मेरी उम्र 43 है, कई दिनों से मेरी हड्डियों में बहुत दर्द हो रहा है,ऐसा क्यों हो रहा है और इस का समाधान क्या है?

सवाल-

मेरी उम्र 43 है. कई दिनों से मेरी हड्डियों में बहुत दर्द हो रहा है. कमजोरी महसूस होती है जिस के कारण मैं कहीं भी गिर जाती हूं. मुझे एक और समस्या है कि मेरे एक घुटने का जोड़ बारबार टूट जाता है. ऐसा क्यों हो रहा है और इस का समाधान क्या है?

जवाब- 

हमारी हड्डियां कैल्सियमफास्फोरस और प्रोटीन के अलावा कई प्रकार के मिनरल्स से बनी होती हैं. बढ़ती उम्र के साथ खानपान पर ध्यान देना बहुत जरूरी हो जाता है वरना हड्डियां कमजोर हो जाती हैं. गलत खानपानबदलता लाइफस्टाइलव्यायाम की कमीशराब का अत्यधिक सेवनशरीर में कैल्सियमविटामिन डी और प्रोटीन की कमी आदि के कारण भी हड्डियां कमजोर पड़ने लगती हैं जिस के कारण इस प्रकार की समस्या होती हैं. आप ने जिन लक्षणों का जिक्र किया है उन से औस्टियोपोरोसिस की बीमारी का पता चलता है. औस्टियोपोरोसिस में हड्डियां इतनी कमजोर हो जाती हैं कि इस रोग से पीडि़त मरीज आसानी से गिर जाते हैं. ऐसी घटनाओं मेंकूल्हे व जोड़ों की हड्डियों के टूटने की संभावना अधिक होती है. बीमारी से छुटकारा पाने के लिए जल्द से जल्द इलाज शुरू करेंखानपान सही रखेंशारीरिक रूप से सक्रिय रहें और हड्डियों की नियमित मालिश कराएं. बीमारी ज्यादा गंभीर होने पर हिप या नी रिप्लेसमैंट की जरूरत पड़ सकती है.

अगर वह उसे माफ कर दे: भाग 3- पिता की मौत के बाद क्या हुआ ईशा के साथ

रेशमा गोदी में अपना बच्चा पकड़े एक तरफ खड़ी थी. ‘‘बैठो,’’ रेखा ऐसे बोली जैसे वह उस का घर हो और रेशमा उस की मेहमान हो.

झिझकते हुए रेशमा उस के सामने केन की कुरसी पर बैठ गई. काले रेशमी बाल, गोरा रंग… वह एक जवान व सुंदर औरत थी, मुश्किल से उस की उम्र 25-26 की लग रही थी.

एक लंबी सांस भरते हुए रेखा ने पूछा, ‘‘तुम्हें मालूम है कि मैं कौन हूं?’’

‘‘हां, मैं ने आप की फोटो देखी हुई है,’’ वह सिर झुकाए हुए बोली.

उस की गोदी में बच्चा रोने लगा था तो रेखा ने पूछा, ‘‘यह लड़का है?’’

‘‘हां.’’

रेखा अनायास ही सोचने लगी कि वह और रवि हमेशा दूसरे बच्चे की चाह में रहते थे. कभी रवि की संवेदनशील पोस्टिंग की वजह से उन के बीच विछोह बना रहा तो कभी यों ही…समय बीतता चला गया. ईशा 14 साल की हो गई और वह 40 की, जहां औरत को गर्भधारण करने से पहले काफी सोचना पड़ता है.

रेशमा धीरे से बोली, ‘‘मुझे मालूम है कि आप यहां क्यों आई हैं… आप जानना चाहती हैं कि मेरे रवि से…’’ कहते हुए उस की आंखें भर आईं. रेखा को उस पल लगा कि रवि केवल रेशमा का ही मर्द था, उस का अपना कोई नहीं.

‘‘वह बहुत अच्छे थे,’’ वह रुंधे स्वर में बोली. फिर बड़े तटस्थ भाव से अपनी कहानी सुनाने लगी…

‘‘हमारा परिवार असम व नागालैंड की सीमा पर दीमापुर जिले का रहने वाला था. पुलिस को हम पर शक था कि हमारा संबंध डीएचडी (डीमा हलीम डोगा) उग्रवादी गिरोह से है जिन का लक्ष्य डीमासा जनजातियों के लिए एक अलग राज्य बनाने का है.

‘‘हम पहाड़ी गांव के लोग कहां से आतंक फैलाएंगे? उग्रवादी तो पाकिस्तान के आईएसआई के लोग हैं. पुलिस हम पर बेकार शक करती है.

‘‘एक शाम सुरक्षा बल के जवानों ने हमारे घर पर आक्रमण किया कि तुम ने अपने घर में उग्रवादियों को शरण दे रखी है. वे हमारे रिश्तेदार थे, मेरी बहन के ससुराल वाले.

‘‘केवल शक की बुनियाद पर सुरक्षाकर्मियों ने मेरे परिवार के सभी सदस्यों को मार दिया. एक केवल मेरी ही जान बच पाई थी, रवि की वजह से. जब तक सुरक्षा बल के कर्मचारी गोली मेरे सीने में उतारते रवि अपने दल का प्रतिनिधित्व करते हुए वहां पहुंच गए. उन्होंने मुझे बचाया व बाद में सुरक्षा प्रदान की. मेरा सारा परिवार मेरी आंखों के सामने खत्म हो गया था. दीमापुर में रहने से मेरा मन घबराने लगा था. मैं  अपनी सारी संपत्ति बेच कर कालाइगांव आ गई और यह काटेज ले कर रहने लगी. वह बहुत अच्छे थे.’’

रेखा को समझने में देर नहीं लगी कि रवि व उस के बीच मानवता का रिश्ता धीरधीरे प्रेम में बदल गया था.

कहानी खत्म होने के बाद उन के बीच एक गहरा सन्नाटा छा गया. रवि के प्रति रेखा को और वितृष्णा होने लगी. उस ने सिर्फ उसे ही धोखा नहीं दिया बल्कि रेशमा की मजबूरी का भी फायदा उठाया.

