Urfi Javed के नए ड्रेसिंग सेन्स को देख लोगों ने दिया ये रिएक्शन, ‘बोले कोई तो मुझे मारे …’

टीवी एक्ट्रेस और मॉडल उर्फी जावेद नई ड्रेस पहने और चर्चा ना हो ऐसा हो ही नहीं सकता है. उर्फी जावेद अपने यूनिक फैशन सेंस के लिए जानी जाती है. उनके फैशन की फैंस जहां तारीफ करते हैं, वहीं सोशल मीडिया के तमाम यूजर्स उनकी जमकर क्लास लगाते हैं. इसी बीच उर्फी जावेद की नई तस्वीरें सामने आई हैं जिनको देखकर एक बार फिर लोग हैरान हैं. उर्फी जावेद की लेटेस्ट पिक्चर्स में उनकी ड्रेस को देखकर कुछ लोग उनकी क्रिएटीविटी की तारीफ कर रहे हैं तो कुछ लोग उन्हें ट्रोल कर रहे हैं. देखें उर्फी जावेद की नई तस्वीरें

उर्फी जावेद हर बार अपने फैशन से सभी को चौका देती है.हमेशा लगता है की उर्फी जावेद अगली बार किस चीज से ड्रेस बनाएगे तभी वह ऐसा कुछ कर गुजरती है जो भी उन्हे देखते है उन्हे देखते ही रह जाते है. भले ही उन्हे ट्रोल खूब किया जाता हो लेकिन आज के वक्त सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाली सेलिब्रेटी भी है.  शनिवार को उर्फी जावेद एक बार फिर से पपराजी के सामने आई. उर्फी जावेद ने कुछ ऐसी ड्रेस पहनी की उनका यह वीडियो वाइरल हो गया.

 

 

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ब्लैक आउटफिट ने उर्फी जावेद ने दिया पोज़

उर्फी जावेद ने कोननुमा ब्लैक ब्रालेट पहना जिसपर गोल्डन वर्क किया गया है. इसके साथ उन्होंने ब्लैक लॉन्ग स्कर्ट मैच किया. उन्होंने गोल्डन कलर की हाई हीलस पहनी हुई है और बालों को जुड़ा बनाया. उर्फी जावेद अपनी गाड़ी से उतरी और पोज देती है. उनके इस आउटफिट को लेकर उन्हे ट्रोल भी खूब किया गया.

 

 

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तन ढकने के लिए कोट लेकर पहुंचीं लड़की

इस वीडियो में आप देखेंगे कि उर्फी जावेद  (Urfi Javed) रेस्टोरेंट के बाहर खड़े होकर पोज दे रही हैं और पैपराजी लगातार एक्ट्रेस की फोटोज क्लिक कर रहे हैं. तभी उर्फी के खुले बदन को देखकर एक महिला हाथ में जैकेट पकड़े उर्फी को कोट पहनाने की कोशिश करने आईं. ये लड़की जैसे ही उर्फी के पास आई तो उर्फी ने लड़की का हाथ रोका. इसके बाद गुस्से से लड़की को घूरने लगीं. उर्फी का गुस्से से तिलमिलाता चेहरा देखकर ये लड़की पीछे हट गई. इसके बाद उर्फी रेस्टोरेंट के अंदर चली गई. इस वीडियो को देखकर ऐसा लग रहा है कि उर्फी को कोट पहनाने वाली ये लड़की कोई और नहीं उर्फी की स्टॉफ मेंबर है.

Urfi Javed का वर्कफ्रंट 

उर्फी जावेद (Urfi Javed Tv Shows) के वर्कफ्रंट की बात करें तो उर्फी ने साल 2016 में अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत की थी. बड़े भैया की दुल्हनिया उर्फी का पहली टीवी शो था. इसके बाद उर्फी जावेद (Urfi Javed Bigg Boss OTT) बिग बॉस ओटीटी में भी दिखाई दी थीं .

Winter Special: मूंगदाल क्यूब्स विद बींस

डेली हैल्दी खाना कभी कभी बेस्वाद हो जाता है जिसके के लिए एक्साट्रा फूड होना बेहद ज़रुरी होता है ऐसे में कुछ आसान तरीके से बनाएं मूंगदाल क्यूब्स विद बींस.

सामग्री

1/3 कप मूंगदाल पाउडर

150 ग्राम फ्रैंचबींस 1 इंच के टुकड़ों में कटी

2 छोटे चम्मच अदरक व हरीमिर्च बारीक कटी

3/4 छोटा चम्मच हलदी पाउडर

2 छोटे चम्मच धनिया पाउडर

1/4 छोटा चम्मच लालमिर्च पाउडर

1/2 छोटा चम्मच देगीमिर्च पाउडर

2 बड़े चम्मच दही

1/2 कप प्याज बारीक कटा

1 छोटा चम्मच अदरक व लहसुन पेस्ट

1/2 छोटा चम्मच गरममसाला

2 बड़े चम्मच सरसों का तेल

थोड़ी सी बारीक कटी धनियापत्ती सजाने के लिए

नमक स्वादानुसार.

विधि

मूंगदाल पाउडर को 1 कप पानी में 20 मिनट के लिए भिगो दें. इस में दही, हलदी पाउडर, थोड़ा सा नमक, थोड़ा सा अदरक व हरीमिर्च पेस्ट मिलाएं और थोड़ा सा फेंट लें. नौनस्टिक कड़ाही को चिकना कर के मिश्रण डालें व धीमी आंच पर मिश्रण के गोला बनने तक घोटें. मिश्रण को चिकनाई लगी थाली में जमाएं व ठंडा कर के इच्छानुसार क्यूब्स काट लें. पुन: नौनस्टिक कड़ाही में 1 बड़ा चम्मच तेल गरम कर के क्यूब्स को उलटपलट कर सुनहरा भून कर निकाल लें. बचे तेल को गरम कर के प्याज और अदरक व लहसुन का पेस्ट डाल कर पारदर्शी होने तक भूनें. सभी सूखे मसाले व फ्रैंचबींस डाल दें. साथ ही 2 बड़े चम्मच पानी भी. धीमी आंच पर ढक कर फ्रैंचबींस के गलने तक पकाएं. इस में दाल क्यूब्स डालें व उन्हें भी थोड़ी देर उलटेंपलटें. सब्जी तैयार है. धनियापत्ती से सजा कर सर्व करें.

असली मां का सच सुनते ही भड़की छोटी अनु, अनुज-अनुपमा ने दी माया को धमकी

रुपाली गांगुली और गौरव खन्ना स्टारर ‘अनुपमा’ इन दिनों टीवी पर धमाल पर धमाल मचा रहा है. साल 2023 की शुरुआत से ही टीआरपी लिस्ट में नंबर वन पर बने ‘अनुपमा‘ (Anupama) में आए दिन ट्विस्ट और टर्न्स देखने को मिल रहे हैं. शो की कहानी छोटी अनु और उसकी सगी मां माया की ओर मोड़ दी गई है जो अनुज-अनुपमा की जिंदगी में भी तूफान लाने वाली है. बीते दिन भी ‘अनुपमा’ में दिखाया गया कि छोटी अनु माया से मिलने की जिद करने लगती है, जिससे नाराज होकर अनुपमा उसे डांट देती है. ऐसे में छोटी अनु घर छोड़कर चली जाती है. वह कार के सामने आने वाली ही होती है कि माया और अनुपमा उसे बचा लेते हैं. लेकिन ‘अनुपमा’ में आने वाले ट्विस्ट और टर्न्स यहीं पर खत्म नहीं होते हैं.

 

 

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छोटी अनु को अपना सच बताएगी माया

‘अनुपमा’ में अनुपमा और छोटी अनु माया को घर लेकर आते हैं. माया अनुपमा से पूछती भी है कि अगर देवकी अपना कान्हा मांगने आतीं तो क्या यशोदा उन्हें घर बुलातीं. इसपर अनुपमा जवाब देती है हां. घर आने के बाद माया छोटी अनु को सच बताती है कि वह उसकी असली मां है. वह छोटी से यह भी बता देती है कि सालों पहले उसने ही छोटी को आश्रम में दिया था, लेकिन वह दूर होकर भी उसकी पूरी खबर रखती थी.

 

 

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सगी मां के बारे में जानते ही उससे मुंह मोड़ेगी छोटी

अनुपमा‘ में सच सुनते ही छोटी अनु माया से मुंह मोड़ लेगी. वह उसे जवाब देगी कि जानवर भी अपने मरे हुए बच्चों को साथ रखते हैं लेकिन मैं तो जिंदा थी. आश्रम में तो वो होते हैं जिनके मम्मी-पापा नहीं होते. वहां बच्चों को उनके मम्मी-पापा की गोद में देखकर मैं रोती थी. मम्मी-पापा नहीं आते तो मैं आज भी आश्रम में ही रहती.

