BIGG BOSS: अपनी हरकतों से सबसे बड़े ‘ड्रामेबाज’ बन बैठे ये कंटेस्टेंट्स,देखें लिस्ट

सलमान खान के धमाकेदार शो ‘बिग बॉस’ ने लोगों का दिल जीतने में कोई कसर नहीं छोड़ी है. शो में हर सीजन अलग-अलग कंटेस्टेंट्स और उनकी पर्सनैलिटी देखने को मिलती है. कुछ कंटेस्टेंट्स जहां अपने अंदाज से लोगों का दिल जीत लेते हैं तो वहीं कुछ पूरे सीजन लोगों की नजरों में चढ़े रहते हैं. इतना ही नहीं, बिग बॉस के कुछ सदस्यों को ‘सबसे बड़े ड्रामेबाज’ तक का टैग मिल चुका है. इस लिस्ट में जहां पहले राखी सावंत और शहनाज गिल का नाम शामिल था तो वहीं सूची में शालीन भनोट का भी नाम जुड़ चुका है. तो चलिए एक नजर डालते हैं बिग बॉस के सबसे बड़े ‘ड्रामेबाज’ कंटेस्टेंट्स पर-

1. शालीन भनोट (Shalin Bhanot)

शालीन भनोट ने बीते दिन के एपिसोड में बिग बॉस के सामने घर से बाहर निकलने के लिए काफी कुछ कहा. इतना ही नहीं, उन्होंने अपनी बीमारी का भी जिक्र किया। उनकी हरकतों से बिग बॉस तक परेशान हो गए थे. वहीं उनका यह अंदाज देख लोगों ने भी उन्हें ‘ड्रामेबाज’ का टैग दे दिया.

 

 

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2. राखी सावंत (Rakhi Sawant)

राखी सावंत को बिग बॉस के सबसे बड़े ड्रामेबाज कंटेस्टेंट का टैग मिल चुका है. लोगों का मानना है कि वह हर सीजन में जबरदस्ती की ओवरएक्टिंग करती हैं और ड्रामा दिखाती हैं.

 

 

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3. रश्मि देसाई (Rashami Desai)

रश्मि देसाई को सबसे बड़े ड्रामेबाज का टैग किसी और ने नहीं बल्कि खुद उनकी को-कंटेस्टेंट शहनाज गिल ने दिया था. शहनाज ने उन्हें झगड़े के दौरान ‘बेवकूफ औरत’ तक कहा था.

 

 

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4. डॉली बिंद्रा (Dolly Bindra)

बिग बॉस 4 का हिस्सा रहीं डॉली बिंद्रा को भी उनकी हरकतों के लिए ‘ड्रामेबाज’ कहा गया था. वह अक्सर कंटेस्टेंट्स से झगड़ा करती हुई दिखाई देती थीं. उनका डायलॉग ‘बाप पर मत जाना’ खूब मशहूर भी हुआ था.

 

 

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5. निमृत कौर आहलुवालिया (Nimrit Kaur Ahluwalia)

‘बिग बॉस 16’ की निमृत कौर आहलुवालिय अपनी हरकतों के लिए खूब ट्रोल होती हैं. लोगों का मानना है कि जब भी वह घर से बेघर होने के लिए नॉमिनेट होती हैं तो रोना-पीटना शुरू कर देती हैं. इतना ही नहीं, मंडली का कोई सदस्य अगर प्रियंका से बात करता है तो भी उन्हें परेशानी होती है.

 

 

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6. इमाम सिद्दीकी (Imam Siddiqui)

इमाम सिद्दीकी ने बिग बॉस में कई बार ड्रामेबाजी की थी. उन्होंने बिग बॉस को खुद को जलाने तक की धमकी दी थी. साथ ही को-कंटेस्टेंट्स के सामने दावे किये थे कि उन्होंने शाहरुख खान जैसे सितारों को बनाया है.

7. शहनाज गिल (Shehnaaz Gill)

 

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‘बिग बॉस 13’ कंटेस्टेंट शहनाज गिल को ‘ड्रामेबाज’ के साथ-साथ ‘नौटंकी’ और ‘मतलबी’ का भी टैग मिल चुका है. गेम के लिए वह एक एपिसोड में सिद्धार्थ का साथ छोड़ पारस और माहिरा के साथ आ गई थीं, जिसके लिए दर्शकों ने उन्हें जमकर ट्रोल किया था. इतना ही नहीं, उनकी कुछ हरकतें भी फैंस को पसंद नहीं आती थीं.

8. प्रियंका चाहर चौधरी (Priyanka Chahar Choudhary)

 

प्रियंका चाहर चौधरी के यूं तो कई चाहने वाले हैं, लेकिन खुद अब्दु रोजिक ने उन्हें सीजन का सबसे बड़ा ‘ड्रामेबाज’ कहा था. इतना ही नहीं, अपने एक इंटरव्यू में अब्दु ने प्रियंका को काले दिल वाला भी कहा था.

सुशांत सिंह राजपूत का आखिरी वीडियो वायरल, वीडियो देख फैंस हुए भावुक

दिवंगत एक्टर सुशांत सिंह राजपूत आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी यादें हमेशा ही उनके फैंस के दिलों में जिंदा रहेंगी. एक्टर के निधन ने पूरी इंडस्ट्री को हिलाकर रख दिया था. 14 जून, 2020 को आकस्मिक निधन से पूरे देश में उनके फैंस हैरान रह गए थे. सुशांत के निधन के बाद उनकी मौत को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. आज उनकी मौत को दो साल पूरे हो गए हैं और फैंस को अभी भी उनकी मौत से जुड़े सवालों के जवाब नहीं मिले हैं.

आज सुशांत सिंह राजपूत का जन्मदिन है. सुशांत अगर आज जिंदा होते वो अपना 37वां जन्मदिन मना रहे होते. एक्टर के निधन के बाद उनका आखिरी वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. इस वीडियो को देखने के बाद आपका भी दिल दहल जाएगा.

वायरल हो रहा है सुशांत का आखिरी वीडियो

सुशांत सिंह राजपूत का जन्म 21 जनवरी, 1986 को पटना में हुआ था. एक्टर की मौत के बाद उनका एक वीडियो वायरल हो रहा है, जो उनके आखिरी दिनों का बताया जा रहा है. सुशांत का ये वीडियो महज कुछ सेकेंड का है, जिसमें वो काफी परेशान नजर आ रहे हैं. एक्टर की हालत देखकर फैंस भी काफी परेशान और दुखी नजर आ रहे हैं.

 

 

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एक्टर की हालत देख परेशान हुए फैंस

सुशांत सिंह राजपूत के वायरल हो रहे वीडियो में आप देख सकते हैं कि वो परेशान दिख रहे हैं. साथ ही जब उनसे कोई सवाल किया जा रहा है तो वो अजीब तरह से बड़बड़ाते दिख रहे हैं. उनकी हालत देखकर साफ पता चल रहा है कि एक्टर अपनी होश में नहीं हैं. उनके बाल बिखरे हुए हैं और उनकी जबान लड़खड़ाती ​नजर आ रही है. इस दौरान सुशांत ने ग्रे कलर की सिंपल सी टी-शर्ट कैरी की है.

