कब जागरूक होगी जनता

महाराष्ट्र में सत्ता परिवर्तन जिस में शिव सेना के महाअगाड़ी विकास गठबंधन के उद्धव ठाकरे को डिफैक्शनों के जरिए जटा दिया गया और अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का फैसला कि उन के संविधान में औरतों का कोई गर्भपात का संवैधानिक अधिकार नहीं है, आम भारतीय घरों पर क्या कोई असर डालता है.

ये मामले कानूनी, राजनीतिक या पार्टीबाजी के हैं और एक आम घर, घरवाली, उस के बच्चों, रिश्तेदारों को इन 2 घटनाओं के बारे में ङ्क्षचता तो दूर इन के बारे मं जानने या सोचने की भी जरूरत नहीं है. काश यह सही होता. इन दोनों मामलों का भारत के भी हर घर पर असर पड़ेगा, अमेरिका के हर घर पर भी.

महाराष्ट्र का सत्ता परिवर्तन एक बार फिर याद दिलाता है कि आप किसी पर भी भरोसा नहीं कर सकते. वह यह भी साफ करता है कि जो अपने नेता, मालिक, मुखिया की पीठ में छुरा भौंकता है जरूरी नहीं अपराधी हो, वह महान हो सकता है, सुग्रीव की तरह भाई बाली को दगा देने वाला या विभीषण की तरह रावण से बेइमानी करने वाला. इस सत्ता बदलाव पर बहुत से चैनलों ने तालियां बजाईं, बहुत से नेताओं ने बधाई दी, जिस ने अपने नेता उद्धव ठाकरे के खिलाफ बगावत की उसे लड्डू खिलाए.

अगर बगावत सही है. अपने नेता के खिलाफ साजिश करना ठीक है तो माझी का ननद के खिलाफ साजिश करने मंं क्या हर्ज है, छोटे भाई का बड़े भाई को धोखा देकर पिता की सारी संपत्ति हड़प लेने में क्या बुराई है, युवा पत्नी को प्रैफ्रेंस देकर मांबाप को घर से निकाल देने में क्या गलत है. जब नेता किसी को धोखा दे सकते हैं भाई, बहन, रिश्तेदार, बेटे, बेटी क्यों नहीं दे सकते. उद्देश्य तो अपना फायदा ढूंढऩा है जो एकनाथ ङ्क्षशदे को मिल गया जो महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बन गए.

यथा राजा तथा प्रजा पुरानी फिसलती है. जो हमारे महान नेताओं ने कर्नाटक, मध्य प्रदेश, गोवा, अरुणाचल प्रदेश में किया तो हम अपने घरों में क्यों नहीं कर सकते. राजाओं के पदचिह्नïों पर ही तो प्रजा चलेगी.

ऐसा ही अमेरिका में किया गया है. एक औरत के वहा गया है कि उस का अपने बदन पर कोई अधिकार नहीं क्योंकि संविधान में, जो तब लिखा गया जब गर्भपात की तकनीक नहीं थी, नया है तो गलत ही होगा. कल को औरतों को पीटना भी अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट सही ठहरा सकती है क्योंकि धर्म कहता है कि पतिपत्नी को पीट सकता है और संविधान में पत्नी को स्पष्ट नहीं दिया गया कि नहीं पीट सकते. सुप्रीम कोर्ट कह सकती है  कि बाइबल के हिसाब से चलो तो जो फादर ने कहा वही अकेला सच है और चर्च का फादर पिटने वाली को यही कहता है कि पीटने वालों को ईश्वर दंड देगा, तुम भुगतते रहो. सुप्रीम कोर्ट यह भी कह सकता है कि अमेरिकी संविधान में रेप के खिलाफ कुछ नहीं है और इसलिए रेप भी हो सकते हैं.

इस तरह की बेतुकी बातें अदालतें नहीं करतीं, ऐसा नहीं है. अदालतों के निर्णय बेतुकी बातों से भरे पड़े हैं. राम मंदिर पर हमारी सुप्रीम कोर्ट अपने आदेश में साफ  कहती है कि अयोध्या की मसजिद गिराना गैरकानूनी है पर साथ ही कहती है कि यह जमीन हिंदू मंदिर के लिए दे दी जाएं.

दुनिया भर की अदालतें एकदूसरे के फैसलों को पढ़तीसमझती रहती और कल को भारत में जो गर्भपात की आधीअधूरी छूट मिली हुई है, छिन जाए तो बड़ी बात नहीं आजादी के 30 सालों तक भारत में भी गर्भपात गैरकानूनी ही था. भारतीय अदालतें ने कभी उसे संवैधानिक हक नहीं माना था. कोर्ई सिरफिरा अब बने कानूनों को गलत कहता हुआ अदालत चला जाए तो आज के जज क्या कहेेंगे पता नहीं. वे भी अमेरिकी उदाहरण को फौलों कर सकते हैं.

जनता अगर खुद जागरूक न हो तो इस तरह की उठापटक कब उस पर हावी हो जाए कहां नहीं जा सकता.

लंबाई बढ़ाने का कोई तरीका बताएं?

सवाल-

मैं 13 साल की लड़की हूं. मेरी लंबाई 4 फुट 9 इंच है. कुछ ऐसे व्यावहारिक उपाय बताएं जिन से कि मेरी लंबाई बढ़ सके?

