लाल साया: भाग-2

‘‘महेश तो आज छुट्टी पर है. गांव गया है.‘‘

‘‘फिर तो बहुत अच्छा है. हम दोनों आज शाम तक निकल जाते हैं. सब को लगेगा कि हम तीनों चले गए.‘‘

‘‘ठीक है, मैं ड्राइवर को बोल दूंगा.”

‘‘नहीं, नहीं, अंकल, आप के ड्राइवर के साथ नहीं.”

‘‘हां, ठीक कह रहे हो. मैं टैक्सी बुला दूंगा.‘‘

‘‘जी.”

दोपहर में तीनों लड़के नीचे आए तो विमला देवी की सूजी आंखें उन के दिल का भेद खोल रही थीं.

‘‘पापा मुझे माफ कर दीजिए. मैं आज के बाद कभी शराब को हाथ भी नहीं लगाऊंगा,” कहते हुए विशेष पिता के पैरों में गिर पड़ा. वह फूटफूट कर रो रहा था.

निशब्द उन्होंने उठा कर बेटे को गले लगा लिया.

‘‘रिचा… पापा रिचा… मुझे कुछ याद नहीं है…” वह हिचकियों के साथ बोला.

‘‘मैं हूं ना बेटा… सब संभाल लूंगा… और फिर तुम इतने भाग्यशाली हो कि तुम्हारे इतने अच्छे दोस्त हैं.”

‘‘अंकल, हम दोनों दिन में ही निकल जाते हैं. हम ने ऊपर सब ठीक कर दिया है.”

‘‘मैं ने दूसरा ड्राइवर बुला रखा है. वह तुम्हें छोड़ आएगा. और हां बेटा, जैसे विशेष वैसे ही तुम लोग. इसलिए यह छोटी सी भेंट है. तुम्हारे मकान के लिए पच्चीस लाख का यह चेक है. और तुम्हारे बिजनेस के लिए पच्चीस लाख का यह चेक है.‘‘

‘‘अरे अंकल…‘‘

‘‘बस रख लो बेटा, मुझे खुशी होगी,‘‘ बिना आंखें मिलाए सेठजी बोले.

कालोनी में इस बात की चर्चा जाने कैसे फैल गई कि सेठ मदन लाल के घर रात में गोली चली थी. सफाई देदे कर दोनों परेशान थे. विमला देवी ने तो सब से मिलना ही बंद कर दिया. सेठ मदन लाल तनाव में रहने लगे. ऊपर से रिचा की गुमशुदगी की रिपोर्ट के चलते पुलिस जांच करने उन के घर आ धमकी. बड़ी मुश्किल से लेदे कर सेठजी ने मामला निबटाया.

इस घटना को 4-6 महीने बीत गए थे. एक दिन विमला देवी बोलीं, ‘‘सुनिएजी, कहीं विशेष की शादी की बात चलाइए. अब उस की शादी तो करनी ही है ना…‘‘

‘‘देखो, थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा. जल्दबाजी ठीक नहीं. देख तो रही हो जितने शादी के प्रस्ताव थे, सभी कोई ना कोई बहाना कर पीछे हट गए. पता नहीं कैसे समाज में हमारे परिवार को ले कर नकारात्मक माहौल बन गया है. तो अब थोड़ी प्रतीक्षा ही करनी होगी.”

‘‘मुझे तो बड़ी चिंता हो रही है.”

‘‘मां, मुझे शादी नहीं करनी है. कितनी बार तो कह चुका हूं. फिर वही विषय ले कर बैठ जाती हैं आप,” विशेष अचानक कमरे में आ गया था.

तभी मदन लाल जी का फोन घनघनाया.

‘‘हां उमेश, बेटा.‘‘

‘‘अरे, पिछले हफ्ते ही तो 10 लाख तुम्हारे अकाउंट में डाले थे. नहीं, अब मैं और नहीं दे सकता,’’ कह कर उन्होंने गुस्से से फोन काट दिया.

‘‘उमेश… आप से पैसे मांग रहा है?” चकित सा विशेष पिता को देख रहा था.

‘‘पैसे नहीं मांग रहा है… ब्लैकमेल कर रहा है. 10-10 लाख दो बार ले चुका है और अब फिर…‘‘ गुस्से से वे हांफने लगे थे.

‘‘मुझे कुछ नहीं बताया उस ने,” विशेष के स्वर में हैरानी थी.

‘‘अरे, आप को क्या हो रहा है?” विमला देवी उठ कर पति के सीने पर हाथ फेरने लगीं, जिसे वे कस कर दबा रहे थे. उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, परंतु बचाया नहीं जा सका.

हंसताखिलखिलाता घर बिखर गया. घर में जैसे मुर्दनी छा गई थी. विशेष पिता की जगह अपनी शर्राफे की दुकान पर बैठने लगा था. दिन जैसेतैसे कट रहे थे.

‘‘विशेष, छुटकी की शादी का न्योता आया है. जाना पड़ेगा,” मां विशेष के आते ही बोलीं.

‘‘ठीक है मां, मैं मामाजी के यहां आप के जाने की व्यवस्था कर देता हूं.”

‘‘नहीं बेटा तुझे भी चलना होगा.”

‘‘आप जानती तो हैं मां…”

‘‘जानती हूं, तू कहीं नहीं जाना चाहता. परंतु मीरा की शादी में भी तू पढ़ाई के कारण नहीं जा पाया था. उन्हें लगेगा, उन की गरीबी के कारण तू उन के घर नहीं आता.”

‘‘यह सच नहीं है मां. मेरे लिए रिश्ते महत्व रखते हैं. गरीबीअमीरी तो मैं सोचता भी नहीं. मैं मामाजी की बहुत इज्जत करता हूं,‘‘ विशेष ने प्रतिवाद किया.

‘‘जानती हूं, इसीलिए चाहती हूं कि तू मेरे साथ चल. दो दिन की ही तो बात है,‘‘ बेटे के सिर पर हाथ फेरते हुए वे बोलीं.

‘‘ठीक है मां, जैसा आप चाहे.‘‘

गांव में उन की गाड़ी के रुकते ही धूम मच गई ‘‘बूआजी आ गईं, बूआजी आ गईं.”

भाईभाभी के साथ छुटकी भी दौड़ी आई और उस के साथ में थी उस की प्यारी सहेली रजनी. विशेष पर नजर पड़ते ही अपनी सुधबुध खो बैठी. सब एकदूसरे को दुआसलाम कर रहे थे और रजनी अपलक विशेष को निहारे जा रही थी.

‘‘रजनी, भैया को ऐसे क्यों  घूर रही हो?‘‘ छुटकी ने कोहनी मारी.

सब उधर ही देखने लगे. रजनी के साथसाथ विशेष भी झेंप गया, ‘‘नहीं… कुछ नहीं…‘‘ कहते हुए रजनी बूआजी का सामान निकलवाने लगी.

