जब बुजुर्गों की सेवा में बाधक बन जाए कैरियर

‘पीकू’ फिल्म में पीकू का किरदार देख कर दर्शकों के मुंह से यही निकला कि घरघर पीकू बसती है यानी पीकू जैसी लड़कियां हमारे समाज में पाई जाती हैं, जो आप को मांबाप की सेवा करती उन्हीं के घर पर मिलेंगी. हम यह नहीं कह रहे कि पीकू जैसी सेवा अपने बुजुर्ग मांबाप के लिए करना गलत है. पर यह भी जरूरी है कि पीकू बन कर अपनी जिंदगी को खराब न करें क्योंकि उस चक्कर में मांबाप भी परेशान होंगे.

कई साल पहले आई इस फिल्म की बात करें तो इस के 2 किरदार हमारे मन में कई सवाल छोड़ जाते हैं. कई बार हमें पीकू सही लगती है, तो कई बार भास्कर बनर्जी. चूंकि फिल्म को कौमेडी टच दिया गया है, इसलिए यह अंत में उन जरूरी सवालों से बच जाती है, जिन का हमें असल जिंदगी में सामना करना पड़ता है.

क्या सेवा करने के कारण अपना कैरियर, अपनी मरजी से कुछ करने की आजादी और शादी न करने का फैसला लेना सही है? क्या गैरतमंद लड़की पूरी जिंदगी अपने भैयाभाभी, बहन के तानों को सहते हुए काटना पसंद करेगी? मान लीजिए कि आप का भाई, भाभी, बहन या अन्य परिवार के सगेसंबंधी आप के बूढ़े या लाचार मां या बाप को नहीं देख सकते, तो क्या आप अपनी पूरी लाइफ उन की देखभाल में गुजार देंगी? क्या पूरी जिंदगी उन्हीं की अजीब इच्छाओं या दवादारू के पीछे ही उल?ा रहे?

बड़ा सवाल है कि उन के चले जाने के बाद आप की स्थिति क्या होगी? क्या आप को भी उन की तरह एक पीकू चाहिए होगी या फिर आप के पास इतना पैसा है कि आप बिना किसी के सहारे अपनी पूरी जिंदगी गुजार देंगी? क्या सभी पीकुओं के पास पैसा या अन्य सुखसुविधाएं होंगी? ये सवाल पीकू कई लोगों के मन में छोड़ गई थी पर समाज ने कुछ सीखा है लगता नहीं.

सेवा जरूरी या कैरियर

एक बेटी के ऐसे मातापिता की सेवा करने के पीछे अपना कैरियर और सुख गंवाया जो हर समय चूंचूं करते फिरते रहे गलत है और यह अनावश्यक भी. कई मांबाप ऐसे होते हैं कि अपने सिवा उन्हें कोई नहीं दिखता. दूसरी ओर बुजुर्ग मातापिता की आदतों से खिन्न बेटी का व्यवहार समाज में अभद्र होता जाता है. वह अपने कुलीग्स, दोस्तों, नौकरों या अजनबी लोगों से भी अशिष्ट व्यवहार करने लगती है.

35 वर्षीय शेखर ने अपना पूरा जीवन मां की सेवा करने के लिए समर्पित कर दिया, वह मां जिस ने शेखर के और 2 बड़े भाइयों को भी जन्म दिया था, लेकिन बड़े भाइयों और उन की पत्नियों ने मां का वह हाल किया कि वह अब बिस्तर पर है. घर के सारे कामकाज से ले कर बाहर का राशन व सब्जी लाने का सारा काम, कामवाली की तरह लगे रहने वाली शेखर की मां ही किया करती थी.

शेखर को यह नागवार गुजरा और उस ने अपनी कंपनी से रिजाइन दे कर फ्रीलांसिंग पर घर बैठे काम करना शुरू कर दिया और मां की सेवा के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया.

शादी न करने का फैसला

शेखर ने अपना कैरियर तो चौपट किया ही साथ ही नौजवान होने के बावजूद उस ने शादी न करने का बड़ा फैसला भी लिया. अब अगर उस से कोई पूछ बैठता कि शादी की या नहीं तो इस पर शेखर की प्रतिक्रिया होती कि फिर मां की सेवा कौन करेगा? उम्र ज्यादा होने पर अब वह चाहे भी तो उस की शादी नहीं हो पाएगी और अगर हो भी गई तो क्या उस की पत्नी भी भाभियों की तरह ही मां के साथ दुर्व्यवहार करने लगेगी?

क्या शेखर की यह सोच जायज है? क्या शेखर ने सोचा है कि मां के जाने के बाद जब वह खुद बिस्तर पर पड़ जाएगा, तो उस की सेवा कौन करेगा या फिर उस ने जीवन में इतना कमा लिया है कि नौकर रख कर भी वह आजीवन अपनी सेवा कराएगा?

क्या शेखर को शादी कर अपनी हमसफर को पहले ही स्थिति साफ कर देनी नहीं चाहिए थी? शादी कर अपनी पत्नी को बताना चाहिए था कि मां की सेवा भी करनी पड़ेगी. क्या दुनिया की सारी लड़कियां शेखर की भाभियों की तरह ही होती हैं?

शेखर की तरह ही ऐसे कई घरों में पीकू भी हैं, जो अपना पूरा जीवन अपने बुजुर्ग मातापिता की सेवा में लगा देती हैं. क्या ऐसा करना सही है? कुछ मांएं तो बिलकुल स्वार्थी हो जाती हैं कि बेटी की शादी न करतीं और फिर उन की देखभाल न करें. वे हर लड़के को भगा देती हैं. कुछ शादी के बाद तलाक तक दिला देती हैं.

नर्क से बदतर जिंदगी

जून, 2012 में 2 सगी बहनों को 8 साल खुद की कैद से बाहर निकाला गया. पासपड़ोस के लोग उस समय हक्केबक्के रह गए, जब उन दोनों को हंसतेखेलते 8 सालों से नहीं देखा था. इन दोनों बहनों के पास से बदबू आ रही थी और दोनों ही चलने में असमर्थ हो गई थीं. दोनों इतनी कमजोर थीं क्योंकि कई महीनों से उन्होंने खाने का स्वाद चखना तो दूर बल्कि देखा व सूंघा तक नहीं था. मानसिक हालत तो ऐसे में खराब होनी ही थी.

अब इस कहानी को 8 साल पहले रिवर्स करें तो पाएंगे कि ममता की शादी हो जाने के बाद उस के कुछ सालों बाद पिता भी चले गए. थोड़े दिनों बाद ही गृहक्लेशों के कारण ममता की जिंदगी नर्क से भी बदतर हो गई और बेटे के जन्म के बाद पतिपत्नी का तलाक हो गया. ममता अपने मायके बूढ़ी मां के पास आ गई साथ में छोटी बहन का भी उसे सहारा मिल गया.

बिखर जाती है जिंदगी

अब कहानी यहां से नया टर्न लेती है. धीरेधीरे मानसिक तनाव झेलते इस पूरे परिवार के बुरे दिन शुरू हो गए थे. ममता की हालत व बिखरी लाइफ को देख कर नीरजा भी अवसादग्रस्त हो गई. यहां अब तक कमाने का कोई जरीया नहीं बचा था. हां, सालों में कोई रिश्तेदार मेहरबान होता तो कुछ मदद कर जाता पर कब तक.