जवाब-

आप की लंबाई बढ़ने की अभी 2-3 साल तक अच्छी संभावना है. कुछ छोटेछोटे उपाय अमल में लाने से आप को लाभ मिल सकता है.

बेहतर होगा कि आप नियमित अच्छी प्रोटीनयुक्त डाइट लें. दूध, दही, दालें, अन्न, अंडा, गोश्त और मछली प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं. शरीर को अच्छी मात्रा में कैलोरी और प्रोटीन मिलते रहने से कद लंबा होने की संभावना बढ़ जाती है. इस के विपरीत अगर कैलोरी और प्रोटीन पर्याप्त न लें तो कद छोटा रह जाता है. दूसरा, खूब खेलेंकूदें, भागेंदौड़ें, शारीरिक कसरत करें. इस से भी शरीर में अधिक ग्रोथ हारमोन स्रावित होता है और लंबाई बढ़ाने में मदद मिलती है. तीसरा, रात में 7-8 घंटे की नींद लें. यह न केवल स्वास्थ्य अच्छा बनाए रखने का जरूरी नुसखा है, बल्कि लंबाई बढ़ाने में भी मददगार सिद्ध होता है. इस से शरीर की जैव रासायनिकी पर अनुकूल प्रभाव पड़ता है. चौथा, कभी कोई रोग हो तो समय से उस का इलाज कराएं. उस के प्रति लापरवाही न बरतें.

इन 4 नियमों को अमल में लाने के बाद आगे मातापिता से विरासत में मिले जींस पर यह बात छोड़ दें कि आप की लंबाई कितनी बढ़ेगी.

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बच्चों की हाइट में रुकावट आना माता-पिता के लिए चिंता का कारण बन जाता है. वैसे तो लड़कों की हाइट 25 वर्ष तक और लड़कियों की हाइट 18 वर्ष तक बढ़ती है. ज़्यादातर बच्चों की हाइट उनके माता-पिता के अनुसार ही होती है जिसे हम जेनेटिक बोलते है, लेकिन कई बार बच्चों की हाइट माता -पिता जितनी भी नहीं बढ़ती इसकी वजह हार्मोन का ग्रोथ न होना हो सकता है.
कम हाइट के वजह से बच्चों के व्यवहार में भी बदलाव देखने को मिलता है. कई बार कम हाइट वाला बच्चा बाकी बच्चों के सामने खुद को कमजोर समझने लगता है, ऐसा देखा भी गया है जिन बच्चों की हाइट कम होती है उन में चिढ़चिढ़ापन ज्यादा आ जाता है. अगर आप को भी अपने बच्चों के हाइट में ग्रोथ नजर नहीं आ रही तो आप इन टिप्स को जरूर अपनाएं.

बच्चों की अच्छी हाइट के लिए अपनाएं ये टिप्स

जब निकलें शिशु के दांत

बच्चे के दांतों को निकलता देखना हर पेरैंट्स के लिए बहुत खुशी की बात होती है. पहला दांत आने का मतलब यह होता है कि अब शिशु खानेपीने की हलकी ठोस चीजें खा सकेगा. मगर बच्चे के लिए दांत निकलना कष्ट का सबब बन जाता है क्योंकि दांत आते समय बच्चे को दर्द, बुखार जैसी बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

अगर आप का छोटा बच्चा भी बिना किसी वजह के रो रहा है, हर चीज अपने मुंह में डाल रहा है या बिना वजह परेशान है तो ये संकेत दांत निकलने के हो सकते हैं. आमतौर पर बच्चों के दांत 4 से 7 महीनों के बीच निकलने शुरू हो जाते हैं. वैसे कुछ बच्चों के दांत आने में देरी भी होती है. दांत निकलने के क्रम में शरीर में कुछ बदलाव भी आते हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में पेरैंट्स सम?ा नहीं पाते और बेवजह परेशान होने लगते हैं.

दांत निकलने के लक्षण

बारबार रोना और परेशान दिखना. जब दांत निकलते हैं तो बच्चों के मसूड़ों में तकलीफ होती है. ऐसे में वे चिड़चिड़े और परेशान रहते हैं. ठीक से सो भी नहीं पाते.

पेट में समस्या

जब बच्चों के दांत निकलते हैं तो उन्हें डायरिया यानी लूज मोशन की समस्या हो सकती है जो 2-3 दिन रह सकती है. कुछ बच्चे इन दिनों कब्ज से भी परेशान रहते हैं, जिस के कारण उन के पेट में दर्द होता रहता है.

चीजें मुंह में डालना

जब बच्चे के दांत निकलते हैं तो वह हर चीज को मुंह में डालने लगता है क्योंकि मसूड़ों में खुजली, सूजन और दर्द रहता है. ऐसे में बच्चों को चबाने से आराम मिलता है. दरअसल, बच्चों के मसूड़ों के मांस को चीर कर दांत बाहर निकलते हैं, इसलिए उन में दर्द और खुजली होती है. इस तकलीफ से राहत पाने के लिए वे इधरउधर की चीजें उठा कर उन्हें चबाने की कोशिश करते हैं.

हलका बुखार

बच्चे के दांत निकलने पर उस के मसूड़ों में खारिश होने लगती है, जिस के कारण वह किसी भी चीज को उठा कर मुंह में डालने लगता है और कई बार साफसफाई का ध्यान नहीं रखने पर बच्चा इन चीजों पर मौजूद बैक्टीरिया के कारण संक्रमित हो जाता है. इस से बच्चे का पेट खराब हो जाता है और उसे उलटी व दस्त की समस्या हो जाती है. कई बार इन्फैक्शन के कारण उसे बुखार भी आ जाता है.