‘‘आप रहने दीजिए, मैं निकलवा दूंगा,’’ विशेष ने उसे टोका.

‘‘आप तो पाहुन हैं,” वो खिलखिलाई और बैग उठा कर अंदर भाग गई.

‘‘बहुत ही प्यारी बच्ची है बीबीजी. अपनी छुटकी की सब से पक्की सहेली है. जान छिड़कती हैं दोनों एकदूसरे पर,” स्नेह से भौजाई बोलीं.

जब तक सब लोग आ कर बैठे, रजनी सब के लिए शरबत ले कर हाजिर थी. बूआजी सब से बोलतीबतियाती रहीं, पर निगाह उन की हर पल रजनी पर ही टिकी रही. एक आशा की किरण दिखाई दी थी उन्हें. रजनी का स्पष्ट झुकाव उन के सुदर्शन बेटे पर दिखाई दे रहा था. और कितने महीनों बाद विशेष भी खुश दिखाई दे रहा था. शाम को जब ढोलक की थाप पर रजनी नाची तो विमला देवी लट्टू ही हो गईं.

‘‘भाभी, रजनी तो वाकई बहुत अच्छा नाचती है.”

‘‘हां बीबीजी, बहुत भली और गुणी लड़की है. पढ़ने में भी अव्वल आती है. वजीफा पाती है. लगन की ऐसी पक्की कि जाड़ा, गरमी, बरसात साइकिल से कसबे तक पढ़ने जाती है,” स्नेह पगे स्वर में भौजाई बोलीं.

‘‘अपने विशेष के लिए कैसी रहेगी?” वे सीधे भाभी की आंखों में देख रही थीं.

‘‘बीबीजी, लड़की तो बहुत ही अच्छी है. लाखों में एक. जोड़ी भी बहुत अच्छी लगेगी, लेकिन…‘‘ बात अधूरी ही छोड़ दी उन्होंने.

‘‘लेकिन क्या…?‘‘

‘‘लेकिन, बहुत गरीब परिवार से है. आप की हैसियत की तो छोड़ दीजिए. साधारण शादी भी नहीं कर सकेंगे वे लोग.‘‘

आगे पढ़ें- रजनी के लिए आए इस प्रस्ताव से छुटकी की शादी की…

शरणागत: कैसे तबाह हो गई डा. अमन की जिंदगी- भाग 2

इन का परिवार पहाड़ी था, परंतु ईसाई धर्म अपना लिया था. उन की बिरादरी में बहुत से परिवार थे, जिन्होंने पाखंडों और रूढि़वादिता से तंग आ कर अपनी इच्छा से इस धर्म को अपनाया था. अगले दिन जब अमन वार्ड में मरीजों को देखने गया तो नीरा उसी वार्ड में थी. उस के मातापिता भी वहीं खड़े थे. डा. अमन ने जब नीरा का हालचाल पूछा तो उस ने अपनी लंबीलंबी पलकें झपका कर ठीक महसूस करने का इशारा कर दिया. उस के पिता उतावले से हो कर पूछने लगे, ‘‘डाक्टर हड्डी जुड़ने में कितना समय लगेगा? ठीक तो हो जाएगी न?’’

अमन ने उन्हें धीरज बंधाते हुए कहा, ‘‘हड्डी जुड़ने में थोड़ा समय लगेगा. आप चिंता न करें, आप की बेटी बिलकुल ठीक हो जाएगी.’’

यह सुन कर उन दोनों के चेहरे पर गहरी चिंता झलकने लगी. यह देख कर अमन को हैरानी हुई. उस ने नीरा के पिता से कहा, ‘‘आप की बेटी ठीक है. फिर यह चिंता किसलिए कर रहे हैं?’’

इस पर नीरा के पिता ने झिझकते हुए बताया, ‘‘डाक्टर साहब, नीरा की परीक्षा खत्म होने के बाद सगाई होने वाली है. हमारी बिरादरी के एक आईएएस लड़के से इस की शादी की बात पक्की हो रखी है. 3 दिन बाद लड़का सगाई की रस्म के लिए आने वाला है. उस के मातापिता यहीं रहते हैं.’’

अमन ने कहा, ‘‘देखिए, आप पहले बेटी की सेहत पर ध्यान दीजिए. सगाई बाद में होती रहेगी,’’ कह अमन अन्य मरीजों का मुआयना कर वार्ड से बाहर जाने से पहले नीरा से बोला, ‘‘मेरे पास कुछ किताबें हैं, आप को भिजवाता हूं, पढ़ती रहेंगी तो मन लगा रहेगा.’’

आज नीरा के होने वाले पति व उस के परिवार वालों की आने की उम्मीद में उस के मम्मीपापा जल्दी आ गए. वे नीरा के लिए गुलाबी रंग का सलवारकुरता लाए थे. नीरा के चेहरे पर भी खुशी झलक रही थी. जल्दी से नर्स को बुला कर हाथमुंह धो कर कपड़े बदल वह बेसब्री से इंतजार करने लगी.

सुबह से शाम हो गई पर लड़के के परिवार का कहीं दूरदूर तक अतापता न था. अमन जब शाम को वार्ड में आया तो देखा नीरा के मातापिता चेहरे लटकाए जा रहे थे, नीरा को यह कह कर कि चर्च में जा कर पता करते हैं. शाम को वे वहां आएंगे ही… सब ठीकठाक हो. नीरा भी थकावट और चिंता से बेहाल थी. चुपचाप चादर ओढ़ कर सो गई.

अगले दिन नीरा के मातापिता आए तो उन के चेहरों पर उदासी छाई थी. जैसे अरसे से बीमार हों.

अमन वार्ड के अन्य मरीजों को देख रहा था. नीरा की मां आते ही रोष भरी आवाज में बोल उठीं, ‘‘मैं कहती थी न कि दाल में कुछ काला है. चर्च में लड़के का परिवार आया था पर परायों जैसा व्यवहार था. औपचारिक हायहैलो का जवाब दे कर चर्च से निकल गए. तुम्हारा रिश्ता करवाने वाली महिला आशा भी नजरें चुरा रही थी. मैं ने पास जा कर पूछा तो बोली, ‘‘लड़के का परिवार बहुत नीच निकला. जब मैं ने नीरा के संग सगाई के प्रोग्राम के बारे में पूछा तो नीरा के बारे में उलटासीधा बोलने लगे कि नीरा हाथ छोड़ कर साइकिल चला रही थी…कुछ लड़कों के साथ रेसिंग कर रही थी. ऐक्सिडैंट इसी कारण हुआ..

‘‘न भई न मेरे लड़के ने तो साफ मना कर दिया कि नहीं करता सगाई. कहीं नीरा की टांग में फर्क रह गया तो उस की जिंदगी बरबाद हो जाएगी. उसे तो आएदिन क्लब व पार्टियों में जाना पड़ता है.