‘‘मैं आप के लिए कुछ पीने को लाती हूं,’’ रेशमा बोली और अपनी गोदी के शिशु को सोफे पर लिटा कर किचन में चली गई.

रेखा ने शिशु को देखा. शिशु बहुत सुंदर था. उसे देख कर कोई उसे बिना प्यार किए रह ही नहीं सकता. शिशु रोने लगा तो रेखा ने उसे गोद में उठा लिया. बच्चा खामोश हो कर अपनी गहरी काली आंखों से उसे घूरने लगा, जैसे कुछ मनन कर रहा हो. ऐसे ही गहन विचार रवि के चेहरे पर अकसर प्रकट हो जाते थे.

रेशमा चाय बना कर ले आई. रेखा की गोद में अपना बच्चा देख एक पल के लिए वह ठिठकी, फिर उस के चेहरे पर एक भीनी मुसकान तैर गई.

‘‘क्या नाम है इस का?’’ रेखा ने पूछा.

‘‘मनु. उन्होंने ही रखा था.’’

रेखा ने अपनी आंखों से सबकुछ देखसुन लिया था. अब वहां ठहरने का कोई मतलब नहीं था. उस ने रेशमा से बिदा ली और जीप में बैठ गई. न जाने क्यों रेशमा से मिल कर उसे एक हलकापन महसूस हो रहा था, जैसे सिर से कोई बोझ उतर गया हो.

दिल्ली लौट कर रेखा की ठहरी जिंदगी ने रफ्तार पकड़ ली. उस ने अपने कालिज जाना शुरू कर दिया था. ईशा भी अपनी पढ़ाई में तल्लीन हो गई थी. रवि मर गया था मगर वह केस थमा नहीं था. जांचपड़ताल चल रही थी. खबरों में कुछ न कुछ उस केस से संबंधित आता ही रहता. रवि के साथ उल्फा, डीएचडी उग्रवादी गिरोहों की चर्चा भी हो जाती. रेखा अपनी जिंदगी को इन सभी से बहुत दूर मानतीथी.

लेकिन 2 माह बाद, एक दिन रेशमा को टीवी के परदे पर देख कर रेखा चौंक गई. वह पुलिस हिरासत में थी. पुलिस के अनुसार वह पहले से ही डीमा हलीम डोगा  (डीएचडी) आतंकवादी गिरोह से संबंध रखती थी. फिर अभी हाल में उस ने रवि के हत्यारों से बदला लेने के लिए कइयों को मौत के घाट उतार दिया था. उस के बच्चे की चर्चा भी होती कि उसे देखने वाला कोई नहीं है. वह बच्चा फिलहाल किसी बाल कल्याण संस्था के हवाले है. बाद में सरकार फैसला करेगी कि उसे कहां भेजा जाए.

सहसा रेखा के सामने उस मासूम बच्चे का चेहरा तैर गया…मनु.

कुछ निर्णय लेते हुए रेखा ने कमांडर पंत को फोन मिलाया, ‘‘मुझे रवि के बच्चे की कस्टडी चाहिए,’’ वह दृढ़ स्वर में बोली.

कुछ पलों के लिए कमांडर पंत खामोश बने रहे, फिर बोले, ‘‘मिसेज शर्मा, आप महान हैं.’’

एक बार फिर रेखा उसी मार्ग से कालाइगांव पहुंची. रेशमा से मिलने जेल गई. इन 2 महीनों में वह एकदम पतली हो गई थी. मगर चेहरे पर वही कशिश अभी भी थी. इस बार रेखा ने उसे घूर कर देखा, ऐसा सुंदर व मासूम चेहरा मगर सिर में घातक जुनून. रेशमा बोली, ‘‘मुझे फांसी लगे या आजीवन सजा हो, मुझे चिंता नहीं. मुझे बस, इस बात का संतोष है कि मैं ने रवि को मारने वालों को मार गिराया है. बदला ले लिया है.’’

वह सहर्ष अपने बच्चे की जिम्मेदारी रेखा को देने के लिए तैयार हो गई बल्कि हलकी हंसी हंसते हुए बोली, ‘‘यह अच्छा होगा कि रवि के दोनों बच्चे एकसाथ पलेंगेबढ़ेंगे.’’

रेखा ने फिलहाल अपने कालिज से लंबी छुट्टी ले ली है. नई परिस्थितियां उत्पन्न हो गई हैं. घर में एक अबोध शिशु आ गया है. उसे अभी काफी व्यवस्थाएं करनी हैं. घर में बच्चे से संबंधित तमाम वस्तुएं बिखर गई हैं, पालना, दूध की बोतलें आदि.

ईशा छोटे भाई की देखरेख में रेखा का पूरा हाथ बंटाती. एक दिन रेखा मनु को बोतल से दूध पिला रही थी और ईशा बगल में बैठी उसे मंत्रमुग्ध निहार रही थी. पिता की मौत से जो अभाव उस की जिंदगी में आया था, मनु उस की पूर्ति कर रहा था. सहसा वह बोली, ‘‘मां, आप बहुत महान हो. आप में इतनी अधिक क्षमाशीलता है. मुझे आप की तरह ही बनना है.’’

राजीव सेन ने धूमधाम से मनाया पत्नी चारु असोपा का जन्मदिन,क्या चारु ने पति को कर दिया माफ?

टीवी एक्ट्रेस चारु असोपा और राजीव सेन ने एकबार फिर से नई तस्वीरों से खलबली मचा दी है. चारू पिछले काफी वक्त से अपने पति राजीव सेन से अलग रह रही हैं, लेकिन हाल ही में सोशल मीडिया पर सामने आईं तस्वीरों में वो राजीव के साथ रोमांटिक होती नजर आईं.  तस्वीरों में राजीव और चारु के अलावा उनकी बेटी जियाना भी दिखाई दे रही हैं. इन तस्वीरों को देखकर लग रहा है कि दोनों एक बार फिर एक-दूसरे के साथ आ गए हैं! अपने तलाक की कार्यवाही के बीच, चारू असोपा और राजीव सेन ने इस बार फिर से सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया है.

