आखिर सफाई में किस बात का ज़िक्र कर रही हैं एक्ट्रेस स्वरूपा घोष, पढ़ें इंटरव्यू

स्वरूपा की वेब सीरीज ‘लाइफ नवरंगी’ रिलीज हो चुकी है, जिसे दर्शकों का प्यार मिल रहा है. स्वरूपा इसमें महिला उद्यमी वेंकटालक्ष्मी की भूमिका निभा रही है, जो आंध्र प्रदेश के नरसापुर में रहती है, जहाँ करीब 15 हजार की आबादी है, जहाँ सीवेज की व्यवस्था नहीं है, इसलिए ये गन्दा पानी सड़कों और पीने के पानी में मिलकर उसे दूषित कर देती है, ऐसे त्यागे गए मल का नाम उन्होंने ‘मलासुर’ दिया है यानि एक राक्षस जो वहां रहने वाले लोगों को बीमार बनाकर खा जाता है. 25 साल से वेंकटालक्ष्मी त्यागे हुए मल को टैंक के सहारे ले जाकर प्रोसेस करती है.

कई प्रतिभाओं की धनी अभिनेत्री स्वरूपा घोष बंगाल की है. उनका जन्म आर्टिस्ट अतिरंजन और लेखिका अरुणा दास के घर हुई. पिता की कला को देखते हुए उन्हें अभिनय की इच्छा हुई और उनके पिता उन्हें थिएटर के बैकग्राउंड में काम करने के लिए भेज दिया, ताकि वे अभिनय की बारीकियों को सीख सकें. 17 साल की उम्र में उन्हें थिएटर में अभिनय करने का पहला मुख्य किरदार मिला, क्योंकि उस नाटक की मुख्य भूमिका निभाने वाली एक्ट्रेस को किसी कारणवश बाहर निकाल दिया गया था.

थिएटर से अपनी जर्नी को शुरू करने वाली स्वरूपा आज एक सफल अभिनेत्री है, जिन्होंने केवल बांग्ला फिल्म ही नहीं, हिंदी सिनेमा में भी बहुत काम किया है. वह एक्ट्रेस के अलावा, थिएटर प्रेक्टिशनर, एक्टर ट्रेनर और डायरेक्टर भी है. हंसमुख और विनम्र स्वभाव की स्वरूपा ने हमेशा नई और चुनौतीपूर्ण अभिनय करना सही माना, क्योंकि उन्हें उसमे कुछ नया एक्सपेरिमेंट करना पसंद है. उनकी कई हिंदी फिल्में काफी सफल रही, जिसमे निर्देशक सुजीत सरकार की फिल्म पिकू और पिंक खास थी. उन्होंने ब्रिटिश स्कूल में एक्टिंग की तालीम देने के अलावा लंदन, साउथ अमेरिका, जर्मनी, कोरिया आदि जगहों पर परफॉर्म किया है. उनके पति एडवर्टाइजमेंट के क्रिएटिव फील्ड में है.

सवाल – इस कहानी की किस बात से आप आकर्षित हुई?

जवाब –ये विषय गंभीर है और लोगों को इस विषय पर जागरूक होना चाहिए, मुझे याद है बचपन में मैं कोलकाता के क़स्बा में रहती थी और क़स्बा में विकास बहुत धीमी थी और वहां इस तरह के सेप्टिक टैंक की व्यवस्था थी. जिसे महीने में एक बार साफ़ किया जाता था, जबकि उन्हें बीच-बीच में साफ़ न करने से कीड़े फैलते थे. सेप्टिक टैंक क्या होता है, इसके बारें में भी जानकारी नहीं थी, लेकिन सुना था कि उन जगहों से कीड़े निकलते है,जब मैं शूटिंग के लिए ऐसे तंग गलियों,जहाँ गंदे पानी नाली के ऊपर तक आ चुके है,वही लोग रहते है और ये पानी पीने के पानी में मिलकर उसे दूषित कर देते है, जिससे कई बीमारियाँ इन जगहों पर फैलती है. इन सेफ्टिक टैंक के लिए काम करने वालों के लिए किसी प्रकार की अच्छी व्यवस्था नहीं थी. अभी चीजें बहुत बदल चुकी है,लेकिन अभी भी बहुत कम लोग इसे जानते है. मैं जब दिल्ली के पास लोनी में शूटिंग करने गयी तो वहां बाथरूम है, लेकिन उसे साफ़ रखने की आदत किसी में नहीं. खास कर महिलाओं को ऐसी परिवेश में टॉयलेट जाना संभव नहीं. मेरे मन में सोचा कि जब शहर के आसपास के क्षेत्र की व्यवस्था ऐसी है तो गांव की हालत कैसी होगी.

सवाल – क्या ऐसे किसी जगह पर आप गई, जहाँ गंदे परिवेश में रहने के लिए लोग मजबूर है?

जवाब – बिल्कुल गई हूं, तभी तो इसे समझना आसान रहा. फिल्म के निर्देशक देबात्मा मंडल जब मेरे पास आयें तो मुझे आश्चर्य नहीं लगा, क्योंकि सेफ्टीक टैंक के बारें में बहुत कम लोगों को पता है. इसलिए इस पर बात अवश्य होनी चाहिए. असल में त्यागे हुए मल को कहा ले जाकर फेंक रहे रहे है, उसे भी देखना जरुरी होता है, क्योंकि दिल्ली की यमुना में सारे जगहोंसे गंदे पानी मिलते है और उस पानी को ही पीने के लिए प्रयोग होता है. केवल घर ही नहीं आसपास का साफ़ होना बहुत आवश्यक है. इसे अनदेखा करना सही नहीं है, इसे ही वेब सीरीज के सहारे दिखाया जा रहा है, ताकि लोग जागरूक हो. सभी बेहतर शिक्षा की मांग करते है, लेकिन उसका एप्लिकेशन हो रहा है या नहीं, उसे देखना पड़ता है. ये सही है की आज सभी के पास मोबाइल है और सभी इस तरह की वेब सीरीज देख सकते है.

सवाल – इस शो से आपकी जिंदगी कितनी बदली?

जवाब – बहुत बदल गई, पहले भी मैं स्लम में जाती थी और उनके लिए काम करती थी,  पर अब मेरे भाव अधिक बदल गए है.मैं ऐसे बच्चों को कुछ काम करने के लिए प्रेरित करती हूं और आगे आने में सहायता करती हूं.

सवाल – क्या आप वेंकटालक्ष्मी से मिल पायी ?

