life lessons : विधिअकसर कहती, ‘‘धरा तूने शादी कर के क्या तीर मार लिया मुझे देख ठाट से लिव इन में रहती हूं.’’
‘‘गगन ने बढि़या बैडरूम फ्लैट दे रखा है, कुक है, मेड है, वार्डरोब में ब्रैंडेड ड्रैसेज की लाइन लगी है. मुझे मालूम है कि वे शादीशुदा है उन के 2 बच्चे हैं लेकिन मुझे इस से क्या फर्क पड़ता है. वे हर हफ्ते 3 दिन मेरे साथ रहते हैं. जब आते हैं फाइव स्टार में डिनर करवाते हैं और मैं तो लाइफ को फुल मस्ती से ऐंजौय कर के जी रही हूं.’’
धरा अपलक विधि के चेहरे की ओर देख रही थी और उस की बातों को चुपचाप सुन रही थी.
‘‘यार तुम मस्त हो कर रहा करो. दूसरों की परवाह करना बंद कर दो, घर से बाहर निकलते ही सब लोगों को भूल जाया करो और केवल अपने लिए मस्त हो कर जीना शुरू कर दो. तभी तुम खुश रह सकती हो.’’
‘‘यार धरा, तुम तो बिलकुल पागल हो… तुम्हें तो शादी करने की जल्दी पड़ी थी, क्यों तुम तो मुझ से 1 ही साल छोटी थीं और तुम्हें शादी करे भी 4 साल पूरे हो गए. सही कह रही हूं न…’’ अपने बालों की लटें जो माथे पर ?ाल रही थीं उन्हें एक अदा के साथ हलका सा झटक कर वह मुसकरा उठी थी.
‘‘विधि, सच कहूं तो तुम कितने स्टाइल से रहती हो. तुझे इतना खुश देख मुझे तो तुम से जलन होने लगती है.’’
‘‘धरा, तुम भी कम हो क्या? कुदरत ने तुम्हें सुंदर रूप दिया है, तुम जिसे चाहो उस पर डोरे डाल कर उसे अपना दीवाना बना सकती हो… अच्छा भला कमा रही है. आखिर बता न क्या कमी है तुझ में… यार, लाइफ को ऐंजौय कर नहीं तो यह बात पक्की समझ लो कि रोती हुई पैदा हुई हो और रोतेरोते ही दुनिया से विदा हो जाओगी.
‘‘आखिर यह बताओ कि तुम कब तक रोती रहेगी कभी सास की बीमारी तो कभी ननद की शादी तो कभी देवर के लिए कोतवाली के चक्कर लगाती रहती है. रोज यही सब कहानी सुनसुन कर मैं तो बोर हो गई हूं. मु?ो यह समझ नहीं आता कि ऐसे दमघोटू माहौल में तू सांस कैसे ले पाती है… बाहर निकल अपनी इस मनहूसियत भरी जिंदगी से… चटपटी और मस्ती वाली बातें कर तो मुझे भी मजा आए. हमेशा रोनेधोने वाली बातें सुन कर मेरा तो मूड खराब हो जाता है. क्यों? तेरे औफिस में तेरे नए बौस रजत बहुत डैशिंग और स्मार्ट हैं न… उन पर लाइन मार… उन के साथ मस्ती कर… बस तेरी भी जिंदगी में खुशियां ही खुशियां छा जाएंगी.’’
‘‘क्या तुम उन्हें जानती हो?’’ शायद विधि ने उस के चेहरे पर उभर आए भावों को सम?ा लिया था, ‘‘अरे तेरा तो चेहरा ऐसे लाल हो रहा है. जैसे मैं ने तेरी चोरी पकड़ ली हो… मैं तो एक साधारण सी बात कह रही थी कि जब हम नौकरी करते हैं, पैसा कमा कर लाते हैं, रातदिन मेहनत करते हैं तो क्या अपने मन से कुछ भी कर नहीं सकते? अपनी जिंदगी को ऐंजौय नहीं कर सकते? क्या तुम ने सब की जिम्मेदारियों को निभाने का ठेका ले रखा है?