 

 

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वनराज का अकड़पन सुधारेगी काव्या

रुपाली गांगुली के ‘अनुपमा’ में माया काव्या को लंदन जाने का मौका देती है. लेकिन वनराज काव्या से लंदन जाने से मना कर देता है और कहता है कि ये तुम्हारे पति का फैसला है. इसपर काव्या भी जवाब देती है कि अगर तुम दिल्ली वाली जॉब स्वीकार लोगे तो मैं लंदन नहीं जाऊंगी. वनराज उसकी बात से इंकार कर देता है तो काव्या भी अपने फैसले पर अड़ी रहती है और कहती है, “मैं लंदन जाऊंगी और अनुपमा की तरह मेरा पासपोर्ट छुपाने की कोशिश भी मत करना.”

 

 

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माया को चेतावनी देंगे अनुपमा और अनुज

‘अनुपमा’ में एंटरटेनमेंट का डोज यहीं पर खत्म नहीं होता है. शो में जल्द ही देखने को मिलेगा कि अनुज और अनुपमा माया को चेतावनी देंगे. अनुज, माया से कहेगा कि दुनिया गुणगान नहीं करती, इसका मतलब ये नहीं है कि एक पिता अपने बच्चे से प्यार नहीं करता. जंग तो होगी. माया जवाब देती है कि इसे मैं जीतूंगी. इसी पर अनुपमा भी बोल पड़ती है, “मैं आपको खुद से कम नहीं समझ रही तो आप भी मुझे अपने से कम मत आंकना. अगर आप मा-या हो तो मैं भी अनुपमा हूं.”

अक्षरा ने दिया अभिमन्यु को वार्निंग, अभिनव का हुआ एक्सीडेंट

टीवी सीरियल ये रिश्ता क्या कहलाता है में इन दिनों खूब सारा इमोशनल ड्रामा देखने को मिल रहा है. सीरियल में प्रणाली राठौड़ ‘अक्षरा’ और हर्षद चपोड़ा ‘अभिमन्यु’ के किरदार में दिल जीत रहे हैं. दोनों की रोमांटिक केमिस्ट्री की दर्शकों ने हमेशा तारीफ की है लेकिन इन दिनों दोनों दूर-दूर हैं. कहानी में दोनों अलग हो चुके हैं. ये रिश्ता क्या कहलाता है (Yeh Rishta Kya Kehlata Hai) के बीते एपिसोड में देखने को मिला था कि अभिनव ने शादी में अपनी और अक्षरा की झूठी लव स्टोरी सुनाई थी, जिस वजह से वह काफी ज्यादा परेशान था। हालांकि, अक्षु ने इस बात को दिल से नहीं लगाया. लेकिन अभिमन्यु को यह बात काफी बुरी लगी थी. वहीं, सीरियल में आगे भी एक मजेदार ट्विस्ट आने वाला है, जिस वजह से अक्षरा और अभिमन्यु एक बार फिर आमने-सामने आकर खडे़ हो जाएंगे.

 

अभिमन्यु पर भड़केगी अक्षरा

ये रिश्ता क्या कहलाता है में देखने को मिल रहा है कि अभिमन्यु इन दिनों कसौली में है और अक्षरा-अभिनव के साथ एक शादी अटेंड कर रहा है. बीते एपिसोड में अभिनव और अभिमन्यु ने साथ में शराब पी थी, जिसके बाद अब अक्षरा का गुस्सा दोनों पर फूटेगा. सीरियल में आगे देखने को मिलेगा कि अक्षु अभिमन्यु को यहां से जाने की बात कहेगी. वह बोलेगी कि जिस अक्षरा से आप इतना दूर हो चुके हैं, उसके पास आने की जरूरत नहीं है. दूसरी तरफ सुबह होते ही अक्षरा अभिनव को भी खरी-खोटी सुनाएगी.

 

अभिनव को होगा एक्सीडेंट

सीरियल में आगे देखने को मिलेगा कि अक्षरा और अभिनव शादी से घर लौट आएंगे, जहां पर अक्षु अभि पर भड़केगी. वहीं, कुछ देर बाद जैसे ही अभिनव घर से बाहर जाएगा, तो उसका एक्सीडेंट हो जाएगा. इस दौरान पूरे कसौली में डॉक्टर्स और नर्सों की स्ट्राइक होगी, जिस वजह से अभिनव की हालत बिगड़ती जाएगी.

 

अभिमन्यु को याद करेगी अक्षरा

ये रिश्ता क्या कहलाता है में आगे देखने को एक्सीडेंट के बाद अभिनव की हालत काफी ज्यादा खराब हो जाएगी. वहीं, इस मुश्किल में अक्षरा को कोई भी डॉक्टर नहीं मिलेगा. ऐसे में अभीर सीधा अभिमन्यु को फोन मिलाएगा. लेकिन वह फोन नहीं उठाता, जिसके बाद वह एक मैसेज करता है. सीरियल में यह भी देखने को मिलेगा कि अभिमन्यु अभिनव का इलाज करने अक्षरा के घर पहुंच जाएगा.

ज्यादा बच्चों से ही नहीं बल्कि कम बच्चों से भी परेशान है दुनिया

भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान, इंडोनेशिया, केन्या. ये वे देश हैं, जो अपने यहां आबादी विस्फोट से परेशान हैं. इन सब देशों में सरकारों की अथक कोशिशों के बावजूद भी अगर गरीबी नहीं दूर हो रही, लोगों का जीवनस्तर बेहतर नहीं हो रहा, तो उसका एक बड़ा कारण इन देशों में लगातार जनसंख्या की वृद्धि होना है. भारत में तमाम भविष्यकालिक योजनाओं और विकास को लगातार बढ़ती जनसंख्या बेमतलब कर देती है. यही हाल पाकिस्तान और बांग्लादेश का भी है. लेकिन दुनिया में कुछ ऐसे भी देश हैं जो जनसंख्या न बढ़ने के कारण या बहुत मामूली दर से बढ़ने के कारण परेशान हैं. ये देश सिर्फ परेशान ही नहीं हंै बल्कि इस परेशानी से निपटने के लिए वे अपने युवा दंपतियों को शादी के तुरंत बाद जल्द से जल्द बच्चा पैदा करने के लिए तमाम तरह से प्रोत्साहित करते हैं. यह प्रोत्साहन सिर्फ मुंहजुबानी नहीं होता बल्कि इसके लिए वे इन्हें कई किस्म के प्रोत्साहक फायदे भी देते हैं.

इटली की सरकार पिछले कई सालों से अपने युवा दंपतियों को ज्यादा से ज्यादा बच्चा पैदा करने के लिए प्रोत्साहित करती रही है. हालांकि इस साल कोविड-19 महामारी की जबरदस्त चपेट में रहने के कारण इस कार्यक्रम को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है, लेकिन जल्द ही फिर इस तरह के सरकारी विज्ञापन दिखने शुरु होंगे जिसमें कहा जाता है- ‘सुंदरता की कोई उम्र नहीं होती. मगर बच्चे पैदा करने की होती है.’ दरअसल इटली दुनिया के उन दस देशो में शामिल है,जहां बच्चों की जन्मदर निरंतर घट रही है. ऐसा किसी बीमारी की वजह से नहीं हो रहा, लोगों विशेषकर युवाओं की व्यस्त जीवनशैली और अकेले रहने की आदत के चलते हो रहा है. इटली जैसे ही हालात कई अन्य देशों के भी हैं. इन देशों को यह चिंता सता रही है कि गिरती प्रजनन दर से कहीं उनके भविष्य पर ही सवालिया निशान न लग जाये. इन्हीं हालात को भांपते हुए इन देशों की सरकारें अपने युवा विवाहित जोड़ों को प्रोत्साहित करती हैं कि वे शादी के बाद जल्द से जल्द बच्चे पैदा करें.

ऐसे देशों में इटली के अलावा तुर्की, रोमानिया, सिंगापुर, डेनमार्क, रूस, दक्षिण कोरिया, जापान, हांगकांग और स्पेन शामिल हैं. इटली में प्रति महिला फर्टिलिटी रेट 1.43 है  जो कि यूरोप के औसत फर्टिलिटी रेट 1.58 से काफी कम है. इसे देखते हुए इटली सरकार ने खासतौर पर नवविवाहित युवा जोड़ों को संबंध बनाने के लिए प्रोत्साहित करने की नीति बनाई है. ऊपर जिस विज्ञापन का जिक्र किया गया है, वह इसी प्रक्रिया का हिस्सा है. एक और मशहूर विज्ञापन है, ‘आगे बढ़ो इंतजार मत करो.’ इटली से इतर तुर्की सरकार ने युवा विवाहित जोड़ों को साल 2015 में बच्चा पैदा करने पर ईनाम देने की घोषणा की गई थी. पहला बच्चा पैदा होने पर 130 डॉलर, दूसरे बच्चे पर 170 डॉलर और तीसरा बच्चा पैदा होने पर 260 डॉलर का इनाम दिया जाता है.