 

 

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वीडियो देख भड़के फैंस

सुशांत सिंह राजपूत का ये वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. इस वीडियो को देखने के बाद फैंस काफी नाराज दिख रहे हैं. साथ ही सुशांत के फैंस उन्हें इंसाफ दिलाने की बात करते दिख रहे हैं. वहीं कई यूजर्स ने सुशांत की इस हालत का जिम्मेदार उनकी एक्स गर्लफ्रेंड और अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती को बताया है.

फर्टिलिटी और जिंदगी को कैसे प्रभावित करता है तनाव? जानें यहां

श्रीमती नैना अरोरा फर्टिलिटी क्लीनिक में अपनी बारी आने का इन्तजार कर रही थी तभी उन्हें एक पोस्टर दिखा जिस पर समझदारी (माइंडफुलनेस) के मह्त्व के बारे में लिखा गया था. इसने अचानक से नैना का ध्यान अपनी ओर खींचा. वह पिछले 2 साल से गर्भधारण की कोशिश कर रही थी लेकिन दूसरे सेमेस्टर में ही उनका बच्चा पेट में ख़राब हो जाता था.  इसे लेकर वह बहुत चिंतित थी क्योंकि वह नही जानती थी कि इसका परिणाम क्या होगा. उसने उत्साहपूर्वक माइंडफुलनेस प्रोग्राम में यह सोचते हुए साइन इन किया कि इससे उसकी समस्या को हल करने में सहूलियत मिलेगी.

ऐसा समय जब अनिश्चितता और डर हर तरफ फैला हुआ है तो माइंडफुलनेस रोजमर्रा की जिंदगी का एक अभिन्न अंग बन गया है. तनाव के परिणामस्वरूप न केवल गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं, बल्कि कई फर्टिलिटी और फर्टिलिटी संबंधी समस्याएं भी होती हैं. दुनिया भर के फर्टिलिटी एक्सपर्ट माइंडफुलनेस के लिए सलाह देते हैं जिसमें योग, मेडिटेशन और सीखने की व्यवहार तकनीक शामिल होती है.  इन तकनीको में इलाज के बेहतर परिणाम के लिए नकारात्मक विचारों पर काबू पाना शामिल होता है.

फर्टिलिटी और स्ट्रेस (तनाव) के पीछे का विज्ञान

इस बारें में कई स्टडी हुई है जिससे पता चला है कि महिला के जीवन में बहुत ज्यादा तनाव उनके गर्भवती होने की संभावनाओं को प्रभावित कर रहा है. हमारा शरीर भी तनाव के स्तर को समझता है. यही एक कारण है यह महिला के गर्भधारण की संभावना को प्रभावित करता है क्योंकि बच्चा पैदा करने के लिए तनाव अच्छा नही होता है. इसके अलावा, यह भी देखा गया है कि तनाव से पीड़ित महिला अक्सर कम इन्टीमेट होती है और जीवन की चुनौतियों से निपटने के लिए वह अक्सर शराब और तंबाकू का सेवन करने लगती है. और इस तरह की आदत महिला के गर्भवती होने की संभावना को और भी बदतर बना देता है.

वहीं ग्रुप थेरेपी, व्यक्तिगत संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी, और गाइडेड इमेजरी जैसी रिलैक्सेशन तकनीकों से तनाव कम करने से कुछ माँ बनने में असफल  महिलाओं को गर्भवती होने में मदद मिली है. इसके पीछे कारण यह है कि कोर्टिसोल जैसे तनाव हार्मोन मस्तिष्क और अंडाशय के बीच सिग्नलिंग को बाधित करते हैं, जो ओव्यूलेशन को बढ़ा सकते हैं. लेकिन जब हम माइंडफुलनेस की प्रैक्टिस करते हैं तो इस समस्या से निजात पाई जा सकती है और इसका रिजल्ट सकारात्मक आ सकता है.

स्ट्रेस का निवारण करना

सीडीसी के अनुसार  माँ बनने की उम्र वाली 10 में से 1 महिला को गर्भवती होने में परेशानी महसूस होती है या बिना किसी परेशानी के वह गर्भधारण नहीं कर पाती है. वहीं जब महीनो के बाद भी गर्भधारण नहीं हो पाता है तो फिर तनाव हावी होने लगता है. यह वही समय होता है जब दिमाग और शरीर को आराम देने वाले प्रोग्राम मददगार साबित होते हैं. इन प्रोग्राम का लक्ष्य विभिन्न एप्रोच के जरिये, जिसमे बातचीत करने की थेरेपी शामिल होती, तनाव को कम किया जाए. कई महिला इस नकारात्मक विचार से कि ‘वे कभी माँ नहीं बन सकती है’ से भी पीड़ित हो सकती है. इसके लिए वे खुद को दोष दे सकती है.

एक्सरसाइज

तनाव कम करने और प्रजनन क्षमता बढ़ाने के लिए शारीरिक रूप से एक्टिव रहना बहुत जरूरी होता है.  मध्यम रूप से काम करना – उदाहरण के लिए सप्ताह में 1 से 5 घंटे के लिए गतिविधियों में लिप्त रहने से गर्भधारण की संभावना बढ़ जाती है. साथ ही जो महिलाएं ज्यादा मेहनत वाला काम करती हैं उनमे भी गर्भवती होने की संभावना कम हो जाती है.

वजन

तनाव होने से हम भावनात्मक आराम के लिए बहुत ज्यादा चीजें खाने लगते हैं. ज्यादा वजन या मोटापा होने से गर्भवती होना मुश्किल हो जाता है. कुछ रिसर्च बताते हैं कि जो महिलाएं मोटापे से ग्रस्त हैं उन्हें गर्भधारण करने में अन्य महिलाओं की तुलना में तीन गुना ज्यादा परेशानी हो सकती है.

स्वस्थ डाईट

हमारे तनावपूर्ण समय के दौरान हम प्रोसेस्स्डए शुगर से भरपूर खाद्य पदार्थों को खाने लगते हैं. लेकिन अध्ययनों ने साबित कर दिया है कि जो महिलाएं साबुत अनाज, ओमेगा-3 फैटी एसिड, मछली और सोया से भरपूर मेडीटेरियन डाईट का पालन करती हैं, उनके गर्भधारण की संभावना उन लोगों की तुलना में ज्यादा होती है जो बहुत ज्यादा फैट वाले, भारी प्रोसेस्स्ड डाईट खाती हैं.

नोवा आईवीऍफ़ फर्टिलिटी, नई दिल्ली के फर्टिलिटी कंसल्टेंट डॉ अस्वती नायर 

जानें क्या हैं मल्टीपल मेकअप प्रोडक्ट्स के फायदे

अगर आप Makeup पर बहुत ज्यादा खर्च नहीं करना चाहतीं और कम समय में जल्द से जल्द मेकअप करना चाहती हैं, तो मल्टीपल मेकअप प्रोडक्ट्स को अपनी पहली पसंद बना सकती हैं. ये मल्टी टास्किंग होने के साथसाथ काफी किफायती भी हैं.

क्यों खरीदें मल्टीपल मेकअप प्रोडक्ट्स

– मल्टीपल मेकअप प्रोडक्ट्स का चुनाव हर तरह से फायदेमंद है. 1 के दाम में 2 प्रोडक्ट्स खरीदे जा सकते हैं जैसे अगर मौइश्चराइजर ₹120 और सनस्क्रीन ₹100 का है, तो सनस्क्रीन युक्त मौइश्चराइजर ₹150 में मिल सकता है, जिस में मौइश्चराइजर और सनस्क्रीन दोनों के गुण होते हैं.