जवाब – मिलना मुश्किल था, क्योंकि वह बहुत व्यस्त महिला है, लेकिन उनके बारें में बहुत सुना है. मुझे गर्व महसूस होता है कि मैं ऐसी स्ट्रोंग महिला की भूमिका निभा रही हूं. सीरीज को थोड़ा आकर्षक बनाने के लिए मेरे चेहरे कोनिर्देशक ने थोड़ा अलग दिखाया है. बाद में मैंने जब उनकी तस्वीर देखी तो लगा कि मुझे बिल्कुल उनके जैसा नैचुरल दिखना आवश्यक था, जिसे मनोरंजन की दृष्टि से थोड़ा बदला गया है.

सवाल – सामाजिक मुद्दों पर बनी फिल्मों को तब तक लोग जानते है, जब तक उसका प्रमोशन होता है और फिल्म चलती है, इसके बाद कुछ योजनायें भी लागू होते है, लेकिन एक साल बाद लोग उसे भूल जाते है, ऐसे में इसे बनाये रखने के लिए क्या करने चाहिए?

जवाब – इसमें फिल्मों से अधिक वेब सीरीज कारगर होती है, क्योंकि ये डिजिटल पर बनी रहती है और लोग उसे कभी भी देख सकते है. साथ ही सीरीज होने की वजह से ये चलती रहती है और लोग तब तक समझ जाते है कि उन्हें करना क्या है.

सवाल – क्या इस प्रोसेस को चालू रहने के लिए संस्था की आवश्यकता नहीं है?

जवाब – कई संस्थाएं है, जो इन विषयों पर काम कर रही है, लेकिन ये चीज तब तक सफल नहीं होगी, जब तक लोगों की सोच नहीं बदलती. उनकी सोच को बदलने में ही अधिक समय जाता है. साफ-सफाई के बारें में पेरेंट्स को बचपन से बच्चों को सिखाना है. सोच बदलने से ही ऐसे काम में गति आती है. आगे काम चालू रहता है या नहीं उसके लिए निगरानी रखने की जरुरत है, तभी काम सफलतापूर्वक हो सकेगा.

सवाल –बंगाल की फिल्म इंडस्ट्री में हीरो मैटर वाली फिल्में कम होने की वजह क्या है?

जवाब – इसकी वजह कहानियों और कंटेंट का बदलना है, जिसमें सभी को एक्टिंग का मौका मिलता है. अभी कोई अकेला हीरोनहीं है. जोड़ियों का कांसेप्ट भी अब बदल चुका है, जैसे उत्तमकुमार सुचित्रा सेन, काजोल, शाहरुख़ आदि.

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वनराज के कारण होगा अनुपमा-अनुज का झगड़ा, भड़काने का काम करेगी बरखा

हाल ही में सीरियल अनुपमा (Anupama) की किंजल यानी एक्ट्रेस निधि शाह (Nidhi Shah Aka Kinjal) के शो छोड़ने की खबरों से फैंस हैरान थे. हालांकि एक्ट्रेस ने इन खबरों को केवल अफवाह बताया था. इसी बीच सीरियल में नया ट्विस्ट देखकर दर्शक एक्ट्रेस निधि शाह के एक्टिंग की तारीफ करते नजर आ रहे हैं. लेकिन मेकर्स सीरियल में एक और धमाका करते हुए नजर आने वाले हैं. आइए आपको बताते हैं क्या होगा शो में आगे (Anupama Latest Update)…

अनुपमा पर बरसा वनराज

 

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अब तक आपने देखा कि किंजल के गिरने पर अनुपमा और अनुज उसे अस्पताल लेकर जाते हैं. वहीं कपाड़िया हाउस में वनराज हंगामा खड़ा करता हुआ नजर आता है. जहां से आने के बाद अनुपमा पर भी वह गुस्सा करते हुए नजर आता है. दरअसल, किंजल का बच्चा सुरक्षित होने के बावजूद अनुपमा रोते हुए वनराज से माफी मांगती है. लेकिन वनराज गुस्से में उसे भला बुरा कहता है. हालांकि वनराज उसे चेतावनी देता है कि अनुपमा से ऐसे बात ना करे.

अनुज-वनराज की होगी बहस

 

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अपकमिंग एपिसोड में आप देखेंगे कि वनराज, अनुज की चेतावनी से और भड़क जाएगा. वहीं अनुपमा को ताने मारते हुए कहेगा कि वह एक चम्मच भी नहीं भूलती थीं जब वह एक मध्यम वर्ग की बहू थीं और अब एक अमीर बहू के रूप में, वह असफल रहीं. इसी के साथ वह अनुज के साथ झगड़ा कर बैठेगा. हालांकि बापूजी के कहने पर वह कपाड़िया हाउस से चला जाएगा. लेकिन घर जाकर वह किंजल पर बरसता नजर आएगा.

अनुज को भड़काएगी बरखा

 

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इसके अलावा आप देखेंगे कि अनुज का वनराज पर गुस्सा बढ़ जाएगा. वहीं बरखा आग में घी डालते हुए अनुपमा से कहेगी कि अनुज की प्रतिक्रिया सही है. वनराज को उस पर चिल्लाना नहीं चाहिए था और ड्रामा नहीं करना चाहिए था क्योंकि उसे डर है कि वनराज अक्सर बच्चों के साथ यहां आ जाता और अक्सर नाटक करता है. इसी के साथ अनुज, अनुपमा से कहेगा कि बेहतर रहेगा कि वह किंजल को घर वापस छोड़ दें. दूसरी तरफ अनुज-अनुपमा के झगड़े को बरखा हवा देगी और इसी के चलते अनुज, अनुपमा से बार-बार वनराज का बचाव करना बंद करने और शाह परिवार से कुछ समय के लिए दूर रहने के लिए कहेगा. हालांकि अनुपमा, अनुज से कहेगी कि वह बड़ों की लड़ाई बच्चों के जीवन को प्रभावित नहीं होने देगी. अब देखना होगा कि अनुज-अनुपमा के बीच दूरियां बढ़ाने के लिए बरखा कौनसी नई चाल चलती है.

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प्रहरी: भाग 3- क्या समझ पाई सुषमा

नवंबर की धूप में गार्डन फूलों से लहलहा रहा था. शनिवार की छुट्टी होने के कारण अपने छोटे बच्चों को साथ ले कर आए बहुत से युवा जोड़े वहां घूम रहे थे. दिल्ली शहर के छोटे मकानों में रहने वाले मध्यवर्गीय परिवारों के बच्चे खुली हवा के लिए तरसते रहते हैं. अब इस समय यहां मैदान में बड़ी ही मस्ती से होहल्ला मचाते एकदूसरे के पीछे भाग रहे थे. बच्चों की इस खुशी का रंग उन के मातापिता के चेहरों पर भी झलक रहा था.