राष्ट्रपति एर्दोगान का मकसद है कि हर परिवार में कम से कम तीन बच्चे जन्म लें. इसके तहत तुर्की में मां बनने वाली महिलाओं को फुल टाइम के वेतन पर पार्ट टाइम जॉब की सुविधा दी जाती है. जहां तक दुनिया में सबसे कम फर्टिलिटी रेट का सवाल है तो वह सिंगापुर की महिलाओं की है. यहां प्रति महिला फर्टिलिटी रेट केवल 0.81 बच्चा है. इसको ध्यान में रखकर कई साल पहले 9 अगस्त 2012 को सिंगापुर सरकार ने ‘नेशनल नाइट’ का आयोजन किया था. इसका मकसद जोड़ों को संबंध बनाने के लिए प्रेरित करना था. इसके तहत सरकार ने किराये के लिए उपलब्ध छोटे वन बेडरूम अपार्टमेंट की भी सीमा तय कर दी है ताकि लोग साथ रहने और परिवार बनाने के बारे में सोचें.

सिंगापुर की सरकार हर साल ऐसे प्रोत्साहन कार्यक्रमों में 1.6 अरब डॉलर खर्च करती है,जिसका मकसद लोगों को संबंध बनाने के लिए प्रोत्साहित करना होता है. महिलाओं की कम फर्टिलिटी का शिकार रोमानिया भी है. लेकिन रोमानिया चूंकि गरीब मुल्क है इसलिए वह अपने लोगों को ज्यादा बच्चा करने के लिए कोई प्रोत्साहन राशि नहीं देता. हां, वह इसका प्रयास दूसरे तरीके से करता है. रोमानिया सरकार ने बच्चे न पैदा करने वाले दंपतियों पर भारी भरकम टैक्स थोप दिया है. जो दंपति बच्चा पैदा कर सकने के लायक होते हैं, फिर भी वे बच्चा नहीं पैदा करते, उन पर रोमानिया की सरकार 20 फीसदी का इनकम टैक्स लगाती है. रोमानिया सरकार का इस संबंध में साफ तौरपर कहना है, ‘अगर आप देश को भविष्य में काम करने के लिए कामगार नहीं दे रहे तो डॉलर दें.’ इस कानून के अलावा रोमानिया सरकार ने दंपतियों के संबंध में और भी कई कड़े कानून लगा दिये हैं. मसलन- यहां बिना बच्चों वाले कपल को बहुत मुश्किल से तलाक मिलती है.

एक समय में दुनिया की दूसरी महाशक्ति रहा रूस भी कम प्रजनन दर की समस्या से गुजर रहा है. रूस में इस प्रजनन दर के कम होने के कई कारण है, उनमें सबसे बड़ा कारण महिलाओं का बच्चा पैदा करने के प्रति रूझान का न होना भी है. इसीलिए करीब 14 साल पहले साल 2007 में रूस सरकार ने 12 सितंबर को गर्भधारण दिवस घोषित कर दिया था. इस दिन रूस में पूरी तरह से वैसी ही छुट्टी होती है, जैसे सोवियत संघ के दिनों में 1 मई मजदूर दिवस को हुआ करती थी, मतलब पूरी तरह से शटडाउन. इस छुट्टी के पीछे मकसद इस दिन लोगों को संबंध बनाने के लिए प्रेरित करना है. रूस में जो महिलाएं इस दिन के ठीक नौ माह बाद बच्चे को जन्म देती हैं, उन्हें एक फ्रिज उपहार में दिया जाता है. हालांकि यह तो दावे से नहीं कहा जा सकता कि इस योजना के बाद रूस में प्रजनन दर बढ़ी है. पर हां, बच्चे पैदा करने के प्रति रूसियों ने एक सजगता और कमिटमेंट तो जरूर आया है.

कम प्रजनन दर की समस्या से डेनमार्क जैसा देश भी जूझ रहा है. इसलिए वह भी अपने युवा जोड़ों को शादी के तुरंत बाद बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित करता है. डेनमार्क में सरकार के इन प्रयासों को इसलिए सफल माना जा सकता है क्योंकि 10 साल पहले के मुकाबले अब डेनमार्क में प्रजनन दर बढ़ गई है. 2015 के बाद डेनमार्क की महिलाओं का फर्टिलिटी रेट 1.73 बच्चे हो गया है, जो कि पहले से .58 तक बेहतर हुआ है. डेनमार्क में सिर्फ सरकारी स्तर पर ही नहीं प्राइवेट स्तर पर भी प्रजनन दर को प्रोत्साहित करने की कोशिश की जाती है. कुछ साल पहले एक ट्रैवल कंपनी ने युवाओं को एक विशेष ऑफर दिया था. इसके तहत अगर उस ट्रैवल कंपनी से लिए गए टूर पैकेज के दौरान कोई महिला गर्भधारण करती है तो कंपनी की ओर से उसके बच्चे की तीन साल तक की तमाम जरूरतें यह कंपनी बिल्कुल मुफ्त में मुहैय्या करायेगी.

प्रजनन दर से जूझ रहा दक्षिण कोरिया भी हर महीने के तीसरे बुधवार को फैमिली डे के रूप में मनाता है. इसके तहत दक्षिण कोरिया के तमाम सरकारी अधिकारी शाम 7 बजे लाइट बंद कर देते हैं. जिसका संदेशा विवाहित जोड़ों के लिए यह होता है कि वे शारीरिक संबंध बनाएं. दक्षिण कोरिया के लिए भी गिरती प्रजनन दर भविष्य के लिए बड़ा झटका है. दक्षिण कोरिया में महिला फर्टिलिटी रेट केवल 1.25 है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कोरिया सरकार जल्द से जल्द अपने दंपतियों को विशेषकर युवा दंपतियों को प्रोत्साहित न कर पायी तो यह फर्टिलिटी रेट और नीचे गिर जायेगी, जिसका नतीजा कोरिया के संदर्भ में एक बड़े मानव संसाधन संकट के रूप में सामने आयेगा. दक्षिण कोरिया में सरकार फैमिली लाइफ को प्रमोट करने के लिए हर तरह के कदम उठा रही है. जिन लोगों के पास एक से ज्यादा बच्चे हैं, उन्हें कई तरह के नकद प्रोत्साहन राशि दी जाती है.

कोरिया जैसा ही हाल जापान का भी है. साथ ही यह भी कह सकते हैं कि जापान भी कोरिया की ही तरह अपने यहां प्रजनन दर बढ़ाने के लिए कई तरह के उपाय आजमा रहा है. वैसे जापान की यह समस्या तात्कालिक नहीं है, सन 1975 से ही वह इस तरह की समस्या से जूझ रहा है. इसलिए वह दंपतियों को ज्यादा से ज्यादा बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित भी तभी से कर रहा है. बावजूद इसके अभी तक उसे बड़ी सफलता नहीं मिली. वर्ष 2010 में यूनिवर्सिटी ऑफ टीसुकुबा के छात्रों ने योतारो बेबी रोबोट बनाया था जिसका मकसद युवा दंपतियों में मां-बाप बनने की इच्छाओं को विस्तारित करना था. यूरोप के दूसरे प्रजनन दर से जूझ रहे देशों जैसा हाल स्पेन का भी है. स्पेन के युवा दंपति बच्चे पैदा करने में कुछ खास रुचि नहीं जता रहे. इसके भयानक नतीजों को समझते हुए स्पेन की सरकार ने साल 2017 में एक नयी प्रशासनिक व्यवस्था को जन्म दिया, जिसके तहत स्पेशल कमिश्नर को नियुक्त किया गया. यह कमिश्नर इस बात का पता लगायेगा कि आखिर स्पेनी युवा शारीरिक संबंध बनाने में रूचि क्यों नहीं ले रहे? इसको समझकर ही स्पेन इस संबंध में किसी बड़े कदम के बारे में सोचेगा. उम्मीद है इस साल के अंतत स्पेन सरकार अंतिम तौरपर इस नतीजे पर पहुंच जायेगी कि बच्चे पैदा करने के प्रति स्पेनियों का रूझान इतना कमजोर और नकारात्मक क्यों हैं?

एशिया का एक और देश हांगकांग भी अपने युवाओं से परेशान है कि वे शादी, सेक्स और संतानोत्पत्ति के प्रति इतने उदासीन क्यों रहते हैं? गौरतलब है कि हांगकांग में महिला फर्टिलिटी की दर महज 1.18 बच्चा है. प्रजनन दर की इस कमी के चलते हांगकांग में बूढ़े हो रहे लोगों की जगह लेने वाले नहीं हैं. इसी कारण साल 2013 से हांगकांग सरकार ने ऐसे जोड़ों को नगद ईनाम देने की घोषणा की, जो शादी के तुरंत बाद बच्चा पैदा करने में रूचि रखते हैं.