 

राजीव ने मनाया चारु का बर्थडे

दरअसल चारू असोपा के जन्मदिन पर राजीव सेन ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर ये खूबसूरत फैमिली फोटोज शेयर की हैं. राजीव अपने परिवार के साथ समय बिताते दिख रहे हैं. जो तस्वीरें पोस्ट की हैं उसमें वो बेटी जियाना के साथ और चारू के साथ जन्मदिन मनाते दिख रहे हैं. राजीव, एक्ट्रेस को बड़े ही प्यार भरे अंदाज में बर्थडे विश करते हुए दिखाई दिए. तस्वीरों को शेयर करते हुए राजीव ने लिखा, ‘जन्मदिन की बधाई चारु… आपको ढेर सारा प्यार, अच्छी सेहत और हमेशा खुशियां मिले.’

 

 

View this post on Instagram

 

A post shared by FilmyTriangle (@filmytriangle)

राजीव ने शेयर खूबसूरत फोटो

राजीव की शेयर की गई इन तस्वीरों में चारु का बहुत ही खूबसूरत लग रही हैं. उन्होंने शॉर्ट फ्लोरल ड्रेस पहनी है वहीं राजीव कैजुअल लुक में हैंडसम लग रहे हैं. इन फोटोज को देखकर प्रशंसकों में उनके पुनर्मिलन की उम्मीदें जाग गई है. फैन्स उन्हें शादी के दूसरा मौका देने पर विचार करने के लिए कह रहे हैं.

क्या देना चाहते है एक दूसरे को एक और मौका

चारु ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया था कि उनके तलाक की प्रक्रिया जल्द ही शुरू होगी. उन्होंने कहा था, ‘हमने अलग होने के अपने फैसले को वापस नहीं लिया है. हम काउंसलिंग में हैं और जून तक छह महीने की कूलिंग-ऑफ अवधि पर हैं.’ चारू इस बात की सराहना करती हैं कि राजीव जियाना के साथ क्वालिटी टाइम बिता रहे हैं. चारू कहती हैं, ‘मुझे खुशी है कि हम सौहार्दपूर्ण हो गए हैं. वह अपनी पूरी कोशिश कर रहे हैं.’

अनुपमा के सामने आया अनुज और माया का कड़वा सच, क्या होगा अनुपमा का रिएक्शन

रुपाली गांगुली और गौरव खन्ना स्टारर ‘अनुपमा‘ ने लोगों का दिल जीतने में कोई कसर नहीं छोड़ी है. आए दिन शो में ऐसे-ऐसे ट्विस्ट देखने को मिल रहे हैं जिसने लोगों को हैरान करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है. इन दिनों ‘अनुपमा’ में एक बार मेकर्स ने फिर से एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर का एंगल जोड़ दिया है. बीते दिन भी रुपाली गांगुली के ‘अनुपमा’ में दिखाया गया कि माया, अनुज के ख्यालों में खोई रहती है. लेकिन वह घर पहुंचने से पहले अनुज को समझाती है कि वह अनुपमा को बीती रात का सच न बताए. दूसरी ओर अनिरुद्ध को घर बुलाने के लिए वनराज काव्या के चरित्र पर सवाल उठाता है. लेकिन रुपाली गांगुली स्टारर ‘अनुपमा’ में आने वाले ट्विस्ट और टर्न्स यहीं पर खत्म नहीं होते हैं.

वनराज का भांडा फोड़ेगी काव्या

रुपाली गांगुली के ‘अनुपमा’ में दिखाया जाएगा कि वनराज के तानों का काव्या जबरदस्त जवाब देती है. वह बा और बापूजी के सामने बताती है कि कैसे उसने अनुपमा से कहा कि वह काव्या के साथ खुश नहीं है और अपनी जिंदगी में आगे बढ़ नहीं पा रहा है. काव्या, बा और बापूजी से बताती है कि वनराज का मानना है कि मैं उसे खुशी नहीं दे पा रही हूं. इतना ही नहीं, काव्या वनराज को धमकी देती है कि अब वह केवल अपने बारे में सोचेगी

 

माया के कहने पर अनुपमा से सच छुपाएगा अनुज

अनुपमा‘ में दिखाया जाएगा कि माया के कहने पर अनुज अनुपमा से सच छुपा लेगा. वह उसे माया की हरकतें बताने की जगह कहेगा कि छोटी ने चॉकलेट खाई थीं और वह बिना ब्रश किये सो गई थी. दूसरी ओर माया बार-बार अनुज पर हक जताने की कोशिश करेगी और ये बातें अनुपमा को जरा भी पसंद नहीं आती हैं.

 

अनुज को वनराज की हरकतें बताएगी अनुपमा

गौरव खन्ना के ‘अनुपमा’ में अनुपमा अपने पति को वनराज की हरकतें बता देती है. वह कहती है कि वनराज ने उसके वहां रुकने का, हंसने का अलग ही मतलब निकाल लिया. शो को लेकर माना जा रहा है कि अनुपमा की ये बातें सुनते ही अनुज आपा खो बैठेगा और वनराज संग लड़ाइयां करेगा.

 

माया को अनुपमा के कदमों में गिराएगी काव्या

‘अनुपमा’ में एंटरटेनमेंट का डोज यहीं खत्म नहीं होता. शो में जल्द ही दिखाया जाएगा कि शिवरात्री की पूजा में माया अनुज पर फूल फेंकती है और ये चीज काव्या देख लेती है. वह घसीटकर उसे अनुपमा की कदमों में गिराती है और कहती है कि यह तुम्हारे पति से प्यार कर बैठी है. काव्या की ये बातें सुनते ही अनुपमा का पारा चौथे आसमान पर चढ़ जाता है. दूसरी ओर वनराज भी आग में घी डालने की कोशिश करता है.

