Winter Special: शरीर के लिए पानी क्यों है जरूरी?

वैज्ञानिक अनुसंधानों के अनुसार एक व्यक्ति बिना भोजन के 1 हफ्ते तक जीवित रह सकता है, लेकिन पानी की 1 बूंद के बिना 5 दिन से ज्यादा जीवित नहीं रह सकता. इंसान के शरीर में जैसे ही 1% भी पानी की कमी होती है उसे प्यास लगने लगती है. 5% तक की कमी आने पर शरीर की नसों और उस के स्टैमिना में कमी आने लगती है. ऐसा होने पर शरीर बहुत थका और बहुत ही ड्राईनैस महसूस करने लगता है. अगर शरीर में पानी के स्तर में 10% की कमी आती है तो इंसान को धुंधला दिखने लगता है. वह बेहोशी की हालत में आ जाता है. अगर शरीर में पानी की कमी 20% तक हो जाए तो यह इंसान की मौत का कारण भी बन सकती है. यही कारण है कि इंसान को हमेशा अपने शरीर की पानी की पूर्ति करते रहना चाहिए.

आइए, जानें कि पानी किस तरह शरीर के कई बेहद जरूरी कामों के लिए अहम है.

पानी एक वाहक

हमारे शरीर का दोतिहाई हिस्सा पानी या तरल पदार्थ का बना होता है. रक्त, जिसे हम मानवशरीर की जीवनरेखा कहते हैं, उस का भी 83% पानी ही होता है. रक्त शरीर के हर अंग तक विटामिन, मिनरल्स, अन्य जरूरी पोषक तत्त्व जैसे हीमोग्लोबिन, औक्सीजन आदि को पहुंचाने का काम करता है. पेशाब भी हमारे शरीर का एक अहम तरल पदार्थ है, जो शरीर से खराब टौक्सिक को बाहर निकालने का काम करता है. अगर हमारे शरीर में पानी की मात्रा कम है, तो शरीर में बनने वाले विषाक्त पदार्थ बाहर नहीं जाएंगे और इस से कई समस्याएं जैसे त्वचा का सूखापन, कब्ज, सिरदर्द आदि हो सकती हैं.

इलैक्ट्रोलाइट संतुलन

इलैक्ट्रोलाइट्स, सोडियम या पोटैशियम जैसे मिनरल होते हैं और डीहाइड्रेशन से बचने के लिए इन का शरीर में संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है. ये मिनरल शरीर में कई कामों के लिए अहम होते हैं. जैसे रक्त का पीएच स्तर बनाए रखना, नसों का काम और मस्तिष्क व शरीर के अन्य अंगों के बीच संतुलन बनाए रखना. आमतौर पर बहुत ज्यादा पसीना निकलने से शरीर में इलैक्ट्रोलाइट के स्तर में गिरावट आती है, जिस की वजह से थकावट, चक्कर आना आदि समस्याएं होती हैं.

नाजुक अंगों की रक्षा

हमारे शरीर के बेहद नाजुक हिस्सों जैसे आंख, पाचनतंत्र, मुंह आदि को भी पर्याप्त पानी की जरूरत होती है. पानी की कमी से सब से ज्यादा प्रभाव हमारे पाचनतंत्र पर पड़ता है. खाना पचाने के लिए मुंह में बनने वाली राल बेहद जरूरी होती है, जबकि शुष्क मुंह में चबाने और भोजन को अंदर तक ले जाने में समस्या होती है, जिस से अपच की समस्या हो सकती है. हमारी आंखों को भी पानी की जरूरत होती है ताकि जमा गंदगी को साफ किया जा सके.

हड्डियों को रखता है मजबूत है

शरीर की हड्डियों को मजबूत बनाए रखने के लिए हमें विटामिन डी और कैल्सियम के साथसाथ पानी की भी बहुत जरूरत होती है. शरीर के सभी जौइंट्स जैसे एड़ी का जौइंट, घुटने का जौइंट आदि में नरमी बनाए रखने के लिए पानी की जरूरत होती है. कम पानी की वजह से प्रौढावस्था में ही हड्डियों से जुड़ी समस्याएं जैसे आर्थ्राइटिस, झुकाव, चोट आदि हो जाती हैं.

