Winter Special : घर पर तैयार करें दालसब्जी बिरयानी

घर पर अपनों के साथ खाने का मजा ही कुछ ओर होता है और उसके लिए ज़रुरी है कि हम कुछ आसान तरीकों से जल्दी खाना पका लें, तो ऐसे में आपके लिए तैयार है दालसब्जी बिरयानी की रेसेपी.

सामग्री

-1/4 कप धुली मसूर दाल

-1 कप चावल

-1/2 कप गोभी के छोटे कटे टुकड़े

-1/4 कप हरे मटर के दाने

-1/2 कप प्याज लंबाई में कटा

-2 टमाटर कद्दूकस किए

-1 छोटा चम्मच अदरक व लहसुन पेस्ट

-1/4 छोटा चम्मच लालमिर्च पाउडर

-2 छोटे चम्मच धनिया पाउडर

–1 छोटा चम्मच जीरा2 छोटे चम्मच खसखस

-10-12 केसर के धागे

-1/2 छोटा चम्मच गरममसाला

-3 बड़े चम्मच घी या तेल

-नमक स्वादानुसार.

विधि

-खसखस को 1 घंटा गरम पानी में भिगो कर पीस लें. चावलों व दाल को 20 मिनट अलगअलग पानी में भिगो दें. फिर चावलों को 5 कप उबलते पानी में गलने तक पकाएं.

-अब पानी निथार दें. मटरों और गोभी के टुकड़ों को भाप में थोड़ा कम गलने तक पका लें. केसर के धागों को 1 चम्मच कुनकुने दूध में भिगो दें.

-एक नौनस्टिक कड़ाही में घी गरम कर के प्याज सुनहरा होने तक भून कर निकाल लें. बचे घी में जीरे का तड़का लगा कर अदरक व लहसुन पेस्ट भूनें. फिर टमाटर डालें. 2 मिनट बाद लालमिर्च, धनिया पाउडर, नमक

-खसखस व गरममसाला डाल कर घी छूटने तक भूनें इस में दाल और सब्जियां डाल कर 2 चम्मच पानी डाल कर ढक कर पकाएं ताकि दाल गल जाए.

-जब सब्जियों व दाल से मसाला अच्छी तरह लिपट जाए तब केसर डाल कर कुछ सैकंड भूनें. अब एक बाउल में नीचे भुने प्याज के कतले डालें, फिर चावलों की तह लगाएं.

-ऊपर से थोड़ी सब्जी डालें. पुन: चावलों की तह, फिर भुना प्याज डालें. 2 चम्मच दूध डाल कर इसे ओवन में 200 डिग्री सैल्सियस पर 5 मिनट पकाएं. बिरयानी तैयार है. चटनी, दही या सौस के साथ टिफिन में रख लें.

Divya Aggarwal ने ब्रेकअप के 8 महीने बाद की सगाई, जानें कौन होगा दूल्हा?

मशहूर बिग बॉस11 ओटीटी की विजेता दिव्या अग्रवाल ने रचाई सगाई. जी हां, बिजनेसमैन और ब्याफ्रेंड अपूर्व पडगांवकर संग सगाई कर ली है.इस बात की जानकारी खुद दिव्या ने अपने इंस्टाग्राम पर फोटो शेयर कर के दी है.

आपको बता दे, कि एक्ट्रेस दिव्या अग्रवाल ने सगांई अपने जन्मदिन पर सेलिब्रेट की है. उन्होने अपनी सगाई से जुड़ी तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की है. इससे पहले एक्ट्रेस वरुण सूद को डेट कर रही थी, जिनसे ब्रेकअप के 8 महीने बाद अब उन्होंने सगाई कर ली है लेकिन ये सगाई उन्होने अपूर्वा पडगांवकर  से की है.

जी हां,अपूर्वा द्वारा पहनाई गई अंगूठी की फोटो साझा की है साथ ही कैप्शन में लिखा कि “अब मैं कभी भी अकेली नहीं चलूंगी” हालांकि फोटो शेयर कर दिव्या ट्रोलर्स के निशाने पर आ गई. कुछ यूजर्स ने उन्हे जमकर ट्रोल किया है. कुछ यूजर्स ने जहां वरुण सूद को दिव्या अग्रवाल के लिए बेस्ट बताया तो वहीं कुछ यूजर्स ने बिजनेसमैन संग सगाई करने के लिए एक्ट्रेस पर निशाना साधा.


बता दें,कि उनकी सगाई कोई हिन्दू रीती रिवाजों के साथ नहीं है बल्कि, जन्मदिन की पार्टी के समय ही बिजनेसमैन अपूर्वा पडगांवकर ने दिव्या अग्रवाल को रिंग देकर प्रोपज किया और दिव्या ने अगूंठी पहनकर अपूर्वा पडगांवकर को अपना जीवन साथी चुन लिया है.

इंस्टाग्राम पर की फोटो शेयर

दिव्या अग्रवाल ने इंस्टाग्राम पर अपूर्वा के साथ फोटोज साझा कर रिलेशनशिप की जानकारी दी.एक्ट्रेस ने लिखा, “क्या मैं कभी मुस्कुराना बंद करूंगी? बिल्कुल नहीं. जिंदगी और चमकदार हो गई है और यह सफर साझा करने के लिए मुझे एक सही इंसान भी मिल गया है. इनका #Baico इस बात का वादा है. इस खास दिन के बाद मैं कभी भी अकेले नहीं चलूंगी”.

