरू कर लूं. मुझे तो इस बंधीबंधाई कमाई वाली प्राइवेट नौकरी में आगे बढ़ने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं और फिर क्या शादी के बाद भी हर छोटेछोटे खर्च के लिए मैं तुम पर ही निर्भर रहूंगा?’’

‘‘अच्छा जानू, एक बात तो बताओ जरा कि अगर किसी और की मदद लेने की जगह मैं ही तुम्हें फाइनैंस कर दूं तो?’’

‘‘वाह, इस से बढि़या बात तो कोई हो ही नहीं सकती. यह तो वही कहावत हुई, ‘बगल में छोरा और शहर में ढिंढोरा.’ मुझ से ज्यादा तो तुम आर्थिक रूप से सबल हो. इस का तो मुझे तनिक भी एहसास नहीं था,’’ यह कहतेकहते रवि की आंखों में अचानक ही चमक नजर आने लगी थी.

फिर उस ने अचानक ही मानवी को अपनी ओर खींच लिया था और प्यार भरे स्वर में उस से बोला था, ‘‘मैं तो सोच रहा था कि तुम शायद अपने किसी परिचित या सहकर्मी से मदद लोगी पर तुम्हारे पास तो गढ़ा हुआ धन है, मेरी छिपीरुस्तम…’’

‘‘जनाब, जरा अपनी सोच को ब्रेक लगाइए और ध्यान से मेरी बात सुनिए,’’ मानवी हंसते हुए बोली, ‘‘मेरे पास कोई गढ़ा हुआ धन नहीं बल्कि खूनपसीने से कमाए हुए पैसों की बचत है जिस की मैं ने एफडी करवाई हुई है.’’

अब तक मैं ने इस बारे में तुम्हें नहीं बताया था पर अब जब हम दोनों एक होने जा रहे हैं तो भला यह दुरावछिपाव क्यों?’’

‘‘ओह, मेरी प्यारी मानवी,’’ इतना कह कर रवि ने एक प्यारा सा चुंबन मानवी के गाल पर अंकित कर दिया था.

फिर वे दोनों अपने प्यार की खुमारी में डूबे पिक्चर हौल की तरफ बढ़ गए थे.

पहले उन्होंने मस्त मूवी का मजा लिया और फिर एक बढि़या रेस्तरां में लजीज खाना खाया.

जब रात को दोनों सोने के लिए बिस्तर पर लेटे तब फिर से रवि ने सुबह वाली बात का जिक्र छेड़ दिया.

‘‘मैं क्या कह रहा था मानवी,’’ रवि जरूरत से ज्यादा अपने स्वभाव को नम्र करते हुए बोला, ‘‘कल सोमवार है तो तुम औफिस जाने से पहले बैंक से पैसे निकाल कर मुझे दे देना. पैसे हाथ में होंगे तो आगे की प्लानिंग आसान हो जाएगी,’’ फिर रवि मानवी के बालों में अपना हाथ फेरने लगा था.

‘‘वह तो ठीक है जानू,’’ मानवी रवि को गलबहियां डालती हुई बोली, ‘‘पर पहले हमारी शादी होगी, तभी तुम्हें पैसे मिलेंगे, क्योंकि मैं ने यह पैसे अपने फ्यूचर पार्टनर के लिए ही तो बचा कर रखे थे.’’

‘‘ओह, तो तुम्हें मुझ पर भी विश्वास नहीं है,’’ रवि खुद को मानवी की पकड़ से छुड़ाते हुए बोला, ‘‘क्या, मैं तुम्हें ऐसा लगता हूं जो तुम्हें धोखा दे कर भाग जाऊंगा?’’

‘‘सच, बहुत प्यारे लगते हो तुम, जबजब गुस्से में होते हो,’’ मानवी फिर से रवि से लिपटते हुए बोली, ‘‘मेरे जानेजिगर, अब जब तुम्हें अपना तनमन ही सौंप दिया तो भला शक की कैसी गुंजाइश?

‘‘मैं तो यह सोच रही थी कि अब जब शादी करनी ही है तो फिर देरी कैसी? इधर हमारी शादी हुई तो उधर मैं अपनी सारी जमापूंजी तुम्हें सौंप दूंगी,’’ मानवी रवि के आगोश में समाते हुए बोली.

इतना कह कर मानवी तो सो गई पर रवि बेचैनी से लगातार करवटें बदलता रहा था.

‘‘जल्दी से तैयार हो जाओ. हम लोग अभी मंदिर जा कर शादी करेंगे,’’ इतना कह कर रवि ने एक पैकेट उसे थमा दिया, जिस में एक प्यारी सी लाल साड़ी, लाल चूडि़यां और एक प्यारा सा महकता गजरा था.

‘‘पर रवि, इतनी भी क्या जल्दी है? थोड़ा समय दो मुझे,’’ मानवी चाय बनाते हुए बोली.

‘‘तुम लड़कियां न वाकई में कमाल हो. पहले तो जल्दीजल्दी की रट लगाती हो और फिर अगर तुम्हारी बात मान लो तो उस में भी तुम्हें प्रौब्लम होती है,’’ इतना कह कर रवि गुस्से में पैर पटकता हुआ बाहर चला गया.

वैसे मानवी को ये सब इतनी जल्दी होते देख अटपटा तो अवश्य लग रहा था पर अब शक की कोई गुंजाइश नहीं थी.

इसलिए वह सबकुछ भुला कर खुशीखुशी तैयार होने लगी थी. बीचबीच में उसे अपने घर वालों की याद भी आ रही थी पर फिर उस ने सोच लिया था कि वह शादी होते ही रवि को ले कर अपने घर जाएगी.

मानवी को दुलहन के रूप में देख कर पहले तो वे लोग अवश्य उस से गुस्सा होंगे पर फिर जल्दी ही मान भी जाएंगे, क्योंकि वह सभी की लाड़ली जो है.

‘‘वाह, क्या गजब ढा रही हो तुम दुलहन के रूप में, आज तो सब तुम पर फिदा हो जाएंगे,’’ रवि की इस चुटकी पर मानवी शरमा कर उस के गले जा लगी थी.

‘‘अरे सुनो, तुम्हारा बैंक भी तो मंदिर के रास्ते में ही पड़ता है न. ऐसा करना तुम अपनी चैकबुक भी रख लेना,’’ रवि कुछ सोचते हुए बोला.

