Face Scrub: कुछ बातों का रखें ध्यान

हर कोई चाहता है कि उसकी स्किन हमेशा चमकती हुई रहे, उसके चेहरे पर गंदगी नजर न आए. और साथ ही उसकी स्किन हमेशा सोफ्ट व मुलायम बनी रहे. और इन सब में फेस स्क्रब का अहम रोल होता है. क्योंकि फेस स्क्रब त्वचा से सारी अशुद्धियो को हटाकर, डेड स्किन को रिमूव करके स्किन को ग्लोइंग बनाने के साथ उसे स्मूथ बनाने का काम जो करता है. और अगर इस संबंध में ये कहें कि ब्यूटी बिज़नेस में फेस स्क्रब का इस्तेमाल लंबे समय से किया जा रहा है, तो गलत नहीं होगा. लेकिन ये भी सच है कि लंबे समय से इसका इस्तेमाल करने के बाद भी हम चेहरे पर स्क्रब को अप्लाई करने के समय कुछ गलतियां कर ही बैठते हैं , जिसके कारण कभी हमारी स्किन रेड पड़ जाती है, तो कभी पील हो जाती है. ऐसे में जरूरी है कि जब भी आप फेस स्क्रब करें तो कुछ टिप्स व ट्रिक्स को ध्यान में रखें , ताकि आपको फेस स्क्रब से फायदा भी मिल जाए व आपकी स्किन को कोई नुकसान भी न पहुंचे.

क्यों करते हैं फेस स्क्रब

फेस स्क्रब स्किन को एक्सफोलिएट करने का काम करता है. जिससे स्किन से डेड स्किन रिमूव होकर पोर्स के क्लोग होने की समस्या नहीं होती है. बता दें कि धूलमिट्टी व गंदगी के कारण पोर्स बंद हो जाते हैं , जिससे एक्ने , स्किन पर जरूरत से ज्यादा सीबम का उत्पादन होने लगता है. जिससे स्किन ऑयली होने के कारण उस पर एक्ने की समस्या हो जाती है. ऐसे में फेस स्क्रब स्किन को अंदर से डीप क्लीन करके स्किन को क्लीन व ग्लोइंग बनाने का काम करता है.

जानते हैं इस संबंध डर्मेटोलॉजिस्ट पूजा नागदेव से.

टिप्स एंड ट्रिक्स फोर फेस स्क्रब

– फर्स्ट वाश योर फेस

जब भी आप फेस स्क्रब का इस्तेमाल करें तो उससे पहले अपनी स्किन को जरूर क्लीन करें, ताकि स्किन पर जमी गंदगी निकल सके. और साथ ही जो भी कोस्मेटिक्स आपने स्किन पर लगाया हुआ है वो रिमूव हो जाए , तभी उस पर फेस स्क्रब करने का अच्छा रिजल्ट मिल पाता है. इस बात का भी ध्यान रखना है कि आपका फेस हलका हलका गीला भी रहना चाहिए, ताकि उस पर स्क्रब करने में आसानी हो.

– आराम से मसाज करें

जरूरी नहीं कि बेहतर रिजल्ट के लिए चेहरे पर तेज तेज मसाज करने से ही अच्छा रिजल्ट मिलता है. बल्कि हार्ड हाथों से मसाज करने से स्किन के पील होने के साथ उसके रेड होने का भी डर बना रहता है. ऐसे में जब भी आप चेहरे पर स्क्रब करें तो हलके हाथों से 30 सेकंड तक सर्कुलर डायरेक्शन में ही स्क्रब करें. उसके बाद चेहरे को हलके गरम पानी से क्लीन करें. क्योंकि ये आपकी स्किन के नेचुरल आयल को बैलेंस में रखने का काम जो करता है. लेकिन आपको इस बात का भी ध्यान रखना है कि अगर आपकी स्किन पर किसी भी तरह की कोई एलर्जी है तो आप फेस स्क्रब करने से बचें.

– सही एक्सफोलिएशन के तरीके को अपनाना

अगर आपकी स्किन ड्राई, सेंसिटिव व एक्ने प्रोन स्किन है तो आपके लिए मैकेनिकल एक्सफोलिएशन का तरीका बिलकुल भी ठीक नहीं है. क्योंकि ये आपकी स्किन को नुकसान पहुंचाने का काम करता है. ऐसे में आपके लिए सोफ्ट एक्सफोलिएशन या फिर माइल्ड तरीका ही बेहतर रहेगा. स्ट्रोंगर केमिकल ट्रीटमेंट या फिर मैकेनिकल एक्सफोलिएशन ग्रीसी व मोटी स्किन वालों के लिए ठीक रहता है. और अगर आपकी स्किन डार्क है या फिर आपको अपने चेहरे पर डार्क एरिया ज्यादा नजर आते हैं तो आपको हार्श केमिकल्स व मैकेनिकल एक्सफोलिएशन से दूर ही रहना चाहिए. क्योंकि आज भी एक्सफोलिएशन की कुछ ऐसी टेक्निक्स हैं , जिसके कारण स्किन पर डार्क स्पॉटस हो सकते हैं. इसलिए जरूरी है एक्सफोलिएशन के सही तरीके को अपनाने की.

– इंग्रीडिएंट्स जरूर देखें

स्क्रब फार्मूलेशन में इस्तेमाल किए जाने वाले कई प्राकृतिक घटक त्वचा के लिए नुकसानदायक होते हैं. जैसे नमक, बादाम, फ्रूट पिट्स इत्यादि. भले ही ये नेचुरल हैं , लेकिन ये कई बार स्किन पर काफी हार्ड इफेक्ट डालने का काम करते हैं . जबकि दूसरी तरफ जोजोबा बीड्स, ओट्स, सिलिका व राइस ब्रैन बहुत ही कोमल व असरदार होते हैं , लेकिन इन सबके बावजूद भी ध्यान रखना बहुत जरूरी है. जैसे अगर स्क्रब के कण बहुत छोटे हैं और वो उपयोग के दौरान घुल जाते हैं तो इसे ज्यादा व बारबार करने से बचें. ये भी देखना बहुत जरूरी है कि उसमें स्किन को मॉइस्चराइज करने के साथ शांत करने वाले तत्व भी हो. इसलिए हमेशा इंग्रीडिएंट्स चेक करके ही फेस स्क्रब का इस्तेमाल करें.

काम के टिप्स

– अगर आप स्किन को साफ करने के लिए रोजरोज स्क्रब कर रही हैं तो सावधान हो जाएं , क्योंकि इससे आपकी स्किन खराब हो सकती हैं. इसलिए हफ्ते में 1 – 2 बार ही स्क्रब करना चाहिए.

– कभी भी गंदे फेस पर स्क्रब न करें, बल्कि उससे पहले चेहरे को वाश जरूर करें. क्योंकि इससे पोर्स के ब्लॉक होने का डर रहता है.

– स्क्रबिंग हमेशा हलके हाथों से करनी चाहिए, वरना स्किन के रेड होने का डर रहता है.

– स्क्रब में हमेशा थोड़ा पानी मिलाकर ही उसका इस्तेमाल करना चाहिए.

– अपनी स्किन के हिसाब से ही स्क्रब का इस्तेमाल करें.

GHKKPM: वीनू को लेकर पाखी और सई में हुई बड़ी तकरार, दो माओं के बीच पीसेगा वीनू!

स्टार प्लस का पॉपुलर शो ‘गुम है किसी के प्यार में’ फैंस को काफी पसंद आता है. इस शो में हमें हर दिन कुछ नया देखने को मिलता है. शो में अभी मजेदार ट्रैक चल रहा है, जो फैंस को एंटरटेन कर रहा है. आज के एपिसोड में दिखाया जाएगा कि सई सावी और विनायक की क्लास में जाती हैं और उन्हें बोलती हैं कि वह स्कूल खत्म होने तक उनका इंतजार करेगी. विराट घरवालों के सामने विक्रांत के झूठ का पर्दा उठाएगा। विक्रांत विरोधी पॉलिटिकल पार्टी से है और करिश्मा की मदद से भवानी का राजनीतिक करियर बर्बाद करना चाहता है.