‘‘भई हम ने तो वही किया जो बेटे ने कहा. अच्छा हुआ अभी बातचीत ही हुई थी, कोई रस्म नहीं हुई थी.’’

सारी बात सुन कर नीरा की मां पस्त हो कर स्टूल पर बैठ गईं और सिसकने लगीं. पिता भी सिर झुकाए पलंग पर बैठ गए. ये सब सुन कर नीरा गुस्से से कांपने लगी. फिर चिल्ला कर बोली, ‘‘उन की इतनी हिम्मत… मेरे लिए ऐसा बोला. उस दिन तो लड़के की मां तारीफों के पुल बांध रही थीं, नीरा के हाथ में चाय का गिलास था. उस ने उसे जोर से पटक दिया. वार्ड के अन्य मरीज उसे देखने लगे. डा. अमन और उस के सहयोगी नीरा को शांत करने की कोशिश करने लगे. नीरा के पिता नीरा की मां को डांटते हुए बोले, ‘‘अभी सबकुछ बताना था?’’

नीरा की मां भी भरी बैठी थीं. गुस्से में जोर से बोलीं, ‘‘तो क्या बताने के लिए मुहूर्त निकलवाती?’’

बड़ी मुश्किल से उन्हें बाहर भेज कर नीरा को नींद का इंजैक्शन लगाया गया. पल भर में ही सब कुछ घटित हो गया.

अमन सोचने लगा वास्तव में नीरा के साथ अन्याय हुआ है. यदि यह ऐक्सिडैंट शादी के बाद होता तो क्या होता? उसे समाज के ऐसे मतलबी लोगों से नफरत होने लगी. उसे नीरा से सहानुभूति सी होने लगी कि अच्छीभली लड़की के जीवन में जहर घोल दिया.

नीरा अभी इस घटना से उबर भी नहीं पाई थी कि एक और घटना हो गई, जिस ने नीरा की जीवनधारा को उलटी दिशा में मोड़ दिया.

2 दिन बाद ही नीरा की मां जब नीरा से मिलने आईं तो बहुत ही गुस्से में थीं. आते ही आवदेखा न ताव नीरा पर बरस पड़ीं. बोलीं, ‘‘नीरा सचसच बताओ तुम सचमुच हाथ छोड़ कर साइकिल चला रही थी? लड़कों के साथ रेसिंग कर रही थी? सारी कालोनी में तुम्हारे ही चर्चे हैं.’’

नीरा का दिल पहले ही चोट खाया था. यह बातें उसे नश्तर की तरह चुभने लगीं. मां और बेटी के बीच बहस ने खतरनाक रूप ले लिया. नीरा पलंग से उठने की कोशिश में गिर गई. डाक्टर ने उसे प्राइवेट रूम में शिफ्ट कर दिया. सीनियर डाक्टर ने नीरा के घर वालों पर नीरा से मिलने की पाबंदी लगा दी क्योंकि इस का नीरा की सेहत पर गलत असर पड़ रहा था और अस्पताल का माहौल भी बिगड़ रहा था. हां, वे नीरा का हाल डाक्टरों से फोन से पूछ सकते थे.

शारीरिक और मानसिक चोट ने नीरा को बुरी तरह तोड़ दिया था. वह न तो किसी से बातचीत करती और न ही दवा व भोजन समय पर लेती. सभी डाक्टरों ने उसे समझाया पर वह टस से मस न हुई.

आगे पढ़ें- नीरा अमन को अपना मित्र समझने लगी. वह…

टमाटर से बने इन 6 फेस पैक से पाएं इंस्टैंट ग्लो

टमाटर जो आपको हर घर की किचन में मिल जाएगा. क्योंकि टमाटर खाने के स्वाद को कई गुणा बढ़ाने का काम जो करता है. यहीं नहीं बल्कि लोग इसे सलाद व टमाटर की चटनी के रूप में भी बड़े चाव से खाते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि जो टमाटर सब्जियों की जान होता है वो स्किन में भी नई जान डालने का काम करता है. क्योंकि टमाटर में हर तरह की स्किन प्रोब्लम का सोलूशन जो छुपा है . तो जानते हैं इस संबंद में ब्यूटी एक्सपर्ट अंजलि से कि टमाटर से कैसेकैसे पैक बनाकर किन किन तरह की स्किन प्रोब्लम्स से छुटकारा पा सकते हैं.

1. टोमेटो फेस पैक फॉर टैनिंग

चेहरे की बात हो या फिर हाथ पैरों की , टैनिंग न चाहते हुए भी हो ही जाती है. क्योंकि जब भी हम सनस्क्रीन के बिना बाहर निकलते हैं तो सूर्य की अल्ट्रा वायलेट किरणों के संपर्क में आने से हमारी स्किन टेन हो ही जाती है. जो हमारे रंग पर असर डालती है. ऐसे में अगर इसका समय रहते ट्रीटमेंट नहीं किया जाता तो ये समस्या बढ़ भी सकती है. ऐसे में आपको महंगे ट्रीटमेंट नहीं बल्कि घर पर ही टमाटर से टैनिंग को रिमूव करने वाला फेसपैक बनाना होगा.

कैसे बनाएं

– आप एक टमाटर को काट कर बाउल में उसका रस निकाल लें. फिर इसमें कुछ बूंदे नींबू के रस की मिला लें. और आधा चम्मच के करीब ताजा दही मिलाकर इसका स्मूद पेस्ट तैयार करें और फिर इसे चेहरे पर अप्लाई करके 10 मिनट के लिए छोड़ दें और धो लें. ऐसा अगर आप रोजाना करेंगे तो यकीन मानिए आपकी स्किन से सारी टैनिंग गायब हो जाएगी और आपके चेहरे पर ग्लो भी आ जाएगा. क्योंकि इनमें ब्लीचिंग प्रोपर्टीज होने के साथ स्किन को नौरिश करने वाली प्रोपर्टीज होती हैं , जो टैनिंग को रिमूव करने के साथ स्किन पर चमक लाने का काम करती हैं.

2. फेस पैक फॉर डार्क स्पोट्स

चेहरे पर दाग धब्बे किसे पसंद होते हैं. लेकिन विभिन कारणों से दाग धब्बे हो ही जाते हैं. अकसर हाइपर पिगमेंटेशन की स्तिथि में ऐसा होता है. क्योंकि तब स्किन ज्यादा मेलेनिन उत्पन करने लगती है. जिससे स्किन डार्क दिखने के साथ साथ स्किन पर पैचेज नजर आने शुरू हो जाते हैं. लेकिन टमाटर का पैक इस समस्या से निजात दिलवाने का काम करता है.