विभा का मन भी यहां की रौनक में डूब कर हलका हो उठा. सब से बड़ी बात तो यह थी कि तपन और सुषमा के बीच कल वाला तनाव खत्म हो गया था और वे दोनों सहज हो कर आपस में बातें कर रहे थे. एक तरफ पेड़ की छाया में साफ जगह देख कर सुषमा ने दरी बिछा दी. ठंडी बयार में फूलों की महक घुली थी. विभा को यह सब आनंद दे रहा था. दरी पर बैठी वह मन ही मन सोच रही थी कि आने वाले दिनों में शायद तपन और सुषमा भी जब यहां आएंगे तो नन्हें हाथ उन की उंगलियां थामे होंगे. यह सोच कर विभा का दिल एक सुखद एहसास से भीग उठा. अचानक सुषमा की आवाज से उस की विचारशृंखला टूटी, ‘‘मांजी, यह चाय ले लीजिए.’’

अचानक तपन बोला, ‘‘सुषमा, वह देखो, उधर शंकर और सविता बैठे हैं. चलो, मिल कर आते हैं.’’ किंतु सुषमा बोली, ‘तुम हो आओ, मैं यहां मांजी के साथ ही बैठूंगी.’’

‘‘ठीक है,’’ कह कर तपन उधर चला गया. विभा ने एक गहरी नजर सुषमा पर डाली, जो घुटनों पर सिर रखे चुप बैठी थी. चाय पी कर गिलास नीचे रखते ही विभा उस के पास खिसक आई और पूछा, ‘‘तुम गई क्यों नहीं? शायद उस के दफ्तर का कोई दोस्त है.’’

‘‘क्या फायदा मांजी, फिर झगड़ाझंझट करेंगे. अब आप ही बताइए, इन के मित्र मुझ से बात करें तो क्या मैं अशिष्ट बन जाऊं? उन के साथ हंस कर बात करूं तो ये नाराज, और न करूं तो वे लोग बुरा मानेंगे. मैं तो बीच में फंस जाती हूं न. अब तो मैं इन के साथ पार्टियों में जाना भी बंद कर दूंगी, घर पर ही ठीक हूं,’’ सुषमा थोड़ा तल्खी से बोली.

विभा कुछ देर उस के खूबसूरत चेहरे को देखती रही जहां एक आहत सी अहं भावना की परछाईं थी. फिर कुछ सोच कर समझाते हुए बोली, ‘‘तपन तुम्हें बहुत चाहता है, इसी से उस में तुम्हारे प्रति यह भावना है. पति के दिल की एकछत्र स्वामिनी होना तो बड़े गर्व की बात है.’’

‘‘वह तो ठीक है,’’ सुषमा का चेहरा शर्म से लाल हो गया, ‘‘किंतु जब औरों को देखती हूं तो लगता है कि उन्हें इस बात की चिंता ही नहीं कि उन की पत्नियां कहां, किस से बातें कर रही हैं.’’ ‘‘तब तो तुम यह भी देखती होगी कि वही लोग कभीकभी शराब के नशे में डूबे उन से गलत व्यवहार भी करते होंगे?’’

‘‘यह सब तो कभीकभी चलता है, इन पार्टियों में सभी तरह के लोग होते हैं.’’

‘‘तो फिर अब इस बात को भी समझो कि तुम्हारे साथ किसी का गलत व्यवहार तपन को कभी सहन न होगा. विवाहित जीवन में पति का अंकुश पत्नी पर और पत्नी का अंकुश पति पर होना बहुत जरूरी है. यही एक सफल दांपत्य जीवन का मंत्र है, जहां पतिपत्नी दोनों एकदूसरे को गलत कामों के लिए टोक सकते हैं, एकदूसरे को सही राह दिखा सकते हैं. किंतु इस के लिए विश्वास की मजबूत नींव जरूरी है, जिस में एकदूसरे के इस टोकने को गलत न समझा जाए, बल्कि उस के मूल में छिपी सही विचारधारा को समझा जाए, सुषमा, इस अधिकार को एक का दूसरे पर शासन मत समझो बल्कि एक की दूसरे के प्रति अतिशय प्रेम की अभिव्यक्ति समझो. ‘‘यदि तुम्हें वह सदैव अपनी नजरों के सामने रखना चाहता है तो यह तुम्हारा बहुत बड़ा सम्मान है. पति जिस स्त्री का सम्मान करता है, उस का सम्मान सारी दुनिया करती है, इसे हमेशा याद रखना.’’

इतना सबकुछ एक सांस में ही कह चुकने के बाद विभा खामोश हो गई. उस की बातें बड़े गौर से सुनती सुषमा के सामने विवाहिता जीवन का एक नया ही रहस्य खुला था कि आज के इस नारीमुक्ति युग में पति का पत्नी पर अपना अधिकार साबित करना कोई अमानवीय काम नहीं बल्कि उस के अखंड प्रेम का संकेत है.

सुषमा सोचने लगी कि न जाने उस की कितनी सहेलियां अकेली घूमतीफिरती हैं, अकेली ही पार्टियों में भी जाती हैं. किंतु सच तो यह है कि सुषमा को उन पर बड़ी दया आती है, क्योेंकि अकसर ही उन्हें किसी न किसी पुरुष के गलत व्यवहार का शिकार होना पड़ता है, जिस से उन को बचाने वाला वहां कोई नहीं होता. लेकिन उस के साथ तो उलटा ही है, किसी की टेढ़ी तो क्या, सीधी नजर भी उस पर पड़े तो पति सह नहीं पाता. हमेशा ढाल बन कर खड़ा हो जाता है. इसलिए तो आज तक कभी किसी पार्टी में उस के साथ गलत व्यवहार करने की किसी की हिम्मत नहीं हुई. बुरे से बुरा व्यक्ति भी उस के सामने आ कर इज्जत से हाथ जोड़ कर उसे ‘भाभीजी’ ही कहता है. फिर वह खुद भी तो किसी को ऐसा ओछा व्यवहार करने का मौका नहीं देती.

किंतु उस की मर्यादा का सजग प्रहरी तो तपन ही है न, उस का अपना तपन, जो इन पार्टियों में हर समय साए की तरह उस के साथ रहता है. अकसर उस के दोस्त हंसते भी हैं और कहते भी हैं, ‘बीवी को कभी अकेला छोड़ता ही नहीं.’ किंतु तपन उन के हंसने या मजाक बनाने की कतई परवा नहीं करता. ये विचार मन में आते ही सुषमा को अपने तपन पर बहुत ज्यादा प्यार आया. उस की इच्छा हो रही थी कि दौड़ कर जाए और दूर खड़े तपन के गले में अपनी बांहें डाल दे और कहे, ‘अब मैं तुम्हारी किसी बात का बुरा नहीं मानूंगी. मांजी ने मेरी आंखों से नासमझी का परदा उठा दिया है. तुम्हारी नाराजगी का भी सम्मान करूंगी, क्योंकि वह मेरा सुरक्षाकवच है. मेरे अब तक के व्यवहार के लिए मुझे माफ कर दो.’