शरीर के तापमान को बनाए रखता

पानी हमारे शरीर में प्राकृतिक तौर पर तापमान को सामान्य बनाए रखने का काम करता है. एक सामान्य शरीर का तापमान 35 डिग्री सैल्सियस या 98.6 डिग्री फारेनहाइट होता है. इसलिए जब हम धूप में गरम तापमान में जाते हैं तो हमारे शरीर से बहुत पसीना निकलता है, जिस से शरीर का तापमान कम हो जाता है.

बच्चों से ले कर बड़ों तक सभी को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए ताकि वे अच्छी जिंदगी जी सकें. प्रत्येक वयस्क व्यक्ति को दिन भर में 2 लिटर तरल पदार्थ पीना चाहिए. इस के साथ ही पानी की शुद्धता को ले कर भी सतर्क रहना चाहिए. नल के पानी को हमेशा उबाल कर ही पीना चाहिए. फिल्टर पानी का इस्तेमाल करें.

जब भी बाहर जाएं, पानी अवश्य साथ रखें. दूषित पानी से पेट से जुड़ी समस्याएं ज्यादा होती हैं. सफर के दौरान घर से थोड़ा ही पानी लिया जा सकता है. ऐसे में आप बोतलबंद पानी ले सकते हैं. बोतलबंद पानी चुनते वक्त हमेशा सीलबंद बोतल ही खरीदें. हमेशा ऐसी बोतल लें जिस पर आईएसआई मार्क लगा हो, जो शुद्धता की पहचान है.

हाल ही में कंज्यूमर फोरम ‘जागो ग्राहक जागो’ की तरफ से किए गए शोध में यह सामने आया है कि कई बोतलबंद पानी के ब्रैंड आईएसआई मार्क की कसौटी पर खरे नहीं उतरे. इन बोतलों के पानी में टीडीएस की मात्रा अधिक पाई गई. अत: बोतलबंद पानी लेते समय बोतल पर आईएसआई मार्क जरूर देखें.

ममता के धागों से बुना दोस्ती का रिश्ता

माधुरी दीक्षित अभी भी अभिनय से ले कर टीवी रिऐलिटी शो, ब्रैंड इंडोर्समैंट और औनलाइन डांस ऐकेडमी आदि में व्यस्त रहती हैं. पर इन सब से वे अपने परिवार के लिए समय अवश्य निकाल लेती हैं. माधुरी से हुई बातचीत में यह पता चला कि वे व्यस्त रहने के बावजूद भी किस तरह अपने परिवारिक दायित्वों को पूरा करती हैं.

बच्चों के साथ आप का रिश्ता किस तरह का है?

मैं अपने बच्चों की मां होने के साथसाथ उन की दोस्त और टीचर भी हूं. मेरे बच्चे मुझे तनाव मुक्त कर देते हैं. उन की बातें को सुनना, उन के साथ स्कूल में क्या हुआ, आगे उन्हें क्या करना है आदि बातों को जानना मैं रोज करती हूं. मैं एक ऐसी मां हूं जो बच्चे का होमवर्क पूरा हुआ कि नहीं इस का भी खयाल रखती हूं.

जरूरत पड़ने पर मैं एक स्ट्रिक्ट मां भी हूं जो अपने बच्चों को अनुशासन में रखती है ताकि उन का भविष्य अच्छा बने. पर इस के साथसाथ मैं उन के साथ सभी बातें शेयर भी करती हूं. अभी वे छोटे हैं, इसलिए मैं उन्हें दिशा निर्देश दे कर सही रास्ता चुनने के लिए प्रेरित करती हूं. ताकि बाद में वे गलतियां न करें और सही दिशा की ओर अग्रसर हों.

बच्चों से जुड़ा कोई वाकया जो आप हमारे साथ शेयर करना चाहेंगी?