बूढ़ी मां का सहारा बनती दोनों बेटियां खुद ही बिस्तर पर पड़ गईं. बेटे के भविष्य की भी चिंता को ममता ने घर कर लिया था पर दूसरी बहन मानसिक रूप से विक्षिप्त होने के चलते उस ने कोई कदम नहीं उठाया और न ही अपनी बहन को उबारा. ममता ने खुद बरबाद होना ज्यादा सही सम?ा. अगर वह थोड़ी हिम्मत दिखाती तो शायद हंसतेखेलते परिवार की ऐसी दुर्दशा नहीं होती.

आज अगर देखें तो 10 परिवारों में करीब

2 परिवार आप को ऐसे मिल जाएंगे जहां बेटा या बेटी की उम्र 35 से 40 वर्ष होगी और उस ने अपना सारा जीवन मां या बाप की देखरेख में समर्पित कर दिया है. ये उम्र ज्यादा हो जाने पर खुद से शादी न करने का फैसला कर लेते हैं या इन्हें शादी के औफर आने बंद हो जाते हैं. अगर औफर आए भी तो बेमेल लोगों के आते हैं, जो लोगों को नागवार गुजरते हैं.

अगर ममता ने ठोस कदम उठाया होता तो वह अपनी मां, बेटे और बहन सभी के लिए मिसाल कायम कर सकती थी. क्या ममता का यह फैसला सही साबित हुआ, अंत तो आप सब के सामने ही है. दोनों बहनों ने कैसे हार कर अपनेआप को कैद कर लिया था.

ब्लैकमेलिंग से नहीं चलते रिश्ते

अकसर वृद्ध होते मांबाप इकलौती बेटी को सैलफिश कह कर अपनी नाजायज मांगें मनवा लेते हैं. इंसानी रिश्तों में ब्लैकमेलिंग अपनाना उचित नहीं है.

अपनी बात मनवाने के लिए जिद्द इख्तियार करना भी ठीक नहीं कहा जा सकता है. किसी बात पर एकराय होने के लिए उस पर स्वस्थ बहस होनी चाहिए. साथ में यह भी देखा जाना चाहिए कि उस से किसी पक्ष का नुकसान न हो.

जहां मां या बाप में से एक की मृत्यु हो चुकी हो कई बार बड़ों के मन में यह बात बैठा दी जाती है कि उन की देखभाल के लिए उन के मातापिता ने दूसरी शादी नहीं की. वे बच्चों को ऐसे तर्क दे कर चुप करा देते हैं और अपनी बात मनवाते हैं. यह ब्लैकमेलिंग बेटियों को मानसिक शिकार बना देती है. वे अपना खुद का रखरखाव करना छोड़ देती हैं.

मेरे बाद क्या, गलत सोच

कई युवा यह सोचते हैं कि उन के अलावा परिजनों की देखभाल कोई और नहीं कर सकता या वे शादी कर लेंगे तो अकेले मां या बाप का क्या होगा. जरूरी नहीं कि आप के पार्टनर को आप के परिजनों की चिंता न हो. आप अपने पेरैंट्स को शादी के बाद भी अपने साथ रख सकते हैं.

इस के लिए आप को अपने पार्टनर को कनविंस करना होगा. ‘गोलमाल 3’ फिल्म एक बढि़या उदाहरण है, जिस में 2 अकेले बुजुर्ग अपने परिवारों को एकसाथ लाने का फैसला करते हैं, इस फैसले से परिवार में कुछ समय के लिए मतभेद हो सकते हैं लेकिन यह भविष्य को ले कर रास्ता दिखाता है.

थोड़ा एडजस्ट करें, प्लीज

जब बेटी अकेली हो तो बात दूसरी, पर कई बार बहन या भाई, मांबाप की जिम्मेदारी अविवाहित बेटी पर डाल कर कन्नी काट लेते हैं. उन की अनचाही बातें पूरी करते फिरते. खैर, यह फिल्म थी. अगर युवतियां अपना कैरियर, लाइफस्टाइल, शादी जैसे अहम फैसले अपने बुजुर्गों के लिए बदल रही हैं, तो थोड़ा ऐडजस्ट उन्हें भी करना पड़ेगा.

जीवन 2 तरीके से जीया जा सकता है. सूखी लकड़ी की तरह कठोर हो कर या हरी लकड़ी की तरह लचीला हो कर. पहले तरीके से दूसरों और खुद को तकलीफ और तनाव ही मिलेगा पर दूसरे तरीके से बेहतर परिणाम निकलने की गुजाइंस बढ़ जाती है. कई मांबाप अपने कमाए पैसे की धौंस पर बेटियों को सही निर्णय नहीं लेने देते. हर बेटी को अपने पूरे जीवन को देख कर फैसले लेने चाहिए.

बोझ न बनें

बारबार दिखाई जाने वाली अभिताभ बच्चन व हेमामालिनी की फिल्म ‘बागबान’ में 4 बच्चों के बावजूद भी उन के मांबाप को अलगथलग रहना पड़ता है. उन 2 बुजुर्गों की जिम्मेदारी इकट्ठे कोई नहीं उठाना चाहता तो वहीं तब वह बुजुर्ग रिटायर होने के बाद भी हिम्मत नहीं हारता और अपनी लिखी खुद की कहानी पर ही किताब लिखने का फैसला करता है.

यानी हम यहां सम?ा सकते हैं कि वह किसी पर भी बो?ा नहीं बनता. इस फिल्म से भी कई निराश लोगों को हिम्मत मिल सकती है क्योंकि एक उम्र के बाद खुद बुजुर्गों को लग सकता है कि वे परिवार पर बो?ा बन गए हैं. यह सोच युवा पीढ़ी के मन में भी आ सकती है. उस से बचने के लिए बुजुर्ग परिवार की मदद कर सकते हैं.

जीवन में अकेले होने पर कई बार तनाव भी घर कर जाता है. ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए बुजुर्ग अपना मन अपने नातीपोते के कामों व उन में लगा सकते हैं. इस से परिवार को भी मदद मिलेगी. अपनी समस्याओं को खुद निबटाएं न कि सब को अपनी समस्या के चलते फांस कर रखें. किसी पर कभी बो?ा न बनें.

बुढ़ापे में कोई क्लब जौइन करना, सोशल होना, दोस्त बनाना, सुबहशाम टहलने जाना बुजुर्गों का मन बहलाने के काम आ सकता है. हमारा शरीर एक मशीन की तरह है, इस का चलना बंद हो गया तो कई पार्ट्स में परेशानी हो सकती है. इन तरीकों से बुजुर्ग परिवार का छोटामोटा काम करने के साथ ही अपना मन भी लगा सकेंगे.

युवाओं को समझना जिम्मेदारी

इस से एक कदम आगे बढ़ कर बुजुर्ग युवतियों को जीवन का मूल्य सम?ाएं. बुजुर्ग पीढ़ी अपने जीवन का बड़ा हिस्सा जी चुकी होती है, इसलिए उन्हें युवाओं को अपने हिसाब से जीने की सलाह देनी चाहिए. बेटियां मांबाप के जोश में कई बार शादी न करते, कैरियर को सैक्रीफाइज करने जैसे कई बड़े फैसले ले लेती हैं, लेकिन बुजुर्गों को अपने अनुभव का हवाला देते हुए उन्हें सम?ाना चाहिए कि ऐसे फैसले बाद में पछतावे की वजह बनते हैं.

