अमूमन बच्चों का सपना मैनेजमैंट, इंजीनियरिंग या फिर मैडिकल के क्षेत्र में भविष्य बनाने का होता है. ऐसे बच्चे आईआईटी और आईआईएम जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में जाने का सपना संजोते हैं. लेकिन यह सपना सच केवल कुछ बच्चों का ही होता है. कई बच्चे इन कालेजों की प्रवेश परीक्षा में भले ही उतने अंक प्राप्त न कर पाते हों जितने अंकों की जरूरत इन में प्रवेश हेतु होती हो लेकिन उन के वे अंक एक अच्छा प्राइवेट कालेज पाने के लिए पर्याप्त होते हैं.

बैंगलुरु निवासी आईटी प्रोफैशनल चित्रप्रिया गुप्ता कहती हैं, ‘‘भारत में अभिभावकों का एक पारंपरिक सपना होता है कि उन का बच्चा एक दिन किसी बड़े संस्थान से पढ़ कर निकलेगा

और एक बेहतरीन जौब उस के हाथ में होगी. खासतौर पर जिन बच्चों के मातापिता ने उन्हें इंजीनियर बनाने का ख्वाब देखा होता है उन के लिए आईआईटी सब से पहली प्राथमिकता बन जाता है. जबकि वर्तमान समय में आईआईटी की बराबरी के कई प्राइवेट कालेज खड़े हो चुके हैं. देश में ऐसे कई सफल प्रोफैशनल्स और व्यवसायी हैं, जो कभी आईआईटी और आईआईएम नहीं गए.’’

आइए, मैनेजमैंट, इंजीनियरिंग और मैडिकल से जुड़े कुछ ऐसे ही प्राइवेट कालेज के बारे में बात की जाए.

मैंनेजमैंट कालेज

वैसे तो मैंनेजमैंट कोर्स करने वाले हर बच्चे की इंडियन इंस्टिट्यूट औफ मैनेजमैंट में पढ़ने की ख्वाहिश होती है, लेकिन यदि इस संस्थान में ऐडमिशन न मिले तो दूसरे प्राइवेट कालेज भी हैं, जिन्हें सुनहरे भविष्य के लिए  चुना जा सकता है:

इंडियन इंस्टिट्यूट औफ बिजनैस: फाइनैंशियल टाइम्स की ग्लोबल एमबीए रैंकिंग के तहत 2016 में विश्व भर के मैनेजमैंट कालेजों में इसे 29वां स्थान प्राप्त हुआ है, यह एक ऐसा मैंनेजमैंट कालेज है, जहां न तो डिप्लोमा दिया जाता है और न ही डिग्री, बल्कि हर पाठ्यक्रम के लिए यहां बच्चों को सर्टिफिकेट दिया जाता है. यहां मौजूद कोर्स में पोस्ट ग्रैजुएट इन मैनेजमैंट, पोस्ट ग्रैजुएट इन मैनेजमैंट, सर्टिफिकेट फौर बिजनैस ऐनालिस्ट, सैंटर फौर एग्जीक्यूटिव, फैलोशिप इन मैनेजमैंट एवं मैनेजमैंट इन पब्लिक पौलिसी प्रमुख हैं, जिन में से मैनेजमैंट इन पब्लिक पौलिसी अपनेआप में भारत का पहला ऐसा कोर्स है, जिसे मिड कैरियर प्रोफैशनल्स के लिए डिजाइन किया गया है.  इन कोर्स के लिए जीमैट ऐग्जाम्स क्वालिफाई करना होता है. इस कालेज की 2 शाखाएं हैं. पहली हैदराबाद में और दूसरी मोहाली में.

जेवियर लेबर रिलेशन इंस्टिट्यूट: भारत में तीसरे नंबर पर सबसे अच्छे प्राइवेट कालेज की ख्याति इसी कालेज को प्राप्त है. जमशेदपुर स्थित इस मैनेजमैंट कालेज में फुलटाइम रैजीडैंशियल एमबीए, रिसर्च प्रोग्राम, मास्टर कोर्स और ऐग्जीक्यूटिव कोर्स विद्यार्थियों का भविष्य संवारने के लिए उपलब्ध हैं.

इस कालेज में ऐडमिशन के लिए जेवियर ऐप्टिट्यूट टैस्ट (जैट)देना होता है. जैट का स्कोर देश भर के 70 कालेजों में स्वीकार किया जाता है और उस के आधार पर बच्चों को अन्य प्राइवेट कालेजों में ऐडमिशन मिलता है.

नरसी मोंजी इंस्टिट्यूट औफ मैनेजमैंट स्टडीज: 2003 में यूजीसी द्वारा डीम्ड यूनिवर्सिटी घोषित किया जा चुका यह मैनेजमैंट कालेज रैंकिंग के हिसाब से भारत का छठवां प्राइवेट मैनेजमैंट कालेज है. यहां ऐडमिशन के लिए एनमैट परीक्षा उत्तीर्ण करनी होती है.

मैडिकल कालेज

बेहतरीन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने वाले देशों की सूची में भारत का नाम भी दर्ज है. इस का श्रेय देश में मौजूद विश्व के सब से अच्छे मैडिकल कालेजों को जाता है.