मेरे बेटे रेयान और आरिन जब पहली बार मुंबई रहने आए थे तो उन्हें यह शहर बहुत खराब लगा था. वे हमेशा पूछा करते थे कि मम्मी यहां के रास्ते इतने गंदे क्यों हैं? भिखारी रास्ते पर भीख क्यों मांगते हैं आदि? पर अब वे ऐसी बातें नहीं पूछते. स्कूल में उन के काफी दोस्त बन गए है. वे उन के घर भी आयाजाया करते हैं. मेरा आधा संघर्ष यहीं खत्म हो चुका है क्योंकि उन्हें अपना स्कूल और यह शहर पसंद आ गया है. मेरे हिसाब से वही सही समय था जब मैं बच्चों के साथ मुंबई आ गई. अगर उन के बड़े होने पर आती, तो वे शायद यहां ऐडजस्ट नहीं कर पाते या फिर आना ही नहीं चाहते.

अमेरिका से वापस आने के बाद आप एक बार फिर व्यस्त हो गई हैं. ऐसे में अपने पारिवारिक दायित्वों को कैसे पूरा करती हैं?

मैं अपने समय को सही तरीके से मैनेज करना जानती हूं. मेरा मानना है कि अगर बच्चे मुझे काम करते हुए देखेंगे तो वे और अधिक जिम्मेदार हो जाएंगे क्योंकि मातापिता का असर बच्चों पर सब से अधिक होता है.

मेरे काम में मेरे पति का बहुत सहयोग रहता है. उन में खूबी यह है कि वे विश्व के किसी भी कोने में ऐडजस्ट कर सकते हैं. उन्होंने अपना मैडिकल प्रोफैशन छोड़ कर मेरा साथ दिया. अभी वे मेरे प्रोडक्शन हाउस को संभाल रहे हैं. वे बहुत ही शांत प्रकृति के हैं. मैं कई बार कुछ निर्णय नहीं ले पाती, तो ऐसे में उन की राय लेती हूं. वे किसी भी काम को दृढ़तापूर्वक करते हैं. उन का निर्णय तुरंत होता है.

Winter Special : पालक रोल्स की ये है रेसिपी

पालक की सब्जी तो सब खाते है और बनाते है जिससे बनाना भी बेहद आसाना है ऐसे में ज़रुरी है कि पालक की सब्जी के अलावा भी कुछ और ट्राए किया जाएं, तो ऐसे में बनाएं और खाएं पालक रोल्स. जिन्हे आप आसान तरीके से अपने घर पर बना सकते है.

सामग्री

  • 1 कप पालक पेस्ट
  • 1/2 पाउच भुना मसाला
  • 1/2 कप दही
  • 3 बडे़ चम्मच बेसन
  • 1/4 छोटा चम्मच कालीमिर्च पाउडर
  • 100 ग्राम पनीर
  • नमक स्वादानुसार

विधि

-पालक पेस्ट, भुना मसाला, बेसन, दही व नमक को अच्छे से मिलाएं. फिर इस में 1 कप पानी मिलाएं और कड़ाही में गाढ़ा होने तक पकाएं.

-पकने पर प्लास्टिक में सारे मिश्रण की पतली परत बेल लें और 1 इंच चौड़ाई में काट लें. पनीर में नमक, कालीमिर्च पाउडर मिला लें और इन स्ट्रिप्स में एक तरफ रख कर रोल करें.

-सौस या चटनी के साथ परोस कर खाएं

Anupama : पाखी-अधिक के बीच छिडेगीं जंग तो, समर-डिंपल आएंगे नजदीक

स्टार प्लस सीरियल अनुपमा मीडिया की सुर्खियो मे बना हुआ है शो इन दिनो हिट चल रहा है सीरियल में आने वाले मोड़ फैंस को काफी एंटरटेन कर रहे है, शो के मेकर्स शो को बेहतर बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे है. शो के टिवस्ट और टर्नस शो को टीआरपी के रेस में रख रहे है. बीते दिन रुपाली गांगुली स्टारर अनुपमा में दिखाया गाया कि विज्येंद्र मेहता अनुपमा और डिंपल को किडनैप करने की कोशिश करते है लेकिन वो खुद के बनाएं जाल में फंस जाते है आइए आगे बताते है कि क्या हुआ?

शो में दिखाया जाएगा कि अनुपमा आरोपियों को पुलिस के हवाले कर देती है. इस बात के लिए वहां मौजूद एक बच्ची न केवल अनुपमा की तारीफ करती है, बल्कि उसके जैसा बनने की भी बात कहती है. इस काम के लिए अनुपमा के साथ-साथ काव्या और किंजल की भी खूब वाहवाही होती है.

