Leena Jumani : आज ऐक्टिंग करते हुए, डांस, म्यूजिक और फैशन के जरीए मैं खुद को ऐक्सप्रैस कर पाती हूं और ला और पौलिटिक्स की जो नींव पापा ने दी थी वह आज भी मेरी हर पब्लिक अपीयरैंस और बातचीत में  झलकती है…

टेलीविजन   से ले कर बौलीवुड और ओटीटी तक अपनी ऐक्टिंग से अलग पहचान बनाने वाली ऐक्ट्रैस हैं लीना जुमानी. गुजरात से निकल कर मुंबई तक का उन का सफर संघर्ष और मेहनत से भरा रहा है. ‘बंदिनी’ में खेमी के किरदार से घरघर में पहचानी गईं लीना ने ‘कुमकुम भाग्य’ में तनु के नैगेटिव रोल से अपनी वर्सैटिलिटी साबित की.

लीना ने अपने कैरियर की शुरुआत 2009 में टीवी शो ‘कोई आने को है’ से की थी. इस के तुरंत बाद उन्हें इमेजिन टीवी के शो ‘बंदिनी’ में खेमी के रोल में बड़ी पहचान मिली जहां उन्होंने एक गरीब गांव की लड़की का किरदार निभाया था. टैलीविजन पर उन्होंने ‘गंगा की धीज’ में पाखी, ‘पुनर्विवाह’ में परिधि,’ ‘पिया का घर प्यारा लगे,’ ‘कुमकुम भाग्य,’ ‘कवच,’ ‘अपनापन,’ ‘गुस्ता दिल’, ‘बातें कुछ अनकही सी’ जैसे शोज किए. लेकिन सब से बड़ा ब्रेक उन्हें जी टीवी के सुपरहिट शो ‘कुमकुम भाग्य’ में तनुश्री यानी ‘तनु’ मेहता के नैगेटिव रोल से मिला जिस के लिए उन्हें सब से ज्यादा जाना जाता है. इस शो में वे 2014 से 2022 तक नजर आईं.

उन्होंने ‘अदालत,’ ‘हम ने ली है शपथ’ जैसे शोज में कैमियो भी किया था. लीना जुमानी ने पाकिस्तानी रिऐलिटी शो ‘मैडवैंचर्स’ के पहले सीजन में भाग लिया था.

करीब 20 से ज्यादा टीवी सीरियल्स में काम कर चुकी लीना जुमानी ने ग्लैमरस से ले कर देहाती और नैगेटिव तक हर तरह के रोल में खुद को प्रूव किया है.

टैलीविजन के साथसाथ लीना ने फिल्मों में भी काम किया है. फिल्मों में सब से पहली फिल्म ‘जीवनदान’ थी. उस के बाद कैरियर की स्टार्टिंग में 2008 में ‘भूरा भाई मैट्रिक फेल’ की थी. 2013 में ‘हिम्मतवाला’ में अजय देवगन की बहन पद्मा बनी थीं, फिर गुजराती मूवी ‘साथियो चल्यो खोड़लधाम’ की. 2022 में ‘हे केम छो लंदन’  रिलीज हुई थी. ओटीटी पर विक्रम भट्ट द्वारा निर्मित ‘माया 2’ की थी. एक और सीरीज ‘बिसात’ की थी जो 2022 में रिलीज हुई थी. इन में उन्होंने अपनी वर्सटाइल इमेज दिखाई और खुद को एज एन ऐक्टर चैलेंज किया.

अपनी बेहतरीन ऐक्टिंग के लिए उन्होंने बहुत से अवार्ड्स जीते हैं. जी रिश्ते अवार्ड्स में 2016 में उन्हें बैस्ट सौतन का अवार्ड मिला था और उन्हें ‘कुमकुम भाग्य’ और ‘अपनापन’ के लिए बैस्ट नैगेटिव किरदार के अवार्ड्स भी मिले हैं. हाल ही में बैस्ट इन्फ्लुएंसर पर्सनैलिटी का अवार्ड भी मिला है.