कैसे बनाएं

– आप एक बाउल में टमाटर के गूदे को लेकर उसमें कुछ बूंदे नींबू के रस की डालें, फिर इस पेस्ट को अच्छे से मिलाते हुए चेहरे पर अप्लाई कर लें. कम से कम इस पैक को आप अपने चेहरे पर 15 मिनट अप्लाई करें और फिर सूखने के बाद धो लें. धीरे धीरे स्किन से डार्क स्पोट्स हलके होकर गायब होने लगेंगे. क्योंकि टमाटर में उच्च मात्रा में मौजूद लीकोपेन नामक तत्व स्पोर्टस को हलका करने का काम करता है , वहीं नींबू में विटामिंग सी स्किन पर ग्लो लाने के साथ साथ दाग धब्बे को कम करने में अहम रोल निभाता है. आप इस पैक को हफ्ते में 4 दिन जरूर अप्लाई करें.

3. पैक फोर ऑयली स्किन

अगर आपकी स्किन ऑयली है, जिसके कारण आप अपने चेहरे की चिपचिपाहट से परेशान हैं साथ ही आपको एक्ने की भी प्रोब्लम है तो आप परेशान न हो और न ही क्रीम्स के भरोसे रहें बल्कि हम आपको बताते हैं आसान सा पैक , जिसे आप मिनटों में बनाकर ऑयली स्किन के साथ साथ एक्ने से भी छुटकारा पा लेंगी.

कैसे बनाएं

– आप एक बाउल में 2 बड़े चम्मच टमाटर के रस में 1 बड़ा चम्मच खीरे के रस की ऐड करें. फिर इस पेस्ट को कॉटन की मदद से चेहरे पर अप्लाई करें. इस पैक को चेहरे पर 15 मिनट के लिए लगा छोड़ दें और धो लें. कुछ ही दिनों में आपकी स्किन ऑयली से नोर्मल हो जाएगी. लेकिन आपको कुछ महीनों तक इसे हफ्ते में 3 बार जरूर अप्लाई करना होगा. बता दें कि टमाटर व खीरे में एस्ट्रिंजेंट प्रोपर्टीज होने के कारण ये स्किन को क्लीन कर पोर्स को टाइट करता है, जिससे एक्ने की प्रोब्लम नहीं होती है.

4. चेहरे पर ग्लो लाने के लिए पैक

चेहरे पर ग्लो कौन नहीं चाहता , लेकिन पोलुशन व सही ढंग से स्किन की केयर नहीं करने के कारण धीरे धीरे स्किन से ग्लो खत्म होने लगता है. जिसके कारण न तो हमें अपनी स्किन से प्यार रह जाता है और न ही हमें अपने रूखे से चेहरे को देखकर कुछ पहनने को मन करता है. क्योंकि अगर चेहरा सुंदर हो तो सब कुछ अच्छा लगता है. वरना सारा लुक ही खराब हो जाता है. ऐसे में चेहरे पर इंस्टेंट ग्लो लाने के लिए टमाटर का पैक बेस्ट है.

कैसे बनाएं

– आप 3 बड़े चम्मच टमाटर के रस में चुटकी भर हलदी मिलाकर पेस्ट तैयार करें. फिर इसे चेहरे पर लगाकर 20 मिनट के लिए छोड़ दें. ड्राई होने के बाद अच्छे से चेहरे को धो लें. इस पैक को आप हफ्ते में 2 बार जरूर अप्लाई करें. आपको चेहरे पर फेसिअल जैसा ग्लो नजर आने लगेगा. क्योंकि हलदी में एंटीओक्सीडैंट्स और एंटी इन्फ्लैमटॉरी प्रोपर्टीज होने के कारण ये स्किन पर ग्लो लाने का काम करती है, वहीं टमाटर में विटामिन सी होता है, जो स्किन ब्राइटनिंग का काम करता है. तो हुआ न इंस्टेंट ग्लो लाने वाला पैक.

5. ब्लैक हेड्स के लिए पैक

अकसर देखा जाता है कि जब भी हम अपनी स्किन की केयर करना छोड़ देते हैं या फिर गलत कास्मेटिक प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं तो स्किन पर ब्लैक हेड्स की समस्या उत्पन हो जाती है. क्योंकि रोम छिद्रों में गंदगी जमा जो हो जाती है. जिसे स्किन की प्रोपर केयर व पैक से कुछ ही हफ्तों में निजात पाया जा सकता है.

कैसे बनाएं

– 3 बड़े चम्मच टमाटर के रस में एक बड़ा चम्मच दही के साथ 1 बड़ा चम्मच ओट्स को अच्छे से मिलाकर पेस्ट तैयार करें. जब पेस्ट तैयार हो जाए तो इसे चेहरे पर 10 मिनट के लिए लगाकर छोड़ दें और फिर चेहरे को धो लें. इस पैक को हफ्ते में 3 बार लगाने से महीने भर में आपको ब्लैक हेड्स की समस्या से छुटकारा मिल जाएगा. क्योंकि ओट्स में स्किन से गंदगी को हटाने वाली प्रोपर्टीज होती हैं , जो ब्लैकहेड्स का कारण बनता है. वहीं टमाटर में एसिडिक प्रोपर्टीज होने के कारण ये ओपन पोर्स के साइज को छोटा करके ब्लैक हेड्स को होने से रोकता है. तो दही में लैक्टिक एसिड और ज़िंक होने के कारण ये ब्लैकहेड्स, दाग घब्बों को हटाने में सक्षम है.

6. ड्राई स्किन की प्रोब्लम को बाए कहने वाला पैक

बदलते मौसम, ज्यादा गरम पानी से नहाने, कम पानी पीने , हार्मोनल चैंजेस व घटिया ब्यूटी प्रोडक्ट्स के इस्तेमाल से ड्राई स्किन की प्रोब्लम हो जाती है, जिससे स्किन हमेशा रूखी रूखी व खिची हुई नजर आती है. और साथ ही ड्राई स्किन के कारण स्किन पर ग्लो भी नहीं रहता. ऐसे में आपके लिए टमाटर का पैक बेस्ट साबित होगा.

कैसे बनाएं

– बाउल में आप 3 बड़े चम्मच टमाटर के रस में एक बड़ा चम्मच बादाम के तेल की डालकर पेस्ट बनाएं. फिर इस पेस्ट को 20 – 25 मिनट के लिए फेस पर लगा छोड़ दें और फिर धो लें. इससे आपकी स्किन में मोइस्चर वापिस आने लगेगा. ऐसा आप हफ्ते में 3 बार करें. बता दें कि बादाम के तेल को सदियों से स्किन की डॉयनेस को दूर करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है.