खास मौके पर की Kiss

 

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दिव्या अग्रवाल और अपूर्वा पडगांवकर पार्टी में सबके सामने रोमांटिक भी हुए. एक तस्वीर में अपूर्वा एक्ट्रेस के माथे पर किस करते दिखाई दिए. दिव्या अग्रवाल बिग बॉस 11 का हिस्सा रह चुकी है. इससे पहले वो प्रियांक शर्मा को भी डेट कर चुकी है. दोनों की मुलाकात ‘स्प्लिट्सविला’ में हुई थी. हालांकि उनका रिलेशनशिप ज्यादा दिनों तक नहीं चल पाया था.

GHKKPM: सई-विराट की जिंदगी में आएगा नया मोड़, होगी बड़ी अनहोनी

“गुम है किसी के प्यार में” मशहूर शो इन दिनों मीडिया की सुर्खियों में बना हुआ है टीवी शो टीआरपी की रेस में शामिल है शो में आने वाले मोड़ फैंस को काफी पसंद आ रहे है. हाल ही में गुम है किसी के प्यार में का एक प्रोमो वीडियो सामने आया है. जिसे देख काफी एंटरटेन हो जाएंगे. शो में नया मोड़ आया है जिसका असर सई, पाखी और विराट की जिंदगी पर पडेगा. वीडियो को देखकर ये कहा जा सकता है तीनों की जिंदगी अब बदल जाएगी.

आपको बता दें, कि प्रोमो वीडियो में दिखाया गया है कि सपने में सई और विराट एक बस के साथ खेलते दिखाई देते हैं, जिसे लेकिन विनायक कहता है कि इसमें हम जल्द ही पिकनिक करने जाएंगे. वह जैसे ही बस को रिमोट से चलाता है, सवि उसकी स्पीड को बढ़ाने के लिए कहती है. आगे जाकर बस नीचे गिर जाती है. दूसरी तरफ सई और विराट भी चौंककर नींद से उठ जाते हैं और बुरी तरह घबरा जाते हैं.बता दे, इस प्रोमो वीडियो को अबतक 20 हजार लोग देख चुके है .

 

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प्रोमो वीडियो को देख फैंस कई तरह के कमेंट्स कर रहे है और तरह-तरह के सवाल कर रहे है. एक यूजर ने प्रोमो पर कमेट करते हुए लिखा है कि “फिर से बस हादसा” तो वहीं दूसरे यूजर ने सवाल किया है, “इस हादसे के बाद सई और विराट एक होंगे या फिर विराट और पाखी एक होंगे” दूसरे यूजर ने शो को लेकर बात कही और लिखा, कि “इस हादसे के बाद यह भी सच बाहर आएगा कि विनायक सई और विराट का बेटा है”

 

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खुशियों के फूल – भाग 3 : किस बात से डर गई अम्बा

वह  दिन उन दोनों की जिंदगी का एक अहम दिन था जब दोनों अस्पताल में टेस्ट के बाद कोरोना नेगेटिव निकले थे. अभी उन्हें चौदह दिनों तक क्वारंटाइन में और रहना था. सो दोनों फिर से निनाद के घर चले गए.

घर पहुंचकर निनाद ने अम्बा से  कहा, “अम्बा,  में ताउम्र तुम्हारा शुक्रगुजार रहूंगा कि तुम मेरी सारी ज़्यादतियाँ  भुलाकर मुझे मौत के मुंह से वापस खींच लाई. मैं वादा करता हूं तुमसे, अब कभी पुरानी  गलतियां  नहीं दोहराऊंगा. कभी बेबात तुम पर नहीं चिल्लाऊंगा. आई एम रीयली वेरी सॉरी. मुझे माफ कर दो.’’

“निनाद, तुम्हारे माफ़ी मांगने से क्या रो रो कर, कुढ़ते झींकते तुम्हारे साथ बिताए तीन साल अनहुए हो जाएँगे? उन तीन सालों में तुमने मुझे जो दर्द दिया, तुम्हारे सॉरी कह देने से क्या उनकी भरपाई हो जाएगी? मैं कैसे मान लूँ कि तुम अब पुरानी बातें नहीं दोहराओगे? नहीं नहीं, हम अलग अलग ही ठीक हैं. अब मुझमें तुम्हारी फ़िज़ूल की कलह को झेलने की सहनशक्ति भी नहीं बची है.मैं अकेले बहुत सुकून से हूँ.“

उसकी बातें सुन निनाद ने उससे फिर से मिन्नतें की “अम्बा, मेरा यकीन करो, तुमसे अलग रह कर अब मुझे अपनी गलती का एहसास हो गया है कि मैंने तुम्हारे साथ बहुत अन्याय किया. बेवज़ह तुमसे झगड़ा करता रहा. प्लीज़ अम्बा, एक बार मुझे माफ़ करदो. वादा करता हूँ, तुम्हें कभी मुझसे शिकायत नहीं होगी. प्लीज़ अम्बा.’’