टीवी ऐक्टिंग के साथसाथ लीना सोशल मीडिया पर भी काफी ऐक्टिव हैं और अपनी फैशन रील्स व कंटैंट के लिए भी जानी जाती हैं. उन्हें ग्लोबल रीच और इन्फ्लुएंस के लिए हेराल्ड ग्लोबल जैसे प्रतिष्ठित मंचों से भी सम्मानित किया जा चुका है.

आज लीना सिर्फ एक ऐक्ट्रैस नहीं बल्कि उन लड़कियों के लिए एक इंस्पिरेशन भी हैं जो छोटे शहरों से बड़े सपने ले कर आती हैं. ग्लैमर, फिटनैस और सादगी का बैलेंस लिए लीना ने अपनी जिंदगी के लो फेज से ले कर स्टारडम तक की जर्नी पर खुल कर बात की:

‘मन्नत हर खुशी पाने की’ सीरियल में ‘लीना जुमानी’

मौडलिंग की शुरुआत कैसे हुई

अपने कैरियर की शुरुआत के बारे में लीना जुमानी बताती हैं, ‘‘मैं एक मीडिल क्लास सिंधी फैमिली से आती हूं. पेरैंट्स का रैडीमेड गारमैंट्स का बिजनैस था. मैं ने अपने कैरियर की शुरुआत मौडलिंग से की थी. सब से पहले अहमदाबाद में ड्रैसेज के लिए फोटोशूट करना शुरू किया. ऐक्चुअली उस समय मैं एक शेयर बाजार के औफिस में जौब करती थी और मेरी बहन भी वहां पार्टनर के तौर पर थी.

उसी ने मु झे सजैस्ट किया कि मु झे अपना पोर्टफोलियो बनवाना चाहिए और ऐक्टिंग, मौडलिंग फील्ड में ट्राई करना चाहिए. बहन ने ही मेरा पोर्टफोलियो बनवाया. फिर फोटोग्राफ लेने शुरू किए तो मौडलिंग के लिए काम मिलना शुरू हो गया.

‘‘मौडलिंग के बाद मु झे गुजराती मूवी का औफर आ गया. मेरी सब से पहली फिल्म थी ‘जीवनदान.’ यह 2008 की बात है. 2007 में मैं ने मौडलिंग शुरू की थी और 2008 में बैक टू बैक 2 मूवी और साइन कर ली थीं- एक ‘भूराबाई मैट्रिक फेल’ और एक और मूवी जो रिलीज ही नहीं हुई. वहीं फिल्म की शूटिंग के दौरान ही मु झे एक कोऐक्टर मिले जो बहुत अच्छे दोस्त बन गए थे. वे आलरैडी उस समय गुजराती सीरियल में काम कर रहे थे. मैं ने भी गुजराती सीरियल में ट्राई किया और मु झे काम भी मिल गया. तब मैं गुजराती सीरियल का शूट करने मम्मी के साथ मुंबई आती थी और साथ ही सूरत में कैटलाग शूट भी करती थी.

‘‘जब वह गुजराती शो खत्म होने वाला था तभी मैं ने बालाजी टैलीफिल्म्स में ट्राई किया. उस वक्त वहां बाहर एक ड्रौप बौक्स हुआ करता था जहां आप अपने फोटोज डाल सकते थे. अगर आप कैरेक्टर में फिट होते थे तो औडिशन के लिए काल आता थी. मैं ने भी अपने फोटोज उस बौक्स में डाले थे.

‘‘मु झे औडिशन के लिए काल्स आने लगीं. औडिशन दिया और मु झे सब से पहला हिंदी शो ‘बंदिनी’ मिला जो 2009 में इमेजिन टीवी पर आया था. इस के बाद मैं ने अजय देवगन के साथ बौलीवुड मूवी ‘हिम्मतवाला’ भी की जिस में मैं ने उन की छोटी बहन का किरदार निभाया था. इस के बाद मु झे लगातार काम मिलना शुरू हो गया.