कई मातापिता शिशु को दांत निकलने के समय होने वाली दिक्कतों से बचाने के लिए दवा का उपयोग करने लगते हैं जबकि ऐसा करने से बचना चाहिए. दांत निकलने में दवा के इस्तेमाल के बजाय अगर आप कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखें और कुछ घरेलू उपाय करें तो काफी हद तक इन दिक्कतों से बचा जा सकता है:

– जब बच्चे के दांत निकल रहे होते हैं तो उस का कुछ चबाने का मन करता है. इस से बच्चे को आराम मिलता है. गाजर सख्त होती है इसलिए बच्चे को गाजर चबाने के लिए दे सकती हैं. एक लंबी गाजर को धो कर छील लें. 15-20 मिनट के लिए फ्रिज में रख कर ठंडा करें और उस के बाद बच्चे को दें. बच्चे को जब भी गाजर चबाने के लिए दें तब कोई न कोई उस के आसपास रहे ताकि वह गाजर को निगले नहीं या गाजर उस के गले में न फंसे. शिशु को ठंडा खीरे या सेब का टुकड़ा भी दे सकती हैं.

– मार्केट में टीथिंग बिस्कुट आते हैं जो दांत निकलने की प्रक्रिया को आसान बनाते हैं. ये बिस्कुट मीठे नहीं होते हैं और बच्चे को दांत निकलने पर होने वाले दर्द और असहजता से आराम दिलाते हैं. केला भी इस दर्द को कम करने का काम कर सकता है. केला मुलायम होता है और इसे चबाने से शिशु के दांतों को आराम मिल सकता है.

– कभीकभी मसूड़ों की मालिश से बच्चों को दांत निकलने की परेशानी में बहुत मदद मिलती है. मसूड़ों पर हलका दबाव दर्द को कम और बच्चों को शांत करने में मदद करता है. अपनी उंगली अच्छे से साफ करें या एक मुलायम कपड़ा लें और फिर उस से कुछ सैकंड्स के लिए बच्चे के मसूड़ों को रगड़ें. आप के शिशु को शुरुआत में शायद अच्छा न लगे परंतु बाद में राहत महसूस होगी. इस के अलावा किसी और्गेनिक तेल से बच्चे के माथे और गालों की भी मालिश करें.

– बच्चे की दूध की बोतल को फ्रिज में ठंडा होने के लिए रख दें. ठंडा होने पर इसे बच्चे को चबाने के लिए दें. इस से बच्चे को दांत निकलने पर हो रहे दर्द से राहत मिलेगी.

– 1/2 चम्मच सूखे कैमोमाइल फूलों को 1 कप गरम पानी में मिलाएं. इस को छान कर रख

लें. अब इस चाय का एक छोटा चम्मच अपने बच्चे को हर 1 या 2 घंटे बाद दें. कैमोमाइल का फूल 1 वर्ष से अधिक उम्र के शिशुओं में दांत निकलने की परेशानी में बहुत मदद कर सकता है. इस में सूजन को कम करने वाले गुण भी होते हैं.

सुबह की किरण: क्या पूरी हुई प्रीति और समीर की कहानी

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संस्कारी बहू बनीं उर्फी जावेद, ट्रैडिशनल अवतार देख चौंके फैंस

बिग बौस ओटीटी में नजर आ चुकीं एक्ट्रेस उर्फी जावेद अपने फैशन के चलते आए दिन सुर्खियों में रहती हैं. वहीं अपने बोल्ड लुक के चलते ट्रोलर्स के भी निशाने पर आ जाती हैं. हालांकि उनकी फैन फौलोइंग भी बढ़ती जा रही है. इसी बीच एक्ट्रेस की बहू अवतार में कुछ फोटोज वायरल हो रही हैं, जिसे देखकर फैंस हैरान हैं.

संस्कारी बहू बनी उर्फी

कई टीवी सीरियल्स का हिस्सा रह चुकी एक्ट्रेस हाल ही में ऐ मेरे हमसफर सीरियल में नजर आईं थीं, जिसमें वह ट्रैडिशनल बहू बनकर सुर्खियों बटोरती हुई दिखीं. चूड़ी, बिंदी लगाए एक्ट्रेस का अवतार देखकर फैंस हैरान हैं, जिसके चलते उनकी वीडियो और फोटोज सोशलमीडिया पर वायरल हो रही हैं. वहीं संस्कारी लुक में उर्फी की फोटोज देख लोग उनकी तारीफ कर रहे हैं.

कई सीरियल्स का हिस्सा रह चुकी हैं उर्फी

 

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अजीब फैशन सेंस के चलते सोशलमीडिया पर ट्रैंड करने वाली एक्ट्रेस उर्फी जावेद ऐ मेरे हमसफर के अलावा बिग बॉस OTT, सीरियल बड़े भैया की दुल्हनिया, चंद्र नंदिनी, मेरी दुर्गा, सात फेरों की हेरा फेरी से लेकर राजन शाही के हिट सीरियल ये रिश्ता क्या कहलाता है का भी हिस्सा रह चुकी हैं.