पत्रलेखा को सच बताने की कोशिश करेगा विराट

‘गुम है किसी के प्यार में’ के अपकमिंग एपिसोड में खूब सारा मसाला देखने को मिलेगा. सीरियल में विराट पर प्रेशर बना हुआ है कि वह पत्रलेखा को सारी सच्चाई बता दे. और अपकमिंग एपिसोड में विराट ऐसा करने की कोशिश करता नजर आएगा. सीरियल में देखने को मिलेगा कि विराट पाखी को बोलता है कि उसे एक जरूरी बात करनी है. इस दौरान वह उसे वीनू का वो स्वेटर भी दिखाता है, जो उसे अनाथ आश्रम से मिला था. लेकिन पाखी उसे देखकर भड़क जाती है और उसे लगता है कि वह फिर से सई की बात करेगा. इसी बीच दोनों के पास वीनू आ जाता है और वह उसके साथ बिजी हो जाता है.

 

वीनू को फोन करेगी सई

सीरियल में जब से सई को पता चला है कि वीनू उसका बेटा है, तब से ही वह अपने बेटे के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिता रही है. लेकिन पत्रलेखा को यह चीज बिल्कुल भी पसंद नहीं आती. सीरियल में आगे देखने को मिलेगा कि विनायक, पत्रलेखा और विराट को अपना प्रोजेक्ट दिखाता है लेकिन तभी बीच में सई का फोन आ जाता है और वीनू सई से बात करने लग जाता है. इस चीज से पाखी भड़क जाती है और वह सई को मन ही मन खूब खरी-खरी सुनाती है। दूसरी तरफ सई विनायक से बात करने के बाद खुद से ही खूब सारी बातें करती हैं.

 

दो माओं के बीच पीसेगा वीनू!

‘गुम है किसी के प्यार में’ में एक और बड़ा ट्विस्ट देखने को मिलेगा। सीरियल में देखने को मिलेगा कि वीनू अपने प्रोजेक्ट में ट्रॉफी जीतता है, जिसके बाद वह अपनी मां को याद करता है. लेकिन वहां पर पत्रलेखा और सई दोनों मौजूद होती हैं. यह चीज देखकर विराट थोड़ा टेंशन में आ जाता है. अब देखने होगा कि विराट कैसे इस परिस्थिति को संभालता है.

YRKKH: अभिमन्यु, अभिनव के सामने खोलेगा अक्षरा की सच्चाई! आएगा शो में ट्विस्ट

टीवी सीरियल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है (Yeh Rishta Kya Kehlata Hai) में इन दिनों खूब सारा मसाला देखने को मिल रहा है. कहानी अक्षरा, अभिमन्यु और अभिनव के इर्द-गिर्द घूम रही है. सीरियल में अब तक देखने को मिला है कि अक्षरा और अभिमन्यु का आमना-सामना हो गया है. लेकिन अभि कसौली से जल्द से जल्द जाने की कोशिश करता है और इसके लिए वह अगली सुबह ही होटल से निकल जाता है. लेकिन कहानी में एक बड़ा ट्विस्ट आएगा, जिसके बाद दोनों एक बार फिर आमने-सामने हो जाएंगे. इतना ही नहीं, अपकमिंग एपिसोड में अक्षरा-अभि को खरी-खोटी सुनाती नजर आएगी. आइए आपको बताते हैं कि ये रिश्ता क्या कहलाता है कि आने वाले एपिसोड में क्या-क्या होगा.

अक्षरा-अभिनव के करीबी की शादी में शामिल होगा अभिमन्यु

ये रिश्ता क्या कहलाता है के अपकमिंग एपिसोड में देखने को मिलेगा कि अभिमन्यु कसौली से शिमला जा नहीं पाता. इसी बीच उसकी मुलाकात एक बार फिर अभिनव से होती है और यहां पर अभिनव अभिमन्यु को अपने साथ एक शादी में ले आता है. इस दौरान नीलम मां अभि को शादी अटेंड करने की बात कहती है, जिसे अभिमन्यु ठुकरा नहीं पाता.

 

जाने-अनजाने अभिमन्यु को खरी-खोटी सुनाएगी अक्षरा

सीरियल की कहानी में आगे अभिनव अभिमन्यु को पहाड़ी स्टाइल में तैयार करता है, जिसके बाद दोनों के कपड़े एक जैसे हो जाते हैं. एक सेकंड के लिए अभीर भी दोनों को देखकर हैरान रह जाता है. इसी बीच, जब अभिमन्यु बाहर आता है तो अक्षरा उसे अभिनव समझकर डांटने लगती है. दोनों के बीच एक पर्दा होता है. अक्षरा कहती है कि वह नहीं चाहती कि अभिमन्यु की लाइफ में हो. यह बात सुनकर अभि काफी हर्ट होता है और वहां से चला जाता है.

 

अभिनव को सब सच बताएगा अभिमन्यु

ये रिश्ता क्या कहलाता है में एक बहुत बड़ा ट्विस्ट सामने आने वाला है. सीरियल में अभिनव और अभिमन्यु रात में थोड़ा टाइम साथ बिताते नजर आएंगे. इस दौरान दोनों थोड़ी शराब भी पीते हैं, जिस वजह से नशे में दोनों एक-दूसरे से अक्षरा की बात करते हैं. इसी दौरान अभिमन्यु अभिनव को अक्षरा की सच्चाई बता देगा. हालांकि, इस मौके पर अक्षरा भी वहां पहुंच जाती है और यह सब सुनकर उसके होश उड़ जाते हैं.

फैमिली के लिए बनाएं पालक कॉर्न

पालक और कॉर्न दोनों ही पौष्टिक सब्जियां हैं. इन्हें मिलकर बनाई जाने वाली पालक कॉर्न भी इसीतरह स्वादिष्ट और पौष्टिक होती है. यह रेसिपी बनाने में आसान और खाने में मजेदार है.

सामग्री

पालक- 1/2 कप पेस्ट

कॉर्न- 1 कप उबले हुए

टमाटर- 3/4 कप पेस्ट

प्याज- 3/4 कप पेस्ट

लहसुन- 3 टुकड़े

तेल- 2 चम्मच

जीरा- 1 छोटा चम्मच

हल्दी पाउडर- 1/2 छोटा चम्मच

गरम मसाला- 1/2 छोटा चम्मच

लाल मिर्च पाउडर- 1 छोटा चम्मच

नमक- 2 छोटा चम्मच

विधि

पालक के पत्तो को पानी में अच्छे से धो ले और डंडियां तोड़ कर हटा दीजिये. एक बड़े बर्तन में पानी गरम करें और पानी उबलते ही उसमें पालक के पत्तों को डाले. पत्तों को 2 से 3 मिनट के लिए उबालें. पालक के पत्ते उबल जाने के बाद अतरिक्त पानी निकाल कर ठन्डे पानी से पालक को धोलें.

कॉर्न को भी उबाल कर रख लें. उबले हुए पालक के पत्तों को मिक्सी में पिस लें. इसी तरह टमाटर और प्याज को भी मिक्सी में पिस लें.

एक कढ़ाई में तेल गरम करें और जीरा डालकर भूनने दें. जीरा भूनने पर प्याज का पेस्ट डालें और 4 मिनट तक पकायें. प्याज का पेस्ट पकने पर इसमें टमाटर का पेस्ट डालें और तब तक पकाएं जब तक टमाटर उबलने लगे.

बाकि मसाले डाल लें. सब्जी में लाल मिर्च पाउडर, हल्दी पाउडर, गरम मसाला पाउडर और नमक डालें. सभी मसालों को अच्छे से मिला ले और टमाटर के साथ पकने दें. मसाले पक जाये फिर पालक की पेस्ट डाले और 3 से 4 मिनिट तक पकाएं. उबले हुए कॉर्न को कढ़ाई में डालें और पालक से साथ पकने दे.

स्वादिष्ट पालक कॉर्न बनकर तैयार है. इसे गरमा गरम रोटी, नान, पराठा या कुलचा के साथ परोसें.

जरूरी है हेयर औयल मसाज

जिस तरह शरीर को लूब्रिकेशन और नरिशिंग की जरूरत होती है वैसे ही बालों और स्कैल्प को भी औयल की जरूरत होती है.

