इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक अच्छे जजमैंट में एक कांग्रेसी सांसद राकेश राठौर पर चल रहे मुकदमे कोखारिज कर दिया. मुकदमा उस की एक ऐक्स लवर ने रेप का केस बनाते हुए दायर किया था कि राकेश राठौर ने शादी का प्रौमिस कर के उस के साथ फिजिकल रिलेशन बनाए. हाई कोर्ट ने कहा कि ये संबंध तो ऐविडैंस के हिसाब से कंसैंसुअल थे और रेप का मामला नहीं बनता.
यह महिला राकेश राठौर को एक पौलिटिकल इवेंट में मिली थी और फिर दोनों की आपस में छनने लगी. दोनों मैरिड थे पर अपनेअपने स्पाउस से छिपा कर कनसैंट सहित सैक्स करते थे. राकेश राठौर ने इस लवर को पार्टी की जिला महिला यूनिट का अध्यक्ष भी बनवा दिया था. और न जाने कितने काम राकेश ने इस औरत के किए होंगे पर जब रिश्तों में खटास हो गई तो लवर ऐनिमी बन गई और उस ने नेता लवर को कोर्ट में घसीट लिया.
यह प्रोविजन जो पहले इंडियन पीनल कोड में था और अब भारतीय न्याय संहिता में भी है कि शादी का वादा कर के सैक्स करने को रेप कहा जाएगा अगर शादी नहीं की गई और सैक्स की कनसैंट ले भी ली गई थी, गलत है. 2 ऐडल्ट्स को यह झूठ न बोलना पड़े कि उन के साथ मैरिज का प्रौमिस करा गया था गलत है. अगर ऐडल्ट्स के बीच कनसैंट के साथ सैक्स हुआ था तो शादी का वादा था या नहीं, यह कानून की धारा ही गलत है.
सैक्स अपने सुख के लिए किया जाता है, यह सौदा नहीं है. शादी में भी नहीं है और शादी के बाहर भी नहीं है. 2 ऐडल्ट जब सैक्स करें और जबरदस्तीपू्रव न हो सके तो रेप का मामला बनता ही नहीं. कई मामलों में एक लड़की शिकायतें करती है कि उन के बीच 2 साल तक सैक्स संबंध बने पर शादी का वादा कर के इसलिए रेप हुआ, यह गलत ही है.
2 साल तक चलने वाली सैक्सुअल रिलेशनशिप पूरी तरह कनसैंट पर ही निर्भर होगी. रेप तो सिर्फ एक बार हो सकता है. अगर विक्टिम उस की शिकायत नहीं करती और फिर उसी पुरुष से मिलती है तो वह विक्टिम नहीं है, सैक्सुअल पार्टनर है.
सैक्स सुख को कानूनी काले सांचों में न डाला जाए. यह सारी लड़कियों के लिए जरूरी है. ऐसे 10-20 केस भी उन सब लड़कियों पर भारी पड़ते हैं जो ऐडल्ट होते हुए भी खुशी के लिए किसी पुरुष से सैक्स करना चाहती हैं. आदमी ऐसे मामलों में डरा रहता है कि न जाने कब लड़की शिकायत कर दे. सैक्स को फ्रीडम दो. यह नैचुरल राइट है- सही भी है, हक भी है.