फैशन को लेकर बटोरती हैं सुर्खियां

 

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हाल ही में एक्ट्रेस उर्फी जावेद सबसे ज्यादा सर्च की जाने वाली एक्ट्रेस बनी हैं. हालांकि बौलीवुड एक्ट्रेसेस को पीछे छोड़ने वाली उर्फी अपने अजीबो गरीब फैशन और बयानों को लेकर सुर्खियों में रही हैं. लेकिन कई बार वह ट्रोलिंग का सामना भी कर चुकी हैं. पर उन्हें इन ट्रोलिंग या कमेंट से कोई फर्क नहीं पड़ता और वह ट्रोलर्स को करारा जवाब देते हुए नजर आती हैं.

 बिग बॉस OTT से छाईं उर्फी

 

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बता दें, बिग बॉस OTT का हिस्सा बनने के बाद से उर्फी जावेद ज्यादा पौपुलर हो गई हैं. आज हर कोई उन्हें जानता है और उनके साथ फोटोज खिंचवाने के लिए तैयार रहता है.

जब लत बन जाएं गैजेट्स

गैजेट्स का गुलाम होना ठीक नहीं क्योंकि अगर आप इन के गुलाम हो गए तो इन के खराब होने पर आप एक दिन भी इन के बिना नहीं बिता पाएंगे और आप को इन के बिना जिंदगी नीरस व अधूरीअधूरी सी लगने लगेगी. इसलिए आज तक आप ने जो किया सो किया, लेकिन अब अपनी जिंदगी में गैजेट्स को उतनी ही अहमियत दें, जितनी देने की जरूरत है. भूल कर भी खुद को इन का गुलाम न बनने दें.

आइए, जानते हैं कैसे इन से दूरी बनाएं:

आज किसी को फोन नहीं करेंगे

हर समय बस मोबाइल से चिपके रहने से हमारी आदत पूरी तरह बिगड़ गई है. बस जरा सा खाली समय मिला नहीं कि फोन में कभी गूगल पर कुछ देखने लग जाते हैं, तो कभी सोशल मीडिया पर फोन से अपने फोटोज अपलोड करते हैं, तो कभी दूसरों की डाली गईं पोस्ट्स में इतना इंटरैस्ट दिखाने लगते हैं जैसे इस से जरूरी और कोई काम ही नहीं है.

ऐसे में आप मन में ठान लें कि हर हफ्ते संडे को हम अपने मोबाइल से किसी को भी फोन नहीं करेंगे और न ही इस का इस्तेमाल सैल्फी लेने, फोटो अपलोड करने में करेंगे. जब तक बहुत जरूरी न होगा, हम आज के दिन फोन को हाथ नहीं लगाएंगे. अगर आप मन में ऐसा संकल्प ले लेंगे और 1-2 महीनों तक इस पर अमल भी करेंगे तो आप आराम से गैजेट्स से दूरी बना पाएंगे.

आज पूरा दिन टीवी से छुट्टी

आज रिलैक्स डे है, आज औफिस की छुट्टी है, आज कोई काम नहीं है तो इस का मतलब यह नहीं कि आप आज पूरा दिन बस टीवी पर ही नजरें गड़ाए बैठे रहें. आप का ब्रेकफास्ट, लंच, डिनर सब टीवी के सामने ही हो रहा है और टीवी के सामने बैठेबैठे कब सुबह से शाम हो गई पता ही नहीं चला.

ऐसा आप के साथ ही नहीं बल्कि अधिकांश लोगों के साथ होता है कि फ्री टाइम का मतलब वाचिंग टीवी और फुल डे फ्री का मतलब तो फुल डे टीवी के साथ टाइम स्पैंड होता है. घर के बाकी लोग चाहे कुछ भी कहते रहें, लेकिन आप को टीवी से फुरसत मिले तब न.

अगर आप के साथ भी ऐसा ही है तो हफ्ते में 1 दिन या 15 दिन में एक दिन टीवी से ब्रेक जरूर लें.

आज गाड़ी की छुट्टी

चाहे पास की मार्केट जाना हो या फिर 2 गलियां छोड़ कर फ्रैंड से मिलने, हर काम के लिए हम गाड़ी का इस्तेमाल करते हैं, जिस से जहां हमारी चलने की आदत छूटती जा रही है, वहीं हम खुद के खर्चों को भी बढ़ाते जा रहे हैं. ऐसे में अगर आप खुद को गाड़ी के ही सहारे नहीं चलाना चाहते या फिर खुद के खर्चों को जानबूझ कर नहीं बढ़ाना चाहते तो हफ्ते में 1 दिन बिना गाड़ी घर के व खुद से जुड़े काम करें. इस से एक तो आप की गाड़ी पर से निर्भरता खत्म होगी और दूसरा आप अपने कामों के लिए खुद के शरीर को चलाना सीखेंगे.

आज औनलाइन सामान नहीं मंगवाएंगे

आज डेली नीड्स के हर सामान के लिए हम औनलाइन स्टोर्स पर निर्भर हो गए हैं. कोई सामान खत्म हुआ नहीं कि झट से और्डर कर के मंगवा लिया, जिस से न तो हम ग्रोसरी पर होने वाले खर्च को कंट्रोल कर पाते हैं और दूसरे हमारी आदत भी खराब होती जाती है. औनलाइन सामान मंगवाने पर हम दुकानदार से अब सामान के लिए मोलभाव भी नहीं कर पा रहे हैं. यहां तक कि कुछ खाने का मन किया तो झट से और्डर कर के मंगवा लेते हैं. लेकिन जान लें कि ये औनलाइन स्टोर्स हमें घर बैठे कुछ ही मिनटों में सामान देने के कारण हमें आलसी बना रहे हैं.