औयल अलगअलग तरह के होते हैं जो शरीर की अलगअलग जरूरतों के लिए उपयोगी साबित होते हैं. उदाहरण के लिए वैजिटेबल औयल, फ्लोरल औयल, मिनरल औयल, हर्बल औयल आदि. इन का अपना महत्त्व होता है जैसे कोई लूब्रिकेशन के लिए, कोई ओवरऔल हैल्थ के लिए, कोई नरिशमैंट के लिए, कोई घुटनों के लिए, कोई स्किन के लिए तो कोई बालों या स्कैल्प के लिए परफैक्ट होता है.

स्कैल्प में डैंड्रफ की समस्या, खुजली, ड्राइनैस जैसी समस्याएं हो सकती हैं, जबकि हमारे बाल अकसर औयली रहते हैं. आप शैंपू करती हैं और शाम तक ये फिर से औयली हो जाते हैं. इस के विपरीत कभीकभी बाल रफ और ड्राई होते हैं पर स्कैल्प औयली रहती है. अगर एक ही जगह पर 2 अलगअलग तरह के टैक्स्चर हैं और पीएच बैलेंस नहीं है तो हमें पीएच बैलेंसिंग करनी होती है. इस के लिए औयल के अंदर कपूर, लैमन जूस आदि डाल कर उसे स्कैल्प में पेनिट्रेट कराते हैं. कई बार पीएच बैलेंसिंग कैप्सूल, अल्फा हाइड्रौक्सी आदि भी मसाज औयल में मिलाई जाती है.

इस संदर्भ में कौस्मैटोलौजिस्ट आश्मीन मुंजाल ने बालों और स्कैल्प की हैल्थ से जुड़ी कुछ जरूरी बातें बताईं:

तनाव से टूटते हैं बाल

हम अकसर मन में तनाव रखते हैं. छोटीछोटी बातों पर परेशान होते हैं. दिमाग में नैगेटिव भावनाएं रहती हैं. इस का सीधा असर हमारे बालों और स्कैल्प की हैल्थ पर पड़ता है. इसलिए सब से जरूरी है कि आप हमेशा अपने मन को शांत रखें, खुश रहें और सकारात्मक भावों से ओतप्रोत रहें. इस का अच्छा असर आप के बालों पर पड़ेगा. आप के बाल घने एवं चमकीले होंगे और स्कैल्प भी सेहतमंद रहेगी. डैंड्रफ वगैरह की समस्या भी नहीं होगी.

गंदे बालों में औयल मसाज कभी नहीं

अकसर हम एक गलती यह करते हैं कि जब हमारे बाल गंदे होते हैं, हम बाहर से घूम कर आते हैं और हमारे बालों में प्रदूषण का असर रहता है, पसीना, चिकनाई और धूलमिट्टी जमी रहती है तब हम बालों में औयलिंग करते हैं. ऐसे में क्यूटिकल्स और स्कैल्प के रोमछिद्र के ऊपर ऐक्सटर्नल मैटीरियल यानी प्रदूषण और गंदगी जमा रहती है और पोर्स भरे होते हैं. जिस से औयलिंग से फायदा होने के बजाय नुकसान होता है. इसलिए ऐसे गंदे बालों में कभी भी औयलिंग नहीं करनी चाहिए. जब बाल साफ हों, धुले हुए हों तब उन में औयल मसाज की जाए तभी उस का असर दिखेगा.

कौंब भी जरूरी

सोने से पहले स्कैल्प के ऊपर कम से कम 100 बार कौंब जरूर करें. इस से स्कैल्प के रोमद्रि खुलते हैं और धूलमिट्टी एवं डैड स्किन हटती है. यह चिंता न करें कि ज्यादा कौंब करने से बाल झड़ने लगेंगे बल्कि उलटा आप कौंब करेंगी तो स्कैल्प में रक्तप्रवाह बढ़ेगा और आप के बाल ज्यादा सेहतमंद बनेंगे.

हौट औयल ट्रीटमैंट

साफसुथरे बालों में कम से कम 50 बार कंघी करें. सौफ्ट ब्रिसल्स वाले ब्रश से इस तरह कंघी करें कि मसाज जैसी हो जाए. आप सामान्य कंघी या फिर नीम की लकड़ी की कंघी भी ले सकती हैं. लेकिन ध्यान रखें कि वह ज्यादा कठोर न हो बल्कि मुलायम हो.

अब तेल गरम कर के कौटन को उस में डुबो कर उसे पूरी स्कैल्प पर आराम से लगाएं. तेल इस तरह न लगाएं कि रबिंग कर रही हों बल्कि हलकेहलके हाथों से लाइट मसाज करें. बालों में तेल लगा कर जोरजोर से चंपी कभी नहीं करनी चाहिए वरना बाल कमजोर हो कर टूटने लगते हैं.

जब औयलिंग हो जाए तो फिर स्टीमिंग भी जरूरी है. इस के लिए आप हौट स्टीमर का प्रयोग करें या फिर पानी गरम कर के उस में टौवेल भिगो कर उसे बालों पर लपेट सकती हैं. करीब 15-20 मिनट तौलिए को लपेटे रखें. इस से पोर्स खुल जाते हैं और अच्छी तरह तेल अंदर पैनिट्रेट हो जाता है. इस के बाद आप तेल लगे बालों में रात भर के लिए शावर कैप या कौटन का दुपट्टा लपेट लें ताकि तेल सही तरह रख सके. इस हौट औयल ट्रीटमैंट से आप के बाल सेहतमंद और चमकीले बनेंगे.

हैड मसाज से सिर के नीचे की नसों में रक्त का प्रवाह तेज हो जाता है. इस से बालों की जड़ें मजबूत होती हैं और हेयर फौल रुक जाता है. इस के अलावा भी नियमित रूप से हैड मसाज लेने के कई शारीरिक और मानसिक फायदे होते हैं.

बालों के लिए औयल मसाज के फायदे

बालों की ग्रोथ में मददगार:

बाल प्रोटीन से बनते हैं और उन की ग्रोथ के लिए पर्याप्त विटामिन और अन्य न्यूट्रिएंट्स की जरूरत पड़ती है. औयल मसाज से इन की पूर्ति हो जाती है. इस के अलावा स्कैल्प में तेल से मालिश करने पर रोमछिद्र खुल जाते हैं और इस से सिर की त्वचा तेल को अच्छी तरह सोखती है. सिर में रक्तसंचार बढ़ता है, बालों की जड़ें मजबूत होती हैं और बालों की ग्रोथ में भी मदद मिलती है.

नियमित रूप से तेल की मसाज करने से बालों में कैमिकल और अन्य हेयर ट्रीटमैंट से होने वाले नुकसान का असर भी कम होने लगता है. हेयर औयल बालों में चमक बढ़ाते हैं. गरमी की वजह से बाल अकसर बेजान और दोमुंहे हो जाते हैं. नियमित रूप से बालों में तेल से मालिश करने पर दोमुंहे बालों की समस्या खत्म हो जाती है और बालों को पोषण मिलता है.

बालों को मजबूत बनाए:

कमजोर बालों का मतलब है पतले बाल, बालों में बहुत ज्यादा रूखापन या चिकनाई मौजूद होना और बालों का दोमुंहा होना या टूटना व झड़ना.

वैसे एक दिन में 100-150 बालों का झड़ना सामान्य है, लेकिन यदि बाल इस से ज्यादा झड़ रहे हों तो नियमित रूप से तेल की मसाज करना बालों को मजबूत बना कर इन का टूटना कम करेगा.

इन्फैक्शन रोकने के लिए:

जब स्कैल्प के रोमछिद्र बंद हो जाते हैं तो कई छोटीबड़ी समस्याएं जैसे जलन, खुजली और बैक्टीरियल इन्फैक्शन आदि हो सकते हैं. इन्फैक्शन की वजह से आगे चल कर डैंड्रफ की समस्या भी हो सकती है. इस की वजह से सिर में जूंएं होने का खतरा बढ़ जाता है और कई बार तो हेयर फौल की समस्या भी शुरू हो जाती है. नियमित रूप से बालों में ऐंटीबैक्टीरियल तत्त्वों जैसे शहद से युक्त तेल से मालिश करने से स्कैल्प को पोषण मिलता है और इन्फैक्शन नहीं होता है.