Winter Special: बच्चों को शाम के नाश्ते में दें भाकरी पिज़्ज़ा

शाम होते ही बच्चों को भूख लग आती है और वे कुछ खाने की डिमांड करने लगते हैं. यूँ तो आजकल के बच्चों को मैगी, नूडल्स, पास्ता, पिज़्ज़ा जैसे फ़ास्ट फ़ूड ही भाते हैं परन्तु इन्हें हर समय बच्चों को नहीं खिलाया जा सकता क्योंकि इनमें पौष्टिकता तो न के बराबर होती ही है साथ ही प्रिजर्वेटिव का प्रयोग किये जाने से ये स्वास्थ्य के लिए हानिकारक भी होते हैं. इसलिए यदि अपने पारम्परिक खाद्य पदार्थों को ही थोड़ा सा ट्विस्ट करके बनाया जाए तो बच्चे उन्हें रुचि पूर्वक खायेंगे.

भाकरी एक गुजराती खाद्य पदार्थ है जिसे गुजराती व्यापार के लिए जाते समय अपने साथ ले जाते थे क्योंकि गेहूं के आटे से कम तेल में धीमी आंच पर बनाई जाने के कारण यह लंबे समय तक खराब नहीं होती. भाकरी को ही थोड़ा सा ट्विस्ट देकर बहुत ही हैल्दी भाकरी पिज़्ज़ा बनाया जा सकता है. भाकरी पिज़्ज़ा बनाने के लिए हम पहले भाकरी बनायेंगे और फिर उससे पिज़्ज़ा बनाकर बच्चों को सर्व करेंगे तो आइए जानते हैं इस नई हैल्दी रेसिपी को कैसे बनाते हैं-

कितने लोंगों के लिए 4
बनाने में लगने वाला समय 40 मिनट
मील टाइप वेज

सामग्री (भाकरी के लिए)

गेहूं का आटा 1 कप
बेसन 1 टेबलस्पून
सूजी 1 टेबलस्पून
अजवाइन 1/4 टीस्पून
नमक 1/4 टीस्पून
मलाई 1 कप
कसूरी मैथी 1 टीस्पून
तिल 1 टीस्पून
तेल सेकने के लिए

सामग्री (पिज़्ज़ा के लिए)

शिमला मिर्च 1
प्याज 1
टमाटर 1
उबले कॉर्न 1 टीस्पून
नमक 1/4 टीस्पून
मोजरेला चीज़ 2 कप किसा
चिली फ्लैक्स 1/2 टीस्पून
पिज़्ज़ा सॉस 1 टीस्पून
मक्खन 2 टीस्पून

विधि

भाकरी बनाने के लिए भाकरी की समस्त सामग्री को एक बाउल में डालकर अच्छी तरह मिलाएं. अब इसमें 1 टीस्पून तेल मिलाएं और धीरे धीरे पानी मिलाते हुए पूड़ी से भी अधिक कड़ा आटा गूंथकर 15 मिनट के लिए ढककर रख दें. अब तैयार आटे को चार बराबर भागों में बांटें और चकले पर पिज़्ज़ा जैसी मोटी सी रोटी बेलें. इसे तवे पर मामूली सा तेल लगाकर एकदम धीमी आंच पर साफ कपड़े से दबाकर सेंक लें. इसी प्रकार सारी भाकरी तैयार कर लें.

पिज़्ज़ा बनाने के लिए सभी सब्जियों को लम्बाई में काट लें. अब एक पैन में बटर डालकर प्याज हल्का सा सॉते कर लें. अब शिमला मिर्च, टमाटर, कॉर्न और नमक डालकर 1 मिनट तक तेज आंच पर चलाएं और गैस बंद कर दें. अब इसमें पिज़्ज़ा सॉस मिलाएं. तैयार भाकरी पर बटर लगाकर तैयार टॉपिंग के मिश्रण को अच्छी तरह फैलाएं. ऊपर से किसा चीज और चिली फ्लैक्स डालकर प्रीहीटेड अवन में 10 मिनट बेक करके सर्व करें.

नोट-मोजरेला चीज के स्थान पर आप चीज क्यूब का प्रयोग कर सकतीं हैं. अवन न होने की स्थिति में पैन अथवा कढ़ाई में भी ढककर धीमी आंच पर बेक किया जा सकता है.

सर्दियों में होने वाली परेशानियों का ये है आसान इलाज

सर्दी के मौसम में खांसी, जुकाम, गले की खराश, जैसी समस्याएं आम हैं. खराश की समस्या को जल्दी ठीक करना जरूरी है, नहीं तो ये खांसी का रूप ले लेती है. इस खबर में हम आपको बताने वाले हैं कि सर्दी, खांसी, खराश जैसी समस्याओं का दवाइयों के बिना, घरेलू नुस्खों की मदद से कैसे इलाज कर सकते हैं.

इसमें एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं. गले के इंफेक्शन और दर्द में अदरक काफी लाभकारी होता है. इसके लिए आप एक कप में गर्म पानी उबाल लें. उसमें शहद डाल कर मिलाएं और दिन में दो बार पिएं. कुछ ही दिनों में आपको अंतर समझ आएगा.

1. नमक पानी से करें गरारा

गले की खराश में नमक के पानी का गरारा काफी लाभकारी होता है. खराश के कारण गले में सूजन आ जाती है. गुनगुने पानी और नमक का गरारा करने से सूजन में काफी आराम मिलता है. इसे दिन में 3 बार करने से आपको जल्दी ही आराम मिलेगा.

2. मसाला चाय

लौंग, तुलसी और काली मिर्च को पानी में डाल कर उबाल लें. इसके बाद इसमें चायपत्ती डालकर चाय बना लें. सर्दियों में नियमित तौर पर इसका सेवन करें. आपको सर्दी संबंधित परेशानियां नहीं होंगी.

3. अदरक

अदरक को पानी में डाल कर उबाल  लें. थोड़ी देर तक उसे उबालें ताकि अदरक का अर्क पानी में आ जाए. इसके बाद पानी में शहद मिला कर पिएं. सर्दी से होने वली परेशानियों में आपको काफी आराम मिलेगा.

4. लहसुन

लहसुन इंफेक्शन पैदा करने वाले जीवाणुओं को मार देता है. इसलिए गले की खराश में लहसुन बेहद फायदेमंद है. उपचार के लिए गालों के दोनों तरफ लहसुन की एक-एक कली रखकर धीरे-धीरे चूसते रहें.

5. भाप लेना

सर्दियों में होने वाली परेशानियों में भाप लेना काफी कारगर होता है. किसी बड़े बर्तन में गुनगुना पानी कर लें और तौलिया से पानी और चेहरा ढक कर भाप लें. आराम मिलेगा.

पगली: आखिर क्यूं महिमा अपने पति पर शक करती थी- भाग 3

पहली मुलाकात के करीब 3 सप्ताह बाद एक दोपहर अंजलि ने औफिस से

महिमा के यहां फोन कर के बातें करीं, ‘‘मैं तुम से एक प्रार्थना कर रही हूं. तुम उस का बुरा न मानना, प्लीज.’’

अंजलि की आवाज में नाराजगी व शिकायत के भाव पढ़ कर महिमा मुसकराने लगी, ‘‘दीदी, आप की कैसी भी बात का मैं बुरा कैसे मान सकती हूं. आप प्रार्थना न करें बल्कि मु?ो आदेश दें,’’ महिमा ने भावुक लहजे में जवाब दिया.

‘‘महिमा, तुम मेरे पीछे दिन में मेरी मां से मिलने मत जाया करो, प्लीज.’’

‘‘ऐसा मत कहिए, दीदी. उन से मिल कर मेरा दिल बड़ा अच्छा महसूस करता है.’’

‘‘देखो, उन की तबीयत ठीक नहीं रहती है. दोपहर को उन्हें आराम न मिले, तो उन का सिर दर्द करने लगता है. तुम प्लीज…’’

‘‘नहीं दीदी, आप उन से मिलने की मेरी खुशी मु?ा से मत छीनिए. मैं आगे से और कम देर बैठा करूंगी, पर बिलकुल न जाने का आदेश आप मु?ो मत दीजिए.’’

‘‘नहीं, तुम्हें उन से मिलने नहीं जाना है. उन्हें तुम्हारी बातें पसंद नहीं आती हैं,’’ अंजलि की आवाज गुस्से से भर उठी.

‘‘मैं उन से भी गलत नहीं बोली हूं, दीदी,’’ महिमा ने विरोध प्रकट किया.