 

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अनुज और अनुपमा मे होगा रोमांस

जी हां, परिवार से मुसीबतों से हटते ही अनुज और अनुपमा एक दूसरे के नज़दीक आएंगे और रोमांस करेंगे. जिंजर ब्रेड बनाते-बनाते दोनो एक दूसरे के करीब आएंगे. रोमांस के बीच अनुज, अनुपमा को किस करने की भी कोशिश करता है, लेकिन तभी वहां छोटी अनु आ जाती है और दोनों एक-दूसरे से दूर हो जाते हैं.

अनुपमा में आगे दिखाया जाएगा कि डिंपल केस ख्त्म होने के बाद अनुपमा की डांस अकेडमी काम करने जाती है. वहा उसे समर मिलता है, वहां समर उसे डांस भी सिखाता है, लेकिन प्रैक्टिस के दौरान गलती से डिंपल का हाथ समर को लग जाता है, हालांकि समर को इससे कोई परेशानी नहीं होती. वहीं दोनों को साथ देख बा को गुस्सा आ जाता है और वह अनुपमा से शिकायत करती हैं कि उस लड़की का असर मेरे समर के सिर पर ना पडे.लेकिन कहानी यही खत्म नहीं होती है.

 

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आगे दिखाया गया है कि अधिक पाखी से बर्तन धोने के लिए कहता है. लेकिन वो मना कर देती है अधिक, पाखी को बापूजी से उसके कपड़े प्रेस करवाने पर भी डांटता है . वहीं ये सब अनुपमा देख लेगी और वह बा से पूछेगी कि स्वीटी यहां क्या हो रह रही है? लेकिन बा उल्टा जवाब देंगी, “मेरे घर में रह रही है, तेरे नहीं. तू अपना घर देख, मैं अपना देख लूंगी.”

Bigg Boss 16 के घर में होगी श्रीजिता की वाइल्ड कार्ड एंट्री, टीना दत्ता के उड़ेंगे होश

कलर्स टीवी रिएलटी शो बिग बॉस 16 हर साल की तरह मीडिया की लाइमलाइट में बना हुआ है और टीआरपी रेस पर टॉप चल रहा है. बिग बॉस में होने वाले टास्क लोगों को काफी पसंद आ रहे है. नए मोड शो को और एंटरेटनिंग बना रहे है. ऐसे इस हफ्ते को कैपटन सी टास्क भी काफी मजेदार रहा है और कैपटवन अकिंत गुप्ता बने यानी घर का राजा इस हफ्ते अकिंत गुप्ता बने है. हाल ही में बिग बॉस का प्रोमो वीडियो सामने आया जिसमें दिखाया गया है कि किसी को देख टीना दत्ता के होश उड़ जाएंगे.

आपको बता दे, कि इस हफ्ते अकिंत गुप्ता कैपटन है वही अगले हफ्ते के लिए कैप्टन बनने की रेस में प्रियंका चाहर, शालीन भनोट, टीना दत्ता, सुंबुल तौकीर और सौंदर्या शर्मा का नाम शामिल है। खबर ये भी है कि घर में जल्द वाइल्ड कार्ड एंट्री होने वाली है.

 

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जी हां घर में श्रीजिता डे  वाइल्ड कार्ड एंट्री लेने वाली है. प्रोमो वीडियो में साफ दिखाया है कि बिग बॉस16 के घर में श्रीजिता डे आने वाली है. इस क्लिप मे आप देख सकते है कि उनकी एंट्री से घरवालों काफी खुश नज़र आ रहे है. लेकिन टीना दत्ता उन्हे देखकर कुछ अलग ही रिएक्शन देती है उन्हे देख हैरान हो जाती है. क्योकि श्रीजीता उनसे मिलने से मना कर देती है. जिसके बाद टीना और शालीन एक दूसरे को गले लगाते है. इस प्रोमो को देखने के बाद फैंस इसके अपकमिंग एपिसोड का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं.

