फिल्म ‘परिणीता’ से हिंदी सिनेमा जगत में डेब्यू करने वाली एक्ट्रेस विद्या बालन से कोई अपरिचित नहीं. उन्होंने फिल्मों के अलावा टीवी धारावाहिक ‘हम पांच’ में भी काम किया है. हालांकि उनकी कुछ फिल्में सफल तो कुछ असफल रही,पर उन्होंने इसे अधिक महत्व नहीं दिया. वह फिल्म के प्रोसेस को हमेशा एन्जॉय करती है और हर नयी फिल्म उनके लिए चुनौती लाती है. 40 की उम्र में भी वह उसी उमंग और ख़ुशी से काम करती है. पिछले 10 सालों से वह हर साल एक फिल्म करती है. उनकी फिटनेस का राज उनका हमेशा खुश रहना है. उनकी फिल्म ‘मिशन मंगल’ रिलीज पर है, जिसे लेकर वह बहुत उत्साहित है. आइए जानें कैसे उन्होंने अपनी जर्नी तय की.

सवाल- फिल्म ‘मिशन मंगल’ में इतनी सारी एक्ट्रेसेस के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?

वो भी एक मिशन ही था. मैंने कई एक्ट्रेसेस के साथ फिल्म ‘बेगम जान’ में भी अभिनय किया था,पर ये अलग था, इसमें सभी एक्ट्रेसेस अपनी भूमिका से पूरी तरह वाकिफ थी. मैं इनमें से कईयों को जानती तक नहीं थी, लेकिन ये कभी लगा नहीं. इसके अलावा अक्षय कुमार के साथ मैं पहले भी काम कर चुकी हूं, लेकिन इस फिल्म में मुझे फिर से सालों बाद अभिनय करने का मौका मिला. एक अच्छा ये भी था कि अक्षय के घर का खाना रोज सेट पर आता था.

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सवाल- अधिकतर कहा जाता है कि 40 की उम्र के बाद जिंदगी शुरू होती है और आप नयी-नयी फिल्में कर भी रही है, आप अपनी जीवन शैली से कितनी खुश है?

ये सही है कि मैं 40 की हो चुकी हूं और पहले से कहीं अधिक मैं अपनी जिंदगी से खुश हूं. मेरे अंदर उम्र और मैच्युरिटी से जो बदलाव आये है, उससे मैं अपने आपमें अच्छा महसूस कर रही हूं. लाइफ बहुत ही साधारण हो चुकी है और छोटी-छोटी चीजों से मुझे खुशियां मिलने लगी है. ये सही है कि महिलाएं मेनोपोज के बाद इमोशनल हो जाती है, क्योंकि उन्हें हार्मोनल बदलाव से गुजरना पड़ता है, इसे कोई समझ नहीं पाता. पहले महिलाएं अपने इस बदलाव को किसी से शेयर भी नहीं कर पाती थी, जिससे कई बार वे मानसिक तनाव में चली जाती थी,पर अब महिलाएं इस बारे में खुलकर बात करने लगी है, जिससे उन्हें इससे गुजरने में मुश्किल नहीं होती और आज पुरुष भी उनके इस बात को समझते है.

सवाल- विद्या आप जब भी कोई लूज कपड़ा पहनती है, तो लोग कहने लगते है कि विद्या प्रेग्नेंट है, इन खबरों को आप कैसे लेती है?

मुझे वे लोग उल्लू के पट्ठे लगते है, क्योंकि मैं कभी भी पतली नहीं थी. हर बार मेरे जरा सी पेट देखने पर अगर आपको लगता है कि मैं प्रेग्नेंट हूं, फिर तो मैं जिंदगी भर के लिए प्रेग्नेंट हूं.

सवाल- पहले की हिरोइनें जीरो फिगर न होने पर भी वे सफल एक्ट्रेस थी, आज जीरो फिगर की  होड़ है, इस बारें में आपकी सोच क्या है?

