स्टूडैंट्स की डिमांड्स को लेकर पूरा देश बौयलिंग पौइंट पर आ गया है. पिछले 30 सालों में पढ़ाई पर पूजा का जो प्लास्टर पौराणिक लोगों ने समाज पर थोपा था उस से स्टूडैंट्स का 2 पीढि़यों से भारी नुकसान हुआ ही है, देश की औरतों को भी बड़ा नुकसान हुआ है. अफसोस है कि आज जो भी खुल कर बोला जा रहा है उस में यंग वूमन न के बराबर हैं.

राहुल गांधी ने पुणे में अगस्त में एक मीटिंग सिर्फ लड़कियों की जरूर बुलाई पर जब तक यह मूवमैंट न बने यह नहीं कहा जा सकता कि कौकरोच और स्टूडैंट प्रोटैस्टों का असर गर्ल और वूमन पावरलैसनैस पर पड़ेगा. राहुल गांधी ने खुल कर मनुस्मृति को अटैक किया है जो सवर्णों की औरतों को गुलाम बना कर शूद्रों और अछूतों की गिनती में रखता है चाहे वे ऊंची ट्विज, अपर कास्ट क्यों न हों, पर वह मैसेज घरघर पहुंचेगा, इस में डाउट है.

डाउट इसलिए है कि पढ़ीलिखी, अपर कास्ट की लड़कियों की ब्रेनवाशिंग इतनी कंप्लीट है कि वे पूजापाठ, व्रत, त्योहार को एंशेंट रिलीजस ऐक्टिविटी नहीं, लाइफस्टाइल मानती हैं और उसी में उन्हें मजा आता है, उसी में लाइफ परपज दिखता है.

सोशल मीडिया पर पढ़ीलिखी दिखने वाली लड़कियों के पोस्टों की भरमार है जो बताती है कि कौन से फैस्टिवल को कैसे मनाएं, कैसे पूजापाठ करें, कैसे फास्ट करें, क्या फास्ट के समय खाया जा सकता है, कौन से दिन हैं जब वैजिटेरियन खाना ही खाना है. कौन से दिनों में सैक्स प्रौहिबिटेड है.

ये सब रिस्ट्रिक्शंस ही औरतों को आगे बढ़ने से रोक रही हैं. उन्हें मेल डौमिनेशन में रहने को फोर्स कर रही हैं, उन के टेलैंट को छीन रही हैं, उन्हें सैकंड क्लास सिटीजन बना रही हैं. सदियों तक तो ऐजुकेशन ब्राह्मणों की औरतों के लिए बैन थी. वे संस्कृत श्लोक याद तक नहीं कर सकती थीं जबकि उन के घरों के मेल मैंबर्स उन्हें रातदिन रटते रहते थे. उन्हें तो बस लोकल डायलेक्ट में कोई आरती रटा दी जाती थी.

आज कौकरोच और स्टूडैंट प्रोटैस्टों को मेल डोमिनेशन से निकलना होगा, इसलिए नहीं कि डोमिनेशन बुरा है, इसलिए कि इकोनौमिक ग्रोथ, हैप्पीनैस, हैल्थ तभी आएगी जब सब लोग बराबर से इकोनौमी में कंट्रीब्यूट करें. अब जरूरत है छिपकली पार्टी की, कैट गैंग की (ये भी मेलफीमेल दोनों होते हैं पर आमतौर पर उन्हें फीमेल माना जाता है).

मेल डौमिनेटेड और मेल ब्रेनवाश्ड घरों की लड़कियां रिक्वेस्ट कर पाएंगी, डाउट है. अमेरिका का फेमिनिस्ट मूवमैंट अब डैड सा है. यूरोप भी पीछे है. चीन बिना रिलीजन के भी मेल डोमिनेटेड है. हम तो अभी 2000 साल पीछे हैं.

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