निनाद की ये बातें सुन अम्बा को अभी तक यकीन नहीं हो रहा था कि यह वही निनाद है जो कुछ महीनों पहले तक उससे बात बात पर लड़ाई मोल लेता था. बहाने बहाने से उसे सताता था. कुछ सोच कर उसने निनाद से कहा, “इस बार तो मैं तुम्हारी बात मान  लेती हूँ, लेकिन एक बात कान खोलकर सुन लो, अगर  अब तुमने फिर से बेबात मुझसे कभी भी कलह की, बेवज़ह मुझसे झगड़े तो मैं उसी वक़्त  तुम्हें छोड़ कर चली जाऊँगी और तुमसे तलाक लेकर रहूंगी. पढ़ी लिखी अपने पैरों पर खड़ी हूं, अकेले जिंदगी काटने का दम खम  रखती हूं. इतने दिनों से अकेली बड़े चैन से रह ही रही हूँ. अब मैं तुम्हें अपनी मानसिक शांति भंग करने की इज़ाजत  हर्गिज़ हर्गिज़  नहीं दूँगी. ना ही अपनी बेइज्ज़ती करवाऊंगी. तुम्हें अपनी गलती का एहसास हो गया, इसलिए इस बार तो मैंने तुम्हें माफ़ किया लेकिन याद रखना, अगली बार तुम्हें कतई माफ़ी नहीं मिलेगी.“

“नहीं, नहीं अम्बा, भरोसा रखो, अब मैं तुम्हें शिकायत का मौका हर्गिज़ हर्गिज़ नहीं दूंगा. मैं वास्तव में अपनी पुरानी ज़्यादतियों के लिए बहुत शर्मिंदा हूँ. अब हम एक नई जिंदगी की शुरुआत करेंगे. जिंदगी की यह दूसरी पारी तुम्हारे नाम, माय लव,” यह  कहते हुए निनाद ने अम्बा  को अपने सीने से लगा लिया था .

पति की बाहों में बंधी अम्बा  को लगा, मानो पूरी दुनिया उसकी मुट्ठी में थी. निनाद  के साथ साझा, सुखद  भविष्य के सतरंगे  सपने उसकी आंखों में झिलमिला उठे.उसे लगा, एक अर्से बाद उसके चारों ओर खुशियों के फ़ूल गमक महक उठे थे.

त्रिकोण- शातिर नितिन के जाल से क्या बच पाई नर्स?

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पति पत्नी के मामलों में धर्म का क्या काम

माना जाता है कि मुसलिम विवाहों के झोगड़ों के मामले आपस में सुलटा लिए जाते हैं और ये अदालतों में नहीं जाते पर अदालतें शादीशुदा मुसलिम जोड़ों के विवादों से शायद आबादी के अनुपात से भरी हुई हैं. ये मामले कम इसलिए दिखते हैं कि गरीब हिंदू जोड़ों की तरह गरीब मुसलिम जोड़े भी अदालतों का खर्च नहीं उठा सकते और पतिपत्नी एकदूसरे की जबरदस्ती सह लेते हैं.

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हाल ही में एक मामले में एक मुसलिम पति को पत्नी को अपने साथ रहने पर मजबूर करने का हक देने से इनकार कर दिया क्योंकि उस पति ने दूसरी शादी भी कर ली थी और इसलिए पहली पत्नी अपने पिता के घर चली गईर् थी. पहली पत्नी अपने पिता की इकलौती संतान है और उस के पिता ने मुसलिम कानून की जरूरत के हिसाब से जीतेजी सारी संपत्ति बेटी को उपहार कर दी थी.

हालांकि अदालत ने कुरान का सहारा लिया. पतिपत्नी के झोगड़ों में धर्म को लिया ही नहीं जाना चाहिए क्योंकि धर्म जबरन एक आदमी और औरत के साथ रहने के अनुबंध पर सवार हो चुका है. शादी का न तो मंदिर से कोई मतलब है, न चर्च से, न मुल्ला से, न ग्रंथी से. शादी 2 जनों की आपसी रजामंदी का मामला है और जब रजामंदी से किसी की शादी की है कि दोनों किसी तीसरे को अपने संबंधों के बीच न आने देंगे तो यह माना जाना चाहिए बिना चूंचपड़ के. कानून को पतिपत्नी का हक देना चाहिए लेकिन कौंट्रैक्ट एक्ट के हिसाब से, धर्म के हिसाब से नहीं. पतिपत्नी के अधिकार एकदूसरे पर क्या हैं और वे अगर संबंध तोड़ें तो कौन क्या करेगा क्या नहीं, यह इसी तरह तय करना चाहिए जैसे पार्टनरशिप एक्ट, कंपनीज एक्ट, सोसायटीज एक्ट में तय होता है. धर्म इन अनुबंधों के बीच में नहीं आता. शादी न भगवानों के कहने पर होती है न भगवानों के कहने पर टूटती है.