डैंड्रफ को रोके:

डैंड्रफ हेयरफौल की बड़ी वजह है. इस के अलावा मौसम में होने वाले बदलाव और प्रदूषण इन स्थितियों को और ज्यादा खराब करते हैं. डैंड्रफ के कारण ड्राई स्कैल्प, खुजली होने, बालों के टूटने और जूंएं होने का खतरा बढ़ जाता है. डैंड्रफ डैड स्किन होती है जो ड्राई स्कैल्प की समस्या होने पर ज्यादा परेशान करती है.

यह ड्राईनैस भी अपनेआप नहीं होती है. स्कैल्प में ड्राईनैस तब होती है जब सिर की तैलीय ग्रंथियां या तो कम सीबम का उत्पादन करती हैं या फिर बिलकुल नहीं करती हैं. नियमित रूप से औयल की मसाज करने से स्कैल्प को पोषण मिलने के अलावा सिर की तेल ग्रंथियां भी पर्याप्त सीबम का उत्पादन कर पाती हैं. -गरिमा पंकज द्य

बाल झड़ने की वजह

बाल झड़ने की समस्या इंटरनल भी हो सकती है और ऐक्सटर्नल भी यानी आप के शरीर में किसी तरह की बीमारी, तनाव, मानसिक परेशानी आदि के कारण भी बाल झड़ सकते हैं. दूसरी वजह है डैंड्रफ. स्कैल्प की स्किन ड्राई होने पर डैड और रफ स्किन यानी डैंड्रफ ज्यादा आने लगता है तो भी बाल झड़ने लगते हैं.

ऐसे में जरूरी है कि आप औयल मसाज कर स्कैल्प को मौइस्चराइज रखें. नरिशिंग के लिए औयल मसाज नरिशमैंट के लिए जिस तरह आप पहले चेहरे को क्लीन करती हैं, फिर कोई क्रीम या औयल लगाती हैं वैसे ही पहले बालों को क्लीन करें, उस के बाद औयल मसाज करें. कौन सा औयल स्कैल्प के जरूरत के हिसाब से जरूरी है यह कई बातों पर निर्भर करता है जैसे बाल झड़ रहे हैं तो उस के लिए सरसों का तेल, नारियल तेल, भृंगराज औयल, प्रिमरोज औयल आदि का प्रयोग बेहतर होगा. शाइन बढ़ाने के लिए यानी बालों को चमकीला और घना बनाने के लिए धन्वंतरि तेल या बादाम रोगन आदि का प्रयोग कर सकती हैं. रात को पहले तेल को थोड़ा गरम करें और फिर बालों में लगा लें. सुबह बालों को धो लें.

कामकाजी महिलाएं: हुनर पर भारी आर्थिक आजादी

महामारी और स्लोडाउन के कारण कामकाजी महिलाओं की संख्या लगातार घट रही है. अध्ययनों के मुताबिक वैसे भी हमारे देश में काम करने वाली महिलाओं की संख्या काफी कम है. भारत में काम करने की उम्र वाले 67% पुरुषों के मुकाबले महिलाओं की संख्या केवल 9% है.

आजादी के 74 साल से अधिक बीत जाने के बावजूद रोजगार के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बहुत कम है खासकर युवा महिलाओं को अपने कैरियर के रास्ते में बहुत बाधाओं और चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. उन के लिए रोजगार के क्षेत्र में जैंडर गैप की स्थिति आज भी वैसी ही है जैसे 1950 के शुरुआत में थी.

भले ही महिलाओं ने कितनी भी टैक्निकल या वोकेशनल ट्रेनिंग ले ली हो उन्हें वर्कप्लेस में लैंगिक असमानता का दंश आज भी भोगना पड़ रहा है. आज भी उन के हिस्से कम वेतन वाली नौकरियां ही आती हैं.

महामारी की मार कामकाजी महिलाओं पर

आजकल अच्छी फौर्मल नौकरियां, जिन में कैरियर बनाने के अच्छे मौके मिलते हैं, घट रही हैं. कौंट्रैक्ट पर आधारित जौब ज्यादा है. सीएमआईई के एक अध्ययन के मुताबिक कामकाजी महिलाओं के लिए यह काफी कठिन समय है.

महामारी की वजह से बाजार में वैसे ही जौब कम हैं. वर्किंग ऐज की 11% महिलाओं के मुकाबले 71% पुरुष जौब कर रहे हैं. इस के बावजूद महिलाओं में बेरोजगारी दर 17% है जबकि पुरुषों में इस के मुकाबले काफी कम यानी 6% ही है. मतलब बहुत थोड़ी सी महिलाएं हैं जो नौकरी ढूंढ रही हैं और उन के लिए भी पुरुषों के मुकाबले नौकरी पाना बहुत कठिन है. ऐसी स्थिति रोजगार के क्षेत्र में महिलाओं के प्रति भेदभाव की वजह से है.

सीएमआईई के आंकड़ों के मुताबिक 2019-20 में महिला श्रमिकों की संख्या महज 10.7% थी जबकि उन्हें लौकडाउन के पहले महीने यानी अप्रैल, 2020 में 13.9% जौब लौस की स्थिति से गुजरना पड़ा. नवंबर, 2020 तक ज्यादातर पुरुषों ने वापस जौब प्राप्त कर ली, मगर महिलाओं के साथ ऐसा नहीं हो सका. नवंबर, 2020 तक 49% महिलाओं की नौकरी छूट चुकी थी, मगर बहुत कम महिलाओं को ही वापस काम मिल सका.

हाल ही में औनलाइन पेशेवर नैटवर्क ‘लिंक्डइन अपौर्च्युनिटी-2021’ के सर्वे में भी इसी बात का खुलासा हुआ है कि महामारी की वजह से महिलाएं अधिक प्रभावित हुई हैं और उन्हें अधिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है. सर्वे 18 से 65 साल की उम्र के लोगों पर औनलाइन किया गया, जिस में आस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान समेत 7 देशों के लोग शामिल हुए.

सर्वे के मुताबिक इस कोरोना महामारी का विदेशों में काम कर रही महिलाओं की तुलना में भारत की कामकाजी महिलाओं पर ज्यादा प्रभाव पड़ा है. 90% महिलाएं कोरोना के चलते दबाव में हैं. पूरे एशिया पैसिफिक देशों में महिलाओं को काम और सैलरी के लिए कड़ी लड़ाई लड़नी पड़ी है और कई जगह पर पक्षपात का सामना करना पड़ा. 22% महिलाओं का कहना है कि उन्हें पुरुषों जितनी वरीयता नहीं दी जाती.

यही नहीं देश की 37% कामकाजी महिलाओं का कहना है कि उन्हें पुरुषों की तुलना में कम अवसर मिलते हैं, जबकि 25% पुरुष भी इस से सहमत हैं. इन महिलाओं का कहना है कि उन्हें पुरुषों की तुलना में कम वेतन मिलता है.

औफिस के साथ घर संभालने की जिम्मेदारी

युवा महिलाएं जब जौब के लिए निकलती हैं तब पहले तो उन्हें बहुत मुश्किल से नौकरी मिल पाती है. उस पर बहुत जल्द ही घर और मातृत्व की जिम्मेदारियों की वजह से नौकरी करने में मुश्किलें भी आने लगती हैं. घर वाले उन्हें घर संभालने की सलाह देते हैं.

नौकरी में की जाने वाली उन की मेहनत को नजरअंदाज किया जाता है और यह उम्मीद रखी जाती है कि वे घर लौट कर मुसकराते हुए चेहरे के साथ खाना बनाएंगी और घर व बच्चों की देखभाल और साफसफाई भी करेंगी. यही वजह है कि लड़कियां अधिक जिम्मेदारी वाली जौब लेने से बचती हैं.

ऐंप्लायर भी लड़कियों को ज्यादा महत्त्वपूर्ण ओहदा देने से पहले सौ बार सोचते हैं. कहीं न कहीं उन्हें भी इस बात का खयाल रहता है कि शादी के बाद उसे जौब कंटीन्यू करने या अपनी जिम्मेदारियां निभाने में कठिनाइयां आ सकती हैं. इसलिए वे उसे कम महत्त्वपूर्ण ओहदे पर रखते हैं. इधर महिलाएं भी अपनी परिस्थितियां जानती हैं, इसलिए सहजसरल काम को तवज्जो देती हैं.