‘‘तुम मेरी शादी की बातें करती हो… सौरभ और मेरे बारे में सवालजवाब करती हो, मेरे भैयाभाभी को लानतें देती हो, तो उन का मन

दुखी और परेशान होता है. वे तुम से मिलना

नहीं चाहती हैं और तुम मेरे पीछे मेरे घर नहीं जाओगी, बस.’’

अंजलि के सख्त स्वर के ठीक उलट महिमा ने मीठे स्वर में जवाब दिया, ‘‘दीदी, मैं आप की बात नहीं मान सकती क्योंकि मु?ो भी खुशी और शांति से जीने का अधिकार है. मु?ो आप की मां व आप से मिल कर मन की शांति मिलती है. जैसे आप मेरे कहने भर से सौरभ से मिलना बंद नहीं कर सकतीं, वैसे ही मैं भी आप के घर जाना नहीं बंद करूंगी. पत्नी पति की प्रेमिका को हमेशा से ?ोलती आईर् है, तो प्रेमिका को भी पत्नी को सहन करने की आदत डालनी चाहिए. अब चाह कर भी मु?ो अपनी व अपनी मां की जिंदगी से काट नहीं सकेंगी क्योंकि मैं दूर हो कर पागल हो जाऊंगी. आप ऐसा करने की कोशिश न खुद करना, न सौरभ से कराना, प्लीज.’’

अंजलि उस पर गुस्से से चिल्लाने लगी,

तो बड़ी शांति के साथ महिमा ने संबंधविच्छेद

कर दिया.

उस शाम सौरभ गुस्से से भरा घर में घुसा क्योंकि अंजलि ने महिमा के खिलाफ उस के अंदर खूब चाबी भरी थी.

‘‘तुम अंजलि के घर जाना आज से बंद कर दोगी,’’ शयनकक्ष में प्रवेश करते ही सौरभ ने उसे अपना आदेश सुना दिया क्योंकि अंजलि और उस की मां तुम से मिलना नहीं चाहती हैं.’’

‘‘आप उन के कहे में आ कर गुस्सा मत होइए. वे दोनों बहुत अच्छी हैं. मैं उन्हें कल जा कर मना लूंगी.’’

‘‘नहीं, तुम उन के घर मत जाना,’’ सौरभ चिल्ला पड़ा.

‘‘मत चिल्लाइए मु?ा पर,’’ महिमा रोंआसी हो उठी, ‘‘मु?ो अंजलि दीदी से सीखते रहना है कि आप के दिल की रानी बने रहने के लिए मेरा व्यवहार कैसा हो… मु?ा में क्या गुण हों.’’

‘‘तुम जैसी हो, अच्छी हो. बस, उन के घर…’’

‘‘मैं उन से मिलती नहीं रही, तो पिछड़ जाऊंगी और आप को खो दूंगी.’’

‘‘बेकार की बातें मत करो, महिमा,’’ सौरभ का गुस्सा फिर भड़का.

‘‘आप मेरे डर को क्यों नहीं सम?ा रहे हैं. मैं बांट तो रही हूं आप को अंजलि दीदी के साथ क्या बदले में वे 1-2 घंटे मु?ो सहन नहीं कर सकतीं,’’ महिमा उठ कर सौरभ की छाती से जा लगी और फिर किसी बच्चे की तरह से रोने लगी.

सौरभ उसे और नहीं डांट सका. उस ने

धीमे से उसे सम?ाने कीकोशिश करी पर वह असफल रहा क्योंकि महिमा की आंखों में प्यार का नशा उस की पलकें बो?िल करने लगा था. जल्द ही महिमा के बदन की मादक महक ने उस के जेहन से अंजलि की शिकायतों व नाराजगी को दूर भगा दिया.

अगले दिन औफिस जाते समय सौरभ ने महिमा से अंजलि के घर न जाने की बात कही, तो वह चुप रह कर रहस्यमयी अंदाज में बस मुसकराती रही.

दोपहर के समय वह अंजलि की मां सावित्री से मिलने पहुंच गई. उस की आवाज पहचान कर सावित्री ने दरवाजा खोलने से ही इनकार कर दिया.

‘‘तुम अपने घर लौट जाओ. मु?ो तंग करने मत आया करो,’’ सावित्री की आवाज में गुस्से के साथसाथ डर व घबराहट के भाव भी मौजूद थे.

‘‘आंटी, मैं तो आप से बस कुछ देर को हंसनेबोलने आती हूं. मु?ा से चिड़ने या डरने की आप को कोई जरूरत नहीं. अगर आप मु?ा से प्यार से मिलती रहेंगी, तो मैं कभी आप को कोई नुकसान पहुंचाने की सोचूंगी भी नहीं,’’ महिमा ने ऊंची आवाज कर के उन्हें आश्वस्त करने का प्रयास किया.

‘‘मु?ो नुकसान पहुंचाने की धमकी दोगी, तो मैं पुलिस बुला लूंगी.’’

‘‘अगर आप ने मु?ो अंदर न आने दिया, तो मैं गुस्से से पागल हो जाऊंगी, आंटी. फिर मु?ो होश नहीं रहेगा कि मैं ने अपनी जान ले ली या किसी और की.’’

‘‘तुम पूरी पागल हो. चली जाओ यहां से.’’

‘‘हां, मैं पागल हूं, और वह भी तुम्हारी बेटी के कारण जो मु?ा से मेरे पति को छीनना चाहती है. मु?ो यों तंग कर के मेरा अनादर कर के आप ठीक नहीं कर रही हैं, आंटी,’’ महिमा ने उन के घर की घंटी बजाने के साथसाथ दरवाजा भी पीटना शुरू कर दिया.

सामने व ऊपरनीचे के फ्लैटों के दरवाजे खुलने लगे और औरतें बाहर आ

कर तमाशा देखने लगीं. महिमा ने किसी से वार्त्तालाप आरंभ करने की कोई कोशिश नहीं करी, तो वे सावित्री से मामले को सम?ाने की कोशिश में बातें करने लगीं.

‘‘इस पगली को यहां से जाने को कहो. यह मु?ो मारने आई है,’’ अंदर से आती सावित्री की आवाज से साफ जाहिर हुआ कि वे रो रही हैं.

‘‘आप बेकार मु?ा से डर रहीं, आंटी. सौरभ के कारण मेरे आप के घर से संबंध हमेशा बने रहेंगे. हमें प्यार से मिल कर रहना चाहिए,’’ महिमा ने उन्हें सब के सामने बड़ी मीठी, कोमल आवाज में फिर सम?ाया.

‘‘नहीं, हमें नहीं रखना है तुम दोनों से कोई संबंध.’’

‘‘ऐसी गलत बात मुंह से न निकालें, आंटी. आप की बेटी ऐसा करने को कभी तैयार नहीं होगी. अच्छा, अभी मैं जाती हूं. कल आप

से मिलने जरूर आऊंगी और आप के सारे गिलेशिकवे दूर कर दूंगी,’’ महिमा ने पड़ोसिनों की तरफ मुसकरा कर देखा और फिर इमारत से बाहर आने के लिए सीढि़यां उतरने लगी.

उस रात सौरभ काफी देर से घर लौटा. महिमा को वह बड़ा उदास सा नजर आया. वह सीधा शयनकक्ष में गया और महिमा उस के पीछेपीछे वहां पहुंच गई, ‘‘मु?ो प्लीज, डांटना मत,’’ उस के कुछ बोलने से पहले ही महिमा ने उस के सामने हाथ जोड़े और घबराए लहजे में आगे बोलने लगी, ‘‘मैं ने कुछ गलत बात सावित्री आंटी से नहीं कही. वे अकारण मु?ा से डर रही थीं. मैं कल ही अंजलि दीदी से माफी मांगने आप के साथ चलूंगी.’’

कुछ देर खामोशी से उसे घूरने के बाद सौरभ ने सोचपूर्ण लहजे में टिप्पणी करी, ‘‘तुम बहुत चालाक हो… या एकदम बुद्धू.’’

‘‘अधिकतर लोग तो मु?ो पगली सम?ाते हैं… आप के प्यार में मैं पागल हूं भी और इसीलिए मु?ो डांटनाडपटना मत, प्लीज. मैं अंजलि दीदी से माफी…’’

सौरभ ने उस के मुंह पर हाथ रख कर उसे चुप किया और थके से स्वर में बोला, ‘‘अंजलि को भूल जाओ, महिमा. उस ने आज मु?ा से सारे रिश्ते तोड़ लिए हैं. अपनी मां की सुखशांति की खातिर वह मु?ा से और विशेषकर तुम से भविष्य में कैसा भी संबंध रखने को तैयार नहीं है.’’