एक आदमी और औरत जीवनभर एकदूसरे के साथ ही सुखी रहेंगे, यह जरूरी नहीं. शादी के बाद 50-60 या 70 सालों में बहुत कुछ बदल सकता है. पसंद बदल सकती है, स्तर बदल सकता है, शरीर बदल सकता है. जीवनसाथी को हर मामले में जबरन ढोया जाए, यह गलत है. प्रेम में तो लोग एक पेड़ के लिए भी जान की बाजी लगा देते हैं. जिस के साथ सुख के हजारों पल बिताए हों, उस के साथ दुख में साथ देना कोई बड़ी बात नहीं.

मुसलिम जोड़े ने अदालत की शरण ली वह साबित करता है कि मुसलिम मर्द भी तलाक का हक कम इस्तेमाल करते हैं और जहां हक हो वहां खुला भी इस्तेमाल नहीं किया जाता. कट्टर माने जाने वाले मुसलिम जोड़े भी सैक्युलर अदालतों की शरण में आते हैं. यह बात दूसरी कि बहुत सी अदालतों के जजों के मनों पर धार्मिक बोझो भारी रहता है. इस मामले में जज ने सही फैसला किया कि पति पत्नी को साथ रहने पर मजबूर नहीं कर सकता खासतौर पर तब जब उस ने दूसरी शादी भी कर रखी हो, चाहे वह मुसलिम कानून समान हो.

मेरे फेस पर मुंहासे होने लगे है, मैं क्या करुं?

सावल

मैं दिल्ली से बैंगलुरु शिफ्ट हुई तो मुझे मुहांसे होने लगे जो पहले दिल्ली में कभी नहीं हुए. मेरी उम्र 25 साल है. जो खाना मैं दिल्ली में खाती थी अब भी खाती हूं. मैं क्या करूं?

जवाब

ज्यादातर दिल्ली में मुंहासे निकलने के चांस ज्यादा होते हैं. बैंगलुरु का तापमान बहुत नौर्मल रहता है यानी न गरम न ठंडा. इसलिए जगह बदलने की वजह से मुंहासे निकलना शुरू हुआयह आप की गलतफहमी है. आप को चैक करना चाहिए कि कहीं कोई हारमोनल प्रौब्लम तो नहीं है. अगर है तो उसे सौल्व करना जरूरी है. हारमोन में बदलाव आने से कई बार औयल ग्लैंड्स ज्यादा ऐक्टिव हो जाती हैं. इसलिए त्वचा की सफाई और भी जरूरी है. तैलीय त्वचा को मुंहासों से बचाने के लिए उस की नियमित सफाई जरूरी है. चेहरे को साफ करने के लिए एस्ट्रिंजैंट का इस्तेमाल कर सकती हैं या फिर घर में भी स्किन टौनिक बना सकती हैं. रात को नीम या पुदीने की पत्तियों को पानी में भिगो दें. सुबह पानी को उबाल कर छान लें. इस स्किन टौनिक से त्वचा साफ करने से भी मुंहासों की समस्या से छुटकारा मिलेगा. मुंहासों को दूर करने के लिए 1/2 चम्मच अखरोट की गिरी का पाउडर और 1 चम्मच चावल का आटा लें. इस में 1/2 चम्मच मूली का रस1 चम्मच छाछकुछ गुलाबजल की बूंदें मिला कर पेस्ट बना लें. इस पेस्ट को चेहरे पर लगाएं. सूखने पर ठंडे पानी से धो लें. इस से मुंहासे कम होंगे और रंग भी निखरेगा.

-समस्याओं के समाधान

ऐल्प्स ब्यूटी क्लीनिक की फाउंडर डाइरैक्टर डा. भारती तनेजा द्वारा

पाठक अपनी समस्याएं इस पते पर भेजें : गृहशोभाई-8रानी झांसी मार्गनई दिल्ली-110055.

 व्हाट्सऐप मैसेज या व्हाट्सऐप औडियो से अपनी समस्या 9650966493 पर भेजें.

Winter Special: जब घटाना हो वजन

आजकल हर न्यूजपेपर, टीवी चैनल, इंटरनैट, मैगजीन आदि में वजन कम करने की तमाम तरह की दवाओं के विज्ञापन छपते हैं. उन के साथ ही इन्हें इस्तेमाल करने वालों के अनुभव भी बताए जाते हैं और दवा लेने के पहले के और बाद के फोटो भी दिखाए जाते हैं. मनी बैक जैसे औफर भी दिए जाते हैं. इन विज्ञापनों को देख कर लोग जल्द से जल्द वजन घटाने के लिए इन दवाओं का सेवन शुरू कर देते हैं. परंतु ये दवाएं उन के शरीर को फायदा कम नुकसान ज्यादा पहुंचाती हैं. आइए, जानते हैं कैसे:

स्थायी समाधान नहीं

क्लीनिकल डाइटीशियन के अनुसार, वजन कम करने वाली कुछ दवाओं से शरीर का ‘बेसल मैटाबौलिक रेट’ बढ़ा कर वजन कम हो जाता है. लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं होता, क्योंकि जैसे ही दवा का सेवन बंद करते हैं वजन फिर से बढ़ जाता है.

दरअसल, खाना खाने से हमारे शरीर को ऐनर्जी मिलती है. ऐसे में अगर कोई दवा हमारे खाने को शरीर में जज्ब होने से रोकती है, तो वह हमारे शरीर के लिए नुकसानदायक है. वजन कम करने वाली सभी दवाएं यही काम करती हैं. कई बार तो इन का असर उलटा भी हो जाता है. इसलिए वजन घटाने के लिए इन दवाओं का सेवन कभी नहीं करना चाहिए.

