आपके बालों को नुकसान पहुंचाती है हीट, जानें कैसे

अगर बालों की सेहत काफी खराब है तो इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं और सबसे मुख्य कारण है ब्लीच, केमिकल्स और हीट का प्रयोग करना. अगर हेयर स्टाइलिंग प्रोडक्ट का काफी ज्यादा प्रयोग करती हैं तो इसका अर्थ है आपके बालों को काफी हीट मिल रही है और उन्हें इससे बहुत नुकसान पहुंच रहा है. ब्लो ड्रायर, स्ट्रेटनर, कर्लर का प्रयोग करना बालों के लिए बहुत ज्यादा नुकसान दायक कब हो सकता है बता रही हैं काव्या कृष्णन नायर डिजाइन इंजीनियर. आइए जानते हैं .

अगर हीट निकलने वाले प्रोडक्ट्स जैसे स्ट्रेटनर, ब्लो ड्रायर और कर्ल आयरन का ज्यादा प्रयोग कर रही हैं तो बालों की दशा काफी खराब होती नजर आ रही होगी. ऐसे कुछ उपकरणों में तो तापमान नियंत्रित करने का भी विकल्प नहीं होता है. कुछ टूल्स में 400 डिग्री फारेनहाइट से भी ज्यादा तापमान पहुंच जाता है. आपको यह लग रहा होगा कि तापमान जितना ज्यादा होगा उतना ही अधिक अच्छी स्टाइलिंग भी होगी. हाई हीट से आपके बालों के केराटिन स्ट्रैंड की शेप में बदलाव देखने को मिलता है. 300 डिग्री f से अधिक तापमान ए केराटिन बालों को बी केराटिन में बदल देते है. इससे बाल कमजोर हो जाते हैं और डेमेज होने का रिस्क भी काफी बढ़ जाता है. जब बालों का केराटिन पूरी तरह से पिघल जाता है तो मॉलिक्युलर लेवल की शेप बदल जाती है और इसे दुबारा ठीक नहीं किया जा सकता है.

डेमेज बालों में मॉइश्चर की होती है कमी

हीट मिलने से बालों में मॉइश्चर की कमी उत्पन्न होती है. आपके बाल अलग अलग बॉन्ड्स से बने होते हैं जिसमे 4% फैट, ऑयल, पिगमेंट्स और 17% पानी, 79% केराटिन प्रोटीन होते हैं. आपके बालों के अंदरूनी भाग को कॉर्टेक्स कहा जाता है. इसमें वॉटर मॉलिक्यूल्स होते हैं और यह केराटिन बाउंड से बंधे हुए होते हैं.

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जैसे ही बालों को हीट मिलती है तो उनमें मौजूद प्राकृतिक ऑयल उनसे निकल जाते हैं और वॉटर मॉलिक्यूल एवापोरेट हो जाते हैं. इससे बालों का प्रोटीन स्ट्रक्चर बदल जाता है. अधिक तापमान के कारण पानी जल्दी से सूख जाता है जिससे हर बाल का स्ट्रक्चर प्रभावित होता है. इससे बालों के क्यूटिकल्स क्रैक होने लगते हैं. इससे बालों की बाहरी परत और अधिक नुकसान झेलने के रिस्क से घिर जाती है.

जैसे ही बाल डेमेज होते हैं तो बालों की शिंगल्स खुल जाती हैं, इससे स्प्लिट एंड्स और उलझे हुए बाल अधिक देखने को मिल सकते हैं.

हीट से डेमेज हुए बालों को किस तरह मैनेज करें?

अगर एक बार आपके बालों का स्ट्रक्चर हीट द्वारा बदल जाता है तो ऐसा फिर हमेशा के लिए हो जाता है. इस स्थिति को मैनेज करने के बहुत कम ही ऑप्शन उपलब्ध होते हैं. आप अपने बालों को काटने से डेमेज को कम कर सकती हैं. अगर बाल अधिक ऊंचाई तक डेमेज हो गए हैं तो काफी ज्यादा कटवाने की जरूरत पड़ सकती है. अगर आप छोटे बाल नहीं करवाना चाहती हैं तो हर बार बालों के एंड को काट दें और अगली बार बाल बढ़ने का इंतजार करें.

अगर बाल पोरस हो गए हैं तो उनमें लीव इन कंडीशनर लगा सकती हैं. इससे बालों में मॉइश्चर सील होने में मदद मिलेगी जिससे बालों को सॉफ्ट महसूस होगा. ऐसे प्रोडक्ट्स का ज्यादा प्रयोग करें जिनमें केराटिन, सिल्क और व्हीट प्रोटीन जैसे इंग्रेडिएंट्स मिले हुए हों.

निष्कर्ष

बालों को डेमेज होने से बचाने के लिए हीट प्रोडक्ट्स का काफी कम प्रयोग करें और अगर करना चाह भी रही हैं तो उनका तापमान 200 या 300 डिग्री एफ से अधिक न रखे. इसके साथ ही हीट प्रोटेक्टेंट स्प्रे का प्रयोग जरूर करें.

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एक्सरसाइज काे लिए सबसे अच्छा औप्शन है साइकिलिंग

शारीरिक फिटनैस को ले कर हमेशा यह उलझन रही है कि कौन सी गतिविधियां सुडौल और छरहरे बदन के लिए मददगार हैं. हम में से ज्यादातर लोग बाहर घूमने से परहेज करते हैं, क्योंकि हम अपनी अन्य समस्याओं को दूर करने पर ज्यादा समय बिताते हैं.

साइकिलिंग हम में से उन लोगों के लिए एक खास विकल्प है, जो जिम की चारदीवारी से अलग व्यायाम संबंधी अन्य गतिविधियों को पसंद नहीं करते हैं. साइकिल पर घूमना शारीरिक रूप से फायदेमंद हो सकता है. आप साइकिल के पैडल मार कर ही यह महसूस कर सकते हैं कि आप की मांसपेशियों में उत्तेजतना बढ़ी है. शारीरिक गतिविधि एड्रेनलिन से संबद्ध है, जो आप को बेहद ताकतवर कसरत का मौका प्रदान करती है. यह आप को बाकी व्यायाम के लिए भी उत्साहित करती है.

जिम की तुलना में जिन कारणों ने साइकिलिंग को अधिक प्रभावी बनाया है, वे मूलरूप से काफी सामान्य हैं. शरीर में सिर्फ एक मांसपेशी के व्यायाम के तहत आप को हमेशा दिल को तरजीह देनी चाहिए. इस का मतलब है दिल के लिए कसरत करना जिस से दिल संबंधी विभिन्न रोगों का जोखिम घटता है. महज एक स्वस्थ शरीर की तुलना में स्वस्थ दिल अधिक महत्त्वपूर्ण है.

ब्रिटिश मैडिकल ऐसोसिएशन के अनुसार, प्रति सप्ताह महज 32 किलोमीटर साइकिलिंग करने से दिल की कोरोनरी बीमारी के खतरे को 50% तक कम किया जा सकता है. एक अध्ययन में यह भी पता चला है कि जो व्यक्ति प्रति सप्ताह 32 किलोमीटर तक साइकिल चलाते हैं, उन्हें दिल की किसी बीमारी के होने की आशंका नहीं रहती है.

फायदे अनेक

साइकिलिंग का खास फायदा यह है कि इस का लाभ अबाधित तरीके से मिलता है और आप को इस का पता भी नहीं चलता. साइकिलिंग में महज पैडल मारने से ही आसान तरीके से आप की कसरत शुरू हो जाती है. इसे आराम से या उत्साहपूर्वक घुमाएं, दोनों ही मामलों में दिल की धड़कन बढ़ती है. इस से शरीर में प्रत्येक कोशिका के लिए औक्सीजनयुक्त रक्त का प्रवाह बढ़ता है, दिल और फेफड़े मजबूत होते हैं.