लगभग दोतिहाई कामकाजी महिलाएं परिवार और घरेलू जिम्मेदारियों के कारण काम में भेदभाव का सामना कर रही हैं.

कम वेतन वाली नौकरी

घर वाले अपने घर की बहूबेटियों को वैसी जौब लेने की सलाह देते हैं जिस में समय कम देना पड़े और औफिस भी आसपास हो भले ही सैलरी कितनी ही कम क्यों न हो. वैसे भी उन का तर्क यही होता है कि तेरी सैलरी से घर नहीं चल रहा, फिर सैलरी के पीछे घर की जिम्मेदारियों से मुंह क्यों मोड़ना.

यही सब बातें हैं जिन की वजह से जानेअनजाने महिलाओं को कम सैलरी वाली जौब की तरफ धकेला जाता है. घर और बच्चों की देखभाल में लगी महिलाओं की आंखें धीरेधीरे एक शानदार नौकरी और कैरियर के सपने देखना भूल जाती हैं और वे खुद को घरपरिवार तक सीमित रखना सीख जाती हैं.

शादी के बाद ज्यादातर महिलाओं के नौकरी न कर पाने या कम सैलरी वाली जौब करने की एक वजह यह भी होती है, क्योंकि वे नौकरी करना भी चाहें तो उन पर बहुत सी पाबंदियां लगा दी जाती हैं. मसलन, घर के बड़ों द्वारा महिला को ताकीद किया जाना कि वह किसी भी तरह शाम 7 बजे के अंदर घर में दाखिल हो जाए. कभी जरूरी होने पर उसे घर वालों से मीटिंग वगैरह के लिए दूसरे शहर जाने की अनुमति नहीं मिलती. घर का कोई सदस्य बीमार हो तो सब से पहले उसे ही छुट्टी लेनी पड़ती है.

किसी भी घर में पुरुष को ही मुख्य कमाऊ सदस्य माना जाता है. औरतों को आगे आने का अवसर कम मिलता है. औरतें कम वेतन वाली जौब भी कर लेती हैं, क्योंकि वे काम करें या न करें यह बात घर के लोगों के लिए महत्त्वपूर्ण नहीं होती. इसलिए अकसर उन्हें ऐसी जौब ही ढूंढ़ने की सलाह दी जाती है, जिसे वे आसानी से घर के काम निपटाते हुए कर सकें भले ही वेतन कम क्यों न हो.

शहरों में ज्यादा खराब स्थिति

सीएमआईई के कंज्यूमर पिरामिड्स हाउसहोल्ड सर्वे में भारतीय महिलाओं की वर्कफोर्स में भागीदारी के संदर्भ में 2 अनापेक्षित ट्रैंड दिखते हैं. पहला तो यह कि शहरों की पढ़ीलिखी महिलाओं के मुकाबले ग्रामीण इलाकों की ज्यादातर महिलाएं बाहर काम करने जाती हैं.

2019-20 में काम करने वाली ग्रामीण महिलाओं की संख्या 11.3% थी जबकि शहरी महिलाओं की भागीदारी केवल 9.7% थी. वैसे तो दोनों ही स्थितियां सही नहीं, मगर शहरी पढ़ीलिखी ट्रैंड महिलाओं के लिए अधिक और बेहतर जौब के मौके की उम्मीद की जानी स्वाभाविक है, जबकि असलियत इस के विपरीत है. दूसरा यह कि युवा महिलाओं को सूटेबल जौब मिलने में ज्यादा परेशानी आती है.

एक और स्टडी के मुताबिक शहरी आबादी की तुलना में गांवों में महिलाएं घर के बाहर जा कर ज्यादा काम करती हैं. गांवों में 35% से ज्यादा महिलाएं खेतों में काम करती हैं और इन में से 45% महिलाएं वर्षभर में 50 हजार रुपए भी नहीं कमा पातीं. इन में मात्र 26% महिलाएं अपने पैसों को अपनी मरजी के अनुसार खर्च कर पाती हैं.

शहरी क्षेत्रों में वार्षिक आय क्व2 से क्व5 लाख वाले परिवारों में केवल 13% महिलाएं नौकरी करने जाती हैं, जबकि पांच लाख से ऊपर वाले आयवर्ग में यह प्रतिशत 9 ही है. वहीं गांव में क्व50 हजार से क्व5 लाख प्रतिवर्ष की आय वाले परिवारों में महिलाओं के काम करने का प्रतिशत 16 से 19 है.

हिंसा और यौन शोषण

हाल ही में एक नौनप्रौफिट और्गेनाइजेशन हर रिस्पेक्ट ने एक डाटा पब्लिश किया जो भारतीय फैक्टरियों में महिलाओं के साथ हो रही हिंसा पर आधारित है. यह डाटा मुख्य रूप से एक स्टडी पर आधारित है. इस स्टडी के तहत फैक्टरियों में काम करने वाले 11,500 स्त्रियोंपुरुषों और उन के मैनेजर्स को सर्वे में शामिल किया गया. पाया गया कि इन फैक्टरियों में काम करने वाली महिलाओं को लैंगिक असमानता का सामना करना पड़ता है. यह डाटा भारतीय समाज में, जिस में रोजगार भी शामिल है, महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव, हिंसा और यौन शोषण को स्पष्ट रूप से दिखाता है.

इस अध्ययन में शामिल 34 % पुरुष और महिला वर्कर्स ने इस कथन पर सहमति जताई कि कई दफा ऐसा मौका भी आता है जब एक औरत मारपीट डिजर्व करती है. यही नहीं 36% वर्कर्स ने इस बात पर भी सहमति जताई कि यदि सुपरवाइजर किसी महिला कर्मचारी को सजैस्टिव कमैंट्स देता है और वह इंटरैस्टेड दिखती है तो यह सैक्सुअल हैरसमैंट नहीं है. यही नहीं रिपोर्ट के मुताबिक 28 से ज्यादा प्रतिशत लोगों ने पति द्वारा अपनी पत्नी की पिटाई करने को न्यायसंगत ठहराया.

इस अध्ययन में ऐसे कई कारण बताए गए हैं, जिन की वजह से घर या औफिस में महिलाओं के साथ हिंसा होती है. इस के लिए पुरुषवादी सामाजिक पैटर्न और जैंडर नार्म्स जो महिलाओं को पुरुषों के अधीन रखता है, जिम्मेदार है. औरतों को शुरू से सामाजिक और आर्थिक रूप से पुरुषों पर निर्भर माना जाता है. ऐसे में कहीं न कहीं उन्हें घर और औफिस में अपमानजनक स्थिति का सामना करना पड़ जाता है जो बहुत स्वाभाविक है. ओहदा हो या वेतन उन्हें अक्सर पुरुषों के सामान क्षमता होने के बावजूद निम्न पोजीशन दी जाती है.

जरूरी है सोच में बदलाव

यूएनडीपी (संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम) की एक रिपोर्ट में 75 देशों के आंकड़ों का अध्ययन किया गया. इन देशों में विश्व की लगभग 80 फीसदी आबादी बसती है. इन आंकड़ों के विश्लेषण में पाया गया है कि महिलाओं को समानता हासिल करने के मामले में बहुत सी अदृश्य बाधाओं का सामना करना पड़ता है.

रिपोर्ट में प्रस्तुत किए गए आंकड़ों के अनुसार जिन लोगों की राय शामिल की गई उन में से लगभग आधे लोगों का खयाल था कि पुरुष श्रेष्ठ राजनीतिक नेता होते हैं, जबकि 40% से ज्यादा लोगों का विचार था कि पुरुष बेहतर कारोबारी ऐग्जीक्यूटिव होते हैं, इसलिए जब अर्थव्यवस्था धीमी हो तो उस तरह की नौकरियां या कामकाज पुरुषों को मिलने चाहिए.

अकसर यह देखने में आता है कि घर में अगर लड़का और लड़की दोनों हैं तो लड़के को नौकरी के लिए दूसरे शहर में भेजने में भी कोई समस्या नहीं रहती और लड़की को बहुत हुआ तो उसी शहर में छोटीमोटी नौकरी करने के लिए भेज दिया जाता है और वह भी काफी मनाने के बाद. इस तरह की सोच में बदलाव बहुत जरूरी है.