सुरक्षित नहीं

वजन कम करने की चाहत में लोग इन दवाओं का सेवन करते हैं, लेकिन सिर्फ गोलियां खा कर वजन कम नहीं हो सकता है. ये एक सीमा तक ही काम करती हैं. इन के साइड इफैक्ट्सके कारण वीकनैस, गुस्सा आना, लो ब्लडप्रैशर, केशों का झड़ना, ज्यादा भूख लगना, डिप्रैशन जैसी समस्याएं पैदा होने लगती हैं.

आजकल वजन कम करने वाली ऐलोपैथिक, आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक सभी किस्म की दवाएं मार्केट में उपलब्ध हैं. लेकिन सच यह है कि तमाम दावों के बावजूद ज्यादातर दवाएं सुरक्षित नहीं हैं.

कैसे बनाएं सुडौल काया

सही डाइट व जीवनशैली में सुधार के साथसाथ कुछ अन्य उपाय भी हैं, जिन्हें अपना कर आप अपनी फिगर को सुडौल बना सकती हैं. इस में दोराय नहीं कि स्लिमट्रिम होने के लिए जितनी मेहनत करनी पड़ती है, उतनी ही कीमत भी चुकानी पड़ती है. बाजार में ऐसे भी कई उत्पाद उपलब्ध हैं, जिन का इस्तेमाल सरल है व सुडौल काया पाने में असरकारक भी. उन में से एक है स्लिमिंग औयल. यह अगर किसी ब्रैंडेड कंपनी का हो और प्राकृतिक तत्त्वों से बना हो तो इस के नियमित इस्तेमाल से सैल्युलाइट घटता है और त्वचा में कसाव बढ़़ता है. फलस्वरूप शरीर स्वस्थ व सुडौल बनता है. मगर इस्तेमाल से पहले जरूरी है कि यह तसल्ली कर लें कि आप की त्वचा पर इस का कोई साइड इफैक्ट तो नहीं होगा.

सुधारें लाइफस्टाइल

जिस प्रकार कार चलाने के लिए पैट्रोल या डीजल के अलावा कोई और लिक्विड यूज नहीं कर सकते, उसी प्रकार आप खाना खाने के बजाय कुछ स्नैक्स या ड्रिंक्स लेंगे तो उन से शरीर को चलाने के लिए पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिल सकती. सही समय पर सही मात्रा में हैल्दी फूड लेने से ही शरीर से काम लिया जा सकता है. इसलिए कभी खाने को नजरअंदाज न करें. अगर आप अपना वजन घटाना चाहती हैं, तो प्रौपर डाइट लेने के साथसाथ ऐक्सरसाइज भी जरूर करें.

क्या है एक्टर अदनान खान की दिली ख्वाहिश, पढ़े इंटरव्यू

इश्क सुभान अल्लाह फेम अभिनेता अदनान खान दुबई से है,बचपन से ही उन्हें फिल्म देखने का शौक था. ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने थोड़े समय के लिए जॉब किया,लेकिन उन्हें ये काम पसंद नही आया और वे अभिनय और डायरेक्शन की ओर मुड़े. शुरुआत में उन्होंने दुबई में शूट कर शॉर्ट फिल्म ’बबल’बनाई, जो इंटरनेशनली फेमस हुई और कई अवॉर्ड्स भी जीती.

इसके बाद उन्होंने मुंबई आने का प्लान बनाया और एक्टिंग में जाने का मन बनाया,इसके लिए उन्होंने अनुपम खेर की एक्टिंग क्लास में दाखिला लिया और कई नाटकों में काम किया, इससे उन्हें आगे बढ़ने में मदद मिली.

Adnan khan

अभी सोनी टीवी पर उनकी शो कथा अनकही आ रही है, जिसमें उन्होंने वियान की मुख्य भूमिका निभा रहे है. किसी सही शो को चुनना अदनान के लिए आसान नहीं होता,ऐसे में अदनान अपनी भूमिका में कुछ खास बातों को देखते है, वे कहते है कि किसी भूमिका के बारे में मैं अधिक नही सोचता. केवल पिछले शो की भूमिका से अलग चुनने की कोशिश करता हूं. मैं अधिक डार्क या शेकी भूमिका में काम नहीं करना चाहता,जिससे मैं रीलेट न कर सकूं.

चरित्र ने बदला मुझे

इस शो में वियान का चरित्र बहुत सुंदर है, इसमें बचपन से ही वियान की सोच को काफी अलग दिखाया गया है

इसके आगे अदनान कहते है कि वियान का चरित्र बहुत ही आकर्षक और चुनौतीपूर्ण है, इसमें एक ऐसे व्यक्ति की भूमिका है, जिसके जीवन में बहुत सारी चीज़ें घटती है,लेकिन वह उसे प्रकट नही करता. जब उसके जीवन में एक ऐसे चरित्र का प्रवेश होता है,जिससे उसकी दुनिया बदल जाती है. इस किरदार से मैं खुद को रीलेट कर पाता हूं, क्योंकि मैंने अपने जीवन में ऐसी कई लड़कियों से मिला,जो पैसे को प्यार से अधिक महत्व देती है और उन्हें किसी के जीवन से बीच रास्ते में निकल जाने में समय नहीं लगता. इस चरित्र को करने के बाद से मुझमें अंतर आया है और अब ऐसे कई उदाहरण , मेरे पास है, जिसमें मैंने महिलाओं की कामयाबी और सफ़लता को दिल से माना है. मैं उन सभी को सम्मान भी देता हूं,जिसमें मेरी मां का स्थान सबसे ऊपर है.