ऐसे में अगर आप को अपनी इस लत को छोड़ना है तो आप हफ्ते में एक दिन औनलाइन कोई भी सामान नहीं मंगवाने का संकल्प लें. उस दिन यदि आप को किसी सामान की जरूरत पड़ी तो आप दुकान पर जाएं. दुकानदार से आप मोलभाव कर के सामान लें, जो बजट को कंट्रोल करने का तो काम करेगा ही, साथ ही आप उस दिन सिर्फ जरूरी चीजें ही लाएंगे, जो बचत के साथसाथ आप की औनलाइन और्डर करने की हैबिट को भी बदलने का काम करेगा.

बच्चों को आत्मनिर्भर बनाएंगी ये 5 बातें

जिस तरह गीली मिट्टी को किसी भी आकार में ढाल कर खूबसूरत बरतन में बदला जा सकता है, ठीक उसी तरह बच्चों में अगर शुरुआत से ही अच्छी आदतें पैदा की जाएं तो वे बड़े हो कर अच्छे नागरिक बनते हैं और ये आदतें उन में जीवन भर बनी रहती हैं. आज की प्रतिस्पर्धी दुनिया में आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता बेहद जरूरी है जो व्यक्ति को जीवन के हर संघर्ष का सामना करने के लिए तैयार करती है. अगर बच्चों में ये गुण कम उग्र से ही विकसित हो जाएं तो ये जीवन भर उन के साथ बने रहते हैं.

बच्चों में आत्मनिर्भरता की भावना विकसित करने के लिए उन के आसपास का माहौल ऐसा होना चाहिए. जिस से उन में आत्मविश्वास पैदा हो. बच्चों के व्यवहार और व्यक्तित्व पर उन के मातापिता, अध्यापकों और साथियों का गहरा असर पड़ता है. जिस बच्चे को सहयोग, सराहना, प्रोत्साहन और सही मार्गदर्शन मिलता है वह आगे चल कर एक अच्छे व्यक्ति के रूप में विकसित होता है, उस में आत्मसम्मान की भावना होती है.

आत्मनिर्भर बनने के लिए जरूरी है कि अपने फैसलों पर भरोसा रखें और इन फैसलों के परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहें. एक व्यक्ति जीवन की सभी मुश्किलों का सामना आसानी से कर सकता है बशर्ते उस में आत्मविश्वास हो. बच्चों में इस तरह का आत्मविश्वास पैदा करना मुश्किल है, लेकिन यह बहुत जरूरी है क्योंकि इसी से तय होता है कि बच्चे आगे कैसे व्यक्ति के रूप में उभरेंगे.

1. उदाहरण दे कर समझएं

मातापिता ही बच्चों की सब से बड़ी ताकत होते हैं. बच्चे अकसर हर स्थिति में अपने मातापिता जैसा व्यवहार करने की कोशिश करते हैं. इसीलिए अगर मातापिता में आत्मविश्वास है तो बच्चों में आत्मविश्वास की भावना स्वाभाविक रूप से आ जाती है. वे मातापिता जो अपने बच्चों के साथ डांटडपट करते हैं या छोटी सी बात के लिए भी उन की पिटाई तक कर देते हैं, वे न केवल बच्चों के लिए बुरा उदाहरण प्रस्तुत करते हैं बल्कि अपने खुद के आत्मसम्मान को भी नुकसान पहुंचाते हैं.

शारीरिक, मानसिक या भावनात्मक रूप से पीडि़त बच्चे आत्मसम्मान की भावना खो देते हैं. इसलिए मातापिता को ऐसा व्यवहार करना चाहिए कि बच्चा गलत व्यवहार या मारपिटाई के बिना ही अपनी गलती को समझ जाए.

ऐसा व्यवहार करें जिस से बच्चे में अच्छी आदतें पैदा हों. आप अपने अच्छे व्यवहार से बच्चों के लिए रोल मौडल बनें. इस से उन में खुदबखुद आत्मविश्वास पैदा होगा. धीरेधीरे वे आत्मनिर्भर बनने लगेंगे. सुनिश्चित करें कि बच्चों में ओवर कौन्फिडैंस यानी जरूरत से ज्यादा आत्मविश्वास न हो.

2. ध्यान रखें कि आत्मविश्वास अहंकार न बने

आत्मविश्वास जरूरी है, लेकिन बच्चे की इतनी ज्यादा सराहना भी न करें कि आत्मविश्वास अहंकार बन जाए. अच्छे व्यवहार की सराहना करना जरूरी है, मगर बिना कारण सराहना करने से बच्चे में अनावश्यक अहंकार पैदा होता है. अगर बच्चे ने वास्तव में अच्छा प्रयास किया है तो उस की सराहना करनी चाहिए और अगर वह किसी काम में असफल होता है तो अनावश्यक प्रशंसा न करें.

यह समझना जरूरी है कि हमेशा हर चीज एकदम परफैक्ट नहीं हो सकती. आप के बच्चे को मेहनत, कोशिश का महत्त्व पता होना चाहिए. लेकिन उसे यह बात भी समझनी चाहिए कि कभीकभी आप बहुत कोशिश के बाद भी कामयाब नहीं हो पाते. ऐसी स्थिति में हार मानने के बजाय आगे बढ़ें और कोशिश करना जारी रखें.