टूट गया अंगूरी भाभी का 19 साल का रिश्ता, पति से अलग हुईं एक्ट्रेस शुभांगी अत्रे

‘भाबी जी घर पर है’ की अंगूरी भाभी यानी एक्ट्रेस शुभांगी अत्रे शादी के 19 साल के बाद अपने पति पीयूष पूरी से अलग हो गईं हैं. दोनों लगभग एक साल से साथ नहीं रह रहे हैं और कहा जा रहा है कि अब दोनों में सुलह होने की संभावना काफी कम है. शुभांगी और पियूष की एक बेटी भी है. दोनों ने साल 2003 में शादी की थी. शुभांगी के पति पियूष डिजिटल मार्केटिंग फील्ड में काम करते हैं. इन दोनों की शादी इंदौर में हुईं थी, जहां उनका परिवार रहता है. एक इंटरव्यू में शुभांगी ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि लगभग एक साल हो गया है, हम साथ नहीं रह रहे हैं. पीयूष और मैंने अपनी शादी को बचाने की पूरी कोशिश की. आपसी सम्मान, विश्वास और दोस्ती एक मजबूत शादी की नींव होती है.

 

 

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बहुत की रिश्ता बचाने की कोशिश

शुभांगी ने कहा, “हालांकि, हमें ये एहसास हुआ कि हम अपने मतभेदों को हल नहीं कर सकते और इसलिए दोनों ने एक-दूसरे को स्पेस देने और अपने व्यक्तिगत जीवन और करियर पर ध्यान देने का फैसला लिया.” एक्ट्रेस के लिए इस निर्णय तक पहुंचना आसान नहीं था. उन्होंने कहा, “ये अभी भी मुश्किल है. मेरा परिवार मेरी हाईएस्ट प्रायोरिटी है और हम सभी चाहते हैं कि हमारा परिवार हमारे आसपास हो. लेकिन कुछ नुकसान मरम्मत से परे हैं. जब इतने सालों का रिश्ता टूटता है तो यह आपको मेंटली और फिजिकली प्रभावित करता है.

 

 

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मां के साथ रहती हैं बेटी

हालांकि शुभांगी और पियूष ने ये तय किया है कि उनकी 18 साल की बेटी आशी के लिए दोनों आपस में कोई रंजिश नहीं रखेंगे. क्योंकि उसे माता और पिता दोनों का प्यार मिलना चाहिए. वो अपनी मां के साथ रहती हैं और उसके पापा उसे हर रविवार मिलने आते हैं. अंगूरी भाभी के किरदार के बाद शुभांगी अत्रे फिर एक बार लाइम लाइट में आईं. उन्होंने कसौटी जिंदगी की से अपने करियर की शुरुआत की थी.

परिवार संग खेली होली फिर हुई बेचैनी, 66 साल की उम्र सतीश कौशिक का हार्ट अटैक से निधन

बॉलीवुड के जाने-माने एक्टर और डायरेक्टर सतीश कौशिक की निधन की खबर ने फैंस को भावुक कर दिया है. सतीश कौशिक का 66 साल की उम्र में हार्ट अटैक की वजह से निधन हो गया है. सतीश कौशिक की निधन की खबर ने बॉलीवुड स्टार्स को दुखी कर दिया है. अब सतीश कौशिक के अंतिम संस्कार से जुड़ी खबर सामने आ रही है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एक्टर और डायरेक्टर सतीश कौशिक का अंतिम संस्कार आज दोपहर 3 बजे के बाद होगा. सतीश कौशिक के निधन के बाद उनके फैंस दुखी नजर आ रहे हैं.

 

 

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पोस्टमॉर्टम के बाद होगा अंतिम संस्कार

सतीश कौशिक के निधन की खबर सामने आने के बाद बॉलीवुड में शोक की लहर दौड़ गई है. सतीश कौशिक को बॉलीवुड स्टार्स सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि देते हुए नजर आ रहे हैं. इसी बीच सतीश कौशिक के अंतिम संस्कार को लेकर खबर सामने आ रही है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एक्टर का आज दोपहर 3 बजे अंतिम संस्कार होगा. अभी उनके शव को पोस्टमॉर्टम के लिए दीनदयाल अस्पताल ले जाया गया। इसके बाद शव को मुंबई लाया जाएगा. जहां उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा. सतीश के कौशिक के अंतिम दर्शन करने के लिए कई बॉलीवुड स्टार्स पहुंच सकते है.

 

 

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होली सेलिब्रेशन के दौरान हुई दिक्कत

एक्टर और डायरेक्टर सतीश कौशिक होली सेलिब्रेशन के लिए दिल्ली गए थे. इसी दौरान उन्हें बेचैनी महसूस हुई, जिसके बाद सतीश कौशिक को फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया था. एक्टर सतीश कौशिक के निधन की खबर अनुपम खेर ने सोशल मीडिया पर ट्वीट शेयर की दी थी. सतीश कौशिक ने बॉलीवुड की कई फिल्मों में अपनी एक्टिंग का जलवा दिखाया था. वो एक डायरेक्टर के साथ-साथ एक जाने-माने एक्टर भी थे. सतीश कौशिक को लेकर आपकी क्या राय है, कमेंट कर के हमें जरूर बताएं. आप सतीश कौशिक को कैसे याद कर रहे हैं.

घर पर ऐसे बनाएं सरसो पालक कटलेट, बेसन बाटी और चावल की बड़ी

बच्चों के लिए घर पर कुछ टेस्टी और हेल्दी बनाना मुश्किल का काम है. लेकिन आज हम आपको सरसों पालक कटलेट की रेसिपी बताएंगे, जिसे आसानी से बनाकर आप अपने फैमिली को खिलाकर तारीफें पा सकती हैं.

1- सरसों पालक के कटलेट

सामग्री

–  2 कप पालक कटा

–  2 कप सरसों कटी

–  1 छोटा टुकड़ा अदरक

–  1 हरीमिर्च कटी

–  2 ब्रैडस्लाइस

–  1/2 कप पनीर

–  2 बड़े चम्मच मक्खन

– नमक स्वादानुसार.

विधि

पालक और सरसों को स्टीम कर लें. फिर इसे अदरक और हरीमिर्च के साथ मिक्सी में पीस लें. ब्रैडस्लाइस का मिक्सी में चूरा कर लें. फिर ब्रैड चूरा, पनीर, पालक व सरसों का पेस्ट और नमक मिला लें. टिकियां बना कर गरम तवे पर मक्खन के साथ दोनों तरफ से सेंक कर सौस के साथ गरमगरम परोसें.

2- बेसन की बाटी

सामग्री

– 11/2 कप बेसन

– 1/2 कप मक्के का आटा

–  2 बड़े चम्मच घी

–  1/2 कप पनीर

–  1 हरीमिर्च कटी

– 1 बड़ा चम्मच धनियापत्ती कटी

–  तलने के लिए तेल

–  नमक स्वादानुसार.

विधि

मक्के के आटे को छान कर बेसन, घी और नमक मिला कर गूंध लें. उबलते पानी में आटे की लोइयां बना कर 8-10 मिनट पकाएं. पानी से निकाल कर अच्छी तरह मसल कर छोटीछोटी बौल्स बनाएं. पनीर को मसल कर उस में धनियापत्ती, हरीमिर्च और नमक मिलाएं. आटे की छोटीछोटी बौल्स के बीच पनीर का मिश्रण भर कर अच्छी तरह बंद कर गरम तेल में सुनहरा होने तक तलें, सरसों के साग के साथ सर्व करें.