मन ही मन इन विचारों में घिरी सुषमा का चेहरा विश्वास की आभा से जगमगा रहा था. आंखों में मानो प्यार के दीए जल उठे थे. बड़ी बेसब्री से वह तपन के आने की प्रतीक्षा कर रही थी. सुषमा सोच रही थी कि कैसी अजीब बात है कि जब तक वह घटनाओं से खुद को जोड़े हुए थी, कुछ भी साफ देख, समझ नहीं पा रही थी, किंतु जब घटनाओं से अलग हो कर उस ने खुद को तटस्थ किया तो सबकुछ शीशे की तरह साफ हो गया. उस के अपने ही दिल ने पलभर में सहीगलत का फैसला कर लिया.

स्किन मौइस्चराइज न करें ये गलतियां

सर्दियां हों या गरमियां, स्किन को अच्छी तरह मौइस्चराइज करते रहना बहुत जरूरी होता है ताकि स्किन अंदर से हाइड्रैट हो कर आप को ड्राइनैस की समस्या से तो छुटकारा मिले ही, साथ ही स्किन ग्लोइंग भी नजर आए क्योंकि हाइड्रेशन के अभाव में स्किन ड्राई होने के साथसाथ एक्ने, टैनिंग, रैश इत्यादि की भी समस्या हो सकती है जबकि मौइस्चराइज करने से हैल्दी स्किन सैल्स भी प्रमोट होते हैं.

लेकिन कई बार हम स्किन को ज्यादा हाइड्रेट करने के चक्कर में स्किन को ओवर मौइस्चराइज करना शुरू कर देते हैं, जिस का परिणाम यह होता है कि स्किन खुद से कम मौइस्चर प्रोडूयस करना शुरू कर देती है. ऐसे में स्किन पर क्रीम्स की लेयर के नीचे की स्किन ड्राई हो जाती है. ऐसे में इस बात का ध्यान रखने की जरूरत होती है कि स्किन को मौइस्चराइज जरूर करें, लेकिन जरूरत से ज्यादा नहीं.

आइए, जानते हैं इस संबंध में ब्यूटी ऐक्सपर्ट नमिता से कि स्किन को ज्यादा मौइस्चराइज करने के क्या नुकसान हो सकते हैं:

क्लोग पोर्स की समस्या

जब भी हम स्किन पर ड्राइनैस को खत्म करने के लिए ओवर मौइस्चराइजर का इस्तेमाल करते हैं तो यह पोर्स को क्लोग कर देता है क्योंकि ज्यादा मौइस्चराइजर स्किन पर जम जाता है, साथ ही इस का हैवी टैक्सचर स्किन को ब्रीथ करने में जब मदद नहीं करता है तो पोर्स क्लोग हो जाते हैं और क्लोग पोर्स से औयल और डैड स्किन सैल बाहर नहीं निकल पाते हैं जो एक्ने, ब्रेकआउट्स का कारण बनने के साथसाथ आप की खूबसूरती को कम करने का काम करता है. इसलिए स्किन पर बैस्ट मौइस्चराइजर लगाने के साथसाथ उस की क्वांटिटी का भी खासतौर पर ध्यान रखने की जरूरत होती है.

स्किन ड्राइनैस की समस्या

भले ही यह आप को सुनने में थोड़ा अजीब लगे, लेकिन यही सच है कि स्किन पर ओवर मौइस्चराइजर का इस्तेमाल करने से स्किन पर ड्राइनैस की समस्या हो जाती है, साथ ही स्किन डल व सैंसिटिव भी हो जाती है.

इस का कारण यह है कि चेहरे पर ज्यादा मौइस्चराइजर अप्लाई करने से आप की त्वचा का तेल उत्पादन कम होने लगता है, जो नैचुरली स्किन को ड्राई बनाने का काम करता है, जिस से स्किन तब तक तो सौफ्ट रहती है, जब तक उस पर मौइस्चराइजर की लेयर होती है, लेकिन जैसे ही वह हटती है तो स्किन ड्राई लगने लगती है क्योंकि स्किन का नैचुरल औयल जो खत्म हो जाता है. यह ड्राइनैस स्किन की रौनक को गायब करने के साथसाथ स्किन को सैंसिटिव बनाने का भी काम करती है जो और भी ढेरों स्किन प्रौब्लम्स का कारण बन सकती है.

एक्ने की प्रौब्लम

हेयर फौलिकल्स जब औयल व डैड स्किन सैल्स से भर जाते हैं, तो स्किन की स्थिति गंभीर हो जाती है, जो एक्ने के साथसाथ उन में जलन, इचिंग का भी कारण बनता है. ये एक्ने आप के पूरे चेहरे के नूर को चुराने का काम करते हैं. इसलिए स्किन को हाइड्रेट करने के लिए जरूरत से ज्यादा मौइस्चराइजर अप्लाई करने से बचें.

बंपी स्किन

हर महिला चाहती है कि उस की स्किन सौफ्ट हो. लेकिन जानेअनजाने में हमारी स्किन केयर गलतियों की वजह से स्किन पर डैड स्किन सैल्स जमा होने के साथसाथ स्किन रूखी भी होने लगती है जो न तो छूने पर अच्छी लगती है और न ही दिखने में. इस का एक कारण स्किन पर ओवर मौइस्चराइजर अप्लाई करना भी होता है. इस के कारण स्किन रिन्यूअल प्रोसेस भी स्लो हो जाता है, जो समय से पहले बूढ़ा बनाने का काम करता है, साथ ही बंपी स्किन पर इचिंग पैदा करने का काम करता है, जिसे समय रहते कंट्रोल करना जरूरी होता है.

रिड्यू नैचुरल ब्यूटी

जो बात नैचुरल ब्यूटी में होती है वह बात मेकअप में नहीं. ऐसे में जब हम स्किन को उस की जरूरत से ज्यादा मौइस्चराइज करना शुरू कर देते हैं तो वह अंदर से ड्राई होने के कारण अपनी नैचुरल ब्यूटी खोने लगती है.

इस से स्किन में मेकअप प्रोडक्ट्स भी आसानी से ऐब्जौर्ब नहीं हो पाते हैं जो स्किन को भद्दा दिखाने का काम करते हैं. ऐसे में स्किन की नैचुरल खूबसूरती को बरकरार रखने के लिए अच्छा व कम मात्रा में ही मौइस्चराइजर लगाने की जरूरत होती है ताकि वह स्किन में अपना असर दिखा सके.