पहले से एक धारणा लोगों में थी कि लड़की को हमेशा जवान रहना चाहिए,तभी वह किसी पुरुष के आकर्षण का केंद्र बन सकती है. पुराने ज़माने में राजा रजवाड़े भी इसी को ध्यान में रखते हुए कई शादियाँ करते थे. असल में तब महिलाएं एक उम्र तक बच्चे के पालन-पोषण में अपनी जिंदगी बिता देती थी, लेकिन अब जमाना बदला है. आज महिलाएं जब करती है और वे अपनी एक अलग पहचान बनाती है. वे देर से शादी करती है और अपनी इच्छानुसार बच्चे पैदा करती है. ये बदलाव आया है. मैं अपनी इस शारीरिक बनावट से काफी खुश हूं और एक अच्छी शादीशुदा जिंदगी बिता रही हूं.

सवाल- आपने कभी अपने लुक पर अधिक काम नहीं किया, क्या आपको किसी प्रकार की रिजेक्शन का डर नहीं था?

मैंने कुछ सालों पहले ‘अमेरिकन ब्यूटी’ एक फिल्म देखी थी, जिसमें कही गयी एक लाइन मुझे हमेशा याद  रही. उसमें कहा गया था कि आपका काम ही आपकी ब्यूटी है, आपकी लुक नहीं. इसके अलावा मेरे घर पर हमेशा मुझे ब्यूटीफुल एहसास करवाया गया. इसलिए मुझे कभी लगा नहीं कि मैं सुंदर नहीं. कैमरे पर किसी भी भूमिका को निभाना मेरे लिए सुंदर दिखने से अधिक चुनौतीपूर्ण उसकी एक्टिंग रही है. जो भी भूमिका मैंने निभाई, उससे मैंने हमेशा अपने आप को जोड़ा है.

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सवाल- आजकल इंडस्ट्री में काफी बदलाव हीरोइनों को लेकर आया है, केवल सुंदर होना ही मापदंड नहीं, अभिनय भी आना जरुरी है, आपकी राय क्या है?

मैंने पिछले 10 साल से महिला प्रधान फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया है. कुछ फिल्में सफल तो कुछ असफल रही. मैंने कभी इस बारें में अधिक नहीं सोचा, क्योंकि मैं 26 साल की उम्र में इंडस्ट्री में एंट्री की थी, जबकि तबतक अधिकतर हीरोइनें इंडस्ट्री से आउट हो जाती है. मेरे हिसाब से अगर आप खुद से प्यार करें और अभिनय करने की इच्छा रखते है ,तो आपको कोई भी रोक नहीं सकता.

सवाल- वैज्ञानिक क्षेत्र में महिलाओं का नाम उभर कर सामने कम आता है, इसमें कमी कहाँ और किससे हो रही है? महिलाओं के लिए आपकी मेसेज क्या है?

विज्ञान में महिलाएं पहले से है और अच्छा काम भी कर रही है, पर मिशन की बात आने पर वे झिझक कर पीछे रह जाती है, इसलिए पुरुष हावी हो जाते है. मुझे ये जानकर ख़ुशी हुई कि आज इसरों में 40 प्रतिशत महिलाएं है. लडकियां आजकल हर क्षेत्र में है और आगे आने में संकोच नहीं करते. अब सबको समझना पड़ेगा कि महिलाएं केवल खूबसूरती के लिए नहीं,बल्कि काम भी अच्छा करती है. अधिक आगे बढ़ने के लिए पुरुषों को भी उन्हें सहयोग देने की जरुरत है और महिलाओं को खुद भी बिना संकोच के अपनी कामयाबी को शेयर करने की आवश्यकता है.

सवाल- फिल्म के चलने और न चलने का प्रेशर आप पर कितन रहता है?

फिल्म ‘कहानी’ के बाद द डर्टी पिक्चर्स हिट होने पर मैं उसका प्रेशर लेने लगी थी.उसके बाद लगातार फिल्मों के फ्लौप होने से वह निकल गया. अब कुछ नहीं लगता. फिल्म के चलने और न चलने की क्रेडिट मैं नहीं ले सकती. मैं फिल्म का हिस्सा हूं और सब कुछ ठीक न होने पर ही फिल्म चलती है.

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