सरकार भी दे ध्यान

बुजुर्गों के लिए सामाजिक सुरक्षा बढ़ाए जाने की जरूरत है. उन के लिए बेहतर पैंशन, वृद्धाश्रम, सस्ता अनाज जैसी सुविधाएं बढ़ानी चाहिए. यूरोप के कई देशों में सरकारें सामाजिक सुरक्षा के नाम पर बड़ी रकम खर्च करती हैं. भारत में परिवारों के टूटने का दौर तेजी से बढ़ा है. इस से भी बुजुर्ग अलगथलग पड़ जाते हैं, इसलिए भी सरकार को बुजुर्गों के लिए सुविधाएं बढ़ानी चाहिए ताकि किसी बेटी को अपनी जवानी न खोनी पड़े.

धर्म उठाता है फायदा

भारत में अकसर बच्चों को श्रवण कुमार, राम आदि की कहानियां सुना कर आज्ञाकारी और भक्त बनने को प्रेरित किया जाता है. यह विचार धर्र्म से प्रेरित है. धर्म ने ही सिखाया है कि मातापिता की सेवा श्रवण कुमार की तरह करनी चाहिए. कई बार तो मातापिता तीर्थ यात्राओं जैसे चारधाम आदि की भी मांग करते हैं.

तीर्थयात्रा के अलावा मातापिता के मरने पर उन का श्राद्ध, बरसी, पिंडदान करना जैसे धर्म संस्कार बेटियों से करवा कर उन्हें नकली बनावटी सम्मान दे दिया जाता है. आत्मा की शांति, अगले जन्म के नफेनुकसान दिखा कर अनेक कर्मकांड बेटियों से करवाए जाते हैं और यह दोहरा बोझ बन जाता है.

इन सब चक्करों में न पड़ कर और

किसी दबाव में न आ कर समझदारी से कदम उठाना चाहिए.

मंदिर नहीं अस्पताल जरूरी

अपना कोई अजीज बीमार हो और सरकारी औल इंडिया इंस्टिट्यूट औफ मैडिकल’ जैसे सरकारी अस्पताल में जा पहुंचा हो और न डाक्टर बात करने को तैयार होन लैब असिस्टैंट तो कितनी घुटन और परेशानी होती है यह भुक्तभोगी ही जानते हैं. देशभर में सरकारी अस्पतालों का जाल बिछा है पर जहां मंदिर में जाने पर तुरंत प्रवेश मिल जाता है (या कुछ घंटों में सही) अस्पताल अभी भी इतने कम हैं कि उन में बैड मिलना और इलाज का समय निकालना ऐवरेस्ट पर चढ़ने के समान होता है.

दिल्ली एम्स ने सर्कुलर जारी किया है कि वहां कौरीडोरों में मरीजोंउन के रिश्तेदारों के अलावा जो भी हो उसे यूनिफौर्म और आईडी का डिस्पले करते रहना होगा क्योंकि कौरीडोर प्राइवेट लैबोंक्लीनिकों के एजेंटों से भरे हैं. ये लोग पहले मरीज की मदद करते हैं और फिर झांसा देते हैं कि सरकारी लैब में रिजल्ट सप्ताहों में आएगासर्जरी महीनों में होगीडाक्टर के लिए नंबर कई दिनों में आएगा तो क्यों न प्राइवेट जगह चला जाए.

यह देश की बहुत बड़ी दुर्गति है कि हर नागरिक को समय पर इलाज न मिल पाए. गरीब को अनाज मिलेसही इलाज मिले और जेब में पैसे हों या न होंइलाज हो हीयह तय करना सरकार का पहला काम है न कि फलां जगह मंदिर के लिए कौरीडोर बनाना और फलां जगह दूसरे धर्मस्थल को ले कर डिस्प्यूट खड़ा करना. सरकार को 4 लेन6 लेन सड़कें बनाने से ज्यादा अस्पतालों को ठीक करना होगा.

आज जो भी मैडिकल इलाज वैज्ञानिकों की शोध से मिल रहा हैवह कुछ को फाइवस्टार के पैसे देने पर ही मिलेदेश के लिए सब से ज्यादा दर्दनाक स्थिति है.

केंद्र सरकार अपनी नाक के नीचे एम्स को दलालों से मुक्त नहीं करा सकती तो ईडी (एनफोर्समैंट डाइरैक्टोरेट) सीबीआई (केंद्रीय जांच ब्यूरो) एनआईए (नैशनल इंवैस्टिगेशन ऐजेंसी) जैसी संस्थाएं जनता के लिए बेकार हैं. जब अपना कोई मर रहा होकराह रहा होसिर पर पैसे बनाने वाले दलाल चढ़े हों क्योंकि सरकारी इलाज न जाने कब मिलेगासरकार को ईडीफीडी पर गर्व नहीं करना चाहिएसरकारी अस्पतालों में घूम रहे दलालों पर शर्म से गड़ जाना चाहिए.  

एक्सपर्ट से जाने मेल फर्टिलिटी 101 और पुरुषों के बांझपन से जुड़ी समस्याएं

बांझपन प्रजनन तंत्र की एक समस्या है जो आपको महिला को गर्भवती करने से रोकती है। आज 7 में से एक कपल को बांझपन की समस्या है, इसका अर्थ है कि पिछले 6 महीने या सालभर में गर्भधारण करने के प्रयास में वे सफल नहीं रहे। इनमें आधे से भी ज्यादा मामलों में पुरुष बांझपन की एक अहम भूमिका होती है. डॉ रत्‍ना सक्‍सेना, फर्टिलिटी एक्‍सपर्ट, नोवा साउथेंड आईवीएफ एंड फर्टिलिटी, बिजवासन की बता रही हैं इसके लक्षण और उपाय.

पुरुष बांझपन के क्या लक्षण होते हैं?

बांझपन अपने आपमें ही लक्षण है। हालांकि, गर्भधारण का प्रयास कर रहे दंपति के मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक नकारात्मक प्रभावों के बारे में बता पाना काफी मुश्किल है। कई बार, बच्चा पैदा करना उनके जीवन का एकमात्र लक्ष्य होता है। बच्चे की चाहत रखने वाले पुरुषों और महिलाओं दोनों में ही अवसाद, क्षति, दुख, अक्षमता और असफलता की भावना आम होती है।

दोनों में से कोई एक या दंपति, जो ऐसी किसी भी भावना से गुजर रहे हैं उन्हें चिकित्सकों जैसे थैरेपिस्ट या साइकेट्रिस्ट से प्रोफेशनल मदद लेनी चाहिए, ताकि वे जीवन के इस मुश्किल दौर से उबर पाएं।

हालांकि, कुछ मामलों में, पहले से मौजूद समस्या, जैसे कोई आनुवंशिक डिस्‍ऑर्डर, हॉर्मोनल अंसतुलन, अंडकोष के आस-पास की फैली हुई नसें या शुक्राणु की गति को रोकने वाली कोई समस्या हो तो उसके संकेत तथा लक्षण इस प्रकार हो सकते हैं:

1.यौन इच्छा का कम हो जाना या इरेक्शन बनाए रखने में समस्या होना (इरेक्टाइल डिसफंक्शन)
2.अंडकोष में दर्द, सूजन या गांठ होना
3. लगातार श्वसन संक्रमण होना
4.खुशबू ना आना
5.शरीर के बालों या चेहरे के बालों का कम हो जाना, साथ ही क्रोमोसोमल या हॉर्मोनल असामान्यताएं
6.स्पर्म काउंट का सामान्य से कम होना

