मौडलिंग से अपने करियर की शुरुआत करने वाली मराठी एक्ट्रेस प्रणाली भालेराव मुंबई के मुलुंड की है. बचपन से ही उसे अभिनय का शौक था, जिसे साथ दिया उनकी मां शालिनी भालेराव और पिता संजय भालेराव ने. साधारण परिवार की प्रणाली ने अपनी पढ़ाई पूरी कर अभिनय की ओर मुड़ी. कई सालों तक मौडलिंग करने के बाद उसे एक कमर्शियल मराठी फिल्म ‘टकाटक’ मिली जिसमें उसने एक मध्यम परिवार की साधारण पत्नी की भूमिका निभाई है. फिल्म सफल रही और उसे आगे कई फिल्मों में काम करने का मौका भी मिल रहा है. कैसे उन्हें अपनी मंजिल मिली, आइये जानते है उन्ही से.

सवाल- इस फील्ड में आने की प्रेरणा कहां से मिली?

मेरे परिवार में कोई भी अभिनय के क्षेत्र में नहीं है. मैंने 2 साल पहले मौडलिंग करना शुरू कर दिया था. मैंने सोचा था कि थोड़े दिनों बाद में अभिनय का प्रशिक्षण लेकर एक्टिंग शुरू कर दूंगी, लेकिन अचानक ये फिल्म मिली और हिट भी हो गयी. बहुत अच्छा लगा कि मेरी पहली फिल्म सफल हुई है. मैंने कभी पहले अभिनय स्कूल या कौलेज में नहीं किया है. मैं एक साधारण लड़की हूं. मुलुंड के स्कूल कौलेज में ऐसी कोई सुविधा नहीं थी, लेकिन मैंने आसपास के लोगों को हमेशा औब्जर्ब किया है, कई फैशन शो देखें है और ये सब ग्लैमरस चीजें मुझे बहुत आकर्षित करती थी. इससे मुझे लगा कि मैं अभिनय के क्षेत्र में जा सकती हूं. फिर मैंने उसी अंदाज में अपने आप को ग्रूमिंग करना शुरू कर दिया, क्योंकि मेरी हाइट बहुत अधिक है, जिससे मुझे कई लोग मॉडलिंग के लिए कहते थे. उस समय मेरी वित्तीय अवस्था भी बहुत अच्छी नहीं था. इसलिए बहुत संघर्ष करने पड़े, पर धीरे-धीरे इस क्षेत्र में आ गयी. इस फिल्म का ब्रेक भी मुझे एक दोस्त की वजह से मिली.

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सवाल- आपने इस फिल्म में कई अन्तरंग दृश्य किये है, परिवार की प्रतिक्रिया इस विषय पर कैसी रही ?

जब मुझे कहानी बताई गयी थी, तभी निर्देशक ने कहानी की डिमांड को बता दिया था और मौडलिंग करते हुए बिकिनी पहनना कोई बड़ी बात नहीं थी. जब मेरा लुक टेस्ट हुआ तो मुझे थोडा डर लगा, पर मैंने उस लुक टेस्ट को भी बहुत एन्जौय किया है. बाद में पता चला कि निर्देशक को मेरा लुक पसंद आया और मुझे फिल्म मिली. परिवार को मैंने किसिंग सीन्स और बिकिनी सीन्स के बारें में बता दिया था. उन्होंने साहस दिया और कहा कि अगर आपको सीन्स सही लगती है, तो अवश्य करों. ये सही है कि परिवार का सहयोग होने से आप कुछ भी कर सकते है.

सवाल- इस फिल्म की कामाक्षी से आप अपने आप को कितना रिलेट कर पाती है?

मैं इस चरित्र से अपने आप को जोड़ पाती हूं, क्योंकि मैं भी किसी काम को आसानी से छोड़ती नहीं. जब तक पूरा न हो, लगी रहती हूं. इससे मेरा बोल्डनेस और आत्मविश्वास बढ़ा है. मैं बहुत मेहनत कर आगे बढ़ी हूं, मेरा कोई इंडस्ट्री में नहीं है. इसलिए मेहनत, लगन और धैर्य के साथ ही मैं यहाँ तक पहुंच पायी.