3- चावल की बड़ी

सामग्री

– 1 कप चावल

–  1 हरीमिर्च

–  1/2 कप फूलगोभी कसी

–  1/2 चम्मच अदरक कसा

–  2 बड़े टमाटर

– 1/4 चम्मच हलदी

–  1/4 चम्मच जीरा

– 1 चम्मच धनिया पाउडर

– 1/4 चम्मच गरममसाला

– 1/4 चम्मच लालमिर्च पाउडर

– चुटकीभर हींग

– 1 बड़ा चम्मच घी

– तलने के लिए तेल

–  1 बड़ा चम्मच धनियापत्ती कटी

–  नमक स्वादानुसार.

विधि

चावलों को पानी में 1/2 घंटा भिगो कर महीन पीस लें. फिर इस में अदरक, फूलगोभी, हरीमिर्च और नमक मिला कर अच्छी तरह फेंट लें. कड़ाही में तेल गरम कर मिश्रण की छोटीछोटी बडि़यां बना कर तल लें. एक कड़ाही में घी गरम कर जीरा, हलदी, धनिया पाउडर, लालमिर्च पाउडर और हींग डालें. इस में टमाटरों को मिक्सी में पीस कर डाल अच्छी तरह भून लें. 1 कप पानी और बडि़यां डाल कर 8-10 मिनट हलकी आंच पर पकने दें. फिर धनियापत्ती डाल कर परांठों के साथ परोसें.

मेरी उम्र 28 साल है, 1-2 महीनों से पीठ के दर्द ने परेशान कर रखा है, कृपया बताएं इस से कैसे छुटकारा पाऊं?

सवाल

मेरी उम्र 28 साल है. 1-2 महीनों से पीठ के दर्द ने परेशान कर रखा है. घर का काम करने और ?ाकने में अब बहुत मुश्किल होती है. कृपया बताएं इस से कैसे छुटकारा पाऊं?

जवाब

इस प्रकार का पीठ का दर्द रीढ़ की हड्डी में आए खिंचाव और दबाव के कारण होता है. मरहम लगाने और आराम करने से दर्द में राहत मिलेगी. एक सक्रिय जीवनशैली के साथ संतुलित आहार और बैठनेचलने और ?ाकने के दौरान सतर्कता के साथ इस दर्द से छुटकारा पाया जा सकता है. रीढ़ को प्रभावित होने से रोकना चाहती हैं तो एक मुद्रा में बहुत देर तक खड़ी या बैठी न रहें. प्रैस करनेबरतन धोने व खाना बनाने आदि कामों के लिए पीठ और गरदन ?ाकानी पड़ती हैइसलिए अपने शरीर के पोस्चर पर ध्यान दें. यदि यह दर्द गंभीर है और आराम के बाद भी ठीक न हो या बारबार दर्द की शिकायत हो तो जांच अवश्य कराएं. समय पर इलाज से समस्या पूरी तरह ठीक हो जाएगी.

ब्रैस्ट फीडिंग मां और बच्चे के लिए क्यों है सही

इन दिनों कितने ही आधुनिक कपल्‍स अपने-अपने पेशेवर जीवन में इतने व्‍यस्‍त होते हैं कि वे पैरेंट्स बनने का फैसला लंबे समय तक टालते रहते हैं लेकिन आखिरकार जब वे ऐसा करने के लिए तैयार होते हैं तो बढ़ती उम्र एक बड़ी बाधा के रूप में उनकी चुनौतियां बढ़ाती है।

वर्ल्‍ड हैल्‍थ ऑर्गेनाइज़ेशन के अनुसार, भारत में करीब 3.9 से 16.8 प्रतिशत कपल्‍स को प्राइमरी इन्‍फर्टिलिटी की समस्‍या पेश आती है। नतीजा यह होता कि ये आधुनिक कपल्‍स जब गर्भधारण की ओर बढ़ते हैं, तो उनकी परेशानियों के समाधान के लिए कई नई तकनीकें और आधुनिक फर्टिलिटी इलाज पद्धतियां जैसे कि आईवीएफ, आईयूआई, एम्‍ब्रयो फ्रीज़‍िंग और ऍग फ्रीज़‍िंग वगैरह उनके सामने विकल्‍प के तौर पर उपलब्‍ध होते हैं। ये उपचार उन कपल्‍स के लिए जोखिम-मुक्‍त विकल्‍प साबित होते हैं जो देरी से पैरेंटहुड की तरफ कदम बढ़ाना चाहते हैं।

डॉ रम्‍या मिश्रा, सीनियर कंसल्‍टैंट – इन्‍फर्टिलिटी एवं आईवीएफ, अपोलो फर्टिलिटी (लाजपत नगर, नई दिल्‍ली) का कहना है-

हाल के समय में ऍग फ्रीज़ करवाने का विकल्‍प काफी लोकप्रिय हो चुका है। अब कई महिलाएं उम्र के उस मोड़ पर ही अपने ऍग्‍स फ्रीज़ करवाना पसंद करती हैं जब वे रिप्रोडक्टिव उम्र में होती हैं और गर्भधारण का फैसला बाद के लिए छोड़ देती हैं ताकि वे तब उसे चुन सकें जब वे इसके लिए तैयार हों। लेकिन कई बार ऐसा भी होता है कि सामाजिक कारणों की वजह से बहुत सी महिलाएं अपने ऍग फ्रीज़ नहीं करवा पाती हैं, कुछ ऐसा मेडिकल कारणों के चलते करती हैं। कई बार कैंसर के उपचार के लिए इस्‍तेमाल होने वाली कुछ थेरेपी जैसे कि कीमोथेरेपी और रेडिएशन वगैरह महिलाओं के डिंबों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसलिए भविष्‍य में गर्भधारण को आसान बनाने के लिए महिलाओं को कैंसर उपचार शुरू करने से पहले ही भविष्‍य के लिए अपने डिंबों को सुरक्षित करवाने की सलाह दी जाती है।

क्‍या हैं डिंब सुरक्षित (फ्रीज़) करवाने के लाभ 

महिलाओं के शरीर में बनने वाले संभावित डिंबों की संख्‍या जिन्‍हें फॉलिक्‍स कहा जाता है, सीमित होती है, और यह एक से दो मिलियन के बीच होती है। जैसे-जैसे महिलाओं की उम्र बढ़ती है, उनकी डिंब कोशिकाओं की संख्‍या घटती है, और इस वजह से गर्भधारण अधिक चुनौतीपूर्ण होता है। लेकिन यदि किसी महिला ने अपने प्रजननकाल में समय से डिंबों को सुरक्षित (फ्रीज़) करवाया होता है तो वे उम्र के बाद के पड़ाव में भी आसानी से गर्भधारण कर सकती हैं।