– जितना समय एक मेकअप प्रोडक्ट लगाने में लगता है उतने समय में 2 लगाए जा सकते हैं जैसे अगर चेहरे पर पहले मौइश्चराइजर फिर फाउंडेशन लगाती हैं तो मौइश्चराइजर लगाने में 1 और फाउंडेशन लगाने में 2 मिनट लगते हैं, जबकि फाउंडेशन युक्त मौइश्चराइजर सिर्फ

1 मिनट में पूरे चेहरे पर लगा सकती हैं.

– मल्टीपल मेकअप प्रोडक्ट्स को कैरी करना भी आसान है. अलग से लिपस्टिक और आईशैडो का पैलेट कैरी करने से बैग की काफी जगह भर जाती है. जबकि लिपस्टिक कम आईशैडो पैलेट कम जगह में आसानी से ऐडजस्ट होने के साथसाथ लिप और आई मेकअप दोनों के काम आता है.

कौन से मल्टीपल मेकअप प्रोडक्ट खरीदें

अपने वैनिटी बौक्स में इन मल्टीपल मेकअप प्रोडक्ट्स को दें खास जगह.

सनस्क्रीनयुक्त मौइश्चराइजर

मौइश्चराइजर और सनस्क्रीन रोजाना लगाना जरूरी है. मौइश्चराइजर त्वचा को कोमलता प्रदान करता है, तो सनस्क्रीन सूर्य की हानिकारक किरणों से त्वचा की हिफाजत करता है. ऐसे में अलग से मौइश्चराइजर और सनस्क्रीन खरीदने और लगाने के बजाय सनस्क्रीन युक्त मौइश्चराइजर खरीदें, जो मौइश्चराइजर के साथसाथ सनस्क्रीन का भी काम करे. ओले कंप्लीट, लोरियल पैरिस, गार्नियर स्किन रिन्यू जैसे सनस्क्रीनयुक्त मौइश्चराइजर खरीद सकती हैं.

क्लींजर कम टोनर

स्वस्थ त्वचा के लिए जितनी जरूरत क्लींजर की होती है उतनी ही टोनर की भी होती है. ऐसे में क्लींजर और टोनर दोनों खरीदने के बजाय क्लींजर कम टोनर खरीदें यानी ऐसा क्लींजर खरीदें, जिस में टोनर के भी गुण हों ताकि उस में निहित क्लींजर चेहरे को क्लीन करे और टोनर त्वचा के खुले रोमछिद्रों को बंद कर त्वचा में कसाव लाए.

टिंटेड मौइश्चराइजर

पहले चेहरे पर मौइश्चराइजर उस के बाद फाउंडेशन अप्लाई करने से बचना चाहती हैं, तो मेकअप बैग में टिंटेड मौइश्चराइजर को जगह दे सकती हैं. इस में मौइश्चराइजर के साथसाथ फाउंडेशन के भी गुण होते हैं. यह रूखी त्वचा को मुलायम बनाता है और इस में पाया जाने वाला फाउंडेशन मेकअप के लिए परफैक्ट बेस भी रैडी करता है. कुछ टिंटेड मौइश्चराइजर में सनस्क्रीन भी होता है. अच्छे परिणाम के लिए क्लीनिक, मैरी के, नार्स जैसे टिंटेड मौइश्चराइजर खरीद सकती हैं.

बीबी/सीसी/डीडी क्रीम

मौइश्चराइजर, सीरम, सनस्क्रीन, प्राइमर, कंसीलर, फाउंडेशन आदि को बारीबारी से लगाने से बचना चाहती हैं, तो एक ही बार में सब कुछ एकसाथ बीबी या सीसी क्रीम से लगाएं. अगर इन दोनों में से किसी एक का इस्तेमाल करने के बाद भी ऐंटीऐजिंग क्रीम लगानी पड़ रही है, तो डीडी क्रीम खरीदें. इस से अलग से ऐंटीऐजिंग क्रीम नहीं लगानी होगी. बीबी और सीसी क्रीम के लिए पौंड्स, मेबलिन, लैक्मे आदि का चुनाव कर सकती हैं.

पैंसिल आईलाइनर

अपने मेकअप बौक्स में आईलाइनर और काजल दोनों रखने के बजाय एक पैंसिल आईलाइनर खरीदें. इस का इस्तेमाल काजल की तरह निचली आईलाइनर पर लगाने के लिए कर सकती हैं और आईलाइनर की तरह आंखों की निचली और ऊपरी दोनों आईलिड पर भी लगा सकती हैं. इस तरह एक कौस्मैटिक से 2 काम कर सकते हैं.

टु साइडेड पैंसिल

बाजार में ड्यूअल पैंसिल की भी काफी डिमांड है. यह पैंसिल 2 मेकअप प्रोडक्ट्स का काम करती है. इस के एक ओर लिपलाइनर तो दूसरी ओर आईब्रो पैंसिल होती है. इसी तरह कुछ पैंसिल्स के एक तरफ लिपलाइनर तो दूसरी ओर आईलाइनर होता है यानी 1 से 2 का काम निकाला जा सकता है.

ग्लौसी लिपस्टिक

चूंकि आप को मेकअप का ग्लौसी इफैक्ट पसंद है, इसलिए आप होंठों पर लिपस्टिक के बाद लिपग्लौस लगाती हैं, तो अपने होंठों पर 2 मेकअप प्रोडक्ट्स लगाने में लगने वाले समय को बरबाद करने के बजाय ग्लौसी लिपस्टिक खरीदें. इसे लगाने के बाद आप को लिपस्टिक के ऊपर फिर से ग्लौस लगाने की जरूरत नहीं होगी.

कलर टिंट

लिपस्टिक के साथ ही ब्लशर का काम करने वाले कलर टिंट की भी बाजार में ढेरों वैराइटी उपलब्ध हैं. यह आप को अलगअलग कलर के साथसाथ मैट और ग्लौसी 2 डिफरैंट टैक्स्चर में भी आसानी से मिल जाएगा. ऐसे में आप मौके के अनुसार शेड और टैक्स्चर का चुनाव कर सकती हैं.

मल्टीपर्पज पैलेट

अगर आप डिफरैंट शेड की लिपस्टिक या आईशैडो लगाने की शौकीन हैं और उस के लिए लिपस्टिक या आईशैडो पैलेट खरीदने का मन बना रही हैं, तो सिर्फ लिपस्टिक पैलेट या आईशैडो पैलेट खरीदने के बजाय मल्टीपर्पज पैलेट खरीदें, जिस का इस्तेमाल लिपस्टिक और आईशैडो दोनों के लिए कर सकती हैं.

कलर स्टिक

बाजार में ऐसा भी मल्टीपर्पज मेकअप प्रोडक्ट है, जिसे थ्री इन वन कह सकते हैं यानी होंठों पर बतौर लिपस्टिक, चीक्स पर ब्लशऔन और आंखों पर आईशैडो की तरह इसे लगाया जा सकता है. इसे कलर स्टिक भी कहते हैं. ज्यादा न सही लेकिन एक कलर स्टिक आप भी खरीद सकती हैं. लेकिन इस बात का ध्यान रहे कि कलर स्टिक लाइट शेड में हो, क्योंकि डार्क शेड आप लिपस्टिक के लिए यूज कर सकती हैं, लेकिन आईशैडो और ब्लशऔन के लिए डार्क शैड जरूरी नहीं कि आप पर सूट करे.