पुरुष बांझपन के क्या कारण हैं
कई सारे शारीरिक और पर्यावरण से जुड़े कारक हैं जोकि आपके प्रजनन पर प्रभाव डाल सकते हैं। उन कारकों में शामिल हो सकते हैं:

एजुस्पर्मिया: शुक्राणु कोशिकाओं का उत्पादन करने में असमर्थता के कारण बांझपन।
ओलिगोस्पर्मिया: कम गुणवत्ता वाले शुक्राणु का उत्पादन।
आनुवंशिक रोग: क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम, मायोटोनिक डिस्ट्रोफी, माइक्रोडिलीशन, हेमोक्रोमैटोसिस।
विकृत शुक्राणु: ऐसे शुक्राणु जो अंडे को निषेचित करने के लिये पर्याप्त समय तक जीवित नहीं रह सकते।
बीमारियां: डायबिटीज, ऑटोइम्यून रोग और सिस्टिक फाइब्रोसिस
वैरिकोसेले: एक ऐसी समस्या हैं, जहां आपके अंडकोष की नसें सामान्य से बड़ी होती हैं। इसकी वजह से उसकी गर्मी बढ़ जाती है, जो आपके द्वारा उत्पादित शुक्राणुओं के प्रकार या मात्रा को बदल सकता है।
कैंसर का इलाज: कीमोथैरेपी, रेडिएशन
लाइफस्टाइल से जुड़े विकल्प: शराब, धूम्रपान और नशीली दवाओं के उपयोग सहित मादक द्रव्यों का सेवन।
हॉर्मोनल परेशानियां: हाइपोथैलेमस या पिट्यूटरी ग्रंथियों को प्रभावित करने वाली समस्याएं
प्रोस्टेटेक्टोमी – प्रोस्टेट ग्रंथि को सर्जिकल रूप से हटाना, जो बांझपन, नपुंसकता और असंयम का कारण बनता है।
एंटीबॉडीज – एंटीबॉडीज जो शुक्राणु की गतिविधि को रोकते हैं, उससे अपने साथी के अंडे को निषेचित करने की शुक्राणु की क्षमता कम हो जाती है।

उपलब्ध परीक्षण
आपके चिकित्सक, आपकी मेडिकल हिस्ट्री का मूल्यांकन करते हैं और एक जांच करते हैं। पुरुष बांझपन से जुड़ी अन्य जांचों में शामिल हो सकता है:
सीमन का विश्लेषण- दो अलग-अलग दिनों में स्पर्म के दो नमूने लिए जाते हैं। चिकित्सक, किसी प्रकार की असामान्यता की जांच करने के लिये उस सीमन और स्पर्म तथा एंटीबॉडीज की उपस्थिति की जांच करेंगे। आपके स्पर्म की मात्रा, उसकी गतिशीलता और आकार की भी इस आधार पर जांच होगी।
ब्लड टेस्ट: हॉर्मोन के स्तर को जांचने और अन्य समस्याओं का पता लगाने के लिये ब्लड टेस्ट किए जाते हैं।
टेस्टीक्युलर बायोप्सी: अंडकोष (टेस्टिकल्‍स) के भीतर नलियों के नेटवर्क की जांच करने के लिये एक महीन सुई और एक माइक्रोस्कोप का उपयोग किया जाता है ताकि यह देखा जा सके कि उनमें कोई शुक्राणु है या नहीं।
अल्ट्रासाउंड स्कैन- प्रजनन अंगों की इमेजिंग देखने के लिये अल्ट्रासाउंड स्कैन किए जाते हैं, जैसे कि प्रोस्टेट ग्रंथि, रक्त वाहिकाएं और स्‍क्रॉटम के अंदर की संरचनाएं।

कौन-कौन से उपचार होते हैं
वेसेक्टॉमी रिवर्सल: इस प्रक्रिया में, सर्जन आपके वास डिफरेंस को फिर से जोड़ देता है, जो स्‍क्रोटल ट्यूब होती है जिसके माध्यम से आपका शुक्राणु आगे बढ़ता है. उच्च क्षमता वाले सर्जिकल माइक्रोस्कोप के माध्यम से देखते हुए, सर्जन सावधानी से वास डिफरेंस के सिरों को वापस एक साथ सिल देता है।

वासोपिडीडिमोस्टोमी: ब्लॉकेज को हटाने की इस प्रक्रिया के लिये, आपके वास डिफरेंस को सर्जरी की मदद से दो हिस्सों में कर दिया जाता है और ट्यूब के आखिरी हिस्से को एक बार फिर जोड़ दिया जाता है. काफी सालों पहले जब सामान्य पुरुष नसबंदी की जाती थी तो इंफेक्शन या इंजुरी की वजह से एपिडीडिमिस या उपकोष में एक अतिरिक्त ब्लॉकेज हो जाता था। उसकी वजह चाहे कोई भी हो, आपके सर्जन एपिडीडिमिस ब्लॉकेज की बायपासिंग करके इस समस्या को सुलझा देंगे.

इंट्रासाइटोप्लास्मिक स्पर्म इंजेक्शन (आईसीएसआई): कृत्रिम प्रजनन तकनीकें उस बिंदु तक आगे बढ़ गई हैं जहां एक एकल शुक्राणु को एक अंडे में शारीरिक रूप से इंजेक्ट किया जा सकता है। इंट्रासाइटोप्लाज्मिक शुक्राणु इंजेक्शन (आईसीएसआई) में, शुक्राणु को एक विशेष कल्चर माध्यम में एक अंडे में इंजेक्ट किया जाता है। पुरुष के शुक्राणु को गर्भाशय ग्रीवा के माध्यम से उसके साथी के गर्भाशय में डालने से पहले एकत्रित किया जाता है, धोया और केंद्रित किया जाता है। इस प्रक्रिया ने पुरुष बांझपन के गंभीर कारकों के उपचार के विकल्पों को भी बदल दिया है। इस तकनीक की वजह से 90% बांझ पुरुषों के पास अब अपनी आनुवंशिक औलाद पाने का मौका है।

इन-विट्रो-फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) – पुरुष बांझपन से जूझ रहे कुछ दंपतियों के लिये इन-विट्रो-फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) एक पसंदीदा उपचार है। आईवीएफ प्रक्रिया के दौरान, गर्भाशय को इंजेक्शन योग्य प्रजनन दवाओं से स्टिम्युलेट किया जाता है, जिसकी वजह से कई सारे अंडे परिपक्‍व होते हैं। जब एग्स पर्याप्त रूप से परिपक्‍व हो जाते हैं तो फिर उन्हें एक सरल प्रक्रिया के द्वारा निकाल लिया जाता है। एक कल्चर डिश में या फिर सीधे हर परिपक्‍व एग में एक सिंगल स्पर्म को इंजेक्ट करके फर्टिलाइजेशन को अंजाम दिया जाता है। इस प्रक्रिया को इंट्रासाइटोप्लाज्मिक स्पर्म इंजेक्शन (ऊपर देखें) के नाम से जाना जाता है। फर्टिलाइजेशन के बाद, गर्भाशय ग्रीवा के माध्यम से डाले गए एक छोटे कैथेटर के माध्यम से दो से तीन भ्रूणों को गर्भाशय में रखने से पहले तीन से पांच दिनों तक भ्रूण के विकास की निगरानी की जाती है।