आज भी सामाजिक बंधनों के कारण महिलाएं चाह कर अपना योगदान आर्थिक विकास में नहीं दे पा रही हैं. हम चाहे कितनी भी आर्थिक आजादी की बातें कर लें पर जब तक महिलाओं के विकास व आजादी को ले कर खुलापन नहीं आएगा तब तक आर्थिक आजादी अधूरी नजर आती है.

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WINTER SPECIAL: सर्दियों में सेहतमंद है स्वादिष्ट सूप

सूप संतुलित भोजन का अहम हिस्सा है. जिस प्रकार सलाद खाना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है उसी प्रकार सूप भी अत्यधिक स्वास्थ्यप्रद होता है. सूप का सेवन भोजन करने से पूर्व किया जाता है क्योंकि यह जठराग्नि अर्थात भूख को जाग्रत करता है. सर्दियों में सूप अवश्य पीना चाहिए क्योंकि तासीर गर्म होने के कारण यह शरीर को गर्म रखता है. चूंकि सूप विभिन्न सब्जियों को उबालकर नाममात्र के मिर्च मसाले से बनाया जाता है इसलिए ये शरीर को भरपूर पोषण भी प्रदान करते हैं. आजकल बाजार में विभिन्न कम्पनियों के रेडीमेड सूप भी मिलते हैं जो पाउडर फॉर्म में होते है और इनमें सिर्फ गर्म पानी मिलाकर प्रयोग किया जा सकता है. आमतौर पर सब्जियों, दालों, हर्ब्स, और नानवेज से विभिन्न सूप बनाये जातें हैं. सूप को शाम को डिनर से पूर्व पीना ठीक रहता है परन्तु इसे सदैव ताजा बनाकर ही पीना चाहिए.आइए सूप के कुछ अन्य लाभों पर भी नजर डालते हैं-

-सूप में नाममात्र के मसाले और बटर का प्रयोग किया जाता है जिससे इनकी कैलोरी बहुत ही कम हो जाती है इसीलिए ये वजन को कम करने में काफी मददगार हैं.

-भूख को जगाने के साथ साथ ये भोजन की तलब को भी कम करते हैं.

-सब्जियां विटामिन्स, खनिज लवण और फाइबर से भरपूर होतीं है इसलिए विभिन्न सब्जियों से बने सूप बहुत सेहतमंद होते हैं.

-सूप एक तरल पेय है इसलिए ये शरीर में पानी की कमी को संतुलित करते हैं.

-यदि आप वजन कम करना चाहते हैं तो ऊपर से क्रीम डालने से बचें.

कुछ पौष्टिक सूप की रेसिपीज

-टमाटर पालक सूप

कितने लोंगों के लिए 6
बनने में लगने वाला समय 30 मिनट
मील टाइप वेज

सामग्री

मध्यम आकार के टमाटर 6
पालक 12 पत्ते
पानी 6 कप
काली मिर्च पाउडर 1/4 टीस्पून
काला नमक 1/2टीस्पून
ब्रेड स्लाइस 2

विधि

ब्रेड स्लाइस के किनारे चाकू से अलग कर दें. इन्हें आधे इंच के चौकोर टुकड़ों में काट लें. अब एक नॉनस्टिक पैन में 1 टीस्पून मक्खन डालकर मंदी आंच पर इन्हें ब्राउन कर लें. पालक के पत्तो और टमाटर को मोटा मोटा काटकर 2 कप पानी डालकर प्रेशर कुकर में मंदी आंच पर 2 सीटियां लेलें. जब ये ठंडे हो जाएं तो पीस लें. अब पिसे मिश्रण को छलनी से छानकर गैस पर एक पैन में चढ़ाएं. काला नमक, काली मिर्च और बचा पानी डालकर अच्छी तरह उबालें. तले ब्रेड के टुकड़े डालकर सर्व करें.

नोट-पालक के पत्ते डाले जाने से सामान्य टोमेटो सूप की अपेक्षा यह आयरन से भरपूर हो जाता है.

-खजूर आंवला सूप

कितने लोंगों के लिए 4
बनने में लगने वाला समय 30 मिनट
मील टाइप वेज

सामग्री

आंवला पेस्ट 1/2 कप
ख़जूर पेस्ट 1/4 कप
पानी 4 कप
नमक स्वादानुसार
हींग चुटकी भर
काली मिर्च 1/2 टीस्पून
लहसुन बारीक कटा 2 कली
अदरक किसा 1 छोटा टुकड़ा
मक्खन 1 टेबलस्पून
कटा हरा धनिया 1 टीस्पून

विधि

एक नॉनस्टिक पैन में मक्खन गर्म करके लहसुन, अदरक और हींग भूनें. अब आंवला, ख़जूर का पेस्ट, काला नमक, काली मिर्च और 2 कप पानी डालकर 2-3 उबाल आने तक पकाएं. अब इसे गैस से उतारकर छान लें. छने मिश्रण को शेष पानी डालकर पुनः 5 मिनट तक धीमी आंच पर पकाएं. गर्मागर्म सूप हरा धनिया डालकर सर्व करें.

-मंचाऊ सूप

कितने लोंगों के लिए 6
बनने में लगने वाला समय 25 मिनट
मील टाइप वेज

सामग्री

तेल 2 टीस्पून
अदरक बारीक कटा 1 इंच
लहसुन कटी 2 कली
हरी मिर्च 1
प्याज बारीक कटा 1
सूखी लाल मिर्च 1
बारीक कटी गाजर 1
कटा पत्तागोभी 1/2कप
चौकोर कटे मशरूम 3
सोया सॉस 2 टेबलस्पून
नमक स्वादानुसार
काली मिर्च पाउडर 1 टीस्पून
शकर 1 टेबलस्पून
सिरका 1 टेबलस्पून
बारीक कटी फ्रेंच बीन्स 6
स्प्रिंग अनियन कटा 2 टेबलस्पून
कटा धनिया 1 टेबलस्पून
उबले नूडल्स 1 कप
कॉर्नफ्लोर 3टेबलस्पून
तलने के लिए तेल पर्याप्त मात्रा में

विधि

उबले नूडल्स में 1 टेबलस्पून कॉर्नफ्लोर अच्छी तरह मिलाएं और गर्म तेल में सुनहरा तलकर टिश्यू पेपर पर निकाल लें. अब एक नॉनस्टिक पैन में 2 टीस्पून तेल गरम करके अदरक, लहसुन, हरी मिर्च, और प्याज को 1 मिनट तक सॉते करें. अब सूखी लाल मिर्च भूनकर सभी सब्जियां 3 से 4 मिनट तक तेज आंच पर भूनें. इसमें सोया सॉस, नमक, काली मिर्च पाउडर, शकर,वेनेगर और पानी डालकर 5 मिनट तक पकाएं. बचे 2 टेबलस्पून कोर्नफ्लोर में 1 कप पानी मिलाएं और तैयार मिश्रण में डालकर चलाते हुए उबालें. बढ़िया गाढ़ा सूप तैयार है. तले नूडल्स और कटा धनिया डालकर सर्व करें.

-ब्रोकली आलमंड सूप

कितने लोंगो के लिए 6
बनने में लगने वाला समय 30 मिनट
मील टाइप वेज

सामग्री

मध्यम आकार की ब्रोकली 1
मक्खन 1 टेबलस्पून
बारीक कटा प्याज 1
मैदा 1 टेबलस्पून
बादाम 10
तेजपात के पत्ते 2
दूध 1 कप
नमक स्वादानुसार
काली मिर्च पाउडर 1/2टेबलस्पून

विधि

बादाम को भिगोकर उसका छिलका उतार दें. एक पैन में लगभग 2 ग्लास पानी को उबालें और नमक डालकर ब्रोकली डालें. जब ब्रोकली हल्की सी नम हो जाये तो गैस से उतारकर ठंडे पानी में छान लें ताकि इसका रंग बरकरार रहे. अब एक पैन में मक्खन डालकर प्याज को सॉते करें, तेजपात के पत्ते भूनकर मैदा को हल्का सा भून लें ध्यान रखें कि मैदे का रंग न बदले. दूध डालकर अच्छी तरह चलाएं. 1 कप पानी मिलायें और छलनी से छान लें.इस छने मिश्रण को गैस पर चढ़ाएं. बादाम को बारीक काटकर नॉनस्टिक पैन में हल्का ब्राउन भून लें. ब्रोकली को भी 2 कप पानी के साथ पीस लें. अब पिसी ब्रोकली को उबलते दूध और मैदा के मिश्रण में डालें. नमक और काली मिर्च पाउडर डालकर भली भांति चलाएं. भुने बादाम डालें और गर्मागर्म सर्व करें.

