Healthy relationship : शीना और सौरभ का रिश्ता 3 साल पुराना था लेकिन फिर भी बहुत सी बातों से वे अब भी जानबूझ कर अनजान बने हुए थे या कहें गौर नहीं करते थे. जैसे शीना का बंगाली समाज से होना और सौरभ का मराठी समाज से. शीना और उस के घर वाले अपनी संस्कृति को ले कर बहुत दृढ़ सोच रखते थे, वहीं सौरभ के घर वाले भी पुरानी सोच का दायरा बनाए हुए थे.
शीना और सौरभ दोनों को पता था कि उन के घर वाले दोनों के रिश्ते को मंजूरी नहीं देंगे फिर भी दोनों ने 3 साल साथ गुजारे और जब आज शादी का मोड़ आया तो सौरभ तो एक बार को हिम्मत कर गया मगर शीना अपना कल्चरल सर्किल पार नहीं कर पाई. नतीजा वही हुआ जो तय था उन का ब्रेकअप जो दोनों के लिए एक तलाक जैसा ट्रौमा ही था.
आज की रिलेशनशिप में एक कपल आपस में इतना इन्वौल्व होते हैं कि वह एक तरह की शादी ही है. एक दूसरे की पसंद न पसंद ही नहीं बल्कि चौबीसों घंटों की दिनचर्या, उठानाबैठाना, सोनाखाना हर चीज पर एकदूसरे की नजर और ध्यान रहता है. इमोशन से ले कर कपड़े तक आपस में शेयर किए होते हैं. यह पूरा वैवाहिक रिश्ता सा ही है, जिस पर कोई कानूनी मुहर नहीं.
हर वक्त किसी के लिए अवेलेबल और डिवोटेड रहने के बाद का अलगाव बहुत पीड़ा देता है. जिस वजह से इस रिश्ते का टूटना एक तलाकशुदा जीवन जीने जैसा लगता है. इसलिए जो रिश्ता बनाया है उसे निभाने की कोशिश भी करें नहीं तो हर ब्रेअअप के कई साइड इफैक्ट्स में से 2 को ?ोलना तो तय है ही :
साइकोलौजिकल ट्रौमा : जब आप किसी के साथ बहुत समय तक रहते हैं तो आप को उस के साथ की आदत और जरूरत हो जाती है, जिसे आप के लिए एकदम से भुलाना या खत्म करना मुमकिन नहीं होता है. यह कोशिश करना ही आप को एक मानसिक पीड़ा या कहें साइकोलौजिकल ट्रौमा देने लगता है. इंसान डिप्रैशन, अकेलेपन, ऐंग्जाइटी आदि का शिकार बन जाता है.
डैमेज सेम सोशल सर्किल: जब 2 लोग साथ आते हैं तो उन का सोशल सर्किल भी जुड़ जाता है. जैसे आप के बौयफ्रैंड के दोस्त आप के दोस्त हो जाते हैं, आप के दोस्त उस के दोस्त बनते हैं. आप सब का अब साथ में उठनाबैठना होता है. लेकिन ब्रेकअप के बाद वहीं फ्रैंड सर्किल आप को एक पिंजरे सा लगता है. उन दोस्तों के बीच बैठना मुश्किल हो जाता है क्योंकि वे दोस्त आप के ऐक्स के दोस्त होते हैं और आप के दोस्त भी अब आप के ऐक्स के दोस्त होते हैं.
साथ ही आप का ऐक्स भी वहीं उठताबैठता है तो अब उसे आप कितना अवौइड करेंगी. उसे अवौइड करने के चक्कर में कई दोस्तों से दूर होना पड़ेगा. इसलिए कोई भी कमिटमैंट करने से पहले, कोई भी रिश्ता बनाने से पहले, दोस्ती को एक नया मोड़ देने से पहले कुछ बातों पर विशेष ध्यान दें:
कमिट करने से पहले विचार करें
किसी भी रिलेशनशिप में बातों और वादों का बहुत महत्त्व होता है. इन पर रिश्तें की नींव भी रखी जाती है इसलिए किसी को भी हां कहने से पहले रिलेशनशिप में कमिटमैंट देने से पहले विचारें. विचारें कि यह रिलेशनशिप आप के लिए सही है या नहीं?