पीईएसए: यदि आपकी सर्जरी असफल हो जाती है तो एक और सर्जिकल प्रक्रिया, पर्क्यूटेनियस एपिडीडिमल स्पर्म एस्पिरेशन (पीईएसए) की जाती है। इसमें लोकल एनेस्थेसिया देकर एक पतली सुई को एपिडीडिमिस में डाला जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान, स्पर्म को निकाला जाता है और तुरंत ही आईसीएसआई के लिये इस्तेमाल किया जाता है या आगे इस्तेमाल के लिये फ्रीज कर दिया जाता है।

हॉर्मोनल दवाएं- मस्तिष्क में पिट्यूटरी ग्रंथि गोनैडोट्रोपिन हॉर्मोन स्रावित करती है, जो अंडकोष को शुक्राणु पैदा करने के लिए उत्तेजित करती है। कुछ मामलों में इन गोनैडोट्रोपिन के अपर्याप्त स्तर के कारण पुरुष बांझपन होता है। इन हॉर्मोन्स को दवा के रूप में लेने से शुक्राणु उत्पादन बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

Winter special: सर्दियों के जायके

जायके सर्दियों के तिल हौट पौट सामग्री

-2 आलू उबले

-50 ग्राम नूडल्स उबले 

-50 ग्राम पत्तागोभी कद्दूकस

-4 बड़े चम्मच प्याज कटा

-हरी व लाल मिर्च स्वादानुसार

1/2 छोटा चम्मच अमचूर

-11/2 छोटे चम्मच कौर्नफ्लोर

-1/4 कटोरी मैदे का घोल

-3 कलियां लहसुन

-थोड़ा सा लाल, औरेंज कलर

-थोड़ा सा तेल तलने के लिए

-नमक स्वादानुसार.

विधि

आलुओं को कद्दूकस कर के उन में नमक, कौर्नफ्लोर, मिर्च व अमचूर डाल कर अच्छी तरह मिक्स कर लें. मैदे के घोल में कलर मिक्स कर लें. नूडल्स में प्याजलहसुन व पत्तागोभी मिला लें. हलका सा नमक व मिर्च मिला लें. 2 बड़े चम्मच पीठी हाथ पर फैला कर उस में नूडल्स मिक्सचर भर के चारों तरफ से बंद कर दें. फिर मैदे के घोल में डुबो कर पेड़े को तिल में लपेट गरम तेल में सुनहरा होने तक तल लें. इसी तरह सारे तैयार कर चटनी के साथ गरमगरम सर्व करें. कौर्न कौस्तिनी सामग्री द्य 2 ब्रैड द्य 2 चम्मच मक्खन द्य 1 टमाटर द्य 1 खीरा द्य 1 कप पत्तागोभी द्य 1-1 लाल, हरी व पीली शिमलामिर्च द्य चाटमसाला स्वादानुसार द्य 1/2 कप कौर्न उबले द्य कालीमिर्च पाउडर स्वादानुसार. विधि धीमी आंच पर तवा गरम कर ब्रैड को सुखा लें. इस से वह कुरकुरी हो जाएगी. टमाटर के बीज निकाल कर 2 टुकड़े कर लें. पत्तागोभी और तीनों शिमलामिर्च को भी बीज निकाल कर काट लें. फ्राइंगपैन में 1/2 चम्मच मक्खन डाल कर हलका सा सौफ्ट होने पर शैलो फ्राई कर लें. ब्रैड के छोटेछोटे टुकड़े करें. इस में सारी सामग्री मिला लें. ऊपर से चाटमसाला व कालीमिर्च पाउडर बुरक तुरंत सर्व करें. क्रीमी ट्रूफल पुडिंग सामग्री द्य थोड़ा सा स्पंज केक द्य व्हिपिंग क्रीम द्य 1 कप मिक्स फू्रट केला, अनार, बब्बूगोसा, सेब, अंगूर द्य थोड़ा सा वैनिला कस्टर्ड पाउडर द्य थोड़ा सा पीला, लाल फूड कलर द्य 1 गिलास दूध द्य चीनी या शहद स्वादानुसार. विधि दूध में से 3-4 छोटे चम्मच दूध एक कटोरी में निकाल कर बाकी दूध एक फ्राइंगपैन में डाल कर उबलने रखें. जब दूध उबलने लगे तो आंच धीमी कर दें. कस्टर्ड पाउडर को निकाले दूध में घोल कर दूध को चलाते हुए उस में मिला दें. 5 मिनट पका कर आंच से उतार कर ठंडा होने दें. व्हिपिंग क्रीम बीट में क्रीम भर लें. अलगअलग कलर की तैयार कर लें. एक सर्विंग बाउल में स्पंज केक के टुकड़े कर के लगा लें. ऊपर से फू्रट्स सजा कस्टर्ड फैला दें. फिर अलगअलग कलर की क्रीम से सजा कर फ्रिज में चिल्ड कर सर्व करें. ड्राईफ्रूट डिलाइट सामग्री द्य 15 मखाने शैलो फ्राई किए द्य गोंद फ्राई किया द्य 2 बड़े चम्मच मगज भुनी द्य 50 ग्राम काजूबादाम भुने द्य 1/4 छोटा चम्मच सोंठ द्य गुड़ स्वादानुसार द्य 2 बड़े चम्मच घी द्य 1 गिलास पानी विधि मखाने, गोंद, मगज व काजूबादाम को दरदरा पीस या कूट लें. पैन में घी गरम करें. 1 गिलास पानी में गुड़ डाल कर घुलने तक पकाएं. अब इस में सारी सामग्री डाल कर 20 मिनट धीमी आंच पर पकाएं और फिर गरमगरम सर्व करें.

जंजाल – भाग 4 : नैना मानव को झूठे केस में क्यों फंसाना चाहती थी?

‘‘बहुत जल्दी भूल गए सपना को,’’ नैनाने कहा तो मानव को याद आया. सपना केसाथ उस के रिश्ते की बात चल रही थी. बात लगभग तय ही थी, लेकिन सगाई होने से 3 दिन पहले ही उस की प्रतियोगी परीक्षा का परिणाम आया और उस का चयन लेखाधिकारी के पदपर हो गया.

उस की नौकरी की खबर सुनते ही उस के पिता सपना के साथ रिश्ते को ले कर आनाकानी करने लगे और अंतत: वह रिश्ताटूट गया.‘‘तुम से रिश्ता टूटने के बाद सपना की सगाई कहीं नहीं हो रही थी. ऐसे में वह गहरे अवसाद में चली गई. उस ने कभी शादी न करने का फैसला तक ले लिया. उसे सामान्य करने में हमें क्या कुछ नहीं करना पड़ा. तभी मैं ने निश्चय किया था कि जिस सरकारी नौकरी का तुम दंभ पाले बैठे हो, उस से तो मैं एक दिन तुम्हें निकलवा कर रहूंगी,

नैना ने कहा तो मानव वर्तमान में आया.मगर अब तक सुहानी उस बातचीत को अपने मोबाइल में रिकौर्ड कर चुकी थी. हालांकि वह जानती थी कि यह कोई ठोस सुबूत नहीं है, लेकिन ‘न मामा से तो काना मामा ही भला’  क्या पता यही रिकौर्डिंग मानव के पक्ष को मजबूत बना दे. सुहानी ने मानव की तरफ से सचिव के नाम एक अपील लिखी.‘‘नैना ने जो आरोप मु झ पर लगाए हैं उन्हें साबित करने के लिए इन्होंने कोई भी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया. नैना यह साबित नहीं कर पाई कि मेरा कोई भी कृत्य आईपीसी की किसी भी धारा के अंतर्गत आपराधिक श्रेणी में आता है.