‘‘मैं ने टीवी, बौलीवुड और ओटीटी तीनों में काम किया है और मेरी नजर में ये सारी अलगअलग इंडस्ट्री भले ही दिखते हों लेकिन बिग पिक्चर से देखेंगे तो सब एक ही इंडस्ट्री है. ये एक ही इंडस्ट्री के अलगअलग पार्ट हैं- जैसे टैलीविजन इंडस्ट्री, फिल्म इंडस्ट्री, ओटीटी इंडस्ट्री. जब आप टैलीविजन में काम करते हैं तो किसी शो से कमिटेड हो जाते हैं.

‘‘कौंट्रैक्ट साइन करने के बाद 25-30 दिन एक ही शो के लिए काम करते हैं. फिर आप के लिए किसी और चीज में ट्राई करना या काम करना बहुत ही मुश्किल हो जाता है क्योंकि समय नहीं मिलता है. मैं ने कभी किसी खास इंडस्ट्री में काम करने के लिए वेट नहीं किया. मु झे जब जो काम मिला उसे अपनी पलकों पर रखा चाहे वह टैलीविजन हो, वैब सीरीज हो या बौलीवुड हो.’’

शुरुआती संघर्ष

लीना बताती हैं, ‘‘शुरुआती 2-3 साल मुश्किल थे. इंडस्ट्री में मेरा कोई गौडफादर न पहले था और न आज है. आज भी ऐसा ही है कि औडिशन दो और काम मिले तो काम करो. मैं एक बात बोल सकती हूं कि आप नो डाउट कितना भी काम कर लो, कितने भी शोज कर लो पर हर नए शो के लिए आप को फिर से औडिशन देना ही पड़ता है.

‘‘बंदिनी में छेमी का किरदार एक गुजरात बेस्ड लड़की का था और उस के लिए मैं ने औडिशन दिया तो सलैक्ट हो गई. इस की तैयारी के लिए मु झे नहीं लगता कि मैं ने कोई ऐक्सट्रीम तैयारियां कीं. पर मैं सारी चीजें बहुत अच्छे से सुनती थी. जैसे अगर डाइरैक्टर कुछ बोल रहे हैं कि यह ऐसे नहीं, ऐसे सीन करो तो ध्यान देती थी. ऐवरी सिंगल डे मैं कुछ नया सीख रही थी. आज भी ऐसा ही करती हूं. हर एक रोल के लिए हर रोज कुछ न कुछ नया सीखती रहती हूं.’’

परिवार की सपोर्ट

‘‘सिंधी ब्रौड माइंडेड होते हैं. जहां तक मेरे परिवार की बात है उन्होंने मु झे हर कदम पर सपोर्ट किया. चाहे मैं कुछ नया ट्राई कर रही थी तब भी, चाहे मेरे पास कुछ नहीं था तब भी. जब  मु झे ट्राई करना था, स्ट्रगल करना था तब भी. एक टाइम था जब मैं सूरत, मुंबई और अहमदाबाद तीनों जगह अलगअलग काम कर रही थी. मेरी मां हमेशा मेरे साथ रहीं.

‘‘वह डेढ़ साल हम ने आलमोस्ट ऐवरी नाइट ट्रेन में निकाला था. एक दिन अहमदाबाद में काम है तो दूसरे दिन सूरत में काम है और तीसरे दिन मुंबई में. ऐसा डेढ़ साल चला. वह प्रौपर स्ट्रगल वाला टाइम था. ऐसे में मेरी मम्मी हमेशा मेरे साथ रही थीं. यह 2008 की बात है.’’

नैगेटिव रोल और पब्लिक रिएक्शन

‘‘किसी सीरियल में नैगेटिव रोल करने का मतलब यह नहीं कि आप रियल में भी वैसी ही हैं. लेकिन अकसर लोग आप को उस रूप में देखने लगते हैं. इस बात पर तो मु झे हंसी आती है. काफी लोगों का ऐजंपशन यही होता है. मेरे ओपिनियन में आप ऐक्टर हैं तो यह आप का काम है, आप की जौब है. उदाहरण के लिए रियल लाइफ में कुमकुम भाग्य की तनु से या किसी भी सीरियल के किसी नैगेटिव रोल से दूरदूर तक कोई लेनादेना नहीं है. मैं ने जितने भी रोल प्ले किए हैं सब से पहले उस रोल को सम झने की कोशिश करती हूं.

