पति पत्नी के मामलों में धर्म का क्या काम

माना जाता है कि मुसलिम विवाहों के झोगड़ों के मामले आपस में सुलटा लिए जाते हैं और ये अदालतों में नहीं जाते पर अदालतें शादीशुदा मुसलिम जोड़ों के विवादों से शायद आबादी के अनुपात से भरी हुई हैं. ये मामले कम इसलिए दिखते हैं कि गरीब हिंदू जोड़ों की तरह गरीब मुसलिम जोड़े भी अदालतों का खर्च नहीं उठा सकते और पतिपत्नी एकदूसरे की जबरदस्ती सह लेते हैं.

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हाल ही में एक मामले में एक मुसलिम पति को पत्नी को अपने साथ रहने पर मजबूर करने का हक देने से इनकार कर दिया क्योंकि उस पति ने दूसरी शादी भी कर ली थी और इसलिए पहली पत्नी अपने पिता के घर चली गईर् थी. पहली पत्नी अपने पिता की इकलौती संतान है और उस के पिता ने मुसलिम कानून की जरूरत के हिसाब से जीतेजी सारी संपत्ति बेटी को उपहार कर दी थी.

हालांकि अदालत ने कुरान का सहारा लिया. पतिपत्नी के झोगड़ों में धर्म को लिया ही नहीं जाना चाहिए क्योंकि धर्म जबरन एक आदमी और औरत के साथ रहने के अनुबंध पर सवार हो चुका है. शादी का न तो मंदिर से कोई मतलब है, न चर्च से, न मुल्ला से, न ग्रंथी से. शादी 2 जनों की आपसी रजामंदी का मामला है और जब रजामंदी से किसी की शादी की है कि दोनों किसी तीसरे को अपने संबंधों के बीच न आने देंगे तो यह माना जाना चाहिए बिना चूंचपड़ के. कानून को पतिपत्नी का हक देना चाहिए लेकिन कौंट्रैक्ट एक्ट के हिसाब से, धर्म के हिसाब से नहीं. पतिपत्नी के अधिकार एकदूसरे पर क्या हैं और वे अगर संबंध तोड़ें तो कौन क्या करेगा क्या नहीं, यह इसी तरह तय करना चाहिए जैसे पार्टनरशिप एक्ट, कंपनीज एक्ट, सोसायटीज एक्ट में तय होता है. धर्म इन अनुबंधों के बीच में नहीं आता. शादी न भगवानों के कहने पर होती है न भगवानों के कहने पर टूटती है.

एक आदमी और औरत जीवनभर एकदूसरे के साथ ही सुखी रहेंगे, यह जरूरी नहीं. शादी के बाद 50-60 या 70 सालों में बहुत कुछ बदल सकता है. पसंद बदल सकती है, स्तर बदल सकता है, शरीर बदल सकता है. जीवनसाथी को हर मामले में जबरन ढोया जाए, यह गलत है. प्रेम में तो लोग एक पेड़ के लिए भी जान की बाजी लगा देते हैं. जिस के साथ सुख के हजारों पल बिताए हों, उस के साथ दुख में साथ देना कोई बड़ी बात नहीं.

मुसलिम जोड़े ने अदालत की शरण ली वह साबित करता है कि मुसलिम मर्द भी तलाक का हक कम इस्तेमाल करते हैं और जहां हक हो वहां खुला भी इस्तेमाल नहीं किया जाता. कट्टर माने जाने वाले मुसलिम जोड़े भी सैक्युलर अदालतों की शरण में आते हैं. यह बात दूसरी कि बहुत सी अदालतों के जजों के मनों पर धार्मिक बोझो भारी रहता है. इस मामले में जज ने सही फैसला किया कि पति पत्नी को साथ रहने पर मजबूर नहीं कर सकता खासतौर पर तब जब उस ने दूसरी शादी भी कर रखी हो, चाहे वह मुसलिम कानून समान हो.

मेरे फेस पर मुंहासे होने लगे है, मैं क्या करुं?

सावल

मैं दिल्ली से बैंगलुरु शिफ्ट हुई तो मुझे मुहांसे होने लगे जो पहले दिल्ली में कभी नहीं हुए. मेरी उम्र 25 साल है. जो खाना मैं दिल्ली में खाती थी अब भी खाती हूं. मैं क्या करूं?

जवाब

ज्यादातर दिल्ली में मुंहासे निकलने के चांस ज्यादा होते हैं. बैंगलुरु का तापमान बहुत नौर्मल रहता है यानी न गरम न ठंडा. इसलिए जगह बदलने की वजह से मुंहासे निकलना शुरू हुआयह आप की गलतफहमी है. आप को चैक करना चाहिए कि कहीं कोई हारमोनल प्रौब्लम तो नहीं है. अगर है तो उसे सौल्व करना जरूरी है. हारमोन में बदलाव आने से कई बार औयल ग्लैंड्स ज्यादा ऐक्टिव हो जाती हैं. इसलिए त्वचा की सफाई और भी जरूरी है. तैलीय त्वचा को मुंहासों से बचाने के लिए उस की नियमित सफाई जरूरी है. चेहरे को साफ करने के लिए एस्ट्रिंजैंट का इस्तेमाल कर सकती हैं या फिर घर में भी स्किन टौनिक बना सकती हैं. रात को नीम या पुदीने की पत्तियों को पानी में भिगो दें. सुबह पानी को उबाल कर छान लें. इस स्किन टौनिक से त्वचा साफ करने से भी मुंहासों की समस्या से छुटकारा मिलेगा. मुंहासों को दूर करने के लिए 1/2 चम्मच अखरोट की गिरी का पाउडर और 1 चम्मच चावल का आटा लें. इस में 1/2 चम्मच मूली का रस1 चम्मच छाछकुछ गुलाबजल की बूंदें मिला कर पेस्ट बना लें. इस पेस्ट को चेहरे पर लगाएं. सूखने पर ठंडे पानी से धो लें. इस से मुंहासे कम होंगे और रंग भी निखरेगा.