वैसे तो भारत में कई सरकारी मैडिकल कालेज हैं, लेकिन उन में प्रवेश आसान नहीं है. मगर चुनिंदा प्राइवेट मैडिकल कालेज भी हैं जिन की परीक्षा के लिए बच्चे तैयारी कर सकते हैं.

क्रिश्चियन मैडिकल कालेज ऐंड हौस्पिटल, विल्लौर: मैडिकल कालेजों की रैंकिंग में पहले नंबर पर इसी कालेज का नाम लिया जाता है. यह भारत का पहला किडनी ट्रांसप्लांट और बोनमैरो ट्रांसप्लांट करने वाला अस्पताल भी है. इन खूबियों के साथ ही यह कालेज नर्सिंग डिप्लोमा, बैचलर औफ साइंस, मास्टर औफ साइंस, पी.एच.डी, एमबीबीएस, एमएस, एमडी, डीएम, एमसीएच जैसे कोर्स की डिग्री भी देता है. इस कालेज में प्रवेश हेतु नैशनल ऐलिजिबिलिटी कम ऐट्रैंस टैस्ट देना होता है.

कस्तूरबा मैडिकल कालेज, मणिपाल: भारत में दूसरे नंबर का सबसे अच्छा प्राइवेट मैडिकल कालेज केएमसी मणिपाल है. यहां से मिली एमबीबीएस की डिग्री भारत में ही नहीं, बल्कि कई और देशों में भी महत्त्व रखती है.

इस के साथ ही यहां एशिया महाद्वीप की सब से बड़ी हैल्थ साइंस लाइब्रेरी भी है.

इस कालेज में दाखिला लेने के लिए आल इंडिया मणिपाल यूनिवर्सिटी औनलाइन ऐंट्रैंस टैस्ट देना होता है.

एआईएमएस, केरल: भारत के इस प्रसिद्ध अस्पताल में प्रिवैंटिव मैडिसिन, मैडिकल ऐजुकेशन और रिसर्च प्रोग्राम विद्यार्थियों को मैडिकल के क्षेत्र में उज्जवल भविष्य निर्माण करने हेतु कोर्स औफर किए जाते हैं. साथ ही यहां बीडीएस, बी. फार्मा जैसे कोर्स भी उपलब्ध हैं. यहां प्रवेश के लिए आल इंडिया अमृता ऐंट्रैंस ऐग्जाम क्वालिफाई करना जरूरी है.

इंजीनियरिंग कालेज

 जो बच्चे मैडिकल के क्षेत्र में रुचि नहीं रखते उनके लिए विज्ञान के माध्यम से ही तकनीक के क्षेत्र से जुड़ने का विकल्प खुला रहता है और इस में उन की मदद करते हैं इंजीनियरिंग इंस्टिट्यूट. भारत में सैंकड़ो इंजीनियरिंग इंस्टिट्यूट हैं, लेकिन इंजीनियर बनने की इच्छा रखने वाले बच्चों की मानसिकता आज भी आईआईटी और एचबीटीआई जैसे सरकारी कालेजों में दाखिला प्राप्त करने के इर्दगिर्द ही घूमती है. जबकि आज ऐसे कई प्राइवेट संस्थान हैं जो काबिल इंजीनियर्स तैयार कर रहे हैं.

ऐसे ही कुछ संस्थानों के नाम प्रस्तुत हैं:

इंडियन इंस्टिट्यूट औफ साइंस, बैंगलुरु: वैज्ञानिक रिसर्च एवं हायर ऐजुकेशन के लिए मशहूर आईआईएस कालेज एक डीम्ड यूनिर्वसिटी के रूप में अंडरग्रैजुएट स्टूडैंट्स के लिए बैचलर औफ साइंस में डिग्री कोर्स कराता है. यह कोर्स विज्ञान के क्षेत्र में भविष्य बनाने वाले बच्चों के लिए लौंचिंग पैड जैसा है, जो न केवल इंडस्ट्री में जौब दिलवाने, बल्कि ऐकैडेमिक्स में भी भविष्य आजमाने में सहायक होता है. इस कालेज में प्रवेश के लिए आईआईटीजेईई मेन और ऐडवांस में से किसी एक की परीक्षा देनी होती है.

बिड़ला इंस्टिट्यूट औफ टैक्नोलौजी: डीम्ड यूनिवर्सिटी के साथ ही यूएसए, यूके और कनाडा की यूनिवर्सिटीज के साथ इस का कोलैबरेशन हायर ऐजुकेशन का वर्ल्ड क्लास ऐकैडेमिक नैटवर्क बनाता है. सिविल,

कंप्यूटर, कैमिकल, मेकैनिकल, प्रोडक्शन, बायोटैक्नोलौजी जैसे विषयों में इंजीनियरिंग के लिए प्रसिद्ध इस कालेज में बिटसैट प्रवेश परीक्ष उत्तीर्ण करनी होती है.

हम यह नहीं कह रहे कि सरकारी संस्थानों में प्रवेश के लिए कोशिश न करें. हां, यदि इन संस्थानों में दाखिला न मिले तो बताए गए विकल्प भी कैरियर को नई दिशा देने में सहायक होंगे.

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