किफायती मेकअप टिप्स

– सिंगल शेड की 3-4 अलगअलग लिपस्टिक खरीदने के बजाय लिपस्टिक पैलेट खरीदें. इस में आप को कम से कम 12 लिपस्टिक के शेड्स मिल जाएंगे और वह भी कम दाम में.

– आईशैडो के डिफरैंट शेड खरीदने के बजाय आईशैडौ पैलेट खरीदें. इस में आप को 8 से 16 आईशैडो शेड आसानी से मिल जाएंगे.

– चीकबोंस को हाईलाइट करने के लिए ब्लशर पैलेट खरीदें. एक पैलेट में आप को कम से कम 6 से 12 कलर मिल जाएंगे.

– अलग से फाउंडेशन, आईशैडो, लिपस्टिक खरीदने के बजाय मेकअप किट भी खरीद सकती हैं. इस में ए टु जैड मेकअप प्रोडक्ट्स होते हैं और यह काफी सस्ती भी मिलती है.

चिकन चंगेजी रेसिपी

सर्दियों में नौनवेज खाने और बनाने के अलग ही मजा होता है तो आज हम के लिए लेकर आए है ऐसे ही नौनवेज डिश जिसे आप सर्दियों जल्दी पका भी सकती है और खा भी सकती है.

सामग्री:

– चिकन लेग पीस (800ग्रा)

– टमाटर की प्यूरी ( 01 कप)

– तेल ( 1/2 कप)

– दही (04 बड़े चम्मच)

– लौंग (03 नग)

– छोटी इलाइची (02 नग)

– बड़ी इलाइची ( 01 नग)

– दालचीनी ( 01 स्टिक)

– सूखी लाल मिर्च ( 3 नग)

– प्याज (बारीक कटी हुई)

– अदरक-लहसुन पेस्ट ( 02 छोटे चम्मच)

– जीरा पाउडर (01 छोटा चम्मच)

– हल्दी पाउडर ( 01 छोटा चम्मच)

– धनिया पाउडर ( 01 छोटा चम्मच)

– गरम मसाला पाउडर (1/2 छोटा चम्मच)

– केवड़ा जल ( 01 बड़ा चम्मच)

– नमक (स्वादानुसार)

चिकन चंगेजी बनाने की विधि :

– सबसे पहले एक फ्राई पैन में तेल गर्म करें.

– गर्म तेल में लेग पीस डालें अैर डीप फ्राई कर लें.

– अब एक दूसरा पैन लेकर उसमें 6 बड़े चम्मच तेल डाल कर गर्म करे.

– तेल गर्म होने पर इसमें बड़ी इलाइची, छोटी इलाइची, दालचीनी, लौंग, सूखी लाल मिर्च और प्याज डालें   और अच्छी तरह से फ्राई कर लें.

– इसके बाद पैन में अदरक-लहसुन का पेस्ट और टमाटर की प्यूरी डालें और इन्हें भी 1 मिनट के लिए   फ्राई कर लें.

– इसके बाद पैन में हल्दी पाउडर, जीरा पाउडर, धनिया पाउडर डालें और चलाते हुए भूनें.

– जब सारे मसाले अच्छी तरह से भुन जाएं, पैन में दही और गरम मसाला डाल दें और चलाते हुए भूनें.

– जब मसाले तेल छोड़ने लगें, इसमें लेग पीस डाले कर चला लें.

– अगर आपको शोरबा पसंद है, तो इसमें थोड़ा सा पानी डाल दें और 3 मिनट ढ़क कर पकायें.

– इसके बाद इसमें केवड़ा जल डाल दें और 1 मिनट तक पकाने के बाद गैस बंद कर दें.

BB 16 Elimination: क्या सलमान खान करेंगे सौंदर्या शर्मा को शो से बाहर!

बिग बॉस 16 में इस बार घर से बेघर होने के लिए चार कंटेस्टेंट नॉमिनेटेड हैं. इसमें सुम्बुल तौकीर खान, शालीन भनोट, टीना दत्ता और सौंदर्या शर्मा का नाम शामिल है. अब खबर आ रही है कि इस बार भी कोई फीमेल कंटेस्टेंट ही शो से एलिमिनेट होगी. इस हफ्ते के वोटिंग ट्रेंड्स सामने आ चुके हैं और साथ ही उस कंटेस्टेंट का नाम भी जिसे इस बार घर में सबसे कम वोट्स मिले हैं.

 

 

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ये कंटेस्टेंट होगा बाहर

बिग बॉस 16 के वोटिंग ट्रेंड्स पर नजर डालें तो फिलहाल सुम्बुल तौकीर खान को घर में सबसे ज्यादा वोट मिले हैं और इसके साथ ही वो टॉप पर पहुंच गई हैं. सुम्बुल के बाद नंबर है टीना और शालीन का. वोटिंग ट्रेंड्स में आखिरी नंबर पर आईं हैं सौंदर्या शर्मा. इन्हें इस हफ्ते सबसे कम वोट मिले हैं. तो वहीं लोगों को लगाता है कि मेकर्स आखिरी तक शालिन और टीना को उनके ‘कन्फ्यूज्ड लव एंगल’ के लिए नहीं निकालेंगे.

 

 

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सुम्बुल को मिले सबसे ज्यादा वोट्स

सुम्बुल तौकीर खान इस हफ्ते नॉमिनेट थीं और उन्हें अपने दोस्त एमसी स्टेन, निमृत और शिव ठाकरे के फैन्स से भी अच्छी खासी संख्या में वोट मिल रहे हैं. तो इमली फेम एक्ट्रेस इस हफ्ते के लिए सेफ हैं. इन सब बातों को देखते हुए यह साफ है कि बिग बॉस 16 में सौंदर्या का सफर इस हफ्ते खत्म हो सकता है. अगर वह घर जाती हैं तो ये देखना और भी दिलचस्प होगा कि अर्चना गौतम का गेम किस तरफ जाता है.

निमृत बनीं पहली फाइनलिस्ट

दूसरी तरफ इस निमृत कौर अलहूवालिया शो की पहली फाइनलिस्ट बन गई है और उनकी और शिव की दोस्ती के बीच दरारा भी आ गई है. मंडली में खलबली इस बात से मच गई कि शिव ने निमृत की जगह शो में प्रियंका को स्ट्रॉन्ग कंटेस्टेंट बताया था. जिसके बाद निमृत, शालीन को गले लगाती नजर आईं जिसे देखकर शिव और स्टैन जल गए.

YRKKH : अक्षरा को देख अभिमन्यु हुआ शॉक, शो मे आएगा बड़ा ट्विस्ट

टीवी सीरियल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है (Yeh Rishta Kya Kehlata Hai) दर्शकों के दिलों पर राज कर रहा है. इस सीरियल में प्रणाली राठौड़ (Pranali Rathod) और हर्षद चोपड़ा (Harshad Chopda) की जोड़ी नजर आ रही है. दोनों अक्षरा और अभिमन्यु का किरदार निभा रहे हैं. साथ ही जय सोनी भी अहम भूमिका निभा रहे हैं. इस सीरियल में छह साल के लीप के बाद अक्षरा और अभिमम्यु का आमना-सामना हो चुका है. बीते एपिसोड में देखने को मिला था कि अभी अक्षु के घर पर डिनर करने पहुंचता है और यहां पर दोनों एक-दूसरे को देखकर हैरान रह जाते हैं.