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साइकिलिंग उन लोगों के लिए कसरत का श्रेष्ठ विकल्प है, जो किसी चोट से रिकवर हो रहे हों. क्रौस टे्रनिंग विकल्प ढूंढ़ रहे हों या 85 की उम्र में मैराथन में भाग लेने के लिए अपने घुटनों को मजबूत बनाए रखने की कोशिश कर रहे हों. दौड़ने या जिम में ऐक्सरसाइज की तुलना में टांगों, एडि़यों, घुटनों और पैरों के लिए साइकिलिंग अधिक आसान एवं फायदेमंद है. इस से दिल शरीर के विभिन्न जोड़ों पर अधिक दबाव डाले बगैर पंपिंग करता है.

अधिक समय तक दौड़ने से शरीर पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है. वहीं दूसरी तरफ साइकिलिंग का कम प्रभाव है और यह घुटनों पर अधिक दबाव डाले बगैर टांगों की मांसपेशियों की कसरत है. इस के अलावा साइकिलिंग जोश बढ़ाती है.

हम में से ज्यादातर लोग साइकिलिंग के वक्त अपनी क्षमता से अधिक आगे बढ़ जाते हैं, क्योंकि यह बेहद आनंददायक है. इस के अलावा यह काफी कैलोरी भी अवशोषित करती है और उन लोगों के लिए फायदेमंद है, जो अपना अतिरिक्त वजन घटाना चाहते हैं. नियमित साइकिल चलाने से लगभग 300 कैलोरी प्रति घंटे खर्च हो सकती है और रोजाना आधा घंटा साइकिल चलाने से 1 साल में आप का 8 किलोग्राम वजन घट सकता है. यह मांसपेशियों को मजबूत बनाने और उपापचय दर बनाने में भी मददगार है.

साइकिलिंग सस्ता व्यायाम

विशेष स्वास्थ्य फायदों के अलावा साइकिलिंग जिम की तुलना में आप के मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी कई मानों में लाभदायक हो सकती है. बाहर की ताजा हवा लेना, सुबह के समय सूर्य की गरमी को महसूस करना या शाम को त्वचा को ठंडी हवा आदि ऐसे लाभ हैं, जो जिम की कसरत में हासिल नहीं हो सकते. साइकिलिंग तनाव कम कर सकती है क्योंकि आप बाहर घूमते वक्त प्राकृतिक तौर पर ताजा हवा लेते हैं. यह क्रिया दिमाग के उस हिस्से को नियंत्रित करती है, जो चिंता और आशंका से जुड़ा होता है और उस हिस्से को सक्रिय करती है, जो सुंदरता, गति से संबद्ध है.

इन स्वास्थ्य फायदों के अलावा साइकिलिंग आप का काफी समय बचाने में भी मददगार है. यह सर्वोच्च क्रम का मल्टीटास्किंग है. आप काम पर जाने के लिए साइकिल का चयन कर सकते हैं और फिटनैस व्यवस्था पर किसी तरह का दबाव पड़ने की चिंता से भी मुक्त रह सकते हैं.

साइकिलिंग श्रेष्ठ गतिविधियों में से एक है, आप अपनी शारीरिक फिटनैस के साथसाथ मानसिक फिटनैस के लिए भी कर सकते हैं. यह रक्तप्रवाह को बराकरार रखती है और आप के शरीर के अच्छा महसूस कराने वाले हारमोन पैदा करती है. अत: इसे अपने दैनिक रूटीन में जरूर शामिल करें.

शारीरिक फिटनैस को ले कर हमेशा यह उलझन रही है कि कौन सी गतिविधियां सुडौल और छरहरे बदन के लिए मददगार हैं. हम में से ज्यादातर लोग बाहर घूमने से परहेज करते हैं, क्योंकि हम अपनी अन्य समस्याओं को दूर करने पर ज्यादा समय बिताते हैं.

साइकिलिंग हम में से उन लोगों के लिए एक खास विकल्प है, जो जिम की चारदीवारी से अलग व्यायाम संबंधी अन्य गतिविधियों को पसंद नहीं करते हैं. साइकिल पर घूमना शारीरिक रूप से फायदेमंद हो सकता है. आप साइकिल के पैडल मार कर ही यह महसूस कर सकते हैं कि आप की मांसपेशियों में उत्तेजतना बढ़ी है. शारीरिक गतिविधि एड्रेनलिन से संबद्ध है, जो आप को बेहद ताकतवर कसरत का मौका प्रदान करती है. यह आप को बाकी व्यायाम के लिए भी उत्साहित करती है.

जिम की तुलना में जिन कारणों ने साइकिलिंग को अधिक प्रभावी बनाया है, वे मूलरूप से काफी सामान्य हैं. शरीर में सिर्फ एक मांसपेशी के व्यायाम के तहत आप को हमेशा दिल को तरजीह देनी चाहिए. इस का मतलब है दिल के लिए कसरत करना जिस से दिल संबंधी विभिन्न रोगों का जोखिम घटता है. महज एक स्वस्थ शरीर की तुलना में स्वस्थ दिल अधिक महत्त्वपूर्ण है.

ब्रिटिश मैडिकल ऐसोसिएशन के अनुसार, प्रति सप्ताह महज 32 किलोमीटर साइकिलिंग करने से दिल की कोरोनरी बीमारी के खतरे को 50% तक कम किया जा सकता है. एक अध्ययन में यह भी पता चला है कि जो व्यक्ति प्रति सप्ताह 32 किलोमीटर तक साइकिल चलाते हैं, उन्हें दिल की किसी बीमारी के होने की आशंका नहीं रहती है.

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फायदे अनेक

साइकिलिंग का खास फायदा यह है कि इस का लाभ अबाधित तरीके से मिलता है और आप को इस का पता भी नहीं चलता. साइकिलिंग में महज पैडल मारने से ही आसान तरीके से आप की कसरत शुरू हो जाती है. इसे आराम से या उत्साहपूर्वक घुमाएं, दोनों ही मामलों में दिल की धड़कन बढ़ती है. इस से शरीर में प्रत्येक कोशिका के लिए औक्सीजनयुक्त रक्त का प्रवाह बढ़ता है, दिल और फेफड़े मजबूत होते हैं.

साइकिलिंग उन लोगों के लिए कसरत का श्रेष्ठ विकल्प है, जो किसी चोट से रिकवर हो रहे हों. क्रौस टे्रनिंग विकल्प ढूंढ़ रहे हों या 85 की उम्र में मैराथन में भाग लेने के लिए अपने घुटनों को मजबूत बनाए रखने की कोशिश कर रहे हों. दौड़ने या जिम में ऐक्सरसाइज की तुलना में टांगों, एडि़यों, घुटनों और पैरों के लिए साइकिलिंग अधिक आसान एवं फायदेमंद है. इस से दिल शरीर के विभिन्न जोड़ों पर अधिक दबाव डाले बगैर पंपिंग करता है.

अधिक समय तक दौड़ने से शरीर पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है. वहीं दूसरी तरफ साइकिलिंग का कम प्रभाव है और यह घुटनों पर अधिक दबाव डाले बगैर टांगों की मांसपेशियों की कसरत है. इस के अलावा साइकिलिंग जोश बढ़ाती है.

हम में से ज्यादातर लोग साइकिलिंग के वक्त अपनी क्षमता से अधिक आगे बढ़ जाते हैं, क्योंकि यह बेहद आनंददायक है. इस के अलावा यह काफी कैलोरी भी अवशोषित करती है और उन लोगों के लिए फायदेमंद है, जो अपना अतिरिक्त वजन घटाना चाहते हैं. नियमित साइकिल चलाने से लगभग 300 कैलोरी प्रति घंटे खर्च हो सकती है और रोजाना आधा घंटा साइकिल चलाने से 1 साल में आप का 8 किलोग्राम वजन घट सकता है. यह मांसपेशियों को मजबूत बनाने और उपापचय दर बनाने में भी मददगार है.