‘‘शादी ही तो की है लेकिन पूरे परिवार की, दुनियाभर की जिम्मेदारियों को निभाने की ठेका थोड़े ही लिया है. पति को निभाओ. इतना तक तो फिर भी ठीक है. लेकिन शादी का मतलब सारी दुनिया के लिए मरना थोड़े ही होता है. सम?ा लो कि तुम इस दुनिया में रोती हुई पैदा हुई हो और बिना कोई लुत्फ उठाए सारी जिंदगी रोतेरोते ही यहां से विदा हो जाएगी.’’
धरा रिकशे पर बैठी जरूर थी लेकिन उस का मनमस्तिष्क, विधि की चमचम करती डायमंड की एअररिंग्स, उस की स्टाइलिश ब्र्रैंडेड ड्रैस से आजाद नहीं हुआ था. वह उसी में खोई हुई थी.
विधि उस की बचपन की सहेली औफिस से निकलते समय जबतब मिल जाया करती थी क्योंकि दोनों का ही औफिस एक ही कैंपस में था. केवल बिल्डिंग अलग थी. उस को देखते ही उसे अपना मुंह छिपा लेने का मन करने लगता है. वह अपने बलबूते से कहां की कहां पहुंच गई थी और एक वह है कि आज भी उसी तरह की जिंदगी जी रही है. उस की कही हुई बातें उस के कानों मे गूंज रही थीं.
वह हमेशा कितनी मस्त हो कर बातें करती रहती है. बातबात पर ठहाके लगाती हुई वह कितनी सुंदर और खुश दिखती है. वह कितने आत्मविश्वास और गर्व से अपनी बातें उस से कह देती है. एक वह है, जो संकोच के मारे किसी से बात करने में ?ि?ाकने लगती है. बस पूरा दिन सुबह से शाम तक काम ही काम में उल?ा रहती है.
विधि कितने ठाट से अकेले फ्लैट में रहती है, गाड़ी से औफिस आती है. वह अपनी शर्तों पर नौकरी करती है. कोई बात उस के बेमन की हुई तो झट नौकरी बदल लेती है. एक वह है कि हर समय उसे पहली तारीख का इंतजार रहता है कि सैलरी आए तो मां को खर्चे के लिए दे.
विधि तो अपनी लंबीचौड़ी बातें कह कर वहां से अपनी गाड़ी से जा चुकी थी लेकिन उस के दिलदिमाग को ?ाक?ार कर रख गई थी. उस की बातें उसे उद्वेलित कर रही थीं. वह मन ही मन बहुत बेचैनी महसूस कर रही थी. विधि और उस का बचपन साथसाथ बीता है. उस के सामने तो उस की पूरी जीवनकुंडली खुली पड़ी हुई है. यह बात तो सौ प्रतिशत सच ही है कि उस ने पूरे जीवन में केवल अभाव ही अभाव देखे हैं. पहले भी वह अभाव में ही जी रही थी और आज भी वह अभाव में ही जी रही है.
उस की आंखों के समक्ष उस का अतीत सामने आ कर खड़ा हो गया था. पिता बचपन में ही एक दुर्घटना में उसे अनाथ कर गए थे. मजबूरी में मां ने एक छोटे से स्कूल में नौकरी कर ली थी. किसी तरह से रोटी का जुगाड़ हो जाता था. बचपन तो किसी तरह से बीत गया लेकिन युवावस्था में उस ने जैसे ही अपने कदम रखे कि आसपास के आवारा छोकरे उस के घर के आसपास मंडराने लगे थे.