डेटिंग ऐप

श्रद्धा और पूनावाला कांड में एक ???…..??? वह समाज है जो आज भी हर घर को, हर यूथ को, हर दिल को जातिधर्म, इकौनोमिक स्टेट्स, भाषा, स्किल, कलर से बांटता है. हमारे यहां सदियों पुरानी ट्रेडिशनों को बुरी तरह अपनाया ही नहीं जाता, पैदा होते ही बच्चों को उन का गुलाम भी बना दिया जाता है. जब दिलों में उमंगे उठने लगें, जब किसी की ओर अट्रैक्शन होने लगे, जब लगे कि साथ में एक बौयफ्रैंड, गर्लफ्रैंड होना यूथ की निशानी है लेकिन घर वाले हर चौइस पर पहरा देते हों तो सिवा रिबेल बनने के कोई ठोस रास्ता नहीं है.

श्रद्धा और पूनावाला जैसे मामले हर जगह हो रहे हैं क्योंकि स्कूलों में, सडक़ों पर, बसस्टैंडों पर, पड़ोस में, वर्कप्लेस में अब हर जाति, रंग, धर्म के लोग मिल रहे हैं. मांबाप को यह गवारा नहीं होता कि उन की लाड़ली या लाड़ला किसी ऐसे से पक्का मेलजोल बढ़ाए जो उन के समाज को मंजूर न हो. धर्म के दुकानदार इस कदर चारों ओर फैले हुए हैं और इस कदर उन के एजेंट बिखरे हैं कि कहीं भी जरा भी भनक लगी नहीं कि घरों में हंगामा हो जाता है. लड़कियां और लडक़े ज्यादातर मामलों में अपने फ्रैंड के बारे में सीक्रेसी बरतते हैं और यह कोशिश करते हैं कि उन का संबंध पता न चले.

यह आसान नहीं होता. बारबार फोन की रिंग बजना, देररात तक फोन पर फुसफुसाहट, फोन आते ही एकांत ढूंढऩा, घंटों गायब रहना और पूछने पर टेढ़ेमेढ़े जवाब देना आम है. पर मांबाप, बहनभाई भांप लेते हैं. उन से ज्यादा वे भांप लेते हैं जो सडक़ों के चौराहों पर भगवा दुपट्टा डाले खाली खड़े हरेक को धमकाते रहते हैं. उन से बच पाना बहुत मुश्किल होता है. इसलिए लडक़ेलड़कियां घर छोड़ कर भागते हैं. उन्हें दीनदुनिया की खबर नहीं होती. उन्हें रहने की जगह नहीं मिलती. उन की जेबों में पैसे सीमित होते हैं. गुस्साय मांबाप पुलिस में शिकायत करने की धमकियां देने लगते हैं.

देश में मौजूदा सरकार तो उन लोगों की है जो चाहते हैं कि हर शादी अपने धर्म के दुकानदार के कहने पर सैकड़ों साल पुराने रीतिरिवाजों से हो और शादी से पहले लडक़ालडक़ी एकदूसरे का मुंह तक न देखें. वे भला अपनी मरजी से चल रहे लडक़ीलडक़े को कोई प्रोटैक्शन देंगे. वे तो लडक़े पर किडनैपिंग, रेप, लूट का चार्ज लगा कर ऐसा करने की अदालत के फैसले से पहले ही सजा दे देते हैं.

पूनावाला और श्रद्धा किसी डेटिंग ऐप पर पहले मिले थे. हालांकि 4 साल साथ रहने के बाद श्रद्धा का ब्रूटल मर्डर हुआ पर उन लोगों की कमी नहीं है जो डेटिंग ऐपों को ही दोषी ठहरा रहे हैं. उन का कहना है कि अगर ऐप न होती तो हादसा न होता. वे यह क्यों नहीं कहते कि अगर समाज खुला होता, जाति, धर्म, भाषा, रंग की दीवारें न होतीं तो क्या युवा दिलों को खुल कर मिलने के ज्यादा मौके न मिलते.

Holi 2023- यूं बनाएं मक्का पापड़ी चाट और साबूदाना फ्रूट बाउल

होली  के मौके को अगर आप भी खास बनाना चाहती हैं तो बनाए ये खास डिश मक्का पापड़ी चाट और खास बात यह होगी कि इस रेसिपी में आपका प्यार मिला होगा जो निश्चित तौर पर आपके त्योहार को और भी खास बना देगा.

स्टार्टर रैसिपीज- यूं बनाएं मक्का पापड़ी चाट और साबूदाना फ्रूट बाउल

सामग्री

–  1 कप मक्के का आटा

–  1/4 कप मैदा

–  1 बड़ा चम्मच तेल

–  1/2 कप दही

–  1 बड़ा चम्मच हरी चटनी

–  1 बड़ा चम्मच सोंठ

–  1 उबला आलू

1 प्याज बारीक कटा

–  1 टमाटर बारीक कटा

–  1 हरीमिर्च बारीक कटी

–  1 छोटा चम्मच धनियापत्ती कटी

–   लालमिर्च पाउडर

–  तलने के लिए तेल

– नमक स्वादानुसार.

विधि

मक्के के आटे और मैदे को छान कर नमक और तेल डाल कर गूंध लें. इसे पतला बेल कर तिकोने आकार में काट लें. गरम तेल में सुनहरा होने तक तलें. प्लेट में निकाल कर इस के ऊपर प्याजटमाटर व आलू काट कर डालें. ऊपर से दहीचटनीसोंठ और धनियापत्तीहरीमिर्च और नमक डाल कर सर्व करें.

साबूदाना फ्रूट बाउल

सामग्री

–  1/2 कप साबूदाना

–  1/2 कप नारियल का दूध

–  3 बड़े चम्मच कंडैंस्ड मिल्क

–  थोड़े काजूबादाम के टुकड़े

–  थोड़े से कटे फल सेबअनारसंतरापाइनऐप्पल.