ऐसे व्यवहार से बच्चा यह समझ जाएगा कि उस के मातापिता हर स्थिति में उसे चाहते हैं और तभी वह आप की हर सलाह पर भरोसा करेगा, घर के नियमों का पालन करेगा. प्यार से ही आत्मविश्वास की नींव तैयार होती है. आप के बच्चे को यह पता होना चाहिए कि आप उसे हमेशा प्यार करते हैं, फिर चाहे वह पढ़ाई, खेलों या अन्य गतिविधियों में कैसी भी परफौर्मैंस दे. बच्चों को सिखाएं कि उन्हें हमेशा कामयाबी पाने के लिए कोशिश करनी है, लेकिन असफल होने पर कभी निराश नहीं होना है.

3. उन की उत्सुकता को दबाएं नहीं

बच्चों में हर चीज को जानने की इच्छा, जिज्ञासा होती है, उन में अनूठा रोमांच होता है. कई बार यह मातापिता के लिए सिरदर्द का कारण बन जाता है. लेकिन बच्चों के उत्साह को दबाने के बजाय मातापिता को इसे हैंडल करना आना चाहिए.

बच्चों की ऐनर्जी को सही दिशा में लगाएं. मातापिता को बच्चों पर चौबीसों घंटे निगरानी रखनी होती है खासतौर पर तब जब वे बहुत छोटे होते हैं.

लेकिन उन्हें आजादी भी मिलनी चाहिए ताकि वे अपनी पसंदनापसंद, अच्छेबुरे के बारे में सीख सकें. जब आप उन्हें खुद दुनिया को जानने का मौका देते हैं, तो उन में आत्मविश्वास पैदा होता है खासतौर पर तब जब उन्हें पता हो कि आप हर समय उन की मदद के लिए उन के साथ हैं.

4. बच्चों को आजादी देना

बच्चों को आजादी देने से पहले उन के लिए कुछ नियम तय कर दें. लेकिन ध्यान रखें कि ये नियम उचित हों जो उन की आजादी में बेवजह रुकावट पैदा न करें. अगर बच्चों को पता है कि आप उन से क्या उम्मीद करते हैं तो उन में बेहतर आत्मविश्वास होता है.

ऐसी स्थिति में अगर आप के बच्चे को अपने दोस्तों और साथियों के बीच कोई फैसला लेना है, तो वह इस बात को समझेगा कि उसे क्या करना है और क्या नहीं. ऐसे में वह सहज हो कर सही फैसला ले सकेगा.

हर व्यक्ति हमेशा सफल नहीं हो सकता, जीवन में हम गलतियों से ही सीखते हैं. आप सफलता और असफलता का मुकाबला कैसे करते हैं, उसी से आप में आत्मविश्वास पैदा होता है. बच्चे हर चीज को दिल से लगाते हैं. इसलिए अभिभावक होने के नाते आप का कर्तव्य है कि आप उन्हें समझएं कि असफलता से निराश नहीं होना है. लेकिन इसी के साथ उन्हें यह एहसास भी होना चाहिए कि उन्हें फिर से सफलता पाने के लिए कोशिश करनी है.

5. आत्मविश्वास सिखाना भी जरूरी

कोई भी मातापिता अपने बच्चों को पालने में गलतियां कर सकते हैं. हर स्थिति में आप की भूमिका तय नहीं होती, लेकिन बच्चों को सहानुभूति, दयालुता जैसे गुण सिखाने के साथसाथ आत्मविश्वास भी सिखाना जरूरी है. बच्चों को रिश्तों के उतारचढ़ाव के बारे में भी समझना चाहिए. अगर आप जिम्मेदार अभिभावक हैं तो आप बचपन से ही अपने बच्चों को आत्मनिर्भरता सिखाते हैं, जिस से आत्मविश्वास और आत्मसम्मान के गुण जीवन भर उन के साथ बने रहते हैं.

बेबी स्किन केयर में हो नो मिस्टेक

क्रैडल कैप से कैसे डील करें यह प्रोब्लम बहुत ही छोटे बेबीज में देखने को मिलती है, जिस के कारण आप को उन की स्कैल्प पर यलो या फिर ग्रीसी पैच दिखने लगते हैं. कई बार ये आप को अपने बेबीज के माथे, आईब्रो व कानों के आसपास भी देखने को मिल जाएंगे. ये वैसे तो धीरेधीरे कुछ समय में निकल जाते हैं, लेकिन अगर आप अपने बच्चे की स्कैल्प को क्लीयर व साफसुथरा देखने के लिए हाथ से उसे निकालेंगी तो उस की सैंसिटिव स्किन को नुकसान हो सकता है. यह समस्या अकसर हेयर फौलिकल्स के आसपास स्किन ग्लैंड्स के द्वारा अत्यधिक औयल का उत्पादन करने के कारण पैदा होती है. यह समस्या वैसे तो खुदबखुद ठीक हो जाती है, लेकिन अगर स्थिति में कोई सुधार न आए तो तुरंत डर्मैटोलौजिस्ट को दिखाएं.

बच्चों की स्किन बहुत सैंसिटिव होती है, इसलिए हम उस पर बिना सोचेसमझे कोई भी प्रोडक्ट यूज नहीं कर सकते खासकर के वे प्रोडक्ट्स जिन्हें हम अपनी स्किन पर इस्तेमाल करते हैं क्योंकि उन की कोमल स्किन को तो सौफ्ट, कैमिकल फ्री व जैंटल प्रोडक्ट्स की जरूरत होती है.