घर पर मांबेटी अकेले ही तो रहती थीं. जब कई बार रातों को कुंडी खटकने की आवाज वे लोग सुन लेतीं तो दोनों मांबेटी दहशत के मारे रातभर सो नहीं पाती थीं. मां को तो स्कूल रोज जाना ही होता था. वह घर में कई बार जब अकेली रहती तो मन में डरती कि कोई छत से कूद कर न आ जाए.
समय बीतता रहा. वह कालेज में आ गई थी तो कालेज की फीस और दूसरे खर्चों के लिए वह एक औफिस में पार्टटाइम जौब करने लग गई.
औफिस का काम करते समय उस से अकसर गलतियां हो जाती थीं
क्योंकि कंप्यूटर के लिए वह नवसिखिया थी. इसलिए वहां काम करते समय रोज कोई न कोई मुश्किल खड़ी हो जाती थी या वह कोई गलती कर बैठती. उस समय वह अपने सीनियर कमल की सीट पर जाती और वह चाहे कितना भी जरूरी काम कर रहा होता, वह तुरंत उस की प्रौब्लम सौल्व कर देता. कई बार उस की सीट पर आता और उस की दिक्कत सुल?ा कर चुपचाप अपनी सीट पर चला जाता. वह सारा दिन अपना सिर ?ाकाए हुए अपने काम में चुपचाप लगा रहता था.
धरा को वह नवयुवक औरों से अलग लगता था. गेहुएं रंग का 5 फुट 10 इंच का सीधासादा साधारण सा लड़का, उस के दिल पर दस्तक देने लगा था. जब कभी औफिस में उसे रात हो जाती और कैब का टाइम निकल जाता तो वह उसे घर तक छोड़ने के लिए भी आ जाता. वह कई बार मां के आग्रह पर चाय पीने के लिए रुक जाया करता. धीरेधीरे न जाने कब कमल ने उस के दिल में जगह बना ली, वह जान भी नहीं पाई थी.
कमल मां को भी अच्छा लगने लगा था. मां ने ही कमल से उस की शादी के संदर्भ में बात की थी.
उस ने स्पष्ट शब्दों में कह दिया था कि उस के घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है और उस के ऊपर पारिवारिक जिम्मेदारियां भी काफी हैं इसलिए धरा को मैं वह सबकुछ नहीं दे पाऊंगा, जिस की वह पूरी तरह से हकदार है. वह सुंदर है, पढ़ीलिखी है और नौकरी कर रही है, उसे उस से कहीं अधिक अच्छा लड़का मिल जाएगा.
डबडबाई हुई आंखों से नजरें चुरा कर तेजी से उठ कर जाने लगा तो मां ने उस का हाथ जोर से पकड़ लिया था, उस की साफगोई ने मां का भी दिल छू लिया था. बोली, ‘‘देखो बेटा यदि तुम धरा का हाथ पकड़ लोगे तो मैं उस के भविष्य की तरफ से बिलकुल निश्चित हो कर मर सकूंगीं. मेरी जिंदगी का क्या ठिकाना. बीमार रहती हूं. कब ऊपर से बुलावा आ जाए. फिर तुम तो जानते ही हो कि हमारा महल्ला किस तरह का है और तुम तो यह भी जानते ही हो कि अकेली लड़की को जीवन में कितनी दुश्वारियां झेलनी पड़ती हैं. यहां के आवारा लड़के तो सीधीसादी धरा को जीने ही नहीं देंगे. मैं चैन से मर भी नहीं पाऊंगी,’’ और मां ने धरा के हाथ को पकड़ कर कमल के हाथों में पकड़ा दिया.
धरा को भी कमल की बांहों में उस समय अपना भविष्य सुरक्षित लग रहा था. कुछ महीनों के बाद सादे से समारोह में वह कमल की पत्नी बन कर उस के घर आ गई. परिवार में सब लोग खुश थे. कमल की मां बहू पा कर बहुत खुश थीं.