‘‘ऐसा कैसे हो सकता है. मैं उन्हें सम?ाऊंगी… मनाऊंगी. आप को दुख देने का उन्हें कोई हक नहीं है. हम अभी उन से मिलने चलते हैं,’’ महिमा फौरन परेशानी भरी उत्तेजना का शिकार बन गई.

‘‘पगली,’’ अपनी उदासी को भूल कर सौरभ मुसकराने को मजबूर हो गया.

महिमा की आंखों में आंसू छलक आए तो वह आगे बढ़ कर सौरभ की छाती से लग गई.

‘‘मु?ो आंसू बहाती महिमा को नहीं देखना है. मैं तो हनीमून वाली हंसमुख, चंचल, शोख, सैक्सी महिमा के साथ बिलकुल नई प्यारभरी जिंदगी की शुरुआत करने का इच्छुक हूं, पगली.’’

‘‘मैं तो वैसी ही हूं, पर अंजलि दीदी की आप के जीवन में मौजूदगी के कारण जरा पगला गई थी.’’

‘‘वह अध्याय अब समाप्त हुआ, महिमा. तुम्हारा पागलपन कारगर साबित हुआ. हमें अपने प्रेमसंबंध से खुशी कम और दुख ज्यादा मिलने लगा, तो उसे समाप्त करने को हम मजबूर हो गए. मेरी पगली जीत गई और इस जीत से मैं सचमुच बड़ी शांति… बड़ी खुशी महसूस कर रहा हूं,’’ सौरभ के बाजुओं की पकड़ महिमा के इर्दगिर्द मजबूत हुई, तो वह रहस्यमयी अंदाज में मुसकराती हुई उस की आंखों पर बारबार मधुर चुंबन अंकित करने लगी.

अभिनेत्री कावेरी प्रियम से जाने बुजुर्गो के अकेलापन का सीधा हल, कैसे, पढ़े इंटरव्यू

अभिनेत्री कावेरी प्रियम झारखंड के बोकारों की है. उन्हें बचपन से ही अभिनय का शौक रहा. उनके पिता सेल (स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड) में प्रबंधक के रूप में काम करते हैं, उनके भाई रितेश आनंद ब्रिटिश टेलीकॉम में वित्तीय विश्लेषक हैं. कावेरी के परिवार में कोई भी एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री से नहीं है, फिर भी उनका साथ हमेशा रहा है. स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, वेल्लोर से अपना ग्रेजुएशन पूरा किया. कावेरी ने एक्टिंग का कोर्स दिल्ली के इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव एक्सीलेंस से वर्ष 2016 में किया था. पढ़ाई पूरी करने के बाद वह कैरियर बनाने के लिए मुंबई आ गईं और कई प्रिंट शूट और विज्ञापन करके एक मॉडल के रूप में अपना करियर शुरू किया.

टेलीविजन पर कैरियर की शुरुआत उन्होंने साल 2015 में नागिन सीजन 2 से की थी. उस शो में उन्होंने एक छोटी सी भूमिका निभाई थी. इस शो के बाद उन्होंने सीरियल “परदेस में है मेरा दिल” में काम मिला. साल 2019 में, उन्होंने हिंदी टीवी सीरियल “ये रिश्ते हैं प्यार के” में कुहू माहेश्वरी की भूमिका निभाई थी, जिसमे आलोचकों ने उनके काम को काफी सराहा. इसके बाद उन्हें कई शोज मिले, हर तरह की भूमिका पसंद करने वाली कावेरी अब सोनी सब की शो ‘दिल दिया गल्लां’ में अमृता ब्रार की मुख्य भूमिका में है. शो और अपनी  जर्नी के बारें में उन्होंने खास गृहशोभा के लिए बात की,  आइये जानते है उनकी जर्नी कैसी रही.

 

रिलेटेबल कहानी

कावेरी के पेरेंट्स झाड़खंड के बोकारो में रहते है और उन्होंने स्कूल की पढ़ाई वही से की है. आज के हालात पर बनी इस शो में काम करने की वजह के बारें में पूछने पर कावेरी बताती है कि आज अधिकतर घरों में बच्चे पेरेंट्स को छोड़कर बाहर या विदेश काम करने या पढने चले जाते है, ऐसे में उनके पेरेंट्स अकेले रह जाते है. धीरे-धीरे उनके बीच दूरियां बढती जाती है, जेनरेशन  गैप बढ़ता जाता है. माता-पिता अपने दिल की बात किसी से शेयर नहीं कर पाते. उनमे डिप्रेशन और अकेलापन का विकास हो जाता है. इतना ही नहीं मैं इस भूमिका से खुद को हमेशा रिलेटेबल पाती हूँ, क्योंकि मैं भी अपने पेरेंट्स को छोड़कर मुंबई आ गई हूँ. मुझे उनकी भावनाओं की समझ है. चरित्र को निभाना भी मुझे अच्छा लग रहा है, क्योंकि इसमें मैं मॉडर्न लड़की हूँ, लेकिन गुजराती पारंपरिक परिवार से हूँ, ऐसी परिस्थिति में भी मैं बहुत ग्राउंडेड हूँ. मैं इससे खुद को बहुत अच्छी तरीके से जोड़ पाती हूँ, क्योंकि मैं रियल लाइफ में प्रैक्टिकल होने के साथ-साथ पारंपरिक चीजों को भी फोलो करती हूँ. दोनों शेड मुझे बहुत पसंद है.

रिश्तों में होनी चाहिए बातचीत

आज के एकाकी परिवार में बुजुर्गों को एक उम्र के बाद सम्हालने वाले कम होते है और विदेशों की तरह यहाँ उतनी सुविधा नहीं है कि एक बुजुर्ग अकेले शांतिपूर्वक सुरक्षित रह सकें और उनकी देखभाल सरकार या किसी संस्था के द्वारा किया जाता हो. देखभाल की व्यवस्था होने पर उन्हें अकेले रहने में किसी प्रकार की समस्या नहीं होती, पर यहाँ ऐसा नहीं है और बुजुर्गो की देखभाल कमोवेश बच्चों को ही करना पड़ता है. कावेरी कहती है कि रिश्ते को अच्छा बनाए रखने के लिए दो लोगों के बीच में बातचीत होने की बहुत जरुरत है, क्योंकि भाई-बहन, पति-पत्नी, या किसी भी रिश्ते में एक दूसरे की खैर खबर लेने की जरुरत होती है, इससे व्यक्ति दूर रहकर भी एक दूसरे से जुड़ा रह सकता है. इसे अपनाने की जरुरत है, क्योंकि भविष्य में आगे बढ़ने के लिए कोई भी कही जा सकता है, लेकिन परिवार भी इग्नोर न हो, इसका ख्याल उन्हें रखना है. मैं कितनी भी व्यस्त क्यों न रहूं, मैं अपने परिवार और दोस्तों से बात करने का समय अवश्य निकाल लेती हूँ और ये मुझ पर ही निर्भर करता है. इसलिए ये सभी बच्चों पर अधिक निर्भर करता है, वैसे ही पेरेंट्स को भी बच्चों को समझना है, वे अधिक एक्सपेक्टेशन बच्चों से न रखे, तभी वे खुश रह सकते है. ये सही है कि बाहर जाने वाले बच्चों के लिए लगातार एक सपोर्ट की जरुरत होती है. पहले विदेश जाने पर किसी को भी परिवार की खबर लेना मुश्किल होता था, पर आज ये नहीं है, तकनीक ने अपना योगदान दिया है. इसमें सब सही हो सकता है, एफर्ट दोनों तरफ से होनी चाहिए.

 

मिली प्रेरणा

फिल्मों में आने की प्रेरणा के बारें में पूछने पर कावेरी का कहना है कि बचपन से ही मुझे एक्टिंग का काफी शौक रहा है. स्कूल कॉलेज में मैंने काफी नाटकों और डांस में भाग लिया है. बडी हुई, तो एक्स्ट्रा कर्रिकुलम भाग लेना भी अच्छा लगता था, इससे मेरे अंदर अभिनय की तरफ बढ़ने की प्रेरणा मिली. सोसाइटी में किसी भी फेस्टिवल पर मैं आसपास के सबको बुलाकर स्क्रिप्ट लिखती थी और स्टेज पर परफॉर्म करती थी. ये खेल-खेल में निकल जाता था. तब मैंने नहीं सोचा नहीं था कि एक्टिंग मेरा प्रोफेशन बनेगा, क्योंकि परिवार में एजुकेशन को अधिक महत्व दिया जाता था, पढाई को पूरा करना मेरे लिए जरुरी था. मैं उसे पूरा कर रही थी और साथ में दिल्ली में नाटक देखा करती थी. एक जगह मैंने शो के लिए ऑडिशन दिया था, जो मुंबई में होना था, मैं चुन ली गई और उस शो के लिए मुंबई आई, लेकिन शो शुरू नहीं हुआ, पर मैंने समय न गवाकर मुंबई आकर एक्टिंग का कोर्स ज्वाइन कर लिया, क्योंकि मुझे लग रहा था कि मैं अभिनय के क्षेत्र में कुछ कर सकती हूँ. मेरा पैशन एक्टिंग ही है और इसमें मुझे समय देने और मेहनत करने की जरुरत है.

