healthy skin : बढ़ी हुई ह्यूमिडिटी, बदलते टैंपरेचर और हवा में ज्यादा नमी से स्किन ज्यादा औयली और कभीकभी ब्रेकआउट होने का भी खतरा हो सकता है. स्किनकेयर प्रोडक्ट्स स्किन बैलेंस बनाए रखने में जरूरी भूमिका निभाते हैं लेकिन आयुर्वेद का मानना है कि हैल्दी दिखने वाली स्किन पर हमारे रोज के खाने का भी असर पड़ता है.
स्किन शरीर के अंदरूनी बैलेंस की ?ालक है. डाइट, डाइजैशन, लाइफस्टाइल की आदतें और मौसमी बदलाव ये सभी स्किन के दिखने और महसूस होने के तरीके में योगदान करते हैं. इसलिए मौनसून के दौरान जब माहौल में नमी ज्यादा होती है तो सही खाना चुनने से स्किन बैलेंस को अंदर से बनाए रखने में मदद मिलती है.
मौनसून के दौरान स्किन औयली क्यों हो जाती है
ह्यूमिडिटी स्किन औयलीनैस बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है. मौनसून के मौसम में स्किन पर पड़ने वाले प्रभाव:
हवा में नमी का लैल बढ़ जाना.
पसीना आसानी से नहीं निकलना.
स्किन पर तेल और गंदगी जमा हो जाना.
स्किन चिपचिपी हुई लगना.
आयुर्वेद इन बदलावों को 3 दोषों– वात, पित्त और कफ के बैलेंस से देखता है.
मौनसून का मौसम ऐसा समय माना जाता है जब डाइजैशन धीमा हो जाता है और शरीर को ज्यादा देखभाल की जरूरत हो सकती है. आयुर्वेद का मानना है कि डाइजैशन को सपोर्ट करने से पूरा बैलेंस बनाए रखने में मदद मिलती है, जिस का असर स्किन पर दिख सकता है.
डाइजैशन और स्किन के बीच आयुर्वेदिक कनैक्शन
आयुर्वेद एक बैलेंस्ड डाइजैस्टिव सिस्टम को बहुत महत्त्व देता है जो शरीर को उस के न्यूट्रिएंट्स को असरदार तरीके से प्रोसैस करने में मदद करता है. मौनसून के दौरान मौसम में बदलाव, ऐक्टिविटी लैवल में कमी और नमी बढ़ने की वजह से डाइजैशन ज्यादा सैंसिटिव हो सकता है.
इस मौसम में आयुर्वेदिक डाइट में इन चीजों पर ध्यान देना चाहिए:
ताजा बना खाना खाएं.
गरम और आसानी से पचने वाला खाना खाएं.
मौसमी चीजें खाएं.
बैलेंस्ड मसाले प्रयोग करें.
खाने का तय समय.
जब डाइजैशन को सपोर्ट मिलती है तो शरीर आसानी से बैलेंस बनाए रख पाता है.
मौनसून के दौरान बैलेंस्ड दिखने वाली स्किन के लिए फूड्स
आयुर्वेद बहुत ज्यादा डाइट लेने की सलाह नहीं देता है. इस के बजाय यह सोचसम?ा कर ऐसे औप्शन चुनने पर फोकस करता है जो डाइजैस्टिव हैल्थ के लिए अच्छे हों और सीधे स्किन की क्वालिटी पर असर डालते हों.
ताजा मौसमी खाना
मौसमी सब्जियां और फल पूरी सेहत को सपोर्ट करते हुए पोषण देते हैं.
पसंद करें
हलकी पकी सब्जियां जो डीप फ्राई न हों.
मौसम के हिसाब से ताजे फल.
कम तेल और कम मसालों वाला सादा घर का बना खाना.
ताजा खाना आमतौर पर ज्यादा प्रोसैस्ड औप्शन की तुलना में पचाने में आसान होता है.
पाचन के लिए मसाले
पारंपरिक भारतीय खाना पकाने में मसालों का इस्तेमाल न सिर्फस्वाद के लिए बल्कि सेहत के तरीकों के हिस्से के तौर पर भी किया जाता है. याद रखें, अगर आप खाना पकाने में नियमित इन मसालों को शामिल करती हैं तो भारतीय खाना पाचन तंत्र के लिए सबसे अच्छा है: अदरक, जीरा, धनिया, सौंफ, हलदी.
ये मसाले पारंपरिक रूप से सही मात्रा में और सही तरीके से इस्तेमाल करने पर पाचन को आराम देने के लिए जाने जाते हैं.
नमी से स्किन औयली लग सकती है लेकिन हाइड्रेशन जरूरी है. सही हाइड्रेशन के लिए ये आदतें अपनाएं:
ज्यादा पानी पीएं.
ताजे मौसमी फलों का जूस और स्मूदी ले.
हलके हर्बल ड्रिंक्स.
पौष्टिक सूप लें.
अच्छी तरह हाइड्रेटेड स्किन अकसर ज्यादा
हैल्दी और बैलेंस्ड दिखती है.