मिली प्रेरणा

एक्टिंग का शौक बचपन से अदनान को रहा, उन्हें फिल्में देखने का भी बहुत शौक था. अभिनय की प्रेरणा के बारे में पूछने पर वे कहते है कि मैं दुबई का हूं और बचपन से मुझे कहानियां, कविताएं और कोट्स लिखने का बहुत शौक था. दुबई में एक्टर्स कम होते है, वहां एक्टिंग में जाने की कोई कल्चर नहीं है. मैंने एक एक्टर विल्समिथ की अंग्रेज़ी फिल्म ’सेवन पाउंड्स’ देखा और इस फिल्म ने मेरी जिंदगी बदल दी. उस फिल्म की एक्टिंग मेरे अंदर बस गई.

मिला परिवार का सहयोग

अभिनय में आने के लिए अदनान को न तो किसी ने मना किया और न ही वाहवाही की. उनका कहना है कि सभी ने दिल से कोशिश करने की सलाह दी. मेरी मां को फिल्मों से कोई लगाव नहीं है, लेकिन उन्होंने भी रोका नहीं.

रहा संघर्ष

मुंबई आने के बाद अदनान को बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ा, क्योंकि वे किसी को जानते नही थे, उनके जो दो तीन लोग जानने वाले थे, वे भी हेल्प नही कर पाए. ऐसे में उन्होंने अनुपम खेर की एक्टिंग क्लास में दाखिला लिया और वहां उन्हें कई दोस्त मिले, जो एक्टिंग सीखने आए नए छात्र थे. इसलिए सभी मिलकर सुबह अंधेरी वेस्ट में स्थित ऑडिशन स्टूडियो से निकलते हुए अच्छे कलाकारों को देखकर वहां पहुंचते और दरवाजा खटखटाकर ऑडिशन देते थे,ऐसे करीब एक साल तक चलता रहा. अदनान कहते हैं कि इसे मैं संघर्ष नही मानता,क्योंकि हर काम को खोजना पड़ता है और उसमें कही हां तो कहीं ना का सामना करना पड़ता हैं. यह एक खोज थी. एक्टिंग कोर्स खत्म करने के बाद मुझे एक बड़ी प्रॉडक्शन हाउस में ऑडिशन का ऑफ़र मिला था,लेकिन मैं वहा नही गया,क्योंकि मैं बहुत नर्वस था.

मिला ब्रेक

अदनान आगे कहते है कि मुझे पहला ब्रेक शो ’अर्जुन’से मिला.दो मिनट का ही रोल था, लेकिन मेरे काम को सभी ने पसंद किया,ऐसे मैंने कई सारे छोटी छोटी भूमिकाएं निभाई और आगे बढ़ता गया.जिंदगी बदलने वाली शो ’इश्क सुभान अल्लाह’ थी, जिससे मैं घर घर पहचाना जाने लगा. इसमें मेरी भूमिका भी अच्छी थी.

इसके आगे वे कहते है कि एक्टिंग फ़ील्ड में ग्लैमर अवश्य है, लेकिन एक्टिंग से जो प्यार करते है,वहीं व्यक्ति इस फ़ील्ड में काम कर सकते हैं. रिजेक्शन सभी को सहना पड़ता है,लेकिन मायूस होने के बजाय खुद के क्राफ्ट पर अच्छी तरीके से काम कर आगे बढ़ना पड़ता है. इसके अलावा अपने कॉन्फिडेंस को बनाएं रखें.इस क्षेत्र में सबका स्वागत है. रिजेक्शन होने पर मैं स्वीकार कर लेता हूं, उस बारे में अधिक नही सोचता, खराब लगता है, लेकिन जल्दी काम पर लौटने के बारे में सोचता हूं.

ड्रीम है क्या?

अदनान के पास 10से 12 आइडियाज है, जिन्हें वे शॉर्ट फिल्म में ढालना चाहते है. ये सभी आयडियाज आम जीवन से प्रेरित है. वे इन आइडियाज को शॉर्ट फिल्म में परिवर्तित कर दर्शकों तक पहुंचाना चाहते है. सुपर पॉवर मिलने पर मैं टाइम लाइन में जाकर सालो जिंदा रहना चाहता हूं और पुराने समय में लोग कैसे रहते थे,उसे देखना चाहता हूं. इतिहास उन्होंने लिखी है,जो जीतते आए हैं,हारने वालों ने नही. इसलिए उसका अध्ययन करना मुझे पसंद है.नए साल को में नए रूप में स्वागत करना चाहता हूं, जिसमें खुशियां हो, गम का प्रवेश न हो,किसी से मनमुटाव न हो.