डिंब सुरक्षित करवाने की प्रक्रिया में डिंबग्रंथियों (ओवरीज़) को होर्मोनों से उत्‍प्रेरित किया जाता है ताकि वे एक बाद में काफी अधिक संख्‍या में डिंबों का निर्माण करें, और इन डिंबों को डिंबग्रंथियों से निकालकर लैब में भेजा जाता है जहां इन्‍हें शून्‍य से कम तापमान पर सुरक्षित तरीके से स्‍टोर किया जाता है। इस प्रकार इन फ्रीज़ किए गए डिंबों को बाद में, जबकि महिला गर्भधारण के लिए तैयार हो, इस्‍तेमाल किया जा सकता है।

क्‍या है डिंब फ्रीज़ (ऍग फ्रीज़ींग) करवाने की सही उम्र 

इसमें कोई दो राय नहीं है कि जैसे-जैसे महिलाओं और पुरुषों की उम्र बढ़ती है, उनकी फर्टिलिटी भी उसी हिसाब से कम होने लगती है। वे 20 से 30 की उम्र में सर्वाधिक उर्वर/प्रजननयोग्‍य (फर्टाइल) होते हैं लेकिन उम्र के तीसवें वसंत के बाद उनकी प्रजनन क्षमता प्रभावित होने लगती हैं और यही कारण है कि उसके बाद गर्भधारण में अधिक जटिलताएं और दिक्‍कतें पेश आती हैं।

आधुनिक दौर में कपल्‍स की जरूरतों के मद्देनज़र, कई तरह के फर्टिलिटी ट्रीटमेंट्स सामने आ चुके हैं। ऍग फ्रीज़ करवाना ऐसा ही एक तरीका है जिसमें महिलाएं अपने डिंबों को सुरक्षित रखवती हैं और बाद में जब वे तैयार होती हैं तो उनकी मदद से गर्भधारण करती हैं। इसमें कोई शक नहीं है कि ऍग फ्रीज़‍िग की सही उम्र और भविष्‍य में गर्भधारण की कामयाबी के बीच सीधा संबंध है। किसी भी महिला के लिए ऐसा करवाने की आदर्श उम्र उसके रिप्रोडक्टिव वर्ष होते हैं। आमतौर पर, उम्र के तीसरे दशक के शुरुआती वर्षों को इस लिहाज़ से आदर्श माना जाता है जबकि महिलाएं आमतौर से सबसे अधिक उर्वर होती हैं और जैसे-जैसे वे उम्र के चौथे दशक के अंतिम चरण में पहुंचती हैं, उनकी फर्टिलिटी कमज़ोर पड़ने लगती है और तब उनकी डिंबग्रंथि में बनने वाले डिंबों की संख्‍या और गुणवत्‍ता दोनों प्रभावित हो चुके होते हैं। लेकिन अधिक उम्र में भी प्रेगनेंसी के लिए, अक्‍सर तीस साल की उम्र से पहले डिंबों को सुरक्षित करवाने की सलाह दी जाती है।

डिंबों को फ्रीज़ करवाना:

अधिक उम्र होने पर गर्भधारण का अधिक सेहतमंद विकल्‍प
आज के दौर में, इन्‍फर्टिलिटी एक दर्दनाक सच्‍चाई बन चुकी है जिससे कई आधुनिक कपल्‍स गुजरते हैं। लेकिन टैक्‍नोलॉजी के क्षेत्र में प्रगति होने से कई नए रिप्रोडक्टिव ट्रीटमेंट्स उपलब्‍ध हो चुके हैं, जो इन्‍फर्टिलिटी की चुनौती से उबारते हैं। ऐसा ही एक जोखिमरहित तरीका है डिंबों को फ्रीज़ करवाना जिससे अधिक उम्र में हैल्‍दी प्रेगनेंसी संभव होती है। महिलाएं अपनी व्‍यस्‍त जीवनशैली के मद्देनज़र, रिप्रोडक्टिव उम्र में अपने डिंबों को सुरक्षित (फ्रीज़) करवा सकती हैं और बाद में जब भी वे अपना परिवार शुरू करना चाहें, तब इनका इस्‍तेमाल किया जा सकता है। इस विकल्‍प्‍ के बारे में और जानकारी के लिए अपने फर्टिलिटी एक्‍सपर्ट से मिलें और ऍग-फ्रीज़‍िंग की प्‍लानिंग करें.

क्यों जरूरी है स्कूल टाइमिंग में बदलाव

बहुत से वर्किंग मातापिता की चिंता होती है कि नौकरी के साथ बच्चों के स्कूल की टाइमिंग को कैसे संभालेंगे. जब बच्चे छोटे होते हैं तो यह दिक्कत ज्यादा होती है. इस कारण कई बच्चे देर से स्कूल जाते हैं, तो कई बार मां को अपनी नौकरी छोड़नी पड़ती है. जो महिलाएं प्राइवेट सैक्टर में हैं शादी के बाद उन पर यह दबाव रहता है कि नौकरी छोड़ दें. कई महिलाओं को ऐसा करना भी पड़ता है, जिस के कारण वे वर्किंग लेडी से हाउसवाइफ बन जाती हैं. इस से महिलाओं की पूरी क्षमता का लाभ देश, समाज और घरपरिवार को नहीं मिल पाता है.

आज लड़कियों की शिक्षा में भी अच्छाखासा पैसा खर्च होता है. इस के बाद शादी कर के वे हाउसवाइफ बन कर रह जाएं तो वह शिक्षा बेकार हो जाती है. महिला सशक्तीकरण के लिए जरूरी है कि महिलाएं अपनी क्षमता भर काम करें. इस के लिए देश और समाज को भी ऐसे वातावरण को तैयार करना चाहिए, जिस से घरपरिवार  बच्चों के साथ महिलाएं अपना कैरियर भी देख सकें. स्कूल की टाइमिंग में बदलाव इस दिशा में एक क्रांतिकारी बदलाव होगा.

औफिस और स्कूल का समय एक हो

अगर स्कूल के समय और औफिस वर्किंग आवर्स में समानता हो तो महिलाओं के लिए काम के साथसाथ बच्चों को स्कूल छोड़ने में दिक्कत नहीं होगी. स्कूल की टाइमिंग सुबह 10 बज कर 30 मिनट से शुरू हो और शाम 5 बजे बंद हो. यही समय औफिस का भी हो, जिस से कोई भी वर्किंग महिला अपने साथ बच्चे को ले जाकर स्कूल छोड़ सके और जब औफिस से आए तो स्कूल से वापस घर ला सके.

ऐसे में महिलाओं का औफिस और जाते समय यह चिंता नहीं होगी कि वह नहीं रहेगी तो बच्चे की देखभाल कैसे होगी?