‘‘तुम भी न, हर काम जल्दी में ही करते हो,’’ मानवी अपना मांगटीका ठीक करते हुए बोली, ‘‘वैसे मुझे कम से कम इतना तो बता दो कि तुम कौन सा काम शुरू करने वाले हो?’’

‘‘मैडम, यह सरप्राइज है तुम्हारे लिए. बस, यह समझ लो कि यह शादी का तोहफा होगा तुम्हारे लिए,’’ इतना कह कर उस ने मानवी का हाथ पकड़ा और फिर वे दोनों शादी करवाने वाली दुकान की तरफ बढ़ गए. वहां एक पंडित बैठा था. उस ने जल्दबाजी में रीतिरिवाज निबटा कर उन की शादी करवा दी और एक प्रमाणपत्र पकड़ा दिया. फिर लौटते समय मानवी ने बैंक से पैसे निकाल कर रवि को दे दिए.

पैसे मिलते ही रवि के रंगढंग बदल गए, इस का एहसास मानवी को हुआ तो जरूर पर फिर उस ने इसे वहम मान कर आगे बढ़ने में ही भलाई समझी.

मानवी कपड़े चेंज कर के अभी लेटी ही थी कि तभी रवि आ गया, ‘‘यह क्या जानेमन, आज तो सैलिब्रेशन की रात है और तुम इतनी सुस्त सी लेटी हो. दैट्स नौट फेयर माई लव,’’ इतना कह कर उस ने विदेशी शराब 2 गिलासों में उड़ेल दी.

वैसे तो मानवी थकी होने के कारण सोना चाहती थी पर वह रवि को परेशान भी तो नहीं कर सकती थी.

फिर वह तुरंत उठी और रवि के पास जा कर बैठ गई.

‘‘चीयर्स,’’ कह कर इधर दोनों के गिलास आपस में टकराए तो उधर एक अजीब सा उन्माद छा गया मानवी पर. फिर थोड़ी देर बाद उस की आंखें भारी होने लगीं और वह सो गई. अब जब आंखें खुलीं तो रवि का सारा सच उस के सामने आ गया था.

अभी वह इसी उहापोह में थी कि क्या करे? तभी उस के मोबाइल पर उस की सहेली रम्या का फोन आ गया.

‘‘क्या यार, 2 दिन से औफिस क्यों नहीं आई?’’ रम्या हंसते हुए बोली.

‘‘कुछ नहीं यार.’’

‘‘तू अभी बिजी है तो मैं बाद में कौल करती हूं,’’ रम्या ने चुटकी ली.

‘‘ऐसा कुछ नहीं है यार,’’ इतना कह कर मानवी रोने लगी.

‘‘तू रो मत, मैं अभी आती हूं,’’ फिर चिंतातुर रम्या सारा काम बीच में ही छोड़ कर मानवी के पास पहुंच गई.

मानवी की इतनी बुरी हालत देख कर रम्या भी सकते में आ गई. फिर मानवी ने भारी मन से रम्या को सबकुछ बता दिया.

‘‘मैं तो तुझे पहले ही समझाती थी कि मत पड़ इस लिव इन के चक्कर में, पर तब तो मैडम पर इश्क का भूत जो सवार था. लिव इन एक कच्चा रिश्ता होता है जो किसी को भी सुख नहीं देता,’’ रम्या गुस्से में बोले जा रही थी.

‘‘मैं तो आत्महत्या कर के अपना जीवन ही समाप्त कर दूंगी. आखिर किस मुंह से मैं सामना करूंगी अपने घर वालों का?’’ इतना कह कर मानवी फिर से रोने लगी.

‘‘आत्महत्या के बारे में सोचना भी मत,’’ यह कह कर रम्या मानवी को समझाने लगी, ‘‘देख मानवी, अब तक तो तू ने जो कुछ गलत किया सो किया पर अब संभल जा. रही बात तेरे परिवार वालों की, तो यह बात समझ ले कि हमारी लाख गलतियों के बावजूद जो हमें स्वीकार करता है, वह हमारा परिवार ही होता है.

‘‘तू शायद यह नहीं जानती थी कि अपने दोस्त तो हम चुनते हैं पर हमें हमारी फैमिली चुनती है.

‘‘शुरू में तो तेरे परिवार वाले तेरे शुभचिंतक होने के नाते तुझे अवश्य डांटेंगे, लेकिन फिर तुझे खुले मन से स्वीकार भी कर लेंगे.

‘‘आत्महत्या तो रवि को करनी चाहिए तूने तो उसे सच्चे दिल से चाहा था, पर दगाबाज तो वही निकला, जो तुझे आर्थिक, मानसिक व शारीरिक स्तर पर धोखा दे कर चंपत हो गया. वह शातिर तो तेरे पैसों पर ऐश कर रहा होगा और तू यहां रोरो कर बेहाल हो रही है.’’

फिर रम्या ने उस के आंसू पोंछे और उसे अपनी कार में बैठा कर डाक्टर के पास ले गई.

डाक्टर ने पहले मानवी का चैकअप किया और फिर थोड़े उपचार के बाद उसे कुछ दवाएं लिख दीं, जिन से मानवी को बहुत आराम मिला.

इसी बीच रम्या ने मानवी द्वारा बताए गए नंबर पर उस के घर वालों से संपर्क किया और उन्हें सारी बात बता दी.

फिर क्या था? शाम होते ही मानवी के घर वाले उसे लेने आ पहुंचे.

मानवी की मनोदशा उस की मां ने तुरंत भांप ली और उसे अपने प्यार भरे आंचल में समेट लिया. पर मानवी की गलतियों पर उस के बाबूजी ने उसे बहुत डांटा. फिर इस बात का एहसास होते ही कि मानवी को अपनी गलतियों का एहसास है, उन्होंने उसे माफ भी कर दिया.

मानवी अपने घर वालों के साथ अपने घर चली गई. रम्या उस की कार को जाते हुए तब तक देखती रही, जब तक  कार उस की आंखों से ओझल नहीं हो गई.

एक तरफ जहां उसे अपनी सहेली से बिछुड़ना बहुत खल रहा था वहीं दूसरी तरफ उसे इस बात की बेहद खुशी थी कि चाहे देर से ही सही, उस की सहेली उसे उस मकड़जाल से बाहर निकालने में सफल हो गई थी, जिसे उस ने अपनी नासमझी से अपने इर्दगिर्द बुना था.