मेनोपॉज़ के बाद पैप स्मीयर और जाँच : सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के अनुसार, भारतीय महिलाओं में कैंसर के हर पाँच मामलों में से एक सर्वाइकल कैंसर (गर्भग्रीवा का कैंसर) का मामला होता है. अनुमान है कि 30 वर्ष से 50 वर्ष आयुवर्ग में लगभग 160 मिलियन भारतीय महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर का ख़तरा है.

भारत में देखा गया है कि अधिकाँश महिलाएँ जब तक उनका कैंसर आगे बढ़ चुका होता है, तब तक इलाज नहीं करातीं और इसके कारण स्वास्थ्यलाभ एवं उपचार, दोनों मुश्किल हो जाता है. अनेक महिलाएँ नियमित रूप से सामान्य जाँच नहीं कराती हैं, जबकि ऐसा करने से शुरुआती चरणों में सर्वाइकल कैंसर का या कुछ असामान्यताओं का पता चल सकता है. इसके पीछे पेडू की जाँच (पेल्विक एग्जामिनेशन) कराने में संकोच एक बड़ा कारण है.

मनीषा तोमर, वरिष्ठ परामर्शदाता प्रसूति एवं स्त्रीरोग विशेषज्ञ, मदरहुड हॉस्पिटल, नोएडा का कहना है कि-
शुरुआती चरण में सर्वाइकल कैंसर में कोई स्पष्ट लक्षण नजर नहीं आते हैं. जब कैंसर काफी आगे बढ़ चुका होता है तभी इसके लक्षण दिखने शुरू होते हैं। सर्वाइकल कैंसर के लक्षण दूसरी बीमारियों के समान लग सकते हैं, जिसके कारण स्थिति और ज्यादा जटिल हो जाती है। सर्वाइकल कैंसर को रोकने का सबसे कारगर तरीका है किसी असामान्य अवस्था का जल्दी पता लगाने के लिए नियमित जाँच कराना और समय रहते इलाज शुरू करना. महिलाओं को, जब तक डॉक्टर अन्यथा कुछ नहीं बताएँ, मेनोपॉज़ (रजोनिवृत्ति) के बाद भी अपनी नियमित जाँच कराना बंद नहीं करना चाहिए. कैंसर की जाँच का प्राथमिक उद्देश्य है कैंसर से सम्बंधित मौतों को और कैंसर के शिकार होने वाले लोगों की संख्या को कम करना.

आइए, हम उन विधियों को समझें जिसमें कैंसर की रोकथाम या शीघ्र पहचान की जा सकती है.

पैप स्मीयर जाँच – यह जाँच क्यों ज़रूरी है?

शीघ्र पता चल जाने से सर्वाइकल कैंसर ठीक हो सकता है। कैंसर-पूर्व रोग जो सर्वाइकल कैंसर का रूप ले सकते हैं, उन्हें पता करने का सबसे बढ़िया तरीका है पैप स्मीयर जाँच। पैप स्मीयर जाँच गर्भाशय (सर्विक्स) की कोशिकाओं में बदलाव का पता लगाती है। इस जाँच से सर्वाइकल कैंसर या रोगों के संकेत मिलते हैं जो आगे चल कर कैंसर में बदल सकते हैं. जाँच के दौरान नमूने के लिए गर्भाशय से कोशिकाएँ निकाली जाती हैं. यह गायनेकोलॉजिकल जाँच के तहत एक बाईमैन्युअल पेल्विक एग्जाम (पेडू की दोनों हाथ से जाँच) के साथ-साथ बार-बार की जाती है.

किसी तरह की कैंसर-पूर्व अवस्था का पता लगाने और उनका इलाज करने के लिए नियमित रूप से पैप जाँच और ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) जाँच कराकर सर्वाइकल कैंसर को रोका जा सकता है. इसकी रोकथाम के लिए एचपीवी वैक्सीन लेना एक और तरीका है। 9 वर्ष से 26 वर्ष के बीच की लड़कियाँ और महिलाएँ एचपीवी वैक्सीन ले सकती हैं. लड़कियों को यौन क्रिया आरम्भ करने के पहले एचपीवी वैक्सीन दिया जाए, तो यह सबसे प्रभावकारी माना जाता है

मुझे कब-कब जाँच करानी चाहिए?

21 वर्ष से 65 वर्ष तक की महिलाओं के लिए हर तीन साल पर सामान्य जाँच करानी की सलाह दी जाती है. 30 वर्ष की आयु के बाद हर पाँच वर्षों पर एचपीवी टेस्‍ट के साथ पैप टेस्‍ट या सिर्फ एचपीवी टेस्‍ट कराया जा सकता है.

क्या मुझे मेनोपॉज़ के बाद भी जाँच करानी चाहिए?

अगर आप मेनोपॉज़ के दौर से गुजर रही है, या मेनोपॉज़ हो चुका है, तब भी आपको पैप या एचपीवी टेस्‍ट कराना चाहिए। जिन महिलाओं ने किसी गैर-कैंसर व्याधि के लिए गर्भाशय पूरा काट कर निकलवा लिया है और उनका कैंसर-पूर्व पैप जांच का कोई इतिहास नहीं है, वैसी महिलाएँ अपने चिकित्सीय इतिहास या ह्यूमन पैपिलोमा वायरस होने के जोखिम के आधार पर जाँच बंद कर सकती हैं. 65-70 वर्ष की आयु होने पर महिलाएँ जांच कराना छोड़ सकती हैं, बशर्ते कि कम से कम लगातार तीन बार सामान्य पैप टेस्‍ट हुए हों और पिछले दस वर्षों में पैप टेस्‍ट में कोई असामान्यता नहीं पाई गई हो

उपर्युक्त के अलावा, निम्नलिखित चीजों से सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम में मदद मिलती है :

– किशोरावस्था के अंतिम वर्षों या बाद तक प्रथम यौन सम्भोग करने से परहेज,
– यौन क्रियाओं में सहयोगी की संख्या कम रखना,
– अनेक लोगों से सहवास करने वाले व्यक्ति के साथ सम्भोग करने से परहेज,
– जननांग में गाँठ (जेनिटल वार्ट्स) या अन्य चिन्ह दर्शाने वाले व्यक्ति के साथ सम्भोग से परहेज,
– धूम्रपान छोड़ना।

‘‘छत्रीवालीः कंडोम की निंदा न करे और सेक्स षिक्षा आवष्यक की बात करने वाली अति सतही फिल्म..’’

रेटिंगः डेढ़ स्टार

निर्माताः रौनीस्क्रूवाला

निर्देषकः तेजस विजय देउस्कर

लेखकः संचित गुप्ता व प्रियदर्षी श्रीवास्तव

कलाकारः रकुलप्रीत सिंह,सुमित व्यास, राकेष बेदी,सतीष कौषिक,डौली अहलूवालिया, राजेष तेलंग,फिरोज चैधरी,

अवधिः एक घ्ंाटा 56 मिनट

ओटीटी प्लेटफार्मः जी 5

बौलीवुड में भेड़चाल का भी दौर आता रहता है.जिसके चक्कर मंे फिल्मकार कभी कुछ नया नही सोचता.पर दावे जरुर करता है.अब ‘अजिंक्य’,‘प्रेमसूत्र’,‘बकेट लिस्ट’ जैसी मराठी फिल्मों के लेखक व निर्देषक तेजस देउस्कर पहली बार बतौर निर्देषक समाज में टैबू समझे जाने वाले कंडोम व स्कूली बच्चों को सेक्स षिक्षा देने की वकालत करने वाली फिल्म ‘‘छत्रीवाली’’ लेकर आए हैं,जो कि बीस जनवरी 23 से ओटीटी प्लेटफार्म, ‘जी 5 ’ पर स्ट्ीम हो रही है.उनका दावा है कि उन्होने एक नया सब्जेक्ट उठाने का साहस दिखाया है.जबकि हकीकत में वह कुछ भी नया नही परोस रहे हैं.