परिवार का सहयोग 

कावेरी का आगे कहना है कि परिवार ने हमेशा सहयोग दिया है, पहले उनके मन में डाउट तो था कि मैं कैसे मुंबई जाकर सरवाईव करुँगी, लेकिन उन्होंने ही मुझे मुंबई छोड़ने आये और सारा इंतजाम कर वापस गए. मैं इस बात में खुद को लकी मानती हूँ.

संघर्ष 

कावेरी कहती है कि मेहनत की बात करें. तो वह मेरे लिए बहुत अधिक ही था, शुरू में मैंने एक दिन में 20 से 25 ऑडिशन दिए है. हर दिन ऑडिशन के लिए जाती है, ऑडिशन देकर ही मैंने बहुत कुछ सीखा है. कैसे रिलेटेबल ऑडिशन दिया जाता है, उनकी पसंद क्या होती है, आदि को समझने में समय लगा, लेकिन मैं उन दिनों थिएटर करती रहती थी, इससे समय का पता अधिक नहीं चला. असल ब्रेक वर्ष 2018 में ‘ये रिश्ते है प्यार के’ से मिला. मैने दो साल तक संघर्ष किया है. हर स्टेज का अलग संघर्ष रहता है. पहले लोगों को जानना, जान जाने पर काम का मिलना, और अंत में खुद के अनुसार काम का मिल पाना. ऑफ़र आते है, पर मुझे करना नहीं है, तो ना बोलना पड़ता है. ना कहने के बाद पसंद का काम मिलना, इसमें संघर्ष रहता है. मुझे अब अच्छा काम मिला.

नहीं है कोई दायरा

मैंने कभी खुद को किसी दायरे में नहीं बाँधा, अलग-अलग एक्टिंग करनी है, बस यही सोच हमेशा रही है. किसी भी फिल्म, वेब या टीवी शो हर में काम करने की इच्छा है. वेब में इंटिमेट सीन्स होते है, पर ये कहानी पर निर्भर होता है.  मैंने हमेशा फॅमिली शो करने की कोशिश की है. मैं इंटिमेट सीन्स को गलत नहीं कहती. ये हर कलाकार पर निर्भर करता है कि वह कौन सी शो करे और किसे ना कहे. मैं एक कलाकार हूँ और हर एक्टर डायरेक्टर के साथ काम करना चाहती हूँ, लेकिन अमिताभ बच्चन मेरे ड्रीम को-स्टार है.

दिल्ली से मुंबई आकर खुद को सेटल्ड करना कावेरी के लिए आसान नहीं था, लेकिन उन्हें करना क्या है, इसकी जानकारी थी, जिससे उन्हें अधिक इधर-उधर भटकना नहीं पड़ा. बाहर से आने पर स्ट्रेस लेवल हमेशा हाई रहता है, ऐसे में खुद को स्ट्रेस मुक्त रखने के लिए कावेरी ने हमेशा परिवार का सहारा लिया. वह कहती है कि तकनीक का सहारा आज अधिक है, ऐसे में तनाव होने पर एक वेब सीरीज उठा कर पूरा देख लेती हूँ, ताकि बाकी कुछ भी भूल जाऊं, इसके अलावा मैडिटेशन करती हूँ. मेरी इच्छा है कि दर्शक मुझे देंखे और उनका प्यार मेरे लिए हमेशा बनी रहे.

फिल्म समीक्षाः ‘‘पठान: बेहतरीन एक्शन, बेहतरीन लोकेशन,बाकी सब शून्य…’’

रेटिंग: डेढ़ स्टार

निर्माता: आदित्य चोपड़ा

पटकथा लेखक: श्रीधर राघवन

निर्देषक: सिद्धार्थ आनंद

कलाकार: ष्षाहरुख खान,जौन अब्राहम,दीपिका पादुकोण, आषुतोष राणा,डिंपल कापड़िया, सिद्धांत घेगड़मल,गौतम रोडे,गेवी चहल,षाजी चैहान, दिगंत हजारिका, सलमान खान व अन्य.

अवधि: दो घंटे 26 मिनट

‘ये इश्क नही आसान’, ‘दुनिया मेरी जेब में’,‘शहंशाह ’ जैसी फिल्मों के निर्माता बिट्टू आनंद के बेटे सिद्धार्थ आनंद ने बतौर निर्देषक फिल्म ‘‘सलाम नमस्ते’’ से कैरियर की षुरूआत की थी.उसके बाद उन्होने ‘तारा रम पम’,‘बचना ऐ हसीनों’,‘अनजाना अनजानी’,‘बैंग बैंग’ और ‘वाॅर’ जैसी फिल्मंे निर्देषित कर चुके हैं.सिद्धार्थ आनंद निर्देषित पिछली फिल्म ‘‘वार’’ 2019 में रिलीज हुई थी,जो कि आदित्य चोपड़ा निर्मित ‘वायआरएफ स्पाई युनिवर्स’ की तीसरी फिल्म थी.और लगभग साढ़े तीन वर्ष बाद  बतौर निर्देषक सिद्धार्थ आनंद नई फिल्म ‘‘पठान’’ लेकर आए हैं, जिसका निर्माण ‘यषराज फिल्मस’ के बैनर तले आदित्य चोपड़ा ने किया है. फिल्म ‘पठान’,‘वायआरएफ स्पाई युनिवर्स’ की चैथी फिल्म है.फिल्म ‘पठान’ पर ‘यषराज फिल्मस’के साथ ही इसके मुख्य अभिनेता षाहरुख खान ने भी काफी उम्मीदें लगा रखी हैं.2022 में ‘यषराज फिल्मस’ की सभी फिल्में बुरी तरह से असफल हो चुकी हैं.जबकि षाहरुख खान की पिछली फिल्म ‘‘जीरो’’ 2018 में प्रदर्षित हुई थी,जिसने बाक्स आफिस पर पानी तक नहीं मांगा था.फिल्म ‘पठान’ को तमिल व तेलगू में भी डब करके प्रदर्षित किया गया है.‘यषराज फिल्मस’ की यह पहली फिल्म है,जिसे आईमैक्स कैमरों के साथ फिल्माया गया है.

dipika

‘यषराज फिल्मस’ ने फिल्म ‘पठान’ का जब पहला गाना अपने यूट्यूब चैनल पर रिलीज किया था,उस वक्त से ही वह गाना और  फिल्म विवादों में रही है.उस वक्त बौयकौट गैंग ने दीपिका पादुकोण की भगवा रंग की बिकनी को लेकर आपत्ति दर्ज करायी थी.पर अफसोस की बात यह है कि फिल्म ‘पठान’ में भगवा रंग कुछ ज्यादा ही फैला है.फिल्म देखकर दर्षक की समझ में ेआता है कि भगवा रंग तो ‘आईएसआई’ के एजंटांे को भी हिंदुस्तान की तरफ खीच लेता है.