पूरे प्रकरण में चश्मदीद गवाह कोई भी नहीं है.‘‘केवल संदेह के आधार पर मु झे दोषी करार दिया जाना कौन से कानून में लिखा है?बंद कमरे में 2 वयस्कों के बीच जो कुछ भीहोता है वह सहमति से हुआ है या जबरदस्ती से, इसे साबित करने के लिए किसी के पास कोई सुबूत नहीं होता. ऐसे मामलों में कोई चश्मदीद गवाह भी नहीं होता तो फिर आप मु झे किस आधार पर दोषी मान सकते हैं, माना कि मैंअपने पक्ष में सुबूत नहीं जुटा पाया तो क्या नैना ने मेरे गुनाह का कोई सुबूत पेश किया? नहीं न. सिर्फ अजय सर की गवाही को आधार बना कर मु झे दोषी साबित नहीं किया जा सकता.

वैसे भी अजय तो कमरे के बाहर ही थे न. भीतर क्या हो रहा है और किन परिस्थितियों में हो रहा है इस बात का उन्होंने केवल अंदाजा ही लगाया है, देखा तो कुछ भी नहीं. मु झे यह कहते हुए बहुत अफसोस होता है कि बहुत सी पढ़ीलिखी और जागरूक महिलाएं कानून द्वारा दिए गए अधिकारों का गलत इस्तेमाल करती हैं. नैना भी उन्हीं में से एक है.

‘‘मेरे पास इस बात के पुख्ता सुबूत हैं कि नैना ने मु झ से पुरानी खुंदस निकालने के लिए मेरे प्रति दुर्भावना रखते हुए एक सोचीसम झी चाल के तहत मु झे फंसाया है. न केवल मु झे बल्कि उस ने अजय का भी जो उस से सहानुभूति रखते थे गलत इस्तेमाल किया है.

अपनी दलील के पक्ष में मेरे पास एक औडियो रिकौर्डिंग है जिस में नैना खुद अपनी साजिश को स्वीकार रही है.’’ सुहानी ने अपनी अपील के अंत में समस्त बचाव पक्ष के साक्ष्यों को संलग्न कर के मानव को बरी करने का निवेदन सचिव महोदय से किया और मानव तथा नैना की बातचीत की रिकौर्डिंग को एक पैन ड्राइव में डाल कर मानव के साथ सचिवालय पहुंच गई.रिकौर्डिंग सुनने के बाद सचिव महोदय के सामने सारी तसवीर साफ हो गई. उन्होंने 4 दिन बाद नैना को अपने कार्यालय में उपस्थित होनेके लिए तलब किया. मानव को भी बुलाया गया था.

नैना अपना दांव उलटा पड़ते देख पहले ही घबरा गई थी. जैसे ही सचिव महोदय ने सख्त शब्दों में बात करनी शुरू की, नैना फूटफूट कर रोने लगी और उस ने अपनी गलती स्वीकारकर के उन से और मानव से लिखित में माफी मांग ली. सचिव महोदय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि मानव के खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं है. उन्होंने परिवीक्षा अधिनियम के तहत संदेह का लाभ देते मानव का निलंबन आदेश निरस्त कर दिया तथा निलंबन काल में रोके हुए उस के वेतन एवं अन्य भत्ते भी बहाल करने का आदेश जारी कर दिया.

नैना को भविष्य में अपने आचरण में सुधार करने की चेतावनी देते हुए उस का ट्रांसफर जिला मुख्यालय से पास के कसबे में कर दिया गया. आदेश मिलते ही मानव ने सब से पहले सुहानी को फोन कर के यह खुशखबरी दी.‘‘थैंक्यू सुहानीजी. मेरी मदद करने के लिए,’’ मानव ने कृतार्थ होते हुए कहा.‘‘बधाई हो आप को. आप ने मु झे अपना वकील चुना इस नाते मैं ने जो कुछ किया वह मेरा पेशा था. लेकिन फिर भी मु झे अफसोस है मानव कि हम महिलाएं अपने उपयोग के लिए बने कानूनों का दुरुपयोग करने से नहीं हिचकतींऔर अपने स्वार्थ की पूर्ति करने के लिए पुरुषों को  झूठे केस में फंस देती हैं. मैं पूरी महिलाजाति की तरफ से आप से माफी मांगती हूं,’’

सुहानी ने कहा.एक बार फिर से सुहानी को धन्यवाद देता हुआ मानव वापसी के लिए बस स्टैंड की तरफ चल दिया.‘वैसे नैना की प्रतिक्रिया भी जायज ही थी. गलती मेरी भी कम नहीं थी. मैं भी अपने पिता की बातों में आ कर सरकारी नौकरी पर दंभ कर बैठा था. हम ने भी तो सपना के साथ अन्याय किया ही था. सजा तो मु झे भी मिलनी चाहिए,’ मानव के मन में 1-1 कर विचारों की तरंगें उठगिर रही थीं. उस ने फैसला कर लिया कि वह नैना और सपना से माफी मांगेगा. यदि नैना राजी हुई तो उसे अपना कर अपनी भूल को सुधारने का प्रयास भी करेगा.विशाखा कमेटी, वकील, जिरहबहस और जांचपड़ताल के इस जंजाल से बाहर निकल कर अब उसे अपने पांव बहुत हलके, बेहद शांत और सफर आसान लग रहा था.

टीवी की Anupama रुपाली गांगुली ने मां के साथ ऐसे की मस्ती, देखें वीडियो

अनुपमा शो स्टारर एक्ट्रेस रुपाली गागुंली इऩ दिनों काफी चर्चा में चल रही है एक तरफ उनका शो मीडिया की लाइमलाइट में बना हुआ है वही, दूसरी तरफ अपनी ऑफसक्रीन मां के साथ शेयर किया वीडियो काफी सुर्खियां बटोर रहा है.

जी हां, रुपाली गागुंली सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती है ऐसे में उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया जिस वीडियो में रुपाली अपनी मां और मौसी के साथ मस्ती करती हुई नज़र आ रही है.वीडियो को शेयर करते हुए रुपाली ने कैप्शन में लिखा है कि ‘अब आपको पता चला कि ड्रामा कहां से आता है, फाइनली मम्मी और मौसी का रील डेब्यू’ रुपाली के इस वीडियो क्लिप पर फैंस ने जमकर कमैंट किए. रुपाली को यू मां और मौसी के साथ वीडियो शेयर करना फैंस खूब पसंद आया है.

 

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आपको बता दें, कि वायरल वीडियो में रुपाली पहले फोन पर बात करती हुई नज़र आ रही है. जिसके बाद उनकी मां और मौसी उनसे फोन छीन लेती है और फोन काट देती है जिसके बाद तीनों वीडियो में हस्ते हुए नज़र आते है. वीडियो में ये रुपाली की मां रजनी गागुंली है साथ में उनकी मौसी है.

 

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बता दें, रुपाली इससे पहले भी कई फोटो और वीडियो इंस्टाग्राम पर शेयर करती हुई नजर आई है. वो सोशल मीडिया पर एक्टिव रहती है और अपने फैंस को खुश करने के लिए समय-समय पर वीडियो -फोटो शेयर करती रहती है वही, रुपाली के वर्क फ्रंट की बात करें, तो वो अपने Anupama टीवी सीरियल में बीजी चल रही है.