खुशियों के फूल – भाग 2 : किस बात से डर गई अम्बा

एक  दिन लेकिन हद ही हो गई. उस दिन अम्बा  मां के घर से लौटी ही थी, कि रात के आठ  बजे तक टेबल पर डिनर सर्व ना होने की फ़िजूल सी बात पर निनाद उस पर गुस्से से फट पड़ा और उस दिन निनाद का बेवजह गुस्से से चीखना चिल्लाना सुन अम्बा  का धैर्य जवाब दे गया. वह उल्टे पैरों वापस मां के घर चली आई. बहुत सोच विचार कर मां के यहां एक माह  रहने के बाद उसने निनाद को फोन करके कहा “निनाद, अब मैं यहां माँ के साथ ही रहूँगी. तुम्हारे घर नहीं लौटूंगी. मुझे तुमसे तलाक चाहिए.’’

अम्बा की यह बात सुनकर निनाद अतीव क्रोध से बिफर उठा. अम्बा की तलाक की मांग उसे अपने पौरुष पर प्रहार लगी. सो गुस्से से भड़कते हुए वह चिल्लाया, “शौक से रहो माँ के साथ.मैं भी तुम्हारे बिना मरा नहीं जा रहा. जब चाहोगी तलाक मिल जाएगा.’’

मन ही मन समझता था कि वह पत्नी के साथ ज्यादती कर रहा है लेकिन अपने पुरुषोचित, अड़ियल  और अहंवादी  स्वाभाव से मजबूर था.

अम्बा तलाक की कार्यवाही शुरू करने के लिए एक अच्छे वकील की तलाश में जुट गई थी. अम्बा को माँ के यहां आए तीन माह हो चले थे.तभी अम्बा को एक अच्छी महिला वकील मिल गई थी और वह उससे मिलने ही वाली थी कि तभी  उन्हीं दिनों लंदन में एक कॉन्फ्रेंस में दोनों को जाना पड़ा. कॉन्फ्रेंस अटेंड कर एक ही फ़्लाइट से वे दोनों अपने देश लौटे ही थे कि लंदन में कोरोना  के प्रकोप के चलते  अपने शहर के एयरपोर्ट पर निनाद को हल्का बुखार निकला. फिर हौस्पिटल में दोनों का कोरोना का टेस्ट हुआ और उसमें  दोनों कोरोना पॉजिटिव निकले

कि तभी निनाद की  पुकार से उसकी तंद्रा टूटी और वह वर्तमान में वापस आई और दौड़ी-दौड़ी निनाद के पास गई.

निनाद आंखें बंद कर लेटा हुआ था.”अम्बा,  मेरे पास बैठो.  मुझे कुछ अच्छा नहीं लग रहा.”

” कैसा लग रहा है निनाद?”

”  बहुत कमजोरी लग रही है और घबराहट हो रही है.”

“अरे घबराने की क्या बात है?  चलो मैं तुम्हारे लिए गर्मागर्म टमेटो सूप बनाकर लाती हूं.सूप पीकर तुम बेहतर फ़ील करोगे,” यह कहकर अम्बा  रसोई में जाकर दस  मिनट में सूप बनाकर ले आई.

” अम्बा,  हम दोनों ठीक तो हो जाएंगे ना?”

” हां हां बिल्कुल ठीक हो जाएंगे. डाक्टर ने कहा था न, हम दोनों के ही सिमटम्स बहुत माइल्ड हैं. डरने की कोई बात नहीं है. तुम सोने की कोशिश करो. सो लोगे तो बेहतर फील करोगे.”

” तुम भी जा कर आराम करो. तुम्हें भी तो थकान हो रही होगी.”

” नहीं नहीं, मेरा इंफेक्शन  शायद  कुछ ज्यादा ही माइल्ड है. मुझे कुछ गड़बड़ फील नहीं हो रहा. तुम सो जाओ.”

तभी निनाद ने अपना हाथ बढ़ाकर अम्बा का हाथ थाम उसे जकड़ लिया और उसे खींच कर अपने पास बिठाते हुए उससे बेहद मीठे स्वरों में बोला, “मुझसे नाराज़ हो? मैं अपनी पिछली गलतियों को लेकर बेहद शर्मिंदा हूं. मेरे पास बैठो. तुम मुझसे दूर चली जाती हो तो मुझे लगता है, मेरी जिंदगी मुझसे दूर चली गई. वापिस आजाओ अम्बा मेरी ज़िंदगी में. तुम्हारे बिना मैं बहुत अकेला हो गया हूँ.“ यह कह कर उसने उसकी  हथेली को चूम उसके हाथों को अपनी गिरफ़्त में जकड़ लिया.”

महीनों बाद पति के स्नेहिल स्पर्श और स्वरों  से अम्बा  एक अबूझ  मृदु ऐहसास  से भर उठी लेकिन दूसरे ही क्षण वह असमंजस से भर उठी. तीन वर्षों तक उसका दुर्व्यव्हार सह कर क्या अब उसे एक बार फिर उसके करीब आना चाहिए?

पति के हाथों को जकड़े जकड़े अम्बा  सोच रही थी, “काश, तुम पहले भी ऐसे ही रहते तो जिंदगी कितनी खुशनुमा होती.”