 

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आपको बता दें, कि नॉमिनेशन टास्क हुआ था, जिसमें इस बार नॉमिनेशन की लिस्ट में टीना दत्ता, सुंबुल तौकीर खान, निमृत कौर का नाम शामिल है.वहीं एमसी स्टेन को बिग बॉस ने पहले से ही नॉमिनेट कर रखा है.

सरकार की हुई जमीन

दिल्ली में बहुत सी जमीन केंद्र सरकार की है जिसे अरसा पहले सरकार ने खेती करने वाले किसानों से कौढिय़ों के भाव खरीदा था. इस में बहुत जगह कमॢशयल प्लाट बने हैं, छोटे उद्योग लगे हैं. रिहायशी प्लाट कट कर दिए गए हैं. जिन कीमतों पर जमीन इंडस्ट्री, दुकानों या घरों को दी गई उस से थोड़ी कम कीमत पर स्कूलों, अस्पतालों, समाजसेवी संस्थाओं को दी गई. यह जमीन दे तो दी गई पर केंद्र सरकार का दिल्ली डेबलेपमैंट अथौरिटी उस पर आज भी 50-60 साल बाद भी कुंडली लगाए भी बैठा है जबकि उद्योग चल रहे है, दुकानें खुली, लोग रह रहे है स्कूल अस्पताल चल रहे हैं.

उस का तरीका है लगे होल्ड जमीन. डीडीए ने आम बिल्डरों की तरह एक कौंट्रेक्ट पर सब आदमियों से साइन करा रखे है कि कौंट्रेक्ट, जिसे सब लोग कहते हैं, कि किसी भी धारा के खिलाफ काम करने पर अलौटमैंट कैंसिल की जा सकती है चाहे कितने ही सालों से वह जमीन अलाटी के पास हो.

ऐसा देश के बहुत हिस्सों में होता है और लीज होल्ड जमीनों पर आदमी या कंपनी या संस्था खुद की पूरी मालिक नहीं रहती. नियमों को तोडऩे पर जो परोक्ष रूप में सरकार के खिलाफ कुछ बोलने पर भी होता है. इस धारा को इस्तेमाल किया जाता है. बहुत से लोग इस आतंक से परेशान रहते हैं.

जहांं भी लीज होल्ड जमीन और अलादी सब लीज के बंधनों से बंधा है वहां खरीदफरोक्त, विरासत में, भाइयों के बीच विवाद में अलौट करने वाला. सरकारी विभाग अपना अडग़ा अड़ा सकता है. 40-50 साल पुरानी शर्तें आज बहुत बेमानी हो चुकी हैं. शहर का रहनसहन तौरतरीका बदल गया है. कामकाज के तरी के बदल गए है पर लीज देने वाला आज भी पुरानी शर्तों को लागू कर सकता है.

कुछ साल पहले सुप्रीम कोर्ट ने इन्हीं लीज की शर्तों के आधार पर काफी सारा दिल्ली का व्यापार ठप्प करा दिया था कि रहायशी इलाकों में दी गर्ई जमीन पर कमॢशयल काम नहीं हो सकता. चाहे यह सिद्धांत 40-50 साल पहले ठीक रहा हो पर आज जब दुकानों की जरूरत है तो चांदनी चौक के रिहायशी कटरे भी दुकानों में बदल गए हैं और खान मार्केट के भी. और शहरों में भी ऐसा हो रहा है लखनऊ के हजरतगंज में ऊपरी मंजिलों में घर गायब हो गए हैं. जयपुर की सी स्कीम में बड़ी घरों की जगह माल बन गए हैं.

सरकारी दफ्तर फिर भी पुराने अधिकार छोडऩे को तैयार नहीं है क्योंकि यह कमाई का बड़ा साधन है. दिल्ली में एक अस्पताल का 1995 में अलौटमैंट कैंसिल कर दिया गया कि वह अस्पताल शुरू करने वालों ने दूसरों को बेच दिया गया जबकि अस्पताल की संस्था वही थी, बस मेंबर बदले गए थे. ट्रायल कोर्ट ने डीडीए का पक्ष लिया पर उच्च न्यायालय ने मामला खारीज कर दिया कि मेंबर बदलना, बेचना नहीं है.