क्या परमानैंट नेलपौलिश करवाना सही है, इसका कोई नुकसान तो नहीं है?

सवाल

मैं जब भी मैनीक्योर कराने जाती हूं तो मुझे परमानैंट नेलपौलिश की सलाह दी जाती है. क्या यह सेफ है?

जवाब

जी हां परमानैंट या जैल नेलपौलिश लगाना काफी सेफ है क्योंकि इस में जैल से नेलपौलिश लगाई जाती है और उसे मशीन से सैट किया जाता है. यह नेलपौलिश जल्दी से उतरती नहीं है. इसलिए एक तो हर वक्त खूबसूरत लगती है  और दूसरा जो जनरल नेलपौलिश चिपचिप होती है वह ज्यादातर आप के या आप के बच्चों के खाने में जाती है क्योंकि यह चिप नहीं होती तो आप के लिए सेफ बनी रहती है.

दूसरा यह काफी दिनों तक टिकती है. 1 से डेढ़ महीने तक चल जाती है. एक बात और है जिस की हमें गलतफहमी रहती है कि एक बार परमानैंट नेलपौलिश लगा दी जाए तो उस के ऊपर कलर बदला नहीं जा सकता. हमें आदत होती है कि जब भी हम कहीं जाते हैं तो हम नेलपौलिश बदलना चाहती हैं.

आप चाहें तो इस जैल नेलपौलिश के ऊपर दूसरी लगा सकती हैं. उसे उतार भी सकती हैं. नीचे की टिकी रहेगी.

ध्यान रखने की बात यह है कि जब भी आप परमानैंट नेलपौलिश लगवाएं तो किसी ऐक्सपर्ट से लगवाएं क्योंकि इसे लगाने से पहले नेल्स को ब्फ किया जाता है. ज्यादा बफिंग करने से नेल्स वीक हो जाते हैं.

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सवाल

मेरा रंग तो गोरा है पर मेरी गरदन का कलर काफी डार्क रहता है. कोई भी ज्वैलरी पहनती हूं तो अच्छी नहीं लगती. बताएं क्या करूं?

जवाब

आप अपनी गरदन को सब से पहले ब्लीच कर लें. कुछ हद तक उस का रंग ठीक हो जाएगा. उस के बाद नियमित स्क्रब करें. स्क्रब बनाने के लिए फ्रैश ऐलोवेरा का जैल निकाल लें और उस में चीनी डाल कर उस से अपनी

गरदन पर रोज मसाज करें. उस के बाद उसे सूखने दें. सूखने के बाद धो लें. ऐसा करने से 15 दिन में आप की गरदन का कलर पहले से बैटर हो जाएगा. जब भी घर से बाहर जाएं अपने फेस के साथसाथ गरदन पर भी या जितना हिस्सा दिखता है उस पर सनस्क्रीन जरूर लगा कर जाएं.

-समस्याओं के समाधान

ऐल्प्स ब्यूटी क्लीनिक की फाउंडर डाइरैक्टर डा. भारती तनेजा द्वारा 

पाठक अपनी समस्याएं इस पते पर भेजें : गृहशोभा, ई-8, रानी झांसी मार्ग, नई दिल्ली-110055.

व्हाट्सऐप मैसेज या व्हाट्सऐप औडियो से अपनी समस्या 9650966493 पर भेजें.

आलिया- अनुष्का से लेकर शिल्पा शेट्टी तक, क्या है इन 4 सैलिब्रिटी मौम्स की खूबसूरती का राज

बच्चे के जन्म के साथ ही औरत की जिंदगी कई मानों में बदल जाती है. चाहे उस का सोचने का नजरिया हो या फिर बात अपीयरैंस की हो, फिजिकल. अधिकतर महिलाएं पोस्ट डिलिवरी वजन बढ़ने से परेशान रहती हैं. इस मोटापे से तो हमारी खूबसूरत सैलिब्रिटिज भी नहीं बच सकी हैं. मगर सवाल यहां यह है कि पोस्ट डिलिवरी सैलिब्रिटिज बेहद कम वक्त में अपनी पहली जैसी छरहरी काया हासिल कर लेती हैं.

लेकिन कैसे? आप के इसी सवाल का जवाब आज हम देंगे कि कैसे करीना कपूर से ले कर अनुष्का शर्मा, शिल्पा शेटी, सोनम कपूर, आलिया तक कैसे फैट लौस में कामयाब हुई हैं.

  1. घर का खाना खाना है करीना को पसंद

20 दिसंबर, 2016 को करीना ने तैमूर और 21 फरवरी, 2021 को अपने दूसरे बेटे जेह को जन्म दिया. इन दोनों ही जर्नी में करीना ने अपनी अपीयरैंस को ले कर लोगों को खासा प्रभावित किया है. बहरहाल करीना ने पहली प्रैगनैंसी के दौरान काफी वजन बढ़ा लिया था, बावजूद इस के करीना ने अपने मनोबल को टूटने नहीं दिया और 18 महीने में अपनी बौडी को रिकवर किया.

करीना का मानना है कि सादा और स्वच्छ खाना, हलका व्यायाम और वाकिंग से वजन कम किया जा सकता है. लेकिन इस में कोई जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए. आप धीरेधीरे अपने वजन को नियंत्रित करने के ओर कदम बढ़ाएं. इस दौरान महिलाएं कम कार्बोहाइड्रेट का सेवन करने लग जाती हैं ताकि जल्दी वजन कम हो, लेकिन करीना ने धीरेधीरे अपनी डाइट को पोषण से भर कर तब अपना वजन कम किया है. करीना कई बार मंच से अपनी फिटनैस का श्रेय अपनी खानपान की आदतों को देती हैं.

सैलिब्रिटी न्यूट्रिशनिस्ट रुतुजा दिवेकर करीना के साथ लंबे अरसे से जुड़ी हुई हैं. वे बताती हैं कि करीना ने सिर्फ घर के बने खाने और मौसमी फलसब्जियों के जरीए ही हैल्दी प्रैगनैंसी और पोस्ट प्रैगनैंसी वजन को नियंत्रित किया है.

प्रैगनैंसी और पोस्ट प्रैगनैंसी के वक्त करीना ने दाल हो या चावल सब चीजों में घी का तड़का जरूर लगाया है और वे अपने दोनों बच्चों के खाने में भी देशी घी का इस्तेमाल जरूर करती हैं. करीना को ऐक्सपोर्टेड फल और सब्जियों से ज्यादा मौसमी फल, दहीचावल, ज्वार, मक्का, गेहूं के आटे की रोटी, लौकी, करेले, दाल आदि बहुत पसंद हैं.

करीना परांठों से भी परहेज नहीं करतीं, बस उनका कहना है कि आप जो खा रहे हैं उस की मात्रा नियंत्रित करें. रुतुजा का कहना है कि सब से पहले आप सोचिए आप को कितनी भूख है और अपनी प्लेट में क्या रखना चाहते हैं उस के बाद अपनी सोच से आधा खाना प्लेट में रखें और दोगुना वक्त ले कर धीरेधीरे चबा कर खाएं. मान लीजिए आप 5 मिनट में खाना खाते हैं तो 10 मिनट में उसे खत्म करें.

करीना को पावर योगा और हौट योगा भी काफी पसंद है. इस के साथ ही वे वाकिंग को अपने लिए जरूरी मानती हैं.

2. न्यू सैलिब्रिटी मौम आलिया हैं सब की फैवरिट

प्रैगनैंसी के दौरान क्यूट बेबीबंप फ्लौंट करना हो या पोस्ट प्रैगनैंसी एरियल योगा कर वेट लौस, हर अवतार में आलिया लोगों को काफी पसंद आ रही हैं. 6 नवंबर, 2022 को ऐक्ट्रैस ने अपनी बेटी राहा कपूर को जन्म दिया और उस के बेहद कम वक्त बाद ही वे एरियल योगा और सही डाइट से पहले की तरह फिट नजर आ रही हैं.

 

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आप को हैरानी होगी लेकिन करीना की तरह ही आलिया भी घर का खाना बेहद पसंद करती हैं. चुकंदर तड़का दही इनका मनपसंद है जिसे वे अपनी डाइट में शामिल करना नहीं भूलतीं. आलिया घर की बनी रोटीसब्जी, दालचावल खाना बेहद पसंद करती हैं और उन्हें भी खाने में देशी घी का तड़का बेहद पसंद है. बहरहाल आलिया रोज एक जैसा खाना न खा कर अपने खाने में वैरायटी लाना नहीं भूलतीं और न ही वे अपना कोई मील स्किप करती हैं. बस कंट्रोल पोर्शन और घर के बने सिंपल खाने से ही उन्होंने अपना वजन कम किया है.

हालांकि स्नैक्स क्रेविंग को कम करने के लिए अनुष्का नीबू पानी में केसर मिला कर पीती हैं. वर्कआउट के बाद आलिया पैक्ड जूस के बदले फ्रैश निकाला हुआ गन्ने का जूस पीना पसंद करती हैं. रोजाना ब्रेकफास्ट में भी आलिया किसी न किसी वैजिटेबल जूस को जरूर शामिल करती हैं. बौडी को हाइड्रेट रखने के लिए वे रोजाना कम से कम 2-3 लिटर पानी जरूर पीती हैं.

3. 1 महीने में फैट टू फिट हो गई थीं अनुष्का

अभिनेत्री अनुष्का शर्मा ने प्रैगनैंसी के दौरान कठिन योगाभ्यास की तसवीरें शेयर कर लोगों को हैरान कर दिया था, लेकिन उस से भी ज्यादा लोगों को अनुष्का की पोस्ट प्रैगनैंसी वेट लौस जर्नी देख कर हैरानी हुई है. उन्होंने मात्र 1 महीने में अपनी पहले जैसी छरहरी काया को हासिल कर लिया था. उन की न्यूट्रिशनिस्ट का कहना है कि अच्छी नींद किसी की भी वेट लौस जर्नी में काफी अहम भूमिका निभाती है

 

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बहरहाल मां बनने के बाद भरपूर नींद लेना किसी सपने जैसा लगता है, लेकिन जैसे ही आप का बच्चा  सोए, आप भी उसके साथ ?ापकी लें. यह आप की स्किन, मानसिक स्थिति और स्वास्थ्य के लिए बेहतर होगा और इस से आप की रिकवरी भी जल्दी होगी तथा ऐनर्जी भी मिलेगी.

इस के अलावा बच्चे को सही पोस्चर में पकड़ना, स्तनपान करवाते समय कमर के पीछे तकिया लगाना ताकि बैकपेन न हो, इस की सलाह अनुष्का की न्यूट्रिशनिस्ट देती हैं. प्रैगनैंसी फैट को घटाने के लिए अनुष्का शर्मा ने संतुलन बढ़ाने वाली ऐक्सरसाइज का सहारा लिया. उन के लिए मैडिटेशन और डीप ब्रीदिंग ऐक्सेरसाइज भी मददगार साबित हुई हैं. इस से पोस्टपार्टम डिप्रैशन से राहत पाने में भी मदद मिलती है.

4. शिल्पा हैं नई मांओं के लिए प्रेरणा

शिल्पा शेट्टी का नाम आते ही हमारे सामने बहुत ही फिट अदाकारा की छवि बन जाती है. लेकिन मदरहुड की जर्नी में शिल्पा भी मोटापे का शिकार हुई हैं. उन के अनुसार वे अपने बेटे के जन्म के बाद इतनी मोटी हो गई थीं कि उन्हें उन का कोई कपड़ा फिट नहीं होता था और उन्हें घर से बाहर निकलने में भी शर्म आती थी.

उन्होंने बेटे वियान के जन्म के बाद 32 किलोग्राम वजन बढ़ा लिया था, लेकिन सिर्फ 4 महीनों की कड़ी मेहनत और हैल्दी खानपान के जरीए उन्होंने वापस अपनी बौडी को पहले की शेप में कर लिया.

-सोनिया राणा डबास      

एक हसीना एक दीवाना: भाग 3- क्या रंग लाया प्रभात और कामिनी का इश्क ?

आज अचानक कामिनी खुद ही उस के पास आ गई. शाम के साढ़े 5 बजे प्रभात की छुट्टी हुई, तो वह कामिनी के पास गया. कामिनी मुसकराते हुए बोली, ‘‘अब चलें?’’

‘‘हां, चलो.’’ बैंक से कुछ ही कदम पर कामिनी का घर था. पैदल चलतेचलते प्रभात ने पूछा, ‘‘रिजल्ट आने के बाद तुम मुझ से शादी करने वाली थीं, फिर मुझे बिना बताए घर से चली क्यों गई थीं?’’

‘‘तुम तो जानते ही थे कि मैं अपने पैरों पर खड़ी होने के बाद ही शादी करना चाहती थी. उस दिन तुम मेरे साथ जिस्मानी हरकत करने पर उतारू हो गए थे, इसलिए मुझे तुम से झूठा वादा करना पड़ा था. ‘‘मैं जानती थी कि रिजल्ट आने के बाद शादी के लिए तुम मुझ पर दबाव डालोगे, इसलिए रिजल्ट निकलने के कुछ दिन बाद ही अपने मामा के पास मुंबई चली गई थी. मेरे मामा वहां एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते हैं.

‘‘मामा के पास रह कर ही मैं ने नौकरी पाने की कोशिश की, तो 7-8 महीने बाद मुझे प्राइवेट कंपनी में नौकरी मिल गई. पर पोस्टिंग मुंबई में न हो कर कोलकाता हुई. तब से मैं कोलकाता में ही हूं.’’ बात करतेकरते कामिनी घर पहुंच गई. दरवाजा बंद था. ताला खोलने के बाद कामिनी बोली, ‘‘तुम्हारी पूर्व प्रेमिका के घर में तुम्हारा स्वागत है.’’

‘‘पूर्व क्यों? आज भी तुम मेरी प्रेमिका हो. तुम्हारे सिवा किसी और के बारे में मैं सोच भी नहीं सकता. जब तक मैं तुम्हें पा नहीं लूंगा, तब तक मुझे चैन नहीं मिलेगा,’’ कहते हुए प्रभात अंदर आ गया. ‘‘ऐसी बात है, तो आज मैं पहले तुम्हारी चाहत पूरी करूंगी, उस के बाद कोई बात करूंगी.’’

दरवाजा अंदर से बंद करने के बाद प्रभात की आंखों में आंखें डाल कर कामिनी बोली, ‘‘तुम बैडरूम में जा कर मेरा इंतजार करो. मैं कपड़े बदल कर जल्दी आती हूं.’’ ‘‘मतलब, शादी से पहले ही तुम अपना सबकुछ मुझे सौंप दोगी?’’

‘‘हां,’’ कामिनी चुहलबाजी करते हुए बोली. यह सुन कर प्रभात हैरान था. कामिनी में हुए बदलाव की वजह वह समझ नहीं पा रहा था.

प्रभात को हैरत में देख कामिनी मुसकराते हुए बोली, ‘‘आज मैं तुम्हारी चाहत पूरी कर देना चाहती हूं, तो तुम्हें हैरानी हो रही है?’’ ‘‘हैरानी इसलिए हो रही है कि पहले मैं कभीकभी तुम्हें चूम लेता था, तो तुम यह कह कर डांट देती थीं कि शादी से पहले यह सब करोगे, तो मिलनाजुलना तो दूर बात करना भी बंद कर दूंगी, फिर अचानक आज तुम ने अपना सबकुछ मेरे हवाले करने का मन कैसे बना लिया?’’

‘‘तुम ने अब तक शादी नहीं की और न ही मेरी तलाश बंद की. इसी वजह से तुम पर मेरा प्यार उमड़ पड़ा है. वैसे, तुम नहीं चाहते हो, तो कोई बात नहीं है. हम यहीं बैठ कर बात कर लेते हैं,’’ कामिनी बोली. प्रभात हाथ आए मौके को गंवाना नहीं चाहता था. पता नहीं, कामिनी का मन कब बदल जाए, इसलिए उस ने झट से कह दिया, ‘‘मैं क्यों नहीं चाहूंगा. तुम्हें पाने के लिए ही तो मैं 3 साल से दरदर भटक रहा था. तुम बताओ कि बैडरूम किधर है?’’

‘‘चलो, मैं साथ चलती हूं,’’ कामिनी के साथ प्रभात बैडरूम में चला गया. वह उसे बांहों में भर कर उस के गालों व होंठों को दीवानों की तरह चूमने लगा. कामिनी उसे सहयोग करने लगी. प्रभात की बेकरारी बढ़ गई, तो उस ने कामिनी के सारे कपड़े उतार दिए.

मंजिल पर पहुंच कर सांसों का तूफान जब थम गया, तो प्रभात ने कहा, ‘‘तुम्हें पा कर आज मेरा सपना पूरा हो गया कामिनी.’’ ‘‘यही हाल मेरा भी है प्रभात. तुम्हारा हक तुम्हें दे कर कितनी खुशी मिली है, यह मैं बता नहीं सकती.’’

‘‘ऐसी बात है, तो तुम मुझ से शादी कर लो. अब मैं तुम से जुदा नहीं रह सकता.’’ ‘‘मैं भी अब कहां तुम से जुदा रहना चाहती हूं. मैं खुद तुम से शादी करना चाहती हूं, मगर इस में एक अड़चन है.’’

‘‘कैसी अड़चन?’’ ‘‘दरअसल, बात यह है कि मैं प्राइवेट नौकरी से खुश नहीं हूं. नौकरी छोड़ कर मैं खुद की एक फैक्टरी लगाना चाहती हूं. इस के लिए मैं ने एक जगह भी देख रखी है. बस, मुझे पैसों की जरूरत है.

‘‘मैं लोन मांगने के लिए ही बैंक गई थी. वहां तुम मुझे मिल गए. अब अगर तुम मेरी मदद कर दोगे, तो मुझे जरूर लोन मिल जाएगा.’’ ‘‘कितना लोन चाहिए?’’

‘‘कम से कम 5 करोड़ का.’’ ‘‘5 करोड़? तुम पागल हो गई हो क्या? बिना गारंटर के कोई भी बैंक इतनी बड़ी रकम नहीं देता.’’

‘‘क्या तुम मेरे लिए गारंटर बन नहीं सकते?’’ ‘‘मतलब?’’

‘‘मतलब यह कि बैंक में गारंटर के कागजात ही तो दिखाने हैं. वे तुम नकली बना लो. तुम बैंक में काम करते ही हो. तुम्हारे लिए ऐसा करना कोई मुश्किल नहीं होगा.’’ बात करतेकरते अचानक कामिनी ने प्रभात को बांहों में भर लिया और बोली, ‘‘तुम मुझे लोन दिला दोगे, तो मैं फिर कभी तुम से कुछ नहीं मांगूंगी.’’