विधि

साबूदाने को पानी में भिगो कर उबाल लें. छलनी में डाल कर ठंडे पानी से धो लें. एक कड़ाही में कंडैंस्ड मिल्क और नारियल का दूध डाल कर गरम करें. फिर साबूदाना डाल कर 1-2 मिनट तक चला लें. फिर कटे फल और काजूबादाम डाल कर परोसें.

वैज पोहा बौल्स

सामग्री

–  1 कप पोहा

–  1 बड़ा चम्मच लालपीली व हरीमिर्च बारीक कटी

1 छोटा प्याज बारीक कटा

2 छोटी गाजर कसी

–  2 बड़े चम्मच कच्चा नारियल कसा

–  हरीमिर्च बारीक कटी

–  1 बड़ा चम्मच तेल

–  1 बड़ा चम्मच गाढ़ा दही

–  1/2 चम्मच सरसों

–  करीपत्ता

–  हरीमिर्च कटी

–  नमक स्वादानुसार.

विधि

पोहे को पानी से धो कर छलनी में पानी निकालने के लिए रखें. फिर इस में सभी शिमलामिर्चप्याजहरीमिर्चकच्चा नारियलगाजरदही व नमक मिलाएं. अच्छी तरह मिला कर इस की छोटीछोटी बौल्स बनाएं. फिर स्टीमर में 10-12 मिनट स्टीम करें. कड़ाही में तेल गरम कर सरसों डालें. भुनने पर करीपत्ता और हरीमिर्च डाल कर पोहे की बौल्स डाल अच्छी तरह मिलाएं और फिर एक प्लेट में सजा कर चटनी के साथ परोसें.

जरूरी है जीवन बीमा

बीमा पौलिसी हमें और हमारे परिवार को भविष्य के खतरों से सुरक्षा कवच प्रदान करती है. यदि किसी परिवार में धन अर्जित करने वाले व्यक्ति की असामयिक मौत हो जाती है या वह अस्थायी दिव्यांगता का शिकार हो जाता है तो घर पूरी तरह से बिखर जाता है. उन के लिए खर्चों को पूरा करना काफी मुश्किल होता है.

ऐसे में जीवन बीमा काम आता है. बीमित व्यक्ति के परिवार को बीमा कंपनी की ओर से एक निश्चित मुआवजा हासिल होता है. इस तरह अपने परिवार को भविष्य के किसी भी ऐसे संकट से बचाने और अपने बच्चों का भविष्य संवारने के लिए जीवन बीमा लेना काफी जरूरी हो जाता है. इस का चयन आप अपने बजट और जरूरत के हिसाब से कर सकते हैं.

जीवन बीमा के प्रकार

जीवन बीमा पौलिसी मोटे तौर पर 8 तरह की होती हैं, जिन में ऐंडोमैंट पौलिसी, टर्म इंश्योरैंस, मनी बैक, होल लाइफ इंश्योरैंस प्लान, यूलिप प्लान, चिल्ड्रन प्लान, सेविंग्स ऐंड इन्वैस्टमैंट प्लान, रिटायरमैंट प्लान आदि शामिल हैं. इन सब के अपने फायदे और अपने नुकसान हैं. लोगों को अपनी जरूरत के हिसाब से चुनना चाहिए.

जीवन बीमा लेने के लाभ

जीवन बीमा किसी भी मुश्किल हालात में वित्तीय परेशानियों से बचने में आप की काफी मदद करता है. इस के जरीए आप अपने परिवार या संसाधनों को वित्तीय सुरक्षा तो प्रदान कर ही सकते हैं, इस के अलावा यह आप के टैक्स को बचाने में और बैंकों द्वारा लोन की सुविधा को आसानी से हासिल करने में भी मददगार साबित हो सकती हैं.

जीवन बीमा का महत्त्व

जीवन बीमा किसी भी अप्रत्याशित स्थिति में आप के परिवार को वित्तीय सुरक्षा देता है. चुने गए बीमा के आधार पर हम मासिक/वार्षिक रूप से बीमा कंपनी को प्रीमियम चुकाते हैं और किसी भी अप्रत्याशित हादसे की स्थिति में कंपनी हमें या हमारे द्वारा चुने गए नौमिनी को पहले से तय की गई राशि देती है. इस तरह जीवन बीमा का मुख्य उद्देश्य आप की गैरमौजूदगी में आप के परिवार की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने में मदद करना होता है. किसी भी हादसे की स्थिति में आप के जीवनसाथी, बच्चे, बूढ़े मांबाप आप के जीवन बीमा से प्राप्त राशि से घर और जीवनयापन के अन्य खर्चों का वहन कर सकेंगे.

जीवन बीमा आप की विकलांगता की स्थिति में भी आप को अच्छीखासी राशि प्रदान करता है ताकि आप और आप के परिवार को आय की कमी की वजह से वित्तीय परेशानियां नहीं झेलनी पड़ें.

एक जीवन बीमा पौलिसी दीर्घकालीन निवेश है जो आप के दीर्घकालिक लक्ष्यों को पूरा करने में मदद कर सकती है. कुछ योजनाओं के पैसे से आप घर खरीद सकते हैं या अपने रिटायरमैंट की योजना बना सकते हैं या अपने बच्चों की शिक्षा की योजना बना सकते हैं. अपने लक्ष्यों और जरूरतों के अनुसार ही आप को बीमा के प्रकार का चुनाव करना होगा और इस का प्रीमियम निर्धारित करना होगा.

हम चाहते हैं कि रिटायरमैंट के लिए की गई हमारी बचत हमारे जीवन के आखिरी दिन तक खत्म नहीं हो. सही जीवन बीमा पौलिसी का चुनाव कर के आप हर माह उस में कुछ पैसे निवेश कर सकते हैं जो आप के रिटायरमैंट के बाद आप को हर माह निश्चित आय के रूप में मिलती रहेगी.

हर बीमा पौलिसी में टैक्स बैनिफिट का प्रावधान भी होता है. किसी भी बीमा पौलिसी में चुकाया गया प्रीमियम धारा 80सी के अंतर्गत साल में अधिकतम 1.5 लाख रुपए तक कर छूट के लिए पात्र होगा. मृत्यु/विकलांगता की स्थिति में आयकर अधिनियम 1961 की धारा 10(डी) के अंतर्गत प्राप्त राशि भी कर मुक्त होगी.