साइकिलिंग सस्ता व्यायाम

विशेष स्वास्थ्य फायदों के अलावा साइकिलिंग जिम की तुलना में आप के मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी कई मानों में लाभदायक हो सकती है. बाहर की ताजा हवा लेना, सुबह के समय सूर्य की गरमी को महसूस करना या शाम को त्वचा को ठंडी हवा आदि ऐसे लाभ हैं, जो जिम की कसरत में हासिल नहीं हो सकते. साइकिलिंग तनाव कम कर सकती है क्योंकि आप बाहर घूमते वक्त प्राकृतिक तौर पर ताजा हवा लेते हैं. यह क्रिया दिमाग के उस हिस्से को नियंत्रित करती है, जो चिंता और आशंका से जुड़ा होता है और उस हिस्से को सक्रिय करती है, जो सुंदरता, गति से संबद्ध है.

इन स्वास्थ्य फायदों के अलावा साइकिलिंग आप का काफी समय बचाने में भी मददगार है. यह सर्वोच्च क्रम का मल्टीटास्किंग है. आप काम पर जाने के लिए साइकिल का चयन कर सकते हैं और फिटनैस व्यवस्था पर किसी तरह का दबाव पड़ने की चिंता से भी मुक्त रह सकते हैं.

साइकिलिंग श्रेष्ठ गतिविधियों में से एक है, आप अपनी शारीरिक फिटनैस के साथसाथ मानसिक फिटनैस के लिए भी कर सकते हैं. यह रक्तप्रवाह को बराकरार रखती है और आप के शरीर के अच्छा महसूस कराने वाले हारमोन पैदा करती है. अत: इसे अपने दैनिक रूटीन में जरूर शामिल करें.

शिव इंदर सिंह
एम.डी., फायरफौक्स बाइक्स प्रा.लि.

तो होम लोन लेना हो जाएगा आसान

हर इंसान का सपना होता है कि उस का अपना एक प्यार खूबसूरत सा घर हो. इस सपने को साकार करने के लिए वह उधार लेने को भी तैयार रहता है. बैंकों तथा नौनबैंकिंग फाइनैंशियल कौरपोरेशन द्वारा इसी उद्देश्य की पूर्ति हेतु होम लोन की सुविधा उपलब्ध है. सरल किस्तों में कम ब्याज पर होम लोन एक सुरक्षित लोन है जो कौलेटरल के रूप में प्रौपर्टी खरीदने के लिए प्राप्त किया जाता है.

होम लोन किफायती ब्याज दरों पर लंबी अवधि के लिए अधिक रकम की फंडिंग प्रदान करते हैं. यह रकम बाद में ईएमआई के माध्यम से चुकाई जाती है. ईएमआई पूरी होने के बाद प्रौपर्टी आप के नाम हो जाती है. पर यदि आप पूरी रकम का भुगतान नहीं कर पाते यानी ईएमआई बीच में देना बंद कर देते हैं तो प्रौपर्टी की बिक्री से बकाया लोन राशि को रिकवर करने का कानूनी अधिकार ऋणदाता के पास होता है.

यदि सरल भाषा में समझें तो आप की संपत्ति आप के उधारदाता के पास गिरवी रहेगी. आप प्रतिमाह निश्चित ईएमआई की रकम उसे देते रहेंगे. कुल मूलधन तथा ब्याज जब आप वापस कर देते हैं तो वह संपत्ति आप को मिल जाती है. न्यूनतम ब्याज 6.50% होता है जो संबंधित बैंक या एनबीएफसी के द्वारा निश्चित होता है. ब्याज दर आप के सीआईबीआईएल स्कोर और प्रौपर्टी किस एरिया में है इस से भी निर्धारित होती है.

डिफाल्टर न बने

सीआईबीआईएल का फुल फौर्म है क्रैडिट इनफौर्मेशन ब्यूरो इंडिया लिमिटेड. इस का कार्य है किसी व्यक्ति की लोने के लिए साख तथा वित्तीय स्थिति तय करना. क्रैडिट स्कोर 3 अंकों की संख्या होती है जो 300 से 900 के बीच होती है. होम लोन के लिए योग्य होने के लिए सीआईबीआईएल स्कोर 700 से ऊपर रहना चाहिए अर्थात तब आसानी से होम लोन मिल जाता है.

सीआईबीआईएल स्कोर को सही रखने के लिए जरूरी है कि आप अपने अन्य ऋणों की ईएमआई का समय पर भुगतान करें, क्रैडिट कार्ड की लिमिट्स का ध्यान रख कर ही उपयोग करें, किसी पूर्व के ऋण वापसी में आप डिफाल्टर न हों.

प्रौपर्टी के मूल्य का अधिकतम 80% तक होम लोन के रूप में लिया जा सकता है. नया घर खरीदने, नया घर बनाने, घर की मरम्मत करने या पुनर्निर्माण के लिए या फिर प्लाट खरीदने के लिए होम लोन आसानी से मिल जाता है.

नौकरीपेशा व्यक्ति को होम लोन लेने के लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड के साथसाथ 3 महीने की सैलरी स्लिप और 6 महीने की बैंक स्टेटमैंट देनी होती है. व्यवसायी से 1 साल की बैंक स्टेटमैंट मांगी जाती है. साथ ही प्रौपर्टी के पेपर्स जांच के लिए देने पड़ते हैं. आप के सीआईबीआईएल स्कोर तथा प्रौपर्टी के मूल्य के आधार पर होम लोन की राशि स्वीकृत होती है.

किसी भी बैंक या संस्था से होम लोन लेने के पहले सभी पेपर्स की जांच स्वयं करें. ब्याज का प्रतिशत कितना है यह अवश्य जांच लें. जागरूकता के साथ लिए होम लोन से आप अपने घर के सपने को साकार कर सकते हैं, किराए के घर की जगह अपने स्वयं के घर के स्वामी बन सकते हैं. होम लोन की ईएमआई की रकम में टैक्स बैनिफिट भी लेना संभव है.

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आप को कितना लोन मिल सकता है

बैंक आप की कमाई के हिसाब से लोन देता है. दरअसल, आप की होम लोन लेने की क्षमता उसे चुकाने की कैपैसिटी पर निर्भर करती है. यह आप की मासिक कमाई, खर्च और परिजनों की कमाई, संपत्ति, देनदारी जैसे मसलों पर निर्भर करती है.

बैंक सब से पहले यह देखते हैं कि आप समय पर होम लोन चुका पाएंगे या नहीं. आमतौर पर कोई बैंक या कर्ज देने वाली कंपनी का ध्यान इस बात पर जाता है कि आप अपनी मासिक आमदनी का 50% होम लोन की किस्त के रूप में दे पाएंगे या नहीं. इस के अलावा बैंक होम लोन के लिए उम्र की ऊपरी सीमा भी फिक्स कर चलते हैं.

किसी मकान या फ्लैट की कीमत का 10 से 20% तक डाउन पेमैंट करनी पड़ती है यानी प्रौपर्टी की वैल्यू का 80-90% तक लोन मिल सकता है. इस में रजिस्ट्रेशन, ट्रांसफर और स्टांप ड्यूटी जैसे चार्ज भी शामिल होते हैं. अगर कर्ज देने वाली संस्था आप को ज्यादा रकम होम लोन के रूप में देने को तैयार है तब भी जरूरी नहीं कि आप सारी रकम लोन के रूप में ले लें. समझदारी इसी में है कि आप अधिक से अधिक अमाउंट डाउन पेमैंट कर दें ताकि लोन का बोझ कम से कम रहे और आप को ब्याज के रूप में बहुत ज्यादा रकम लंबे समय तक न देनी पड़े.

होम लोन लेने की पात्रता

आप की प्रति माह की कुल आय का 60 गुना लोन मिल सकता है. अगर आप ने कोई दूसरा लोन लिया है जो चालू है तो लोन देने वाला बैंक उस की मासिक किस्त आप की आमदनी से घटाने के बाद होम लोन की रकम पर विचार करेगा. अगर आप होम लोन लेना चाहते हैं, मगर आप का क्रैडिट स्कोर सही नहीं है या आप के पिछले किसी लोन/उधार के भुगतान में चूक हुई है तो बैंक लोन देने से मना कर सकता है.

आमतौर पर बैंक आप की कुल मासिक आय के 40 से 50% रकम को व्यक्तिगत खर्च के लिए जरूरी मानते हैं. इस के बाद बची रकम के हिसाब से होम लोन दिया जाता है.

उदाहरण के लिए अगर आप की मासिक आमदनी 60 हजार रुपए है तो बैंक यह मानता है कि आप का पर्सनल खर्च 25 से 30 हजार रुपए प्रति महीना होगा. अगर आप ने कोई और लोन नहीं लिया है तो आप 20 साल के लिए 9% सालाना ब्याज दर पर होम लोन के रूप में 35-40 लाख रुपए तक पा सकते हैं.

होम लोन के फायदे

निवेश: अगर आप होम लोन ले कर अपना घर खरीदते हैं तो समय के साथ आप के घर की कीमत में इजाफा होता रहता है. यह वास्तव में निवेश का एक अच्छा जरीया भी है.

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इनकम टैक्स में बचत

होम लोन की मासिक किस्त के रूप में चुकाई जाने वाली रकम में मूलधन और ब्याज दोनों ही होता है. अगर आप मूलधन के हिसाब से सोचें तो इनकम टैक्स कानून के सैक्शन 80सी के तहत आप सालभर में 1.5 लाख रुपए के भुगतान पर आयकर में राहत पा सकते हैं.

इस के साथ ही आप ने होम लोन की किस्त में ब्याज के रूप में जो रकम चुकाई है उस के लिए साल में 2 लाख रुपए तक की रकम पर अलग से इनकम टैक्स में छूट मिलती है.

रहने में सुविधा

अगर आप अपना घर लेते हैं तो भविष्य में आप होम लोन शिफ्टिंग के झंझट से मुक्त रह कर अपने काम पर पूरा ध्यान दे सकते हैं.

Alia Bhatt करने जा रही है ग्लोबल डेब्यू, पढ़ें खबर

आज आलिया बॉलीवुड में टॉप के बड़े फिल्म सितारों में से एक है, अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दर्शकों को प्रभावित करने के लिए पूरी तरह से तैयार है. यह फिल्म भारत के सबसे बड़े बॉलीवुड सितारों में से एक के रूप में चार फिल्मफेयर पुरस्कार विजेता आलिया की वैश्विक शुरुआत को चिह्नित करती है, जो उसने बहुत ही कम समय में पा लिया है. उनकी मेहनत और लगन हमेशा फिल्मों में किसी न किसी रूप में देखी गयी है, जिसे दर्शकों ने काफी सराहा है. अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा, दीपिका पादुकोण की श्रेणी में आज अलिया भी शामिल होने वाली है, जो उनके परिवार के लिए गर्व की बात है. आलिया ने लगभग हर बड़े निर्देशक के साथ काम किया है और मानती है कि किसी कलाकार के कला को निखारने में निर्देशक का बड़ा हाथ होता है.

संजय लीला भंसाली द्वारा निर्देशित उनकी हाल ही में रिलीज़ हुई फिल्म “गंगूबाई काठियावाड़ी”, बॉक्स ऑफिस पर एक सफल फिल्म बन चुकी है. फिल्म ने पिछले सप्ताह के अंत में तीसरी सबसे बड़ी ओपनिंग हासिल की और और महामारी की शुरुआत के बाद से बॉलीवुड फिल्म के लिए सबसे बड़ी गैर-हॉलिडे ओपनिंग साबित हुई है, हालांकि ये फिल्म काफी पहले बन चुकी थी, लेकिन इस लार्जर देन लाइफ फिल्म को भंसाली सिनेमा हॉल में रिलीज करना चाहते थे.संजय ने वैसा ही किया और अब रिलीज किया है.

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जोया अख्तर द्वारा निर्देशित उनकी 2019 की फिल्म “गली बॉय”, उस वर्ष के बर्लिन फिल्म महोत्सव में प्रीमियर हुई थी और एक अंतरराष्ट्रीय हिट बन गई थी, जिसने अब तक दुनिया भर में $ 25M से अधिक की कमाई की है. यह फिल्म 2020 के ऑस्कर में सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा फिल्म के तौर पर भारत की आधिकारिक प्रस्तुति थी. अलिया जानती है कि किस तरह से उसे लाइम लाइट में रहना है. ITA अवार्ड फंक्शन में अलिया प्लास्टिक की साड़ी में प्रवेश किया, तो सभी ने उसका मजाक उड़ाया, लेकिन बाद में पता चला कि वह कोई मामूली साड़ी नहीं है बल्कि आलिया की स्टर्लिंग सिल्वर साड़ी रिसाइकल नायलॉन बेस और डिग्रेडेबल फॉक्स लेदर (अशुद्ध चमड़े) से मिलकर तैयार की गई है, जिसमें मैटेलिक पैराशूट का भी प्रयोग किया गया है.

फ़िल्मी परिवार में जन्मी आलिया अपने पेरेंट्स के बहुत कारीब है और किसी भी बात को वह कहने से हिचकिचाती नहीं. 28 साल की आलिया हर तरीके की फिल्म में काम करना पसंद करती है और ये मौका उसे मिल भी रहा है. International women’s day पर महिलाओं के लिए अलिया का कहना है कि मैं अपने आसपास इतनी महिला कर्मचारी को देखकर बहुत खुश होती हूँ, क्योंकि उनका काम के प्रति समर्पण बहुत अधिक होता है, इसलिए अधिकतर कंपनियों में भी महिला कर्मचारी को अधिक प्राथमिकता दी जाती है.मैं खुद महिला होकर गर्वित हूँ.

उनकी अंतर्राष्ट्रीय अपील (इंस्टाग्राम पर 60 मिलियन से अधिक फॉलोअर्स सहित) को स्वीकार करते हुए, द अकादमी ने उन्हें 2020 के क्लास में शामिल किया.

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कुछ पल का सुख: क्यों था ऋचा के मन में आक्रोश- भाग 1

मालती ने घड़ी देखी. सुबह के साढ़े 5 बजे थे. इतनी सर्दी में मन नहीं हुआ कि रजाई छोड़ कर उठे लेकिन फिर तुरंत ध्यान आया कि बगल के कमरे में बहू लेटी है, उस का हुक्म है कि जब ताजा पानी बहुत धीमा आ रहा हो तो उसी समय भर लेना चाहिए इसलिए मन और शरीर के साथ न देने पर भी वह उठ कर रसोई की ओर चल दी.

धीमी धार के नीचे बालटी लगा कर मालती खड़ी हो गई. पानी की धार के साथसाथ ही उस के विचारों की शृंखला भी दौड़ने लगी. वह सोचने लगी कि किस तरह उस की बहू ने बड़ी चालाकी और होशियारी से उस के घर और बेटे पर पूर्ण अधिकार कर लिया और उसे खबर भी न होने पाई.

राजीव उस की इकलौती संतान है. विवाह के 10 वर्ष बाद जब राजीव ने जन्म लिया तो मालती और उस के पति सुधीर की प्रसन्नता का ठिकाना न रहा. दोनों अपने बेटे को देख कर खुशी से फूले न समाते थे. धीरेधीरे राजीव बड़ा होने लगा. जब वह स्कूल जाने लगा तो मालती के आंचल में मुंह छिपा कर कहता, ‘मां, मैं इतनी देर तक स्कूल में तुम्हारे बिना कैसे रहूंगा, मुझे तुम्हारी याद आती है.’

उस की भोली बातें सुन कर मालती को हंसी आ जाती, ‘स्कूल में और भी तो बच्चे होते हैं, राजू, वे भी तो अपनी मम्मियों को छोड़ कर आते हैं.’

‘आते होंगे, उन की मम्मियां उन से प्यार ही नहीं करती होंगी.’

‘अच्छा, तो क्या दुनिया में आप की मम्मी ही आप से प्यार करती हैं और आप अपनी मम्मी को,’ कह कर मालती प्यार से राजीव को अपने आंचल में समा लेती.

फिर जब राजीव की नौकरी लगी तो उसे एक ही रट लगी रहती कि अब तू जल्दी से शादी कर ले. वह चाहती थी कि जल्द से जल्द घर में बहू आ कर उस के सूनेपन को भर दे लेकिन राजीव सदा ही इनकार कर देता. जब मालती के लाए सभी रिश्तों के लिए वह मना करता गया तो उसे कुछ शक हुआ. उस ने पूछा, ‘देख, अगर तू ने खुद ही कोई लड़की देख ली है तो बता दे, मैं बेकार ही बहू ढूंढ़ने की परेशानी उठाती फिर रही हूं.’

आखिर राजीव ने उसे अपने मन की बात बता दी कि वह लड़की उस के साथ ही आफिस में काम करती है.

‘कब से जानता है तू उसे?’

‘यही कोई 6-7 महीने से.’

‘दिखने में कैसी है?’

‘बहुत सुंदर है मां, और बहुत ही अच्छी,’ राजीव बोला, ‘तुम पापा से बात करो न.’

सुन कर मालती मुसकरा दी पर साथ ही हृदय में हौले से कहीं कुछ कचोट गया. जीवन में पहली बार उस के बेटे ने कोई बात उस से छिपाई थी पर क्षमा करने का अद्भुत गुण भी  था उस के भीतर. उस ने सुधीर से इस बारे में बात की तो वह भी इस रिश्ते के लिए तैयार हो गए. आखिर राजीव और ऋचा का विवाह संपन्न हो गया.

राजीव के विवाह के बाद मालती की प्रसन्नता का ठिकाना न था. ऋचा का स्वभाव भी ठीक था. मालती का जीवन बड़े ही शांतिपूर्ण ढंग से कट रहा था कि तभी सुधीर का हार्ट फेल होने से देहांत हो गया.

खुशियों की उम्र इतनी छोटी होगी उस ने सोचा भी न था. बेटे के प्रेम में वह कब पति को भूल गई थी इस का अनुभव उसे सुधीर से बिछड़ने के बाद हुआ. व्याकुल हो कर वह सुधीर की एकएक बात याद करती. उसे याद आता सुधीर हंस कर कहा करते थे, ‘हर समय बेटाबहू के आगेपीछे घूमती रहती हो, कभी दो घड़ी मेरे पास भी बैठ जाया करो. ऐसा न हो कि बाद में पछताती फिरो.’

मालती उन बीते हुए क्षणों को लौटा लेने के लिए विकल हो उठती मगर अब यह संभव नहीं था.

फिर ऋचा ने धीरेधीरे बड़ी चालाकी से उस से काम लेना शुरू किया, ‘मां, मैं नहाने जा रही हूं. आप जरा राजीव का टिफिन तैयार कर देंगी.’

सरल स्वभाव की मालती, ऋचा की बातों को समझ नहीं पाती. खुद ही कह देती, ‘तुम नहा लो, बहू, खाना मैं बना देती हूं.’

फिर उसे पता ही नहीं चला और रसोई की सारी जिम्मेदारी धीरेधीरे उस के ऊपर ही आ गई. सुबह नाश्ता बनाने से ले कर रात का खाना तक वही बनाती है. जब सुधीर थे तब परिस्थिति ऐसी कभी नहीं थी. काम तो वह तब भी करती थी पर कभी ऐसा प्रतीत नहीं हुआ कि वह किसी के अधीन है. पहले यहां जो कुछ था उस का अपना था. अब वह जो भी काम करती है उस में ऋचा जानबूझ कर मीनमेख निकाल कर उसे अपमानित करती रहती है.

जब से राजीव का प्रमोशन हुआ है तब से वह काम में अधिक व्यस्त रहने लगा है. मालती को बेटे से कोई शिकायत नहीं है. बस, है तो केवल यह दुख कि जो बेटा बचपन में उस से एक पल भी दूर नहीं रह पाता था, आज उसी के पास उस से बात तक करने का समय नहीं रह गया है. इस कमी को वह अपने 5 वर्षीय पोते रमन के साथ खेल कर पूरा कर लेती है लेकिन ऋचा को दादी का यह स्नेह भी अच्छा नहीं लगता.

जिस घर के बनने पर उस ने पति का हाथ थाम कर गृहस्वामिनी बन कर प्रवेश किया था आज उसी घर में उस की स्थिति एक नौकरानी जैसी हो गई है.

‘‘मां,’’ तभी ऋचा ने उसे आवाज दी और वह अतीत की यादों से वर्तमान में लौट आई. उस ने घबरा कर पानी भरना छोड़ चाय का पानी गैस पर रख दिया.

ऋचा का मायका उसी शहर में होने के कारण वह कभी अपने घर रहने नहीं जाती थी. यदि सुबह गई तो शाम तक वापस आ जाती थी. एक दिन उस की बूआ के बेटे की शादी का दिल्ली से निमंत्रणपत्र आया. ऋचा ने राजीव से कहा तो राजीव बोला, ‘‘मैं तो नहीं जा पाऊंगा, तुम रमन को ले कर चली जाओ.’’

‘‘ठीक है. फिर मेरा 2 दिन बाद का रिटर्न टिकट भी यहीं से करा देना.’’

अगले हफ्ते ऋचा, रमन को ले कर दिल्ली चली गई. ट्रेन में बिठा कर राजीव लौटा तो काफी रात हो गई थी. थका हुआ राजीव आ कर तुरंत सो गया.

मालती का प्रतिदिन का यह नियम है कि उसे सुबह ठीक साढ़े 5 बजे उठ कर पीने का पानी भरना होता था. अगले दिन सुबह उसी समय उस की आंख खुल गई लेकिन फिर उस ने आराम से रजाई में मुंह ढक लिया.

जड़ों से जुड़ा जीवन: भाग 2- क्यों दूर गई थी मिली

कहानी- वीना टहिल्यानी

आखिर फरीदा ने ही धीरज धरा. अपनी पकड़ को शिथिल किया. फिर आंचल से आंसू पोंछे. भरे गले से बच्ची को समझाया, ‘जा बेटी, जा…बीती को भूल जा…अब यही तेरे मातापिता हैं… बिलकुल सच्चे…बिलकुल सगे. तू तो बड़ी तकदीर वाली है बिटिया जो तुझे इतना अच्छा घर मिला, अच्छा परिवार मिला… यहां क्या रखा है? वहां अच्छा खाएगी, अच्छा पहनेगी, खूब पढ़ेगी और बड़ी हो कर अफसर बनेगी…मेरी बच्ची यश पाए, नाम कमाए, स्वस्थ रहे, सुखी रहे, सौ बरस जिए…जा बिटिया, जा…मुड़ कर न देख, अब निकल ही जा…’ कहतेकहते फरीदा ने उसे गोद से उतारा और मिली उर्फ मृणाल की उंगली मिसेज ब्राउन को पकड़ा दी.

नई मां की उंगली पकड़ कर मिली, मृणाल से मर्लिन बन गई. नया परिवार पा कर कितना कुछ पीछे छूट गया पर यादें हैं कि आज भी साथ चलती हैं. बातें हैं कि भूलती ही नहीं.

घर के लाल कालीन पर पैर रखते ही मिली को लाल फर्श वाले बाल आश्रम के लंबे गलियारे याद आ जाते जिन पर वह यों ही पड़ी रहती थी…बिना चादरचटाई के. उन गलियारों की स्निग्ध शीतलता आज भी उस के पोरपोर में रचीबसी है.

मिली को शुरुआत में लंदन बड़ा ही नीरव लगा था. सड़कों पर कोलकाता जैसी भीड़ नहीं थी और पेड़ भी वहां जो थे हरे भरे न थे. सबकुछ जैसे स्लेटी. मिली को कुछ भी अपना न दिखता. दिल हरदम देश और अपनों के छूटने के दर्द से भरा रहता. मन करता कि कुछ ऐसा हो जाए जो फिर वह वापस वहीं पहुंच जाए.

मौम उस का भरसक ध्यान रखतीं. खूब दुलार करतीं. डैड कुछ गंभीर से थे. कुछकुछ विरक्त और तटस्थ भी. उसे गोद लेने का मौम का ही मन रहा होगा, ऐसा अब अनुमान लगाती है मिली.

यहां सब से भला उस का भाई जौन है. उस से 8 साल बड़ा. खूब लंबा, ऊंचा, गोराचिट्टा. मिली ने उसे देखा तो देखती ही रह गई.

पहले परिचय पर घुटनों के बल बैठ कर जौन ने उस के छोटेछोटे हाथों को अपने दोनों हाथों में ले लिया फिर हौले से उसे अंक में भर लिया. कैसा स्नेह था उस स्पर्श में, कैसी ऊष्मा थी उस आलिंगन में, मानो पुरानी पहचान हो.

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मिली के मन में आता कि वह उसे दादा कह कर बुलाए. अपने देश में तो बड़े भाई को दादा कह कर ही पुकारते हैं. पर यहां संभव न था. यहां और वहां में अनेक भेद गिनतेबुनते मिली हर पल हैरानपरेशान रहती.

अपनी अलग रंगत के कारण मिली स्कूल में भी अलग पहचानी जाती. सहज ही सब से घुलमिल न पाती. कैसी दूरियां थीं जो मिटाए न मिटतीं. सबकुछ सामान्य होते हुए भी कुछ भी सहज न था. मिली को लगता, चुपचाप कहीं निकल जाए या फिर कुछ ऐसा हो जाए कि वह वापस वहीं पहुंच जाए पर ऐसा कुछ भी न हुआ. मिली धीरेधीरे उसी माहौल में रमने लगी. मां के स्नेह के सहारे, भाई के दुलार के बल पर उस ने मन को कड़ा कर लिया. अच्छी बच्ची बन कर वह अपनी पढ़ाई में रम गई.

अंधेरा घिरने लगा था. गुडनाइट बोल कर मिसेज स्मिथ कब की जा चुकी थीं और मिली स्थिर सी अब भी वहीं डाइनिंग टेबल पर बैठी थी…अपनेआप में गुमसुम.

दरवाजे में चाबी का खटका सुन मिली अतीत की गलियों से निकल कर वर्तमान में आ गई…

एक हाथ में बैग, दूसरे में कापीकिताबों का पुलिंदा लिए ब्राउन मौम ने प्रवेश किया और सामने बेटी को देख मुसकराईं.

मिली के सामने खाली प्लेट पड़ी देख वह कुछ आश्वस्त सी हुईं.

‘‘ठीक से खाया… गुड, वैरी गुड…’’

इकतरफा एकालाप. फिर बेटी के सिर में हाथ फेरती हुई बोलीं, ‘‘मर्लिन, मैं ऊपर अपने कमरे में जा रही हूं, बहुत थक गई हूं…नहा कर कुछ देर आराम करूंगी… फिर पेपर सैट करना है…डिनर मैं खुद ले लूंगी…मुझे डिस्टर्ब न करना. अपना काम खत्म कर सो जाना,’’ कहतेकहते मिसेज ब्राउन सीढि़यां चढ़ गईं और मिली का दिल बैठ गया.

‘काम…काम…काम…जब समय ही न था तो उसे अपनाया ही क्यों? साल पर साल बीत गए फिर भी यह सवाल बारबार सामने पड़ जाता. समाज सेवा करेंगी, सब की समस्याएं सुलझाती फिरेंगी पर अपनी बेटी के लिए समय ही नहीं है. यह सोच कर मिली चिढ़ गई.

जब से जौन यूनिवर्सिटी गया था मिली बिलकुल अकेली पड़ गई थी. सुविधासंपन्न परिवार में सभी सदस्यों की दुनिया अलग थी. सब अपनेआप में, अपने काम में व्यस्त और मगन थे.

पहले ऐसा न था. लाख व्यस्तताओं के बीच भी वीकएंड साथसाथ बिताए जाते. कभी पिकनिक तो कभी पार्टी, कभी फिल्म तो कभी थिएटर. यद्यपि मूड बनतेबिगड़ते रहते थे फिर भी वे हंसते- बोलते रहते. हंसीखुशी के ऐसे क्षणों में मौम अकसर ही कहती थीं, ‘मर्लिन थोड़ी और बड़ी हो जाए, फिर हम सब उस को इंडिया घुमाने ले जाएंगे.’

मिली सिहर उठती. उसे रोमांच हो आता. उस का मन बंध जाता. उसे मौम की बात पर पूरा यकीन था.

डैड भी तब मां को कितना प्यार करते थे. उन के लिए फूल लाते, उपहार लाते और उन्हें कैंडिल लाइट डिनर पर ले जाते. मौम खिलीखिली रहतीं लेकिन डैड के एक अफेयर ने सबकुछ खत्म कर दिया. घर में तनातनी शुरू हो गई. मौम और डैड आपस में लड़नेझगड़ने लगे. परिवार का प्रीतप्यार गड़बड़ा गया. उन्हीं दिनों जौन को यूनिवर्सिटी में प्रवेश मिल गया और भाई के दूर जाते ही अंतर्मुखी मिली और भी अकेली पड़ गई.

मौम और डैड के बीच का वादविवाद बढ़ता गया और एक दिन बात बिगड़ कर तलाक तक जा पहुंची. तभी डैड की गर्लफ्रेंड ने कहीं और विवाह कर लिया और मौमडैड का तलाक टल गया. उन्होंने आपस में समझौता कर लिया. बिगड़ती बात तो बन गई पर दिलों में दरार पढ़ गई. अब मौम और डैड 2 द्वीप थे जिन्हें जोड़ने वाले सभी सेतु टूट चुके थे.

उन के रिश्ते बिलकुल ही रिक्त हो चुके थे. मन को मनाने के लिए मौम ने सोशल सर्विस शुरू कर ली और डैड को पीने की लत लग गई. कहने को वे साथसाथ थे, पर घर घर न था.

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मिली को अब इंतजार रहता तो बस, जौन के फोन का लेकिन जब उस का फोन आता तो वह कुछ बोल ही न पाती. भरे मन और रुंधे गले से बोलती उस की आंखें…बोलते उस के भाव.

जौन फोन पर झिड़कता, ‘‘मर्लिन… मुंह से कुछ बोल…फोन पर गरदन हिलाने से काम नहीं चलता,’ और मिली हंसती. जौन खिलखिलाता. बहुत सी बातें बताता. नए दोस्तों की, ऊंची पढ़ाई की. वह मिली को भी अच्छाअच्छा पढ़ने को प्रेरित करता. खुश रहने की नसीहतें देता. मिली उस की नसीहतों पर चल कर खूब पढ़ती.

मिसेज ब्राउन ने अपने को पूरी तरह से काम में झोंक कर अपनी सेहत को खूब नकारा था. अचानक वह बीमार पड़ीं और डाक्टर को दिखाया तो पता चला कि उन्हें कैंसर है और वह अंतिम स्टेज में है. मिली ने सुना तो सकते में आ गई. लेकिन मौम बहादुर बनी रहीं. जौन मिलने आया तो उसे भी समझाबुझा कर वापस भेज दिया. उस की पीएच.डी. पूरी होने वाली थी. मां के लिए उस की पढ़ाई का हर्ज हो यह मिसेज ब्राउन को मंजूर न था.

मां के समझाने पर मिली सामान्य बनी रहती और रोज स्कूल जाती. बीमार अवस्था में भी मौम अपना और अपने दोनों बच्चों का भी पूरा खयाल रखतीं. डैड अपनेआप में ही रमे रहते. पीते और देर रात गए घर लौटते थे.

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Aditya Narayan ने 15 साल बाद कहा SaReGaMaPa को अलविदा

टीवी के जाने माने होस्ट आदित्य नारायण (Aditya Narayan) इन दिनों सुर्खियों में हैं. जहां बीते दिनों वह बेटी के पिता बने हैं तो वहीं अब उन्होंने अपना  सालों पुराना शो ‘सारेगामापा’ (Sa Re Ga Ma Pa) को अलविदा कहने का फैसला कर लिया हैं. हालांकि इसका ऐलान एक्टर ने अपने सोशलमीडिया के जरिए फैंस को कहा है. आइए आपको बताते हैं पूरी खबर…

शो छोड़ने का लिया फैसला

बीते 6 मार्च को शो सा रे गा मा पा का फिनाले हुआ था, जिसमें नीलांजना रे (Neelanjana Ray) ने शो का खिताब अपने नाम किया था. वहीं एक्टर ने इन्हीं पलों की फोटोज शेयर करते हुए होस्टिंग छोड़ने का फैसला फैंस को सुनाया है. दरअसल, फोटोज के साथ आदित्य नारायण ने कैप्शन में लिखा, ‘ बड़े भारी मन के साथ, मैं अपने सालों पुराने शो सारेगामापा की होस्टिंग को छोड़ रहा हूं, जिसने मुझे पहचान दी. 18 साल के एक यंग लड़के से खूबसूरत पत्नी और एक बच्ची के साथ यह पूरे 15 साल, 9 Season, 350 एपिसोड, सचमुच समय बहुत आगे बढ़ गया है. इसी के साथ उन्होंने शो से जुड़े सभी लोगों को थैंक्यू भी कहा है.

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विशाल ददलानी समेत लोगों ने दी शुभकामनाएं

आदित्य नारायण के फैसले से जहां फैंस दुखी हैं तो वहीं सेलेब्स उन्हें करियर की शुभकामनाएं दे रहे हैं. वहीं शो के जज विशाल ददलानी उन्हें कमेंट में कह रहे हैं कि ‘मैं क्या बोलूं… तुम्हारा पहला सारेगामापा मेरा पहला सारेगामापा और जो कुछ भी हमने इससे पाया है. इससे मुझे उम्मीद है तुम अपना मन बदलोगे. तुम्हारा म्यूजिक , जो इतना कामयाब हुआ कि तुम्हारे पास टीवी करने का समय नहीं है. कोई नहीं, मैं रह लूंगा तुम्हारे बगैर. जा, आदि….जी ले अपनी जिंदगी! लव यू.’

बता दें, हाल ही में 24 फरवरी को आदित्य नारायण बेटी के पिता बने हैं, जिसके चलते वह काफी खुश हैं. वहीं बेटी के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताना चाहते हैं. इसके अलावा वह कुछ बड़ा करने की तैयारी भी कर रहे हैं, जिसके लिए वह टीवी और अपने काम से थोड़ा ब्रेक लेने की बात कह चुके हैं.

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Anupamaa की ‘नंदिनी’ ने छोड़ी एक्टिंग, इस वजह से हुई TV इंडस्ट्री से दूर

टीवी सीरियल अनुपमा (Anupamaa) के सितारे आए दिन सुर्खियों में रहते हैं. जहां सीरियल में इन दिनों फैमिली ड्रामा देखने को मिल रहा है तो वहीं सीरियल से जुडी एक्ट्रेस ने एक्टिंग छोड़ने का फैसला कर लिया है. जी हां, सीरियल अनुपमा में समर की मंगेत्तर नंदिनी के रोल में नजर आने वाली एक्ट्रेस अनघा भोसले (Anagha Bhosale) ने अचानक एक्टिंग से ब्रेक लेने का फैसला लिया है. आइए आपको बताते हैं पूरी खबर…

एक्टिंग छोड़ने का बताया कारण

खबरों की मानें तो हाल ही में एक्ट्रेस अनघा भोसले ने अचानक सीरियल अनुपमा को छोड़ दिया था, जिसके चलते फैंस उन्हें काफी याद कर रहे थे. वहीं उनके को स्टार सोशलमीडिया के जरिए उनका हाल जानते नजर आए थे. वहीं अब एक इंटरव्यू में अनघा भोसले ने एक्टिंग की दुनिया छोड़ने के बारे में बताया है. दरअसल, एक्ट्रेस ने कहा है, ‘मैं अंदर से आध्यात्मिक हूं और ऐसे कामों में दिल से शामिल होती हूं. काम करने के दौरान महसूस किया है कि मैं इसके बारे में इस इंडस्ट्री के बारे में जो सोचती थी, वो पूरी तरह से गलत था. यहां चीजें मेरी सोच से एकदम अलग हैं. इंडस्ट्री में बहुत पॉलिटिक्स है और लोग एक-दूसरे के ऊपर चढ़कर आगे बढ़ना चाहते हैं. यहां हमेशा खूबसूरत दिखने का दवाब रहता है.

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एक्ट्रेस ने दबाव की कही बात

इंडस्ट्री के बारे में अनघा कहती हैं कि यहां हर वक्त लोगों पर सोशल मीडिया में एक्टिव रहने का दवाब रहता है और मैं ऐसी नहीं हूं, जिसके कारण मुझे इन चीजों को एक्सेप्ट करने में वक्त लगा है. इस इंडस्ट्री से जुड़े लोग सच्चे नहीं हैं क्योंकि यहां हर मोड़ पर दोगले इंसान देखने को मिलते हैं. मैं इन सारी चीजों से दूर होकर आध्यात्म की राह पर चलना चाहती हूं, ताकि मुझे शांति मिल सके.’ हालांकि एक्ट्रेस ने कहा है कि अगर अनुपमा के निर्माता राजन शाही उन्हें दोबारा बुलाते हैं तो वह एक्टिंग की दुनिया में वापस आएंगी. वहीं एक्ट्रेस के इस फैसले से उनके फैंस कयास लगा रहे हैं कि उनका ये फैसला अनुपमा शो से जुड़ा हुआ है.

 

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बता दें, एक्ट्रेस अनघा भोसले से पहले ये रिश्ता क्या कहलाता है कि एक्ट्रेस मोहेना सिंह ने भी एक्टिंग की दुनिया छोड़ने का फैसला किया है. हालांकि उनका ये फैसला शादी के चलते लिया गया था.

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मेरे न्यू बौर्न बेबी की हार्ट प्रौब्लम के कारण मौत हो गई, कृपया इसका कारण बताएं?

सवाल-

मैं 20 वर्षीय विवाहिता हूं. 4 महीने पहले मैं ने एक बेटे को जन्म दिया था. बच्चे को कोई हार्ट प्रौब्लम थी और उस का पेट भी सामान्य से बड़ा था. शायद इसीलिए औपरेशन से प्रसव होने के 13 घंटों के बाद ही मेरे बेटे की मृत्यु हो गई. प्रसव से पूर्व सब कुछ ठीक था अर्थात प्रसवावस्था में मुझे कोई समस्या नहीं थी. फिर मेरे बच्चे के साथ ऐसा क्यों हुआ? मैं बहुत दुखी रहती हूं.

जवाब-

एक मां 9 महीने तक जिस शिशु को अपने गर्भ में रखती है, जिस के लिए कष्ट सहती है, उसे अपनी गोद में लेने और उस पर अपनी ममता लुटाने के सपने देखती है. पर जब उस सपने को यों ठेस पहुंचती है तो मायूस होना लाजिम है. आप को स्वयं को इस दुख से उबारना होगा. साथ ही अपने स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना होगा. अभी आप की उम्र बहुत कम है. आप थोड़े अंतराल के बाद किसी स्त्रीरोग विशेषज्ञा की देखरेख में दोबारा गर्भधारण कर सकती हैं.

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अबौर्शन कराने का निर्णय कठोर और साहसिक निर्णय होता है. कुछ महिलाएं विवाह से पहले अनचाहे गर्भ से, तो कुछ विवाह बाद के अनप्लान्ड गर्भ से छुटकारा पाने के लिए अबौर्शन कराती हैं. कई महिलाओं को बच्चे की चाह रखने के बावजूद चिकित्सकीय या सामाजिक दबाव के कारण यह निर्णय लेना पड़ता है. अबौर्शन में कई शारीरिक और मानसिक बदलावों से गुजरना पड़ता है. अबौर्शन सर्जरी या दवाईयों के द्वारा किया जाता है.

ये शारीरिक लक्षण चिंता का कारण

वैसे तो अधिकतर अबौर्शन सुरक्षित होते हैं, लेकिन फिर भी दूसरे सर्जिकल प्रोसैस की तरह इस में कई जटिलताएं और जोखिम होते हैं. अबौर्शन के बाद ये शारीरिक लक्षण चिंता का कारण हो सकते हैं:

– 48 घंटे से अधिक समय तक 100 डिग्री से अधिक बुखार रहना.

– अत्यधिक ब्लीडिंग.

– वैजाइना से रक्त के बड़ेबड़े थक्के निकलना.

– अबौर्शन के 4-5 दिन बाद तक ब्लीडिंगजारी रहना.

– पेट में मरोड़ और अत्यधिक दर्द होना.

– वैजाइना से ऊतकों का डिसचार्ज होना.

– वैजाइना से निकलने वाले डिसचार्ज सेदुर्गंध आना.

– मूत्र और मल त्याग की आदत में बदलाव आना.

– पेशाब और मल में रक्त आना.

– चक्कर आना, बेहोशी छाना.

– कमजोरी महसूस होना.

– अवसादग्रस्त अनुभव करना.

– भूख न लगना.

– सोने में समस्या आना.

अबौर्शन कराने के बाद प्रैगनैंसी हारमोन भी शरीर में रहते हैं यानी अबौर्शन के बाद शरीर और हारमोन सिस्टम को सामान्य अवस्था में आने में 1 से 6 हफ्ते लग सकते हैं. आमतौर पर अबौर्शन सुरक्षित होता है. 100 में से 1 महिला मेंही गंभीर लक्षण दिखाई देते हैं. अबौर्शन के बाद के ये समस्याएं हो सकती हैं:

पूरी खबर पढ़ने के लिए- अबौर्शन: क्या करें क्या नहीं

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz   सब्जेक्ट में लिखे…  गृहशोभा-व्यक्तिगत समस्याएं/ Personal Problem

ले न डूबे यह लत

लोग बिस्तर तक मोबाइल से चिपके रहते हैं. मगर उन की यह लत उन्हें भारी पड़ सकती है क्योंकि हाल ही में अमेरिकन जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार हफ्ते में 20 घंटे से ज्यादा टीवी या मोबाइल फोन देखने से पुरुषों के स्पर्म प्रोडक्शन में 35% तक की कमी आ सकती है. रिपोर्ट के मुताबिक 1 दिन में 5 घंटे से ज्यादा टीवी देखने वालों के शरीर में स्पर्म काउंट में भारी कमी आती देखी गई है.

इस के ठीक उलट कंप्यूटर पर रोजमर्रा का औफिस का दिनभर काम करते रहने वालों के शरीर में ऐसी कोई कमी नहीं देखी गई. ऐसे लोगों के न तो स्पर्म काउंट में कोई कमी देखी गई और न ही उन के शरीर में टेस्टोस्टेरौन हारमोन के स्तर में कोई कमी आई. इस का एक कारण यह भी हो सकता है कि ऐसे लोग जो बहुत ज्यादा टीवी देखते हों, पर ज्यादा ऐक्सरसाइज नहीं करते हों और न ही हैल्दी खाना खाते हों, तो ये दोनों ही आदतें उन की फर्टिलिटी पर प्रभाव डालती हैं.

इन्फर्टिलिटी का बड़ा कारण

टीवी या मोबाइल पर फिल्में देखने वालों का दिमाग एक तरह से काम करना बंद कर देता है. जंक फूड के अत्यधिक सेवन और आलस भरे लाइफस्टाइल के चलते आजकल काफी लोग मोटापे का शिकार होते जा रहे हैं और यह इन्फर्टिलिटी का एक बड़ा कारण बनता जा रहा है. मोटापे की वजह से पुरुषों और महिलाओं दोनों में कामेच्छा कम होती जाती है.

मोटापा न केवल यौन संबंध बनाने की इच्छा में कमी लाता है, बल्कि इस के चलते सैक्स के दौरान जल्दी स्खलन होने की समस्या भी पेश आती है. इस के चलते सैक्सुअल परफौर्मैंस प्रभावित होती है क्योंकि लिंग में पर्याप्त उत्तेजना नहीं आ पाती, साथ ही अगर महिला मोटापे से पीडि़त है, तो उस स्थिति में भी सही तरीके से समागम नहीं हो पाता है.

कैन, पैकेट बंद फूड और हाई फैट युक्त चीजें बहुत तेजी से और बड़ी मात्रा में ऐसिडिटी पैदा करती हैं, जिस से शरीर के पीएच स्तर में बदलाव आता है. आलस भरे लाइफस्टाइल के साथ कैमिकल ऐडिटिव्स और ऐसिडिक नेचर वाला खानपान या तो स्पर्म सैल्स के आकार और उन की गतिशीलता को नुकसान पहुंचाता है या फिर इस की वजह से स्पर्म डैड हो जाते हैं.

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हार्ट पर खतरा

‘ब्रिटिश जर्नल औफ स्पोर्ट्स मैडिसन’ में प्रकाशित रिपोर्ट के तहत लैब ऐनालिसिस के लिए 18 से 22 साल की उम्र के 200 स्टूडैंट्स के स्पर्म सैंपल कलैक्ट किए गए. उन के विश्लेषण से यह पता चला कि सुस्त लाइफस्टाइल और स्पर्म काउंट में कमी का एकदूसरे से सीधा संबंध है.

ज्यादा टीवी देखने वालों का औसत स्पर्म काउंट 37 एमएन माइक्रोन प्रति एमएल था, जबकि उन स्टूडैंट्स का स्पर्म काउंट 52 एमएन माइक्रोन प्रति एमएल था, जो बहुत कम टीवी देखते हैं. सुस्त लाइफस्टाइल और टीवी देखने के आदी लोगों के स्पर्म काउंट में सामान्य के मुकाबले 38% तक कमी पाई गई है.

इस रिपोर्ट से यह भी साबित हुआ है कि अत्यधिक टीवी देखने वालों के हृदय में अत्यधिक आवेग के चलते फेफड़ों में खून का जानलेवा थक्का जमने और उस के चलते हार्ट अटैक से मौत होने की संभावना भी 45% तक बढ़ जाती है और टीवी, या मोबाइल स्क्रीन के सामने हर 1 घंटा और बिताने के साथसाथ यह संभावना और भी बढ़ती जाती है.

प्रजनन क्षमता पर असर

कुछ रिपोर्ट्स में बताया गया है कि हर हफ्ते औसतन 18 घंटे की ऐक्सरसाइज करने से स्पर्म क्वालिटी बढ़ाई जा सकती है, लेकिन अत्यधिक ऐक्सरसाइज करने से भी स्पर्म क्वालिटी पर असर पड़ता है. देखने में आया है कि शारीरिक रूप से सक्रिय रहने वाले ऐसे लोग जो हफ्ते में 15 घंटे मौडरेट ऐक्सरसाइज करते हैं या कोई खेल खेलते हैं उन का स्पर्म काउंट शारीरिक रूप से कम सक्रिय रहने वाले लोगों की तुलना में 3-4 गुना तक ज्यादा रहता है.

टीवी या मोबाइल के सामने घंटों एकटक निगाहें रखने का सीधा संबंध शरीर में गरमी बढ़ाने से होता है. स्पर्म ठंडे वातारण में ज्यादा अच्छी तरह पनपते हैं, जबकि शरीर के ज्यादा गरम रहने से वे ज्यादा अच्छी तरह नहीं पनप पाते हैं. जरूरत से ज्यादा ऐक्सरसाइज करना और लगातार टीवी देखना, दोनों ही शरीर में फ्रीरैडिकल्स के उत्पादन और उत्सर्जन को बढ़ावा देते हैं, जिस के चलते स्पर्म सैल्स मर जाते हैं, जिस का सीधा असर प्रजनन क्षमता पर पड़ता है. इसलिए डाक्टरों की सलाह है कि आप सबकुछ करें, लेकिन हर चीज की एक सीमा हो.

आप टीवी, मोबाइल देखिए, लेकिन साथ में जिन में भी वक्त बिताएं, हैल्दी डाइट लें और जीवन को अच्छी तरह ऐंजौय करें.

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