कमल ने थोड़े दिनों के बाद उसे कंप्यूटर कोर्स जौइन करवा दिया. उस ने टैली पर काम करना सीख लिया था. उस ने ज्यादा सैलरी के लिए नौकरी बदल ली थी. घर की आर्थिक स्थिति कुछ सुधर गई थी. तभी ननद का रिश्ता तय हो गया. उन की शादी और दहेज के कारण उन लोगों के सिर पर कर्ज हो गया.
मुश्किल घड़ी तब आई जब लगभग 2 साल के बाद सास को पैरालिसिस का अटैक हो गया और वे बैड पर आ गईं. देवर आवारा था, वह बाहर के लड़कों के साथ यहांवहां समय बिताया करता. 1-2 बार कमल ने कहसुन कर किसी प्राइवेट दुकान पर नौकरी लगवाई तो वह वहां टिका नहीं क्योंकि वहां काम करना पड़ता था.
सास की बीमारी के बाद घर के सारे कामों की जिम्मेदारी उस के सिर पर आ गई थी. सुबह उठते ही कमल उस के लिए चाय का कप ले कर हाजिर हो जाता, उसी एक कप चाय को पी कर वह काम में जुट जाती. झाड़ूबरतन, कपड़े करने के बाद जब तक वह सब का नाश्ता, टिफिन बना पाती तब तक घड़ी की सूई औफिस जाने का टाइम बताने लगती. यद्यपि कमल मां का सारा काम करने के बाद किचन में भी उस की मदद करता लेकिन वह तब तक थक कर निढाल हो चुकी होती. वह उलटीसीधी तैयार हो कर औफिस पहुंचती. फिर वहां के काम में जुट जाती.
शाम को लौट कर आती तो फिर घर के काम में जुटना पड़ता. वह अपनी इस मशीनी रंगहीन जिंदगी से कई बार परेशान हो कर उदासी से घिर जाती. फिर वह सोचती कि उसी ने तो अपने लिए इस तरह के जिंदगी को चुना है.
कमल औफिस के बाद एक जगह पार्टटाइम काम करने लगा था. तब से उसे लौटते समय घर के लिए सब्जी और दूसरे सामान वगैरह भी ले कर आना पड़ता था. चाहे छुट्टी हो या वर्किंग डे उस की लाइफ एकदम बोरिंग हो गई थी. घर के दमघोटू माहौल से उस का दम घुटने लगता.
धरा मन ही मन सोचती कि यह छुट्टी क्यों होती है. कम से कम औफिस के काम और वहां फ्रैंड्स के साथ वह खुल कर हंसीमजाक तो कर लेती है. जब से रजत सर बौस बन कर आए हैं. उसे औफिस अच्छा लगने लगा है. औफिस आ कर उसे घर की सारी चिंताओं से मुक्ति मिल जाती है.
कई बार उस के साथ की लड़कियां कहतीं कि 4 साल हो गए अब फैमिली के बारे में तो सोचो. ऐसे माहौल में फैमिली के बारे में तो वह कभी सोच ही नहीं सकती.
विधि से मुलाकात को 5-6 महीने बीत गए थे लेकिन उस का दिया गुरु मंत्र उस के सिर चढ़ कर बोल रहा था.
रजत सर जैसे औफिस में खुशबूदार ठंडी हवा के झोंके से आए थे. उन के पहले अमनजी तो बस अपने काम से काम रखते थे. लेकिन रजत सर के आते ही औफिस का
माहौल बदल गया था. अब लोग काम के साथ आपस में बातें और ठहाके भी लगाया करते थे और उन्मुक्त हो कर आपस में खूब हंसीमजाक भी करते थे.
धरा रजत सर की सैक्रेटरी बन गई थी, इसलिए उन के कैबिन में बैठने लगी थी.
एक दिन रजत सर ने धीरे से कहा था, ‘‘धरा तुम बहुत टैलेंटेड हो फ्यूचर में तुम
काफी आगे तक जा सकती हो.’’