 

नॉर्मल रहने की कोशिश करेंगे अक्षरा-अभिमन्यु

टीवी सीरियल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ के अपकमिंग एपिसोड में देखने को मिलेगा कि अक्षरा और अभिमन्यु डिनर टेबल पर एक-दूसरे के साथ नॉर्मल रहने की कोशिश करेंगे. वहीं, इन सबके बीच अभिनव की खुशी का ठिकाना नहीं होगा, क्योंकि वह अभिमन्यु को अपने घर पर देखकर बहुत खुश है. वह खुद अभी को खाना परोसता है. दूसरी तरफ अक्षरा अपने बेटे अभीर में बिजी होती है. हालांकि, अभिमन्यु, अक्षु-अभीर और अभिनव को साथ देखकर कम्फर्टेबल हो जाता है.

 

अक्षरा के घर से जल्द निकलेगा अभिमन्यु

कहानी में ज्यादातर सीन्स टेबल के आसपास ही बीत जाएंगे. सीरियल में देखने को मिलेगा कि अक्षु को देखने को बाद अभिमन्यु जल्द से जल्द उस घर से जाने की कोशिश करेगा. लेकिन अभिनव ऐसा होने नहीं देता. इसी वजह से अभिमन्यु खाना खाने के तुरंत बाद वहां से निकल जाता है. हालांकि, इससे पहले वह तीनों को गिफ्ट भी देता है. साथ ही अभी अभिनव को उसके पैसे भी देता है. लेकिन अभिमन्यु के हाथ से कैश अक्षरा लेती है.

 

अभिनव को सच बताने को कोशिश करेगी अक्षरा

‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ के अपकमिंग एपिसोड में आगे देखने को मिलेगा कि अभिमन्यु अक्षरा के घर से बाहर निकलने के बाद काफी ज्यादा परेशान हो जाता है. उसे सारी पुरानी बातें याद आती हैं. दूसरी तरफ अक्षरा भी शॉक में गेट पर खड़ी रहती है. वहीं, जब वह अंदर आती है तो अभिनव को अभिमन्यु के बारे में बताने की कोशिश करती है. लेकिन ऐसा नहीं कर पाती, जिस वजह से वह और ज्यादा परेशान हो जाती है. हालांकि, कहानी में अक्षरा और अभिमन्यु का आमना-सामना एक और बार होगा.

‘‘सिर्फ औरतों के प्रति ही नहीं, बल्कि आज के वक्त में लड़कों के लिए भी आवाज उठाना चाहिए.’’ -रिद्धि डोगरा

मषहूर अदाकारा रिद्धि डोगरा पिछले 15 वर्षों से अभिनय जगत में काम कर रही हैं,जबकि वह अभिनेत्री बनना नहीं चाहती थी.वह तो डंास के षौक के चलते षाॅमक डावर से डांस की ट्ेनिंग ले रही थी.उसके बाद उन्हे एक चैनल पर नौकरी मिल गयी.पर एक दिन नौकरी छोड़ दी और अचानक दिया टोनी सिंह ने उन्हे सीरियल ‘‘मर्यादा’’ में अभिनय करने का अवसर दे दिया.उसके बाद से उन्होने पीछे मुड़कर नहीं देखा.कई टीवी सीरियलांे में अभिनय करने के अलावा वह ‘नच बलिए’ और ‘खतरों के खिलाड़ी’ जैसे रियालिटी षो का भी हिस्सा बनी.फिर वेब सीरीज ‘असुर’,‘मैरीड ओमन’ व ‘पिचर्स’ में भी नजर आयीं.मगर वह फिल्मों से नहीं जुड़ना चाहती थी.लेकिन उनकी तकदीर उन्हे फिल्मों में ले आयी.बतौर हीरोईन उनकी पहली फिल्म ‘‘लकड़बग्घा’’ तेरह जनवरी 2023 को सिनेमाघरों में प्रदर्षित हो चुकी हंै.जबकि षाहरुख खान के साथ फिल्म ‘जवान’ और सलमान खान के साथ फिल्म ‘‘टाइगर 3’’ की षूटिंग कर चुकी हैं.

 

प्रस्तुत है रिद्धि डोगरा के साथ हुई बातचीत के अंष…

 

सवाल – आपके अंदर अभिनय के प्रति रूचि कहां से पैदा हुई थी?

जवाब – मुझे लगता है कि मेरे मम्मी पापा में कुछ तो रहा होगा.मेरी मम्मी ने स्कूल व कालेज में स्टेज पर बहुत काम किया है.तो वही मेरे खून में आ गया.मेरे पापा को फिल्मों का बहुत षौक था.उनको सिनेमा का काफी ज्ञान था.जब मैं व मेरा भाई बच्चे थे,तब वह हमें फिल्मों के बारे में बताया करते थे कि कौन सी फिल्म में क्या है और वह कहंा फिल्मायी गयी थी.तो आप कह सकते हैं कि हमें यह सिनेमा के प्रति लगाव व रचनात्मकता के प्रति झुकाव कहीं न कहीं हमें हमारे माता पिता से ही मिला है.पर यह सच है कि मुझे अभिनेत्री नही बनना था.पर तकदीर ने मुझे  अभिनेत्री बना दिया.

सवाल – 2007 से 2022 तक के अपने कैरियर को किस तरह से देखती हैं?

जवाब – मैं पीछे मुड़कर देखती नही हॅूं.मैं तो सिर्फ काम करते जा रही हॅूं.लेकिन अब मैं 2007 से पहले की बहुत सी चीजों को देख व समझ सकती हॅॅंू.मेरे अभिनेत्री बनने की बात अब मेरी समझ में आ रही है.हकीकत यही है कि मैं कभी भी अभिनेत्री नहीं बनना चाहती थी.मैने कभी नहीं सोचा था कि मुझे बड़े होकर अभिनय को कैरियर बनाना है.जबकि षुरू से ही मैं स्टेज पर या लोगों के बीच सहज रही हूॅॅं,क्योंकि मैं डांसर रही हॅूं.जब मैं कालेज में थी,तो मैने सायकोलाॅजी आॅनर्स किया.इसी के चलते मानवीय व्यवहार की समझ विकसित हुई.कलाकार को बहुत आॅब्जर्व करना चाहिए,वह आदत मेरे अंदर भी है.हर कलाकार मानवीय भावनाओं से काफी जुड़ा रहता है.मैं कभी अकेले रहते हुए बोर नही होती.क्योंकि तब मैं लोगों को आॅब्जर्व करती रहती हॅूं.उनके बात करने के तरीके,चाल ढाल वगैरह पर मेरी नजर रहती है.तो अब मेरी समझ में आया कि मैने सायकोलाॅजी/मनोविज्ञान से पढ़ाई क्यों की थी? मैं जूम टीवी पर नौकरी कर रही थी,पर यह नौकरी छोड़ दी,क्योंकि मुझे लगा कि मुझे कोई ‘बाॅस’ कैसे बता सकता है कि मुझेक्या करना है और क्या नहीं करना है.अब मेरी समझ में आया कि वह नौकरी मुझे क्यों नही भायी और मैं अपनी बाॅस बन गयी.आज बतौर कलाकार मैं अपने निर्णय खुद ले रही हॅॅंू.तो अब 2007 से पहले की बातें मेरी समझ में आ रही हैं.