विचारें कि इस रिश्ते का भविष्य है या नहीं? इस रिश्ते की उम्र कहीं सिर्फ आकर्षण पर तो नहीं टिकी? विचारें कि इस रिश्ते में कितनी सच्चाई और कितनी गंभीरता है? विचारें कि सामने वाला कितना सच्चा और काबिल है? विचारें कि कहीं 2 दिन की मुहब्बत उम्रभर का जंजाल तो नहीं बन सकती? ऐसी बहुत बातें हैं जो किसी को भी किसी रिलेशन में पड़ने से पहले 10 बार सोचनी चाहिए.
फैमिली बैकग्राउंड जानें
अधिकतर देखा गया है कि बौयफ्रैंड के साथ सब सही चलता है लेकिन उस के परिवार के साथ कुछ देर बैठना भी मुश्किल होता है. आप की और उस के परिवार की आइडियोलौजी, पसंद, रहनसहन, बोलीभाषा में बहुत फर्क होता
है और यही फर्क एक अड़चन या सजा बन जाता है जब यहां जातधर्म की ऊंचनीच भी आ जाए. कई बार यही अड़चन रिलेशनशिप को शादी से पहले कुचल देती है या शादी के बाद.
इसलिए इस तर्क को समझते हुए कमिटमैंट का फैसला करें.
अपने घर वालों की अपेक्षा भी समझें
कई बार रिश्तों में घर वाले धर्मजात को महत्त्व नहीं देते लेकिन वे आप के चुने गए साथी में कुछ विशेष देखना चाहते हैं. जैसे कोई बड़ी पढ़ाई, जौब, वैल्यूज, मैच्योरिटी आदि. इसलिए उन के इस मानदंड को समझते हुए भी कोई निर्णय लें.
एक ही बौयफ्रैंड होना चाहिए
बौयफ्रैंड हो या गर्लफ्रैंड कोई व्यक्ति अगर किसी भी रिलेशन में है तो उसे एक ही साथी रखना चाहिए. यह नहीं कि वह लोगों का औप्शन ले कर चले कि इस से बात नहीं जमेगी तो दूसरे तो हैं ही. किसी भी रिश्ते में ईमानदारी बहुत पहले आती है इसलिए उस की महत्ता को सम?ों और किसी एक के साथ ही जीनेमरने के वादे करें न कि सामूहिक गीत गाते चलें.
भविष्य को महत्ता दें
रिलेशनशिप में जाने से पहले अपने और उस रिश्ते का भविष्य देखें और जांचें. अभी आप को सबकुछ अच्छा और सुहाना दिख रहा है इस का मतलब यह नहीं कि साल 2 साल बाद भी यह सुहाना ही रहे. इसलिए भविष्य में किसी भी घटना, अड़चन, ऊंचनीच का जोखिम उठा सको, उस में साथ निभा सको और जहां अपना खुद भी भविष्य उज्ज्वल देख सको सिर्फ उसी रिश्ते में आगे बढ़ो.
यदि आप इतना सब नहीं कर सकते या इन बातों को महत्त्व नहीं दे सकते तो सिर्फ दोस्ती तक ही सीमित रहे क्योंकि आज या कल इन बातों की गंभीरता अपनेआप रिश्तों में जगह कर लेगी और इसे समय पर नहीं भरा जाए तो यह अलगाव का कारण भी बन जाएगी. इसलिए इन बातों को महत्त्व दें, इन्हें गंभीरता से लें. अगर आप को कोई समाधान नजर नहीं आ रहा तो अपनों से बात करें, दोस्तों की सलाह लें और यहां बहुत जरूरी है कि सोशल मीडिया के ?ाठे ज्ञान से दूर रहें. यहां पर जो रिलेशनशिप और लव गुरु हैं, वे कोई एडवाइजर या प्रोफैशनल नहीं हैं. वे सिर्फ एक कंटेंट मेकर हैं जो हर हाल में सिर्फ वायरल और ट्रेंडिंग होना चाहते हैं.
अगर आप को बाहरी सलाह या नौलेज लेनी ही है तो किताबों और पत्रिकाओं का रुख करें. आज दुनियाभर में रिलेशनशिप को ले कर लाखों किताबें हैं जो अनुभवी और प्रोफैशनल हैल्पर काउंसलर ने लिखी हैं. साथ ही पत्रिकाओं या मैगजीन अथवा न्यूजपेपर में बहुत सी रिलेशनशिप टिप्स और एडवाइस होती हैं, लोगों के सवालजवाब होते हैं जो अनुभवी ऐक्सपर्ट्स और लेखकों द्वारा वास्तविक जीवन देख कर लिखे गए होते हैं न कि किसी बनावटी ट्रेंडिंग रील पर.