इस संबंध में जानते हैं एशियन इंस्टिट्यूट औफ मैडिकल साइंसेज के डर्मैटोलौजिस्ट डाक्टर अमित बांगया से:

शावर में नो मिस्टेक

बेबी को जब भी आप नहलाएं तो हलके कुनकुने पानी से ही नहलाएं. इस से आप का बेबी सेफ रहने के साथसाथ उस की स्किन को भी कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा क्योंकि बेबी की स्किन व सिस्टम दोनों ही सैंसिटिव जो होते हैं. इस बात पर भी ध्यान दें कि बेबी को सिर्फ 4-5 मिनट का ही बाथ देना है वरना ज्यादा देर बाथ देने से स्किन पर रैशेज, ड्राइनैस व उस के ज्यादा सैंसिटिव होने के कारण उस के पील होने के चांसेज ज्यादा रहते हैं.

अगर आप बेबी बाथ के समय इन बातों का ध्यान रखती हैं तो आप के बेबी की स्किन सौफ्ट रहने के साथसाथ हैल्दी भी बनी रहती है.

आफ्टर बाथ मौइस्चराइजर

अब सवाल यह है कि बेबी का मौइस्चराइजर कैसा हो? इस के लिए आप अच्छी गंध देख कर मौइस्चराइजर का चयन न करें किसी की देखादेखी नहीं और न ही यह सोचें कि पिछली बार हम ने अपने फर्स्ट बेबी के लिए यह प्रोडक्ट यूज किया था तो इस बार भी यही करेंगे. यह जान लें कि हर बच्चे की स्किन अलग होती है और वह अलग तरह से रिएक्ट करती है.

ऐसे में आप जब भी अपने बेबी के लिए मौइस्चराइजर का चयन करें तो वह कैमिकल, पैराबिन व फ्रैगरैंस फ्री होना चाहिए. कोशिश करें कि आप जिंक औक्साइड वाला मौइस्चराइजर या फिर जैंटल मौइस्चराइजर का ही इस्तेमाल करें क्योंकि यह बेबी की स्किन पर बैरियर का काम करता है ताकि स्किन को ऐक्स्ट्रा केयर के साथसाथ ऐक्स्ट्रा प्रोटैक्शन भी मिल सके.

बेबी पाउडर चूज करें रिसर्च के साथ

अपने बेबी के लिए किसी भी बेबी पाउडर का चयन कर लेना सही नहीं है. मार्केट में आप को कई ब्रैंड की बेबी पाउडर देखने को मिल जाएगा, लेकिन आप के लिए सही यही है कि खुद रिसर्च कर के या फिर डर्मैटोलौजिस्ट की सलाह के बाद ही अपने बच्चे के लिए बेबी पाउडर का चयन करें.

आप बेबी के लिए जिंक औक्साइड वाले जैंटल बेबी पाउडर का चयन कर सकती हैं क्योंकि इस में हैं आप के बेबी की स्किन को कूल, फ्रैश और हैप्पी फील करवाने वाली प्रौपर्टीज, साथ ही इस में हीलिंग प्रौपर्टीज होने के कारण यह स्किन को स्मूद बनाने का भी काम करता है. वहीं अगर बेबी पाउडर में नैचुरल ऐक्टिव जैसे राइस स्टार्च हों तो वे बेबी की सैंसिटिव स्किन को प्रोटैक्ट करने का काम करता?है. यह स्किन पर ब्रीदेबल लेयर बनाता है, जिस से पोर्स के क्लोग होने की समस्या नहीं होती है.

एलैनटोइन करे स्किन को रिपेयर

बेबी चैन की नींद सोए, इस के लिए कारण पेरैंट्स अपने बेबी को हमेशा डायपर पहना कर रखते हैं जो स्किन पर रैशेज, रैडनैस व इचिंग का कारण बनता है. ऐसे में जरूरी है कि थोड़ीथोड़ी देर में नैपी बदलती रहें और जितना हो सके, उस की स्किन को ड्राई रखें. आप बेबी की स्किन पर एलैनटोइन इनग्रीडिएंट युक्त मौइस्चराइजर, लोशन या फिर पाउडर का इस्तेमाल करें क्योंकि ये सैंसिटिव स्किन के लिए भी परफैक्ट होने के साथ स्किन को ऐक्सफौलिएट कर उसे हील करने का काम करता है, जिस से स्किन सौफ्ट व स्मूद बनी रहती है.

Monsoon Special: वीकेंड पर बनाएं बिहारी लिट्टी चोखा

कोई खास अवसर हो या घर पर मेहमान आए हो उनके लिए आप इस आसान बिहारी लिट्टी चोखा बनाकर उन्हें आश्चर्यचकित कर सकती हैं. देसी घी और हरी धनिया के चटनी के साथ आप इसे खाएंगी तो यकीनन आपको उम्दा स्वाद मिलेगा.