समाज में टैबू समझे जाने वाले कंडोम पर बनी 1977 में प्रदर्षित फिल्म ‘‘दूसरा आदमी’’ में  नवविवाहित ऋषि कपूर को तथा 1986 में प्रदर्षित फिल्म ‘‘ अनुभव’’ में ने शेखर सुमन को दर्षक एक मेडिकल स्टोर के सामने खड़े और कंडोम खरीदने के लिए संघर्ष करते देख चुके हैं.इन दोनो फिल्मों में मेडिकल स्टोर वाला दोस्त नजर आया था,वह उनकी शर्मिंदगी में इजाफा नहीं करता था.लेकिन फिल्मकार तेजस देउस्कर नया परोसने के नाम पर अपनी फिल्म ‘छत्रीवाली’ मे मेडिकल स्टोर के मालिक मदन चाचा (राकेष बेदी  )  कंडोम खरीदना बताते हुए कंडोम खरीदने आने वाले पुरूषों को अपनी पत्नियों के खिलाफ जंग छेड़ने के लिए उकसाते हैं…क्या इसे जाजय कहा जाए? षायद फिल्मकार तेजस विजय देउस्कर को यह भी पता नही है कि आज हम 2023 मे जी रहे हैं,जहां स्कूली बच्चों के बैग में भी कंडोम मिल रहे हैं.

इतना ही नही कुछ दिन पहले ही अपारषक्ति खुराना की फिल्म ‘हेलमेट’,नुसरत भरूचा की फिल्म ‘जनहित में जारी’ के अलावा  अविका गोर की फिल्म ‘‘कहानी रबर बैंड की’’ में कंडोम,सेक्स षिक्षा आदि की बातें की जा चुकी हैं,पर इन फिल्मों को दर्षकों ने नकार दिया था,क्योंकि यह फिल्में भी सही ढंग से नही बनी थी.

  कहानीः

फिल्म ‘छत्रीवाली’ की कहानी के केंद्र मंे करनाल,हरियाणा की सान्या धींगरा (रकूल प्रीत सिंह ) हैं, जो कि अपनी मां धींगरा आंटी (डौली अहलूवालिया ) के साथ रह रही है.केमिस्ट्ी में महारत रखने वाली सान्या धींगरा,रतन लांबा (सतीष कौषिक) की कंडोम बनाने वाली कंपनी में नौकरी कर रही हैं.बस में सान्या की मुलाकात रिषि कालरा (  सुमित व्यास) से होती है.रिषि संस्कारी है.उसकी ‘कालरा पूजा भ्ंाडार’ नामक धार्मिक पूजा के सामनांे की विक्री करने वाली दुकान है.रिषि का बड़ा भाई राजन कालरा (राजेष तेलंग) एक कालेज में जीव विज्ञान के प्रोफेसर हैं,कड़क स्वभाव के चलते उनकी पत्नी निषि(प्राची शाह पंड्या) व बेटी मिनी(रीवा अरोड़ा) डरती है.रिषि के माता पिता भी है.पूरा धार्मिक व संस्कारी परिवार है.कंडोम का उपयोग करना गलत मानते हैं.करनाल षहर में मदन चाचा (राकेष बेदी  ) की अपनी दवा की दुकान हैं,जो कि कंडोम को अष्लील मानते हैं.उनकी राय में कंडोम खरीदना अष्लील संस्कृति है.

सान्या धींगरा पहली मुलाकात मे ही रिषि कालरा को दिल दे बैठती है.सान्या,रिषि के परिवार से झूठ बोलती है कि वह मेहता छत्री कंपनी में नौकरी करती है.षादी के बाद सुहागरात में रिषि कंडोम का उपयोग करने से इंकार कर देता है.पर सान्या उसके मन से कंडोम के प्रति विष्वास जगाकर धीरे धीरे कंडोम का उपयोग करवाना षुरू कर देती है.फिर वह आस पड़ोस की महिलाओं को चोरी छिपे कंडोम का उपयेाग करने के  बारे में बताती है.जब ढेर सारे मर्द मदन की दुकान पर कंडोम खरीदने जाते हैं,तो मदन चाचा सभी को हड़काते हंै कि वह लोग औरतो की बातांे में आकर अष्लीलता फैलाने वाला काम कर रहे हैं.इसी बीच एक अखबार में रतन लांबा की कंपनी का ही एक मुलाजिम सान्या की तस्वीर छपवा देता है कि वहह कंडोम कंपनी में काम करती है.उस अखबार की प्रति व कई पुरूषों के साथ मदन चाचा ,कालरा के घर पहुॅचकर खरी खोटी सुनाते हैं.तब राजन कालरा आदेष देते हैे कि सान्या नौकरी छोड़ दे.वह उसे षिक्षक की नौकरी दिलो देंगें.पर सान्या नौकरी छोड़ने की बजाय पति का घर छोड़ देती है.उसके बाद कई घटनाक्रम तेजी से बदलते हैं.अंततः सान्या नौकरी के साथ ही अपने परिवार का भी साथ पा ही जाती है.

लेखन व निर्देषनः

फिल्म की कहानी व पटकथा काफी कमजोर व सतही है,जिसके चलते कइ्र दृष्य जबरन ठॅंूसे हुए लगते हैं.फिल्म की गति भी काफी धीमी है.कमजोर पटकथा के चलते रकुल की सतही क्रांति का कोई असर नही पड़ता.तेजस देउस्कर ने फिल्म में कंडोम की फैक्टरी का दौरा तो करा दिया,पर ऐसा कुछ नहीं दिखाया,जिससे उपभोक्ताओं में घृणा पैदा न हो.सुस्त यौवन जिज्ञासा के बीच स्कूल में यौन शिक्षा का प्रचार करने के जो दृष्य रखे गए हैं,वह अज्ञानी इंसान द्वारा लिखे गए नजर आते हैं.सान्या और स्कूल के प्रिंसिपल के बीच यौन षिक्षा को लेकर पूरी बातचीत लेखक व निर्देषक की अज्ञानता को उजागर करती है.फिल्म इस बात पर कोई रोषनी नही डालती कि मेडिकल की दुकान का मालिक कंडोम बेचने व खरीदने के खिलाफ क्यो है? योनि स्वास्थ्य के बारे में जानना महत्वपूर्ण है और बच्चों को योनि स्वच्छता के बारे में जीवन की शुरुआत में ही सिखाया जाना बेहतर है.इस संदेष को भी यह फिल्म दर्षकों तक पहुॅचाने में असफल रहती है.जबकि फिल्म में रकूल प्रीत सिंह को एक दृष्य में स्कूली बच्चों को लड़के व लड़िकयों  के अंगो,ओवरी व प्रजनन की जानकारी देते हुए दिखाया गया है.पर यह पूरा दृष्य बहुत ही बचकाना है.फिल्म में गर्भपात गोलियों और गर्भपात के दुः परिणामों के बारे में संवेदनषील तरीके से बात की गयी है.फिल्म के कुछ संवाद काफी घटिया है.बतौर निर्देषक तेजस देउस्कर प्रभावित नही कर पाते.फिल्म का गीत संगीत प्रभावहीन है.

अभिनयः

कंडोम कंपनी में नौकरी करने वाली सान्या के किरदार में रकुल प्रीत सिंह फिल्में खूबसूरत नजर आयी हैं.वह काॅमेडी दृष्यों में जमी हैं,मगर गंभीर दृष्यो में असफल रही है.संवाद अदायगी में कई जगह वह मात खा जाती हैं.उनकी बौडीलैगवेजभी संवादों से मात नही खाती.रिषि के किरदार में सुमित व्यास प्रभावित नहीं करते.उनके अभिनय में अब दोहराव ही नजर आता है. राजन उर्फ भाईजी के किरदार में राजेष तेलंग के किरदार को लेखक ने ठीक से गढ़ा ही नहीं,इसलिए वह कई जगह कन्फ्यूज नजर आते हैं.डौली अहलूवालिया की प्रतिभा को जाया किया गया है.

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