‘‘मैं सोचती हूं कि यह रोल जो मैं प्ले कर रही हूं उस की स्टोरी क्या है? वह किरदार ऐसे बिहेव क्यों कर रहा है? नैगेटिविटी क्यों फैला रहा है? इस के पीछे का रीजन क्या है? इस का माइंडसैट क्या है? इस की इच्छाएं क्या हैं? इस को जिंदगी में क्या नहीं मिला? क्या पाना चाहती है? कितनी लालची है? ये सारी चीजें सोच कर कि ये कैरेक्टर किस हिसाब से बात करेगा, किस हिसाब से बिहेव करेगा अपनी बौडी लैंग्वेज में, उस हिसाब से मैं कैरेक्टर को प्ले करने की कोशिश करती हूं. मैं सिर्फ ऐक्शन और कट के बीच में ही वह किरदार प्ले करती हूं. कट हो गया और मैं लीना बन जाती हूं.

‘‘एक बार ‘कुमकुम भाग्य’ के जी रिश्ते के अवार्ड फंक्शन में गई थी जहां कुछ फैंस ने मु झे पूरा घेर लिया था और बोलने लगे कि तुम ऐसी कैसे हो, तुम घर तोड़ना चाहती हो. मैं घिर कर केवल यही बोल रही थी कि यह सिर्फ पार्ट औफ द जौब है, मेरी ऐक्टिंग है. मैं वैसी नहीं हूं. उस वक्त मैं थोड़ी इमोशनल हो गई थी और यही बताने की कोशिश कर रही थी कि यह मैं केवल ऐक्टिंग कर रही हूं.’’

गुजराती ऐक्सैंट और शरमीलापन

लीना बताती हैं, ‘‘गुजराती ऐक्सैंट के कारण शुरुआत में थोड़ी परेशानी आई क्योंकि मैं जब हिंदी में बात करती थी तो भी मेरा कहीं न कहीं गुजराती ऐक्सैंट आ जाता था. इतने सालों की प्रैक्टिस से अब मेरा ऐक्सैंट नौर्मल गया है लेकिन स्टार्टिंग में बात करने में प्रौब्लम होती थी. यही नहीं ओपनली मैं सब से अच्छे से बात नहीं कर पाती थी. बहुत शरमा जाती थी.

‘‘मैं बहुत शरमीली थी. किसी को नमस्ते कहने में भी मेरी जान चली जाती थी. जब मैं ‘हिम्मतवाला’ शूट कर रही थी तो अजय देवगन को हैलो, गुड मौर्निंग भी नहीं बोल पाती थी. बहुत कौंशस और नर्वस रहती थी. मु झे काफी साल लगे खुद को यह सब सिखाने में वरना पहले मैं बहुत शरमीली थी. बहुत चुपचाप रहती थी. अगर कोई बात न करे तो पता भी न चले कि मेरे मुंह में जबान है.’’

‘माया 2’ में काम करने का बोल्ड फैसला

‘‘जब वैब सीरीज ‘माया 2’ के उस बोल्ड किरदार को निभाने के लिए मु झे फोन आया और स्टोरी बताई गई तो मैं खुद भी बहुत नर्वस थी कि मैं यह रोल प्ले कर पाऊंगी या नहीं. मैं ने थोड़ा समय लिया था सोचने के लिए. उस समय एक ऐक्ट्रैस के रूप में मैं ऐक्सप्लोर करना चाहती थी कि मैं क्याक्या कर सकती हूं. मैं अपने कंफर्ट जोन से निकलना चाहती थी.

‘‘मु झे लगता है अब अगर आप मु झ से पूछें कि फिर से ‘माया 2’ जैसा कुछ करना चाहती हूं तो मैं बोलूंगी कि नहीं करना चाहती पर उस वक्त मैं ऐक्सप्लोर करना चाहती थी और खुद को एज एन ऐक्टर चैलेंज देना चाहती थी. उस में बहुत बड़ा क्रैडिट हमारी डाइरैक्टर कृष्णा को जाता है जो फीमेल डाइरैक्टर थीं. जो कोऐक्टर्स थे उन सब को भी क्रैडिट जाता है. वह एक काइंड औफ ऐक्टिंग फील्ड में मेरा ट्रायल था कि मैं उस रोल को कितना जस्टिस दे सकती हूं.