चिपचिपे मौइस्चराइजर से बचें

स्किन को मौइस्चराइज करने का यह मतलब नहीं कि आप स्किन पर ग्रीसी, स्टिकी स्किन केयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करें क्योंकि ऐसे प्रोडक्ट्स स्किन में आसानी से ऐब्सौर्ब होने के बजाय स्किन की सतह पर जमा होने के साथसाथ पोर्स को क्लोग करने का काम करते हैं, साथ ही स्टिकी स्किन पर आसानी से धूलमिट्टी जमा होने के साथ ये स्किन पर एक्ने, ऐलर्जी का कारण भी बनते हैं. इसलिए जब भी मौइस्चराइजर का चुनाव करें तो देखें कि वह आप की स्किन टाइप पर सूट करने के साथसाथ उस में स्किन को इरिटेट करने वाले इनग्रीडिएंट्स न हों.

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बगीचे से घास-फूस हटाने के 9 नेचुरल टिप्स

अगर आपके घर के गार्डन में बहुत सारी घास उग आई है और आप हर बार उसके कटवाते हैं लेकिन कोई फायदा नहीं होता है और वह फिर से उग आती है. ऐसे में आपको कुछ ऐसे तरीकों को अपनाना चाहिए, जो उस घास को जड़ से खत्‍म कर दें. इन घासों की जड़ें बहुत मजबूत होती है, इन्‍हे खींचकर निकालने पर भी ये खत्‍म नहीं होती है और दुबारा निकल आती हैं.

अगर आप कुछ घरेलू उपाय अपनाते हैं तो इन घासों को समाप्‍त किया जा सकता है, वरना इन घास के आपके गार्डन के पौधों को नुकसान हो सकता है और कई बार पालतू जानवर इन्‍हे चबा लेते हैं जिससे इन्‍हे नुकसान पहुंचता है.

1. सिरका

अगर आप घरेलू सिरके का इस्‍तेमाल इन घासों को खत्‍म करने के लिए करें तो यह घास जड़ से खत्‍म हो जाएगी. इसके लिए एक मग में पानी लें, उसमें एक कप सिरका डालें और उसे घास उखाड़ने के बाद डाल दें. इसके बाद घास नहीं निकलेगी. ऐसा दो बार करने पर भी वहां से खरपतवार हटा जाएगी.

2. नमक

अगर किसी पौधे के पास घास उग आती है तो हटाने के लिए उसकी जड़ों में नमक डाल दें, इससे उसकी जड़े गल जाएगी और वह घास अपने आप हट जाएगी.

3. ब्‍लीच

ब्‍लीच का इस्‍तेमाल आप घास को हटाने के लिए भी कर सकते हैं. इसके लिए आपको ब्‍लीच को घास की जड़ों में यूं ही पाउडर रूप में डाल देना चाहिए, जड़े अपने आप कट जाती हैं और घास सूख जाती है.

4. बेकिंग सोडा

घास के ऊपर बेकिंग सोडा डाल दें. इसे डालने से घास झुलस जाएगी और आपके गार्डन की मिट्टी को भी कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा. गर्मियों के दिनों में उगने वाली घास पर हमेशा बेकिंग सोडा छिड़कना ही चाहिए.

5. एल्‍कोहल

घास को हटाने के लिए उस एल्‍कोहल डाल दें, इससे वह पूरी तरह झुलस जाएगी और दुबारा पनप नहीं पाएगी.

6. कॉर्न ग्‍लूटेन मील

क्‍या आपको अपने गार्डन से हमेशा के लिए घास को निकालना है तो आप कॉर्न ग्‍लूटेन का इस्‍तेमाल करें. यह लॉन को खरपतवार रहित बनाता है.

7. अखबार

आपको कुछ अजीब सा लग रहा होगा, लेकिन यह सही बात है कि घास को अगर आप अपने गार्डन से हटाना चाहना है तो अखबार को फोल्‍ड करके मोटी सी लेयर बनाकर घास के ऊपर रख दें. इससे उसमें प्रकाश संश्‍लेषण नहीं होगा और वह सूख जाएगी.

8. जमीन को ढ़ंकने वाले पौधे

ग्राउंड कवर प्‍लांट, मिट्टी को उपजाऊ बनाएं रखती है और घास को भी हटा देती है. यह घास का जड़ काट कर देती है.

9. गर्म पानी

पानी को अच्‍छी तरह खौला लें और खौलते हुए पानी को घास के ऊपर डाल दें. इससे आपकी लॉन की घास अपने आप झुलस कर हट जाएगी.

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तो तकरार से नहीं पड़ेगी रिश्ते में दरार

पतिपत्नी एकदूसरे के जीवनसाथी होने के साथसाथ एकदूसरे के दोस्त भी होते हैं. लेकिन भले ही दोनों एकदूसरे के साथ एक ही छत के नीचे रहते हैं, फिर भी बहुत सी चीजों में उन के विचार नहीं मिलते हैं. कभी वे नेचर में अलग होते हैं, तो कभी उन का लाइफस्टाइल एकदूसरे से मेल नहीं खाता है, जिस वजह से उन के बीच नोकझंक होनी शुरू हो जाती है और कई बार तो छोटीछोटी बातों पर यह झगड़ा इतना अधिक बढ़ जाता है कि रिश्ता टूटने तक की नौबत आ जाती है.

ऐसे में दोनों को रिश्ते में मधुरता बनाए रखने के लिए एकदूसरे की हैबिट्स को इग्नोर करने या फिर उन से इरिटेट होने के बजाय उन्हें आपसी समझ व प्यार से अपनाने की जरूरत

होती है ताकि रिश्ते में प्यार बरकरार रह सके वरना यह तकरार कब रिश्ते में दरार का कारण बन जाएगी, पता नहीं चलेगा. आइए, जानते हैं कैसे करें एडजस्टमैंट:

बैड पर टौवेल छोड़ने की आदत

वैसे तो यह हैबिट किसी की भी अच्छी नहीं होती है, लेकिन अब कर भी क्या सकते हैं. अगर आप का पार्टनर नहाने के बाद गीला टौवेल बैड पर छोड़ दे तो बजाय झगड़ने के आप उन्हें प्यार से समझएं कि माई स्वीटहार्ट, अगर तुम रोज गीला टौवेल बैड पर छोड़ दोगे तो इस से टौवेल में नमी बरकरार रहने से तुम्हें बैक्टीरिया के इन्फैक्शन का खतरा हो सकता है साथ ही इस से बैड पर भी नमी रहने से हम भी बीमार हो सकते हैं.

इसलिए अपनी इस आदत को अपनी हैल्थ के लिए बदल लो. हो सकता है कि आप का यों प्यार से समझना काम कर जाए क्योंकि कई बार झगड़े की जगह प्यार में वह बात होती है, जो अपनों की बुरी से बुरी आदत को बदल देती है. अगर फिर भी पार्टनर न सुधरे तो आप ही बैड से टौवेल को उठा कर सही जगह रख दें क्योंकि यही है अच्छे रिश्ते की पहचान.