जीवन बीमा किसे और कब लेना चाहिए

ऐसे हर व्यक्ति के लिए जीवन बीमा जरूरी है जिस पर परिवार की जिम्मेदारी होती है. आप जौब में हों या अपना कारोबार कर रहे हैं आप को अपनी सालाना आमदनी का कम से कम 10 गुना जीवन बीमा कवर जरूर लेना चाहिए.

जीवन बीमा पौलिसी व्यक्ति के नहीं रहने की स्थिति में उस के परिवार को वित्तीय जोखिम से सुरक्षा देता है. मान लीजिए कि किसी व्यक्ति ने होम लोन ले कर घर खरीदा है. उस के बच्चे निजी स्कूल में पढ़ रहे हैं. घर के सभी खर्चों के लिए परिवार उस व्यक्ति की आय पर निर्भर है. अगर किसी बीमारी या दुर्घटना की वजह से इस व्यक्ति की मौत हो जाती है तो उस के नहीं रहने की स्थिति में उस का परिवार सड़क पर आ जाएगा. इस स्थिति से बचाव के लिए उसे बीमा पौलिसी खरीदना जरूरी है. बीमा कवरेज लेने से उस के नहीं होने की स्थिति में उस पर आश्रित परिवार के सदस्यों को बीमा कंपनी से मुआवजा मिलेगा जिस से उन के आगे की जरूरतें पूरी हो सकती हैं. इसलिए यदि किसी व्यक्ति के परिवार में पत्नी है, बच्चे हैं और उस के वृद्ध मातापिता हैं और उन की अपनी कोई कमाई नहीं है तो व्यक्ति को निश्चित रूप से जीवन बीमा पौलिसी खरीदनी चाहिए.

जब तक आप के परिवार के सदस्य अपने खर्च के लिए आप की कमाई पर निर्भर हों आप को उतने समय का अंदाजा लगा कर ही बीमा पौलिसी खरीदनी चाहिए. आप जब तक अपने परिवार के लिए कमाने वाले महत्त्वपूर्ण सदस्य हैं तब तक के लिए आप को जीवन बीमा कराना चाहिए.

आमतौर पर यह माना जाता है कि अगर आप की शादी 30 साल की उम्र में हो गई है और 35 साल की उम्र तक आप के 2 बच्चे हैं तो उन की पढ़ाईलिखाई आदि अगले 25 साल में पूरी हो जाएगी और तब तक वे जौब शुरू कर देंगे. इस हिसाब से आप को जीवन बीमा पौलिसी 60-65 साल तक की उम्र के लिए कवरेज लेना चाहिए.

यदि आप बीमा करवाना चाहते हैं तो आप बीमा कंपनी के आधिकारिक पोर्टल पर अपना प्लान चुन सकते हैं. उन के प्रतिनिधि आप को तुरंत कौल करेंगे और आप को आगे की राह दिखाएंगे. इस के अलावा बीमा करवाने के लिए आप अपने नजदीकी एजेंट से भी संपर्क कर सकते हैं.

मेरे जीवन में काम और परिवार के अलावा कुछ भी नहीं है- मनोज बाजपेयी

फिल्म ‘गुलमोहर’ अभिनेता मनोज बाजपेयी के लिए एक अलग और चुनौतीपूर्ण कहानी है, जिसे निर्देशक राहुल चित्तेला ने बहुत ही सुंदर तरीके से पर्दे पर उतारा है. ये नई जेनरेशन की फॅमिली ड्रामा फिल्म है, जिसमे मनोज बाजपेयी ने अरुण बत्रा की भूमिका निभाई है, जो काबिलेतारीफ है. मनोज कहते है कि मुझे एक ऐसी ही अलग कहानी में काम करने की इच्छा थी, जिसे निर्देशक राहुल लेकर आये और मुझे करने का मौका मिला. खास कर इस फिल्म के ज़रिये मुझे शर्मीला टैगोर और अमोल पालेकर जैसी लिजेंड के साथ काम करने का मौका मिला. मुझे बहुत ख़ुशी मिलती है, जब मैं ऐसे लिजेंड कलाकार के साथ काम करता हूँ. मैंने अमिताभ बच्चन जैसे अभिनेता के साथ भी काम किया है. मुझे दुःख इस बात का है कि मैं अभिनेता संजीव कुमार के साथ काम नहीं कर पाया. एक बार मैं लिजेंड दिलीप कुमार से भी मिला हूँ, उन्होंने सिर्फ कहा था कि मैं उम्दा काम करता हूँ. ये सारी बातें एक कलाकार को अच्छा काम करने के लिए प्रेरित करती है.

फिल्म ‘बेंडिट क्वीन’ से अभिनय के क्षेत्र में कदम रखने वाले अभिनेता मनोज बाजपेयी को फिल्म ‘सत्या’ से प्रसिद्धी मिली. इस फिल्म के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला. बिहार के पश्चिमी चंपारण के एक छोटे से गाँव से निकलकर कामयाबी हासिल करना मनोज बाजपेयी के लिए आसान नहीं था. उन्होंने धीरज धरा और हर तरह की फिल्में की और कई पुरस्कार भी जीते है. बचपन से कवितायें पढ़ने का शौक रखने वाले मनोज बाजपेयी एक थिएटर आर्टिस्ट भी है. उन्होंने हिंदी और अंग्रेजी में हर तरह की कवितायें पढ़ी है. साल 2019 में साहित्य में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री अवार्ड से भी नवाजा गया है.