सवाल- किस तरह का संघर्ष रहा?

ग्रेजुएशन के बाद जब मैंने परिवार को मौडलिंग करने की बात कही तो उन्होंने पहले ना कही, लेकिन मेरी इच्छा को देखते हुए उन्होंने कहा कि मौडलिंग के लिए वे मुझे वित्तीय सहायता नहीं दे सकते. इसलिए मैंने पहले 1 साल तक जॉब किया. सैलरी से कुछ पैसे घर पर देने के बाद कुछ मैंने अपने लिए जमा किया. उससे ट्रेवल करना, ड्रेस खरीदना, औडिशन देना आदि करती थी. मैंने शूट्स देखकर मौडलिंग सीखी है.

सवाल- आगे क्या करने वाली है?

अभी कई फिल्में मुझे मिल रही है. इसके साथ-साथ कुछ फैशन शो भी कर रही हूं.

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सवाल- आप कितनी फैशनेबल है?

मैंने फैशन देख-देखकर सीखा है.मुझे फैशन और मेकअप बहुत पसंद है. मैं डिज़ाइनर दीपाली यादव और जाग्रुति के कपड़े बहुत पसंद करती हूँ.

सवाल- फूडी कितनी है?

मैं फिटनेस फ्रीक होने के साथ-साथ बहुत फूडी भी हूं. चिकन बिरयानी मुझे बहुत पसंद है. मैं अपना फिटनेस डाइट खुद बनाती हूं.

सवाल- महिलाओं को प्रेजेंटेबल होना कितना जरुरी होता है?

केवल ग्लैमर वर्ल्ड में ही नहीं. हर जगह व्यक्ति को प्रेजेंटेबल होना जरुरी है. कुछ लोगों को फौर्मल ड्रेस पहनना बोरिंग लगता है. जबकि ऐसा होना नहीं चाहिए.  प्रेजेंटेबल होने से सामने वाले की धारणा आपको देखकर बदलती है. आप कुछ अच्छा पा सकते है.

सवाल- क्या कभी आपको कास्टिंग काउच का सामना करना पड़ा?

एक दो बार ऑफर हुई थी, लेकिन मुझे समझ में आया और मैंने मना कर दिया. जब मैं एक्टिंग सीख रही थी तो एक इंसान ने मुझे एक हिंदी प्ले में कास्ट किया पर थोड़े दिनों बाद निर्देशक से मिलने के लिए कहा. तब मैंने सीधा ना कह दिया.

सवाल- मौनसून को कैसे एन्जौय करती है?

बारिश शुरू होने से पूरा वातावरण बदल जाता है और एक फ्रेश अनुभव होता है. मेरी इच्छा है कि मैं बारिश में एक गाना शूट करूं. बारिश का मौसम बहुत ही रोमांटिक होता है.

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सवाल- सोशल वर्क जिसे आप करना चाहती है?

मैंने कॉलेज से ही वातावरण पर काम करना शुरू कर दिया है. इसके अलावा ‘सेवा और सहयोग’ नामक संस्था से जुडी हुई हूँ. इसके अलावा मैं औरतों की समस्याओं को अधिक देखती हूँ. फिल्म में भी ऐसी ही संदेश देने की कोशिश की गयी है, क्योंकि महिलाओं के साथ बहुत अत्याचार और उत्पीडन की घटनाएं होती है, जिसे वे किसी के आगे बता नहीं पाती. उनके लिए जागरूकता फैलानी है.

सवाल- आपको लड़की होने पर किसी प्रकार का अफसोस है?

जरुर है, क्योंकि मेरा परिवार परम्परागत विचार रखता है. हर कोई लड़की की गलती देखता है .लड़के की नहीं. समाज भी ऐसा ही है. शुरू-शुरू में बहुत उदास होती थी पर अब नहीं,क्योंकि आज मुझे मेरे पिता लड़का मानते है.

सवाल- गृहशोभिका की महिलाओं के लिए मेसेज क्या है?

जो सही लगे, आप अवश्य करें. घर पर बैठे न रहे, काम करते रहे.

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