अगर आप को पसंद हों स्टाइलिश कपड़े

आज का जमाना स्टाइलिश है. ऐसे में हरकोई खुद को स्टाइलिश दिखाना चाहता है. लेकिन जरूरी नहीं कि आप का पार्टनर आप को स्टाइलिश कपड़ों में देखना पसंद करे. उसे आप सिंपल लुक में ज्यादा पसंद आती हों या फिर ट्रैडिशनल आउटफिट्स में. ऐसे में आप अगर रोज उन से स्टाइलिश कपड़े पहनने को ले कर बहस करेंगी तो आपस में मनमुटाव पैदा होगा.

इस से बेहतर है कि आप उन की पसंद के आउटफिट्स तो पहनें ही, साथ ही आप उन्हें प्यार से, अपने रोमांस से अट्रैक्ट करते हुए उसे समझने की कोशिश करें कि स्टाइलिश कपड़े पहनने में कोई बुराई नहीं है, बल्कि आज हरकोई जमाने के साथ चल कर खुद को अपडेटेड रखना चाहता है. अगर पार्टनर की समझ में आ जाए तो अच्छा वरना आप उस के पीछे स्टाइलिश कपड़े पहन कर अपने इस शौक को पूरा कर सकती हैं.

लेकिन यह भी जरूरी है कि आप उसे धीरेधीरे इस तरह समझने की कोशिश करें कि उसे अपनी गलती का एहसास भी हो जाए और आपस में तकरार भी न हो.

जब हो पति को इंग्लिश मूवीज का शौक

अगर दोनों पार्टनर की हैबिट्स मैच करें तो इस से अच्छा हो ही क्या सकता है. लेकिन अगर न करें तो दिक्कत तो काफी होती ही है, लेकिन फिर भी जरूरी होता है कि एकदूसरे की हैबिट्स को खुशीखुशी अपनाने की. जैसे प्रवीण को इंग्लिश मूवीज देखने का बहुत शौक था, लेकिन उस की पत्नी दीप्ति को सीरियल्स व हिंदी मूवीज पसंद थीं, जिस कारण दोनों कभी साथ बैठ कर टीवी नहीं देखते थे और साथ ही इस बात पर दोनों में कई बार कहासुनी भी हो जाती थी.

ऐसे में प्रवीण ने तो कभी अपनी पत्नी की पसंद की मूवी उस के साथ बैठ कर देखने का मन नहीं बनाया, लेकिन दीप्ति ने सोचा कि ऐसा कब तक चल सकता है, इसलिए मु?ो भी खुद में इंग्लिश मूवीज के प्रति इंटरैस्ट पैदा करना होगा. धीरेधीरे उस ने प्रवीण के साथ इंग्लिश मूवीज देखना शुरू किया और फिर धीरेधीरे ऐंजौय करने लगी. इस से मूवी के मजे के साथसाथ दोनों साथ में एकदूसरे की कंपनी को भी ऐंजौय करने लगे. अगर इसी तरह सब पार्टनर एकदूसरे को समझ कर चलें तो रिश्ते में मधुरता आने के साथसाथ आपसी समझ भी विकसित होती है.

न हो आउटिंग पर जाने का शौक

हो सकता है कि आप के पार्टनर को अपनी छुट्टी को घर पर ही स्पैंड करने की आदत हो और आप उस के बिलकुल उलट हों यानी आप को आउटिंग पर जाना बहुत अच्छा लगता हो. ऐसे में आप अपने पार्टनर को कहीं घूमने के लिए मनाएं कि इस से मूड व माइंड दोनों फ्रैश होने के साथसाथ एक ही तरह की दिनचर्या से चेंज भी मिलता है.

ऐसे में आप खुद कहीं आउटिंग पर जाने के लिए बुकिंग करवाएं, पूरी तैयारी करें. हो सकता है कि आप की यह कोशिश आप के पार्टनर में घूमने के प्रति थोड़ाबहुत शौक पैदा कर दे. लेकिन कोशिश व मनाने की मेहनत तो आप को ही करनी होगी.

अगर फिर भी आप को लगे कि मेहनत करने का कोई फायदा नहीं है तो आप खुद ही अकेले या फिर फ्रैंड्स के साथ आउटिंग के लिए निकल जाएं क्योंकि पार्टनर पर जोरजबरदस्ती करने का कोई फायदा नहीं है. इस से आप जबरदस्ती पार्टनर को आउटिंग पर तो ले जाएंगी, लेकिन यह आउटिंग मजा नहीं बल्कि सजा जैसी लगेगी.

बातबात पर रिएक्ट करने की आदत

कुछ पार्टनर्स की यह आदत होती है कि वे बिना किसी बात के गुस्सा करने लगते हैं या फिर छोटीछोटी बात पर रिएक्ट करने लगते हैं, जिस से आपस में तनाव बढ़ने के साथसाथ इस का प्रभाव धीरेधीरे रिश्ते पर पड़ने के कारण रिश्ता कमजोर पड़ने लगता है. ऐसे में रिश्ते की नींव को मजबूत बनाने के लिए जरूरी है कि दोनों पतिपत्नी में से किसी एक को पार्टनर के रिएक्ट करने पर खुद को चुप रखने की आदत डालनी होगी वरना ऐसे वक्त में बेवजह की बहस रिश्ते को वीक बनाने का काम करेगी.

लेकिन इस का मतलब यह नहीं कि आप हमेशा ही चुप रहें बल्कि जब पार्टनर शांत हो जाए तो उसे समझएं कि आप का इस तरह से रिएक्ट करना आप की पर्सनैलिटी को खराब करने के साथसाथ हम दोनों को एकदूसरे से दूर ले जाने का काम करेगा, इसलिए खुद को शांत रखना सीखें. हो सकता है कि आप की इन बातों का असर पार्टनर पर हो जाए वरना आप की चुप्पी ही इस प्रौब्लम का समाधान है.

जब बातबात पर टोके

टोकाटोकी किसी को भी पसंद नहीं होती है. लेकिन अगर आप की पार्टनर आप को हर छोटीछोटी बात पर टोके कि तुम ने यह काम सही नहीं किया, तुम ऐसे कैसे कर सकते हो, तुम्हें यह नहीं आता, तुम ने किचन में काम क्या किया कि उसे गंदा कर के मेरे लिए ही काम को बढ़ा दिया. ऐसे में अगर आप उस की हर बात पर प्रतिक्रिया देंगी तो हर बार बात लड़ाई में बदल जाएगी. इस से अच्छा है कि आप उसे प्यार से समझएं कि जरूरी नहीं हर बात पर टोक कर ही समझया जाएं बल्कि प्यार से भी चीजों को सुलझया जा सकता है और हर बार टोकना किसी को भी बुरा लग सकता है और तुम अपनी इस टोकने की आदत को धीरेधीरे सुधारने की कोशिश करो.