सवाल – कभी आपने कहा था कि आप टीवी पर काम करते हुए खुष हैं.फिल्म नही करना चाहती.पर अब आपकी पहली फिल्म ‘‘लकड़बग्घा’’ सिनेमाघर में पहुॅच चुकी है?

जवाब – मैने बहुत बड़े सपने कभी नही देखे.मैं तो अच्छा काम करना चाहती थी.टीवी पर मुझे सषक्त किरदार निभाने को मिल रहे थे.पर जब ओटीटी षुरू हुआ,तब भी मुझे उससे जुड़ने की इचछा नही हुई.लेकिन एक दिन मेरे पास वेब सीरीज ‘असुर’ का आफर आया,कहानी सुनकर मना नही कर पायी.फिर‘मैरीड ओमन’ ओर ‘पिचर्स’ भी की.फिर जब एक दिन मेरे पास अंषुमन झा व फिल्म ‘लकड़बग्घा’ के निर्देषक विक्टर मुखर्जी आए और मुझे कहानी सुनायी,तो कर लिया.अगर आप इस पर कोई लेबल लगाना चाहते हैं तो यह मेरी पहली फिल्म है.हालांकि, मुझे लगता है कि मैं हमेशा दर्शकों से जुड़ी रही हूं, इसलिए मुझे ऐसा नहीं लग रहा है कि मैं पहली बार दर्शकों से मिली.जब भी मैं कहती हूं कि यह मेरी पहली फिल्म है,तो कभी-कभी मुझे यह अजीब लगता है.लेकिन यह भी सच है कि मैं पहली बार बड़े पर्दे पर नजर आ रही हूं, जो मेरे लिए काफी रोमांचक है.मैने इस फिल्म को दो वजहों से किया.एक तो यह फिल्म जानवरों पर बनी है और दूसरी वजह यह कि मुझे क्राव मागा सीखना था,जो कि इस फिल्म के निर्माता ने मुझे क्राव मागा सीखने का अवसर दिया.

riddhi dogra

सवाल – क्राव मागा सीखना कितना फायदेमंद रहा?

जवाब – मेरी समझ से क्राव मागा सभी को सीखना चाहिए,क्योंकि यह एक उस तरह का मार्शल आर्ट है,जिसमें हाथ से हाथ का मुकाबला होता है.यहां हथियार का उपयोग नहीं होता.क्राव मागा हमारे देष की महिलाओं के लिए बहुत उपयोगी है.वह इसका उपयोग आत्मरक्षा के लिए कर सकती हैं.

सवाल – अब तो आप षाहरुख खान और सलमान खान के साथ भी फिल्में कर रही हैं?

जवाब – जी हाॅ! जब मैने ‘लकड़बग्घा’ साइन की थी,उसके बाद ही मुझे षाहरुख खान के ेसाथ फिल्म ‘जवान’ और सलमान खान के ेसाथ ‘‘टाइगर 3’’ की है.इन फिल्मों को लेकर फिलहाल ज्यादा बात नही कर सकती.

सवाल – डांसर होने का अभिनय में कितनी मदद मिल रही है?

जवाब – मेरी राय में डांस और अभिनय सब परफार्मेंस ही हैं.डांस,अदाकारी में बहुत मदद करती हैं.हालांकि मैने क्लासिकल डांस कभी नही किया.क्लासिकल डांस से अभिनय करने में मदद बहुत मिलती है.लेकिन मुझे डांस से उर्जा मिलती है.जिसके चलते जब मैं कैमरे के सामने होती हॅूं,तो वह पल जाया नहीं होने देती.इतना ही नही डांस परफार्मेंस देते रहने के कारण जब मैं पहली बार कैमरे के ेसामने पहुॅची,तो मुझे डर नहीं लगा.जबकि तमाम कलाकार बताते हैं कि वह कैमरे के सामने फ्रिज हो गयी थी.या उन्हें डर लगा था.मंै तो सेट पर पूरी युनिट व कैमरे के सामने एकदम सहज थी.दूसरी बात स्टेज पर डांस करते रहने के कारण मेरे अंदर अनुषासन की भावना आ गयी है.मैंने षाॅमक डावर से नृत्य सीखा है. उन्होेने सिखाया था कि बिना अनुषासन के परफार्मेंस अच्छी हो ही नही सकती.सुबह से षाम तक एक ही डांस को बार बार करते रहना होता था.डांस करते समय हमें यह याद रखना होता था कि हर स्टेप सही होना चाहिए.तो डंास से मैंने हर छोटी छोटी चीज पर ध्यान देना सीखा.

सवाल – सायकोलाॅजी की पढ़ाई करने के कारण अभिनय में कितनी मदद मिल रही है?

जवाब – मुझे तो यही लगता है कि मैने सायकोलाॅजी मंे आॅनर्स किया, इसीलिए अभिनय मंे मेरा षौक बढ़ा.पहले मैं काॅमर्स स्टूडेंट थी.पर कालेज जाने पर मंैने साॅयकोलाॅजी ले ली.मेरे इस निर्णय से मेरे माता पिता भी हैरान हुए थे.अब जब मैं पटकथा पढ़ती हॅंू,अपने किरदार के बारे में पढ़ती हॅूं,या अलग अलग निर्देषक के साथ किरदार को लेकर विचार विमर्ष करती हॅूं,तो इंज्वाॅय करती हॅूं.सायकोलाॅजी पढ़ा है,इसलिए मैं किरदार का विष्लेषण करती हॅंूं कि यह इंसान ऐसा क्यों है?

मैं यहां पर बताना चाहॅूॅंगी कि जब मैं जूम टीवी में नौकरी कर रही थी,तो मेरा आफिस मंुबई में ही लोअर परेल में था.वहां से यहां अंध्ेारी तक लोकल ट्ेन से आती जाती थी.तो मैं हर किसी को आॅब्जर्व करती रहती थी.ट्ेन में मछली वाली मिलती थी.उनकी आपस की लड़ाईयों को आब्जर्व किया करती थी.घर आकर मैं मौसी को उसी तरह से एक्टिंग करके बताती थी कि आज ट्ेन में ऐसा हुआ.उन दिनों मैं अपनी मौसी के साथ रहती थी.तब मुझे अभिनेत्री नहीं बनना था.पर वह मेरे अंदर कहीं न कहीं था.क्यांेकि मैं आब्जर्व कर अभिनय कर रही थी.

सवाल- वैसे भी अभिनय में दो चीजमहत्वपूर्ण होती हैं.एक तो कलाकार के निजी जीवन के अनुभव व उसका अपना आब्जर्वेषन और दूसरा उसकी कल्पना षक्ति.आप इनमें से किसका कितना उपयोग करती हैं?