यह सुन धरा एकबारगी चौंक उठी. वह धरा की जगह तुम कब से हो गई है. रजत सर उसे अच्छे लगते हैं लेकिन क्या वह भी उन्हें अच्छी लगती है. वह कई बार मन ही मन में सोचा करती. अब कई बार दोनों की नजरें आपस में टकरातीं तो रजत सर के होंठों पर मुसकराहट और आंखों में अपने लिए प्रशंसा के भाव दिख जाते.
अब उस ने अपनी ओर से भी ध्यान देना शुरू कर दिया था. उस ने कमल के साथ ही जा कर 4-5 जोड़ी कपड़े खरीद लिए थे.
कमल बोले भी थे, ‘‘चलो कम से कम तुम्हें अपनी सुध तो आई. हमेशा दूसरों का ही खयाल रखती रही हो. तुम खुश रहती हो तो मु?ो बहुत अच्छा लगता है.’’
धरा ने घर के काम के लिए एक मेड रख लिया था. अब वह कभी चेहरे पर उबटन लगा लेती तो कभी जल्दी में मलाई लगा लेती. उस के चेहरे पर खुशी का निखार दिखने लगा था. अब वह कई बार मन ही मन गुनगुना भी उठती.
धरा अब कई बार रजत सर की गाड़ी में क्लाइंट के साथ मीटिंग के लिए शहर में ही दूरदराज जाने लगी थी. सर की आरामदायक लग्जरी एसी गाड़ी में दरवाजा खोलते ही ठंडी हवा का खुशबूदार ?ांका आता तो उस का तनमन तरंगित हो उठता. रजत सर मीटिंग के बाद उसे कई बार होटल में लंच के लिए भी ले जाया करते. इतने बड़े होटल में जा कर वह रजत सर
के मुसकराते चेहरे, उन को तिरछी चितवन से निहारते देख, उन के महंगे पर्फ्यूम की मदमाती खुशबू से वह किसी स्वप्निल दुनिया में पहुंच जाया करती थी.
धरा मन ही मन सोचा करती कि काश ये पल यहीं रुक जाएं और वह रजत सर की बांहों के ?ाले में हमेशा के लिए सो जाए. अब कई बार उसे औफिस से लौटने में देर हो जाया करती थी.
कमल पहले घर आ जाते. एक दिन वे बोले, ‘‘आज तुम्हें बहुत देर हो गई?’’
बस वह चिंहुक पड़ी और चिढ़ कर बोली, ‘‘क्यों जब तुम रोज देर से आते हो तो? एक दिन मु?ो देर हो गई तो शिकायत कर रहे हो?’’
‘‘मैं तो इसलिए कह रहा था कि घर में अंधेरा पड़ा था. मैं आया तो लाइट जलाई, तुम चेंज करो मैं तुम्हारे लिए चाय बना देता हूं. खाना बाहर से ले आऊंगा?’’
कमल का स्वर बिलकुल सहज और नौर्मल था. कई बार वह सोचा करती कमल किस तरह का इंसान है. बड़ी बहन की शादी, मां की सेवा, औफिस का काम, भाई की आवारागर्दी लेकिन वे कभी किसी बात पर किसी से उलझते नहीं. ठंडे मन से सब काम करते रहते हैं.
जानेअनजाने धरा रजत सर और कमल की मन ही मन तुलना करने लगती. कहां रजत सर की बड़ी सी एसी गाड़ी और कहां कमल का पुराना स्कूटर…
रजत सर का नाम सोचते ही अंगअंग मुसकरा उठता और तनमन नई ऊर्जा से आलोकित हो उठता.
रजत सर ने जब उसे अपना टूर चार्ट दिया तो मुंबई जाने में अपना नाम देख वह चौंक पड़ी.
रजत बोले, ‘‘अगले मंडे की फ्लाइट है, 5 दिनों तक रुकना पड़ेगा. अपनी तैयारी कर लो.’’