इस से हो सकता है कि वह आप की इमोशनल बातों से खुद को सच में सुधारने की कोशिश करे. अगर न सुधारे तो आप थोड़े टाइम के लिए उस से कम बात करना शुरू कर दें क्योंकि कई बार गलती का एहसास करवाने के लिए रिश्ते में थोड़ी दूरी बनाना भी जरूरी हो जाता है.

घर का खाना हो पसंद

हर इंसान की अपनी पसंद होती है. किसी को घर में रहना पसंद होता है, तो किसी को आउटिंग करना, किसी को घर का खाना पसंद होता है, तो किसी को बाहर का. ऐसे में हो सकता है कि आप के पार्टनर को घर का खाना पसंद हो और आप को बाहर का, तो इस बात पर आप दोनों आपस में लड़ने के बजाय सहमति बनाएं कि हफ्ते में 6 दिन घर का खाना बनेगा तो एक दिन हम लोग बाहर जा कर खाना खाएंगे. इस से दोनों की बात भी रह जाएगी और इस वजह से बेवजह की लड़ाई से भी बचा जा सकता है.

पार्टनर को हो दाड़ी रखने का शौक

हर कोई चाहता है कि उस का पार्टनर हैंडसम लगे. लेकिन हर लड़के की अपनी आदत होती है कि वह खुद को कैसा रखना पसंद करता है. किसी को सिंपल कपड़ों में रहना पसंद होता है, तो किसी को काफी बनठन कर. किसी को शेव कर के अच्छा लगता है तो किसी को कईकई दिनों तक बिना शेव करे. ऐसे में अगर आप पार्टनर को रोज शेव बनाने के लिए टोकती रहेंगी तो खुद भी परेशान रहेंगी और पार्टनर भी आप से चिढ़ने लगेगा. इस से अच्छा है कि उस की इस आदत को आप खुशीखुशी स्वीकार करें. लेकिन आप खुद को टिपटौप रखना न छोड़ें.

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मेरी बस्ट बहुत ढीली हो गई है, मैं इसे टाइट करने के लिए क्या करूं?

सवाल-

मेरी उम्र 55 साल है. मेरी बस्ट बहुत ढीली हो गई है. मैं इसे टाइट करने के लिए क्या करूं?

जवाब-

उम्र के साथसाथ बस्ट ढीला होनी शुरू हो जाती है. अगर इस पर ध्यान न दिया जाए तो वह लटक भी सकती है. आप रोज किसी अच्छे औयल या क्रीम से बस्ट की दोनों हाथों से ऊपर की तरफ मसाज करें. इस के अलावा घर में कम से कम हफ्ते में एक बार यह ट्रीटमैंट भी कर सकती हैं. इस के लिए आप को बंदगोभी लेनी है. बंदगोभी के पत्तों को अलगअलग करें और थोड़ी देर पानी में भिगो दें. फिर थोड़ी देर फ्रिज में रख दें. फिर उन्हें बस्ट पर चारों तरफ लगा कर सीधी लेट जाएं. इस से बस्ट टाइट हो जाती है. किसी पार्लर में जा कर भी ट्रीटमैंट ले सकती हैं. इस के लिए वैक्यूम ट्रीटमैंट किया जाता है और खास तरीके से मसाज भी की जाती है. आजकल बोटोक्स, डर्मा फिलर्स से भी बस्ट को टाइट किया जाता है.

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बढ़ती उम्र का प्रभाव सब से पहले चेहरे पर ही दिखाई देने लगता है. चेहरे पर कब महीन रिंकल्स उभर आते हैं, इस का पता ही नहीं चलता. ये रिंकल्स चेहरे की चमक कम कर देते हैं, इसलिए ऐक्सपर्ट्स मानते हैं कि रिंकल्स को अवौइड नहीं करना चाहिए. रिंकल्स ही कुछ समय बाद एजिंग में बदलने लगते हैं. अकसर लोग 30-35 की उम्र के बाद ही रिंकल्स की समस्या को ले कर ऐक्सपर्ट्स के पास जाते हैं, लेकिन तब तक ट्रीटमैंट के लिए देर हो चुकी होती है. तब ट्रीटमैंट से सिर्फ 30% तक ही फायदा होता है. अगर आप 20-22 साल की उम्र से ही स्किन की केअर करेंगी तो रिंकल्स की समस्या आएगी ही नहीं.?

रिंकल्स होने के कारण

ऐक्सपर्ट्स का मानना है कि रिंकल्स होने के 2 कारण होते हैं, जेनेटिक व ऐक्सटर्नल. यदि रिंकल्स जेनेटिक वजह से हैं तो उन्हें ठीक किया जा सकता है.

अगर आप अपने आहार संतुलन का पूरा ध्यान रखती हैं तो आप की त्वचा जवां नजर आती है. भोजन में विटामिन ए,सी और ई को बढ़ाने से त्वचा ग्लो करने लगेगी और टाइट भी रहेगी.

वजन कम होना: दूसरों की देखादेखी यदि डाइटिंग शुरू करने की सोची और खाना कम कर दिया है तो इस से भले ही शरीर कुछ स्लिमट्रिम हो जाए, पर वजन तेजी से कम होने के कारण आप की स्किन ढीली होने लगती है और स्किन पर रिंकल्स पड़ने लगते हैं, जो देखने में अच्छे नहीं लगते.

प्रदूषण: आप कहीं भी निकल जाइए, चारों तरफ प्रदूषण से जुड़ी ऐसी समस्याएं घेरे रहेंगी जो वास्तव में धीरेधीरे ऐसा बहुत कुछ चुरा लेती हैं जो बड़ी मुश्किल से हासिल होता है.

पूरी खबर पढ़ने के लिए- रिंकल फ्री स्किन रखें जवां

कृषि कानूनों की तरह न हो जाएं अग्निवीर

अग्निपथ स्कीम की चर्चा के दौरान भारतीय सेनाओं के अफसरों की चर्चा न के बराबर हो रही है. जहां लाखों युवा आम्र्ड फोसर्स में नौकरी पाने के अवसर खोने पर पूरे देश में ट्रेनें, बसें, भाजपा कार्यालय, सरकारी संपत्ति जला रहे हैं, करीब 1 लाख अफसरों वाली सेना योग्य व कर्मठ अफसरों की कमी से जूझ रही है.

छठे व 7वें सैंट्रल पे कमीशन में अफसरों के वेतन काफी बढ़ गए हैं और बहुत ही सुविधाएं भी आम्र्स फोर्र्सेस के अफसरों की मिल जाती है जो वेतन में नहीं गिनी जातीं, अफसरों में कमी सरकार के लिए एक चिंता बनी है.