-समस्याओं के समाधान

ऐल्प्स ब्यूटी क्लीनिक की फाउंडर डाइरैक्टर डा. भारती तनेजा द्वारा

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Winter Special: जब घटाना हो वजन

आजकल हर न्यूजपेपर, टीवी चैनल, इंटरनैट, मैगजीन आदि में वजन कम करने की तमाम तरह की दवाओं के विज्ञापन छपते हैं. उन के साथ ही इन्हें इस्तेमाल करने वालों के अनुभव भी बताए जाते हैं और दवा लेने के पहले के और बाद के फोटो भी दिखाए जाते हैं. मनी बैक जैसे औफर भी दिए जाते हैं. इन विज्ञापनों को देख कर लोग जल्द से जल्द वजन घटाने के लिए इन दवाओं का सेवन शुरू कर देते हैं. परंतु ये दवाएं उन के शरीर को फायदा कम नुकसान ज्यादा पहुंचाती हैं. आइए, जानते हैं कैसे:

स्थायी समाधान नहीं

क्लीनिकल डाइटीशियन के अनुसार, वजन कम करने वाली कुछ दवाओं से शरीर का ‘बेसल मैटाबौलिक रेट’ बढ़ा कर वजन कम हो जाता है. लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं होता, क्योंकि जैसे ही दवा का सेवन बंद करते हैं वजन फिर से बढ़ जाता है.

दरअसल, खाना खाने से हमारे शरीर को ऐनर्जी मिलती है. ऐसे में अगर कोई दवा हमारे खाने को शरीर में जज्ब होने से रोकती है, तो वह हमारे शरीर के लिए नुकसानदायक है. वजन कम करने वाली सभी दवाएं यही काम करती हैं. कई बार तो इन का असर उलटा भी हो जाता है. इसलिए वजन घटाने के लिए इन दवाओं का सेवन कभी नहीं करना चाहिए.

सुरक्षित नहीं

वजन कम करने की चाहत में लोग इन दवाओं का सेवन करते हैं, लेकिन सिर्फ गोलियां खा कर वजन कम नहीं हो सकता है. ये एक सीमा तक ही काम करती हैं. इन के साइड इफैक्ट्सके कारण वीकनैस, गुस्सा आना, लो ब्लडप्रैशर, केशों का झड़ना, ज्यादा भूख लगना, डिप्रैशन जैसी समस्याएं पैदा होने लगती हैं.

आजकल वजन कम करने वाली ऐलोपैथिक, आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक सभी किस्म की दवाएं मार्केट में उपलब्ध हैं. लेकिन सच यह है कि तमाम दावों के बावजूद ज्यादातर दवाएं सुरक्षित नहीं हैं.

कैसे बनाएं सुडौल काया

सही डाइट व जीवनशैली में सुधार के साथसाथ कुछ अन्य उपाय भी हैं, जिन्हें अपना कर आप अपनी फिगर को सुडौल बना सकती हैं. इस में दोराय नहीं कि स्लिमट्रिम होने के लिए जितनी मेहनत करनी पड़ती है, उतनी ही कीमत भी चुकानी पड़ती है. बाजार में ऐसे भी कई उत्पाद उपलब्ध हैं, जिन का इस्तेमाल सरल है व सुडौल काया पाने में असरकारक भी. उन में से एक है स्लिमिंग औयल. यह अगर किसी ब्रैंडेड कंपनी का हो और प्राकृतिक तत्त्वों से बना हो तो इस के नियमित इस्तेमाल से सैल्युलाइट घटता है और त्वचा में कसाव बढ़़ता है. फलस्वरूप शरीर स्वस्थ व सुडौल बनता है. मगर इस्तेमाल से पहले जरूरी है कि यह तसल्ली कर लें कि आप की त्वचा पर इस का कोई साइड इफैक्ट तो नहीं होगा.

सुधारें लाइफस्टाइल

जिस प्रकार कार चलाने के लिए पैट्रोल या डीजल के अलावा कोई और लिक्विड यूज नहीं कर सकते, उसी प्रकार आप खाना खाने के बजाय कुछ स्नैक्स या ड्रिंक्स लेंगे तो उन से शरीर को चलाने के लिए पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिल सकती. सही समय पर सही मात्रा में हैल्दी फूड लेने से ही शरीर से काम लिया जा सकता है. इसलिए कभी खाने को नजरअंदाज न करें. अगर आप अपना वजन घटाना चाहती हैं, तो प्रौपर डाइट लेने के साथसाथ ऐक्सरसाइज भी जरूर करें.

क्या है एक्टर अदनान खान की दिली ख्वाहिश, पढ़े इंटरव्यू

इश्क सुभान अल्लाह फेम अभिनेता अदनान खान दुबई से है,बचपन से ही उन्हें फिल्म देखने का शौक था. ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने थोड़े समय के लिए जॉब किया,लेकिन उन्हें ये काम पसंद नही आया और वे अभिनय और डायरेक्शन की ओर मुड़े. शुरुआत में उन्होंने दुबई में शूट कर शॉर्ट फिल्म ’बबल’बनाई, जो इंटरनेशनली फेमस हुई और कई अवॉर्ड्स भी जीती.