रिलेटेबल है कहानी

मनोज ने हमेशा रिलेटेबल कहानियों में काम करना पसंद किया है, क्योंकि वे खुद को इससे जोड़ पाते है. इसी कड़ी में उन्होंने फिल्म ‘गुलमोहर’ किया है, जो ओटीटी प्लेटफॉर्म ‘डिजनी प्लस हॉटस्टार’ पर रिलीज होने वाली है, इस फिल्म में काम करने की खास वजह के बारें में पूछने पर वे बताते है कि ये इसकी स्क्रिप्ट और उलझन मेरे लिए आकर्षक है, एक परिवार के अंदर हर व्यक्ति कुछ पकड़ना चाह रहा है, लेकिन वह रेत की तरह उसके हाथ से छूट रहा है, ये मुझे बहुत अच्छा लगा. ये आज की कहानी है, जहाँ रिश्तों और संबंधों के बारें में लोग कम सोचते है. आज मैं काम में व्यस्त हूँ और अपने परिवार के साथ रहना मुमकिन नहीं होता, इसलिए जब भी थोडा समय मिलता है मैं परिवार के साथ रहने की कोशिश करता हूँ.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Manoj Bajpayee (@bajpayee.manoj)

रिश्तों को दे समय

रिश्ते और संबंधों में हल्कापन आने के बारें में मनोज का कहना है कि रिश्ते है, खासकर शहरों में किसी के पास समय नहीं है, जबकि गांव में ऐसा आज भी नहीं है, लेकिन रिश्ते तो है. व्यक्ति काम से अपने आप को बाहर नहीं निकाल पाता, ताकि रिश्तों को मजबूत कर पाएं. रिश्तों को उतना ही महत्व दें, जितना काम को देते है, ताकि बाद में कोई अफ़सोस न हो.

हैप्पी यादे जीवन की

मनोज आगे कहते है कि मुझे याद आता है, मैं एक्टर बनना चाहता था और मैंने 18 साल की उम्र में गांव छोड़ा था. गांव में तब फ़ोन की व्यवस्था नहीं थी, बाद में टेली फ़ोन आया और कम्युनिकेशन स्मूथ हो गया और अब सबके हाथ में मोबाइल फ़ोन है, लेकिन बात नहीं होती.

इसके अलावा जब गांव से निकला, तो परिवार से दूर हो गया, जब मैने उन्हें गांव से दिल्ली लाया, तो मैं मुंबई आ गया, इस तरह से मैं उनके साथ नहीं रह पाया. ये खाली है और कभी भर नहीं सकते. उसे याद करता हूँ और ये सारे हैप्पी यादें है. मैंने कुछ अपनी माँ से और कु अपने पिता से अडॉप्ट किया है. परिवार का साथ मिलकर रहना और बातचीत करना बहुत जरुरी होता है. इससे इमोशनल बोन्डिंग बढती है, जिसकी आज की स्ट्रेसफुल लाइफ में बहुत जरुरी होता है.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Manoj Bajpayee (@bajpayee.manoj)

ओटीटी ने दिया मौका

इंडिपेंडेंट फिल्मों के बनने से कलाकारों को काम करने का अधिक मौका मिला है और ये आगे तक चल सकेगी. मनोज आगे कहते है कि इंडिपेंडेंट सिनेमा में पैसे नहीं होते, लेकिन कहानी को अपने हिसाब से कहने और फिल्म मेकिंग को ऑर्गनाइज कर दिया है. आज सबके पास वौयस् है, पहले ऐसा नहीं था.

इस फिल्म को करते हुए मैंने बहुत एन्जॉय किया है. फिल्म किसी को कुछ सिखाती नहीं, रिलेट कराती है. इसलिए विश्वास के साथ काम करें, तो सफल अवश्य होगी. मुझे याद है, मुझे फिल्मों में एंट्री मिलना थोडा मुश्किल था, लेकिन मैंने एक्टिंग की ड्रीम को मैंने नहीं छोड़ा. बदलाव जरुरी था, लेकिन ओटीटी ने इस बदलाव को जल्दी ला दिया. फिल्म मेकिंग की तकनीक भी बहुत बदली है.

महिलाओं को आगे बढ़ने में होती है समस्या

मनोज आगे कहते है कि परिवार और पुरुष को इस बात को समझना पड़ेगा कि समय बदल गया है और महिलाओं के सामने पूरा आसमान है और वह पूरी तरह से स्वतंत्र ख्याल की हो चुकी है. उनपर किसी प्रकार की बंदिश लगाने से वह सम्बन्ध नहीं रहेगा. परिवार को मजबूत करने के लिए महिलाओं को अपनी स्वतंत्रता के साथ उड़ पाए, इसके लिए पुरुष की तरफ से एक समझदारी की जरुरत है. मेरे परिवार में मेरी माँ एक स्ट्रोंग महिला रही, उनकी कई बातों को मैं अपने जीवन में उतारता हूँ. ये बातें मेरी जीवन में महत्वपूर्ण है और अंत तक मेरे साथ रहेंगी. मेरे जीवन में काम और परिवार के अलावा कुछ भी नहीं है.

Holi 2023: इन 7 टिप्स को अपनाएं और लें होली का मजा

होली के दिन आपका भी मन करता होगा रंगो में डूब जाने का और जी खोल कर मस्ती करने का. करें भी क्यों ना आखिर कितने इंतजार के बाद तो ये दिन आता है. तो खुद को जरा भी रोके बिना रंग का पूरा लुत्फ उठाइये पर जरा सानधानी से.

एक पुराना समय था जब लोग हल्‍दी, चदंन, गुलाब और टेसू के फूल से रंग बनाया करते थे पर आजकल तो रासायनिक रंगों का ही बोलबाला है. ऐसे मे सावधानी बरतना बहुत जरूरी है. ऐसे रंगों मे कई तरह के रासायनिक और विषैले पदार्थ मिले होते हैं, जो त्वचा, नाखून व मुंह से शरीर मे प्रवेश कर अदंरूनी हिस्सों को क्षति पहुंचा सकते हैं. ऐसे में अगर होली खेलने से पहले कुछ सावधानियां बरती जायें तो त्वचा को रासायनिक रंगों से होने वाले नुक्सान से काफी हद तक बचाया जा सकता है.