आज के समय में बच्चों का स्कूल सुबह 7 बज कर 30 मिनट से होता है. 1 से 2 बजे के बीच बच्चों की छुट्टी हो जाती है. बच्चे घर आते हैं. अगर घर में कोई देखभाल करने वाला नहीं है तो मातापिता को इस बात की चिंता होती है कि बच्चा घर में अकेले कैसे रह रहा होगा. कोई ऐसा काम न कर बैठे जो उस के लिए गलत हो जाए. कई लोग इस के लिए नौकरों और घरपरिवार वालों का सहयोग लेते हैं.

सुरक्षित रहेंगे बच्चे

कुछ मातापिता बच्चों को क्रेच में छोड़ते हैं. कई स्कूलों में यह व्यवस्था होती है कि स्कूल के बाद भी कुछ बच्चे जब तक मातापिता लेने न आएं स्कूल में रुके रहते हैं. यह हर व्यवस्था स्थायी और अच्छी नहीं होती है. नौकरों के भरोसे छोड़ने में दिक्कत होती है. उन को अलग से पैसा भी देना पड़ता है. क्रेच में अधिकतर जगहों पर होते नहीं हैं. जहां हैं भी बहुत अच्छे नहीं होते. छुट्टी के बाद स्कूलों में बच्चे बहुत सुरक्षित नहीं रहते हैं.

इन समस्याओं का एक ही हल है कि बच्चों के स्कूल का समय बदला दिया जाए. स्कूल और औफिस का समय एकसाथ कर दिया जाए, जिस से औफिस जाते समय मातापिता बच्चों को स्कूल जा कर छोड़ दें और जब औफिस से घर आएं तो बच्चों को स्कूल से साथ लेते हुए घर आएं.

इस के 2 लाभ होंगे- एक तो बच्चे को रोकने के लिए कोई पैसा खर्च नहीं होगा उस के साथ ही साथ औफिस में काम कर रहे मातापिता इस चिंता से भी मुक्त रहेंगे और औफिस में सही तरह से काम कर सकेंगे.

बच्चों के स्कूल टाइमिंग को बदलने से कोई दिक्कत नहीं होगी. स्कूल अपनी समय सीमा में ही खुलेंगे. अंतर केवल इतना होगा कि वे सुबह नहीं खुलेंगे. बच्चे सब से अधिक मातापिता के साथ ही सुरक्षित होते हैं. ऐसे में जब मातापिता ही घर से स्कूल छोड़ेंगे और वे ही छुट्टी के बाद घर लाएंगे तो किसी को कोई असुविधा नहीं होगी.

कैसे शुरू करें फूड बिजनैस

अगर खुद का व्यवसाय हो तो काम करने की इच्छा अपनेआप ही प्रबल हो जाती है. ऐसे में परिवार के साथ काम का तालमेल बैठाना भी आसान हो जाता है. घर से टिफिन औफिस भेजने का काम करना एक ऐसा काम है जो आसानी से करा जा सकता है. इस काम में साफसफाई और स्वादिष्ठ भोजन खिलाना ही असली चुनौती है.

हर दिन खाना सब को अच्छा लगे, वापस न आए, इस का हमेशा खयाल रखना पड़ता है. शादी के बाद जब बड़े शहरों में यह काम कर सकती हैं. 300 वर्ग फुट के छोटे से घर में एक किनारे रसोईघर बना कर 10 से 20 लोगों के टिफिन की व्यवस्था की जा सकती है.

खाने में रोटी, पराठा, पूरी और दाल, सब्जी, चावल, पूरा खाना शाकाहारी हो सकता है. धीरेधीरे जब ग्राहकों की संख्या बढ़ने लगे तो अपने आसपास की महिलाओं को भी जोड़ा जा सकता है जो खास डिश सप्लाई करें. भरपेट खाना और थोड़े पैसे दिए जाते हैं. 100 से अधिक लोगों के लिए खाना एक अकेले घर से बन सकता है. इस में जरूरत होती है 4-5 जनों की, जिन में लड़केलड़कियां दोनों हो सकते हैं. सुबह 7 बजे से रात 10 बजे तक चलाएं तो अच्छा है.

बेहतर बिजनैस

विनिता को ही लें. उस के ससुराल पक्ष की ओर से इजाजत नहीं थी, लेकिन पैसे की तंगी ने उन्हें राजी करवाया. वह कहती है कि ससुराल वाले नहीं चाहते थे कि मैं कोई व्यवसाय करूं पर मु?ो घर चलाना था, घर का किराया देना था जो पति के पैसों से पूरा नहीं हो पा रहा था. मेरे बच्चे भी बड़े हो रहे थे. उन्हें स्कूल भेजना होता था, इसलिए अंत में मैं ने इस व्यवसाय को चुना. मेरी पढ़ाई भी अधिक नहीं थी कि मैं बाहर जा कर कुछ दूसरा काम कर सकूं.

मु?ो खाना बनाना हमेशा से पसंद था और फिर जब लोगों को मेरे हाथ का बनाया खाना अच्छा लगने लगा है तो मु?ो, कुछ नया और अच्छा भोजन बनाने की प्रेरणा मिली. इस काम में अब मेरे पति अरविंद यादव और देवर भी हाथ बंटाते हैं. बाजार से कच्चा सामान लाना, औफिस में तैयार खाना पहुंचाने का काम वे ही करते हैं.

इस सर्विस से 50 हजार रुपए प्रति माह तक की कमाई हो सकती है. करीब 10-12 किलोमीटर के दायरे में खाना पहुंचाने का इंतजाम करना चाहिए.

काम के साथ नाम भी इस काम में ये बातें अवश्य ध्यान में रखनी चाहिए ताकि आप का व्यवसाय लगातार चलता रहे:

– लोगों की पसंदनापसंद का खयाल रखना.

– अच्छी क्वालिटी के तेल और मसालों का खाने में प्रयोग करना.

द्य सब से जरूरी होता है साफसफाई का ध्यान रखना, जिस में कच्ची सब्जियों से ले कर खाना बनाने वाली महिलाओं की साफसफाई का भी ध्यान रखना जरूरी होता है.

विनिता मानती है कि उस ने सही समय में व्यवसाय शुरू किया उस के 2 बच्चे लक्ष्य यादव (7 वर्ष) और विवेक यादव (3 वर्ष) के हैं. ये अब स्कूल जाने लगे हैं. आगे भी वह उन्हें अच्छी शिक्षा देना चाहती है. वह चाहती है कि उस का व्यवसाय इतना बढ़े कि वह कुछ महिलाओं को रोजगार मुहैया करवा सके. शुरू में कानूनों की परवाह न की जाए पर अगर काम बढ़ जाए तो कईकई कानून लागू हो जाते हैं. ‘फूड सेफ्टी ऐंड स्टैंडर्ड इंडिया एक्ट 2006’ लगता है. इस के रजिस्ट्रेशन से ग्राहक मिल जाते हैं पर फिर इंस्पैक्टरों को ?ोलना शुरू हो जाता है जो साफसफाई देखने आते हैं.

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