सामग्री

लिट्टी के लिए

गेहूं का आटा- 2 कप

ऑयल- 2 बड़े चम्मच

अजवाइन- आधी टीस्पून

देसी घी- 2 टेबलस्पून

नमक- स्वादानुसार

फिलिंग के लिए

सत्तू/भुने चने- 1 कप

लहसुन- 5 कलियां (कदूकस की हुई)

अदरक- 1 इंच का टुकड़ा (कद्दूकस किया)

प्‍याज- 1 (बारीक कटा)

हरी मिर्च- 2 (बारीक कटी)

हरी धनिया- आधा कप (बारीक कटी)

अजवाइन- 1 टीस्पून

कलौंजी- आधी टीस्पून

नींबू का रस- 1 बड़ा चम्मच

2 भरवां लाल मिर्च के अचार का मसाला

नमक- स्वादानुसार

चोखा के लिए

आलू-1 उबला

बैंगन- 1 बड़ा

टमाटर- 4

लहसुन- 4

प्‍याज- 3 बारीक कटे

अदरक- 1

इंच का टुकड़ा कद्दूकस किया

हरी मिर्च- 3

हरी धनिया- एक टेबलस्पून

सरसों का तेल-1 बड़ा चम्मच

नमक- स्वादानुसार

विधि

आटे में नमक, अजवाइन और तेल मिलाकर थोड़ा टाइट आटा बना लें. फिर उसे हल्के गीले कपड़े से ढककर रखें. भरावन के लिए सत्तू को छान लें. इसमें अदरक, प्‍याज, लहसुन, धनिया, अजवाइन, कलौंजी, मिर्च का मसाला, हरी मिर्च, नींबू रस और नमक मिलाएं. थोड़ा सा पानी मिलाएं और अच्छी तरह से मिश्रण को मिला लें.

आटे की लोई बनाएं और उसमें फिलिंग भर के गोल लोई बना लें. इसे तंदूर या ओवन में 200 डिग्री पर बेक करें. बाद में इन्हें घी में डालें.

चोखा के लिए

चोखा बनाने के लिए सबसे पहले टमाटर को उबाल लें और उसके छिलके निकाल दें. अब बैगन को धो लें और चाकू की सहायता से उसमें छेद कर दें. उन छेदों में छिली हुई लहसुन की कलियां डाल दें. बैंगन को ओवन में या गैस पर मुलायम होने तक भून कर पका लें.

बैंगन का छिलका निकाल दें और मैश कर लें. उबले हुए आलू और टमाटर भी इसमें मिला लें इन्हें मैश कर लें. अब इसमें प्‍याज, अदरक, हरी मिर्च, धनिया, नमक और सरसों का तेल डालें और अच्छी तरह मैश करें. लिट्टी-चोखा तैयार है.

पाखी को शाह परिवार के खिलाफ करेगा अधिक, Anupama सिखाएगी सबक

सीरियल अनुपमा (Anupama) की टीआरपी पर इस हफ्ते गिरावट देखने को मिली है. हालांकि मेकर्स सीरियल को दिलचस्प बनाने के लिए नए-नए ट्विस्ट लाते नजर आ रहे हैं. इसी के चलते अनुपमा का बरखा के भाई पर गुस्सा देखने को मिलने वाला है. आइए आपको बताते हैं क्या होगा शो में आगे (Anupama Serial Update)…

बा ने सुनाई खरी-खोटी

 

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अब तक आपने देखा कि वनराज के बाद बा भी कपाड़िया फैमिली पर गुस्सा करती है. हालांकि अनुपमा उन्हें शांत रहने के लिए कहती है लेकिन वह एक नहीं सुनते, जिसके चलते पूरा कपाड़िया परिवार शाह हाउस से चला जाता है. वहीं घर जाकर बरखा अपने भाई अधिक को पाखी और शाह फैमिली से दूर रहने के लिए कहती है.

पाखी को भड़काएगा अधिक

 

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अपकमिंग एपिसोड में आप देखेंगे कि वनराज और अनुपमा के बीच बहस होगी, जिसके चलते वनराज उसे कपाडिया फैमिली को शाह फैमिली से दूर रखने के लिए कहेगा. हालांकि अनुपमा, वनराज की बातों का करारा जवाब देखी और उसकी क्लास लगाती दिखेगी. दूसरी तरफ पाखी, अधिक से वीडियो कॉल पर बात करेगी, जिसमें अधिक उसे कहेगा कि जब माता-पिता अपनी बेटी को पढ़ाई के लिए विदेश भेज सकते हैं, लेकिन उसे घर से बाहर नहीं भेजना चाहते और न ही दोस्ती करने देना चाहते हैं. इसी के साथ वह कहेगा कि अब वह एक वयस्क है और उन्हें अपने फैसले और दिल की बात सुनने का अधिकार है और उसके माता-पिता के कहने पर किसी के दबाव में नहीं आना चाहिए. वहीं अधिक उसे विदेश जाकर पढ़ाई करने की सलाह देगा, जिसके लिए पाखी मान जाएगी.

 

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अनुपमा पूछेगी सवाल

इसके अलावा आप देखेंगे कि अनुज, अनुपमा से कहेगा कि उसके बच्चों के मामले में उसका कोई अधिकार नहीं है. इसीलिए उसे ये लड़ाई खुद लड़नी होगी और अधिक से भी बात करनी होगी. वहीं वनराज, पाखी से कहेगा कि वह अनुपमा के अलावा कपाड़िया परिवार के किसी भी सदस्य के साथ कोई रिश्ता नहीं रखने देगा, जिसे सुनकर पाखी परेशान नजर आएगी. इसी के बाद अनुपमा, अधिक से सवाल करेगी कि क्या वह पाखी को सिर्फ यह कहने के लिए एक कमरे में ले गया कि वह उसे पसंद करता है या उसका कोई और इरादा था, जिसे सुनकर अधिक और पूरा परिवार हैरान रह जाएगा.

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