असल में सरकारों को आम आदमी की ङ्क्षजदगी में जितना कम हो उतना ही रहना चाहिए. जब तक वजह दूसरों का नुकसान न हो, सरकार नियमों कानूनों का हवाला दे कर अपना पैसा नहीं वसूल सकती.

देश की सारी कृषि भूमि पर सरकार ने परोक्ष रूप से कुंडली मार ली है. उसे सिर्फ कृषि की भूमि घोषित कर दिया गया है. उस पर न मकान बन सकते है न उद्योग लग सकते है जब तक सरकार को मोटी रकम न दी जाए. सरकारको कृषि योग्य जमीन बचाने की रुचि नहीं है, वह सिर्फ कमाना चाहती है. चेंज इन लैंड यूज के नाम पर लाखों करोड़ों वसूले भी जाते हैं, और मनमानी भी की जाती है. अगर पैसा बनाना हो तो 10-20 साल आवेदन को जूते घिसवाए जा सकते हैं.

अब जमीनें औरतों को विरासत में मिलने लगी हैं. उन्हें इन सरकारी दफ्तरों से निपटना पड़ता है. उन को हर तरह से परेशान किया जाता है. तरहतरह के दयाल पैदा हो गए हैं. हर तरह के ट्रांसफर पर आपत्ति लगा दी जाती है. बेटियों के लिए पिता की संपत्ति एक जीवन जंजाल बन गया है जिसे न निगला जा सकता है न छोड़ा जा सकता है क्योंकि सरकारी सांप गले में जा कर फंस जाता है.

अस्पताल में 3 दिन : अपनी-अपनी तकलीफें

मैंने चाय का आखिरी घूंट पिया और आदत के अनुसार उस को मुंह में घुमाया तो मेरे सामने के बैड पर लेटा बालक हंस दिया. मैं ने जल्दी से चाय को गले उतारा और इशारे से पूछा, ‘क्या?’ वह फिर हंस दिया, बोला, ‘चाय को मुंह में रखने और घुमाने से आप मुझे मानव विकास क्रम के पहले चरण से लगे.’ उस की बात सुन कर मैं भी हंस दिया.

अस्पताल का जनरल वार्ड है यह. कई रोगी हैं यहां. मैं तो 2 दिनों पहले ही आया हूं. कई रोगी तो महीनों से भरती हैं. यह लड़का भी 7 दिनों से भरती है. इस को कुत्ते ने काटा था तो इस के पिताजी इसे बावसी के पास ले गए थे. यहां ज्यादातर लोग पशु के काटने, बुखार आने, पेटदर्द जैसी बीमारियों पर पहले आस्था के केंद्र पर जाते हैं. जब मामला बिगड़ जाता है तो डाक्टर के पास आते हैं. ठीक होने पर डाक्टर को नहीं, बावसी को ही प्रसाद चढ़ाते हैं. तो इस लड़के को कुत्ते ने काटा. बावसी ने कुत्ते के काटे पर फूंक मारी और कहा, ‘जाओ, ठीक हो जाएगा.’ सब ने बावसी की जय की और टापरे चले गए थे. पर कुछ दिनों बाद मामला बिगड़ गया. कुत्ता पागल था, सो, लड़के को रेबीज हो गया, तो इसे यहां अस्पताल लाया गया.

अस्पताल में एक संस्था द्वारा मुफ्त में दिए जाने वाले भोजन का वितरण शुरू हुआ और लड़के के पिताजी भोजन लेने चले गए.

मेरे पास के बिस्तर पर एक 14 साल की लड़की है, जिस को उस के ही रिश्तेदारों ने जम कर पीटा है. स्वयंसेवी संस्था, पुलिस, नेता, प्रशासन के लोग उस से मिलने लगातार आते रहते हैं. किसी ने बताया कि प्रेम का मामला है, लेकिन परंपरा, सम्मान से जुड़ा है. यहां यह परंपरा है कि गांव के लड़केलड़की भाईबहन माने जाते हैं. यह लड़की गांव के ही एक लड़के से प्रेम करती है. लड़का भी जीजान से इस को चाहता था. जब गांव के बड़ेबुजुर्गों को पता लगा तो दोनों को समझाया कि यह प्रेम गलत है. वे शादी नहीं कर सकते. पर ये दोनों नहीं माने. एक दिन दोनों ने जहर खा लिया. प्रेमी तो मर गया लेकिन प्रेमिका बच गई, जो अब यहां है. लड़की बहुत दबाव में है.