अफसरों को लगता है कि वे जो जोखिम लेते हैं, जिस तरह उन के बच्चों को तबदिलों की वजह से भटकना पड़ता है, सेना को औफिस लाइफ क्लालिटी युवा सेवा में नौकरी पाने को बेचैन नहीं दिखते. जहां आम रोजमर्रा के लिए लाखों युवा कस कर मेहनत करते दिखते हैं, पढ़ेलिखे परिवारों के बच्चे आईआईटी, नीट, क्लैट, एमबीए आदि की तैयारी में लगे रहते हैं. भारतीय जनता पार्टी अपनी सोच पर बहुत गरूर करती है पर उस के नेताओं में अपने बच्चों को सेना में भेजने की रूचि न के बराबर है.

अग्निवीर योजना का एक लाभ जरूर है कि जो युवा 21 से 25 साल तक रिटायर होंगे उन की शादी हुई ही नहीं होगी और सैनिक विडोज तो कम दिखेंगे. जो सेना में रह जाएंगे उन की औरतें विधवा होने का पूरा रिस्क लेती है क्योंकि सेना जिंदगी भर की पेंशन देने का वादा करती हैं.

अफसरों के लिए आज भारी क्वालिकेशन की जरूरत है क्योंकि सेना भी अब आधुनिक होती जा रही है और जो समान विदेशों से खरीदा जहा रहा है, चाहे हवाई जहाज हो, सब मेरीम हो, टैंक हों, उन में कंप्यूटरों की जरूरत होती है. आज की लड़ाई में चाहे अफसर पीछे रहें, जोखिम बराबर का बना रहता है और पढ़ेलिखे कमीशंड औफिसर बच्चे की कोई रूचि नहीं दिखा रहे.

भारत का लैंड बौर्डर 15,000 किलोमीटर कम है और 7,500 किलोमीटर सी बौर्डर है और हर जगह फैसले लेने के लिए अफसर स्पौट पर चाहिए होते है पर सरकार की सुविधाओं की घोषणाओं, बड़ेबड़े विज्ञापनों के बावजूद ‘देशभक्त’ युवा इस नौकरी में ज्यादा आगे नहीं आ रहे. अफसरों में दलित व मुसलिम न के बराबर लिए जाते हैं और ये वर्ग पढ़लिख कर भी कोई रूचि नहीं दिखाते क्योंकि समाज की छूआछूत की भावना को आर्मी की खास ट्रेनिंग भी पूरी तरह गला नहीं पाती. अच्छे घरों के मांबाप अपने इललौते से बच्चों को इस जोखिम की नौकरी में भेजना ही नहीं चाहते. यह स्थिति अग्निवीरों से बिलकुल उलट है जहां लाखों सैनिक बच्चे के लिए टैस्ट की तैयारी में खुद को महिनों तक बुरी तरह थका रहे हैं. ऐसा अफसर बनने में न के बराबर हो रहा है. देश के अखबारों में सैनिक अफसर बनने की परिक्षाओं की कोिचग के विज्ञापन लगभग नहीं दिखते क्योंकि इस में बहुत कम का इंट्रस्ट है.

शौर्ट सर्विस कमीशन के अफसर आर्मी की ट्रेनिंग के बाद अक्सर रिटायर हो कर निजी सैक्टर में नौकरी पाने का मौका ढूंढऩे लगते हैं क्योंकि अब वे शहरों की जिंदगी का मजा लेना चाहते हैं और रेगिस्तान, पहाड़ी, दुर्गम या कोस्टल विरान इलाकों में खुश नहीं रहते. निजी सैक्टर बिना जोखिम वाली अच्छी नौकरियां शौर्ट सॢवस कमीशंड अफसरों को देना हैं और रिटायरमैंट लेना अक्लमंदी लगती है जबकि अग्निवीरों के लिए उल्टी रिटायरमैंट एक सूसाइड की तरह है.

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Anupama में मां का किरदार नहीं निभानी चाहती थी ‘किंजल’, कही ये बात

सीरियल ‘अनुपमा’ (Anupama) की कहानी जहां दिलचस्प मोड़ लेते हुए नजर आ रही है तो वहीं सीरियल से जुड़े स्टार्स के कारण शो सुर्खियों में हैं. जहां हाल ही में किंजल यानी एक्ट्रेस निधि शाह (Kinjal Aka Nidhi Shah) के शो छोड़ने की खबरें थीं तो वहीं अब एक्ट्रेस का दिया इंटरव्यू चर्चा में आ गया है. आइए आपको बताते हैं पूरी खबर…

शो छोड़ने की खबर को बताया अफवाह

 

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बीते दिनों ‘अनुपमा’ के सेट से किंजल उर्फ निधि शाह (Nidhi Shah) के ट्रैक को खत्म करने की खबर से फैंस निराश हो गए थे. हालांकि अब एक्ट्रेस निधि शाह ने इन खबरों को केवल अफवाह बताया है. दरअसल, एक इंटरव्यू में एक्ट्रेस निधि शाह ने कहा कि ये अफवाहें हैं और वो खुद सरप्राइज है कि ये खबरें किसने शुरू की, ‘मैं आगे बढ़ना चाहती हूं और मुझे उम्मीद है कि जल्द ही मुझे वेब शो, टीवी शो या फिल्म में एक अच्छा ऑफर मिलेगा.’

 

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मां के रोल को लेकर कही ये बात

 

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किंजल  के किरदार को लेकर एक्ट्रेस निधि शाह ने कहा कि शो में एक ही किरदार लंबे समय तक निभाना आसान नहीं है. इससे लंबे समय तक काम और सेहत पर बुरा असर पड़ता है. इसी के साथ वह महसूस करती है कि किसी को साथ बढ़ने की जरूरत है और बेहतर ऑफर खोजने की जरूरत है. वहीं शो में किंजल की प्रैग्नेंसी ट्रैक को लेकर एक्ट्रेस निधि शाह ने कहा कि वह टीवी पर मां की भूमिका नहीं निभाना चाहती. क्योंकि वह काफी छोटी है और उन्हें अनुपमा में प्रेगनेंसी के ट्रैक के बारे में कोई जानकारी नहीं थी. वहीं इस ट्रैक को लेकर आगे क्या होगा इसकी भी कोई जानकारी नहीं है. हालांकि अगर उन्हें कोई अच्छा प्रौजेक्ट मिला तो वह शो छोड़ने के लिए तैयार है और उन्हें उम्मीद है कि प्रोडक्शन उनके फैसले को समझ पाएगा.

बता दें, सीरियल में इन दिनों वनराज और अनुपमा के बीच लड़ाई देखने को मिल रही है. जहां पाखी के बर्ताव के कारण वनराज उसे कपाड़िया हाउस जाने से रोक रहा है तो वहीं बरखा के कारण किंजल के बच्चे को नुकसान पहुंचता नजर आ रहा है. वहीं अपकमिंग एपिसोड में वनराज, अनुपमा को उसके बच्चों से दूर करता हुआ नजर आएगा.

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