जवाब – कलाकार के तौर पर मैं दोनों का ही उपयोग करती हॅूं.आब्जर्वेषन और कल्पनाषक्ति दोनों का उपयोग करती हॅूं.मगर मैं अपनी निजी जिंदगी का ज्यादा उपयोग नहीं करती.क्यांेकि फिर मैं बहुत खर्च हो जाती हॅूं.इसलिए उससे बचने का प्रयास करती हॅूं.कई बार जब रोने का दृष्य हो,तो मैं अपनी निजी जिंदगी की घटना याद करती हॅूं,पर फिर लगता है कि मैं यह क्या कर रही हॅूं.मैं तो अपने गम को ही याद करके यूज करती हॅॅंू.पहले मैं अपनी निजी जिंदगी की घटनाओं का उपयोग करती थी,पर अब कम करती हॅूं.पहले मैं अपनी निजी जिंदगी के अनुभव,भावनाओं, अहसास का बहुत उपयोग करती थी,पर फिर लगा कि इसे अपने आप से अलग करना बहुत भारी हो जाता है.इसलिए षूटिंग से पहले वर्कषाॅप करना जरुरी है.वर्कषाॅप में हमंे समझ मंे आता है कि यह किरदार है,इसके यह चारित्रिक विषेषताएं हैं,इसकी यह बौडी लैंगवेज है और इस हिसाब से हमें चलना है.मैं मानती हॅूॅं कि कल्पना षक्ति काम आती है.कलाकार के तौर पर हमें किरदार में रूचि लेनी होती है.इसीलिए कहते हंै कि कलाकार भावुक होता है.कलाकार खुद को खर्च करने किए बगैर किरदार को समझ पाता है.

सवाल – आपने अब तक कई किरदार निभाए.कोई ऐसा किरदार जिसने आपकी निजी जिंदगी पर असर किया हो?

जवाब – टीवी पर तो लगभग सभी किरदार असर करते थे.क्योकि मैं ख्ुाद सीखती थी,मैं हर किरदार निभाते हुए बड़ी हो रही थी.षुरूआत में मेेरे हिस्से ऐसे किरदार आए,जहंा मैं कई संवाद बोलती थी,जो कि लड़कियों की जिंदगी के उत्थान के लिए होते थे.उस वक्त मैं भी बीस वर्ष की थी,तो उसका असर मुझ पर भी हो रहा था. उन चीजों,संवादों ने मुझे खुद को स्ट्ांग बनाने में बहुत प्रभावित किया था.फिर अभी मैने ओटीटी पर वेब सीरीज ‘‘मैरीड ओमन’’ किया,जिसका मुझ पर काफी असर हुआ.यदि हम औरतों की सेक्सुअल ओरिएंटेषन को नजरंदाज कर दें,तो समाज में कितनी औरते हैं,जो बोल नहीं पाती.तमाम औरतें बोल या बता नही पाती कि उनके दिल में क्या है?वह क्या अहसास करती हैं.मेरे मन में औरतों के प्रति संवेदना है.सिर्फ औरतों के प्रति ही नहीं,बल्कि आज के वक्त में लड़कों के लिए भी आवाज उठाना चाहिए.सभी ने अपने घर की बेटियों को सिखा दिया है कि आपको अपनी आवाज उठानी चाहिए.लड़कों को किसी ने नही सिखाया कि लड़कियां आवाज उठा रही हैं,उनकी इज्जत करो.लड़के तो अपने आप मंे जी रहे हैं.मुझे लगता है कि अब लड़कों को भी सिखाना चाहिए.बेचारे लड़के कन्फ्यूज हंै कि लड़कियां स्ट्ांग हो गयी,अब हम क्या करें?

सवाल – आप ओमन इम्पावरमेंट की बात कर रही हैं.पर आपको लगता है कि इसका समाज पर कुछ असर हो रहा है?

जवाब – फिल्म इंडस्ट्ी में ओमन इम्पावरमेंट तो कई वर्षों से चल रहा है.ब्लैक एंड व्हाइट के युग से स्ट्ांग ओमन किरदार फिल्मों में पेष किए जाते रहे हैं.मुझे लगता है कि समाज व फिल्म इंडस्ट्ी दोनों एक दूसरे के प्रतिबिंब ही हैं.लेकिन समाज ज्यादा बड़ा है.समाज की सोच ज्यादा बड़ी है.समाज में काफी बदलाव आया है.सोषल मीडिया की वजह से भी बदलाव आया है.अब उन्हे अपने मन की बात कहने की जगह मिल गयी है.पर अभी और बदलाव आने की जरुरत है.मैं टीवी से ओटीटी और फिल्म तक पहुॅची हॅूं,तो मैं बहुत ज्यादा आब्जर्व कर रही हॅूं.मैं अहसास कर रही हूॅॅं कि महिलाओं की आवाज उठाने का अवसर टीवी में ज्यादा था.फिल्मों में स्ट्ांग किरदार कम हैं, मुझे स्ट्ांग किरदार ढूढ़ने पड़ेंगे. इसके लिए मुझे ही लिखना पड़ेगा.नारी सषक्त है,पर समाज उन्हें दबा देता है.तो हम लड़कियों और औरतों को आवाज उठाते रहना पड़ेगा.दुनिया का दस्तूर तो औरतों को दबाते रहना ही है.

भगवान से उठ रहा भरोसा

भगवान को मानने और न मानने वालों को विश्वस्तरीय सर्वे के अनुसार विश्व में नास्तिकों का औसत हर साल बढ़ रहा है. नास्तिकों की सब से ज्यादा 50% संख्या चीन में है. भारत में भी नास्तिकों की संख्या बढ़ी है. इस के उलट पाकिस्तान में आस्तिकों की संख्या बढ़ी है. लेकिन अरबों की आबादी वाले देशों में महज कुछ लोगों की बातचीत के आधार पर एकाएक यह कैसे मान लिया जाए कि इन देशों में नास्तिकों अथवा आस्तिकों की संख्या परिवर्तित हो रही है?

आस्तिक और नास्तिकवाद के ताजा सूचकांक के मुताबिक इस तरह के भारतीयों ने भी बताया था कि वे धार्मिक नहीं और न ईश्वर में विश्वास रखते हैं. यह संख्या बढ़ रही है. पोप फ्रांसिस के देश अर्जेंटीना में खुद को धार्मिक कहने वालों की संख्या कम हुई है. इसी तरह खुद को धार्मिक बताने वालों की संख्या में दक्षिण अफ्रीका, अमेरिका, स्विट्जरलैंड, फ्रांस तथा वियतनाम में गिरावट भी आई है.

नास्तिक अथवा आस्तिकों की संख्या घटनेबढ़ने से देशों की सांस्कृतिक अस्मिताओं पर कोई ज्यादा फर्क पड़ने वाला नहीं है क्योंकि वर्तमान परिदृश्य में दुनिया की हकीकत यह है कि सहिष्णु शिक्षा के विस्तार और आधुनिकता के बावजूद धार्मिक कट्टरपन बढ़ रहा है, धार्मिक स्वतंत्रता पर हमले हो रहे हैं.

यह कट्टरता इसलामिक देशों में कुछ ज्यादा ही देखने में आ रही है. कट्टरपंथी ताकतें अपने धर्म को ही सर्वश्रेष्ठ मान कर भिन्न धर्मावलंबियों को दबा कर धर्म परिवर्तन तक के लिए मजबूर करती रही है. भारत, पाकिस्तान और बंगलादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं के साथ यही हो रहा है. कश्मीर क्षेत्र में मुसलिमों का जनसंख्या घनत्व बढ़ जाने से करीब साढ़े चार लाख कश्मीरी हिंदुओं को अपने पुश्तैनी घरों से खदेड़ दिया गया.

अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला

पाकिस्तान में हालात इतने बदतर हैं कि वहां उदारता, सहिष्णुता और असहमतियों की आवाजों को कट्टरपंथी ताकतें हमेशा के लिए बंद कर देती हैं. यहां के महजबी कट्टरपंथियों ने कुछ साल पहले अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय मंत्री शहबाज भट्टी को पाकिस्तान के विवादास्पद ईशनिंदा कानून में बदलाव की मांग करने पर मौत के घाट उतार दिया था. शहबाज भट्टी कैथोलिक ईसाई थे. यह सीधेसीधे अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला था.

