पाकीजा होटल के सभागार में महिला क्रांति दल द्वारा महिलाओं की एक सभा का आयोजन किया जा रहा था. सभा में चर्चा का विषय था- ‘महिला और मोबाइल.’ इस सभा में लगभग हर वर्ग, जाति और नस्ल की महिलाएं आमंत्रित थीं.

सत्ताधारी दल के विधायक भोलेराम की पत्नी सरोजनी को सभा की अध्यक्ष बनाया गया था. इस कारण होटल मालिक ने सभागार का कोई किराया नहीं लिया था. उद्योगपति सुरेंद्र की पत्नी आभा आज की सभा की विशिष्ट अतिथि थीं. जलपान की व्यवस्था उन की ओर से थी. महिला महाविद्यालय में समाजशास्त्र की हैड औफ डिपार्टमैंट मिसेज नलिनी आज के कार्यक्रम की मुख्य अतिथि थीं.

कार्यक्रम का संचालन माध्यमिक विद्यालय की मैडम विनोद बाला कर रही थीं. जबकि उन का सहयोग कर रही थीं जींस और टौप पहने मिस सलमा नसरीन.

अतिथि परिचय, स्वागत आदि औपचारिकताओं के बाद विनोद बाला ने मोना ब्यूटीपार्लर की मालकिन मोना को सर्वप्रथम आमंत्रित किया. ऐसा लग रहा था जैसे मोना सीधे ब्यूटीपार्लर से उठ कर चली आई हों. हाथ में मोबाइल लिए, कंधे पर हैंड बैग लटकाए और खुले केशों को लहराते हुए वे ऐसे चल रही थीं, जैसे रैंप पर चलने की तैयारी कर के आई हों. अभी वे माइक तक पहुंची भी नहीं थीं कि उन का मोबाइल घनघना उठा. उन्होंने मोबाइल को कान पर लगाते हुए कहा, ‘‘ओह, जस्ट ए मिनट. मैं अभी सभा में हूं. कुछ  देर बाद बात करूंगी.’’

मोना के इस व्यवहार से कुछ महिलाओं की हंसी छूट गई तो कुछ झुंझला उठीं. मंचासीन महिलाओं को तो यह बिलकुल भी अच्छा नहीं लगा. सभागार में बैठी नीता ने तड़का लगा ही दिया, ‘‘यह तो ऐसे बन रही है, जैसे इस के पास ही मोबाइल हो. सभा में क्यों स्विच औफ नहीं कर सकती.’’

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