परंपराएं कितनों का ही खून करती हैं, कितने ही अरमानों का गला दबा देती हैं, कितनी ही उम्मीदों को कोख में ही मार देती हैं. हर व्यक्ति जन्म लेते ही ऐसे कितने ही बोझों को ले कर बड़ा होता है. आजकल के युवा कहां मानते हैं ऐसी पुरानी बातों को. यह बात मांबाप, रिश्तेदार और समाज के ठेकेदार नहीं मानते हैं, इसलिए ऐसी घटनाएं होती हैं.

फिर ग्रामीण लड़केलड़कियां शारीरिक संबंधों को कम उम्र में ही समझ जाते हैं. क्योंकि वे एक कमरे के टापरे में मांबाप, भाईभाभी को सैक्स करते देखते हैं. प्राइवेसी तो होती नहीं है, तो वे भी इसे करने लगते हैं. फिर परिवार, गांव के सम्मान की रक्षा के लिए लड़केलड़कियां पेड़ों पर लटके दिखते हैं, जहर खा लेते हैं या दुष्कर्म के मुकदमे दायर हो जाते हैं.

वार्ड में और भी मरीज हैं जिन से मिलनेजुलने का, आनेजाने वालों का तांता लगा रहता है. ऊंची आवाज में बातचीत होती रहती है. दूसरे मरीजों की तकलीफ का खयाल नहीं रखा जाता है. कभीकभी नर्स चुप रहने को कहती है, तो कुछ देर शांति रहती है, फिर वही सब शुरू हो जाता है. कुछ बुजुर्ग बीड़ी पीते हैं. गार्ड उन से बीड़ी छीन लेते हैं. लेकिन चोरीछिपे फिर वार्ड में ये वस्तुएं आ ही जाती हैं. सभी जानते हैं इन से होने वाले नुकसान, लेकिन नशा होता ही ऐसा है जिस से दिमाग बंद हो जाता है. इंसान अच्छाबुरा, सहीगलत कुछ नहीं देखता.

दूसरे दिन सुबह अचानक वार्ड में शोरगुल बढ़ गया. ढोलधमाके ले कर बड़ा हुजूम वार्ड में घुस आया. जिस बैड पर लड़का लेटा था, वहां पूजापाठ होने लगी, कर्मकांड किया जाने लगा. भोपा आटे के पिंड बना कर लाया था जिसे बैड के चारों तरफ घुमाया जाने लगा. वैसे, लड़के को बैड से हटा दिया गया था.

जब वे लोग चले गए तो लड़के को वापस बैड पर लिटा दिया गया. जानकारी मिली कि 10 साल पहले एक लड़के की इसी बैड पर मृत्यु हो गईर् थी और भोपा ने उस के परिजनों को बताया कि लड़के की आत्मा भटक रही है, उस की मुक्ति करनी है, इसलिए यह कर्मकांड किया गया.

अस्पताल का प्रशासन, गार्ड सभी मूकदर्शक बने देख रहे थे, मरीजों की तकलीफ से उन को कोई मतलब नहीं था. आत्मा ले जाई जा चुकी थी और वार्ड के ज्यादातर लोग इस कर्मकांड की प्रशंसा कर रहे थे. कैसा समाज हम ने बनाया है जहां पाखंड के नाम पर होने वाले अंधविश्वास के आगे दूसरों की तकलीफ की कोई सुनवाई नहीं है.

मैं पूरे दिन विचलित रहा, उत्तेजित रहा. मेरे पक्ष में लोग ज्यादा नहीं थे, इसलिए प्रशासन से शिकायत करने पर मेरी सुनवाई नहीं हुई थी. लोकतंत्र में बहुमत की ही सुनवाई होती है. उस के लिए गलतसही कुछ नहीं होता. मैं बेचैनी से करवटें बदलता रहा.