‘‘मैं ने वह रोल इसलिए किया था कि एज एन ऐक्टर मैं खुद को चैलेंज करना चाहती थी. ऊपर से यह लेस्बियन रोल था सो बहुत ही चैलेंजिंग था. किसी को भी आप औन स्क्रीन किस कर रहे हो तो यह मेरे लिए बहुत चैलेंजिंग था.

‘‘जब मेरा फर्स्ट सीन था तो मैं काफी बार हंस पड़ी. फिर मैं ने और मेरी कोऐक्टर ने डिसाइड किया कि एक बार सीरियस होते हैं और खत्म करते हैं सीन क्योंकि बारबार यह नहीं करना है. औफ स्क्रीन तो बिलकुल ऐंजौय नहीं किया. मतलब वह काम था एज ए प्रोफैशनल. काम करो, पैक अप हुआ और अपनेअपने घर जाओ, अपनी जिंदगी जीयो. पर एज एन ऐक्टर यह रोल काफी चैलेंजिंग था.’’

फिटनैस और डाइटिंग

हर जगह फिट और ऐक्टिव नजर आने वाली लीना अपनी फिटनैस का खयाल कैसे रखती हैं, इस सवाल पर वे कहती हैं, ‘‘मैं तो कहूंगी कि मेरी यह फिटनैस गौड गिफ्टेड है क्योंकि न मैं ऐक्सरसाइज करती हूं और न प्रौपर डाइट फौलो करती हूं. मैं समोसे भी खाती हूं, पानीपूरी भी खाती हूं, मैं ने कभी अपने खाने पर रोक नहीं लगाई.

‘‘बीच में एक सर्टेन टाइम था जब ‘कुमकुम भाग्य’ के वक्त में मु झे लगता था कि थोड़ी सी डबल चिन आ गई है और मैं थोड़ी फैटी हो गई हूं. औन स्क्रीन आप थोड़े ऐक्स्ट्रा ही लगते हैं तो उस हिसाब से मैं ने 6 महीने डाइटिंग की थी. पर अपने पूरे कैरियर की जिंदगी में मैं ने सिर्फ वे 6 महीने ही डाइटिंग की होगी.’’

शिफ्ट टाइमिंग और थकान

‘‘पहले शूटिंग की कोई टाइमिंग नहीं होती थी और कोई रूल्स ज्यादा नहीं थे. तब ऐसा होता था कि मैं 18-18 घंटे शूट कर रही होती थी. कभीकभी 2-2, 3-3 दिन लगातार शूट करनी होती थी. पर पिछले कुछ सालों में रूल्स बैटर हो गए हैं. अब आप 12 घंटे ही काम करेंगे. जब से यह रूल आया है 12 घंटे ही काम होता है और बीच में लंच ब्रेक भी होता है. यह शैड्यूल बहुत थकाने वाला नहीं होता. जैसे 9 बजे से 9 बजे तक, 7 से 7 बजे तक या 2 से 2 बजे तक. वह डिपैंड करता है कि कैसे सीन्स हैं और बीच में थोड़ीबहुत रैस्ट करने को भी मिल जाती है.’’

नैपोटिज्म पर विचार

‘‘जब आप टैलीविजन करते हो तो मु झे लगता है कि कोई भी रिश्ता आप को काम नहीं दिला सकता. इंडस्ट्री के किसी व्यक्ति से रिश्ता या जानपहचान हो तो यह आप को केवल किसी एक औडिशन तक पहुंचा सकता है. उस के बाद चैनल सलैक्ट करता है. फिर आप की ऐक्टिंग काम आती है, आप का टैलेंट दिखता है. ये सारी चीजें हैं जो आप को लौंग टर्म में काम दिलवाती रहती हैं पर महज कोई एक रिश्ता या पहचान आप को काम नहीं दिला सकती.’’

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