प्रभात चिंता में पड़ गया. प्रभात को परेशान देख कामिनी बोली, ‘‘अगर तुम लोन नहीं दिलाना चाहते हो, तो कोई बात नहीं. मैं यह समझ कर अपने दिल को समझा लूंगी कि तुम्हें मुझ से नहीं, मेरे जिस्म से प्यार था. मेरा जिस्म पाने के बाद तुम ने मुझ से किनारा कर लिया.’’

प्रभात ने मन ही मन तय किया कि वह हर हाल में बैंक से कामिनी को लोन दिला कर यह साबित कर देगा कि वह उस के जिस्म का नहीं, बल्कि उस के प्यार का भूखा है. उस ने नकली गारंटर बनने का फैसला किया. बैंक में अकसर ऐसा किया जाता है, जब पैसा महफूज हो. प्रभात ने ऐसा किया भी. नकली गारंटर बना कर 2 महीने में उस ने कामिनी को बैंक से 5 करोड़ रुपए का लोन दिला दिया.

5 करोड़ रुपए पा कर कामिनी की खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा. 2 महीने तक तो ठीक रहा, पर उस के बाद प्रभात के ऊपर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा. कामिनी प्रभात से कम मिलने लगी. लोन का ब्याज नहीं आ रहा था. सारा पैसा निकाल लिया गया था.

कामिनी को लोन दिलाने के 4 महीने बाद बैंक के अफसरों को सचाई का पता चल गया. नतीजतन, प्रभात को नौकरी से हाथ धोना पड़ा. उस पर मुकदमा चला सो अलग. एक दिन प्रभात ने कामिनी से शादी करने के लिए कहा, तो उस ने शादी करने से साफ मना कर दिया. कामिनी ने कहा, ‘‘आज मैं तुम्हें एक सचाई बता रही हूं…’’

‘‘क्या?’’ प्रभात ने पूछा. ‘‘सचाई यह है कि मैं ने तुम्हें कभी प्यार ही नहीं किया. दरअसल, मैं प्यारमुहब्बत में यकीन नहीं करती. कालेज लाइफ में तुम मेरे आगेपीछे घूमने लगे थे, तो टाइम पास के लिए मैं ने तुम्हारा साथ दिया था, पर तुम से प्यार नहीं किया था.

‘‘दरअसल, मेरी मंजिल रुपए कमाना है. होश संभालते ही मैं भरपूर दौलत की मालकिन बनने का सपना देखने लगी थी. सपना पूरा करने के लिए मैं कुछ भी करगुजरने के लिए तैयार थी. इस के लिए मैं कोई शौर्टकट रास्ता ढूंढ़ रही थी कि बैंक में तुम मिल गए और मुझे रास्ता दिखाई पड़ गया. ‘‘मुझे तुम से जो पाना था, मैं पा चुकी हूं. अब तुम्हारे पास मुझे देने के लिए कुछ भी नहीं बचा है. तुम मुझ से जो चाहते थे, मैं भी वह तुम्हें दे चुकी

हूं, इसलिए अब हम दोनों के बीच कुछ नहीं रहा. ‘‘तुम से कमाए पैसों से मैं अपनी जिंदगी संवार लूंगी. तुम भी अपनी जिंदगी के बारे में सोचो, अब तुम मुझ से कभी मिलने की कोशिश मत करना.’’

प्रभात यह सुन कर हैरान रह गया. कोई हसीना इतनी खतरनाक भी हो सकती है, वह नहीं जानता था. अब कामिनी से कोई बात करना बेकार था, इसलिए प्रभात चुपचाप उस के घर से बाहर आ गया. कामिनी से उस का मोह भंग हो गया था और वह जल्दी अपने घर लौट जाना चाहता था.

लेखक- राम महेंद्र राय

अब घर पर भी बनाएं बूंदी और बूंदी के लड्डू

बूंदी के लड्डू किसे पसंद नहीं होगे लेकिन बाजार के लड्डू खा खाकर आप भी बोर हो गए होंगे. इसलिए आज हमको बताएंगे घर पर आसानी से बूंदी बनाने का तरीका और फिर बूंदी के लड्डू बनाने की विधी. तो फिर देर किस बात की आइए जानते हैं.

सामग्री

  1. 1/2 कप पानी
  2. 1 कप चीनी
  3. केसर

सामग्री बूंदी की

  1. 1 कप बेसन
  2. केसर
  3. 3/4 कप पानी
  4. 2 से 3 काली इलायची
  5. 1/2 छोटा चम्मच मगज
  6. तलने के लिए तेल
  7. लड्डू का आकार देते समय हथेलियों पर लगाने के लिए 1 छोटा चम्मच तेल या घी.

विधि चीनी की चाशनी और बूंदी के लिए घोल बनाने की

  • 1 पैन में चीनी, केसर के धागे और पानी घोल कर चाशनी तैयार करने के लिए आंच पर रख दीजिए.
  • चीनी के घोल को पकाने के लिए धीमी से मध्यम आंच पर रखें.
  • 1 बाउल में बेसन, केसर (पाउडर या हाथ से ही हलका पिसा हुआ) और पानी डाल कर घोल बनाएं.
  • यह बैटर न तो गाढ़ा होना चाहिए और न ही पतला.
  • चाशनी को 1 तार की चाशनी बनने तक पकाएं और फिर आंच बंद कर दें.
  • ध्यान रहे कि बूंदी डालते समय चाशनी गरम होनी चाहिए.
  • चाशनी को गरम रखने के लिए आप चाशनी के पैन को गरम पानी से भरी ट्रे या बरतन में रख सकती हैं.