जनरल जिया उल हक की हुकूमत के समय बने इस अमानवीय कानून के तहत कुरान शरीफ, मजहब ए इसलाम और पैगंबर हजरत मोहम्मद व अन्य धार्मिक शक्तियों के बारे में कोई भी विपरीत टिप्पणी करने पर मौत की सजा सुनाई जा सकती है.

मलाला यूसुफ पर तो महज इसलिए आतंकवादी हमला हुआ था क्योंकि वह स्त्री शिक्षा की मुहिम चला रही थी.

चरम पर नस्लभेद

चीन में 50% नागरिकों का नास्तिक होना इस बात की तसदीक है कि नास्तिकता कोई गुनाह नहीं है क्योंकि चीन लगातार प्रगति कर रहा है. वहां की आर्थिक और औद्योगिक विकास दरें ऊंचाइयों पर है. अमेरिका के बाद अब चीन ही दुनिया की बड़ी महाशक्ति है. जाहिर है यदि नास्तिक होने के बावजूद किसी देश के नागरिक ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ हैं तो यह नास्तिकता देश के राष्ट्रीय हितों के लिए लाभकारी ही है.

यदि विकसित देशों की बात करें तो वहां केवल आर्थिक और भौतिक संपन्नता को ही विकास का मूल आधार माना जा रहा है, जबकि विकास का आधार चौमुखी होना चाहिए. सामाजिक, धार्मिक और शैक्षिक स्तर पर भी व्यक्ति की मानसिकता विकसित होनी चाहिए. पश्चिमी देशों में अमेरिका, ब्रिटेन और आस्टे्रलिया विकसित देश हैं. किंतु नास्तिकों की संख्या बढ़ने के बावजूद यहां रंगभेद और धर्मभेद के आधार पर वैमन्स्यता बढ़ रही है.

अमेरिका और ब्रिटेन में भारतीय सिखों पर हमले हो रहे हैं, जबकि आस्ट्रेलिया में उच्च शिक्षा प्राप्त करने गए भारतीय और पाकिस्तानी छात्रों पर हमलों की घटनाएं सामने आई हैं.

2014 से पहले धार्मिक स्वतंत्रता पर निगरानी रखने वाली अंतर्राष्ट्रीय समिति के एक अध्ययन की रिपोर्ट में माना गया था कि धार्मिक स्वतंत्रता के मामले में अपेक्षाकृत भारत अव्वल था क्योंकि यहां के लोग उदार थे.

सभी अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों पर किसी भी किस्म की कानूनी पाबंदी नहीं हुई. अब उलटा हो रहा है. धर्म का उन्माद बढ़ रहा है. भारत की धर्मनिरपेक्षता की खोखली होती जड़ों से दुनिया सीख ले सकती है. जहां बहुधर्मी, बहुसंस्कृति और बहु जातीय समाज अपनीअपनी सांस्कृतिक विरासतों को सा?ा करते हुए साथ नहीं रह पा रहे हैं.

अनीश्वरवाद बनाम प्रत्यक्षवाद

कहने को भारतीय दर्शन के इतिहास में भौतिकवाद और आदर्शवाद की परस्पर विरोधी विचारधाराएं एक  साथ चली हैं. चार्वाक नास्तिक दर्शन का प्रबल प्रणेता था. चार्वाक ने बौद्धिक विकास के नए रास्ते खोले. उस ने अनीश्वरवाद बनाम प्रत्यक्षवाद को महत्ता दी. चार्वाक ने ही मुस्तैदी से कहा कि पृथ्वी, जल, अग्नि और वायु के अद्भुत समन्वय व संयोग से ही मनुष्य व अन्य जीव तथा वनस्पतियां अस्तित्व में आई हैं. जीवों में चेतना इन्हीं मौलिक तत्त्वों के परस्पर संयोग से प्रतिक्रियास्वरूप उत्पन्न हुई है. मगर चार्वाक ??के ग्रंथों को भी जला दिया गया और बौध मठों को भी तोड़ दिया गया.

विज्ञान मानता है कि संपूर्ण सृष्टि और उस के अनेक रूपों से उत्पन्न ऊर्जा का ही प्रतिफल है. जीवधारियों की रचना में अभौतिक सत्ता की कोई भूमिका नहीं है. चेतनाहीन पदार्थों से ही विचित्र व जटिल प्राणी जगत की रचना संभव हुई.

ईश्वर ने नहीं बनाया ब्रह्मांड

ब्रिटिश वैज्ञानिक स्टीफन हाकिंग ने कहा है कि ईश्वर ने ब्रह्मांड की रचना नहीं की है. इसे सम?ाने के लिए उन्होंने महामशीन ‘बिगबैंग’ में महाविस्फोट भी किया था. इस के जरीए उन्होंने ब्रह्मांड की उत्पत्ति के संदर्भ में भौतिक विज्ञान के गुरुत्वाकर्षण सिद्धांत को मान्यता दी है. इस सिद्धांत के अनुसार लगभग 12 से 14 अरब वर्ष पहले संपूर्ण ब्रह्मांड एक परमाणविक इकाई के रूप में था.

इस से पहले क्या था, यह कोई नहीं जानता क्योंकि उस समय मानवीय समय और स्थान जैसी कोई वस्तु अस्तित्व में नहीं थी, समस्त भौतिक पदार्थ और ऊर्जा एक बिंदु में सिमटे थे. फिर इस बिंदु ने फैलाना शुरू किया. नतीजतन आरंभिक ब्रह्मांड के कण समूचे अंतरिक्ष में फैल गए और एकदूसरे को दूर भगाने लगे. यह ऊर्जा इतनी अधिक थी कि आज तक ब्रह्मांड विस्तृत हो रहा है. सारी भौतिक मान्यताएं इस एक घटना में परिभाषित होती हैं, जिसे बिगबैंग सिद्धांत कहते हैं.

धर्म बन गया व्यापार

दर्शन के विभिन्न मतों के ही कारण भारत में भगवान को नहीं मानना अपराध तो नहीं माना गया, इस कारण से किसी को फांसी नहीं दी गई पर उस का सामाजिक बहिष्कार हो जाता है. फिर भी भारत व अन्य देशों में नास्तिक बढ़ रहे हैं, तो इस स्थिति को अथवा नास्तिकों को बुरी नजर से देखने की जरूरत नहीं है क्योंकि नास्तिक दर्शन या नास्तिक व्यक्ति परलोक की अलौकिक शक्तियों से कहीं ज्यादा इसी लोक को महत्त्व देता है, कर्मकांड से दूर रहता है. लेकिन इस दर्शन में उन्मुक्त भोग की जो परिकल्पना है, वह सामाजिक व्यवहार के अनुकूल नहीं है.

नास्तिकों का अस्तित्व असल में धर्म व्यापार पर गहरा असर डालता है. मंदिरों के पंडे, चर्चों के फादर, मसजिदों के मुल्ला आदि सब मुफ्त की खाते हैं. अफसोस यह है कि नास्तिक खत्म नहीं होते क्योंकि नास्तिवाद से पैसा नहीं मिलता. पैसा तो नास्तिकों के गुरुओं को मिलता है.

मैं जहां हूं वहीं अच्छा हूं

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