कभी ट्रक पर लिखे मेसेज पढ़े हैं?

क्या कभी ट्रक, मिनी ट्रक, ऑटो या रिक्शे पर लिखे मेसेज पढ़े हैं? कलरफुल, फनी या कभी कभी ज्ञान का सागर मिलता है इनमें! वैसे आपको गुदगुदाने के साथ साथ बहुत बड़ी सीख भी देते हैं. मजेदार मेसेज के साथ साथ भारत में ट्रक ड्राइवर्स अपने विश्वास, धर्म की निशानियां भी साथ लेकर चलते हैं. बुरी नजर से बचने के लिए इनके तरीके वाकई काबिल-ए-तारीफ होते हैं.

यहां हैं कुछ ऐसे ही मजेदार मेसेज जिसे पढ़कर आप हंसने पर मजबूर हो जायेंगे.

1.नशा त्यागें, जिन्दगी नहीं!

‘पब्लिक गुड्स कैरियर’ हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. हालांकि कई बार इनके द्वारा ड्रग्स, स्मगलिंग का सामान भी ट्रांसपोर्ट किया जाता है. पर ट्रकों में ऐसे मेसेजेस दिख जाते हैं.

2. हम सबकी जिम्मेदारी, प्रदूषण मुक्त गड्डी हमारी!

ये तो सत्य वचन है जी. देश के हर नागरिक का धर्म है कि वह पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्य करे. और हमारे ट्रक ड्राइवर्स भी इस बात को भली भांति समझते हैं.

3.Ditch the Bitch, Let’s go trucking!

ब्रेक-अप के बाद और क्या चाहिए? ट्रक ड्राईवर्स अब मॉडर्न होते जा रहे हैं. राइमिंग पर जरा ध्यान दीजिए!

4.सबकी नजर में रहते हैं, हर वक्त सफर में रहते हैं

क्या लाजवाब तरीका है अपने सफर को डेस्क्राइब करने का!

5.ना मुन्ना ना!

जब मुन्ना ओवरटेक करने के चक्कर में स्पीड बढ़ाने की कोशिश करता है. मुन्ने को कुछ विशेषण भी सुनने पड़ते हैं. और उसके परिवार को कोई और याद करता है! खैर ये बिहार का ट्रक तो नहीं लगता!

6.ज्यादा खाएगी, तो मोटी हो जाएगी

एक ट्रक ड्राइवर अपने ट्रक को फिट रखने के लिए क्या कुछ नहीं करता! यहां ड्राइवर अपने ट्रक को कम तेल पीने को कह रहा है. ये तो डाइटिंग वाला ट्रक है!

7.गुर्जर जब दहाड़ता है, तब शेर भी पालथी मारता है.

इसे रिजर्वेशन से जोड़कर न देखें. जरा सोचिए, शेरों का क्या रिएक्शन होगा ये सुनकर!

8.हंस मत पगली, प्यार हो जाएगा!

इन्हें तो कोई अवार्ड मिलना चाहिए दोस्तों!

9.ये नीम के पेड़ चंदन से कम नहीं, हमारा लखनऊ लंडन से कम नहीं

ये है नवाबों के शहर का टशन.

10.धीरे चलोगे तो बार-बार मिलेंगे, तेज चलोगे तो हरिद्वार मिलेंगे

सत्यमेव जयते. जबरदस्त पर थोड़ा कड़वा.

11.मैं बड़ा होकर ट्रक बनूंगा

सपने देखने का हक तो सभी को होता है. तो ये पीछे क्यों रहेंगे?

12.ड्राइवर की जिन्दगी में लाखों इल्जाम होते हैं, निगाहें नेक होती हैं फिर भी बदनाम होते हैं.

इन्होंने तो अपना दिल निकालकर रख दिया. सच में ऑटो चालक को कितना सहना पड़ता है.

डेटिंग पर जाने के लिए 12 स्टाइलिश टिप्स

डेटिंग तो आज जैसे एक स्टेटस सिंबल बन गया है. गर्ल्स में तो वैसे भी डेटिंग को ले कर काफी क्रेज देखने को मिलता है. यह क्रेज उन्हें अपनी ड्रैसेज को ले कर होता है कि क्या ड्रैस पहनें जो कुछ अलग लुक दे. सब से पहले तो जान लें कि ऐसी ड्रैस और ऐक्सैसरीज ही चुनें जो मौके और टाइम के अनुसार हो. अब आप को घंटों समय बरबाद करने की जरूरत नहीं है. यहां हम आप को बता रहे हैं कि कैसे आप अपने आउटफिट्स के जरिए अपनी डेट को यादगार बना सकती हैं :

लंच डेट

यदि आप अपने बौयफ्रैंड के साथ लंच पर जा रही हैं, तो ऐसा लुक अपनाएं जो भारीभरकम महसूस होने के बजाय आरामदायक और स्टाइलिश हो. शौर्ट स्कर्ट और टौप भी पहन सकती हैं या फिर जींस के साथ कट स्लीव्स टौप आप को एक स्टाइलिश लुक देगा.

कलर

ड्रैस का कलर हमेशा ऐसा चुनें, जो आप पर फबता हो. वैसे गरमियों में हलके कलर काफी अच्छे लगते हैं. यदि आप पर शोख और चटक कलर अच्छे लगते हैं, तो जरूर ट्राई करें, ऐसे रंगों में आप खिलीखिली नजर आएंगी.

मेकअप

लंच पर जाते समय न्यूड कलर्स का इस्तेमाल करें, क्योंकि दिन में ज्यादा ब्राइट कलर्स अच्छे नहीं लगते हैं.

ऐक्सैसरीज

यदि आप गर्ली लुक चाहती हैं, तो बालों में हेयर बैंड या हलका सा पफ बना सकती हैं. इस के साथ हलकीफुलकी ज्वैलरी व वेज हील्स सैंडिल ही पहनें.

डिनर डेट

डेट पर जाना है और साथ ही डिनर भी है, तो कुछ ऐसी ड्रैस पहनें जो आप के लुक पर असर डाले साथ ही आप की फिगर को भी उभारे. इस के लिए आप वन पीस ड्रैस ट्राई कर सकती हैं. मौके को देखते हुए यह ड्रैस आप पर काफी फबेगी.

कलर

यदि आप वन पीस ड्रैस पहन रही हैं और आप को डिनर पर भी जाना है तो रैड, रौयल ब्लू व ग्रीन जैसे खिले हुए कलर्स पहन सकती हैं.

मेकअप

डिनर पर आप सिर्फ आई मेकअप पर ध्यान दें क्योंकि ऐसे में आप की आंखों को खूबसूरत दिखना चाहिए. साथ ही लिपस्टिक न्यूड कलर्स की ही लगाएं.

ऐक्सैसरीज

सिंपल सोबर सी ज्वैलरी, नैक पीस, कोकटेल रिंग्स आदि पहन सकती हैं. इस पर हाई हील्स ज्यादा सूट करेंगी.

स्पोर्टी डेट

यदि आप अपने बौयफ्रैंड के साथ कोई मैच या रोमांचक स्पोर्ट्स देखने जा रही हैं, तो शौर्ट्स पहनें. टैंक टौप के बजाय टी शर्ट या आरामदायक ड्रैस ही पहनें. लुक को मजेदार बनाने के लिए प्रिंटेड व रंगबिरंगे आउटफिट पहनें.