विधि बूंदी की

  • एक कड़ाही में डीप फ्राई करने के लिए तेल गरम करें. तेल मध्यम गरम होना चाहिए.
  • जब आप बेसन के घोल की 1 या 2 बूंदें डालते हैं, तो वे सतह पर तेजी से लेकिन स्थिर रूप से ऊपर आनी चाहिए.
  • अगर ये बहुत जल्दी ऊपर आ जाती हैं तो तेल बहुत गरम है. यदि वे ऊपर नहीं आते हैं या समय लेते हैं, तो तेल पर्याप्त गरम नहीं है.
  • एक छेद वाली कलछी/चम्मच लें. अपने हाथों से कलछी को तेल के ऊपर रखें. तली हुई बूंदी को निकालने के लिए आप को एक बड़ी कलछी या झारे की आवश्यकता होगी.
  • बूंदी को मध्यम गरम तेल में ही तलें. अगर तेल गरम होगा तो बूंदी तेल सोख लेगी और क्रिस्पी नहीं बनेगी, वहीं अगर तेल ज्यादा गरम हुआ तो बूंदी जल है सकती.
  • बूंदी के लिए आप एक बड़े चम्मच में बेसन का घोल लें और उसे छेद वाली कलछी के ऊपर डालें और बेसन के घोल वाले से चम्मच से दबाएं ताकि बैटर कलछी के छेदों के नीचे कड़ाही में गिरने लगे.
  • बूंदी को सुनहरा होने तक तलें, इन्हें ज्यादा फ्राई या क्रिस्पी न करें.
  • बूंदी को सही पकने के लिए लगभग 45 सैकंड से 1 मिनट का समय पर्याप्त है.
  • यह कदम महत्त्वपूर्ण है क्योंकि अगर बूंदी कुरकुरी हो जाती है तो मोतीचूर के लड्डू नर्म नहीं होंगे और वे चाशनी को अच्छे से नहीं सोख पाएंगे.
  • तली हुई बूंदी कड़ाही से निकालने के लिए बड़े खांचे वाले चम्मच/झारे का इस्तेमाल करें.
  • बूंदी निकालने के बाद तेल को अच्छी तरह से छान लें और फिर उन्हें सीधे चाशनी में डालें. ध्यान दें कि चाशनी गरम होनी चाहिए. अगर चाशनी गरम नहीं है तो इसे गरम कर लें.
  • यदि चीनी की चाशनी क्रिस्टल बन जाती है तो 1 से 2 बड़े चम्मच पानी मिला कर फिर से गरम करें.
  • चपटी या पूंछ वाली बूंदी के बारे में परेशान होने की जरूरत नहीं है क्योंकि हम उसे बाद में ब्लैंडर में डाल कर पीसेंगे.
  • इसी तरह सारी बूंदी बना लें और उस के तेल को अच्छी तरह डाल कर उसे तुरंत गरम चाशनी में डाल कर अच्छे से मिलाती जाएं.
  • चाशनी में बूंदी नर्म हो जानी चाहिए.

विधि लड्डू की

  • एक ब्लैंडर या मिक्स्चर में चाशनी के साथ मिक्स की गई सारी बूंदी डालें.
  • 1 बड़ा चम्मच गरम पानी डालें और हलका पीस लें. ध्यान रहे हमें सिर्फ बूंदी को लड्डू का आकार देने में भी मुश्किल होती है.
  • अगर बूंदी कुरकुरी हो तो आप मिक्सर में जरूरत के अनुसार 1 से 2 बड़े चम्मच गरम पानी और डाल सकती हैं ताकि बूंदी नरम रहें.
  • बूंदी में मगज, काली इलायची डाल कर अच्छे से मिक्स करें.
  • हथेलियों पर थोड़ा सा तेल या घी लगा कर लड्डू का आकार दें.
  • लड्डू बनाते समय मिश्रण गरम होना चाहिए. ठंडा होने पर यह मिश्रण सख्त हो जाएगा और लड्डू आकार नहीं ले पाएंगे.
  • आप इन्हें खरबूजेके बीज, मगज, किशमिश, बादाम या पिस्ता की कतरन से सजा सकती हैं.
  • इन लड्डुओं को फ्रिज में भी स्टोर किया जा सकता है.

-व्यंजन सहयोग: नारायण दत्त शर्माकलिनरी हैडबारबेक्यू नेशन हौस्पिटैलिटी लिमिटेड

उसके लिए: अपूर्वा ने प्रणव को क्या जवाब दिया?

वह मुंह फेर कर अपूर्वा के सामने खड़ा था. अपूर्वा लाइबे्ररी में सैल्फ से अपनी पसंद की किताबें छांट रही थी. पैरों की आवाज से वह जान गई थी कि प्रणव है. तिरछी नजर से देख कर भी अपूर्वा ने अनदेखा किया. सपने में यह न सोचा था कि दिलफेंक आशिक किसी दिन इस तरह से आ सकता है. दोनों का यह प्यार परवान तो नहीं चढ़ा, पर दिलफेंकों के लिए जलन का सबब रहा. प्रणव तो अपूर्वा की सीरत और अदाओं पर ही क्या काबिलीयत पर भी फिदा था. रिसर्च पूरी होने तक पहुंचतेपहुंचते एक अपूर्वा ही उस के मन चढ़ी. मन चढ़ने के प्रस्ताव को उस के साथ 2 साल गुजारते भी उगल न सका.

अपूर्वा प्रणव की अच्छी सोच की अपनी सहेलियों के सामने कई बार तारीफ कर चुकी थी. मनचले और मसखरे भी प्रणव को छेड़ते, ‘अपूर्वा तो बनी ही आप के लिए है.’ कुछ मनचले ऐसा कहते, ‘यह किसी और की हो भी कैसे सकती है? यह ‘बुक’ है, तो सिर्फ आप के वास्ते.  कुछ कहते, ‘इसे तो कोई दिल वाला ही प्यार कर सकता है.’

अपूर्वा के सामने आने का फैसला भी प्रणव का एकदम निजी फैसला था. यह सब उस ने अपूर्वा के दिल की टोह लेने के लिए किया था कि वह उसे इस रूप में भी पसंद कर सकती है या नहीं. प्रणव ने बदन पर सफेद कपड़ा पहन रखा था और टांगों पर धोतीनुमा पटका बांधा था. पैरों में एक जोड़ी कपड़े के बूट थे. माथे पर टीका नहीं था. अपूर्वा रोज की तरह लाइब्रेरी में किताबें तलाशने में मगन थी. प्रणव दबे पैर उस के बहुत करीब पहुंचा और धीमे से बोला, ‘‘मिस अपूर्वा, मुझे पहचाना क्या?’’

अपूर्वा थोड़ा तुनकते हुए बोली, ‘‘पहचाना क्यों नहीं…’’ फिर वह मन ही मन बुदबुदाई, ‘इस रूप में जो हो.’

प्रणव ने कनैक्शन की गांठ चढ़ाने के मकसद से फिर पूछा, ‘‘मिस अपूर्वा, मैं ने आप के पिताजी को अपनी कुछ कहानियों की किताबें आप के हाथ भिजवाई थीं. क्या आप ने उन्हें दे दी थीं?’’