शाम के डाक्टर राउंड पर आए. जब उन को मैं ने यह परेशानी बताई तो वे हंस कर बोले, ‘‘आप को कल छुट्टी मिल जाएगी, घर जा कर चिंतनमनन करते रहना.’’ वे बेफिक्री से दूसरे रोगियों को देखने लगे.

मैं ये जानना चाहती हूं कि लिवर फेल्योर क्या है और इसके उपचार क्या हैं?

सवाल 

मेरे पति की उम्र 56 वर्ष है. उन का लिवर फेल्योर हो चुका है. मैं जानना चाहती हूं कि लिवर फेल्योर क्या है और इस के लिए कौनकौन से उपचार उपलब्ध हैं?

जवाब

लिवर फेल्योर तब होता है जब लिवर का एक बड़ा भाग क्षतिग्रस्त हो जाता है और उसे किसी उपचार से ठीक नहीं किया जा सकता है. लिवर फेल्योरजीवन के लिए एक घातक स्थिति हैजिस के लिए तुरंत उपचार की जरूरत होती है. लिवर फेल्योरलिवर की कई बीमारियों की आखिरी स्टेज है. शुरूआती चरण में लिवर फेल्योर का उपचार दवाईयों से किया जाता है

इस के उपचार का प्रारंभिक उद्देश्य यह होता है कि लिवर के उस हिस्से को बचा लिया जाए जो अभी भी कार्य कर रहा है. अगर यह संभव नहीं है तब लिवर प्रत्यारोपण जरूरी हो जाता है. इस में या तो पूरा लिवर बदला जाता है या फिर लिवर का कुछ भाग. अत्याधुनिक तकनीकों ने लिवर प्रत्यारोपण को काफी आसान और सफल बना दिया है.

प्रोग्राम डायरेक्टर ऐंड क्लीनिकल लीड – लिवर ट्रांसप्लांटएचपीबी सर्जरी ऐंड रोबोटिक लिवर सर्जरीनारायणा हौस्पिटलगुरुग्राम.

पाठक अपनी समस्याएं इस पते पर भेजें : गृहशोभाई-8रानी झांसी मार्गनई दिल्ली-110055.

व्हाट्सऐप मैसेज या व्हाट्सऐप औडियो से अपनी समस्या 9650966493 पर भेजें.

Winter Special : वैजी कचौड़ी का स्वाद है बेमिसाल

घर पर पकवान खाना किसे पसंद नहीं होता है. ऐसे में ज़रुरी है कि आप कुछ टेस्टी बनाएं , जिसे घर पर आसान तरीके से बना सकें तो, ऐसे में हाजिर है वैज कचौड़ी की रेसेपि जिसे आप चंद मिनटो में अपने घर पर बना सकते है.

सामग्री

  • 500 ग्राम फूलगोभी कद्दूकस की हुई
  • 50 ग्राम आलू उबले,
  • 50 ग्राम फ्रेंच बींस उबली हुई,
  • 500 ग्राम आटा,
  • 50 ग्राम शिमलामिर्च बारीक कटी हुई
  •  1 छोटा चम्मच हरीमिर्च पेस्ट
  • 1 छोटा चम्मच धनिया पाउडर
  • 1 छोटा चम्मच जीरा पाउडर
  • 2 चुटकियां कसूरीमेथी
  • 1/2 छोटा चम्मच अमचूर
  • नमक स्वादानुसार
  • तलने के लिए पर्याप्त तेल.

विधि

-सारी सब्जियों को मिक्स कर के उन में नमक, मिर्च, जीरा पाउडर, हरीमिर्च पेस्ट, धनिया पाउडर, कसूरीमेथी व अमचूर मिला कर हाथ से अच्छी तरह मैश कर लें.

-आटे को दूध के साथ थोड़ा सख्त गूंध लें. इस की लोइयां बना लें. लोइयों को थोड़ा सा बेल कर एक के बीच में सब्जियों का मिश्रण रख कर दूसरे बेली गई लोई को ऊपर से रख कर हलके हाथ से पूरी की साइज की बना कर गरम तेल में सुनहरा होने तक तल लें.

-फिर गरमगरम सब्जी या अचार के साथ सर्व करें.

विकल्प: क्या दूसरी शादी वैष्णवी के लिए विकल्प थी?

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