इसके बाद उन्होंने मुंबई आने का प्लान बनाया और एक्टिंग में जाने का मन बनाया,इसके लिए उन्होंने अनुपम खेर की एक्टिंग क्लास में दाखिला लिया और कई नाटकों में काम किया, इससे उन्हें आगे बढ़ने में मदद मिली.

Adnan khan

अभी सोनी टीवी पर उनकी शो कथा अनकही आ रही है, जिसमें उन्होंने वियान की मुख्य भूमिका निभा रहे है. किसी सही शो को चुनना अदनान के लिए आसान नहीं होता,ऐसे में अदनान अपनी भूमिका में कुछ खास बातों को देखते है, वे कहते है कि किसी भूमिका के बारे में मैं अधिक नही सोचता. केवल पिछले शो की भूमिका से अलग चुनने की कोशिश करता हूं. मैं अधिक डार्क या शेकी भूमिका में काम नहीं करना चाहता,जिससे मैं रीलेट न कर सकूं.

चरित्र ने बदला मुझे

इस शो में वियान का चरित्र बहुत सुंदर है, इसमें बचपन से ही वियान की सोच को काफी अलग दिखाया गया है

इसके आगे अदनान कहते है कि वियान का चरित्र बहुत ही आकर्षक और चुनौतीपूर्ण है, इसमें एक ऐसे व्यक्ति की भूमिका है, जिसके जीवन में बहुत सारी चीज़ें घटती है,लेकिन वह उसे प्रकट नही करता. जब उसके जीवन में एक ऐसे चरित्र का प्रवेश होता है,जिससे उसकी दुनिया बदल जाती है. इस किरदार से मैं खुद को रीलेट कर पाता हूं, क्योंकि मैंने अपने जीवन में ऐसी कई लड़कियों से मिला,जो पैसे को प्यार से अधिक महत्व देती है और उन्हें किसी के जीवन से बीच रास्ते में निकल जाने में समय नहीं लगता. इस चरित्र को करने के बाद से मुझमें अंतर आया है और अब ऐसे कई उदाहरण , मेरे पास है, जिसमें मैंने महिलाओं की कामयाबी और सफ़लता को दिल से माना है. मैं उन सभी को सम्मान भी देता हूं,जिसमें मेरी मां का स्थान सबसे ऊपर है.

मिली प्रेरणा

एक्टिंग का शौक बचपन से अदनान को रहा, उन्हें फिल्में देखने का भी बहुत शौक था. अभिनय की प्रेरणा के बारे में पूछने पर वे कहते है कि मैं दुबई का हूं और बचपन से मुझे कहानियां, कविताएं और कोट्स लिखने का बहुत शौक था. दुबई में एक्टर्स कम होते है, वहां एक्टिंग में जाने की कोई कल्चर नहीं है. मैंने एक एक्टर विल्समिथ की अंग्रेज़ी फिल्म ’सेवन पाउंड्स’ देखा और इस फिल्म ने मेरी जिंदगी बदल दी. उस फिल्म की एक्टिंग मेरे अंदर बस गई.

मिला परिवार का सहयोग

अभिनय में आने के लिए अदनान को न तो किसी ने मना किया और न ही वाहवाही की. उनका कहना है कि सभी ने दिल से कोशिश करने की सलाह दी. मेरी मां को फिल्मों से कोई लगाव नहीं है, लेकिन उन्होंने भी रोका नहीं.

रहा संघर्ष

मुंबई आने के बाद अदनान को बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ा, क्योंकि वे किसी को जानते नही थे, उनके जो दो तीन लोग जानने वाले थे, वे भी हेल्प नही कर पाए. ऐसे में उन्होंने अनुपम खेर की एक्टिंग क्लास में दाखिला लिया और वहां उन्हें कई दोस्त मिले, जो एक्टिंग सीखने आए नए छात्र थे. इसलिए सभी मिलकर सुबह अंधेरी वेस्ट में स्थित ऑडिशन स्टूडियो से निकलते हुए अच्छे कलाकारों को देखकर वहां पहुंचते और दरवाजा खटखटाकर ऑडिशन देते थे,ऐसे करीब एक साल तक चलता रहा. अदनान कहते हैं कि इसे मैं संघर्ष नही मानता,क्योंकि हर काम को खोजना पड़ता है और उसमें कही हां तो कहीं ना का सामना करना पड़ता हैं. यह एक खोज थी. एक्टिंग कोर्स खत्म करने के बाद मुझे एक बड़ी प्रॉडक्शन हाउस में ऑडिशन का ऑफ़र मिला था,लेकिन मैं वहा नही गया,क्योंकि मैं बहुत नर्वस था.

मिला ब्रेक

अदनान आगे कहते है कि मुझे पहला ब्रेक शो ’अर्जुन’से मिला.दो मिनट का ही रोल था, लेकिन मेरे काम को सभी ने पसंद किया,ऐसे मैंने कई सारे छोटी छोटी भूमिकाएं निभाई और आगे बढ़ता गया.जिंदगी बदलने वाली शो ’इश्क सुभान अल्लाह’ थी, जिससे मैं घर घर पहचाना जाने लगा. इसमें मेरी भूमिका भी अच्छी थी.

इसके आगे वे कहते है कि एक्टिंग फ़ील्ड में ग्लैमर अवश्य है, लेकिन एक्टिंग से जो प्यार करते है,वहीं व्यक्ति इस फ़ील्ड में काम कर सकते हैं. रिजेक्शन सभी को सहना पड़ता है,लेकिन मायूस होने के बजाय खुद के क्राफ्ट पर अच्छी तरीके से काम कर आगे बढ़ना पड़ता है. इसके अलावा अपने कॉन्फिडेंस को बनाएं रखें.इस क्षेत्र में सबका स्वागत है. रिजेक्शन होने पर मैं स्वीकार कर लेता हूं, उस बारे में अधिक नही सोचता, खराब लगता है, लेकिन जल्दी काम पर लौटने के बारे में सोचता हूं.

ड्रीम है क्या?

अदनान के पास 10से 12 आइडियाज है, जिन्हें वे शॉर्ट फिल्म में ढालना चाहते है. ये सभी आयडियाज आम जीवन से प्रेरित है. वे इन आइडियाज को शॉर्ट फिल्म में परिवर्तित कर दर्शकों तक पहुंचाना चाहते है. सुपर पॉवर मिलने पर मैं टाइम लाइन में जाकर सालो जिंदा रहना चाहता हूं और पुराने समय में लोग कैसे रहते थे,उसे देखना चाहता हूं. इतिहास उन्होंने लिखी है,जो जीतते आए हैं,हारने वालों ने नही. इसलिए उसका अध्ययन करना मुझे पसंद है.नए साल को में नए रूप में स्वागत करना चाहता हूं, जिसमें खुशियां हो, गम का प्रवेश न हो,किसी से मनमुटाव न हो.

खुशियों के फूल – भाग 2 : किस बात से डर गई अम्बा

एक  दिन लेकिन हद ही हो गई. उस दिन अम्बा  मां के घर से लौटी ही थी, कि रात के आठ  बजे तक टेबल पर डिनर सर्व ना होने की फ़िजूल सी बात पर निनाद उस पर गुस्से से फट पड़ा और उस दिन निनाद का बेवजह गुस्से से चीखना चिल्लाना सुन अम्बा  का धैर्य जवाब दे गया. वह उल्टे पैरों वापस मां के घर चली आई. बहुत सोच विचार कर मां के यहां एक माह  रहने के बाद उसने निनाद को फोन करके कहा “निनाद, अब मैं यहां माँ के साथ ही रहूँगी. तुम्हारे घर नहीं लौटूंगी. मुझे तुमसे तलाक चाहिए.’’

अम्बा की यह बात सुनकर निनाद अतीव क्रोध से बिफर उठा. अम्बा की तलाक की मांग उसे अपने पौरुष पर प्रहार लगी. सो गुस्से से भड़कते हुए वह चिल्लाया, “शौक से रहो माँ के साथ.मैं भी तुम्हारे बिना मरा नहीं जा रहा. जब चाहोगी तलाक मिल जाएगा.’’

मन ही मन समझता था कि वह पत्नी के साथ ज्यादती कर रहा है लेकिन अपने पुरुषोचित, अड़ियल  और अहंवादी  स्वाभाव से मजबूर था.

अम्बा तलाक की कार्यवाही शुरू करने के लिए एक अच्छे वकील की तलाश में जुट गई थी. अम्बा को माँ के यहां आए तीन माह हो चले थे.तभी अम्बा को एक अच्छी महिला वकील मिल गई थी और वह उससे मिलने ही वाली थी कि तभी  उन्हीं दिनों लंदन में एक कॉन्फ्रेंस में दोनों को जाना पड़ा. कॉन्फ्रेंस अटेंड कर एक ही फ़्लाइट से वे दोनों अपने देश लौटे ही थे कि लंदन में कोरोना  के प्रकोप के चलते  अपने शहर के एयरपोर्ट पर निनाद को हल्का बुखार निकला. फिर हौस्पिटल में दोनों का कोरोना का टेस्ट हुआ और उसमें  दोनों कोरोना पॉजिटिव निकले

कि तभी निनाद की  पुकार से उसकी तंद्रा टूटी और वह वर्तमान में वापस आई और दौड़ी-दौड़ी निनाद के पास गई.

निनाद आंखें बंद कर लेटा हुआ था.”अम्बा,  मेरे पास बैठो.  मुझे कुछ अच्छा नहीं लग रहा.”

” कैसा लग रहा है निनाद?”

”  बहुत कमजोरी लग रही है और घबराहट हो रही है.”

“अरे घबराने की क्या बात है?  चलो मैं तुम्हारे लिए गर्मागर्म टमेटो सूप बनाकर लाती हूं.सूप पीकर तुम बेहतर फ़ील करोगे,” यह कहकर अम्बा  रसोई में जाकर दस  मिनट में सूप बनाकर ले आई.

” अम्बा,  हम दोनों ठीक तो हो जाएंगे ना?”

” हां हां बिल्कुल ठीक हो जाएंगे. डाक्टर ने कहा था न, हम दोनों के ही सिमटम्स बहुत माइल्ड हैं. डरने की कोई बात नहीं है. तुम सोने की कोशिश करो. सो लोगे तो बेहतर फील करोगे.”

” तुम भी जा कर आराम करो. तुम्हें भी तो थकान हो रही होगी.”

” नहीं नहीं, मेरा इंफेक्शन  शायद  कुछ ज्यादा ही माइल्ड है. मुझे कुछ गड़बड़ फील नहीं हो रहा. तुम सो जाओ.”

तभी निनाद ने अपना हाथ बढ़ाकर अम्बा का हाथ थाम उसे जकड़ लिया और उसे खींच कर अपने पास बिठाते हुए उससे बेहद मीठे स्वरों में बोला, “मुझसे नाराज़ हो? मैं अपनी पिछली गलतियों को लेकर बेहद शर्मिंदा हूं. मेरे पास बैठो. तुम मुझसे दूर चली जाती हो तो मुझे लगता है, मेरी जिंदगी मुझसे दूर चली गई. वापिस आजाओ अम्बा मेरी ज़िंदगी में. तुम्हारे बिना मैं बहुत अकेला हो गया हूँ.“ यह कह कर उसने उसकी  हथेली को चूम उसके हाथों को अपनी गिरफ़्त में जकड़ लिया.”

महीनों बाद पति के स्नेहिल स्पर्श और स्वरों  से अम्बा  एक अबूझ  मृदु ऐहसास  से भर उठी लेकिन दूसरे ही क्षण वह असमंजस से भर उठी. तीन वर्षों तक उसका दुर्व्यव्हार सह कर क्या अब उसे एक बार फिर उसके करीब आना चाहिए?

पति के हाथों को जकड़े जकड़े अम्बा  सोच रही थी, “काश, तुम पहले भी ऐसे ही रहते तो जिंदगी कितनी खुशनुमा होती.”

अगली सुबह निनाद  जब उठा तो उसके सर में तेज दर्द था. अम्बा  ने निनाद के फैमिली डॉक्टर को निनाद के चेकअप के लिए बुलाया. वह आए और निनाद  की हालत देख अम्बा  से बोले, “चिंता की कोई बात नहीं है. अभी भी इनके सिम्टम्स माइल्ड ही  हैं. हॉस्पिटलाइजेशन की जरूरत नहीं है. बस इन पर पूरे वक्त वॉच रखिए और तबीयत बिगड़े तो मुझे इन्फॉर्म करिए. आपको भी कोरोना का इंफेक्शन है. बेहतर होगा यदि आप एक नर्स रख लें.”

“नहीं-नहीं डॉक्टर, मैं बिल्कुल ठीक हूं.  ना मुझे कोई कमजोरी लग रही न ही कहीं दर्द है. आप निश्चिंत रहिए मैं इन पर पूरे वक्त वॉच रखूंगी.”

डाक्टर के जाने के बाद निनाद  ने अम्बा  से कहा, “तुम  इतना लोड लोगी तो तुम भी बीमार पड़ जाओगी. प्लीज कोई नर्स रख लो.”

“हां, इस बारे में सोचती हूं. तुम अभी सो जाओ.’’

निनाद को चादर उढ़ा वह दूसरे बेडरूम में अपने पलंग पर लेट गई. पिछले दिन से अम्बा गंभीर सोचविचार में मग्न थी. निनाद को लेकर वह कुछ फैसला नहीं कर पा रही थी. निनाद के रवैये से स्पष्ट था, वह अब समझौते के मूड में था, लेकिन क्या वह पिछले तीन वर्षों तक उसके दिये घावों को भुला कर उसकी इच्छानुसार उसके साथ एक बार फिर जिंदगी की नई शुरुआत कर पाएगी.वह घोर द्विविधा में थी. निनाद के बंधन को काट फेंके या फिर गुजरे दिनों को भुला कर एक नया आगाज़ करे? एक ओर उसका मन कहता, इंसान की फितरत कभी नहीं बदलती. उसने उसके साथ एक नई शुरुआत कर भी ली तो क्या गारंटी है कि वह उसे दोबारा तंग नहीं करेगा? तभी दूसरी ओर वह सोचती, जब निनाद ने अपनी गलती मान ली है तो एक मौका तो उसे देना ही चाहिए.अनायास उसके कानों में माँ के धीर गंभीर शब्द गूंज उठे, “रिश्तों की खूबसूरती उन्हें बनाए रखने में होती है, ना की उन्हें तोड़ने में.“

जिंदगी के इस मोड पर वह स्पष्टता से कुछ सोच नहीं पा रही थी, कि क्या करे.

बीमारी के इस दौर में निनाद एक दम बदला बदला नज़र आ रहा था. वह   बेहद डर गया था. वह एक बेहद डरपोक किस्म का, कमज़ोर दिल का इंसान था.उसे लगता वह कोरोना से मर जाएगा. ठीक नहीं होगा. वह बेहद कमज़ोरी फील कर रहा था. अम्बा  को यूं दिन रात अपनी देखभाल करते देख मन ही मन उसने न जाने कितनी बार अपने आप से दोहराया, “इस बार बस मैं ठीक हो जाऊं, अम्बा  को बिल्कुल तंग नहीं करूंगा. उसे पूरा प्यार और मान दूंगा. अब उसपर बिलकुल नहीं चिल्लाऊंगा.” अम्बा को इस तरह समर्पित भाव से अपनी सेवा करते देख वह गुजरे दिनों में उसके प्रति अपने दुर्व्यवहार को लेकर घोर  पछतावे से भर उठा. साथ ही कोरोना से मौत के खौफ ने उसे बहुत हद तक  बदल दिया था.

उस दिन रात का एक  बज रहा था. निनाद की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी.  उसके हाथ पैरों में बहुत दर्द हो रहा था. वह बार-बार दर्द से हाथ पैर पटक रहा था. अम्बा  उसके हाथ पैर दबा रही थी. अम्बा  के हाथ पैर दबाने से उसे बेहद आराम लगा था और भोर होते होते वह गहरी नींद में सो गया था. इतनी देर तक उसके हाथ पैर दबाते दबाते अम्बा  भी थकान से बेदम हो गई थी लेकिन मन में कहीं अबूझ सुकून का भाव था. वह कोरोना की वज़ह से  निनाद में आए परिवर्तन को भांप रही थी. निनाद अब  बेहद बदल गया था. उसकी आंखों में अपने लिए प्यार का समुंदर उमड़ते  देख वह मानो  भीतर तक भीग  उठती लेकिन दूसरे की क्षण पुराने दिनों की याद कर भयभीत हो उठती.

अगली सुबह अम्बा ने डाक्टर को बुलवाया. उन्होंने निनाद के लिए कुछ दवाइयाँ लिख दीं. उन दवाइयों  से निनाद  की तबीयत धीमे धीमे सुधरने लगी थी. दस  दिनों में वह बिस्तर से उठ बैठा था.

Hansika Motwani बनीं दुल्हन, स्टेज पर पति ने किया kiss

एक्ट्रेस हंसिका मोटवानी और सुहेल खुतरिया के साथ शादी के बंधन में बंध चुकी है, जी हां 4 दिसंबर को दोनों ने शादी की है. जिसकी फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है.

आपको बता दें, कि शादी के दिन हंसिका मोटवानी बेहद ही खूबसूरत लग रही थी, शादी का लहंगा उनपर बेहद ही खूबसूरत लग रहा था. शादी में उन्होंने लाल रंग का लेहंगा कैरी किया. जिसके साथ उन्होंने ट्रैडिशनल ज्वैलरी और बैंगल्स कैरी किए.वही सुहेल ने खास दिन पर शेरवानी कैरी की है.

बता दें, कि कपल ने जयपुर के मुंडोता फोर्ट में अपनी शादी रचाई.शादी पूरे रसमो-रिवाज के साथ हुई. सुहेल और हंसिका की ये वेडिंग फोटोज वायरल हो रही हैं. मिडिल पार्टेड हेयर और ग्लोइंग मेकअप ने हंसिका के लुक में चार चांद लगा दिए.

2 दिसंबर से शुरु हुआ फंक्शन

जयपुर में हंसिका और सुहेल के शादी के फंक्शंस 2 दिसंबर से शुरू हो गए थे. ये कपल टॉक ऑफ द टाउन बना हुआ था. सुहेल और हंसिका की ड्रीमी वेडिंग की तरह उनका  मैरिज प्रपोजल भी कम शानदार नहीं था. बता दे, कि सुहेल ने एक्ट्रेस को  एफिल टावर के सामने प्रपोज किया था. कपल एक दूसरे के बिजनेस पार्टनर भा है, वही शादी की स्टेज पर कपल ने  kiss भी किया. सुहेल ने हंसिका को उनके माथे पर किस कर शादी की बधाई दी.

मां : क्या बच्चों के लिए ममता का सुख जान पाई गुड्डी

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Bigg Boss 16: कैप्टेंसी टास्क में होगी प्रियंका-सुंबुल के बीच तकरार, देखें वीडियो

विवादित शो बिग बॉस16 दिन पर दिन टीआरपी की लिस्ट में टॉप चल रहा है, हर दिन शो में नए टास्क और नोंक-झोंक शो को हिट बना रहे है. कुछ की दोस्ती बिगड़ती नज़र आ रही है तो कुछ नए दोस्त बनते दिख रहे है.

रिएलटी शो बिग बॉस16 में एक फिर नई तकरार नज़र आई है इस समय घर पर निमृत कौर का राज है वो शो में रानी बनी हुई है. उन्हो बीते हफ्ते कप्तान बनाया गया था. उस दौरान कैप्टंसी के चलते टीना दत्ता और निमृत कौर आपस में लड़ते नज़र आए थे. हालांकि, शिव ठाकरे नें निमृत कौर का नाम लेकर उन्हें कप्तान बना दिया था. इस हफ्ते फिर से सत्ता बदलने वाली है. कैप्टन बनने की रेस में सबसे आगे शालीन भनोट, प्रियंका चाहर, अंकित गुप्ता और सुंबुल तौकीर खान नज़र आ रहे है. इस बीच बिग बॉस का एक नया प्रोमो वीडियो सामने आया है.

 

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आपको बता दें, कि कलर्स टीवी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक नया प्रोमो वीडियो अपलोड़ किया है. को, जिसमें शालीन भनोट, प्रियंका चाहर, अंकित गुप्ता और सुंबुल तौकीर खान कैप्टेंसी टास्क परफॉर्म करते नजर आ रहे हैं. क्लिप में देख सकते हैं कि सुंबुल तौकीर किस तरह प्रियंका से लड़ रही है. टीवी की इमली का ये बदला अंदाज फैंस को खूब पसंद आ रहा है. इस प्रोमो को देखने के बाद फैंस बिग बॉस के अपकमिंग एपिसोड का इंतजार कर रहे हैं.

 

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एक ट्रेन जहां चलती हैं लेडी डौन की

‘‘अरे हटोहटो मु?ो अंदर आने दो… नहीं उतरो आंटी, क्या यही एक ट्रेन है, जो अंतिम है, उतरो, उतर जाओ जगह नहीं है, दूसरी में चढ़ जाना 3 से 4 मिनट में एक लोकल ट्रेन आती है, फिर भी घर जाने की जल्दी में इसी में चढ़ना है…’’ ऐसी कहे जा रही थी, मुंबई की विरार लेडीज स्पैशल में एक युवा महिला, चढ़ने वाली 45 वर्षीय महिला को, जिसे हर रोज इसे सुनना पड़ता है, लेकिन घर का बजट न बिगड़े, इसलिए इतनी मुश्किलों के बाद भी वह जौब कर रही है, हालांकि कोविड के बाद उसे केवल 3 दिन ही औफिस आना पड़ता है, लेकिन इन 3 दिनों में औफिस आना भारी पड़ता है. कई महिलाएं भी उस दबंग महिला की हां में हां मिला रही थीं और उस महिला को उतरने के लिए कह रही थीं.

अबला नहीं सबला है यहां

यहां यह बता दें कि विरार लेडीज स्पैशल रोज चर्चगेट से चल कर हर स्टेशन पर रुकती हुई विरार पहुंचती है, लेकिन उतरने वालों से चढ़ने वालों की संख्या हमेशा अधिक रहती है. गेट के एक कोने में खड़ी महिला गोरेगांव उतरने का इंतजार कर रही थी, लेकिन वह मन ही मन सोच रही थी कि क्या वह उतर पाएगी क्योंकि इस विरार लेडीज स्पैशल में बोरीवली तक की किसी महिला यात्री को चढ़ने या उतरने नहीं दिया जाता क्योंकि बोरीवली लेडीज स्पैशल है, इसलिए विरार महिलाओं के कई गैंग, जो इस बात का इतमिनान करते हैं कि बोरीवली तक उतरने वाली कोई महिला इस ट्रेन में चढ़ी है या नहीं.

4-5 महिला गैंग, जिन में 7-8 महिलाएं हर 1 गैंग में होती हैं. अगर गलती से भी कोई महिला इस लोकल में चढ़ जाती है तो उसे ट्रेन के गैंग विरार तक ले जाते हैं. यहां यह सम?ाना मुश्किल होता है कि अबला कही जाने वाली महिला इतनी सबला कैसे हो गई.

कठिन सफर

असल में मुंबई की लोकल ट्रेन यात्रा के उस एक घंटे में एक महिला ही दूसरी महिला की शत्रु बन जाती है. मायानगरी की भागदौड़ में घरपरिवार के साथ कैरियर को भी संवारने का दबाव महिलाओं पर होता है. सुबह कार्यालय पहुंचने की जल्दी और शाम को घर लौटने की, इस के लिए महिलाएं बहुत कुछ ?ोलती हैं.

इस में सब से दुखदायी है औफिस से घर पहुंचने के लिए मुंबई से विरार की ट्रेन यात्रा, जहां महिला डब्बे में महिलाएं ही दूसरी महिलाओं की शत्रु बन जाती हैं. मुंबई से विरार के बीच की इस ट्रेन यात्रा में महिलाओं के गैंग का बोलबाला रहता है.

ऐसे में कई बार कई महिलाओं ने अपनी नासम?ा से जान तक गवां दी. सुबह निकली महिला चल कर नहीं, स्ट्रेचर पर मृत अवस्था में घर पहुंचती है. यहां सीट भी उन्हीं महिलाओं को मिलती है, जो उस महिला गैंग की सदस्य होती हैं अन्यथा कुछ भी कर लें, आप को मारपीट से ले कर अपनी जान भी गवानी पड़ सकती है.

दमदम मारपीट

ऐसी ही एक घटना घटी पिछले दिनों ठाणे पनवेल लोकल ट्रेन के महिला कोच में. तुर्भे स्टेशन पर सीट खाली होने पर एक महिला यात्री ने दूसरी महिला यात्री को सीट देने की कोशिश की, ऐसे में तीसरी महिला ने उस सीट को कब्जा करने की कोशिश की, पहले तीनों में बहस हुई, बाद में बात इतनी बढ़ी कि वे आपस में मारपीट करने लगीं. कुछ देर बाद मामला इस कदर बढ़ गया कि महिलाओं में बाल खींचना, घूंसा, थप्पड़ तक शुरू हो गए. इस मारपीट में महिला पुलिस आ गई. इस मामले में दोनों महिलाओं ने एकदूसरे के खिलाफ मामला दर्ज कराया. महिला पुलिस सहित करीब 3 महिलाएं इस विवाद में घायल हुईं.

वाशी रेलवे स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक एस कटारे ने जानकारी देते हुए बताया कि सीट को ले कर शुरू हुए विवाद में कुछ महिलाओं ने आपस में मारपीट की थी. इस मारपीट में एक महिला पुलिसकर्मी भी घायल हो गई. उस का इलाज कराया गया. इस के अलावा सरकारी कर्मचारी से मारपीट करने की वजह से एक महिला को गिरफ्तार भी किया गया.

शिकायत नहीं मुंबई लोकल के ट्रेन के इस सफर में बहस, मारपीट, कपडे़ फाड़ना, धक्के देना आदि होते रहते हैं, लेकिन सही तरह से वही महिला इन लोकल्स में सफर कर पाती है, जो झगडे़ से अलग किसी कोने में खड़ी रह कर अपने पसंद के गाने हैड फोन के द्वारा सुनते हुए खुश रहे. इन लोकल्स में सीट मिलना संभव नहीं और कोई आप को सीट छोड़ देने को कहे, तो हंसती हुई तुरंत सीट छोड़ कर खड़ा हो जाना ही ठीक रहता है ताकि आप सही सलामत अपनी जान ले कर घर पहुंच

Winter Special: शादी से पहले बनाएं अपनी फिटनैस

शादी का दिन दुलहन के लिए सब से खास दिन होता है. इस दिन खूबसूरत और फिट दिखना उस का हक है. सही डाइट और ऐक्सपर्ट की मदद से आप इस दिन को और भी खूबसूरत बना सकती हैं.

दिल्ली के लोकनायक अस्पताल की सीनियर डाइटिशियन डा. किरण का कहना है, ‘‘लोगों के लाइफस्टाइल और फूड हैबिट अलगअलग होने की वजह से सब की शारीरिक जरूरत भी एकदूसरे से अलग होती है. इसलिए अपनी फिटनैस को बरकरार रखने के लिए हैल्थ विशेषज्ञों की मदद जरूर लें और अपनी नई जिंदगी की शुरुआत फिटनैस के साथ करें.’’

डाइट

नाश्ते में ब्रैड, 1 अंडा व फ्रैश जूस लें. अखरोट व बादाम भी जरूर शामिल करें. इन में पाए जाने वाले प्रोटीन, फाइबर, फाइरोकैमिकल आप के दिल को स्वस्थ रखने के साथसाथ आप की बौडी की वेस्ट लाइन को भी बढ़ने से रोकते हैं.

दिन में एक बार दही जरूर खाएं, क्योंकि दही में जिंक, कैल्सियम और विटामिन बी होता है, जिस से आप की त्वचा कोमल बनी रहेगी.

शाम के वक्त पनीर से बनी चीजें ही खाएं. पनीर में प्रोटीन और कैल्सियम होता है, जो आप को पेट की बीमारियों से दूर रखता है. इस के सेवन से आप के शरीर की हड्डियां भी मजबूत होती हैं.

अगर आप मांसाहारी हैं, तो मछली का सेवन जरूर करें. इस में पाए जाने वाले प्रोटीन केशों के लिए लाभकारी होते हैं, जिस से उन में चमक आती है.

शाकाहारी हैं, तो हरी सब्जियों को उबाल कर खाएं. इस से आप की सेहत सही रहेगी. और पिंपल्स की परेशानी भी नहीं होगी.

ब्यूटी

चेहरे पर हर दिन सीटीएम यानी क्लींजिंग, टोनिंग व मौइश्चराइजिंग जरूर करें. इस से सारी मृत त्वचा निकल जाएगी है और चेहरा खिल उठेगा.

अगर आप के केश रफ हैं, तो उन की शादी से 4 महीने पहले ही मसाज शुरू कर दें और हेयर मास्क लगाएं. इस से केशों में चमक आने के साथसाथ उन की ग्रोथ भी सही होने लगेगी. इस से आप शादी वाले दिन मनचाहा हेयरस्टाइल बना सकती हैं.

2 महीने पहले से ही पैडिक्योर और मैनिक्योर करवाना शुरू कर दें ताकि हाथपैरों से सारी मृत त्वचा हट जाए और डैमेज नेल्स भी शेप में आ जाएं. आप मेहंदी वाले दिन मैनिक्योर से अपने हाथों की खूबसूरती में चार चांद लगा सकती हैं.

अपनी बौडी को स्पा टच जरूर दें. स्पा से आप की बौडी की सारी थकान दूर हो जाएगी और आप फ्रैश महसूस करने लगेंगी. बौडी मसाज, हैड मसाज,

फुट मसाज, हौट मसाज कई तरह के स्पा होते हैं, लेकिन दुलहन के लिए ब्राइडल मसाज सही होती है. शादी से 3 महीने पहले ही स्पा करवाना शुरू कर दें.

शादी के दिन अपनी त्वचा से मैच करता वाटरप्रूफ मेकअप ही करें ताकि आप लंबे समय तक फ्रैश महसूस कर सकें और खूबसूरत दिख सकें.

स्ट्रैस पर कंट्रोल

शादी के कामों में घर वालों की मदद करें.

अपनी शादी के लहंगे को खुद डिजाइन करें.

खुद प्लानिंग करें कि शादी में घर की डैकोरेशन कैसी होनी चाहिए.

परिवार वालों व दोस्तों से बातचीत करें.

डार्क चौकलेट खाएं. इस से भी स्ट्रैस काफी कंट्रोल में रहता है.

स्लिमट्रिम दिखने के लिए

लहंगे को नाभि के नीचे ही पहनें. इस से आप लंबी लगेंगी और आप का फिगर परफैक्ट दिखेगा.

अपनी स्किन से मैच करता कलर चुन कर भी आप स्लिम लग सकती हैं. स्लिम दिखने के लिए आप ऐक्सपर्ट की मदद जरूर लें.

अगर आप के शरीर का ऊपरी हिस्सा चौड़ा है, तो आप फुलस्लीव ड्रैस ही पहनें.

हैवी मेकअप करने के बजाय चेहरे के किसी एक भाग को फोकस करें.

यह भी ध्यान रखें

यदि आप चश्मा लगाती हैं और लेजर सर्जरी करवाने की सोच रही हैं, तो बेझिझक डाक्टर से बातचीत कर के सर्जरी करवाएं या फिर शादी के दिन लैंस लगाना चाहती हैं, तो  2 महीने पहले ही लैंस लगाना शुरू कर दें ताकि शादी के दिन लैंस में आप सहज महसूस कर सकें.

पैरों का विशेष ध्यान रखें. कई बार हील वाली चप्पलें ज्यादा पहनने की वजह से पैरों में सूजन आ जाती है. इसलिए आरामदायक चप्पलों का ही प्रयोग करें.

अधिकांश लड़कियां शादी के 1 सप्ताह पहले नाक में छेद करवाती हैं. लेकिन आप ऐसा बिलकुल भी न करें, बल्कि शादी से महीना भर पहले छेद करवा लें ताकि शादी नजदीक आने पर किसी तरह की तकलीफ न हो.

दांतों में सड़न की समस्या हो तो जल्द ही इस का इलाज करवाएं और फिर शादी के दिन खुल कर हंसें.

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