रजत सर के साथ शहर से बाहर जाना… वह घबरा उठी थी.
‘‘ऐसे क्या देख रही हो? इस मीटिंग में तुम्हारा रहना जरूरी है क्योंकि तुम्हें ही वहां प्रेजैंटेशन देना होगा.’’
‘‘सुबह 5 बजे ड्राइवर तुम्हारे घर पर लेने आ जाएगा,’’ ‘‘ओके सर.’’
उस ने जल्दबाजी में कह तो दिया था
ओके लेकिन वह अभी भी सोच नहीं पा रही थी कि क्यों उस ने जाने के लिए हां कह दी. फिर एक तरफ वह मन ही मन खुशी से फूली नहीं समा रही थी दूसरी तरफ घबरा भी रही थी कि चलो इस दमघोटू माहौल से उसे कुछ दिनों के लिए आजादी तो मिलेगी लेकिन मन में प्रश्नचिह्न उठ खड़ा हुआ था. रजत सर के साथ तो बाहर हमेशा ईशान जाया करता था तो इस बार वह
उसे क्यों ले जाना चाहते हैं. अनेक प्रश्न चिह्न कांटों की तरह उस के मनमस्तिष्क में उग कर चुभ रहे थे.
‘‘किस सोच में पड़ गई हो?’’
‘‘कुछ नहीं सर…मैं चल रही हूं.’’
‘‘ओके… यह हुई न बात… यू आर नाइस ऐंड वाइज गर्ल. फ्यूचर में खूब आगे तक जाओगी.’’
धरा घर आई तो सपाट स्वर में कमल से बोली ,‘‘मु?ो बौस के साथ प्रैजेंटेशन के लिए मुंबई जाना पड़ेगा.’’
‘‘कोई बात नहीं, मैं मां को संभाल लूंगा. तुम चिंता मत करो.’’
‘‘चलो इस संडे को तुम्हारी शौपिंग करवा दूं, एक नया बैग पैक और कुछ ड्रैसेज, पर्स, कौस्मैटिक्स तमाम सामान कमल ने उस के लिए खरीद दिया.
कमल तो रात में गहरी नींद सो गया लेकिन धरा की आंखों से नींद उड़ गई थी कि क्या वह कमल के विश्वास को
धोखा नहीं दे रही है? उस के मन में ऊहापोह चल रही थी कि क्या वह इतनी नासमझ है कि जानती नहीं कि रजत सर क्यों उसे अपने साथ
ले जाना चाह रहे हैं? स्त्री की छठी इंद्रिय होती है जो एक निगाह में पुरुष के अंतर्मन में निहित वासना भरी निगाहों के भावों को पढ़ लेती है. क्या वह उन की निगाहों को नहीं पहचान पा रही है? यह तो सरासर केवल अपने को ?ाठलाने वाली बात है. वह सबकुछ जानतेबू?ाते क्यों अपनी बसीबसाई गृहस्थी का सर्वनाश करना चाह रही है? फिर न जाने कब निद्रा ने उसे अपने आगोश में ले लिया.
अगली सुबह जब कमल धरा के पास चाय का कप ले कर आया तो उस
के माथे पर चिंता की लकीरें और सूजी हुई लाल आंखों को देख कर ?ाट उस ने उस के माथे पर हाथ रख कर कहा, ‘‘क्या बात है? तुम्हारी तबीयत तो ठीक है? तुम्हें कल अपने बौस के साथ मुंबई फ्लाइट से जाना है न…’’
कमल की आंखों में अपने प्रति अनोखा विश्वास और प्यार गहराइयों से तैरता देख वह एकबारगी सहम उठी.
