लेखक- राखी शील आढ्य
Emotional Story: डाक्टर अखिलेश ने स्टेथेस्कोप से मरीज की जांच करते हुए एक के बाद एक सवाल पूछे, ‘‘क्या हो रहा है चैंपियन, आज कुछ बताओगे मुझे? क्या तुम्हें कुछ याद आ रहा है? तुम्हारा नाम, तुम कहां रहते हो, अपने मातापिता या किसी और के बारे में? क्या तुम सुन रहे हो, मैं क्या कह रहा हूं?’’ डाक्टर अखिलेश की आवाज में उन की चिंता साफ झलक रही थी. उन्होंने मरीज की तरफ देखा, उस की आंखें हमेशा की तरह खाली थीं, उन में कोई हलचल नहीं थी. पलकें भी नहीं झपक रही थीं.
पिछले 4-5 दिनों से यही हो रहा था. ‘‘डाक्टर अखिलेश दिल्ली के जानेमाने न्यूरोसर्जन हैं. उन की चिकित्सा की ख्याति केवल यहां तक ही सीमित नहीं है बल्कि धीरेधीरे पूरे देश में फैल रही है. उन के पास आने वाले ज्यादातर मरीजों का इलाज सर्जिकल तरीकों से कम गैरसर्जिकल तरीकों से ठीक करने में उन का ज्यादा विश्वास है. अखिलेश का मानना है कि ज्यादातर तंत्रिका रोग मन की गहरी चोट से पैदा होते हैं, इसलिए अगर उस चोट को ठीक कर दिया जाए तो 90% रोग ठीक हो जाते हैं.
ऐसा नहीं है कि वे हमेशा इस तरीके से मरीजों को पूरी तरह से ठीक कर पाए हैं लेकिन वे ज्यादातर मामलों में सफल रहे हैं. उन क ी एक और खासीयत यह है कि जब वे किसी मरीज का इलाज अपने हाथ में लेते हैं तो जरूरत पड़ने पर खुद से पैसे दे कर भी मरीज को ठीक करने के लिए प्रतिबद्ध रहते हैं. यही कारण है कि चिकित्सा जगत के साथसाथ आम लोगों के बीच भी उन्होंने बहुत तेजी से नाम कमाया है. उन के मरीज उन्हें भगवान मानते हैं. बाहर गलियारे में वे कुछ देर टहलते रहे.
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