अगली सुबह निनाद  जब उठा तो उसके सर में तेज दर्द था. अम्बा  ने निनाद के फैमिली डॉक्टर को निनाद के चेकअप के लिए बुलाया. वह आए और निनाद  की हालत देख अम्बा  से बोले, “चिंता की कोई बात नहीं है. अभी भी इनके सिम्टम्स माइल्ड ही  हैं. हॉस्पिटलाइजेशन की जरूरत नहीं है. बस इन पर पूरे वक्त वॉच रखिए और तबीयत बिगड़े तो मुझे इन्फॉर्म करिए. आपको भी कोरोना का इंफेक्शन है. बेहतर होगा यदि आप एक नर्स रख लें.”

“नहीं-नहीं डॉक्टर, मैं बिल्कुल ठीक हूं.  ना मुझे कोई कमजोरी लग रही न ही कहीं दर्द है. आप निश्चिंत रहिए मैं इन पर पूरे वक्त वॉच रखूंगी.”

डाक्टर के जाने के बाद निनाद  ने अम्बा  से कहा, “तुम  इतना लोड लोगी तो तुम भी बीमार पड़ जाओगी. प्लीज कोई नर्स रख लो.”

“हां, इस बारे में सोचती हूं. तुम अभी सो जाओ.’’

निनाद को चादर उढ़ा वह दूसरे बेडरूम में अपने पलंग पर लेट गई. पिछले दिन से अम्बा गंभीर सोचविचार में मग्न थी. निनाद को लेकर वह कुछ फैसला नहीं कर पा रही थी. निनाद के रवैये से स्पष्ट था, वह अब समझौते के मूड में था, लेकिन क्या वह पिछले तीन वर्षों तक उसके दिये घावों को भुला कर उसकी इच्छानुसार उसके साथ एक बार फिर जिंदगी की नई शुरुआत कर पाएगी.वह घोर द्विविधा में थी. निनाद के बंधन को काट फेंके या फिर गुजरे दिनों को भुला कर एक नया आगाज़ करे? एक ओर उसका मन कहता, इंसान की फितरत कभी नहीं बदलती. उसने उसके साथ एक नई शुरुआत कर भी ली तो क्या गारंटी है कि वह उसे दोबारा तंग नहीं करेगा? तभी दूसरी ओर वह सोचती, जब निनाद ने अपनी गलती मान ली है तो एक मौका तो उसे देना ही चाहिए.अनायास उसके कानों में माँ के धीर गंभीर शब्द गूंज उठे, “रिश्तों की खूबसूरती उन्हें बनाए रखने में होती है, ना की उन्हें तोड़ने में.“

जिंदगी के इस मोड पर वह स्पष्टता से कुछ सोच नहीं पा रही थी, कि क्या करे.

बीमारी के इस दौर में निनाद एक दम बदला बदला नज़र आ रहा था. वह   बेहद डर गया था. वह एक बेहद डरपोक किस्म का, कमज़ोर दिल का इंसान था.उसे लगता वह कोरोना से मर जाएगा. ठीक नहीं होगा. वह बेहद कमज़ोरी फील कर रहा था. अम्बा  को यूं दिन रात अपनी देखभाल करते देख मन ही मन उसने न जाने कितनी बार अपने आप से दोहराया, “इस बार बस मैं ठीक हो जाऊं, अम्बा  को बिल्कुल तंग नहीं करूंगा. उसे पूरा प्यार और मान दूंगा. अब उसपर बिलकुल नहीं चिल्लाऊंगा.” अम्बा को इस तरह समर्पित भाव से अपनी सेवा करते देख वह गुजरे दिनों में उसके प्रति अपने दुर्व्यवहार को लेकर घोर  पछतावे से भर उठा. साथ ही कोरोना से मौत के खौफ ने उसे बहुत हद तक  बदल दिया था.

उस दिन रात का एक  बज रहा था. निनाद की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी.  उसके हाथ पैरों में बहुत दर्द हो रहा था. वह बार-बार दर्द से हाथ पैर पटक रहा था. अम्बा  उसके हाथ पैर दबा रही थी. अम्बा  के हाथ पैर दबाने से उसे बेहद आराम लगा था और भोर होते होते वह गहरी नींद में सो गया था. इतनी देर तक उसके हाथ पैर दबाते दबाते अम्बा  भी थकान से बेदम हो गई थी लेकिन मन में कहीं अबूझ सुकून का भाव था. वह कोरोना की वज़ह से  निनाद में आए परिवर्तन को भांप रही थी. निनाद अब  बेहद बदल गया था. उसकी आंखों में अपने लिए प्यार का समुंदर उमड़ते  देख वह मानो  भीतर तक भीग  उठती लेकिन दूसरे की क्षण पुराने दिनों की याद कर भयभीत हो उठती.

अगली सुबह अम्बा ने डाक्टर को बुलवाया. उन्होंने निनाद के लिए कुछ दवाइयाँ लिख दीं. उन दवाइयों  से निनाद  की तबीयत धीमे धीमे सुधरने लगी थी. दस  दिनों में वह बिस्तर से उठ बैठा था.

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