चलिए जानते हैं कि होली खेलने से पहले हमें क्‍या-क्‍या सावधानियां बरतने की जरुरत है-

1. होली खेलने से 20 मिनट पहले अपने शरीर पर खूब सारा तेल या फिर मौस्‍चराइजर लगा लें. इसके बाद अपने शरीर पर वाटरप्रूफ सनस्‍क्रीन लगा कर ही होली खेलने निकलें.

2. होली के दिन आप पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनिए. अच्‍छा होगा कि कपड़े के अंदर कोई स्‍विम सूट पहन लें जिससे होली का रसायनयुक्‍त रंग अंदर जाने से बच जाए.

3. इस दिन बालों पर विशेष ध्‍यान देना जरुरी है. अपने बालों पर एक अच्‍छा तेल लगाएं जिससे नहाने के समय बालों पर रंग चिपके ना और आसानी से धुल भी जाए. चाहें तो टोपी भी पहन सकती हैं. तेल के अलावा अपने होंठों को हानिकारक रंगों से बचाने के लिए उस पर लिप बाम लगाना बिल्कुल न भूलें.

4. अपनी आखों का विशेष ध्यान रखें. आंखों को रंग, गुलाल, अबीर आदि से बचाएं क्‍योंकि इनमें मौजूद पोटेशियम हाईक्रोमेट नामक हानिकारक तत्व आंखों को काफी नुकसान पहुंचा सकते हैं. यदि कुछ रंग आंख मे चला जाए तो आंखों को तब तक पानी से धोएं जब तक रंग ठीक से निकल न जाए.

5. नाखूनों पर जब रंग चढ़ जाते हैं तो जल्‍दी साफ नहीं होते. इसके लिए नाखूनों और उसके अंदर भी वैसलीन लगाएं. इससे नाखूनों और उसके अंदर रंग नहीं चढेगा. इसके अलावा महिलाएं किसी गहरे रंग की नेलपौलिश भी लगा सकती हैं.

6. जब भी रंग खरीदने जाएं तो कोशिश हमेशा यही होनी चाहिए कि हरा, बैगनी, पीला और नारंगी रंग न लेकर लाल या फिर गुलाबी रंग खरीदें. वह इसलिए क्‍योंकि इन सब गहरे रंगों में ज्‍यादा रसायन मिले हुए होते हैं.

7. रंग खेलने के बाद त्‍वचा रुखी हो जाती है, तो इसके लिए शरीर पर मलाई या बेसन का पेस्‍ट बना कर लगाया जा सकता है. अगर शरीर पर कोई घाव या चोट आदि है तो होली खेलने से बचें, क्योंकि रंगों में मिले रासायनिक तत्व घाव के माध्यम से शरीर के रक्त में मिलकर नुकसान पहुंचा सकते हैं.

इन दी गई सावधानी को बरते और खुलकर होली का मजा ले.

Holi 2023: होली के रंगों में भी आप दिख सकती हैं फैशनेबल

होली रंगों का त्योहार है. होली के मौके पर अगर आप किसी होली इवेंट में जा रही हैं तो आपके फैब्युलस लुक का होना जरूरी है. अगर आप इस बात से चिंतित हैं कि होली इवेंट में किस तरह से ड्रेसअप करना चाहिए या किस तरह का मेकअप करना चाहिए तो चलिए हम आपकी ये परेशानी भी दूर कर देते हैं. यहां हम आपको बता रहे हैं कुछ ऐसे टिप्स जिसमें आप फैब्युलस लग सकती हैं.

1. ड्रेसअप

व्हाइट कलर होली पर पहनने वाला एक पुराना फैशन बन चुका है. अब आप व्हाइट के साथ अलग-अलग कलर को पेयर करके अपने पहनावे को और भी वाइब्रेंट और आकर्षक बना सकती हैं. ऐसे ड्रेस चुनें जो आपको होली सेलिब्रेशन के दौरान कंफर्ट का एहसास कराये.

अगर आप टीशर्ट और टौप को फैशनेबल प्लाजो या ट्राउजर के साथ पेयरअप करना चाहती हैं या आप ढ़ीली कुर्ती, लूज टौप के साथ हौट पैंट या लाइट ब्लू जींस कैरी करना चाहते हैं तो इसे जरुर ट्राय करें. फ्लोरल प्रिंट आपको होली पर एक नया लुक और एहसास देगा. इसी तरह युनिक लुक पाने के लिए लाइट कलर जैसे पिंक, येलो, पर्पल, ग्रीन को भी अपना सकती हैं.

2. हेयरडू

होली की मस्ती के साथ इसके हानिकारक रंगों से अपने बालों को बचाना भी उतना ही जरुरी होता है. इसलिए अपने बालों को इनसे बचाने के लिए पहले अपने बालों को नारियल तेल से मौइश्चराइज कर लें इसके बाद कोई चिक स्टाइल हेयरडू बनायें. जैसे पोनीटेल, ब्रेडेड बन, फ्रेंच बन या उंची चोटी पर डबल ब्रेड भी कर सकती हैं. हाइ पोनी करके क्यूट ड्रेस के साथ आप और भी क्यूट लगेंगी.

3. नेलआर्ट

अपने नेल्स को नेलपेंट की मदद से कवर करें और इसे होली के रंगों से बचायें. इसके अलावा कुछ युनिक करना चाहते हैं तो होली नेल आर्ट डिजाइन अपने नाखूनों पर बनायें. बेस कोट के अलावा आप अलग-अलग रंगों के साथ अपने नेल्स को सजा सकती हैं.

4. फुटवियर

इस फेस्टिव में हाइ हील्स पहनना सोचें भी नहीं. क्योंकि इवेंट के दौरान आपको रनिंग और डांसिंग भी करनी पड़ेगी तो इसे ध्यान में रखते हुए ही अपनी कंफर्ट के मुताबिक फुटवेयर का चयन करें. शूज का चुनाव करें. बैली या खूबसूरत स्लिपर भी चुन सकती हैं. अगर आप जींस, शार्ट्स के साथ टौप पहन रही हैं तो स्नीकर्स, बैली, लोफर या सिंपल स्लिपर आजमा सकती हैं.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें