किशोरावस्था के दौरान बच्चे और मातापिता के बीच का रिश्ता बड़े ही नाजुक दौर से गुजर रहा होता है. इस समय जहां बच्चे का साक्षात्कार नए अनुभवों से हो रहा होता है वहीं भावनात्मक उथलपुथल भी हावी रहती है. बच्चे इस उम्र में खुद को साबित करने और अपना व्यक्तित्व निखारने की जद्दोजहद में लगे होते है. विपरीत लिंग के प्रति आकर्षण भी बढ़ रहा होता है. अगर आप जान लें कि आप के बच्चे के दिमाग में क्या चल रहा है तो इस स्थिति से निपटना शायद आप के लिए आसान हो जाएगा .किशोरावस्था की शुरूआत अपने साथ बहुत से शारीरिक बदलावों के साथसाथ हार्मोनल बदलाव भी लाती है जो मिजाज में उतारचढ़ाव और बिल्कुल अनचाहे बर्ताव के रूप में सामने आता है. ऐसे में बच्चे के साथ बेहतर तालमेल बैठाने के लिए पेरेंट्स को कुछ बातों का ख़याल जरूर रखना चाहिए.

1. दें अच्छे संस्कार

घर में एकदूसरे के साथ कैसे पेश आना है, जिंदगी में किन आदर्शों को अहमियत देनी है, अच्छाई से जुड़ कर कैसे रहना है और बुराई से कैसे दूरी बढ़ानी है जैसी बातों का ज्ञान ही संस्कार हैं. इस की बुनियाद एक परिवार ही रखता है. पेरेंट्स ही बच्चों में इस के बीज डालते हैं. ये कुछ भी हो सकते हैं जैसे ईमानदारी, बड़ों का आदर करना, जिम्मेदार बनना, नशे से दूर रहना ,हमेशा सच बोलना, घर में दूसरों से कैसे पेश आना है आदि , इन सभी बातों को लिख कर अपने बच्चे के कमरे में चिपका दें ताकि ये बातें बारबार उस के दिमाग में चलती रहे और वह इन बातों को जल्दी याद कर पाये.

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2. थोड़ी आजादी भी दें

घर में आजादी का माहौल पैदा करें. बच्चे को जबरदस्ती किसी बात के लिए नहीं मनाया जा सकता. मगर जब आप सही गलत का भेद समझा कर फैसला उस पर छोड़ देंगे तो वह सही रास्ता ही चुनेगा. उस पर किसी तरह का दवाब डालने से बचिए. बच्चा जितना ज्यादा अपनेआप को दबाकुचला महसूस करेगा उस का बर्ताव उतना ही उग्र होगा.

अपने किशोर/युवा बच्चों को अपने सपनों को पूरा करने के लिये जरूरी छूट दें. याद रखें कि आप का बच्चा बड़ा हो रहा है. उसे अपने जज़्बात जाहिर करने दें पर उसे यह अहसास भी करायें कि वह मर्यादा की हदें न लांघे.

3. मातापिता के रूप में खुद मिसाल बनें

बच्चे के लिए खुद मिसाल बनें. बच्चे से आप जो भी कुछ सीखने या न सीखने की उम्मीद करते हैं पहले उसे खुद अपनाएं. ध्यान रखें बच्चे हमारे नक्शेकदम पर चलते हैं. आप उन्हें सफलता के लिए मेहनत करते देखना चाहते हैं तो पहले खुद अपने काम के प्रति समर्पित रहे .बच्चों से सच्चाई की चाह रखते हैं तो कभी खुद झूठ न बोले.

4. सज़ा भी दें और ईनाम भी

बच्चों को बुरे कामों के लिए डांटना जरुरी है तो वहीँ वे कुछ अच्छा करते हैं तो उन की तारीफ़ करना भी न भूलें. आप उन्हें सजा भी दें और ईनाम भी. अगर आप ऐसा करेंगे तो बच्चे को निष्चित ही इस का फायदा मिलेगा. वे बुरा करने से घबराएंगे जब कि अच्छा कर के ईनाम पाने को ले कर उत्साहित रहेंगे. यहाँ सजा देने का मतलब शारीरिक तकलीफ देना नहीं है बल्कि यह उन को मिलने वाली छूट में कटौती कर के भी दी जा सकती है, जैसे टीवी देखने के समय को घटा कर या उन्हें घर के कामों में लगा कर.

5. अनुशासन को ले कर संतुलित नज़रिया

जब आप अनुशासन को ले कर एक संतुलित नज़रिया कायम कर लेते हैं तो आप के बच्चे को पता चल जाता है कि कुछ नियम हैं जिन का उसे पालन करना है पर जरूरत पड़ने पर कभीकभी इन्हे थोड़ा बहुत बदला भी जा सकता है. इस के विपरीत यदि आप हिटलर की तरह हर परिस्थिति में उस के ऊपर कठोर अनुशाशन की तलवार लटकाये रहेंगे तो संभव है कि उस के अंदर विद्रोह की भावना जल उठे .

6. घरेलू कामकाज को जरूरी बनाना

बच्चे को शुरू से ही अपने काम खुद करने की आदत लगवाएं. मसलन अपना कमरा, कबर्ड ,बिस्तर, कपड़े आदि सही करने से ले कर दूसरी छोटीमोटी जिम्मेदारियों का भार उन पर डालें. हो सकता है कि इस की शुरूआत करने में मुश्किल हो मगर समय के साथ आप राहत महसूस करेंगे और बाद में उन्हे जीवन में अव्यवस्थित देख के गुस्सा करने की संभावना ख़त्म हो जायेगी.

7. अच्छी संगत

शुरू से ध्यान रखें और प्रयास करें कि आप के बच्चे की संगत अच्छी हो. अगर आप का बच्चा किसी खास दोस्त के साथ बंद कमरे में घण्टो का समय गुज़ारता है तो समझ जाइये कि यह ख़तरे की घण्टी है. इस की अनदेखी न करें. इस बंद दरवाजे के खेल को तुरंत रोकें. इस से पहले कि बच्चा गलत रास्ते पर चल निकले और आप हाथ मलते रह जाएँ थोड़ी सख्ती और दृढ़ता से काम लें. बच्चे को समझाएं.और सुधार के लिए जरुरी कदम उठाएं. इसी तरह दिनरात वह मोबाइल से चिपका रहे या किसी से चैटिंग में लगा रहे तो भी आप को सावधान हो जाना चाहिए.

8. सब के सामने बच्चे को कभी भी न डांटे

दूसरों के आगे बच्चे को डांटना उचित नहीं. याद रखें जब आप अकेले में समझाते हुए , वजह बताते हुए बच्चे को कोई काम से रोकेंगे तो इस का असर पॉजिटिव होगा. इस के विपरीत सब के सामने बच्चों के साथ डांटफटकार करने से बच्चा जिद्दी और विद्रोही बनने लगता है . किसी भी समस्या से निपटने की सही जगह है आप का घर. इस के लिए आप को सब्र से काम लेना होगा. दूसरों के सामने खास कर उस के दोस्तों के सामने हर बात में गल्तियां न निकालें और न ही उसे बेइज्ज़त करें.क्यों कि ऐसी बातें वह कभी भूल नहीं पायेगा और आप को अपना दुश्मन समझने लगेगा.

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9. उस की पसंद को भी मान दें

आप का बच्चा जवान हो रहा है और चीजों को पसंद और नापसंद करने का उस का अपना नज़रिया है इस सच्चाई को समझने का प्रयास करें. अपनी इच्छाओं और पसंद को उस पर थोपने की कोशिश न करें. किसी बात को ले कर बच्चे पर दवाब न डालें जब तक आप के पास इस के लिये कोई वाज़िब वजह न हो.

10. क्वालिटी टाइम बिताएं

यह सच है कि किशोर/युवा हो रहे बच्चे माता-पिता को अपनी जिंदगी से जुड़ी हर बात साझा करने से बचते हैं . पर इस का मतलब यह नहीं कि आप प्रयास ही न करें. प्रयास करने का मतलब यह नहीं कि आप जबरदस्ती करें और उन से हर समय पूछताछ करते रहे. इस के विपरीत जरुरत है बच्चों के साथ क्वालिटी टाइम बिताने और उन से दोस्ताना रिश्ता बनाने की.उन के साथ फिल्म देखना, बाहर खाने के लिए जाना और खुले में उन के साथ कोई मजेदार खेल खेलना वगैरह. इस से बच्चा खुद को आप से कनेक्टेड महसूस करेगा और खुद ही आप से अपनी हर बात शेयर करने लगेगा.

Edited by Rosy

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