इतना प्यार करने वाले पति को धोखा दे कर भला वह क्या हासिल कर लेगी. मात्र कुछ समय परपुरुष की बांहों का सुख पाने के बाद
क्या उस की आत्मा जीवनभर उसे धिक्कारेगी नहीं? क्या वह यह सब कर के केवल एक छलावे के पीछे आंख बंद कर अंधाधुंध नहीं भागती जा रही है? जबकि उसे मालूम है कि इस का रिजल्ट उस के सिर की छत को छीन कर इसे बीच सड़क पर भी ला सकता है. परंतु वह करे तो भी क्या करे.
कमल के साथ जिंदगी में इस से ज्यादा कभी कुछ नहीं मिल सकेगा. यह तो उस ने बीते
4 सालों में अच्छी तरह से सम?ा लिया है. उस ने प्यार में पड़ कर अपनी मां के कहने पर भावुकता में बह कर 21 वर्ष में ही शादी का जोड़ा पहन कर आखिर क्या पा लिया सिवा जिम्मेदारियों के बो?ा को अपने कंधे पर संभालने के? इस तरह से तो वह असमय बूढ़ी हो जाएगी. फिर तो उस के हाथ कुछ भी नहीं रह जाएगा और वह केवल हाथ मलती रह जाएगी.
धरा रजत सर के आगोश में मुंबई की रंगीनियों का अनुभव करने, उसे जीने के लिए जरूरजरूर जाएगी. कम से कम जीवन में कुछ हसीन रातें तो बिता सके. अपने जीवन में आए इस अवसर को वह यों ही नहीं जाने देगी. कमल तो आज तक ढाबे के खाने के सिवा बस डोसा और इडली ही खिला सकते हैं.
‘‘धरा, आज औफिस से आते समय अपने लिए एक बड़ा पर्स जरूर ले लेना क्योंकि फ्लाइट में हैंड बैगेज में 7 किलोग्राम वेट अलाउड रहता है. तुम्हारे पास पैसे हैं कि नहीं?’’
तुम परेशान मत हो, मैं कोई सस्ते वाला ले लूंगी?’’
‘‘अरे नहीं तुम ढंग का पर्स लेना मैं अपने फ्रैंड से पैसे उधार ले लूंगा. आखिर फ्लाइट में बौस के साथ जा रही हो कुछ तो स्टैंडर्ड मैंटेन करना ही पड़ेगा,’’ और फिर कमल ने उसे पीछे से अपनी बांहों में भर लिया.
धरा के मन में ऊहापोह तो चल ही रही थी लेकिन फिर भी वह अपनी तैयारियों में जुटी हुई थी. आज सैटरडे की वजह से मौल में बहुत भीड़ थी. वह पर्स की शौप पर सस्ता सा पर्स खोज रही थी.
तभी अचानक एक सेल्स गर्ल पर उस की निगाह पड़ी, उस का चेहरा हूबहू विधि की तरह ही था. ‘इतना शृंगारविहीन उदास चेहरा विधि का तो किसी तरह से भी नहीं हो सकता,’ उस ने मन ही मन सोचा. विधि भला यहां कैसे हो सकती है… लेकिन वह अपनी निगाहें उस के चेहरे से हटा ही नहीं पा रही थी.
तभी विधि से उस की नजरें मिल गईं. उसे पहचानते ही उस ने इशारे से उसे बुलाया
और ड़बड़बाई आंखों से बोली,10 मिनट के लिए ठहरो 6 बजे मेरी यहां से ड्यूटी औफ होने वाली है, मुझे तुम्हें बहुत सारी बातें बतानी हैं. बाहर निकलते ही वह उस का हाथ पकड़ कर एक छोटी सी चाय की दुकान में ले गई.