कहानीः

एक्षन प्रधान,देषभक्ति व जासूसी फिल्म ‘‘पठान’’ की कहानी के केंद्र में राॅ एजेंट फिरोज पठान (षाहरुख खान) और पूर्व ‘राॅ’ अफसर जिम्मी (जौन अब्राहम) और पाकिस्तानी खुफिया एजंसी की जासूस डाॅ. रूबैया मोहसीन (दीपिका पादुकोण) और पाकिस्तानी आईएसआई जरनल हैं.फिल्म की षुरूआत 5 अगस्त 2019 से होती है,जब कष्मीर से धारा 370 हटाए जाने की खबर से बौखलाया हुआ पाकिस्तानी सेना का जनरल अपनी मनमानी करते हुए पूर भारत को नेस्तानाबूद करने का सौदा जिम्मी से करता है. जिम्मी दक्षिण अफ्रीका के खतरनाक हथियार विक्रताओं से हथियार खरीदने का सौदा करता है.जहां पर पठान घायलअवस्था में बंदी है.फिर कहानी तीन साल के बाद षुरू राॅ के आफिस से षुरू होती है.जब एक खुफिया पुलिस अफसर (सिद्धांत घेगड़मल),राॅ की अफसर नंदिनी को सूचना देता है कि पठान की तस्वीर नजर आयी है.अब नंदिनी उस अफसर के साथ पठान से मिलने निकलती है.विमान में बैठने के बाद वह पठान की कहानी बताती है कि राॅ प्रमुख कर्नल लूथरा ( आषुतोष राणा ) राॅ के हर एजेंट को कुछ समझता नही है.एक दिन खबर मिलती है कि दुबई में हो रहे वैज्ञानिकों के सम्मेलन में भारत के दो वैज्ञानिक भी होंगे तथा मुख्य अतिथि भारत के राष्ट्पति है.कर्नल लूथरा भारत के राष्ट्पति की पूरी सुरक्षा की जिम्मेदारी लेते हैं.पठान अपनी टीम के साथ आतकंवादियों को पकड़ने की जिम्मेदारी लेता है.कर्नल लूथरा राष्ट्पति व वैज्ञानिकों अलग अलग राह पर भेज देते हैं.जिम्मी वैज्ञानिको के सामने आकर उन्हे अपने कब्जे मंेकर लेता है,पठान पहुॅचता है,पर जिम्मी के हाथों परास्त हो जाता है.उसके हाथ कुछ नही आता.यहीं पर जिम्मी की बातों से खुलासा होता है कि जिम्मी एक पूर्व राॅ अफसर है,जिसे सरकार ने मरने के लिए छोड़ दिया था.भारत सरकार के रिकार्ड मंे राॅ अफसर जिम्मी की मौत हो चुकी है और उसे षौर्य पदक से नवाजा जा चुका है.इसलिए अब जिम्मी भी भारत के खिलाफ है.अब वह पैसे के लिए पाकिस्तानी आईएसआई एजंसंी के जनरल के लिए काम करता है.फिर एक दिन पता चलता है कि लंदन में डांॅ रूबया के एकाउंट से बहुत बड़ी रकम जिम्मी को ट्ांसफर हुई है. पठान जानकारी निकाल कर स्पेन पहुॅचता है?जहां पता चलता है कि उसे जिम्मी ने वहां बुलाने के ेलिए यह खबर राॅ तक भिजवायी थी.डाॅ रूबिया आईएसआई एजेट हैं और जिम्मी के साथ काम कर रही है.पर उसका दिल पठान पर आ जाता है,इसलिए वह जिम्मी के गुंडांे ेसे उसे बचाती है और फिर उसके ेसाथ मिलकर रक्तबीज लेने जाती है.रक्तबीज हाथ में आते ही डाॅ. रूबिया अपनी असलियत पा आ जाती है और पठान को बताती है कि उसने तो जिम्मी के कहने पर उसके ेसाथ यह नाटक किया क्योंकि रक्तबीज उसकी मदद के बिना पाना मुष्किल था.पठान को मौत के मंुहाने पर छोड़ देती है.रक्तबीज की मदद से जिम्मी रूस के एक षहर में बंदी बनाए गए भारतीय वैज्ञानिक से ऐसा वायरस बनवा रहा है जिसे छोड़ देने पर पूरे भारत के लोग ‘स्माल फाॅक्स’ की बीमारी से ग्रसित होकर एक सप्ताह के अंदर मौत के मंुह में समा जाएंगे.अब पठान की लड़ाई देष को बचाने के लिए जिम्मी से है.बीच में टाइगर (सलमान खान) भी पठान की मदद के लिए आ जाते हैं.अंततः  यह लड़ाई कई मोड़ांे से गुजरती है और नंदिनी सहित कई राॅ के अफसर व वैज्ञानिको की मौत के बाद जिम्मी की चाल असफल हो जाती है.पठान को अब नंदिनी की जगह बैठा दिया जाता है.

लेखन व निर्देषनः

फिल्म बहुत तेज गति से दौड़ती है,मगर पटकथा मंे काफी गड़बड़ियंा हैं. कहानी कब वर्तमान मंे और कब अतीत में चल रही है,पता ही नही चलता.पूरी फिल्म एक खास अजेंडे के तहत बनायी गयी है.फिल्म मेंपाकिसतानी एजेट रूबिया भगवा रंग के कपड़े व भगवा रंग की बिकनी पहनती है और अंततः भारत के पक्ष में कदम उठाती हैं.फिल्म में ंअफगानिस्तान को दोस्त बताया गया है.यानीकि ‘अखंड ’भारत का सपना साकार होने वाला है,षायद ऐसा फिल्मकार मानते हैं. फिल्म अजेंडे के तहत बनायी गयी है,इसका अहसास इस बात से होता है कि भारत को बर्बाद करने की जिम्मेदारी एक भारतीय राॅ एजंसी के एजेंट जिम्मी ने उठाया है.जिम्मी कहता है कि- ‘भारत माता’ ने उसे क्या दिया.भारत माता ने उसकी मां को मरवा दिया.उसके पिता को बम से उड़वा दिया.वगैरह वगैरह..इन संवादांे से जिसे जो अर्थ लगाने हो लगाए.पर देष के राजनीतिक घटनाक्रमों व घटनाओं को इन संवादांे सेे जोड़कर देखे,तो कुछ बातें साफ तौर पर समझ में आ सकती हैं कि फिल्मकार कहना क्या चाहता है? पर क्या इस तरह के संवाद व इस तरह के किरदार को फिल्म में प्रधानता देकर हमारी अपनी ‘राॅ’ के  कार्यरत लोगों का उत्साह खत्म नही कर रहे हैं? अब तक हमेषा यह होता रहा है कि जब भी फिल्मकार किसी अजेंडे के तहत फिल्म बनाता है तो फिल्म की कहानी व उसकी अंतर आत्मा गायब हो जाती है. इसलिए फिल्म देखना दुष्कर हो जाता है.फिल्म में एक्यान दृष्य बहुत अच्छे ढंग से फिल्माए गए हैं. एक्षन के षौकीन इंज्वाॅय कर सकते हैं.फिल्म में कुछ खूबसूरत लोकेषन हैं.तो वहीं कई दृष्य देखकर फिल्मकार व लेखक की सोच पर तरस आता है.मसलन-विमान के ऐसी डक के अंदर ‘वायरस’ रक्तबीज है.राॅ अफसर विमान के पायलट को उसके नाम से फोन कर कहते है कि वह देखे.पायलट एसी डक मंे वायरस रक्तबीज के होने की पुष्टि करता है.पर पायलट के चेहरे पर या विमान यात्रियों के चेहरे पर कोई भय नजर नही आता.फिर कर्नल लूथरा आदेष देते हैं कि विमान को दिल्ली षहर से बाहर ले जाओ और पूरे विमान को गिरा दो.जबकि ‘एटीसी’ कंट्ोलर ही विमान के पायलट से फ्लाइट का नाम लेकर बात करता है.राॅ अफसर कर्नल लूथरा मिसाइल से विमान को गिराने का आदेष देते है,मिसाइल छूटने के बाद उसका रास्ता भी मुड़वा देेते हैं.यानीकि बेवकूफी की घटनाए भरी पड़ी हैं.फिल्म के अंत में प्रमोषन गाने के ेबाद पठान(षाहरुख खान  )और टाइगर (सलमान खान)एक साथ रूस में उसी टूटे हुए पुल पर नजर आते हैं, और कहते है कि अब हमने बहुत कर लिया.अब दूसरो को करने देते हैंफिर किसे दे,यह काम का नहीख्,यह बेकार है.अंत में कहते है कि हमें ही यह सब करना पड़ेगा,हम बच्चों के हाथ में नही सौंप सकते.अब इस दृष्य की जरुरत व मायने हर दर्षक अपने अपने हिसाब से निकालेगा..फिर विरोध होना स्वाभाविक है.रूस में बर्फ के उपर के एक्षन दृष्य अतिबचकाने व मोबाइल गेम की तरह नजर आते हैं.

संवाद लेखक अब्बास टायरवाला के कुछ संवाद अति सतही हैं.

कैमरामैन बेजामिन जस्पेर ने बेहतरीन काम किया है.पर संगीतकार विषाल षेखर निराष करते हैं.

अभिनयः

पठान के किरदार में षाहरुख खान नही जमे.एक्षन दृष्यों में बहुत षिथिल नजर आते हैं.उनके ेचेहरे पर भी उम्र झलकती है.जिम्मी

के किरदार में जौन अब्राहम को माफ किया जा सकता है क्योंकि वह पहले ही कह चुके हैं कि उनके किरदार के साथ और उनके साथ न्याय नही हुआ.पाकिस्तानी एजेंट रूबैया के किरदार में दीपिका पादुकोण के हिस्से कुछ एक्षन दृष्यों के अलावा सिर्फ जिस्म की नुमाइष करना व खूबसूरत लगने के अलावा कुछ आया ही नही.खूफिया एजेंट होते हुए जब आप किसी को फंसा रही है,तो उस वक्त जो चेहरे पर कुटिल भाव होने चाहिए,वह दीपिका के चेहरे पर नही आते.डिंपल कापड़िया,प्रकाष बेलावड़े व आषुतोष राणा की प्रतिभा को जाया किया गया है.

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