मेकअप

ऐसे में आप का मेकअप काफी लाइट होना चाहिए, आंखों में काजल और हलके कलर का लिपग्लौस इस्तेमाल करें.

ऐक्सैसरीज

कम से कम ऐक्सैसरीज पहनें और औक्सफोर्ड शूज पहन कर जानदार लुक बनाएं.

winter Special: हैप्पी विंटर के ये है 15 टिप्स

सर्दियों के आते ही महिलाओं की आम समस्या होती है कांतिहीन और शुष्क त्वचा, जिस का खास कारण होता है सूखी हवा. यानी आप के आसपास के वातावरण में नमी की कमी. सूखी हवा आप की त्वचा से नमी को सोख लेती है और उसे कांतिहीन व शुष्क बना देती है.

यहां कुछ ऐसे सरल उपाय बताए जा रहे हैं, जो इन सर्दियों में आप की त्वचा का खयाल रखेंगे और उसे नमी व कांति प्रदान करेंगे-

1  रोजाना कुनकुने पानी में शौवर लें और तौलिए से थपथपा कर त्वचा सुखाएं. त्वचा को रगड़ें नहीं.

2  स्नान के तुरंत बाद जब त्वचा नम हो तब एक क्रीम बेस्ड मौइश्चराइजर अपने पूरे शरीर पर लगाएं. अतिरिक्त सुरक्षा के लिए ‘शी’ बटर या कोकोआयुक्त मौइश्चराइजर का चयन करें.

3  वैसे अपनी त्वचा को नम व कोमल रखने के लिए नहाने के पानी में जैतून या नारियल तेल की कुछ बूंदें डालें.

4  कोमल शौवर जैल इस्तेमाल करें और कठोर व अत्यधिक खुशबूदार साबुन से परहेज करें.

5  त्वचा से मृत कोशिकाओं को हटाने के लिए कुछ हफ्तों के अंतराल पर एक बार आप को अपनी त्वचा को रगड़ना पड़ सकता है.

6  होंठों को फटने से बचने के लिए नियमित रूप से उन पर लिप बाम लगाती रहें. होंठों को अपनी लार से नम करने की गलती न करें, क्योंकि इस से वे और खराब हो जाएंगे. एक पुराना व घरेलू नुसखा भी है- शहद में कुछ बूंदें जैतून तेल की मिला कर अपने होंठों पर लगाएं और उन्हें आर्द्र बनाए रखें.

7  घर के कामकाज करते वक्त दस्ताने जरूर पहनें. खासकर तब, जब आप डिटर्जैंट आदि का इस्तेमाल कर रही हों. ऐसा कर के आप अपने हाथों को खुरदरा होने से बचा सकेंगी. इस के अलावा, घरेलू काम खत्म करने के बाद दिन में 2-3 बार अपने हाथों पर एक अच्छी हैंड क्रीम लगाएं.

8  सर्दियों के मौसम में एडि़यां आसानी से क्रैक हो जाती हैं. इसलिए मृत त्वचा को निकालने के लिए समयसमय पर ऐक्सफोलिएट इस्तेमाल करें और उस के बाद ऐसी पैट्रोलियम जैली या ग्लिसरीन बेस्ड क्रीम लगाएं, जिस में यूरिया या लैक्टिक ऐसिड मौजूद हो. आप हर रोज रात में फुट क्रीम लगा सकती हैं और ऊपर से सूती मोजे पहन सकती हैं.

9  अपने केशों व शरीर की सप्ताह में एक बार कुनकुने तेल से मालिश करें. इस के लिए आप जैतून या नारियल का तेल इस्तेमाल करें.

10 धूप में निकलने से आधा घंटा पहले अपने चेहरे व हाथों पर सनस्क्रीन लगाएं. यदि आप को ज्यादा वक्त बाहर रहना है, तो 3-4 घंटे बाद फिर सनस्क्रीन लगाएं.

11 सर्दियों में भी खूब पानी पीएं.

12 कठोर पील्स, मास्क, टोनर, ऐस्ट्रिंजैंट या अन्य किसी ऐसे त्वचा अथवा हेयर स्टाइलिंग उत्पाद से परहेज करें जिस में अल्कोहोलिक कंटैंट ज्यादा हो. क्योंकि जब अल्कोहल वाष्प बन कर उड़ता है, तो त्वचा की नमी भी उड़ा ले जाता है.

13 सर्दियों में आप घर की बनी एक और चीज भी इस्तेमाल में ला सकती हैं. ऐवोकैडो को जैतून तेल की कुछ बूंदों या दही में मिश्रित करें, पिसे बादाम मिलाएं और इस मिक्सचर को स्नान से पहले अपने पूरे शरीर पर मलें. 20 मिनट बाद इसे धो लें और उस के बाद नहाएं.

14 यह समझना अत्यावश्यक है कि सस्ते उत्पाद भी उतना ही अच्छा काम कर सकते हैं जितना कि महंगे उत्पाद. अहम बात यह है कि आप की त्वचा उस उत्पाद पर कैसी प्रतिक्रिया देती है और आप को उस के साथ कैसा अनुभव होता है, न कि आप ने कितना पैसा खर्च किया.

15 कम से कम एक बार त्वचा विशेषज्ञ के पास जाना भी एक अच्छा तरीका है. विशेषज्ञ आप की त्वचा की किस्म का विश्लेषण कर के, त्वचा की देखभाल हेतु परामर्श देता है, विकारों को दूर करता है और आप को त्वचा के लिए किस प्रकार के उत्पाद इस्तेमाल करने चाहिए, यह बताता है.

– डा. नितिन एस. वालिया
(वरिष्ठ त्वचा विशेषज्ञ, बीएलके सुपर स्पैशलिटी हौस्पिटल)

Winter Special: बेक्ड पकौड़े ऐसे बनाएं

घर में नाशते में कई बार ब्रेड और चाय से काम चालाना पड़ता है लेकिन, इसके आलावा भी आप कई अन्य डिश इस्तेमाल करते होंगे. ऐसे में नाशते मेॆं बनाने के लिए सबसे आसान और टेस्टी डिश है  बेक्ड पकौडे। जिन्हे जल्दी और आराम से घर पर नाशते में बना सकते है.

सामग्री

-3/4  कप ढोकला आटा

-2 बड़े चम्मच बेसन

-3 बड़े चम्मच प्याज बारीक कटा

-3 बड़े चम्मच गाजर कद्दूकस की

-1 छोटा चम्मच अदरक व हरीमिर्च पेस्ट

-1/2 छोटा चम्मच धनिया दरदरा कुटा

-लालमिर्च पाउडर स्वादानुसार

-1 बड़ा चम्मच धनियापत्ती बारीक कटी

-1 बड़ा चम्मच रिफाइंड औयल, नमक स्वादानुसार.

विधि

ढोकले के आटे में बेसन मिला कर पानी डालें और पकौड़ों लायक घोल तैयार करें. इस में प्याज, गाजर और बाकी सारी सामग्री मिला लें. अप्पा पत्रम के प्रत्येक गड्ढे को तेल से चिकना करें और उस में 1-1 चम्मच घोल डाल कर आंच पर रखें. बरतन को ढक दें. आंच धीमी रखें. पकौड़ों को पलटें और थोड़ा सा तेल लगा दें. दोनों तरफ से करारा सेंक कर चटनी के साथ सर्व करें.

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