‘‘जी हां, दे दी थीं,’’ वह बोली.

‘‘आप के पिताजी ने क्या उन्हें पढ़ा भी था?’’

‘‘जी हां, उन्होंने पढ़ी थीं,’’ अपूर्वा ने छोटा सा जवाब दिया.

‘‘तो क्या आप ने भी उन्हें पढ़ा था?’’

‘‘हां, मैं ने भी वे पढ़ी हैं,’’ किताबें पलटते व छांटते हुए अपूर्वा ने जवाब दिया और एक नजर अपने साथ खड़ी सहेली पर दौड़ाई.

सहेली टीना ने बड़ी मुश्किल से अपनेआप को यह कहते हुए रोका, ‘‘रसिक राज, उन्हें तो मैं ने भी चटकारे लेते गटक लिया था. लिखते तो आप अच्छा हो, यह मानना पड़ेगा. किसी लड़की को सस्ते में पटाने में तो आप माहिर हो. चौतरफा जकड़ रखी है मेरी सहेली अपूर्वा को आप ने अपने प्रेमपाश में.’’ प्रणव ने फिर हिम्मत जुटा कर पूछा, ‘‘मिस अपूर्वा, क्या मैं उन किताबों की कहानियों में औरत पात्रों के मनोविज्ञान पर आप की राय ले सकता हूं? क्या मुझे आज थोड़ा वक्त दे सकती हैं?’’ अपूर्वा इस बार जलेकटे अंदाज में बोली, ‘‘आज तो मेरे पास बिलकुल भी समय नहीं है. हां, कल आप से इस मुद्दे पर बात कर सकती हूं.’’

प्रणव टका सा जवाब पा कर उन्हीं पैरों लाइब्रेरी से बाहर आ गया. अगले कल का बिना इंतजार किए लंबा समय गुजर गया, साल गुजर गए. इस बीच बहुतकुछ बदला. अपूर्वा ने शादी रचा ली. सुनने में आया कि कोई एमबीबीएस डाक्टर था. खुद प्रोफैसर हो गई थी. बस… प्रणव ने सिर्फ शादी न की, बाकी बहुतकुछ किया. नौकरीचाकरी 3-4 साल. संतों का समागम बेहिसाब, महंताई पौने 4 साल.

65 साल का होने पर लकवे ने दायां हिस्सा मार दिया. लिखना भी छूट गया. नहीं छूटा तो अपूर्वा का खयाल. लंगड़ातेलंगड़ाते भाई से टेर छेड़ता है अनेक बार. कहता है, ‘‘भाई साहब, वह थी ही अपूर्वा. जैसा काम, वैसा गुण. पढ़नेलिखने में अव्वल. गायन में निपुण, खेलकूद में अव्वल, एनसीसी की बैस्ट कैडेट, खूबसूरत. सब उस के दीवाने थे. ‘‘वह सच में प्रेम करने के काबिल थी. वह मुझ से 9 साल छोटी थी. मैं तो था अनाड़ी, फिर भी उस ने मुझे पसंद किया.’’

प्रणव का मन आज बदली हुई पोशाक में भी अपूर्वा के लिए तड़प रहा है. भटक रहा है. उसे लगता है कि अपूर्वा आज भी लाइब्रेरी की सैल्फ से किताबें तलाश रही है, छांट रही है. एनसीसी की परेड से लौट रही है. वह उसे चाय पिलाने के लिए कैंटीन में ले आया है. पहली बार पीले फूलदार सूट में देखी थी अपने छोटे भाई के साथ. रिसैप्शन पार्टी में उस ने सुरीला गीत गया था. श्रोता भौंचक्क थे.

प्रणव ने कविता का पाठ किया था. इस के बाद पहली नजर में जो होता है, वह हुआ. कविताकहानियों की पोथियां तो आईं, पर रिसर्च पूरी नहीं हुई. वह अभी भी जारी है. 40-45 सालों के बाद भी ये सारे सीन कल की बात लगते हैं. बारबार दिलोदिमाग पर घूमते हैं. वह कल आज में नहीं बदल सकता, प्रणव यह बात अच्छी तरह जानता है. वह आज सिर्फ अपूर्वा की खैर मांगता है. उस की याद में किस्सेकहानियां गढ़ता है. उस की खुशहाली के गीत रचता है.

डा. प्रत्यूष गुलेरी

मैं गरमी में जब भी मेकअप करती हूं तो कुछ ही घंटों में पिघल जाता है, मुझे क्या करना चाहिए?

सवाल

गरमी का मौसम आ रहा है. मेरी स्किन बहुत ही औयली है. मैं मेकअप किस तरह से करूं कि मेरा मेकअप बहुत देर तक टिके क्योंकि मैं जब भी मेकअप करती हूं कुछ ही घंटों में पिघल जाता है?

जवाब

आप जब भी मेकअप करने लगें उस से पहले कुछ खास तैयारी करने की जरूरत है.

  1. सब से पहले अपनी स्किन को क्लीन कर के टोनर लगाएं. टोनर को एक कौटन पर ले कर स्किन पर थपथपाएं और उस को सूखने दें पोंछें नहीं. इस से आप के पोर्स बंद हो जाएंगे जिस से आप का मेकअप ज्यादा देर तक टिकेगा.
  2. अगर बहुत ही गरमी हो तो एक कौटन के कपड़े में एक बर्फ का टुकड़ा ले कर अपनी स्किन पर फिराएं और उस को अपनेआप सूखने दें.
  3. इस के बाद टोनर का इस्तेमाल करें.
  4. आप के स्किन के पोर्स बंद होने की वजह से मेकअप बहुत घंटे टिक सकेगा.
  5. मेकअप का बेस हमेशा वाटरपू्रफ चुनें. उस के बाद उसे लूज पाउडर से सैट करें. इस से आप का बेस काफी हद तक टिकेगा.
  6. इस के अलावा बाकी के प्रोडक्ट भी वाटरपू्रफ लें जैसेकि आईलाइनर, मसकारा, वाटरपू्रफ यूज करें. लिपस्टिक लौंगलास्टिंग लें, बिंदी स्टीकर वाली लें.
  7. आईशैडो और ब्लशऔन भी पाउडर वाला इस्तेमाल करें. सारा मेकअप करने के बाद मेकअप सीलर से मेकअप को सील कर लें. इस से आप का मेकअप काफी देर तक टिकेगा और आप खूबसूरत बनी रहेंगी.
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