वहां पहुंचते ही वह उस के गले से लिपट कर फूटफूट कर रो पड़ी, ‘‘धरा, तूने शादी कर के बहुत अच्छा किया. मैं गगन के साथ लिव इन को बहुत अच्छा समझती थी लेकिन एक
छोटी सी गलती ने मुझे कहीं का नहीं छोड़ा. मैं प्रैगनैंट हो गई थी. पहले 2 बार मैं अबौर्शन के दर्द से गुजर चुकी थी. उस के साथ ही अपने बच्चे की हत्या के अपराधबोध से मानसिक रूप से अत्यंत दुखी थी. इसलिए मैं ने गगन से शादी करने की जिद की और मातृत्व के सुख को पाना चाहा.’’
‘‘बस मेरी इसी एक इच्छा ने मुझ से सबकुछ छीन लिया,’’ गगन ने मुझे प्यार से ड्रिंक में कुछ मिला कर पिला दिया और फिर मैं उस की बांहों में रोज की तरह मदहोश हो कर सो गई लेकिन जब मेरी आंखें खुलीं और होश आया तब अपने को हौस्पिटल में पाया. जब मैं होश में आई तब महसूस हुआ कि मैं अपने शरीर के अंश को खो चुकी हूं..
‘‘हौस्पिटल में मेरी नजरें हर पल गगन को ढूंढ़ती रहती लेकिन उसे तो फोन तक बंद आ रहा था. 3 दिन बाद जब हौस्पिटल से मैं हताशनिराश दुखी मन से फ्लैट में पहुंची तो वहां के स्टाफ ने मुझे पहचानने से ही इनकार कर दिया था. मैं वहां से कोई भी सामान अपने साथ नहीं ले सकती थी क्योंकि वहां का सारा सामान गगन का ही था. अब न ही मेरे पास नौकरी थी न ही पैसा. जहां भी कहीं नौकरी मिलने की बात होती, गगन उस में अड़ंगा लगा देता. काफी दिनों बाद मुश्किलों से इस मौल में सेल्सगर्ल की नौकरी मिल पाई,’’ कह कर वह फिर से फफक पड़ी.
विधि के आंसू पोंछतेपोंछते धरा की खुद की आंखें भी छलछला उठी थीं. उस ने पर्स तो खरीद लिया पर उस में जो सब से पहले रखा उस से उस के मन की उलझन और ऊहापोह समाप्त हो चुकी थी. वह मुंबई जाएगी पर काम रजत सर की मरजी से नहीं कंपनी की जरूरत के अनुसार करेगी.
उस ने औटो से ही रजत सर को मैसेज कर दिया, ‘‘सर आई एम रैडी. प्लीज सैंड कैब टूमारो.’’
वह अपने घर जब आई तो गुनगुनाती हुई खाना बना रही थी तभी कमल आए और से पूछा, ‘‘तुम्हारी पैकिंग हो गई?’’
‘‘हां हो गई है,’’ कह कर वह हंस दी.
कमल सुबह अलार्म बजने के पहले ही उठ गया. ‘‘धरा, जल्दी उठो, तुम्हें लेने टैक्सी आ रही होगी.’’
धरा ने कमल को प्यार से अपने आगोश में ले कर उस पर चुंबनों की बौछार कर दी.
कैब में बैठने से पहले उस ने मन पक्का कर लिया कि वह नौकरी भी बचाएगी और पति भी. इसलिए नहीं कि वह कमल को पति परमेश्वर मान रही, इसलिए कि उस ने हंस कर, जान कर, कमल से शादी की थी और कमल से उसे कोई शिकायत नहीं थी. रजत उस का बौस है, उसे वह आदरसम्मान देगी पर उस की उंगलियों पर नाचेगी नहीं. रात में धरा पति की बांहों में खुशी से लिपट कर सो गई थी. आज उसे उस की बांहों में असीम सुकून का अनुभव हो रहा था.
अगली सुबह धरा फ्लाइट में थी पर ऐसे चली मानो वह सब जानती है. रजत से उस ने पर्याप्त दूरी बनाए रखी. रजत बारब उस से कुछ कहने के बहाने पास आता और वह बहाना बना कर अलग हो जाती.
